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कॉन्ग्रेस के संपर्क में BJP के विधायक: राजस्थान के सियासी घमासान के बीच महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेसी मंत्री का दावा

महाराष्ट्र सरकार में मंत्री व कॉन्ग्रेस नेता यशोमती ठाकुर ने शुक्रवार (18 जुलाई, 2020) को दावा किया कि प्रदेश में बीजेपी के 105 में से कुछ विधायक उनकी पार्टी के संपर्क में हैं। साथ ही अगर उनके नाम सार्वजनिक कर दिए गए तो ‘भूकंप’ आ जाएगा।

ट्विटर पर एक वीडियो संदेश साझा करते हुए ठाकुर ने कहा, “बीजेपी को ‘सत्ता की भूख’ है। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि पार्टी को अपने झुंड को एक साथ रखने पर अपनी ऊर्जा को खर्च करना चाहिए क्योंकि राज्य के कई विधायक कॉन्ग्रेस पार्टी के संपर्क में हैं।” इसके साथ ही उन्होंने महा विकास अघाड़ी सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा कि गठबंधन सरकार राज्य में सफलतापूर्वक अपना कार्यकाल पूरा कर रही है। महाराष्ट्र ने देश को एक नया सूत्र दिया है।

विपक्ष पर निशाना साधते हुए, सुश्री ठाकुर ने आरोप लगाया कि भाजपा ने दिसंबर 2019 में सत्ता सँभालने के बाद से राज्य में महाराष्ट्र सरकार को लगातार गिराने का प्रयास किया है। इसके साथ ही उन्होंने एनसीपी-कॉन्ग्रेस-शिवसेना गठबंधन को महाराष्ट्र में स्थिर बताया है।

प्रदेश की महिला एवं बाल कल्याण विभाग मंत्री ने भाजपा नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर हमला बोलते हुए कहा, “वह ऐसे लोगों से घिरे हैं जो बाहरी (पक्ष बदलने वाले)है। वह उन नेताओं का हवाला दे रही थीं जिन्होंने प्रदेश में पिछले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस एवं एनसीपी छोड़ कर भाजपा का दामन थाम लिया था।”

ठाकुर ने आगे कहा, “भाजपा के 105 विधायकों में से कितने लोग दूसरे दलों से आए हैं? क्या आप गारंटी लेते हैं कि वे सब हमेशा भाजपा के साथ रहेंगे? पार्टी के 105 विधायकों में से उन विधायकों के नाम का खुलासा हो जाए, जो कॉन्ग्रेस के संपर्क में हैं तो भूकंप आ जाएगा।”

कॉन्ग्रेस नेता ने भाजपा की आलोचना करते हुए कहा कि केंद्र में बहुमत की सरकार होने के बावजूद यह राज्यों में दूसरी पार्टी की सरकारों को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। जहाँ विपक्षी पार्टी सत्ता में है। उन्होंने कर्नाटक, मध्य प्रदेश और अब राजस्थान में चल रही सत्ता के टकराव का हवाला देते हुए कहा।

गौरतलब है कि 2019 के विधानसभा चुनावों के बाद, भाजपा एक सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और भाजपा-शिवसेना गठबंधन ने सरकार बनाने के लिए जनादेश हासिल कर लिया था। लेकिन उसके बाद शिवसेना ने सत्ता के मोह में एनडीए से नाता तोड़ लिया था। शिवसेना, राकांपा और कॉन्ग्रेस के साथ मिलकर फिर नया गठजोड़ किया था। और महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की अगुवाई में सरकार का गठन किया गया था।

उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र में भाजपा के कई विधायक कॉन्ग्रेस पार्टी के संपर्क में हैं, यह विस्फोटक रहस्य उस समय उजागर हुआ जब कॉन्ग्रेस नेताओं ने भाजपा पर राजस्थान कॉन्ग्रेस इकाई के विधायकों को खरीदने का आरोप लगाया था। यह आरोप विशेष रूप से अशोक गहलोत और सचिन पायलट के समर्थकों ने आपस में लगाया था।

कॉन्ग्रेस ने राजस्थान में चल रहे सियासी घमासान की वजह भाजपा को बताया था। जबकि महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के नेता ने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया था कि विपक्षी विधायकों के समर्थन को सुरक्षित करने के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी अनैतिक साधनों को अपनाने से पीछे नहीं हटेगी।

अशोक गहलोत ने लगातार दूसरी बार BSP से की दगाबाजी, राजस्थान में लगे राष्ट्रपति शासन: मायावती

राजस्‍थान में जारी सियासी घमासान के बीच बसपा सुप्रीमो मायावती ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर हमला बोला है। मायावती ने राजस्‍थान में राष्‍ट्रपति शासन लगाने की माँग की है।

बीएसपी प्रमुख मायावती ने कहा, “राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पहले दल-बदल कानून का खुला उल्लंघन व बीएसपी के साथ लगातार दूसरी बार दगाबाजी करके पार्टी के विधायकों को कॉन्ग्रेस में शामिल कराया और अब जगजाहिर तौर पर फोन टेप करा कर इन्होंने एक और गैर-कानूनी व असंवैधानिक काम किया है।”

मायावती ने आगे कहा, “इस प्रकार राजस्थान में लगातार जारी राजनीतिक गतिरोध, आपसी उठा-पठक व सरकारी अस्थिरता के हालात का वहाँ के राज्यपाल को प्रभावी संज्ञान लेकर वहाँ राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश करनी चाहिए, ताकि राज्य में लोकतंत्र की और ज्यादा दुर्दशा न हो।”

बीजेपी ने की फोन टैपिंग की CBI जाँच की माँग

बता दें कि राजस्थान में जारी सियासी संकट के बीच ऑडियो क्लिप सामने आया है। इस टेप का हवाला देकर कॉन्ग्रेस ने राजस्थान में सरकार गिराने के लिए खरीद-फरोख्त की कोशिश का आरोप लगाया है।

बीजेपी प्रवक्‍ता संबित पात्रा ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि संवैधानिक प्रावधानों को ताक पर रखकर फोन टैंपिंग किए जाने सहित विभिन्न प्रकरण की सीबीआई से जाँच कराई जानी चाहिए। भाजपा प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि क्या राजस्थान में परोक्ष रूप से आपातकाल नहीं लगाया जा रहा? उन्होंने कहा, ”भाजपा इस पूरे प्रकरण की सीबीआई द्वारा जाँच की माँग करती है। इससे दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।”

पात्रा ने कहा, “राजस्थान की सरकार 2018 में बनी, अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बने, उसके बाद एक कॉन्ग्रेस पार्टी की सरकार में शीत युद्ध की स्थिति बनी रही। कल अशोक गहलोत जी ने स्वयं मीडिया के सामने आकर कहा है कि 18 महीने से मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री के बीच में वार्तालाप नहीं हो रही थी। राजस्थान में कॉन्ग्रेस का राजनीतिक ड्रामा हम देख रहे हैं। ये षड्यंत्र, झूठ-फरेब और कानून को ताक पर रखकर कैसे काम किया जाता है, उसका मिश्रण है।”

बीजेपी प्रवक्‍ता पात्रा ने सवाल किया कि क्या राजस्थान में फोन टैपिंग की जा रही थी और क्या यह आधिकारिक स्तर पर की जा रही थी? क्या मानक प्रक्रियाओं (SOP) का पालन हुआ? क्या फोन टैपिंग इत्यादि की गई? क्या सभी राजनीतिक पार्टी के सभी लोगों के साथ इस प्रकार का व्यवहार किया जा रहा है? इसे लेकर तत्काल सीबीआई जाँच होनी चाहिए।

गौरतलब है कि महेश जोशी, रणदीप सुरजेवाला सहित कई कॉन्ग्रेस नेताओं के खिलाफ बीजेपी ने पुलिस से शिकायत की है। इसमें कहा गया है कि पार्टी को बदनाम करने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आवास पर साजिश रची गई।

बीजेपी नेता लक्ष्मीकांत भारद्वाज ने जयपुर के अशोक नगर थाने में कॉन्ग्रेस नेताओं के खिलाफ शिकायत की है। उन्होंने विधायकों की खरीद-फरोख्त के फर्जी ऑडियो बनाकर बीजेपी को बदनाम करने का आरोप कॉन्ग्रेस नेताओं पर लगाया है।

AIMIM के कादिर खान, कॉन्ग्रेस के अनूप पटेल ने उकसाया तो मॉं-बेटी ने खुद को लगाई आग: 4 पर FIR

लखनऊ स्थित लोकभवन के सामने 17 जुलाई को माँ-बेटी ने आत्मदाह की कोशिश की थी। मंडलायुक्त सुजीत पाण्डेय ने बताया है कि कुछ लोगों ने आपराधिक षड्यंत्र रच महिलाओं को ऐसा करने के लिए भड़काया था

उन्होंने बताया कि इस मामले में AIMIM नेता कादिर खान, कॉन्ग्रेस के अनूप पटेल समेत 4 लोगों पर मामला दर्ज किया गया है। लखनऊ के ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर (लॉ एंड ऑर्डर) नवीन अरोड़ा ने भी इस घटना से जुड़ी कुछ बातें बताई। उन्होंने कहा, “एक महिला को पुलिस वालों ने बचा लिया जबकि दूसरी की हालत गंभीर है।” 

इस घटना के बाद विरोधी दल उत्तर प्रदेश की योगी सरकार से सवाल करने लगे। महिलाओं के अमेठी से होने की वजह से केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी पर भी खूब सवाल उठाए गए।   

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा, “लखनऊ में लोकभवन के सामने दो महिलाओं ने दो महिलाओं द्वारा दबंगों के खिलाफ़ कोई कार्रवाई न होने से हताश होकर आत्मदाह करने की दुखद ख़बर आई है। सपा ने लोकभवन इसलिए बनवाया था कि वहाँ बिना भेदभाव आम जनता अपनी शिकायतों के निवारण के लिए जा सके। लेकिन इस भाजपा सरकार में ग़रीबों की कोई सुनवाई नहीं।” 

बसपा मुखिया मायावती ने ट्वीट कर कहा, “ज़मीन विवाद प्रकरण में अमेठी ज़िला प्रशासन से न्याय न मिलने पर माँ बेटी को लखनऊ में आत्मदाह करने को मजबूर होना पड़ा। यूपी सरकार इस घटना को गंभीरता से ले तथा पीड़ित को न्याय दे व लापरवाह अफसरों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करे ताकि ऐसी घटना पुनः न हो।”   

इसके बाद कॉन्ग्रेस और AIMIM नेताओं ने इस घटना पर सिलसिलेवार तरीके से योगी सरकार को घेरना शुरू कर दिया।   

संयोग और हैरानी की बात है कि घटना के बाद लगातार कई ट्वीट आए। इसमें लगभग सारे ट्वीट AIMIM नेताओं और समर्थकों के थे। इनमें बिना किसी आधार के योगी सरकार को ज़िम्मेदार ठराया गया था।   

आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने भी ट्वीट किया, जबकि आम आदमी पार्टी की सक्रियता उत्तर प्रदेश में लगभग न के बराबर है। उन्होंने भी इस घटना की आड़ में योगी सरकार को कठघरे में खड़ा करने का अवसर नहीं छोड़ा।   

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया के पूर्व सांसद मोहम्मद सलीम ने ट्वीट कर कहा, “जलती हुई भारत माता सड़कों पर दौड़ रही हैं।” 

खुद को पत्रकार कहने वाली रोहिणी सिंह जिनके अखिलेश यादव से करीबी संबंध है, ने भी इस घटना पर ट्वीट किया।

17 जुलाई के दिन दो महिलाओं ने लखनऊ के लोकभवन क्षेत्र के ठीक सामने खुद को आग लगा ली थी। घटना में दोनों बुरी तरह झुलस गई। दोनों माँ-बेटी हैं और अमेठी के जामो थाना क्षेत्र की रहने वाली है।   

मां बेटी ने लखनऊ में किया आत्मदाह
लखनऊ में जिस स्थान पर मां-बेटी ने आत्मदाह किया

घटना के दौरान पुलिसकर्मियों ने एक महिला को बचा लिया था। दूसरी महिला की हालत गंभीर बनी हुई है। दोनों महिलाओं को उपचार के लिए नज़दीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ख़बरों के मुताबिक़ उनका अपने पड़ोसी से विवाद हुआ था। उन्होंने पड़ोसियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कराया था। इसके बाद पड़ोसी ने भी माँ-बेटी के विरुद्ध मामला दर्ज कराया था। दोनों का आरोप था कि पुलिस उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही थी। फिलहाल बेटी की हालत स्थिर है जबकि माँ की हालत गंभीर बनी हुई है।

पुणे मेडिकल आपदा की ओर बढ़ रहा है, भाजपा MLA ने की केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की माँग

पुणे से भारतीय जनता पार्टी के विधायक सिद्धार्थ शिरोले ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार और पुणे प्रशासन, दोनों ही जिला अस्पतालों में कोरोना वायरस के दौरान आईसीयू बेड और वेंटिलेटर की कमी के महत्वपूर्ण मुद्दे को हल करने में विफल रहे हैं। भाजपा नेता और विधायक सिद्धार्थ शिरोले ने केंद्र सरकार से मदद माँगते हुए इस बारे में ट्विटर पर लिखा है कि महाराष्ट्र एक बड़ी आपदा की ओर बढ़ रहा है।

शिवाजीनगर निर्वाचन क्षेत्र, पुणे के भाजपा विधायक सिद्धार्थ शिरोले ने इस सम्बन्ध में केंद्र सरकार से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। सिद्धार्थ शिरोले का कहना है कि महाराष्ट्र सरकार कोरोना महामारी से निपटने में विफल रही है और राज्य बड़ी महामारी की स्थिति में है।

उन्होंने कहा कि पुणे प्रशासन निजी अस्पतालों के आधार पर चल रहा था, जो कि बुरी तरह से चरमरा गए हैं। सिद्धार्थ शिरोले ने ट्विटर पर लिखा, “पुणे एक बड़ी मेडिकल आपदा से बस कुछ ही दिन दूर है। राज्य सरकार नाकाम रही है।”

महाराष्ट्र, शिवाजीनगर से विधायक ने पुणे में कोरोना वायरस की गंभीर स्थिति को देखते हुए केंद्र सरकार की मदद माँगी है। उन्होंने कहा कि पुणे COVID-19 संक्रमण के सक्रीय मामले में देश के शीर्ष 3 जिलों में शामिल है। ज्ञात हो कि पुणे में शुक्रवार को 1539 नये मामले सामने आए हैं।

शिरोले ने अपने ट्वीट में लिखा है कि महाराष्ट्र के प्रमुख शहर में आईसीयू और वेंटिलेटर की भारी कमी है। उन्होंने ट्वीट में लिखा, “नवीनतम संख्या के अनुसार पुणे में वर्तमान में 200 से अधिक आईसीयू और 100 वेंटीलेटर बेड की कमी है, जिसके कारण कई नागरिकों को अपनी जान गँवानी पड़ रही है।”

पुणे में ही रहने वाले प्रवीण झा ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया कि पुणे में लॉकडाउन सम्बन्धी निर्देशों को लेकर भी सरकार बहुत स्पष्ट नहीं है। उन्होंने बताया कि बेहद संवेदनशील इलाकों में भी सरकार और प्रशासन सिर्फ खानापूर्ति तक ही जन सुविधाओं का ध्यान रख रही है।

प्रवीण झा ने बताया कि पिछले पाँच दिन से पुणे में कर्फ्यू लगा हुआ है। और बिगड़ते हालातों को देखते हुए फिर से कर्फ्यू लगाया जा रहा है। इस बंद के दौरान दुकानें और सार्वजानिक आवाजाही बंद रहेंगी लेकिन ऑफिस और कम्पनियाँ खुले रहेंगे।

उन्होंने बताया कि किस तरह से कर्फ्यू के दौरान पास बनाने के लिए कर्फ्यू लगने से पहले दिन एक सर्क्युलर जारी कर दिया जाता था और लोगों को पोर्टल पर जाकर PMC की वेबसाइट पर जाकर लॉग इन करना होता था और पास निकालकर सम्बंधित अधिकारीयों को दिखाना होता था।

लेकिन सरकार के दोनों ही पोर्टल बुरी तरह से नाकामयाब रहे और इसके बाद अजित पवार द्वारा नया पत्र जारी कर कहा गया कि अपनी कम्पनी के HR मैनेजर द्वारा साइन किया गया लेटर ही पास का विकल्प होगा। इसका नतीजा यह रहा कि सड़कों पर लोग सामान्य दिनों की ही तरह ही भारी संख्या में मौजूद थे। बदतर हालातों के बीच भी पुणे में बंद को लेकर कोई ख़ास प्रबंध नहीं हैं।

महाराष्ट्र में एक दिन में COVID-19 के 8,308 नए मामले सामने आने से शनिवार (जुलाई 18, 2020) सुबह तक राज्य में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की कुल संख्या बढ़कर 2,92,589 हो गई है। जबकि पुणे में वर्तमान में 12,016 केस सक्रिय हैं और अब तक 917 लोगों की जान जा चुकी है।

राज्य में ऐसा तीसरी बार हुआ है, जब एक दिन में कोरोना वायरस के 8,000 से अधिक नये मामले सामने आए हैं। बृहस्पतिवार (शुक्रवार 16, 2020) को राज्य में एक दिन में सबसे अधिक 8,641 नए मामने सामने आए थे, जबकि गत 11 जुलाई को 8,139 व्यक्ति COVID-19 से संक्रमित पाए गए थे।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि शुक्रवार (जुलाई 17, 2020) को COVID-19 से 258 और मरीजों की मौत होने से राज्य में मृतक संख्या बढ़कर 11,452 हो गई। विभाग ने कहा कि दिन में कुल 2,217 मरीजों को ठीक होने के बाद विभिन्न अस्पतालों से छुट्टी दी गई, जिससे राज्य में अभी तक ठीक हुए मरीजों की संख्या बढ़कर 1,60,357 हो गई। महाराष्ट्र राज्य में वर्तमान में एक्टिव मामलों की संख्या 1,20,780 है।

हिंदू हूँ, लेकिन ईसा मसीह की कृपा से यहाँ तक पहुँची: जस्टिस आर भानुमति ने विदाई भाषण में बताई ‘आस्था’

जस्टिस आर भानुमति 19 जुलाई को रिटायर होने वाली हैं। शुक्रवार को विदाई भाषण में उन्होंने जीसस क्राइस्ट में अपनी आस्था का खुलासा किया। उन्होंने कहा, “यद्यपि मैं हिंदू। लेकिन मैं जीसस की धार्मिक शिक्षा पर भरोसा करती हूॅं। उनके आशीर्वाद से ही पढ़ाई पूरी हुई और जीवन में सफल हो पाई।”

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक़ जस्टिस भानुमति ने कहा कि उन्हें अपने जीवन में काफी मुसीबतों का सामना करना पड़ा। लेकिन जिस तरह से ईसा मसीह ने उनकी मदद की उस तरह कोई इंसान भी नहीं कर पाता। 

उन्होंने कहा, “मैं हिंदू हूँ फिर भी ईसा मसीह की धार्मिक शिक्षा में विश्वास करती हूँ। उनकी कृपा के चलते मेरी पढ़ाई पूरी हुई और मैं जीवन में यहाँ तक पहुँच पाई। न्यायिक सेवा के दौरान मेरे सामने दिक्कतों का पहाड़ था जिनका कोई अर्थ तक नहीं था। लेकिन जिस तरह ईसा मसीह ने मेरी मदद की ऐसा कोई और नहीं कर सका था। शायद कोई इंसान भी नहीं।”    

जस्टिस भानुमति ने अपनी न्यायिक सेवा की शुरुआत उच्च न्यायिक सेवा, तमिलनाडु से बतौर ज़िला जज की थी। साल 2003 में वह मद्रास उच्च न्यायालय का हिस्सा बनी थीं। साल 2013 में उन्होंने झारखंड उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश पद सँभाला। इसके ठीक एक साल बाद वह सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश बनीं। इसके साथ ही वह देश की सबसे बड़ी अदालत में न्यायाधीश का पद सँभालने वाली 6वीं महिला बनीं। उन्होंने कुल 6 साल तक सर्वोच्च न्यायालय में अपनी सेवाएँ दी।    

उनके विदाई समारोह के दौरान अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने भी कुछ बातें कहीं। उन्होंने इस दिन एक दुखद दिन बताया और उम्मीद जताई कि जस्टिस भानुमति जल्द ही कानून के क्षेत्र में दोबारा सक्रियता दिखाएँगी।   

बोले गहलोत- डेढ़ साल से सचिन पायलट से नहीं हुई बात, लौट आए तो गले लगा लूँगा: BJP ने कहा- ऑडियो टेप की हो CBI जाँच

राजस्थान में जारी सियासी घमासान के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बताया है कि उनकी सचिन पायलट से बीते डेढ़ साल से बात नहीं हुई है। साथ ही दावा किया है कि पायलट सरकार गिराने की साजिश बहुत दिनों से कर रहे थे।

गहलोत की सरकार में पायलट उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष थे। उन्हें हाल ही में दोनों पदों से हटाया गया है। गहलोत ने कहा, “कोई मंत्री अपने सीएम से बात नहीं करता, न ही उसकी सलाह लेता है और न ही कोई बातचीत करता है। लोकतंत्र में, कट्टर प्रतिद्वंद्वी भी बात करते हैं। लोकतंत्र की खूबसूरती संवाद ही है।”

साथ ही गहलोत ने यह भी कहा कि अगर सचिन पायलट उनके पास वापस आते हैं तो वे उन्हें गले लगाने को भी तैयार हैं।

दूसरी ओर, शनिवार (जुलाई 18, 2020) को भारतीय जनता पार्टी ने कॉन्ग्रेस पर जमकर निशाना साधा और यह सवाल उठाया कि क्या राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार को गिराने की कथित साजिश के बीच राज्य के नेताओं के फोन टैप किए जा रहे हैं?

पार्टी ने केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) से राजस्थान में कॉन्ग्रेस द्वारा लगाए गए आरोपों की जाँच की भी माँग की है, जिसमें ऑडियो टेप के जरिए यह साबित करने का प्रयास किया जा रहा है कि भाजपा गहलोत सरकार को गिराने के लिए कॉन्ग्रेस के बागी नेताओं के साथ मिलीभगत कर रही थी।

भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, “क्या फोन टैपिंग कोई कानूनी मुद्दा नहीं है? फ़ोन टैपिंग के लिए निर्धारित मानक प्रक्रियाएँ पूरी की गईं? मुख्यमंत्री को जवाब देना चाहिए कि क्या राज्य की मशीनरी का दुरुपयोग हुआ है और राज्य में कोई आपात स्थिति है?”

कॉन्ग्रेस पार्टी प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने शुक्रवार (जुलाई 17, 2020) को मीडिया को उन ऑडियो टेप्स के बारे में जानकारी दी थी, जिनमें कथित तौर पर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत सहित भाजपा नेताओं को राज्य सरकार को गिराने के लिए सचिन पायलट खेमे के बागी विधायकों के साथ साजिश के बारे में सुना जाने का दावा किया गया है।

सुरजेवाला के आरोपों को भाजपा के साथ-साथ शेखावत ने भी खारिज कर दिया, जिन्होंने दावा किया था कि कथित ऑडियो टेप पर आवाज उनकी नहीं थी। उन्होंने कहा है कि वो सीबीआई जाँच के लिए तैयार हैं।

वहीं, भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस पार्टी के भीतर ही साजिश चल रही है और इसका दोष भाजपा पर मढ़ा जा रहा है। उन्होंने कहा, “हमारी नैतिकता स्पष्ट है और हम संविधान के अनुसार काम करते हैं। इसलिए हम सीबीआई जाँच चाहते हैं।”

भाजपा ने प्रेस वार्ता में सीबीआई जाँच की माँग करते हुए कहा, “क्या एसओपी फॉलो हुआ, फोन टेपिंग इत्यादि किया गया? क्या सभी राजनीतिक पार्टी के सभी लोगों के साथ इस प्रकार का व्यवहार किया जा रहा है?”

उन्होंने कहा, “राजस्थान के लोग जानना चाहते हैं कि क्या उनकी निजता से समझौता किया गया है? क्या राजस्थान में कॉन्ग्रेस सरकार ने खुद को बचाने के लिए असंवैधानिक तरीकों का इस्तेमाल किया? क्या राजनीति से संबंधित किसी व्यक्ति का फोन टैप किया जा रहा है?”

बीजेपी ने ट्वीट कर कहा कि ये गंभीर सवाल हैं, जिसका जवाब हम राजस्थान कॉन्ग्रेस और अशोक गहलोत से चाहते हैं। पार्टी प्रवक्ता पात्रा ने कहा, “राजस्थान की सरकार 2018 में बनी। अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बने। उसके बाद एक कोल्ड वॉर की स्थिति कॉन्ग्रेस पार्टी की सरकार में बनी रही। कल अशोक गहलोत जी ने स्वयं मीडिया के सामने आकर कहा है कि 18 महीने से मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री के बीच में वार्तालाप नहीं हो रही थी। राजस्थान में कॉन्ग्रेस का राजनीतिक ड्रामा हम देख रहे हैं। ये षड्यंत्र, झूठ-फरेब और कानून को ताक पर रखकर कैसे काम किया जाता है, उसका मिश्रण है।”

राजस्थान पुलिस के विशेष ऑपरेशन समूह (एसओजी) ने शुक्रवार (जुलाई 17, 2020) को राज्य में कॉन्ग्रेस सरकार को गिराने की साजिश रचने के आरोप में दो एफआईआर दर्ज की थी। FIR कॉन्ग्रेस पार्टी के मुख्य सचेतक (व्हिप) महेश जोशी की शिकायतों के आधार पर दर्ज की गई है।

सुशांत सुसाइड केस में जो कहा वह साबित नहीं कर पाई तो पद्मश्री लौटा दूँगी: कंगना रनौत

अपनी बेबाकी के लिए मशहूर अभिनेत्री कंगना रनौत ने कहा है कि सुशांत सिंह राजपूत सुसाइड केस में उन्होंने जो कुछ भी कहा है यदि वे इसे साबित नहीं कर पाईं तो अपना पद्मश्री लौटा देंगी। उन्होंने यह बात रिपब्लिक टीवी के अर्नब गोस्वामी को दिए इंटरव्यू में कही।

सुशांत सिंह के सुसाइड के बाद कंगना ने बॉलीवुड में भाई-भतीजावाद और गुटबाजी पर जमकर हमला बोला था। साथ ही उन्होंने बताया था कि किस तरह मीडिया बाहर से आए लोगों की लिंचिंग करती है।

कंगना फ़िलहाल अपने घर मनाली में हैं। रिपब्लिक टीवी को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि अगर वह सुशांत सिंह राजपूत की मौत पर दिए अपने बयानों को साबित नहीं कर पाती हैं तो पद्मश्री पुरकार लौटा देंगी। उन्होंने बताया कि इस मामले में मुंबई पुलिस ने उन्हें समन भेजा था। वह जाँच टीम का हर तरह से सहयोग करने के लिए तैयार भी थीं।

कंगना ने कहा, “मुंबई पुलिस ने मुझे समन भेजा। मैंने उन्हें बताया कि मैं मनाली में हूँ। वह किसी को भेज कर मेरा बयान दर्ज करा सकते हैं लेकिन इसके बाद मुझसे किसी ने संपर्क नहीं किया। मैं खुद स्पष्ट करना चाहती हूँ अगर मैंने कुछ सार्वजनिक रूप से कहा है और मैं इसे साबित नहीं कर सकी तो अपना पद्मश्री लौटा दूँगी।” उन्होंने कहा, “मैं ऐसी इंसान नहीं हूँ कि बस यूँ ही इतनी बड़ी बात सार्वजनिक रूप से कह दूँ।”

तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीत चुकीं कंगना को इस साल की शुरुआत में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। कंगना ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद ही इस पर खुल कर बात की। उन्होंने इस मुद्दे पर होने वाली नकारात्मक रिपोर्टिंग की जम कर आलोचना की। उन्होंने यह भी कहा कि वह खुद कई कलाकारों के निशाने पर थीं। कंगना ने सुशांत सिंह राजपूत के खिलाफ कैम्पेन चलाने वाली कई दिग्गज बॉलीवुड हस्तियों का नाम लिया। इसमें कारण जौहर, आदित्य चोपड़ा और महेश भट्ट जैसे लोगों का नाम शामिल था।   

सुशांत सिंह राजपूत के मामले में मुंबई पुलिस ने पूछताछ के लिए कुल 36 लोगों की सूची तैयार की थी। इसमें संजय लीला भंसाली, रिया चक्रवर्ती, संजना संघी और मुकेश छाबड़ा समेत अन्य लोगों का नाम शामिल है। ख़बरों के मुताबिक़ मुंबई पुलिस शेखर कपूर को भी इस मामले में सामान भेजने वाली थी। लेकिन कुछ समय बाद तय हुआ कि वह अपना बयान व्यक्तिगत रूप से मुंबई पुलिस को भेजेंगे।    

कंगना ने करीब दो मिनट का वीडियो जारी कर इंडस्ट्री से सवाल पूछा था कि सुशांत की मौत आत्महत्या थी या प्लान्ड मर्डर? उन्होंने कहा था, “सुशांत सिंह की मौत ने हम सबको झकझोर के रख दिया है। लेकिन वे लोग, जो इस चीज में माहिर हैं कि कैसे समानांतर नैरेटिव चलाया जाए, वो ये कहने लगे हैं कि जिनका दिमाग कमजोर होता है, वे डिप्रेशन में आते हैं और सुसाइड कर लेते हैं।” 

उन्होंने यह भी दावा किया था कि कुछ लोगों के इशारे पर मीडिया ब्लाइंड आइटम लिखती है ताकि जब कोई झूठ बोले, तो उसके ख़िलाफ़ कोई कानूनी कार्रवाई न हो सके। सुशांत के संदर्भ में ऐसी ही मीडिया रिपोर्टों का उल्लेख करते हुए बताया था कि पत्रकारिता के नाम पर मीडिया ने सुशांत को कैसे अपमानित किया।

उन्होंने बताया था, “23 अगस्त 2017 को बॉलीवुड लाइफ सुशांत के बारे में लिखता है कि वो जब भी सेक्स करता है तो अपने ही गाने सुनता है। तो वो सबसे बड़ा नारसिसिस्ट है। 16 दिसंबर 2016 में मुंबई मिरर लिखता है कि सुशांत एक ट्रक ड्राइवर की तरह दिखता है। 22 फरवरी 2019 को मुंबई मिरर लिखता है कि पार्टी में तमाशा करने के बाद सुशांत ने काँच की बोतल एक निर्देशक के सिर पर मारी। 18 अक्टूबर 2018 को डीएनए लिखता है कि सुशांत ने अपनी को-एक्टर का रेप किया और वह मीटू के चलते अब जेल जा सकता है।”

सुशांत सिंह राजपूत 14 जून को मुंबई के अपने आवास में मृत मिले थे। इस मामले की सीबीआई जॉंच की मॉंग भी लगातार उठ रही है।

बार-बार बलात्कार से गर्भवती हुई 15 साल की बच्ची: अगवा करने के बाद बनाया गया था मुस्लिम

हुमा यूनुस का 14 साल की उम्र में पाकिस्तान के सिंध प्रान्त में अक्टूबर 2019 में अब्दुल जब्बार ने अपहरण कर लिया गया था। उससे जबरन इस्लाम कबूल करवाया गया। तभी से वह कैद में है। अपहरणकर्ता द्वारा बार-बार बलात्कार के बाद हुमा अब गर्भवती है। अपहरणकर्ता उसके परिवार को धमकियाँ दे रहे हैं।

पाकिस्तान के सिंध प्रांत के उच्च न्यायालय में महिला वकील, तबस्सुम यूसुफ, युवा कैथोलिक लड़की हुमा यूनुस के माता-पिता का प्रतिनिधित्व कर रही है, जो कि अब 15 वर्ष की हो चुकी है।

वकील तबस्सुम के अनुसार, “हुमा ने अपने माता-पिता को फोन किया, उन्हें बताया कि वह अब लगातार हुई यौन हिंसा के परिणामस्वरूप गर्भवती हो गई है। अपने पिता से पूछे जाने पर कि क्या वह अपने अपहरणकर्ता का घर छोड़कर अपने माता-पिता के घर वापस आ सकती है? उसने उन्हें बताया कि उसे घर छोड़ने की अनुमति नहीं है और प्रेग्नेंट होने के कारण उसकी स्थिति अब और दयनीय है, जिस कारण वह अब दीवारों के भीतर बंद कमरे में कैद है।”

लड़की का अपहरण करने वाले अब्दुल जब्बार का भाई मुख्तियार, ‘रेंजर्स’ का एक सदस्य है, जो कि पाक सुरक्षा बलों की एक शाखा है। उसने टेलीफोन के माध्यम से हुमा के माता-पिता से संपर्क किया और उन्हें सीधे धमकी दी। उनसे कहा कि अगर वे अपनी बेटी की तलाश में आए तो उसे मार देंगे।

महिला वकील ने आगे कहा, “इसी व्यक्ति, मुख्तियार ने ऑडियो संदेशों में कहा है कि अगर कोई ईसाई हुमा को वापस लाने कोशिश करेगा, तो वह उसके माता-पिता, और जो भी उनकी मदद करेगा, उन्हें मार डालेगा।”

गौरतलब है कि हुमा को न्याय दिलाने के क्रम में कराची के लिए तीसरे न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सबूत की कमी के आधार पर मामले को बंद कर दिया था। सबूत की फिर से जाँच करने के लिए उसी न्यायाधीश से अपील की गई और मजिस्ट्रेट ने लड़की के जन्म प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के लिए आधिकारिक सार्वजनिक रिकॉर्ड प्राधिकरण, एनएडीआरए से संपर्क किया।

जिसके बाद सुनवाई गत जुलाई 13, 2020 के लिए निर्धारित की गई थी। हालाँकि, पीड़िता के परिवार के वकील ने पहले से ही सुनवाई के दौरान दो आधिकारिक दस्तावेज पेश किए थे, जो यह साबित करते हैं कि वह कम उम्र की है। हुमा के स्कूल प्रमाण-पत्र और बतिज्मा सर्टिफिकेट स्पष्ट रूप से हुमा की जन्म तिथि 22 मई 2005 बताते हैं।

इससे पहले, फरवरी 2020 की एक सुनवाई के दौरान पाकिस्तान स्थित सिंध प्रान्त के हाई कोर्ट के दो न्यायाधीशों, मुहम्मद इकबाल कल्होरो और इरशाद अली शाह यह फैसला तक सुना चुके हैं कि भले ही हुमा नाबालिग हों, फिर भी ईसाई लड़की और उसके अपहरणकर्ता अब्दुल जब्बार के बीच शादी वैध रहेगी, क्योंकि इस्लामी शरिया कानून के अनुसार, पहले मासिक धर्म के बाद किसी भी उम्र की लड़की शादी कर सकती है।

सिंध के उच्च न्यायालय अभी भी कोरोना वायरस महामारी के कारण बंद है और संभवतः अगस्त के बाद भी नहीं खुलेगा। इसके बाद ही इस अदालत के समक्ष सुनवाई के लिए कोई तारीख तय की जा सकेगी।

बताया जा रहा है कि हुमा के अपहरणकर्ता जब्बार का प्रतिनिधित्व करने वाला वकील समय बढ़ाने के लिए हर कानूनी कोशिश कर रहा है। दरअसल, इसके पीछे कारण यह है कि तीन साल बाद पीड़िता लड़की 18 साल की हो जाएगी और इस बात की बहुत अधिक संभावना है कि मामले को अनिश्चित काल के लिए लंबित कर दिया जाएगा।

इसके अलावा, जब भी पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों की बात आती है, तो कानून-व्यवस्था में देरी की प्रवृत्ति देखी जाती है, क्योंकि इन्हें न तो प्राथमिकता माना जाता है, न ही अत्यावश्यक।

गायों की आड़ में सुरक्षा बलों पर फायरिंग, 4 आतंकी ढेर, दहशतगर्दों के निशाने पर अमरनाथ यात्रा

जम्मू-कश्मीर से आतंकवाद का सफाया करने के लिए लगातार ऑपरेशन जारी है। आज शोपियाँ के अमशिपोरा इलाके में सुरक्षा बलों ने एक एनकाउंटर में 4 आतंकवादियों को मार गिराया है। सुबह-सुबह यह एनकाउंटर शुरू हुआ। कल भी एक एनकाउंटर में तीन आतंकवादी मारे गए थे।

पिछले 24 घंटों के भीतर भारतीय सुरक्षाबल 7 आतंकियों को मार गिराने ने में कामयाब रहे हैं। हालाँकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स का कहना है कि आज सुबह हुए एनकाउंटर में अब तक 3 आतंकी ढेर किए गए हैं।

आज सुबह 5 बजे शुरू हुए इस एनकाउंटर में सुरक्षा बलों ने आतंकियों को मुँहतोड़ जवाब दिया। मारे गए आतंकियों की अभी तक पहचान नहीं हो सकी है कि वे किस संगठन से जुड़े थे। शोपियाँ पुलिस, सेना की 62 आरआर और सीआरपीएफ की एक संयुक्त टीम ने गाँव में आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में एक विशेष इनपुट के बाद कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन (CASO) शुरू किया, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हुई।

जैसे ही सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम संदिग्ध स्थान की ओर बढ़ी, आतंकवादियों ने गायों के झुंड के पीछे छुपकर सुरक्षाबलों पर फायरिंग शुरू कर दी। सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम ने प्रभावी ढंग से जवाबी कार्रवाई की, जिसके परिणामस्वरूप अब तक 4 आतंकवादियों के मारे जाने की खबर आ चुकी है। बताया जा रहा है कि ऑपरेशन अभी भी जारी है।

पाकिस्तानी गोलाबारी में एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत

शुक्रवार (जुलाई 17, 2020) शाम पाकिस्तान ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर के पूँछ जिले के गुलपुर और करमारा सेक्टर के रिहायशी इलाकों को निशाना बनाकर फायरिंग की और मोर्टार से गोले दागे।

जिसके बाद भारतीय सेना ने भी जवाबी कार्रवाई में फायरिंग की। हालाँकि, इस दौरान पाकिस्तान की ओर से एक गोला करमाना गाँव के एक मकान पर फट गया। जिससे मौके पर ही तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य नागरिक गंभीर रूप से घायल है।

मृतकों की पहचान 58 वर्षीय मोहम्मद रफीक, उनकी पत्नी 50 वर्षीय राफिया और 15 वर्षीय बेटे इरफान के तौर पर हुई है। घटना के तुरंत बाद सुरक्षाबलों की टीम मौक पर पहुँचकर ग्रामीणों को सुरक्षित जगहों पर पहुँचाया।

अमरनाथ यात्रा को निशाना बनाने की फिराक में हैं आतंकी

आतंकवादी इस बार श्री बाबा अमरनाथ की प्रस्तावित वार्षिक तीर्थयात्रा 2020 में श्रद्धालुओं को निशाना बनाने की फिराक में हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, साउथ कश्मीर में इस समय 25-30 विदेशी आतंकियों समेत करीब 100 आतंकी सक्रिय हैं।

9 राष्ट्रीय राइफल्स सेक्टर कमांडर ब्रिगेडियर वीएस ठाकुर ने शुक्रवार (जुलाई 17, 2020) को मीडिया से बातचीत के दौरान इस बात की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इनपुट से पता चला है कि आतंकवादी नेशनल हाइवे-44 पर यात्रा को निशाना बना सकते हैं।

उन्होंने कहा कि अमरनाथ यात्रा से चार दिन पहले सुरक्षाबलों को एक बड़ी सफलता मिली है। सुरक्षाबलों ने शुक्रवार को दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में तीन आतंकियों को मार गिराया है। मारे गए आतंकियों में आईईडी एक्सपर्ट पाकिस्तानी नागरिक वालिद भी शामिल था।

ब्रिगेडियर वीएस ठाकुर ने बताया कि दक्षिण कश्मीर के विभिन्न हिस्सों और हाइवे की सुरक्षा का लगातार आकलन करके सुरक्षा बढ़ाई जा रही है। यात्रा मार्ग के आसपास के इलाकों में लगातार आतंकियों के खिलाफ तलाशी अभियान भी जारी है। उन्होंने कहा कि स्थानीय नागरिक भी आतंकियों के खिलाफ सुरक्षाबलों का सहयोग कर रहे हैं।

वहीं, लुकुंग में सेना की स्थिति का जायजा लेकर चीन को कड़ा संदेश भेजने के एक दिन बाद, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह आज, शनिवार (जुलाई 18, 2020) को अमरनाथ मंदिर का दौरा करेंगे। रक्षा मंत्री दो दिन के लद्दाख व जम्मू और कश्मीर के दौरे पर हैं।

इससे पहले उन्होंने शुक्रवार को वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर चीनी अतिक्रमण से जुड़े विवाद के बीच भारत की जवाबी रणनीतिक तैयारी का चीन को संदेश देने के लिए लेह-लद्दाख के लुकूंग सैन्य चौकी का दौरा किया।

गहलोत के घर रची गई ऑडियो टेप की साजिश: सुरजेवाला सहित कई कॉन्ग्रेस नेताओं के खिलाफ BJP ने की शिकायत

महेश जोशी, रणदीप सुरजेवाला सहित कई कॉन्ग्रेस नेताओं के खिलाफ बीजेपी ने पुलिस से शिकायत की है। इसमें कहा गया है कि पार्टी को बदनाम करने के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आवास पर साजिश रची गई।

बीजेपी नेता लक्ष्मीकांत भारद्वाज ने जयपुर के अशोक नगर थाने में कॉन्ग्रेस नेताओं के खिलाफ शिकायत की है। उन्होंने विधायकों की खरीद-फरोख्त के फर्जी ऑडियो बनाकर बीजेपी को बदनाम करने का आरोप कॉन्ग्रेस नेताओं पर लगाया है।

इससे पहले ऑडियो क्लिप सामने आने के बाद केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, कॉन्ग्रेस से निलंबित विधायक भँवरलाल शर्मा और संजय जैन पर राजद्रोह के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। एडीजी (एटीएस और एसओजी) अशोक राठौड़ बताया था कि कॉन्ग्रेस नेता महेश जोशी से मिली शिकायतों के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

अब राजस्थान भाजपा प्रवक्ता लक्ष्मीकान्त भारद्वाज ने महेश जोशी, रणदीप सुरजेवाला और अन्य के विरुद्ध अशोक नगर थाने, जयपुर में मामला दर्ज शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप लगाया है कि कॉन्ग्रेस के नेता फर्ज़ी ऑडियो क्लिप के सहारे भाजपा की छवि खराब करने में लगे हुए हैं।

भारद्वाज ने शिकायत में कहा है कि महेश जोशी, रणदीप सुरजेवाला और भॅंवरलाल शर्मा भाजपा की छवि को नुकसान पहुॅंचाने के इरादे से आपराधिक षड्यंत्र रच रहे हैं। कॉन्ग्रेस अंदरूनी विवाद से ध्यान हटाने के लिए ऐसा कर रही है। ऑडियो में मंत्री और विधायक की आवाज़ होने का दावा भाजपा के विरुद्ध पूर्णतः मिथ्या प्रचार है। साथ ही विधायकों को खरीदने की बात भी झूठ है, पूरे प्रकरण में अधिकारियों का दुरुपयोग केवल षड्यंत्र रचने के लिए किया गया है।

शिकायत में कहा गया है कि लोकेश शर्मा नाम का व्यक्ति जो खुद को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का ओएसडी बताता है, ने 16 जुलाई के दिन सभी मीडियाकर्मियों को फर्ज़ी ऑडियो क्लिप भेजा जिससे भाजपा की छवि को नुकसान पहुॅंचाने का आपराधिक उद्देश्य पूरा हो सके। इस घटनाक्रम का ब्यौरा अगले दिन 17 जुलाई को समाचार समूह दैनिक भास्कर में प्रकाशित भी हुआ है। इसके बाद कॉन्ग्रेस प्रवक्ता ने प्रेस वार्ता करके ऑडियो क्लिप के अंश सार्वजनिक रूप से सभी का सामने पढ़े जिनकी कोई विश्वसनीयता नहीं है।   

भारद्वाज ने कहा है कि साज़िश के माध्यम से भाजपा और उसके समर्थकों के खिलाफ घृणा फैलाने और उनका अपमान करने का प्रयास किया गया है। फर्ज़ी ऑडियो क्लिप के आधार पर ही भाजपा नेता पर दंड संहिता की धारा 124 (ए) के तहत झूठा मामला दर्ज कराया गया है। निजी वैमनस्य के तहत एसओजी का इस्तेमाल किया जा रहा है।

उन्होंने मामले की निष्पक्ष जॉंच की मॉंग करते हुए महेश जोशी, लोकेश शर्मा, रणदीप सुरजेवाला और अन्य के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 469, 471, 195, 500, 504, 505 और 120बी, 166ए के तहत मामला दर्ज करने की मॉंग की है। 

गौरतलब है कि राजस्थान में सियासी उठापटक सरकार गिराने की कथित साजिशों को लेकर सचिन पायलट को बयान दर्ज कराने के लिए भेजे गए नोटिस के बाद हुई थी। पायलट के आक्रामक रुख को देखते हुए उनसे पार्टी के प्रदेश ईकाई की कमान के साथ-साथ उप मुख्यमंत्री का पद भी छीन लिया गया था। इस विवाद में ऑडियो क्लिप भी सामने आने के बाद कॉन्ग्रेस ने भाजपा पर विधायकों को खरीदने का आरोप लगाया।

पायलट सहित 19 कॉन्ग्रेस विधायकों को विधानसभा स्पीकर ने सदन की सदस्यता से अयोग्य घोषित करने को लेकर नोटिस भी दिया था। इसके खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की गई थी। कोर्ट ने 20 जुलाई तक सुनवाई टालते हुए स्पीकर से इस नोटिस पर मंगलवार तक कार्रवाई नहीं करने को कहा था।