नेपाल की राजधानी काठमांडू में गुरुवार (जुलाई 23,2020) को एक 22 वर्षीय लड़की पर तेजाब फेंकने का मामला सामने आया। इस घटना में लड़की का चेहरा बुरी तरह झुलस गया।
पीड़िता की पहचान पबित्रा करकी के रूप में हुई। आरोपितों का नाम मुन्ना मोहम्मद और मोहम्मद आलम बताया जा रहा है।
पुलिस ने तेजाब फेंकने वाले भारतीय युवक मुन्ना मोहम्मद को घटना के दो घंटे में ही गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में मुन्ना ने बताया कि उसे ये सब करने को उसे 42 वर्षीय नेपाली मालिक मोहम्मद आलम ने कहा था।
इसके बाद पुलिस ने मोहम्मद आलम को गिरफ्तार कर लिया। वहीं, पीड़िता को घटना के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहाँ फिलहाल उसका इलाज चल रहा है और अभी उसकी स्थिति स्थिर है।
Indian hurls acid on girl over turned down love proposal in Nepal, arrested – The New Indian Express https://t.co/VL8iRAVu74
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस ने बताया कि मुन्ना ने पबित्रा पर कल रात करीब 8:45 बजे उस वक्त हमला किया जब वो अपने घर से बाहर निकली। लगभग दो घंटे में वहाँ की मेट्रोपोलिटन पुलिस क्राइम डिवीजन की एक टीम ने मुन्ना को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तारी के वक्त उसका हाथ भी बुरी तरह से झुलसा हुआ था। पूछताछ में उसने अपना जुर्म स्वीकारा और बताया कि उसके मालिक आलम ने उसे ये सब करने को कहा।
आलम से जब पूछताछ हुई तो उसने बताया कि उसने पबित्रा पर तेजाब इसलिए फिंकवाया क्योंकि उसने उसका प्रेम नहीं स्वीकारा था और उसे नकार दिया था। इसलिए उसने मुन्ना से कहकर ये करवाया। इसी बीच पीड़िता ने अपने दिए बयान में पुलिस को कहा, “मुझे नहीं पता था आलम मुझसे प्रेम करता है। मेरे लिए तो वो भाई जैसा था।”
सुशांत सिंह राजपूत की खुदकुशी के बाद पुलिस लगातार बॉलीवुड की हस्तियों से पूछताछ कर रही है। पुलिस सुशांत की गर्लफ्रेंड समेत कई अन्य सितारों से पूछताछ कर चुकी है। इस केस में सुशांत के परिजनों, दोस्तों और फिल्म इंडस्ट्री से 30 से ज्यादा लोगों को तलब किया गया है।
अब पुलिस ने अभिनेत्री कंगना रनौत को समन भेजा है। यह समन पुलिस ने उनके मनाली स्थित घर पर भेजा है, क्योंकि कंगना इस वक्त अपने परिवार के साथ वहीं पर है।
बता दें, पिछले महीने बांद्रा पुलिस के इंवेस्टिगेशन टीम ने कंगना के मुंबई वाले घर पर समन भेजा था और एक्ट्रेस की गैर-मौजूदगी में उनके एक स्टाफ के सदस्य को सौंप दिया था। पुलिस के समन पर कंगना रनौत की लीगल टीम ने अपने जवाब में लिखा, ” सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड मामले में जाँच कर रहे ऑफिसर ने कंगना रनौत को 27 जुलाई तक बांद्रा पुलिस स्टेशन में अपना बयान दर्ज कराने को कहा है और मेरी क्लाइंट सुशांत सिंह राजपूत की रहस्यमयी परिस्थितियों में हुई मौत मामले में आपकी सहायता करना भी चाहती हैं। लेकिन वो पिछले 17 मार्च से ही अपने मनाली वाले घर पर रह रही हैं। कोरोना वायरस को देखते हुए इस समय ट्रेवल नहीं कर सकती हैं। हम आपसे अनुरोध करना चाहते हैं कि आप अपने सवाल उपल्ब्ध कराएँ, जिसका वो उत्तर दे सकें।”
कंगना रनौत की लीगल टीम ने आगे लिखा, “हम आपसे ये भी अनुरोध करते हैं कि यदि हो सके तो आपका कोई ऑफिसर आए और मनाली में हमारे क्लाइंट से पूछताछ करे। अगर आप यहाँ नहीं आ सकते तो हमें सूचित करें ताकि हम किसी इलेक्ट्रॉनिक मीडियम से उनका बयान दर्ज कर सकें।”
वहीं ट्विटर के जरिए कंगना की लीगल टीम ने व्हाट्सअप का भी एक स्क्रीनशॉट शेयर किया था। इसमें यह दिखाया गया है कि कंगना को लेकर उनकी बहन रंगोली चंदेल से मुंबई पुलिस की क्या बातचीत हुई थी।
इस स्क्रीनशॉट को शेयर करते हुए लिखा गया है, “कंगना के पास अभी तक कोई भी फॉर्मल समन नहीं आया है। पिछले दो हफ्तों से रंगोली के पास पुलिस के फोन आ रहे हैं। कंगना अपना बयान दर्ज कराना चाहती हैं, लेकिन मुंबई पुलिस की ओर से कोई जवाब नहीं मिल रहा है। ये वही मैसेज है जो रंगोली ने मुंबई पुलिस को भेजा है।”
There is no formal summon sent to Kangana , Rangoli keeps getting casual calls from the cops for past 2 weeks, Kangana wants to record statement but we don’t get any response from @mumbaipolice, Here’s a screen shot of message Rangoli ji sent to @mumbaipolicepic.twitter.com/w03i2csbWV
इस स्क्रीनशॉट में रंगोली ने लिखा है, “आप किसी को भेज सकते हैं? इस पर मुंबई पुलिस के अधिकारी कहते हैं कि चूंकि जाँच हर दिन के हिसाब से हो रही है, ऐसे में ये संभव नहीं है। इसके बाद रंगोली मैसेज करते हुए लिखती हैं कि वह इस मामले में मुंबई पुलिस की पूरी मदद करना चाहती हैं और कंगना भी चाहती हैं कि सुशांत सिंह राजपूत को न्याय मिले, इसलिए वह अपने बयान को दर्ज कराने के लिए मुंबई पुलिस के सवालों का इंतजार कर रही हैं।” सोशल मीडिया पर यह स्क्रीनशॉट काफी वायरल हुआ है।
गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत की खुदकुशी के बाद से कंगना रनौत लगातार बॉलीवुड की कुछ हस्तियों पर निशाना साध रही हैं। अपने कई बयानों में वो बॉलीवुड में फैले भाई-भतीजावाद और वशंवाद (नेपोटिज्म) पर खुलकर बोल चुकी हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू में कंगना ने कहा था सुशांत सुसाइड मामले में पुलिस ने बॉलीवुड के एक तबके से अभी तक पूछताछ की ही नहीं है।
कंगना रनौत ने कहा था, “मैं बता रही हूँ कि अगर मैंने कुछ ऐसा कह दिया हो, जिसकी मैं गवाही नहीं दे सकती, जिसे मैं साबित नहीं कर सकती और जो जनता के हित में नहीं है तो मैं अपना पद्मश्री लौटा दूँगी। मैं यह नहीं कह रही कि थी कोई भी चाहता था कि सुशांत मर जाएँ, लेकिन कई चाहते थे कि वे निश्चित रूप से बर्बाद हो जाएँ। ये लोग भावनात्मक गिद्ध होते हैं। वे लोगों को मरता देखना चाहते हैं। निर्माता आदित्य चोपड़ा, फिल्म निर्माता महेश भट्ट, फिल्म निर्माता- निर्देशक करण जौहर और फिल्म समीक्षक राजीव मसंद को भी पूछताछ के लिए बुलाया जाना चाहिए।”
अनगिनत असफल प्रयासों के बाद एक बार फिर ऐसा लगता है जैसे राहुल गाँधी को लॉन्च करने की तैयारी शुरू हो चुकी है। इसके लिए मीडिया संस्थान इंडिया टुडे की ‘डेटा इंटेलीजेंस यूनिट’ भी कॉन्ग्रेस का पूरा साथ दे रही है। दरअसल इंडिया टुडे ने कॉन्ग्रेस को कोट करते हुए हाल में एक रिपोर्ट की है।
इस रिपोर्ट में ये दावा किया गया है कि कॉन्ग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी ने कुछ दिन पहले यानी 17 जुलाई और 20 जुलाई को जो LAC मामले पर वीडियोज डाली थी उसे करीब 15 करोड़ लोगों ने देखा।
इंडिया टुडे की मानें तो दोनों वीडियो को करीब 4 करोड़ लोगों ने ट्विटर पर देखा। 6 करोड़ लोगों ने इन्हें फेसबुक पर देखा। 2 करोड़ ने यूट्यूब पर देखा और 2 करोड़ लोगों ने ही उसे व्हॉट्सएप पर शेयर करके देखा।
अब हालाँकि सच्चाई क्या है? इसका मालूम वास्तविक वीडियोज को देखकर पता लगाया जा सकता है। जैसे इंडिया टुडे ने कहा कि राहुल गाँधी की वीडियो को ट्विटर पर 4 करोड़ लोगों ने देखा। लेकिन वीडियोज के नीचे अगर व्यूज को देखा जाए तो आँकड़े एकदम भिन्न हैं।
राहुल गाँधी के ट्विटर अकाउंट्स से 17 जुलाई को रिलीज की गई वीडियो पर 2.7 मिलियन व्यूज हैं यानी 27 लाख। जबकि 20 जुलाई को डाली गई दूसरी वीडियो पर 1.8 मिलियन हैं, यानी 18 लाख। कुल मिलाकर दोनों का जोड़ 45 लाख होता है, जो 4 करोड़ के आसपास भी नहीं है। अब हम यहाँ अपने विवेक पर यह समझ सकते हैं कि मुमकिन हो कि इंडिया टुडे ने 4.5 मिलियन को 4.5 करोड़ समझ लिया हो इसलिए उन्होंने इतनी बड़ी गलती की।
अब बात फेकबुक की। इंडिया टुडे बताता है कि राहुल गाँधी की दोनों वीडियो 6 करोड़ लोगों ने देखी। लेकिन फेसबुक बताता है कि पहली वीडियो को 358,000 लोगों ने देखा है, जबकि दूसरी वीडियो 2,37,000 द्वारा देखी गई। यानी दोनों को मिलाकर कुल व्यूज हुए करीब 5,95,000 जो 6 लाख होने में भी 5 हजार कम हैं। मगर, इंडिया टुडे ने अपने गणित में इस गिनती को 6 करोड़ बताया है।
इसके बाद राहुल गाँधी की तारीफों के पुलिंदे पूरी रिपोर्ट में नजर आए और यह भी कहा गया कि राहुल गाँधी की लोकप्रियता इतनी बढ़ रही है कि लोग चीन के साथ बढ़ते सीमा संकट के बीच मौजूदा विवाद के ख़िलाफ़ कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष के साथ मिल कर वर्तमान स्थिति की आलोचना कर रहे हैं।
यूट्यूब व्यूज की बात करते हुए रिपोर्ट में कॉन्ग्रेस आईटी सेल का हवाला दिया गया और उस प्लेटफॉर्म पर भी राहुल की लोकप्रियता समझाने के लिए ये दावा किया गया कि यूट्यूब को 2 करोड़ लोगों ने दोनों वीडियो को देखा। हकीकत में राहुल गाँधी की पहली वीडियो को यूट्यूब पर 81000 व्यूज मिले हैं और दूसरी को अभी तक केवल 41,000। दोनों का जोड़ हुआ 1,22,000। अब किस आधार पर इंडिया टुडे इस पर 2 करोड़ व्यूज के दावे कर रहा है, ये नहीं पता चल पाया है।
इसके बाद सबसे हैरान करने वाली बात कि राहुल गाँधी की छवि निर्माण में कॉन्ग्रेस और इंडिया टुडे ने व्हॉट्सएप पर देखे गए व्यूज का भी अंदाजा लगा लिया। जबकि सब जानते हैं कि फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर व्यूज का पता लगाना एक सरल काम है। लेकिन व्हॉट्सएप को लेकर ऐसे दावे करना फर्जीवाड़े के सिवा कुछ नहीं है।
साथ ही इस बात का भी ध्यान रहे कि व्हॉट्सएप डेटा को तीसरा पक्ष एक्सेस नहीं कर सकता। फिर अकेले एक राजनीतिक पार्टी के नेता की वीडियो को कितने शेयर मिले, इसकी जानकारी उन्हें कैसे मिली, ये एक बड़ा सवाल है। आखिर जब यूट्यूब, फेकबुक, ट्विटर पर दर्शकों की संख्या सामान्य है तो व्हॉट्सएप भी तो ऐसा ही प्लेटफॉर्म है, वहाँ इतनी तादाद में लोग इसे कैसे देखेंगें।
इंडिया टुडे ने अपनी आर्टिकल में राहुल गाँधी की वाह-वाही के लिए कॉन्ग्रेस सोशल मीडिया सेल के रोहन गुप्ता का बयान कोट किया है। इसमें रोहन गुप्ता ने कहा है, “राहुल जी की वीडियो को लोग इसलिए इतना देख रहे हैं क्योंकि जब कोई सच बोलता है तो वो जनता को अपने साथ जोड़ता है।”
हालाँकि, यहाँ सच्चाई ये है कि इंडिया टुडे और कॉन्ग्रेस आईटी सेल की बहुत कोशिशों के बाद भी अपने उद्देश्यों में सफल नहीं हो पाए। लेकिन इस कोशिश ने यह साबित कर दिया कि जो लोग 4.5 मिलियन को 4 करोड़ बोलते हैं। 6 लाख को 6 करोड़ कहते हैं और 1,22,000 को 2 करोड़ कहते हैं, उनकी कोशिशें उनकी मैथ्स की कम समझ के कारण फेल होती हैं।
कथित इतिहासकार रामचंद्र गुहा आजकल ‘पाँचवीं पीढ़ी के राजवंशी’ राहुल गाँधी को लेकर बेहद कठोर बयान देते नजर आ रहे हैं। हाल ही में उन्होंने केरल लिटरेचर फेस्टिवल के दौरान कहा था कि राहुल गाँधी का बेहद परिश्रमी नरेंद्र मोदी के रहते राजनीति में कोई भविष्य नहीं है। यही नहीं, गुहा ने कहा कि केरल ने राहुल गाँधी को संसद भेजकर विनाशकारी काम किया है।
इसके बाद इतिहासकार और दरबारी लेखक रामचंद्र गुहा प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द वायर’ की जर्नलिस्ट आरफ़ा खानम शेरवानी को दिए इंटरव्यू में भी इसी अंदाज में देखे गए और राजस्थान की राजनीति में चल रहे तूफ़ान से लेकर पीएम मोदी के काम करने की शैली को लेकर भी राहुल गाँधी पर ही बरसते नजर आए। साथ ही, गुहा ने वामपंथियों पर भारत के खिलाफ षड्यंत्र करने का भी आरोप लगाया।
आरफ़ा खानम को दिए करीब 35 मिनट के इंटरव्यू में गुहा कहते हैं, “लोगों ने 2019 में नरेंद्र मोदी को इसलिए वोट दिया क्योंकि वो डरते थे कि राहुल गाँधी को प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहिए। उनको लगता है कि राहुल गाँधी अयोग्य हैं, उनके बस की नहीं कि वो देश चलाए। उनकी सरकार रही, लेकिन 10 साल वो मंत्री नहीं बने। राहुल गाँधी बस ट्विटर पर एक्टिव हैं।”
#WATCH | By and large, the country deems Rahul Gandhi an “incompetent” leader. He has no administrative experience despite the UPA being in power.
राजस्थान की राजनीति पर इंटरव्यू में आरफ़ा खानम ने गुहा से पूछा कि अगर किसी के पास रुपए हैं तो आप उन्हें कैसे रोकेंगे? आरफ़ा ने कहा कि ऐसे में तो सिर्फ नैतिकता का ही सवाल रह जाता है। इस पर इतिहासकार गुहा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में कुछ करना चाहिए।
रामचंद्र गुहा इस इंटरव्यू में कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट अपना काम ठीक तरह से नहीं कर रही है। आरफ़ा खानम द्वारा लोकतान्त्रिक संस्थाओं के इस्तेमाल के सवाल पर उन्होंने कहा कि हमारे इन संस्थाओं जैसे अफसरशाही, न्यायपालिका, इलेक्शन कमिशन हो, इस सबके साथ हस्तक्षेप कॉन्ग्रेस ने ही शुरू किया था।
गुहा ने कहा, “जब UPA की सरकार थी तब इलेक्शन कमिश्नर मनमोहन और सोनिया चुनते थे, क्योंकि वो चाहते थे कि ऐसे में फैसले उनके ही पक्ष में होंगे। नरेंद्र मोदी इंदिरा गाँधी से भी आगे चले गए हैं। जो इंदिरा ने शुरू किया नरेंद्र मोदी उसे आगे लेकर गए हैं।”
इसके साथ ही, गुहा ने भारतीय सेना और CDS बिपिन रावत पर राजनीति करने का भी आरोप लगाया और कहा कि वो भाजपा के समर्थक हैं, आर्मी प्रमुख को ऐसा नहीं करना चाहिए। (इस इंटरव्यू में 09.45 पर यह हिस्सा देख सकते हैं।)
गुहा ने कहा कि मुझे याद है कि इंदिरा गाँधी की पूजा किस तरह से की जाती थी और लोग ‘इंदिरा इज इण्डिया एंड इण्डिया इज इंदिरा’ जैसे बयान तक दिया करते थे। गुहा ने कहा कि लोग इंदिरा से डरते थे लेकिन लोग जितना मोदी की तारीफ करते हैं, उतनी इंदिरा की नहीं की गई थी।
आरफ़ा खानम ने कहा कि क्या नरेंद्र मोदी ‘कम्युनल इंदिरा गाँधी हैं?’ इस पर गुहा न कहा कि उनसे भी ज्यादा हैं, क्योंकि इंदिरा ने आपातकाल की अपनी भूल को स्वीकार किया था।
गुहा ने कहा कि अगर किसी को मोदी के खिलाफ आना है तो उसे हिंदी आनी चाहिए। अगर आप देश की सबसे जरूरी भाषा नहीं बोल सकते हैं तो… इस पर आरफ़ा खानम ने उन्हें टोकते हुए कहा कि अकेले राहुल गाँधी ही हैं जिनकी आलोचना भी होती है।
रामचंद्र गुहा ने उदाहरण देते हुए कहा कि अब लोग यह नहीं जानना चाहते कि आपके दादा या परदादा ने क्या किया था, वो ये जानना चाहते हैं कि आपने खुद क्या किया और आपने अपने आप क्या किया?
इस पर आरफ़ा ने कहा कि ‘नामदार’ तो भाजपा में भी बहुत ज्यादा हैं। गुहा ने उन्हें जवाब देते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी का कोई गॉडफादर नहीं था, जबकि राहुल गाँधी का दिल बहुत अच्छा है क्योंकि वो नहीं चाहते कि एक और गाँधी देश में आए।
गुहा ने कहा, “ऐसा ही प्रियंका गाँधी ने कहा कि वो इंदिरा गाँधी की पोती हैं, इसका इक्कीसवीं सदी में क्या मतलब है? लोग तो आपको तुरंत नामदार कह देंगे।”
द वायर की पत्रकार आरफ़ा ने प्रियंका गाँधी वाली बात फिरसे काटते हुए कहा कि अकेले राहुल गाँधी ही हैं जो आरएसएस के खिलाफ खुलकर बोलते हैं। इसके जवाब में गुहा ने कहा कि आरएसएस से बराबरी करनी है तो आपको ट्विटर नहीं, बल्कि सड़क पर लोगों के बीच जाना होगा।
हाल ही में केरल साहित्य महोत्सव में गुहा ने राहुल गाँधी ही नहीं, बल्कि कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी पर भी कटाक्ष करते हुए कहा था कि उनकी हालत मुगल वंश के आखिरी वारिस जैसी है।
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, गुहा ने कहा, “भारत अधिक लोकतांत्रिक और कम सामंती होता जा रहा है, और गाँधीवाद को इसका एहसास नहीं है। आप (सोनिया गाँधी) दिल्ली में हैं, आपका राज्य दिन प्रति दिन सीमित होता जा रहा है, लेकिन फिर भी आपके चाटुकार आपको बता रहे हैं कि आप अभी भी बादशाह हैं।”
केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार (24 जुलाई, 2020) को ’एक्टिविस्ट’ रेहाना फातिमा की अग्रिम जमानत खारिज कर दी है। रेहाना फातिमा पर नाबालिक बच्चों से नग्न शरीर पर ड्राइंग कराने और फिर सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट करने के लिए मुकदमा दर्ज किया गया था। रिपोर्टों के अनुसार, उसने अब शीर्ष अदालत में जाने का फैसला किया है।
Kerala High Court dismisses an anticipatory bail plea of activist Rehana Fathima, in a case registered against her for posting on social media a video of her minor children painting on her body. pic.twitter.com/FvlqpiYywl
मातृभूमि की एक रिपोर्ट के अनुसार, फातिमा ने सूचित किया है कि वह सर्वोच्च न्यायालय से ‘अनुकूल निर्णय’ की उम्मीद कर रही है। इस बीच, उसने राज्य सरकार से उक्त मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए भी कहा है। फातिमा ने दावा किया कि अदालत के फैसले जनता की राय से प्रभावित होते है। इसलिए इस तथ्य को बदलना होगा।
रेहाना ने कहा, “मुझे न्यायालय से अनुकूल निर्णय मिलने की उम्मीद है। कानून हमेशा लोगों के एक वर्ग के अनुसार नहीं हो सकता। यह सभी के लिए समान है।” रेहाना फातिमा ने इस बात पर जोर दिया कि हर किसी के पास अपने अधिकारों को अर्जित करने की जिम्मेदारी है।
रेहाना ने अपने अर्धनग्न शरीर पर नाबालिग बच्चों से पेंटिंग कराने और वीडियो यू-ट्यूब पर डालने पर नैतिकता को लेकर उठ रही बहस के बीच, राज्य सरकार पर अपना चेहरा छुपाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। फातिमा ने आरोप लगाया कि पिनाराई विजयन की अगुवाई वाली केरल सरकार ‘किसी और सभी का बलिदान’ करने के लिए तैयार है। यह सरकार के पिछले ट्रैक रिकॉर्ड की पुनरावृत्ति है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार ने केरल उच्च न्यायालय से उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज करने को कहा है। इसके साथ ही सरकार ने यह तर्क दिया कि लोगों को ‘कला’ के नाम पर कुछ भी करने तथा बच्चों सहित किसी को भी अपने किसी भी गतिविधि में शामिल करने का अधिकार नहीं है। केरल सरकार ने अदालत से रेहाना के पिछले कार्यों का संज्ञान लेने के लिए भी कहा है।
रेहाना ने बच्चों से कराया था अपने नग्न शरीर पर पेंट
गौरतलब है कि, केरल में पथनमथिट्टा जिले के तिरुवल्ला पुलिस ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत रेहाना फातिमा और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 (गैर-जमानती अपराध के लिए यौन रूप से स्पष्ट सामग्री प्रसारित करना) मुकदमा दर्ज किया था।
रेहाना फातिमा ने 19 जून 2020 को ही यूट्यूब वीडियो फेसबुक पर शेयर किया था। इसमें उनके बेटे और बेटी को उनकी सेमी न्यूड बॉडी पर पेंटिंग करते देखा जा सकता है। इस वीडियो के साथ उन्होंने हैशटैग #BodyArtPolitics पोस्ट किया था। रेहाना के मुताबिक, यह वीडियो उन्होंने इसलिए बनाया था, ताकि महिलाएंँ सेक्स और अपने शरीर को लेकर ज्यादा खुल सकें, वो भी ऐसे समाज में जहाँ यह दोनों चीजें प्रतिबंधित हैं।
आज पूरी मानवता कोरोना महामारी की अग्निपरीक्षा से जूझ रही है। दुनिया के नक्शे पर कुछ कम ही देश ऐसे हैं जहाँ इस बीमारी ने हाहाकार मचाकर नहीं रखा है। भारत, अमेरिका, रूस समेत कई देश कोरोना की वैक्सीन बनाने में जुटे हैं ताकि मानवता को सर्वकालिक सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक, कोरोना वायरस से बचाया जा सके।
ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा कि वैक्सीन कब आएगी, लेकिन इस बीच कोरोना महामारी से निपटने की सरकारी कोशिशों के इतर कई समाजसेवी संस्थाएँ भी इस लड़ाई में तन-मन-धन से लगी हैं।
इसी कड़ी में सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण नाम है, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS)। पूरी दुनिया में भारत को एक बार फिर से विश्वगुरु बनाने की मुहिम में जुटे संघ ने इस महामारी के खिलाफ लड़ाई में भी कोई कसर नहीं छोड़ रखी है।
कोरोना संक्रमण के दौरान जब हम आप महामारी से बचाव के लिए सरकार का कहा मान ज्यादा से ज्यादा समय घरों में बिता रहे हैं, संघ के स्वयंसेवक फ्रंट लाइन वॉरियर्स बनकर डटे हुए हैं। देश के अधिकतर हिस्सों में इस संस्था के कार्यकर्ता इस महमारी से जन-जन को बचाने में जुटे हैं। इनका योगदान अद्भुत है। परंतु यह कोई नई बात नहीं है कि जब यह संस्था अपना योगदान दे रही है। अतीत के पन्नों को पलटें तो संघ का योगदान इतिहास में भी स्वर्ण अक्षरों में लिखा नजर आता है।
जब भी कोई आपदा आई, स्वयंसेवक मदद में रहे सबसे आगे
देश के किसी भी हिस्से में, जब भी कोई आपदा आई है, तब राहत/सेवा-कार्यों में राष्ट्रीय स्वयंसवेक संघ के कार्यकर्ताओं ने आगे बढ़-चढ़कर लोगों की मदद की है। उदाहरण के तौर पर, गुजरात भूकंप, ओडिशा चक्रवात, केरल बाढ़, केदारनाथ आपदा या अन्य आपात स्थितियों में संघ के स्वयंसेवकों की पूर्ण निष्ठा एवं समर्पण की भावना को याद किया जा सकता है। इन आपदाओं के दौरान संघ के स्वयंसेवकों ने एक तरह से अपना जीवन दाँव पर लगा कर समाज हित में अद्भुत योगदान दिया है।
‘संघ के लिए सेवा उपकार नहीं, बल्कि करणीय कार्य’
26 अप्रैल, 2020 को सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी के एक संबोधन में संघ के सेवाभाव की मनसा को सहज रूप में समझा जा सकता है। उस संबोधन के दौरान उन्होंने कहा था कि स्वयंसेवक के लिए ‘सेवा’ उपकार नहीं है, बल्कि उनके लिए यह ‘करणीय कार्य है’। इसलिए स्वयंसेवक अपना दायित्व मान कर सेवा-कार्य करते हैं।
उन्होंने यह भी कहा, “सेवा-कार्यों की प्रेरणा के पीछे हमारा कोई भी स्वार्थ नहीं होता है। हमें अपने अहंकार की तृप्ति एवं अपनी कीर्ति-प्रसिद्धि के लिए सेवा-कार्य नहीं करना है। यह अपना समाज है, अपना देश है, इसलिए हम कार्य कर रहे हैं। स्वार्थ, भय, मजबूरी, प्रतिक्रिया या अहंकार, इन सब बातों से रहित आत्मीय वृत्ति का परिणाम है, यह सेवा।”
संघ के स्वयंसेवकों से उन सभी को सीख लेनी चाहिए जो सिर्फ अपने स्वार्थ-पूर्ति हेतु सेवा कार्य करते हैं। वर्तमान समय में तो ऐसा बन गया है कि जो भी सेवा कार्य किया गया, उसका श्रेय तो लेना ही है। साथ ही साथ जो नहीं किया उसका भी श्रेय लूटने का प्रयास किया जाता है। हर तरफ श्रेय लेने की होड़ लगी हुई है।
कोरोना महामारी के खिलाफ युद्ध में कुछ इस तरह डटा है संघ
अब जब समूचा देश कोरोना जैसी महामारी से लड़ रहा है, तब इस संकट की घड़ी में आरएसएस के स्वयंसेवक संकटमोचक के रूप में आगे आकर सेवा-कार्यों में जुटे हुए हैं। स्वयंसेवक राशन बाँटने से लेकर लोगों को जागरूक करने, ट्रेसिंग एवं टेस्टिंग में मदद करने जैसे कार्यों में लगे हुए हैं।
आरएसएस एवं विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने लोगों की मदद के लिए ‘सेवा एवं स्वावलंबन’ अभियान की शुरुआत की है। इस अभियान को दिवाली तक चलाया जाएगा। इस अभियान में संघ से जुड़े विहिप, सेवा भारती, मातृशक्ति, राष्ट्र सेविका समिति एवं दुर्गावाहिनी जैसे सहयोगी संगठन शामिल हैं।
इसके तहत कहीं निर्धन महिलाओं को मास्क बनाने के कार्यक्रम में लगाया गया है, तो कहीं दूसरे माध्यमों से उन्हें आमदनी के तरीके बताए जा रहे हैं।
20 मई तक के आँकड़े के अनुसार, आरएसएस ने पूरे देश में राहत कार्यों हेतु 4,79,949 समर्पित स्वयंसेवकों को तैनात किया। इन समर्पित स्वयंसेवकों ने 85,701 स्थानों पर सेवाएँ दी। 1,10,55,450 लोगों को राशन किट तथा 7,11,46,500 लोगों को खाने के पैकेट वितरित किए गए। साथ ही साथ 62,81,117 मास्क बाँटे गए और 27,98,091 माइग्रेंट वर्कर्स की सहायता की गई। बात इतने पर ही नहीं रुकती, संघ के इन समर्पित स्वयंसेवकों द्वारा 39,851 लोगों को ब्लड भी डोनेट किया गया।
इस संकट के दौरान उनके द्वारा किए जा रहे सहायता कार्यों की सूची इतनी लंबी है कि क्या बताया जाए और क्या छोड़ा जाए। सेवा कार्यों के दौरान संघ के स्वयंसेवकों की तबीयत भी खराब हुई परंतु वे भयभीत नहीं हुए।
सेवा कार्य में कोई भेदभाव नहीं
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सेवा कार्यों की सबसे अहम विशेषता यह है कि इसमें किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होता। स्वयं सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने 26 अप्रैल के अपने भाषण में यह स्पष्ट रूप से कहा था कि “सेवा-कार्य बिना किसी भेदभाव के सबके लिए करना है। जिन्हें सहायता की आवश्यकता है वे सभी अपने हैं, उनमें कोई अंतर नहीं करना। अपने लोगों की सेवा उपकार नहीं है, वरन हमारा कर्तव्य है।”
आरएसएस के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने भी बल देकर कहा कि कोरोना वायरस जैसी महामारी के समय आरएसएस के स्वयंसेवक सभी वर्ग की मदद कर रहे हैं। चाहे वह किसी भी धर्म के मानने वाले ही क्यों न हों।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का यह सेवा भाव आज हम सभी लोगों के लिए एक सीख है। प्राचीन भारत के मनीषियों ने हमें निःस्वार्थ सेवा के नैतिक गुण सिखाए थे, लेकिन बाद के सालों में हम यह गुण भूल गए।
आज संघ के लोग अपने सेवा कार्यों से हमें यही गुण फिर से सिखा रहे हैं। स्वयंसेवक हमें सिखा रहे हैं कि हमने समाज से लिया तो बहुत कुछ है, लेकिन क्या हम समाज को कुछ दे भी पा रहे हैं या नहीं। ऐसे में जरूरी है कि हम सभी अपने अंदर के स्वयंसेवक को जगाएँ और इस आपदा की घड़ी में माँ भारती की सेवा में जुट जाएँ।
राजस्थान में जारी सियासी संकट के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अब धमकी की राजनीति पर उतर गए हैं। उन्होंने कहा है कि यदि जनता राजभवन का घेराव करेगी तो उनकी जिम्मेदारी नहीं होगी।
राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात से ठीक पहले उन्होंने मीडिया से यह बात कही। गहलोत ने कहा, “हम चाहते हैं कि सोमवार से विधानसभा का सत्र शुरू हो जाए। तब सब कुछ साफ हो जाएगा। मैंने टेलीफोन पर राज्यपाल से बात की है और उनसे तत्काल फैसला लेने का आग्रह किया है। अब मैं उनसे मिलने भी जा रहा हूॅं।”
We want to start the State Assembly session from Monday. Everything will be clear then. I had a telephonic conversation with the Governor and requested him to take a decision on this immediately. Now, we are going to meet him also: Rajasthan Chief Minister Ashok Gehlot pic.twitter.com/rA7flMyxCT
राजस्थान के सीएम ने कहा, “हम सभी (विधायक दल) उनसे मिलेंगे और उनसे निवेदन करेंगे कि किसी के दबाव में न आएँ (और विधानसभा सत्र बुलाएँ)। आपका संवैधानिक पद है और आपने शपथ ली है। अपनी अंतरात्मा और संविधान की शपथ के आधार पर फैसला लें। वरना फिर हो सकता है कि पूरे प्रदेश की जनता अगर राजभवन को घेरने के लिए आगे आएगी तो हमारी ज़िम्मेदारी नहीं होगी।”
#WATCH: “We are going to the Governor to request him to not come under pressure (and call Assembly session)… varna fir ho sakta hai ki pure pradesh ki janta agar Raj Bhawan ko gherne ke liye aagai, to hamari zimmedari nahi hogi,” says Rajasthan CM Ashok Gehlot https://t.co/2UaH94tTrBpic.twitter.com/ODEq7PZGei
इसके बाद गहलोत ने विधायकों संगे राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात की। वहीं इस मुद्दे पर भाजपा सरकार में केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भी बयान दिया है।उन्होंने कहा यह पूरी तरह राजनीतिक षड्यंत्र है। आने वाले समय में यह स्पष्ट हो जाएगा कि असल में इसके लिए कौन ज़िम्मेदार है।
There is a political conspiracy. It’ll become clear in coming days that how, when & who are behind it: Union Minister Gajendra Singh Shekhawat on Rajasthan Court’s order to investigate against him & his associates in alleged ‘Sanjivini Credit Cooperative Society’ scam. pic.twitter.com/oe5P7e1UEc
वहीं आज ही के दिन सचिन पायलट को भी उच्च न्यायालय से राहत मिली थी। विधानसभा स्पीकर के द्वारा दिए गए नोटिस पर अभी स्टे लगा दिया गया था। हाईकोर्ट की ओर से सचिन पायलट और राजस्थान के अन्य बागी विधायकों के मामले में फिलहाल फैसले को लेकर कोर्ट की ओर से यथास्थिति का आदेश जारी किया गया है। यानी, विधानसभा स्पीकर विधायकों को अयोग्य करार नहीं दे पाएँगे। हालाँकि, अन्य मामलों को लेकर अभी भी हाईकोर्ट में सुनवाई होती रहेगी।
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले का एक वीडियो इंटरनेट पर इस वक्त तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में पुलिस पेंच नदी की तेज लहरों के बीच में फँसी दो लड़कियों को बचाते हुए नजर आ रही है। भयानक रूप से उफनती नदी के बीच में फँसी दो लड़कियाँ सेल्फी लेने के चक्कर में पेंच नदी में मौजूद एक पत्थर पर जाकर बैठ गईं थी। बाद में जान बचाने के लिए घंटो खड़ी रहीं।
मामला परफेक्ट सेल्फी का है। सेल्फी लेने की चक्कर में दोनों लड़कियाँ पेंच नदी के बीच में गई थी। इसी बीच अचानक से नदी का जलस्तर बढ़ गया एवं बहाव तेज हो गया और दोनों नदी में ही फँस गई। लड़कियों को मुश्किल में देख स्थानीय पुलिस को उन्हें रेस्क्यू करने के लिए बुलाया गया। जिसके बाद स्थानीय लोगों और रस्सियों की मदद से लड़कियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
नदी में फँसी लड़कियों को रेस्क्यू करने वाले स्थानीय पुलिस अधिकारी ने मीडिया को बताया, लड़कियों का एक समूह पिकनिक मनाने के लिए पर्वतीय नदी पेंच में आया था। वहीं उनमें से दो लड़कियाँ सेल्फी लेने के लिए नदी के बीच में चली गई थी।
इस दौरान बारिश के कारण नदी का बहाव अचानक बढ़ गया। युवती के साथ मौजूद अन्य सहेलियों ने स्थानीय लोगों को इसकी सूचना दी। जिन्होंने पुलिस को इसके बारे में तुरंत सूचित किया। ऐसे में हिम्मत दिखाते हुए दोनों लड़कियाँ करीब एक घंटे तक वहाँ खड़ी रहीं। जिसके बाद पुलिस और स्थानीय लोगों द्वारा उन्हें बचाया जा सका।
अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन पर रोक लगाने वाली याचिका को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आज (जुलाई 24, 2020) सुनवाई के बाद खारिज कर दिया। यह याचिका दिल्ली के वकील और कॉन्ग्रेस पार्टी समर्थक साकेत गोखले ने डाली थी। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि याचिका केवल आशंकाओं पर आधारित है, इसमें तथ्य नहीं हैं।
न्यायाधीश गोविंद माथुर तथा न्यायमूर्ति एसडी सिंह की पीठ ने साकेत गोखले की याचिका खारिज करते हुए कहा कि याचिका कल्पनाओं पर आधारित है। कोर्ट ने कहा, “हम आयोजकों व राज्य सरकार से अपेक्षा करते हैं कि वे सामाजिक व शारीरिक दूरी बनाए रखने के दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्यक्रम करेंगे।”
“We expect the organizers and the Government of Uttar Pradesh would ensure all the protocol applicable for social and physical distancing”, said the Allahabad HC while dismissing PIL by @SaketGokhale to restrain “Bhoomi Pujan”of Ram Mandir at Ayodhya.https://t.co/9FQoOOrjfX
गौरतलब है कि इससे पहले चीफ जस्टिस ने लेटर पिटीशन को जनहित याचिका के तौर पर स्वीकार करते हुए भूमि पूजन के कार्यक्रम पर रोक लगाने की माँग में दाखिल याचिका की सुनवाई की। दिल्ली के पत्रकार साकेत गोखले की ओर से दाखिल PIL में कहा गया था कि राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन कोरोना के अनलॉक-2 गाइडलाइन का उल्लंघन है।
इसमें कहा गया था कि भूमि पूजन में लोग इकट्ठा होंगे, जो कोरोना के नियमों के विपरीत होगा। ये भी कहा गया था कि भूमि पूजन का कार्यक्रम होने से कोरोना के संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ेगा और उत्तर प्रदेश सरकार केंद्र की गाइडलाइन में छूट नहीं दे सकती। कोरोना संक्रमण के कारण ही बकरीद पर सामूहिक नमाज की इजाजत नहीं दी गई है और सैकड़ों लोगों की उपस्थिति में कार्यक्रम होने जा रहा है।
गौरतलब है कि साकेत गोखले सोशल मीडिया पर मोदी सरकार और इसके कामकाज को लेकर फेक और भ्रामक खबरें फैलाने के लिए जाने जाते हैं।
यहाँ बता दें अयोध्या में राम मंदिर के भूमि पूजन के लिए 5 अगस्त की तारीख तय हुई है। इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री मोदी सुबह 11 बजे अयोध्या पहुँचेंगे। बताया जा रहा है कि पीएम मोदी सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजकर 10 मिनट तक अयोध्या में रहेंगे। 5 अगस्त को भूमि पूजन का कार्यक्रम सुबह 8 बजे शुरू होगा।
राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत के बड़े भाई और उर्वरक घोटाले में आरोपित अग्रसेन गहलोत पर ‘स्मगलिंग सिंडिकेट का भी हिस्सा होने का आरोप लगाया है। डीआरआई और कस्टम अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई एक इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में यह आरोप लगाए गए थे।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, कस्टम ऑथोरिटी द्वारा जुलाई की शुरुआत में अग्रसेन गहलोत से जुड़े मामले की शिकायत दर्ज की गई थी। यह घोटाला 2013 में सामने आया था। ऑथोरिटी ने उल्लेख किया कि अभियुक्त को यह पहले से पता था कि यह एक स्मगलिंग सिंडिकेट था।
रिपोर्ट के अनुसार, गहलोत ने ‘नकद भुगतान ’प्राप्त करने की बात कबूल कर ली थी, जब उनसे सबूतों के साथ पूछताछ की गई थी। बता दें कि अशोक गहलोत के भाई अग्रसेन गहलोत की कंपनी अनुपम कृषि ने इम्पेक्स प्राइवेट लिमिटेड को किसानों के लिए निर्धारित पोटाश को निर्यात करके बदले में मोटी रकम ली थी। किसानों के लिए निर्धारित खाद को उन्होंने बिना सरकार की मंजूरी के फर्जी तरीके से विदेशों में निर्यात कर दिया था। गौरतलब है कि उनकी ‘अनुपम कृषि’ नाम की फर्म है, जिसके माध्यम से वे 1980 से पहले से ही फर्टीलाइजर का व्यापार करते आ रहे हैं।
‘सब्सिडी वाले पोटाश’ का कुल निर्यात लगभग 30,000 टन था और इसकी कीमत 130 करोड़ रुपए थी। रिपोर्ट्स के अनुसार, कस्टम ऑथोरिटी ने 2013 में गहलोत पर 61 करोड़ का जुर्माना भी लगाया था। जाँच से शामिल एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, गहलोत सब्सिडी वाले फ़र्टिलाइज़र के ‘एजेंट, डीलर और कस्टोडियन’ थे। मीडिया द्वारा पूछे जाने पर गहलोत ने जाँच रिपोर्ट में डीआरआई द्वारा लगाए गए आरोपों का जवाब देने से इनकार कर दिया था।
इससे पहले, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उर्वरक घोटाले के सिलसिले में अशोक गहलोत के भाई के ठिकानों पर छापा मारा था। रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान में छह स्थानों पर छापे मारे गए थे। जिनमें जोधपुर भी शामिल था। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में दो स्थान, गुजरात में चार और दिल्ली में एक जगह छापा मारा गया था।
फ़र्टिलाइज़र घोटाला
जब 2007-09 में यूपीए की सरकार थी, तब अग्रसेन गहलोत ने सब्सिडी वाले फर्टीलाइजर का एक्सपोर्ट किया था। पिछले दिनों भी सरकारी एजेंसियों ने कुछ ठिकानों की तलाशी ली थी। जयपुर में अशोक गहलोत के बेटे वैभव से जुड़ी कंपनी के ठिकानों को तलाशा गया था।
ऑपइंडिया ने अपनी एक ख़बर में बताया था कि जहाँ एक तरफ राहुल गाँधी किसानों के हमदर्द बन कर उभरने की कोशिश कर रहे हैं, गुजरात कॉन्ग्रेस के प्रभारी रहे अग्रसेन गहलोत के फर्टीलाइजर स्कैम का सामने आना उनकी योजनाओं पर पानी फेर सकता है। अग्रसेन ने खाद बनाने के लिए आई सामग्रियों का गलत इस्तेमाल किया जबकि ये किसानों के लिए थे। यानी, गरीब किसानों की जगह प्राइवेट कंपनियों को फायदा पहुँचाया गया।
दस्तावेजों के हवाले से हमें बताया था कि जब जयपुर मे अशोक और दिल्ली में मनमोहन राज कर रहे थे, तब बेखौफ अग्रसेन गहलोत ने किसानों के लिए आया कितने ही टन पोटास को एक्सपोर्ट कर दिया और शिपिंग बिल में इसे नमक बताया। साथ ही उसकी वैल्यू भी गलत बताई गई। साथ ही उन्होंने सारे पेमेंट्स कैश में किए, जिससे उसका रिकॉर्ड ठीक से नहीं रखा गया। जबकि अग्रसेन का कहना है कि बिचौलियों ने उनसे किसानों के लिए खाद खरीदा।