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‘राफेल खरीदने के लिए पैसे नहीं’ – सबसे ज्यादा समय तक देश के रक्षा मंत्री रहे एके एंटोनी ने तब कहा था

भारतीय वायु सेना पहले से कई गुना ज्यादा मजबूत होने वाली है क्योंकि फ़्रांस से राफेल फाइटर जेट्स भारत के लिए निकल गए हैं। बीच में यूएई मे रिफ्यूलिंग के लिए रुकते हुए पाँचों राफेल जेट्स बुधवार (जुलाई 29, 2020) को अंबाला एयरबेस पहुँचेंगे। यूएई में इनमें फ्रेंच वायुसेना के टैंकर एयरक्राफ्ट द्वारा फ्यूल भरा जाएगा। जहाँ इसके लिए मोदी सरकार धन्यवाद की पात्र है, वहीं हमें पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटोनी का बयान भी याद करना चाहिए। 

जब 2019 लोकसभा चुनावों के लिए प्रचार पूरे शबाब पर था, तब भारत के पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटोनी ने राफेल सौदे को लेकर ऐसा बयान दिया था, जो उनके ही 2014 वाले बयान को काटता था। एंटोनी ने उस वक़्त दो बातें कही थीं। उन्होंने कहा था कि राजग सरकार ने राफेल सौदे में देरी की। उन्होंने ख़ुद के बारे में कहा था कि उन्होंने भी इस सौदे में देरी की। लेकिन, बड़ी सफाई से उन्होंने ख़ुद के फ़ैसले को ‘राष्ट्रहित’ से जोड़ दिया था। बकौल एंटोनी, उन्होंने राष्ट्रहित में राफेल सौदे में देरी की। 

स्वयं तत्कालीन केंद्रीय रक्षा मंत्री एंटोनी ने 2014 में यह स्वीकार किया था कि यूपीए सरकार के पास वित्त की कमी है, जिस कारण वे चालू वित्त वर्ष में राफेल सौदे को आगे नहीं बढ़ा पाएँगे। फरवरी 6, 2014 को उन्होंने ये बयान दिया था। 10 वर्षों से सत्ता में रही एक राजनीतिक पार्टी के रक्षा मंत्री द्वारा इस तरह का बयान देना कि उसके पास वायुसेना के लिए रुपए ही नहीं हैं, काफ़ी अजीब था। एंटोनी ने कहा था:

“पाँच साल की लंबी प्रक्रिया के बाद भारत ने राफेल लड़ाकू विमानों के लिए फ्रांसीसी दसौं एवियेशन का चयन किया है। भारतीय रक्षा ख़रीद प्रक्रिया के अनुसार जो कम्पनियाँ सेनाओं की विशिष्ट आवश्यकता और निर्धारित मानकों पर खरे साजो-सामान को सबसे सबसे कम क़ीमत पर पेशकश करने को तैयार होती है उन्हें उसकी आपूर्ति का ठेका दिया जाता है।”

अपने बयान में तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटोनी ने आगे कहा था कि सरकार के पास रुपए ही नहीं बचे हुए हैं, ऐसे में सभी बड़े प्रोजेक्ट्स को अप्रैल तक इंतजार करना पड़ेगा। ये बात वो व्यक्ति बोल रहा था, जिससे ज्यादा दिन तक हमारे देश में किसी भी रक्षा मंत्री का कार्यकाल नहीं रहा। एंटोनी ने इस पद को साढ़े 7 साल तक संभाला। यूपीए एक दशक तक सत्ता में रही। लेकिन तब भी ये लोग लाचारी दिखाते रहे। 

एके एंटोनी ने तब कहा था कि लाइफ साइकिल कॉस्ट को कैलकुलेट करने के सम्बन्ध में कुछ शिकायतें आई हैं और अभी इस मामले को ठीक नहीं किया जा सका है। उन्होंने स्वीकारा था कि सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमिटी के पास अंतिम अप्रूवल के लिए लाए जाने से पहले ये ज़रूरी है। फिर किस मुँह से कॉन्ग्रेस नेता बाद में कहते थे कि मोदी सरकार से पहले उन्होंने डील फाइनल कर ली थी? एंटोनी ने तब कहा था कि सरकार की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है। 

खुद एंटोनी ने उस वक्त स्वीकार किया था कि राफेल मामले में देरी हुई है। साथ ही उन्होंने ये भी कहा था कि इस पर बातचीत चल रही है। उन्होंने बताया था कि फंड्स की भारी कमी है, इसीलिए अगले वित्त वर्ष से पहले कुछ नहीं हो पाएगा। वहीं जब मोदी सरकार ने वायुसेना को सशक्त करने की ओर कदम बढ़ाया तो राहुल गाँधी रोज राफेल-राफेल चिल्ला कर लोकसभा चुनाव में माहौल बनाने लगे। 

ये अलग बात है कि ये मुद्दा बुरी तरह फेल हुआ और वो कॉन्ग्रेस अध्यक्ष का पद छोड़ कर ही भाग निकले, वरना ‘द हिन्दू’ के एन राम ने रोज लंबे-लंबे लेख लिख कर मीडिया में माहौल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। ‘द वायर’ और ‘द क्विन्ट’ जैसे मीडिया पोर्टल्स की अगुआई में सोशल मीडिया में भी दुष्प्रचार फैलाया जा रहा था। चुनाव परिणाम आते ही सब चुप हो गए क्योंकि जनता ने उन्हें सबक सिखा दिया था। 

हरियाणा के अंबाला में लैंड करने वाले 3 राफेल जेट्स 2 सीट वाले हैं और बाकी 2 सिंगल सीटर हैं। फ़्रांस से यहाँ तक पहुँचने में ये 7000 किलोमीटर की दूरी तय करेंगे। पहाड़ों पर उम्दा प्रदर्शन के लिए इनमें सेल्फ-प्रोटेक्शन के लिए अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है और ये रडार से भी लैस हैं। इसका ‘Combat Range’ 750-1680 किलोमीटर होगा। इसमें इंफ्रारेड सर्चिंग और ट्रैकिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है। 

भारतीय सेना को आतंकी बताने वाले लेक्चर की पढ़ाई केरल में, अरुंधति रॉय हैं लेखिका: BJP ने राज्यपाल को लिखा पत्र

केरल के कालीकट विश्वविद्यालय में अरुंधति रॉय का लेक्चर पढ़ाई जाने के फैसले के बाद वहाँ विवाद खड़ा हो गया है। केरल भाजपा ने इसके खिलाफ विरोध जताया है। बता दें कि ‘Come September’ नामक अरुंधति रॉय का ये लेक्चर 2002 का ही है। अब केरल के कालीकट यूनिवर्सिटी ने निर्णय लिया है कि इसे बीए अंग्रेजी के तीसरे सेमेस्टर के विद्यार्थियों को सिलेबस में पढ़ाया जाएगा।

केरल भाजपा के अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने इसे देशद्रोह करार दिया है। उन्होंने माँग की है कि न सिर्फ अरुंधति रॉय के इस लेक्चर को सिलेबस से तुरंत निकाल बाहर किया जाए बल्कि ये निर्णय लेने के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ केस भी दर्ज किया जाए। सिलेबस में अरुंधति रॉय के इंट्रोडक्शन में लिखा है कि उन्होंने जम्मू कश्मीर में सशस्त्र भारतीय सेना के खिलाफ ‘निहत्थे’ कश्मीरियों की ‘आज़ादी के आंदोलन’ का समर्थन किया था।

के सुरेंद्रन ने केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान को इस सम्बन्ध में पत्र भेज कर कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने कहा कि उक्त लेख को अरुंधति रॉय के एक भाषण से लिया गया है, जिसमें न सिर्फ सरकारी नीतियों को गलत बताया गया है बल्कि भारतीय संविधान तक को भी चुनौती दी गई है। बकौल सुरेंद्रन, अरुंधति रॉय ने इस लेक्चर में दावा किया है कि भारत सरकार ने जम्मू कश्मीर में ‘आज़ादी के अहिंसक आंदोलनकारियों’ के खिलाफ आतंक का रास्ता अपनाया है।

उन्होंने पूछा कि मासूस विद्यार्थियों को कारगिल युद्ध के सम्बन्ध में ऐसा लेख कैसे पढ़ाया जा सकता है, जिसे भारत-विरोधी श्रोताओं के समक्ष पेश किया गया हो? के सुरेंद्रन ने आरोप लगाया कि इससे कारगिल युद्ध में भारत के लिए बलिदान देने वाले जवानों का अपमान होगा, जो भारत की सम्प्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए। उन्होंने चेताया कि अगर इसे सिलेबस से नहीं हटाया गया तो भाजपा बड़ा आंदोलन करेगी और क़ानूनी रास्ता अपनाएगी।

बता दें कि उक्त लेक्चर को अरुंधति रॉय ने अमेरिका के लानन फाउंडेशन के समक्ष सितम्बर 18, 2002 को सैंटा फे में दिया था। इसमें उन्होंने ‘पॉवर बनाम पॉवरलेस’ के संघर्ष की बात करते हुए दावा किया था कि सरकारी नीतियों की आलोचना करने वालों को देशद्रोही करार दिया जा रहा है। इसे टेक्स्टबुक ‘Appreciating Prose’ में शामिल किया गया है, जिसे मुरुकन बाबू सीआर ने एडिट किया है।

मुरुकन कालीकट यूनिवर्सिटी सिंडिकेट के सदस्य रहे हैं। इसके अलावा इसमें आबिदा फ़ारूक़ी का नाम शामिल है, जो कोन्डोत्ती स्थित गवर्नमेंट आर्ट्स एंड साइंस कॉलेज में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर कार्यरत रही हैं। वो अंग्रेजी के बोर्ड ऑफ स्टडीज की अध्यक्ष भी रही हैं। इस टेक्स्टबुक को एक प्राइवेट प्रकाशन द्वारा लाया गया है। सिंडिकेट सदस्य केके हनीफा ने कहा कि अकादमिक बॉडी, बोर्ड ऑफ स्टडीज, फैकल्टी और अकादमिक काउंसिल ने मिल कर सिलेबस तैयार किया है।

उन्होंने कहा कि इसे एक ‘Prose Paper’ के रूप में जोड़ा गया है, जिसका भाषा के अध्ययन से ज्यादा मतलब है और इसके अंदर क्या कंटेंट है, इससे कम। उन्होंने कहा कि वो लोकतान्त्रिक रूप से शिकायतों को देखेंगे लेकिन सिर्फ अरुंधति रॉय की वजह से इसका विरोध करना गलत है। वहीं मुरुकन ने कहा कि इस पुस्तक में जो भी विचार हैं, वो एडिटर्स के नहीं हैं। साथ ही उन्होंने इसके निरीक्षण की भी माँग की।

इस लेक्चर में अर्बन नक्सल अरुंधति रॉय ने कहा कि भारत में जो कोई परमाणु बम, बड़े बाँधों, उद्योगों का वैश्वीकरण, सांप्रदायिक हिंदू फासीवाद के बढ़ते खतरे पर अपने विचार प्रकट करता है, सरकार उसे राष्ट्र विरोधी करार देती है। सबसे अजीब बात तो ये कि उन्होंने ये तक दावा कर दिया कि 20वीं शताब्दी में राष्ट्रवाद की अवधारणा के कारण ही आतंकवाद का जन्म हुआ और कई नरसंहार हुए।

फ्रांस से उड़ गए राफेल फाइटर प्लेन, कुछ घंटों में भारत में होगी लैंडिंग: देखें फोटो और वीडियो

भारतीय वायु सेना के बेड़े में अंततः राफेल मिलने वाला है। आज (27 जुलाई, 2020) अत्‍याधुनिक मिसाइलों और घातक बमों से लैस फाइटर जेट फ्रांस से भारत के लिए उड़ चला है। सीमा पर चल रहे चीन-पाक से तनाव के बीच इस मौके को बेहद अहम माना जा रहा है।

आज राफेल विमानों के रवाना होने से पहले फ्रांस में भारतीय दूतावास ने इन विमानों और इंडियन एयरफोर्स के जाबांज पायलटों की तस्‍वीर जारी की है। तस्वीरों में हम देख सकते हैं फाइटर जेट भारत के लिए उड़ान भरने को बिलकुल तैयार हैं। यह 7364 किलोमीटर की हवाई दूरी तय करके 29 जुलाई यानी बुधवार को अंबाला एरबेस पहुँचेंगे।

इसके बाद अगले हफ्ते इन पाँचों विमानों की तैनाती चीन सीमा विवाद के मद्देनजर की जाएगी। ये पाँच विमान भारत और फ्रांस के बीच हुई 36 विमानों के समझौते की पहली खेप है। इससे पहले खबर थी कि 6 विमानों की खेप आएगी। लेकिन आज फ्रांस से दूतावास ने जो तस्वीरें जारी की, उसमें 5 विमानों के आने की खबर है।

बता दें कि अब तक वायुसेना के 12 लड़ाकू पायलटों ने फ्रांस में राफेल लड़ाकू जेट पर अपना प्रशिक्षण पूरा कर लिया है। कुछ और अपने प्रशिक्षण के उन्नत चरण में हैं।

इससे पूर्व याद दिला दें चीन के रवैये को देखते हुए IAF को हाई अलर्ट पर रखा गया था। 2 जून को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी टेलीफोन पर अपने फ्रांसीसी समकक्ष फ्लोरेंस पारले से बातचीत की थी। फ्रांस की रक्षा मंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया था कि कोरोना वायरस महामारी के बावजूद राफेल विमान तय समय के अनुसार भारत पहुँचाए जाएँगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, राफेल विमानों को भारत लाने के लिए वन स्टॉप का इस्तेमाल किया जा रहा है। यानी फ्रांस से उड़ान भरने के बाद वे UAE के अल डाफरा एयरबेस पर उतरेंगे। यहाँ पर फ्यूल से लेकर बाकी सभी टेक्निकल चेकअप के बाद राफेल विमान सीधे भारत के लिए उड़ान भरेंगे और सीधे अंबाला एयरबेस पर आएँगे।

भारत ने सितंबर 2016 में फ्रांस के साथ लगभग 53,000 करोड़ रुपए की लागत से 36 राफेल लड़ाकू जेट की खरीद के लिए एक अंतर-सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद राजनाथ सिंह ने पहला राफेल विमान फ्रांस के एक एयरबेस पर 8 अक्टूबर को प्राप्त किया था।

राफेल विमान का पहला स्क्वाड्रन अंबाला में तैनात होगा, जबकि दूसरा स्क्वाड्रन पश्चिम बंगाल के हसीमारा में तैनात किया जाएगा। IAF की ओर से इसके रखरखाव की सुविधाओं को विकसित करने के लिए 400 करोड़ रुपए का खर्चा किया गया है। इन 36 राफेल विमानों में से 30 फाइटर जेट होंगे और 6 को ट्रेनिंग के लिए रखा जाएगा। ट्रेनर जेट ट्वीन सीटर होंगे, जिनके पास फाइटर जेट जैसे सभी विशेषताएँ होंगी।

पुणे में जितने कोरोना संक्रमित उसके आधे भी नहीं देश के 24 राज्यों में, महाराष्ट्र के एक तिहाई केस यहीं से

पूरे देश में कोरोना वायरस संक्रमण के आँकड़े लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में इस बात पर गौर करना आवश्यक है कि वो कौन से क्षेत्र हैं जहाँ संक्रमितों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है। अब तक के आँकड़े देख कर तो लगता है कि महाराष्ट्र के पुणे में कोरोना सबसे ज्यादा तबाही मचा रही है। भारत के कुल सक्रिय मामलों में से 30% महाराष्ट्र से ही हैं।

अगर पुणे की बात करें तो यहाँ से महाराष्ट्र के एक तिहाई मामले सामने आए हैं। पुणे में महाराष्ट्र के कुल 32.4% सक्रिय मामले हैं। इससे पता चलता है कि वहाँ कोरोना वायरस के संक्रमितों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है। पूरे महाराष्ट्र में कोरोना के 1,48,601 मामले हैं। इनमें से 48,180 अकेले पुणे में हैं।

अगर पिछले 5 दिनों की ही बात करें तो पुणे में क्रमशः 3606, 3187, 3381, 3088 और 3196 मामले सामने आए हैं। इस तरह से पिछले 5 दिनों में पुणे जिले में 16,000 से भी अधिक सक्रिय मामले हैं। अगर कुल संख्या की बात करें तो पुणे में अब तक कोरोना वायरस के 76,203 मामले सामने आए हैं। इनमें से 1793 लोगों की मौत हुई है।

दिल्ली में स्थिति सुधरने के बाद वहाँ कोरोना के 11,904 संक्रमित ही बचे हैं। ऐसे में फ़िलहाल पुणे सक्रिय मामलों के केस में देश का सबसे ज्यादा प्रभावित जिला बन गया है। महाराष्ट्र में इसके बाद ठाणे (36,174) और मुंबई (22,536) का स्थान है। ये महाराष्ट्र के टॉप-3 जिले हैं, जो फ़िलहाल कोरोना से सबसे ज्यादा बदहाल हैं। बता दें कि वहाँ शिवसेना-एनसीपी-कॉन्ग्रेस की संयुक्त सरकार है, जिसके सीएम उद्धव ठाकरे हैं।

महाराष्ट्र में कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित जिले (साभार: Covid19India)

महाराष्ट्र के बाद कर्नाटक कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य है, जहाँ कुल 58,414 सक्रिय मामले हैं। कर्नाटक के बाद तमिलनाडु कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य है, जहाँ कुल 53,703 सक्रिय मामले हैं। इसके बाद आंध्र प्रदेश का स्थान आता है, जहाँ 48,956 सक्रिय मामले हैं। इस तरह से भारत के 4 राज्यों को छोड़ दें तो बाकी सभी राज्यों में पुणे की आधी संख्या में भी कोरोना केसेज नहीं हैं।

इस तरह से पुणे में देश के कुल 10% कोरोना मामले हैं। भारत के 4 ही राज्यों में पुणे से ज्यादा मामले हैं, बाकी के 24 राज्यों में इसकी आधी संख्या में भी कोरोना मरीज नहीं हैं। उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश को ले लें तो वहाँ कोरोना के 23,921 कोरोना मामले हैं, जो पुणे के आधे (24,478) मामले से कम ही हैं। इसके और ठाणे के बाद बेंगलुरु अर्बन है, जहाँ कोरोना के 33,156 सक्रिय मामले हैं।

[सभी आँकड़े ‘Covid19India.Org‘ नामक वेबसाइट से लिए गए हैं (साभार)]

‘जिसने भी जीता ऑस्कर, बॉलीवुड में उन सब का करियर खत्म’ – सबसे बड़े अवॉर्ड विजेता ने खोली पोल

सुशांत सिंह राजपूत की मौत (आत्महत्या) के बाद बॉलीवुड के स्याह राज खुलते जा रहे हैं। लॉबी, माफिया, नेपोटिजम (वंशवाद या भाई-भताजीवाद) से लेकर अब यह ऑस्कर विजेता और उनके टैलेंट तक पहुँच गया है। अब ताज़ा प्रकरण में बेस्ट साउंड डिजाइन के लिए ऑस्कर जीतने वाले रेसुल पुकूट्टी ने नया खुलासा किया है।

हुआ यह कि एआर रहमान ने बॉलीवुड में काम न मिलने को लेकर एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने एक मुख्य कारण बताया, जिसके अनुसार एक खास गैंग का उनके खिलाफ लॉबी करना बताया गया।

एआर रहमान बड़ी हस्ती हैं। उनका यह आरोप तुरंत खबर बना। चर्चा शुरू हुई। इस चर्चा को एक स्तर आगे ले गए शेखर कपूर। सुशांत की मौत से आहत शेखर पहले से ही बॉलीवुड कल्चर को निशाने पर लेकर ट्वीट करते रहे हैं।

शेखर कपूर ने एआर रहमान की खबर को ट्वीट करते हुए लिखा – “रहमान तुम्हारी सबसे बड़ी दिक्कत है कि तुमने ऑस्कर जीत लिया है। बॉलीवुड में ऑस्कर ताबूत की ऑखिरी कील होती है। इससे साबित होता है कि तुम में उतनी क्षमता है, जितनी बॉलीवुड पचा ही नहीं सकता।”

बात इतने पर रुकी नहीं। इस चर्चा में फिर कूदे रेसूल पुकूट्टी (Resul Pookutty)। नाम से परिचित न हों तो याद करा दें कि यह भी ऑस्कर विजेता हैं। गूगल कीजिए तो पता चल जाएगा इनके बारे में और इनका काम भी याद आ जाएगा।

रेसुल ने शेखर कपूर के ट्वीट पर जवाब देते हुए अपना दर्द साझा किया। उन्होंने लिखा:

“शेखर कपूर, आप मुझसे पूछिए। मैं लगभग टूट गया था क्योंकि ऑस्कर जीतने के बाद हिंदी सिनेमा इंडस्ट्री में कोई मुझे काम नहीं दे रहा था जबकि क्षेत्रीय सिनेमा मुझे थामे हुए था। कुछ प्रोडक्शन हाउस ने तो मेरे मुँह पर कहा था – हमें तुम्हारी कोई जरूरत नहीं है। लेकिन इन सब के बावजूद मैं इंडस्ट्री से प्यार करता हूँ…”

इससे पहले रेडियो मिर्ची को दिए एक इंटरव्यू में रहमान ने कहा था,

“मैं अच्छी फिल्मों को मना नहीं करता, लेकिन मुझे लगता है कि कोई गैंग है जो गलतफहमी के चलते गलत खबरें फैला रहा है। मुकेश छाबड़ा मेरे पास आए थे और मैंने उन्हें दो दिन में गाना तैयार करके दिया। उन्होंने मुझसे कहा- सर ना जाने कितने लोगों ने कहा है कि मत जाइए, मत जाइए उनके पास और उन्होंने मुझे कहानियों पर कहानियाँ सुनाई हैं।” रहमान ने कहा कि मैंने उनकी बातें सुनीं और सोचा कि ठीक है अब मैं समझ गया हूँ कि मुझे कम काम क्यों मिल रहा है और अच्छी फिल्में मेरे पास तक क्यों नहीं आ पाती हैं।”

गौरतलब है कि सुशांत की आत्महत्या ने बॉलीवुड के पर्दे के पीछे की सच्चाई को सामने ला दिया हैं। कई बड़े एक्टर, फेमस सेलेब्रिटीज़ से जुड़ी कई बातें सामने आ रही हैं। आए दिन लोग नेपोटिज्म को लेकर भी खुलकर बात कर रहे हैं।

RJ सायमा नैतिकता की अपील बस दिवाली पर करती हैं, बकरीद उन्हें ‘शांति’ से मनाने दी जाए…

मीडिया हिप्पोक्रेसी आखिर क्या है? इसका जवाब आपको इन दिनों सोशल मीडिया पर बहुत अच्छे से देखने को मिलेगा। बकरीद आ रही है और हर वामपंथी अपनी गंगा-जमुनी तहजीब की आड़ लेकर यहाँ पर एक अलग ही स्तर की लड़ाई लड़ रहा है।

ये लड़ाई उन लोगों के ख़िलाफ़ है जो बकरीद को लेकर सवाल उठाते हैं। ये लड़ाई उन लोगों के ख़िलाफ़ है जो बकरीद के मौके पर कुर्बानी की जगह कोई सवाब का काम करने को कहते हैं। ये लड़ाई उन लोगों के भी खिलाफ है जो सोचते हैं कि उनके अपील करते रहने से एक दिन कट्टरपंथियों का हृदय परिवर्तन हो जाएगा और वह इस त्योहार को मनाने के लिए कोई अन्य तरीका ढूँढ निकालेंगे।

पिछले कुछ समय से बकरीद ट्विटर पर एक बड़ी चर्चा का विषय रहा है। कई लोगों ने इस पर ट्वीट किया है। इनमें कुछ ऐसे बुद्धिजीवि हैं जिन्होंने कुर्बानी न करने की माँग को हिंदुत्व की माँग बता दिया। कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने बिना कुछ कहे ये दर्शा दिया कि इस देश में मुस्लिम समुदाय को उनका त्योहार शांति से मनाने ही नहीं दिया जाता।

हम बात कर रहे हैं रेडियो जगत के सुप्रसिद्ध नाम- आरजे सायमा की। आरजे सायमा, जो अपने शो में अक्सर हमें इंसानियत, हर किसी से प्रेम और एक-दूसरे की मदद करने की बातें कहानियों की जरिए अपनी मधुर आवाज में सुनाती हैं और जिनसे सैंकड़ों लोग प्रभावित होते हैं। उन्होंने ही ट्विटर पर बकरीद को लेकर लिखा है कि ये बहुत शर्मनाक बात है कि एक समुदाय के लोगों को उनका त्योहार शांति से नहीं मनाने दिया जा रहा।

हाँ-हाँ! आप इस बात को हास्यास्पद समझ सकते हैं कि सायमा जैसा इंसान इन दिनों बकरीद के त्योहार को ‘शांति’ से मनाने देने की अपील कर रहा है। शायद, शांति शब्द का इस्तेमाल करते हुए वह यहाँ पर सिर्फ़ इंसानी जुबान पर लगाम की गुहार लगा रही है। उनकी अपील से ऐसा बिलकुल नहीं लगता कि उनका पशुओं की चीखों से कोई सरोकार है।

वे लिखती हैं,”ये बहुत शर्मनाक है कि आप एक समुदाय को उनका त्योहार शांति, खुशी और उल्लास के साथ मनाने देना नहीं चाहते। मैं इसको कोई तूल नहीं देती। ये मजाक तुम पर नहीं है। तुम ही मजाक हो।”

अब सायमा के इस ट्वीट पर कई प्रतिक्रियाएँ आईं हैं। कुछ कट्टरपंथियों की। तो कुछ ऐसे लोगों की जो बकरीद पर कुर्बानी रोकने की गुहार लगा रहे हैं, लेकिन सायमा की मधुर आवाज के भी फैन हैं। एक यूजर उन्हें लिखता है, “सायमा मैं तुम्हारा प्रशंसक रहा हूँ। तुम रेडियो पर श्रेष्ठ से भी ऊपर हो। लेकिन तुम्हारे समुदाय के लोग जैसे एकतरफा ट्वीट करते हैं ये बेहद निराशाजनक है। कोई तुम्हें तुम्हारा त्योहार मनाने से नहीं रोक रहा। इसलिए चिल्लाना बंद करो।”

आरजे सायमा इसी ट्वीट के जवाब में लिखती हैं कि जब आप सोशल मीडिया पर #Bakralivesmatter जैसा हैशटैग हर रोज देखते हैं तो ये निश्चित तौर पर चिंता का विषय हो जाता है।

जिस हैशटैग का हवाला देते हुए आरजे सायमा अपने ट्वीट को जस्टिफाई कर रही हैं, उसमें ऐसा क्या है? उस हैशटैग में लोग कुर्बानी के बिना बकरीद मनाने की अपील कर रहे हैं। या ये बता रहे हैं कि हर साल एक त्योहार के नाम पर कितने बकरे काट दिए जा रहे हैं। लेकिन पेटा जैसा कोई संगठन इसके लिए आवाज नहीं उठा रहा और कट्टरपंथी भी नहीं सुधर रहे।

इस हैशटैग के अंतर्गत कुछ लोग मार्मिक तस्वीरें शेयर कर रहे हैं जिसमें माँ और बच्चे के जरिए ये समझाने की कोशिश हो रही हैं कि पशुओं के भीतर भावनाएँ होती है, वो भी मातृत्व प्रेम समझते हैं… आखिर इसमें गलत क्या है? सायमा भी तो अपने शो में यही सब संदेश देती हैं। फिर उन्हें इस हैशटैग से क्या दिक्कत है। क्या समझ लिया जाए कि जो बातें वो सिखाती हैं वो सिर्फ़ आम दिनों में खुद के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए होती हैं। या फिर ये समझ लिया जाए कि आरजे सायमा की सोच भी कट्टरपंथियों की सोच से इतर नही है।

आखिर हैशटैग में दिक्कत क्या है। जिन्हें लगता है कुर्बानी गलत है वो केवल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर अपनी राय ही तो रख रहे हैं। मानना है मानिए नहीं मानना मत मानिए। अपने पाखंडी रवैये की पोल तो मत खोलिए।

जो इवन डेज में आपको दिवाली-होली पर पॉल्यूशन और पानी पर ज्ञान देने के लिए उकसाता है, जबकि ऑड दिनों में ये कहलवाता है कि बकरीद को शांति से मनाने दिया जाए। दिवाली पर सायमा जैसों को फौरन उन लोगों की चिंता सता जाती है जिन्हें धुएँ से परेशानी होती है। क्या उनका विवेक उन्हें उन लोगों के लिए आवाज उठाने को नहीं बोलता जिन्हें खून से भरी नालियाँ देखकर घबराहट शुरू हो सकती हैं।

भगवान के नाम पर या बीमारों का ख्याल करते हुए हिंदू मुमकिन है एक दिन बिलकुल पटाखे जलाना छोड़ दें। लेकिन क्या यही अपेक्षा या ऐसा ही त्याग दूसरे समुदाय के लोगों से हिन्दू कर सकते हैं? खुद सोचिए, क्या शरीर से निकाला गया खून शांति का प्रतीक होता है? नहीं। उसे हिंसा का चिह्न ही मानते हैं। फिर आप उसे युद्ध के नाम पर बहाइए या फिर त्योहार के नाम पर।

आज ये बात भी हम मानते हैं कि आम दिनों में लोगों ने इसे अपना स्वाद बना लिया है। फिर चाहे वो हिंदू हो या कोई पंडित। इसके लिए अलग से टिप्पणी करने की आवश्यकता नहीं है या वीडियोज और तथ्य डालकर प्रमाण देने की जरूरत नहीं है।

हम ये बात जानते हैं कि हिंदुओं में भी अधिकाँश लोग मांसाहारी भोजन खाते हैं। लेकिन हमें ये भी पता है कि इसके पीछे क्या कारण है। वो त्योहार के नाम पर इतनी बर्बरता नहीं दिखाते। आज #bakralivesmatter हैशटैग में कई वीडियोज, कई तथ्य, कई स्क्रीनशॉट आपको ऐसे देखने को मिलेंगे, जो ये साबित करने के लिए डाले जा रहे हैं कि जो खुद मांसाहार खाते हैं वो बकरीद पर भावुक होकर सिर्फ़ इस्लाम को ट्रोल कर रहे हैं।

लेकिन, ये बात समझने की आवश्यकता है कि आम दिनों में मांसाहार खाने वाले लोगों के पीछे भौगोलिक परिस्थितियाँ, इतिहास में अदला-बदली की गई संस्कृतियाँ या फिर आर्थिक मजबूरियाँ उत्तरदायी होती हैं। हाँ! आज के परिप्रेक्ष्य में ये सारा मामला व्यापार और स्टेटस पर जरूर आ टिका है। मगर, क्या कभी किसी ने सुना है कि कोई हिंदू इस तरह के तर्क दे रहा हो कि उसने कई सैकड़ों पशुओं को इसलिए काट दिया क्योंकि उसे गरीबों को भोजन देना था? शायद कभी नहीं। क्योंकि जो आर्थिक रूप से मजबूत इंसान है वो किसी का पेट भरकर पुण्य कमाने के लिए ऐसी हिंसा को विकल्प ही नहीं मानता।

आरजे सायमा या फिर उनके अन्य कट्टरपंथी समर्थकों को हम किसी भी रूप में मांसाहारी भोजन करने से नहीं रोक रहे। हमारा ये उद्देश्य बिलकुल भी नहीं हैं। हमें मालूम है देश की अर्थव्यवस्था में मीट का निर्यात एक महत्वपूर्ण कारक है। हम ये भी मानते हैं कि आखिर इंसान की प्रवृति यही है कि जो गले से नीचे उतर जाए और पेट में जाकर पच जाए वही उसे मील लगने लगता है, तो फिर वह सेवन क्यों न करे।

लेकिन, हम ये जरूर पूछते हैं कि किसी त्योहार के नाम पर करोड़ों पशुओं का एक साथ मारना कहाँ तक उचित है? कहाँ तक उचित है पूरे साल बच्चों को इंसानियत के नाम पर ढकोसलों से भरी बातें सिखाना और एक दिन छूरी लेकर उन्हें ये दिखाना कि एक चलता-फिरता जीव त्योहार के नाम पर काटा जा सकता है… इसमें कुछ गलत नहीं है। क्या औचित्य है ऐसी धारणाओं का जो हमारे भीतर ऐसी मानसिकता पैदा करे कि एक जीव को मारकर दूसरे जीव का पेट भरा जाएगा?

आरजे सायमा को त्योहार पर शांति चाहिए ताकि वे इसे खुशी से मना पाएँ। हम पूछते हैं क्या उन्हें किसी ने रोका है। खुद सोचिए अगर आज पूरी दुनिया इस त्योहार पर दी जाने वाली कुर्बानी के विरोध पर आ खड़ा हो और कोई कानून या फरमान निकाला जाए, तब भी तो एक तबका ऐसा होगा जो अपने अस्तित्व का खतरा बताकर आजादी माँगने लगेगा। शाहीन बाग ऐसे निराधार बातों पर हुए प्रदर्शनों का सबसे हालिया उदहारण है ही।

‘अगर कॉन्ग्रेस के खिलाफ मतदान नहीं किया तो हो जाओगे अयोग्य’ – BSP की ‘माया’ से राजस्थान की राजनीति में फँसा पेंच

राजस्थान की राजनीति में अब कॉन्ग्रेस के लिए मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। दरअसल, लंबे समय से चल रहे सियासी ड्रामे के बाद अब वहाँ बहुजन समाज पार्टी ने कॉन्ग्रेस के लिए एक नया पेंच फँसाया है। प्रदेश में बीएसपी ने अपने 6 नेताओं को विधानसभा में शक्ति परीक्षण के दौरान सत्तारूढ़ पार्टी कॉन्ग्रेस के ख़िलाफ़ मतदान करने के लिए व्हिप जारी किया है।

बसपा महासचिव सतीश चंद्र मिश्र ने एक बयान में कहा, “सभी 6 विधायकों को अलग-अलग नोटिस जारी करके सूचित किया गया कि चूँकि बसपा एक मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय पार्टी है और संविधान की दसवीं अनुसूची के पारा चार के तहत पूरे देश में हर जगह समूची पार्टी (बसपा) का विलय हुए बगैर राज्य स्तर पर विलय नहीं हो सकता है।” मिश्रा ने कहा कि अगर 6 विधायक पार्टी व्हिप के खिलाफ जाकर मतदान करते हैं, तो वे विधानसभा की सदस्यता के लिए अयोग्य हो जाएँगे।

नोटिस में आगे कहा गया है कि वे बसपा के व्हिप का पालन करने के लिए आबद्ध हैं और ऐसा नहीं करने पर वे विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य हो जाने के पात्र होंगे। मिश्रा ने कहा कि बसपा राजस्थान उच्च न्यायालय में अयोग्यता की लंबित याचिका में हस्तक्षेप करेगी या अलग से रिट याचिका दायर करेगी।

यहाँ बता दें कि बसपा ने जिन 6 विधायकों को व्हिप जारी कर अपना फरमान सुनाया है, उनमें उदयपुरवटी विधायक आर गुधा; करौली के लखन सिंह; खेरिया से दीपचंद; नदबई के जेएस अवाना; तिजारा के संदीप कुमार और नागर के वाजिद अली शामिल हैं। इन सभी ने साल 2018 में हुए विधानसभा चुनावों में बसपा की टिकट पर जीत हासिल की थी।

बाद में पार्टी ने कॉन्ग्रेस के साथ गठजोड़ कर लिया और ये 6 नेता भी कॉन्ग्रेस से जुड़ गए। स्वयं विधानसभा स्पीकर सीपी जोशी ने इस बात की जानकारी सबको दी थी। मगर, अब बसपा चाहती है कि उनकी पार्टी से चुनाव लड़ कर जीतने वाले विधायक सत्ताधारी पार्टी के शक्ति परीक्षण में समर्थन न दें।

बसपा के राष्ट्रीय सचिव सतीश चंद्रा ने बताया बसपा प्रमुख मायावती ने राज्य की वर्तमान स्थिति पर एक प्रेस नोट जारी किया था जिसमें उन्होंने कहा था कि जब लोग महामारी के कारण पीड़ित हैं, तो दूसरी ओर, सरकार अपने विधायकों को लोक कल्याण के लिए काम करने देने के बजाय पाँच सितारा होटल में बंद कर रही है। बीएसपी का मानना ​​है कि राज्य की मौजूदा स्थिति को देखते हुए राजस्थान में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाना चाहिए।

राष्ट्रीय सचिव ने इस दौरान ये भी कहा कि ऐसा पहली बार हुआ कि कोई मुख्यमंत्री ही राजभवन में प्रदर्शन करने पहुँच गया। इसलिए, इससे यह साबित होता है कि राज्य में न्याय व्यवस्था प्रभावित है। प्रदेश के राजयपाल को इस मामले पर संज्ञान लेना चाहिए और बिना किसी विलंब के राजनैतिक संकट और कोरोना के मद्देनजर यहाँ राष्ट्रपति शासन लागू कर देना चाहिए।

गौरतलब है कि साल 2019 में बसपा के कॉन्ग्रेस के साथ जुड़ने से अशोक गहलोत सरकार को अच्छी मजबूती मिली थी। नतीजतन 200 सदस्यीय विधानसभा में उनकी संख्या बढ़कर 107 हो गई थी। लेकिन अब ऐसी निर्देशों से उन पर संकट गहरा सकता है।

बता दें कि रविवार को बसपा द्वारा जारी व्हिप से पहले इस मामले के संबंध में एक भाजपा विधायक ने याचिका दायर करते हुए इन विधायकों के कॉन्ग्रेस में विलय को रद्द करने का अनुरोध किया था।

‘ये मेरा अंतिम वीडियो… NTK नेता ने मुझे Slut Shame किया’ – अभिनेत्री विजयलक्ष्मी ने किया आत्महत्या का प्रयास

दक्षिण भारत की अभिनेत्री विजयलक्ष्मी ने आत्महत्या का प्रयास किया है। रविवार (जुलाई 26, 2020) की शाम अभिनेत्री ने फेसबुक पर एक वीडियो अपलोड करने के बाद आत्महत्या का प्रयास किया। विजयलक्ष्मी को चेन्नई के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है। अपने वीडियो में विजयलक्ष्मी ने NTK (नाम तमिलर कच्ची) नेता सीमन और पनकट्टू पडाई नेता हरि नादर पर उन्हें अपमानित और प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है।

विजयलक्ष्मी ने फेसबुक पर डाले गए अपने वीडियो में कहा कि ये उनका अंतिम वीडियो है क्योंकि पिछले कुछ महीनों से वो असीम प्रताड़ना का सामना कर रही हैं। उन्होंने इसके लिए NTK नेता सीमन और उनके साथी नेताओं को जिम्मेदार ठहराया। विजयलक्ष्मी ने कहा कि उन्होंने पिछले दिनों अपनी माँ व बहन के कारण जीने की भरपूर कोशिश की लेकिन हरि नादर ने उनका हाल ही में मीडिया में अपमान किया है।

अभिनेत्री ने बताया कि उन्होंने अपने कुछ बीपी टेबलेट्स खा लिए हैं, इसीलिए कुछ ही देर में उनका बीपी काफी कम हो जाएगा और उनकी मौत हो जाएगी। विजयलक्ष्मी में कहा कि वो वीडियो देख रहे अपने प्रशंसकों को बताना चाहती हैं कि उनका जन्म कर्नाटक में हुआ था, सिर्फ इसीलिए NTK नेता सीमन ने उन्हें काफी प्रताड़ित किया। विजयलक्ष्मी ने कहा कि एक महिला होने के नाते उन्होंने इसका सामना करने की भरसक कोशिश की लेकिन अब वो इस दबाव को सहन करने में अक्षम हैं।

विजयलक्ष्मी ने बताया कि वो पिल्लई समुदाय से संबंध रखता है, जिससे श्रीलंका में लिट्टे का सबसे बड़ा सरगना रहा प्रभाकरण आता था। अभिनेत्री ने अपनी वीडियो में कहा:

“सीमन आज जो भी है, वो प्रभाकरण की वजह से ही है। लेकिन अब वो मुझे लगातार सोशल मीडिया पर प्रताड़ित कर रहा है। सीमन, तुमने मुझे Slut Shame किया है और अब ये मेरे पर निर्भर करता है कि तुम्हारी प्रताड़ना के बाद मैं क्या करूँ। मैं अपने प्रशंसकों से अपील करती हूँ कि सीमन को इस मामले में भाग कर मत निकलने देना। उन्हें जमानत तक नहीं मिलनी चाहिए। मेरी मौत से सभी की आँखें खुल जानी चाहिए। मैं किसी का दास बन कर जीवन व्यतीत नहीं करना चाहती।”

फेसबुक पर अभिनेत्री विजयलक्ष्मी का वीडयो

बता दें कि विजयलक्ष्मी कन्नड़, तमिल और मलयालम फिल्मों में सक्रिय रही हैं। पिछले ढाई दशक से वो दक्षिण भारतीय सिनेमा में काम करती रही हैं। वो तमिल स्टार विजय और मलयालम के वरिष्ठ अभिनेता मोहनलाल के साथ भी काम कर चुकी हैं। वहीं अगर NTK की बात करें तो ये पार्टी तमिल आतंकी प्रभाकरण को अपना आदर्श मानती है। पार्टी के कई कार्यक्रमों में पोस्टरों-बैनरों पर प्रभाकरण की तस्वीर देखी गई है।

इस पार्टी की स्थापना 1958 में ‘वी तमिल्स’ के रूप में हुई थी, जो श्रीलंका और भारत के तमिल क्षेत्रों को मिला कर एक ‘ग्रेटर तमिलनाडु’ बनाना चाहती है। इस पार्टी के नेताओं ने भारत का नक्शा तक जलाया था।

राम मंदिर भूमि पूजन के लिए आडवाणी और भागवत को भी आमंत्रण, दूरदर्शन करेगा सीधा प्रसारण

अयोध्या में आगामी 5 अगस्त को राम मंदिर की आधारशिला रखी जानी है। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या जाएँगे और भूमि पूजन के बाद राम मंदिर की पहली ईंट रखेंगे। भूमि पूजन के लिए बीजेपी के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत को भी आमंत्रण भेजा गया है। इस समारोह का दूरदर्शन द्वारा सीधा प्रसारण किया जाएगा।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा ने बताया कि इनके अलावा, सभी धर्मों के आध्यात्मिक नेताओं को भी आमंत्रित करने का विचार किया जा रहा है। उन्होंने कोरोना वायरस और सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर भी जानकारी दी।

मिश्रा ने बताया कि कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर सामाजिक दूरी बनाए रखने के नियम का पालन करते हुए कार्यक्रम में सीमित संख्या में लगभग 200 लोगों को बुलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सूची को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।

मिश्रा ने कहा कि मंदिर आंदोलन का हिस्सा रहे कई लोगों को आमंत्रण दिया जा रहा है, जिनमें भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती शामिल हैं। मंदिर के एक अन्य ट्रस्टी कामेश्वर चौपाल ने भूमि पूजन की जानकारी दी। उन्होंने बताया, आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत और महासचिव सुरेश भैयाजी जोशी को भी विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार के साथ कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया जा रहा है।

ट्रस्ट के सदस्यों के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राम मंदिर की आधारशिला रखने के लिए अयोध्या आने की संभावना है। चौपाल ने कहा कि ‘भूमि पूजन’ के लिए गुरुद्वारों, बौद्ध और जैन मंदिरों सहित सभी प्रमुख पूजा स्थलों से मिट्टी एकत्र की जा रही है।

ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने बताया कि यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में ‘सबसे महत्वपूर्ण’ कार्यक्रम होगा। उन्होंने कहा कि दूरदर्शन और अन्य चैनलों द्वारा इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया जाएगा। इसके जरिए वे लोग भी इस पावन अवसर का हिस्सा बन सकेंगे जिनके लिए कोरोना संकट की वजह से यहाँ आना संभव नहीं है। राय ने भगवान राम के भक्तों से निवेदन किया कि वे अयोध्या आने के बजाय निकटवर्ती मंदिरों या अपने-अपने घरों में इस मौके पर उत्सव मनाएँ।

आयोजन के लिए मिट्टी संग्रह कार्यक्रम का समन्वय कर रहे विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि दिल्ली में जैन मंदिरों, बाल्मीकि मंदिरों और गुरुद्वारा शीशगंज सहित विभिन्न धार्मिक स्थानों से मिट्टी अयोध्या भेजी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि महामारी के बाद पूरे देश में लगभग दस करोड़ परिवारों के पास जाकर विहिप मंदिर निर्माण के लिए धन इकट्ठा करेगा। यह भूमि पूजन इस सदी का सबसे भव्य कार्यक्रम होगा।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार नरेंद्र मोदी अयोध्या जाएँगे। पाँच अगस्त को पीएम मोदी करीब 3 घंटा रामनगरी अयोध्या में रहेंगे। भूमि पूजन के बाद वे अयोध्या में पर्यटन पर भी कार्यक्रम देखेंगे।

‘मुस्लिमों ने 40 साल में कम से कम 5 लाख काफिरों के साथ बलात्कार किया’: ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग का आतंक

पिछले 40 साल में ब्रिटेन में कम से कम 5 लाख गैर-मुस्लिम (काफिर) लड़कियों के साथ समुदाय विशेष के लोगों ने रेप किया है। रेप पीड़िता डॉ. एला हिल ने ‘Triggernometry’ को दिए एक इंटरव्यू में इसका खुलासा किया।

20 साल पहले की डरावनी कहानी को याद करते हुए हिल ने बताया कि उन्हें उनके पाकिस्तानी मुस्लिम ब्वॉयफ्रेंड ने निशाना बनाया था। उसका रिश्ता जल्द ही एक नियंत्रित, जुनूनी और मजहबी रूप में तब्दील हो गया। पाकिस्तानी मुस्लिम ब्वॉयफ्रेंड ने रॉदरहैम, शेफ़ील्ड और ब्रैडफोर्ड के आसपास अलग-अलग फ्लैटों में ले जाकर उनके साथ रेप किया और यातनाएँ दीं।

उसने उन्हें इतनी गहरी चोट दी थी कि उससे उबरने में लगभग 1 साल लग गए। ब्वॉयफ्रेंड ने हिल के माता-पिता को जान से मारने की धमकी दी थी, जिसकी वजह से वह चुपचाप सब कुछ सहन करती रहीं।

हिल बताती है कि जब उन्होंने वहाँ से भागने की कोशिश की तो उसने उनका पीछा किया और जबरन उनके घर में घुस गया। पाकिस्तानी शख्स ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर ‘ऑनर किलिंग’ को अंजाम देने की कोशिश की लेकिन हिल बच गई। मगर उन्हें काफी चोटें आईं थीं, जिसकी वजह से उन्हें एक हफ्ते तक अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। इसके बाद पुलिस ने पाकिस्तानी ग्रूमिंग गैंग से उनके बचने का एकमात्र तरीका उनका नाम बदलकर कहीं और शिफ्ट हो जाना बताया। उनके पैरेंट्स ने ऐसा ही किया और इसी वजह से आज वो जीवित हैं।

डॉ. हिल ने बताया कि ग्रूमिंग ग्रुप जातीय और धार्मिक आधार पर रेप की वारदात को अंजाम देते हैं। उन्होंने खुलासा किया कि ग्रूमिंग ग्रुप मुख्य रूप से कम उम्र की लड़कियों को निशाना बनाता है, लेकिन युवा और वृद्ध महिलाओं को भी अपना शिकार बनाते हैं।

यह पूरे ब्रिटेन में फैला हुआ है। बहुत कम ऐसे शहर हैं, जहाँ पर गैंग स्कैंडल नहीं है। उन्होंने बताया कि पिछले 40 वर्षों में अकेले ब्रिटेन में जिन करीब 5 लाख लड़कियों का बलात्कार किया गया, उनमें से अधिकतर गोरे हैं और उन्हें शिकार बनाने वाले मुख्य रूप से एशियाई मुस्लिम हैं।

हिल ने कहा, “इसका बहुत कुछ नस्ल और धर्म से लेना-देना है। बहुत से लोग इस बारे में बात करना पसंद नहीं करते हैं या वे इसके बारे में सुनना पसंद नहीं करते हैं।” उन्होंने बताया कि जब उन्हें पीटा जाता था, तो ह्वाइट स्लैग, गोरी वेश्या और अन्य भद्दी-भद्दी चीजें कहकर संबोधित किया जाता था। हिल ने बताया कि उनकी गोरी त्वचा हमेशा समुदाय विशेष के अपराधी के दिमाग में थी।

हिल ने बताया कि उनकी यातना अच्छे मुस्लिम और गैर मुस्लिम के विचारों से प्रेरित था। उन्होंने कहा कि भले ही वह एक धर्मनिष्ठ ईसाई थी, फिर भी उसके मुस्लिम अपराधी का मानना था कि उसके साथ बलात्कार जायज है, क्योंकि वह सिर से पैर तक पूरी तरह से ढँकी नहीं थी।

हिल ने आगे कहा, “अगर कोई गोरी लड़की समुदाय विशेष के शख्स की आँखों में देखती है तो इसका मतलब है कि वह उसके साथ सेक्स करना चाहती है।” उन्होंने बताया कि वो पुलिस के पास भी 5 बार गई, मगर पुलिस ने कहा कि वो कुछ नहीं कर सकते।

आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, पिछले साल इंग्लैंड में लगभग 19,000 नाबालिगों का यौन शोषण किया गया था। नवीनतम आँकड़ों में पिछले 5 वर्षों में चाइल्ड ग्रूमिंग पीड़ितों की संख्या में तेज वृद्धि देखी गई।