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सुशांत के शव से रिया चकवर्ती ने की थी छेड़छाड़? गुपचुप मोर्चरी में घुसी, 45 मिनट तक कूपर हॉस्पिटल में रही

सुशांत सिंह राजपूत की मौत की गुत्थी सुलझाने में सीबीआई जुट गई है। इस बीच मीडिया रिपोर्टों से कुछ नई जानकारी सामने आई है। इससे रिया चकवर्ती की भूमिका को लेकर नए सिरे से सवाल खड़े हो रहे हैं।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक वह सुशांत का शव देखने गुपचुप कूपर हॉस्पिटल के शवगृह में गई थी। अस्पताल में उसने करीब 45 मिनट गुजारे। एक चश्मदीद के हवाले से दावा किया गया है कि रिया ने सुशांत के शव को देखने बाद ‘सॉरी बाबू’ कहते हुए माफ़ी माँगी थी।

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट अनुसार रिया का सुशांत के साथ खून का रिश्ता नहीं था। ऐसे में उन्हें शव देखने की इजाजत कैसे मिली। सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने इस खुलासे पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि जब पोस्टमार्टम चल रहा था तो क्या रिया भी वहॉं मौजूद थी और सबूतों से छेड़छाड़ कर रही थी?

रिपब्लिक न्यूज चैनल की एक रिपोर्ट् के अनुसार सुशांत की मौत के बाद रिया अपने माता-पिता और भाई के साथ अस्पताल पहुॅंची थी। शव देखने के लिए वह गुपचुप तरीके से अंदर गई।

चश्मदीद सुरजीत सिंह राठौर ने बताया, “15 जून को रिया चक्रवर्ती कूपर अस्पताल के मोर्चरी में पहुँची थी। मैं वहाँ पर मौजूद था। तभी सूरज सिंह ने आकर मुझसे कहा कि रिया चक्रवर्ती यहाँ आना चाहती हैं तो प्लीज थोड़ा मदद करें, पुलिस को थोड़ा समझा दें और उन्हें शव को देखने दें। मैंने उसके बाद वहाँ मौजूद अधिकारियों से बात की और कहा कि रिया चक्रवर्ती आई है उसको सुशांत सिंह की बॉडी को देखना है। इसके बाद उन्होंने हमें परमिशन दी।”

उन्होंने बताया,”10 मिनट बाद मैं और रिया चक्रवर्ती शवगृह में गए। रिया के साथ उसका भाई, माँ और एक और सदस्य भी शायद उसके पिता थे। मैंने सुशांत के चेहरे से सफेद कपड़े को हटाया, उनके गले में एक निशान था। उसी वक्त मुझे कुछ गड़बड़ लगा था।”

चश्मदीद ने बताया रिया चक्रवर्ती पाँच से सात मिनट तक शव गृह में रही। इस दौरान मैंने ही रिया को कफन उठा कर सुशांत को दिखाया था। रिया ने सुशांत के चेस्ट पर हाथ रखकर कहा था सॉरी बाबू। ये सुनकर मैं चौंक गया। क्या इसने कुछ गलत किया है? इसके अलावा रिया ने और कुछ नहीं बोला और वो रोने लगी।

आपको बता दें कि नियम के तहत इस तरह अस्पताल में परिवार के अलावा कोई भी शव देखने नहीं जा सकता है।
इस बात के सामने आने के बाद सुशांत सिंह के पिता केके सिंह के वकील विकास सिंह ने कहा है, “रिया आखिर शवगृह में कैसे पहुँच गई? वो शवगृह में किस हैसियत से गईं? परिवार को मालूम था कि रिया सुशांत की लाइफ बर्बाद कर रही है। मुंबई पुलिस को इस पूरे मामले पर जवाब देना चाहिए।”

‘SP से इस्तीफा दो नहीं तो रेप केस में फँसा दूँगा’: जहर खाने से पहले लालू यादव के दामाद तेज प्रताप पर हरवीर ने लगाए आरोप

उत्तरप्रदेश के मैनपुरी में समाजवादी पार्टी के पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के पूर्व राज्य सचिव हरवीर सिंह प्रजापति ने गुरुवार (अगस्त 20, 2020) को जहर खाकर आत्महत्या करने का प्रयास किया। सपा नेता ने आत्महत्या से पहले फेसबुक पर पोस्ट भी डाला। पोस्ट में उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के पौत्र व सपा के पूर्व सांसद तेज प्रताप सिंह यादव पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। तेज प्रताप बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के दामाद भी हैं।

पोस्ट में हरवीर ने तेज प्रताप यादव, राजेश खटीक और विश्वनाथ प्रजापति को आत्महत्या का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने लिखा कि तेज प्रताप उन्हें पिछले 2 हफ्तों से मानसिक तौर पर प्रताड़ित कर रहे हैं। प्रजापति के मुताबिक, तेज प्रताप उन पर दबाव बना रहे हैं कि वह समाजवादी पार्टी को छोड़ भाजपा में शामिल हो जाएँ। इतना ही नहीं, प्रजापति का आरोप है कि यादव उन्हें धमकाते हैं कि अगर उन्होंने पार्टी से इस्तीफा नहीं दिया तो वह उस पर झूठा रेप केस कर देंगे।

फेसबुक पोस्ट

प्रजापति ने यह भी बताया है कि उनके बच्चों को भी जान से मारने की धमकी दी जा रही है। इसके अलावा गायत्री प्रजापति जैसे मामले में फँसाने के लिए उनके फोन से दो लड़कियों को वीडियो कॉल करके उनकी फोटो और वीडियो भी रिकॉर्ड की गई है।

प्रजापति के अनुसार, इन लड़कियों को पैसे देकर उन्हें परेशान करवाया गया, क्योंकि तेज प्रताप यादव और विश्वनाथ प्रजापति ऐसा चाहते हैं। प्रजापति ने इस पोस्ट में लिखा है कि वह अब अपने परिवार के सामने जाने में बहुत शर्म महसूस करते हैं, इसलिए अपने जीवन को समाप्त कर रहे हैं।

बता दें, हरवीर सिंह के इस पोस्ट को जैसे ही उनके परिजनों ने देखा, वह फौरन उन्हें बचाने गए। इसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। अब वह फिलहाल खतरे से बाहर हैं। इस घटना के बाद हरवीर सिंह को समाजवादी पार्टी से निकाल दिया गया है। एक प्रेस रिलीज जारी करके यह सूचना सार्वजनिक की गई।

प्रेस रिलीज में पार्टी के जिलाध्यक्ष ने लिखा कि तेज प्रताप सिंह यादव पर गंभीर टिप्पणी करने के आरोप में हरवीर सिंह को पार्टी में जिला सचिव पद से हटा दिया गया है। इस रिलीज में हरवीर सिंह के आरोपों को अनुशासनहीनता करार दिया गया। साथ ही कहा गया कि उन्होंने ये आरोप बिना किसी सबूत के लगाए हैं।

‘मैंने उसे कहा था… UP पुलिस छोड़ती नहीं’: 5 साल ध्रुव को किडनैप करने वाले अशफाक का रोते हुए Video

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में 5 साल के ध्रुव की किडनैपिंग का खुलासा होने के बाद आरोपित अशफाक की वीडियो सामने आई है। इस वीडियो में अशफाक बच्चे को किडनैप करने के लिए माफी माँग रहा है। साथ ही इस वीडियो में वह यह भी बता रहा है कि अगर शिखा (ध्रुव की माँ) उसे नहीं कहती तो वह कभी बच्चे को यूपी से बाहर नहीं लेकर जाता। वीडियो में उसके चेहरे पर यूपी पुलिस का खौफ भी साफ देखा जा सकता है।

सोशल मीडिया पर सामने आई अशफाक की इस वीडियो में वह रोते हुए कहता है, “…तभी तो बच्चा छोड़ दिया सर मैंने, नहीं तो नहीं छोड़ता। मैंने उसे (शिखा को) बोला था कि अगर बात पुलिस तक गई तो पक्का पकड़ा जाऊँगा। कोई चांस नहीं होगा छूटने का। लेकिन उसने बोला कि नहीं ये बात पुलिस में नहीं जाएगी। तभी मैं ले गया उसे यूपी से बाहर। वरना सर मैं लेकर ही नहीं जाता। क्योंकि यूपी पुलिस छोड़ती नहीं साहब…नहीं छोड़ती है।”

बता दें कि कुछ समय पहले उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में शिखा नाम की महिला ने प्रेमी अशफाक के साथ भागने के लिए अपने 5 साल के बच्चे ध्रुव का ही अपहरण करवा दिया। पुलिस ने किडनैपिंग में शिखा और अशफाक के हाथ होने का खुलासा करते हुए बताया था कि दोनों की मुलाकात फेसबुक के जरिए हुई और फिर प्यार परवान चढ़ा। एक दिन क्राइम पेट्रोल देखते हुए शिखा ने फिरौती के लिए यह साजिश रची, क्योंकि वह अशफाक के साथ भागना चाहती थी। अशफाक को जिम खोलने के लिए पैसे चाहिए थे।

रिपोर्ट की मानें तो शिखा ने स्वयं ही ध्रुव को समझाया था कि वह अशफाक को परेशान न करे। बाद में खुद भी आने का वायदा किया। अशफाक ने भी बच्चे को घुमाने का लालच दिया और उसे लेकर नोएडा के एक होटल में पहुँच गया। पुलिस ने अपहरण की सूचना पर जब कार्रवाई की तो घबराकर बच्चे को कौशांबी में छोड़ दिया।

मुंबई: मास्क पहनने को कहा तो नफीसा ने डॉक्टर से की बदसलूकी, मेहराज ने एक्ट्रेस को धमकाया

मुंबई पुलिस ने अनुदान रोड स्थित नर्सिंग होम के एक डॉक्टर को गाली और धमकी देने के आरोप में नफीसा अब्बास लकड़ावाला नाम की महिला के खिलाफ केस दर्ज किया है। रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए डॉक्टर ने नफीसा से मास्क पहनने के लिए कहा। इसी बात पर पर भड़कते हुए उसने डॉक्टर्स के साथ बदसलूकी की। फिलहाल पुलिस ने महिला को गिरफ्तार नहीं किया है।

ज्ञात हो कि मालाबार हिल क्षेत्र निवासी डॉक्टर कविता तिलवानी अपने भाई के साथ ग्रांट रोड में एसपी नर्सिंग होम चलाती हैं। उनकी तहरीर पर डीबी मार्ग पुलिस स्टेशन में बुधवार (अगस्त 19, 2020) को मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने बताया कि 8 महीने की गर्भवती मरीज फैज़मा शेख 17 अगस्त को नर्सिंग होम में भर्ती हुई थी।

18 अगस्त को उनकी डिलीवरी हुई। डिलीवरी के बाद फैज़मा शेख के 20-22 रिश्तेदार उसे देखने के लिए नर्सिंग होम में आए थे। उनमें से कुछ लोगों ने मास्क नहीं पहना था। इसके साथ ही, फैज़मा से मिलने आए रिश्तेदारों ने कमरे में भीड़ जमा कर ली थी।

अपनी शिकायत में डॉ. तिलवानी ने बताया कि बिस्तर पर तीन महिलाएँ मरीज के साथ बैठी थीं। इनमें कुछ ने मास्क भी नहीं पहना था। साथ ही, कमरे में आए लोगों की वजह से काफी भीड़ इक्कठा हो गई थी, जो कोरोना महामारी के समय किसी के लिए भी जनलेवा हो सकता था।

इस पर डॉक्टर ने आपत्ति जताते हुए लोगों को बाहर जाने और मास्क लगाने के लिए कहा तो नफीसा अब्बास लकड़ावाला, जो फैज़मा के बिस्तर पर बैठी थी, ने डॉक्टर को भद्दी गालियाँ देनी शुरू कर दी। साथ ही उसने मारपीट करने की धमकी भी दी।

महिला द्वारा की गई बदसलूकी के बाद नर्सिंग होम के कर्मचारियों ने वहाँ मौजूद लोगों को कमरे से बाहर निकाला। साथ ही, डॉ. तिलवानी ने डीबी मार्ग पुलिस स्टेशन को फोन कर लकड़ावाला के खिलाफ महाराष्ट्र मेडिकेयर सर्विस पर्सन्स एंड मेडिकेयर सर्विस इंस्टीट्यूशंस (हिंसा और नुकसान की रोकथाम या संपत्ति को नुकसान) अधिनियम, 2010 की धारा 4 के तहत मामला दर्ज कराया।

डीबी मार्ग पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ निरीक्षक सूर्यकांत बाँगर ने मामले की जाँच के आदेश दिए। उन्होंने बताया कि आरोपित महिला के बयान दर्ज करने और मामले की तह तक पहुँचने बाद उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।

मेहराज और उसके दोस्त ने एक्ट्रेस को दे दी धमकी

एक अन्य मामले में, बुधवार (अगस्त 19, 2020) को मुंबई के अंधेरी में मराठी एक्ट्रेस मानसी नाइक ने एक सुपरमार्केट के बाहर मेहराज निसार आजमी (28) और उसके साथी सूर्या दुबे (20) को मास्क ना पहनने के लिए टोका। इस पर दोनों ने ही अभिनेत्री मानसी नाइक की बात का विरोध करते हुए उनके साथ बदतमीजी की और धमकी देनी शुरू कर दी।

हालात बिगड़ते देख अभिनेत्री को मदद के लिए पुलिस को फोन करना पड़ा। इस मामले में मेहराज और सूर्या दुबे के खिलाफ केस दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। हालाँकि, बाद में दोनों को चेतावनी देकर छोड़ भी दिया गया।

16 साल की लड़की से गैंगरेप: मदद के नाम पर 30 लोगों ने लाइन में लगकर किया बलात्कार, Video वायरल

इजरायल से इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। यहॉं के इलट (Eilat) शहर स्थित एक होटल में 30 लोगों ने लाइन लगाकर एक 16 साल की लड़की का रेप किया और वीडियो बना ली।

आरोपित एक-दूसरे को जानते तक नहीं थे और लड़की की मदद के बहाने उसके साथ रेप किया। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया है।

पुलिस ने इस मामले में अब तक दो लोगों को गिरफ्तार किया है। इन्होंने पूछताछ में माना है कि लड़की के साथ कई लोगों ने रेप किया। पुलिस ने यह भी कहा है कि लड़की होटल में गेस्‍ट नहीं थी, बल्कि वह अपने दोस्‍तों के साथ शराब पीने के बाद बाथरूम गई थी।

इसके बाद लड़की को कुछ लोग होटल के कमरे में ले गए और गैंगरेप किया। ये आरोपित भी एक-दूसरे को नहीं जानते थे। एक संदिग्‍ध ने बताया कि आरोपितों ने लड़की के कमरे के बाहर लाइन लगाई और एक के बाद एक कमरे में जाकर उसके साथ बलात्‍कार करते रहे।

संदिग्ध ने बताया कि बलात्‍कारी मेडिकल सहायता देने के नाम पर लड़की के कमरे में घुसे थे। इस दौरान लड़की के नशे में होने का फायदा उठाकर उसके साथ बलात्‍कार किया। जाँचकर्ता लड़की के मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। वहीं मामला प्रकाश में आने में पूरे देश में गुस्सा है। लोग सड़कों पर उतर कर लड़की के लिए इंसाफ माँग रहे हैं।

इस पूरी घटना से बेहद दुखी इजरायल के प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सब बेहद हैरान करने वाला है। यह केवल लड़की के खिलाफ अपराध नहीं है, यह खुद मानवता के खिलाफ अपराध है। इसकी पुरजोर निंदा होनी चाहिए और जो लोग इसके लिए जिम्‍मेदार हैं उनके खिलाफ सख्‍त कार्रवाई होनी चाहिए।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि पुलिस ने इस मामले में जिन दो लोगों को गिरफ्तार किया है, उनका कहना है कि लड़की इस महीने की शुरुआत में एक दोस्त के साथ इलट आई, जहाँ उसने अपने दोस्तों के परिचितों से मुलाकात की और उन सबने शराब पी। शराब पीने के बाद वह होटल में वॉशरूम इस्तेमाल करने गई। जहाँ कुछ लोगों ने उसका रेप किया।

इस बीच किशोरी के दोस्त ने उसकी मदद करनी चाही, लेकिन वह उन पुरुषों को रोकने में सक्षम नहीं था। यहाँ बता दें कि हिरासत में लिए गए दो संदिग्धों की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि ये इजरायल के निवासी हैं और इनकी उम्र 20 के आसपास है।

गौरतलब है कि पिछले साल भी इजरायल से एक गैंगरेप केस का मामला सामने आया था। तब एक 19 साल की ब्रिटिश महिला ने 12 इजरायल युवकों पर रेप का आरोप लगाया था।। हालाँकि, बाद में उसे झूठ बोलने का आरोपित बना दिया और 4 महीने की सजा सुनाई गई। फिर, महिला अधिकारों की माँग करने वाले समूह ने इस केस को दोबारा खोला और वकील ने कहा कि महिला अपनी सजा के ख़िलाफ़ अपील करेगी।

बेंगलुरु दंगों पर येदियुरप्पा ने दिया डीके शिवकुमार को दो टूक जवाब, कहा- एक ईमानदार जाँच से कॉन्ग्रेस को डर कैसा

एक दिन पहले कॉन्ग्रेस कमेटी के मुखिया डीके शिवकुमार ने भारतीय जनता पार्टी पर बेंगलुरु दंगे की जाँच प्रभावित करने का आरोप लगाया था। इस पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा विरोधी दलों को तब तक कोई आरोप नहीं लगाना चाहिए जब तक जाँच की रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती है।    

मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने इस मुद्दे पर आधिकारिक तौर पर बयान जारी करते हुए कहा, “बेंगलुरु दंगों की जाँच अभी चल रही है। बहुत जल्द सच सामने आएगा इसलिए कॉन्ग्रेस को इस मुद्दे पर आरोप नहीं लगाने चाहिए। न ही इस मुद्दे का राजनीतिकरण करना चाहिए।”

इसके पहले कर्नाटक सरकार में स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्री के सुधाकर ने भी डीके शिवकुमार के बयान पर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि डीके शिवकुमार ईमानदार तरीक़े से हो रही जाँच से क्यों डर रहे हैं।    

के सुधाकर ने कहा, “KPCC (कर्नाटक प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी) के अध्यक्ष ने सार्वजनिक रूप से बेंगलुरु के मंडलायुक्त कमल पंत पर आरोप लगाया है। जबकि वह दंगों के इन मामले की निष्पक्ष रूप से जाँच कर रहे हैं। लोग उन्हें भाजपा का एजेंट कह रहे हैं। डीके शिवकुमार आखिर इस जाँच से क्यों डर रहे हैं? यह कोशिश किसे बचाने के लिए की जा रही है?”

बीते दिन (20 अगस्त 2020) मीडिया वार्ता करते हुए डीके शिवकुमार ने भाजपा पर कई आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था पुलिस अपनी जाँच में कॉन्ग्रेस नेताओं को निशाना बना रही है।    

इसके अलावा डीके शिवकुमार ने अपने बयान में कहा था, “मैं पुलिसकर्मियों से निवेदन करना चाहता हूँ। खासकर मंडलायुक्त, जिनके लिए यह चेतावनी है। मैं इस बात पर चर्चा नहीं करना चाहता हूँ कि क्यों हाल ही में हिंसा की घटना हुई। लेकिन आप सभी (पुलिस अधिकारी) भाजपा के मंत्रियों से प्रभावित होकर जाँच कर रहे हैं। मिस्टर कमीश्नर हम आपको ऐसा नहीं करने देंगे। हम भले भाजपा का विरोध करें या नहीं लेकिन पुलिस वालों का विरोध ज़रूर होगा। कॉन्ग्रेस का कोई भी नेता हिंसा के लिए ज़िम्मेदार नहीं है यह पूरी तरह पुलिस की नाकामी है। पुलिस घटना को नियंत्रित नहीं कर पाई और हम इस घटना की निंदा करते हैं।” 

बेंगलुरु दंगे के सिलसिले में अब तक 61 लोगों के खिलाफ गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (यूएपीए) के तहत मामला दर्ज किया गया है। सिटी पुलिस कमिश्नर के हवाले से मीडिया रिपोर्टों में यह जानकारी दी गई है।

पंत ने बताया कि मामले की जॉंच जारी है और साक्ष्यों के आधार पर यह आगे बढ़ रही है। इसी आधार पर आरोपितों की गिरफ्तारी की जा रही है। जो आरोपित पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं, उन्हें भी जल्द पकड़ लिया जाएगा। कर्नाटक की राजधानी में 11 अगस्त की रात हिंसा और आगजनी हुई थी। राज्य के गृहमंत्री बसवराज बोम्मई ने पिछले दिनों दंगों के पीछे संप्रदाय विशेष के कट्टरपंथी लोगों का हाथ होने की बात बताई थी। उन्होंने इसे बड़ी साजिश का हिस्सा बताते हुए जॉंच के आदेश दिए थे।

कर्नाटक के कॉन्ग्रेस विधायक के भतीजे नवीन द्वारा सोशल मीडिया पर पैगम्बर मोहम्मद के कथित अपमानजनक पोस्ट को लेकर कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में हुए दंगों में उग्र भीड़ द्वारा ‘पुलिसकर्मियों को मार डालो, उन्हें मत छोड़ो, उन्हें खत्म करो’ के नारे भी लगाए गए। नवीन को भी फिलहाल गिरफ्तार किया गया है। विधायक के आवास और डीजे हाली के एक थाने में संप्रदाय विशेष के उपद्रवियों ने उत्पात मचाया, जिन्होंने कई पुलिस और निजी वाहनों को भी आग लगा दी और लूटपाट भी मचाई थी। 

मंगलवार (अगस्त 11, 2020) की शाम कॉन्ग्रेस विधायक अखंडा श्रीनिवास मूर्थी के आवास पर संप्रदाय विशेष के हज़ारों लोगों की भीड़ इकट्ठा हुई। कुछ ही देर में भीड़ ने पूरे घर को तबाह कर दिया। इसके बाद डीजे हल्ली और केजी हल्ली पुलिस थाने पर भी जम कर तोड़ फोड़ की। पुलिस द्वारा की गई जवाबी कार्रवाई में कुल 3 लोगों की जान गई थी और 6 लोग घायल हुए थे। दंगे की घटनाओं में 60 पुलिसकर्मी घायल हुए थे जिसमें से 15 नज़दीकी अस्पतालों में भर्ती हुए थे।  

103 बुद्धिजीवियों ने लिखा CJI को पत्र, प्रशांत भूषण मामले में दबाव बनाने वाले समूहों की भूमिका पर उठाए सवाल

देश की सबसे बड़ी अदालत ने प्रशांत भूषण अवमानना के मामले में दोषी करार दिया था। इस मामले पर ‘Campaign for Judicial Accountability and Reforms (CJAR)’ ने टिप्पणी की थी। टिप्पणी में CJAR ने सर्वोच्च न्यायालय को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने की बात कही गई थी। 103 बुद्धिजीवियों ने इस टिप्पणी की कड़ी आलोचना की है और CJAR के इस नज़रिए पर असहमति जताई है। इन 103 लोगों में उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश, पूर्व आईएएस-आईपीएस अधिकारी और सेना के पूर्व अधिकारी भी शामिल हैं।     

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में कहा था कि प्रशांत भूषण के आरोप व्यक्तिगत नहीं, बल्कि देश की एक अहम संस्था पर थे। इस निर्णय पर टिप्पणी करते हुए CJAR ने प्रशांत भूषण का समर्थन किया था। इसके अलावा उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले की आलोचना भी की थी। 15 अगस्त को CJAR की तरफ से जारी किए बयान की आलोचना करने वाले बुद्धिजीवी समूह में भी कई दिग्गज नाम शामिल थे।    

इसमें मुंबई उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश केआर व्यास, पूर्व विदेश सचिव अमर सिन्हा, पंजाब के पूर्व मुख्य सचिव सर्वेश कौशल और अन्य शामिल थे। इस 103 लोगों के समूह ने कहा, CJAR के दावे से ऐसा लग रहा है जैसे वह सिविल सोसायटी के इकलौते प्रतिनिधि हैं। उनके अलावा दूसरे किसी को संविधान और लोकतंत्र की चिंता ही नहीं है। इसके अलावा 103 लोगों के समूह ने कहा ऐसा करने के पीछे राजनीतिक एजेंडे के अलावा कोई और वजह नहीं है।    

प्रशांत भूषण के मामले को सिर्फ एक राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे सिर्फ और सिर्फ संसद, चुनाव आयोग और सर्वोच्च न्यायालय जैसे लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुँचती है।    

103 लोगों के समूह द्वारा लिखी गई चिट्ठी (साभार – टाइम्स ऑफ़ इंडिया)

समूह ने लिखा है यह पहला ऐसा मौक़ा नहीं है जब CJAR ने इस तरह के भड़काऊ और छवि धूमिल करने वाली बातें कही हैं। CJAR कुछ लोगों को छोड़ कर (जैसे अरुं​धति रॉय) प्रशांत भूषण को अपना अहम हिस्सा मानता है। इसका साफ़ मतलब है कि वह एक एजेंडे पर काम कर रहे हैं और अपना पक्ष न्यायिक ढाँचे में रख कर पेश कर रहे हैं। इसके अलावा समूह ने कहा कि न्यायिक व्यवस्था का हिस्सा होने पर कई संवैधानिक और नैतिक ज़िम्मेदारियाँ भी होती हैं। ऐसे में इस पेशे से जुड़े किसी भी तरह के सिद्धांतों की अनदेखी करना दुर्भाग्यपूर्ण और अस्वीकार्य है।  

इसके बाद समूह ने मोरिस वर्सेज़ क्राउन केस का उल्लेख किया। इसके अलावा अपने बात कहने के लिए लार्ड डेनिंग्स के कथन,’न्याय के क्रम किसी भी तरह का दखल या रुकावट नहीं होनी चाहिए। जो इन प्रक्रियाओं पर हमला करते हैं वह एक तरह से समाज की नींव पर हमला कर रहे हैं’ का ज़िक्र किया है। अंत में समूह ने लिखा है, “CJAR और अन्य संगठनों ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की आलोचना करते हुए टिप्पणी की है। यह सरासर गलत और निराशाजनक है। हम इस तरह की दिखावटी जागरूकता का पूरी तरह विरोध करते हैं।”   

103 लोगों के समूह द्वारा लिखी गई चिट्ठी का दूसरा पन्न (साभार – टाइम्स ऑफ़ इंडिया )

इसके पहले 700 अधिवक्ताओं ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने कहा था कि भारत ने ऐसे हमलों की श्रृंखला देखी है जो संस्थाओं को हानि पहुँचाने के उद्देश्य से किए जाते हैं। ऐसे हमले ज़्यादातर न्यायाधीशों के विरोध में किए जाते हैं। इस तरह के हमले करने वाले खुद से एक लकीर खींच लेते हैं और जो उस लकीर से सहमत नहीं होता उन्हें हमले झेलने पड़ते हैं। यह कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब किसी अधिवक्ता के राजनीतिक हित तय नहीं हो पाते हैं, तब वह निचले दर्जे की टिप्पणी करते हैं।    

इसके बाद पत्र में लिखा था कि देश की सबसे बड़ी अदालत और न्यायाधीशों पर अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल, द्वेषपूर्ण हमले और बेबुनियादी आरोप नहीं किए जाने चाहिए। न्यायपालिका को अपने कर्तव्य निभाने होते हैं, दायित्वों का पूरा करना होता है। ऐसे में यह भी उतना ही ज़रूरी है कि अदालतों के सम्मान का भी उतना ही ख़याल रखा जाए। इस तरह के बयान “सर्वोच्च न्यायालय संविधान की ह्त्या कर रहा है।” लोगों में न्यायपालिका की छवि खराब करते हैं और भरोसा भी कम करते हैं।      

केजरीवाल की AAP को शेल कम्पनी के जरिए ₹2 करोड़ ‘चंदे’ के नाम पर ट्रासंफर करने वाले 2 व्यापारी गिरफ्तार

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने एक शेल कंपनी के माध्यम से अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप) को ₹2 करोड़ ‘दान’ करने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स द्वारा यह जानकारी शुक्रवार (अगस्त 21, 2020) को जारी की गई है। दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए दो में से एक की पहचान दिल्ली के व्यवसायी मुकेश कुमार के रूप में की गई है। दूसरे की पहचान सुधांशु बंसल के रूप में की गई है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, आम आदमी पार्टी (AAP) को 4 फर्जी कंपनियों के जरिए चंदा देने का मामला फ़रवरी 2014 का है, जब ROC (रजिस्ट्रार ऑफ़ कम्पनीज) ने 4 फ़र्ज़ी कंपनियों के जरिए आम आदमी पार्टी में ₹2 करोड़ आने की शिकायत पुलिस को दी थी। ये पैसा देहरादून की एक कंपनी ने शैल कंपनियों के जरिए दिया था।

गौरतलब है कि कल यानी, बृहस्पतिवार (अगस्त 20) को ही आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविन्द केजरीवाल ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी आगामी उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में सभी 70 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

मार्च 31, 2014 को डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की पार्टी AAP को कथित रूप से चंदा देने के आरोप में दोनों को गिरफ्तार किया गया है। मुकेश शर्मा दिल्ली में स्थित एक प्रॉपर्टी डीलर और तंबाकू व्यापारी हैं।

ध्यान देने की बात है कि जब तत्कालीन दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा को बर्खास्त कर दिया गया था, तभी कपिल मिश्रा ने एक आरोप लगाया था कि एक शेल कंपनी द्वारा AAP को पैसे का भुगतान किया गया था। कपिल मिश्रा, जो कि अब भाजपा नेता हैं, ने AAP की फंडिंग में ‘भारी अनियमितता’ का भी आरोप लगाया था और ₹2 करोड़ के संदिग्ध ‘दान’ के बारे में सवाल उठाए थे। उन्होंने यह भी दावा किया था कि कई शेल कंपनियों ने AAP को पैसे दिए थे और पार्टी को इसका पता था।

शेल कॉर्पोरेशन एक ऐसा संगठन होता है, जो बिना सक्रिय व्यवसाय या महत्वपूर्ण संपत्ति के होते हैं। इस प्रकार के कॉर्पोरेशन आवश्यक रूप से अवैध नहीं होते, लेकिन उन्हें कभी-कभी अवैध रूप से इस्तेमाल किया जाता है, जैसे कि कानून या जनता की नजरों से बचने के लिए इनका इस्तेमाल किया जाता है।

शालिनी यादव से बनी फिजा फातिमा: फैसल संग किया निकाह, भाई ने बताया लव जिहाद का मामला, किए कई चौंकाने वाले खुलासे

उत्तरप्रदेश के कानपुर में इस्लाम धर्म कबूल कर शादी करने का मामला सामने आया है। पिछले 2 महीने से गायब शालिनी यादव का पता चल चुका है। लेकिन अब उसका नाम, धर्म और मैरिटल स्टेटस बदल चुका है। शालिनी यादव ने एक वीडियो जारी कर बताया कि उसका नाम अब फिजा फातिमा हो चुका है। और उसने फैसल नाम के एक शख्स से शादी कर ली है।

शालिनी के परिजनों ने पुलिस को मोहम्मद फैसल के ​खिलाफ तहरीर दी है। पुलिस ने मामले को संज्ञान में लेते हुए गाजियाबाद जाने की तैयारी में जुट गई है।

बता दें कानपुर के बर्रा 6 की रहने वाली 22 वर्षीय शालिनी यादव 29 जून से ही लापता थी। उसने अपने घरवालों से परीक्षा देने का बहाना बनाया और लखनऊ चली गई। फिर उसी दिन से वह घर नहीं लौटी। परिजनों ने उसे खोजने की खूब कोशिश की लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। परिवार ने गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी।

जिसके बाद 8 अगस्त को शालिनी यादव ने खुद फेसबुक पर एक वीडियो अपलोड करके अपने घरवालों को अपनी शादी की कहानी सुनाई। शालिनी यादव इस वीडियो में अपने परिवार वालों को चकमा देकर भागने और फिर धर्म बदलकर शादी करने की बात कहती हुई दिखाई दे रही है। शालिनी ने कहा, उसने लाल कालोनी के रहने वाले मोहम्मद फैजल से शादी कर ली है और इस्लाम धर्म कबूल करके अपना नाम शालिनी यादव से फिजा फातिमा (Fiza Fatima) कर लिया है।

वहीं शालिनी के भाई ने आरोप लगाते हुए इस पूरे मामले को लव जिहाद बताया है। भाई ने कहा कि वह घर से 10 लाख रुपए लेकर निकली थी। फैसल ने उसे बहला-फुसलाकर प्रेमजाल में फँसाया है। भाई ने कहा कि इसके पीछे लव जिहाद गैंग का हाथ है। बहन के प्रति अपनी चिंता को जाहिर करते हुए उसने शहर में चल रहे लव जिहाद का खुलासा करते हुए कहा कि लव जिहाद का गैंग हिंदू लड़कियों को निशाना बना कर उन्हें अपने झाँसे में लेता है। फिर उनसे इस्लाम कबूल कराता है। अब तक इस गैंग ने 5 लड़कियों को अपना शिकार बनाकर उन्हें इस्लाम कबूल करवा चुका है। अगर इस पर लगाम नहीं लगाया गया तो कई हिंदू बहन-बेटियों की जिंदगी बर्बाद कर देगा।

वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया एडवाइजर शलभ मणि त्रिपाठी ने भी अपने ट्विटर हैंडल से शालिनी की वीडियो को शेयर किया है। शलभ मणि त्रिपाठी ने इसे लव जेहाद का नाम देते हुए कुछ सवाल उठाए हैं।

उन्होंने ट्वीट में लिखा, “परीक्षा देने के बहाने निकली कानपुर की शालिनी यादव ने पहले धर्म बदला, फिर फैजल से निकाह कर लिया। सवाल ये है कि धर्म बदलने की क्या जरूरत? धर्म शालिनी यादव ने ही क्यों बदला? फ़ैजल ने क्यों नहीं? तभी तो कहते हैं, ये लव नहीं, ये है लव जेहाद।” यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

वहीं अपर पुलिस अधीक्षक बाबूपुरवा आलोक सिंह ने बताया कि परिजनों की तहरीर पर थाना किदवई नगर में आरोपित युवक फैसल के खिलाफ धारा 364, 360, 120-B और 511 में मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि परिजनों का आरोप है कि शालिनी यादव का अपहरण कर लिया गया है। इस संदर्भ में एक वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें लड़की खुद को शालिनी यादव बताकर शादी और धर्म परिवर्तन करने की बात कह रही है। इस पूरे मामले की जाँच की जा रही है।

बता दें, सीओ आलोक सिंह ने बताया कि इससे पहले एक बार गाजियाबाद पुलिस टीम गई थी, इसमें शालिनी ने बयान दिया था कि वह बालिग है और उसने अपनी इच्छा से शादी की है। वायरल वीडियो में भी शालिनी (फिज़ा फातिमा) अपने अपने परिवारवालों से जान का खतरा बताते हुए अपने पति फैज़ल और अपनी सुरक्षा की माँग की है।

अब चौथी सदी के चर्च को बना दिया मस्जिद: तुर्की मिटा रहा ईसाइयों की हर पहचान

हागिया सोफिया (Hagia Sophia) के बाद तुर्की सरकार ने अब इस्तांबुल के चोरा म्यूजियम (Chora museum) को मस्जिद में तब्दील करने का आदेश दिया है। राष्ट्रपति का यह फरमान आज 21 अगस्त को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित किया गया।

हालिया फरमान के मुताबिक इस साइट को अब धार्मिक मामलों के निदेशालय को स्थांतरित कर दिया गया है और अब इसे एस्टैबिलशमेंट ऐंड ड्यूटीस ऑफ द प्रेसीडेंसी रिलीजियस अफेयर्स कानून के आर्टिकल 35 के अनुसार संप्रदाय विशेष के लोगों की नमाज के लिए खोला जाएगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, म्यूजियम को मस्जिद बनाने का निर्णय साल 2019 में ही ले लिया गया था। लेकिन तुर्की की स्टेट काउंसिल ने इसे कार्यान्वित नहीं किया था। पर, आज वहाँ की सरकार ने यह फरमान निकाल दिया कि चौथी सदी में बनी इस इमारत को मस्जिद बनाया जा रहा है।

चोरा म्यूजियम की पहचान इंटरनेट पर एक चर्च के तौर पर मिलती है। इसे चौथी सदी में बाइजेंटाइन शासकों ने बनवाया था। इस्तांबुल पर ओटोमेन्स ने 1453 पर कब्जा किया और इसे 1511 में मस्जिद बनाया। 434 वर्ष तक इसे मस्जिद माना गया। फिर 1945 में तुर्की सरकार ने इसे म्यूजियम बना दिया।

11 नवंबर, 2019 के अपने निर्णय में, राज्य की परिषद ने निष्कर्ष निकाला कि राष्ट्रीय शिक्षा मंत्रालय को संग्रहालय और संग्रहालय के गोदाम के रूप में उपयोग किए जाने के लिए भवन का आवंटन “कानून के विपरीत है।” वास्तविकता में तो 22 जून, 1965 के चोरा संग्रहालय प्रशासन के एस्टैबिलशमेंट ऐंड ड्यूटीस ऑफ द प्रेसीडेंसी रिलीजियस अफेयर्स कानून के आर्टिकल 35 के अनुसार, इसे नमाज अता करने के लिए खोलने का निर्णय लिया गया था।

गौरतलब है कि इससे पहले पिछले महीने हागिया सोफिया चर्च को तुर्की में मस्जिद में तब्दील करने का फैसला हुआ था। इसके बाद कैथलिक समाज के प्रमुख पोप ने इस फैसले पर अफसोस जताया था और यूनेस्को ने भी इसकी आलोचना की थी।

स्वयं तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन 10 जुलाई को इस्तांबुल में 1500 साल पुराने ऑर्थोडॉक्स क्रिश्चियन कैथेड्रल हागिया सोफिया को मस्जिद में बदलने की घोषणा की थी। उससे पहले तुर्की के एक अदालत ने यह निर्देश दिया था।

इसका इतिहास भी बाइजेंटाइन काल से जुड़ा है। जब इसे सम्राट जस्टिनियन I के आदेश से 537 में एक भव्य चर्च के रूप निर्मित किया गया था। इसे दुनिया का सबसे बड़ा चर्च माना जाता था। 1453 में ओटोमन शासन के दौरान इसे मस्जिद में परिवर्तित कर दिया गया। उससे पहले बाइजेंटाइनों ने इसे सदियों तक संभाला था।

सुल्तान मेहमेद II के कब्जा करने से पहले इस्तांबुल को कॉन्स्टेंटिनोपोल के नाम से जाना जाता था। उसने ही तब गिरजाघर के भीतर जुमे की नमाज शुरू की थी। इसके बाद चार मीनारों को मूल संरचना के साथ में जोड़ा गया था। इतना ही नहीं ईसाई मोज़ेक को इस्लामी चित्रकला के साथ ढक दिया गया था।

इसे 1453 में मॉडर्न तुर्की के संस्थापक केमल अतातुर्क द्वारा एक संग्रहालय का दर्जा दिया गया था। लेकिन, अब यहाँ के सभी चीजों को बदलने की तैयारी की जा रही है। हालाँकि, हागिया सोफिया लंबे समय से इस्लाम-ईसाई प्रतिद्वंद्विता का प्रतीक रही है।

लगभग 900 वर्षों तक, हागिया सोफिया को पूर्वी ईसाइयों के लिए का तीर्थस्थल माना जाता था। तीर्थ स्थल पर रखे गए कलाकृतियों में ईसा मसीह का मूल क्रॉस भी शामिल था। सदियों से, ईसाई तीर्थयात्री इन सभी वस्तुओं से आत्मिक शांति प्राप्त करते आ रहे हैं।