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अपनों पर हमला करने में ऊर्जा बर्बाद न करें: जितिन प्रसाद का समर्थन कर कपिल सिब्बल ने कॉन्ग्रेस पर साधा निशाना

पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने एक बार फिर अपनी ही पार्टी पर निशाना साधा है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है, “अफसोस की बात है कि जितिन प्रसाद को उत्तर प्रदेश में आधिकारिक तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। जरूरत इस बात की है कि कॉन्ग्रेस बीजेपी पर सर्जिकल स्‍ट्राइक करे न कि अपनों पर हमले करके अपनी ऊर्जा बर्बाद करे।”

पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद के खिलाफ कॉन्ग्रेसियों के विरोध-दर्शन के बाद यह ट्वीट आया है। इससे स्पष्ट है कि भले सोनिया गॉंधी को कॉन्ग्रेस ने छह और महीने के लिए अंतरिम अध्यक्ष चुन लिया हो पर पार्टी की अंदरूनी लड़ाई खत्म नहीं हुई है।

जितिन प्रसाद उन 23 नेताओं में शामिल थे जिन्होंने कॉन्ग्रेस नेतृत्व में बदलाव को लेकर सोनिया गाँधी को चिट्ठी लिखी थी। दरअसल बुधवार (26 अग्गास्त 2020) को लखीमपुर खीरी जिला कॉन्ग्रेस कमेटी की बैठक में जितिन प्रसाद समेत अन्य नेताओं की कड़ी आलोचना की गई थी। इन सभी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की माँग की गई थी। साथ ही इस संबंध में सोनिया गाँधी को प्रस्ताव भी भेजा गया था।   

बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाध्यक्ष प्रह्लाद पटेल ने भी इस मुद्दे पर बयान दिया था। उनका कहना था कि सोनिया गाँधी एक सर्वमान्य नेता हैं। साथ ही दल के लोग राहुल और प्रियंका पर पूरा भरोसा करते हैं। बैठक में शामिल अन्य नेताओं का कहना था कि जिस वक्त यह सब हुआ उस दौरान सोनिया गाँधी का स्वास्थ्य ठीक नहीं था। राजस्थान और मध्य प्रदेश की सरकार पर भाजपा हमलावर थी। ऐसे कठिन समय में जितिन प्रसाद समेत अन्य वरिष्ठ नेताओं ने पत्र लिख कर हस्ताक्षर किया। पत्र के माध्यम से सोनिया गाँधी की कार्यशैली पर ऊँगली उठाई। शीर्ष नेताओं की इस हरकत से यह साफ़ हो गया था कि वह सोनिया गाँधी पर बिलकुल भरोसा नहीं करते हैं। जो काम असल में भाजपा का था वह दल के ही लोग कर रहे थे, इससे दल की नींव ही कमज़ोर हुई।   

जितिन प्रसाद के विरोध में जारी किए गए निंदा प्रस्ताव में एक और अहम बात कही गई थी। निंदा प्रस्ताव के मुताबिक़ जितिन प्रसाद का पारिवारिक इतिहास गाँधी परिवार के विरोध का रहा है। जितिन प्रसाद के पिता ने खुद सोनिया गाँधी के विरोध में चुनाव लड़ा था। इसके बावजूद सोनिया गाँधी ने उन्हें पार्टी में जगह दी, लोकसभा का टिकट दिया और मंत्री भी बनाया था। लिहाज़ा जितिन प्रसाद की यह हरकत अनुशासनहीनता मानी जाएगी। इस बात का ज़िक्र करते हुए प्रस्ताव के अंत में जितिन प्रसाद पर कड़ी कार्रवाई की माँग उठाई गई थी। इसके अलावा बैठक के दौरान जितिन प्रसाद के विरोध में नारे भी लगाए गए थे।   

कॉन्ग्रेस कार्यसमिति की बैठक में राहुल गाँधी ने भी इस पत्र के समय पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने इस मुद्दे पर सवाल करते हुए कहा था कि पार्टी नेताओं द्वारा यह पत्र ऐसे वक्त में लिखा गया जब सोनिया गाँधी अस्पताल में भर्ती थीं। नेतृत्व पर सवाल करते हुए यह पत्र ऐसे समय में लिखा गया जब राजस्थान कॉन्ग्रेस सरकार पर संकट था। राहुल ने कथित तौर पर इसमें बीजेपी के साथ मिलीभगत की बात भी कही थी।

इसके बाद कपिल सिब्बल ने ट्वीट कर कहा था, “राहुल गाँधी कहते हैं कि हमारी बीजेपी के साथ साँठ-गाँठ है, राजस्थान हाईकोर्ट में पार्टी को सफलता दिलाई। मणिपुर में बीजेपी के खिलाफ पूरी ताकत से पार्टी का बचाव किया। पिछले 30 सालों में बीजेपी के पक्ष में एक भी बयान नहीं दिया। फिर भी हम पर बीजेपी से साँठ-गाँठ का आरोप लग रहा है।” हालॉंकि बाद में उन्होंने यह कहते हुए यह ट्वीट वापस ले लिया था कि उनकी राहुल से बात हुई है और उन्होंने ऐसी कोई बात नहीं कही थी।

आरोप भी रिया के, सफाई भी रिया की: सुशांत सिह राजपूत की मौत पर राजदीप की ‘अवसाद’ पत्रकारिता

रिया चक्रवर्ती ने इंडिया टुडे से बात करते हुए सुशांत सिंह राजपूत मामले में अपना पक्ष रखा है। रिया ने कहा यूरोप यात्रा के दौरान उन्हें पता चला कि सुशांत मानसिक रूप से अस्वस्थ्य हैं। यह साक्षात्कार 27 अगस्त 2020 को रात 9 बजे प्रसारित होगा। फ़िलहाल इंडिया टुडे समूह ने इस साक्षात्कार का एक छोटा सा हिस्सा साझा किया है।

साक्षात्कार में साफ तौर पर समझा जा सकता है कि राजदीप सरदेसाई सुशांत सिंह की कथित मानसिक बीमारी पर ज़ोर दे रहे हैं। उनकी बातों से ऐसा लग रहा है जैसे मानसिक बीमारी का आरोप वास्तविक तथ्य है। जबकि सुशांत सिंह का परिवार इस मुद्दे पर अपना पक्ष पहले ही रखा चुका है। उन्होंने कहा था कि पहले कभी सुशांत सिंह को इस तरह की कोई दिक्कत नहीं हुई थी। न ही किसी विशेषज्ञ ने उनके संबंध में ऐसा कुछ कहा था। सुशांत पर मानिसक रूप से बीमार होने का आरोप अभी तक सिर्फ और सिर्फ रिया चक्रवर्ती ने लगाया है, जिन पर खुद इस मामले के संबंध में जाँच चल रही है।   

इस कड़ी में बॉलीवुड से जुड़े कुछ ऐसे लोगों ने भी सुशांत सिंह को मानसिक रूप से बीमार बता दिया, जिनका असल मायनों में सुशांत सिंह राजपूत से दूर-दूर तक कोई लेना देना ही नहीं था। रिया चक्रवर्ती के अलावा सार्वजनिक रूप से सिर्फ एक और व्यक्ति ने सुशांत सिंह को लेकर यह दावा किया था। वह सुशांत सिंह की कथित तौर पर काउंसलर थी। लेकिन उसके पास इस तरह के मामलों को देखने के लिए उचित योग्यता तक नहीं थी। उसने बरखा दत्त को दिए साक्षात्कार में इस बात का खुलासा किया था।   

अपने इस साक्षात्कार में रिया चक्रवर्ती ने सुशांत सिंह राजपूत के साथ यूरोप यात्रा के बारे में बताया। रिया ने कहा कि जब हम यूरोप के लिए निकलने वाले थे तब सुशांत ने कहा था कि वह हवाई जहाज के भीतर claustrophobic महसूस करते हैं। सुशांत ने इसके लिए दवाइयाँ भी ली थी लेकिन बिना किसी परामर्श के।

सुशांत इस यात्रा के लिए शुरू से ही उत्साहित थे लेकिन वह तीन दिन तक पेरिस में अपने होटल के कमरे से बाहर नहीं निकले। रिया ने कहा “सुशांत इस यात्रा को लेकर बहुत खुश था। उसने यह भी कहा था कि इस यात्रा में ही पता चलेगा कि उसके व्यक्तित्व के बाकी पहलू क्या हैं? सुशांत ने मुझे कहा था कि हम सड़कों पर पैदल घूमेंगे, वह मेरे साथ हर ख़ुशी मनाएगा जो भारत में नहीं हो पाया था। हम असल मायनों में बहुत खुश थे।” 

इसके बाद रिया ने कहा सुशांत स्विट्ज़रलैंड तक सामान्य था, लेकिन जैसे ही हम इटली पहुँचे कुछ दिक्कतें शुरू हुई। उन्होंने एक होटल का कमरा बुक किया जो Gothic (एक तरह का कबीला) था। कमरे का आकार गुम्बद जैसा था और उसमें अजीबोगरीब तस्वीरें लगी हुई थीं। रिया ने होटल बदलने की बात कही, लेकिन सुशांत ने मना कर दिया। रिया के मुताबिक़ इसके बाद सुशांत की हालत बिगड़ने लगी और बेचैनी होने लगी। इसके बाद सुशांत ने कहा कि साल 2013 में उसे अवसाद की परेशानी हुई थी। तब वह हरेश शेट्टी नाम के चिकित्सक से मिला था। उन्होंने ही सुशांत को वह दवाई लेने के लिए कहा था जो सुशांत ने हवाई जहाज में बैठने के बाद ली थी। रिया के मुताबिक़ जब सुशांत की हालत बिगड़ी तब उन्होंने यात्रा समाप्त करने का फैसला लिया।   

इसके बाद राजदीप ने पूछा कि यूरोप की दूसरी यात्रा के दौरान रिया का भाई शोविक उनके साथ क्यों गया था। इस पर रिया ने कहा शोविक की सुशांत सिंह के साथ अच्छी बातचीत थी। सुशांत ने ही इस बात पर ज़ोर दिया था कि शोविक उनके साथ यूरोप की यात्रा पर जाए। वह अक्सर शोविक को ‘सौतन’ कह कर चिढ़ाते थे। रिया ने यह भी कहा कि Rhealityx नाम की जिस कंपनी में सुशांत, शोविक और वह साझेदार थे, इसका नाम भी सुशांत ने ही तय किया था। रिया के मुताबिक़ जब तक शोविक के पास कोई काम नहीं था तब तक रिया ने उसके शेयर के पैसे भी दिए थे।   

रिया ने कहा कि फ़िलहाल जिस तरह की बातें की जा रही हैं कि सुशांत सिंह उनका खर्च उठा रहे थे, इस तरह के दावे पूरी तरह गलत हैं और वह एक जोड़े की तरह ज़रूर रह रहे थे। रिया ने कहा,”पेरिस की एक कपड़े की कंपनी Shein के लिए उसका शूट होना था। कंपनी ने उसे बिज़नेस क्लास का टिकट भेजा था, इस पर सुशांत ने कहा कि साथ समय बिताने का यह अच्छा मौक़ा है। इसके बाद सुशांत ने उसकी टिकट रद्द कराई और फर्स्ट क्लास टिकट बुक कराई।” 

इसके बाद रिया ने यह भी कहा कि सुशांत किसी चीज़ से समझौता नहीं करता था, वह राजा की तरह रहना पसंद करता था। रिया को यूरोप की यात्रा के दौरान ऐसा लगा कि सुशांत खूब खर्च कर रहा है, लेकिन बाद में समझ आया कि वह ऐसा है ही। इसके पहले वह अपने दोस्तों के साथ थाइलैंड की यात्रा पर भी गया था। उस यात्रा के दौरान सुशांत ने लगभग 70 लाख रुपए खर्च किए थे। उसे बड़े लोगों की तरह रहना पसंद था।   

राजदीप सरदेसाई का रवैया सुशांत सिंह मामले की जाँच पर बेहद आलोचनात्मक रहा है। इसके पहले राजदीप ने बयान दिया था कि सुशांत के परिजनों को शांति से शोक मनाना चाहिए। साथ ही राजदीप ने सुशांत सिंह राजपूत मामले की जाँच शुरू होते ही आपत्ति भी जताई थी। जब एक आईपीएस अधिकारी ने यह बताया था कि हर अप्राकृतिक मौत की जाँच करना कानूनी दायरे में आता है, तब राजदीप सरदेसाई ने इस मुद्दे पर अपनी असहमति जताई थी।   

राजदीप सरदेसाई का ट्वीट

बाद में मामले की जाँच सीबीआई को सौंप दी गई थी। इस पर राजदीप ने ट्वीट करते हुए लिखा था, “जहाँ देश कोरोना जैसी महामारी से जूझ रहा है, बाढ़ जैसे हालत हैं। वहाँ सीबीआई को सुशांत सिंह राजपूत मामले की जाँच करने का आदेश दिया जा रहा है।“ कुल मिला कर राजदीप सरदेसाई को इस बात की चिंता थी कि सरकार के संसाधन बर्बाद हो रहे हैं, जबकि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि बाढ़ और कोरोना वायरस का सीबीआई से कोई लेना-देना ही नहीं है। लेकिन अपराध का सीबीआई से ज़रूर लेना-देना है। 

मुहर्रम पर जुलूस निकालने की माँग खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने कहा – ‘अनुमति दी तो फैलेगी अराजकता’

सुप्रीम कोर्ट ने मुहर्रम जुलूस निकालने की माँग वाली याचिका को आज (अगस्त 27, 2020) सुनवाई के दौरान खारिज कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर मुहर्रम जुलूस निकालने की इजाजत देंगे तो इससे अराजकता फैलेगी।

कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा, “अगर हम जुलूस निकालने की अनुमति दे देंगे तो इससे आराजकता फैलेगी और फिर एक समुदाय विशेष को कोरोना फैलाने के नाम पर लक्षित किया जाएगा, जो सुप्रीम कोर्ट नहीं चाहेगा।” अदालत ने यह भी कहा कि वह ऐसा कोई आदेश नहीं देंगे जिससे लोगों के स्वास्थ्य को खतरा हो।

पीठ ने वकील द्वारा शिया धर्मगुरु कल्बे जव्वाद के उस तर्क को भी खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने बताया था कि जगन्नाथ पुरी मंदिर में रथ यात्रा की अनुमति दी गई थी।

पीठ ने पुरी यात्रा को लेकर कहा कि वह यात्रा एक जगह पर होती है और याचिकाकर्ता पूरे देश के लिए इजाजत माँग रहे हैं। अगर किसी एक जगह की बात होती, तो खतरे का आँकलन करके आदेश दिया जा सकता था।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एसए बोबड़े की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मुहर्रम के जुलूस के लिए कोई निश्चित स्थान नहीं होता है, जहाँ प्रतिबंध और सावधानी बरती जा सकती है। बेंच ने कहा कि आप एक समुदाय के लिए पूरे देश के लिए अस्पष्ट निर्देश माँग रहे हैं।

बता दें कि मुहर्रम जुलूस निकालने के लिए शिया धर्म गुरु कल्बे जव्वाद ने याचिका दाखिल की थी। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह पूरे देश पर लागू होने वाला कोई आदेश नहीं दे सकते। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कोर्ट से अपील की थी कि हमें कम से कम लखनऊ में जुलूस की इजाज़त दी जाए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने उनसे इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने को कहा।

गौरतलब है कि पूरे देश में मुहर्रम का त्योहार 29 अगस्त को मनाया जाना है। ऐसे में कोर्ट ने इस याचिका को भी खारिज कर दिया जिसमें मुहर्रम जुलूस में केवल 5 लोगों को ही शामिल होने की इजाजत माँग थी।

मुख्तार अंसारी की अवैध इमारत ध्वस्त, तोड़ने का खर्च भी वसूलेगी यूपी सरकार

लखनऊ प्रशासन ने गुरुवार (अगस्त 27, 2020) को माफिया मुख्तार अंसारी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। प्रशासन ने डालीबाग कॉलोनी में अंसारी की एक अवैध संपत्ति को ध्वस्त कर दिया।

बताया जा रहा है कि अवैध निर्माण को गिराने का खर्च भी यूपी सरकार मुख्तार अंसारी से ही वसूलेगी। अवैध आवासीय परिसर को गिराने की कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी पुलिस बल मौजूद था।

लखनऊ प्रशासन ने कहा है, “डालीबाग कॉलोनी के पास गैंगस्टर मुख्तार अंसारी की अवैध रूप से स्वामित्व वाली संपत्ति को ध्वस्त कर दिया गया है। तोड़ने में हुआ खर्च भी उससे वसूला जाएगा। जिन अधिकारियों के अधीन यह अवैध निर्माण हुआ, उनकी जिम्मेदारी तय की जाएगी और उन पर भी कार्रवाई की जाएगी।”

गौरतलब है कि इससे पहले भी यूपी पुलिस ने अपराधियों पर नकेल कसते हुए अवैध रूप से कब्जा की गई जमीन और अवैध तरीकों से अर्जित की गई 39.80 करोड़ रुपए की संपत्तियों को मुख्तार के करीबियों से मुक्त कराया था। इसके साथ ही मुख्तार अंसारी गिरोह से जुड़े लोगों के 33 असलहों के लाइसेंस भी निलंबित कर पुलिस थानों में जमा करवाया था।

वहीं वाराणसी पुलिस ने 11 जुलाई को गैंगस्टर एक्ट के तहत अंसारी के एक अन्य सहयोगी श्रीप्रकाश मिश्रा उर्फ ​​झुनना पंडित की संपत्तियों को भी जब्त कर लिया था।

उल्लेखनीय है कि पुलिस अधीक्षक गाजीपुर ओपी सिंह ने माफिया मुख्तार अंसारी को लेकर कहा था, “अंसारी और उनके सहयोगियों के अवैध कब्जे से 33.8 करोड़ रुपए की संपत्ति पहले ही मुक्त हो चुकी। उनके लाइसेंस रद्द करने के बाद कम से कम 33 हथियार जब्त किए गए हैं और जमा किए गए हैं। अंसारी के साथ मिलकर अवैध कारोबार चलाने वाले कम से कम 17 बदमाशों की पहचान की गई है और उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।”

बता दें की पिछले साल पुलिस ने मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी के घर से छह हथियार और 4,431 कारतूस जब्त किए गए थे। उसने कथित तौर पर एक ही लाइसेंस पर सभी हथियारों को खरीदा था।

दुर्गा पूजा के लिए नहीं बनेंगे पंडाल, गणेश पूजा करने वालों पर होगी कार्रवाई: जमशेदपुर में झारखंड पुलिस का निर्देश

कोरोना संक्रमण काल में दुर्गा पूजा के आयोजन को लेकर हर राज्य से अलग-अलग समाचार आ रहे हैं। कृष्ण जन्माष्टमी की तरह ही वैश्विक महामारी कोविड-19 का असर दुर्गा पूजा के आयोजन पर पड़ना तय माना जा सकता है क्योंकि दुर्गा पूजा के आयोजन पर कई तरह की पाबंदियाँ रहने वाली हैं।

झारखंड स्थित जमशेदपुर में पुलिस ने दुर्गा पूजा को लेकर निर्देश दिए हैं कि सार्वजानिक स्थानों पर किसी प्रकार का आयोजन नहीं किया जाएगा और सभी लोग अपने ही घरों और मंदिरों में पूजा करेंगे।

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, जमशेदपुर सिटी एसपी सुभाष चन्द्र जाट ने सार्वजानिक स्थलों पर आयोजन और जुलूस ना करने की बात कही है। इसके साथ ही जमशेदपुर प्रशासन ने अखाड़ा समितियों के साथ बैठक कर संप्रदाय विशेष के मुहर्रम के सम्बन्ध में भी गाइडलाइन जारी की हैं।

प्रशासन ने सभी पुलिस थानों को निर्देश दिया है कि दुर्गा पूजा के लिए कोई पंडाल नहीं बनाया जाएगा और सिर्फ मंदिर में ही पूजा की जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने कहा कि कुछ जगहों पर गणेश पूजा की गई और विसर्जन जुलूस भी निकाले गए, जिन्हें चिन्हित कर मामला दर्ज किया गया है।

ज्ञात हो कि गणेश पूजा के बाद ही लगभग हर शहर में माँ दुर्गा की मूर्ति निर्माण के लिए तैयारियाँ शुरू हो जाती हैं। 17 अक्टूबर से प्रारंभ हो रहे दुर्गा पूजा में समय है और प्रशासन द्वारा इसकी तैयारियों को लेकर कठोर निर्देश भी जारी कर दिए हैं, जिससे माँ दुर्गा के मूर्ति निर्माण जैसे उद्योग भी प्रभावित होंगे। वहीं, संप्रदाय विशेष के धर्मावलंबियों की ओर से मातम का त्योहार मुहर्रम बृहस्पतिवार से मनाया जाएगा।

‘फ्लाइट में बैठने से सुशांत को लगता था डर’ – रिया चक्रवर्ती के ‘राजदीप इंटरव्यू’ की अंकिता लोखंडे ने खोली पोल

आजतक पर राजदीप सरदेसाई को ‘सुपर एक्सप्लोसिव इंटरव्यू’ देते हुए रिया चक्रवर्ती ने अपने ऊपर लग रहे कई आरोपों पर जम कर सफाई दी। उन्होंने राजदीप से अपने व सुशांत के यूरोप ट्रिप पर बातें की। 

इस बीच उन्होंने एक जगह ये बोल दिया कि सुशांत को फ्लाइट में बैठने से डर लगता था। वह उसके लिए दवाई भी लेते थे। अब उनके इसी बयान ने तूल पकड़ लिया है। सुशांत की एक्स गर्लफ्रेंड अंकिता ने एक वीडियो पोस्ट करके रिया पर पलटवार किया है

अंकिता ने सुशांत की उस वीडियो को ट्वीट किया, जिसमें वह खुद ही प्लेन उड़ा (हालाँकि यह शायद flight simulator हो) रहे थे। उन्होंने लिखा, “क्या यह Claustrophobia है? (सुशांत) तुम हमेशा उड़ना चाहते थे और तुम उड़े भी। हम सभी को तुम पर गर्व है।”

बता दें कि अंकिता लोखंडे सुशांत को लंबे समय से जानती थीं। वह उनके साथ पवित्र रिश्ता में काम करने के दौरान रिलेशन में आईं। बाद में दोनों के बीच 6 साल तक रिश्ता रहा। इसके बाद साल 2016 में दोनों के अलग होने की खबरें मीडिया में आईं। मगर, दोनों ने कभी भी एक दूसरे के लिए कुछ नहीं बोला।

सुशांत के जाने के बाद से ही अंकिता उनके परिवार के साथ खड़ी नजर आ रही हैं। अंकिता ने ही सुशांत की मौत के पीछे सबसे पहले डिप्रेशन के कारण को नकारा था। उन्होंने सुशांत के भीतर की जिजीविषा को उदाहरण दे देकर सबके सामने रखा था। उन्होंने ही मीडिया को बताया था कि सुशांत जैसा इंसान जिसके सपने इतने ऊँचे हों, वह डिप्रेशन में कैसे हो सकता है।

बता दें कि अंकिता लोखंडे के दावे के अलावा सुशांत के इंटरव्यू भी इस बात साक्ष्य हैं कि सुशांत को ऊँचाइयों से या प्लेन से कभी डर नहीं लगता था। वह अक्सर ये बातें कहते थे कि उनके जीवन का लक्ष्य प्लेन उड़ाने के लिए लाइसेंस पाना था। इसके अलावा वह अंतरिक्ष और चांद पर जाने की इच्छा भी कई बार जाहिर कर चुके थे।

इसके अलावा उन्हें नासा जाने का मौका भी मिला था। उस समय सुशांत ने कहा था “मैंने 2 साल पहले नासा के साथ एक वर्कशॉप की थी, जिन्होंने मुझे ट्रेनिंग दी थी। मुझे वहाँ पर इंस्ट्रक्टर का सर्टिफिकेट भी मिला था। मैं सोच रहा हूँ कि अब मैं अपनी ट्रेनिंग पूरी करने हॉस्टन चला जाऊँ। वह पर स्पेस से जुड़ी काफी बातें बताते हैं।”

सुशांत ने उस दौरान यह भी बताया कि उन्होंने चाँद पर एक प्लॉट खरीदा है और नासा 2024 में कुछ एस्ट्रोनॉट्स को चाँद पर भेजेगा। उन्होंने यह भी कहा था, “मैं भी चाँद पर जाना चाहता हूँ। मैं उसके लिए पूरी तैयारी करूँगा, बाकी मेरी किस्मत पर डिपेंड करता है कि मैं जा पाता हूँ या नहीं।”

जिस हीर खान ने दी थी हिंदू देवी-देवताओं को गाली, वो पाकिस्तानी युवकों से वॉट्सऐप पर करती थी चैट

हिंदू देवी-देवताओं पर अपमानजनक और अमर्यादित टिप्पणी करने वाली हीर खान पर राष्ट्रदोह का मामला दर्ज किया गया। इसके बाद बुधवार को उसे जेल में बंद कर दिया गया। फ़िलहाल उससे पूछताछ के दौरान कई हैरान कर देने वाली बातें सामने आ रही हैं। सबसे ताज़ा खुलासे में उसने बताया कि वह पाकिस्तान के दो युवकों से व्हाट्सएप पर बातचीत करती थी। इसके अलावा उसने बताया कि आतंकवादी मसूद अज़हर का वीडियो देख कर उसने भी नफ़रत फैलाना शुरू किया था।   

पुलिस के मुताबिक़ रिमांड पर उससे आगे की पूछताछ की जाएगी। दैनिक जागरण में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़ हीर खान सऊदी अरब, हैदराबाद, दिल्ली, कानपुर, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र और लखनऊ के एक मौलाना के भी संपर्क में थी। आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) और खुफ़िया एजेंसी के लोगों ने हीर को जेल भेजने के पहले उससे लंबी पूछताछ की। इस बातचीत में उसने और भी कई बातें बताई।   

उसने कहा कि बीते 2 सालों में वह कई शहरों में आयोजित की गई तक़रीर का हिस्सा बन चुकी है। अधिकारियों के मुताबिक़ हीर ने यह भी बताया कि उसका एक रिश्तेदार जमात-ए-इस्लाम-ए-हिंद से भी जुड़ा है। इस रिश्तेदार का बेटा स्टूडेंट इस्लामिक आर्गेनाईजेशन का सदस्य है। इन दोनों के साथ ही वह मंसूर अली पार्क में सीएए और एनआरसी के विरोध प्रदर्शन में भी शामिल हुई और भाषण भी दिया था।   

अधिकारियों के मुताबिक़ अब मौलाना समेत हीर के संपर्क के लोग भी जाँच के दायरे में आएँगे। हीर खान हाईस्कूल फेल है और एक कोचिंग संचालक से अंग्रेज़ी सीखने के बाद उसने यूट्यूब पर वीडियो शेयर करना शुरू किया था। वह मोबाइल से ही अपने वीडियो एडिट करती थी। उसने अपनी दो ईमेल आईडी भी बनाई थी और परी खान नाम की फेसबुक प्रोफाइल। एक एनजीओ संचालक और अधिवक्ता भी हीर खान के संपर्क में था।     

माँ सीता के लिए ‘₹#डी’ और अयोध्या को एक ‘₹#डीखाना’ बताने वाली विवादित हीर खान को प्रयागराज पुलिस ने 25 अगस्त को गिरफ्तार कर लिया था। बताया जा रहा था कि इस विवादित वीडियो को बनाने के बाद हुई शिकायतों से डर से हीर खान अपने एक रिश्तेदार के घर छुपी हुई थी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने इसकी सूचना अपने ट्विटर अकाउंट से दी थी।

शलभ मणि त्रिपाठी ने ट्वीट में लिखा, “अल्लाह के अलावा किसी से ना डरने का दावा करने वाली हीर खान को फ़िलहाल यूपी पुलिस के होमगार्ड्स से भी खौफ लग रहा है, हमारे देवी देवताओं के लिए बेहद घटिया बयान देने वाली हीर खान मुक़दमा दर्ज होते ही फ़रार हो गई है, गिरफ़्तारी के लिए यूपी पुलिस की कई टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं।” इसके अगले ट्वीट में उन्होंने लिखा है, “प्रयागराज पुलिस ने हीर खान को गिरफ़्तार कर लिया है। ये अपने एक रिश्तेदार के घर छुपी हुई थी।”

यूट्यूब चैनल ‘ब्लैक डे 5 अगस्त’ पर एक इस्लामी कट्टरपंथी महिला हीर खान ने ऐसा वीडियो साझा किया था, जिसमें हिन्दू देवी-देवताओं को जम कर गालियाँ बकी गई थी। यूट्यूबर हीर खान ने इस वीडियो में माँ सीता के लिए ‘₹#डी’ शब्द का प्रयोग किया है और अयोध्या को एक ‘₹#डीखाना’ करार दिया। आईपीएस अधिकारी संदीप मित्तल ने यूपी पुलिस और सीएम योगी आदित्यनाथ को टैग कर नियमानुसार कार्रवाई की अपील की थी। 

हीर खान इस वीडियो में हिन्दुओं को ‘काफिर’ बताते हुए कहती है, “सीता ₹#डी थी, सीता %$ड़ मरवाती थी, सीता चु$% मरवाती थी, झाँ## के बाल नोच लेंगे। अयोध्या तो एक ₹#डीखाना है। सीता को न जाने कितने मुल्लों ने चो$# था। सीता इतना बुरा #$वाती थी कि रावण तक भी हार जाता था। रावण कहता था कि मेरे ल$₹ में दर्द हो रहा है, तेरे %$त में कितना अंदर डालूँ। सीता की माँ का भों$₹₹, श्रीराम की माँ की $%त।”

उक्त महिला यहीं नहीं रुकी बल्कि उसने और भी आगे बढ़ कर भगवान राम और माँ सीता के लिए अपशब्दों की बौछार लगा दी। उसने हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाते हुए कहा, “श्रीराम भ#वे की औलाद, श्रीराम ₹#डी की औलाद, तुम्हारे 33 करोड़ देवी-देवताओं की माँ का भों#ड़ा। तेरे गणपति की $%त में आग लगा देंगे। तुम सब मा$रचो# हो। तुम्हारी मीडिया की माँ का भों#ड़ा।”

अजमल कसाब से भी ज्यादा रिया का मीडिया ट्रायल: सुशांत सिंह की मौत पर स्वरा भास्कर, प्रोड्यूसर ने कहा – ‘शर्म करो’

दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिह राजपूत के मामले की मीडिया कवरेज पर कटाक्ष करते हुए ट्विटर ट्रोल और रसभरी वेब सीरीज फेम स्वरा भास्कर ने अपनी नाराजगी जातते हुए इसकी तुलना अजमल कसाब के साथ की है।

स्वरा भास्कर ने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा, “मुझे नहीं लगता है कि कसाब भी मीडिया के लिए इस तरह की ‘विच हंट’ (Witch Hunt) का विषय रहा होगा। जिस तरह रिया चक्रवर्ती मीडिया ट्रायल को झेल रही हैं। हम सबको शर्म आनी चाहिए, एक जहरीली तमाशा देखने वाली जनता होने के लिए, जो इस तरह की जगरीली चीजें देख रही है।” ट्विटर ट्रोल स्वरा भास्कर ने इस ट्वीट के साथ #RheaDrugChat #SushantSinghRajput जैसे हैशटैग का भी इस्तेमाल किया है।

वहीं, सुशांत के करीबी दोस्त और प्रोड्यूसर विकास गुप्ता ने स्वर भास्कर के इस ट्वीट को रीट्वीट करते हुए लिखा, “मीडिया ट्रायल का कारण है कि केस की जाँच सीबीआई कर रही है और सच सामने आ रहा है। सुशांत की ना केवल हत्या हुई है, बल्कि बायपोलर होने की झूठी बात कही गई है और लूटा गया है। तुम जैसे लोगों को खुद पर शर्म आनी चाहिए जो गलत की मदद कर रहे हैं। रिया चक्रवर्ती और कसाब की तुलना कर रहे हो, ज्यादा हो गया।”

गौरतलब है कि वर्ष 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों में शामिल आतंकवादी अजमल कसाब को नवंबर 21, 2012 को पुणे की यरवदा जेल में फाँसी दी गई थी।

स्वरा भास्कर इससे पहले भी सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले को लेकर सोशल मीडिया पर हमेशा की तरह ही लगातार लिखती जा रही हैं। इससे पहले उन्होंने सुशांत केस में सीबीआई जाँच को लेकर भी मुंबई पुलिस का पक्ष रखते हुए कहा था कि मुंबई पुलिस के काम पर सवाल उठाना ठीक नहीं है।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में लगातार नए खुलासे सामने आ रहे हैं। सीबीआई जाँच के बाद अब एनसीबी ( नारकोट‍िक्‍स कंट्रोल ब्‍यूरो) के न‍िदेशक राकेश अस्‍थाना ने इस पूरे मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जाँच में आई कुछ अहम फाइंडिंग्‍स का भी खुलासा क‍िया है। ED को इस बात के सबूत म‍िले हैं क‍ि र‍िया च्रकवर्ती और सुशांत सिंह राजपूत को ड्रग्‍स सप्‍लाई क‍िए जाते थे।

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत का निधन 34 साल की उम्र में जून, 2020 में मुंबई के बांद्रा में उनके घर पर हुआ। उनकी मृत्यु के बाद से ही इस मामले की जाँच में कई घटनाक्रम देखे गए हैं। आखिरकार यह मामला केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) के पास चला गया।

11 अगस्त को, अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती, जो कथित तौर पर सुशांत की मौत से जुड़े प्रमुख आरोपितों में से एक है, ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि वह ‘मीडिया ट्रायल’ का शिकार हुई है, मीडिया के एक वर्ग ने उसकी निजता को भी ख़त्म किया है और उस पर आरोप भी लगाए हैं।

ताहिर हुसैन अब नहीं रहा पार्षद, दिल्ली नगर निगम ने निरस्त की सदस्यता: दिल्ली दंगों में है मुख्य आरोपी

आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद और दिल्ली दंगों के आरोपित ताहिर हुसैन के मामले में बड़ी ख़बर आई है। पूर्वी दिल्ली नगर निगम (EDMC) ने ताहिर हुसैन की सदस्यता रद्द कर दी है। पूर्वी दिल्ली नगर निगम ने इस संबंध में बयान जारी करते हुए मामले की जानकारी दी। नगर निगम के बयान के अनुसार 26 अगस्त को यह निर्णय लिया गया था।   

वार्ड संख्या 59-ई के पार्षद की सदस्यता निरस्त की जा रही है। दिल्ली नगर निगम ने इस मामले में आदेश जारी करते हुए कई अहम बातें कहीं। आदेश के मुताबिक़ दिल्ली नगर निगम अधिनियम की धारा 33 की उपधारा 2 में यह प्रावधान है। यदि कोई सदस्य लगातार सदन की 3 बैठकों में बिना किसी पूर्व सूचना के अनुपस्थित रहता है, तो सदन उक्त पार्षद की सदस्यता समाप्त करके वार्ड के प्रतिनिधि पद को रिक्त घोषित कर सकता है। 

इसके बाद आदेश में यह भी लिखा है कि यह पार्षद का कर्तव्य है वह लंबी अवधि की अनुपस्थिति हेतु पूर्व सूचना माननीय महापौर अथवा निगम सचिव कार्यालय को दे। ताहिर हुसैन वार्ड संख्या 59 ई का प्रतिनिधित्व कर रहा था। वो जनवरी 2020, फरवरी 2020 (मार्च 2020, अप्रैल 2020 और मई 2020 में कोविड 19 के चलते बैठक हुई नहीं), जून 2020 तथा जुलाई 2020 की बैठक में बिना सूचना अनुपस्थित था।  

पूर्वी दिल्ली नगर निगम का आदेश वार्ड 59 के पार्षद की सदस्यता समाप्ति का घोषणा – संख्या 5
पूर्वी दिल्ली नगर निगम का आदेश

इस मामले में 11 अगस्त को भी ख़बर प्रकाशित हुई थी कि पार्षद ताहिर हुसैन की सदस्यता ख़तरे में पड़ सकती है। जिसमें पूर्वी दिल्ली के महापौर निर्मल जैन ने कहा था ताहिर हुसैन ने उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों की साजिश रचने की बात स्वीकार कर ली थी। ताहिर हुसैन और पूर्व पार्षद इशरत जहां के खिलाफ़ सदन में निंदा प्रस्ताव भी पारित हुआ था। अब कानूनी प्रक्रिया समझी जा रही है कि किस तरह ताहिर हुसैन की सदस्यता रद्द हो सकती है? महापौर ने यह भी बताया था कि दिल्ली पुलिस की तरफ से नगर निगम को कोई जानकारी नहीं मिली थी। मगर ताहिर हुसैन ने लगातार कई बैठकों में हिस्सा नहीं लिया था।      

दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार (21 अगस्त, 2020) को फरवरी में हुए हिंदू विरोधी दंगों में शामिल AAP के पूर्व नेता ताहिर हुसैन के खिलाफ दायर चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए कहा कि ताहिर हुसैन के उकसावे पर संप्रदाय विशेष के लोग हिंसक हो गए और हिंदू समुदाय पर पथराव शुरू कर दिया था। रिपोर्ट्स के अनुसार, अदालत ने फरवरी में उत्तर-पूर्व दिल्ली में हुए हिंदु विरोधी दंगों के दौरान खुफिया (आईबी) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या से संबंधित मामले और दंगों को भड़काने में हुसैन की भूमिका के खिलाफ दायर आरोपपत्र का संज्ञान लेते हुए यह टिप्पणी की थी। अदालत ने आरोपितों के खिलाफ प्रोडक्शन वारंट भी जारी किया और उन्हें 28 अगस्त को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए पेश करने का निर्देश दिया।

पूर्व AAP नेता ताहिर हुसैन, जो इस साल की शुरुआत में राष्ट्रीय राजधानी में हुए भीषण हिंदू-विरोधी दंगों के प्रमुख अभियुक्त है, से प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पूछताछ की थी। टाइम्स नाउ द्वारा प्रकाशित एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, ताहिर हुसैन से दिल्ली हिंसा की फंडिंग को लेकर पूछताछ की जा रही थी। इसके साथ ही, निजामुद्दीन मरकज और दिल्ली दंगों के बीच सम्बन्ध की भी अब जाँच की जा रही है। हुसैन ने दिसंबर, 2019 से फरवरी, 2020 तक दंगा करने वालों और दंगाइयों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वालों को 1.02 करोड़ रुपए ट्रांसफर करने के लिए कई शेल कंपनियाँ बनाई थीं।

दंगों कि साजिश ने बारे में भी उसने कई हैरान करने वाली बातें कही थीं। उसने पूछताछ के दौरान कहा “मेरा घर इलाके में सबसे ऊँचा था। CAA समर्थकों को सबक सिखाने के लिए मैंने अपने सहयोगियों के साथ पहले ही साजिश रच ली थी। घर में कन्स्ट्रक्शन का काम भी चल रहा था, ऐसे में ईंट-पत्थर इत्यादि समान पहले ही जमा कर लिए गए थे। मेरी लाइसेंसी पिस्टल थाने में जमा थी, जिसे मैं दंगों के 2-3 दिन पहली ही छुड़ा कर लाया था। पुलिस के हाथ सबूत न लगे, इसीलिए मैंने पहले ही क्षेत्र के सारे सरकारी व प्राइवेट CCTV कैमरे तोड़वा दिए थे। मैंने अपने समर्थकों को हर तरीके से तैयार रहने कह दिया था।”

पिंजरा तोड़ हाइ-क्लास वाले, बेल मत दीजिए… भाग जाएँगे: HC से दिल्ली पुलिस, भड़काऊ वीडियो पर TheWire ने फैलाया झूठ

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार (अगस्त 26, 2020) को दिल्ली पुलिस को उत्तर-पूर्व दिल्ली दंगों से संबंधित मामले में केस डायरी पेश करने की अनुमति दी है। हाईकोर्ट ने पिंजरा तोड़ समूह की सदस्य देवांगना कलीता और नताशा नरवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए पुलिस को यह निर्देश दिया।

हाईकोर्ट में दिल्ली पुलिस द्वारा 29 अगस्त को केस डायरी प्रस्तुत की जाएगी और सुनवाई 31 अगस्त को होगी। इससे पूर्व, 14 अगस्त को अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 26 अगस्त को निर्धारित की थी।

इस मामले में देवांगना कलिता और समूह की एक अन्य सदस्य नताशा नरवाल को इस साल मई में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार किया था और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत उन पर मामला दर्ज किया, जिसमें दंगा, गैरकानूनी सभा आयोजित करने और हत्या का प्रयास संबंधी धाराएँ शामिल हैं।

उन पर दंगों में ‘पूर्व-नियोजित साजिश’ का कथित तौर पर हिस्सा होने के आरोप में, सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े एक अलग मामले में कड़े आतंकवाद-रोधी कानून- गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। नताशा और देवांगना ने साजिश रच के 66 फूटा सड़क को ठप्प करवाया था। दोनों का काम जाफराबाद तक ही सीमित नहीं था। इन्होंने कई अन्य इलाकों में घूम-घूम कर संप्रदाय विशेष के लोगों को भड़काया और नागरिकता कानून की गलत व्याख्या कर संप्रदाय विशेष को दंगों में भाग लेने के लिए भी उकसाया था।

नए नागरिकता कानून के समर्थकों और विरोधियों के बीच हिंसा भड़कने के बाद 24 फरवरी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में कई सांप्रदायिक झड़पें हुई थीं, जिनमें कम से कम 53 लोग मारे गए थे और लगभग 200 लोग घायल हो गए थे।

देवांगना कलिता के खिलाफ 4 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि नताशा तीन मामलों में आरोपित है। निचली अदालत ने 14 जून को नताशा और देवांगना कलिता की जमानत याचिका इस आधार पर खारिज कर दी थी कि आवेदनों में कोई ठोस आधार नहीं है और आरोप-पत्र से यह स्पष्ट है कि जाँच अभी लंबित है और इसे अन्य आरोपितों के खिलाफ भी दायर किया गया है।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने पिंजरा तोड़ संगठन की सदस्य देवांगना कलीता मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से आग्रह किया कि देवांगना कलीता और उसके सहयोगी को कुछ आधारों पर जमानत नहीं दी जानी चाहिए। दिल्ली पुलिस ने इस दलील में कहा है कि यह हाईक्लास शिक्षित परिवारों से जुड़े लोग हैं, जिन्होंने सोच-समझ कर लोगों को भड़काया और संप्रदाय विशेष की भीड़ का इस्तेमाल किया। और जमानत मिलने पर यह जाँच के पहले ही चरण में भाग भी सकते हैं। पुलिस का कहना है कि यह मामला दंगों की कई घटनाओं में से एक है, जो 23 से 26 फरवरी के बीच पूर्वोत्तर दिल्ली में दर्ज की गईं, जिसमें 53 लोग मारे गए, 581 लोग घायल हुए।

पुलिस ने कहा है कि इन दंगों के संबंध में 751 एफआईआर दर्ज की गई हैं। आरोप पत्र दाखिल होने के बावजूद भी अभियुक्त देवांगना कलीता को इस कारण भी जमानत नहीं दी जा सकती है क्योंकि वर्तमान में हालातों में अभी तक बहुत बदलाव नहीं आया है और जाँच जारी हैं और आरोपित को जाँच के प्रथम चरण में जमानत नहीं दी जानी चाहिए।

दिल्ली पुलिस ने कहा कि जैसा कि चार्जशीट में विस्तृत रूप से कहा गया है, यह स्पष्ट रूप से सामने आया है – वर्तमान आवेदक, देवांगना कलीता दंगों की मुख्य और प्रमुख साजिशकर्ता है और घटना के वक्त प्रदर्शन स्थल पर वह जाफराबाद मेट्रो स्थल के नीचे 66 फुटा स्पॉट रोड ब्लॉक साइट/विरोध प्रदर्शन स्थल पर मौजूद थी। पुलिस के अनुसार, देवांगना शुरुआत से ही दिल्ली के जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे यानी फरवरी 22, 2020 से हिंसक भीड़ के वापस जाने तक यानी, फरवरी 25, 2020 की देर शाम लगभग 7:00 बजे तक भीड़ का नेतृत्व कर रही थी।

पुलिस ने कहा है कि जमानत की वर्तमान आवेदक देवांगना कलीता इस प्रकार इन दंगों का मुख्य चेहरा थी, जिसने संगठित तरीके से अन्य सह-अभियुक्तों के साथ मिलकर भीड़ जुटाई और स्थानीय संप्रदाय विशेष की भीड़ और आम जनता को सक्रियता से दंगे भड़काने के लिए उकसाया। इसीका नतीजा था कि भीड़ ने गोलियाँ चलाईं और पथराव किया, ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों पर बोतलें आदि फेंकीं और यह जमानत की आवेदक देवांगना कलीता द्वारा आपराधिक मानसिकता से लगाए गए बल का ही परिणाम था, जिससे पुलिस और जनता को गंभीर चोटें आईं।

दिल्ली पुलिस ने माननीय उच्च न्यायलय के सामने अपना पक्ष रखते हुए लिखा है कि आरोपित को जिन कारणों से जमानत नहीं दी जानी चाहिए, वो कुछ इस प्रकार हैं –

  1. जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे 66 फूटा रोड पर विरोध प्रदर्शन स्थल पर वह मौजूद थी, तब तक भी वहाँ पर हालात सामान्य थे।
  2. 24 फरवरी को जिस जगह पर देवांगना कलीता भीड़ का नेतृत्व कर रही थी, वहीं शाहरुख पठान नाम का युवक बन्दूक तानकर पुलिस की ओर बढ़ा और उसने फायरिंग की। जिसे कि जाफराबाद पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया।
  3. 5 जनवरी और 23 फरवरी को दिए गए भाषणों की वीडियो साक्ष्य में पिंजरा तोड़ के सदस्यों को भड़काऊ भाषण देते देखा गया है।
  4. इन्होने लोगों को हिंसक होने, लाठी और फायर आर्म्स से पुलिस से मुठभेड़ करने के लिए लोगों को उकसाया। वह दंगाइयों से लगातार सम्पर्क में थी।
  5. आरोपित देवांगना कलीता और उनके सहयोगी गुल्फिशा, नताशा, सुहैल, अदनान, तस्लीम, शादाब, गुड्डू चौधरी, फैजान और कासिम अंसारी की पहचान की गई है। इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। देवांगना की रूममेट नताशा ने मई 05, 2020 को अपने बयान में इस मामले में अपनी उपस्थिति को स्वीकार किया है।
  6. देवांगना और उनके सहयोगियों को दिसम्बर 2019 में ही पूर्वोत्तर दिल्ली में बैठकें और कैंडल मार्च करते हुए देखा गया।
  7. संप्रदाय विशेष के लोगों से सम्पर्क कर नामी चेहरों के जरिए उन्हें नागरिकता कानून के सम्बन्ध में गलत जानकारी दी और कहा कि इस कानून से उनको देश से भगा दिया जाएगा।

हालाँकि, प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द वायर’ की एक ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देवांगना कलीता की ज़मानत याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट के उनके कथित भड़काऊ भाषण के वीडियो माँगने पर पुलिस ने कहा कि उनके पास ऐसा कोई वीडियो नहीं है।

जबकि, दिल्ली पुलिस द्वारा देवांगना कलीता की जमानत रद्द करने के लिए जो तर्क दिए गए हैं, उसमें इस बात का स्पष्ट जिक्र किया गया है कि पुलिस के पास दो अलग-अलग दिनों – जनवरी 05, 2020 और फरवरी 23, 2020 को घटनास्थल के वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं।

सूत्र से मिली जानकारी के अनुसार 05 जनवरी और 23 फरवरी के विरोध प्रदर्शन के वीडियो बरामद कर लिए गए हैं। 5 जनवरी को CAA-NRC के विरोध में दिए गए उसके (देवांगना कलीता) शुरुआती भाषण और विरोध प्रदर्शन के लिए दिए गए भड़काऊ भाषण इसके साथ संलग्न हैं।

इससे पहले की एक सुनवाई में दिल्ली पुलिस ने कहा था कि उनके पास देवांगना कलीता के 24 और 25 फरवरी को हुए दंगों से पहले कथित तौर पर लोगों को भड़काने के वीडियो हैं और उनके 22 तथा 23 फरवरी के भी वीडियो हैं, जब नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के बाहर बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन कर रहे थे।

पुलिस ने कहा है कि वीडियो क्लिप्स, चश्मदीदों के बयान और जमानत याचिका दायर करने वाली आरोपित के कॉल रिकॉर्ड विवरण (CDR) से भी यही नतीजे निकले हैं कि वह उत्तर-पूर्व दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान भी दंगाइयों, मास्टर माइंड, उपद्रवियों, विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के नेताओं, विभिन्न विरोध प्रदर्शन स्थलों के सूत्रधारों और दंगों के मुख्य षड्यंत्रकारियों के सम्पर्क में थे।

ऐसे में, द वायर का यह दावा, कि पुलिस ने देवांगना कलीता के वीडियो साक्ष्य होने से इनकार किया, द वायर के इरादों पर संदेह प्रकट करता है।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस ने अपने जवाब में लिखा है कि आरोपित देवांगना कलीता ने वीडियो साक्ष्यों की जाँच में भी उनका सहयोग नहीं किया है और अपनी जमानत के लिए दायर याचिका के लिखित जवाब में देवांगना के द्वारा जो वीडियो दिया गया है, उसमें भी घटना के चश्मदीद गवाह इंस्पेक्टर मिथिलेश को देखा जा सकता है। इसके साथ ही, ट्विटर पर मौजूद 23 फरवरी के वीडियो में भी देवांगना की मौजूदगी और भीड़ पुलिस के होने पर भीड़ को भड़काने वाले उसके बयान देखे जा सकते हैं।

पुलिस ने अपने जवाब में कहा है कि देवांगना के मोबाइल फोन से बरामद जानकारी के अनुसार यह भी पता चला है कि वह पूर्वोत्तर दिल्ली के दंगाइयों के साथ लगातार और सीधे सम्पर्क में थी। पुलिस द्वारा दाखिल जवाब में कहा गया है कि स्टेटस रिपोर्ट में जिन तथ्यों को वर्णित किया गया है, उससे भी स्पष्ट है कि देवांगना प्रथम दृष्टया आरोपित हैं।

देवांगना कलीता की जमानत याचिका रद्द किए जाने की इस अपील में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि उसे इस कारण भी जमानत नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि आरोपित को यदि जमानत दे दी जाए, तो वह भाग सकती है।

इसके अनुसार, आरोपित देवांगना असम की निवासी है और उसका पति यूनाइटेड किंगडम में रहता है। वह खुद दिल्ली में बतौर किराएदार रह रही है। यह पाया गया है कि देवांगना का इस सोसायटी में कोई परिवार और सम्बन्धी नहीं है और ऐसे में यदि उसे जमानत दे दी जाती है तो वह दिल्ली दंगों की जाँच के बीच ही भाग सकती है, जिससे कि जाँच प्रक्रिया बाधित होगी।

पुलिस का कहना है कि चश्मदीदों को यह भय है कि आरोपित देवांगना जमानत पर यदि बाहर आती है तो वह और उसका समूह उनके लिए खतरा पैदा कर सकते हैं क्योंकि वह गवाह इस समूह के खिलाफ बयान दे रहा है। उनकी माँग है कि उनकी पहचान गोपनीय रखने के साथ-साथ उन्हें सुरक्षा भी उपलब्ध कराई जाए। पुलिस ने कहा है कि गवाहों को अपनी सुरक्षा का भय है और उन्हें लगता है कि ये आरोपितों के बाहर आने के बाद उन्हें निशाना बना सकते हैं।

इसके साथ ही, आरोप पत्र में दिल्ली पुलिस ने लिखा है कि कॉलम संख्या 11 में वर्णित आरोपित (देवांगना कलीता) हाइक्लास शिक्षित परिवार से ताल्लुक रखती हैं और उन्होंने जो कुछ भी किया, वह यह जानते हुए किया कि उनके काम से समाज में हलचल पैदा होगी और साम्प्रदयिक सौहार्द भी ख़राब होगा।

इसके अलावा उन्हें यह भी आभास था कि उनके कारणों से राष्ट्रीय राजधानी की शांति भी भंग होगी। अपने गलत इरादों के साथ ही आरोपितों ने ऐसी जगहों को चुना, जहाँ संप्रदाय विशेष की आबादी निवास करती है, जहाँ मस्जिद भी हैं और हिन्दू आबादी भी उसके पास ही रहती है।

उन्होंने संप्रदाय विशेष के समूह बनाने शुरू किए। इसके लिए सब्जी विक्रेता, संप्रदाय विशेष की महिलाएँ, ढाबा व्यापारी आदि चुने गए और उन तक नागरिकता कानून और जनसंख्या रजिस्टर की गलत व्याख्या की गई, उनसे कहा गया कि यदि ये कानून लागू हो गए तो उन सब को देश से बाहर निकाल दिया जाएगा।

पुलिस द्वारा दायर आरोप पत्र के अनुसार, पिंजरा तोड़ समूह की एक्टिविस्ट नताशा और देवांगना ने संप्रदाय विशेष के लोकल लोगों को प्रभावित करने के लिए प्रभावशाली चेहरों, स्थानीय नेताओं की मदद ली। इसके लिए वो गुल्फिशा खातून और अन्य देश विरोधी तत्वों से मुलाकात की, जहरीले भाषणों से लोगों के मन में डर पैदा किया और उन्हें हिंसा के लिए उकसाया।

दिल्ली पुलिस ने माननीय उच्च न्यायलय से निवेदन किया है कि इन सभी आधारों पर आरोपित पिंजरा तोड़ संगठन के सदस्यों को जमानत नहीं दी जानी चाहिए। साथ ही, पुलिस ने कहा है कि अभी जाँच जारी है और उन चेहरों को भी सामने लाया जाएगा जो दिल्ली दंगों की साजिश में शामिल थे और अब तक भी छुपे हुए हैं।

उल्लेखनीय है कि सीएए के विरोध में उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगा मामले में पिंजरा तोड़ की सदस्य एवं जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय की छात्रा देवांगना कलीता और नताशा नरवाल के अलावा जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्र आसिफ इकबाल तन्हा और गुलफिशा खातून, कॉन्ग्रेस की पूर्व पार्षद इशरत जहाँ, जामिया समन्वय समिति की सदस्य सफूरा जरगर, मीरान हैदर, जामिया एलुमनी एसोसिएशन के अध्यक्ष शिफा-उर-रहमान, आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन, कार्यकर्ता खालिद सैफी और पूर्व छात्र नेता उमर खालिद शामिल हैं, जिन पर आतंकवाद निरोधक कानून-गैर कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया गया है।

उमर खालिद को इस मामले में अब तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। पुलिस ने अपनी प्राथमिकी में दावा किया था कि उमर और उसके साथियों ने इलाके में लोगों को दंगा भड़काने के लिए उकसाया था और यह पूर्व नियोजित साजिश थी। हाईकोर्ट ने इससे पहले नताशा नरवाल की जमानत अर्जी को खारिज करने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था।

इस सुनवाई में कोर्ट ने कहा कि उस दौरान हर तरफ मीडिया की मौजूदगी थी और वे रिकॉर्डिंग कर रहे थे। न्यायाधीश ने कहा कि मैं जानना चाहता हूँ कि उन्होंने क्या कहा, जिससे भीड़ भड़की। ज्ञात हो कि दिल्ली पुलिस ने नताशा नरवाल तथा देवांगना कलीता को मई, 2020 में दंगा मामले में गिरफ्तार किया था।