स्वीडन में शुक्रवार (अगस्त 28, 2020) को कुरान जलाने की घटना सामने के बाद इस्लामिक भीड़ ने वहाँ जम कर हिंसा की। अल्लाह हू अकबर के नारों के साथ भीड़ ने पत्थरबाजी की। सड़कों को जाम करके आगजनी की कोशिश की गई। इसी बीच नॉर्वे में भी स्वीडन जैसी एक रैली निकाले जाने की खबर अगले ही दिन सामने आई।
जानकारी के मुताबिक, नॉर्वे की राजधानी ओसलो में शनिवार को यह रैली निकाली गई। इस रैली को Stop Islamisation of Norway (SIAN) नामक समूह ने आयोजित किया। ये रैली संसद की बिल्डिंग के पास निकाली गई। सैंकड़ों लोग इसमें शामिल हुए। यहाँ रैली का विरोध करने वाले भी आए। मगर, पुलिस ने उन्हें उस समय रोक दिया।
रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि धुर दक्षिणपंथियों का यह प्रदर्शन करीब दो घंटे तक चला। स्टॉप इस्लामाइजेशन ऑफ नार्वे के नेता लार्स थोर्सन ने वहाँ इस्लाम विरोधी कई बयान दिए। उन्होंने पैगंबर के बारे में बातें कहीं और संस्था के लोग नारेबाजी करते रहे।
न्यूज एजेंसी एनटीबी ने दावा किया कि इस रैली में एक SIAN की एक महिला सदस्य ने पहले पवित्र कुरान के पन्नों को फाड़ा और फिर उन पर थूक भी दिया। इसके अलावा उसने दूसरे पक्ष के प्रदर्शनकारियों से यह भी कहा, “देखों अब मैं कुरान को अपवित्र कर दूँगी।”
इसके बाद इस्लाम समर्थकों ने पुलिस के बैरिकेडिंग को तोड़ दिया और स्टॉप इस्लामाइजेशन ऑफ नार्वे के समर्थकों से भिड़ गए। दोनों के बीच जमकर मारपीट हुई। हालाँकि, बाद में प्रशासन ने पेपर स्प्रे और टियर गैस का इस्तेमाल करके दोनों समूहों को अलग कर दिया।
पुलिस ने इस संबंध में 29 लोगों को गिरफ्तार भी किया। जबकि एक व्यक्ति घायल हो गया। कहा जा रहा है कि भड़काऊ बातें करने वाली महिला पर पहले ऐसे प्रोटेस्टों में हेट स्पीच के आरोप लग चुके हैं।
स्वीडन के मालमो में शुक्रवार की घटना के बाद नॉर्वे में यह मामला प्रकाश में आया था। स्वीडन में दक्षिणपंथियों द्वारा कुरान की प्रति जलाने के बाद हिंसा भड़की थी और इस्लामिक भीड़ ने काफी तबाही मचाई थी। वहीं इससे पहले नवम्बर 2019 में भी नार्वे में इस्लाम के ख़िलाफ़ हुई रैली में एक व्यक्ति ने कुरान जला दी थी, जिसके बाद हंगामा शुरू हो गया था।
यहाँ बता दें कि पाकिस्तान ने नॉर्वे और स्वीडन में हुई इन घटनाओं की निंदा करते हुए रविवार को अपना बयान जारी किया और कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मजहबी नफरत को जस्टिफाई नहीं कर सकती। इसके अलावा विदेश कार्यालय के प्रवक्ता जाहिर हाफिज चौधरी ने कहा, “इस तरह से इस्लामोफोबिक घटनाओं की बढ़ोतरी किसी भी मजहब की भावना के ख़िलाफ़ है।”
उन्होंने आगे कहा, “दूसरों की धार्मिक मान्यताओं के लिए सम्मान सुनिश्चित करना एक सामूहिक जिम्मेदारी है और वैश्विक शांति और समृद्धि के लिए बिल्कुल महत्वपूर्ण है।”
#Pakistan strongly condemns the recent incidents of desecration of Holy Quran in Malmo #Sweden & Oslo #Norway.
The rise of such Islamophobic occurrences goes against the spirit of any religion. Freedom of speech can’t justify religious hatred. 1/2
गुजरात के अहमदाबाद के अमराईवाडी इलाके में एक पादरी के खिलाफ एक नाबालिग से छेड़छाड़ करने और उसका न्यूड वीडियो बनाने के आरोप में शिकायत दर्ज की गई है। गुजराती दैनिक समाचार पत्र दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक उसने राबड़ी कॉलोनी में रहने वाली नाबालिग लड़की को प्यार का झूठा झाँसा देकर फँसा लिया। इसके बाद उसने वीडियो कॉल के माध्यम से उसका न्यूड वीडियो बना लिया और फिर बाद में उसे ईसाई धर्म में परिवर्तित करने के लिए मजबूर करने की कोशिश की।
रिपोर्ट के मुताबिक, पादरी ने नाबालिग लड़की के चाचा को यह वीडियो भेजा। जब लड़की के माता-पिता को इसका पता चला, तो उन्होंने पुलिस स्टेशन पहुँचकर पादरी गुलाबचंद के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में बताया गया है कि पादरी 11 वीं कक्षा में पढ़ने वाली लड़की को धमकाता था। नाबालिग लड़की 25 दिसंबर, 2019 को क्रिसमस के मौके पर अपने पड़ोसी के साथ अपने घर के पास वाले एक चर्च में गई थी। पादरी ने लड़की से बात की और उसे अपने माता-पिता को चर्च में लाने के लिए कहा।
हालाँकि, उसने अपने माता-पिता से इस बारे में कोई बात नहीं की। कुछ दिनों बाद, पादरी के भतीजे ने लड़की के माता-पिता को फोन किया और उन्हें चर्च बुलाया। लगभग एक महीने बाद, लड़की अपने माता-पिता के साथ फिर से चर्च गई। इसके बाद पादरी गुलाबचंद और उनके भतीजे ने नाबालिग के घर पर भी ‘प्रार्थना’ सभा का आयोजन किया।
पादरी नाबालिग को उसके पिता के फोन पर कॉल करता था। कथित तौर पर उसने नाबालिग लड़की को ‘चुंबन’ वाली तस्वीर भेजी थी और ‘आई लव यू’ भी बोला था। उसने उसके साथ प्यार में पड़ने का नाटक किया और उसका पीछा भी किया। जब भी वह अकेली होती, वह उसे वीडियो कॉल पर कपड़े उतारने के लिए कहता। मना करने पर वह उसे धमकी देता था कि अगर वह उसकी बात नहीं मानेगी तो वो उसे बदनाम कर देगा।
पादरी ने लगभग एक हफ्ते पहले लड़की का वीडियो उसके चाचा को भेजा था। तब जाकर उसके पिता को सारी बात पता चली। इसके 2-3 दिन बाद भी उसने कथित तौर पर फिर से उसकी न्यूड तस्वीरें भेजी थी। मामले में फिलहाल पुलिस ने शिकायत दर्ज कर ली है और जाँच की जा रही है।
कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा ने पार्टी के भीतर चल रही घमासान के बीच छात्रों के भविष्य के मुद्दे पर राजनीति करने का फैसला लिया है। सोनिया गाँधी की बेटी प्रियंका गाँधी ट्विटर पर SSC और रेलवे परीक्षाओं की भर्ती पर केंद्र सरकार को घेरने का प्रयास करते नजर आ रही हैं लेकिन इसमें एक छोटी सी समस्या आ रही है।
दरअसल, प्रियंका गाँधी SSC और रेलवे भर्ती परीक्षाओं के लिए जितने भी हैशटैग का प्रयोग कर रही हैं, उन सभी में स्पेलिंग मिस्टेक की समस्या नजर आ रही हैं और इस कारण प्रियंका गाँधी वाड्रा सोशल मीडिया पर लोगों के चुटकुलों का जरिया बन चुकी हैं। लोगों ने आपत्ति जताई है कि जो प्रियंका गाँधी परीक्षाओं पर सवाल उठा रही है वह खुद अंग्रेजी की एक स्पेलिंग तक ठीक से नहीं लिख पाती हैं।
दरअसल, कुछ ही दिन पहले ट्विटर पर प्रियंका गाँधी वाड्रा ने एक ट्वीट में लिखा, “कोरोना के बढ़ते संक्रमण के माहौल में #JEE_NEET परीक्षा देने जाने वाले छात्र-छात्राओं व उनके अभिवावकों की बात सुनना जरूरी है। ये बच्चे देश के भविष्य हैं। छात्र-छात्राओं की चिंताओं को संवेदना से देखना होगा न कि हठ और राजनीतिक दृष्टि से। #SpeakUpForStudentSaftey”
इस पर भाजपा आईटी सेल इन चार्ज अमित मालवीय ने ट्विटर पर कटाक्ष करते हुए लिखा, “प्रियंका वाड्रा और NSUI मिलकर भी ‘SAFETY’ को सही ढंग से नहीं लिख सकते। उनमें से कोई भी कभी भी जेईई-नीट परीक्षा में नहीं बैठा और वे अब उन लाखों छात्रों के भविष्य को खतरे में डालना चाहते हैं जो इन प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश चाहते हैं।”
Priyanka Vadra and assorted NSUI lackeys can’t even spell SAFETY correctly…
None of them have ever appeared for any reasonable exam let along JEE-NEET and all they want to do now is to jeopardise future of millions of students who want to enter these prestigious institutions. pic.twitter.com/3eT8K18TWk
दरअसल, इस हैशटैग में प्रियंका गाँधी वाड्रा ने ‘SAFETY’ की जगह ‘SAFTEY’ लिखा था। SSC की परीक्षा में अक्सर स्पेलिंग टेस्ट वाले सवाल भी पूछे जाते हैं।
इस ट्वीट के कुछ ही दिन बाद, मंगलवार 01 सितम्बर को प्रियंका गाँधी वाड्रा ने रेलवे परीक्षा पर भी ज्ञान देने का प्रयास किया और एक बार फिर वह स्पेलिंग परीक्षा में फेल हो गई। इस बार प्रियंका गाँधी ने अपने ट्वीट के साथ एक हैशटैग इस्तेमाल किया – “#speakupforSSCRaliwaystudents” इस हैशटैग में ‘Railway’ की जगह प्रियंका गाँधी ने ‘Raliway’ लिखा है।
प्रियंका गाँधी द्वारा लगातार की जाने वाली इन मामूली भूलों पर ‘गप्पिस्तान रेडियो’ नाम के ट्विटर यूजर ने एक ट्वीट में प्रियंका गाँधी पर कटाक्ष करते हुए लिखा, “इतनी प्लानिंग से एक हैशटैग ट्रेंड किया और किसीने एक स्पेलिंग मिस्टेक नहीं नोटिस की?”
Itni planning se ek hashtag trend kiya, aur kisi ne spelling mistake nahi notice ki?
Anyway, their politics aside, delay in Sarkaari bharti process is a major issue, 2-3 saal lambi process kahan hoti hai ek bharti ke liye bhai?? https://t.co/LLpGP7ph1d
वहीं, एक अन्य ट्विटर यूजर देसी मोजितो (@desimojito) ने एक ट्वीट में लिखा है कि रेलवे ने हाल ही में 64371 में से 40420 सीटों पर भर्ती की है और बाकी की ट्रेनिंग कोरोना के बाद हालात सामान्य होते ही शुरू हो जाएँगी।
उन्होंने साथ ही यह भी लिखा है कि कुछ दिन पहले ही यही प्रियंका गाँधी NEET-ZEE परीक्षा आयोजित कराने के खिलाफ थीं और अब वह कह रही हैं कि परीक्षा कराई जानी चाहिए। @desimojito ने भी प्रियंका गाँधी के ट्वीट में की गई स्पेलिंग मिस्टेक का जिक्र किया है।
Railway already recruited 40420 out of the total 64371 & training of remaining will start after Covid situation gets normal.
Other than that, one day you were against the exams, and now you want exams. Itni Hypocrisy aati kaha se hai?
आज 1 सितंबर 2020 को Opindia की संपादक नुपूर शर्मा ने रिपब्लिक टीवी के चीफ अर्नब गोस्वामी का साक्षात्कार किया। साक्षात्कार के दौरान उन्होंने देश के कई बड़े मुद्दों पर अपना नज़रिया रखा। लगभग दो घंटे से कुछ कम समय तक चले इस साक्षात्कार में कई बड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
सबसे पहले अर्नब गोस्वामी से रिपब्लिक टीवी शुरू करने को लेकर सवाल पूछा गया। आखिर क्यों उन्होंने टाइम्स नाउ छोड़ कर रिपब्लिक टीवी शुरू किया। जिस पर अर्नब ने कहा कि वह टाइम्स नाउ की नींव रखने वाले लोगों में एक थे। उन्होंने चैनल के लिए फंड्स तक इकट्ठा किए थे।
उन्होंने बताया कि कैसे अलग-अलग जगहों से फंड इकट्ठा किए और चैनल शुरू करने की तैयारी की। जिसका मतलब यह था कि चैनल की नींव शून्य से रखी गई थी। लेकिन इतना होने के बावजूद वह सहज नहीं थे और ऐसे हालात बने कि उनके लिए आदेश लेना मुश्किल हो गया।
अर्नब का कहना था कि वहाँ काम करने की पाबंदी महसूस हुई, जिसके बाद उन्होंने अपनी पूरी टीम के साथ कुछ नया शुरू करने की योजना बनाई। इसके बाद अर्नब ने कहा कि जितने लोगों ने काल मार्क्स को नहीं पढ़ा है, वह वामपंथी होने का दावा नहीं कर सकते हैं।
फिर उन्होंने पूछा कि जितने भी चैनल (खासकर एनडीटीवी) के पत्रकार या संवाददाता मार्क्सवादी होने का दावा करते हैं, उनमें से कितनों ने मार्क्स को पढ़ा है? इसलिए वामपंथी शब्द को गाली देना बंद करिए। उनका कहना था कि काम के दौरान उन्हें पूरी स्वतंत्रता चाहिए थी लेकिन जब ऐसा नहीं होता था, तब वह आगे नहीं बढ़ पाते थे। इसलिए उन्होंने अपना चैनल शुरू किया।
इसके बाद उनसे सवाल किया गया कि रिपब्लिक भारत शुरू करने से लेकर आज तक को पीछे छोड़ने के दौरान सफ़र कैसा रहा? इस पर अर्नब ने कहा कि वह इसमें रुपए के लिए नहीं हैं, उनके लिए रिपब्लिक ब्रांड सबसे महत्वपूर्ण है। अब ज़्यादा लोग उन पर भरोसा करते हैं लेकिन लुटियंस में बहुत से लोगों को इस बात से परेशानी होती है। फिर अर्नब ने कहा उनके लिए संस्थान की ब्रांड वैल्यू सबसे अहम है क्योंकि इससे लोगों का भरोसा जुड़ा हुआ है।
अर्नब गोस्वामी ने इसके बाद कहा कि आज एक समाचार समूह के मालिक की सबसे बड़ी उपलब्धि यह पता करना है कि उसका कर्मचारी (संपादक) किस गाड़ी से चलता है। उनके मुताबिक़ एक समाचार समूह का मालिक यह साबित करने में लगा हुआ है कि पत्रकारों का कोई अर्थ नहीं है, न ही पत्रकारों की कोई ज़रूरत है। उन्हें लगता है कि वो पत्रकारों के बिना अपना संस्थान चला सकते हैं और ऐसे लोगों से किसी को परेशानी नहीं होती है।
फिर अर्नब से सवाल किया गया कि उनका चैनल पूरी तरह वन मैन शो है, उनके बिना रिपब्लिक सफल नहीं हो सकता। इसी सवाल में यह भी जुड़ा था कि उनकी पत्रकारिता में काफी शोर है। इसके जवाब में अर्नब ने अपने चैनल के कई एंकर के बारे में बताया, जिनकी रेटिंग अन्य चैनलों की तुलना में काफी बेहतर है। उन्हें भी लाखों लोग देखते और पसंद करते हैं। लोग उनके स्क्रीन पर आने का इंतज़ार करते हैं। अगर कोई उनकी तरफ नहीं देखता चाहता तो यह उनकी निजी और पेशेवर निराशा है।
अपनी शैली की लाउडनेस (शोर-शराबे) पर जवाब देते हुए अर्नब ने कहा कि सुशांत सिंह मामले ने लुटियंस के लोगों के चेहरे का नकाब उतार दिया है। और जब तक एक मुद्दे पर काफी समय के लिए बात नहीं करेंगे, तब तक उस मुद्दे पर न्याय नहीं होगा। फिर अर्नब ने कहा कि अगर वो किसी मुद्दे पर लंबे समय तक बात न करें तो क्या सिर्फ एक दिन उस पर एक बार बात करें?
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि तमाम झूठे लोग जिनकी शाहीन बाग़ के साथ मीडिया साझेदारी (पार्टनरशिप) थी, क्या उन्होंने इस मुद्दे पर लंबे समय तक बात की? उन लोगों को सड़क बंद करने का अधिकार किसने दिया? उन्होंने इतने लंबे समय तक सड़क क्यों जाम की? मास्क पहने हुए तमाम लोग जामिया के पुस्तकालय में क्यों दाखिल हुए थे? लोग शाहीन बाग़ में कविताएँ पढ़ रहे थे और मानवाधिकार का इससे बड़ा मज़ाक क्या होता कि देश की राजधानी में लोग चल नहीं सकते हैं।
हाल ही में अर्नब पर बनाया गया एक मीम भी खूब चर्चा में रहा। एक छोटी से वीडियो क्लिप, जिसमें वह कहते हुए नज़र आ रहे हैं, “मुझे ड्रग्स दो, मुझे चरस दो, गाँजा दो।” इस बात के जवाब में उन्होंने कहा
“मैं रिया चक्रवर्ती की ड्रग पेडलर (ड्रग्स बेचने वाले व्यक्ति) से बातचीत की व्हाट्सएप चैट का ज़िक्र कर रहा था। उसमें रिया चक्रवर्ती ने साफ़ तौर पर कहा था – मुझे ड्रग्स दो। लेकिन कुछ फर्जी लोगों ने उस हिस्से को एडिट किया और सोशल मीडिया पर चला दिया। अब उन्हें देखने वाला कोई नहीं है तो वो अर्नब की 5-6 सेकेंड की क्लिप चला रहे हैं। ऐसे लोगों को मुझे रॉयल्टी देनी चाहिए।”
अर्नब से मीडिया ट्रायल पर भी सवाल किया गया। जिसमें उनसे यह पूछा गया कि मीडिया ट्रायल लोगों की छवि को नुकसान पहुँचाते हैं। इसकी वजह से एक इंसान बहुत निराश भी होता है, खासकर अगर वह निर्दोष है। इसके जवाब में अर्नब ने कई मामलों का ब्यौरा दिया, जिनमें मीडिया ट्रायल की वजह से सकारात्मक नतीजे हासिल हुए थे। इसमें निर्भया रेप केस, जेसिका लाल केस मुख्य हैं।
फिर उन्होंने एनडीटीवी पर सवाल करते हुए कहा कि उपहार केस में उन्होंने कितनी लड़ाई लड़ी? क्या वह अंत तक न्याय के लिए लड़े? उन्हें सुनंदा पुष्कर के लिए भी मीडिया ट्रायल करना चाहिए था।
अर्नब गोस्वामी से यह सवाल भी किया गया कि उन्होंने इतने कम दिनों में हिंदी कैसे सीख ली? इस पर उन्होंने बताया कि उनकी टीम के सदस्यों ने कहा कि वो एक वाक्य हर 10 मिनट में दोहराया करें। वह वाक्य था – ‘मुझे हिंदी नहीं आती है।’ इस वाक्य में उन्होंने एक और बात जोड़ दी, ‘मेरी नियत साफ़ है।’
इसके बाद पत्रकारिता में निष्पक्षता पर जवाब देते हुए अर्नब ने कहा, “यह पूरी तरह बकवास है। इस पेशे का एक व्यक्ति भी निष्पक्ष नहीं है लेकिन मेरे पास यह कहने की हिम्मत है कि मैं न्यूट्रल (निष्पक्ष) नहीं हूँ।”
राष्ट्रवाद के मुद्दे पर अपना नज़रिया रखते हुए अर्नब ने कहा कि राष्ट्रवाद देश को जोड़ने का एक ज़रिया होना चाहिए। अफ़सोस लोगों को इसके सही मायने नहीं पता हैं और समाज ऐसे लोगों के प्रति जवाबदेह नहीं है। उन्होंने बताया कि जो कुछ भी किया है, वह देश के लिए किया है।
उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि 26/11 आतंकवादी हमलों के बाद जिस तरह उन्होंने पाकिस्तान पर सवाल खड़े किए, वह राष्ट्रवाद ही था। भ्रष्टाचार के विरुद्ध लड़ना भी राष्ट्रवाद था, निर्भया मुद्दे पर बात करना राष्ट्र्वाद था। इसके बाद उन्होंने कहा कि वो इस बात पर गर्व करते हैं और ऐसी किसी बहस में नहीं पड़ना चाहते कि देशभक्ति और राष्ट्रवाद में क्या फर्क है?
डिजिटल मीडिया पर अपना पक्ष रखते हुए भी अर्नब ने कई अहम बातें कहीं। उन्होंने कहा
“मैं नहीं चाहता कि चंद एजेंडा फैलाने वाले डिजिटल मीडिया समूह लोगों की आवाज़ बनने का दावा करें। ऐसे डिजिटल मीडिया समूह सिर्फ झूठ परोसते हैं। यह न तो अपनी फंडिंग को लेकर पारदर्शी हैं और न ही अपने तौर-तरीकों को लेकर। इसमें बहुत से ऐसे लोग भी शामिल हैं, जो भारत के नागरिक तक नहीं हैं, यह सब रुकना चाहिए। हमें अपने देश में भारतीय डिजिटल मीडिया समूहों की ज़रूरत है। हमें साथ मिल कर ऐसे लोगों को जवाब देना होगा, जिन्हें देश हित की कोई परवाह ही नहीं है।”
अंत में लुटियंस मीडिया पर बोलते हुए अर्नब ने कहा कि अब ऐसे लोगों का कोई वजूद नहीं रहा। जनता ने उन्हें सिरे से नकार दिया है, यह हारे हुए लोग हैं। इन्हें खुद को किसी न किसी कोने में छिपने की ज़रूरत है क्योंकि ऐसे लोगों का समय ख़त्म हो चुका है।
इसके बाद आने वाली नई पीढ़ी के पत्रकारों के लिए अर्नब ने कहा कि इन्हें मूलभूत तौर तरीकों पर ध्यान देने और सीखने की ज़रूरत है। उनके अनुसार जिस इंसान की जानकारी और समझ मीडिया के जिस पहलू पर हो, उसे उस पर ही काम करना चाहिए, उस स्किल को और तराशना चाहिए। सोशल मीडिया की बहस में पड़ कर समय बर्बाद करने का कोई मतलब नहीं है।
अर्नब गोस्वामी ने यह भी समझाया कि नए लोगों को अपने लिखने का तरीका सुधारने की ज़रूरत है। उन्हें पता होना चाहिए कि एक ख़बर कैसे तैयार की जाती है। खबर कैसे एडिट की जाती है, खबर कहानी के रूप में कैसे बढ़ाई और सुनाई जाती है।
बिहार के बेतिया जिले में बहुचर्चित खालिद हत्याकांड का खुलासा करते हुए पुलिस ने जिंदा खालिद सहित चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। विवादित जमीन को लेकर नगर परिषद सभापति और उनके पति रोहित सिकारिया को फँसाने के लिए हत्या की झूठी साजिश रची गई।
इस पूरे मामले में हत्या किसी और की हुई, पहचान किसी और की हुई और आरोप किसी और पर लगा। हालाँकि, इस मामले में बेतिया पुलिस ने चार दिन के भीतर जब सनसनीखेज खुलासा किया तो सभी के होश उड़ गए।
दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर का स्क्रीनशॉट
पुलिस ने मृत खालिद को दिल्ली से खोजकर पूरे हत्याकांड के केस को पलट दिया है। मृत खालिद के जिंदा निकलने पर नगर परिषद सभापति गरिमा सिकारिया और उनके पति रोहित सिकारिया ने राहत की साँस ली है। क्योंकि खालिद की हत्या के मामले में उसके परिजनों ने परिषद सभापति और उनके पति पर खालिद का मर्डर कराने का आरोप लगाया था। मामले का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने खालिद व उसके पिता सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनसे पुलिस पूछताछ कर रही है।
हालाँकि, जो शव चार टुकड़ों में मिला था उसकी शिनाख्त नहीं हो पाई है। पुलिस के मुताबिक खालिद और उसके दोस्तों ने मिलकर ही एक व्यक्ति की हत्या की थी और जमीन विवाद में नगर परिषद सभापति और उनके पति को फँसाने के लिए यह खतरनाक साजिश रची थी। पुलिस ने इस मामने में खालिद के पिता को भी गुमराह करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पकड़े गए लोगों ने अभी तक इसका खुलासा नहीं किया है कि वह लाश किसकी थी।
दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर का स्क्रीनशॉट
एसपी ने बताया कि बीते 22 अगस्त की रात को एक युवक का सिर मिला था, जिसे उस दिन आसपास के इलाके के लोगों ने पहचानने से इनकार कर दिया था और 23 अगस्त की सुबह बोरे में बंद एक शव मिला था, जिसकी पहचान अख्तर हुसैन ने अपने बेटे खालिद के रूप में की थी। वहीं, मौके से एक धमकी भरा पत्र भी मिला था, जिसमें बियाडा की विवादीत जमीन छोड़ने की धमकी दी गई थी।
जिसको लेकर परिजनों ने सीधा आरोप नगर परिषद सभापति व उनके पति पर लगाया था। जबकि इस हत्या को लेकर परिजनों और स्थानीय लोगों ने जमकर बवाल भी मचाया था और विपक्षी पार्टी इसे राजनीतिक मुद्दा बना रही थी, लेकिन यह सब एक सोची समझी साजिश थी। जिसे पुलिस ने बेनकाब कर दिया है।
पुलिस गिरफ्त में आ चुके मो.अब्दुल खालिद हुसैन ने बताया कि यह सब साजिश बेलदारी के एक युवक शादिक के कहने पर की थी और इसके लिए उसने 20 हजार रुपए दिए थे। शादिक ने उसे नरकटियागंज छोड़ा था जहाँ से वह दिल्ली चला गया था और फिर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस अधीक्षक निताशा गुड़िया ने कहा कि अभी तक की जाँच में यह घटना पूरी तरह से बियाड़ा के जमीन के विवाद को तुल देने के लिए अंजाम दिया गया था। किसी प्रकार के राजनीतिक षड्यंत्र की बात सामने नहीं आई है। एसपी ने बताया कि बरामद सिरकटी लाश में बाल का रंग सफेद था। जबकि पुलिस को खालिद के फोटो में उसका बाल काला मिला।
जब पुलिस के द्वारा खालिद के पिता से इस पर पूछताछ की गई तो कहा कि बाल कलर कराया था। इसके बाद पुलिस का संदेह और बढ़ गया। एसपी निताशा गुड़िया ने बताया कि जो लाश बरामद की गई वह किसकी थी इसका खुलासा जल्द किया जाएगा। आरोपितों से पूछताछ के दौरान कई सुराग हाथ लगे हैं।
हिंदू देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी करने वाली हीर खान उर्फ़ सना से पूछताछ जारी है। पुलिस द्वारा की जा रही जाँच में हीर खान का और अधिक पाकिस्तानी कनेक्शन सामने आया है। प्रयागराज पुलिस के अनुसार, वह कई कट्टरपंथी समूहों से जुड़ी हुई थी। उसमें अक्सर पाकिस्तान से वीडियो आते थे।
हीर खान ने दावा किया कि वह उन वीडियो को देखकर बौखला जाती थी। ये वीडियो उन्हें उकसाते थे। जिसके बाद उसने खुद का वीडियो बनाना शुरू कर दिया। पूछताछ के दौरान, हीर खान ने कानपुर के एक दोस्त का नाम बताया जो यूट्यूब पर उसका वीडियो अपलोड करता था। हीर खान केवल वीडियो रिकॉर्ड करती थी और उसे अपने दोस्त को भेज देती थी। खुफिया एजेंसियाँ हीर खान के उस दोस्त को ट्रैक कर रही है।
पुलिस को जाँच में पता चला कि उसके सोशल मीडिया ग्रुप में न सिर्फ भारत के कई राज्यों बल्कि पाकिस्तान और बांग्लादेशी कट्टरपंथी भी जुड़े हैं। एजेंसियों को शक है कि उसका दोस्त स्लीपर सेल भी हो सकता है। सोमवार (अगस्त 31, 2020) को, एटीएस, आईबी, स्टेट इंटेलिजेंस और पुलिस ने उसके वीडियो बैकग्राउंड और चरमपंथियों से उसके संबंध के बारे में जानने के लिए पूछताछ की।
हीर खान की माँ ने एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में दावा किया कि पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान इंजमाम उल हक़ के पिता हीर खान के मामा हैं। इंजमाम हीर का ममेरा भाई लगता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि हीर, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की प्रशंसक है। वह सभी धर्मों में विश्वास करती है। हालाँकि, पुलिस ने कहा कि उन्हें उसकी माँ के किसी भी बयान पर भरोसा नहीं है क्योंकि ऐसा लगता है कि वह उसे बचाने की कोशिश में यह सब कह रही है। सुरक्षा एजेंसियाँ मंगलवार (सितंबर 1, 2020) को भी हीर खान से पूछताछ जारी रखेगी।
गौरतलब है कि हीर खान को प्रयागराज पुलिस ने 25 अगस्त को गिरफ्तार किया था। हीर खान को उसके यूट्यूब चैनल पर हिंदू विरोधी वीडियो पोस्ट करने के लिए गिरफ्तार किया गया था। 28 वर्षीय यूट्यूबर (YouTuber) पर धारा 153A/505 IPC और 66 IT कानून के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसके अलावा हीर खान पर राष्ट्रदोह का मामला भी दर्ज किया गया था।
दैनिक जागरण में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़ हीर खान सऊदी अरब, हैदराबाद, दिल्ली, कानपुर, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र और लखनऊ के एक मौलाना के भी संपर्क में थी। यूट्यूब चैनल ‘ब्लैक डे 5 अगस्त’ पर हीर खान ने ऐसा वीडियो साझा किया था, जिसमें हिन्दू देवी-देवताओं को जम कर गालियाँ बकी गई थी। यूट्यूबर हीर खान ने इस वीडियो में माँ सीता के लिए ‘₹#डी’ शब्द का प्रयोग किया है और अयोध्या को एक ‘₹#डीखाना’ करार दिया।
केंद्र और RBI ने मंगलवार (सितम्बर 1, 2020) को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि COVID-19 महामारी के बीच लोन के पुनर्भुगतान पर रोक (मोरेटोरियम) की अवधि को दो साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा महामारी से ग्रस्त अर्थव्यवस्था के बीच करदाताओं के लिए यह बड़ा तोहफा हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह महामारी के बीच रोक की अवधि के दौरान ब्याज दरों को माफ करने की याचिकाओं पर बुधवार (सितम्बर 02, 2020) को सुनवाई करेगी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि ‘तनावग्रस्त’ सेक्टर्स के लिए कई कदम उठाए गए हैं और महामारी के कारण अर्थव्यवस्था 23% तक सिकुड़ गई है।
उन्होंने कहा, “हम ऐसे सेक्टर की पहचान कर रहे हैं जिनको राहत दी जा सकती है, यह देखते हुए कि उनको कितना नुकसान हुआ है।” इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में अब और देर नहीं की जा सकती।
पीठ ने कहा कि वह बुधवार को उन मामलों पर सुनवाई करेगी, जिनमें केंद्र सरकार द्वारा COVID-19 लॉकडाउन के बीच दी गई मोरेटोरियम अवधि में किस्तों पर लगाए जा रहे ब्याज का मुद्दा उठाया गया है। शीर्ष अदालत ने इससे पहले केंद्र और आरबीआई को मोरेटोरियम अवधि के दौरान ईएमआई पर ब्याज वसूलने के कदम की समीक्षा करने के लिए कहा था।
गौरतलब है कि बीते मार्च माह में कोरोना संकट को देखते हुए रिजर्व बैंक के निर्देश पर बैंकों ने एक अहम फैसला लिया था। इसके तहत कंपनियों और व्यक्तिगत लोगों को राहत देते हुए लोन की किस्तों के भुगतान पर 6 महीने की छूट दी गई थी। इस सुविधा का लाभ लेते वक्त तात्कालिक राहत तो मिलती है लेकिन बाद में इस पर ज्यादा भुगतान करना होगा या नहीं, इस बात को लेकर संशय बना हुआ है।
क़िस्त भुगतान में मिलने वाली इस राहत को मोरेटोरियम कहा जाता है। ‘लोन मोरेटोरियम’ एक ऐसी सुविधा है, जिसके तहत कोरोना वायरस से प्रभावित ग्राहक या कंपनियाँ अपनी मासिक किस्त को टाल सकती हैं। अभी तक इसकी अवधि बीते कल यानी, 31 अगस्त तक रखी गई थी।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर सुरेश रैना (Suresh Raina) के रिश्तेदारों पर कुछ दिनों पहले पंजाब में अज्ञात हमलावरों ने हमला किया था। इस हमले में रैना के फूफा की पहले ही मौत हो गई थी। अब रैना ने टि्वटर पर जानकारी दी है कि उनके एक चचेरे भाई की भी सोमवार (अगस्त 31, 2020) की रात को दुखद मौत हो गई।
टीम इंडिया के इस पूर्व स्टार क्रिकेटर ने टि्वटर पर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पंजाब पुलिस से इस मामले में कार्रवाई की माँग की है। रैना ने अपने टि्वटर पर मंगलवार (सितंबर 1, 2020) को दो ट्वीट किए।
What happened to my family is Punjab was beyond horrible. My uncle was slaughtered to death, my bua & both my cousins had sever injuries. Unfortunately my cousin also passed away last night after battling for life for days. My bua is still very very critical & is on life support.
उन्होंने लिखा, “मेरे परिवार के साथ पंजाब में जो हुआ वह बहुत भयानक था। मेरे फूफा की हत्या कर दी गई। मेरी बुआ और मेरे दोनों चचेरे भाई को इस हमले में गंभीर चोटें आई हैं। दुर्भाग्य से बीती रात मेरे चचेरे भाई ने भी दम तोड़ दिया, जो बीते कई दिनों से मौत से लड़ रहा था। मेरी बुआ की हालत भी बहुत-बहुत गंभीर है और वह लाइफ सपोर्ट पर हैं।”
Till date we don’t know what exactly had happened that night & who did this. I request @PunjabPoliceInd to look into this matter. We at least deserve to know who did this heinous act to them. Those criminals should not be spared to commit more crimes. @capt_amarinder@CMOPb
रैना ने एक और ट्वीट में अपनी इस बात को पूरा करते हुए लिखा, “आज तक हमें यह मालूम नहीं है कि उस रात सही में हुआ क्या था और यह किसने किया है। मैं पंजाब पुलिस से इस मामले में छानबीन की अपील करता हूँ। कम से कम हमें इतना तो जानने का अधिकार है कि आखिर किसने इस घिनौनी हरकत को अंजाम दिया है। उन अपराधियों को और अपराध करने के लिए खुला नहीं छोड़ा जा सकता।” अपने इस ट्वीट में रैना ने पंजाब पुलिस, कैप्टन अमरिंदर सिंह और मुख्यमंत्री कार्यालय पंजाब के टि्वटर हैंडल को टैग किया है।
उल्लेखनीय है कि पंजाब के पठानकोट जिले के माधोपुर के पास थरिया गाँव में 19-20 अगस्त की रात ये वारदात हुई थी। इस हमले में रैना के फूफा अशोक कुमार की मौत हो गई थी। घटना वाली रात हमलावरों ने परिवार के सदस्यों को जरा भी संभलने का मौका नहीं दिया।
पुलिस और फोरेंसिक एक्सपर्ट की टीम ने मौके पर पहुँच कर घटना स्थल का जायजा लिया था। बताया गया कि घर से गायब चेक बुक और अन्य जरूरी कागजात घर के कुछ दूरी पर बरामद हो हुए थे। फिलहाल अभी तक पुलिस के हाथों कोई सबूत नहीं लगे है। जाँच के लिए डॉग स्कवायड की मदद भी ली जा रही है।
इस मामले में सुरेश रैना के भाई दिनेश ने पंजाब पुलिस की कार्यप्रणाली पर उँगली उठाते हुए कहा था कि इतने दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस को किसी प्रकार का सुराग हाथ नही लगा न ही किसी की गिरफ्तारी हुई। उन्होंने CM अमरिंदर सिंह से इस मामले को संज्ञान में लेने के लिए कहा था। साथ ही माँग की थी कि जल्द से जल्द आरोपितों के खिलाफ़ सख्त कार्रवाई की जाए।
बता दें कि हाल ही में सुरेश रैना यूएई में आयोजित होने जा रहे आईपीएल 2020 को निजी कारणों से छोड़कर भारत लौट आए हैं। टूर्नामेंट छोड़कर उनके वापस आने की वजह फिलहाल साफ नहीं है लेकिन अटकलें लगाई जा रही हैं कि रैना के देश लौटने की एक वजह उनके रिश्तेदारों पर यह घातक हमला भी है।
नागरिकता संशोधन कानून और NRC को लेकर भड़काऊ भाषण देने के आरोप में जेल में बंद डॉ कफील खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आज (सितंबर 1, 2020) राहत प्रदान की है। मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने खान के ऊपर से NSA हटाया। साथ ही सरकार को उन्हें अविलंब रिहा करने के आदेश दिए।
आज कोर्ट का यह आदेश चीफ जस्टिस गोविन्द माथुर और जस्टिस एसडी सिंह की खंडपीठ ने डॉ कफील खान की माँ नुजहत परवीन की याचिका पर सुनाया। इससे पहले 11 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से डॉक्टर कफील खान की माँ की अर्ज़ी पर 15 दिन में फैसला लेने को कहा था। बता दें भड़काऊ भाषण देने के आरोप में डॉ कफील खान मथुरा जेल में अब तक बंद थे।
उल्लेखनीय है कि एक ओर जहाँ हाईकोर्ट ने आदेश सुनाते हुए कहा कि NSA के तहत डॉक्टर कफील को हिरासत में लेना और हिरासत की अवधि को बढ़ाना गैरकानूनी है। कफील खान को तुरंत रिहा किया जाए। वहीं, इसके बाद कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी फूली नहीं समाई। उन्होंने डॉ कफील को NSA से मुक्त किए जाने पर अपनी खुशी जाहिर की।
प्रियंका ने मंगलवार को ट्वीट पर लिखा, “आज इलाहाबाद हाई कोर्ट ने डॉ कफील खान के ऊपर से रासुका हटाकर उनकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया। आशा है कि यूपी सरकार डॉ कफील खान को बिना किसी विद्वेष के अविलंब रिहा करेगी। डॉ कफील खान की रिहाई के प्रयासों में लगे तमाम न्याय पसंद लोगों व यूपी कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं को मुबारकबाद।”
आज इलाहाबाद हाई कोर्ट ने #drkafeelkhan के ऊपर से रासुका हटाकर उनकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया।
आशा है कि यूपी सरकार डॉ कफील खान को बिना किसी विद्वेष के अविलंब रिहा करेगी।
डॉ कफील खान की रिहाई के प्रयासों में लगे तमाम न्याय पसंद लोगों व उप्र कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को मुबारकबाद
बता दें कि प्रियंका गाँधी के अलावा कई ट्विटर यूजर्स भी कफील खान की रिहाई पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ इसे राहत की बात बता रहे हैं। कुछ इसे गलत कह रहे हैं और कुछ अपनी खुशी व्यक्त कर रहे हैं। मगर, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह जैसे कई नेता इस फैसले के बाद यूपी सरकार पर निशाना साधने से नहीं चूक रहे। वहीं रोहिणी सिंह जैसी पत्रकार कह रही है कि कफील इतने दिन जेल में रहे क्योंकि वह संप्रदाय विशेष से हैं।
The court has ordered that NSA charges against Dr Kafeel Khan be dropped. But Dr Khan has already spent more than 200 days in jail. Everyone knew the case against him was a fraud one. His only ‘crime’ was that he was Muslim and spoke out against a vindictive regime.
गौरतलब है कि गोरखपुर के BRD मेडिकल कॉलेज के बालरोग विशेषज्ञ डॉक्टर कफील खान को CAA, NRC और NPA के विरोध के दौरान अलीगढ़ विश्वविद्यालय में 13 दिसंबर 2019 को कथित रूप से भड़काऊ भाषण देने के आरोप में यूपी पुलिस ने उन्हें जनवरी में गिरफ्तार किया था। उनके ऊपर दो समुदायों के बीच में दुश्मनी बढ़ाने के आरोप में केस भी दर्ज हुआ था।
मुंबई में गिरफ्तारी के बाद उन्हें अलीगढ़ लाया गया था और फिर वहाँ से वह मथुरा की जेल में डाले गए। याद दिला दें इससे पहले डॉ कफील बीआरडी मेडिकल कॉलेज विवाद के कारण चर्चा में आए थे। उस समय उन्हें बच्चों की मौत के मामले में गिरफ्तार किया गया। हालाँकि, 2 साल बाद राज्य सरकार द्वारा उनके ऊपर से सभी बड़े आरोप हटा लिए गए।
उत्तर प्रदेश के कैराना में पुलिस ने सोमवार (अगस्त 31, 2020) को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के 4 सदस्यों के घरों पर पिछले साल दिसंबर माह में आयोजित नागरिकता कानून विरोध प्रदर्शनों के सम्बन्ध में संपत्ति का कुर्की नोटिस चस्पा किया है। PFI के ये सदस्य करीब 8 माह पूर्व सीएए के विरोध में उत्तर प्रदेश स्थित ईदगाह के मैदान में धरना प्रदर्शन करने के मामले में फरार चल रहे हैं।
25 सितंबर तक आरोपितों के अदालत में हाजिर नहीं होने पर कार्रवाई होगी। पुलिस अदालत से आदेश प्राप्त करके कुर्की की कार्रवाई कर सकती है। पुलिस का कहना है कि फरार चल रहे चारों आरोपितों के पीएफआई (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) से जुड़े होने की भी बात सामने आई है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अधिकारियों ने कहा कि पीएफआई के सभी चार सदस्य – डॉ गुफरान, डॉ मुनव्वर, अहमद और कारी अब्दुल वाजिद फरार हैं। कैराना पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस के अधिकारी प्रेमवीर राणा ने कहा कि एक स्थानीय अदालत ने सीआरपीसी की धारा 82 (व्यक्ति के फरार होने की संपत्ति की कुर्की) के तहत नोटिस जारी किए हैं और आरोपितों को 25 सितंबर को उसके सामने पेश होने का निर्देश दिया है।
ज्ञात हो कि ये पीएफआई सदस्य उन 18 लोगों में शामिल हैं, जिनके खिलाफ पिछले साल 20 दिसंबर को शामली जिले के कैराना शहर में नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ धरने और हिंसक प्रदर्शनों के मामले में केस दर्ज किया गया था। इनमें से 14 लोग गिरफ्तार किए गए हैं, जबकि 4 पीएफआई के सदस्य फरार हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, कोतवाली प्रभारी प्रेमवीर राणा ने बताया कि दिसंबर 20, 2019 को नागरिकता कानून के विरोध में भीड़ ने ईदगाह के मैदान में इकट्ठा होकर धरना-प्रदर्शन व नारेबाजी की थी। मामले में पुलिस ने तीन नामजद व 700 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। तीन नामजद आरोपितों के अलावा वीडियोग्राफी व बयानों के आधार पर 15 अन्य आरोपियों के नाम भी प्रकाश में आए थे।