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रिटायर्ड जज, ब्यूरोक्रेट्स उतरे प्रशांत भूषण के विरोध में: CJI को लिखा पत्र, कहा- ये लोकतांत्रिक संस्थाओं पर करते हैं आघात, सख्ती से आएँ पेश

सेवानिवृत्त न्यायधीशों और ब्यूरोक्रेट्स समेत नागरिकों के एक समूह ने वकील प्रशांत भूषण को अदालत की अवमानना के मामले में दोषी करार देने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश की आलोचना करने वालों पर निशाना साधा है। उन्होंने नायायलय के फैसले की निंदा करने वालों को घेरते हुए आरोप लगाया कि ये लोग संसद, चुनाव आयोग और शीर्ष अदालत जैसी लोकतांत्रिक संस्थाओं की जड़ों पर आघात करने का हर अवसर भुनाते हैं।

सीजेआई बोबड़े को लिखे गए इस पत्र में कहा गया है कि ये काफी दुर्भाग्यपूर्ण है कि जब किसी वकील का राजनीतिक मकसद कोर्ट के फैसलों से पूरा नहीं होता है तो वो इस पर अपमानजनक टिप्पणी करते हैं। 

पत्र में आगे कहा गया है, “हम सभी लोग इस नए ट्रेंड पर चिंता जताते हैं, जिसमें न्यायपालिका को निशाना बनाया जा रहा है। भारत में पिछले कई सालों में देखा गया कि कुछ लोगों ने लगातार उन जजों पर हमला बोला है, जो उनसे सहमत नहीं थे।”

पत्र में ऐसे वकीलों का जिक्र किया गया है जो कोर्ट के फैसले के खिलाफ बोलते हैं। इसमें कहा गया है कि ऐसे वकील अपमानजक टिप्पणी कर कोर्ट का अपमान करते हैं, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया और जजों को भी टारगेट किया जाता है। हमेशा उनके जजमेंट की आलोचना की जाती है।

खत में आगे कहा गया है कि अगर न्यायपालिका अपना काम और संचालन सही तरीके से कर रही है तो ऐसे में ये जरूरी हो जाता है कि कोर्ट की गरिमा और अथॉरिटी की सुरक्षा की जाए। न्यायपालिका का आधार यही है कि लोग इस पर न्याय के लिए भरोसा रखते हैं। कोर्ट के खिलाफ ये कहना कि ‘सुप्रीम कोर्ट ने लोकतंत्र को बर्बाद कर दिया’ और ‘सुप्रीम कोर्ट संविधान की हत्या कर रहा है’, जनता में न्यायपालिका के भरोसे को तोड़ने की एक शुरुआत जैसा है।

सेवानिवृत्त न्यायधीशों और ब्यूरोक्रेट्स समेत नागरिकों के एक समूह की तरफ से लिखा गया है, “हम कुछ लोगों के बयानों से बहुच चिंतित हैं, जो खुद के सिविल सोसायटी का एकमात्र प्रतिनिधि होने का गलत दावा करते हैं और संसद, चुनाव आयोग तथा अब उच्चतम न्यायालय जैसे भारत के लोकतांत्रिक संस्थानों की जड़ों पर हमला करने के हर अवसर का इस्तेमाल करते हैं।”

इन सभी वकीलों, पूर्व जजों और ब्यूरोक्रेट्स ने आखिर में अपील करते हुए कहा है, “हम सीजेआई से अपील करते हैं कि न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता बनी रहे और ऐसे लोगों से, जो इस संस्था को खत्म करना चाहते हैं, लोकतंत्र के तीसरे पिलर को बचाएँ। साथ ही सुप्रीम कोर्ट से अपील करते हैं कि ऐसे लोगों के साथ सख्ती से पेश आया जाए।”

पत्र पर 100 से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें मुंबई उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश के आर व्यास, सिक्किम उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश प्रमोद कोहली, पूर्व पेट्रोलियम सचिव सौरभ चंद्रा और पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक पीसी डोगरा आदि शामिल हैं। उन्होंने कहा है कि प्रशांत भूषण उच्चतम न्यायालय के एक वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और ‘अदालत की अवमानना’ को कोई ‘दबाव समूह’ न्यायोचित नहीं ठहरा सकता है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण के खिलाफ उनके दो ट्वीट्स को लेकर 14 अगस्त को फैसला दिया था। 14 अगस्त को शीर्ष अदालत ने वकील प्रशांत भूषण को कोर्ट की अवमानना वाले मामले में दोषी करार दिया। न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा, न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ ने भूषण को अवमानना का दोषी ठहराते हुए कहा कि इसकी सजा की मात्रा के मुद्दे पर 20 अगस्त को बहस सुनी जाएगी। शीर्ष अदालत ने पाँच अगस्त को इस मामले में सुनवाई पूरी फैसला सुरक्षित कर लिया था। 

ये पहली बार है जब कुछ लोगों ने प्रशांत भूषण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में आवाज उठाई है। इससे पहले कई बुद्धिजीवी, पत्रकार, वकील और अन्य लोगों ने प्रशांत भूषण का समर्थन किया और कोर्ट के फैसले पर ‘चिंता’ जाहिर की थी। प्रशांत भूषण को अवमानना का दोषी करार दिए जाने के फैसले के बाद सैकड़ों वकीलों और अन्य लोगों ने इसका विरोध किया। बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया से लेकर वकीलों की अन्य एसोसिएशंस ने भी इस पर चिंता जताई थी।

बता दें कि वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक अर्जी दायर की जिसमें अवमानना मामले के संबंध में उनकी सजा पर सुनवाई टालने की माँग की गई है। इसमें कहा गया है कि जब तक इस संबंध में एक समीक्षा याचिका दायर नहीं की जाती है और अदालत द्वारा इस पर विचार नहीं किया जाता है, तब तक सजा पर सुनवाई को टाल दिया जाए। 

‘लायक’ बेटों की बूढ़ी माँ सड़क पर पड़ी मिली, सिर में लग चुके थे कीड़े: मौत होने पर हड़बड़ी में किया गया संस्कार

एक बेटा एक्साइज ऑफिसर। दूसरा बेटा नेता। नेता छोटा-मोटा नहीं, विधानसभा का चुनाव लड़ चुका है TMC के टिकट पर। और इन दोनों बेटों की एक माँ! माँ जो अब इस दुनिया में नहीं रहीं। लेकिन कहानी तब की है, जब माँ मनजीत कौर जिंदा थीं लेकिन सड़क किनारे पड़ी हुईं… आधे शरीर पर कपड़े नहीं और सिर में चल रहे थे कीड़े!

जी हाँ, यह कहानी अभी की ही है। अगस्त 2020 के पंजाब की। ‘लायक’ बेटों की यह कहानी लोगों तक पहुँचती नहीं अगर 80 साल की वृद्ध मनजीत कौर 14 अगस्त को बदहाल अवस्था में स्थानीय लोगों को पंजाब के मुक्तसर शहर में नहीं मिलतीं। भला हो उन लोगों का जिन्होंने मनजीत कौर की जानकारी एक NGO को दी और बात फिर पुलिस-प्रशासन तक पहुँची।

मनजीत कौर को इलाज के लिए गुरु गोविंद सिंह मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ। तब तक खबर सोशल मीडिया में वायरल भी हो गई। लोगों को पता चल चुका था कि इस वृद्ध माँ के ‘लायक’ बेटे कौन हैं। समाज में अपनी ‘प्रतिष्ठा’ को बचाए रखने के लिए बेटा बलविंदर सिंह (एक्साइज ऑफिसर) और बेटा राजेंद्र सिंह राजा (राजनेता) हॉस्पिटल आए। माँ को डिस्चार्ज करा कर घर (जो शायद मनजीत कौर के लिए मकान हो) ले गए।

रविवार यानी 16 अगस्त की रात को मनजीत कौर चल बसीं। ‘लायक’ बेटों को फिर से सामाजिक प्रतिष्ठा में बट्टा लगने का डर सताने लगा। सोमवार की सुबह चुपके से और जल्दी-जल्दी में उन्होंने अपनी माँ का अंतिम संस्कार कर डाला।

इस पूरे मामले को लेकर इलाके में बहुत सवाल उठे। लोगों ने पूछा कि आखिर ‘लायक’ बेटों ने अपनी बूढ़ी माँ को ऐसे हाल में कैसे छोड़ दिया। लोगों ने सवाल किया कि माता-पिता अपने पूरे जीवन की सारी कमाई खर्च करके बच्चों को पढ़ाते हैं ताकि उनका बेटा बुढ़ापे में उनका सहारा बने। लेकिन इन ‘लायक’ बेटों ने तो अपनी माँ को उसके अंतिम दिनों में उसको सड़क पर ही छोड़ दिया।

यहाँ ये भी बता दें कि 80 साल की मनजीत कौर के केवल बेटे ही समाज में रसूख नहीं रखते। बल्कि उनकी पोती भी पुलिस विभाग में एक क्लास वन ऑफिसर है। पोती का दबदबा होने के चलते इस मामले में पुलिस भी कुछ प्रतिक्रिया देने को तैयार नहीं है। और, न ही इस मामले में कोई केस दर्ज हो रहा है। परिवार के सदस्य तो पहले ही लोगों के सवालों से बच रहे हैं। मगर, जिनके मन में ‘काबिल’ बेटों को लेकर सैंकड़ो सवाल उठ रहे हैं वो लोग भी रसूखदार परिवार के खि़लाफ़ कुछ नहीं बोल पा रहे।

बलविंदर सिंह ने तो मीडिया के आरोपों को बिलकुल खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी माँ को एक जानकार के साथ छोड़ा था। और, उनकी देख-रेख के लिए वह उसे पैसे भी दे रहे थे। मनजीत कौर के छोटे बेटे का कहना है कि उनकी बीवी डेढ साल से बिस्तर पर है। इसलिए उन्होंने माँ को उस जानकार के पास छोड़ा। वह उनसे अक्सर मिलने भी जाते थे। हाल में वह उनसे 4 दिन पहले मिले थे।

जम्मू-कश्मीर में तैनात 10,000 सैनिकों को बुलाया जाएगा वापस, चित्रगाम मुठभेड़ में 1 आतंकी ढेर

केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय ने बुधवार (19 अगस्त, 2020) कश्मीर घाटी में बीते एक साल तैनात पैरामिलिट्री की 100 कंपनियों यानी 10,000 जवानों को वापस बुलाने का फैसला किया है। वहीं शोपियाँ के मोलू चित्रग्राम इलाके में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में एक आतंकवादी को ढेर कर दिया। इलाके में सर्च ऑपरेशन अब भी जारी है।

बता दें कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने से पहले लगाई गई इन सभी कंपनियों को अब हालातों की समीक्षा के बाद वहाँ से हटाने का फैसला किया गया है। गृह मंत्रालय के इस फैसले को घाटी में विश्वास बहाली के एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।

कश्मीर घाटी में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने से पहले सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए करीब 30 हजार अतिरिक्त सीआरपीएफ जवानों की तैनात किया गया था। इसके अतिरिक्त बीएसएफ, सशस्त्र सीमा बल, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवानों को भी यहाँ पर बड़ी संख्या में तैनात किया गया था। इन जवानों की तैनाती के साथ ही घाटी में हालातों की समय-समय पर समीक्षा की जा रही थी।

निर्देशों के अनुसार, इस सप्ताह तक केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की कुल 40 कंपनियाँ और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल, सीमा सुरक्षा बल और सशस्त्र सीमा बल की 20 कंपनियाँ जम्मू-कश्मीर से वापस बुला ली जाएँगी। एक सीएपीएफ कंपनी में लगभग 100 जवान होते हैं।

गृह मंत्रालय ने मई में जम्मू-कश्मीर से लगभग 10 सीएपीएफ कंपनियों को वापस बुला लिया था। अब सीआरपीएफ के पास कश्मीर घाटी में लगभग 60 बटालियन (प्रत्येक बटालियन में लगभग 1,000 जवान) होंगे।

मुठभेड़ में एक आतंकी ढेर

सुरक्षाबलों ने बुधवार हुए मुठभेड़ में एक आतंकी को मौत के घाट उतार दिया है। फिलहाल मारे गए आतंकी की पहचान नहीं हो पाई है कि वह किस आतंकी संगठन से ताल्लुक रखता था। कश्मीर जोन पुलिस ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी।

रिपोर्ट के अनुसार चित्रगाम इलाके में आतंकियों के छिपे होने की खुफिया सूचना मिलने के बाद सुरक्षाबल इलाके में पहुँची। इसी दौरान मुठभेड़ शुरू हो गई।

कॉन्ग्रेस नेता पंकज पुनिया ने महिलाओं का किया अपमान: PM मोदी के ₹1 में सैनिटरी नैपकिन योजना का उड़ाया मजाक

हाइजीन को बढ़ावा देने और महिलाओं को और ज्‍यादा सशक्‍त बनाने को लेकर मोदी सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री भारतीय जनधन योजना (पीएमबीजेपी) के तहत जन औषधि केंद्रों में बिकने वाली ‘सुविधा’ सैनिटरी नैपकिन को काफी सस्ते दामों में उपलब्ध करवा रही है। मोदी सरकार ने जनऔ‍षधि केंद्रों में सैनिटरी नैपकिन सिर्फ 1 रुपए में मुहैया करवाया।

पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण के दौरान, अपनी सरकार द्वारा इस पहल का उल्लेख किया था। मासिक धर्म स्वच्छता को सुलभ बनाने और ग्रामीण क्षेत्रों में लड़कियों और महिलाओं को उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम को सोशल मीडिया यूजर्स ने काफी सराहा। उन्होंने मासिक धर्म को लेकर पूर्व निर्धारित धारणाओं को तोड़ने में एक कदम आगे बढ़ाने के लिए पीएम मोदी का अभिवादन किया।

ऐसा लगता है कि पीएम मोदी के प्रति इस कृतज्ञता और प्रशंसा से हरियाणा कॉन्ग्रेस के नेता पंकज पुनिया काफी आहत हो गए और तंज कसते हुए ट्वीट किया, “क्यों संतरों, (आरएसएस समर्थकों को संदर्भित करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक शब्द) सो गए क्या? बस यूँ ही याद दिला रहा था, वो एक रुपए वाला सेनेटरी पैड पहन लेना कभी।”

Congress leader Pankaj Punia’s now deleted Tweet

अपनी औसत दर्जे की मानसिकता को प्रदर्शित करते हुए, कॉन्ग्रेस नेता ने आरएसएस समर्थकों पर सेक्सिस्ट टिप्पणी करते हुए उनका माखौल उड़ाया। पुनिया ने उन्हें मोदी सरकार द्वारा गरीब महिलाओं को उपलब्ध कराए जा रहे सैनिटरी पैड इस्तेमाल करने के लिए कहा।

बता दें कि कई लोग आरएसएस से जुड़े लोगों को संदर्भित करने के लिए ‘संतरे’ शब्द का उपयोग करते हैं, क्योंकि आरएसएस का मुख्यालय नागपुर में है, जो संतरे के लिए प्रसिद्ध है।

अपने बेहद घटिया और असंवेदनशील ट्वीट के माध्यम से, पंकज पुनिया ने न केवल भाजपा और उसके समर्थकों का मज़ाक उड़ाया, बल्कि सामान्य रूप से महिलाओं का भी अपमान किया।

पुनिया की वाहियात टिप्पणी से खफा होकर, सोशल मीडिया यूजर्स ने कॉन्ग्रेस नेता पर तंज कसा। कुछ ने उन्हें “घृणित” और “मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति” बताते हुए कहा कि वो अपने बॉस प्रियंका गाँधी वाड्रा के तालियों के हकदार हैं।

जबकि कुछ लोगों ने ट्विटर से इस पर संज्ञान लेने और महिलाओं पर इस तरह की अश्लील टिप्पणी करने के लिए कॉन्ग्रेस नेता के अकाउंट को सस्पेंड कर देने का आग्रह किया।

पुनिया के ट्वीट पर सोशल मीडिया यूजर्स ने आक्रोशित होकर कॉन्ग्रेस नेता पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर वह महिलाओं का सम्मान नहीं कर सकते, तो उन्हें अपनी माँ को “माँ” नहीं कहना चाहिए।

हालाँकि, यह नहीं है कि पहली बार सोशल मीडिया यूजर्स ने कॉन्ग्रेस नेता के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की है। इससे पहले भी हजारों सोशल मीडिया यूजर्स ने कॉन्ग्रेस नेता की उनके घृणित, वीभत्स और अपमानजनक हिन्दूफोबिक ट्वीट के लिए निंदा की थी।

मई में बीजेपी और उसके समर्थकों के प्रति घृणा व्यक्त करते हुए कॉन्ग्रेस नेता ने ट्वीट किया था, “कॉन्ग्रेस सिर्फ़ मजदूरों को अपने खर्च पर उनके घरों तक पहुँचाना चाहती थी। बिष्ट सरकार ने राजनीति शुरू की। भगवा लपेटकर नीच काम संघी ही कर सकते हैं। ये (बीजेपी और इसके समर्थक) कब्र से निकालकर लाशों का बलात्कार करने वाले लोग हैं। बेटियों के सामने पैंट उतारकर जय श्रीराम के नारे लगाने वाले हस्तमैथुन करने वाले लोग हैं।”

बाद में पंकज पुनिया को हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पंकज पुनिया को हरियाणा के करनाल से गिरफ्तार किया गया था। उनकी गिरफ्तारी सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में हुई थी। 

पुनिया के ख़िलाफ़ उत्तर प्रदेश के हजरतगंज और नोएडा पुलिस ने आईटी एक्ट सहित कई मामलों में FIR दर्ज हुई थी। हजरतगंज में उनके खिलाफ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के मामले में केस दर्ज हुआ था। वहीं, नोएडा में कॉन्ग्रेस नेता के खिलाफ़ धारा 295ए, 500, 505, 153ए और 66 आईटी एक्ट के तहत दर्ज किया गया था।

कराची में हनुमान मंदिर पर बुलडोजर चलाकर पठान ने बनाया घर: बहुमूल्य प्राचीन मूर्तियाँ गायब

पाकिस्तान के कराची में एक पठान ने घर बनाने के लिए प्राचीन हनुमान मंदिर पर बुलडोजर चला दिया। मंदिर से पौराणिक वस्तुएँ और बहुमूल्य मूर्तियाँ भी गायब बताई जा रही हैं।

इसकी जानकारी मंदिर के महाराज ने एक न्यूज चैनल को दी। महाराज ने बताया कि कोरोना वायरस के समय में मंदिर-मस्जिद सब बंद रहने के आदेश दिए गए थे। इसलिए वह खामोश होकर बैठ गए। लेकिन अब उन्हें मालूम चला कि उनका मंदिर तोड़ दिया गया है। यह सूचना देते हुए मंदिर के महाराज बेहद दुखी थे और रोते उन्होंने अपना बयान दिया है।

‘वॉयस ऑफ पाकिस्तान मायनॉरिटी’ ने इसकी वीडियो ट्विटर पर अपलोड की है। इस ट्वीट में लिखा है, “अल्पसंख्यकों के पूजास्थल ध्वस्त करके, तुम केवल भावनाएँ आहत नहीं कर रहे, बल्कि इतिहास भी नष्ट कर रहे हो। कराची के सिंध में स्थित पौराणिक हनुमान मंदिर पर एक रसूखदार ने बुलडोजर चलवा दिया क्योंकि वह वहाँ घर बनाना चाहता था।”

इसके बाद दूसरी ट्वीट में अकॉउंट से महाराज की वीडियो अपलोड की गई। महाराज को कहते सुना जा सकता है कि उन्होंने मंदिर की खबर सुनने के बाद बड़े महाराज से अनुरोध किया कि वे क्या कर रहे हैं? उन लोगों की पूजा रुकी हुई है।

वे कहते हैं, “हमने बड़े महाराज से कहा कि हमारी पूजा 5-6 महीने से रुकी हुई है। आप कहते हो कि हो जाएगा-हो जाएगा। लेकिन अब ये मुकाम आ गया है कि इन्होंने हमारा मंदिर तोड़ दिया।” इतना कहते ही महाराज रोने लगते हैं।

महाराज बताते हैं कि मंदिर के पास रह रहे लोगों को घर से बाहर कर दिया गया है। उनकी जगह पर जो घर बनने जा रहे हैं उसके लिए 5 लोगों ने बुकिंग की है। लेकिन उन्हें भी अभी घर नहीं मिले हैं।

इसके बाद एक अन्य युवक ने बताया कि इस मामले पर पहले से विवाद था। लेकिन कुछ समय पहले लोगों ने जगह की घेराबंदी की और फिर बिना किसी को कुछ भी बताए मंदिर को तोड़ दिया।

युवक ने बताया कि मंदिर से मूर्तियाँ भी गायब हैं और जब पूछा जा रहा है कि मूर्तियों को कहाँ रखा गया, तो वह कहते हैं कि उन्हें कुछ पता ही नहीं है। ज्ञात हो कि इस संबंध में मंदिर प्रशासन ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है, लेकिन अभी तक इस पर कोई फैसला नहीं आया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी इस मसले पर बात चल रही है।

गौरतलब है कि इससे पहले पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थल पर हमले की खबर पर एक मामला गुरुद्वारे का भी आया था। जब एक इस्लामी उलेमा ने भाई तारू सिंह के नाम पर बने गुरुद्वारे की भूमि पर कब्जा कर लिया था और वीडियो जारी करके धमकी भी दी थी।

पाकिस्तान मौलवी
मौलवी ने गुरुद्वारे की जमीन पर किया कब्जा

अलीगढ़: भगवान राम की पूजा करने पर BJP नेता को कट्टरपंथियों ने दी जिंदा जलाकर मारने की धमकी, लगाए धमकी भरे पोस्टर

अलीगढ़ में संप्रदाय विशेष की भाजपा नेत्री ने पाँच अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर के शिलान्यास के समय घर में पूजन किया था। उन्होंने रक्षाबंधन पर रामलला को राखी भेजी थी। अब इसकी वजह से उन्हें धमकी मिल रही है। अलीगढ़ शहर में उनके क्षेत्र में आपत्तिजनक पोस्टर लगाए गए हैं। पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है।

देहली गेट की एडीए कॉलोनी शाहजमाल की रहने वाली रूबी आसिफ खान भारतीय जनता पार्टी की महावीरगंज मंडल महिला मोर्चा की अध्यक्ष हैं। रूबी आसिफ खान ने 30 जुलाई को राम लला को राखी भेजी थी। पाँच अगस्त को जब अयोध्या में राममंदिर का शिलान्यास समारोह हुआ तब उन्होंने अपने घर पर आरती और पूजा भी की थी। इसके साथ-साथ 5100 रुपए का चेक राम मंदिर ट्रस्ट को भेजा था। 

रूबी आसिफ खान का आरोप है कि अब इन्हीं बातों को लेकर कुछ लोग उन्हें जिंदा जलाने और जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। इसके अलावा उन्हें इस्लाम से खारिज किए जाने की धमकी दी जा रही है। उनके मोहल्ले व क्षेत्र में दीवारों पर रूबी के पूजा करते हुए फोटो छपवाकर ऊपरकोट इलाके में दीवारों पर चस्पा कर दिए।

पोस्टरों पर लिखा है कि रूबी और नर्गिस ने मंदिर निर्माण की खुशी में अपने घर में पूजा की। ऐसे लोगों को इस्लाम से खारिज करो। धमकी भरे पर्चे छपवा कर बँटवाए जा रहे हैं। पोस्टर के जरिए परिवार समेत घर के अंदर जलाकर हत्या करने की धमकी दी गई है। इसके साथ ही शरीयत के मुताबिक इस्लाम से बेदखल करने की भी धमकी दी गई है।

वहीं इस मामले में बीजेपी से जुड़े हिंदूवादी कार्यकर्ता संप्रदाय विशेष की महिला नेत्री के समर्थन में साथ आ गए हैं। इसकी लिखित शिकायत रूबी आसिफ खान ने भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ जाकर थाना देहली गेट में की है। पुलिस मामले की जाँच पड़ताल में जुट गई है।

पुलिस के मुताबिक उन्हें 17 अगस्त की शाम, शाह जमाल एडीए कॉलोनी निवासी रूबी आसिफ खान के बायकाट और धमकी से जुड़े पर्चे बाँटे जाने की खबर मिली थी। और पुलिस की टीम इस मामले पर नजर बनाए हुए है।

पूर्व गृहमंत्री समेत BJP नेताओं को मारने के लिए छोटा शकील ने भेजा शॉर्पशूटर: गुजरात ATS के हत्थे चढ़ा

गुजरात के आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) ने कुख्यात बदमाश छोटा शकील की ओर से एक भाजपा नेता की कथित तौर पर हत्या के लिए भेजे गए एक ‘शार्प शूटर’ को गिरफ्तार किया है। एटीएस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार (अगस्त 19, 2020) को यह जानकारी दी। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्‍तान की ओर से इन्‍हें गुजरात भाजपा नेताओं की सुपारी दी गई थी। इनके मोबाइल में गुजरात प्रदेश भाजपा के मुख्‍यालय श्रीकमलम का वीडियो तथा राज्‍य के पूर्व गृह राज्यमंत्री गोरधन झड़ाफिया का फोटो मिला है। इसी वजह से माना जा रहा है कि झड़ाफिया इनके मुख्‍य निशाने पर थे।

एटीएस के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मंगलवार देर रात को एटीएस ने अहमदाबाद में रिलीफ रोड पर स्थित एक होटल पर छापा मारा जहाँ आरोपित ठहरा था। आरोपित ने एटीएस पर गोली चलाई, लेकिन बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

एटीएस के सीनियर अधिकारी ने कहा, “गोपनीय सूचना मिली थी कि छोटा शकील ने एक बीजेपी नेता की हत्या करने के लिए एक शार्प शूटर भेजा है। सूचना के आधार पर हमारे दल ने पिछली रात होटल पर छापा मारा। जब हमने आरोपित को पकड़ने की कोशिश की तो उसने हम पर एक गोली चलाई। सौभाग्य से कोई घायल नहीं हुआ। बाद में हम उसे पकड़ने में कामयाब रहे।” 

उन्होंने कहा कि आरोपित के पास से दो पिस्तौल बरामद हुई हैं। एटीएस के सीनियर अधिकारी ने कहा कि आरंभिक पूछताछ समाप्त होने के बाद आरोपित की पहचान उजागर की जाएगी। होटल के प्रबंधक के अनुसार मुंबई के एक निवासी ने होटल में मंगलवार को कमरा लिया था और बाद में एटीएस उसे पकड़ कर ले गई।

इस बीच गिर सोमनाथ जिले में भाजपा नेता गोरधन झड़ाफिया ने कहा कि उन्हें सूचना मिली थी कि आरोपित उन्हें जान से मारने के लिए भेजा गया था। झड़ाफिया ने कहा, ”गुजरात के गृहमंत्री प्रदीप सिंह जडेजा ने मुझे बताया कि मुझे मारने के लिए भेजे गए एक शार्प शूटर को गिरफ्तार किया गया है।”

बताया जा रहा है कि आरोपित भाजपा कार्यालय व भाजपा नेताओं के ठिकानों की कई बार रेकी कर चुके थे। झड़ाफिया फिलहाल गुजरात भाजपा के नवनियुक्‍त अध्‍यक्ष सी आर पाटिल के सोमनाथ दौरे में उनके साथ हैं।

‘समझ नहीं आता लोगों को सुशांत सिंह को डिप्रेस्ड मानने में क्या समस्या है?’ स्वरा भास्कर ने जताई नसीरुद्दीन से सहमति

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर ट्विटर ट्रोल और पार्ट टाइम अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने अभिनेता की हत्या की जाँच की माँग कर रहे लोगों से ही सवाल किया है कि आखिर वो ये मानने को तैयार क्यों नहीं हैं कि सुशांत सिंह राजपूत डिप्रेशन के शिकार थे।

सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु को शुरू से ही उनके मानसिक स्वास्थ्य के साथ जोड़ते हुए इसे आत्महत्या बताने के तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में, यदि कंगना रानौत, कुछ गिने-चुने समाचार चैनल और सोशल मीडिया पर लोगों द्वारा इस बहस को आगे नहीं बढ़ाया जाता तो शायद ही इस पर आज सीबीआई जाँच हो रही होती और यह मामला कबका आत्महत्या का बताकर बंद भी कर दिया गया होता।

सुशांत सिंह राजपूत के कई करीबियों द्वारा उनके डिप्रेशन और मानसिक स्वास्थ्य की बातों से इनकार किया गया है। इसके बावजूद भी सुशांत की मौत में अपना करियर तलाश रहे स्वरा भास्कर, राजदीप सरदेसाई और नसीरुद्दीन शाह जैसे लोग इस मामले को ‘अनावश्यक बहस’ साबित करने का प्रयास करते हुए देखे जा रहे हैं।

हाल ही में इंडिया टुडे को दिए एक साक्षात्कार में, नसीरुद्दीन शाह ने सुशांत सिंह की मृत्यु के कवरेज को ‘बीमारी’ कहा था, और कहा कि इसकी जाँच अधिकारियों पर छोड़ दी जानी चाहिए।

इंडिया टुडे के अनुसार, रसभरी वेब सीरिज की अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने नसीरुद्दीन शाह के इस बयान से सहमति व्यक्त करते हुए कहा, “मैं बिल्कुल नसीर सर से सहमत हूँ। वास्तव में मैं यह कई दिनों से कह रही हूँ। आप इसे मेरे सोशल मीडिया पर देख सकते हैं, यह देखने के लिए कि यह कैसे सोशल मीडिया और कई मीडिया घरानों ने अपनी कॉन्सपिरेसी थ्योरी को शुरू किया है और जनता को झूठ का शिकार बना रहे हैं।”

नसीरुद्दीन शाह ने इस इंटरव्यू में कहा कि ‘मैं इन खबरों को नहीं देखता हूँ, यह बेकार हैं। सुशांत सिंह को नहीं जानता था लेकिन उनका भविष्य उज्जवल था।’

सुशांत सिंह की मौत का कारण डिप्रेशन बताने पर जोर देते हुए स्वरा भास्कर ने कहा- “लोगों के लिए यह स्वीकार करना इतना मुश्किल क्यों है कि वह डिप्रेस्ड हो सकता है? मैंने एक लेख पढ़ा जहाँ किसी ने कहा कि वह डिप्रेस्ड नहीं था, ये कौन सी थ्योरी है? कोई इसे कैसे देख सकता है? सिर्फ इसलिए कि कोई फेमस है, इसका मतलब यह नहीं है कि चीजें गलत नहीं हो सकती हैं। हमें एक समाज के रूप में मानसिक स्वास्थ्य को अधिक महत्व देने की आवश्यकता है।”

उल्लेखनीय है कि दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह के पिता ने अभिनेता की प्रेमिका रिया चक्रवर्ती पर आत्महत्या के लिए उकसाने और उनके रूपए हड़पने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही रिया चक्रवर्ती पर यह भी आरोप लगाए गए हैं कि उन्होंने सुशांत सिंह को दवाओं की ओवरडोज देकर मानसिक रूप से बीमार करने का प्रयास किया था।

बंगाल में नागिन डांस के साथ मनाया स्वतंत्रता दिवस: TMC के आयोजन में पहले भी हो चुका है ‘सैंया जी गमछा बिछाई के…’ पर डांस

सोशल मीडिया पर इस वक्त पश्चिम बंगाल का एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। इस वायरल वीडियो में मंच पर स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए तृणमूल कॉन्ग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी और उनकी ही पार्टी के सांसद अभिषेक बनर्जी मौजूद हैं, जिनके पीछे एक बड़ा सा बैनर लगा हुआ है। जिसके सामने ‘नागिन-नागिन’ गाने पर कुछ लड़कियाँ उत्तेजक डांस करती हुई नजर आ रही है। इनका नृत्य देखकर वहाँ मौजूद लोग सीटियाँ बजाते हुए हूटिंग कर रहे।

इंडिया टुडे के रिपोर्ट के अनुसार यह वीडियो 15 अगस्त को स्वतन्त्रता दिवस की वर्षगाँठ के मौके पर पश्चिम बंगाल के 24 परगना में हुए एक कार्यक्रम के दौरान का है। सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर बंगाल में सत्तारूढ़ पार्टी के इस वीडियो की जमकर आलोचना हो रही है। यह कार्यक्रम स्थानीय तृणमूल कॉन्ग्रेस समिति द्वारा उत्तर 24 परगना जिले डींगा के सोहाई-स्वेतपुर क्षेत्र में आयोजित किया गया था।

मंच पर जारी डांस के बीच एक स्थानीय तृणमूल नेता वीडियो में कहते है, “सोहाई-स्वेतपुर तृणमूल कॉन्ग्रेस समिति ने 74 वें स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाने के लिए इस कार्यक्रम का आयोजन किया है। हमारे पंचायत समिति के नेता जल्द ही हमें संबोधित करेंगे।”

वहीं वीडियो के वायरल होने के बाद टीएमसी के जिला प्रवक्ता सुनील मुखर्जी ने इस पर पार्टी की तरफ से सफाई पेश की है। उन्होंने कोरोना वायरस का हवाला तो दिया, लेकिन राष्ट्रीय के सम्मान में इस तरह के आयोजन करने पर कोई टिप्पणी नहीं की।

मुखर्जी ने कहा, “हमारे सीएम ने बार-बार पार्टी कार्यकर्ताओं से महामारी के दौरान इस तरह के आयोजन नहीं करने के लिए कहा है। मैंने व्हाट्सएप पर वीडियो देखा है। यह निस्संदेह गलत है।”

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में इससे पहले भी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर तृणमूल कॉन्ग्रेस द्वारा एक अश्लील कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। जिसमें एक लड़की तिरंगे से सजे मंच पर ‘सैंया जी गमछा बिछाई के…’ पर अश्लील डांस करते हुए नजर आ रहीं है।

इसके अलावा वीडियो में मौजूद लोग सिटी बजाते, चिल्लाते और लड़की को पैसे देते हुए भी नजर आ रहे है।

तबलीगी जमात फंडिंग केस: ED की दिल्ली-मुंबई समेत 20 लोकेशंस पर रेड, यहाँ रहते हैं मौलाना साद के खास लोग

तबलीगी जमात मामले में केंद्रीय जाँच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा कुल 20 लोकेशन पर छापेमारी की गई है। जानकारी के मुताबिक जिन लोकेशंस पर छापेमारी की गई है, उनमें दिल्ली के सात ठिकाने शामिल हैं। वहीं मुंबई की पाँच लोकेशंस, हैदराबाद की 4 और 3 ठिकाने केरल के हैं।

माना जाता है कि इन तमाम जगहों पर मौलाना के खास लोग रहते हैं और इन जगहों पर फंडिग के सुराग मिल सकते हैं। दिल्ली के ठिकानों में जाकिर नगर अहम है, ये वो इलाका है जहाँ तबलीगी जमात का हेडक्वार्टर मौजूद है। इसके अलावा कोच्चि की 3 जबकि एक अंकलेश्वर में रेड की गई है।

सूत्रों के मुताबिक, तबलीगी जमात के प्रमुख मौलाना साद अपने दिल्ली के जाकिर नगर स्थित आवास पर नहीं हैं। कहा जा रहा है कि मौलाना साद फिलहाल यूपी में हैं, लेकिन परिवार के अन्य सदस्यों की मौजूदगी में ED उसके ठिकानों पर छापेमारी कर रही है

महाराष्ट्र, हैदराबाद, दिल्ली और केरल जैसे शहरों में ईडी ये पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मरकज़ की फंडिग के पीछे कौन हैं? ईडी की टीम ने दिल्ली के जाकिर नगर इलाके में भी छापेमारी की है। बताया जा रहा है कि यहीं पर जमात के मुखिया मौलाना साद का घर है।

गौरतलब है कि तबलीगी जमात का कोरोना कनेक्शन सामने आने के बाद उसके मुखिया मौलाना साद पर पुलिस ने शिकंजा कसा था। अप्रैल में ही ईडी ने मौलाना साद समेत पाँच लोगों पर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था। ईडी ने मौलाना साद के चार सहयोगियों से पूछताछ भी की थी।

इन लोगों से पूछताछ के दौरान ईडी अधिकारियों की ओर से जानने की कोशिश की जा रही है मरकज के फंड की देखभाल कौन करता था। मरकज के लिए फंड कहाँ से और कैसे आता है। क्या यह फंड डोनेशन के जरिए आता है। ईडी ने मौलाना साद को भी पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन अभी तक वह हाजिर नहीं हुआ है।

बता दें कि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 31 मार्च को मौलाना साद और तबलीगी जमात के कुछ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। यह एफआईआर लॉकडाउन के आदेश का उल्लंघन करते हुए धार्मिक आयोजन में लोगों की भीड़ जमा करने के मामले में दर्ज की गई थी। इसके बाद मौलान साद और उसके साथियों के खिलाफ ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था।

बता दें कि तबलीगी जमात का नाम कोरोना को लेकर सुर्खियों में आया था और इल्जाम लगा था कि जमात के लोग जान बूझकर कोरोना फैला रहे हैं। इस मामले के बाद लगातार वबाल होता रहा और जमात के चीफ मौलाना साद के खिलाफ कार्रवाई की माँग होती रही है लेकिन कोई कार्रवाई हो नहीं पाई है।

पिछले दिनों क्राइम ब्रांच ने मौलाना साद के बेटे को अपने कार्यालय में बुलाकर करीब 2 घंटे पूछताछ की। पूछताछ के दौरान उन्होंने साद के बेटे से 20 लोगों की जानकारी माँगी जो दिल्ली के मरकज में न केवल शामिल थे, बल्कि मरकज़ प्रबंधन टीम का हिस्सा थे।