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राम मंदिर भूमि पूजन से आहत AAP नेता सैयद अब्बास ने BJP प्रवक्ता नुपूर शर्मा को लाइव डिबेट में दी गाली

अयोध्या में राम मंदिर का भूमिपूजन कई लोगों को नागवार गुजरा है। अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण और इसकी प्रक्रियाओं से कुछ लोग कितने आहत हैं, इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि AAP नेता और टीवी पैनलिस्ट डॉ. सैयद असद अब्बास ने अपना आपा खो दिया और लाइव टीवी पर ही भाजपा की राष्ट्रीय प्रवक्ता नुपूर शर्मा पर सेक्सिस्ट गालियाँ देते हुए उन्हें ‘बालाजी एक्ट्रेस, गुंडा और आंटी’ कहने लगे।

सैयद असद अब्बास ने साल 2018 में AAP के टिकट पर चुनाव लड़ा था। यह घटना 24 जुलाई 2020 को रिपब्लिक टीवी पर एक डिबेट के दौरान हुई। डिबेट कॉन्ग्रेस समर्थक साकेत गोखले की याचिका इलाहाबाद हाई कोर्ट से खारिज किए जाने पर हो रही थी।

साकेत गोखले ने अपनी याचिका में 5 अगस्त को अयोध्या में राम मंदिर के ‘भूमि पूजन’ पर रोक की मॉंग की थी। इसे कोरोना वायरस महामारी के दौरान ‘अनलॉक-2’ दिशा-निर्देशों का उल्लंघन बताया था।

शुक्रवार (जुलाई 24, 2020) को ही इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गोखले की याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि पूरी याचिका कल्पना पर आधारित है।

इस विषय पर बहस करते हुए, डॉ. सैयद असद अब्बास, जो आम आदमी पार्टी के नेता हैं, लेकिन टेलीविजन पर एक ‘राजनीतिक विश्लेषक’ के रूप में जाने जाते हैं, ने अपना धैर्य खो दिया और भाजपा प्रवक्ता नुपूर शर्मा पर उनके महिला होने को लेकर तंज करने लगे।

AAP नेता ने पहले आरोप लगाया कि भाजपा भगवान राम का ‘बहुमत प्राप्त करने’ के लिए उपयोग कर रही है। दिलचस्प बात यह है कि राम मंदिर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बनाया जा रहा है। ऐसे में पैनलिस्ट आश्चर्यचकित थे कि क्या डॉ. अब्बास यह आरोप लगा रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट फैसला सुनाकर हिंदुओं को खुश कर रहा है।

इसके अलावा, जब भाजपा प्रवक्ता नुपूर शर्मा ने AAP पैनलिस्ट सैयद अब्बास द्वारा उन पर की गई टिप्पणी – ‘राम नाम जपना पराया माल अपना’ पर जवाब दिया तो डॉ. अब्बास भड़क गए और नुपूर शर्मा को गालियाँ देने लगे।

उन्होंने कहा कि ‘तुम आरएसएस, तुम गुंडों, तुम उपद्रवियों’ के साथ एक समस्या है। उन्होंने आगे कहा कि नूपुर शर्मा जैसे लोग ‘प्राइम टाइम की राखी सावंत’ के अलावा कुछ नहीं हैं। इतना ही काफी नहीं था, डॉ. अब्बास ने नुपुर शर्मा से कहा, “आंटी जी, जाकर एकता कपूर के धारावाहिक में शामिल हो जाइए’ और फिर उन्हें ‘एकता कपूर वैम्प’ कहने लिए।

बहस में शामिल कई लोगों ने डॉ. सैयद असद अब्बास के इस व्यवहार पर नाराजगी भी व्यक्त की। जहाँ रिपब्लिक न्यूज़ के संस्थापक अर्नब गोस्वामी ने अपशब्दों के इस्तेमाल की निंदा की, वहीं तौसीफ अहमद खान जैसे अन्य पैनलिस्टों ने भी डॉ. अब्बास के आचरण की निंदा की।

भाजपा प्रवक्ता नुपूर शर्मा ने ट्विटर पर कहा कि वह लाइव टीवी पर उनके चरित्र पर सवाल उठाने के लिए डॉ. सैयद असद अब्बास के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर विचार कर रही हैं। उन्होंने लिखा कि आप एक महिला के चरित्र पर सवालिया निशान नहीं लगा सकते और उसे सबक सीखना ही होगा।

एक अन्य ट्वीट में नुपूर शर्मा ने कहा कि सिर्फ इस वजह से कि आप तथ्यों पर बात कर रहे हैं, आपको वैम्प, बालाजी एक्ट्रेस, गुंडा और राऊडी कहा जाता है।

कोरोना काल में भारतीय मसालों की जय-जय, पापड़ पर लिबरल गिरोह का इम्युन सिस्टम बिगड़ा

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शुक्रवार (25 जुलाई, 2020) वायरल हुई एक वीडियो में केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल को एक ‘पापड़’ ब्रांड लॉन्च करते हुए देखा गया। इस वीडियो में उन्होंने उत्पाद को लेकर यह दावा किया कि इसमें ऐसी सामग्री है जो Covid-19 से लड़ने में मददगार होगी और मानव शरीर में एंटीबॉडी विकसित करेगी।

हालाँकि, ऐसा करते हुए केंद्रीय मंत्री को भी थोड़ा बहुत इस बात का पता था कि इस दावे के बाद उन्हें काफी ट्रोल किया जाएगा। कई लोगों ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर उनका जम कर मजाक उड़ाना शुरू किया। वहीं लिबरल गिरोह के लोगों ने भी इस मौके का फायदा उठा लिया।

वामपंथी गिरोह के वरिष्ठ सदस्य प्रशांत भूषण ने इस मामले पर भाजपा पर निशाना साधा। साथ ही बीच में बाबा रामदेव पर भी आयुर्वेदिक दवा कोरोनिल को लेकर तंज कसा।

फिर, वामपंथी वेबसाइट ‘द कारवाँ और ‘मिंट’ से जुड़े साहिल त्रिपाठी ने भी केंद्रीय मंत्री का मजाक बनाने में देरी नहीं लगाई। उन्होंने लिखा, “ऑक्सफोर्ड और एस्ट्रा ज़ेनेका को वैक्सीन के लिए अपने निरर्थक परीक्षणों को छोड़ देना चाहिए। पता नहीं वो काम करें या न करें। भारत ने तो पीएम मोदी की 15 अगस्त की डेडलाइन से पहले ही इसका जवाब ढूँढ लिया है।”

गौरतलब है कि चीन के वुहान से शुरू हुआ कोरोना वायरस आज पूरी दुनिया में तेजी से फैल रहा है। भारत में भी लगातार संक्रमित लोगों की संख्या में भारी वृद्धि देखी गई है। लोग इसके वैक्सीन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं ताकि इस महामारी का सटीक इलाज किया जा सके। लेकिन जब तक इलाज नहीं मिलता तब तक भारत में इससे बचने के लिए इम्युनिटी सिस्टम को मजबूत करने की सलाह दी जा रही है।

मसालों के एक्सपोर्ट में बढ़त

यहाँ स्पष्ट कर दें कि हम किसी भी रूप में केंद्रीय मंत्री द्वारा किए गए दावों को सही नहीं ठहरा रहे, क्योंकि यह सच हो सकता है या नहीं भी हो सकता। लेकिन यह बात हम जरूर निश्चित तौर पर कह सकते हैं कि भारतीय मसालों की माँग न केवल भारत में, बल्कि दुनिया भर में इस बीच बढ़ी है। लोग इन मसालों का उपयोग अपनी इम्युनिटी को मजबूत करने के लिए कर रहे हैं, जो उन्हें संक्रमण से दूर रखने में मदद कर सकते हैं।

खबरों के अनुसार, भारतीय मसालों के एक्सपोर्ट में काली मिर्च, इलायची, अदरक, हल्दी, धनिया, जीरा, अजवाइन, सौंफ, मेथी, जायफल, मसाले के तेल में भारी वृद्धि हुई है। ये विशेष रूप से फायदेमंद साबित हो रहे हैं क्योंकि यह मसाले शरीर में एंटी-ऑक्सीडेंट की कमी को पूरा करते है। रिपोर्ट के अनुसार, जून के महीने में इन मसालों का निर्यात लगभग 34 प्रतिशत बढ़ा है।

पापड़ बनाने में मसालों का प्रयोग

ऑपइंडिया केंद्रीय मंत्री के दावों का समर्थन नहीं कर रहा है। लेकिन बता दें भारत में लोग पापड़ को अक्सर भोजन के साथ खाते हैं। भारतीय मसालों को मिलाकर पापड़ बनाया जाता है, जिनके कई स्वास्थ्य लाभ हैं।

उदाहरण के लिए, काली मिर्च (जिसे मसालों के राजा के रूप में भी जाना जाता है) से कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं। इसका उपयोग पापड़ बनाने के लिए जरूर किया जाता है। इस बहुमुखी मसाले में सबसे ज्यादा एंटीऑक्सिडेंट होता है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं और यह शरीर को डिटॉक्स करने में मदद करता है।

इसी तरह, हल्दी, जो पापड़ बनाने के लिए इस्तेमाल की जाती है। लगभग हर दूसरे भारतीय व्यंजन में इसे सुपरफूड के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। यह कैंसर, डिप्रेशन और कई और खतरनाक बीमारियों से लड़ सकती है। वहीं लाल मिर्च विटामिन सी का एक समृद्ध स्रोत है जो इम्यून सिस्टम को बढ़ाने और पुरानी बीमारियों का मुकाबला करने में मदद करता है। इसमें कई शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट भी होते हैं।

यदि आपके पास स्वस्थ इम्यून सिस्टम है, तो आपका शरीर किसी भी बीमारी, यहाँ तक ​​कि कोरोनावायरस या कोविड ​​-19 से भी आपकी रक्षा कर सकता है। अभी तक कोविड ​​-19 से बचाने के लिए न तो कोई वैक्सीन उपलब्ध है और न ही सिद्ध घरेलू उपाय उपलब्ध है। ऐसे में ये नेचुरल फूड आपके शरीर को जरूरी पोषक तत्व प्रदान करते है। इनसे आपके शरीर का इम्यून सिस्टम बढ़ता है और आप कोरोना जैसी घातक बीमारियों का भी सामना आसानी से कर सकते हैं।

यूपी पुलिस ने मामा को मार गिराया: गोंडा से अगवा 6 साल का बच्चा बरामद, ₹4 करोड़ माँगी थी फिरौती

उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक लाख रुपए के ईनामी बदमाश टिंकू कपाला को मार गिराया है। वहीं, गोंडा से अगवा किए गए 6 साल के बच्चे को सकुशल बरामद भी कर लिया है।

बाराबंकी के पुलिस अधीक्षक अरविंद चतुर्वेदी ने बताया कि शुक्रवार रात एसटीएफ का सामना टिंकू कपाला से हुआ। मुठभेड़ में वह जख्मी हो गया। उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया जहॉं उसकी मौत हो गई।

कपाला के खिलाफ दो दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज थे। काफी समय से पुलिस व एसटीएफ उसकी तलाश कर रही थी। यूपी के अलावा महाराष्ट्र और गुजरात में वारदातों को अंजाम देने वाला कपाला कमल किशोर, हेमंत कुमार, संजय और मामा के नाम से भी जाना जाता था।

उत्तर प्रदेश पुलिस को गोंडा अपहरण मामले में भी बड़ी सफलता हासिल की है। मामले में पुलिस और एसटीएफ ने देर रात एनकाउंटर के बाद 4 अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया है। उनके साथ एक युवती के मौजूद होने की बात भी सामने आ रही है। दो अपराधियों के पैर में गोली भी लगी है।

गौरतलब है कि शुक्रवार को गोंडा जिले में एक बीड़ी व्यवसायी के 6 वर्षीय बेटे का अपहरण कर लिया गया था। अपराधियों ने सैनेटाइज़र देने के बहाने दिन में ही बच्चे का अपहरण किया था। अपराधियों ने बच्चे का अपहरण कर्नलगंज कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गाड़ी बाज़ार में किया था। 

इसके बाद बच्चे के पिता से 4 करोड़ रुपए की फिरौती माँगी थी। शनिवार सुबह मुठभेड़ के बाद बच्चा सकुशल बरामद कर लिया गया।  

उल्लेखनीय है कि इससे पहले कानपुर से लैब असिस्टेंट संजीत यादव का 22 जून को अपहरण कर लिया गया था। फिरौती मिलने से पहले ही उनकी हत्या कर शव नदी में फेंक दिया गया था। संजीत को उसके दोस्त ने ही अपने साथियों के साथ मिलकर अगवा किया था।

इस घटना को लेकर पुलिस पर काफी सवाल उठे थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लेते हुए आईपीएस ऑफिसर अपर्णा गुप्ता, डिप्टी एसपी मनोज गुप्ता समेत चार अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया था। साथ ही फिरौती के पैसे की जाँच का आदेश दिया। इस मामले की जाँच एडीजी बीपी जोगदंड को सौंपी गई है।

रामलला का सोने का गर्भगृह बनवाने को पटना का महावीर मंदिर तैयार, RSS ने भेजी मिट्टी: योगी लेंगे तैयारियों का जायजा

अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए 5 अगस्त को भूमि पूजन होना है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मौके पर मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम को लेकर तैयारियॉं जोरों पर है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज (25 जुलाई 2020) राम मंदिर के भूमि पूजन कार्यक्रम की तैयारियों का जायजा लेने अयोध्‍या जाएँगे। इस बीच पटना के महावीर मंदिर ने रामलला का सोने का गर्भगृह बनवाने की पेशकश की है।

आरएसएस मुख्यालय की ओर से भूमि पूजन के लिए भेजी गई मिट्टी

विश्व हिन्दू परिषद् के एक पदाधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) मुख्यालय की ओर से राम मंदिर के ‘भूमि पूजन’ समारोह के लिए मिट्टी अयोध्या भेजी गई है।

विहिप के प्रमुख प्रणव गोविंद शिंदे ने कहा कि रामटेक के एक मंदिर से मिट्टी और नागपुर शहर स्थित संगम, जिसमें पाँच नदियों का पानी आकर मिलता है, दोनों को आगामी भूमि पूजन कार्यक्रम के लिए भेजा गया है।

उन्होंने कहा कि पहले यह तय किया गया था कि देश के विभिन्न हिस्सों की मिट्टी श्री राम जन्मभूमि भेजी जाएगी, लेकिन कोरोना वायरस महामारी के कारण यह सम्भव नहीं हो पाया।

सदियों से लंबित श्री राम मंदिर निर्माण पर फैसला आने के बाद से ही देश-विदेश के सभी श्रद्धालुओं द्वारा इसमें अपना सहयोग देने के लिए भारी उत्साह देखा जा रहा है। मंदिर निर्माण के लिए अभी नींव के शिलान्यास की घोषणा हुई है लेकिन देश-विदेश के रामभक्तों ने पूरे मंदिर को स्वर्णजड़ित बनाने की पहल शुरू कर दी है। श्रद्धालु राममंदिर की दीवारें और चौखट आदि सब सोने व चाँदी से बनाना चाहते हैं।

यही वजह है कि अभी से बड़ी मात्रा में चांदी और सोना भी दान में आने लगा है। पटना महावीर मंदिर ट्रस्ट के सचिव आचार्य किशोर कुणाल ने कहा है कि अयोध्या में सोना का गर्भगृह बनवाने के लिए मंदिर तैयार है। इसके लिए अनुमति का इंतजार है। उन्होंने बताया कि अनुमति मिली तो माइक्रॉन लेयर तकनीक का इस्तेमाल कर गर्भगृह तैयार किया जाएगा। इससे सोना काला नहीं पड़ता।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद महावीर मंदिर ने अयोध्या में मंदिर निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपए देने की घोषणा की थी। इसमें से 2 करोड़ रुपए की पहली किस्त का चेक भी बुधवार (जुलाई 22, 2020) को भेज दिया गया है। वहीं रामादल ट्रस्ट मंदिर के चौखट को स्वर्ण मंडित कराएगा। साथ ही भूमिपूजन पर रामलला को सोने-चाँदी की बनी पोशाक अर्पित करेगा।

मौत के 16 साल बाद: नरसिम्हा राव के तिरस्कार पर कॉन्ग्रेस को पछतावा या मौकापरस्ती?

उन्होंने बेहद मुश्किल वक्त में देश और कॉन्ग्रेस का नेतृत्व सॅंभाला था। वे नेहरू-गॉंधी परिवार के बाहर के पहले शख्स थे, जिसने बतौर प्रधानमंत्री पॉंच साल का कार्यकाल पूरा किया। उस शख्सियत का नाम था पीवी नरसिम्हा राव।

राव को जीते जी सोनिया गॉंधी के इशारे पर पहले कॉन्ग्रेस में अपमानित कर किनारे लगाया गया। मृत्यु हुई तो दिल्ली में उनका अंतिम संस्कार होने नहीं दिया गया। उनके शव को कॉन्ग्रेस कार्यालय में लाने तक की अनुमति नहीं दी गई। दिल्ली में उनका मेमोरियल 2015 में तब बन पाया, जब केंद्र में मोदी के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार चल रही थी।

दिसंबर 2004 में मौत के बाद राव का जब तिरस्कार हुआ तो मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री हुआ करते थे। वित्त मंत्री बनाकर राजनीति में मनमोहन को लाने वाले भी राव थे। लेकिन मनमोहन सिंह ने उनकी अंतिम यात्रा में शामिल होना भी उचित नहीं समझा।

इस घटना के 16 साल बाद जब कॉन्ग्रेस का सूर्य ढलता दिख रहा उसने राव को लेकर यू टर्न मारा है। सोनिया गॉंधी ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर उनकी प्रशंसा की है। हैदराबाद में शुक्रवार को कॉन्ग्रेस की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में सोनिया गॉंधी का पत्र पढ़ा गया। इसमें उन्होंने राव को प्रधानमंत्री के रूप में साहसिक फैसलों से देश को नई दिशा देने का श्रेय दिया गया।

सोनिया ने पत्र में लिखा, “राज्य और राष्ट्रीय राजनीति में एक लंबे कैरियर के बाद वह गंभीर आर्थिक संकट के समय भारत के प्रधानमंत्री बने। उनके साहसिक नेतृत्व के माध्यम से हमारा देश कई चुनौतियों को सफलतापूर्वक पार करने में सक्षम हुआ। 24 जुलाई 1991 का केंद्रीय बजट और हमारे देश के आर्थिक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त किया।”

वहीं पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राव को देश का ‘महान सपूत’ और भारत में आर्थिक सुधारों का जनक बताया है। उन्होंने कहा, “आर्थिक सुधार और उदारीकरण में वाकई उनके सबसे बड़े योगदान हैं। विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदानों को कम करके आँका नहीं जा सकता है।”

भारत में खुली अर्थव्यवस्था का श्रेय राव को देते हुए मनमोहन ने कहा, “यह एक कठिन विकल्प और साहसी फैसला था और यह संभव इसलिए हो सका क्योंकि प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने मुझे चीजों को शुरू करने की आजादी दी, क्योंकि वह उस समय भारत की अर्थव्यवस्था की समस्या को पूरी तरह से समझ रहे थे।”

यहाँ बता दें कि राजीव गॉंधी की हत्या के बाद अचानक राव को जिम्मेदारी सॅंभालनी पड़ी थी। लेकिन कॉन्ग्रेस में सोनिया गाँधी के उदय के साथ ही उनका तिरस्कार शुरू हो गया था, जो उनकी मृत्यु के बाद तक चलता रहा।

23 दिसंबर 2004 को राव की मृत्यु हुई थी और 27 दिसंबर को स्तंभकार एमडी नलपत ने लिखा,”वास्तव में, 1998 में कॉन्ग्रेस की कमान नेहरू वंश के हाथों में दोबारा आने से बाद, AICC के पूर्व अध्यक्ष और प्रधानमंत्री होने के बावजूद, नरसिम्हा राव को कॉन्ग्रेस कार्यसमिति से न केवल बाहर किया गया था, बल्कि उन्हें विशेष आमंत्रित सदस्य की सूची से भी निकाल दिया गया था। उस सूची में केवल वे थे जो आलाकमान की जय-जयकार करते थे।”

नलपत ने दावा किया था कि राव के अंतिम संस्कार के विषय पर चर्चा के लिए दोपहर 3 बजे एक विशेष केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक बुलाने के बावजूद, 9 मोतीलाल नेहरू मार्ग पर उनके शव को लाकर एक मंच पर रखने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। वहाँ न फूल थे और न शोक सभा में आए लोगों के बैठने के लिए कारपेट। यहाँ तक लॉन के शामियाने में कोई इंतजाम नहीं था।

यह सिलसिला राव के देहांत पर भी खत्म नहीं हुआ था। उनके निधन के बाद भी कॉन्ग्रेस पार्टी ने उनका तिरस्कार करना नहीं बंद किया। वे हमेशा पार्टी के निशाने पर हमेशा रहे। पिछले वर्ष राव के पोते एनवी सुभाष ने इसके लिए पार्टी को आड़े हाथों भी लिया था। लगातार राव पर लगते आरोपों को देखते हुए उन्होंने गाँधी परिवार से उस अन्याय के लिए माफी माँगने को कहा था, जो उन्होंने नरसिम्हा राव के साथ किया।

एन वी सुभाष ने AICC सचिव जी चिन्ना रेड्डी के एक बयान पर कहा था कि राव ने अपने कार्यकाल के दौरान नेहरू-गाँधी परिवार को ‘दरकिनार’ करने की कोशिश की थी, ‘यह सच नहीं है और निंदनीय’ है। उन्होंने दावा किया कि राव, गाँधी परिवार के सबसे भरोसेमंद और वफादार नेता थे और हमेशा कई मुद्दों पर गाँधी परिवार का मार्गदर्शन करते थे।

ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि मौत के 16 साल बाद राव को लेकर कॉन्ग्रेस के स्टैंड में यह​ बदलाव पाश्चाताप है या फिर मौकापरस्ती?

असल में यह राव का जन्म शताब्दी वर्ष है। उनकी जयंती पर पिछले महीने कई अखबारों में पूरे पन्ने का विज्ञापन छपा था। इसमें उन्हें ‘तेलंगाना का बेटा… भारत का गर्व’ बताया गया था। यह विज्ञापन तेलंगाना की सत्ताधारी पार्टी टीआरएस की तरफ से प्रकाशित किए गए थे। इसी विज्ञापन ने अचानक से राव को राजनीति में फिर से प्रासंगिक बनाते हुए कॉन्ग्रेस को अपने स्टैंड में बदलाव के लिए मजबूर किया।

इस विज्ञापन के बाद कॉन्ग्रेस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से पोस्ट कर उन्हें दूरदर्शी नेता बताया गया था। राहुल गॉंधी से लेकर मनमोहन सिंह तक सबने उन्हें याद किया। लेकिन सोनिया उस वक्त भी चुप रहीं। अचानक से राव को लेकर सोनिया का मुखर होना कभी मजबूत गढ़ रहे दक्षिण भारत में जमीन तलाशने की कॉन्ग्रेसी रणनीति का हिस्सा है।

कॉन्ग्रेस कर्नाटक की सत्ता बीजेपी के हाथों गॅंवा चुकी है। तेलंगाना में टीआरएस ने उसकी जगह ले ली है। आंध्र प्रदेश से उसे उस जगन मोहन रेड्डी ने उखाड़ फेंका है, जिसे कभी उसने पार्टी से बाहर कर दिया था। तमिलनाडु में उसकी उम्मीदें डीएमके पर टिकी है। बीते साल आम चुनावों में भी इन राज्यों में उसका प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा था। ऐसे में यह करनी पर पछतावे से ज्यादा राव की विरासत पर दावा कर कम से कम तेलंगाना में पैठ बनाने की कवायद दिखती है।

शायद कॉन्ग्रेस के लिए अब इस मोर्चे पर देर हो चुकी है। राव के लिए भारत रत्नी की मॉंग और जन्म शताब्दी के मौके पर साल भर के कार्यक्रम का ऐलान कर इस विरासत पर टीआरएस पहले ही दावा ठोक चुकी है।

अपने ही दाँव में उलझे गहलोत: गवर्नर ने कानून-व्यवस्था पर पूछे सवाल, कहा- सभी विधायकों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करें

राजस्थान में तेजी से बदलते राजनीतिक घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार (24 मई 2020) को गवर्नर कलराज मिश्र पर दबाव बनाने की कोशिश की। लेकिन रात होते-होते यह दॉंव उन्हें भारी पड़ता नजर आया।

पहले तो कॉन्ग्रेसी विधायकों को राजभवन से होटल लौटना पड़ा। उसके बाद राज्यपाल ने गहलोत को पत्र लिखकर राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल पूछा है। यह पत्र गहलोत की उस धमकी के आलोक में लिखा गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि जनता राजभवन का घेराव कर लेती है तो हमारी जिम्मेदारी नहीं होगी।

गवर्नर ने अपने पत्र में अशोक गहलोत से कहा है, “इससे पहले कि मैं विधानसभा सत्र के संबंध में विशेषज्ञों से चर्चा करता, आपने सार्वजनिक रूप से कहा कि यदि राजभवन घेराव होता है तो यह आपकी जिम्मेदारी नहीं है।”

उन्होंने लिखा है, “अगर आप और आपका गृह मंत्रालय राज्यपाल की रक्षा नहीं कर सकता तो राज्य में कानून-व्यवस्था का क्या होगा? राज्यपाल की सुरक्षा के लिए किस एजेंसी से संपर्क किया जाना चाहिए? मैंने कभी किसी सीएम का ऐसा बयान नहीं सुना। क्या यह एक गलत प्रवृत्ति की शुरुआत नहीं है, जहाँ विधायक राजभवन में विरोध-प्रदर्शन करते हैं?”

यह पत्र राज्य कैबिनेट की बैठक से ठीक पहले सामने आया है। राज्यपाल सचिवालय ने बताया है कि राज्य सरकार के जरिए 23 जुलाई की रात को विधानसभा के सत्र को काफी कम नोटिस के साथ बुलाए जाने की पत्रावली पेश की गई। पत्रावली का एनालिसिस किया गया और कानून विशेषज्ञों से परामर्श लिया गया। इस संबंध में जो दस्तावेज दिए गए हैं उसमें न तो सत्र बुलाने की तारीख का उल्लेख है और न इस संबंध में कैबिनेट की मॅंजूरी मिलने का जिक्र।

सचिवालय ने बताया है कि शॉर्ट नोटिस पर सत्र बुलाए जाने के लिए न तो कोई जस्टिफिकेशन दिया गया है और न ही कोई एजेंडा प्रस्तावित किया गया है। सामान्य प्रक्रिया में सत्र बुलाए जाने के लिए 21 दिन का नोटिस दिया जाना जरूरी होता है। साथ ही राज्य सरकार से राज्य सरकार को सभी विधायकों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने को कहा गया है।

अशोक गहलोत ने सरकार बचाने की कोशिशों के तहत। राज्यपाल पर दबाव बनाने की कोशिश की थी। यह कवायद सचिन पायलट और उनके समर्थकों को हाई कोर्ट से मिली राहत के बाद की गई।

गहलोत ने राजभवन घेरकर अनिश्चितकाल तक धरना देने का आह्मवन भी किया। इसके बाद उन्होंने अपने समर्थकों के साथ राजभवन पर धरना दिया, लेकिन शाम तक सब बैठक के लिए होटल रवाना हो गए।

इससे पहले गहलोत ने धमकियाने अंदाज में राजभवन को घेरने की धमकी दी थी। उन्होंने कहा था, “राज्यपाल बिन दबाव में आए सत्र को बुलाएँ। वरना पूरे राज्य की जनता अगर राजभवन को घेरने के लिए आ गई तो हमारी जिम्मेदारी नहीं होगी।”

इस बीच उन कॉन्ग्रेस विधायकों का एक वीडियो सामने आया है जिन्हें कैद करने का आरोप पार्टी लगा रही थी। इस वीडियो में हम देख सकते हैं कि विधायक कहते हैं कि सीएम गहलोत पुराने नेता होने के बावजूद उन्होंने जिस प्रकार के इल्जाम उन लोगों पर लगाएँ, उससे वह लोग बहुत आहत हैं। उन लोगों ने कभी कॉन्ग्रेस नहीं छोड़ी थी और न ही कभी भाजपा के संपर्क में आए थे। वे तो बस गहलोत की कार्यप्रणाली से व्यथित होकर कॉन्ग्रेस हाईकमान से मिल कर अपनी बात रखने दिल्ली आए थे।

विधायकों ने बताया कि वह दिल्ली में काफी समय से हैं। लेकिन आज भी सीएम गहलोत ने यह आरोप लगाया कि भाजपा ने उन्हें कैद किया हुआ है। जबकि वे तो उनके संपर्क में ही नहीं है। इसके विपरीत, वे गहलोत सरकार के रवैये से परेशान हैं। वे कहते हैं कि हमारे परिवार के लोग डरे हैं क्योंकि मुख्यमंत्री द्वारा एसओजी का उपयोग जो किया जा रहा है।

दूसरी ओर भाजपा भी कॉन्ग्रेस पर हमलावर हो गई है। भाजपा नेता व राजस्थान विधानसभा नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया ने राजभवन में गहलोत खेमे द्वारा नारेबाजी को देखकर कहा, “मुझे लगता है कि मुख्यमंत्री स्वयं अपने जाल में फँस गए। प्रारंभ से अब तक इनको निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला और आज जो रास्ता ढूंढा है वो इस गरिमामय पद को गिराने वाला ही साबित होगा।”

उन्होंने आगे ये भी कहा, “मैं केंद्र सरकार से आग्रह करता हूँ कि समय की स्थिति को देखते हुए राजस्थान की पुलिस के भरोसे कानून-व्यवस्था को न छोड़कर CRPF को निश्चित तौर पर यहाँ तैनात करना चाहिए।”

यहाँ बता दें कि ये हलचल शुरू होने से पहले आज सुबह राजस्थान हाईकोर्ट से पायलट समर्थक नेताओं को स्पीकर की कार्रवाई से राहत मिली थी। हाईकोर्ट ने सचिन पायलट गुट को राहत देते हुए विधानसभा स्पीकर के आयोग्यता नोटिस पर यथास्थिति रखने का आदेश दिया था।

उल्लेखनीय है कि एक ओर जहाँ पायलट खेमे को कुछ अतिरिक्त समय के लिए राहत मिली है और गहलोत सरकार में हलचल शुरू हो गई है। वहीं इसी बीच पूरे मामले में भाजपा की एंट्री हुई है।

दरअसल, आज भाजपा नेता मदन दिलावर ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इस याचिका में उन्होंने बसपा BSP के 6 विधायकों के कॉन्ग्रेस के साथ हुए विलय को रद्द करने का अनुरोध किया है। इस याचिका में उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष की ‘निष्क्रियता’ को भी चुनौती दी गई है, जिन्होंने बहुजन समाज पार्टी के विधायकों को विधानसभा से अयोग्य ठहराने के उनके अनुरोध पर कोई निर्णय नहीं लिया है। राजस्थान हाईकोर्ट सोमवार को इस याचिका पर सुनवाई करेगा

अशुभ घड़ी: स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को संतों ने दी शास्त्रार्थ की चुनौती, दावा- जीसस के नाम पर लेते हैं आशीर्वाद

अयोध्या में 5 अगस्त को श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन होना है। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शिरकत करेंगे। लेकिन, भूमि पूजन के मुहूर्त पर सवाल उठा कर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने नए विवाद को जन्म दे दिया। उनका दावा है कि 5 अगस्त को भूमि पूजन करने का कोई शुभ मुहूर्त नहीं है।

शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने मुहूर्त पर सवाल उठाते हुए कहा कि 5 अगस्त को दक्षिणायन भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि है। हमारे शास्त्रों में भाद्रपद मास में गृह-मंदिरारंभ निषिद्ध है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा, “हम तो राम भक्त हैं, राम मंदिर कोई भी बनाए हमें प्रसन्नता होगी। लेकिन उसके लिए उचित तिथि और शुभ मुहूर्त होना चाहिए।”

संतों ने इस बयान पर शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती को शास्त्रार्थ की चुनौती दी है। उनका कहना है, “अगर स्वरूपानंद सरस्वती को हनुमान चालीसा से लेकर ऋग्वेद तक सबका ज्ञान है तो यहाँ आकर सिद्ध करें कि 5 अगस्त को भूमि पूजन करना गलत है। यह सिद्ध करें कि भाद्र पक्ष की भादों अशुभ होती है।”

राम जन्मभूमि के प्रधान पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि भादो में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था और यह संपूर्ण मास शुभ होता है। जिस माह में देवता अवतार लेते हैं, उस माह को शुभ माना जाता है। संतों ने कहा कि प्रमुख रूप से दो अवतार हैं एक राम अवतार, दूसरा कृष्ण अवतार। राम अवतार चैत्र में हुआ था। चैत्र का संपूर्ण मास शुभ होता है। भादो में भगवान कृष्ण ने जन्म लिया था, इसलिए भादो का भी संपूर्ण माह शुभ है। किसी भी तरीके के मंदिरों की भूमि पूजन होने के बाद सभी ग्रह-नक्षत्र अनुकूल हो जाते हैं।

शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती की मंशा पर सवाल उठाने की एक वजह उनका मोदी विरोध भी है। गौरतलब है कि संयम और नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले द्वारिकापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद ने एक बार अपना आपा तब खो दिया जब एक पत्रकार ने उनसे सिर्फ इतना ही पूछा था कि स्वामी जी, अगर नरेंद्र मोदी देश के पीएम बनते हैं तो… ।” पत्रकार ने अपना सवाल भी पूरा नहीं किया था कि शंकराचार्य भड़क गए और उन्होंने पत्रकार को यह कहते हुए थप्पड़ जड़ दिया था, ‘हट… फालतू बात करते हो.. मुझे राजनीति पर बात नहीं करनी है।”

इसके अलावा भी वो कई बार खुले तौर पर कॉन्ग्रेस का समर्थन और मोदी विरोध कर चुके हैं। उनके बारे में एक यह भी तथ्य है कि कॉन्ग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह उनके शिष्य हैं। शंकराचार्य को कॉन्ग्रेस का खुले तौर पर पक्ष लेने के कारण उन्हें कॉन्ग्रेस का करीबी भी माना जाता है।

इसके साथ ही जब से द्वारिकापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने खुद को ‘रामभक्त’ कहा है तब से ही सोशल मीडिया पर उनकी एक तस्वीर भी वायरल हो रही है। इसमें सनातन धर्म का प्रतिनिधत्व करने वाले एक पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ईसाई मशीनरियों के चंगुल में फँसे हुए नजर आ रहे हैं। इस तस्वीर में वह एक पादरी से आशीर्वाद लेते दिख रहे हैं।

जिस कॉन्ग्रेस ने कभी राम के अस्तित्व को ही नकार दिया था, उसी की भाषा बोलने के कारण और स्वामी स्वरूपानंद को सोशल मीडिया में ‘कॉन्ग्रेस स्वामी’ भी कहा जा रहा है।

एक तरफ जहाँ अयोध्या के संत स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से नाराज हैं और उन्हें शास्त्रार्थ की चुनौती दे रहे हैं वही सोशल मीडिया पर भी ईसाई पादरी से आशीर्वाद लेते उनके तस्वीर के कारण लोगों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया।

फैक्टचेक: स्वघोषित पत्रकार साकेत गोखले के घर को RSS कार्यकर्ताओं ने घेरा या फिर सस्ती लोकप्रियता के लिए रचा स्वांग?

इलाहाबाद हाई कोर्ट में राम मंदिर के भूमि पूजन पर रोक लगाने वाली याचिका खारिज होने के बाद राहुल गाँधी के करीबी व पत्रकार साकेत गोखले ने एक नया कारनामा किया। साकेत ने उच्च न्यायालय का फैसला आने के बाद शुक्रवार (24 जुलाई 2020) को अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर आरएसएस पर निशाना साधा। हालाँकि सच्चाई सामने आने पर गोखले की पोल खुल गई।

साकेत गोखले ने अपने ट्वीट में एक वीडियो साझा करते हुए लिखा कि कुछ लोग जय श्री राम चिल्लाते हुए उनके घर के बाहर आ गए हैं और उनकी माँ को धमकी दे रहे हैं। इस ट्वीट में उन्होंने ठाणे पुलिस और महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख से फौरन मदद की गुहार लगाई।

हालाँकि साकेत का ट्वीट दिखते ही सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने सवाल उठाना शुरू कर दिया। कुछ ने कहा कि उन्हें कैसे पता चला कि ये लोग आरएएस के हैं। कुछ ने कहा कि ये उनकी कॉलोनी के ही लोग हैं। हमने इस संबंध में सच्चाई पता लगाने की खातिर आरएसएस के स्थानीय दफ्तर से संपर्क किया।

हमारी बात ठाणे के जिला कार्यवाह जीतेंद्र जोरे से हुई। जीतेंद्र ने आरोपों का खंडन करते हुए हमें बताया कि ऐसी कोई बात नहीं है। हमारे कार्यकर्ता फिलहाल कोविड सेवा में लगे हुए हैं। उनके पास ऐसे लोगों से उलझने का समय नहीं है जो ट्विटर पर खुद ही ललकारते हैं और खुद ही घबराते हैं।

उन्होंने कहा, “वस्तुतः हमारे पास इतना भी समय नहीं कि हम इन बातों पर ध्यान देते रहें। साकेत गोखले कौन हैं, नहीं हैं, हमें नहीं पता। वो शायद संघ का नाम ले कर कुछ सस्ती लोकप्रियता पाना चाहते हों, तो ईश्वर उन्हें अच्छे कार्य करने की सद्बुद्धि दे।”

गौरतलब है कि एक ओर तो साकेत गोखले ट्विटर पर भाजपा और आरएसएस के लोगों को आतंकी बता रहे हैं। उनसे आखिरी साँस तक लड़ने की बातें कर रहे हैं। साथ ही ऐलान कर रहे हैं कि इनमें से किसी ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो वो उस चुनौती को स्वीकारेंगे। दूसरी ओर इलाके में कुछ लोगों के मुँह से जय श्री राम सुनकर उन्हें आरएसएस करार दे रहे हैं और ठाणे पुलिस से मदद माँग रहे हैं।

इन सबसे ये साफ पता चलता है कि भाजपा/RSS के प्रति अपार घृणा करने वाला यह व्यक्ति पहले खुद ही बहादुरी की छाती पीटकर पूरे एजेंडे के लिए माहौल बनाता है, फिर खुद ही डरता है, और बाद में खुद ही जीत भी हासिल कर लेगा और ट्वीट करेगा कि संघियों को सबक सिखा दिया मैंने। वास्तविकता ये है कि संघ वालों को इनके अस्तित्व की हवा भी नहीं, क्योंकि वे पूर्ण मनोयोग से राष्ट्रसेवा में लगे हुए।

जानकारी के लिए मालूम हो कि कोरोना महामारी से जंग के बीच 479949 स्वयंसेवक, 85701 स्थानों पर अपनी सेवा प्रदान कर रहे हैं। 20 मई तक के आँकड़े के अनुसार, आरएसएस ने पूरे देश में राहत कार्यों हेतु 4,79,949 समर्पित स्वयंसेवकों को तैनात किया।

इन समर्पित स्वयंसेवकों ने 85,701 स्थानों पर सेवाएँ दी। 1,10,55,450 लोगों को राशन किट तथा 7,11,46,500 लोगों को खाने के पैकेट वितरित किए गए। साथ ही साथ 62,81,117 मास्क बाँटे गए और 27,98,091 माइग्रेंट वर्कर्स की सहायता की गई। बात इतने पर ही नहीं रुकती, संघ के इन समर्पित स्वयंसेवकों द्वारा 39,851 लोगों को ब्लड भी डोनेट किया गया।

इस संकट के दौरान उनके द्वारा किए जा रहे सहायता कार्यों की सूची इतनी लंबी है कि क्या बताया जाए और क्या छोड़ा जाए। सेवा कार्यों के दौरान संघ के स्वयंसेवकों की तबीयत भी खराब हुई परंतु वे भयभीत नहीं हुए। और अब साकेत गोखले जैसे स्वघोषित पत्रकार सस्ती लोकप्रियता के नाम पर उन्हें घेर कर अपना एजेंडे पूरा करने चले हैं जिन्हें मालूम भी नहीं साकेत गोखले कौन हैं।

सुशांत को धोनी की सफलता का घमंड हो गया था: अनुराग कश्यप ने दिवंगत अभिनेता को बताया गैर पेशेवर

बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की दुखद मौत के बाद उनकी आखिरी फ़िल्म ‘दिल बेचारा’ पॉपुलर ओवर द टॉप (OTT) मीडिया प्लेटफार्म पर रिलीज होने वाली है। इस फ़िल्म के रिलीज से पहले फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप ने सुशांत सिंह पर निशाना साधते हुए उनके खिलाफ गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्हें गैर पेशेवर बताया है।

कश्यप ने बॉलीवुड के टैबलॉयड फिल्मफेयर को दिए इंटरव्यू में आरोप लगाया कि सुशांत सिंह राजपूत को फिल्म “एमएस धोनी- द अनटोल्ड स्टोरी” की शानदार सफलता का घमंड हो गया था। कश्यप ने दावा किया कि उन्होंने एमएस धोनी की रिलीज़ से पहले सुशांत को “मुक्काबाज़” की कहानी सुनाई थी, लेकिन धोनी के सुपरहिट होने के बाद, सुशांत ने कभी फोन नहीं किया। इसके बाद उन्हें उनके बिना “मुक्काबाज़” करना पड़ा।

फिल्मफेयर ने अनुराग के हवाले से कहा, “कुछ साल बाद 2016 में MS Dhoni: The Untold Story की रिलीज़ से पहले मैंने एक स्क्रिप्ट लिखी थी। उसे लेकर मुकेश ने सुशांत से जाकर कहा कि अनुराग ने एक स्क्रिप्ट लिखी है और वह एक ऐसे ऐक्टर की तलाश कर रहे हैं जो यूपी बेस्ड किरदार को निभा सके। सुशांत ने स्क्रिप्ट सुनी। फिर धोनी रिलीज़ हुई और सफल भी रही, लेकिन उन्होंने कभी फोन नहीं किया। मैं अपसेट नहीं था, आगे बढ़ा और फिर मैंने मुक्काबाज की। यह किसी को परेशान करने जैसा नहीं है। मुझे इसकी आदत है।”

अनुराग ने आगे कहा कि आउटसाइडर हमेशा बड़े बैनर की फिल्मों की तरफ आकर्षित रहते हैं और सुशांत भी ऐसे ही थे। उन्होंने दावा किया कि राजपूत ने उनकी फिल्म ‘हंसी तो फंसी’ को छोड़कर YRF की फिल्म ‘शुद्ध देसी रोमांस’ के लिए हाँ कर दिया था।

कश्यप ने कहा, “मुकेश छाबड़ा उस वक्त मेरे ऑफिस से काम करते थे। हम ‘हंसी तो फंसी’ को लेकर चर्चा कर रहे थे। हमने सुशांत सिंह राजपूत के साथ शुरुआत की और फिर परिणीति चोपड़ा से संपर्क किया। लेकिन सुशांत ने हमारी फिल्म छोड़ YRF की शुद्ध देसी रोमांस के साथ काम करने की डील पक्की कर ली। हंसी तो फंसी एक आउटसाइडर की फिल्म थी और सुशांत को YRF की फिल्म चाहिए थी।”

कश्यप ने आगे कहा, “सुशांत को बड़े बैनर के नीचे अपनी पहचान बनानी थी। मैं जो फिल्म कर रहा था उसे छोड़कर ड्राइव फिल्म करने की वजह यही थी कि उन्हें धर्मा के साथ काम करना ज्यादा पसंद था। अब लोग उसकी मौत का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि हर किसी को नीचा दिखा सके।”

गौरतलब है कि सुशांत की आत्महत्या ने बॉलीवुड के पर्दे के पीछे की सच्चाई को सामने ला दिया हैं। कई बड़े एक्टर, फेमस सेलेब्रिटीज़ से जुड़ी कई बातें सामने आ रही हैं। आए दिन लोग नेपोटिज्म को लेकर भी खुलकर बात कर रहे हैं। उनकी अचानक मौत से उनके प्रशंसकों और कंगना रनौत जैसी अन्य हस्तियों में नाराजगी फैल गई, जिन्होंने आरोप लगाया कि बॉलीवुड के दिग्गजों की इंडस्ट्री में भाई-भतीजावाद को बढ़ावा देने के कारण सुशांत सिंह राजपूत ने अपना जीवन समाप्त करने का इतना कठोर निर्णय लिया।

उल्लेखनीय है कि बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने रविवार (जून 14, 2020) को मुंबई के अपने घर में आत्महत्या कर ली थी। उनकी मौत उनके साथियों व प्रशंसकों के लिए किसी सदमे से कम नहीं है। आज भी सुशांत की आत्महत्या से हर कोई हैरान, स्तब्ध है।

इस्लामी मुल्क में मंदिर बनाना हराम, इन्हें तोड़ने का अधिकार: जाकिर नाइक ने इस्लामाबाद में मंदिर निर्माण पर उगला जहर

भगोड़े इस्लामी प्रचारक जाकिर नाइक ने एक बार फिर विवादित बयान दिया है। इस्लामी कट्टरपंथी नाइक ने कहा है किपाकिस्तान अपनी राजधानी में श्रीकृष्ण मंदिर बनवाने के लिए पैसे देकर पाप कर रहा है। अपने कार्यक्रम के दौरान के एक सवाल का जवाब देते हुए उसने यह बात कही। 

जाकिर से पूछा गया था, “क्या इस्लाम को मानने वाले मुल्क में मुस्लिम करदाताओं के रुपयों से मंदिर बनाया जा सकता है?” जवाब में उसने कहा एक मुस्लिम व्यक्ति किसी गैर मुस्लिम पूजा स्थल के निर्माण में दान नहीं कर सकता है। इसके अलावा जाकिर ने कहा वह ऐसे किसी निर्माण का समर्थन भी नहीं कर सकता।

बीते दिनों पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने श्रीकृष्ण मंदिर निर्माण के लिए 10 करोड़ पाकिस्तानी रुपए (4.47 करोड़ भारतीय रुपए) देने का ऐलान किया, इस मंदिर का निर्माण पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद क्षेत्र में रहने वाले 3 हज़ार हिंदुओं के लिए होना है। 

मंदिर निर्माण की स्वीकृति साल 2017 के दौरान नवाज़ शरीफ़ की सरकार में दी गई थी। यह पाकिस्तान का पहला ऐसा मंदिर है जिसे निर्माण की इजाज़त मिली है। हालांकि इस मंदिर के निर्माण में पहले ही तमाम दिक्कतें पैदा हो रही हैं। जिसमें एक बड़ी दिक्कत प्रशासनिक की तरफ से की जाने वाली देरी भी है। 

इतना ही नहीं मंदिर निर्माण में दिक्कतें पैदा करने वालों में बड़ा नाम मौलवियों, उलेमाओं और फ़तवों का है। हाल ही में एक पाकिस्तानी युवक ने उस मंदिर की दीवार तोड़ दी थी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हुआ था। इसके अलावा एक और बच्चे का वीडियो खूब वायरल हुआ था जिसकी उम्र 5 साल से भी कम बताई जा रही थी। 

वीडियो में बच्चा पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान को धमकी दे रहा था “अगर यह मंदिर बनाने की इजाज़त दी गई तो वह हर हिन्दू को जान से मार देगा।” मंदिर बनाने का आदेश देने के बाद पाकिस्तान के सोशल मीडिया पर इमरान खान की जम कर आलोचना हुई। 

जाकिर नाइक ने अपने साप्ताहिक कार्यक्रम में बात करते हुए कहा कि लगभग सभी इमाम और उलेमाओं की इस मुद्दे पर राय एक जैसी है। इस्लाम को मानने वाला कोई भी व्यक्ति किसी गैर मुस्लिम धार्मिक स्थल के निर्माण के लिए दान नहीं कर सकता है। इस बारे में तमाम फ़तवे भी मौजूद हैं। एक मुस्लिम व्यक्ति दूसरे मज़हब के धार्मिक स्थलों के निर्माण का न तो साथ दे सकता है और न ही दान कर सकता है। 

जाकिर ने इस बात के समर्थन में शरिया का हवाला भी दिया। उसने कहा अगर कोई इस्लामी देश मंदिर या चर्च बनाने के लिए रुपए देता है वह हराम माना जाएगा। अगर कोई गैर मुस्लिम व्यक्ति इस काम के लिए अपनी वसीयत भी दान करना चाहे तब इस कार्य को स्वीकृति नहीं मिलनी चाहिए। उस सूरत में भी इसे हराम ही माना जाएगा।

इसके बाद जाकिर ने कहा अब तो फुक्का (इस्लाम के जानकार) भी इस बात से सहमत होते हैं। इस्लामी देशों में गैर मुस्लिम व्यक्ति के दान से मंदिर या चर्च नहीं बनाई जा सकती है। तब इसके लिए (मंदिर निर्माण) मुस्लिम कर दाताओं के रुपयों का सवाल ही कहाँ से उठा? 

इसके अलावा उसने यह भी कहा गैर मुस्लिम, इस्लामी मुल्क में रहने के दौरान ‘धिम्मी’ नाम का समझौता करते हैं, जिसके तहत उन्हें सुरक्षा प्रदान की जाती है। अगर किसी नए मंदिर या चर्च का निर्माण किया जाता है तो मुल्क के पास उसे तोड़ने का पूरा अधिकार है। पुराने वालों की सुरक्षा करना ज़रूरी की जाती है लेकिन इस्लाम के मुताबिक़ नए नहीं बनाए जा सकते हैं।    

अंत में जाकिर ने कहा आखिर पाकिस्तान की सरकार मंदिर बनाने के लिए करोड़ों रुपए कैसे खर्च कर सकती है? अगर पाकिस्तान के उलेमा इसका विरोध कर रहे हैं तो मैं उनसे पूरी तरह सहमत हूँ। हम ज़्यादा से ज़्यादा पुराने मंदिर बचा सकते हैं, नए नहीं बना सकते हैं।