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ताहिर हुसैन अब नहीं रहा पार्षद, दिल्ली नगर निगम ने निरस्त की सदस्यता: दिल्ली दंगों में है मुख्य आरोपी

आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद और दिल्ली दंगों के आरोपित ताहिर हुसैन के मामले में बड़ी ख़बर आई है। पूर्वी दिल्ली नगर निगम (EDMC) ने ताहिर हुसैन की सदस्यता रद्द कर दी है। पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने इस संबंध में बयान जारी करते हुए मामले की जानकारी दी। नगर निगम के बयान के अनुसार 26 अगस्त को यह निर्णय लिया गया था।   

वार्ड संख्या 59-ई के पार्षद की सदस्यता निरस्त की जा रही है। दिल्ली नगर निगम ने इस मामले में आदेश जारी करते हुए कई अहम बातें कहीं। आदेश के मुताबिक़ दिल्ली नगर निगम अधिनियम की धारा 33 की उपधारा 2 में यह प्रावधान है। यदि कोई सदस्य लगातार सदन की 3 बैठकों में बिना किसी पूर्व सूचना के अनुपस्थित रहता है, तो सदन उक्त पार्षद की सदस्यता समाप्त करके वार्ड के प्रतिनिधि पद को रिक्त घोषित कर सकता है। 

इसके बाद आदेश में यह भी लिखा है कि यह पार्षद का कर्तव्य है वह लंबी अवधि की अनुपस्थिति हेतु पूर्व सूचना माननीय महापौर अथवा निगम सचिव कार्यालय को दे। ताहिर हुसैन वार्ड संख्या 59 ई का प्रतिनिधित्व कर रहा था। वो जनवरी 2020, फरवरी 2020 (मार्च 2020, अप्रैल 2020 और मई 2020 में कोविड 19 के चलते बैठक हुई नहीं), जून 2020 तथा जुलाई 2020 की बैठक में बिना सूचना अनुपस्थित था।  

पूर्वी दिल्ली नगर निगम का आदेश वार्ड 59 के पार्षद की सदस्यता समाप्ति का घोषणा – संख्या 5
पूर्वी दिल्ली नगर निगम का आदेश

इस मामले में 11 अगस्त को भी ख़बर प्रकाशित हुई थी कि पार्षद ताहिर हुसैन की सदस्यता ख़तरे में पड़ सकती है। जिसमें पूर्वी दिल्ली के महापौर निर्मल जैन ने कहा था ताहिर हुसैन ने उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों की साजिश रचने की बात स्वीकार कर ली थी। ताहिर हुसैन और पूर्व पार्षद इशरत जहां के खिलाफ़ सदन में निंदा प्रस्ताव भी पारित हुआ था। अब कानूनी प्रक्रिया समझी जा रही है कि किस तरह ताहिर हुसैन की सदस्यता रद्द हो सकती है? महापौर ने यह भी बताया था कि दिल्ली पुलिस की तरफ से नगर निगम को कोई जानकारी नहीं मिली थी। मगर ताहिर हुसैन ने लगातार कई बैठकों में हिस्सा नहीं लिया था।      

दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार (21 अगस्त, 2020) को फरवरी में हुए हिंदू विरोधी दंगों में शामिल AAP के पूर्व नेता ताहिर हुसैन के खिलाफ दायर चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए कहा कि ताहिर हुसैन के उकसावे पर संप्रदाय विशेष के लोग हिंसक हो गए और हिंदू समुदाय पर पथराव शुरू कर दिया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, अदालत ने फरवरी में उत्तर-पूर्व दिल्ली में हुए हिंदु विरोधी दंगों के दौरान खुफिया (आईबी) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या से संबंधित मामले और दंगों को भड़काने में हुसैन की भूमिका के खिलाफ दायर आरोपपत्र का संज्ञान लेते हुए यह टिप्पणी की थी। अदालत ने आरोपितों के खिलाफ प्रोडक्शन वारंट भी जारी किया और उन्हें 28 अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पेश करने का निर्देश दिया।

पूर्व AAP नेता ताहिर हुसैन, जो इस साल की शुरुआत में राष्ट्रीय राजधानी में हुए भीषण हिंदू-विरोधी दंगों के प्रमुख अभियुक्त है, से प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूछताछ की थी। टाइम्स नाउ द्वारा प्रकाशित एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, ताहिर हुसैन से दिल्ली हिंसा की फंडिंग को लेकर पूछताछ की जा रही थी। इसके साथ ही, निजामुद्दीन मरकज और दिल्ली दंगों के बीच सम्बन्ध की भी अब जाँच की जा रही है। हुसैन ने दिसंबर, 2019 से फरवरी, 2020 तक दंगा करने वालों और दंगाइयों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वालों को 1.02 करोड़ रुपए ट्रांसफर करने के लिए कई शेल कंपनियाँ बनाई थीं।

दंगों कि साजिश ने बारे में भी उसने कई हैरान करने वाली बातें कही थीं। उसने पूछताछ के दौरान कहा “मेरा घर इलाके में सबसे ऊँचा था। CAA समर्थकों को सबक सिखाने के लिए मैंने अपने सहयोगियों के साथ पहले ही साजिश रच ली थी। घर में कन्स्ट्रक्शन का काम भी चल रहा था, ऐसे में ईंट-पत्थर इत्यादि समान पहले ही जमा कर लिए गए थे। मेरी लाइसेंसी पिस्टल थाने में जमा थी, जिसे मैं दंगों के 2-3 दिन पहली ही छुड़ा कर लाया था। पुलिस के हाथ सबूत न लगे, इसीलिए मैंने पहले ही क्षेत्र के सारे सरकारी व प्राइवेट CCTV कैमरे तोड़वा दिए थे। मैंने अपने समर्थकों को हर तरीके से तैयार रहने कह दिया था।”

पिंजरा तोड़ हाइ-क्लास वाले, बेल मत दीजिए… भाग जाएँगे: HC से दिल्ली पुलिस, भड़काऊ वीडियो पर TheWire ने फैलाया झूठ

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार (अगस्त 26, 2020) को दिल्ली पुलिस को उत्तर-पूर्व दिल्ली दंगों से संबंधित मामले में केस डायरी पेश करने की अनुमति दी है। हाईकोर्ट ने पिंजरा तोड़ समूह की सदस्य देवांगना कलीता और नताशा नरवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस को यह निर्देश दिया।

हाईकोर्ट में दिल्ली पुलिस द्वारा 29 अगस्त को केस डायरी प्रस्तुत की जाएगी और सुनवाई 31 अगस्त को होगी। इससे पूर्व, 14 अगस्त को अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 26 अगस्त को निर्धारित की थी।

इस मामले में देवांगना कलिता और समूह की एक अन्य सदस्य नताशा नरवाल को इस साल मई में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया था और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत उन पर मामला दर्ज किया, जिसमें दंगा, गैरकानूनी सभा आयोजित करने और हत्या का प्रयास संबंधी धाराएँ शामिल हैं।

उन पर दंगों में ‘पूर्व-नियोजित साजिश’ का कथित तौर पर हिस्सा होने के आरोप में, सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े एक अलग मामले में कड़े आतंकवाद-रोधी कानून- गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। नताशा और देवांगना ने साजिश रच के 66 फूटा सड़क को ठप्प करवाया था। दोनों का काम जाफराबाद तक ही सीमित नहीं था। इन्होंने कई अन्य इलाकों में घूम-घूम कर संप्रदाय विशेष के लोगों को भड़काया और नागरिकता कानून की गलत व्याख्या कर संप्रदाय विशेष को दंगों में भाग लेने के लिए भी उकसाया था।

नए नागरिकता कानून के समर्थकों और विरोधियों के बीच हिंसा भड़कने के बाद 24 फरवरी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में कई सांप्रदायिक झड़पें हुई थीं, जिनमें कम से कम 53 लोग मारे गए थे और लगभग 200 लोग घायल हो गए थे।

देवांगना कलिता के खिलाफ 4 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि नताशा तीन मामलों में आरोपित है। निचली अदालत ने 14 जून को नताशा और देवांगना कलिता की जमानत याचिका इस आधार पर खारिज कर दी थी कि आवेदनों में कोई ठोस आधार नहीं है और आरोप-पत्र से यह स्पष्ट है कि जाँच अभी लंबित है और इसे अन्य आरोपितों के खिलाफ भी दायर किया गया है।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने पिंजरा तोड़ संगठन की सदस्य देवांगना कलीता मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से आग्रह किया कि देवांगना कलीता और उसके सहयोगी को कुछ आधारों पर जमानत नहीं दी जानी चाहिए। दिल्ली पुलिस ने इस दलील में कहा है कि यह हाईक्लास शिक्षित परिवारों से जुड़े लोग हैं, जिन्होंने सोच-समझ कर लोगों को भड़काया और संप्रदाय विशेष की भीड़ का इस्तेमाल किया। और जमानत मिलने पर यह जाँच के पहले ही चरण में भाग भी सकते हैं। पुलिस का कहना है कि यह मामला दंगों की कई घटनाओं में से एक है, जो 23 से 26 फरवरी के बीच पूर्वोत्तर दिल्ली में दर्ज की गईं, जिसमें 53 लोग मारे गए, 581 लोग घायल हुए।

पुलिस ने कहा है कि इन दंगों के संबंध में 751 एफआईआर दर्ज की गई हैं। आरोप पत्र दाखिल होने के बावजूद भी अभियुक्त देवांगना कलीता को इस कारण भी जमानत नहीं दी जा सकती है क्योंकि वर्तमान में हालातों में अभी तक बहुत बदलाव नहीं आया है और जाँच जारी हैं और आरोपित को जाँच के प्रथम चरण में जमानत नहीं दी जानी चाहिए।

दिल्ली पुलिस ने कहा कि जैसा कि चार्जशीट में विस्तृत रूप से कहा गया है, यह स्पष्ट रूप से सामने आया है – वर्तमान आवेदक, देवांगना कलीता दंगों की मुख्य और प्रमुख साजिशकर्ता है और घटना के वक्त प्रदर्शन स्थल पर वह जाफराबाद मेट्रो स्थल के नीचे 66 फुटा स्पॉट रोड ब्लॉक साइट/विरोध प्रदर्शन स्थल पर मौजूद थी। पुलिस के अनुसार, देवांगना शुरुआत से ही दिल्ली के जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे यानी फरवरी 22, 2020 से हिंसक भीड़ के वापस जाने तक यानी, फरवरी 25, 2020 की देर शाम लगभग 7:00 बजे तक भीड़ का नेतृत्व कर रही थी।

पुलिस ने कहा है कि जमानत की वर्तमान आवेदक देवांगना कलीता इस प्रकार इन दंगों का मुख्य चेहरा थी, जिसने संगठित तरीके से अन्य सह-अभियुक्तों के साथ मिलकर भीड़ जुटाई और स्थानीय संप्रदाय विशेष की भीड़ और आम जनता को सक्रियता से दंगे भड़काने के लिए उकसाया। इसीका नतीजा था कि भीड़ ने गोलियाँ चलाईं और पथराव किया, ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर बोतलें आदि फेंकीं और यह जमानत की आवेदक देवांगना कलीता द्वारा आपराधिक मानसिकता से लगाए गए बल का ही परिणाम था, जिससे पुलिस और जनता को गंभीर चोटें आईं।

दिल्ली पुलिस ने माननीय उच्च न्यायलय के सामने अपना पक्ष रखते हुए लिखा है कि आरोपित को जिन कारणों से जमानत नहीं दी जानी चाहिए, वो कुछ इस प्रकार हैं –

  1. जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे 66 फूटा रोड पर विरोध प्रदर्शन स्थल पर वह मौजूद थी, तब तक भी वहाँ पर हालात सामान्य थे।
  2. 24 फरवरी को जिस जगह पर देवांगना कलीता भीड़ का नेतृत्व कर रही थी, वहीं शाहरुख पठान नाम का युवक बन्दूक तानकर पुलिस की ओर बढ़ा और उसने फायरिंग की। जिसे कि जाफराबाद पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया।
  3. 5 जनवरी और 23 फरवरी को दिए गए भाषणों की वीडियो साक्ष्य में पिंजरा तोड़ के सदस्यों को भड़काऊ भाषण देते देखा गया है।
  4. इन्होने लोगों को हिंसक होने, लाठी और फायर आर्म्स से पुलिस से मुठभेड़ करने के लिए लोगों को उकसाया। वह दंगाइयों से लगातार सम्पर्क में थी।
  5. आरोपित देवांगना कलीता और उनके सहयोगी गुल्फिशा, नताशा, सुहैल, अदनान, तस्लीम, शादाब, गुड्डू चौधरी, फैजान और कासिम अंसारी की पहचान की गई है। इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। देवांगना की रूममेट नताशा ने मई 05, 2020 को अपने बयान में इस मामले में अपनी उपस्थिति को स्वीकार किया है।
  6. देवांगना और उनके सहयोगियों को दिसम्बर 2019 में ही पूर्वोत्तर दिल्ली में बैठकें और कैंडल मार्च करते हुए देखा गया।
  7. संप्रदाय विशेष के लोगों से सम्पर्क कर नामी चेहरों के जरिए उन्हें नागरिकता कानून के सम्बन्ध में गलत जानकारी दी और कहा कि इस कानून से उनको देश से भगा दिया जाएगा।

हालाँकि, प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द वायर’ की एक ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देवांगना कलीता की ज़मानत याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट के उनके कथित भड़काऊ भाषण के वीडियो माँगने पर पुलिस ने कहा कि उनके पास ऐसा कोई वीडियो नहीं है।

जबकि, दिल्ली पुलिस द्वारा देवांगना कलीता की जमानत रद्द करने के लिए जो तर्क दिए गए हैं, उसमें इस बात का स्पष्ट जिक्र किया गया है कि पुलिस के पास दो अलग-अलग दिनों – जनवरी 05, 2020 और फरवरी 23, 2020 को घटनास्थल के वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं।

सूत्र से मिली जानकारी के अनुसार 05 जनवरी और 23 फरवरी के विरोध प्रदर्शन के वीडियो बरामद कर लिए गए हैं। 5 जनवरी को CAA-NRC के विरोध में दिए गए उसके (देवांगना कलीता) शुरुआती भाषण और विरोध प्रदर्शन के लिए दिए गए भड़काऊ भाषण इसके साथ संलग्न हैं।

इससे पहले की एक सुनवाई में दिल्ली पुलिस ने कहा था कि उनके पास देवांगना कलीता के 24 और 25 फरवरी को हुए दंगों से पहले कथित तौर पर लोगों को भड़काने के वीडियो हैं और उनके 22 तथा 23 फरवरी के भी वीडियो हैं, जब नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के बाहर बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन कर रहे थे।

पुलिस ने कहा है कि वीडियो क्लिप्स, चश्मदीदों के बयान और जमानत याचिका दायर करने वाली आरोपित के कॉल रिकॉर्ड विवरण (CDR) से भी यही नतीजे निकले हैं कि वह उत्तर-पूर्व दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान भी दंगाइयों, मास्टर माइंड, उपद्रवियों, विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के नेताओं, विभिन्न विरोध प्रदर्शन स्थलों के सूत्रधारों और दंगों के मुख्य षड्यंत्रकारियों के सम्पर्क में थे।

ऐसे में, द वायर का यह दावा, कि पुलिस ने देवांगना कलीता के वीडियो साक्ष्य होने से इनकार किया, द वायर के इरादों पर संदेह प्रकट करता है।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस ने अपने जवाब में लिखा है कि आरोपित देवांगना कलीता ने वीडियो साक्ष्यों की जाँच में भी उनका सहयोग नहीं किया है और अपनी जमानत के लिए दायर याचिका के लिखित जवाब में देवांगना के द्वारा जो वीडियो दिया गया है, उसमें भी घटना के चश्मदीद गवाह इंस्पेक्टर मिथिलेश को देखा जा सकता है। इसके साथ ही, ट्विटर पर मौजूद 23 फरवरी के वीडियो में भी देवांगना की मौजूदगी और भीड़ पुलिस के होने पर भीड़ को भड़काने वाले उसके बयान देखे जा सकते हैं।

पुलिस ने अपने जवाब में कहा है कि देवांगना के मोबाइल फोन से बरामद जानकारी के अनुसार यह भी पता चला है कि वह पूर्वोत्तर दिल्ली के दंगाइयों के साथ लगातार और सीधे सम्पर्क में थी। पुलिस द्वारा दाखिल जवाब में कहा गया है कि स्टेटस रिपोर्ट में जिन तथ्यों को वर्णित किया गया है, उससे भी स्पष्ट है कि देवांगना प्रथम दृष्टया आरोपित हैं।

देवांगना कलीता की जमानत याचिका रद्द किए जाने की इस अपील में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि उसे इस कारण भी जमानत नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि आरोपित को यदि जमानत दे दी जाए, तो वह भाग सकती है।

इसके अनुसार, आरोपित देवांगना असम की निवासी है और उसका पति यूनाइटेड किंगडम में रहता है। वह खुद दिल्ली में बतौर किराएदार रह रही है। यह पाया गया है कि देवांगना का इस सोसायटी में कोई परिवार और सम्बन्धी नहीं है और ऐसे में यदि उसे जमानत दे दी जाती है तो वह दिल्ली दंगों की जाँच के बीच ही भाग सकती है, जिससे कि जाँच प्रक्रिया बाधित होगी।

पुलिस का कहना है कि चश्मदीदों को यह भय है कि आरोपित देवांगना जमानत पर यदि बाहर आती है तो वह और उसका समूह उनके लिए खतरा पैदा कर सकते हैं क्योंकि वह गवाह इस समूह के खिलाफ बयान दे रहा है। उनकी माँग है कि उनकी पहचान गोपनीय रखने के साथ-साथ उन्हें सुरक्षा भी उपलब्ध कराई जाए। पुलिस ने कहा है कि गवाहों को अपनी सुरक्षा का भय है और उन्हें लगता है कि ये आरोपितों के बाहर आने के बाद उन्हें निशाना बना सकते हैं।

इसके साथ ही, आरोप पत्र में दिल्ली पुलिस ने लिखा है कि कॉलम संख्या 11 में वर्णित आरोपित (देवांगना कलीता) हाइक्लास शिक्षित परिवार से ताल्लुक रखती हैं और उन्होंने जो कुछ भी किया, वह यह जानते हुए किया कि उनके काम से समाज में हलचल पैदा होगी और साम्प्रदयिक सौहार्द भी ख़राब होगा।

इसके अलावा उन्हें यह भी आभास था कि उनके कारणों से राष्ट्रीय राजधानी की शांति भी भंग होगी। अपने गलत इरादों के साथ ही आरोपितों ने ऐसी जगहों को चुना, जहाँ संप्रदाय विशेष की आबादी निवास करती है, जहाँ मस्जिद भी हैं और हिन्दू आबादी भी उसके पास ही रहती है।

उन्होंने संप्रदाय विशेष के समूह बनाने शुरू किए। इसके लिए सब्जी विक्रेता, संप्रदाय विशेष की महिलाएँ, ढाबा व्यापारी आदि चुने गए और उन तक नागरिकता कानून और जनसंख्या रजिस्टर की गलत व्याख्या की गई, उनसे कहा गया कि यदि ये कानून लागू हो गए तो उन सब को देश से बाहर निकाल दिया जाएगा।

पुलिस द्वारा दायर आरोप पत्र के अनुसार, पिंजरा तोड़ समूह की एक्टिविस्ट नताशा और देवांगना ने संप्रदाय विशेष के लोकल लोगों को प्रभावित करने के लिए प्रभावशाली चेहरों, स्थानीय नेताओं की मदद ली। इसके लिए वो गुल्फिशा खातून और अन्य देश विरोधी तत्वों से मुलाकात की, जहरीले भाषणों से लोगों के मन में डर पैदा किया और उन्हें हिंसा के लिए उकसाया।

दिल्ली पुलिस ने माननीय उच्च न्यायलय से निवेदन किया है कि इन सभी आधारों पर आरोपित पिंजरा तोड़ संगठन के सदस्यों को जमानत नहीं दी जानी चाहिए। साथ ही, पुलिस ने कहा है कि अभी जाँच जारी है और उन चेहरों को भी सामने लाया जाएगा जो दिल्ली दंगों की साजिश में शामिल थे और अब तक भी छुपे हुए हैं।

उल्लेखनीय है कि सीएए के विरोध में उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगा मामले में पिंजरा तोड़ की सदस्य एवं जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की छात्रा देवांगना कलीता और नताशा नरवाल के अलावा जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा और गुलफिशा खातून, कॉन्ग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहाँ, जामिया समन्वय समिति की सदस्य सफूरा जरगर, मीरान हैदर, जामिया एलुमनी एसोसिएशन के अध्यक्ष शिफा-उर-रहमान, आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन, कार्यकर्ता खालिद सैफी और पूर्व छात्र नेता उमर खालिद शामिल हैं, जिन पर आतंकवाद निरोधक कानून-गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया गया है।

उमर खालिद को इस मामले में अब तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। पुलिस ने अपनी प्राथमिकी में दावा किया था कि उमर और उसके साथियों ने इलाके में लोगों को दंगा भड़काने के लिए उकसाया था और यह पूर्व नियोजित साजिश थी। हाईकोर्ट ने इससे पहले नताशा नरवाल की जमानत अर्जी को खारिज करने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था।

इस सुनवाई में कोर्ट ने कहा कि उस दौरान हर तरफ मीडिया की मौजूदगी थी और वे रिकॉर्डिंग कर रहे थे। न्यायाधीश ने कहा कि मैं जानना चाहता हूँ कि उन्होंने क्या कहा, जिससे भीड़ भड़की। ज्ञात हो कि दिल्ली पुलिस ने नताशा नरवाल तथा देवांगना कलीता को मई, 2020 में दंगा मामले में गिरफ्तार किया था।

राजद जिला उपाध्यक्ष की पीट-पीट कर हत्या, BJP नेता की हालत नाजुक: आधे घंटे बाद पहुँची झारखंड पुलिस

राष्ट्रीय जनता दल के झारखंड, गिरिडीह उपाध्यक्ष कैलाश यादव को मंगलवार (25 अगस्त 2020) बेंगाबाद थाना क्षेत्र के मोतीलेदा गाँव में पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। इसके अलावा उनके साथ मौजूद भाजपा नेता इंद्रलाल वर्मा (55) को पीट-पीट कर घायल कर दिया। इस घटना को लगभग दो दर्जन से ज्यादा हमलावरों ने अंजाम दिया। ख़बरों के मुताबिक़ ऐसा करने से पहले उन्होंने स्ट्रीट लाइट तक बंद कर दी थी।   

कैलाश यादव राजद के जिला उपाध्यक्ष और सह मानवाधिकार सुरक्षा संघ के जिलाध्यक्ष भी थे। हमलावरों ने दोनों नेताओं पर पूरी तैयारी के साथ हमला किया था। उनके पास डंडे, रॉड और पत्थर भी मौजूद थे। राजद नेता कैलाश यादव की उपचार के लिए धनबाद स्थित अस्पताल ले जाने के दौरान मौत हो गई। वहीं भाजपा नेता इंद्रलाल वर्मा की स्थिति नाज़ुक बनी हुई है। गिरिडीह में उपचार कराने के बाद उन्हें भी धनबाद भेज दिया गया है। दोनों नेताओं पर यह हमला ठीक उस वक्त हुआ, जब वह बेंगाबाद थाने से एक ही बाइक पर वापसी जा रहे थे।   

राजद नेता कैलाश यादव मोतीलेदा के टोला खैरान गाँव के रहने वाले थे। भाजपा नेता इन्द्रलाल वर्मा टोला बनगाँवा के रहने वाले हैं। जिस जगह पर यह घटना हुई, राजद नेता का घर वहाँ से लगभग आधा किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

राजद नेता के छोटे भाई छोटेलाल यादव के मुताबिक़ वार्ड संख्या 16 की सदस्य हेमंती देवी के प्रतिनिधि जितेन्द्र वर्मा के साथ निलंबित मुखिया सुखदेव राय का विवाद हुआ था। जितेन्द्र वर्मा पर बालू की रॉयल्टी न देने का आरोप था। इसके बाद जितेन्द्र वर्मा के अनुरोध पर राजद नेता कैलाश यादव और भाजपा नेता इन्द्रलाल वर्मा समेत कई अन्य बेंगाबाद थाने मुखिया के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराने पहुँचे थे।   

इसके बाद सभी अपनी अपनी गाड़ी से वापस घर की ओर लौट रहे थे। इस बीच घात लगाए मुखिया सुखदेव राय, पुत्र राजेश राय समेत अन्य 20-25 लोग बैठे थे। जैसे ही कैलाश यादव और इन्द्रलाल वर्मा वहाँ पहुँचे, तभी हमलावरों ने उन पर हमला कर दिया। ख़बरों के मुताबिक़ हमलावरों की संख्या 20 से 25 के बीच थी। इन्होंने हमला करने से पहले मौके पर गोलीबारी भी की थी, जिससे पूरे इलाके में दहशत हो गई थी।   

इसके चलते कोई भी स्थानीय घटना के दौरान अपने घर से बाहर नहीं निकला। यह घटना रात के लगभग 10 बजे की है। इसके अलावा हमलावर घटना को अंजाम देने के बाद मौके से पैदल ही निकल गए थे। हमलावर कैलाश यादव को घसीट कर कुछ दूरी पर ले गए और वहाँ उन्हें पीट-पीट कर अधमरा कर दिया। घटना के लगभग आधे घंटे के बाद पुलिस को इसकी जानकारी मिली। पुलिस उन्हें लेकर अस्पताल जा रही थी, तभी उनकी मौत हो गई। 

फिर बुधवार को पुलिस ने पोस्टमॉर्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। राजद नेता की हत्या की ख़बर मिलते ही क्षेत्र में काफी भीड़ इकट्ठा हो गई। लोगों ने हमलावरों की गिरफ्तारी की माँग की। पुलिस का कहना है कि वह टेक्निकल सेल की मदद से हमलावरों तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस ने यह भी बताया कि हमले से पहले जितेन्द्र वर्मा ने चार के विरुद्ध बेंगाबाद थाने में शिकायत दर्ज कराई थी।   

शिकायत में सुखदेव राय को मुख्य आरोपी बनाया गया था। शिकायत में जितेन्द्र का यह भी कहना था कि उनका एक ट्रेक्टर है। और यह लोग नदी से बालू उठाने पर रंगदारी की माँग करते हैं। रंगदारी देने से मना करने पर उनके साथ पहले मारपीट की गई थी। रात को कैलाश यादव और इन्द्रलाल वर्मा समेत अन्य लोग इस मामले की शिकायत करके थाने लौट रहे थे। तभी उन पर 20-25 लोगों ने एक साथ मिल कर हमला कर दिया था।   

‘2 सितंबर को मस्जिदें नहीं खुली तो सड़क पर पढ़ेंगे नमाज’ – सांसद इम्तियाज जलील ने महाराष्ट्र सरकार को दी चुनौती

एआईएमआईएम के सांसद ने महाराष्ट्र सरकार को खुलेआम धमकी दी है। सांसद इम्तियाज़ ज़लील ने महाराष्ट्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि आगामी 2 सितंबर को मस्जिदें खोल दी जाएँ। वह इसके लिए सार्वजनिक रूप से आह्वान करेंगे। लेकिन महाराष्ट्र सरकार अगर इस दिन मस्जिदें नहीं खोलती है तो वह सड़क पर नमाज़ पढ़ने बैठ जाएँगे।   

एक समाचार चैनल से बात करते हुए एआईएमआईएम सांसद ने चेतावनी भरा बयान दिया। उन्होंने अपने बयान में कहा:

“हम आखिर कब तक इंतज़ार करेंगे? यह लोकशाही है, सरकार के निरर्थक फैसलों को जनता भी कब तक बर्दाश्त करेगी। तो हमने यह फैसला किया है कि एक तारीख़ (सितंबर) को महाराष्ट्र में गणेश विसर्जन किया जाता है। हिंदुओं के लिए बड़ा दिन होता है। मैं उन तमाम हिंदुओं से अनुरोध करना चाहता हूँ कि वह तमाम मंदिर और पूजा स्थल खुलवाने में लग जाएँ। फिर हम दो तारीख़ (सितंबर) को राज्य में स्थित तमाम मस्जिदों को खुलवाने का आह्वान करेंगे। सरकार अगर इजाज़त दे तो ठीक नहीं तो हम सड़क पर नमाज़ पढ़ेंगे।” 

अपने बयानों के चलते अक्सर सुर्ख़ियों में रहने वाले एआईएमआईएम सांसद ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र सरकार द्वारा धार्मिक स्थलों को बंद रखने के फैसले का कोई तर्क नहीं है। इसके बाद उन्होंने कहा कि अगर सरकार 2 सितंबर को मस्जिदें बंद रखती है तो वो खुद औरंगाबाद की शाहगंज स्थित मस्जिद में नमाज़ पढ़ने जाएँगे। इसके बाद इम्तियाज़ ज़लील ने हिंदुओं से भी अनुरोध किया कि 1 सितंबर यानी गणेश विसर्जन को वह मंदिर खुलवाने का आह्वान करें।  

नेताओं के ऐसे ही बयानों के कारण आम जनता कैसे भड़क सकती है, इसका उदाहरण उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सटे बाराबंकी में देखने को मिला। वहाँ मंगलवार (अगस्त 25, 2020) के दिन अचानक से माहौल बिगड़ गया था। दरअसल, हुआ यूँ कि एक युवक बिना अनुमति लिए ताजिया लेकर जा रहा था, जिसके बाद पुलिस उसे पकड़ कर थाने ले गई। जैसे ही संप्रदाय विशेष के समाज के लोगों को यह पता चला कि ताजिया ले जाने वाले युवक को पुलिस ले गई है, सैकड़ों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए।

संप्रदाय विशेष समाज के लोगों ने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया था। प्रदर्शन उतना उग्र हो गया कि बाराबंकी पुलिस को भी इसे संभालने में मशक्कत करनी पड़ी। संप्रदाय विशेष समाज के लोग पुलिस के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। अफवाह फैलने लगी और प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ती चली गई। बाराबंकी, गोण्डा, बहराइच और श्रावस्ती को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण बुद्धा मार्ग को संप्रदाय विशेष के प्रदर्शनकारियों ने जाम कर दिया, जिससे आवागमन ठप्प हो गया था।

AIMIM सांसद इम्तियाज़ ज़लील के बयान से हैरानी नहीं है। यह पहला ऐसा मौक़ा नहीं है, जब एआईएमआईएम के नेताओं ने इस तरह के विवादित, सांप्रदायिक और अमर्यादित बयान दिए हों। महाराष्ट्र के मालेगाँव में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के विधायक मो इस्माइल ने सरेआम शांति भंग करने के लिए भड़काऊ बयान दिया था। एक वायरल वीडियो में विधायक मुफ्ती मोहम्मद इस्माइल को कहते देखा जा सकता है कि अगर वो अमन-ओ-अमान बाकी रखना जानते हैं तो यह भी जानते हैं कि ये कैसे जाएगा। अपने इस जहरीले बयान देने के बाद उन्होंने इस पर सफाई भी दी और बताया कि उन्होंने ये बातें अपने शहर के संदर्भ में कहीं थीं। महाराष्ट्र या भारत के संदर्भ में नहीं। मतलब! मतलब शहर महाराष्ट्र या भारत से बाहर है? बताया नहीं उन्होंने।

वायरल विडियो में इस्माइल को कहते सुना जा सकता है, “मेरा सवाल है डिपार्टमेंट से, अगर शहर में गोली चलती है और किसी को गोली लगती है, तो कोई केस क्यों दर्ज नहीं किया गया? FIR क्यों दर्ज नहीं की गई? क्या शहर के लोग बेवकूफ हैं? शहर के लोगों को पता नहीं चलता कि गोली चलती है और एफआईआर दर्ज नहीं होती? साहब हम भी समझते हैं कि क्या हालात हैं… अगर इस तरह होता रहा तो शहर की अवाम खामोश नहीं बैठेगी।” आगे AIMIM नेता बोलते है, “…अगर बात हम पर आएगी तो हम अमन-ओ-अमान रखना जानते हैं, तो ये कैसे जाएगा, ये भी हमें पता है। हमने कोई चूड़ियाँ नहीं पहनी हैं, हमारी शराफत है कि हम आज तक खामोश हैं और शहर के अंदर गुंडागर्दी चल रही है।”

इसके पहले भी एआईएमआईएम के कुछ लोगों द्वारा महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करने का मामला सामने आया था। बता दें कि एआईएमआईएम असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी है। मामला झारखण्ड के सरायकेला का था। यहाँ ओवैसी की पार्टी के नेताओं ने महिलाओं के साथ गाली-गलौज किया और फिर रेप करने की धमकी तक की। एआईएमआईएम के नेताओं ने लूटमार की भी कोशिश की।

बता दें कि सरायकेला में ही तबरेज अंसारी नामक व्यक्ति की भीड़ द्वारा हत्या कर दी गई थी। गाँव की 34 महिलाओं ने थाने में आवेदन देकर शिकायत की है कि ओवैसी की पार्टी के लोगों ने उनके साथ गुंडागर्दी की। यह घटना सोमवार (जून 24, 2019) की थी। चारपहिया वाहनों से पहुँचे आरोपितों ने महिलाओं से लूटपाट की, रेप और बम से उड़ा देने की धमकी भी दी।   

‘रिया चक्रवर्ती ने मेरे बेटे सुशांत सिंह राजपूत को दिया जहर, जिससे उसकी मौत हुई’ – पिता ने लगाया हत्या का सीधा आरोप

सुशांत सिंह राजपूत मामले में ड्रग्स का पहलू सामने आने के बाद कई अहम खुलासे हुए हैं। मामले में फ़िलहाल सुशांत सिंह राजपूत के पिता केके सिंह ने बयान दिया है। उन्होंने रिया चक्रवर्ती पर सुशांत की हत्या का सीधा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि रिया ने उनके बेटे सुशांत सिंह को ज़हर दिया, जिसकी वजह से उनके बेटे की मौत हुई। इसके बाद उन्होंने रिया चक्रवर्ती को जल्द से जल्द गिरफ्तार किए जाने पर भी बयान दिया।   

समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए सुशांत सिंह राजपूत के पिता केके सिंह ने यह बयान दिया। उन्होंने कहा, “रिया चक्रवर्ती मेरे बेटे सुशांत सिंह को लंबे समय से ज़हर पिला रही थी। वह मेरे बेटे की हत्यारी है, जाँच एजेंसियों को जल्द से जल्द रिया चक्रवर्ती और उसके सहयोगियों को गिरफ्तार करना चाहिए। इसके अलावा रिया को गिरफ्तार करके उसे सज़ा दिलाएँ।” 

बीते दिनों सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या मामले में अब ड्रग्स एंगल सामने आया था। ड्रग्स को लेकर रिया के व्हाट्सऐप चैट सामने आने के बाद सुशांत की फैमिली और उनके एडवोकेट ने इस मामले में अपने बयान जारी किए थे। इसके बाद सुशांत के पर्सनल असिस्टेंट अंकित आचार्य ने भी इस मामले में खुलासा किया था।

टाइम्स नाऊ की रिपार्ट के अनुसार, अंकित आचार्य ने कहा, “मैंने कभी अपने रहते हुए सुशांत को ड्रग्स लेते हुए नहीं देखा। सुशांत अपनी हेल्थ को लेकर काफी सजग रहते थे। सुशांत अपनी बॉडी को फिट रखने के लिए ज्यादातर प्रोटीन, कैल्शियम और विटमिन्स युक्त जैसी चीजें ही खाते थे।”

बता दें कि अंकित आचार्य सुशांत सिंह राजपूत के पूर्व मैनेजर हैं। उनका मानना है कि सुशांत आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठा सकते हैं। वहीं इस मामले में अपने द्वारा दिए गए बयान की वजह से अंकित आचार्य को नौकरी से निकल दिया गया है। वहीं उन्हें लगातार जान से मारने की धमकी मिल रही है। गौरतलब है कि रिया चक्रवर्ती के ‘रिट्रीव चैट्स’ के हवाले से ड्रग्स एंगल का खुलासा हुआ था। जिसे अभिनेत्री ने डिलीट कर दिया था। चैट रिया चक्रवर्ती और गौरव आर्या के बीच का है। 

बताया गया था कि गौरव एक ड्रग डीलर है, जो इस कारोबार में कई सालों से लगा हुआ है। मार्च 8, 2020 को भेजे गए मैसेज में रिया ने लिखा था कि अगर हम हार्ड ड्रग्‍स की बात करें तो मैंने ज्‍यादा ड्रग्‍स का इस्‍तेमाल नहीं किया है। वहीं दूसरी चैट में रिया ड्रग डीलर गौरव से पूछ रही हैं कि क्या उसके पास MD है? MDMA को शॉर्ट फॉर्म में MD कहा जाता है। इसका आशय Methylenedioxymethamphetamine से है, जिसे काफी स्ट्रॉन्ग ड्रग माना जाता है।

व्हाट्सऐप चैट में रिया चक्रवर्ती से जया कहती हैं, ”चाय, कॉफी या पानी में 4 बूँद डालो और उसे पीने दो। असर देखने के लिए 30 से 40 मिनट रुको।” दोनों के बीच यह बात 25 नवंबर, 2019 को हुई थी। इसके पहले सीबीआई और ईडी के बाद अब सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में एक और केंद्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसी जुड़ गई थी। 

जाँच के दौरान इस मामले में ड्रग्स का एंगल सामने आने के बाद, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने रिया और अन्य के खिलाफ में एक मामला दर्ज किया था। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के निदेशक राकेश अस्थाना ने मीडिया को बताया कि ईडी को इस मामले में सबूत मिले है कि दिवंगत अभिनेता और उनकी प्रेमिका रिया चक्रवर्ती को ड्रग्स सप्लाई की गई थी। 

प्यार, लेकिन शादी कहीं और… दिलशाद ने अपनी ही प्रेमिका का रेप कर काटा गला: लखीमपुर खीरी रेप-मर्डर केस

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में एक लड़की की लाश मिलती है। गर्दन कटा होता है। पुलिस की जाँच में धारदार हथियार से हत्या और गर्दन पर चोट के निशान मिलते हैं। रेप की भी पुष्टि होती है। मामला तब राजनीतिक रंग ले लेता है, जब प्रियंका गाँधी इस मामले को लेकर ट्वीट करती हैं।

26 अगस्त को इस मामले को लेकर प्रियंका गाँधी का ट्वीट

26 अगस्त की शाम होते-होते लखीमपुर खीरी की पुलिस ने इस मामले को सॉल्व कर लिया। आरोपित दिलशाद पकड़ा गया। हत्या में उपयोग किया गया चाकू भी बरामद कर लिया गया। आरोपित ने अपना गुनाह भी कबूल कर लिया। मतलब केस 24 घंटे के भीतर सुलझा लिया गया।

घटना के संबंध में नीमगाँव थाना का प्रेस नोट

रेप और हत्या मामले में एक और ट्विस्ट है। गाँव कनेक्शन की रिपोर्ट के अनुसार मृत लड़की की शादी उसके परिवार द्वारा कहीं और तय कर दी गई थी। प्रेमी दिलशाद को यह फैसला पसंद नहीं आया। मृत लड़की ने अपने परिवार के फैसले के खिलाफ नहीं जाने की बात दिलशाद को बताई। इस बात को लेकर दिलशाद गुस्से में आ गया। फिर उसने पहले अपनी प्रेमिका का रेप किया और बाद में चाकू से गला काट कर हत्या कर दी।

हत्या से एक दिन पहले 13 बार मोबाइल पर बात

लखीमपुर खीरी जिले के एसपी कार्यालय से जारी प्रेस नोट के अनुसार मृतका के शव के पास से उनका मोबाइल व हत्या में उपयोग किया गया चाकू पुलिस ने बरामद कर लिया है। सभी पहलुओं की जाँच में जब मोबाइल कॉल की जाँच की गई तो पाया गया कि मृतका और संदिग्ध दिलशाद के बीच पिछले कई महीने से मोबाइल पर बात हो रही थी। घटना से एक दिन पहले भी दोनों के बीच 13 बार बात हुई थी। संदेह के आधार पर पुलिस ने जब दिलशाद से पूछताछ की तो उसने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया।

मृतका के परिजनों के मुताबिक वह सोमवार को घर से निकली थीं। उन्हें पास के शहर में स्कॉलरशिप का ऑनफार्म भरने के लिए जाना था। लेकिन वो लौट कर घर नहीं आईं तो पुलिस को इसकी सूचना दी गई। मृतका और हत्या आरोपित दिलशाद के बीच संबंध शायद चोरी-छिपे थे क्योंकि लड़की के चाचा शुरुआत में कहा था, ”मैं वास्तव में कुछ नहीं जानता, किस पर संदेह है, कुछ नहीं कह सकता।”

लव जिहाद का एंगल क्यों?

प्रियंका गाँधी द्वारा मामले को राजनीतिक तूल देने और पुलिस द्वारा 24 घंटे के भीतर केस को सॉल्व करने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने इस मुद्दे को उठाया।

शलभ मणि त्रिपाठी ने प्रियंका गाँधी को कहा, “अब एक दलित बेटी हुई लव जेहाद का शिकार। दर्ज़ी दिल़शाद ने कपड़ा सिलने के बहाने दोस्ती की और जुट गया लव ज़ेहाद में। लड़की निकाह को तैयार ना हुई तो दरिंदे ने बेरहमी से रेप और हत्या कर डाली। इस खुलासे के बाद प्रियंका गाँधी एक शब्द लव जिहाद पर भी बोल दें, अगर वोट बैंक का डर ना हो तो।

लव जिहाद मामला कुछ दिन पहले कानपुर में भी नजर आया। 2 महीने में कानपुर इलाके में घर से भागी 5 लड़कियाँ। इन पाँचों लड़कियों के भागने और जिन आरोपितों के संग वो भागीं, इन सबका संबंध जूही कॉलनी से है। IG ने इस संबंध में जाँच के लिए टीम गठित करने को भी कहा है।

शिवसेना सांसद ने दिया इस्तीफा, कहा – ‘अपने कार्यकर्ताओं के साथ नहीं कर पा रहा न्याय, NCP है मूल वजह’

महाराष्ट्र के सत्ताधारी दल शिवसेना में खींचतान का दौर जारी है। वही खींचतान अब सतह पर नज़र आ रही है। परभणी से शिवसेना सांसद संजय जाधव ने लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया है। इसका कारण जिंतुर नगरपालिका में एनसीपी का दखल बताया जा रहा है। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र भी लिखा है। जिसमें उनका कहना है कि वह अपने दल के कार्यकर्ताओं से न्याय करने में असमर्थ हैं।   

संजय जाधव ने अपने पत्र में यह लिखा कि वह अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ न्याय नहीं कर पा रहे हैं। इस आधार पर उन्हें सांसद बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। इसके अलावा उन्होंने यह भी लिखा कि पिछले 8-10 महीनों से परभणी में जिंतुर नगरपालिका में प्रशासक नियुक्ति का मामला वह देख रहे हैं। वहाँ फिलहाल एनसीपी के एक व्यक्ति को गैर सरकारी प्रशासक के रूप में नियुक्त किया गया है। यह शिवसेना के कार्यकर्ताओं के साथ अपमान जैसा है और यह अस्वीकार्य है।  

संजय जाधव ने अपने इस्तीफ़े का पत्र 25 अगस्त को लिखा था। हालांकि संजय जाधव ने यह भी कहा कि भले पार्टी कार्यकर्ताओं को इंसाफ न मिले। लेकिन वो बतौर शिवसैनिक पार्टी के लिए काम करते रहेंगे। वहीं शिवसेना के नेता एकनाथ शिंदे के मुताबिक़ यह मामला हल हो गया था। उन्होंने कहा था, “अगर सरकार में या पार्टी के भीतर किसी भी तरह के विवाद हैं तो शीर्ष नेतृत्व हल करेगा।”

बीते कुछ समय में शिवसेना और एनसीपी कार्यकर्ताओं के बीच महाराष्ट्र के कई शहरों में पदों के संबंध में विवाद की ख़बरें सामने आई हैं। दोनों ही दलों के कई नेता इस मुद्दे पर अपनी असहमति जता चुके हैं। लेकिन दलों के शीर्ष नेता अक्सर यही कहते हुए नज़र आते हैं कि गठबंधन में सब कुछ सही है। दोनों दलों के नेताओं के बीच किसी भी तरह का मनमुटाव नहीं है। लेकिन सांसद संजय जाधव का इस्तीफ़ा होने के बाद सतह पर ऐसा नहीं नज़र आता है।      

अभी से लगभग साल भर पहले जब विधानसभा चुनाव के बाद उद्धव ठाकरे ने भाजपा का साथ छोड़ कर एनसीपी और कॉन्ग्रेस के साथ मिल कर महाराष्ट्र में सरकार बनाई थी, तभी से तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। इसके पहले तक दोनों दल एक दूसरे के वैचारिक स्तर पर विरोधी रहे हैं। ऐसे में राजनीतिक दृष्टिकोण से अंतिम नतीजे क्या होते हैं, इस पर कुछ भी कहना कठिन!     

JEE-NEET: 150 से अधिक यूनिवर्सिटी के VC ने PM मोदी को लिखा समर्थन में पत्र, कहा- छात्रों को एक वर्ष गँवाना नहीं पड़ेगा

भारत और विदेशों के विभिन्न विश्वविद्यालयों के 150 से अधिक शिक्षाविदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा है कि मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE (मुख्य) और NEET में यदि और देरी हुई तो छात्रों का भविष्य प्रभावित होगा।

बुधवार (अगस्त 26, 2020) को लिखे गए इस पत्र में कहा गया है, ”युवा और छात्र राष्ट्र का भविष्य हैं लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण, उनके करियर पर अनिश्चितताओं के बादल छा गए हैं। प्रवेश और कक्षाओं के बारे में बहुत सारी आशंकाएँ हैं, जिन्हें जल्द से जल्द हल करने की आवश्यकता है।” पत्र में कहा गया है कि हर साल की तरह इस साल भी लाखों छात्रों ने अपनी कक्षा 12 की परीक्षाएँ दी हैं और अब प्रवेश परीक्षाओं का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे हैं।

इसके साथ ही, पत्र में यह भी लिखा गया है, “सरकार ने जेईई-मेन्स के लिए तारीखों की घोषणा की है और परीक्षा आयोजित करने में किसी भी तरह की देरी के कारण छात्रों के लिए कीमती वर्ष की बर्बादी होगी। हमारे युवाओं और छात्रों के सपनों और भविष्य से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता है। हालाँकि, कुछ हमारे छात्रों के भविष्य के साथ खेलने की कोशिश कर रहे हैं ताकि वे अपने स्वयं के राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ा सकें और सरकार का विरोध कर सकें।”

कई विश्वविद्यालयों के वीसी ने लिखा पत्र

इस पत्र में हस्ताक्षरकर्ताओं में दिल्ली विश्वविद्यालय से श्री प्रकाश सिंह, इग्नू के प्रोफेसर सीबी शर्मा, लखनऊ विश्वविद्यालय, जेएनयू, बीएचयू, महात्मा गाँधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी, बिहार के वीसी प्रोफेसर संजीव शर्मा, गुजरात के वीसी अमी उपाध्याय, केरल सेंट्रल यूनिवर्सिटी के प्रो-वीसी प्रोफेसर जयप्रसाद, आईआईटी दिल्ली और विदेशी विश्वविद्यालयों जैसे लंदन विश्वविद्यालय, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, द हिब्रू विश्वविद्यालय और बेन गुरियन विश्वविद्यालय, इज़राइल में कार्यरत भारत के शिक्षाविद शामिल हैं।

उन्होंने कहा, “हम दृढ़ता से मानते हैं कि केंद्र सरकार पूरी तरह से सावधानी बरतते हुए जेईई और एनईईटी परीक्षा का सफलतापूर्वक आयोजन करेगी, ताकि छात्रों के भविष्य का ध्यान रखा जा सके और 2020-21 के लिए अकादमिक कैलेंडर तैयार किया जा सके।”

NEET और JEE यानी, मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं के लिए 14 लाख से अधिक एडमिट कार्ड बुधवार को राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा जारी किए जाने के बाद डाउनलोड किए गए। वहीं, गैर-भाजपा शासित राज्यों ने परीक्षाओं को स्थगित करने के लिए संयुक्त रूप से उच्चतम न्यायालय जाने का फैसला किया।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने बुधवार (अगस्त 26, 2020) को केंद्र सरकार को घेरते हुए कहा कि छात्रों की समस्याओं और NEET-JEE परीक्षा के मुद्दे को नरेंद्र मोदी की सरकार ने बिना ध्यान दिए ही निपटा दिया है। इस बैठक के बाद 7 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने इन परीक्षाओं के आयोजन के सम्बन्ध में सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का फैसला लिया है।

वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कॉन्ग्रेस शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों, कॉन्ग्रेस समर्थित सरकारों के मुख्यमंत्रियों और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की एक बैठक को संबोधित करते हुए, सोनिया गाँधी ने कहा, “हमें केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करना होगा और साथ ही उनसे लड़ना होगा। छात्रों की समस्याओं और NEET और JEE परीक्षा के मुद्दों को केंद्र द्वारा अनजाने में निपटा दिया गया है।”

इस कॉन्फ्रेंसिंग में मौजूद सभी मुख्यमंत्रियों ने केंद्र सरकार से परीक्षा की तारीख को आगे बढ़ाने का आग्रह किया है। ममता बनर्जी के अलावा इस बैठक में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भी शामिल थे।

NEET की परीक्षा आगामी 13 सितंबर को है, जबकि इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई मेंस 1-6 सितंबर से निर्धारित है। करीब 9.53 लाख उम्मीदवारों ने जेईई-मेन्स के लिए पंजीकरण किया है और 15.97 लाख छात्रों ने एनईईटी के लिए पंजीकरण किया है। इन परीक्षाओं को पहले से ही कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर दो बार टाला जा चुका है।

बंगाल में तस्करों से ₹35.3 करोड़ की देवी पार्वती, मनसा, भगवान विष्णु और सूर्य सहित 25 प्राचीन मूर्तियाँ बरामद

पश्चिम बंगाल कस्टम की प्रीवेंटिव यूनिट की टीम ने 25 प्राचीन मूर्तियों को जब्त किया है, उनकी कीमत 35.3 करोड़ रुपए बताई जा रही है। इसमे हिंदू देवी-देवता के साथ जैन धर्म से जुड़ी मूर्ति भी पाई गई हैं।

जानकारी के मुताबिक 23 अगस्त की रात, पश्चिम बंगाल के आयुक्तालय (निवारक) के अधिकारियों ने गुप्त सूचना के आधार पर दक्षिण दिनाजपुर जिले में एक ट्रक को कालियागंज सीमा के पास रोका। जब ट्रक की तलाशी ले गई तो उसमें अधिकारियों को धान के नीचे छिपी यह बेशकीमती मूर्तियाँ मिलीं।

बता दें जब्त की गई 25 प्राचीन मूर्तियों में, देवी पार्वती, मनसा देवी, भगवान विष्णु और भगवान सूर्य की सात पत्थर की मूर्तियाँ थीं। हिंदू और जैन मंदिरों में धातु की मूर्तियों के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कांस्य और ऑक्टो मिश्र धातु से बनी सात धातु की मूर्तियाँ और अन्य 11 टेराकोटा मूर्तियों के अलावा सभी जब्त किए गए प्राचीन वस्तुएँ 9 वीं शताब्दी ईस्वी से 16वीं शताब्दी तक की है।

ट्रक से मूर्तियों को जब्त कर लिया गया है। वहीं मूर्तियों को नॉर्थ बंगाल विश्वविधालय के अक्षय पुरातत्व म्यूजियम को सौंप दिया गया है। जहाँ अक्षय कुमार मैत्रेय विरासत संग्रहालय के विशेषज्ञों की मदद से इनकी कीमत की पहचान की गई है। विशेषज्ञों की मदद से कस्टम अधिकारियों को पता चला कि इनकी कीमत 35.3 करोड़ रुपए है।

पश्चिम बंगाल के कस्टम अधिकारियों ने इसके पहले भी 11 करोड़ की 7 मूर्तियाँ बरामद की थी। सीमा से मूर्तियों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी को लेकर कस्टम ने जाँच तेज कर दी है।

JEE और NEET परीक्षा के विरोध में हाथ पर ब्लेड लगाने की पुरानी तस्वीरों के जरिए कॉन्ग्रेस आईटी सेल फैला रहा झूठ

लाखों छात्रों के भविष्य और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मद्देनजर केंद्र सरकार ने JEE और NEET परीक्षा कराने का फैसला किया है, लेकिन कॉन्ग्रेस और कुछ गैरजिम्मेदार राजनीतिक पार्टियाँ इसके खिलाफ देश भर के युवाओं को उकसाने का प्रयास कर रही हैं। 

इसके अलावा सोशल मीडिया के जरिए भी युवाओं को भ्रमित करने की साजिश रची जा रही है। कई फर्जी ट्वीट अकाउंट से पुरानी तस्वीरें पोस्ट कर JEE और NEET परीक्षा के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है।

Debjani नाम के सोशल मीडिया हैंडल से इस बात का खुलासा किया गया है कि किस तरह कुछ लोग फेक अकाउंट से परीक्षा के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। उन्होंने बताया कि कैसे हाथ पर ब्लेड लगाने की पुरानी तस्वीरों को बच्चों का बता कर कॉन्ग्रेस आईटी सेल झूठ फैला रहा है। 

उन्होंने बताया कि कुछ लोग साजिश के तहत युवाओं में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं कि छात्र JEE-NEET परीक्षा के खिलाफ हैं। सोशल मीडिया यूजर्स ने बताया कि कॉन्ग्रेस आईटी सेल 4 साल पुरानी यानी 2016 की ब्लेड से हाथ काटने की तस्वीर को छात्र का बताते हुए शेयर की जा रही है।

उन्होंने यह भी बताया कि जिस ट्विटर हैंडल से यह शेयर किया जा रहा है वह फेक आईडी है। इसे 2020 में ही बनाया गया है और इसके टाइमलाइन पर प्रो कॉन्ग्रेसी ट्वीट्स भरे हुए हैं।

बता दें कि AnanyaS06358832 हैंडल से एक ट्विटर यूजर ने हाथ पर ब्लेड लगाने की एक तस्वीर को शेयर किया। इसके साथ दावा किया गया कि वह शेड्यूल के अनुसार परीक्षा को जारी रखने के सरकार के फैसले के खिलाफ आत्महत्या कर रही है।

हालाँकि, रिवर्स इमेज सर्च करने पर पता चलता है कि यह इंटरनेट पर काफी समय से उपलब्ध है और इसे ट्विटर पर कई बार शेयर किया जा चुका है। जब काफी सोशल मीडिया यूजर्स ने बताया कि यह तस्वीर गूगल से ली गई है, तो ट्विटर यूजर ने ट्वीट डिलीट कर दिया।

एक अन्य ट्विटर यूजर ने हाथ से खून टपकने की एक और तस्वीर शेयरकी, जिसमें आरोप लगाया गया कि सरकार द्वारा परीक्षाओं को स्थगित करने के फैसले के बाद कई छात्रों ने आत्महत्या करने का प्रयास किया है। ट्विटर यूजर ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र के फैसले के कारण छात्र डिप्रेशन और मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं।

पॉलिटिकल साइंस के एक छात्र ने एक ट्वीट के जरिए आरोप लगाया गया है कि वह कोरोना वायरस महामारी और बाढ़ के कारण जेईई और एनईईटी की परीक्षा नहीं दे सकता।

कई अन्य यूजर्स ने भी कॉन्ग्रेस आईटी सेल की पोल खोलने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से इसके खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की है।

गौरतलब है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने दूरदर्शन के साथ बातचीत में बताया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले और छात्रों-अभिभावकों के दवाब के मद्देजनर NEET-JEE परीक्षा कराने का फैसला किया है ताकि स्टूडेट्स का साल बर्बाद न हो। 

उन्होंने बताया कि JEE परीक्षा के लिए अब तक 85 फीसदी स्टूडेंट्स एडमिट कार्ड डाउनलोड कर चुके हैं। निशंक ने कहा कि छात्रों की सुविधा को देखते हुए परीक्षा केंद्र आवंटित किए गए हैं। बता दें कि JEE की परीक्षा 1 से 6 सितंबर के बीच होनी हैं जबकि NEET परीक्षा 13 सितंबर को होगी। 

उधर, कॉन्ग्रेस और दूसरी राजनीतिक पार्टियाँ JEE-NEET परीक्षा को लेकर राजनीति करने पर उतर गई है। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने बुधवार (अगस्त 26, 2020) को NEET और JEE परीक्षा को लेकर 7 गैर बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की। 

इस बैठक में राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत, छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश सिंह बघेल, पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह, पुडुचेरी के सीएम नारायणसामी, महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे, झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हिस्सा लिया। 

ये सभी राज्य कोरोना काल में NEET और JEE की परीक्षा टालने की माँग कर रहे हैं। हालाँकि हकीकत यह है कि ये सभी मुख्यमंत्री अपने राज्यों में सारी गतिविधियों की अनुमति दे रखी हैं। कॉन्ग्रेस और विपक्षी पार्टियाँ अब युवाओं के कंधे पर बंदूक रखकर मोदी सरकार पर निशाना साधने की कोशिश कर रही हैं। एक तरफ ये नेता लॉकडाउन को लेकर लगातर ढील देने की वकालत कर रहे हैं तो दूसरी तरफ परीक्षा रद्द करने की माँग कर रहे हैं।