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संस्कृति बचाओ मंच ने तैयार किया सिंथेटिक बकरा, बकरीद पर आ गया कुर्बानी का इको फ्रेंडली विकल्प

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के कलाकारों के एक समूह ने बकरीद पर कुर्बानी का नया विकल्प निकाला है। इंदौर में यह अभियान शुरू किया है। इसके तहत सिंथेटिक बकरा तैयार किया गया है। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि वह सिंथेटिक बकरे की कुर्बानी दें।

इस बकरे का ऊपरी हिस्सा सिंथेटिक का बना हुआ है और भीतर का हिस्सा मिट्टी और घास की मदद से बनाया गया है। कलाकारों के इस समूह का नाम है, संस्कृति बचाओ मंच। इस समूह से जुड़े शेखर तिवारी ने अभियान के बारे में फ्री प्रेस जर्नल से विस्तार में चर्चा की।  

उन्होंने बताया कि यह प्रयास पर्यावरण के दृष्टिकोण से शुरू किया गया है। तिवारी ने कहा, “हम होली पर पानी बचाते हैं। दीपावली पर पटाखे नहीं जलाते हैं। यहाँ तक कि नागपंचमी मनाने का तरीका भी पूरी तरह बदल लिया है। इतना कुछ सिर्फ और सिर्फ पर्यावरण और समाज के भले के लिए। यह किसी धर्म से जुड़ा हुआ मुद्दा नहीं है हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही बकरे का माँस खाते हैं। एक बार सोच कर देखिये यह जानवरों के लिहाज़ से कितनी अच्छी पहल होगी। हम जानवरों की मदद कर पाएँगे और पर्यावरण की सुरक्षा भी।”    

इस समूह का कहना है जैसे सभी “इको फ्रेंडली” बनने की सोच को बढ़ावा देते हैं। ठीक उसी तरह हम भी “इको फ्रेंडली कुर्बानी” देने की बात कर रहे हैं। इस पहल का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें कई कलाकार बकरे का ढाँचा तैयार करते और उसे रंगते हुए नज़र आ रहे हैं।  

कुछ दिनों पहले मध्यप्रदेश सरकार ने कोरोना के चलते 24 जुलाई की रात 8 बजे से भोपाल में पूर्ण लॉकडाउन का आदेश जारी किया था। इसके विरोध में कॉन्ग्रेस विधायक आरिफ़ मसूद ने वीडियो जारी करते हुए धमकी दी थी। वीडियो में उन्होंने बकरीद के पहले लॉकडाउन का विरोध किया था। साथ ही यह भी कहा था कि बकरों की कुर्बानी हर हाल में हो कर रहेगी। 

इससे पहले PETA ने लखनऊ में एक बिलबोर्ड लगवाया था। इसमें एक बकरी की तस्वीर के साथ लोगों से शाकाहारी बनने की अपील की गई थी। इसके बाद सुन्नी मौलवी ने इसका विरोध करते हुए पोस्टर को आपत्तिजनक बताया था।

वहीं इस विरोध के बाद, उस बिलबोर्ड अर्थात होर्डिंग को वहाँ से हटा दिया गया था। जिसे हटाने को लेकर PETA ने दावा किया कि उन होर्डिंग्स को पुलिस अधिकारियों ने हटा दिया था। फिर भी, वे होर्डिंग्स को हटाने से सहमत नहीं थे। हालाँकि, ऑपइंडिया से बात करते हुए, लखनऊ पुलिस ने कहा था कि पेटा ने खुद ही होर्डिंग्स हटा दिए थे।

पेड़ में बाँधकर मारते, कहते थे धर्म बदलो-मुस्लिम बनो: सिख निधान सिंह ने बताया अफगानिस्तान में क्या-क्या झेला

अफगानिस्तान से 11 सिख रविवार (जुलाई 27, 2020) को भारत आए। इनमें तालिबानियों से बचाई गई नाबालिग और गुरुद्वारा से अगवा किए गए निधान सिंह भी शामिल हैं। भारत पहुँचने के बाद भावुक होते हुए निधान सिंह सचदेवा ने कहा, “मुझे नहीं पता हिंदुस्तान को क्या कहना है, मेरी माँ या पिता मगर हिंदुस्तान तो हिंदुस्तान है। हिंदुस्तान में कोई कमी नहीं है। आतंकी मुझे कहते थे कि मुस्लिम बनो, मैं कहता था ‘वाहेगुरू जी दा खालसा वाहेगुरु जी दी फतेह’ मैं अपना धर्म क्यों बदलूँ।”

उन्होंने तालिबानी आतंकियों द्वारा अगवा करने की घटना को याद करते हुए बताया कि उन्हें रोज मारा जाता था, पेड़ में बाँधकर रखा जाता था और इस्लाम अपनाने के लिए कहा जाता था।

निधान सिंह ने अपनी दर्द भरी दास्तान सुनाते हुए कहा, “मुझे गुरुद्वारे से अपहरण कर लिया गया था और 20 घंटे बाद मैं खून से लथपथ था। मैं एक पेड़ से बँधा हुआ था। वे मुझे मारते थे और मुस्लिम बनने के लिए दवाब डालते थे। मैंने उनसे बार-बार कहा कि मुझे धर्म क्यों बदलना चाहिए, मेरा अपना धर्म है।”

सिख नेता ने कहा, “मेरे पास अपनी बात कहने के लिए शब्द नहीं हैं। मैं बहुत संघर्ष के बाद यहाँ पहुँचा। वहाँ (अफगानिस्तान) में भय का माहौल व्याप्त है। गुरुद्वारे में हम सुरक्षित हो सकते हैं लेकिन उसके बाहर तो एकदम नहीं।”

सचदेवा ने कहा कि वो विदेश मंत्रालय के उस फैसले के आभारी हैं, जिसमें कहा गया है कि अफगानिस्तान में खतरों का सामना कर रहे हिन्दू और सिख समुदाय के सदस्यों को भारत वापस लाया जाएगा।

बता दें कि अफगानिस्तान में रहने वाले निधान सिंह सचदेवा का एक महीने पहले तालिबानियों ने अपहरण कर लिया था फिर उन्हें रिहा कर दिया गया। रविवार को निदान सिंह सहित 11 सिख अफगानिस्तान से भारत पहुँचे। इन्हें विशेष विमान के जरिए काबुल से दिल्ली लाया गया है। दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पहुँचने पर इन सभी का जोरदार स्वागत किया गया।

भारत सरकार ने तालिबानियों द्वारा अपहृत किए गए निधान सिंह की रिहाई में अहम भूमिका निभाई थी। सिंह की रिहाई के लिए उनकी पत्नी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा था। उनका 17 जून को अफगानिस्तान के पकतिया प्रांत के एक गुरुद्वारा से अपहरण किया गया था। एक महीने बाद उनकी रिहाई हुई थी।

निदान सिंह के साथ एक 16 साल की नाबालिग युवती सुनमित कौर भी भारत आई है। उसका अपहरण कर जबरन मुस्लिम बनाकर निकाह करवाया जा रहा था। ये सभी अभी शॉर्ट टर्म वीजा पर भारत आए हैं।

अफगानिस्तान में सिख काफी लंबे समय से आतंकियों के निशाने पर हैं। उन्हें भारत को चोट पहुँचाने के लिए निशाना बनाया जाता है। काबुल के गुरुद्वारे में हुए आतंकी हमले में 27 सिखों की मौत हो गई थी। भारत ने घटना की निंदा की थी और स्थिति पर गंभीर चिंता जताई थी।

अफगान सिख समुदाय के नेताओं ने भारत सरकार से अपील की है कि वो अफगानिस्तान में सिखों और हिन्दुओं की रक्षा करें और उन्हें दीर्घकालिक लम्बे समय तक भारत में रहने की अनुमति उपलब्ध करवाए। जिसके बाद भारत सरकार ने अफगानिस्तान के 700 सताए सिखों को जल्द ही देश लाने और आश्रय देने का फैसला किया है।

बीफ के लिए गर्भवती गाय की हत्या, बैन के बावजूद तमिलनाडु के इस इलाके में काटे जाते हैं गाय और बछड़े

तमिलनाडु से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। यहॉं के एक दंपती ने बीफ के लिए गर्भवती गाय की हत्या कर दी। पुलिस जब तक मौके पर पहुॅंचती वे गोहत्या कर चुके थे।

घटना तमिलनाडु के उथूकोट्टई की है। आरोपित दंपती की पहचान सरला और रघु के तौर पर हुई। तिरुवल्लुवर पुलिस के मुताबिक उन्हें साईं विघ्नेश ऑफ़ ऑलमाइटी एनिमल केयर ट्रस्ट से मामले की जानकारी मिली थी। एक विशेष टीम को मौके पर रवाना किया गया, लेकिन उनके पहुॅंचने से पहले गाय की हत्या कर दी गई थी।

दंपती पर भारतीय दंड संहिता की धारा 188, 270, 273 और पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। दोनों को जमानत पर बाद में रिहा कर दिया गया। साईं विघ्नेश ने टाइम ऑफ़ इंडिया को बताया कि हाल ही में लगभग 10 से अधिक गायों को तिरुवल्लुवर शहर में बचाया गया था।  

उन्होंने कहा, “जानवरों की हत्या को लेकर बकायदा गाइडलाइन है। बूचड़खानों को उन नीति निर्देशों का पालन करना होता है। वे एक खास आयु वर्ग के भैंसे और बैल मार सकते हैं। बीफ के लिए गाय और बछड़ों की हत्या पर पाबंदी है फिर भी लोग ऐसा करते हैं।” 

इसके पहले भी विघ्नेश ने तिरुवल्लुवर शहर में इस तरह की घटनाओं के बारे में पुलिस को जानकारी दी थी। जनवरी महीने में पुलिस ने 3 ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया था जिन पर जानवरों को मार कर उनका मांस बेचने का आरोप लगा था। तीनों आरोपितों पर तमिलनाडु पशु सुरक्षा अधिनियम पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया गया था। 

विघ्नेश एक दिन उथूकोट्टई-तिरुवल्लुवर मार्ग से चेन्नई जा रहे थे तब उन्होंने देखा कि उस इलाके में कई पशुओं का बेरहमी से क़त्ल होता है। विघ्नेश उस इलाके में पशुओं अधिकारों और उनकी सुरक्षा के लिए काम करते हैं। 

रणवीर शौरी भी भट्ट परिवार के मारे, कहा- मुझे तो देश छोड़ना पड़ा था: सुशांत केस में महेश भट्ट से पूछताछ

बॉलीवुड में इन दिनों भाई-भतीजावाद पर बहस छिड़ी हुई है। ऐसे में बॉलीवुड के कुछ कलाकार इस मुद्दे पर बेबाकी से अपनी राय सामने रख रहे हैं। कंगना रनौत के बाद अब एक्टर रणवीर शौरी भी नेपोटिज्म पर खुलकर बोल रहे हैं।

उन्होंने ट्वीट के जरिए बताया है कि वह भी नेपोटिज्म का शिकार हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि कैसे एक वक्त उन्हें भी बॉलीवुड में अलग-थलग कर दिया गया था और बदनाम करने की कोशिश की गई थी।

उन्होंने ट्वीट में अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए बताया कि उस वक्त उनके साथ क्या हुआ था। उन्होंने लिखा, “मैं किसी का भी नाम नहीं ले सकता क्योंकि मेरे पास कोई सबूत नहीं है। मैं इन मुद्दों पर इसलिए बोलता हूँ क्योंकि मेरे साथ भी ये सब हुआ है। अकेला छोड़ देना, गलत बोलना, मीडिया में झूठी खबरें फैलाना। मैं 2003-05 तक काफी परेशान रहा।”

साथ ही रणवीर ने बताया कि उनके साथ ये सब उन्हीं लोगों ने किया, जिनके नाम आज भी सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा, “मेरे खिलाफ इतना खराब माहौल बनाया गया कि मुझे देश तक छोड़ना पड़ गया था। ये इत्तेफाक नहीं था, जानबूझकर किया गया था।” 

रणवीर शौरी ने ये बातें हिन्दुस्तान टाइम्स के साथ बाचतीत में बताया। जब उनसे ट्वीट के संदर्भ में पूछा गया कि क्या वे भट्ट परिवार के साथ के अनुभवों के बारे में बात कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा, “हाँ, मैं उसी के बारे में बात कर रहा हूँ। मैं एक ऐसे अनुभव से गुजरा, जहाँ मैं पेशेवर और सामाजिक रूप से अलग-थलग था, सभी तरफ से एक जैसा दबाव डाला गया। वो हर मौका, हर मंच पर मेरे बारे में झूठ बोलते गए कि मैं शराबी और नशेड़ी हूँ।”

वो आगे कहते हैं, “उस समय आप काफी असहाय और शक्तिहीन महसूस करते हैं, क्योंकि ये लोग इतने शक्तिशाली हैं कि प्रेस सिर्फ उनकी बात सुनेगा और आपको अपना पक्ष रखने के लिए बुलाने की जहमत भी नहीं उठाएगा। आप असहाय और निराश महसूस करते हैं, क्योंकि आप इसके बारे में कुछ नहीं कर सकते।वह वक्त वास्तव में मेरे लिए बेहद जहरीला हो गया था और मुझे कुछ समय के लिए देश छोड़ना पड़ा।”

रणवीर शौरी कहते हैं, “किसी ने भी तथ्यों की जाँच करने की जहमत नहीं उठाई, क्योंकि एक निश्चित पार्टी मीडिया के साथ अधिक शक्तिशाली और अधिक दोस्ताना है। केवल उनके विचार सामने आते हैं। दूसरे व्यक्ति की कहानी के तथ्य और वास्तविकता कभी सामने नहीं आती है। इसका आधा दोष मीडिया को जाता है।”

बता दें कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद कंगना रनौत ने महेश भट्ट पर कई सारे आरोप लगाए। इस मामले में मुंबई पुलिस ने सोमवार (जुलाई 27, 2020) को फिल्म डायरेक्टर महेश भट्ट से सांताक्रूज पुलिस स्टेशन में पूछताछ की। बताया जा रहा है कि उनसे करीब दो घंटे तक पूछताछ की गई। सूत्रों के अनुसार महेश भट्ट से पुलिस ने सुशांत के अलावा रिया चक्रवर्ती के साथ उनके रिश्तों के बारे में सवाल जवाब किए गए।

5 अगस्त को जब मनेगा 370 हटने और भूमि पूजन का जश्न, क्या कर रहा होगा पाकिस्तान: पढ़िए, सीमा पार का पूरा प्लान

5 अगस्त 2020। अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर के लिए भूमि पूजन का दिन। जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने की पहली सालगिरह। कुछ दस्तावेज सामने आए हैं जिससे पता चलता है कि पाकिस्तान सेना ने भारत विरोधी लंबा-चौड़ा प्लान बनाया है।

मेजर (रिटायर्ड) गौरव आर्या ने ये दस्तावेज सोशल मीडिया में शेयर किए हैं। इसके मुताबिक पाकिस्तानी सेना ने एक लंबा-चौड़ा प्लान बनाया है। 5 अगस्त को कई चरणों में इसे अंजाम दिया जाएगा। सबका मकसद एक ही है भारत के खिलाफ अशांति भड़काना।

इसके तहत कश्मीरियों के साथ एकजुटता का ढोंग रचा जाएगा। भारत के कदम के खिलाफ विरोध के प्रतीक के रूप में सभी चैनल का लोगो काला कर दिया जाएगा। इसके अलावा हिलाल का एक विशेष संस्करण और कश्मीरियों के लिए एक विशेष गीत भी कमीशन किया गया है।

मेजर गौरव आर्य द्वारा जारी किए गए दस्तावेज़ में यह भी उल्लेख किया गया है कि पाक पीएम इमरान खान मुजफ्फराबाद, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर का दौरा करेंगे। यहाँ वह भारत के खिलाफ संबोधित करेंगे और अनुच्छेद 370 को खोखला करने एवं जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश में बदलने के विरोध में बोलेंगे।

पाकिस्तान के पब्लिक रिलेशन डिवीजन को भी लगभग 2:28 मिनट के प्रचार वीडियो को बढ़ावा देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसमें कथित भारतीय क्रूरताओं और कश्मीरियों का लचीलापन को दिखाया जाएगा।
इसकी मेजबानी पाकिस्तान के पब्लिक रिलेशन डिवीजन, ISPR (इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस), सूचना और प्रसारण मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, ISI और पब्लिकेशन डिवीजन कर रहे हैं।

पाकिस्तान द्वारा परिकल्पित योजना के तहत, ISPR DG को कश्मीरियों के लिए पाकिस्तानी सेना के समर्थन को आश्वस्त करते हुए, 5 अगस्त, 2020 को एक बयान जारी करना है। साथ ही एक उच्च-वोल्टेज मीडिया ब्लिट्जक्रेग को कश्मीरियों के बीच भारत विरोधी भावनाओं को बढ़ाने का आदेश दिया जाना है।

इसके अलावा UN में पाकिस्तान की बात नहीं सुने जाने के मुद्दे को भी उठाया जाएगा और भारत के खिलाफ UNMOGIP को श्वेत पत्र भी सौंपा जाएगा। इतना ही नहीं, इस दिन OIC और इंटनेशनल ह्यूमन राइट्स ऑर्गेनाइजेशन के साथ ही तुर्की के राष्ट्रपति, मलेशिया के पीएम और चीनी फॉरेन ऑफिस को मेंशन करके ट्वीट एवं बयान जारी किए जाएँगे।

पाकिस्तान द्वारा उल्लिखित प्रोपेगेंडा तमाशा में कश्मीरी मूल के पाकिस्तानी मुल्लों, पाकिस्तानी प्रचारकों और कुछ पाकिस्तानी समर्थक अंतर्राष्ट्रीय संगठनों से भारत सरकार की आलोचना का वीडियो पैकेज भी शामिल है। इसके अलावा, पाकिस्तान के जनसंपर्क विभाग ने भारत सरकार की अंतर्राष्ट्रीय आलोचना का एक पैकेज भी तैयार किया है। दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तानी योजना में भारतीय नेताओं द्वारा भारत सरकार की आलोचना के एक वीडियो पैकेज का भी जिक्र है।

बता दें कि देश में फिलहाल 5 अगस्त की तारीख का हर तरफ जिक्र हो रहा है। इसके दो कारण हैं- पहला, साल भर पहले इसी दिन जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 और 35ए हटाने का ऐतिहासिक फैसला लिया गया था और दूसरा, 5 अगस्त को ही अयोध्या में राम जन्मभूमि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भूमि पूजन करेंगे।

खुफिया एजेंसियों के हवाले से खबर है कि आतंकी इस दिन हमले को अंजाम दे सकते हैं। इसके चलते सुरक्षा एजेंसियाँ अलर्ट पर हैं। बताया जा रहा है कि 5 अगस्त को आर्टिकल 370 और 35ए के निरस्त होने की पहली सालगिरह पर पाक प्रशिक्षित आतंकी जम्मू-कश्मीर में बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में हैं।

पिछले साल जब 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 को निरस्त किया गया था तो पूरे प्रदेश में कर्फ्यू लगाया गया था। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस वजह से आतंकी मंसूबों कामयाब नहीं हो पाए थे।

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इसके बावजूद घाटी में 150 से 200 आतंकी सक्रिय हैं और उन्हें पनाह देने वाला तंत्र भी बना हुआ है। पाकिस्तान पंजाब के रास्ते या फिर ड्रोन से हथियार भेजने की कोशिश में जुटा है। अधिकारी ने कहा कि पाँच अगस्त को आतंकियों का मंसूबा विफल होना उनके मनोबल को तोड़ने वाला होगा।

सर्जरी कराने गए CM, कुर्सी पर बैठ गया कॉन्ग्रेसी प्यादा: नेहरू से सोनिया तक सबने राज्यपाल को बनाया कठपुतली

अंदरूनी लड़ाई की वजह से राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार पर खतरा मंडरा रहा है। इससे पार पाने के प्रयासों में उसने अपनी राजनीति में राज्यपाल को भी खींच लिया है। कभी उन्हें राजभवन के घेराव की धमकी देती है तो कभी प्रधानमंत्री से उनकी शिकायत करने की बात।

इस बीच, केंद्रीय कानून मंत्री रहे कॉन्ग्रेस के तीन नेताओं ने राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र को एक पत्र भी लिखा है। पत्र में संवैधानिक मर्यादा की दुहाई देने के साथ-साथ यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि फैसला कॉन्ग्रेस के मनमाफिक नहीं रहा तो इसके नतीजे गलत हो सकते हैं।

वैसे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जिस दिन पहली बार राज्यपाल पर दबाव बनाने की कोशिश की थी उसी दिन राजभवन ने बिंदुवार सभी सवालों के जवाब दे उन्हें बैकफुट पर धकेल दिया था। बावजूद इसके अपने ही विधायकों की मारी कॉन्ग्रेस ने राज्यपाल को राजनीति में खींचने की कोशिश नहीं बंद की है।

दिलचस्प यह है कि संविधान, नैतिकता वगैरह की दुहाई देने वाली कॉन्ग्रेस का इतिहास इस मामले में बेहद दागदार रहा है। जवाहर लाल नेहरू से लेकर सोनिया गॉंधी तक, सबके लिए गवर्नर कठपुतली जैसे ही रहे। उनका इस्तेमाल पर्दे के पीछे से राज्यों में सत्ता हथियाने के लिए किया गया।

पहले चुनाव के बाद से ही शुरू हुआ सिलसिला  

राज्यपाल का इस्तेमाल आज़ादी के बाद हुए पहले आम चुनाव से ही शुरू हो गया था। साल 1952 के दौरान केंद्र में जवाहर लाल नेहरू के नेतृत्व की कॉन्ग्रेस सरकार थी। तत्कालीन मद्रास में संयुक्त मोर्चे की सरकार के पास ज़्यादा विधायक थे। लेकिन फिर भी उन्हें सरकार बनाने का न्यौता नहीं दिया गया। 

कॉन्ग्रेस के नेता सी. राजगोपालाचारी को सरकार बनाने का प्रस्ताव भेजा गया। सबसे हैरानी की बात यह थी कि उस समय वह खुद विधायक भी नहीं थे। यह पहला मौक़ा था जब संवैधानिक पद पर बैठे एक व्यक्ति का राजनीतिक हित के लिए इस्तेमाल किया गया।  

दूसरी बार भी नेहरू

संयोग से इस तरह का दूसरा मौक़ा भी जवाहर लाल नेहरू के कार्यकाल में ही आया। बात है साल 1957 की जब देश में पहली बार किसी राज्य के भीतर वामपंथी सरकार चुनाव जीत कर आई थी। इस सरकार के मुखिया थे ईएमएस नम्बूदरीपाद, जिन्होंने केरल में पहली बार कम्युनिस्ट सरकार की नींव रखी। 

लेकिन कॉन्ग्रेस ने यहाँ भी अलग तरह का दाँव खेला। राज्य में मुक्ति संग्राम शुरू हुआ और कॉन्ग्रेस पार्टी ने इसे आधार बना कर 2 साल के भीतर सरकार गिरवा दी। हालाँकि केरल की पहली सरकार का विरोध बहुत बड़े पैमाने पर हुआ था लेकिन कॉन्ग्रेस ने उस सरकार को गिराने के लिए असंवैधानिक तरीका चुना। क्षेत्रीय स्तर पर यह पहला चुनाव था जब कॉन्ग्रेस ने सत्ता गँवाई थी। इसके बाद नेहरू के नेतृत्व वाली सरकार ने संवैधानिक पद का राजनीतिक हित के लिए इस्तेमाल किया।  

तीसरा कारनामा हरियाणा से

हरियाणा में 1979 में देवीलाल की अगुवाई में लोकदल की सरकार चुन कर आई। इसके कुछ समय बाद जीडी तापसे हरियाणा के राज्यपाल बनाए गए। 1982 में भजनलाल बिश्नोई ने देवीलाल के विधायकों से संपर्क किया। संपर्क के बाद वह विधायकों से संबंध बनाने में भी कामयाब रहे, नतीजा यह निकला एक बार फिर राज्यपाल अहम भूमिका में आए। 

जीडी तापसे ने भजनलाल को सरकार बनाने का प्रस्ताव दे दिया। देवीलाल को इस बात की भनक लगी तो वह नाराज हो गए। अपने सारे विधायकों को समेटना शुरू किया लेकिन तब तक राज्यपाल के हिस्से की बातें तय हो चुकी थीं। अंत में मौके का इस्तेमाल करते हुए भजनलाल सरकार बनाने में कामयाब हुए।  

इंदिरा भी नहीं रही अछूती 

आंध्र प्रदेश में 1983 में एनटी रामाराव की सरकार चुन कर आई थी। यह आंध्र प्रदेश की पहली गैर कॉन्ग्रेसी सरकार थी। उस दौरान ठाकुर रामलाल राज्यपाल थे। तेलुगू देशम पार्टी के नेता और तत्कालीन मुख्यमंत्री एनटी रामाराव को अपनी हार्ट सर्जरी के लिए विदेश जाना पड़ा। 

उस वक्त भी केंद्र में कॉन्ग्रेस की सरकार थी और इंदिरा गाँधी के हाथों में बागडोर थी। राज्यपाल रामलाल ने केंद्र सरकार में वित्त मंत्री एन भास्कर राव को राज्य का मुख्यमंत्री बना दिया। इस फैसले का देश और प्रदेश दोनों की राजनीति पर गहरा प्रभाव पड़ा। 

अपने इलाज से वापसी के बाद एनटी रामाराव बदलाव इतने बड़े पैमाने पर हुआ राजनीतिक बदलाव देख कर बहुत गुस्सा हुए। उन्होंने इस फैसले को असंवैधानिक करार देते हुए इसका खूब विरोध किया। नतीजतन केंद्र सरकार को भी कुछ फैसले लेने पड़े। शंकर दयाल शर्मा आंध्र प्रदेश के राज्यपाल बनाए गए। इसके बाद उन्होंने राज्य की सत्ता दोबारा एनटी रामाराव को सौंपी।    

अब चलते हैं कर्नाटक 

राज्यपाल को आगे रखते हुए सरकार अस्थिर करने की अगली कहानी भी अस्सी के दशक की है। इस कहानी में भी कॉन्ग्रेस की भूमिका किसी से छुपी नहीं थी। साल 1983 में जनता पार्टी के रामकृष्ण हेगड़े राज्य के मुख्यमंत्री बने। कर्नाटक में पहली बार जनता पार्टी की सरकार चुन कर आई थी, इस सरकार ने अपने 5 साल पूरे किए और दोबारा सत्ता में आई। 

इसके बाद आया टेलीफ़ोन टेपिंग मामला जिसकी वजह से रामकृष्ण हेगड़े को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा था। इसके बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री का पद सँभाला एस आर बोम्मई ने। उस वक्त राज्यपाल थे पी वेंकटसुबैया। अचानक एक दिन उन्होंने 1989 में सरकार को बर्ख़ास्त कर दिया। उनका कहना था कि सरकार के पास बहुमत नहीं है, मामला देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुँचा।

यहाँ बोम्मई जीते और सर्वोच्च न्यायालय ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए एक बड़ी बात कही। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा “सरकार के पास बहुमत नहीं है तो इसका निर्णय केवल विधानसभा सदन में हो सकता है।” इस आदेश के बाद कॉन्ग्रेस सरकार की भरपूर किरकिरी हुई और बोम्मई एक बार फिर राज्य के मुख्यमंत्री बने।    

झारखंड की त्रिशंकु सरकार  

इसके बाद आता है साल 2005 का सबसे चर्चित मामला। जिसमें राज्यपाल द्वारा लिए गए फ़ैसलों से कॉन्ग्रेस सरकार की जमकर किरकिरी हुई थी। झारखंड में त्रिशंकु विधानसभा बनी, उस वक्त झारखंड के राज्यपाल थे सैयद सिब्ते रज़ी। उन्होंने शिबू सोरेन के नेतृत्व वाली त्रिशंकु सरकार को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। जल्दी-जल्दी में लिए गए इस फैसले की सभी ने भारी कीमत चुकाई, शिबू सोरेन बहुमत साबित नहीं कर पाए। जिसकी वजह से उन्हें 9 दिन के भीतर ही पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा। इस फैसले की भी पूरे देश में आलोचना हुई, यूपीए सरकार पर खूब आरोप लगे। इसके बाद एनडीए ने सरकार बनाने का दवा पेश किया, अंत में अर्जुन मुंडा की अगुवाई में झारखंड के भीतर एनडीए ने सरकार बनाई।  

साल 2009, एक बार फिर कर्नाटक 

इस तरह का एक और मौक़ा देखने को मिला था साल 2009 में। कॉन्ग्रेस की सरकार में मंत्री रह चुके हंसराज भारद्वाज को कर्नाटक का राज्यपाल बनाया गया। उन्होंने अपनी पूर्व पार्टी के प्रति पूरी निष्ठा दिखाते हुए तत्कालीन भाजपा सरकार को बर्ख़ास्त कर दिया था। इस निर्णय की भी पूरे देश में आलोचना हुई, उस वक्त बीएस येदुरप्पा राज्य के मुख्यमंत्री थे। संवैधानिक पद पर बैठे हंसराज राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप पर उतर आए। उन्होंने भाजपा सरकार पर गलत तरीके से सत्ता हासिल करने का आरोप लगाया था।   

‘हिंदुओं को तबाह कर बनाया करियर’: वायर वाले सिद्धार्थ वरदराजन ने अनजाने में कबूली सच्चाई

आईपीएस अधिकारी नागेश्वर राव इस समय सोशल मीडिया पर हिंदुओं की संस्कृति तहत-नहस करने वाले ‘क्रिस्टो इस्लामी’ प्रयासों की बखिया उधेड़ रहे हैं। वे मीडिया, सिनेमा जगत और शिक्षा व्यवस्था का उदाहरण देते हुए इन क्षेत्रों में काबिज ऐसे तत्वों का खुलासा कर रहे हैं जिनका लक्ष्य हिंदुत्व को बर्बाद करना रहा है। उनका यह रवैया लेफ्ट इकोसिस्टम के दायरे में फिट नहीं बैठता तो मीडिया गिरोह के दिग्गज उन्हें उन्मादी करार दे रहे हैं।

द वायर के सह संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन ने ट्विटर पर लिखा कि एक ऐसा वरिष्ठ अधिकारी जिसे आलोक वर्मा के बाद सीबीआई का प्रमुख बनाया गया वह साम्प्रदायिक उन्माद फैला रहा है। फिर वरदराजन अपनी बात में नरेंद्र मोदी, अमित शाह और RSS को खींच लाते हैं। आरएसएस की मुस्लिम विरोधी छवि पर भी बात कर लेते हैं।

इस ट्वीट को देखते हुए स्तंभकार व वकील दिव्या कुमार सोती ने वरदराजन को रिप्लाई करते हुए कहा कि उनके जैसे लोगों ने अपना पूरा करियर हिंदुओं को तबाह करने वाले बिंदुओं पर अमल करके ही बनाया है। इसके जवाब में वरदराजन अनजाने में स्वीकार कर लेते है कि उन्होंने अपना करियर इसी प्रकार बनाया है। वे कहते हैं अगर पूर्व आईपीएस अधिकारी द्वारा बताए बिंदुओं पर चलकर कोई करियर बना सकता है, तो फिर उन्हें नकारना भी एक तरह से करियर को आगे बढ़ाने का रास्ता है? है न? नागेश्वर राव यही तो कर रहे हैं।

इसके बाद दिव्या अपने ट्वीट में द वायर के अमेरिकन पत्रकार को कहते हैं कि अनजाने में ही सही लेकिन असलियत बाहर आ गई। सिद्धार्थ मानते हैं कि उन्होंने हिंदुओं की सभ्यता के ख़िलाफ़ काम करके अपना करियर बनाया है। दिव्या आगे कहते हैं कि सिद्धार्थ हिंदुत्व को अंधविश्वास का एक संग्रह बताने के साथ-साथ इब्राहमी शिक्षा और इब्राहमी मीडिया के लिए काम करते थे, जिनसे हिंदू बर्बाद हों।

गौरतलब हो कि द वायर के संस्थापक की ये सारी पोल नागेश्वर राव के ही एक ट्वीट पर खुली है। जिसमें उन्होंने लेफ्ट इकोसिस्टम को आहत करते हुए क्रमानुसार कुछ बिंदु लिखे थे। इन बिंदुओं में इस बात का उल्लेख था कि हिंदू सभ्यता का इब्राहिमीकरण करने के लिए क्या-क्या किया जाता है।

इस ट्वीट के अंतर्गत ही नहीं द वायर पर हाल में एक आर्टिकल भी पब्लिश हुआ है जो बताता है कि वे हिंदू सभ्यता के ख़िलाफ़ किस तरह से कवरेज कर रहे हैं। इस आर्टिकल में द वायर ने बताया है कि कैसे मुस्लिमों का अधिकार हिंदुस्तान पर हिंदुओं से भी ज्यादा है। जबकि अन्य मौकों पर ये इस बिंदु पर काम करते हैं कि हिंदुस्तान में हिंदुओं की कट्टरता का शिकार मुस्लिमों को होना पड़ रहा है।

बता दें, अभी हाल में द वायर पर एफआईआर भी हुई थी। ये एफआईआर सीएम योगी पर झूठ फैलाने के लिए हुई थी। इसके अलावा इन्होंने एक न्यूज प्रकाशित की थी जिसमें द वायर ने मुस्लिमों को बेचारा और साम्प्रदायिक दंगों का शिकार दिखाने के लिए दिल्ली दंगों पर पुलिस की जाँच पर सवाल खड़े कर दिए थे।

नुपूर शर्मा से माँगो माफी: AAP के सैयद अब्बास को NCW का नोटिस, टीवी डिबेट में दी थी गाली

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की चेयरपर्सन रेखा शर्मा ने आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता डॉ. सैयद असद अब्बास को नोटिस जारी किया है। सैयद असद अब्बास को यह नोटिस भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता नुपूर शर्मा पर सेक्सिस्ट टिप्पिणियों को लेकर दिया गया है।

AAP नेता ने हाल ही में रिपब्लिक टीवी पर एक पैनल चर्चा के दौरान अपना आपा खो दिया था और लाइव टीवी पर ही नुपूर शर्मा के लिए ‘बालाजी एक्ट्रेस, गुंडा और आंटी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था।

अब राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस मामले पर संज्ञान लिया है। NCW की चेयरपर्सन रेखा शर्मा ने अब्बास को जारी नोटिस में उनकी आपत्तिजनक और गलत टिप्पणियों के लिए ‘संतोषजनक स्पष्टीकरण’ देने को कहा है। उन्होंने भाजपा नेता से इसे व्यवहार के लिए उनसे माफी माँगने को भी कहा है।

नोटिस में लिखा गया है, “राष्ट्रीय महिला आयोग राष्ट्रीय टेलीविजन पर एक सार्वजनिक शख्सियत के ऐसे गैर जिम्मेदाराना और अपमानजनक विचारों की कड़ी निंदा और विरोध करता है। यह महिलाओं के प्रति बेहद अपमानजनक है और सामान्य रूप से भारतीय महिलाओं की गरिमा को आघात पहुँचाता है।”

राष्ट्रीय महिला आयोग चेयरपर्सन ने कर्नाटक के पुलिस महानिदेशक प्रवीण सूद को भी पत्र लिखा है। इसमें मामले की जाँच करने और ईमेल या फैक्स के माध्यम से आयोग को सूचित करने के लिए अनुरोध किया गया है।

गौरतलब है कि 24 जुलाई को रिपब्लिक टीवी के एक डिबेट के दौरान AAP नेता सैयद असद अब्बास ने अपना धैर्य खो दिया और भाजपा प्रवक्ता नुपूर शर्मा पर उनके महिला होने को लेकर तंज करने लगे। डिबेट के दौरान डॉ. अब्बास नुपूर शर्मा के जवाब से भड़क गए और गालियाँ देने लगे। उन्होंने कहा कि ‘तुम आरएसएस, तुम गुंडों, तुम उपद्रवियों’ के साथ एक समस्या है।

उन्होंने आगे कहा कि नूपुर शर्मा जैसे लोग ‘प्राइम टाइम की राखी सावंत’ के अलावा कुछ नहीं हैं। इतना ही काफी नहीं था, डॉ. अब्बास ने नुपुर शर्मा से कहा, “आंटी जी, जाकर एकता कपूर के धारावाहिक में शामिल हो जाइए’ और फिर उन्हें ‘एकता कपूर वैम्प’ कहा।

दूरदर्शन पर न हो भूमि पूजन का टेलीकास्ट: CPI ने केंद्र को लिखी चिट्ठी, मोदी के अयोध्या दौरे पर भी लेफ्ट जता चुका है आपत्ति

अयोध्या में 5 अगस्त को होने वाले श्रीराम मंदिर भूमिपूजन का दूरदर्शन पर लाइव टेलीकास्ट होगा। वामपंथी दल सीपीआई (CPI) ने इस पर आपत्ति जताई है। उसने इस संबंध में केंद्र सरकार को पत्र लिखा है।

CPI ने सोमवार (जुलाई 27, 2020) को पत्र लिख भूमि पूजन को सरकारी टीवी चैनल पर प्रसारित नहीं करने की माँग की। सीपीआई का कहना है कि धार्मिक समारोह को प्रसारित करने के लिए दूरदर्शन का उपयोग राष्ट्रीय अखंडता के स्वीकृत मानदंडों के खिलाफ है। अयोध्या में मंदिर लंबे समय से संघर्ष और मतभेद का स्रोत रहा है, इसलिए यहाँ पर होने वाले समारोह के प्रसारण से बचा जाना चाहिए।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने इस संबंध में सूचना और प्रसारण (I & B) मंत्रालय को पत्र लिखा है। इसमें लिखा गया है कि अयोध्या में 1992 में बाबरी मस्जिद का विध्वंस और फिर राम मंदिर को लेकर पिछले कई दशकों से देश में संघर्ष और मतभेद रहा है।

पत्र में आगे कहा गया है, “प्रसार भारती अधिनियम की धारा 12 2 (a) में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इसका उद्देश्य ‘देश की एकता, अखंडता और संविधान में निहित मूल्यों को कायम रखना’ है।”

पत्र में जोर देकर कहा गया है, “धर्मनिरपेक्षता और धार्मिक सद्भाव के सिद्धांतों पर स्थापित देश के लिए राष्ट्रीय प्रसारक के रूप में 5 अगस्त को अयोध्या में धार्मिक समारोह को प्रसारित करने के लिए दूरदर्शन का उपयोग राष्ट्रीय अखंडता के स्वीकृत मानदंडों के विपरीत है।”

पत्र में सीपीआई के विनय विश्वम ने लिखा, “धार्मिक कार्य होने वाली भूमि पर विवाद की ऐतिहासिकता को देखते हुए, सरकार के लिए इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने के प्रयासों का विरोध करना और यह सुनिश्चित करना परिपक्व निर्णय होगा कि राज्य की धर्मनिरपेक्ष छवि से समझौता न किया जाए।”

भूमि पूजन में शामिल होने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अयोध्या जाएँगें, ये खबर जब से वामपंथियों ने सुनी है तब से भड़क उठे हैं, कह रहे हैं पीएम मोदी का अयोध्या दौरा न सिर्फ गलत बल्कि सेकुलरिज्म के खिलाफ भी है।

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के नेता डी राजा ने प्रधानमंत्री मोदी के अयोध्या दौरे का विरोध करते हुए कहा कि मोदी का अयोध्या जाना बिलकुल गलत है। इससे गलत सन्देश जायेगा और ये सेकुलरिज्म के खिलाफ है। बता दें कि डी राजा से पहले एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने पीएम मोदी के अयोध्या दौरे पर ऐतराज जताया था।

गौरतलब है कि अयोध्या में आगामी 5 अगस्त को राम मंदिर की आधारशिला रखी जानी है। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या जाएँगे और भूमि पूजन के बाद राम मंदिर की पहली ईंट रखेंगे। भूमि पूजन के लिए बीजेपी के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत को भी आमंत्रण भेजा गया है। इस समारोह का दूरदर्शन द्वारा सीधा प्रसारण किया जाएगा।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय के मुताबिक, भूमि पूजन के पूरे कार्यक्रम का दूरदर्शन लाइव टेलीकास्‍ट करेगा। उन्‍होंने कहा कि अन्‍य चैनल भी भूमि पूजन को लाइव दिखाने की तैयारी में है। राय ने कोरोना वायरस महामारी के खतरे को देखते हुए लोगों से अयोध्‍या न आने की अपील की। उन्‍होंने कहा कि सब लोग घर में रहते हुए भूमि पूजन देखें और उत्‍सव मनाएँ।

अमित शाह के महकमे में ‘स्पेशल 44’, हरेक आतंकी और उसकी संपत्ति पर होगी नजर: जब्ती का भी होगा अधिकार

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने ‘गैर-क़ानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA)’ आरोपितों, उनकी संपत्ति और उनके वित्तीय लेनदेन पर नज़र रखने के लिए 44 अधिकारियों की एक टीम गठित की है। यह टीम न सिर्फ UAPA आरोपितों की गतिविधियों पर नज़र रखेगी बल्कि उनके पूरे वित्तीय नेटवर्क को ट्रैक करेगी। इससे हवाला और अवैध लेनदेन के नेटवर्क का भी खुलासा होगा।

गृह मंत्रालय की इस स्पेशल टीम में 44 अधिकारियों को शामिल किया गया है। इंटेलीजेंस ब्यूरो(IB), फाइनेंसियल इंटेलिजेंस (FIU), RBI, गृह मंत्रालय, सेबी, राज्यों की ATS, राज्यों की CID सहित कई विभागों के बड़े अधिकारियों को इस टीम में रखा गया है। जिन भी लोगों पर UAPA के तहत केस दर्ज हैं, ये 44 अधिकारियों की टीम उन पर नज़र रखेगी। उनके पास आतंकियों की संपत्ति जब्त या फ्रीज करने का भी पूरा अधिकार होगा।

इन 44 अधिकारियों का विदेश मंत्रालय सहित सभी सम्बद्ध मंत्रालयों से तालमेल होगा। इनके पास उन आतंकियों की सूची व विवरण होंगे, जिन्हें UN ने ब्लैकलिस्ट कर रखा है। साथ ही ये राज्यों के साथ भी कंधे से कंधा मिला कर काम करेंगे। राज्यों और केंद्र के बीच समन्वय बना कर काम करने वाले गृह मंत्रालय के ये 44 अधिकारी UAPA आरोपितों की संपत्ति को जब्त कर सकेंगे और उनकी निगरानी करेंगे।

गृह मंत्रालय ने इन्हें टास्क दिया है कि ये UAPA आरोपितों की सूची में से हर एक ही संपत्ति और वित्तीय स्रोत का पता लगाएँ और राज्यों के सहयोग से उन्हें जब्त करने की दिशा में काम शुरू करें। अब तक UAPA कानून के अंतर्गत दाऊद इब्राहिम, मसूद अज़हर, जाकिर-उर-रहमान लखवी और हाफिज सईद को गृह मंत्रालय द्वारा आतंकवादी घोषित किया गया है। साथ ही 9 खालिस्तानी आतंकियों को भी व्यक्तिगत रूप से आतंकी घोषित किया गया है।

बता दें कि उक्त क़ानून को 1967 में संसद द्वारा पारित किया गया था। इसका उद्देश्य है कि देश की अखंडता और सम्प्रभुता को नुकसान पहुँचाने वालों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही उनकी हातिविधियों पर भी लगाम कसी जाए। इस क़ानून के अंतर्गत आरोपितों को न्यूनतम 7 वर्षों की सज़ा दी जाती है। अब तक इस क़ानून में कई बार संशोधन किए जा चुके हैं। ये एक बहुत ही कड़ा क़ानून है।