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योगी सरकार की बड़ी कार्रवाई: 2 दिन के भीतर बाहुबली नेता अतीक अहमद की ₹60 करोड़ की 7 संपत्तियाँ कुर्क, 13 और भी निशाने पर

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से पूर्व सांसद अतीक अहमद की कुल 7 संपत्तियाँ कुर्क की जा चुकी हैं। इन 7 संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग 60 करोड़ रुपए बताया जा रहा है। गुरुवार 27 अगस्त 2020 को अतीक अहमद की 2 संपत्ति कुर्क की गई थीं। जिनकी कीमत 35 करोड़ बताई जा रही है। वहीं बुधवार (26 अगस्त 2020) को 5 सम्पत्तियाँ कुर्क की गई थीं। और इन संपतियों की कीमत लगभग 25 करोड़ बताई जा रही है।    

बुधवार को कार्रवाई की शुरुआत करते हुए प्रयागराज पुलिस ने सबसे पहले अतीक अहमद की 5 संपत्तियों को चिन्हित किया। इसके बाद उन संपत्तियों को कुर्क किया गया। दिन बीत जाने के कारण दो संपत्तियों की कुर्की नहीं हो पाई थी। अगले दिन यानी गुरुवार को प्रयागराज स्थित खुल्दाबाद की 2 संपत्तियों को कुर्क किया गया। जिसमें एक मकान चकिया में स्थित था और दूसरा करबला में। इस कार्रवाई में पुलिस के अलावा नगर निगम, प्रयागराज विकास प्राधिकरण और राजस्व विभाग भी शामिल था।      

इस संबंध में जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिषेक दीक्षित ने भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पूर्व बाहुबली सांसद की कुल 7 संपत्तियाँ कुर्क की जा चुकी हैं। इनका संभावित मूल्य लगभग 60 से 65 करोड़ रुपए है। साथ ही प्रयागराज शहर में भू माफ़ियाओं द्वारा तमाम तरह के अपराधों के माध्यम से इकट्ठा की गई संपत्तियों को कुर्क करने की कार्रवाई जारी रहेगी। ख़बरों के मुताबिक़ अतीक अहमद की कुल 20 संपत्तियों की सूची बनाई गई है जिन्हें कुर्क किया जाना है। जिसमें 7 कुर्क की जा चुकी हैं और लगभग 13 संपत्तियों का मामला अदालत में लंबित है।    

प्रयागराज जिला प्रशासन के मुताबिक़ अतीक अहमद पर 31 मामले और 7 अन्य मामले दर्ज हैं। इसके अलावा अतीक अहमद और उसके रिश्तेदारों के 12 हथियारों के लाइसेंस रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। अतीक अहमद के बेटे अब्बास अहमद पर भी लखनऊ स्थित आवास पर 7 हथियारों के लाइसेंस लेने पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जिसे बाद में दिल्ली स्थित आवास के पते पर स्थानांतरित किया जा चुका था। अभी तक ऐसे 16 हथियारों का पता चला है जो अतीक अहमद द्वारा इस्तेमाल किए जाते थे। अभी तक अतीक अहमद के कुल 6 प्लाट, 6 घर, 2 गाड़ियाँ जब्त की जा चुकी हैं। 6 बैंक एकाउंट भी बंद किए जा चुके हैं। अतीक के गैंग से जुड़े लोगों पर भी कार्रवाई जारी है।    

इस संबंध में प्रयागराज के जिलाधिकारी भानु चन्द्र गोस्वामी ने पहले ही आदेश जारी किया था। आदेश के मुताबिक़ उत्तर प्रदेश की बंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण अधिनियम की धारा-14 (1) के अंतर्गत अतीक अहमद की कुल सात सम्पत्तियों (अवैध) को कुर्क करने का आदेश जारी किया था। इस आदेश में चकिया में स्थित तीन मकान, कालिंदीपुरम में स्थित एक मकान, ओमप्रकाश सभासद नगर में एक मकान, सिविल लाइन में एक मकान और कर्बला में एक मकान शामिल था।    

इन मकानों में मकान नं0-95 डी/1/3 चकिया थाना खुल्दाबाद, मकान नं0-3/6डी/1 कर्बला थाना खुल्दाबाद, मकान नं0-95 डी/4 चकिया थाना खुल्दाबाद, मकान नं0-95 सी/57के/1 चकिया थाना खुल्दाबाद, मकान नं0-24 एमआईजी कालिंदीपुरम थाना धूमनगंज, मकान नं0-197/39 महात्मा गाँधी मार्ग थाना सिविल लाइन्स, मकान नं0-95/51 ओम प्रकाश सभासद नगर शामिल थे। अतीक अहमद की संपत्तियों को कुर्क किए जाने की संस्तुति पहले ही जारी कर दी गई थी। एसएसपी अभिषेक दीक्षित ने अपनी रिपोर्ट में यह संस्तुति जारी की थी। संस्तुति की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए जिलाधिकारी ने अतीक अहमद की अचल संपत्तियों को कुर्क करने का आदेश जारी किया था।  

जिलाधिकारी ने प्रभारी निरीक्षक थाना खुल्दाबाद को मकान नं0-95 डी/1/3, मकान नं0-95 डी/4, मकान नं0-95 सी/57के/1 और मकान नं0-3/6डी/1 की अचल सम्पत्तियों का प्रशासक नियुक्त किया था। इसके अलावा प्रभारी निरीक्षक थाना सिविल लाइन्स को मकान नं0-197/39 महात्मा गाँधी मार्ग की अचल सम्पत्ति का प्रशासक नियुक्त किया था। इसके बाद जिलाधिकारी भानु चंद्र गोस्वामी ने यह भी स्पष्ट किया था कि अतीक अहमद की इन संपत्तियों को कुर्क करने के आदेश का अनुपालन 28 अगस्त के पहले करना है। जिलाधिकारी ने अतीक अहमद के पास मौजूद हथियारों को लेकर भी अहम आदेश जारी किया था। उन्होंने अतीक अहमद समेत आपराधिक पृष्ठभूमि वाले कुल 23 लोगों के शास्त्र लाइसेंस रद्द करने का आदेश दिया था।   

सुशांत की गले में मिले फाँसी के 2 अलग-अलग निशान: शुरूआती तस्वीरों से छेड़छाड़ कर ‘आत्महत्या थ्योरी’ आगे बढ़ाने की आशंका

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में एक ताजा खुलासा सामने आया है। समाचार चैनल टाइम्स नाउ ने दिवंगत अभिनेता की दो तस्वीरें हासिल की हैं जो कि सुशांत की बहन मीतू द्वारा उनके अपार्टमेंट पहुँचने पर ली गई थीं। इन चित्रों पर उनके गले में फाँसी के निशान उन तस्वीरों से अलग हैं जो इस मामले के शुरुआत में लीक होकर सामने आए थे।

दिवंगत अभिनेता की गर्दन पर 2 तरह के निशान दिखाने वाले ये फोटो सुशांत सिंह राजपूत की ‘आत्महत्या’ की बात को ख़ारिज करते नजर आते हैं। CBI की फॉरेंसिक टीम ने मुंबई पुलिस और कूपर अस्पताल की फ़ोरेंसिक टीम से और तस्वीरें माँगी हैं, जहाँ उसके शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया था।

सुशांत के परिवार के वकील विकास सिंह ने ‘टाइम्स नाउ‘ चैनल से इस बात की पुष्टि की कि जो तस्वीरें पहले लीक हुई थीं, संभव है कि उनसे छेड़छाड़ की गई हो।

इससे पहले, सुशांत सिंह की प्रेमिका रिया चक्रवर्ती, जिस पर सुशांत के परिवार द्वारा आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया है, ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि वह सुशांत के पैसों का इस्तेमाल नहीं कर रही थी।

रिया चक्रवर्ती और उसके परिवार के सदस्यों पर, दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह के परिवार द्वारा सुशांत की संपत्ति का दुरुपयोग करने का भी आरोप लगाया गया है, हालाँकि, रिया एक टीवी साक्षात्कार में इन आरोपों से इनकार कर रही है।

मुंबई पुलिस के बाद, प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय जाँच ब्यूरो अभिनेता सुशांत की मौत के विभिन्न नजरियों की जाँच कर रहे हैं। इसके साथ ही सुशांत सिंह मामले की आरोपित रिया चक्रवर्ती के बारे में हाल ही में यह भी खुलासा हुआ कि वह सुशांत को ड्रग्स देती थी।

इस जानकारी के बाद सीबीआई के साथ अब नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की टीम भी एक्शन में आ चुकी है और NCB की एक टीम दिल्ली से मुंबई के लिए रवाना हो चुकी है।

वहीं, रिया चक्रवर्ती द्वारा एक समाचार चैनल में दिए गए विवादित इंटरव्यू के बाद अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की बहन श्वेता सिंह कीर्ति ने ट्विटर पर अपनी प्रतिक्रिया में लिखा है, “तुम में इतनी हिम्मत है कि मीडिया में आकर मेरे भाई की मौत के बाद उसकी पवित्र छवि को खराब करो। तुम्हें क्या लगता है, भगवान नहीं देख रहे जो तुमने किया है?”

सुशांत की बहन श्वेता कीर्ति सिंह ने रिया की गिरफ्तारी की माँग करते हुए ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, “काश मेरा भाई उस लड़की से कभी नहीं मिलता। बिना उसकी मर्जी के ड्रग्स देना और फिर उसे यकीन दिलाना कि तुम बीमार हो और फिर उसे मनोचिकित्सक के पास ले जाना। किस स्तर की हेराफेरी है?”

उन्होंने आगे लिखा, “रिया अगर ये सोच रही हैं कि 120 मिनट का इंटरव्यू देकर वो सारे सवालों के जवाबों से मुक्त हो गई हैं, तो वो पूरी तरह गलत हैं। जिस शख्स से आप प्यार करती थीं, उसके नहीं रहने के बाद, उसकी छवि को कोई कैसे ध्वस्थ कर सकता है, लेकिन रिया ने ऐसा किया। रिया ने कहा सुशांत को ऊँचाई से डर लगता था, लेकिन रिया का झूठ ज्यादा देर नहीं टिक सका। सुशांत तो जहाज उड़ाने और हवा में करतब करने को एन्जॉय करते थे।”

सुशांत की मेडिसिन पर भी रिया ने बोला झूठ? वकील ने कहा- आरोपित को सेलिब्रिटी की तरह पेश किया गया

राजदीप सरदेसाई को दिए इंटरव्यू ने रिया चकवर्ती ने कई दावे किए हैं। एक-एक कर इन पर सवाल उठ रहे हैं। रिया ने दावा किया था कि सुशांत को क्लस्ट्रोफोबिया था और डॉ. हरीश शेट्टी ने इसके लिए उन्हें एक दवा दी थी।

डॉ. शेट्टी से जुड़े सूत्रों ने इसे गलत बताया है। सूत्रों ने रिपब्लिक टीवी को बताया, “रिया झूठ बोल रही है। डॉ शेट्टी ने कभी भी उन्हें मोडाफिनिल का सेवन करने की सलाह नहीं दी थी।” रिया ने इंटरव्यू में दावा किया कि पिछले साल यूरोप ट्रिप के दौरान उन्होंने सुशांत में क्लस्ट्रोफोबिया के लक्षण देखे थे। इसके लिए उन्होंने दवा ली थी।

वहीं सुशांत सिंह राजपूत के पारिवारिक वकील विकास सिंह ने इस इंटरव्यू की आलोचना करते हुए कहा है कि एक आरोपित को सेलिब्रिटी की तरह पेश किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इंटरव्यू पहले से ही फिक्स्ड था। पहले से ही सवाल-जवाब तैयार किया गया था।

वहीं सुशांत की बहन श्वेता ने भी इंटरव्यू पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, “आरोपी रिया को मंच क्यों दिया जा रहा है, ये 130 करोड़ हिंदुस्तानियों का अपमान है।”

सुशांत की बहन श्वेता सिंह कीर्ति ने ट्विटर के जरिए कहा, “आज तक रिया चक्रवर्ती का 2 घंटे का इंटरव्यू ले रहा है और इस इंटरव्यू को नेशनल प्लेटफॉर्म पर प्रसारित करने की योजना बना रहा है। अगर ऐसा होता है तो ये मेरे भाई के न्याय के लिए लड़ने वाले 130 करोड़ भारतीयों के चेहरे पर थप्पड़ और घोर अपमान होगा।”

गौरतलब है इससे पहले यह बात सामने आई थी कि रिया सुशांत की मौत के बाद भी उसके क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर रही थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, रिया चक्रवर्ती ने सुशांत सिंह राजपूत के डेबिट कार्ड के पासवर्ड को दिवंगत अभिनेता के घर के मैनेजर सैमुअल मिरांडा की मदद से कथित तौर पर चुरा लिया था। बताया जा रहा है कि रिया और मिरांडा, दोनों ही सुशांत की मौत के बाद अपने खर्च के लिए सुशांत सिंह राजपूत के रुपयों का इस्तेमाल कर रहे थे।

उल्लेखनीय है कि इस इंटरव्यू से साफ तौर पर समझा जा सकता है कि राजदीप सरदेसाई सुशांत सिंह की कथित मानसिक बीमारी पर ज़ोर दे रहे हैं। उनकी बातों से ऐसा लग रहा है जैसे मानसिक बीमारी का आरोप वास्तविक तथ्य है। जबकि सुशांत सिंह का परिवार इस मुद्दे पर अपना पक्ष पहले ही रखा चुका है। उन्होंने कहा था कि पहले कभी सुशांत सिंह को इस तरह की कोई दिक्कत नहीं हुई थी। न ही किसी विशेषज्ञ ने उनके संबंध में ऐसा कुछ कहा था। सुशांत पर मानिसक रूप से बीमार होने का आरोप अभी तक सिर्फ और सिर्फ रिया चक्रवर्ती ने लगाया है, जिन पर खुद इस मामले के संबंध में जाँच चल रही है।

कर्नाटक: कक्षा 6 के बच्चों को अब नहीं पढ़ाया जाएगा हिंदू आस्था का मजाक उड़ाने वाला पाठ

कर्नाटक में कक्ष छह की सामाजिक विज्ञान पुस्तक के एक लेख को लेकर विवाद खड़ा हो गया। कई लोगों ने इसमें हिंदुओं की आस्था का उपहास उड़ाने को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी। रिपोर्टों के अनुसार उडुपी के अदमार मठ के स्वामी ईशप्रियातीर्थ ने इस पर सवाल उठाए थे। कक्षा VI की पाठ्यपुस्तक में ‘याग’ या ‘यज्ञ’ की हिंदू परंपरा का मज़ाक उड़ाया गया था।

स्वामी ईशप्रियातीर्थ ने राज्य के शिक्षा मंत्री सुरेश कुमार के समक्ष मामला उठाया और उन्हें इस तरह की सामग्री से अवगत कराया था। कथित तौर पर उन्होंने मंत्री को भागवत के अनुसार ‘यग’ (yaga) के कुछ नियमों के बारे में भी बताया।

राज्य के शीर्ष शिक्षा संस्थानों में से एक पूर्णा प्रजना शिक्षा केंद्र, उडुपी श्री अदमा मठ द्वारा संचालित किया जाता है। इस विवाद के सामने आने के बाद प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्री एस सुरेश कुमार ने अब शिक्षकों को सामाजिक विज्ञान पाठ्यक्रम के इस विवादास्पद पाठ को नहीं पढ़ाने का आदेश दिया है।

मंत्री ने कहा, “विवादित हिस्सा इस साल पाठ्यपुस्तक में शामिल नहीं किया गया है। इस वर्ष पाठ्यक्रम की समीक्षा नहीं की गई थी। अगले वर्ष से पाठ्यपुस्तक से विवादास्पद पाठ हटा दिए जाएँगे। जैसा कि इस साल पाठ्यपुस्तक पहले ही बच्चों तक पहुँच चुकी है तो विवादित पाठ को हटाना संभव नहीं है। सरकार इस बात का पूरा ध्यान रखेगी की भविष्य में ऐसी भूल दोबारा न हो।”

कॉन्ग्रेस के घरेलू झगड़े में कूदी शिवसेना, कहा- राहुल गाँधी के नेतृत्व को खत्म करने की थी साजिश

कॉन्ग्रेस द्वारा एक बार फिर अंतरिम अध्यक्ष पद के लिए सोनिया गाँधी को चुन लेने के बाद महाराष्ट्र में उसकी साझेदार शिवसेना ने गुरुवार (अगस्त 27, 2020) को राहुल गाँधी को अपना समर्थन दिया। शिवसेना ने उन 23 कॉन्ग्रेसी नेताओं की कड़ी आलोचना की है, जिन्होंने पूर्णकालिक अध्यक्ष के लिए सोनिया गाँधी को पत्र लिखा था। शिवसेना ने इन नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि यह राहुल गाँधी के नेतृत्व को खत्म करने की साजिश थी।

शिवसेना के मुखपत्र सामना में प्रकाशित संपादकीय में कहा गया है कि जब भाजपा राहुल गाँधी पर हमला कर रही थी, तब ये नेता कहाँ थे? जब उन्होंने कॉन्ग्रेस की अध्यक्षता छोड़ी थी, तब इन नेताओं ने पार्टी को पुनर्जीवित करने की चुनौती क्यों नहीं स्वीकार की?

संपादकीय में आगे लिखा गया, “जब अंदरूनी लोग ही राहुल गाँधी के नेतृत्व को खत्म करने की साजिश में लगे हुए हैं, तो पार्टी का पानीपत (हारना) निश्चित है। यह एक ऐसा नुकसान है, जो भाजपा ने भी उन्हें नहीं पहुँचाया है।”

लेख में राहुल गाँधी के पक्ष में लिखते-लिखते यहाँ तक कहा गया कि उनमें (पत्र लिखने वाले कॉन्ग्रेस नेता में) से कोई जिला स्तर का नेता भी नहीं है। लेकिन, नेहरू परिवार के नेतृत्व की मदद से वे मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री तक बने।

लेख में लिखा गया कि सभी राज्यों में कॉन्ग्रेस के बड़े नेता सिर्फ अपनी कुर्सी सुरक्षित करने में लगे हुए हैं। उन्हें पार्टी की कोई चिंता नहीं है। यदि उनमें से किसी को रास्ता नहीं मिलता है, तो वे भाजपा में शामिल हो जाते हैं। यह एक मात्र सक्रियता है, जो उनमें दिखती है। इसमें सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी क्या कर सकते हैं? सामना ने अपने लेख में ऐसे नेताओं को राजनीति का कोरोना वायरस तक बताया।

बता दें कि सोमवार को कॉन्ग्रेस की बैठक के दौरान भी इस पत्र को लेकर काफी विवाद हुआ था। उस समय राहुल गाँधी ने इस पत्र का हवाला देते हुए अपना गुस्सा व्यक्त किया था और साथ ही इसकी टाइमिंग पर सवाल खड़े किए थे। इसके अलावा पार्टी के नेताओं पर भाजपा के साथ मिलीभगत के भी आरोप लगाए थे।

‘जामिया के जिहादी अगर…’: नौकरशाही में संप्रदाय विशेष के घुसपैठ पर सुदर्शन की रिपोर्ट आने से पहले विवादों में

सुदर्शन न्यूज चैनल के एडिटर इन चीफ सुरेश चव्हाणके ने कुछ दिनों पहले अपने चैनल पर एक सीरीज लाने का ऐलान किया। उन्होंने 25 अगस्त को ट्वीट करते हुए बताया कि उनके चैनल पर 28 अगस्त से एक ऐसी सीरिज शुरू होगी, जिसमें वह कार्यपालिका के सबसे बड़े पदों (IAS-IPS) पर संप्रदाय विशेष के लोगों की बढ़ती संख्या पर बात करेंगे। 

इस घोषणा के साथ उन्होंने सीरिज का परिचय देने के लिए एक वीडियो साझा की। इस वीडियो में हम उन्हें कुछ सवाल करते देख सकते हैं। वह दावा करते हैं कि उनकी सीरिज सरकारी नौकरशाही में संप्रदाय विशेष के घुसपैठ का खुलासा करेगी। 

वे पूछते हैं, “आखिर अचानक संप्रदाय विशेष के लोग आईएएस, आईपीएस में कैसे बढ़ गए? सबसे कठिन परीक्षा में सबसे ज्यादा मार्क्स और सबसे ज्यादा संख्या में पास होने का राज क्या है? सोचिए, जामिया के जिहादी अगर आपके जिलाधिकारी और हर मंत्रालय में सचिव होंगे तो क्या होगा?”

सोशल मीडिया पर अब इसी विवादित वीडियो के कारण बवाल हो गया है। संप्रदाय विशेष के कई एक्टिविस्टों और लेफ्ट लिबरल्स ने सुरेश चव्हाण पर नफरत फैलाने का आरोप लगाया। साथ ही उनके अकाउंट को सस्पेंड करने की माँग की है। सैफ आलम नाम के वकील ने इस बीच मुंबई पुलिस में सुरेश के ख़िलाफ़ शिकायत दायर करके केस की जानकारी भी दी।

कई आईएएस-आईपीएस अधिकारियों ने भी इस ट्वीट के खिलाफ़ अपनी राय रखी। वहीं आईपीएस एसोसिएशन ने भी इस वीडियो की निंदा की है। उनके अलावा वामपंथी गिरोह के लोग भी इसे अपने लिए एक ‘मौका’ समझकर ट्वीट कर रहे हैं।

IPS एसोसिएशन व अधिकारियों का रिएक्शन

आईपीएस एसोसिएशन ने ट्वीट करते हुए लिखा, “सुदर्शन टीवी ऐसी न्यूज स्टोरी को बढ़ावा दे रहा है जिसमें सिविल सर्विस के अभ्यार्थियों को उनके धर्म के आधार पर लक्षित किया जा रहा है।”

एसोसिएशन आगे लिखता है, “हम इस प्रकार की साम्प्रदायिक और गैर जिम्मेदाराना पत्रकारिता की निंदा करते हैं।” यहाँ बता दें कि आईपीएस एसोसिएशन भारतीय पुलिस सेवा अधिकारियों का केंद्रीय समूह है। मगर यह कोई सरकारी संस्था नहीं है।

इस संस्था के अलावा कई आईपीएस अधिकारी भी है जो इस वीडियो की निंदा कर रहे हैं। जैसे आईपीएस अधिकारी निहारिका भट्ट ने इसे ‘घृणा फैलाने वाली कोशिश’ करार दिया और कहा कि धर्म के आधार पर अधिकारियों की साख पर सवाल उठाना न केवल हास्यपूर्ण है, बल्कि इसे सख्त कानूनी प्रावधानों से भी निपटा जाना चाहिए। हम सभी भारतीय पहले हैं।

रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी एन.सी. अस्थाना ने भी ट्वीट कर कहा, “अखिल भारतीय सेवाओं के लिए अधिकारियों के चयन में यूपीएससी जैसी संवैधानिक संस्था की अखंडता और निष्पक्षता पर संदेह जताते हुए, वह संवैधानिक योजना के प्रति अविश्वास को बढ़ावा दे रहे हैं।”

इंडियन पुलिस फाउंडेशन ने भी न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (एनबीएसए), यूपी पुलिस और संबंधित सरकारी अधिकारियों से भी सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया।

सुरेश चव्हाणके के का जवाब

एक ओर जहाँ एसोसिएशन समेत कई अधिकारी ऐसी किसी भी सीरिज को विषैला और नफरत फैलाने वाला बता कर नकार रहे हैं। वहीं दूसरी ओर वामपंथी इस मौके का फायदा उठा कर अपना अलग एजेंडा चला रहे हैं।

लेकिन ये गौर करने वाली बात है कि अभी प्रोग्राम ऑन एयर नहीं हुआ है और कोई नहीं जानता कि इसमें क्या दिखाया जाएगा। सारा बवाल सुदर्शन न्यूज के एडिटर इन चीफ की कुछ सेकेंड की वीडियो पर है। ऐसे में सुरेश चव्हाणके ने ऐसे लोगों को जवाब देते हुए कहा है कि ये प्रोग्राम आईपीएस और आईएएस अधिकारियों पर नहीं है। बल्कि चयन प्रक्रिया पर है। उनका दावा है कि इसमें जाकिर नाइक तक का हाथ है।

वामपंथियों की राय

इस वीडियो पर बवाल होने के बाद संजुक्ता बासु ने लिखा, “दक्षिणपंथियों के दिमाग में कोई तर्क नहीं है। सिर्फ़ संप्रदाय विशेष के प्रति घृणा है। बेवकूफाना थ्योरी है कि संप्रदाय विशेष वर्षों से बहुसंख्यक बनने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन फिर भी जनसंख्या का 14% है। सालों से चल रहा रैकेट अब भी यूपीएससी में केवल 5% है। इनका जनसंख्या के समान अनुपात भी नहीं है।”

तहसीन पूनावाला ने सुदर्शन चैनल पर नफरत फैलाने के लिए कार्रवाई करने की माँग करते हैं। साथ ही उनके ख़िलाफ शिकायत भी की। विजेता सिंह ने आईपीएस एसोसिएशन को सलाह दी कि सुदर्शन न्यूज चैनल नोएडा में हैं, इसलिए वे वहाँ इसके ख़िलाफ़ शिकायत करें।

बता दें, वामपंथियों की ऐसी प्रतिक्रियाओं पर कुछ यूजर्स पलटवार कर रहे हैं। लगातार इनसे पूछा जा रहा है कि विषम दिनों में ऐसा कुछ हो तो उनके लिए प्रेस फ्रीडम खतरे में आ जाती है और सामान्य दिनों में ये केस फाइल करने की सलाह देते हैं।

वामपंथियों की प्रतिक्रिया पर पलटवार

आईपीएस/ आईएएस और बड़े बड़े अधिकारियों की आपत्ति देखकर वामपंथी पत्रकार जो अपना एजेंडा चला रहे हैं, उसको ध्वस्त करने के लिए उनकी रिपोर्ट्स के कुछ स्क्रीनशॉट शेयर किए जा रहे हैं।

कुछ पुराने मामलों पर लोगों का ध्यान आकर्षित करवा कर बताया जा रहा है कि डेटा के नाम पर हिंदुओं को टारगेट करने का काम लिबरल मीडिया लंबे समय से करता आया है। इसकी कभी कोई निंदा नहीं हुई। लेकिन, आज मौके का फायदा उठा कर यही मीडिया अधिकारियों को राय दे रहा है।

लोगों का कहना है कि पुलवामा जैसे मसले पर यही मीडिया जवानों की जाति ढूँढ लाया था और फौजियों को भी ब्राह्मण-दलित में बाँटने का प्रयास किया था।

इसके अलावा द न्यूज मिनट के लेख का वह स्क्रीनशॉट शेयर किया जा रहा है जिसमें राजदीप ने दावा किया था कि कपिल देव के समय तक क्रिकेट अर्बन ब्राह्मण हुआ करता था। इसके बाद ऐसे ही द वायर का एक ट्वीट है जिसमें द वायर मेडिकल प्रोफेशन में ब्राह्मणों और बनिया लोगों का आधिपत्य बताने से नहीं चूकता और द कारवाँ की एक खबर में यूनिवर्सिटी के वीसी पद पर ऊँची जाति और हरिजन का मामला उठता है।

केवल यूपीएससी की बात करें, तो युगपरिवर्तन का शेयर करके सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर हार्ड डेटा में बात करने में दिक्कत है, क्योंकि कई परीक्षाओं के इंटरव्यू स्टेज पर आकर भेदभाव साफ देखने को मिला है।

हर्ष मधुसुदन इस लेख को शेयर करते हुए गौर करवाते हुए कहते हैं, “जो मुस्लिम औसत नंबर पर चुने जाते हैं, उन्हें सामान्य कैटेगरी के अभ्यर्थी से 13 नंबर ज्यादा मिलते हैं। वहीं, एससी/ओबीसी को भी इंटरव्यू स्तर पर कम नंबर मिलते हैं (6.65 और 2.60 क्रमश:)”

बता दें कि पिछले साल जकात फाउंडेशन के 18 छात्रों ने यूपीएससी एग्जाम उत्तीर्ण किया था। इसके बाद भारतीय प्रशासन में इस्लामिक प्रभाव बढ़ता साफ नजर आया। चिंता की बात यह है कि जकात फाउंडेशन इस्लामिक सिद्धांतों पर शुरू हुआ एनजीओ है, जो छात्रों को सिविल सर्विस की परीक्षा के लिए कोचिंग भी देता है। शाह फैसल इसी कोचिंग के एलुमिनी हैं, जिन्होंने साल 2010 में सिविल परीक्षा टॉप की और भारत को बाद में रेपिस्तान कहा।

‘अपॉइंटमेंट कार्ड’ वाले कर रहे विरोध, CWC का चुनाव होना जाना चाहिए: गुलाम नबी आजाद

नेतृत्व पर कॉन्ग्रेस पार्टी के भीतर का मतभेद हाल ही में सार्वजनिक हो गया था। कुछ वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी संगठन में पूरी तरह फेरबदल को लेकर अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गॉंधी को पत्र लिखा था। हालॉंकि, पार्टी कार्यसमिति की बैठक में पत्र लिखने वाले नेताओं की मंशा पर सवाल उठाते हुए उनकी आलोचना की गई थी।

कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता गुलाम नबी आज़ाद ने कहा है कि हर राज्य और जिला अध्यक्ष, यहाँ तक ​​कि पूरे सीडब्ल्यूसी का भी चुनाव होना चाहिए। उन्होंने पार्टी के निर्धारित मानकों पर निशाना साधा और यहाँ तक ​​कि गाँधी के नेतृत्व को लेकर भी अप्रत्यक्ष रूप से सवाल किया।

न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बात करते हुए आजाद ने कहा, “कॉन्ग्रेस के आंतरिक कामकाज में जिस किसी की भी वास्तविक रुचि होगी तो वह हर राज्य और जिले के अध्यक्ष के चुनाव के हमारे प्रस्ताव का स्वागत करेगा। पूरी कॉन्ग्रेस कार्यसमिति का चुनाव होना चाहिए।”

आजाद ने आगे ‘मनोनीत’ उम्मीदवारों की आलोचना करते हुए संकेत दिया कि पार्टी में एक गुट है जो नहीं चाहता कि पार्टी मजबूत हो। आजाद ने कहा,” हमारा इरादा कॉन्ग्रेस को सक्रिय और मजबूत बनाना है। लेकिन जिन लोगों को ‘अपॉइंटमेंट कार्ड’ मिले हुए हैं, वे हमारे प्रस्ताव का विरोध करते हैं। सीडब्ल्यूसी के सदस्य चुने जाने में क्या हर्ज है, जिनका पार्टी में तय कार्यकाल होगा।”

हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में हाल ही में कहा गया था कि शशि थरूर ने पाँच महीने पहले कॉन्ग्रेस नेताओं के लिए एक डिनर पार्टी का आयोजन किया था। इसमें कथित रूप कॉन्ग्रेस पार्टी में बदलाव करने की माँग को लेकर विवादित पत्र को लेकर चर्चा की गई थी।

रिपोर्ट में कहा गया था कि पी चिदंबरम, कार्ति चिदंबरम, अभिषेक मनु सिंघवी, मणिशंकर अय्यर और सचिन पायलट सहित कई प्रमुख नेता डिनर में मौजूद थे। हालाँकि, उनके हस्ताक्षर सोनिया गाँधी को संबोधित 7 अगस्त के पत्र पर नहीं दिखाई दिए। हस्ताक्षरकर्ताओं ने पत्र में पार्टी आलाकमान से स्थायी और ‘सक्रिय’ नेता की माँग की थी।

गौरतलब है कि उस चिट्ठी ने कॉन्ग्रेस पार्टी में बवंडर मचा दिया था। हालाँकि बैठक में पार्टी अध्यक्ष पद के सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर निर्णय नहीं लिया गया। बाद में सोनिया गाँधी को वापस से अंतरिम अध्यक्ष घोषित करते हुए बैठक को समाप्त कर दिया गया था।

बैठक की समाप्ति के बाद अहमद पटेल सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने पत्र लिखने वाले नेताओं की आलोचना की थी। कपिल सिब्बल और गुलाम नबी आज़ाद को भी पत्र को लेकर पार्टी के कई नेताओं की खुली आलोचना का सामना करना पड़ा था। वहीं अपने समापन भाषण में सोनिया गाँधी ने पत्र को लेकर निराशा व्यक्त की थी। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पत्र लिखने वालों से बैर भाव नहीं है।

रिया के इंटरव्यू से भड़की बरखा: राजदीप को बताया सिजोफ्रेनिक, कहा- दिन में कुछ कहते हैं, रात को कुछ और करते हैं

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद से उनकी गर्लफ्रेंड रही रिया चकवर्ती सवालों के घेरे में हैं। अक्सर विवादों में रहने वाले पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने उनका एक इंटरव्यू लिया है। अब तक इस मामले में सवालों से भागती रही रिया को इंटरव्यू में उन्होंने ‘अपनी कहानी‘ पेश करने का भरपूर मौका दिया है।

इसके कारण सोशल मीडिया में यूजर्स न केवल रिया के बयानों के विरोधाभास को उजागर कर रहे हैं, बल्कि राजदीप की भी इस बात को लेकर तीखी आलोचना हो रही है कि उन्होंने इस मामले की मुख्य आरोपित पर उठ रहे सवालों को अपने पाखंड से दबाने की कोशिश की।

दूसरे लोगों की तरह ही बरखा दत्त ने भी इस पाखंड को लेकर राजदीप को लताड़ा है। उन्होंने कहा है कि अन्य मीडिया संस्थानों की ‘वास्तविक मुद्दों’ की अनदेखी कर सुशांत मामले को उठाने के लिए आलोचना करने वाले राजदीप खुद इस मामले की मुख्य आरोपित को अपनी कहानी सुनाने का मौका मुहैया करा रहे हैं।

सिलसिलेवार ट्वीट में राजदीप का नाम लिए बिना बरखा ने कहा है कि उनके जैसे टीवी एंकर दिन में अपने चैनल पर ‘वास्तविक मुद्दों’ की बात कर मीडिया ट्रायल का राग अलापते हैं, लेकिन रात में वे दूसरे न्यूज चैनलों की तरह सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के मामले को कवर करने में जुट जाते हैं।

तीखी आलोचना करते हुए बरखा दत्त ने राजदीप को सिजोफ्रेनिक करार दिया है।

बरखा दत्त का ट्वीट

बरखा ने कहा कि राजदीप जैसे पाखंडियों की तुलना में इस मामले में सार्वजनिक स्टैंड लेने वाले चैनल बेहतर हैं। उन्होंने कहा कि दूसरों से अलग होने का दावा करने वाले राजदीप को यह दोहरा मापदंड दिखाता है।

बरखा दत्त का ट्वीट

बरखा दत्त का आशय राजदीप के उन दावों को लेकर था जिसमें उन्होंने कहा था कि वे इस मामले पर कोई चर्चा या मीडिया ट्रायल नहीं करेंगे। राजदीप लगातार दूसरे चैनलों की इस मुद्दे को उठाने को लेकर आलोचना कर रहे थे।
नीचे आप उन ट्वीट्स को देख सकते हैं जिसमें राजदीप ने असल मुद्दों पर चुप्पी साधकर सुशांत का मामला उठाने का आरोप अन्य मीडिया संस्थानों पर लगाया था।

साभार : ऋषि बागरी

उल्लेखनीय है कि राजदीप सरदेसाई का रवैया सुशांत सिंह मामले की जाँच पर बेहद आलोचनात्मक रहा है। इसके पहले राजदीप ने बयान दिया था कि सुशांत के परिजनों को शांति से शोक मनाना चाहिए। साथ ही राजदीप ने सुशांत सिंह राजपूत मामले की जाँच शुरू होते ही आपत्ति भी जताई थी। जब एक आईपीएस अधिकारी ने यह बताया था कि हर अप्राकृतिक मौत की जाँच करना कानूनी दायरे में आता है, तब राजदीप सरदेसाई ने इस मुद्दे पर अपनी असहमति जताई थी।   

विडंबना यह है कि राजदीप सरदेसाई जहाँ एक तरफ सुशांत सिंह राजपूत मामले को नहीं कवर करना चाहते थे। वहीं सुशांत आत्महत्या मामले की मुख्य आरोपित रिया चक्रवर्ती के साक्षात्कार में उन्हें कोई आपत्ति यही दिखती।

वैसे दिलचस्प है कि राजदीप जिस इंडिया टुडे ग्रुप में काम करते हैं उसके हिंदी न्यूज चैनल आज तक ने इस मामले को खूब कवर किया है। शायद राजदीप का ध्यान इस ओर नहीं गया होगा। लेकिन, इस मामले में कई कवरेज को लेकर सोशल मीडिया में आजतक की काफी आलोचना भी हो चुकी है।

यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि इस मामले में बरखा भी राजदीप से अलग नहीं हैं। आज भले वह रिया का साक्षात्कार करने को लेकर राजदीप पर हमलावर हों, लेकिन इस मामले में वे खुद एक ​कथित मनोवैज्ञानिक का साक्षात्कार कर चुकी हैं। जिसका दावा था कि वह सुशांत के काउंसलर थे और दिवगंत अभिनेता अवसाद से पीड़ित थे। बाद में यह बात सामने आई की इस कथित काउंसलर के पास ऐसे मामलों को देखने की उचित योग्यता तक नहीं थी।

इसी तरह राजदीप ने भी रिया के साथ साक्षात्कार में सुशांत सिंह की कथित मानसिक बीमारी पर ज़ोर दिया है। उनकी बातों से ऐसा लग रहा है जैसे मानसिक बीमारी का आरोप वास्तविक तथ्य है। जबकि सुशांत सिंह का परिवार इस मुद्दे पर अपना पक्ष पहले ही रखा चुका है। उन्होंने कहा था कि पहले कभी सुशांत सिंह को इस तरह की कोई दिक्कत नहीं हुई थी। न ही किसी विशेषज्ञ ने उनके संबंध में ऐसा कुछ कहा था। सुशांत पर मानिसक रूप से बीमार होने का आरोप अभी तक सिर्फ और सिर्फ रिया चक्रवर्ती ने लगाया है, जिन पर खुद इस मामले के संबंध में जाँच चल रही है।

मैंने भी नेपोटिज्म झेला, बॉलीवुड की पॉलिटिक्स के कारण फिल्मों से निकाला गया: सैफ अली खान

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद बॉलीवुड में नेपोटिज्म पर बहस छिड़ी हुई है। अब सैफ अली खान ने दावा किया है कि उन्हें भी नेपोटिज्म झेलना पड़ा। बॉलीवुड पॉलिटिक्स की वजह से उन्हें भी फिल्मों से निकाला गया।

आईएनएएस को दिए साक्षात्कार में सैफ अली खान ने नेपोटिज्म के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा की। सैफ ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि यह मेरे लिए भी कभी आसान रहा है। कुछ लोगों को बेशक लग सकता है कि यह मेरे लिए आसान था। लेकिन सच यह है कि मैंने खुद कई तरह की परेशानियों का सामना किया है। मैंने ‘सुरक्षा’ और ‘एक था राजा’ जैसी फिल्मों में थर्ड लीड का किरदार निभाया है। इन फिल्मों के बारे में किसी ने सुना तक नहीं है। इसलिए यह सब कुछ मेरे लिए भी बेहद मुश्किल था।” 

सैफ ने कहा, “इतना कुछ होने के दौरान ऐसा कभी नहीं सोचा कि मैं यहाँ क्या कर रहा हूँ। मुझे बहुत अच्छे से पता था कि मैं क्या कर रहा हूँ। मैं अपने लिए पैसे कमाने की कोशिश कर रहा था।” इसके बाद सैफ अली खान ने बॉलीवुड की राजनीति पर भी अपने विचार रखे। सैफ ने कहा यहाँ कुछ कहानियाँ ऐसी हैं जो आती हैं और जाती हैं। आमतौर पर ऐसा होता है, “ओह! मुझे नहीं पता था, जो फिल्म आपको ऑफर की गई थी असल में यह आपके लिए थी ही नहीं। फिर हमें समझ आता है कि इसमें कुछ न कुछ पॉलिटिक्स थी।”

फिर हम ऐसा बर्ताव करते हैं “अच्छा! तो यह सब कुछ ऐसे होता है।” इसके बाद सैफ अली खान ने कहा, “इसके पहले मैंने एक इंटरव्यू में कहा था कि मैं भी नेपोटिज्म का पीड़ित रह चुका हूँ। इस बात से मेरा मतलब यह था कि इस तरह की कई चीज़ें होती हैं। बॉलीवुड में भी राजनीति, जोड़-तोड़ और नियंत्रण होता है।”

सैफ ने कहा, “मैं अपने करियर में एक-दो बार ऐसी स्थिति में रहा हूॅं, जहॉं मुझे कुछ ऑफर किया गया। मुझसे पेपर भी साइन करा लिए गए और अगले दिन मुझे फोन आया है कि यह हाथ से निकल गया है। मेरा रिएक्शन ऐसा होता था कि आपका मतलब क्या है? वे कहते थे कि हम इसमें आपकी मदद नहीं कर सकते, क्योंकि यह हमारे हाथ से बाहर है। इसके लिए किसी और ने बात की और उसका हो गया है। हमें माफ करें।” 

ऑल्टन्यूज़ वाले जुबैर पर NCPCR ने दिए कार्रवाई के निर्देश, बच्ची के ऑनलाइन हैरासमेंट का मामला

इस्लामिक प्रोपेगेंडा वेबसाइट ऑल्टन्यूज़ के संस्थापक मोहम्मद जुबैर द्वारा छोटी बच्ची की तस्वीर सार्वजनिक करने, उसके धमकियाँ देने और टॉर्चर करने के आरोप में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने ट्विटर को नोटिस भेजा गया है। आयोग ने कहा है कि वह इस मामले में स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं है और इसके लिए ट्विटर के सीनियर मैनेजर्स को 4 सितम्बर को उपस्थित होना होगा।

NCPCR के चेयरपर्सन प्रियंक कानूनगो ने भी ट्विटर पर इसकी जानकारी शेयर करते हुए लिखा है कि ट्विटर इंडिया के सीनियर मैनेजर को समन जारी करते हुए मोहम्मद जुबैर के खिलाफ एक्शन लेने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, NCPCR द्वारा उचित कार्रवाई के लिए ट्विटर इंडिया और संबंधित कानून प्रवर्तन अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। मोहम्मद जुबैर पर POCSO एक्ट के अंतर्गत कार्रवाई करने की भी माँग की जा रही है।

दरअसल, स्वघोषित फैक्ट चेकर मोहम्मद जुबैर ने हाल ही में एक ट्विटर यूजर को निशाना बनाते हुए एक छोटी बच्ची की तस्वीर सार्वजनिक करने का घटिया कारनामा किया था।

फैक्ट चेकिंग के नाम पर लोगों की निजी और गोपनीय जानकारियाँ सार्वजानिक करने के लिए कुख्यात समूह ऑल्टन्यूज़ के संस्थापकों में से एक मोहम्मद जुबैर ने शुक्रवार (अगस्त 07, 2020) को जगदीश सिंह नाम के एक ट्विटर यूजर को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करने की कोशिश करते हुए एक नाबालिग बच्ची की तस्वीर को ही सार्वजानिक कर दिया। यह बच्ची और कोई नहीं बल्कि उन्हीं ट्विटर यूजर यानी, जगदीश सिंह की पोती थी।

ट्विटर यूजर जगदीश सिंह, मोहम्मद जुबैर के एक और फर्जी के फैक्ट चेकर से सहमत नहीं थे और उन्होंने सोशल मीडिया पर ऑल्टन्यूज़ के लिए प्रचलित जुमले का इस्तेमाल करते हुए जुबैर के ट्वीट के जवाब में ‘ल*डे का फैक्ट चेकर’ कह दिया।

यह जुमला ऑल्टन्यूज़ के कथित ‘फैक्ट चेक्स’ के फर्जीवाड़ों के लिए इन्टरनेट पर युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय है। ट्विटर यूजर जगदीश सिंह के इस कमेंट पर मोहम्मद जुबैर ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और उन्हें सीधे तौर पर जवाब देने के बजाए, उनकी ट्विटर डीपी (डिस्प्ले इमेज) निकाल ली, जिसमें जगदीश सिंह कथित तौर पर अपनी पोती के साथ नजर आ रहे थे।

जुबैर ने जगदीश सिंह की प्रोफाइल में लगी तस्वीर ट्वीट करते हुए लिखा- “हेलो जगदीश सिंह, क्या आपकी प्यारी पोती सोशल मीडिया पर लोगों को गाली देने की आपकी पार्ट टाइम जॉब के बारे में जानती है?”

ट्विटर यूजर की निजी तस्वीर का गलत इस्तेमाल करते हुए मोहम्मद जुबैर ने उन्हें अपनी प्रोफाइल फोटो बदलने की सलाह भी दी थी।