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स्वीडिश शहर में हिंसा-आगजनी के बाद अब नॉर्वे की राजधानी में कट्टरपंथियों ने किया दंगा

स्वीडन के मोल्मो शहर में हिंसा और आगजनी के अगले दिन शनिवार (30 अगस्त, 2020) को कट्टरपंथियों ने नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में भी इस तरह दंगे को अंजाम दिया। स्‍टॉप इस्‍लामाइजेशन ऑफ नॉर्वे (SIAN) की रैली के प्रदर्शनकारियों से संप्रदाय विशेष की भीड़ के टकराव के कारण यह हालात पैदा हुए।

रिपोर्ट के अनुसार, ओस्लो में शनिवार को संसद भवन के पास एक इस्लाम विरोधी रैली का आयोजन किया गया था। लेकिन, इन प्रदर्शनकारियों की भिड़ंत इस रैली के जवाब में संप्रदाय विशेष के लोगों के प्रदर्शन से हो गई।

SIAN की रैली के दौरान, संप्रदाय विशेष की भीड़ ओस्लो की सड़कों पर जमा होकर ड्रम बजाने, गाने और नारे लगाने लगी। संप्रदाय विशेष की भीड़ में शामिल कुछ लोग पुलिस वैन को लात मारते और गाड़ी के ऊपर चढ़ते हुए भी देखे गए।

संप्रदाय विशेष की भीड़ द्वारा किए गए झड़प के बाद ओस्लो की सड़कों पर तनाव बढ़ गया। वहीं इस झड़प से नाराज SIAN की एक महिला सदस्य ने कुरान के पन्नों को फाड़ दिया और उन पर थूक दिया।

कथित तौर पर फैनी ब्रेटन नाम की महिला ने कुरान को फाड़ते हुए कहा, “देखो, अब मैं कुरान को अपवित्र कर रही हूँ।” इसके बाद महिला पर तुरंत संप्रदाय विशेष की भीड़ ने हमला कर दिया।

वहीं पुलिस ने स्थिति को बेकाबू होते देख संप्रदाय विशेष की भीड़ और प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए आँसू गैस और स्प्रे का इस्तेमाल किया। संप्रदाय विशेष की भीड़ की हिंसा को मद्देनजर रखते हुए पुलिस ने पहले SIAN द्वारा आयोजित रैली को समाप्त कर उन्हें हाँ से खदेड़ा।

पुलिस ने इस मामले में बैरिकेड्स से कूदने की कोशिश करने वालों और SIAN के प्रदर्शन में बाधा डालने वाले कुछ नाबालिगों सहित लगभग 29 लोगों को गिरफ्तार किया। कथित तौर पर इन लोगों ने पत्थर और अंडे पुलिस पर फेंके थे।

नॉर्वे में विरोध-प्रदर्शन शुक्रवार को स्वीडिश शहर माल्मो में हुई एक ऐसी ही घटना के बाद में हुआ। वहाँ भी कट्टरपंथी भीड़ ने स्वीडन के नागरिकों को निशाना बनाया था और माल्मो की सड़कों पर सरकार और वहाँ के लोगों की संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया था।

गौरतलब है कि इससे पहले स्वीडन में ‘स्ट्राम कर्स’ समूह के लोगों द्वारा कुरान की कॉपी को जलाने के बाद अल्लाह हू अकबर के नारों के साथ संप्रदाय विशेष भीड़ ने वहाँ की सड़कों पर हिंसक दंगे को अंजाम दिया था। कथित तौर पर डेनमार्क एन्टी- इमीग्रेशन राजनीतिक दल के नेता रास्मुस पालुदान की गिरफ्तारी के विरोध में उनके समर्थकों ने कुरान को जला दिया था। इसके जवाब में कट्टरपंथी इस्लामवादियों ने सड़कों पर उतर हिंसा की। दंगाइयों ने सड़क के किनारे खड़ी कई कारों के टायर में आग लगा दी। पुलिस पर भी पथराव किया।

जामिया वालों को Airtel प्रमोटर फैजान खान ने उपलब्ध कराया था फर्जी नंबर, Whatsapp के जरिए दंगों की साजिश

दिल्ली के शाहदरा जिले में स्थित कड़कड़डूमा कोर्ट में एडिशनल सेशन जज अमिताभ रावत की अदालत ने दिल्ली दंगा के मामले में फैजान खान को जमानत देने से इनकार कर दिया। फैजान खान मोबाइल टेलीकॉम कम्पनी भारती एयरटेल में कार्यरत था। उसने अदालत में खुद पर लगे आरोपों को आधारहीन और झूठा बताया। लेकिन, उसकी असलियत कुछ और है। दिल्ली दंगों में फैजान खान का भी बड़ा रोल है।

दिल्ली दंगों और जामिया से फैजान खान का कनेक्शन जानने से पहले ये जानते हैं कि कोर्ट में उसने वकील के माध्यम से अपने बचाव में क्या कहा। उसने दावा किया कि दिल्ली में दंगे कराने की किसी भी साजिश में वो शामिल नहीं है। बता दें कि फैजान खान को जुलाई 30, 2020 को गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट में उसकी तरफ से वही बयान दिए गए, जो अक्सर वामपंथी मीडिया आतंकियों और दंगाइयों को बचाने के लिए प्रयोग में लाता है- सहानुभूति वाली बातें।

उसने कहा कि वो अपने परिवार में इकलौता कमाने वाला है। साथ ही उसने ये भी दलील दी कि जिस दुकान में वो काम करता है, उसके मालिक को गिरफ्तार नहीं किया गया है और यहाँ तक कि एफआईआर में भी उसका नाम नहीं है। लेकिन, स्पेशल प्रॉसिक्यूटर ने कोर्ट में उसकी पोल खोल दी और उस पर लगे आरोपों के बारे में बताया। बता दें कि इस मामले को क्राइम ब्रांच ने दर्ज किया था और इसे 6 मार्च को स्पेशल सेल को ट्रांसफर किया गया था।

दिल्ली पुलिस ये तो कह ही चुकी है कि फ़रवरी 23-25 को दिल्ली में हुए दंगे पूर्व-नियोजित थे और इसमें इसकी साजिश जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद ने विभिन्न संगठनों के लोगों के साथ मिल कर रची थी। ऑपइंडिया ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि किस तरह साजिश के तहत उमर खालिद ने जगह-जगह लोगों को भड़काते हुए भाषण दिया, जिसमें उसने उन्हें सड़क पर आकर प्रदर्शन करने को कहा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की यात्रा के दौरान ये सब करने का मकसद था कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ये दिखाया जाए कि भारत में अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित किया जाता है। इसके बाद जामिया कोआर्डिनेशन कमिटी का गठन हुआ और दिल्ली सहित जगह-जगह दंगे हुए, जिसका परिणाम ट्रांस-यमुना क्षेत्र के नार्थ-ईस्ट दिल्ली में दंगों के रूप में देखने को मिला। मौजपुर, जफराबाद, चाँदबाग़, गोकुलपुरी और शिव विहार में एसिड बोतलों, पेट्रोल बम, बंदूकों और ईंट-पत्थर सहित अन्य हथियारों के साथ हमले किए गए।

इसी साजिश के तहत 23 फ़रवरी को महिलाओं और बच्चों को जफराबाद मेट्रो स्टेशन के सामने वाली रोड को जाम करने के लिए भेजा गया। 50 से ज्यादा लोग मारे गए, सैकड़ों घायल हुए और सार्वजनिक संपत्ति का जबरदस्त नुकसान हुआ। ऑपइंडिया के सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपितों के मोबाइल फोन्स को जाँच के लिए भेजा गया था। CERT-In जाँच से पता चला कि कई व्हाट्सप्प ग्रुप्स के जरिए दंगे भड़काने के लिए साजिश रची गई। नीचे संलग्न की गई दंगों से 2 सप्ताह पहले की ट्वीट में आप जामिया कोआर्डिनेशन कमिटी के उपद्रवियों को ओखला में विरोध प्रदर्शन करते देख सकते हैं:

ऑपइंडिया के सूत्र बताते हैं कि इसी दौरान जामिया कोआर्डिनेशन कमिटी द्वारा मोबाइल नंबर 9205448022 का धड़ल्ले से प्रयोग किए जाने की बात सामने आई। जाँच में पता चला कि जामिया के ही एक छात्र ने ही इसकी व्यवस्था की थी, जिसके बाद इसे जामिया कोआर्डिनेशन कमिटी के दफ्तर में उसने अपने किसी परिचित के जरिए भेजा था। एयरटेल से इस नंबर का CDR और CAF डिटेल्स निकाले गए। पता चला कि जो फोटो दिया गया था, वो आधार से मैच नहीं कर रहा था।

जाँच में पता चला कि आधार नंबर 942539738556 गुलाम रसूल के बेटे अब्दुल जब्बार के नाम पर है, जो जामिया नगर के जाजी कॉलनी स्थित गफ्फार मंजिल में रहता है। इस नंबर को ओखला विहार के ‘गोल्डन कम्युनिकेशन’ द्वारा जारी किया गया था। अब्दुल जब्बार का पता लगाया गया। पुलिस से पूछताछ में उसने इस सिम कार्ड को जारी करवाने से अनभिज्ञता जाहिर की। इसके बाद असली बात पता चली।

ऑपइंडिया के सूत्रों के अनुसार, 29 जुलाई को फैजान खान को पूछताछ के लिए बुलाया गया, क्योंकि एयरटेल प्रमोटर के रूप में उसने ही इस सिम कार्ड को जारी किया था। मोहम्मद तल्हा की ओखला विहार में स्थित दुकान ‘गोल्डन कम्युनिकेशन्स’ में फैजान एयरटेल कम्पनी के प्रमोटर के रूप में पिछले 1.5 साल से कार्यरत था। उससे विस्तृत पूछताछ हुई। उसने बताया कि जामिया का एक छात्र नेता उसके पास आया था और उसे फेक आईडी से सिम निकलवाने के बदले अधिक रुपए देने का लालच दिया।

इसके बाद उसने उसी दुकान में जिओ के प्रमोटर गौरव की तस्वीर और अब्दुल की आधार आईडी के साथ सिम कार्ड निकाल कर जामिया के उक्त छात्र नेता को दे दिया। उसने रुपए के लालच में ऐसे करने की बात कही। जब उसने ये कबूल कर लिया कि उसने जान-बूझकर ये सब किया है, तो पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। अब इस मामले की जाँच चल रही है, लेकिन इतना साफ़ है कि उसने जान-बूझकर ये सब किया और उसे शुरू से सब पता था।

उसके खिलाफ यूएपीए एक्ट के तहत कार्रवाई की जा रही है। उसे 2 अगस्त को जुडिशल कस्टडी में भेजा गया। 8 अगस्त को जारी किए गए एक आदेश में उसकी जुडिशल कस्टडी को सितम्बर 11 तक बढ़ा दिया गया। इस पर जोर देना ज़रूरी है कि इस मामले में जाँच भी जारी ही है। चूँकि दिल्ली दंगों में कई संगठनों और आरोपितों ने मिल-जुलकर साजिश की, जिससे लोगों की जान गई- इसीलिए इस मामले में पुलिस भी सतर्कता से जाँच कर रही है।

कोर्ट ने भी माना कि लोगों के मन में विभिन्न माध्यमों से डर का माहौल बनाने के लिए ऐसा किया गया। दिल्ली दंगों के मामले में छात्र नेता सफूरा जरगर और कॉन्ग्रेस की पररषद रहीं इशरत जहाँ के खिलाफ भी यूएपीए के तहत ही मामला चल रहा है। कोर्ट ने शुरूआती तौर पर फैजान खान को गलत आईडी-फोटो से सिम कार्ड जारी कर जामिया छात्र नेता को देने का दोषी मना है, जिसका प्रयोग जामिया कोआर्डिनेशन कमिटी ने व्हाट्सप्प ग्रुप्स में किया।

कोर्ट ने कहा कि सीआरपीसी और यूएपीए में जमानत देने के अलग-अलग नियम हैं और Prima Facie रूप में फैजान खान पर लगे आरोप सही प्रतीत हो रहे हैं, इसीलिए उसे जमानत नहीं दी जा सकती है। साथ ही आरोपित के खिलाफ शुरूआती सबूत होने की बात भी कोर्ट ने मानी है। अदालत ने कहा कि सबूतों और आरोपों को देखते हुए फैजान खान को जमानत देने का कोई कारण नहीं दिखता, इसलिए उसकी याचिका ख़ारिज की जाती है।

जिन आर्मी डॉग सोफी और विदा का जिक्र PM मोदी ने किया, वो कर चुके हैं हैरतअंगेज कारनामे, जीते हैं पुरस्कार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने 68वें रेडियो कार्यक्रम मन की बात में सोफी और विदा नाम के भारतीय सेना के दो कुत्तों के बारे में विशेष उल्लेख किया।

सोफी को विस्फोटकों का पता लगाने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। इसके साथ ही वो इम्प्रूव्ड एक्सप्लोसिव डिवाइसेस (IEDs) में उपयोग किए जाने वाले रसायनों और उपकरणों की उपस्थिति का पता लगाने में भी कामयाब रहा है।

इस साल 15 अगस्त को स्पेशल फ्रंटियर फोर्स के बम निरोधक दस्ते के सदस्य सोफी और दूसरे जांबाज कुत्ते विदा को चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ ’कमेंडेशन कार्ड’ से सम्मानित किया गया है।

पत्रकार शिव अरूर ने दोनों जांबाज कुत्तों की कमेंडेशन बैज प्राप्त करते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया था।

विदा नॉर्दर्न कमांड में आर्मी डॉग यूनिट का एक सदस्य है। विदा ने जमीन के नीचे दबे 5 माइंस और एक ग्रेनेड का पता लगाने में मदद की थी। कुत्तों की सर्विस का फायदा सेना के जवानों को भी हुआ है। इनके कारण सेना के जवानों के घायल होने और हताहत होने का खतरा कई बार टला है।

भारतीय सेना में कुत्तों के योगदान को सलाम करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “सोफी और विदा को हाल ही में चीफ ऑफ आर्मी स्‍टाफ कमेंडेशन कार्ड से सम्‍मानित किया गया है। सोफी और विदा को यह सम्मान इसलिए मिला क्योंकि उन्होंने अपने देश की रक्षा करते हुए अपने कर्तव्यों का पालन किया। हमारे सशस्त्र बलों और सुरक्षा बलों के पास कई ऐसे बहादुर कुत्ते हैं, जो न केवल देश के लिए जीते हैं, बल्कि देश के लिए खुद को बलिदान करते हैं।”

आर्मी डॉग यूनिट को ‘द साइलेंट वॉरियर्स’ के रूप में संदर्भित करते हुए, पीएम मोदी ने आपदा प्रबंधन और बचाव कार्यों में कैनाइन द्वारा दिए गए योगदान पर जोर दिया। उन्होंने आगे कहा, “राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) बचाव कार्यों के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित दर्जनों कुत्तों का भी उपयोग किया जाता है। भूकंप, इमारत गिरने की स्थिति में, ये कुत्ते मलबे के नीचे फँसे लोगों की खोज करने में ये एक्सपर्ट होते हैं।

‘बीवी सेक्स से मना नहीं कर सकती’: इस्लाम में वैवाहिक रेप और यौन गुलामी जायज, मौलवी शब्बीर का Video वायरल

इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें कनाडा में एक इस्लामी धर्मगुरु को इस्लाम के संदर्भ में ‘वैवाहिक बलात्कार’ को सही ठहराते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में दिखाई देने वाले मौलवी का नाम शब्बीर अली है। वह कनाडा में इस्लामी विद्वान और इमाम है।

इस विवादित वीडियो का टाइटल ‘The Historical Roots of Female Slavery’ है। हालाँकि यह वीडियो सितंबर 2016 की है, मगर हाल ही में इसे ‘Ex-Muslims of North America’ नाम के ट्विटर हैंडल से शेयर किया गया। वायरल वीडियो में शब्बीर अली ने ‘शादी में महिलाओं की सहमति का अधिकार’, ‘इस्लाम में यौन गुलामी’ और ISIS में मजहबी मान्यताओं का निहितार्थ, जैसे मुद्दों पर लंबी बातचीत की।

ट्विटर पर साझा की गई ऐसी एक क्लिप में, इस्लामिक विद्वान ने ‘नारीवाद’ पर अपने विचार प्रकट किए हैं। इस्लामिक शिक्षाओं का हवाला देते हुए, शब्बीर अली ने कहा, “निकाह में महिला की मुख्य जिम्मेदारी अपने पति की यौन जरूरतों को पूरा करना है। इसी वजह से यह (संभोग का जिक्र करते हुए) पति का अधिकार है और वह इसके लिए दावा करता है। महिला इसके लिए मना नहीं कर सकती।” यह दावा करते हुए उसने इस्लामी निकाह में ‘सहमति’ की अवधारणा को ताक पर रख दिया।

इसके अलावा उसने कुरान के व्याख्याकारों का हवाला देते हुए दावा किया कि इस्लाम के आलोक में ‘वैवाहिक बलात्कार’ को भी उचित ठहराया गया है। शब्बीर अली ने कहा, “कुछ लोगों का कहना है कि आदमी अपनी पत्नी को मजबूर कर सकता है और वह मना नहीं कर सकती, क्योंकि यह उसका ‘अधिकार’ है।” फिर उसने यह दावा करके इसे ‘तुच्छ’ बताने की कोशिश की कि ‘वैवाहिक बलात्कार’ एक ‘आदर्श स्थिति नहीं है’ लेकिन आगे यह भी कहा कि यह महिलाओं का कर्तव्य है कि वह सभी परिस्थितियों में ‘सहयोगी’ बने।

शब्बीर अली ने जोर देते हुए कहा, “जब उसका पति उसे उस विशेष काम के लिए कहता है, तो उसे तैयार होना चाहिए।” उसने कहा कि पैगंबर मुहम्मद ने कहा है कि अल्लाह पुरुषों की हरकतें तब देखता है जब उनका ‘महिलाओं पर अधिकार’ होता है। इतना ही नहीं, अली ने यह भी दावा किया कि ‘महिलाएँ उनके साथ गुलामों की तरह हैं।’

इसी वीडियो के एक अन्य भाग में उसने इस्लामिक दृष्टिकोण के बारे में बात करते हुए कहा, “एक आदमी की एक ही समय में चार बीवियाँ हो सकती हैं। चार बीवियों के अलावा, उसके पास असीमित संख्या में रखैल (concubines) हो सकती हैं, जो मूल रूप से गुलामी वाली महिलाओं को संदर्भित करती हैं।”

उसने आगे कहा, “औरतों को खुद को स्वतंत्र रूप से अपने मालिक को सौंप देना चाहिए। मालिक के पास उसके साथ यौन संबंध बनाने का अधिकार है।” जब शो होस्ट आयशा खाजा ने अली से ‘सहमति’ की भूमिका के बारे में पूछा, तो इस्लामिक विद्वान ने इसे पूरी तरह से खारिज कर दिया।

उसने कहा, “तथ्य यह है कि वह स्वामित्व में है, उसे सहमति का अधिकार या अपने मालिक को रोकने का अधिकार नहीं है।” शब्बीर अली ने जोर देते हुए कहा, “मालिक का उस पर पूरा अधिकार है और उसकी सहमति इस रिश्ते में कोई भी भूमिका नहीं निभाती है।”

वीडियो के अंत में, शब्बीर अली ने कहा कि 21 वीं सदी में कई ‘सम्मानित’ इस्लामी विद्वानों का मानना है कि ‘सेक्स स्लेवरी’ की परंपरा जारी रहनी चाहिए थी और यह एक ‘ईश्वरीय’ अधिकार है। सैद्धांतिक रूप से, यह अभी भी लागू है और वे स्पष्ट शब्दों में ऐसा कहते हैं। अगर आज मुस्लिम और गैर-मुस्लिमों के बीच युद्ध होता है और मुस्लिम गैर-मुस्लिम महिलाओं को पकड़ लेते हैं, तो उन्हें गुलाम बना दिया जाएगा और पुरुषों को उनके साथ यौन संबंध का अधिकार होगा।

आईएसआईएस आतंकियों द्वारा महिला बंदियों को ‘सेक्स स्लेव’ के रूप में लेने के पीछे के कारण स्पष्ट करते हुए उसने कहा, “आईएसआईएस और कोई भी इस तरह का शासन कर सकता है जो वहाँ (इस्लाम में) है। यह नहीं सोचना चाहिए कि वे धार्मिक (इस्लामिक) शासन का पालन कर रहे हैं।” ISIS की कार्रवाई को ‘गलत’ करार देते हुए, उसने कहा कि कुरान के खुलासे ‘ऐतिहासिक संदर्भ’ में सही थे।

हालाँकि कई लोगों के लिए यह मुश्किल हो सकता है कि 21 वीं सदी में ऐसी प्रतिगामी और विचलित करने वाली मानसिकता मौजूद है। यह इंटरव्यू दर्शाता है कि इस तरह के विचार आज भी संप्रदाय विशेष के कई लोगों द्वारा शेयर किए जाते हैं।

विदेश में TV पर पढ़ाई और यहाँ PM मोदी के ‘मन की बात’: AltNews वाला फैला रहा था भ्रम, लोगों ने 32 TV चैनल के नाम गिनाए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (अगस्त 30, 2020) को अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात‘ के जरिए देशवासियों को सम्बोधित किया, जिसमें उन्होंने भारत में खिलौनों की इंडस्ट्री में स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देने के साथ-साथ उन डॉग्स के बारे में भी बात की, जो सुरक्षा बलों के साथ मिल कर देश के लिए काम करते हैं। लेकिन ‘ऑल्ट न्यूज़’ के जुबैर ने इसमें भी खोट निकाल कर पीएम मोदी पर निशाना साधा।

दरअसल, जुबैर ने बीबीसी की एक खबर शेयर की, जिसमें बताया गया है कि मेक्सिको ने टीवी के जरिए ही बच्चों को पढ़ाने का निर्णय लिया है। इस खबर में बताया गया है कि इस कदम से बच्चे बिना इंटरनेट के ही सीधे टीवी पर अपनी पढ़ाई से संबंधित लेक्चर देख सकेंगे। साथ ही तस्वीरों के जरिए बताया गया है कि कैसे मेक्सिको में टीवी के जरिए छात्रों ने पढ़ाई शुरू कर दी है। जुबैर ने इसके जरिए पीएम मोदी की आलोचना की।

इसके लिए जुबैर ने पीएम मोदी की ‘मन की बात’ वाला स्क्रीनशॉट भी शेयर किया, जिसे दूरदर्शन ने ट्वीट किया था। साथ ही उसने लिखा- ‘प्राथमिकताएँ’। इसके जरिए जुबैर ये कहना चाह रहा था कि भारत में दूरदर्शन पीएम मोदी के भाषण दिखाता है जबकि मेक्सिको में टीवी से पढ़ाई हो रही है। इस दौरान उसने ‘कूल’ बनने के लिए ट्वीट तो कर दिया लेकिन उसे ये नहीं पता था कि भारत में ये अप्रैल 2020 से ही हो रहा है।

भारत में दूरदर्शन लगातार बच्चों की पढ़ाई में कई चैनलों के जरिए मदद कर रहा है, जिसमें छोटी कक्षाओं से लेकर स्नातक तक के छात्रों के लिए सामग्रियाँ प्रसारित की जा रही हैं। जुबैर द्वारा शेयर की गई मेक्सिको वाली खबर 26 अगस्त की है जबकि भारत में अप्रैल में ही ये खबर आ गई थी। यानि, भारत ने 4 महीने पहले ही वो काम कर दिया था। लेकिन, जुबैर ने लोगों को गुमराह करने के लिए पीएम मोदी पर जबरदस्ती निशाना साधा।

आइए जानते हैं कि इस विषय में भारत सरकार ने क्या किया है। विभिन्न सरकारी संस्थानों के साथ मिलकर दूरदर्शन और आकाशवाणी (एआईआर) देश भर में स्थित अपने क्षेत्रीय चैनलों के माध्यम से टीवी, रेडियो और यूट्यूब पर वर्चुअल कक्षाओं और अन्य शैक्षणिक सामग्रियों का प्रसारण कर रहे हैं। विद्यालयी कक्षाएँ बंद होने की स्थिति में ये वर्चुअल कक्षाएँ लाखों विद्यार्थियों विशेषकर 10वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को उनकी बोर्ड और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारियों में खासी सहायक साबित हो रही हैं।

डीडी और एआईआर के माध्यम से वर्चुअल पढ़ाई में प्राथमिक, जूनियर और हाईस्कूल स्तर के विद्यार्थियों के लिए पाठ्यक्रम आधारित कक्षाएँ शामिल हैं। कुछ राज्यों में माध्यमिक विद्यालय लीविंग सर्टिफिकेट विषय और 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए मॉडल प्रश्न पत्र भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इनमें से ज्यादातर कक्षाओं से विद्यार्थियों को अपनी इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारियों में भी सहायता मिल रही है।

पाठ्यक्रम से जुड़ी सामग्री से इतर पढ़ाई को दिलचस्प बनाने के लिए कुछ राज्यों में वर्चुअल कक्षाओं में प्रतिष्ठित शख्सियतों द्वारा कहानी सुनाए जाने और प्रश्नोत्तरी कार्यक्रमों (क्विज शो) को भी शामिल किया गया है। विद्यार्थियों के भीतर घर में रहते हुए अनुशासन की भावना विकसित करने के उद्देश्य से ज्यादातर कक्षाएँ जल्द सुबह शुरू हो जाती हैं और कुछ दोपहर में फिर से आयोजित की जाती हैं।

टीवी चैनलों के अलावा, कोविड-19 महामारी के बाद, एनआईओएस द्वारा स्वयं प्रभा डीटीएच चैनल पाणिणी (#27), एनआईओएस चैनल शारदा (#28) एवं एनसीईआरटी के चैनल किशोर मंच (#31), के माध्यम से केवीएस, एनवीएस और सीबीएसई तथा एनसीईआरटी के सहयोग से स्काइप के जरिए लाइव सेशन के प्रसारण की शानदार अनूठी पहल की है। अब विषयों के विशेषज्ञ भी अपने घरों से स्काईप के जरिए स्वयंप्रभा के लाइव प्रसारण के लिए कनेक्ट करने में सक्षम हैं।

वहीं, जिनके पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है, उनके लिए विशेष व्यवस्था है। लर्नर्स इन डीटीएच चैनलों एवं 7 बजे सुबह से 1 बजे दोपहर तक रिर्काडेड ब्रॉडकास्ट के 6 घंटे एनआईओएस यूट्यूब चैनल पर पाठ आधारित शैक्षणिक कार्यक्रमों को देख सकते हैं, जिसके बाद चार विभिन्न विषय विशेषज्ञों के साथ प्रत्येक के लिए डेढ़ घंटे के लिए 1 बजे दोपहर से 7 बजे शाम तक लाइव सेशन के 6 घंटे देख सकते हैं। लर्नर्स लाइव सेशन के दौरान प्रदर्शित नंबर पर फोन कॉल के जरिए अपने घर से सीधे विषय के एक्सपर्ट से प्रश्न पूछ सकते हैं।

स्वयंप्रभा उनके लिए लर्निंग का एक प्रभावी टूल है, जिनके घरों में इंटरनेट की सुविधा नहीं है। स्वयंप्रभा जीएसएटी-15 सैटेलाइट का उपयोग करके 24 घंटों के आधार पर उच्च गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक कार्यक्रमों के प्रसारण को समर्पित 32 डीटीएच चैनलों का एक समूह है। प्रत्येक दिन कम से कम 4 घंटे का एक नया कंटेंट होगा, जिसे एक दिन में 5 बार और दिखाया जाता है, जिससे कि छात्र अपनी सुविधा के अनुसार समय का चुनाव कर सके। डीटीएच चैनल निम्नलिखित कवर करते हैं:

  • उच्च शिक्षा: पोस्ट ग्रेजुएट एवं अंडर-ग्रेजुएट लेवल पर करीकलम आधारित कोर्स कंटेंट कला, विज्ञान, वाणिज्य, ललित कलाएँ, सामाजिक विज्ञान एवं ह्यूमैनिटीज, इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, लॉ, मेडिसिन, कृषि आदि विविध विषयों को कवर करते हैं। सभी कोर्स स्वयं प्लेटफॉर्म, जिसे एमओओसी कोर्सों की पेशकश के लिए डेवलप किया गया है, के जरिए अपनी विस्तृत पेशकश में सर्टिफिकेशन-रेडी होंगे।
  • स्कूली शिक्षा (9-12 लेवल): शिक्षकों के प्रशिक्षण एवं भारत के बच्चों को विषयों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करने और प्रोफेशनल डिग्री प्रोग्रामों में नामांकन के लिए प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उन्हें सहायता करने के लिए टीचिंग एवं लर्निंग ऐड के लिए माड्यूल।
  • करीकलम आधारित कोर्स जो देश एवं विदेश में भारतीय नागरिकों के जीवन पर्यन्त लर्नरों की आवश्यकताओं की पूर्ति कर सकते हैं।
  • प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के लिए छात्रों (11वीं एवं 12वीं) की सहायता करना।
  • चैनल 01-10 सीईसी-यूजीसी द्वारा प्रबंधित किए जाते हैं
  • चैनल 11-18 एनपीटीईएल द्वारा प्रबंधित किए जाते हैं
  • चैनल 19-22 आईआईटी दिल्ली द्वारा उच्च विद्यालय के छात्रों के लिए प्रबंधित किए जाते हैं और इन्हें आईआईटी पाल कहा जाता है।
  • चैनल 23, 24, 25 एवं 26 इग्नू, नई दिल्ली द्वारा प्रबंधित किए जाते हैं
  • चैनल 27, 28 एवं 30 एनआईओएस, नई दिल्ली द्वारा प्रबंधित किए जाते हैं
  • चैनल 29 यूजीसी- आईएनएफएलआईबीएनईटी, गाँधीनगर द्वारा प्रबंधित किए जाते हैं
  • चैनल 31 एनसीईआरटी द्वारा प्रबंधित किए जाते हैं
  • चैनल 32 इग्नू एवं एनआईओएस द्वारा संयुक्त रूप से प्रबंधित किए जाते हैं

जो छात्र जेईई एवं एनईईटी की तैयारी कर रहे हैं, वे इस पहल के जरिए अपने घरों में बैठ कर इससे लाभान्वित हो सकते हैं। कोविड-19 महामारी के बाद, एनआईओएस द्वारा स्वयंप्रभा डीटीएच चैनल पाणिणी (#27), एनआईओएस चैनल शारदा (#28) एवं एनसीईआरटी के चैनल किशोर मंच (#31), के माध्यम से केवीएस, एनवीएस और सीबीएसई तथा एनसीईआरटी के सहयोग से स्काइप के जरिए लाइव सेशन के प्रसारण की शानदार अनूठी पहल की है। विभिन्न डीटीएच सेवा प्रदाताओं में चैनल की संख्या इस प्रकार हैः

  • एयरटेल टीवी में: चैनल #437, चैनल #438, चैनल #439,
  • वीडी वीडियोकॉन में: चैनल #475, चैनल #476, चैनल #477,
  • टाटा स्काई में: चैनल #756, जो स्वयंप्रभा डीटीएच चैनलों के लिए विंडो पॉप अप करता है।
  • डिश टीवी में: चैनल #946, चैनल #947, चैनल #949, चैनल #950

इन सबके बावजूद जुबैर द्वारा पीएम मोदी पर निशाना साधना ये बताता है कि या तो वो पढ़ाई-लिखाई वाली ख़बरों से कोई मतलब ही नहीं रखता है, या फिर सब पता होने के बावजूद वो लोगों को मूर्ख समझता है क्योंकि उसे लगता है कि लोग उसकी बातों में आ जाएँगे। जुबैर को भी इन 32 टीवी चैनलों के सामने बैठ कर कुछ वक्त गुजारना चाहिए, ताकि आगे से वो ऐसे भ्रम न फैलाए।

NDTV की सेकुलर पत्रकारिता: तबरेज पर बताया धर्म, राहुल की मॉब लिंचिंग पर मजहब छिपाया

पश्चिमी दिल्ली के नारायणा में शुक्रवार (अगस्त 28, 2020) को 32 साल के राहुल की मोबाइल चोरी के आरोप में पीट-पीट कर हत्या कर दी। आरोपितों के नाम हैं- मुश्ताक, शिराज, अनीश और इश्तिहार। लेकिन, कथित सेकुलर मीडिया इस घटना पर मौन है। एनडीटीवी ने इसे सामान्य घटना की तरह पेश किया है।

यह वही एनडीटीवी है जो तबरेज अंसारी की मौत पर चीख-चीखकर उसका मजहब बताते नहीं थक रहा था। तबरेज की भी चोरी के आरोप में भीड़ ने पिटाई कर दी थी। बाद में उसकी मौत हो गई। लेकिन, एनडीटीवी समेत तमाम सेकुलर मीडिया ने इसे संप्रदाय विशेष की मॉब लिंचिंग के तौर पर पेश किया था।

एनडीटीवी ने इससे संबंधित अपनी खबर की हेडलाइन में बताया था कि झारखंड में संप्रदाय विशेष के एक युवक की पीट-पीटकर भीड़ ने हत्या कर दी और ऐसा करने वालों ने उससे जय श्रीराम का नारा भी लगवाया। हेडलाइन में यह नहीं बताया कि यह घटना क्यों हुई। जोर इस बात पर था कि आप जानें कि संप्रदाय विशेष के एक इंसान को हिंदुओं ने मार डाला।
लेकिन, राहुल से जुड़ी खबर में एनडीटीवी यह बताया कि मोबाइल चोरी के आरोप में एक 23 साल की युवक पीटकर हत्या कर दी गई। चूॅंकि इस मामले में आरोपित एक खास मजहब के थे तो पीड़ित का धर्म गायब हो गया और चोरी का आरोप प्रमुख।

वैसे कथित सेकुलर मीडिया ने ऐसा कारनामा पहली बार नहीं किया है। पालघर में साधुओं की हत्या के समय भी चोरी के आरोप में तीन लोगों की पीट-पीट कर हत्या करके मीडिया में खबर चलाई गई थी।

यही कारण है कि संप्रदाय विशेष के किसी व्यक्ति की कथित मॉब लिंचिंग होने पर मोदी सरकार को कोसने वाला सेकुलर मीडिया राहुल की हत्या पर मौन है। उसे हिन्दू युवक का यह मॉब लिंचिंग दिखाई नहीं दे रहा है। अगर यह घटना संप्रदाय विशेष के किसी युवक के साथ हुई होती, तो सेकुलर गैंग टीवी चैनलों में बहस और सोशल मीडिया पर पोस्ट करते नजर आता। दिल्ली से लेकर बॉलीवुड तक सभी के हाथों में प्लेकार्ड और पोस्टर नजर आता। लेकिन आज सभी गायब हैं।

किसी भी व्यक्ति की हत्या मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख देती है, मरने वाला चाहे किसी भी धर्म, जाति या रंग का हो। लेकिन सेकुलर गैंग और बुद्धिजीवी व्यक्ति के धर्म, जाति और रंग को आधार बनाकर विरोध करते हैं। महज क्षुद्र राजनीतिक और व्यक्तिगत स्वार्थ के कारण कुछ लोग मोदी सरकार के खिलाफ मॉब लिंचिंग के नाम पर झूठ फैलाने से बाज नहीं आते हैं। सेकुलर और टुकड़े-टुकड़े गैंग हमेशा पक्षपाती चिंता जाहिर कर अपना हित साधने की कोशिश करता है।

गौरतलब है कि राहुल को एक पेड़ से बाँधकर डंडों और लोहे के छड़ों से उसे बेहरहमी से मारा। जिससे उसकी मौत हो गई। चारो आरोपितों को घटना के तुरंत बाद ही गिरफ्तार कर लिया गया।

मेरे साथ किया गाली-गलौज, शराबी कह कर बदनाम किया: लिव-इन में रह चुके पूर्व गर्लफ्रेंड पूजा भट्ट पर रणवीर शौरी का आरोप

अभिनेता रणवीर शौरी ने ट्विटर पर खुलासा किया है कि उनके साथ महेश भट्ट की बेटी पूजा भट्ट ने गाली-गलौज की। दरअसल, उन्होंने ‘याहू’ के एक लेख पर प्रतिक्रिया देते हुए ये बातें लिखीं। उस लेख में पूजा भट्ट के ‘लव लाइफ’ की चर्चा करते हुए लिखा गया था कि रणवीर शौरी के साथ उनका गली-गलौज वाला रिश्ता था और फिर जब दूसरे प्रेमी से शादी हुई तो 11 सालों बाद टूट गई। अभिनेता ने इस लेख पर प्रतिक्रिया दी।

रणवीर शौरी ने लिखा कि इस तरह के लेख किसी को निरंतर बदनाम करने के लिए लिखे जाते हैं, जिसके पीछे दुर्भावनापूर्ण पीआर अभियान है, जिसके माध्यम से फिल्म इंडस्ट्री के बड़े-बड़े लोग उन्हें निशाना बनाने में लगे हुए हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि मीडिया वालों में से कोई भी पहले की ख़बरों या पुलिस रिकॉर्ड्स को चेक करने की जहमत तक नहीं उठाता। वो मीडिया से खासे नज़र आए।

रणवीर शौरी ने पूजा भट्ट की ओर इशारा करते हुए लिखा कि अगर सब कुछ खँगाला जाएगा तो पता चलेगा कि उन्होंने किसी को गाली नहीं दी थी बल्कि उन लोगों ने ही उनके साथ गाली-गलौज किया था। बता दें कि पूजा भट्ट ये दावा करती रही हैं कि रणवीर शौरी शराबी थे और हमेशा उनकी पिटाई किया करते थे। उन्होंने कहा था कि एक बार तो ‘गालीबाज’ अभिनेता ने कुछ ज्यादा ही शराब पी ली थी, जिसके बाद उनकी जम कर पिटाई की।

बता दें कि रणवीर शौरी और पूजा भट्ट कभी लवबर्ड्स हुआ करते थे और लिव-इन रिलेशनशिप में भी रहे हैं। साथ ही उन्होंने उक्त मीडिया रिपोर्ट में पूजा भट्ट के साथ तस्वीरों में दिख रहे व्यक्ति के बारे में कहा कि वो पूजा भट्ट का पति मनीष मखीजा है। बकौल रणवीर शौरी, वो तब बेस्ट फ्रेंड हुआ करता था लेकिन पूजा भट्ट से शादी के बाद उनके रिश्ते बिगड़ गए थे। शौरी ने कहा कि सभी रिश्तों से छेड़छाड़ की जाती है और मानसिक हथियारों का प्रयोग किया जाता है।

बता दें कि नेपोटिज्म विवाद के बाद से ही महेश भट्ट का परिवार लगातार विवादों में है। उनके द्वारा निर्देशित फिल्म ‘सड़क 2’ का भी बुरा हाल हुआ। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद मुंबई पुलिस ने उन्हें बुला कर उनके साथ पूछताछ भी की थी। महेश भट्ट की रिया चक्रवर्ती के साथ कई तस्वीरें वायरल हुई थीं, जिसके बाद वो सोशल मीडिया पर लोगों की जबरदस्त आलोचना का शिकार हुए थे।

ज्ञात हो कि महेश भट्ट निर्देशित फिल्म ‘सड़क 2’ के ट्रेलर के बाद अब फिल्म का भी बुरा हश्र हो रहा है। संजय दत्त और आलिया भट्ट अभिनीत इस फिल्म के ट्रेलर को यूट्यूब पर 1.2 करोड़ डिस्लाइक्स मिल चुके हैं। IMDb पर भी इसकी स्थिति अच्छी नहीं है। इस पर फिल्म को 10 में से मात्र 1.1 रेटिंग मिली है। अब तक करीब 10,000 लोग इसे रेट कर चुके हैं। समीक्षकों ने भी इसे पूरी तरह नकार दिया है।

बेंगलुरु में ड्रग्स रैकेट का भंडाफोड़, 3 गिरफ्तार: एक्टर, म्यूजिशियन और छात्र NCB की रडार पर

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने बेंगलुरु में एक बड़े ड्रग ट्रैफिकिंग रैकेट का भंडाफोड़ किया है। कथित तौर पर इस रैकेट में कुछ प्रमुख संगीतकार, अभिनेता के साथ बेंगलुरु के कुछ कॉलेज के छात्र भी शामिल हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 21 अगस्त को नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के अधिकारियों ने तीन स्थानों पर छापे मारे और तीन ड्रग डीलरों को गिरफ्तार किया। एनसीबी ने बेंगलुरु के कल्याण नगर में एक ड्रग पैडलर के आवास पर छापा मारा और 60 ग्राम वजन में 145 एमडीएमए की गोलियाँ और 2,25,000 कैश जब्त किए।

एक अन्य छापे में बेंगलुरु के निकू होम्स में एमडीएमए की 96 गोलियाँ और 180 एलएसडी ब्लोट्स जब्त किया गया। इसके बाद एमडीएमए की 270 गोलियाँ डोड्डागुब्बी स्थित अनिका के घर से बरामद की गई।

एमडीएमए (मिथाइलेंडीऑक्सी-मेथम्फेटामाइन) जिसे आमतौर पर एक्सटेसी के रूप में जाना जाता है, पार्टियों में इस्तेमाल किए जाने वाला ड्रग है। इसके सेवन से मूड बदलता है और यह अत्यधिक ऊर्जा और आनंद का भाव पैदा करता है। माना जाता है कि घरेलू बाजार में एक्सटेसी की गोली की कीमत 1,500 रुपये से 2,500 रुपए के बीच होती है।

छापेमारी के दौरान एनसीबी ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। जिसमें ड्रग किंगपिन अनिका डी और दो अन्य सहयोगी मोहम्मद अनूप और आर रवींद्रन हैं।

एनसीबी के उप निदेशक केपीएस मल्होत्रा ​​ने बताया कि ड्रग रैकेट ने न केवल कर्नाटक में प्रमुख संगीतकारों और अभिनेताओं को, बल्कि राज्य में वीआईपी के बच्चों को भी ड्रग्स सप्लाई किया है।

कथित तौर पर अनिका ने पहले टीवी शो में भी काम किया है। उसके साउथ फ़िल्म इंडस्ट्री के टॉप अभिनेताओं, संगीतकारों के साथ अच्छे संबंध हैं। बता दें जिस वक्त एनसीबी ने इस रैकेट का भंडाफोड़ किया, तब भी अनिका ड्रग्स के नशे में थी। उन्होंने अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार भी किया। जिसके कारण एनसीबी अधिकारियों को उससे पूछताछ करने के लिए 10 घंटे तक इंतजार करना पड़ा।

अनिका ने एक्टिंग करियर छोड़ने के बाद नशीले पदार्थों की सप्लाई शुरू की थी। अनिका ने मशहूर हस्तियों के साथ संपर्क स्थापित करने के लिए इंडस्ट्री में अपने कनेक्शन का इस्तेमाल किया और उन्हें ड्रग्स सप्लाई करना शुरू कर किया।

इस कार्य में रवीन्द्रन मेन डिस्ट्रीब्यूटर था। उसके मोबाइल फोन में 2000 से अधिक लोगों के नंबर सेव थे। जिनमें कम से कम 10 टॉप कन्नड़ सिनेमा के अभिनेता, प्रमुख संगीतकार और वीआईपी के बच्चे शामिल हैं।

कथित तौर पर ये लोग कई सालों से ड्रग रैकेट चला रहे हैं। एक अधिकारी ने कहा, “अनिका अंतरराष्ट्रीय कूरियर सेवा के माध्यम से विदेश से ड्रग्स इम्पोर्ट कराती थी और इसकी पेमेंट बिटकॉइन के जरिए की जाती थी।”

अनिका ने पूछताछ के दौरान खुलासा किया कि वह 2014 से ड्रग डीलिंग का काम करती थी। पहले वह कॉलेज के छात्रों को रेव पार्टियों में ड्रग सप्लाई करती थी। फिर बाद में उसने अपना कनेक्शन एक्टर्स, वीआईपी, अमीर लोगों के साथ बनाया और उन्हें सप्लाई करना शुरू किया।

एनसीबी अधिकारियों के अनुसार, जब्त किए गए ड्रग्स पश्चिमी यूरोप, विशेष रूप से बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स से लाए गए है। कथित तौर पर ब्रसेल्स से ड्रग्स की सप्लाई बच्चों के खिलौनों के खेप में छुपा कर की जाती है।

दारा शिकोह: ‘धोखे’ से जिसकी 4 लाख की सेना 40000 वाले औरंगजेब से हारी और इतिहास ने जिसके साथ फिर किया ‘धोखा’

शाहजहाँ और औरंगजेब जैसे मुगल बादशाहों के बारे में तो पूरी दुनिया जानती है, लेकिन दारा शिकोह को बहुत कम ही लोग जानते होंगे। दरअसल, दारा शिकोह शाहजहाँ के बड़े बेटे और औरंगजेब के बड़े भाई थे। इतिहास में आज के दिन एक भाई ने अपने ही भाई को सत्ता के लिए मरवा दिया था। भारतीय मुगलकालीन इतिहास में 30 अगस्त 1659 को ही मुगल शासक शाहजहाँ के बेटे दारा शिकोह की उसके ही छोटे भाई ने हत्या करवा दी थी। भारतीय इतिहास में भुला दिया गया यह शख्स शाही मुगल परिवार में अनोखा और अद्भुत व्यक्तित्व वाला था।

दारा शिकोह के एक हाथ में पवित्र कुरान थी और दूसरे हाथ में पवित्र उपनिषद। वो मानता था कि हिन्दू और इस्लाम धर्म की बुनियाद एक है। वो नमाज भी पढ़ता था और प्रभु नाम की अँगूठी भी पहनता था। मस्जिद भी जाता था और मंदिर में भी आस्था रखता था। लेकिन सत्ता की लड़ाई में उसे काफिर बताकर मार दिया गया। तभी से ये सवाल भी बना हुआ है कि क्या भारतीय उपमहाद्वीप का इतिहास अलग होता अगर औरंगजेब की जगह दारा शिकोह भारत का बादशाह बनता।

दारा शिकोह वो मुगल शासक है, जिनके साथ इतिहास ने छलावा किया और गुमनामी के अंधेरे में धकेल दिया। उस दारा शिकोह को उसका वाजिब हक दिलाने के लिए मोदी सरकार आगे आई है। जिस दारा शिकोह ने हिन्दू धर्म ग्रंथों का फारसी में अनुवाद किया था। उस दारा शिकोह को इतिहास में दफन पन्नों से बाहर निकालने का बीड़ा मोदी सरकार ने उठाया है। जिस दारा शिकोह के साथ उसके सगे भाई औरंगजेब ने क्रूरता की हदें पार कर दी थी और उसका सिर कलम करवा दिया था, उस दारा शिकोह की कब्र खोजने में मोदी सरकार जुट गई है।

दारा शिकोह की इमेज लिबरल मानी जाती है। वो हिंदू और इस्लामिक ट्रेडिशन को साथ लेकर चलने वाले मुगल थे। दारा शिकोह ने भगवद्गीता और 52 उपनिषदों का फारसी में अनुवाद किया था। कहा-लिखा तो ये भी गया है कि दारा के सभी धर्मों को साथ लेकर चलने के ख्याल के कारण ही कट्टरपंथियों ने उन्हें इस्लाम-विरोधी करार दे दिया था। इन्हीं हालातों का फायदा उठाकर औरंगज़ेब ने दारा के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया था। एक सच्चाई यह भी है कि जहाँ एक ओर शाहजहाँ ने दारा शिकोह को सैन्य मुहिमों से दूर रखा वहीं औरंगजेब को 16 वर्ष की आयु में एक बड़ी सैन्य मुहिम की कमान सौंप दी।

पुरातत्वविद् केके मुहम्मद के मुताबिक शिकोह अपने दौर के बड़े फ्री थिंकर (स्वतंत्र विचारक) थे। उन्होंने उपनिषदों का महत्व समझा और अनुवाद किया। तब इसे पढ़ने की सुविधा सवर्ण हिंदुओं तक सीमित थी। उपनिषदों के दारा के किए फारसी अनुवाद से आज भी फ्री थिंकर्स को प्रेरणा मिलती है। यहाँ तक कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इसको स्वीकार किया है।

दारा शिकोह का ध्यान पढ़ाई की तरफ ज्यादा था। आगे चलकर दारा को पढ़ाई की ऐसी लत लगी कि वो कभी धार्मिक पुस्तकों के ध्यान में डूबे रहते, तो कभी जामी और रूमी जैसे महान सूफी संतों के शेर और रूपाईयों में खो जाते। मुगल बादशाह शाहजहाँ के सबसे बड़े बेटे दारा शिकोह में भारतीय संस्कृति कूट-कूट कर भरी हुई थी। वो उदारवादी और बेहद नम्र मुगल शासक थे। वो एक बड़े लेखक भी थे। दारा शिकोह सूफीवाद से बेहद प्रभावित थे। उनके मन में हर धर्म के प्रति सम्मान था। 

दारा शिकोह की खूबियों की वजह से पिता शाहजहाँ उन्हें बेहद पसंद किया करते थे और अपना उत्तराधिकारी बनाना चाहते थे। लेकिन दारा शिकोह के भाई औरंगजेब को ये कतई मंजूर नहीं था। दिल्ली सल्तनत हासिल करने के लिए औरंगजेब ने दारा शिकोह के साथ तीन-तीन युद्ध लड़े और तीनों में उसकी मात हुई। बाद में औरंगजेब दारा शिकोह को मौत की सजा देकर जबरन बादशाह बन गया। 

इतिहास में औरंगजेब की खूब चर्चा हुई है और दारा शिकोह को नजरअंदाज कर दिया गया है। सच्चे मायने में एक धर्मनिरपेक्ष मूर्त वाले दारा शिकोह को काफिर तक करार दिया गया था। इतिहासकारों ने भी औरंगजेब का ही महिमामंडन किया। लेकिन दारा शिकोह को वो पहचान नहीं दी, जिनके वो हकदार थे। देश भर में औरंगजेब के नाम से तमाम सड़के मिल जाएँगी। लेकिन दारा शिकोह के नाम पर एक स्मारक तक नहीं बना। हालाँकि 2017 में दिल्ली के डलहौजी मार्ग का नाम बदलकर दारा शिकोह रोड जरूर कर दिया गया था। 

औरंगजेब ने जब साल 1659 में एक भरोसेमंद सिपाही के जरिए दारा शिकोह का सर कलम करवा दिया था तब सिर आगरा में दफनाया गया था और धड़ को दिल्ली में। शाहजहाँनामा के मुताबिक औरंगजेब से हारने के बाद दारा शिकोह को जंजीरों से जकड़कर दिल्ली लाया गया और उसके सिर को काटकर आगरा फोर्ट भेजा गया, जबकि उनके धड़ को हुमायूँ के मकबरे के परिसर में दफनाया गया था।

दारा शिकोह इतिहास की सबसे बड़ी सेना लेकर औरंगजेब से लड़ने गया था। लेकिन उसकी सेना में सैनिकों से ज्यादा छोटे दुकानदार, मजदूर, दस्तकार और यहाँ तक की भांडे-बर्तन बेचने वाले भी शामिल थे। उन्हें लड़ने का कोई अनुभव नहीं था, सिर्फ दारा शिकोह के आदेश पर उन्हें सेना में भर्ती कर लिया गया था। दारा शिकोह के पास 4 लाख सैनिक थे और औरंगजेब के पास सिर्फ 40 हजार।

दारा को हराने में उसके अपने ही विश्वासपात्र का हाथ था। दारा शिकोह ने कभी उसे बुरी तरह से अपमानित किया था। उसने दारा से जंग के मैदान में बदला चुकाया। दारा हाथी पर थे और वह जंग लगभग जीत चुके थे। औरंगजेब के पास गिनती के सैनिक रह गए थे। उसी वक्त उनके एक विश्वासपात्र खलीलुल्लाह ने कहा- हजरत सलामत, आपको जीत मुबारक। अब आप हाथी से उतरकर घोड़े पर बैठिए। पता नहीं कब कोई तीर आपको आकर लग जाए। अगर ऐसा हो गया तो हम कहीं के नहीं रहेंगे। दारा शिकोह बिना सोच विचार किए हाथी से उतरकर घोड़े पर सवार हो गए।

उधर जैसे ही दारा हाथी से उतरे, उनके सैनिकों के बीच दारा के मरने की अफवाह फैल गई। औरंगजेब ने इसका फायदा उठाया। दारा के सैनिक उनका साथ छोड़कर भाग गए और औरंगजेब और मुराद की मुट्ठीभर सेना ने जंग जीत लिया।

जंग हारने के बाद दारा शिकोह यहाँ-वहाँ भटकते रहे। कभी वो मुल्तान तो कभी थट्‌टा और कभी अजमेर भागे। आखिरकार औरंगजेब के एक सैनिक के हाथों वो पकड़े गए। दिल्ली में उन्हें बुरी तरह से अपमानित किया गया। उन्हें बीमार और गंदे हाथी पर घुमाया गया। दारा शिकोह को भिखमंगों जैसे कपड़े पहनाए गए थे।

दारा शिकोह को औरंगजेब ने कैदखाने में डाल दिया। बाद में एक रात जब दारा और उनका बेटा कैदखाने में ही अपने लिए खाना बना रहे थे तो औरंगजेब के एक गुलाम नजीर ने उनका सिर काट डाला। 

अवीक चंदा की किताब ‘दारा शिकोह, द मैन हू वुड बी किंग’ के मुताबिक, औरंगजेब ने दारा शिकोह के कटे हुए सिर को शाहजहाँ के पास तोहफे के तौर पर भिजवाया और उनके धड़ को दिल्ली में ही हुमायूँ के मकबरे में दफना दिया गया। वहीं इटैलियन इतिहासकार निकोलाओ मनूची ने अपनी किताब ‘स्टोरिया दो मोगोर’ में लिखा है कि औरंगजेब के आदेश पर दारा के सिर को ताजमहल के प्रांगण में गाड़ दिया गया, क्योंकि उसका मानना था कि शाहजहाँ जब भी अपनी बेगम के मकबरे को देखेंगे तो उन्हें बार-बार ये ख्याल आएगा कि उनके सबसे प्रिय और बड़े बेटे दारा का सिर वहाँ सड़ रहा है। 

दारा के परिवार का भी बुरा हाल हुआ। उनके एक बेटे को मार दिया गया। दूसरे को ग्वालियर के किले में कैद कर लिया गया। दारा की बेगम अपनी जान बचाने के लिए लाहौर भाग गई। बाद में उन्होंने जहर खाकर जान दे दी।

औरंगजेब ने दारा शिकोह की हत्या करने वाले गुलाम को भी नहीं छोड़ा। दारा को अपमानित कर हाथी पर घुमाने वाले जीवन खाँ और उनका सिर काटने वाले गुलाम नजीर को पहले उसने इनाम देकर विदा किया। फिर रास्ते में दोनों के सिर कटवा दिए।

ये एक ऐतिहासिक तथ्य है कि जहाँ औरंगजेब ने हिंदू धर्म और उसकी परंपराओं, मान्यताओं को नष्ट करने का काम किया, वहीं उसके भाई दारा शिकोह ने हमेशा सर्वधर्म समभाव की बात कही। दारा शिकोह धार्मिक सहिष्णुता और धर्म निरपेक्षता का हिमायती रहा। दारा शिकोह के लिए दूसरे धर्मों की आस्था के बारे में जानकारी हासिल करना राजनीति से प्रेरित नहीं था। इसमें किसी राज्य विस्तार या राज्य संभालने जैसी कोई कवायद नहीं शामिल थी। 

दारा शिकोह विद्वान था। वो भारतीय उपनिषद और भारतीय दर्शन की अच्छी जानकारी रखता था। इतिहासकार बताते हैं कि वो विनम्र और उदार ह्रिदय का था। दारा के सबसे बड़े योगदानों में उपनिषदों का फारसी भाषा में अनुवाद करना माना जाता है। इन अनुवादित किताबों को उसने ‘सिर्रेअकबर‘ यानी महान रहस्य का नाम दिया था। फारसी भाषा में अनुवाद कराए जाने का मुख्य कारण ये था कि फारसी मुगलिया कोर्ट में इस्तेमाल की जाती थी। हिंदुओं का भी विद्वान वर्ग इस भाषा के साथ बखूबी परिचित था।

फारसी में दारा शिकोह के ग्रंथ हैं- सारीनतुल् औलिया, सकीनतुल् औलिया, हसनातुल् आरफीन (सूफी संतों की जीवनियाँ), तरीकतुल् हकीकत, रिसाल-ए-हकनुमा, आलमे नासूत, आलमे मलकूत (सूफी दर्शन के प्रतिपादक ग्रंथ), सिर्र-ए-अकबर (उपनिषदों का अनुवाद)। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता और योगवासिष्ठ का भी फारसी भाषा में अनुवाद किया। ‘मज्म-उल्-बहरैन्’ फारसी में उनकी अमर कृति है, जिसमें उन्होंने इस्लाम और वेदांत की अवधारणाओं में मूलभूत समानताएँ बताई हैं। इसके अलावा दारा शिकोह ने ‘समुद्रसंगम’ (मज़्म-उल-बहरैन) नाम से संस्कृत में भी रचना की। 

दारा शिकोह ने पुस्तकालय भी बनवाए। शुरुआत में इसे दारा शिकोह के पुस्तकालय के रूप में जाना जाता था। बाद में इसे पंजाब के वाइसराय सर ओचर्लोनी के निवास में बदल दिया गया। फिर इसे कुछ सरकारी कॉलेज में बदल दिया गया। उसके बाद, इसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण कार्यालय के कार्यालय के रूप में मदरसा जिला नगरपालिका बोर्ड में स्थापित किया गया।

फिलहाल यह पूरी तरह से बंद हो चुका है। कहा जाता है कि उस समय इस पुस्तकालय में अरबी, संस्कृत, फारसी में लगभग 250000 ग्रंथ थे और बहुत सारी अनुवादित लिपियाँ भी थीं। 2011 में, शीला दीक्षित सरकार ने पुस्तकालय को शहर के प्रदर्शनी हॉल में तब्दील कर दिया।

उल्लेखनीय है कि अलीगढ़ में दारा शिकोह फाउंडेशन के अध्यक्ष आमिर रशीद ने पिछले दिनों कहा था कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद के निर्माण के बजाय, दारा शिकोह के नाम पर मस्जिद का निर्माण किया जाए, जिन्हें हिंदुओं और मुस्लिमों के बीच सद्भाव फैलाने के लिए जाना जाता है।

कानपुर में एक और लव जिहाद: टॉर्चर, काला जादू, ब्रेनवॉश और धर्मांतरण के प्रयास की कहानी

कानपुर के गोविंद नगर की रहने वाली 18 वर्षीय हिंदू लड़की मुस्कान अपने परिवार में लौट आई है। बता दें कि मुस्कान पिछले 10 दिनों से लापता थी। परिवार की शिकायत के आधार पर, गोविंद नगर पुलिस ने कानपुर के जाजमऊ निवासी आसिफ शाह उर्फ नफीज के खिलाफ आईपीसी की धारा 366 के तहत FIR दर्ज कर मामले की जाँच शुरू कर दी है। परिवार ने इसे ‘लव जिहाद’ का एक और मामला बताया है।

ऑपइंडिया ने पहले बताया था कि कैसे आसिफ शाह ने युवती को अपने प्रेम जाल में फँसाया और ब्रेनवाश कर जबरन उसको इस्लाम कबूलने पर मजबूर किया। युवती ने बताया था कि उस पर जबरन इस्लाम कबूल करने का दबाव बनाया जा रहा था। इतना ही नहीं वे लोग तमाम जादू टोना, झाड़-फूँक का इस्तेमाल कर उसके धर्मांतरण की कोशिश कर रहे थे। उसने यह भी कहा कि आसिफ के साथ उसका निकाह हो गया है।

गोविंद नगर पुलिस मामले की जाँच कर रही है। इस मामले को और ज्यादा प्रकाश में लाने के लिए ऑपइंडिया ने पीड़िता के परिवार से बात की। हमने मुस्कान की माँ ममता तिवारी, उनकी नियोक्ता दीप्ति तिवारी और बजरंग दल के कार्यकर्ता माजी तिवारी से बात की। इनकी मदद से ही पीड़ित हिन्दू परिवार अपनी बेटी को वापस पाने में 28 अगस्त को कामयाब हुआ।

‘आसिफ को जानती भी नहीं थी मुस्कान’

मुस्कान की माँ ममता तिवारी ने बताया कि जब लापता बेटी की खोज करने की उनकी सारी कोशिशें नाकाम साबित हुईं, तो उन्हें उनके पति का फोन आया, जिन्होंने उन्हें बताया कि उन्हें मुसकान का फोन आया था और वह उनसे मिलना चाहती थीं। ममता कहती हैं कि रात के 11 बजे, उन्होंने मुस्कान को फोन किया, तो उसने बेहद धीमी आवाज में कहा, “मम्मी हम आपसे मिलना चाहते हैं।” जब ममता ने उस पर सवालों की बौछार कर दी, तो मुस्कान ने जवाब दिया कि मिलने पर वे सब कुछ बता देगी।

अपनी बेटी से बात करने के बाद, ममता तिवारी, बजरंग दल के कार्यकर्ता रामजी तिवारी के संपर्क में आईं, जिनके साथ वह अपनी बेटी से मिलने के लिए कानपुर के रमा देवी नाम की जगह पर गए। उन्होंने कहा, “हमने पूरे दिन इंतजार किया, लेकिन मुस्कान नहीं आई। मैं उसे फोन करती रही, लेकिन उसने मेरा फोन रिसीव नहीं किया।”

अगले दिन जब मुस्कान माँ से मिलने आई, तो उसने घर वापस ले जाने के लिए कहा। ममता ने बताया, “मुस्कान की स्थिति काफी खराब थी। उसने अपना मानसिक संतुलन खो दिया था। उन्होंने मेरी बेटी की वशीकरण करने के लिए कुछ किया था।” उन्होंने आगे कहा कि मुस्कान अपना फोन नंबर, पता… सब कुछ भूल गई थी। मुस्कान की माँ ने दावा कि यह तब तक संभव नहीं है जब तक कि किसी पर कुछ न किया जाए।

ममता ने बताया, “जब मैंने उसका बैग देखा तो उसमें कई सारे चिट भरे हुए थे, जिस पर उर्दू में कुछ लिखा हुआ था। उसने अपनी गर्दन में ताबीज पहन रखा था और पैरों में काला धागा बाँधा हुआ था। हमने तुरंत एक पंडित को बुलाया और उसके ऊपर से जादू-टोने के प्रभाव को खत्म करवाया।”

ममता ने कहा कि जादू का प्रभाव खत्म होते ही मुस्कान रोने लगी। उसने अपने माता-पिता को आपबीती सुनाई। ममता के अनुसार मुस्कान ने कहा, “हम वहाँ नहीं जाएँगे, मुझे वहाँ नहीं जाना है।”

ममता ने बताया कि 14 या 15 अगस्त को (उन्होंने कहा कि उन्हें सही तारीख याद नहीं है) उनकी बेटी ने उनसे कहा था कि वह बारा देवी में अपने ट्यूशन टीचर से मिलना चाहती थी। मुस्कान ने आसिफ उर्फ नफीज से बारा देवी मंदिर के पास मुलाकात की, जहाँ उसने कुछ खाने के लिए रोका। ममता ने कहा, “आसिफ को मुस्कान जानती भी नहीं थी। उसने उसे जीवन में पहली बार देखा था।” 

उन्होंने आगे बताया कि मुस्कान ने कहा था कि वह लड़का उसके पास आया और उसे अपने साथ आने के लिए कहा, जिसके लिए वह राजी हो गई। ममता ने मुस्कान के हवाले से कहा, “मुझे नहीं पता कि मेरे साथ क्या हुआ है। वह मेरे लिए पूरी तरह से अजनबी था, मैं उसका नाम भी नहीं जानती थी, लेकिन जब उसने मुझे अपने साथ जाने के लिए कहा तो मैं सहमत हो गई।” ममता का कहना है कि आसिफ ने मुस्कान के साथ कुछ किया है।

उन्होंने कहा कि आसिफ़ मुस्कान को अपनी बहन के घर ले गया, जहाँ उसने उस पर जादू-टोना शुरू कर किया। ममता ने कहा, “आसिफ की बहन काला जादू और वशीकरण जानती है। वह मुस्कान को एक मज़हर (मकबरे) में ले गई जहाँ ‘काला जादू’ किया गया था। वह ‘वशीकरण’ के माध्यम से ‘ब्रेनवाश’ कर रही थी। इसके बाद, आसिफ ने शादी का प्रस्ताव रखा, जिससे मुस्कान ने सहमति जताई।”

मौलवी को बुलाया गया और उसका निकाह पढ़ा गया। मुस्कान ने माँ को बताया, “उन्होंने मुझसे हाँ, हाँ बोलने के लिए कहा और मैंने बोल दिया।” जब मुस्कान वापस आई, तो उसके हाथ में मेंहंदी लगी हुई, जिसका मतलब था कि उसकी शादी हो चुकी थी।

ममता ने बताया, “मेरी बेटी को बहुत कुछ करना पड़ा। जिस मानसिक पीड़ा और क्लेश से वह गुजरी वह अकल्पनीय है। मुझे जो भी दरवाजा खटखटाना होगा, मैं खटखटाऊँगी, अपराधी को दंडित करने के लिए मुझे जो कुछ भी करना होगा, मैं करूँगी।” मुस्कान की माँ को इतकी तसल्ली है कि कम से कम उनकी बेटी घर वापस आ गई है, फिर भी वह मुस्कान की मानसिक स्थिति को देखकर घबराई हुई हैं।

जब ऑपइंडिया ने बजरंग दल के कार्यकर्ता रामजी तिवारी से संपर्क किया, तो उन्होंने पुष्टि की कि लड़की घर लौट आई है। इस मामले पर बोलते हुए, तिवारी ने भी पुष्टि की कि कानपुर ‘लव जिहाद’ का केंद्र बन गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि संगठित गिरोह कानपुर में संप्रदाय विशेष के विभिन्न बहुल क्षेत्रों जैसे जूही कॉलोनी, जाजमऊ, मचारिया आदि में सक्रिय हैं। सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा कि अपराधियों के तौर-तरीके इस बात की ओर इशारा करते हैं कि इन युवाओं को एक विशेष सिंडिकेट द्वारा हिंदू लड़कियों को लालच और ब्रेनवॉश करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। संप्रदाय विशेष के लड़कों को इसके लिए आर्थिक सहायता और अन्य संसाधन भी प्रदान किया जाता है। उन्होंने कहा कि लगभग सभी मामलों में, संप्रदाय विशेष के पुरुषों ने कथित तौर पर अपनी पहचान को छुपाकर नकली हिंदू पहचान बताया।

इस घटना पर बोलते हुए, बजरंग दल के कार्यकर्ता ने कहा कि 18 वर्षीय लड़की एक हिंदू ब्राह्मण परिवार से है। जब आसिफ ने लड़की से दोस्ती की, तो उसे उसके धर्म के बारे में पता नहीं था। लगभग 10 दिन पहले उसने अपने परिवार को छोड़ दिया और जाजमऊ जिले में आसिफ के साथ रहने चली गई। तिवारी ने कहा कि लड़की ने पुष्टि की कि एक मौलवी आसिफ के घर आया था और उसकी शादी करवाई थी।

तिवारी ने कहा कि आसिफ के परिवार ने उसका ब्रेनवॉश करने और धर्म परिवर्तन के लिए काले जादू का सहारा लिया। आगे कहा कि जब लड़की वापस लौटी तो उसके गले में ताबीज थी।

परिवार ने उसके पास से उर्दू में लिखे गए कागज के कुछ छोटे कतरनों को भी बरामद किया। उन्हें पता चला कि आसिफ का परिवार चाय के साथ कागज के टुकड़े को मिला कर उसे खिला रहा था। इसके अलावा, वे इन कागज की कतरनों को उसके सिर के चारो तरफ घुमाकर जला दिया करते थे।

तिवारी ने आगे कहा कि लड़की को बताया गया था कि जिस कमरे में उसे रखा गया है उसमें दीपा की आत्मा थी, जिसने उस कमरे में फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उससे कहा गया था कि यदि उसने गुप्त प्रथाओं को नहीं किया, तो दीपा आत्मा उसे यातना देगी। एक्टिविस्ट का मानना था कि संप्रदाय विशेष के लड़के के परिवार ने पीड़िता के सामने यह कहानी इसलिए गढ़ी थी ताकि वह काला जादू करवाने से मना न कर सके।

यह पूछे जाने पर कि क्या लड़की ने पुष्टि की है कि उसका धर्मांतरण और निकाह हो गया है, कार्यकर्ता ने कहा कि फिलहाल वह मानसिक रूप से स्थिर नहीं है, इसलिए उसका बयान बार बार बदल रहा है। 29 अगस्त को सीआरपीसी की धारा 164 के तहत उसका बयान दर्ज किया जाएगा।

ऑपइंडिया ने इस बाबत दीप्ति तिवारी से भी बात की, जिनके घर में मुस्कान की माँ खाना पकाने का काम करती है। दीप्ति तिवारी ने कहा, “यह निश्चित रूप से एक धर्म परिवर्तन का मामला लग रहा है।” उन्होंने आगे कहा, चूँकि वे साधारण लोग हैं और पर्याप्त शिक्षित नहीं हैं, इसलिए मैंने उन्हें न्याय दिलाने में मदद करने के लिए हस्तक्षेप किया।” दीप्ति तिवारी ने बताया कि मुस्कान को वर्तमान में महिला पुलिस थाना, कानपुर में रखा गया है। उन्होंने ममता और बजरंग दल कार्यकर्ता के बातों की भी पुष्टि की।

दीप्ति तिवारी ने कहा कि लड़की को पता नहीं था कि लड़का संप्रदाय विशेष से था। लड़के ने कथित तौर पर मुस्कान को बताया कि वह उसी की जाति का है। जब वह (मुस्कान) आसिफ के घर गई, तो शुरू में वह समझ नहीं पाई कि वे संप्रदाय विशेष के लोग हैं। एक दिन जब घर की महिलाएँ बुर्का पहनकर बाहर जा रही थीं तो मुस्कान ने उनसे सवाल, तो उसे मजहर ले जाया गया, जहाँ वशीकरण के जरिए उस पर जादू चलाया गया था।

इधर गोविंद नगर पुलिस आरोपितों की तलाश कर रही है। एसएसपी डॉ. प्रीतिंदर सिंह ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है और जाँच की जा रही है। लड़की को मेडिकल जाँच के लिए भेजा जाएगा और उसका बयान दर्ज किया जाएगा।