Home Blog Page 4675

‘ईसाई इस कायनात के सबसे घटिया काफिर, आपको इस देश से उनका सफाया करना होगा’

पाकिस्तान में कट्टरपंथ अब खुलकर अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ जहर उगलता नजर आ रहा है। सोशल मीडिया पर इस समय एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में एक मौलवी ईसाइयों को दुनिया का सबसे गंदा काफिर बता रहा है। इस वीडियो को वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी के पेज पर शेयर किया गया है।

वीडियो में मौलवी को कहते हुए सुना जा सकता है:

“ईसाई कायनात के सबसे घटिया काफिर होते हैं। हम लोगों को चाहिए कि हम इन्हें अपने आपसे बिलकुल दूर कर दें। ये जो स्कूल खरीद रहे हैं, जगह खरीद रहे हैं और अपने सेंटर बना रहे हैं, अस्पताल बना रहे हैं। इस मुल्क में भी इन लोगों को रहने का हक नहीं है। इस मुल्क से इन्हें बाहर करो ताकि ये वहीं ट्रंप के पास चले जाएँ और उनकी जूतिया पॉलिश करें। इधर पाकिस्तान में इन लोगों का कोई काम नहीं है।”

इस वीडियो को पाकिस्तान के सामाजिक कार्यकर्ता और लेखक राहत ऑस्टिन ने भी शेयर किया है। उन्होंने मौलवी के भाषण के मुख्य अंशों पर ध्यान केंद्रित करवाते हुए लिखा, “ईसाई पैगंबर पर यकीन नहीं करते। वो पूरी दुनिया के सबसे घटिया काफिर हैं। आपको खुद को उनसे किसी भी कीमत पर दूर रखना चाहिए। उन्हें पाकिस्तान में रहने का कोई अधिकार नहीं है। आपको उनका इस देश से सफाया करना होगा।”

यहाँ बता दें कि इस मौलवी के अलावा इंटरनेट पर पाकिस्तान से आई एक अन्य वीडियो भी वायरल हो रही है। जो वहाँ की बहुसंख्यक आबादी के पाखंड की पोल खोलती है। दरअसल, कुछ समय पहले पाकिस्तान का एक युवक इस्लामाबाद में मंदिर बनने की बात पर अपने बच्चों से हिंदुओं को धमकी दिलाते हुए नजर आया था और बच्चा कह रहा था कि अगर मंदिर बना तो वो हिंदुओं को चुन-चुन कर मारेगा।

मगर, अब वही व्यक्ति एक दूसरी वीडियो में जनता से माफी माँग रहा है। वीडियो में उसे कहते सुना जा सकता है कि लोगों को उसकी वीडियो पसंद नहीं आई और कई लोग आहत भी हुए इसलिए अब वह ऐसे विषय पर कभी वीडियो नहीं बनाएगा। उसने इस वीडियो में हिंदू बिरादरी के लोगों से, अपने पाकिस्तानी भाइयों से और इमरान सरकार से माफी माँगी है। अपने वीडियो में उसने कहा है कि अब वो सियासत पर वीडियो नहीं बनाएगा बल्कि सिर्फ़ कॉमेडी वीडियो बनाएगा।

जिस कॉन्ग्रेस ने राम के अस्तित्व को सुप्रीम कोर्ट में किया था खारिज, वो अब ‘भारत के राम’ विवाद में कूदी

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कल श्राीराम भगवान के जन्मस्थान अयोध्या को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि भारत में मौजूद अयोध्या नकली है और असली अयोध्या नेपाल में है। इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर एक अलग बहस छिड़ गई। 

स्वयं नेपाल के लोगों ने ही PM ओली को उनकी इस टिप्पणी पर घेर लिया और भारतीयों ने भी इस पर उनकी खूब आलोचना की। नेपाल की विपक्षी पार्टियों ने भी इसे हास्यास्पद बताया। इसी बीच यूथ कॉन्ग्रेस ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। 

यूथ कॉन्ग्रेस ने मौके का फायदा उठाकर अपने ट्विटर पर लिखा, “पहले उन्होंने भारतीय न्यूज चैनलों को बैन किया और अब नेपाल की इतनी हिम्मत कि ये कह रहे हैं कि भगवान राम भारतीय मिट्टी के पुत्र नहीं हैं।” जिसके बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें ट्रोल कर दिया और बताया कि कैसे कॉन्ग्रेस ने राम मंदिर पर अड़ंगे लगाए थे।

दरअसल, कॉन्ग्रेस की इस टिप्पणी पर सबसे पहले तो ये गौर करने वाली बात है कि नेपाल ने श्रीराम को ‘नेपाली’ नहीं कहा है। बल्कि सिर्फ़ केपी शर्मा ओली ने उन्हें नेपाली बोला है। मगर, कॉन्ग्रेस ने इस बात पर केपी शर्मा को आड़े हाथों लेने की बजाय पूरे नेपाल पर ही निशाना साध दिया।

सबसे हैरत की बात है कि भगवान राम पर ये टिप्पणी उस पार्टी के युवा विंग ने की है, जिसने एक समय में सुप्रीम कोर्ट में श्रीराम के अस्तित्व को खारिज कर दिया था। इसी कॉन्ग्रेस ने रामसेतु पर मामला उठने पर सर्वोच्च न्यायालय को कहा था कि श्री राम के अस्तित्व का कोई ऐतिहासिक सबूत नहीं है और रामायण में वैज्ञानिक व ऐतिहासिक सत्यता का अभाव है।

सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में कॉन्ग्रेस ने कहा था कि वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस को प्राचीन भारतीय साहित्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है, लेकिन ये इसमें मौजूद पात्रों के अस्तित्व और उसमें चित्रित घटनाओं को अस्तित्व साबित करने के लिए ऐतिहासिक रिकॉर्ड नहीं कहा जा सकता।

अब खुद सोचिए, एक पार्टी जिसे श्रीराम के अस्तित्व पर ही संदेह हो और एक समय में वह उसे खारिज करने का प्रयास कर चुकी हो। आज उसकी यूथ विंग ऐसे ट्वीट करके क्या लोगों में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही। और क्या पूरे नेपाल का नाम लेकर भारत के साथ उसके संबंधों को बिगाड़ने का प्रयास नहीं कर रही?

‘मुझे बचा लो… बॉयफ्रेंड हबीब मुझे मार डालेगा’: रिदा चौधरी का आखिरी कॉल, फर्श पर पड़ी मिली लाश

गुरुग्राम में एक युवती की संदिग्ध मौत का मामला सामने आया है। साइबर सिटी में एक इंटीरियर डिजाइनर कम्पनी की सीनियर सेल्स मैनेजर रिदा मसरूर चौधरी की हत्या कर दी गई है। रिदा की बहन का आरोप है कि उसके बॉयफ्रेंड हबीब ने ही उसकी हत्या की है। आरोप है कि हबीब ने रात में गला घोंट कर रिदा की हत्या की। बाद में शव को पँखे से लटका कर इसे आत्महत्या का रूप देने का प्रयास किया। मामले की गुरुग्राम पुलिस जाँच कर रही है।

रिदा मसरूर चौधरी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ की रहने वाली थीं। डीएलएफ फेज-3 थाना ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। केला नगर स्थित सेंट्रल टावर निवासी रिदा चौधरी एक पीजी में रहा करती थी। उसकी हबीब उर्फ़ विवान से क़रीब एक वर्ष पूर्व दोस्ती हुई थी, जो प्यार में बदल गई। उसने ख़ुद को अविवाहित बताया था और शादी का वादा भी किया था। बाद में पता चला कि वो शादीशुदा है और उसका एक बेटा भी है।

हबीब की पोल खुलने के बाद रिदा को उससे घृणा हो गई थी और वो उस से किसी तरह दूर जाना चाहती थी लेकिन हबीब इसके लिए तैयार नहीं था और वो रिदा को हाथ से जाने नहीं देना चाहता था। इस बात को लेकर दोनों में तकरार होती थी और विवाद बाद में कुछ ज्यादा ही बढ़ गया था। हत्या वाली रात रिदा ने अपनी बड़ी बहन तरन्नुम को वीडियो कॉल किया था। कॉल पर वो लगातार कह रही थी कि मुझे बचा लो, हबीब मुझे मार डालेगा।

द्वारका में रह रही रिदा की एक अन्य बहन सीमा को जब इसकी जानकारी मिली तो उसने पुलिस को सूचित किया। पुलिस जब रात में मौके पर पहुँची तो पाया कि रिदा का शव फर्श पर पड़ा हुआ है, साड़ी पंखे से लटकी हुई थी। हत्या के बाद इसे आत्महत्या की तरह दिखाने के लिए साजिश रची गई थी। सहायक पुलिस आयुक्‍त प्रीतपाल का कहना है कि आरोपित की तलाश जारी है। रिदा के शरीर पर चोट के कई निशान मिले हैं।

रिदा का मोबाइल फोन भी गायब है। साथ ही सीसीटीवी कमरे की फुटेज भी नहीं मिल रही है। रिदा रविवार को अलीगढ़ जाने वाली थी क्योंकि उसने गुरुग्राम छोड़ने का मन बना लिया था। उसे सोमवार को अपनी बहन के बेटे के जन्मदिवस कार्यक्रम में भी सम्मिलित होना था। ‘पत्रिका’ की खबर के अनुसार, एक भाई व चार बहनों में रिदा मसरूर चौधरी सबसे छोटी थी। 2010 में उसका निकाह हुआ था लेकिन फिर तलाक हो गया था।

पोस्टमार्टम करने वाले सर्जन का कहना है कि शुरुआती तौर पर रिदा की मौत दम घुटने के कारण हुई है। उसके शरीर पर बाईट के भी कई निशान है। उसकी मौत की खबर रात के 11 बजे मिली। उससे वीडियो कॉल बीच में कट जाने के कारण बहन ने कई बार कॉल किया लेकिन रिसीव नहीं हुआ। उसके पिता खाड़ी देशों में डॉक्टर रह चुके हैं। आरोपित अभी भी फरार चल रहा है, जिसकी तलाश जारी है।

पाक के पूर्व विदेश मंत्री पर ईशनिंदा का मामला दर्ज: कहा था- सभी धर्म एक समान व इस्लामाबाद में मंदिर के हक़ में उठाई आवाज

पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री और PML-N के नेता ख्वाजा आसिफ देश में धार्मिक असमानता के खिलाफ बोलने के लिए ईशनिंदा के आरोपों का सामना कर रहे हैं।

ख्वाजा आसिफ के खिलाफ पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के नेता कमर रियाज ने ईशनिंदा का मामला दर्ज करवाया है। शिकायतकर्ता एडवोकेट कमर रियाज़ के अनुसार, आसिफ ने अपने हालिया नेशनल एसेंबली भाषण में कहा कि कोई भी धर्म दूसरे से श्रेष्ठ नहीं है। पीएमएल-एन नेता ने कहा कि इस्लाम और दुनिया के अन्य सभी धर्म समान हैं।

उन्होंने जफरवाल पुलिस को अपनी शिकायत में कहा, “उनके शब्द पवित्र कुरान और सुन्नत की शिक्षाओं के खिलाफ हैं, और इस्लाम के खिलाफ ईशनिंदा के समान हैं। यह शरिया के अनुसार एक गंभीर अपराध है, जिसमें उन्होंने आसिफ और काफिरों को समान घोषित किया है।”

पीटीआई नेता ने अपने आवेदन में पवित्र कुरान के कुछ छंदों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आसिफ ने सभी मजहब वालों की भावनाओं को आहत किया।

ख्वाजा आसिफ ने गुरुवार को सदन के पटल पर कहा कि पाकिस्तान का संविधान सभी नागरिकों को उनकी जाति, पंथ और धर्म के बावजूद समान अधिकार प्रदान करता है। उन्होंने इस्लामाबाद में एक हिंदू मंदिर के निर्माण के विरोध में सांसदों के एक समूह की आलोचना की

उन्होंने इस्लामाबाद में कृष्ण मंदिर का विरोध करने वालों को लेकर कहा कि संविधान के आलोक में कोई भी धर्म दूसरे से श्रेष्ठ नहीं है। लोगों के प्रतिनिधियों के रूप में, समाज में सद्भावना और सहिष्णुता को बढ़ावा देने के लिए यह सांसदों पर निर्भर करता था।

आसिफ के भाषण से नाराजगी बढ़ गई, क्योंकि चरमपंथी हलकों ने सरकार से कथित ‘ईशनिंदा’ के खिलाफ मामला दर्ज करने की माँग की। बाद में, पीएमएल-एन के अध्यक्ष शहबाज शरीफ ने एक बयान जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि आसिफ द्वारा की गई टिप्पणी संविधान और इस्लाम के प्रावधानों के भीतर है।

शहबाज शरीफ, जो नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता हैं, ने ट्वीट किया, “इस्लाम, हमारा महान धर्म, इस्लामिक स्टेट में रहने वाले सभी समुदायों के अधिकारों और स्वतंत्रता के बारे में स्पष्ट है। समानता पाकिस्तान के संविधान में एक बुनियादी सिद्धांत है। ख्वाजा आसिफ ने नेशनल एसेंबली में जो भी कहा, वो इस्लामी शिक्षाओं और संवैधानिक प्रावधान के संदर्भ में था।”

बता दें कि इससे पहले पाकिस्तान में गंभीर धार्मिक प्रताड़ना झेलने वाले हिंदुओं ने साहसिक निर्णय लिते हुए इस्लामाबाद में कृष्ण मंदिर का निर्माण कार्य जारी रखने का फैसला किया था। इस्लामिक देश की राजधानी में अल्पसंख्यक होने के बावजूद हिंदुओं ने 20,000 वर्गफुट में कृष्ण मंदिर बनाने का निश्चय किया था। यह जमीन उन्हें पाकिस्तान सरकार से आवंटित हुई थी।

इस फैसले के बाद कृष्ण मंदिर को लेकर कट्टरपंथियों की लगातार धमकियाँ मिल रही थी और इस्लामिक उलेमाओं से लेकर इस्लामिक नेता तक पाकिस्तान सरकार के इस फैसले के विरोध में आवाज बुलंद कर रहे थे। इसके खिलाफ फतवा भी जारी किया गया, जिसके बाद मंदिर निर्माण कार्य रोक दिया गया है।

सचिन पायलट को बर्खास्त करते ही गहलोत ने की राज्यपाल से मुलाकात, नजरबंद MLA ने लगाया कॉन्ग्रेस पर बदसलूकी का आरोप

राजस्थान कॉन्ग्रेस में दो फाड़ पूरी तरह से हो चुकी है और इसकी अब बस आधिकारिक घोषणा होनी ही बाकी रह गई है। राजस्थान कॉन्ग्रेस विधायक दल में कई बार बुलाए जाने के बावजूद शामिल नहीं होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के तहत बागी हो चुके सचिन पायलट से डिप्टी सीएम और प्रदेश कॉन्ग्रेस अध्यक्ष की कमान छीन ली गई है।

इसके फौरन बाद ही मंत्री और कॉन्ग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद सचिन पायलट की पहली प्रतिक्रिया आ गई है। सचिन पायलट ने अपने ट्विटर एकाउंट पर लिखा है – “सत्य को परेशान किया जा सकता है पराजित नहीं।”

ट्विटर बायो से कॉन्ग्रेस हटाया

सचिन पायलट ने अपने ट्विटर एकाउंट पर अपना बायो अपडेट करते हुए इसे ‘एमएलए, टोंक’ कर दिया है। इसके साथ ही सचिन पायलट ने अपने ट्विटर बॉयो से डिप्टी सीएम हटा दिया है और कहीं भी कॉन्ग्रेस का जिक्र नहीं है। सचिन पायलट के ट्विटर बॉयो में लिखा है- “टोंक से विधायक। आईटी, दूरसंचार और कॉर्पोरेट मामलों के पूर्व मंत्री, भारत सरकार। कमीशन अधिकारी, प्रादेशिक सेना।

डिप्टी सीएम और पीसीसी चीफ, गोविंद सिंह डोटासरा को राज्य इकाई प्रमुख के रूप में नियुक्त किए जाने के बाद जयपुर में कॉन्ग्रेस मुख्यालय से सचिन पायलट की नेमप्लेट भी हटा दी गई है।

इसके साथ ही राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार के तीन मंत्रियों का भी पत्ता साफ हो गया है। ये सचिन पायलट समर्थक माने जाते हैं। आज, मंगलवार को ही जयपुर के फेयरमोंट होटल में सीएलपी की बैठक में उपस्थित 102 विधायकों ने सर्वसम्मति से माँग की थी कि सचिन पायलट को कॉन्ग्रेस पार्टी से निकाला जाए।

सचिन पायलट को बर्खास्त करने के फैसले के बाद राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कहना है कि वो सचिन पायलट को पद से हटाने के फैसले से खुश नहीं हैं, लेकिन उन्होंने पार्टी के पास दूसरा कोई विकल्प बाकी नहीं छोड़ा था।

कॉन्ग्रेस विधायकों की बैठक के बाद राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने जयपुर के राजभवन में राज्यपाल कलराज मिश्र से मुलाकात की। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आने वाले दिनों में कैबिनेट फेरबदल के सम्बन्ध में राज्यपाल कलराज मिश्र को सूचित किया।

वहीं, कॉन्ग्रेस विधायक दल की बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कॉन्ग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि बैठक में शामिल नहीं होने और पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते सचिन पायलट को राजस्थान कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद समेत डिप्टी सीएम पद से सचिन पायलट को हटा दिया गया है।

सुरजेवाला ने कहा कि उनकी जगह गोविंद सिंह डोटासरा को कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि सचिन पायलट बीजेपी के झाँसे में आ गए, जिनकी कमी हमेशा अखरेगी। आलाकमान के पायलट को मनाने की सारी कोशिशें बेकार गई। ऐसे में भारी मन और खेद के साथ कुछ निर्णय लेने पड़े।

भारतीय ट्राइबल पार्टी के MLA ने लगाया राजस्थान सरकार पर बदसलूकी का आरोप

राहुल सिन्हा ने भारतीय ट्राइबल पार्टी के विधायक राजकुमार रोत का एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा है –

“राजस्थान में चल रही राजनीतिक उथल-पुथल के बीच विधायक भी नाजुक हालात से गुजर रहे हैं। राजस्थान की भारतीय ट्राइबल पार्टी के विधायक राजकुमार रोत ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने उनको जबरन बंधक बनाया हुआ है। अशोक गहलोत का दावा है कि उन्हें राजकुमार रोत का समर्थन मिला हुआ है। अब सवाल ये कि समर्थन करने वाले के साथ ऐसा तो विरोध करने वाले के साथ कैसा होगा?”

इस विडियो में राजकुमार रोत का कहना है कि उन्हें एक हिसाब से बंदी बना लिया है और पुलिस ने उन्हें घेर रखा है। MLA का कहना है कि उनके साथ बत्तमीजी की जा रही है, उनकी गाड़ी की चाबी भी उनसे छीन ली गई है और उन्हें कहीं आने-जाने नहीं दिया जा रहा।

जबकि, रिपोर्ट्स के अनुसार, राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम सचिन पायलट में खींचतान के बीच भारतीय ट्राइबल पार्टी के अध्यक्ष महेश भाई वसावा ने अपनी पार्टी के दोनों विधायकों को वोटिंग के दौरान अनुपस्थित रहने को कहा है।

अपने पत्र में भारतीय ट्राइबल पार्टी के अध्यक्ष महेश भाई वसावा ने कहा कि दोनों विधायक विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के समय न कॉन्ग्रेस को, न अशोक गहलोत को और न सचिन पायलट को और न ही बीजेपी को वोट करें। महेश भाई वसावा ने अपने दोनों विधायकों को निर्देश दिया हैं कि वोटिंग के दौरान वे अनुपस्थित रहें।

दलित हॉस्टल की जमीन पर कॉन्ग्रेस का ‘कब्जा’, गाँधी वाली 3478 वर्ग मीटर ED ने की अटैच

जमीन खरीद से जुड़े एक मामले में अब फिर गाँधी परिवार का नाम उछला है। टाइम्स नाऊ की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में बताया गया है कि गाँधी परिवार द्वारा मुंबई में खरीदी गई एक जमीन में अनियमतताएँ पाई गई हैं।

दस्तावेजों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि 3478 वर्ग मीटर की जमीन को दलितों के हॉस्टल के लिए आरक्षित किया गया था। लेकिन बाद में उसे कमर्शियल प्रॉपर्टी बना दिया गया। ईडी ने भी अपने रिकॉर्ड में इस जमीन को गाँधी परिवार से संबंधित बताया है। जिसे एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड से खरीदा गया।

रिपोर्ट बताती है, बांद्रा ईस्ट इलाके में स्थित ये जमीन साल 1983 में एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड को मिली थी। जिसे बाद में व्यावसायिक भूमि में तब्दील कर दिया गया। साल 2017 के हिसाब से इसकी कीमत 262 करोड़ रुपए होती है।

साल 1967 के एक विस्तृत प्रस्ताव के अनुसार, इस जमीन को तात्कालीन सरकार ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए छात्रावास बनाने के लिए आवंटित किया था। लेकिन साल 1983 में इसे AJL के माध्यम से खरीदा गया और 17 साल तक उसमें कोई निर्माण नहीं हुआ। साल 2000 में इस जमीन पर एक इमारत बनी।

दस्तावेज में यह भी उल्लेख है कि निर्माण सिर्फ़ 20,000 वर्गफीट पर हो सकता था। लेकिन कॉन्ग्रेस ने 80,000 वर्ग फुट भूमि पर एक व्यावसायिक संरचना का निर्माण किया।

इसके बाद एक ओर जहाँ नियमों के अनुसार आमतौर पर, सरकार को वाणिज्यिक संस्थानों से 50 प्रतिशत राजस्व प्राप्त होता है, और बाकी राजस्व राशि संपत्ति के मालिक के पास होती है। वहीं, कॉन्ग्रेस ने इस प्रॉपर्टी से मिलने वाला 70 प्रतिशत का राजस्व अपने पास रखा और केवल 30 प्रतिशत सरकार के साथ साझा किया।

गौरतलब है पिछले साल राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी पर करीब 100 करोड़ रुपए की देनदारी का मामला सामने आया था। नेशनल हेराल्ड मामले में यूपीए अध्यक्ष और कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष को आयकर विभाग ने 100 करोड़ का टैक्स नोटिस भेजा था।

इस केस में आयकर विभाग ने एजेएल से संबंधित उनकी आय के पुनर्मूल्यांकन के बाद ये नोटिस जारी किया था। आदेश में कहा गया था कि उन्होंने अपनी आय करोड़ों रुपए कम बताई हैं।

आयकर विभाग के ऑर्डर में कहा गया था कि सोनिया ने 155.4 करोड़ और राहुल ने 155 करोड़ रुपए की आय कम बताई है। यह आय उस आय से काफी अधिक है जिसे घोषित किया गया है। बता दें, वर्ष 2011-12 द्वारा दिए गए आयकर के पुनर्मूल्यांकन के अनुसार राहुल ने 68.1 लाख रुपए की घोषित आय का कर भरा था।

UAE दूतावास की सील-राजकीय चिन्ह से छेड़छाड़ कर आतंक के लिए 10 महीने में 150 किलो सोने की तस्करी: NIA ने किया खुलासा

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने केरल सोना तस्करी मामले में आतंकी गतिविधि की संलिप्तता की आशंका जाहिर की है। NIA ने खुलासा किया है कि पिछले 10 महीनों में केरल में लगभग 150 किलोग्राम सोने की तस्करी की गई थी।

एजेंसी ने अदालत को बताया कि जाँच में यह भी पता चला है कि तस्करी मुख्य रूप से आभूषण बनाने में नहीं बल्कि आतंकी गतिविधियों के लिए किया जाता था, क्योंकि नकदी में लेन-देन करना मुश्किल हो गया था। एनआईए ने अदालत में कहा कि आरोपितों ने सोना तस्करी के लिए यूएई दूतावास की सील और राजकीय चिन्ह से छेड़छाड़ कर अपराध को अंंजाम दिया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, “कई एजेंसियों द्वारा की गई शुरुआती जाँच से पता चला है कि गिरोह सितंबर 2019 से सोने की तस्करी कर रहा था। उन्होंने अब तक लगभग 150 किलोग्राम सोने की तस्करी की थी। संदिग्धों से पूछताछ से उनके तौर-तरीके और अन्य लोगों पर प्रकाश डाला जा सकता है।”

बता दें कि एनआईए कोर्ट ने सोमवार (13 जुलाई, 2020) को प्रमुख संदिग्धों स्वप्ना सुरेश और संदीप नायर को 21 जुलाई तक एजेंसी की हिरासत में भेज दिया। एनआईए ने मामले में दोनों को हिरासत में लेने की माँग की थी।

एनआईए ने केरल हाईकोर्ट को बताया था कि राजनयिक के सामान के जरिए सोने की तस्करी करने की कोशिश करने वाली महिला स्वप्ना सुरेश के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

हिरासत के आवेदन को आगे बढ़ाते हुए, एजेंसी ने अदालत को बताया कि गृह मंत्रालय ने प्रारंभिक जाँच की थी और पाया था कि तस्करी का सोना आतंकवादी गतिविधियों के लिए उपयोग किया जाता था। एनआईए के अनुसार, एक विस्तृत जाँच की आवश्यकता है क्योंकि इसमें भारत-यूएई द्विपक्षीय संबंध शामिल हैं। यूएई ने भी इस घटना की जाँच शुरू की है। 

कोच्चि स्थित एनआईए अदालत को सूचित किया गया कि स्वप्ना सुरेश और सरिथ, जो पहले यूएई वाणिज्य दूतावास के कर्मचारी थे, ने राजनयिक सामान की आवाजाही के बारे में सीखा और सोने की तस्करी करने के लिए इसे मॉडस ऑपरेंडी के रूप में इस्तेमाल किया।

अदालत की कार्यवाही के दौरान, एक अभियुक्त संदीप नायर ने दावा किया कि खेप को यूएई के राजनयिक को संबोधित किया गया था जिसका नाम राशिद अल शिमिली है। उन्होंने सवाल किया कि राजनयिक की भूमिका की जाँच क्यों नहीं की जा रही है।

सोने की तस्करी के मामले में रविवार (12 जुलाई, 2020) को सीमा शुल्क विशेष जाँच दल द्वारा मलप्पुरम स्थित व्यवसायी के टी रमीज की गिरफ्तारी से जाँच में और तेजी आने की उम्मीद है।

केरल में सोने की तस्करी के रैकेट के लिंचपिन माने जाने वाले रमीज को रविवार की रात में पेरिन्थलम्ना के पास वेटाठूर में उसके निवास से गिरफ्तार किया गया था।

कस्टम अधिकारी के अनुसार, रमीज की गिरफ्तारी सोने की तस्करी मामले की जाँच की तेजी के लिए महत्वपूर्ण थी। इसने राज्य पर आरोप लगाया है कि तस्करी के रैकेट में एक अन्य प्रमुख खिलाड़ी स्वप्ना सुरेश का केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के कार्यालय से घनिष्ठ संबंध है।

रमीज को एक निवेशक और राज्य में सोने की तस्करी का वितरक कहा जाता है और कस्टम अधिकारी उम्मीद कर रहे हैं कि उसकी हिरासत में पूछताछ से सोने की तस्करी रैकेट में निवेशकों का ब्योरा मिल सकता है। इसके साथ ही तस्करी के समन्वय में शामिल प्रमुख कर्मी और स्वप्ना सुरेश एवं संदीप नायर की भागीदारी केे बारे में खुलासा हो सकता है।

बता दें कि स्वप्ना और सरिथ दोनों यूएई वाणिज्य दूतावास के कर्मचारी थे और अज्ञात कारणों के चलते उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। हालाँकि, उन्हें वहाँ काम करने के दौरान राजनयिक सामान की आवाजाही के बारे में पता चल गया था। बाद में, उन्होंने संदीप सहित अन्य संदिग्धों के साथ साजिश रची और 2019 में सोने की तस्करी शुरू कर दी।

गौरतलब है कि जाँच एजेंसी की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया था कि केरल सोना तस्करी मामले में गैर कानूनी गतिविधि (निवारक) अधिनियम, 1967 की धारा 16, 17 और 18 के तहत चार आरोपितों– पीएस सरिथ, स्वप्ना प्रभा सुरेश, फाजिल फरीद और संदीप नायर के खिलाफ त्रिवेंद्रम अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे से पाँच जुलाई को कस्टम (प्रीवेंटिव) कमिश्नरेट, कोचीन द्वारा 14.82 करोड़ रुपए मूल्य के 24 कैरेट के 30 किलोग्राम सोने की बरामदगी के सिलसिले में एक प्राथमिकी दर्ज की गई है।

सचिन पायलट डिप्टी CM और PCC प्रेसिडेंट पद से बर्खास्त, गहलोत खेमे के विधायकों ने की थी कार्रवाई की माँग

कुछ माह पहले ही मध्य प्रदेश में सत्ता गँवा चुकी कॉन्ग्रेस के सामने अब राजस्थान में भी राजनीतिक संकट मँडराता दिख रहा है। इसी को लेकर आज मंगलवार (जुलाई 14, 2020) को जयपुर के फेयरमोंट होटल में चल रही कॉन्ग्रेस विधायक दल (CLP) की बैठक में उपस्थित 102 विधायकों ने माँग की है कि सचिन पायलट को पार्टी से हटा दिया जाना चाहिए।

इस बैठक में ही सचिन पायलट को डिप्टी CM और PCC अध्यक्ष पद से, रमेश मीणा व विश्वेंद्र सिंह को मंत्री पद से बर्खास्त करने का फैसला ले लिया गया है। गोविंद सिंह डोटासरा नए PCC चीफ होंगे। इस बात की जानकारी कॉन्ग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने दी है।

कॉन्ग्रेस ने उन सभी विधायकों को कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्णय लिया, जो आज जयपुर में कॉन्ग्रेस विधायक दल की बैठक में उपस्थित नहीं थे। सचिन पायलट भी इस बैठक में मौजूद नहीं थे। बैठक में अशोक गहलोत का समर्थन जयपुर में कॉन्ग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की बैठक में कॉन्ग्रेस विधायकों ने सर्वसम्मति से मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का समर्थन किया।

ज्ञात हो कि राजस्थान राज्य में कॉन्ग्रेस के कई बड़े नेताओं ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खिलाफ बगावत छेड़ दी है। सचिन पायलट ने पार्टी पर उनकी भूमिका की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, कॉन्ग्रेस पार्टी सचिन पायलट के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की योजना बना रही है, जबकि राजस्थान के डिप्टी सीएम खुद अपने समर्थन में 30 विधायकों का दावा करने के लिए और अधिक विधायकों को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि वह विपक्षी दल के समक्ष अपनी स्थिति मजबूत कर सकें।

राजस्थान कॉन्ग्रेस के विधायक भंवरलाल शर्मा का दावा है कि सचिन पायलट के समर्थन में इस समय 22 विधायक और इन समर्थक विधायकों की सचिन पायलट को सीएम बनाने की माँग है। जबकि, कॉन्ग्रेस के ही कुछ अन्य सूत्रों का कहना है कि सचिन पायलट को 15-17 विधायकों का समर्थन प्राप्त है।

सीएलपी की बैठक शुरू होने से पहले, सचिन पायलट खेमे के विधायकों ने ट्वीट कर कहा कि कॉन्ग्रेस में रहना अशोक गहलोत का गुलाम होने के समान है। इन विधायकों ने भी सचिन पायलेट के साथ सीएलपी की मीटिंग में हिस्सा नहीं लिया है।

राजस्थान कॉन्ग्रेस में चल रहा है ‘डर’ का माहौल

बताया जा रहा है कि अपने तीसरे कार्यकाल में अशोक गहलोत असुरक्षित महसूस कर रहे थे क्योंकि सचिन पायलट ने राजस्थान में कॉन्ग्रेस के प्रदेश मुखिया के रूप में खासी मेहनत की थी। उन्होंने चुनाव के दौरान भी अपने लोगों के नाम टिकट के दावेदारों के रूप में आगे बढ़ाया था।

गहलोत पहले भी ऐसी स्थिति का सामना कर चुके हैं क्योंकि 2008 में सीपी जोशी के 1 वोट से चुनाव हारने के कारण उन्हें सीएम पद की कुर्सी नहीं मिल पाई थी और गहलोत की किस्मत चमक गई थी।

मध्य प्रदेश में सिंधिया की बगावत के बाद भी राजस्थान में विधायकों को होटल में डाला गया था। अशोक गहलोत ने अंत में सरकारी मशीनरी का उपयोग कर के अपने विरोधियों को चोट पहुँचाने की कोशिश की लेकिन उनका दाँव उलटा पड़ता हुआ भी दिखा। पार्टी के पुराने वफादार अब भी अशोक गहलोत के साथ ही हैं, ऐसे में कहा जा रहा है कि प्रियंका के हस्तक्षेप पर पायलट से पार्टी ने फिर से बातचीत शुरू की है।

उधर राजस्थान में सियासी संकट के बीच उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के 102 विधायकों के समर्थन के दावे को ‘गलत’ बताया है। उन्होंने यह बातें समाचार चैनल आज तक से बातचीत में कही

प्रियंका गाँधी का बंगला बचाने के लिए ताकतवर कॉन्ग्रेसी नेता ने किया फोन, PM मोदी के मंत्री ने खोल दी पोल

कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी को अलॉट किया गया लोधी एस्‍टेट के बंगला नंबर 35 का विवाद गहरा गया है। बुधवार (जुलाई 14, 2020) को प्रियंका गाँधी ने उन रिपोर्ट्स का खंडन किया, जिसमें कहा गया था कि उन्‍होंने कुछ और दिन की मोहलत माँगी है।

प्रियंका गाँधी ने ऐसी एक रिपोर्ट पर ट्वीट कर कहा कि उन्‍होंने सरकार से ऐसी कोई दरख्‍वास्‍त नहीं की है। उन्‍होंने कहा कि वह सरकार के निर्देशानुसार, 1 अगस्‍त तक सरकारी बंगला खाली कर देंगी।

प्रियंका गाँधी के ट्वीट के बाद, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने खुलासा किया उन्‍हें प्रियंका की पैरवी के लिए एक बड़े कॉन्ग्रेसी नेता का फोन आया था। उन्‍होंने कहा कि फोन करने वाले ने किसी और कॉन्ग्रेस सांसद के नाम बंगला अलॉट करने को कहा ताकि प्रियंका वहाँ रहना जारी रख सकें।

दरअसल, न्‍यूज एजेंसी आईएएनएस ने एक खबर छापी थी। इसमें कहा गया कि प्रियंका ने सरकारी बंगले में कुछ समय तक और रहने की इजाजत माँगी है। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह दरख्‍वास्‍त मान ली है।

कई सारी वेबसाइट और टीवी चैनलों पर चली इस रिपोर्ट को प्रियंका ने ‘फेक न्‍यूज’ करार दिया है। उन्‍होंने साफ कहा कि उनकी तरफ से ऐसी कोई रिक्‍वेस्‍ट सरकार से नहीं की गई है।

इसके बाद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ट्वीट करते हुए कहा, “तथ्य अपने आप बोलते हैं। मुझे 4 जुलाई की दोपहर 12 बजकर 5 मिनट पर एक ताकतवर कॉन्ग्रेसी नेता का फोन आया था। जिसमें मुझसे रिक्‍वेस्‍ट की गई कि 35, लोधी एस्‍टेट किसी और कॉन्ग्रेस सांसद को अलॉट कर दिया जाए ताकि प्रियंका वाड्रा रह सकें।” पुरी ने प्रियंका को ताकीद करते हुए कहा, “हर चीज को सेंशनलाइज मत कीजिए।”

सच्चाई का खुलासा होने के बाद प्रियंका गाँधी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यदि किसी ने आपसे कहा है तो मैं उनकी चिंता के लिए उसे धन्यवाद कहती हूँ। साथ ही आपके विचार के लिए भी धन्यवाद देती हूँ, लेकिन यह भी तथ्यों को नहीं बदलता है कि मैंने ऐसा कोई अनुरोध नहीं किया और मैं ऐसा कोई अनुरोध नहीं कर रही हूँ। मैं 1 अगस्त तक घर खाली कर दूँगी।”

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी इस पर तंज कसते हुए कहा कि शक्तिशाली कॉन्ग्रेस नेता ने हरदीप सिंह पुरी को इसलिए फोन किया था, क्योंकि ये हाईकमांड का ऑर्डर था।

गौरतलब है कि सरकार ने प्रियंका गाँधी वाड्रा को लुटियंस जोन का स्थित बंगला खाली करने को कहा था। प्रियंका को ये बंगला एक अगस्त तक खाली करना है। एसपीजी सुरक्षा हटने के चलते बंगला खाली करना होगा। इस बाबत उन्हें नोटिस जारी कर दिया गया था। दिल्ली का बंगला वापस लिए जाने के बाद प्रियंका गाँधी का नया ठिकाना लखनऊ में होगा।

केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से 30 जून को नोटिस भेजकर प्रियंका से बंगला खाली करने को कहा गया था। अपने पत्र में सरकार ने कहा था कि प्रियंका 35 लोधी एस्टेट सरकारी आवास को एक महीने के अंदर खाली कर दें, क्योंकि वह अब एसपीजी की सूची में नहीं हैं।

गृह मंत्रालय ने लिखा था, “प्रियंका गांधी को सीआरपीएफ कवर के साथ ‘जेड प्लस’ सुरक्षा अखिल भारतीय स्तर पर मुहैया कराई गई है, जिसमें सरकारी आवास के आवंटन या उसे बरकरार रखने का कोई प्रावधान नहीं है।”

आदेश में कहा गया था, “इसके मद्देनजर वह किसी सरकारी आवास की हकदार नहीं हैं और उनके आवंटन को डायरेक्‍टरेट ऑफ एस्टेट ने एक महीने के अंदर आवास खाली करने के निर्देश के साथ एक जुलाई, 2020 को रद्द कर दिया है।”

रात में प्रियंका गाँधी के 4 कॉल, चिदंबरम भी रहे तैनात: सचिन पायलट नहीं उठा रहे अन्य कॉन्ग्रेसी नेताओं के फोन

राजस्थान में बगावत पर उतरे सचिन पायलट से पहले तो कॉन्ग्रेस दूरी बनाती नज़र आई लेकिन फिर अचानक से सोमवार (जुलाई 13, 2020) की रात पार्टी का हाईकमान सक्रिय हुआ। प्रियंका गाँधी सहित कई नेताओं ने उनसे संपर्क किया। कहा जा रहा है कि प्रियंका गाँधी और पी चिदंबरम ने कई बार बात की।

दूसरी बार कॉन्ग्रेस की बैठक हुई ही इसीलिए थी क्योंकि सचिन पायलट को पार्टी जाने नहीं देना चाहती है। यही कारण है कि प्रियंका गाँधी ने 4 बार और चिदंबरम ने 6 बार बात की। ‘न्यूज़ 18’ के सूत्रों के अनुसार, मंगलवार को फिर से कॉन्ग्रेस की बैठक इसीलिए बुलाई गई क्योंकि पार्टी सचिन पायलट से बार-बार संपर्क करने के लिए बेताब है जबकि वो पार्टी को भाव नहीं दे रहे हैं।

सचिन पायलट ने अधिकतर कॉन्ग्रेस नेताओं का फोन कॉल रिसीव करना ही बंद कर दिया है। राजस्थान में पार्टी के प्रभारी अविनाश पांडेय ने भी स्वीकार किया कि पायलट को कई कॉल्स और मैसेज किए गए लेकिन वो जवाब नहीं दे रहे हैं।

सोनिया गाँधी के सिपहसालार अहमद पटेल और केसी वेणुगोपाल ने भी सचिन पायलट से संपर्क किया है। बता दें कि प्रशासन द्वारा सचिन पायलट को पूछताछ के लिए समन किए जाने के बाद से वो कुछ ज्यादा ही नाराज़ चल रहे हैं। राज्य में ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ के आरोपों को लेकर एफआईआर दर्ज की गई है और उसकी जाँच चल रही है, जिस सम्बन्ध में दो भाजपा नेताओं को भी गिरफ्तार किया गया था।

सचिन पायलट का दावा है कि अशोक गहलोत की सरकार अल्पमत में है और उनके पक्ष में 30 विधायक हैं, जो सीएम से नाराज़ हैं। वहीं मीडिया रिपोर्ट्स का ये भी कहना है कि अशोक गहलोत मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया की बगावत के बाद ही सावधान हो गए थे और वो इसकी तैयारी में लगे थे कि उनका हश्र कमलनाथ जैसा न हो। इससे पहले ही उन्होंने बसपा को तोड़ कर 6 विधायकों को अपनी पार्टी में मिला लिया था।

कहा जा रहा है कि अपने तीसरे कार्यकाल में अशोक गहलोत असुरक्षित महसूस कर रहे थे क्योंकि सचिन पायलट ने राजस्थान में कॉन्ग्रेस के प्रदेश मुखिया के रूप में खासी मेहनत की थी। उन्होंने चुनाव के दौरान भी अपने लोगों के नाम टिकट के दावेदारों के रूप में आगे बढ़ाया था।

गहलोत पहले भी ऐसी स्थिति का सामना कर चुके हैं क्योंकि 2008 में सीपी जोशी के 1 वोट से चुनाव हारने के कारण उन्हें सीएम पद की कुर्सी नहीं मिल पाई थी और गहलोत की किस्मत चमक गई थी।

मध्य प्रदेश में सिंधिया की बगावत के बाद भी राजस्थान में विधायकों को होटल में डाला गया था। अशोक गहलोत ने अंत में सरकारी मशीनरी का उपयोग कर के अपने विरोधियों को चोट पहुँचाने की कोशिश की लेकिन उनका दाँव उलटा पड़ता हुआ भी दिखा। पार्टी के पुराने वफादार अब भी अशोक गहलोत के साथ ही हैं, ऐसे में कहा जा रहा है कि प्रियंका के हस्तक्षेप पर पायलट से पार्टी ने फिर से बातचीत शुरू की है।

उधर राजस्थान में सियासी संकट के बीच उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के 102 विधायकों के समर्थन के दावे को ‘गलत’ बताया है। उन्होंने यह बातें समाचार चैनल आज तक से बातचीत में कही

उप मुख्यमंत्री ने कहा, “25 विधायक मेरे साथ बैठे हैं। हम विधायक दल की बैठक में भाग लेने के लिए जयपुर नहीं जा रहे हैं।” राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आवास पर कॉन्ग्रेस विधायक दल की बैठक के बाद विधायकों बसों से जयपुर के फेयरमोंट होटल भेजा गया।