अपडेट:वाराणसी में जिस व्यक्ति का जबरन सिर मूँड़ कर उस पर ‘जय श्री राम’ लिख दिया गया था, वो भारतीय निकला है। इससे पहले ख़बर आई थी कि वो व्यक्ति नेपाली था, जिसका सिर मूँड़ कर उससे नेपाल के प्रधानमंत्री ओली के खिलाफ नारे लगवाए गए और उसे गंजे सिर पर ‘जय श्री राम’ लिख दिया गया। वाराणसी पुलिस ने खुद इस बात की सूचना दी है कि उक्त व्यक्ति 1000 रुपए लेकर भाड़े का नेपाली बना था।
(नोट: यहाँ से नीचे यह रिपोर्ट पूर्व सूचनाओं पर ही आधारित है। ताजा जानकारी के आधार पर एक नई रिपोर्ट आज (18 जुलाई 2020) को 7.25 PM पर पब्लिश की गई है जिसे आप इस लिंक पर पढ़ सकते हैं।)
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली ने पिछले दिनों भगवान राम और अयोध्या को लेकर टिप्पणी की थी। कई लोगों ने उनकी टिप्पणी को हास्यास्पद बताकर उसका मजाक उड़ाया था तो कुछ ने इस पर गहरा रोष जताया।
इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया। इसमें एक नेपाली युवक का सिर मुॅंड़वाकर उसकी खोपड़ी पर जय श्री राम लिखवाते देखा गया।
घटना बनारस की है। वीडियो वायरल होने के बाद वाराणसी की भेलूपुर पुलिस ने मामले को संज्ञान में लेते हुए मुकदमा दायर किया। जाँच से पता चला कि इस हरकत को अंजाम देने वाले शख्स का नाम अरुण पाठक है।
मीडिया खबरों में पाठक को विश्व हिंदू सेना से जुड़ा बताया गया है। साथ ही ये भी जानकारी दी गई कि उसने इस घटना का वीडियो शेयर करते हुए अपने फेसबुक पोस्ट पर जय-जय श्रीराम लिखा था।
हमने भी अरुण पाठक की फेसबुक प्रोफाइल खँगाली। लेकिन यहाँ से हमें कुछ और भी मालूम चला। अरुण की प्रोफाइल खोलते ही उसके शिवसेना से जुड़े होने के प्रमाण मिले।
उसने अपने फेसबुक प्रोफाइल के बॉयो में लिखा है, “बाला साहेब का शिष्य एवं एक सनातन।” इसके अलावा अन्य जानकारियों में भी इस बात का उल्लेख है कि वो साल 2000 से 2003 तक शिवसेना का जिलाध्यक्ष रह चुका है। उसकी फेसबुक पर अपलोड तस्वीर देखने पर भी मालूम चलता है कि शिवसेना के बड़े नेताओं के साथ भी उसका उठना-बैठना रहा है। उसकी टाइमलाइन पर कई पोस्टर भी हैं। इनमें बाला साहेब की तस्वीर साफ देखी जा सकती है।
यहाँ बता दें शिवसैनिक अरुण पाठक ने पीएम ओली की टिप्पणी के बाद उनकी निंदा के लिए विश्व हिंदू सेना के बैनर तले गंगा किनारे घाटों और मंदिरों पर पोस्टर लगवाए थे। इनके माध्यम से उसने ओली को चीन के इशारों पर चलना बंद करने की चेतावनी भी दी थी।
इसके बाद भेलूपुर इंस्पेक्टर ने नेपाली समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्टर लगाने, नेपाल के कथित नागरिक का सिर मुॅंड़वाकर फेसबुक पर पोस्ट करने और विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य की भावना पैदा के आरोप में धारा 505 (2), 295 और आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज कराया। इसके बाद से उसकी तलाश जारी है।
जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों ने शुक्रवार (17 जुलाई, 2020) को जिन तीन आतंकियों को ढेर किया है उनमें से एक की पहचान वालिद के तौर पर हुई है। वालिद जैश-ए-मोहम्मद का शीर्ष कमांडर और आइईडी विशेषज्ञ था। वालिद मोस्टवांटेड आतंकी की लिस्ट में था। इससे पहले चार बार वह भागने में कामयाब रहा था। वालिद सुरक्षाबलों पर कई हमलों में शामिल रहा था।
वालिद पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं से सीधे निर्देश लेता था। वहीं मारे गए आतंकियों के पास से कई हथियार और गोला बारूद बरामद हुए हैं। मारे गए 2 अन्य आतंकियों के पहचान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन दैनिक जागरण के रिपोर्ट के अनुसार स्थानीय सूत्रों के मुताबिक उनके नाम रउफ अहमद और रईस अहमद हैं।
खबरों के अनुसार मुड़भेड़ के वक्त वालिद स्थानीय नागरिकों की आड़ में भागने की कोशिश कर रहा था। मगर जवानों ने सतर्कता दिखाते हुए उसे पकड़ लिया। इसके हैंड टू हैंड हुई लड़ाई के दौरान सुरक्षाबलों ने उसे मौत के घाट उतार दिया। उसने फिरन के अंदर हथियार छुपा रखा था।
Jammu & Kashmir: 3 Jaish-e-Mohammed terrorists killed and 3 Army personnel injured in an encounter in Kulgam, as per Dilbag Singh, Director General of Police. (Visuals deferred by unspecified time) pic.twitter.com/0J4y2cBtUg
वालिद कोई आम आतंकी नहीं था। उसने पहले भी कई हत्याएँ की हुई है। उसने 2019 में पश्चिम बंगाल के पाँच श्रमिकों की बेरहमी से हत्या की थी। वहीं इस साल मारे गए पाँच नंदीमर्ग कुलगाम के स्थानीय नागरिकों के पीछे भी उसका हाथ था। इतना ही नहीं पुलवामा आतंकी हमले में उसी ने आइईडी कार बम तैयार किया था। वालिद जम्मू कश्मीर के लड़कों को बम बनाने के प्रशिक्षण के साथ उन्हें आतंकवादी बनाने के लिए उकसाता भी था।
सुरक्षाबलों ने वालिद और उसके साथियों के शवों के पास से आधुनिक हथियारों को बरामद किया है। जिसमें दो एसाल्ट राइफलें, एक यूबीजीएल और एक अमरीका निर्मित एम-4 कार्बाइन राइफल, पांच मैगजीन और छह ग्रेनेड शामिल हैं।
गौतलब है कि सुबह जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में तीन आतंकवादी मारे गए थे। यह मुठभेड़ दक्षिण कश्मीर स्थित कुलगाम जिले के नागनाड़ चिम्मर क्षेत्र में हुई। इस दौरान तीन आतंकवादी मारे गए और सेना के तीन जवान घायल हुए हैं। इस बात की आशंका है कि इलाके में और आतंकवादी छिपे हो सकते हैं। इसलिए पुलिस ने सर्च ऑपरेशन जारी रखा है।
सेना को मिली जानकारी के मुताबिक़ दक्षिण कश्मीर स्थित कुलगाम जिले के नागनाड़ क्षेत्र में कई आतंकवादी छिपे थे। सेना ने पहले उनसे आत्मसमर्पण कराने का प्रयास किया लेकिन जवाब में आतंकियों ने गोलीबारी कर दी। जिसके बाद सेना ने जवाबी कार्रवाई की और उसमें 3 आतंकवादी मारे गए। सेना ने इलाके के लोगों कुछ समय तक घरों के भीतर रहने का ही आदेश दिया है। सेना को इस ऑपरेशन के दौरान उन आतंकवादियों के पास से भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक भी मिले हैं।
केवल इस महीने के भीतर ही सेना ने घाटी में 14 आतंकवादियों को मार गिराया है। हाल ही में 13 जुलाई के दिन अनंतनाग के श्रीगुफ़वाड़ा क्षेत्र में जैश-ए-मोहम्मद के 2 आतंकी मारे गए थे।
संयुक्त राष्ट्र (United Nation) की 75वीं सालगिरह की पूर्व संध्या पर न्यूयॉर्क में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज (जुलाई 17, 2020) संयुक्त राष्ट्र को संबोधित किया। यूएन सुरक्षा परिषद का भारत के अस्थायी सदस्य चुने जाने के बाद पीएम मोदी का यह पहला संबोधन है। इससे पहले वह साल 2019 के सितंबर में भी यूएन महासभा को संबोधित कर चुके हैं।
इस संबोधन में पीएम ने बताया कि भारत द्वितीय विश्व युद्ध के तुरंत बाद संयुक्त राष्ट्र के 50 संस्थापक सदस्यों में से एक था। उसके बाद से आज तक काफी बदलाव आए हैं। आज संयुक्त राष्ट्र 193 सदस्य देशों को साथ लाता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने संयुक्त राष्ट्र के विकास कार्यों और संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक परिषद (ECOSOC) का सक्रिय समर्थन शुरुआत से ही किया है। ECOSOC के पहले अध्यक्ष एक भारतीय ही थे। ECOSOC के एजेंडा को आकार देने में भारत ने भी योगदान दिया।
#COVID19 pandemic has severely tested the resilience of all nations. In India, we have tried to make the fight against the pandemic a people’s movement, by combining the efforts of Government and civil society: PM Modi pic.twitter.com/8Vx1KljLG3
पीएम मोदी ने इस अवसर पर अपनी बात रखते हुए सतत विकास लक्ष्यों पर बात की। उन्होंने कहा, “आज, अपने घरेलू प्रयासों के माध्यम से, हम सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में एक प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं और एजेंडा 2030 में अपना योगदान दे रहे हैं।” उन्होंने बताया कि हमारा सिद्धांत सबका साथ और सबका विश्वास है।
पीएम ने कहा कि चाहे भूकंप, चक्रवात, इबोला संकट या कोई अन्य प्राकृतिक या मानव निर्मित संकट हो, भारत ने तेजी और एकजुटता के साथ जवाब दिया है। कोरोना के खिलाफ हमारी संयुक्त लड़ाई में हमने 150 से अधिक देशों में चिकित्सा और अन्य सहायता उपलब्ध करवाई है।
Our ‘Housing for All’ programme will ensure that every Indian will have a safe and secure roof over their head by 2022, when India completes 75 years as an independent nation: PM Modi pic.twitter.com/H1iJt5bEd3
उन्होंने पिछले साल महात्मा गाँधी 150 वीं जयंती का उल्लेख करते हुए कहा, “हमारे 600,000 गाँवों में पूर्ण स्वच्छता प्राप्त करके हमने पिछले साल राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की 150वीं जयंती मनाई। जब भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अपने 75 साल पूरे करेगा तब हमारा ‘हाउसिंग फॉर ऑल’ कार्यक्रम 2022 तक प्रत्येक भारतीय के सिर पर एक सुरक्षित छत सुनिश्चित करेगा।” उन्होंने बताया कि हम महिलाओं को सशक्त करने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं।
Last year, we celebrated the 150th birth anniversary of Father of our Nation Mahatma Gandhi by achieving full sanitation coverage in our 600,000 villages.
In 5 years, we built over 10 crore toilets which improved our rural sanitation cover from 38% to 100%: PM Modi pic.twitter.com/VEZtLGYuVw
विश्व शांति को लेकर संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर पीएम ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र मूल रूप से द्वितीय विश्व युद्ध के उपद्रवों से पैदा हुआ था। आज महामारी के प्रकोप ने इसके पुनर्जन्म और सुधार के नए अवसर प्रदान किए हैं। आइए हम यह मौका न गँवाएँ।
The UN was originally born for furies of the second World War. Today, the fury of the pandemic provides the context for its re-birth and reform.
कोरोना के बारे में भारत की स्थिति बताते हुए पीएम ने कहा भारत ने आपदाओं का मुकाबला तेजी और मजबूती से किया। अब इस समय भारत का रिकवरी रेट दुनिया में सबसे बेहतर है। उन्होंने बताया कि भारत ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में जनता को जोड़ा और अर्थव्यवस्था को वापस ट्रैक पर लाने के लिए पैकेज लाए। पीएम ने संबोधन में आत्मनिर्भर भारत अभियान पर भी बात की और अपने संबोधन के अंत में पीएम ने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों में पूरे समर्थन के साथ अपना सहयोग जारी रखेगा।
महाराष्ट्र में आठवीं कक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल एक पुस्तक में प्रकाशित सामग्री को लेकर विवाद शुरू हो गया है। बताया जा रहा है कि मराठी भाषा में प्रकाशित इस किताब में भारतीय स्वतंत्रता के प्रमुख सेनानियों में से एक सुखदेव के नाम से छेड़छाड़ की गई है।
आमतौर पर इतिहास पढ़ते हुए हमेशा भगत सिंह और राजगुरु के साथ सुखदेव का नाम सबको याद आता है। लेकिन 8वीं कक्षा की बालभारती किताब में उनका नाम कुर्बान हुसैन बताया गया है। साथ ही इसमें ये भी लिखा कि कुर्बान हुसैन को ही भगत सिंह और राजगुरु के साथ लाहौर घटना के बाद फाँसी सुनाई गई थी।
#Breaking | Out of 3 revolutionary leaders Bhagat Singh, Rajguru & Sukhdev, Sukhdev’s name has been replaced by Kurban Hussain in a Marathi textbook of Maharashtra State Secondary Board of Class 8. State Govt orders probe in the matter.
इस मामले के प्रकाश में आने के बाद विपक्ष लगातार महा विकास अघाड़ी सरकार पर बच्चों का ब्रेनवॉश करने का इल्जाम लगा रहा है। दबाव में आकर राज्य सरकार ने इस मामले पर जाँच के आदेश दे दिए हैं। इसके अलावा महाराष्ट्र एजुकेशन बोर्ड भी इसका पता लगाएगा कि गलती कहाँ हुई है। इस किताब के पाठ “मेरा देश भारत” को लिखने वाले लेखक का नाम यदुनाथ थाट्टे है।
एनसीपी ने इस गलती को एक ओर जहाँ ‘टाइपोग्राफिकल एरर’ बताया है, वहीं कॉन्ग्रेस ने ये कहकर सफाई दी है कि ये मराठी किताब है, इतिहास की नहीं। कॉन्ग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत का इस मामले पर कहना है कि ये प्रकाशन में हुई गलती है। वे इस मामले में पड़ताल करवा रहे हैं। उन्होंने इस गलती को छिपाने के लिए यह भी कहा है कि कुर्बान हुसैन भी स्वतंत्रता सेनानी थे और देश को उनको भी सम्मान देना चाहिए।
हालाँकि, मामले पर विरोध करने वालों का इस बात से इनकार नहीं है कि कुर्बान हुसैन स्वतंत्रता सेनानी थे। मगर, बिंदु यह है कि उनका संबंध सोलापुर से था। जिस संदर्भ में यहाँ उनके नाम का उल्लेख हुआ है वहाँ सिर्फ़ भगत सिंह और राजगुरु के साथ सुखदेव का ही नाम आना था।
बता दें, इससे पहले भी पाठ्यपुस्तक मंडल की किताब में कई गलतियाँ हुई हैं। मगर, ऐसी त्रुटि शायद ही कभी सामने आई हो। इस मुद्दे को ब्राह्मण महासंघ के लोगों ने भी उठाया है। उन्होंने इस मामले में कड़ी कार्रवाई की माँग की है।
कौन थे सुखदेव?
स्वतंत्रता सेनानी के रूप में याद किए जाने वाले सुखदेव का पूरा नाम सुखदेव थापर था। उन्होंने ‘लाहौर नेशनल कॉलेज’ में पढ़ाई की थी। वह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रमुख क्रान्तिकारी थे। उन्हें भगत सिंह और राजगुरु के साथ 23 मार्च 1931 को फाँसी पर लटका दिया गया था।
दिल्ली में 24 और 25 फरवरी के दरमियान हुए हिंदू विरोधी दंगों में कट्टरपंथी उन्मादी भीड़ द्वारा 53 लोगों की हत्या कर दी गई थी। वहीं सैकड़ों लोग घायल भी हुए थे। यह घटना राष्ट्र की स्मृति में एक गहरा जख्म है। जिसको लोग चाह कर भी भुला नहीं सकते है। दिल्ली दंगों के दौरान वजीराबाद जाने वाली मेन रोड दिल्ली दंगे का मुख्य केंद्र था। जोकि हिंदू बहुल इलाके यमुना विहार और मजहबी इलाके चाँद बाग को बाँटता है।
यही वह जगह थी जहाँ मजहबी भीड़ द्वारा कांस्टेबल रतनलाल की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा इसी जगह पर एक और घटना घटी थी। जिसमें सप्तऋषि इस्पात और एलाय प्राइवेट लिमिटेड की बिल्डिंग से हो रहें हमले का जवाब मोहन नर्सिंग होम से दिया जा रहा था। जोकि हिंदू बहुल इलाके यमुना विहार में है। इस दौरान हिंदुओं और समुदाय विशेष के बीच हुए इस हमले में शाहिद नाम के एक व्यक्ति की पेट में गोली लगने की वजह से मौत हो गई थी।
उस वक्त खासतौर से वामपंथी मीडिया को प्रोपेगेंडा चलाने का एक मुद्दा मिल गया था। जिसमें मीडिया ने इस बात को प्रदर्शित किया कि किस तरह दंगों के दौरान हिंदुओं द्वारा निर्दोष लोगों का कत्ल किया जा रहा है। मीडिया इस एक घटना को आगे कर दिल्ली दंगों में हिंदुओ को दोषी ठहराने में जुटी थी। मीडिया ने लोगों के भावनाओं से खेलने के लिए सप्तऋषि भवन से उतारे गए शाहिद के शरीर को भी टेलीविजन पर दिखाया था। इसके साथ ही टीवी पर न्यूज़ एंकर्स यह भी बता रहें थे की किस तरह शाहिद को मारते समय हिंदू “गोली मारो सालो को” के नारे भी लगा रहे थे। जिसके जरिए यह माहौल बनाया गया कि मोहन नर्सिंग होम की छत से हिन्दू गोली चला रहे हैं।
हालाँकि, चार्जशीट के सामने आने के बाद यह बात स्पष्ट हो गई कि मीडिया जिस घटना की दलीले दे रही थी सच्चाई उससे बिलकुल विपरीत है। मीडिया ने जिस परिजयोना के तहत लोगों को गुमराह करने की कोशिश की, वह बात भी चार्जशीट आने के बाद विफल हो गई। चार्जशीट में घटना की हर कड़ी को स्पष्ट रूप से उल्लेखित किया गया है। जैसे कि मोहन नर्सिंग होम की छत, सप्तऋषि इस्पात और एलाय प्राइवेट लिमिटेड की छत पर असल में हुआ क्या था? कैसे मुख्य वज़ीराबाद सड़क को मजहबी भीड़ द्वारा युद्ध क्षेत्र में बदल दिया गया था? इसके साथ ही शाहिद को लगी गोली के बारे में भी जिक्र किया गया है। जिसे हमें जानने की जरूरत है।
कैसे मेन वज़ीराबाद रोड पर दंगों को भड़काया गया: क्रोनोलॉजी
दिसंबर में मजहबी भीड़ द्वारा सीएए विरोधी दंगों की शुरुआत हुई थी। 24 दिसंबर को मेन वज़ीराबाद की सड़क दंगों की शुरुआती दौर के अहम हिस्सों में से एक बन गई थी। इसी जगह पर मजहबी भीड़ ने हिंसक रूप धारण कर इलाके में गश्त कर रही पुलिस पार्टी पर हमला करना शुरू कर दिया था। उसी दौरान इस हमले में पुलिसकर्मी रतन लाल की हत्या कर दी गई थी।
23 फरवरी को भीम आर्मी ने चाँद बाग से राजघाट तक मार्च निकालने का आह्वान किया था। भीम आर्मी की तरफ से निकाला गया यह मार्च एक अवैध मार्च था जिसे उस वक्त पुलिस ने रोक दिया था। जिसको लेकर एक समुदाय विशेष का ही गवाह (जिसका नाम गुप्त रखा गया है) ने पुलिस को बयान दिया था कि भीम आर्मी द्वारा बुलाए गए मार्च के लिए कई मजहबी, दलित और छात्र इकट्ठा हुए थे। जिसे पुलिस ने रोक दिया था। पुलिस ने बाद में वज़ीराबाद सड़क को भी सील कर दिया था। इस दौरान जाफराबाद के एक और विरोध स्थल पर हिंसा भड़कने की एक अफवाह फैली थी।
यह वह स्थान था जहाँ 23 तारीख को जेसीसी सदस्यों और अन्य लोगों के साथ मजहबी महिलाओं, विशेष रूप से पिंजरा तोड़ के सदस्यों ने मेट्रो रोड को ब्लॉक कर हिंसा को भड़काने का काम किया था। गौरतलब है कि चार्जशीट में, यहाँ यह स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि यह समुदाय विशेष के एंटी-सीएए लोग थे। जिन्होंने उन लोगों पर पत्थरबाजी और हमला करना शुरू कर किया था, जो सीएए विरोधियों द्वारा जाम किए गए रोड को खुलवाने की माँग कर रहे थे। यह बड़े पैमाने पर OpIndia द्वारा रिपोर्ट किया गया था।
इसके साथ ही सीएए विरोधियों ने 23 और 24 तारीख की रात को एक गुप्त बैठक आयोजित की थी। जहाँ दंगाइयों को 24 फरवरी के दंगों के लिए तैयार रहने के लिए कहा गया था। जिसमें उनको लाठी, पत्थर, ईंट, लोहे की रॉड जैसे अन्य हथियार लाने के निर्देश दिए गए थे। दिलचस्प बात यह है कि 24 फरवरी को हुए दंगों से 15 दिन पहले भी एक गुप्त बैठक हुई थी। उस बैठक में, अमेरिका के प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप के भारत दौरे के दौरान दंगों को अंजाम देने की योजना बनाई गई थी। जिससे बाहरी मीडिया के सामने ज्यादा पब्लिसिटी पाने का मौका मिल जाए।
दायर चार्जशीट के अनुसार 24 तारीख को पुलिस कॉन्सटेबल रतन लाल की हत्या की गई थी। वहीं हिंसक भीड़ ने पुलिसवालों को भी घेर लिया था। इस घटना में सबसे पहले महिलाओं ने पुलिसवालों पर पथराव और हमले की शुरुआत की थी। फिर उस हमले में भीड़ में से पुरुष भी निकल कर शामिल हो गए थे। इस भयावह घटना में मजहबी भीड़ द्वारा कॉन्स्टेबल रतनलाल को मौत के घाट उतार दिया गया। इसके अलावा लगभग 40 अन्य पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए।
चार्जशीट के अनुसार, यह घटना 24 फरवरी 2020 को दोपहर 1:00 बजे हुई थी। उस दिन का दंगा डीएस बिंद्रा (जो मीडिया द्वारा एक मसीहा के रूप में गढ़ा गया था, जिसने शाहीन बाग में प्रदर्शनकारियों के लिए खाने का इंतजाम किया था) सफूरा जरगर, जेसीसी के सदस्य, पिंजरा तोड़ के सदस्य और स्थानीय कट्टरपंथी दंगाइयों जैसे अराजक तत्वों द्वारा रची गई एक बड़ी गहरी साजिश का एक हिस्सा था।
रतन लाल हत्याकांड में दायर चार्जशीट में 24 फरवरी की दोपहर 1 बजे तक हुई घटनाओं के बारे में बात की गई है, जबकि एक अन्य 68 नंबर चार्जशीट में रतन लाल की हत्या के बाद हुई घटनाओं के बारे में बताया गया है।
चार्जशीट नंबर: 68
चार्जशीट नंबर- 68 शाहिद की मौत से संबंधित है, जोकि पेट में गोली लगने से घायल हो गया था। 24 फरवरी को, अल्लाह मेहर के 25 वर्षीय बेटे शाहिद की पेट में गोली लगने से मौत हो गई थी। जब वह सप्तऋषि इस्पात और एलाय प्राइवेट लिमिटेड की छत पर हमले के समय मौजूद था। यह इमारत 25 फूटा चाँद बाग, मेन वजीराबाद रोड के पास एक सर्विस रोड पर स्थित है, जो चाँद बाग मजार के ठीक बगल में है।
यह घटना दोपहर लगभग 3 बजे हुई थी। इससे पहले रतन लाल की हत्या 1 बजे एक मजहबी भीड़ द्वारा की गई थी। चार्जशीट में यह भी शामिल है कि कैसे हिंदू मोहन नर्सिंग होम से पथराव कर रहे थे, जो कि यमुना विहार (हिंदू बहुल) में है। वहीं दूसरी ओर कट्टरपंथी दंगाई सप्तऋषि इस्पात और एलाय प्राइवेट लिमिटेड की इमारत से पथराव कर रहे थे, जो चाँद बाग में है। इन दोनों क्षेत्रों को मेन वजीराबाद रोड बाँटता है।
जिस क्षेत्र में दंगों की शुरुआत हुई थी (गूगल मैप)
हालाँकि, इस गूगल मैप में मोहन नर्सिंग होम को देखा जा सकता है जबकि सप्तऋषि इस्पात और एलॉय प्राइवेट लिमिटेड मेंशन नहीं है। लेकिन चूँकि हमें पता है कि यह इसलिए मैप के ज़रिए समझाने की कोशिश की गई है।
रतन लाल की हत्या के ठीक बाद का मामला
चार्जशीट के अनुसार, 23 फरवरी को प्रदर्शनकारी अचानक 25 फूटा रोड के पास सर्विस रोड से मुख्य वज़ीराबाद रोड पर शिफ्ट हो गए। इससे ट्रैफिक जाम हो गया। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने पूरी सड़क को ब्लॉक कर दिया था। 24 फरवरी को सुबह से ही इस्लामिक मॉब द्वारा भड़काऊ और सांप्रदायिक नारे लगाए जा रहे थे और एहतियात के तौर पर इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात किया गया था।
इस दिन, वज़ीराबाद रोड पर असामान्य संख्या में प्रदर्शनकारी एकत्रित होने लगे। बता दें रतन लाल हत्याकांड में दायर चार्जशीट में विशेष रूप से 23 की रात को हुए एक गुप्त बैठक आयोजित करने का उल्लेख किया गया था। जिसमें दंगाइयों को 24 तारीख को अधिक से अधिक लोगों को इकट्ठा करने और हथियारों को साथ लाने का निर्देश दिया गया था।
दोपहर 1 बजे मजहबी भीड़ ने पथराव और गोली चलाना शुरू कर दिया था। जिसकी वजह से रतन लाल की मौत हो गई और डीसीपी और एसीपी सहित कई अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस घटना के बाद 3 बजे के आसपास हिंदुओं ने भी मजहबी भीड़ के द्वारा किए जा रहें हमले पर जवाबी कार्रवाई करते हुए पथराव शुरू कर दिया। जिसके बाद कट्टरपंथी पीछे हट गए थे।
इन सभी घटनाओं को देखते हुए यह बात स्पष्ट रूप से साबित होती है कि हिंदुओं ने मजहबी भीड़ द्वारा किए जा रहें हिंसा पर प्रतिक्रिया देते हुए जवाबी कार्रवाई की थी। जबकि कट्टरपंथी पक्ष ने पथराव, गोली चलाने, लोहे की छड़ों और लाठी का उपयोग कर रतन लाल की हत्या की थी और कई अन्य अधिकारियों को घायल किया था।
चार्जशीट में आगे कहा गया है कि मजहब विशेष के दंगाई चाँद बाग इलाके में केंद्रित थे, जबकि हिंदू यमुना विहार तक सीमित थे। दोपहर 3 बजे, हिंदुओं और समुदाय विशेष वालों ने इमारतों की छत पर कब्जा कर लिया, जो मुख्य वजीराबाद सड़क पर स्थित अस्पताल के पास था। दोनों पक्ष आपस में पथराव करने लगे और यहाँ तक कि एक-दूसरे पर गोलियों की बौछार भी की।
यहाँ यह बात ध्यान देने लायक है कि वर्तमान चार्जशीट में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यह दंगा विस्तृत रूप से एंटी-सीएए मॉब द्वारा योजनाबद्ध तरीके से किया गया था। जिसमें दंगाई, बिचौलिए और षड्यंत्रकारी मौजूद थे। इसके अलावा, चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि जब उन्होंने भारतीय झंडे को फहराया था, उन झंडों के पीछे भारत का अपमान किया जा रहा था और सांप्रदायिक नारे लगाए जा रहे थे।
उस समय, मजहबी दंगाइयों ने जबरन सप्तऋषि इस्पात और एलाय प्राइवेट लिमिटेड की इमारतों में प्रवेश किया था।
चार्जशीट के मुताबिक़ मजहबी दंगाइयों ने इलाके में रहने वाले मज़दूरों और परिवारों को डराया-धमकाया। इसके अलावा उन पर दबाव बना कर घर खाली कराया और घरों पर कब्ज़ा किया। इसके बाद दंगाई लकड़ी का पटरा लगा कर इमारत के ऊपर तक पहुँचे। जिससे उन्हें वज़ीराबाद के मुख्य मार्ग पर निगरानी रखना आसान हो। इसके बाद उन्होंने इमारत से ही पत्थर और गोलियाँ तक चलाना शुरू कर दिया और ऐसा उन्होंने केवल पुलिस के साथ नहीं बल्कि हिंदुओं के साथ भी किया। उस इमारत की छत पर 25 साल की शाहिद की मृत्यु हुई थी। इस हिस्से को देख कर यह साफ़ हो जाता है कि शाहिद उन दंगाइयों में से एक था जिसने कट्टरपंथियों की तरफ से सप्तऋषि बिल्डिंग पर कब्ज़ा किया, फिर पुलिस वालों और हिंदुओं पर पत्थर और गोलियाँ चलाया।
सप्तऋषि इस्पात एवं अलॉय प्राइवेट लिमिटेड की इमारत में रहने वालों मज़दूरों का बयान भी इस घटनाक्रम की पुष्टि करता है।
जिन मज़दूरों को अपने पूरे परिवार के साथ घर खाली करने की धमकी मिली थी उनकी कहानी भी लगभग ऐसी ही थी। दिन के 3 बजे लगभग 30 मजहबी दंगाई इमारत में दाखिल हुए और मौके पर मौजूद हर इंसान को जगह खाली करने के लिए कहा। इसके बाद वह एक लकड़ी की सीढ़ी से छत तक पहुँचे। मज़दूरों ने अपने घरों को खाली करते हुए देखा कि कई लोग बोरियों में पत्थर और ईंट भर कर ले छत पर ले जा रहे थे। इतना ही नहीं कुछ दंगाइयों के पास भारी मात्रा में आग लगाने के उपकरण भी मौजूद थे। जब मजहबी दंगाई सप्तर्षि इस्पात एवं अलॉय प्राइवेट लिमिटेड की छत पर पहुँचे, इसके बाद विरोध में हिन्दू भी मोहन नर्सिंग होम की छत पर पहुँच गए।
दंगे के दौरान हुए शाहिद आलम के मौत का मामला
चार्जशीट में उन परिस्थितियों का उल्लेख किया गया है जो स्पष्ट रूप से शाहिद आलम की मृत्यु का कारण बनीं। इसमें कहा गया है कि वह 24 फरवरी को दोपहर करीब 3:00 बजे सप्तऋषि इस्पात और एलॉय प्राइवेट लिमिटेड की छत पर था। दंगों के समय शाहिद के साथ, कई अन्य लोग बिल्डिंग की छत पर मौजूद थे और वहीं से पुलिस और हिंदुओं पर पथराव कर रहे थे। यह समय ऐसा था जब पुलिस ने इस स्थिति पर नियंत्रण खो दिया था।
उल्लेखनीय है कि उस समय हिंदू भी मोहन नर्सिंग होम की छत पर पहुँच गए थे और मजहबी भीड़ द्वारा किए जा रहे हमले पर जवाबी कार्रवाई कर रहे थे। लगभग 3:30 बजे, शाहिद के पेट में गोली लग गई थी। जब वह इमारत की छत पर मौजूद था। यह बात सिर्फ चश्मदीद गवाहों ने ही नहीं बल्कि एनडीटीवी के रवीश कुमार द्वारा होस्ट किए गए प्राइम टाइम शो पर भी प्रसारित किया गया था।
किस तरह एनडीटीवी और अन्य मीडिया हाउस ने इस मौत को मुद्दा बनाकर कैसे समुदाय विशेष वालों को निर्दोष साबित किया। इसकी चर्चा हम आपसे बाद में एक लेख के माध्यम से करेंगे।
उस दौरान एनडीटीवी ने दो वीडियो को प्रसारित किया था। एक वीडियो में शहीद आलम था, जिसे गोली लगने के बाद लकड़ी की सीढ़ी से नीचे खींचा जा रहा था। वहीं दूसरी वीडियो मोहन नर्सिंग होम की छत की थी। जहाँ से हिंदुओं द्वारा पथराव और गोलीबारी की जा रही थी।
चार्जशीट में कहा गया है कि शाहिद को नीचे खींचने वाली वीडियो असली है और न केवल पोस्टमॉर्टम वीडियो बल्कि शाहिद के परिजनों द्वारा भी पुष्टि की गई है। हालाँकि, चार्जशीट में कहा गया है कि वीडियो में, सप्तऋषि भवन पर इस्लामी दंगाइयों ने मुखौटे पहने रखे थे जिस वजह से उनकी पहचान नहीं की जा सकी।
चार्जशीट में आगे, एक चौंकाने वाली घटना का भी उल्लेख किया गया है।
चार्जशीट में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि मोहन नर्सिंग होम की छत से हिंदुओं की तरफ से की गई गोलीबारी के फुटेज की भी जाँच की गई। मोहन नर्सिंग होम और सप्तऋषि भवन के बीच की दूरी लगभग 78 मीटर है। शाहिद आलम के शरीर से निकली गोली के टुकड़े एक छोटे असलहे से निकली गोली के प्रतीत होते हैं और इसलिए, पुलिस का मानना है कि यह गोली मोहन नर्सिंग होम की ओर से चलाई गई गोली नहीं हो सकती है।
आखिरकार शाहिद को अस्पताल ले जाने वाले लोग कौन थे?
एनडीटीवी ने यह तो दिखाया कि कैसे शाहिद को सीढ़ी से नीचे घसीटा गया था। लेकिन उन्होंने वास्तव में यह नहीं दिखाया कि उसके शरीर को अस्पताल कैसे ले जाया गया या इसके बाद क्या हुआ। चार्जशीट में इस पहलू को विस्तार से बताया गया है। हालाँकि, यह विस्तृत रिपोर्ट मदीना अस्पताल के एक डॉ. मंसूर खान द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार है।
मंसूर खान ने शाहिद आलम का शव मिलने पर पीसीआर को कॉल किया था। कॉल में, डॉ.मंसूर ने कहा था कि कुछ लोग अस्पताल आए और एक ऐसे व्यक्ति के शरीर को छोड़ कर चले गए जिसे बंदूक के गोली की चोट लगी थी। यह फ़ोन 24 फरवरी को किया गया था और फोन करने वाले की पहचान पुलिस ने मदीना अस्पताल के एक डॉ. मंसूर खान के रूप में की थी।
यह बात सोचने लायक है कि जिन लोगों ने सप्तऋषि भवन की छत से सीढ़ी का उपयोग करके शाहिद को नीचे खींचा था वो बस मदीना अस्पताल के बाहर ही उसे छोड़ कर भाग गए। वहीं मदीना अस्पताल तक पहुँचाने वाले लोगों ने अस्पताल वालों को भी सूचित करना जरूरी नहीं समझा, कि शाहिद को चिकित्सा की आवश्यकता है। और उसके घावों को लेकर अस्पतालवालों को सूचित कर दें।
चार्जशीट के अनुसार, यह सारे तथ्य इस ओर इशारा करते है कि दंगाइयों ने उन सभी बातों का ध्यान रखा जिससे कि उनकी पहचान छिपी रहे और सच्चाई सबके सामने न आ सकें।
एनडीटीवी द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो से यह स्पष्ट है कि, यह इस्लामी लोग ही थे जिन्होंने सप्तऋषि भवन की छत से शाहिद को नीचे खींचा था। इस प्रकार यह भी स्पष्ट है कि उन लोगों ने ही शाहिद को मदीना अस्पताल पहुँचाया होगा, जब उसे बंदूक की गोली लगी थी। पहचान न पता चले इसलिए कोई भी शाहिद को देखने अस्पताल नहीं पहुँचा। जिसके बाद अस्पतालवालों ने शाहिद के शव को डंप कर दिया। फिर बाद में उसके परिजनों ने अस्पताल पहुँच कर शव को लेकर दावा किया था।
चार्जशीट के खुलासों के बाद उठे सवाल और निष्कर्ष
पिछले सभी चार्जशीट के साथ-साथ चार्जशीट नंबर 68 से यह स्पष्ट होता है कि दंगे की शुरुआत कट्टरपंथियों द्वारा की गई थी और शाहिद की मौत हिंदुओं के कारण नहीं हुई थी।
आखिरकार कैसे शाहिद मारा गया?
23 फरवरी को, दो अलग-अलग घटनाएँ हुईं। एक वज़ीराबाद रोड पर अवैध मार्च था जिसे पुलिस ने रोक दिया। दूसरा, वह हिंसा थी जिसमें समुदाय विशेष वालों ने जाफराबाद में हिंदुओं पर पथराव करना शुरू कर दिया था। इसके बाद, दंगाइयों और षड्यंत्रकारियों के बीच एक गुप्त बैठक हुई जो अवैध मार्च का आयोजन कर रहे थे। जिन स्थानीय दंगाइयों को गिरफ्तार किया गया, उनमें सफूरा जरगर, एआईएमआईएम के डीएस बिंद्रा जैसे अन्य लोग दंगों की साजिश रचने में शामिल थे।
चार्जशीट के अनुसार, गुप्त बैठक में दंगाइयों को अगले दिन (24 फरवरी, 2020) को हथियार लाने के लिए कहा गया था और साथ ही अधिक से अधिक लोगों को अपने साथ लाने के भी लिए कहा गया था। अभियुक्तों और गवाहों के बयानों में, दंगाइयों को यह भी कहा गया था कि वे दंगों के दौरान पुलिस से मुठभेड़ करेंगे और उन्हें निपटा देंगे।
24 तारीख को लगभग 1 बजे मेन वज़ीराबाद रोड पर असामान्य रूप से कई लोगों की भीड़ जमा हो गई और दंगा शुरू हो गया था। इस्लामवादी मजहबी भीड़ ने पुलिस पर पथराव करना शुरू कर दिया और लोहे की छड़, तेजाब की बोतल, लाठी, पत्थर, ईंट आदि से पुलिस को पीटा। इस प्रक्रिया में 40 से अधिक पुलिस अधिकारी घायल हो गए और रतन लाल की उसी भीड़ ने हत्या कर दी।
दोपहर 3 बजे, हिंदुओं ने जवाबी कार्रवाई करने का फैसला किया। वे यमुना विहार (हिंदू बहुल) में एकत्र हुए और उस वक्त सारे कट्टरपंथी चाँद बाग में इकट्ठा थे। वज़ीराबाद रोड दो क्षेत्रों को आपस में बाँटता है। मोहन नर्सिंग होम से बचाव में हिंदुओं ने पथराव और फायरिंग शुरू कर दी, जबकि सप्तऋषि बिल्डिंग कट्टरपंथियों के कब्जे में जहाँ मजहबी दंगाई भरे थे, जिन्होंने उस इमारत में मौजूद मजदूरों को धमकी देकर पहले ही भगा दिया था। और जबरदस्ती वहाँ पर कब्जा कर लिया था।
इस दौरान शाहिद को गोली लग गई और उसकी मौत हो गई। जिसके बाद उसे लकड़ी की सीढ़ी का इस्तेमाल करके इमारत की छत से नीचे लाया गया था। इस दृश्य को वामपंथी मीडिया ने खूब प्रसारित कर यह दावा किया था कि समुदाय विशेष के एक निर्दोष युवक को हिंदुओं ने मार दिया।
शाहिद की हत्या कैसे हुई
चार्जशीट में स्पष्ट रूप से एक बात का उल्लेख किया गया है कि मोहन नर्सिंग होम और सप्तऋषि भवन के बीच की दूरी लगभग 78 मीटर है। इसके अलावा, चार्जशीट में कहा गया है कि शाहिद के शरीर से मिले बुलेट के टुकड़े से पता चलता है कि गोली एक छोटे हथियार से चलाई गई थी, इसलिए दूरी के कारण मोहन नर्सिंग होम से चली गोली (शाहिद के शरीर में मिली गोली) नहीं हो सकती है।
अभी भी यह सवाल उठता है कि आखिर शाहिद को किसने मारा
इस दंगे के दौरान लोग एक दूसरे पर पथराव और गोलियाँ चला रहे थे। जिसका यह मतलब बिलकुल नहीं है कि ये सिर्फ ‘दूसरे पक्ष’ को ही लगेंगे। जबकि दोनों भवनों के बीच की दूरी लगभग 78 मीटर है। फिर भी शाहिद को गोली जिससे यह साबित होता है कि शाहिद खुद दंगाई था और वहीं मौजूद था। और जो सप्तऋषि भवन की छत के ऊपर से पुलिस और हिंदुओं पर पथराव कर रहा था। अब चूँकि दूरी ज़्यादा है तो उसे गोली हिंदू पक्ष (मोहन नर्सिंग होम) से नहीं लग सकती थी। इससे यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि खुद कट्टरपंथियों द्वारा दागी गई गोलियाँ लगने से शाहिद की मौत हुई है।
इस मामले में दाखिल चार्जशीट में भी अब तक के सभी आरोपित समुदाय विशेष से हैं जैसे कि मोहम्मद फिरोज, चाँद मोहम्मद, रईस खान, एमडी जुनैद, इरशाद और अकिल अहमद।
शाहिद के शरीर को एक अस्पताल के सामने गुमनाम रूप से क्यों फेंक दिया गया था और यह क्या दर्शाता है?
मदीना अस्पताल के डॉ. मंसूर खान ने अपने बयान में कहा है कि शाहिद के शव को अस्पताल के सामने गुमनाम तरीके से फेंक दिया गया था। जिसके बहुत बाद में उसका परिवार शाहिद के शव का दावा करने आया था। जिसको लेकर पुलिस ने चार्जशीट में निष्कर्ष निकाला है कि दंगाइयों द्वारा यह अपने पहचान को छिपाने के लिए एक साजिश के तहत किया गया था।
एनडीटीवी के क्लिप से भी यह स्पष्ट होता है कि यह समुदाय विशेष का पक्ष ही था जिसने शव को नीचे खींचा था, वही शाहिद को अस्पताल ले गए थे। लेकिन उसके बाद अपने ही लोग शाहिद के शरीर को छोड़ कर क्यों भाग गए थे? यदि हिंदुओं ने वास्तव में शाहिद को मार दिया था, तो क्या यह शाहिद के परिवार (उनके भाई भी उनके साथ छत पर थे) वालों पर निर्भर नहीं करता कि वो पुलिस को बुलाए और शिकायत दर्ज कराएँ?
क्या उनके परिवारवालों को यह सुनिश्चित नहीं करना चाहिए था कि वे शाहिद को अस्पताल में भर्ती कराएँ और उसके शरीर पर लगे घाव का इलाज कराएँ? क्या यह मायने नहीं रखता कि उसके परिवार और दोस्त शाहिद के साथ हॉस्पिटल में रुके? क्या उन्हें पुलिस को अपना बयान दर्ज नहीं करना चाहिए था कि कैसे हिंदुओं ने शाहिद को मारा था?
किसी ने भी घटना के बाद शाहिद को लेकर कोई कदम नहीं उठाया। समुदाय विशेष के लोग केवल मदीना अस्पताल के सामने शाहिद के शरीर को छोड़ कर भाग गए और बहुत बाद में केवल परिवार के लोग शाहिद के शव पर दावा करने के लिए अस्पताल पहुँचे।
कट्टरपंथियों का यह व्यवहार यह साबित करता है कि वे पहले से जानते थे कि शाहिद को वास्तव में अपनी तरफ से हुए हमले के दौरान इस्तेमाल की गई गोलियाँ लगी थी। जिसके बाद उसकी मौत हो गई। फिलहाल, चार्जशीट में यह बात इतनी स्पष्ट रूप से नहीं बताई गई है। हालाँकि, तथ्यों के जरिए इस ओर इशारा जरूर किया गया है।
यदि वास्तव में ऐसा था, तो आखिरकार मीडिया ने एक नकली कहानी क्यों चलाई? जब शाहिद को छत से नीचे खिंचा जा रहा था तब खासतौर पर वहाँ वामपंथी मीडिया मौजूद था। क्या उन्हें पता नहीं चला कि बाद में शाहिद का शरीर कहाँ गया? उन्होंने समुदाय विशेष वालों द्वारा शाहिद के शरीर को मदीना हॉस्पिटल के बाहर छोड़कर भागने पर सवाल क्यों नहीं उठाया? क्या वामपंथी मीडिया और कट्टरपंथी दंगाइयों के बीच हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए पहले से कोई साँठगाँठ थी?
ऐसे कई सवाल है, जिनका जवाब देना अब भी बाकी है।
मोहन नर्सिंग होम की छत पर हिंदू क्या कर रहे थे?
चार्जशीट में इस बात से कहीं भी मना नहीं किया गया कि हिंदू समुदाय के लोग मोहन नर्सिंग होम की छत पर नहीं थे और वहाँ से कट्टरपंथियों पर पत्थर नहीं फेंक रहे थे। ये बातें साफ हैं कि हिंदुओं ने उस भीड़ पर प्रतिकार किया था जो उस दिन इलाके में उन्मादी हो रखी थी। इतना ही नहीं आरोप पत्र में यह भी लिखा है कि हिंदुओं ने 3 बजे के बाद जवाबी कार्रवाई करनी शुरू की यानी कॉन्स्टेबल रतन लाल की हत्या के घंटो बाद हिंदुओं ने जवाब दिया। जिससे भारी तादाद में इकट्ठी भीड़ को पीछे हटना पड़ा। यहाँ ये भी गौर करने वाली बात है कि हिंदुओं ने जिस भीड़ को जवाबी कार्रवाई से पीछे धकेला वो पुलिस पर हमले कर रही थी। यानी अगर हिन्दुओं ने वहाँ प्रतिकार नहीं किया होता तो वह भीड़ न सिर्फ़ हिंदुओं पर हमला करती बल्कि कई और पुलिस अधिकारियों को भी निशाना बनाती।
इस पूरे दंगे का आरोप हिंदुओं पर मढ़ना न्याय पर आघात और सच्चाई से मुँह मोड़ने जैसा है। जिसे कुछ वामपंथी और एजेण्डाबाज पत्रकार अपना हिंदू विरोधी एजेंडा चलाने और इस्लामिक कट्टरपंथियों को बचाने के लिहाज से जानबूझकर कर चला रहे हैं। इस्लामिक मॉब द्वारा सावधानीपूर्वक पूरी तैयारी के साथ खूनी हिंसा की योजना बनाई गई थी। जिसे ग्राउंड रिपोर्ट के साथ-साथ चार्जशीट के माध्यम से विशेष रूप से ऑपइंडिया द्वारा एक्सेस किए रिपोर्ट में विस्तृत तरीके से बताया गया है। हिंदुओं द्वारा ‘हिंदू विरोधी दंगों’ की शुरुआत करने का कोई भी आरोप एक झूठ का पुलिंदा है। खासतौर से वामपंथी मीडिया ने सिर्फ अपना फेक नैरेटिव गढ़ने के लिए उस वक्त मोहन नर्सिंग होम की आड़ में दंगाइयों को बचाने के लिए हिंदुओं को निशाना बनाया था।
नोट: दिल्ली हिन्दू विरोधी दंगों में दाखिल चार्जशीट पर आधारित ऑपइंडिया की इस विस्तृत रिपोर्ट का अनुवाद ऋचा सोनी ने किया है।
कोरोना संक्रमण के मद्देनजर महाराष्ट्र सरकार ने कहा है कि इस बार बकरीद की नमाज मस्जिदों या फिर ईदगाह में नहीं पढ़ी जाएगी। इन्हें केवल घरों में रहकर अता किया जाएगा। इसके अलावा सरकार ने कहा है कि अभी हर बाजार बंद है। इसलिए अगर नागरिक पशु खरीदना चाहते हैं तो वे ऑनलाइन खरीदारी करें।
Bakri Eid prayers should not be offered in mosques or Eidgahs or public places, but should be done at home only. Currently all operating livestock markets will remain closed. If citizens want to buy animals, they should buy it online or by phone: Maharashtra Govt #COVID19
प्रदेश के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने कहा कि महाराष्ट्र में किसी भी धार्मिक कार्यक्रम की अनुमति नहीं है इसलिए सभी को घरों के भीतर ही नमाज अदा करने के लिए कहा गया है। लोगों को नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद जाने की मनाही है। इस वक्त सभी पशु बाजार और मीट मार्केट बंद हैं इस वजह से इन्हें ऑनलाइन ही मँगाया जा सकता है।
इसके अलावा महाराष्ट्र सरकार की तरफ से बकरीद पर जारी गाइडलाइन्स में प्रतीकात्मक कुर्बानी देने की अपील भी की गई है। कहा गया है कि कंटेनमेंट जोन में किसी भी तरह की रियायत नहीं दी जाएगी। पूरे राज्य में बकरीद के किसी भी धार्मिक जुटान की सख्त मनाही की गई है।
गौरतलब है कि इससे पहले महाराष्ट्र सरकार में कॉन्ग्रेस मंत्री असलम शेख लगातार बकरीद पर मुस्लिम समुदाय को छूट दिलवाने के लिए सरकार पर दबाव बना रहे थे और उप मुख्यमंत्री अजीत पवार के साथ बैठक तक की बातें कर रहे थे। इसके अलावा कॉन्ग्रेस नेता व पूर्व मंत्री आसिफ नसीम खान ने मुख्यमंत्री से पत्र लिख कर छूट की अपील की थी।
उन्होंने लिखा था “जैसे सरकार ने गणेशोत्सव मनाने की छूट दी है। वैसे ही हम अपील करते हैं कि उपयुक्त रोक के साथ मुस्लिम समुदाय को ईद उल अदहा मनाने की अनुमति दी जाए।” उन्होंने कहा था कि इस गुहार पर सीएम प्राथमिकता के साथ निर्णय लें ताकि मुस्लिम समुदाय अपना त्योहार मना पाए।
यहाँ बता दें कि महाराष्ट्र इस वक्त भारत में कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य है। मुंबई में भले ही कोरोना के नए मामलों की संख्या कम हुई हो लेकिन प्रदेश के अन्य जिलों में तेजी से केस बढ़ रहे हैं। इसी के मद्देनजर गृहमंत्री ने बकरीद के लिए भी ये निर्देश जारी किए हैं। 17 जुलाई तक राज्य में मरीजों की संख्या 3 लाख के करीब पहुँच गई है। कुल संक्रमितों की संख्या वहाँ 284281 है। इनमें से 158140 वर्तमान में सक्रिय है।
कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने शुक्रवार को भारत-चीन विवाद को लेकर एक वीडियो ट्वीट किया। 3 मिनट की वीडियो में उन्होंने मोदी सरकार के नेतृत्व में भारत को लेकर कई सवाल पूछे। इस दौरान उन्होंने विदेश नीतियों और देश की अर्थव्यव्स्था को लेकर सरकार पर निशाना साधा।
राहुल के विदेश नीतियों से जुड़े इन्हीं सवालों का जवाब विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ट्विटर पर दिया है। उन्होंने एक के बाद एक ट्वीट कर राहुल के हर संदेह पर प्रतिक्रिया दी है और समझाया कि आखिर वे इन सवालों को पूछते हुए कहाँ-कहाँ गलत हैं।
उन्होंने सबसे पहले ट्वीट में अन्य देशों के साथ समझौतों पर राहुल को जवाब दिया। उन्होंने लिखा, “हमारे प्रमुख समझौते मजबूत और आंतरिक स्तर पर ऊँचे हुए हैं। इसका सबूत नियमित तौर पर यूएस, रूस, यूरोप और जापान से होने वाली अनौपचारिक मुलाकातें और शिखर वार्ताएँ हैं। इसके अलावा भारत ने चीन को भी राजनीतिक रूप से अपने साथ जोड़ा है। इस बारे में विश्लेषकों से पूछिए।”
.@RahulGandhi hs questions on Foreign Policy. Here are some answers:
•Our major partn’ships are strongr & internat’l standng higher.Witness regular summits&informal meetngs wth #US#Russia#Europe & #Japan.India engages #China on more equal terms politically.
उन्होंने अगले ट्वीट में लिखा, “अब हम CPEC, BRI, दक्षिण चीन सागर और संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादियों पर अपने मन की बात अधिक खुलकर बोलते हैं। इसे मीडिया से पूछिए।”
अपने तीसरे ट्वीट में उन्होंने बॉर्डर के इंफ्रास्ट्रक्चर की पुरानी समस्या पर अपनी बात रखते हुए लिखा, “2014-20 और 2008 -14 में तुलना कीजिए। 280% तक बजट में बढोतरी, 32% सड़क निर्माण, 99% पुल और 6 सुरंगें का निर्माण। इस बारे में हमारे जवानों से पूछिए।”
पड़ोसी देशों के साथ सवाल उठाने पर भी एस जयशंकर ने राहुल गाँधी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने अपने ट्वीट में श्रीलंका और चीन के बीच हंबनटोटा बंदरगाह समझौता का उल्लेख करते हुए लिखा, “श्रीलंका और चीन के बीच हंबनटोटा बंदरगाह समझौता 2008 में संपन्न हुआ था। इस बारे में इससे निपटने वालों से पूछिए।”
मालदीव से संबंधों पर उन्होंने कहा, “साल 2012 में मालदीव पर राष्ट्रपति नाशीद के काबिज होने के बाद भारत के साथ उसके संबंध बिगड़ गए थे। लेकिन अब वह ठीक है। इस बारे में हमारे व्यावसाइयों से पूछिए।”
•Difficult ties with #Maldives, after India watched President Nasheed being toppled in 2012, now stand transformed.
इसके बाद बांग्लादेश पर उन्होंने लिखा “साल 2015 में बांग्लादेश के साथ एक भूमि सीमा निर्धारित की गई जो अधिक विकास और पारगमन के रास्ते खोलती है। अब आतंकी उसे अपना सुरक्षा ठिकाना नहीं मानते। ये हमारे सुरक्षाकर्मियों से पूछिए।”
•#Nepal after 17 years is getting Prime Ministerial visits. And a swathe of developmental projects: power, fuel, housing, hospital, roads, etc.
नेपाल के साथ संबंधों पर उन्होंने राहुल को बताया, “17 साल बाद नेपाल में प्रधानमंत्री का दौरा हुआ। वो भी बिजली, ईंधन, आवास, अस्पताल, सड़क आदि विकासात्मक परियोजनाओं के साथ। ये उनके नागरिकों से पूछिए।”
फिर भूटान पर वे कहते हैं, “भूटान को एक मजबूत और ताकतवर भागीदार मिला। 2013 के उलट अब वह अपनी रसोई में खाना बनाने के लिए रसोई गैस की चिंता नहीं करते। ये उनके घरवालों से पूछिए।”
•#Bhutan finds a stronger security and development partner. And unlike 2013, they don’t worry about their cooking gas.
इसी प्रकार मोदी सरकार के नेतृत्व में वे भारत के साथ अफगानिस्तान के संबंधों पर बताते हैं, “अफगान ने अपना (सलमा बांध) प्रोजेक्ट पूरा किया और अपना प्रशिक्षण और संयोजकता का विस्तार किया। इसे अफगान की सड़कों से पूछिए।”
•#Afghanistan sees completed projects (Salma Dam, Parliament), expanded training and serious connectivity.
इसके बाद विदेश मंत्री आखिरी ट्वीट में पाकिस्तान का जिक्र करते हैं और यूपीए काल में 26/11 पर, शर्म अल शेख और हवाना की घटनाओं पर मनमोहन सरकार की प्रतिक्रिया को, और बालाकोट व उरी के साथ तुलना करने की बात कहते हैं।
•And #Pakistan (that you skipped) surely notes the difference between Balakot & Uri on the one hand, and Sharm-el-Sheikh, Havana & 26/11 on the other.
वे लिखते हैं, “और पाकिस्तान (जिसे आप भूल गए) उसने भी अब देख लिया होगा कि शर्म-अल-शेख, हवाना, 26/11 में और बालाकोट और उरी में क्या फर्क था। इसे अपने आपसे पूछिए।”
चीन के खिलाफ अमेरिका कड़ा रुख अख्तियार कर रहा है और लगातार कोई न कोई कदम उठा रहा है। अमेरिका एक तरफ कोरोना वायरस को लेकर चीन को जिम्मेदार ठहरा रहा है। वहीं दूसरी ओर साउथ चाइना सी और हॉन्गकॉन्ग के मुद्दे को लेकर भी तनाव बढ़ता जा रहा है।
इस वक्त अमेरिका और चीन के बीच तल्खी इस कदर बढ़ गई है कि डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के साथ सभी संबंधों को तोड़ने की धमकी भी दे दी है। वहीं भारत भी अब चीन से होने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रहा है।
अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ (Mike Pompeo) ने कहा, चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के खिलाफ कार्रवाई करने का समय आ गया है। यह भी कहा कि अब समय आ गया है कि दुनिया चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की ओर से पेश की जा रही चुनौतियों का जवाब दे।
उन्होंने कहा कि चीन को कोरोना वायरस महामारी के बारे में बहुत पहले से ही पता था। चीन सरकार यह जानती थी कि यह महामारी बहुत घातक है। जो एक से दूसरे इंसान में आसानी से फैल सकती है। उसके बावजूद उसने जान-बूझकर ये बात दुनिया से छुपाई।
पोम्पिओ ने ‘फॉक्स न्यूज’ के बिल हेमर को बृहस्पतिवार को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “दक्षिण-पूर्वी एशिया में ही नहीं, बल्कि एशिया और यूरोप के देशों को भी चीन की कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा पेश की जा रही चुनौतियों के बारे में पता चल गया है। अमेरिका ने भी काफी लंबे समय तक इस पर गौर नहीं किया।” उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि उन सभी ने भी यही किया और मुझे लगता है कि अब वे सभी एक संयुक्त निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि इसे सही करने का समय आ गया है।”
पोम्पिओ ने कहा, “दुनिया में लोकतंत्र और स्वतंत्रता से प्रेम करने वाले लोगों के लिए यह जरूरी है कि हम चीन की कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा पेश की जा रही चुनौतियों का जवाब दें।” उन्होंने कहा कि “लगातार 40 साल तक अमेरिकी प्रशासन दूसरी ओर देखता रहा और चीन को अमेरिका का फायदा उठाने का मौका दिया।”
पोम्पिओ के मुताबिक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है, “अब और नहीं।” विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका निष्पक्ष, पारस्परिक व्यापारिक संबंध बनाएगा और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से अमेरिकियों के साथ उसी तरह से व्यवहार करने की माँग करेगा जैसा अमेरिका वहाँ जाने वाले लोगों के साथ करता है। हेमर ने पोम्पिओ से हॉन्गकॉन्ग आधारित वायरस विशेषज्ञ डॉ. यान ली-मेंग के उस दावे के बारे में भी पूछा, जिसमें उन्होंने कहा था कि बीजिंग को इस वायरस के एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलने की जानकारी सार्वजनिक करने से तीन सप्ताह पहले ही इसके बारे में पता था।
पोम्पिओ ने इसके जवाब में कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी ऐसा ही किया और विश्व को इस खतरे से निपटने के लिए जो जानकारी हासिल होनी चाहए थी, वह उसे नहीं दी गई। विश्व में कोरोना वायरस के सबसे अधिक 35 लाख से अधिक मामले अमेरिका में हैं और 1,37,000 से अधिक लोगों की इससे जान जा चुकी है। पोम्पिओ चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों और उनके परिवार के अमेरिका आने पर रोक लगाने की खबरों पर टिप्पणी करने से बचते दिखे।
वहीं अब भारत ने भी चीन के ख़िलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है। भारत ने चीन के रुख को देखते हुए उसके 59 ऐप को पहले ही बैन कर दिया था। फिर उसके बाद भारत ने चीन की कंपनियों से जुड़े सारे कॉन्ट्रैक्ट भी खत्म कर दिए। अब भारत सख्त कदम उठाते हुए एफडीआई नियमों में भी सख्ती दिखाने की तैयारी में लग गया है।
चीन से होने वाले निवेश यानी FDI पर सख्ती और बढ़ सकती है। #Awaaz को मिली #Exclusive जानकारी के मुताबिक सरकार इससे जुड़े नियम में बदलाव करने की तैयारी में है। पूरी खबर बता रहे हैं @RoyLakshmanpic.twitter.com/4ZxNuWostT
CNBC-आवाज़ न्यूज़ रिपोर्ट के अनुसार भारत ECB से होने वाले FDI से जुड़े नियमों में सख्ती बरतने की तैयारी करने जा रहा है। ECB के नियमों में बदलाव करने को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और मार्केट रेगुलेटर सेबी (SEBI) और वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) की कई बैठकें हुई हैं। फिलहाल अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
चर्चा के दौरान ECB को इक्विटी में बदलने के लिए नियम सख्त किए गए है। बेनिफिशल ओनरशिप को लेकर सख्ती बरती गई है। तीसरे देश से आने वाले एफडीआई के लिए मँजूरी लेना अनिवार्य होगा।
देशभर में ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं जब देखा जाता है कि हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक और उन पर भद्दे चुटकुले बनाकर कुछ तथाकथित कॉमेडियन चर्चा का विषय बन जाते हैं। अभी तक ऐसे मामले उत्तर भारत में ही अक्सर देखे और सुने जाते थे। लेकिन ताजा विवाद में एक तमिल भाषी यूट्यूब चैनल द्वारा भगवान कार्तिकेय की आराधना का उपहास बनाया गया है।
भगवान कार्तिकेय (मुरुगन) की स्तुति का अपमान करने को लेकर तमिलनाडु के साइबर क्राइम ब्रांच (CCB) द्वारा पेरियारिस्ट-द्रविड़वादी कार्यकर्ताओं द्वारा चलाए जा रहे एक तमिल यूट्यूब चैनल, ‘करुप्पार कूटम’ (Karuppar Koottam) के खिलाफ मामला दर्ज होने के दो दिन बाद, पुलिस ने बुधवार (जुलाई 15, 2020) शाम चैनल के प्रमुख सदस्यों में से एक एम सेंथिल वासन और इसके एंकर सुरेन्द्रन को गिरफ्तार कर लिया।
चैनल के एक अन्य प्रमुख एंकर सुरेंद्र नटराजन ने कहा है कि उसने गिरफ्तारी को रोकने के लिए मद्रास उच्च न्यायालय में एक अग्रिम याचिका दायर की थी।
पुलिस ने भाजपा के राज्य उपाध्यक्ष एमएन राजा की ओर से भाजपा के राज्य युवा विंग के नेता विनोज पी सेल्वम, तमिलनाडु में राज्य भाजपा अधिवक्ता मंडल के प्रमुख आरसी पॉल कनकराज द्वारा दायर शिकायतों के आधार पर गिरफ्तारियाँ की है।
ऑपइंडिया को तमिल भाषी करन प्रवीण (Karan Praveen) ने बताया कि यह विवाद एक यूट्यूब चैनल द्वारा भगवान कार्तिकेय, जो कि हिन्दू देवता भगवान शिव के पुत्र हैं, की आराधना का मजाक बनाने से शुरू हुआ।
करन ने बताया कि यूट्यूब चैनल करुप्पार कूटम (काला समूह/ भीड़) द्वारा बनाए गए एक वीडियो में पवित्र स्कंद षष्ठी कवचम (भगवान स्कंद का एक भजन, भगवान शिव का पुत्र, उनकी सम्पूर्ण सुरक्षा की माँग करते हुए) में तमिल हिंदुओं की भावना को अपमानित किया है।
स्कंद षष्ठी कवचम, एक ऐसा भजन है, जिसका पाठ तमिल हिंदुओं के घरों में प्रतिदिन किया जाता है। लोग अच्छे स्वास्थ्य, भाग्य और मानसिक शांति पाने के लिए इस भजन का पाठ करते हैं। करण ने बताया कि जिस प्रकार उत्तर भारत में हनुमान चालीसा पढ़ना हिन्दुओं की आस्था का प्रमुख हिस्सा है, ठीक उसी प्रकार दक्षिण भारत में वो भगवान कार्तिकेय से अपने शरीर की रक्षा और मंगल कामना के लिए उनकी आरती करते हैं।
लेकिन अक्सर हिन्दुओं की आस्था को ठेस पहुँचाने वाले पेरियारवादी विचारधारा के समर्थक इस यूट्यूब चैनल द्वारा इस रक्षा कवच मन्त्र का बेहद अश्लील तरीके से इस्तेमाल किया गया है। करण ने बताया कि यह स्थानीय बोली में भी इतना बेहूदा है कि इसका वर्णन तक नहीं किया जा सकता।
करुप्पार कूटम यूट्यूब चैनल के वीडियो में, विशेष रूप से, 64 और 92 के बीच छंदों का उपहास किया गया है। ये छंद भगवान स्कंद से शरीर के प्रत्येक भाग को सिर से पैर तक की सुरक्षा के लिए पढ़े जाते हैं।
करन प्रवीण ने कहा, “भगवान कार्तिकेय, जिन्हें कि हम तमिल में ‘मुरुगन’ कहते हैं, को तमिलों का देवता कहा जाता है और उनकी इस आराधना को निशाना बनाना तमिल हिन्दुओं की आस्था और पहचान पर ही हमला है।”
इस विवादित वीडियो में, करुप्पार कूटम, जो डीएमके-सहयोगी पेरियारवादी विचारकों के समर्थन पर आधारित है, ने इन छंदों के साथ अश्लील, अपमानजनक और बेहद घिनौने तरीके से छेड़खानी करते हुए शरीर के जननांगों को सुरक्षित करने की माँग की है, जो कि हिन्दुओं की आस्था को उपहास बनाने के उद्देश्य से किया गया।
साइबर क्राइम ब्रांच ने सुरेन्द्रन के खिलाफ बीते सोमवार को आईपीसी की धारा 153, 153 (ए) (1) (ए), 295 (पी), 505 (1) (बी) और 505 (2) के तहत मामला दर्ज किया है।
FIR दर्ज होते ही यूट्यूब चैनल करुप्पार कूटम के एक एंकर सुरेन्द्र नटराजन ने, बृहस्पतिवार (जुलाई 16, 2020) को पुदुचेरी में, तमिलनाडु की केंद्रीय अपराध शाखा पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था।
आत्मसमर्पण से पहले सुरेन्द्रन ने पेरियार को फूलों की माला भी पहनाई। लोगों का कहना है कि यह हरकत राजनीतिक लाभ और पेरियारवादी विचारधारा को प्रकाश में लाने के मकसद से की गई है।
चैनल के एक एंकर ने गिरफ्तारी से पहले पेरियार को फूलों की माला पहनाई (चित्र साभार- इन्डियन एक्सप्रेस)
इस बीच, पुलिस ने बुधवार शाम एक 49 वर्षीय व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया था, जिसकी पहचान वेलाचेरी के निवासी एम सेंथिल वासन के रूप में की गई, जो ‘करुप्पार कूटम’ यूट्यूब चैनल का ही सदस्य है।
बुधवार (जुलाई 15, 2020) को मद्रास उच्च न्यायालय के समक्ष दायर की गई अपनी अग्रिम जमानत अर्जी में करुप्पार कूटम के सुरेंद्रन (33) उर्फ ’नाथिकन’ ने कहा था कि लोकतंत्र में यह उसकी अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता है और इसे अपराध नहीं कहा जाना चाहिए।
अपने आवेदन में पत्रकार होने का दावा करने वाले सुरेन्द्रन ने उल्लेख किया कि वह YouTube चैनल ‘करुप्पार कूटम’ के वीडियो एंकरों में से एक है। जिस वीडियो को लेकर विवाद हुआ उसे आप इस लिंक पर देख सकते हैं –
जानवरों के हित और अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था पेटा (PETA) फिलहाल अपने ही दाँव में उलझी हुई नज़र आ रही है। दरअसल कुछ दिनों पहले पेटा ने रक्षाबंधन पर्व के लिए चमड़ा मुक्त अभियान (लेदर फ्री कैम्पेन) चलाया था, जबकि दोनों ही बातों का किसी भी सूरत में एक दूसरे से कोई लेना देना नहीं है। आभासी दुनिया (सोशल मीडिया) प्रतिक्रियाओं का सबसे असरदार मंच बना है। नतीजतन ट्विटर पर पेटा के विरुद्ध #Bakra। ivesMatter हैशटैग ट्रेंड करने लगा।
हैशटैग तो ट्रेंड हुआ ही साथ ही साथ नेटीज़न ने पेटा की भरपूर मौज उड़ाई। आज पूरे दिन भर ट्वीटर पर इस हैश टैग के साथ मीम्स तैयार किए गए और ट्रोल भी किया गया। हालाँकि बहस बढ़ने के बाद पेटा ने इस मामले पर सफाई भी दी। पेटा ने कहा, “हमने ऐसा नहीं कहा कि राखी चमड़े से बनी होती है। बल्कि हमारा कहना यह था कि रक्षाबंधन गाय की सुरक्षा करने के लिए अच्छा दिन है जो कि हमारी बहन जैसी हैं। इसके लिए हमें प्रतिज्ञा लेनी होगी कि हम लेदर का उपयोग नहीं करेंगे। असल मायनों में हमारा संदेश यही था।”
रक्षाबंधन के लिए पेटा द्वारा लगाया गया पोस्टर
लेकिन प्रतिक्रियाओं की नई नवेली दुनिया माफ़ी की भाषा इतनी आसानी से नहीं समझती है।
लेखक और स्तंभकार शेफाली वैद्य ने ट्वीट करते हुए लिखा ‘आपके लिए बस कुछ हैशटैग’
एक व्यक्ति ने लिखा हर जानवर एक जैसे हैं, किसी को भी नुक्सान नहीं पहुँचाना चाहिए। पेटा इंडिया भेद और डर की भावना निकाल कर एक समुदाय की तरफदार न बनें। इंसानियत सबसे ऊपर होती है, सही के लिए खड़े होना चाहिए।
All Animals Are Equal No Animals Shoud Be Harmed In Any Manner. @PetaIndia Stop Discrimination, Fearing, Favouritism & Exception Against Any Particular Community Take Stand for The Cause. Humanity Above All. ?#BakraLivesMatterpic.twitter.com/kLqBZ1mttD
एक और व्यक्ति ने ट्वीट करते हुए लिखा, “यह माँस का टुकड़ा नहीं, बल्कि जीव हैं।” इस ट्वीट के साथ साझा की गई तस्वीर में लिखा था, अब तुम्हारे हवाले ‘मटन’ साथियों।
एक ट्वीट में लिखा था, “गौ रक्षक असली हीरो हैं।” ट्वीट के साथ साझा की गई तस्वीर में लिखा है, “गौ रक्षकों ने पेटा इंडिया से कहीं ज़्यादा जानवर बचाए हैं।”
एक ने मीम साझा किया है। मीम में रानू मंडल की तस्वीर लगी है और जैसे ही उसे पता लगता है ‘बकरा लाइव्स मैटर’ हैशटैग ट्रेंड कर रहा है, वह कहती है ‘मुझे सुनाई नहीं दे रहा है।
कुछ ही दिनों पहले पेटा ने लखनऊ में एक पोस्टर लगाया था जिसमें लोगों से यह निवेदन किया गया था कि वह जीवों की हत्या न करें। इसके बाद तमाम मौलवियों ने इस आपत्ति जताई, पुलिस से शिकायत भी दर्ज कराई गई जिसके बाद पेटा को वह पोस्टर हटाना पड़ा। अब पेटा ने रक्षाबंधन को चमड़े से जोड़ कर दिखाया है, जिसका न तो कोई तर्क है और न ही अर्थ। इतना ही नहीं पेटा ने उस पोस्टर में गाय की तस्वीर भी लगाई है, जिसके बाद सोशल मीडिया पर इसके विरोध में प्रतिक्रियाएँ नज़र आने लगीं। अब तक बकरा लाइव्स मैटर हैशटैग पर 12 हज़ार से अधिक ट्वीट हो चुके हैं।