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BJP सांसद अर्जुन सिंह और उनके MLA बेटे का एनकाउंटर करना चाहती है पुलिस: विजयवर्गीय ने ममता बनर्जी को चेताया

पश्चिम बंगाल में सियासी सरगर्मी के बीच सत्ताधारी पार्टी टीएमसी पर लगातार हिंसा के आरोप लगते रहते हैं। भाजपा विधायक देबेंद्र नाथ की कथित हत्या का मामला शांत भी नहीं हुआ है कि पार्टी ने अपने एक और नेता की हत्या की साजिश का आरोप लगाते हुए ममता बनर्जी को चेताया है।

शुक्रवार को भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने बंगाल के बैरकपुर से भाजपा सांसद अर्जुन सिंह का घर पुलिस द्वारा घेरे जाने पर ममता सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “पश्चिम बंगाल के बैरकपुर से भाजपा सांसद अर्जुन सिंह के घर को आज फिर पुलिस ने घेर लिया! आशंका है कि पुलिस उनका और उनके विधायक पुत्र पवन सिंह का एनकाउंटर करना चाहती है। ममता जी यदि पुलिस ने ऐसी कोई कोशिश भी की तो इसके परिणाम गंभीर होंगे।”

गौरतलब है कि इससे पहले मई माह में सांसद अर्जुन सिंह ने पश्चिम बंगाल के राज्यपाल को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में उन्होंने ममता बनर्जी के इशारे पर ज्वाइंट कमिश्नर अजय ठाकुर पर हत्या के प्रयास का आरोप लगाया था। पत्र में उन्होंने बताया था कि पुलिस उनके घर पर आई थी और उनके व उनके भतीजे के ख़िलाफ़ एक पेंडिंग केस में नोटिस देकर गई। इस दौरान अजय ठाकुर और उनके साथियों के ऊपर उन्होंने बंदूक तानने का आरोप लगाया।

पत्र में हत्या के प्रयास का आरोप लगाते हुए अर्जुन सिंह ने लिखा, “मेरे विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, अजय ठाकुर ने किसी भी बहाने मेरे सुरक्षाकर्मियों के साथ बहस शुरू करने की योजना बनाई थी और फिर मुझे और परिवार को क्रॉस फायर में मारने का प्लान था। योजना को अंजाम देने के लिए, अजय ठाकुर अपने 35 सहयोगियों के साथ आए थे। इस दौरान उनके साथ दो बदमाश भी थे जो सिविल ड्रेस में आए थे।”

यहाँ बता दें कि अभी सोमवार को बंगाल के सुदर्शनपुर के रायगंज में हेमताबाद के भाजपा विधायक देबेन्द्र नाथ रॉय फंदे से झूलते मिले थे। परिजनों ने उनकी मौत पर कहा था कि रविवार रात 1 बजे कुछ युवक उन्हें बुलाने आए थे। इसके बाद से उनकी कोई जानकारी नहीं मिल पाई। सोमवार की सुबह 7 बजे कुछ स्थानीय लोगों ने उन्हें फंदे से झूलता हुआ पाया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने बताया है कि विधायक का मृत शरीर बंद चाय की एक दुकान के सामने झूलता हुआ मिला।

दिल्ली दंगों पर इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट को पुलिस ने नकारा, बताया- भ्रामक, सनसनी बटोरने की कवायद

इंडियन एक्सप्रेस ने दिल्ली दंगों पर 15 जुलाई को एक ख़बर प्रकाशित की थी। इसका शीर्षक था, Resentment in Hindus on arrests, take care: Special CP to probe teams। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि फरवरी में उत्तरी-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में कुछ स्थानीय हिंदू युवकों की गिरफ्तारी को लेकर स्पेशल कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (अपराध) ने अपने सीनियर अधिकारियों को एक पत्र लिखा। पत्र में कहा गया था कि युवकों की गिरफ्तारी से हिंदू समुदाय में काफी गुस्सा है।

इसके अलावा रिपोर्ट में मुद्दे से जुड़ा एक और अहम दावा किया गया था। उन्होंने अपने पत्र में कथित तौर पर उत्तर-पूर्वी दिल्ली के खजूरी ख़ास और चाँद बाग़ इलाकों के युवकों की गिरफ्तारी के लिए एक ‘इंटेलिजेंस इनपुट’ का हवाला दिया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि प्रवीर रंजन के मुताबिक़ समुदाय के लोगों का आरोप है कि ये गिरफ्तारियाँ बिना सबूतों के की गई हैं। साथ ही जितने युवकों की गिरफ्तारी हुई है उनमें से कई निजी कारणों से भी हुई है।  

साथ ही उसमें दो मुस्लिम युवकों का ज़िक्र है। हिंदू समुदाय के लोगों के गुस्से का एक बड़ा कारण यह भी था कि पुलिस ने दोनों मुस्लिम युवकों पर कोई कार्रवाई नहीं की थी। जबकि उन दोनों पर सीएए-एनआरसी के दौरान विरोध-प्रदर्शन को हिंसक बनाने और मुस्लिम समुदाय के लोगों को भड़काने का आरोप है।   

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का यह भी कहना था कि दिल्ली पुलिस द्वारा जारी किए गए आदेश के अनुसार ‘किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने से पहले पूरी सावधानी बरती जाए। हर तरह के सबूतों की (सीधे या तकनीकी) अच्छे से जाँच की जाए जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि गिरफ्तारियों के समर्थन में पर्याप्त संदर्भ मौजूद सबूत हैं।  

मामले में कोई मनमानी गिरफ्तारी न हो और हर सबूत के बारे में सरकारी अभियोजकों से पूरी बातचीत हो। जिन अधिकारियों के अंतर्गत इस मामले की जाँच चल रही हो (एसीपी, डीसीपी, एएसआईटी अतिरिक्त मंडलायुक्त, अपराध) वह जाँच अधिकारियों को इस मामले पर उचित दिशा-निर्देश देते रहें।  

गुरुवार को दिल्ली पुलिस ने इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए विस्तृत रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट में दिल्ली पुलिस ने इंडियन एक्सप्रेस के सभी दावों को खारिज कर दिया और कहा यह पूरी तरह भ्रामक और चर्चा बटोरने वाली खबर के अलावा कुछ नहीं है। इस रिपोर्ट में ऐसा बताने की कोशिश की गई है जैसे दिल्ली पुलिस ने एकतरफ़ा कार्रवाई की हो, जबकि असल में ऐसा कुछ नहीं है।  

दिल्ली पुलिस ने इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का जवाब देते हुए कहा कि इससे अच्छी सनसनी बटोरने वाली खबर नहीं हो सकती है। पूरी रिपोर्ट खोखली है और जिसने भी इस पर काम किया है उसे पुलिस की कार्यशैली की ज़रा भी समझ नहीं है।

दिल्ली पुलिस के जनसंपर्क अधिकारी मंदीप एस रंधावा ने कहा उन्हें जिस पैमाने पर आम लोगों (मुख्य रूप से प्रतिनिधियों), खुफ़िया एजेंसियों और पुलिस की खुफ़िया शाखा से जानकारियाँ मिल रही हैं, वह इससे परेशान हो चुके हैं।  

दिल्ली पुलिस के जवाब के अनुसार इस मामले से जुड़ी हर जानकारी निष्पक्ष रूप से देखी जानी चाहिए। जिस तरह की रिपोर्ट तैयार की गई है वह दिल्ली पुलिस के आदेश को पूरी तरह नज़रअंदाज़ करती है। इसके विपरीत दिल्ली पुलिस ने अपने शुरूआती आदेश में ही लिखा था कि सबूतों के आधार पर जो भी आरोपित होगा, उसकी गिरफ्तारी जाति, धर्म और समुदाय देखे बिना की जाएगी। जिससे कहीं ऐसा संदेश न जाए कि दिल्ली पुलिस मनमानी कार्रवाई/गिरफ्तारी कर रही है।  

दिल्ली पुलिस ने मंडलायुक्त प्रवीर रंजन के मुद्दे पर भी अपना मत रखा। दिल्ली पुलिस के मुताबिक़ मंडलायुक्त रंजन ने जाँच अधिकारियों को सूचित करने के लिए आदेश जारी किया। इतना ही नहीं आदेश के मुताबिक़ दोनों समुदायों से प्रतिनिधित्व मिल रहा है और आदेश की मदद से जाँच अधिकारियों को दिशा-निर्देश देकर उनकी मदद भी की गई थी। दिल्ली पुलिस ने साफ़ तौर पर कहा कि उन्होंने दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाकों में हुए दंगों में निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान क़ानून का पूर्णतः पालन किया गया और सबूत के आधार पर मिले हर आरोपित को जाति, धर्म या समुदाय देखे बिना गिरफ्तार किया गया।

दिल्ली पुलिस ने इंडियन एक्सप्रेस द्वारा किए गए दावों को खारिज करते हुए कुछ और अहम बातें कहीं। मामले से जुड़े सीनियर अधिकारियों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि जाँच के दौरान सभी का रवैया पेशेवर और संगठित होना चाहिए। इस आदेश में उन खुफ़िया इनपुट का भी ज़िक्र था जिनके जरिए जाँच अधिकारियों की मदद मिलनी थी, क्योंकि इस तरह के मामले पहले ही बेहद संवेदनशील होते हैं। आदेश के अनुसार जाँच अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि पूरी कार्रवाई पारदर्शी और साक्ष्यों के आधार पर हो।     

इन जवाब पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इंडियन एक्सप्रेस ने कहा कि उनका पक्ष यही रहने वाला है। इसके अलावा इंडियन एक्सप्रेस ने कहा मंडलायुक्त रंजन के जाँच अधिकारियों को दिए गए आदेश पर उनकी रिपोर्ट किसी भी लिहाज़ से गलत नहीं है। उस रिपोर्ट में सारी बातें सही लिखी हुई हैं। साथ ही इंडियन एक्सप्रेस ने बताया कि उन्होंने मंडलायुक्त रंजन और दिल्ली पुलिस जनसंपर्क अधिकारी रंधावा को इस मामले से जुड़ी एक प्रश्नावली भेजी थी। इस पर दोनों ने अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।    

मुख्तार अंसारी और मछली माफ़िया गैंग की सम्पत्ति ढोल-बाजे के साथ कुर्क, UP पुलिस ने 47 के हथियार लाइसेंस निरस्त किए

उत्तर प्रदेश के जौनपुर में अपराधियों के खिलाफ ‘ऑपरेशन क्लीन’ के तहत बाहुबली मुख्तार अंसारी और उसके करीबियों पर शिकंजा कसने लगा है। कुछ दिनों पूर्व नगर कोतवाली से गिरफ्तार किए गए मछली व्यवसाई व माफिया मुख्तार अंसारी के करीबी रविंद्र निषाद की दूसरी संपत्ति को आज मुनादी बजाकर कुर्क करने की कार्रवाई की गई है।

ऑपरेशन क्लीन के तहत मुख्तार अंसारी गैंग पर कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने अब तक कुल 47 लोगों के हथियार लाइसेंस निरस्त कर दिए हैं। वहीं, भू-माफियाओं के खिलाफ व्यापक अभियान चलाते हुए सरकारी विभाग के जमीनों के भूलेख की समीक्षा का क्रम भी जारी है।

उत्तर प्रदेश सरकार डॉन मुख्तार अंसारी पर कड़ी कार्रवाई कर रही है। गत शनिवार को जौनपुर जिला प्रशासन ने मुख्तार अंसारी के करीबी सहयोगी मछली माफिया रविन्द्र निषाद की संपत्तियों को कुर्क करने का आदेश जारी किया था।

तहसीलदार को निषाद की संपत्तियों को सील करने का काम सौंपा गया था और जौनपुर पुलिस की मदद से सरकार द्वारा निषाद के व्यापारिक प्रतिष्ठानों को सील कर दिया गया। पत्रकार पंकज झा द्वारा साझा किए गए एक वीडियो से पता चला है कि जौनपुर प्रशासन स्थानीय बैंड-बाजे के साथ घोषणा कर संपत्ति सील कर रही है।

अवैध मछली का कारोबार

रिपोर्ट्स के अनुसार, 3 जुलाई को, यूपी पुलिस ने जौनपुर के जोगियापुर क्षेत्र में आंध्र प्रदेश से अवैध रूप से ले जाए गए मछली से भरे एक ट्रक को पकड़ा था। मछली माफिया रविन्द्र निषाद और उनके आंध्र के सहयोगी बी नारंग राव को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने जानकारी दी है कि माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के संरक्षण में सालों से निषाद करोड़ों रुपए का अवैध मछली का कारोबार चला रहा है।

आरोप है कि रविंद्र निषाद कुछ हिस्सा अंसारी गैंग को भी देता था, जिस पर पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए उसे जेल भेज दिया था।

निषाद ने न तो किसी लाइसेंस के लिए आवेदन किया था और न ही अपने किसी व्यावसायिक प्रतिष्ठान का पंजीकरण कराया था। वह कथित तौर पर अंसारी के सक्रिय समर्थन से कारोबार चला रहा है और अंसारी को मुनाफे का हिस्सा देता था।

जाँच के दौरान निषाद की अवैध रूप से अर्जित संपत्ति के प्रारंभिक विवरण के आधार पर, डीएम जौनपुर ने 3.71 करोड़ की संपत्ति की कुर्की का आदेश दिया था। कुर्की के खिलाफ अपील करने के लिए निषाद को आदेश की तारीख से तीन महीने का समय दिया गया है। सील की गई संपत्तियों में बुलेट बाइक, 2 पिकअप ट्रक, एक घर, दुकान और एक निर्माणाधीन शॉपिंग मॉल, बैंक खातों के अलावा शामिल हैं।

हथियार लाइसेंस रद्द

यूपी पुलिस ने जौनपुर के अलावा गाजीपुर में भी मुख्तार अंसारी के माफिया साम्राज्य के खिलाफ कार्रवाई की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अंसारी के कम से कम 4 ज्ञात सहयोगियों के हथियार लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं। प्रशासन ने अंसारी के शूटर बृजेश सोनकर की 58 लाख रुपए की संपत्ति को भी सील कर दिया है।

गत 5 जुलाई को, कथित रूप से अवैध भूमि पर निर्मित एक गोदाम को भी ध्वस्त कर दिया गया था। इसका निर्माण कथित तौर पर मेसर्स विकास कंस्ट्रक्शंस के नाम से किया जा रहा था, जहाँ अंसारी की पत्नी अफसा बेगम और बहनोई आतिफ राजा शेयरहोल्डर थे। 12 जुलाई को, अंसारी के गिरोह के कम से कम 20 सदस्यों पर गैंगस्टर अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।

गाजीपुर के डीएम ओपी आर्य ने भी कहा था कि अंसारी और उनके सहयोगियों के अवैध कब्जे से 33.8 करोड़ रुपए की संपत्ति पहले ही मुक्त हो चुकी है। उनके लाइसेंस रद्द करने के बाद कम से कम 33 हथियार जब्त किए गए हैं और जमा किए गए हैं। अंसारी के साथ मिलकर अवैध कारोबार चलाने वाले कम से कम 17 बदमाशों की पहचान की गई है और उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

कौन हैं मुख्तार अंसारी?

अंसारी एक नेता और माफिया डॉन है। वह पहले बहुजन समाज पार्टी से जुड़ा था। अंसारी उत्तर प्रदेश की मऊ विधानसभा सीट से रिकॉर्ड पाँच बार विधायक रहा है। उसे वर्ष 2010 में बसपा से निष्कासित कर दिया गया था, लेकिन बाद में फिर से प्रवेश दे दिया गया। इसके बाद अंसारी ने मऊ से 2017 का विधानसभा चुनाव जीता था।

मुख्तार अंसारी भाजपा नेता कृष्णानंद राय की हत्या के आरोप में जेल जा चुका है। लेकिन 2019 में गवाहों के मुकर जाने के बाद सीबीआई कोर्ट ने उसे बरी कर दिया। अंसारी के दादा मुख्तार अहमद अंसारी इंडियन नेशनल कॉन्ग्रेस और मुस्लिम लीग के अध्यक्ष थे।

पत्नी के वोट से CM की कुर्सी फिसली, आज गहलोत के तारणहार: कभी पायलट की तरह ठगे रह गए थे सीपी जोशी

राजस्थान में जारी सियासी ड्रामे के बीच एक नाम अचानक से उभर कर सामने आया है। यह नाम है सीपी जोशी का। वे राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष हैं। उन्होंने सचिन पायलट और उनके साथी 18 विधायकों को एक नोटिस थमाया है।

यह नोटिस पार्टी ह्विप का उल्लंघन कर बैठक में शामिल नहीं होने पर उनकी सदन की सदस्यता खत्म करने से जुड़ी है। पायलट सहित 19 विधायकों ने इसे हाई कोर्ट में चुनौती दे रखी है।

वैसे भी जब इस तरह की सियासी स्थिति उत्पन्न होती है तो स्पीकर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। कर्नाटक और मध्य प्रदेश में हाल में ही हम देख चुके हैं कि स्पीकर ने सरकार बचाने के लिए अंत तक प्रयास किए थे। हालॉंकि अदालत के दखल के बाद दोनों जगहों पर कॉन्ग्रेस और उसके सहयोगी दल की सरकार को अल्पमत में होने की वजह से जाना पड़ा।

अतीत के इन अनुभवों पर गौर करें तो जान पड़ता है कि राजस्थान की इस सियासी उठा-पटक के कई पन्ने अभी लिखे जाने शेष हैं। लेकिन, जो सीपी जोशी आज अशोक गहलोत की सरकार के तारणहार की भूमिका में दिख रहे हैं, वे भी कभी उसी तरह खुद को ठगे महसूस कर रहे थे, जैसा 2018 में सचिन पायलट के साथ हुआ था।

पायलट और जोशी के राजनीतिक सफर में कई समानताएँ हैं। दोनों को राजस्थान कॉन्ग्रेस की कमान पार्टी की करारी शिकस्त के बाद मिली थी। दोनों पॉंच साल इस मोर्चे पर लगातार लगे रहे और अगले चुनाव में राज्य की सत्ता में पार्टी को लाकर ही ठहरे। दोनों के कार्यकाल के दौरान प्रदेश की सियासत में गहलोत की ​सक्रियता कम ही रही। लेकिन, दोनों ही मौकों पर गहलोत विजेता बनकर उभरे और मुख्यमंत्री पद पर शीर्ष नेतृत्व ने उनकी ही ताजपोशी की।

हालॉंकि पायलट और जोशी के बीच एक फर्क है। पायलट चुनाव जीतकर भी सीएम पद तक नहीं पहुॅंच पाए, जबकि जोशी अपने जीवन के सबसे निर्णायक चुनाव में खुद हार गए। हार हुई भी तो केवल एक वोट से।

1998 में जब गहलोत ने राजस्थान में सरकार बनाई तो जोशी भी उनकी कैबिनेट में थे। 2003 के विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस को हार झेलनी पड़ी। इसके बाद जोशी प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए। वे शीर्ष नेतृत्व के खास माने जाते थे। यहॉं तक कि 2008 के विधानसभा चुनाव के दौरान यह तय माना जा रहा था कि सत्ता में पार्टी की वापसी हुई तो जोशी ही मुख्यमंत्री होंगे। चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गॉंधी ने भी कई मौकों पर इसके संकेत दिए।

कहा तो यह भी जाता है कि जोशी ने शपथ लेने की तैयारियाँ भी शुरू कर दी थी। वैसे भी राजस्थान की परंपरा 5 साल पर सत्ता बदलने की भी रही है। लेकिन, ऐन मतगणना के दिन जोशी की किस्मत उनसे रूठ गई। नाथद्वारा ​सीट से चुनाव लड़ रहे जोशी को 62215 वोट मिले। उनके प्रतिद्वंद्वी बीजेपी उम्मीदवार को कल्याण सिंह चौहान को मिले 62216 वोट।

यानी एक वोट से किस्मत ने जोशी को धोखा दे दिया। बाद में यह बात सामने आई कि जोशी की पत्नी ने भी मतदान नहीं किया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार खुद जोशी ने इस बारे में कहा था, “हॉं यह सच है। उस दिन मेरी पत्नी और बेटी मंदिर गई हुई थी। इस वजह से वे मतदान नहीं कर पाई थीं।”

नाथद्वारा वो सीट थी जहॉं से 2008 का चुनाव हारने से पहले जोशी चार बार 1980, 1985, 1998 और 2003 के चुनावों में जीत हासिल कर चुके थे। इतना ही नहीं कुछ महीने बाद जब 2009 में आम चुनाव हुए तो राजस्थान के भीलवाड़ा से ही जोशी ने फिर शानदार जीत हासिल की। केंद्र में मंत्री भी बने। कई राज्यों का पार्टी ने प्रभार भी दिया। लेकिन, वह मौका चूकने के बाद जोशी कभी सीएम रेस में शामिल तक नहीं हो पाए।

भारत की एक इंच जमीन भी दुनिया की कोई ताकत छू नहीं सकती: लद्दाख से रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की दहाड़

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शुक्रवार (17 जुलाई, 2020) को पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में LAC पर भारत की सैन्य तैयारियों का जायजा लेने व जमीनी स्थिति की समीक्षा करने पहुँचे। रक्षा मंत्री ने पहले लुकांग में बिपिन रावत और सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के साथ भारतीय सेना और आईटीबीपी के जवानों के साथ बातचीत की। यहाँ उन्होंने जवानों को मिठाईयाँ भी खिलाई। अपनी दो दिवसीय यात्रा पर राजनाथ सिंह ने लेह के स्ताकना में भारतीय सेना के एक खास कार्यक्रम में हिस्सा भी लिया।

राजनाथ सिंह ने यहाँ जवानों को संबोधित करते हुए उनका हौसला बढ़ाया। रक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्वाभिमान सबसे ऊपर है और इसलिए इससे समझौता नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वाभिमान ने ही देश को आजादी दिलाई है।

लेह के लुकुंग चौकी पर पहुँचे रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, “जो कुछ भी अब तक बातचीत की प्रगति हुई है, उससे मामला हल होना चाहिए। कहाँ तक हल होगा इसकी गारंटी नहीं दे सकता, लेकिन इतना यकीन मैं जरूर दिलाना चाहता हूँ कि भारत की एक इंच जमीन भी दुनिया की कोई ताकत छू नहीं सकती, उस पर कोई कब्ज़ा नहीं कर सकता।”

राजनाथ सिंह ने यह भी कहा, “सबसे बड़ा स्वाभिमान होता है राष्ट्रीय स्वाभिमान। हमारे राष्ट्र की सीमाओं पर अगर कोई आँख उठाकर देखने की कोशिश करता है तो हमारा राष्ट्रीय स्वाभिमान जाग उठता है। भारत स्वाभिमान से समझौता नहीं करेगा। यदि कोई चोट पहुँचाने की कोशिश करेगा तो उसे मुँहतोड़ जवाब देंगे। आप सभी पर पूरे देश को नाज है। आप सभी लोगों पर पूरे देश को भरोसा है। आपलोगों के बीच मैं खुद को गौरवान्वित महसूस करता हूँ।”

राजनाथ सिंह ने आगे कहा, “हमारे जवानों ने शहादत दी है। इसका ग़म 130 करोड़ भारतवासियों को भी है। यदि हम आज लद्दाख़ में खड़े हैं तो आज के दिन मैं कारगिल युद्द में भारत की सीमाओं की अपने प्राणों की बाज़ी लगाकर रक्षा करने वाले बहादुर सैनिकों को भी स्मरण एवं नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।”

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जिसने समस्त विश्व में शांति का संदेश दिया है। हमने आज तक किसी भी देश पर आक्रमण नहीं किया और न ही किसी की जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की है। भारत ने हमेशा वसुैधव कुटुम्बकम का संदेश दिया है। भारत हमेशा से शांति चाहता है।

वहीं राजनाथ सिंह ट्वीट के जरिए भी लोगों तक अपने दौरे की जानकारी दे रहे हैं। जहाँ उन्होंने लिखा, “आज सुबह लद्दाख़ पहुँच कर सीमावर्ती इलाक़ों का दौरा किया और लुकुंग चौकी पर जाकर भारतीय सेना के जाँबाज जवानों एवं अधिकारियों के दर्शन करते हुए उनसे बातचीत करने का अवसर मिला।” उन्होंने कहा कि भारत का नेतृत्व सशक्त है। हमें नरेंद्र मोदी जैसा प्रधानमंत्री मिला है। फ़ैसला लेने वाला प्रधानमंत्री मिला है।

गौरतलब है कि इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 3 जुलाई को एक दिवसीय मौके पर लेह-लद्दाख पहुँचे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लद्दाख का अचानक दौरा कर चीन के साथ सीमा विवाद से निपटने में भारत की दृढ़ता का संकेत दिया था। मोदी ने उन जवानों से बातचीत की थी जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। उन्होंने बिना चीन का नाम लिए चीन को चेतावनी भी थी। साथ ही जवानों का हौसला भी बढ़ाया था।

उत्तर प्रदेश: MLA के भाई पर मंदिर से चप्पल चुराने, छेड़खानी का आरोप, मंदिर समिति ने की जाँच की माँग

उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर से भारतीय जनता पार्टी के विधायक श्यामधनी राही के भाई पर मंदिर परिसर से श्रद्दालुओं की चप्पल चोरी का आरोप लगा है। शिकायतकर्ता ने विधायक के भाई पर मंदिर में चोरी का अलावा महिलाओं के साथ छेड़खानी का भी गंभीर आरोप लगाया है। सिद्धार्थनगर थाने से इस संबंध में शिकायत की गई है।

थाना सिद्दार्थनगर पुलिस के मुताबिक शिकायत की जाँच की जा रही है। अभी तक वह किसी प्रमाण तक नहीं पहुँची है, जिससे यह स्पष्ट कहा जा सके कि आरोप सही हैं या नहीं।

भाजपा विधायक के भाई के खिलाफ यह शिकायत सिंहेश्वरी देवी मंदिर के संचालक, आचार्य दुर्गेश मिश्रा दिव्यांशु द्वारा दर्ज कराई गई है। शिकायत के अनुसार, सिंहेश्वरी देवी मंदिर, नौगढ़ थाना, जनपद सिद्दार्थनगर के परिसर में आए दिन श्रद्दालुओं के चप्पल, हेलमेट और मोबाइल जैसी चीजें चोरी हो जाती हैं।

शिकायतकर्ता ने कहा है कि चोरी के साथ ही मंदिर में महिलाओं के साथ अभद्रता भी होती रहती है। इसमें आरोप लगाया गया है कि जब इस सम्बन्ध में मंदिर समिति के लोगों ने खोजबीन शुरू की तो भाजपा नेता श्यामधनी राही के भाई शिव प्रसाद उर्फ़ त्यागी से यह सब बरामद हुए हैं और फिर श्रद्दालुओं को वापस भी कर दिया गया।

शिकायतकर्ता ने कहा है कि इस सम्बन्ध में थाने को भी कई बार अवगत कराया जा चुका है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि चोरी को लेकर जब त्यागी से बात की गई तो उसने कथित तौर पर यह जवाब दिया कि वह विधायक का भाई है और सामान नहीं लौटाएगा।

मंदिर संचालक ने पुलिस से इस सम्बन्ध में संज्ञान लेते हुए CCTV कैमरा की जाँच करने और आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही है। उनका कहना है कि मोबाइल, हेलमेट और चप्पल चुराने से श्रद्धालुओं को समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

कश्मीर में आतंकियों के निशाने पर बीजेपी नेता, सुरक्षा एजेंसियों ने जारी किया अलर्ट: 5 अगस्त आने से बढ़ी बौखलाहट

केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में लगातार होते आतंकियों के सफाई अभियान के कारण अब उनकी बौखलाहट बीजेपी राज्य इकाई के नेताओं कार्यकर्ताओं पर निकलने लगी है। घाटी में लगातार बीजेपी नेताओं पर आतंकी हमलें और अपहरण के मामले सामने आ रहे है। इसमें आई गति की मुख्य वजह 370 हटाए जाने के 1 साल पूरा होने को भी माना जा रहा है। वर्षगाँठ नजदीक आने के साथ ही घाटी में बौखलाए आतंकियों से प्रशासन ने खासतौर से बीजेपी नेताओं को सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

दरअसल, सुरक्षा एजेंसियों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया जा रहा है कि आतंकियों ने कई बीजेपी नेताओं को मौत के घाट उतारने की योजना बनाई है। जिसकी खबर सुरक्षा एजेंसियों को लगने के बाद उन्होंने कश्मीर के कई भाजपा नेताओं की सुरक्षा बढ़ा दी हैं। इसके साथ ही सभी को 5 अगस्त तक अलर्ट रहने के लिए भी कहा गया है।

जम्मू-कश्मीर पुलिस को मिले इनपुट के आधार पर अल बदर संगठन के पाकिस्तानी आतंकी भाजपा प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर की हत्या के साजिश को अंजाम दे सकते हैं। आतंकी पुलिस की वर्दी में भी हमला कर सकते हैं। इसी के मद्देनजर पुलिस ने अल्ताफ ठाकुर की सुरक्षा बढ़ा दी है। उनके घर के बाहर भी सुरक्षाबल तैनात कर दिए गए हैं। उन्हें एहतियात बरतने को कहा गया है। बता दें ठाकुर की सुरक्षा में पहले से ही कई पीएसओ तैनात किए गए थे।

कश्मीर में इस वक्त राष्ट्रवादी विचारधारा रखने वाले बीजेपी के नेता और कार्यकर्ता आतंकियों के निशाने पर है। जहाँ अभी बांदीपोरा में बीजेपी नेता की हत्या का मामला सुलझा भी नहीं था। वहीं हाल ही में बीजेपी नेता और सोपोर में वाटरगाम नगरपालिका के उपाध्यक्ष मेहराजउद्दीन मल्ला का अपहरण कर लिया गया था। इन घटनाओं से सहमे अबतक बीजेपी के 6 स्थानीय नेताओं ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार भाजपा नेता वसीम बारी की बर्बरतापूर्ण हत्या करने बाद आतंकियों ने घाटी में सभी भाजपा कार्यकर्ताओं को पार्टी छोड़ने का आदेश जारी किया था। जिसमें उन्होंने बीजेपी के लिए कार्यरत और घाटी में राष्ट्रवादी विचारों को बढ़ावा देने वाले सभी नेताओं को जान के खतरे की चेतावनी दी थी। जिसके बाद ख़ौफ का ऐसा आलम शुरू हुआ कि एक के बाद एक छह नेताओं ने अलग-अलग वजह बताते हुए पार्टी से दूरी बना ली।

इस्तीफा देने वाले नेताओं में बीजेपी की महिला नेता मुबीना बानो, बशीर अहमद मलिक बारामूला में नेता मारूफ बट और कुपवाड़ा में आसिफ अहमद शामिल हैं।

गौरतलब है कि 15 जुलाई को बारामुला जिले में एक भाजपा कार्यकर्ता मेहराजुद्दीन मल्ला का अज्ञात व्यक्तियों द्वारा अपहरण कर लिया गया था। जिसके लगभग 11 घंटे बाद पुलिस ने उन्हें रेस्क्यू कर लिया था।

बारामूला के वाटरगाम में नगर समिति के उपाध्यक्ष मेराजुद्दीन मल्ला को बचाने के लिए चलाए गए ऑपरेशन को लश्कर के सोपोर कमांडर सज्जाद उर्फ ​​हैदर के परिवार के सदस्यों को हिरासत में लेकर शुरू किया गया था। गौरतलब है कि दो दिन पहले हैदर ने जम्मू-कश्मीर के पुलिस और भाजपा पार्टी कार्यकर्ताओं को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी थी। जिसके बाद मल्ला का अपहरण कर लिया गया। आतंकवादियों ने इसी तरह की एक धमकी कश्मीर के महानिरीक्षक (IG), को भी जारी की थी।

वहीं बीते सप्ताह बुधवार 8 जुलाई को जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले में आतंकियों ने देर शाम भाजपा के जिलाध्यक्ष वसीम बारी की हत्या कर दी थी। आतंकवादियों ने वसीम बारी के अलावा उनके पिता और भाई की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई। उमर भाजपा की जिला युवा इकाई का सदस्य थे, जबकि उनके पिता बशीर शेख भाजपा के जिला उपाध्यक्ष रह चुके थे। हमला करने के बाद आतंकी मौके से फरार हो गए थे।

यू तिरोत सिंह: तीर-भालों और तलवारों से अंग्रेजों की ईंट से ईंट बजाने वाला राजा

अजादी की लड़ाई के कई नायकों को, उनके साहस और शौर्य को, उनके योगदान को दो-चार पंक्तियों में समेट उन्हें मुख्यधारा से दूर कर दिया गया। आज 17 जुलाई  को एक ऐसे ही नायक की 185वीं पुण्यतिथि है। ब्रिटिश साम्राज्य को भारत से उखाड़ फेंकने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले उस योद्धा का नाम है, यू तिरोत सिंह (U Tirot Sing)।

मेघालय के इस योद्धा पर पूरे नॉर्थ-ईस्ट को गर्व होता है। तिरोत सिंह ने बहुत छोटी उम्र में ब्रिटिश साम्राज्य के ख़िलाफ़ बिगुल फूँक दिया। अपने करीब 10,000 लड़ाकों के साथ उनकी ईंट से ईंट बजाकर रख दी।

वैसे तो खासी समुदाय से आने वाले तिरोत सिंह खडसॉफ्रा सियामेशिप (Khadsawphra Syiemship) के राजा थे। लेकिन उन्हें उस पद पर बेहद संवैधानिक रूप से आसित करवाया गया था। उनके भीतर का जज्बा बिलकुल किसी योद्धा जैसा था।

राजा तिरोत सिंह स्वयं भी अपनी प्रजा की भलाई के बारे में दिन रात सोचते थे। इसी कारण जब ईस्ट इंडिया कंपनी के डेविड स्कॉट के नेतृत्व में ब्रिटिशों ने उनके सामने प्रस्ताव रखा कि वह गुवाहाटी को सिलहट से जोड़ने के लिए सड़क निर्माण करना चाहते हैं तो उन्होंने उस विचार का स्वागत किया। 

तिरोत सिंह को लगा कि इससे उनके समुदाय को सविधा होगी और वह अपने व्यापार को विस्तार दे पाएँगे। उन्होंने साल 1827 में डेविड स्कॉट के साथ अपने दरबार में बैठक की। इस बैठक में लंबी चर्चा के बाद गुवाहाटी के नजदीक रानी से नोंगख्लो होते हुए सुरमा घाटी तक सड़क निर्माण को मँजूरी दी गई।  

सड़क बनने का काम शुरू हुआ तो उन लोगों के बंगले भी नोंगख्लो में आ गए। लगभग 18 महीनों के लिए, कार्य सुचारू रूप से आगे बढ़ा और अधिकारियों ने स्थानीय आदिवासियों के साथ स्वतंत्र रूप से मिश्रित होकर सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखे।  मगर, एक दिन एक बंगाली सेवक ने तिरोत सिंह को यह बताया कि अंग्रेज इस रोड को बनाने के साथ स्थानीय लोगों पर कर लगाने की योजना बना रहे है और सड़क पूरी होते ही उन्हें अपने अधीन कर लेंगे।

तिरोत सिंह को ब्रिटिशों की जालसाजी समझने में देर न लगी। उन्हें मालूम चल गया कि इस सड़क के जरिए ब्रिटिश किस घिनौनी मंशा को अंजाम देना चाहते हैं। उन्होंने फौरन सभी को नोंगख्लो खाली करने को कहा। मगर, ब्रिटिशों ने इसे नजरअंदाज कर दिया।

तिरोत सिंह इस नाफरमानी को देखकर नाराज हो गए। इसके बाद उन्होंने अपने कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर अंग्रेजों पर 4 अप्रैल 1829 को हमला किया। उधर, ब्रिटिशों ने भी तिरोत सिंह की नाराजगी देखकर खुद को बचाने के लिए अपने सैनिकों को सिलहट और कामरुप में बुलाया और उनकी आवाज दबानी चाही। किंतु तिरोत सिंह के नेतृत्व में खासी चुप न बैठे और उन्होंने अंग्रेजों के ख़िलाफ़ जंग छेड़ने की पेशकश की।

यू तिरोत सिंह के सिर्फ़ पारंपरिक युद्ध के समान जैसे तीर, भाला, तलवार आदि थे। अंग्रेजों की बंदूक और युद्ध की रणनीति के ख़िलाफ़ ये असरदार नहीं थे। बावजूद तिरोत सिंह के नेतृत्व में खासी समुदाय के लड़ाकों ने हार नहीं मानी। 

चार साल तक अंग्रेजों से उनका युद्ध चला। तिरोत सिंह की ताकत लगातार क्षीण हो रही थी। लेकिन वे अंग्रेजों के सामने झुकने को तैयार नहीं हुए। घायल हालत में उन्होंने गुफाओं में जाकर शरण ली। दुर्भाग्यवश उनके किसी अपने ने ही ब्रिटिशों के साथ मिलकर छल कर दिया और करीब 9 जनवरी 1833 को उनका जबरन सरेंडर करवाया गया।

इसके बाद उन्हें ढाका भेजा गया। जहाँ कैद में रहने के दौरान उन्होंने 17 जुलाई 1835 में अपनी आखिरी साँस ली। माना जाता है कि उन्हें पेट में परेशानी शुरू हो हई थी। जिसके कारण उनकी मृत्यु हुई। आज तिरोत सिंह को भारत के उन शूरवीरों के साथ याद किया जाता है जिन्होंने ब्रिटिशों के ख़िलाफ़ कभी अपना सिर अपनी मर्जी से नहीं झुकाया और विपरीत हवा होने के बावजूद मैदान में अड़े रहे।

मेघालय के इस जाबाँज का उल्लेख ब्रिटिश इतिहासकार सर एडवर्ड गेट की किताब ‘The History of Assam’ और प्रोफेसर पीएन दत्ता की ‘1986 में असम शिलांग के इतिहास की झलक’ में भी है। इसके अलावा आज के दिन सोशल मीडिया पर भी लोग तिरोत सिंह को याद करते हुए नमन कर रहे हैं और उनसे जुड़ी कहानी साझा कर उनके शौर्य को नमन कर रहे हैं।

राजस्थान: केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत और निलंबित कॉन्ग्रेस MLA भँवरलाल शर्मा पर राजद्रोह का मुकदमा

राजस्थान की सियासत में उतार-चढ़ाव का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। राजस्थान कॉन्ग्रेस के दो दिग्गज नेताओं के बीच का विवाद कुछ ही समय पहले एक ऑडियो क्लिप पर पहुँच गया था। लेकिन अब बहस आरोप प्रत्यारोप से कहीं आगे बढ़ चुकी है और मामले में कई नाम सामने आ चुके हैं। ऑडियो क्लिप मामले में केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, कॉन्ग्रेस से निलंबित विधायक भँवरलाल शर्मा और फिलहाल हिरासत में लिए गए संजय जैन पर राजद्रोह के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है।  

इसके अलावा तीनों पर आपराधिक षड्यंत्र रचने की धाराएँ भी लगाई गई हैं। गुरुवार को ऑडियो क्लिप सामने आते ही विवाद शुरू हो गया था। अशोक राठौड़ एडीजी (एटीएस और एसओजी) ने इस मामले पर कहा कि उन्हें कॉन्ग्रेस नेता महेश जोशी से कुल दो शिकायतें मिली थीं। इस पर संज्ञान लेते हुए शेखावत, भँवरलाल और संजय जैन पर धारा 124 (A) राजद्रोह और 120 (B) आपराधिक षड्यंत्र के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।  

गजेन्द्र सिंह का कहना है कि वह संजय जैन को नहीं जानते हैं। वह है कौन मैं तो यह भी नहीं जानता हूँ। न्यूज़ 18 से बात करते हुए शेखावत ने कहा, “ऑडियो क्लिप में मेरी आवाज़ नहीं है। यह ऑडियो पूरी तरह नकली है, मैं किसी भी तरह की जाँच के लिए तैयार हूँ।”

आज के दिन जयपुर में हुई प्रेस वार्ता के दौरान रणदीप सुरजेवाला ने ऑडियो टेप के कुछ अंश पढ़ कर सुनाए थे। सुरजेवाला ने बताया, “भँवरलाल ने कहा उनके पास संख्या नहीं है, आखिर वह कितने समय तक विधायकों को होटल में रख सकते हैं?” प्रेस वार्ता के वीडियो में ठीक 8वें मिनट की शुरुआत में सुरजेवाला ने कहा कि भँवरलाल के मुताबिक़ गहलोत सरकार के पास विधायकों की संख्या नहीं है।  

राजस्थान सरकार के ओएसडी ने एक ऑडियो साझा किया है, ऑडियो क्लिप सामने आने के बाद ऐसा दावा किया जा रहा है कि केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह जयपुर, संजय जैन नाम के व्यक्ति के ज़रिए विधायक भँवरलाल शर्मा के संपर्क में आए थे।

वहीं दूसरी तरफ आज ही के दिन उच्च न्यायालय में सचिन पायलट और उनके साथ कुल 18 बागी विधायकों की याचिका पर सुनवाई भी होनी है। बीते दिन यह सुनवाई टल गई थी, दरअसल राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष ने सचिन पायलट समेत कई विधायकों को अयोग्यता की सूचना जारी कर दी थी।

राजस्थान: सचिन पायलट गुट के MLA पर फिलहाल कार्रवाई नहीं कर पाएँगे स्पीकर, हाई कोर्ट में अब सोमवार को सुनवाई

राजस्थान कॉन्ग्रेस की अंदरूनी लड़ाई बयानबाजी, आरोप-प्रत्यारोप से होते हुए अदालत की चौखट तक पहुॅंच चुकी है। सचिन पायलट सहित 19 विधायकों की याचिका पर राजस्थान हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने शुक्रवार (17 जुलाई 2020) को सुनवाई की। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद सोमवार सुबह 10 बजे तक के लिए सुनवाई टाल दी। यानी अब अगली सुनवाई 20 जुलाई को 10 बजे के बाद होगी।

विधायकों की ओर से विधानसभा स्पीकर की नोटिस को चुनौती दी गई थी। सुनवाई के दौरान सचिन पायलट की ओर से वकील हरीश साल्वे ने अपनी दलील रखी। उन्होंने अपनी बात कहते हुए स्पीकर के आदेश पर सवाल उठाए। उन्होंने सचिन पायलट गुट का पक्ष रखते हुए कहा है कि इस मामले में दसवीं अनुसूची का उल्लंघन नहीं हुआ है। उन्होंने स्पीकर से कोर्ट में बुलाने की माँग की। साल्वे ने कहा कि कहा कि पायलट गुट ने दल बदल कानून का उल्लंघन नहीं किया है।

स्पीकर से कोर्ट ने इस मामले में मंगलवार शाम 5 बजे तक कोई फैसला नहीं लेने को भी कहा है। पहले माना जा रहा था कि स्पीकर जल्द फैसला लेंगे, क्योंकि उन्होंने पायलट और उनके साथी विधायकों को जवाब देने के लिए शुक्रवार शाम तक का वक्त दे रखा था।

हरीश साल्वे ने सचिन पायलट के पक्ष में दलील देते हुए कहा कि पार्टी को जगाना बगावत नहीं है। विधानसभा के बाहर दल-बदल कानून का प्रावधान लागू नहीं होता है। ऐसे में स्पीकर को नोटिस देने का अधिकार नहीं है। साल्वे ने कहा कि पार्टी ग्रुप ने कोई विद्रोह नहीं किया है, वह सिर्फ अपनी बात रखने के लिए गए थे।

इस मामले में हरीश साल्वे की ओर से पहले नोटिस को स्थगित करने की बात कही गई, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। इसके बाद साल्वे ने कोर्ट से इस मामले में समय माँगा।

हरीश साल्वे के बाद अभिषेक मनु सिंघवी विधानसभा अध्यक्ष की ओर से दलील पेश की। उन्होंने अपनी दलील में कहा कि सचिन पायलट गुट की याचिका प्री-मैच्योर है, इसलिए इसको खारिज किया जाना चाहिए।

इससे पहले सरकार के मुख्य सचेतक महेश जोशी ने पूरे मामले में पार्टी बनाए जाने को लेकर याचिका डाली थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया था। इन विधायकों से स्पीकर ने पार्टी ह्विप नहीं मानने पर सदस्यता समाप्त करने को लेकर जवाब तलब किया है। गुरुवार को 19 विधायकों ने नोटिस के खिलाफ याचिका दायर की थी। सुनवाई के बाद मामला डिवीजन बेंच को ट्रांसफर कर दिया गया था।

इस पूरे प्रकरण की शुरुआत सरकार गिराने की कथित साजिशों को लेकर सचिन पायलट को बयान दर्ज कराने के लिए भेजे गए नोटिस के बाद हुई थी। पायलट के आक्रामक रुख को देखते हुए उनसे पार्टी के प्रदेश ईकाई की कमान के साथ-साथ उप मुख्यमंत्री का पद भी छीन लिया गया था। इस विवाद में ऑडियो क्लिप भी सामने आया है जिसे आधार बना कर कॉन्ग्रेस ने भाजपा पर विधायकों को खरीदने का आरोप लगाया है।

जयपुर में कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि भाजपा के केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भाजपा से संबंधित संजय जैन, कॉन्ग्रेस विधायक भँवरलाल शर्मा के साथ मिल सरकार गिराने की साजिश रच रहे थे। वायरल हो रहे ऑडियो के आधार पर रणदीप सुरजेवाला ने यह भी आरोप लगाया है कि गजेन्द्र सिंह शेखावत, भँवरलाल शर्मा के साथ बैठक में उन्हें अपनी तरफ लेकर आने की योजना बना रहे हैं।

सुरजेवाला ने बताया, “भँवरलाल ने कहा उनके पास संख्या नहीं है, आखिर वह कितने समय तक विधायकों को होटल में रख सकते हैं?” प्रेस वार्ता के वीडियो में ठीक 8वें मिनट की शुरुआत में सुरजेवाला ने कहा कि भँवरलाल के मुताबिक़ गहलोत सरकार के पास विधायकों की संख्या नहीं है। हालॉंकि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने दावा किया था कि उनके पास विधायकों का पर्याप्त संख्या बल है।

एक समाचार समूह में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ गजेन्द्र सिंह और संजय जैन के बीच बातचीत के कुल 3 ऑडियो सामने आए थे। जिस ऑडियो में लगाए गए आरोपों के आधार पर 30 विधायकों को खरीदने की बात हो रही है। रिपोर्ट के मुताबिक़ यह समझौता पहले ही हो गया था और दिल्ली में सब कुछ तय हुआ। इन ऑडियो की पुष्टि करते हुए समाचार समूह भास्कर ने कहा कुल तीन ऑडियो थे, दो राजस्थानी में और एक हिंदी-अंग्रेज़ी में।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि ऑडियो में एक व्यक्ति 30 विधायक खरीदने की बात कर रहा है, साथ ही उसने कहा जल्द ही यह लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा। बातचीत से इस बात का अंदाज़ा भी लगाया जा सकता है कि उनसे जुड़े हुए लोग दिल्ली में मौजूद हैं।