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दिल्ली दंगा: दिलबर नेगी की निर्मम हत्या में जमानत से कोर्ट का इनकार, कहा- भयावह थी हिंसा

दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट में आज सुनवाई हुई। कोर्ट ने दिलबर नेगी की हत्या के 3 आरोपितों को जमानत देने से मना कर दिया।

कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा, “घटनास्थल पर हुई हिंसा भयावह थी, इसमें निर्दोष लोगों की जान और जनता की संपत्ति को नुकसान हुआ। इस स्तर पर आरोपितों को जमानत देने और उनकी रिहाई से जाँच में बाधा आ सकती है।”

बता दें, दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दिलबर नेगी की हत्या में 12 लोगों को आरोपित बनाया है। चार्जशीट में पुलिस ने बताया कि सांप्रदायिक हिंसा के दौरान मुस्लिम भीड़ ने हिंदुओं की संपत्तियों को निशाना बनाते हुए दिलबर नेगी को मिठाई की दुकान के अंदर जला दिया।

चार्जशीट में बताए गए सभी आरोपित फिलहाल न्यायिक हिरासत में है। इन सभी पर हत्या, दंगा, दो समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और आपराधिक साजिश रचने के आरोप लगे हैं। चार्जशीट में ये भी बताया गया है कि मुस्लिम समुदाय की भीड़ बृजपुरी की पुलिया की तरफ से आई और हिंदुओं की संपत्ति को निशाना बनाकर दंगा करना शुरू किया और फिर उस रात इन लोगों ने वहाँ आगजनी भी की।

पुलिस ने कहा कि भीड़ ने अनिल स्वीट्स नाम की एक दुकान में लगा दी थी, जहाँ से पुलिस ने 26 फरवरी को दिलबर नेगी का शव बरामद किया था। हत्या के वक्त नेगी लंच करने के लिए दुकान के गोदाम में गया था और बाद में वहाँ आराम कर रहा था। तभी दंगाइयों की भीड़ आई और उसपर हमला बोल दिया।

उल्लेखनीय है कि 20 साल के युवक दिलबर नेगी की दर्दनाक हत्या के 3 मुस्लिम आरोपितों ने दिल्ली पुलिस के सामने कई चौंकाने वाली बातें कही हैंl उनका कहना है कि राजधानी में हो रहे दंगों के दौरान वे उत्तर-पूर्वी दिल्ली के शिव विहार में हुई अंधाधुंध गोलीबारी में शामिल थे।

दिल्ली दंगों में दिलबर नेगी की हत्या के मामले में पुलिस द्वारा फ़ाइल की गई चार्जशीट के मुताबिक़ तीन मुख्य आरोपितों शाहनवाज़, सलमान और सोनू सैफ ने पिस्टल का इंतज़ाम करने की बात स्वीकार की। एक आरोपी सलमान ने हिन्दू समुदाय के लोगों पर गोलीबारी करने की बात भी कबूल की

मौलाना आजाद और वामपंथियों ने मिटाया मुस्लिमों का खूनी इतिहास: IPS अफसर ने बताया कैसे हिंदू धर्म को दिखाया नीचा

भारतीय इतिहास से छेड़छाड़ सर्वविदित हैं। वामपंथियों ने बड़ी सफाई से इस्लामिक आक्रांताओं और मुस्लिम शासकों के खूनी इतिहास को छिपा कर उनका महिमामंडन किया। हिंदू धर्म को लेकर उनका दुराग्रह भी साफ है। यह सब किस तरह अंजाम दिया गया इस पर IPS अधिकारी एम नागेश्वर राव ने प्रकाश डाला है।

उन्होंने शनिवार (जुलाई 25, 2020) को इस संबंध में ट्वीट किए। साथ ही बताया कि कैसे इस खेल में देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आजाद शामिल थे। दिलचस्प यह है कि अबुल कलाम को उदारवादी के तौर पर पेश किया जाता है।

राव ने बताया है कि भारत के इतिहास को बड़ी सफाई से ‘विकृत’ किया गया। ऐसा करने वाले को शिक्षा मंत्री का नाम दिया गया। शिक्षा मंत्री रहते हुए मुस्लिम नेता 1947-1977 के बीच 20 साल भारतीय मन-मस्तिष्क के प्रभारी बने बैठे थे।

एम नागेश्वर राव ने ट्वीट किया, “मौलाना अबुल कलाम आजाद के 11 साल (1947-58) के बाद, हुमायूँ कबीर, एमसी छागला और फकरुद्दीन अली अहमद- 4 साल (1963-67), फिर नुरुल हसन- 5 साल (1972-77)। शेष 10 साल अन्य वामपंथी जैसे वीकेआरवी राव… ने ये जिम्मेदारी सँभाली।” नागेश्वर राव ने ये लाइनें चार स्लाइड की एक सीरीज से ली, जिसे उन्होंने एक ट्वीट में पोस्ट किया था।

पोस्ट में राव ने अपने लेख को “Story of Project Abrahmisation of Hindu Civilization” नाम दिया है। इसमें नागेश्वर राव ने छह बिंदुओं को सूचीबद्ध किया है, 

1: हिंदुओं को उनके ज्ञान से वंचित करना, 

2. हिंदू धर्म को अंधविश्वासों के संग्रह के रूप में सत्यापित करना,

3. शिक्षा पर इस्लाम और ईसाइयत का प्रभुत्व (अब्राहमीकरण)

4. मीडिया और मनोरंजन का अब्राहमीकरण

5. अपनी पहचान हिंदू पहचान को लेकर शर्मिंदगी पैदा करना

6. हिंदू धर्म और समाज की मृत्यु हो जाती है

नागेश्वर राव ने रविवार को एक और पोस्ट किया। इसमें उन्होंने लिखा, “क्या हम अपने राष्ट्रीय आदर्श वाक्य सत्यमेव जयते के लिए असल में प्रतिबद्ध हैं। क्या सत्य अकेले विजय हो सकता है? ज्यादातर नहीं। इसके विपरीत, हम राजनीतिक शुद्धता के नाम पर झूठ बताते हैं, जिसे हम अपनी शिक्षा में ही सीखते है। इसमें कोई हैरानी वाली बात नहीं है कि हम पाखंडियों के राष्ट्र हैं, न कि विजेताओं के। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि एक राष्ट्र के तौर पर हम कपटी हैं।”

उन्होंने अपने पोस्ट में दावा किया कि दिल्ली में सड़कों और सार्वजनिक स्थानों का नाम “आक्रमणकारियों” के नाम पर रखा गया है। इसमें दिल्ली के मूल निर्माताओं कृष्ण/पांडवों के बारे में कोई उल्लेख नहीं है।

राव ने पोस्ट में आरोप लगाया कि इस प्रणाली ने वामपंथी शिक्षाविदों को संरक्षण दिया और हिंदुत्ववादी राष्ट्रवादी विद्वानों को दरकिनार कर दिया। आगे दावा किया गया कि 1980 के दशक में, “रामजन्मभूमि द्वार” का उद्घाटन और रामायण और लव कुश जैसे टीवी धारावाहिकों के प्रसारण से हिंदू भावना पुन: जागृत हुई।

वैसे देखा जाए तो वामपंथी इतिहासकारों द्वारा भारत के वास्तविक इतिहास के साथ की गई छेड़छाड़ गहन चिंता का विषय है। कॉन्ग्रेस नीत केंद्र सरकार के सतत संरक्षण में वामपंथी इतिहासकारों ने ऐतिहासिक साक्ष्यों व घटनाओं में भ्रामक जानकारियाँ डालने का काम किया। 

कॉन्ग्रेस सरकार ने देश के स्वाधीन होने के बाद से ही सेकुलरिज्म के नाम पर भारत के स्वर्णिम इतिहास के साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी थी। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने स्वयं अपनी पुस्तक ‘भारत की खोज’ में महाराणा प्रताप की अपेक्षा अकबर को महान सिद्ध करने का प्रयास किया था।

स्वाधीनता संग्राम के इतिहास के साथ छेड़छाड़ कर सुनियोजित ढंग से राष्ट्र की स्वाधीनता के लिए सर्वस्व समर्पित करने वाले क्रांतिकारियों की घोर उपेक्षा ही नहीं की गई, अपितु उन्हें आतंकवादी और सिरफिरा सिद्ध करने के प्रयास किए गए।

इसी विकृति के कारण नई पीढ़ी बंगाल के क्रूर शासक सिराजुद्दौला से अपरिचित हैं। कम्युनिस्ट इतिहासकार उसे अंग्रेजों से लड़ने वाले महान सेनानी के रूप में प्रस्तुत करते हैं। कम्युनिस्ट इतिहासकारों ने भारतीय इतिहास को हर दृष्टि से विकृत करने का प्रयास किया है। औरंगजेब ने हिंदुओं और सिख गुरुओं पर जैसी बर्बरता ढाई, उसकी मिसाल मिलनी मुश्किल है। किंतु वामपंथी इतिहासकार औरंगजेब के कुछेक मंदिरों को दान देने का यशगान कर उसके जिहादी चरित्र पर पर्दा डाले रखते हैं। 

मुस्लिम आक्रांताओं ने यहाँ के बहुसंख्यकों को मौत या इस्लाम में से एक को स्वीकारने का विकल्प दिया, इसे वामपंथी इतिहासकार भूले से भी उदघाटित नहीं करते। मीडिया और बुद्धिजीवी वर्ग का कम्युनिस्ट खेमा उस मानसिकता के साथ लगातार नरमी बरतता रहा, जिसने हिंदू धर्म को नीचा दिखाने के लिए उनके मंदिरों का विध्वंस किया, उनकी आस्था से जुड़े स्थलों को रौंद कर वहाँ मस्जिदों का निर्माण कराया। स्वतंत्रता के बाद से अब तक वामपंथी इतिहासकारों ने इस परंपरा को आगे ही बढ़ाया है।

मौलवी ने गुरुद्वारे की जमीन पर किया कब्जा, सिखों को धमकी देते हुए कहा- यहाँ केवल मुस्लिम रह सकते हैं

पाकिस्तान के लाहौर में एक मौलवी ने गुरुद्वारे की जमीन पर कब्जा कर लिया है। उसने एक वीडियो जारी करके सिखों को धमकी दी है। इसमें कहा है कि पाकिस्तान इस्लामी देश है और यहाँ सिर्फ़ मुस्लिम रह सकते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मौलवी का नाम सोहेल बट्‌ट है। वह दावत-ए-इस्लामी (बरेलवी) से जुड़ा है। वह लाहौर में मुस्लिम पैगम्बर हजरत शाह काकु चिश्ती दरगाह का केयरटेकर भी है। उसने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर गुरुद्वारा शहीद भाई तारु सिंह की जमीन पर कब्जा किया है।

जमीन कब्जाने के बाद उसने जो वीडियो जारी की है उसमें उसने पाकिस्तान गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष गोपाल सिंह चावला को धमकी दी गई है। गोपाल चावला ने गुरुद्वारा में पिछले साल सिखों के प्रतीक श्री निसाल साहिब को फहराया था। सोहेल ने दावा किया है कि गुरुद्वारा और उसके आसपास की 4 से 5 कनाल जमीन हजरत शाह काकु चिश्ती दरगाह और शहीदगंज मस्जिद की है।

कहा जा रहा है कि सोहेल ने ये कदम भू-माफियों के इशारे पर उठाया गया है। इसमें से एक तो ISI का ऑफिसर जेन साब भी है। मौलवी को वीडियो में कहते सुना जा सकता है, “एक मुस्लिम राष्ट्र होने के नाते पाकिस्तान केवल मुस्लिमों का है। 1947 में पाकिस्तान के बनने के समय करीब 20 लाख मुस्लिमों ने जिंदगी गँवाई थी। ये सिख गुंडागर्दी दिखा रहे हैं। यह एक इस्लामी राष्ट्र है, वे कैसे गुंडागर्दी दिखा सकते हैं? ऐतिहासिक रिकॉर्ड बताते हैं कि यह साइट हमारी है।”

यहाँ बता दें कि लाहौर की जमीन पर स्थित यह गुरुद्वारा भाई तारू सिंह के शहीद स्थल पर बना था। वहीं तारू सिंह जिन्होंने अपने धर्म के लिए अपने केश नहीं कटवाए थे, बल्कि उसके बदले अपनी खोपड़ी उतरवा ली थी। 1726 में मुगलकाल के दौरान जकारिया खान ने उन्हें इस्लाम स्वीकारने को कहा था। लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया।

इसके बाद जकारिया खान ने उन पर कई ज्यादतियाँ की और आखिर में उनसे उनके केश माँगे। लेकिन उन्होंने केश नहीं उतरवाए। आज पाकिस्तान में ऐसे कई ऐतिहासिक गुरुद्वारे हैं। लेकिन स्थितियाँ अब पहले जैसी नहीं हैं।

चीन के 47 और ऐप बैन, PUBG समेत 250 ऐप्स पर है सरकार की नजर

भारत सरकार ने चीन के 47 और ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया है। पिछले महीने भी 59 चीनी ऐप पर बैन लगाया गया था। बताया जा रहा है कि PUBG समेत 250 ज्यादा ऐप्स की केंद्र सरकार समीक्षा भी कर रही है।

इंडिया टुडे के मुताबिक जिन 47 चाइनीज़ एप्लीकेशंस पर फिलहाल प्रतिबंध लगाया है, वह पहले से बैन की गई एप्लीकेशंस के क्लोन की तरह काम कर रही थीं। सरकार की तरफ से इन 47 एप्लीकेशंस के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी गई है। ख़बरों की मानें तो करीब 250 ऐसी चाइनीज़ एप्लीकेशंस की सूची तैयार कर ली गई है जिन पर आने वाले समय में कार्रवाई हो सकती है। 

सरकार मूल रूप से यह सुनिश्चित करना चाहती है कि इस तरह की एप्लीकेशंस का डोमेन कितना सुरक्षित है। इसके अलावा यह एप्लीकेशंस यूज़र्स की निजी सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा का उल्लंघन तो नहीं करती हैं। सरकार की तरफ से जिन एप्लीकेशंस की सूची तैयार की गई है उसमें चीन की डिजिटल दुनिया के कई बड़े नाम शामिल हैं। पबजी, टेनसेंट, अलीबाबा समेत कई एप्लीकेशन मौजूद हैं। पिछले काफी समय से चीन की कई मशहूर एप्लीकेशंस पर डाटा मॉर्फिंग (जानकारी का गलत इस्तेमाल) का आरोप लगता रहा है। 

इसके पहले इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने चीन की कई एप्लीकेशन पर प्रतिबंध लगाया था। जिसके बाद प्रतिबंधित एप्स गूगल प्ले स्टोर से हटा दिए गए थे। जानकारों के मुताबिक़ प्रतिबंध लगाने के बावजूद इन एप्लीकेशंस के नकली वर्ज़न मौजूद थे और वह अच्छे से काम भी कर रहे थे। अब इन्हें अधिकृत तौर पर लगभग हर जगह से हटा दिया गया है। 

भारत सरकार ने बीते महीने टिकटॉक समेत कुल 59 चीनी ऐप्स को देश में बैन कर दिया गया था। भारत और चीन के बीच गलवान में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत सरकार की तरफ से यह कार्रवाई हुई थी। उस झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे। चीनी ऐप्स पर बैन लगाने के फैसले पर भारत सरकार का कहना था कि सुरक्षा के मद्देनजर ये कदम उठाया गया है।

राम मंदिर की नींव में मुस्लिम ईंट क्यों रखेगा: अजीत भारती का सवाल | Ajeet Bharti on Faiz Khan Ram Mandir issue

अयोध्या में 5 अगस्त को राम मंदिर का भूमि पूजन होगा। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद मौजूद रहेंगे। इस दौरान खबर आई कि खुद को भगवान राम का भक्त कहने वाले मोहम्मद फैज खान ने 800 किलोमीटर की लंबी पदयात्रा शुरू कर दी है। तो वहीं जमशेद और सईद को भूमि पूजन में जाना है। क्या पता कोई और भी फैज होगा, जो ईंट लेकर निकल पड़ा होगा। 

समस्या तो इस बात को लेकर है कि मीडिया का एक वर्ग इन्हें ऐसे दिखा रहा है कि वो एक व्यक्ति भर नहीं बल्कि व्यक्ति से काफी ऊपर एक राम भक्त हो जाते हैं। जब इस तरह से एक समुदाय को हाइलाइट किया जाता है, माहौल बनाया जाता है, तो सवाल उठने लगता है कि आखिर वो करना क्या चाहते हैं? इसके पीछे एजेंडा क्या है? 

ये वामपंथियों की पुरानी चाल रही है। दशकों से ये केस चल रहा था और 1989 में भी वामपंथियों ने टाँग अड़ाकर मुस्लिमों को ये विश्वास दिलाया कि वो केस जीत सकते हैं, जबकि इसमें उनके जीतने लायक कुछ भी नहीं था। फैज का मिट्टी लेकर जाना उस राम मंदिर में समुदाय विशेष के एक व्यक्ति का अपना ‘योगदान’ लिखवाने जैसा है, जिस मंदिर के लिए 500 सालों तक संघर्ष चला है। मंदिर के ध्वस्त होने से लेकर पुनर्निर्माण के बीच लाखों हिन्दुओं की नृशंस हत्याएँ हुईं।

पूरा वीडियो यहाँ देखें:

फैज के मिट्टी लेकर अयोध्या जाने पर अजीत भारती के सवाल

भए प्रगट कृपाला: 70 साल पहले आधी रात हुई अलौकिक रोशनी, भाइयों संग प्रकट हुए रामलला

अयोध्या में 22 और 23 दिसंबर 1949 की उस दरम्यानी रात तीन गुंबदों के नीचे क्या हुआ था, यकीनी तौर पर कुछ भी कहना मुश्किल है। एक मुस्लिम कॉन्स्टेबल के बयान का हवाला देकर एक पक्ष वहॉं भगवान के प्रकट होने की बातें करता है तो दूसरा पक्ष फैजाबाद के तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट गुरुदत्त सिंह और जिलाधिकारी केकेके नायर की भूमिका को संदिग्ध बताकर दावा करता है कि मूर्तियॉं बाहर से लाकर रखी गई थी।

वरिष्ठ पत्रकार हेमंत शर्मा अपनी किताब ‘युद्ध में अयोध्या’ में लिखते हैं कि उस रात कड़ाके की ठंड थी। अयोध्या घने कोहरे में लिपटा था। घुप्प अँधेरा पसरा था। कुछ दिख नहीं रहा था। राम जन्मभूमि परिसर की सुरक्षा में तैनात कोई दो दर्जन पुलिसवाले (पीएसी) तंबू में सो रहे थे। अंदर दो सिपाहियों की ड्यूटी बारी-बारी से थी।

पिछले नौ दिन से वहॉं रामचरितमानस का नवाह पाठ चल रहा था। यज्ञ-हवन का दिन होने के कारण वहॉं इतने ज्यादा पुलिस वाले तैनात थे। अमूमन समूचा परिसर तीन-चार पुलिसवालों के हवाले ही रहता था। रात 12 बजे से कॉन्स्टेबल अब्दुल बरकत की ड्यूटी थी। बरकत समय से ड्यूटी पर नहीं पहुॅंचे। रात एक बजे के बाद कॉन्स्टेबल शेर सिंह उन्हें नींद से जगा ड्यूटी पर भेजते हैं। जगमग रोशनी में अष्टधातु की मूर्ति देख सिपाही बरकत को काटो तो खून नहीं। बिल्कुल अवाक! उन्होंने एफआईआर में बतौर गवाह पुलिस को बताया- कोई 12 बजे के आसपास बीच वाले गुंबद के नीचे अलौकिक रोशनी हुई। रोशनी कम होने पर मैंने जो देखा उस पर विश्वास नहीं हुआ। वहाँ अपने तीन भाइयों के साथ भगवान राम की बालमूर्ति विराजमान थी।

बरकत का बयान अयोध्या में राम जन्मभूमि कार्यशाला के बाहर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा है। इसमें बरकत के हवाले से कहा गया है- मस्जिद के भीतर से नीली रोशनी आ रही थी, जिसे देख मैं बेहोश हो गया। हालाँकि ‘युद्ध में अयोध्या’ में हेमंत शर्मा ने उस रात का जो विवरण दिया है उससे प्रतीत होता है कि मूर्तियाँ बाहर से लाकर रखी गई थी। शर्मा ने लिखा है कि एक घंटा देरी से ड्यूटी पर पहुँचने के कारण कॉन्स्टेबल बरकत को भलाई इसी बात में दिखी कि वे रामलला के प्रकट होने की कहानी का समर्थन करें। उनका यह बयान मूर्ति लाने वाले समूह​ के लिए फायदेमंद था, क्योंकि बरकत का बयान चमत्कार का प्रमाण था।

शर्मा लिखते हैं कि सुबह चार बजे के आसपास रामजन्मभूमि स्थान में मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा हो गई थी। बाहर टेंट में खबर आई कि भगवान प्रकट हो गए हैं। तड़के साढ़े चार बजे के आसपास मंदिर में घंटे-घड़ियाल बजने लगे, साधु शंखनाद करने लगे और वहॉं मौजूद लोग जोर-जोर से गाने लगे,
भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी।
हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी॥
लोचन अभिरामा तनु घनस्यामा निज आयुध भुज चारी।
भूषन बनमाला नयन बिसाला सोभासिंधु खरारी॥

ये पंक्तियॉं गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस के बालकाण्ड में लिखी है, भगवान के जन्म लेने के मौके पर। कितना दिलचस्प संयोग है कि तुलसीदास ने इन पंक्तियों की रचना उसी कालखण्ड में की थी, जब अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर की जगह बाबरी मस्जिद बनाई गई थी!

मेरठ की समरीन बानो ने इंदौर में साक्षी शर्मा बन ऐंठे पैसे, हिंदू नामों से कई राज्यों में लोगों को लगा चुकी है चूना

हाल ही में एक वीडियो वायरल हुआ था। इसमें साक्षी नाम की एक महिला पुलिस-प्रशासन और स्थानीय बूचड़खाने पर गंभीर आरोप लगा रही थी। उसका दावा था कि आसपास के इलाकों में बूचड़खाने चलाने वाले लोग उसे और और उसके कुत्तों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं। इनसे निपटने के लिए उसने जनता से मदद माँगी थी।

उसने इंदौर की तिलक नगर पुलिस पर लापरवाही, निष्क्रियता और गलत व्यवहार करने का भी आरोप लगाया था। महिला ने स्थानीय लोगों पर उत्पीड़न और धमकी देने का आरोप लगाया है। साथ ही पुलिस पर भी कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया

वीडियो में उसने अपनी कमाई से 40-45 विकलांग आवारा कुत्तों को आश्रय प्रदान करने का दावा किया था। उसने स्थानीय बूचड़खाना चलाने वालों पर आरोप लगाया कि पिछले कई महीनों से यहाँ के लोग उसे परेशान कर रहे हैं। कुछ महीने पहले भी उसके साथ मारपीट हुई और मारने की धमकी दी गई।

महिला ने वीडियो में आगे कहा, “पिछले 10 महीनों से ये लोग मेरे घर के बाहर ड्रग्स ले रहे हैं। शाम 5 बजे के बाद इन लोगों ने मेरा घर से बाहर निकलना मुश्किल कर दिया है। जब मैंने इसकी शिकायत तिलक नगर पुलिस स्टेशन में की तो उन्होंने कहा कि ये सब इसलिए हो रहा है क्योंकि मेरे घर में कोई पुरुष नहीं हैं, मैं अविवाहित हूँ और घर में कुत्ते हैं।”

महिला ने दावा किया कि बूचड़खाने चलाने वालों ने उसके कुत्ते की हत्या कर दी थी और शव पोस्टमार्टम के बाद गायब हो गया था। उसने कहा कि उसका एक और पिल्ला गायब है। महिला का कहना है कि यदि वो घर छोड़कर कहीं और जाती है तो उसके पालतू कुत्ते बेघर हो जाएँगे। 

महिला द्वारा लगातार पुलिस ‘निष्क्रियता’ का आरोप लगाने के बाद सोमवार (जुलाई 27, 2020) को भारत के सबसे बड़े पशु कल्याण संगठन पीपुल्स फॉर एनिमल्स ने इंदौर पुलिस का एक वीडियो साझा किया। इसमें पुलिस के हवाले से कहा गया, “उनकी प्राथमिक चिंता यह थी कि पशुपालक अपने पशुओं को क्षेत्र में चराने जाते थे, जिससे उनके कुत्तों को असुविधा होती थी। हमने अपने अधिकारियों को इस मुद्दे को हल करने का निर्देश दिया है।”

‘निष्क्रियता’ के दावों को खारिज करते हुए, इंदौर पुलिस ने बताया कि शोभा राम के खिलाफ 9 मार्च को मामला दर्ज किया गया था। इंदौर पुलिस के अनुसार, उसकी शिकायत के आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 112, 323, 506 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने कहा गया कि आरोपित को गिरफ्तार कर लेने के बावजूद ‘डॉग लवर’ ने पुलिस के खिलाफ आधारहीन आरोप लगाया।

पुलिस ने खुलासा किया, “उसकी जान को कोई खतरा नहीं है। हमने पूछताछ के लिए आरोपित शोभा राम और सुरक्षा गार्ड रति राम को चौक पर बुलाया है। हमने उसके लापता पिल्ला के बारे में भी पूछताछ की है। गार्ड कई अवसरों पर महिला के लिए पालतू जानवरों का सप्लाई करता था, लेकिन उसके नियोक्ताओं द्वारा ऐसा करने से रोक दिया गया था। फिर उसने उसे झूठे मामले में फँसाने की धमकी दी।”

पुलिस अधिकारी ने दावे के साथ बताया कि वायरल वीडियो में सहानुभूति का केंद्र बनने वाली अपना नाम बदल-बदल कर रहती आई है। उसका नाम साक्षी शर्मा नहीं बल्कि समरीन बानो है। वह मूल रूप से मेरठ की रहने वाली है। उसके खिलाफ नोएडा और दादरी सहित कई पुलिस स्टेशनों में मामले दर्ज हैं।

महिला का वीडियो वायरल होने के बाद, पीपुल फॉर एनिमल्स ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि महिला वास्तव में एक बहरूपिया है, जो विकलांग कुत्तों को शरण देने के नाम पर लोगों को ठगने की कोशिश कर रही है। पीपुल फॉर एनिमल्स ने ट्विटर पर भी बताया कि महिला धोखेबाज है। उसने पहले भी आवारा कुत्तों के नाम पर चंदा इकट्ठा किया है।

पीएफए ने यह भी बताया कि महिला आवारा कुत्तों को सड़क से उठाती है, उनके साथ तस्वीरें क्लिक करती है और लोगों से दान के लिए अपील करती है। संगठन ने यह भी कहा कि उक्त महिला ने गोवा, पंजाब, दिल्ली, हैदराबाद और नोएडा में लोगों से बड़ी रकम वसूल चुकी है। इसके साथ ही संगठन ने यह भी दावा किया कि महिला फर्जी हिंदू नाम के साथ धोखाधड़ी कर रही है।

पुलिस अधिकारी का दावा है कि वायरल वीडियो वाली साक्षी शर्मा (समरीन बानो) से मोहल्ले वाले परेशान हैं। पुलिस को लोगों ने बताया है कि वह कुत्तों को मारती है। कुत्ते खुले में घूमते हैं तो लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

पुलिस ने बताया कि मकान मालिक नीतीश कुमार त्रिपाठी ने समरीन के खिलाफ एरोड्रम थाना में 30 हजार रुपया किराया न देने की शिकायत की थी। जानकारी के मुताबिक मकान का किराया न देने की वजह से समरीन के खिलाफ कई पुलिस स्टेशनों में केस दर्ज है। पुलिस अधिकारी का कहना है कि साक्षी उर्फ समरीन ने सोशल मीडिया पर अलग-अलग नाम से अकाउंट बनाए हैं जिनकी पड़ताल की जा रही है।

‘धर्म बदलने से पूर्वज नहीं बदलते, राम ही हमारे असली पूर्वज’: भूमि पूजन में शामिल होंगे मुस्लिम

अयोध्या में 5 अगस्त को श्रीराम मंदिर का भूमि पूजन है। ख़बरों के मुताबिक़ इसमें कुछ मुस्लिम भी शामिल होंगे। इन मुस्लिमों ने इसकी वजह अपने पूर्वजों का हिंदू होना बताया है।

अयोध्या शहर (पूर्व में फैज़ाबाद) के जमशेद खान ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया से कहा, “धर्म बदल लेने से किसी के पूर्वज नहीं बदल जाते हैं। हम ऐसा मानते हैं कि राम हमारे वास्तविक पूर्वज थे। हम अपने हिन्दू भाइयों के साथ खुशी के इस मौके में शामिल होंगे।” 

सईद अहमद ने भी बताया कि वे भी भूमि पूजन में शामिल होंगे। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (अवध) के मुखिया डॉ. अनिल सिंह ने बताया कि भूमि पूजन में शामिल होने कई मुस्लिम अयोध्या आएँगे।

अयोध्या के ही रहने वाले राशिद अंसारी ने बताया कि इसमें शामिल होना गर्व की बात है। इनके फैज़ खान छत्तीसगढ़ स्थित अपने पैतृक गाँव की मिट्टी लेकर आ रहे हैं।  

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भूमि पूजन के बाद राम मंदिर की पहली ईंट रखेंगे। भूमि पूजन के लिए बीजेपी के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत को भी आमंत्रण भेजा गया है। इस समारोह का दूरदर्शन द्वारा सीधा प्रसारण किया जाएगा।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने बताया कि इनके अलावा, सभी धर्मों के आध्यात्मिक नेताओं को भी आमंत्रित करने का विचार किया जा रहा है। उन्होंने कोरोना वायरस और सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर भी जानकारी दी।

मिश्रा ने बताया कि कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर सामाजिक दूरी बनाए रखने के नियम का पालन करते हुए कार्यक्रम में सीमित संख्या में लगभग 200 लोगों को बुलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सूची को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।

मिश्रा ने कहा कि मंदिर आंदोलन का हिस्सा रहे कई लोगों को आमंत्रण दिया जा रहा है, जिनमें भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती शामिल हैं। मंदिर के एक अन्य ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल ने भूमि पूजन की जानकारी दी। उन्होंने बताया, आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत और महासचिव सुरेश भैयाजी जोशी को भी विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार के साथ कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया जा रहा है।

चीन को रूस ने भी दिया झटका, S-400 मिसाइलों की डिलीवरी पर रोक: जासूसी के आरोपों के बाद फैसला

भारत के साथ विवाद शुरू होने के बाद चीन को कई अन्य देशों से झटके लग रहे हैं। पिछले दिनों अमेरिका ने उस पर कोरोना संक्रमण समेत कई बातों को लेकर निशाना साधा था और अब रूस एक्शन में आया है। रूस ने चीन को दी जाने वाली S-400 मिसाइल की डिलीवरी पर रोक लगा दी है।

इससे पहले मास्को ने चीन पर जासूसी का गंभीर आरोप लगाया था। उन्होंने सेंट पीटर्सबर्ग आर्कटिक सोशल साइंसेज अकादमी के अध्यक्ष वालेरी मिट्को को चीन को गोपनीय सामग्री सौंपने का दोषी पाया था और इसके बाद ही डिलीवरी रोकने का फैसला लिया है।

बता दें S-400 उन्नत प्रणाली वाला मिसाइल सिस्टम है, जिसमें सतह से हवा में मार करने की क्षमता है। रूस ने डिलीवरी पर रोक लगाते हुए कहा है कि भविष्य में S-400 की डिलीवरी को लेकर तिथि साफ़ की जाएगी। 

चीनी मीडिया सोहू के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि रूस ने घोषणा की है कि वह एस-400 मिसाइल सिस्टम को चीन को सौंपने पर रोक लगा रहा है। सोहू अखबार में कहा गया है, उनका (रूस) कहना है कि इन हथियारों को पहुँचाने का काम काफी जटिल है, क्योंकि चीन को प्रशिक्षण के लिए सैन्य कर्मी और तकनीकी स्टाफ भेजना पड़ता है। वहीं रूस को भी हथियारों को सेवा में लाने के लिए बड़ी संख्या में अपने तकनीकी कर्मियों को बीजिंग भेजना होता है, जो कि मौजूदा दौर में काफी मुश्किल काम है। 

रूस द्वारा मिसाइलों की आपूर्ति सस्पेंड किए जाने के बाद चीन का कहना है कि मॉस्को को यह कदम मजबूरी में उठाना पड़ा है, क्योंकि वह नहीं चाहता है कि कोरोना वायरस से निपटने में लगी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी का ध्यान भटके।

भारत ने भी लिया है S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम

मौजूदा सूचना के अनुसार, S-400 मिसाइल सिस्टम, S-300 का अपडेटेड वर्जन है। यह 400Km के दायरे में आने वाली मिसाइलों और 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को भी खत्म करने की क्षमता रखता है। भारत के पास इस सिस्टम के होने का मतलब ये है कि ये एस-400 डिफेंस सिस्टम एक तरह से मिसाइल शील्ड का काम करेगा, जो एटमी क्षमता वाली बैलिस्टिक मिसाइलों से भारत को सुरक्षा देगा।

यह सिस्टम एक साथ एक बार में 72 मिसाइल दाग सकता है। इसके साथ ही यह सिस्टम अमेरिका के सबसे एडवांस्ड फाइटर जेट एफ-35 को भी गिरा सकता है। ये मिसाइल सिस्टम इतना ताकतवर है कि 36 परमाणु क्षमता वाली मिसाइलों को एक साथ नष्ट कर सकता है। चीन के बाद इस डिफेंस सिस्टम को खरीदने वाला भारत दूसरा देश है।

यहाँ बता दें भारत ने चीन से भी पहले इस सिस्टम को खरीदने का निर्णय लिया था। इसका पहला बैच तो उसे 2018 में मिल गया था और बाकी इस साल के आखिर तक उसे मिलेगा। सबसे दिलचस्प बात ये है कि एक ओर जहाँ रूस ने चीन को मिसाइल देने पर अभी रोक लगा दी है। वहीं भारत को समय पर देने का वादा दोहराया है।

गँवार, लुटेरा, अत्याचारी… या महाबली व तहजीबों का संगम? अकबर पर तुलसीदास को पढ़ें, जावेद अख्तर को नहीं

‘रामचरितमानस’ के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं क्योंकि अंग्रेजी साहित्य में जो स्थान शेक्सपियर का है और संस्कृत में कालिदास का, वही स्थान उनका खरी बोली में है। उनका जन्म श्रवण महीने में शुक्ल पक्ष के सप्तमी को हुआ था। माना जाता है कि वो मुग़ल बादशाह अकबर के सामानांतर थे। खुद पर गोस्वामी तुलसीदास ने कोई पुस्तक तो लिखी नहीं लेकिन हाँ, उस समय के बारे में थोड़ी-बहुत बातें इशारों में ज़रूर कही हैं।

अकबर जब गद्दी पर बैठा, तब तुलसीदास अपने युवाकाल में ही थे। अकबर भी किशोरावस्था में ही गद्दी पर बैठा था। उससे पहले दिल्ली में सूरी वंश का शासन था। बीच में हेमचन्द्र विक्रमादित्य के नाम से हेमू ने शासन किया था, लेकिन मजबूत सेना और बड़ा लड़ाका होने के बावजूद युद्ध में बनी परिस्थितियों की वजह से उन्हें अकबर और बैरम खान की फ़ौज से हार मिली थी। अकबर की तरफ से शुरुआत में बैरम खान ही शासन चलाता था।

कहा जाता है कि अकबर ने ज़रूर हिन्दुओं पर लगने वाला जजिया कर समाप्त किया था और गोहत्या को प्रतिबंधित किया था लेकिन उसने राजपूत राजाओं पर आक्रमण शुरू कर दिया था और वो हिन्दुओं को हिन्दुओं से लड़ाने में महारत रखता था। वो दिखावा कर के सभी मजहब-धर्मों को खुश रखना चाहता था और साथ ही इस्लाम की रीति अनुसार काम करता था लेकिन उसका मुख्य उद्देश्य था साम्राज्य विस्तार और सत्ता में लम्बे समय तक टिके रहना।

मालवा, गोड़वाना, पंजाब, चित्तौर, रणथम्भौर, गुजरात और कालिंजर पर जब उसके आक्रमण पर आक्रमण हो रहे होंगे और वो खुद को ‘महाबली’ घोषित कर रहा होगा, तब भारत के जनमानस और जनकवियों ने उसके बारे में न लिखा हो, ये असंभव है। हाँ, अत्याचार की पराकाष्ठा का इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि किसी ने खुल कर उसके अत्याचारों पर लिखने की बजाए इशारों में लिखा।

लेखक रामचंद्र तिवारी ने अपनी पुस्तक ‘तुलसीदास‘ में गोस्वामी द्वारा रचित एक दोहे का जिक्र किया है, जो उनके हिसाब से तत्कालीन सत्ताधीश और उसके शासन काल में उपजी परिस्थितियों को दर्शाता है। इस श्लोक में राजा को गोस्वामी तुलसीदास ने ‘गँवार’ कहा है और कहा है कि वो साम-दाम-भेद की जगह पर केवल डरावने दंड देने में विश्वास रखता है। आप भी उनके इस श्लोक को देखें:

गोड़ गँवार नृपाल महि,
यमन महा महिपाल ।
साम न दाम न भेद कलि,
केवल दंड कराल ।।

इस श्लोक में वो तत्कालीन राजा को चोर और लुटेरा कह रहे हैं। ये किसी से छिपा नहीं है कि बादशाह अकबर के हरम में 5000 से भी अधिक महिलाएँ थीं और विभिन्न इतिहासकारों ने इस सम्बन्ध में लिखा भी है। बावजूद इसके किसी मुस्लिम राजा को ‘महान’ बना कर अशोक के सामानांतर खड़ा करने की सेक्युलर गैंग की चाहत ने अकबर को अच्छा बना कर पेश किया। ये एक षड्यंत्र ही तो था।

रामचंद्र तिवारी पूछते हैं कि 5000 सुंदरियों के रख-रखाव के लिए धन की ज़रूरत पड़ती होगी और ये धन किसानों पर अत्याचार कर के भू-राजस्व वसूल कर लाया जाता होगा, इसमें कोई शक नहीं है। यही कारण है कि अकबर के समय को भले ही लिबरल गैंग समृद्धि का काल बताता हो लेकिन क्या ये समृद्धि सत्ताधीशों, सामंतों, बड़े व्यापारियों और जागीरदारों की विलासिता के अलावा कुछ और भी नहीं?

नहीं, ये आम जनता की समृद्धि तो बिलकुल ही नहीं थी। गोस्वामी तुलसीदास दूरदर्शी थे। किसानों पर हो रहे अत्याचार पर भी वो चुप नहीं रहे और उन्होंने लिखा। जिन किसानों को उपज का एक तिहाई हिस्सा कर के रूप में देना पड़े, वो बेचारे ख़ुश रहते होंगे क्या? अकबर ने तो किसानों से लगान के रूप में अनाज की जगह नकद धन वसूलने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। तुलसीदास इस सम्बन्ध में देखिए क्या लिखते हैं:

खेती न किसान को,
भिखारी को न भीख, बलि,
वनिक को बनिज न, 
चाकर को चाकरी ।
जीविका विहीन लोग
सीद्यमान सोच बस,
कहैं एक एकन सों
कहाँ जाई, का करी ।।

इस श्लोक से स्पष्ट पता चलता है कि किसानों को खेती नहीं करने दी जा रही है। यहाँ तक कि भिखारियों तक को भीख माँगने नहीं दिया जा रहा है। नौकर-चाकर तक जीविका से रहित हो गए हैं। गोस्वामी तुलसीदास पूछते हैं कि आजीविका विहीन लोग आखिर जाएँ तो कहाँ जाएँ, करें तो क्या करें? क्या ये उस समय की तत्कालीन परिस्थिति को नहीं दर्शाता? क्या इसके पीछे तथाकथित ‘महाबली’ अकबर नहीं होगा?

लेकिन, आज हम ‘जोधा अकबर’ फिल्म में और उसके गानों में जिस अकबर को दिखाया गया है, उसे सत्य मानते हैं और गोस्वामी तुलसीदास ने हमें जो बताया, उसे भूल बैठे हैं। ‘जोधा अकबर’ में एआर रहमान द्वारा तैयार किए गए गानों में अकबर को कुछ ज्यादा ही महान बना कर पेश कर दिया गया। जावेद अख्तर ने इसका लिरिक्स लिखा। इसमें जीत आज तुम्हारी..महाबली है..देश में सुख की..पवन चली है..” पंक्तियाँ लिखी गईं। आप भी गौर कीजिए:

देता है हर दिल यह गवाही, दिल वाले हैं जिल-इ-इलाही
जाऊँ कही भी निकलों जिधर से, गलियों गलियों सोना बरसे
तेरे मज़हब है जो मोहब्बत, कितने दिलों पर तेरी हुकूमत
जितना कहें हम उतना कम है, तहजीबों का तू संगम है

इन पंक्तियों का मतलब समझाने की हमें ज़रूरत नहीं है क्योंकि ‘अज़ीम-ओ-शाह शहंशाह’ गाने में आप इसे कई बार सुन चुके हैं और साथ ही इसका अर्थ भी समझते ही हैं। इसमें अकबर को ‘तहजीबों का संगम’ कहा गया है, अर्थात हर धर्म-मजहब का प्रतीक। साथ ही उसे मोहब्बत के मजहब को मानने वाला कहा गया है। गली-गली में सोना बरसने की बात करते हुए भारत की समृद्धि के लिए मुगलों को कारण बताया गया है।

लेकिन तुलसीदास तो ‘बनिक को बनिक न चाकर को चाकरी’ कह कर इन छद्म बुद्धिजीवियों की पोल खोल देते हैं। यहाँ बनिक का मतलब गाँव के उन बनियों से है, जो किसानों का अनाज खरीद कर उसे बाजार तक ले जाता है। इसमें बड़े व्यापारियों की बात नहीं की गई है। इसीलिए, आज ज़रूरत है कि हम तत्कालीन भारत को समझने के लिए हम गोस्वामी तुलसीदास को पढ़ें, कट्टर इस्लामी जावेद अख्तर को नहीं।