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हेट स्पीच मामले में कपिल मिश्रा समेत इन BJP नेताओं को मिली राहत, पुलिस ने कहा- दंगे भड़काने के नहीं मिले कोई सबूत

दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के मामले पिछले दिनों दिल्ली हाईकोर्ट में कुछ भाजपा नेताओं के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज करवाने की माँग पर जनहित याचिकाएँ डाली गई थीं। इन्हीं याचिकाओं पर दिल्ली पुलिस ने हलफनामे के रूप में कोर्ट को अपना जवाब सौंपा है। जिसके बाद भाजपा नेता कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर, अभय वर्मा और प्रवेश वर्मा को बड़ी राहत मिली।

इस हलफनामे में कहा गया कि दिल्ली पुलिस को अपनी पड़ताल में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे साबित हो कि इन नेताओं ने दंगा भड़काने में अपनी कोई भूमिका निभाई। इसके अलावा पुलिस ने इस हलफनामे में यह भी कहा कि उनकी जाँच में अभी तक किसी पुलिस अधिकारी की भूमिका भी सामने नहीं आई है।

हलफनामे में पुलिस ने कहा, “उत्तरपूर्वी दिल्ली दंगे से जुड़े उपरोक्त सभी मामलों में अभी तक की जाँच में ऐसा कोई योग्य सबूत नहीं पाया गया है जो इन याचिकाओं में उल्लेखित लोगों की दंगा भड़काने या उसमें हिस्सा लेने की उनकी भूमिका की तरफ संकेत करता है।”

हलफनामे में कहा गया कि दिल्ली पुलिस इन नेताओं के भाषणों की पड़ताल कर रही हैं। अगर दंगों से जुड़े किसी भी नेक्सस का खुलासा इसके पीछे होता है तो समय रहते इस मामले पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

इसके अलावा ये भी लिखा है कि अगर ऐसे कोई सबूत मिलते हैं जिनका संबंध आपत्तिजनक भाषण या फिर दंगों के दौरान अपराध करने से संबधित हो, तो इस मामले में फौरन कार्रवाई की जाएगी और उक्त व्यक्तियों को अभियुक्त के तौर पर पेश किया जाएगा।

पुलिस ने एक जनहित याचिका, जिसमें पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर जाँच के लिए माँग की गई थी। उसपर जवाब देते हुए हलफनामे में दिल्ली पुलिस की ओर से कहा गया कि अब तक मामले की जाँच में पुलिस अधिकारियों की संलिप्ता के सबूत भी नहीं मिले हैं। यदि, आगे ऐसा कोई मामला मिलता है, तो उपयुक्त कार्रवाई होगी।

कोर्ट के समक्ष हलफनामे को दायर करने के साथ ही दिल्ली पुलिस ने इन जनहित याचिकाओं को खारिज करने की माँग भी की। उन्होंने याचिकाकर्ताओं की मंशा पर सवाल उठाया और कहा कि जनहित याचिका डालने वालों ने अपना एजेंडा चलाने के लिए चुनिंदा भाषण लिए। जबकि अन्य हिंसा भड़काने वाले भाषणों को दरकिनार कर दिया। इससे मालूम चलता है कि ऐसी याचिका डालने वालों की मंशा सच्ची नहीं बल्कि प्रेरित थी।

गौरतलब है कि गत फरवरी माह में हुए दंगों के मद्देनजर भाजपा, कॉन्ग्रेस और आप के कई नेताओं पर हेटस्पीच देने के आरोप में एफआईआर की माँग हुई थी। अलग-अलग जनहित याचिकाओं में भी इन नेताओं को हेटस्पीच देने का आरोपित बताया गया था।

इस मामले में भाजपा के प्रवेश वर्मा, अभय वर्मा, अनुराग ठाकुर और कपिल मिश्रा पर कार्रवाई की बात हुई थी। जबकि एक अन्य अर्जी में राहुल गाँधी, सोनिया गाँधी और प्रियंका गाँधी समेत कई कॉन्ग्रेसी नेताओं पर भीड़ को उकसाने का आरोप लगा था। इसके बाद आम आदमी पार्टी के मनीष सिसोदिया और अमानतुल्लाह खाँ जैसे नेताओं पर नफरत फैलाने का आरोप लगा था।

छत्रपति शिवाजी का मजाक उड़ाने वाली कॉमेडियन को इम्तियाज शेख उर्फ़ उमेश दादा ने दी रेप की धमकी, गिरफ्तार

कॉमेडियन अग्रिमा जोशुआ द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज का मजाक बनाए जाने का वीडियो वायरल होते ही विवाद शुरू हो गया। उनके पिछले साल के इस वीडियो के वायरल होने के बाद शुभम मिश्रा नामक व्यक्ति ने उन्हें रेप की धमकी दी, जिसके बाद उसे गिरफ़्तार कर लिया गया। अब मुंबई के नालासोपारा से एक और व्यक्ति को गिरफ़्तार किया गया है, जिसने शिवाजी का अपमान करने अग्रिमा जोशुआ को गाली दी और रेप के लिए धमकाया था।

महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इम्तियाज शेख उर्फ़ उमेश दादा की गिरफ़्तारी की जानकारी दी। उन्होंने हाल ही में एक वीडियो ट्वीट किया था और अग्रिमा जोशुआ को मिल रही रेप की धमकियों को लेकर कार्रवाई करने की बात कही थी। देशमुख ने कहा कि कुछ लोगों को सोशल मीडिया पर महिलाओं के बारे में आपत्तिजनक पोस्ट करने के लिए गिरफ्तार किया गया है, जिसकी जाँच अभी भी जारी है।

साथ ही उन्होंने ये भी जानकारी दी कि अग्रिमा जोशुआ द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज के बारे में पहले से दिए गए बयान पर कानूनी सलाह ली जा रही है और अगर वह दोषी पाई जाती हैं तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। इम्तियाज शेख और शुभम मिश्रा ‘सोशल इन्फ्लुएंसर’ होने के साथ-साथ आपस मे दोस्त भी हैं। इंतियाज सोशल मीडिया पर गालियों और अश्लीलता से भरे वीडियो पोस्ट करने के लिए जाना जाता है।

इस बार भी उसने अग्रिमा जोशुआ को गाली देते हुए और धमकाते हुए वीडियो डाला था। अरब सागर में स्थित छत्रपती शिवाजी के स्मारक को लेकर मजाक बनाया गया था, जिसके बाद उसने ये धमकी दी। मुंबई क्राइम ब्रांच की डीसीपी रश्मि करंडीकर ने कहा कि पुलिस विभाग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए इंतियाज शेख को गिरफ्तार किया। इस बात की जाँच चल रही है कि इस वीडियो को बनाने मे किन-किन लोगों ने मदद कि और क्या शुभम मिश्रा भी इसमें शामिल था?

उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 294 (सार्वजनिक रूप से अश्लील व्यवहार करना या ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करना), धारा 354A (किसी महिला को प्रताड़ित करना), धारा 354B (किसी महिला के लिए आपराधिक दबाव का प्रयोग करना), धारा 505 (अफवाहों को प्रकाशित करना), धारा 506 (आपराधिक धमकी) और धारा 509 (किसी महिला के सम्मान को ठेस पहुँचाना) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

इसके साथ-साथ उसके खिलाफ आईटी ऐक्ट की धारा 67A (अनलाइन अश्लीलता) के तहत भी मामला दर्ज किया गया। मंगलवार (जुलाई 14, 2020) को ही उसे कोर्ट में पेश की जाने कि बात भी कही गई थी। बता दें कि वीडियो वायरल होते ही कॉमेडियन के खिलाफ पूरे राज्य में आक्रोश और गुस्से की लहर फैल गई थी। 5 अप्रैल को ‘कॉमेडियन’ अग्रिमा के द्वारा इसका एक मिनट का क्लिप शेयर करने के बाद यह वायरल हो गया।

छत्रपति शिवाजी महाराज के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने को लेकर आक्रोशित राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उस स्टूडियो में जाकर तोड़-फोड़ की थी, जहाँ पर कॉमेडिन अग्रिमा जोशुआ ने वीडियो शूट किया था। इसके बाद जोशुआ ने ट्विटर पर माफी माँगते हुए कहा था कि वो महान व्यक्तित्व के अनुयायियों को पहुँचे ठेस के लिए हार्दिक क्षमा याचना करती हैं।

वीडियो में, यश को स्टूडियो में अधिकारियों से कॉमेडियन से लिखित माफी माँगने के लिए कहते हुए देखा जा सकता है। वहीं अन्य MNS कार्यकर्ता कार्यक्रम स्थल पर मेज और कुर्सियों को लात मारते और नुकसान पहुँचाते नजर आते हैं। इसके बाद आयोजकों ने कॉमेडियन अग्रिमा जोशुआ को छत्रपति शिवाजी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने की अनुमति देने के लिए मौखिक और लिखित माफी माँगी।

कब्र से निकाल कर फेंका नवजात बच्ची का शव, बांग्लादेश में अहमदियों को बताया ‘काफिर’

बांग्लादेश में इस्लामिक कट्टरपंथियों का कहर केवल हिंदुओं पर नहीं बरसता बल्कि अन्य अल्पसंख्यक समुदाय भी वहाँ की बहुसंख्यक आबादी के अत्याचार का शिकार होते हैं। ताजा मामला अहमदी समुदाय से जुड़ा है। अहमदी समुदाय को बांग्लादेश के कट्टरपंथी काफिर ही मानते हैं। खबर है कि शनिवार को कट्टरपंथियों ने एक नवजात बच्ची के शव को कब्र से बाहर निकालकर सिर्फ़ इसलिए फेंक दिया क्योंकि वह अहमदी समुदाय की थी।

घटना ब्राह्मणबारिया जिले के सदर उपजिला के घाटुरा की है। यहाँ सरकारी कब्रिस्तान में एक नवजात को अहमदियों ने उसकी मृत्यु के बाद दफनाया था। लेकिन कुछ ही घंटों बाद कट्टरपंथियों ने उसकी कब्र को वापस खोदा और शव को रोड किनारे फेंक आए।

इस घटना का मालूम चलते ही अहमदी नेताओं में रोष व्याप्त हो गया। उन्होंने इस घटना के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करना शुरू कर दिया और माँग उठाई कि आरोपितों के ख़िलाफ़ सख्त से सख्त कार्रवाई हो।

रिपोर्ट्स के अनुसार, जिस शिशु के शव के साथ कट्टरपंथियों ने ये अमानवीयता की, उसे स्वप्न बेगम नाम की महिला ने गुरुवार को क्रिश्चियन मेमोरियल अस्पताल में सुबह 5:30 बजे जन्म दिया था। लेकिन, हालत नाजुक होने के कारण बच्ची को इनक्यूबेटर में रखा गया। हालाँकि बच्ची बच नहीं पाई और उसी दिन 7 बजे उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद उसे सरकारी कब्रिस्तान में दफन किया गया। जिस पर कट्टरपंथियों ने ‘काफिर’ बच्ची को कब्रिस्तान में दफनाने पर आपत्ति जताई और कब्र खोदकर उसे रोड पर फेंक दिया।

मामले की सूचना पाते ही घटनास्थल पर पुलिस भी पहुँची और बच्ची के शव को वहाँ से 16 किमी दूर जाकर कांदिरपारा गाँव में 11:30 बजे दफनाया गया। इसके बाद ब्राह्मणबारिया जिले के ऑफिसर इंचार्ज मोहम्मद सलीम ने इस संबंध में जानकारी दी कि स्थानीयों से बात करने के बाद कांदिरपारा गाँव में अहमदिया समुदाय के कब्रिस्तान में शव को दफना दिया गया है। लेकिन उन्होंने ये नहीं बताया कि कट्टरपंथियों पर क्या कार्रवाई हुई है।

बच्ची के पिता सैफुल इस्लाम इस संबंध में कहते हैं कि वह उन लोगों को नहीं पहचान सकते, जिन्होंने उनकी बेटी की कब्र खोदकर उसे रोड पर फेंका। लेकिन अहमदिया जमात की स्थानीय इकाई अध्यक्ष एसएम इब्राहिम लगातार अलग-अलग मस्जिदों के मौलवियों को इसके लिए जिम्मेदार बता रहे हैं। उनका आरोप है कि ये मौलवी गैर-अहमदियों को भड़काते हैं।

जबकि, आरोपों के बाद एक मुनीर हुसैन नामक मौलवी का कहना है कि इलाके के दूसरे समुदाय वालों ने बच्ची के माता-पिता के फैसले पर आपत्ति जताई थी कि वह कब्रगाह में उसका शव न दफनाएँ। मौलवी के अनुसार, “ये शरिया के ख़िलाफ़ है कि कब्रगाह में कोई काफिर दफनाया जाए। गाँव में अभी तक कट्टरपंथियों ने ऐसा कभी नहीं होने दिया।”

यहाँ बता दें कि बांग्लादेश में अहमदियों का शोषण लंबे समय से चला आ रहा है। उनकी गलती बस ये है कि वह पैगंबर को अपने मजहब का संस्थापक मानते हैं। जिसके कारण बांग्लादेश में अभी तक करीब 1 लाख अहमदियों पर हमला हो चुका है।

हाल की बात है जब मजहबी उलेमाओं ने प्रशासन को इसलिए धमकाया था कि वे अहमदियों को दूसरे धर्म का घोषित करें। इसके अतिरिक्त साल 2015 में अहमदी के मस्जिदों पर हमला भी हुआ था। इससे पहले 1999 में भी अहमदियों के मस्जिद को निशाना बनाया गया था।

6 मारे गए, 4 गिरफ्तार: विकास दुबे के घर से मिले पुलिस से लूटे हथियार, 11 आरोपित अभी भी फरार

उत्तर प्रदेश के एडीजी (लॉ एन्ड आर्डर) प्रशांत कुमार ने विकास दुबे प्रकरण को लेकर मंगलवार (जुलाई 14, 2020) की सुबह 10 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के यूपी पुलिस की अहम जानकारियाँ मीडिया से साझा की। उन्होंने बताया कि 2-3 जुलाई, 2020 की मध्यरात्रि में बिकरू गाँव में दबिश के दौरान पुलिस पार्टी पर विकास दुबे व उसके साथियों द्वारा हमला कर असलहों से फायर किया गया, जिसमें 8 पुलिसकर्मी वीरगति को प्राप्त हुए।

एडीजी प्रशांत कुमार ने बताया कि इस दौरान विकास दुबे और उसके गुर्गों से पुलिस के हथियार भी लूट लिए थे। इस सम्बन्ध में चौबेपुर में आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।

अभियुक्तों की गिरफ़्तारी और पुलिस से लुटे गए हथियारों की बरामदगी के लिए कानपुर एसएसपी ने कई टीमें गठित की थीं। एडीजी प्रशांत कुमार ने बताया कि मुखबिर की सूचना पर 50,000 रुपए के इनामी शशिकांत उर्फ़ सोनू को रात्रि 2.50 बजे गिरफ्तार किया गया।

पूछताछ के दौरान उसने बिकरू में हुई घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार की और कई अन्य आरोपितों के भी नाम लिए। उसने विकास दुबे गैंग के कई अहम सदस्यों के बारे में खुलासा किया और लुटे हुए हथियार कहाँ छिपे हुए हैं, इसकी भी जानकारी दी।

शशिकांत उर्फ़ सोनू की निशानदेही पर विकास दुबे के घर से पुलिस से लूटी गई एके-47 और 17 कारतूस बरामद किए गए। साथ ही शशिकांत के घर से राइफल और 20 कारतूस जब्त किए गए। यूपी पुलिस ने बताया कि अब इस मामले में जाँच के बाद आगे की कार्रवाई की जा रही है।

कानपुर में एडीजी (लॉ एंड आर्डर) प्रशांत कुमार की प्रेस कॉन्फ्रेंस

यूपी पुलिस ने बताया कि इस पूरे प्रकरण में 21 अभियुक्त थे, जिनमें से 4 गिरफ्तार किए जा चुके हैं। इनमें श्यामू वाजपेयी, जहान यादव, दयाशंकर अग्निहोत्री और शशिकांत के नाम शामिल हैं। साथ ही अब तक विभिन्न एनकउंटरों में 6 आरोपितों की मौत हुई है।

जो आरोपित मारे गए, वो हैं- विकास दुबे, राजाराम, अतुल दुबे, अमर दुबे, प्रभात मिश्रा और प्रवीण दुबे। अब 11 ऐसे आरोपित हैं, जिन्हें पुलिस ने वांछित की श्रेणी में डाला है और उनकी तलाश की जा रही है। साथ ही मुंबई में गुड्डन त्रिवेदी और उसके एक साथी को गिरफ्तार किया गया है, जिसे रिमांड पर लेने की कार्रवाई जारी है। पुलिस ने मीडिया के सामने बरामद हथियारों के जखीरे को भी पेश किया।

उधर कानपुर में विकास दुबे और उसके गुर्गों के साथ हुए एनकाउंटर में वीरगति को प्राप्त हुए 8 पुलिसकर्मियों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सामने आई है। इसमें पता चला है कि CO देवेंद्र मिश्रा समेत सभी पुलिसकर्मियों की हत्या करने के लिए धारधार हथियारों का भी इस्तेमाल किया गया था। उनकी इतनी बेरहमी से हत्या की गई थी कि इन गुंडों का सिर्फ मारना ही नहीं बल्कि बदला लेने का मकसद दिखाई पड़ता है।

आजीवन कारावास वाले कैदी सहित अर्बन नक्सलियों को जेल से छोड़ो, उनको महामारी हो जाएगी: CPI (M)

कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सिस्ट) के पोलिट ब्यूरो ने एक माँग उठाई है। अपनी माँग में उनका कहना है कि वारावारा राव, गौतम नवलखा और प्रोफ़ेसर साईंबाबा जैसे अर्बन नक्सलियों को कोरोना वायरस महामारी को मद्देनज़र रखते हुए बाहर निकाला जाए। माँग में सभी को ‘मानवाधिकार कार्यकर्ता’ बताते हुए हर व्यक्ति के स्वास्थ्य पर गंभीरता से चिंता जताई है।    

सीपीआई (एम) के पोलित ब्यूरो द्वारा जारी किए गए बयान में लिखा है, “अखिल गोगोई कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। वारावारा राव की हालत भी अच्छी नहीं है। जेल के भीतर जिस तरह की गन्दगी रहती है, उसे देखते हुए यही लगता है कि गौतम नवलखा, अनिल तेलतुम्ब्डे, सुधा भारद्वाज, शोमा सेन जैसे मानवाधिकार कार्यकर्ता, जो गलत आरोपों के आधार पर जेल में बंद किए गए हैं, वह भी इन्फेक्शन की चपेट में आ सकते हैं।”  

सीपीआई (एम) पोलिट ब्यूरो की तरफ से जारी किया गया बयान

पोलित ब्यूरो ने लिखा, “तमाम राजनीतिक कैदियों की तुलना में प्रो. साईबाबा की हालत सबसे बदतर है। ऐसा व्यक्ति जिसमें 90 फ़ीसदी अक्षमताएँ हैं, उसे लगभग 19 तरह की स्वास्थ्य सम्बन्धी परेशानियाँ हैं, जिनमें ज़्यादातर जानलेवा हैं। यहाँ तक कि संयुक्त राष्ट्र के दूतों ने भी उनकी सेहत को देखते हुए उन्हें रिहा करने की माँग की थी।”    

सीपीआई (एम) का पोलित ब्यूरो, जिन्हें मानवाधिकार और राजनैतिक कार्यकर्ता बता रहा है, उन पर कई गंभीर आरोप लगे हुए हैं। जिनमें से कुछ आरोपों के मुताबिक़ इनके संपर्क ऐसे लोगों से भी हैं, जो आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। इनमें से कुछ एल्गर परिषद मामले में भी आरोपित हैं। इसलिए पार्टी ने जिस तरह की भाषा अपनाई है, वह असल में बेहद खतरनाक है।   

CPI (M) के मुताबिक़ अर्बन नक्सली, ‘मानवाधिकार कार्यकर्ता’   

गौतम नवलखा फिलहाल यूएपीए के तहत आरोपित हैं। वह अनिल तेलतुम्ब्डे के साथ एल्गर परिषद् मामले में भी आरोपित हैं। इसके अलावा उन पर माओवादियों से भी संपर्क में रहने का आरोप है। साथ ही वह ऐसे संगठनों से भी जुड़े हुए हैं, जिनका सीधा संबंध नक्सलियों से है। कुछ ऐसी ही कहानी वारावारा राव, शोमा सेन और सुधा भारद्वाज की है। गौतम नवलखा पर हिजबुल मुजाहिद्दीन सहित कई अलगाववादी नेताओं से संपर्क में रहने का भी आरोप है।   

कुछ समय पहले नवलखा, गुलाम नबी फई द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भी शामिल हुए थे। जिसे अमेरिका ने तथ्य छिपाने के लिए 2 साल की सज़ा सुनाई थी। उस तथ्य के मुताबिक़ फई का संगठन कश्मीरी अमेरिका काउंसिल का संस्थापक एक पाकिस्तानी आईएसआई का एजेंट था। जिसकी मंशा अमेरिका की भारत के प्रति नीतियाँ खराब करना था।   

प्रो. साईबाबा 

जीएन साईबाबा, दिल्ली विश्वविद्यालय के राम लाल आनंद कॉलेज में प्रोफ़ेसर थे। इन्हें गढ़चिरौली की सेशन अदालत ने साल 2017 में भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने वाले माओवादियों से संपर्क रखने और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के चलते आजीवन कारावास का आदेश दिया था। वह यूएपीए की धारा 13, 18, 20, 38 और 39 के तहत आरोपित सिद्ध हुए थे।

जीएन साईबाबा को सबसे पहले साल 2014 में सीपीआई माओइस्ट के साथ संपर्क रखने और उनके लिए संसाधन उपलब्ध कराने और उनके लिए भर्ती कराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

इसके बाद 30 जून साल 2015 के दिन स्वास्थ्य को देखते हुए 3 महीने की बेल दी गई थी। अगस्त 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ़ एक बार फिर जमानत दी। साल 2016 में आई एक रोपोर्ट के मुताबिक़ साईंबाबा ने जेएनयू के कई छात्रों को माओवादी गतिविधियों में शामिल किया था। वह छात्र डेमोक्रेटिक स्टूडेंट यूनियन के सदस्य थे, जिसका सदस्य उमर खालिद भी था।     

भीमा कोरेगाँव 

एल्गर परिषद् के नाम से आयोजित किए गए इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य 1818 के भीमा कोरेगाँव का जश्न मनाना था। जिसमें पेशवाओं ने ईस्ट इंडिया कंपनी से लड़ाई की थी। इसमें दलित समुदाय की एक सेना ने अंग्रेजों की तरफ से पेशवाओं के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। इसलिए दलित इसे धूमधाम से मनाते हैं, जून 2018 में इसके 200 साल पूरे हुए थे।

उस आयोजन में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी। जैसे ही मामला एनआईए को सौंपा गया, इसमें पुलिस ने कुल 9 कथित बुद्धिजीवियों को गिरफ्तार किया, सुधा भारद्वाज, रोना विल्सन, सुरेन्द्र गड्लिंग, महेश राउत, शोमा सेन, अरुण फरेरिया, वर्नोन गोंजाव्रिस और वारावारा राव का नाम शामिल था।     

रफीक ने किया दलित लड़की का रेप, उसके परिवार ने बनाया गर्भपात का दबाव: परेशान हो कर ली खुदकुशी

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के एक गाँव में रविवार (जुलाई 12, 2020) को 22 वर्षीय एक लड़की ने फंदे पर लटक कर आत्महत्या कर ली। अपने सुसाइड नोट में उसने मोहम्मद रफीक उर्फ मिंटू पर रेप का आरोप लगाया।

नोट में उसने लिखा कि रफीक ने पहले बहुत समय तक उसका लगातार रेप किया और फिर गर्भपात के लिए दबाव बनाया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रफीक के ऊपर धारा 376 और SC/ST एक्ट की अन्य उपयुक्त धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। उसे इस संबंध में पुलिस ने 7 जुलाई को गिरफ्तार करके जेल भी भेज दिया गया।

लेकिन रविवार को आत्महत्या से पहले लड़की ने नोट में लिखा कि रफीक के परिवार वाले भी इस मामले में उस पर समझौते का दबाव बना रहे थे। उसने अपने नोट में रफीक के तीन भाइयों और माता-पिता के नाम का उल्लेख किया है।

लड़की ने नोट में आरोप लगाया कि इन लोगों ने ही उसे रफीक के साथ समझौता करने के लिए प्रताड़ित किया। नोट में 6 लोगों के नाम का जिक्र करते हुए लड़की ने लिखा कि रेप के बाद वह प्रेग्नेंट हुई लेकिन उस पर गर्भपात करवाने का भी दबाव बनाया जाता रहा।

लखीमपुर खीरी पुलिस का इस संबंध में कहना है कि उन्होंने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली थी और आरोपित युवक 7 जुलाई को गिरफ्तार हो गया था। मगर, रविवार को लड़की ने अपने घर पर फाँसी लगा ली। अपने नोट में उसने लड़के के घरवालों पर लगातार प्रताड़ित करने का आरोप लगाया, जिसके बाद उन्हें भी एससी/एसटी एक्ट के तहत हिसारत में लिया गया है।

यहाँ बता दें कि टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, लड़की के एक रिश्तेदार ने इस मामले के स्थानीय पुलिस पर भी आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि शुरू में स्थानीय पुलिस आरोपितों के ख़िलाफ़ कोई एक्शन नहीं ले रही थी और समझौते की बात कर रही थी। इसीलिए, इस मामले को सुलझाने के लिए बाद में दूसरे ऑफिसर को भेजा गया और फिर आरोपित गिरफ्तार हुआ।

‘प्वाइंट ब्लैंक रेंज’ से गोली, पोस्टमॉर्टम के दौरान डॉक्टर भी दंग: PM रिपोर्ट से विकास दुबे की हैवानियत सामने

कानपुर में विकास दुबे और उसके गुर्गों के साथ हुए एनकाउंटर में वीरगति को प्राप्त हुए 8 पुलिसकर्मियों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। अब जब कानपुर में बिकरू गाँव के नरसंहार में बलिदान हुए पुलिसकर्मियों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आ गई है, इसमें पता चला है कि दुर्दांत अपराधी विकास दुबे और उसके साथियों ने सीओ देवेंद्र मिश्रा समेत 8 पुलिसकर्मियों को बड़ी बेरहमी से मारा था।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि CO देवेंद्र मिश्रा समेत सभी पुलिसकर्मियों की हत्या करने के लिए धारधार हथियारों का भी इस्तेमाल किया गया था। उनकी इतनी बेरहमी से हत्या की गई थी कि इन गुंडों का सिर्फ मारना ही नहीं बल्कि बदला लेने का मकसद दिखाई पड़ता है।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक, CO देवेंद्र मिश्रा को 4 गोली मारी गई थी, जिनमें से तीन उनके शरीर से आर-पार हो गई। 1 गोली उनके सिर में, एक छाती में और 2 पेट में लगी थी। इसके अलावा विकास दुबे और उसके साथियों ने सीओ देवेंद्र मिश्रा पर गोलीबारी करने के बाद उनके पैर को भी काट दिया था।

पुलिसकर्मियों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, सभी गोलियाँ ‘प्वाइंट ब्लैंक रेंज’ से मारी गईं। इसका अर्थ है कि काफी नजदीक से गोली चलाई गई थी। इसके अलावा 3 पुलिसकर्मियों के सिर पर और 1 के चेहरे पर गोली मारी गई। सभी 8 पुलिसकर्मियों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से ये साफ होता है कि बेहद बेरहमी से सभी की हत्या की गई।

सिपाही सुल्तान को दो गोलियाँ मारी गईं। अन्य पुलिसकर्मियों को आठ से दस गोलियाँ मारी गईं, जिससे उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। यहाँ तक कि पोर्टमॉर्टम करने के दौरान डॉक्टर भी शरीर पर गोलियों के निशान देखकर दंग रह गए।

पुलिसकर्मियों के सिर, चेहरे, हाथ, पैर, सीने और पेट में गोलियाँ दागी गईं। वहीं बिल्हौर के सीओ देवेंद्र मिश्र के चेहरे पर एक गोली लगने से वाइटल ऑर्गन बाहर आ गया और उन्होंने तुरंत दम तोड़ दिया था।

डॉक्टरों के अनुसार, यही हाल अन्य पुलिसकर्मियों का भी हुआ होगा। ज्यादातर गोलियाँ शरीर के शरीर के आर-पार हो गई थीं। तीन पुलिसकर्मियों के शरीर में गोलियों के टुकड़े मिले जो हड्डियों से टकराने से कई टुकड़ों में बँट गए थे।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कानपुर पुलिस हत्याकांड में विकास दुबे और उसके साथियो ने रायफल से गोलीबारी की थी। पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया के दौरान मिले गोलियों के टुकड़ों को परीक्षण के लिए भेजा जाएगा।

बता दें कि पुलिस ने विकास दुबे को गिरफ्तार करने के बाद एक एनकाउंटर में मार गिराया था। गौरतलब है कि गुरुवार को उज्जैन में पकड़े जाने के बाद यूपी पुलिस विकास दुबे को कानपुर लेकर आ रही थी।

इस दौरान रास्ते में अचानक उत्तर प्रदेश एसटीएफ की गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई और विकास दुबे ने मौका देखकर भागने की कोशिश की। पुलिस ने इस दौरान उसे आत्मसमर्पण करने को कहा। मगर विकास दुबे ने पुलिस की बंदूक से उन पर गोली फायर कर दी। इसके बाद पुलिस को भी उसे रोकने के लिए जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी।

UP के बाद अब MP में चला बुल्डोजर: बच्चियों संग रेप आरोपित प्यारे मियाँ का मैरिज हॉल ध्वस्त

नाबालिग लड़कियों को पार्टी के बहाने बुला कर शराब पिला कर नचवाने वाले और फिर उनका बलात्कार करने वाले भोपाल के पत्रकार प्यारे मियाँ पर लगे आरोपों को लेकर मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार सख्त है। पत्रकार प्यारे मियाँ फिलहाल फरार है।

पत्रकार प्यारे मियाँ पर 30,000 रुपए की इनामी राशि रखी गई है। साथ ही भोपाल स्थित उसके मैरिज हॉल को ध्वस्त कर दिया गया। प्रशासन ने बुलडोजर चला कर उसकी संपत्ति को जमींदोज कर दिया।

प्यारे मियाँ को दो सरकारी आवास मिले थे, जिससे उसके रसूख के बारे में पता चलता है। फ़िलहाल दोनों आवंटित आवासों का अलॉटमेंट ख़त्म कर दिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्यारे मियाँ जैसे लोगों ने ग़लत और अनैतिक कार्य कर के पत्रकारिता को बदनाम कर रखा है। पुलिस-प्रशासन की टीम ने हमीदिया कॉलेज के पास गिन्नौरी इलाके में स्थित आरोपी के अवैध मैरिज हॉल को भी गिरा दिया है।

खुद एडीजी और डीआईजी इरशाद वली ने अपनी देखरेख में इस प्रक्रिया को अंजाम दिया। इससे पहले प्यारे मियाँ पर 10,000 रुपए का इनाम रखा गया था, जिसे अब तीन गुना बढ़ा दिया गया है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्यारे मियाँ को पत्रकार के रूप में दी गई अधिमान्यता के साथ-साथ उसे अलॉट किया गया घर भी वापस लिया जाए। उन्होंने कहा:

“बेटियों के विरुद्ध अपराध करने वाले पूरी मानवता के दुश्मन है, मैं उन्हें छोड़ूँगा नहीं। अपराधों में संलग्न सफेदपोशों को चिह्नित कर उनके विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। भोपाल में नाबालिग बेटियों के साथ अपराध करने वाला जघन्य अपराधी है, जहाँ कहीं भी हो, उसे ढूँढ कर उसके विरुद्ध कार्रवाई की जाए। प्रदेश में अभियान चलाकर आदतन अपराधियों, माफियाओं, अतिक्रमणकारियों, अवैध शराब का कारोबार करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करें। भोपाल में बेटियों के विरुद्ध अपराध के आरोपी प्यारे मियाँ को आवंटित शासकीय आवास एवं उसको पत्रकार के रूप में दी गई अधिमान्यता को तुरंत निरस्त करने की कार्रवाई की जाए।”

दरअसल, मामला ये है कि देर रात गश्त करती पुलिस पार्टी को 5 लड़कियाँ सड़क पर दिखीं। कारण पूछा गया तो जवाब देने के हालत में एक भी लड़की नहीं थी। सब शराब के नशे में थीं। नाबालिग लड़कियों का शराब के नशे में होना पुलिस को खटका। पुलिस ने सभी 5 लड़कियों को चाइल्ड लाइन को सौंप दिया। फिर इनकी काउंसलिंग की गई। जब पूछताछ हुई तो इन्होंने यौन शोषण का खुलासा किया।

प्यारे मियाँ ने अपनी सहायक स्वीटी विश्वकर्मा की मदद से इन लड़कियों को अपने यहाँ नाचने के लिए बुलाया था। विष्णु हाइट्स स्थित फ्लैट में पार्टी के दौरान प्यारे मियाँ द्वारा एक नाबालिग का यौन शोषण करने की बात भी सामने आई है। इन पाँचों लड़कियों ने भी प्यारे मियाँ पर लैंगिक शोषण का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें समय-समय पर उस फ्लैट में ले जाया जाता था। उन्हें इसके लिए धनराशि भी दी जाती थी।

PTI को ₹84 करोड़ बकाया जमा कराने का नोटिस: 1984 से नहीं चुकाया किराया, प्रसार भारती से रिश्ते बिगड़े

हाल ही में प्रसार भारती ने ‘प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI)’ के साथ हुए करारों की समीक्षा शुरू की थी। अब उसने PTI को 84 करोड़ रुपए का बिल थमाया है। प्रसार भारती का कहना है कि जिन नियम एवं शर्तों के साथ PTI को उसके नई दिल्ली स्थित दफ्तर के लिए ज़मीन मुहैया कराई गई थी, उसका उसने उल्लंघन किया है। उक्त ज़मीन PTI को लीज एग्रीमेंट पर दी गई थी और न्यूज़ एजेंसी को दसियों करोड़ का फायदा होता आया है।

बता दें कि ग्राउंड फ्लोर पर स्थित दफ्तर के लिए PTI ने 1984 से लेकर अब तक किराया नहीं दिया है। ऊपर से उसने उक्त परिसर में अवैध निर्माण भी कराया है। इन्हीं कारणों से उसे नोटिस भेजा गया है।

पत्रकारों की पूरी लॉबी ने भारत सरकार पर निशाना साधते हुए PTI का बचाव किया है। PTI द्वारा भारत-चीन तनाव के बीच चीनी राजदूत का इंटरव्यू लेकर भारत-विरोधी प्रोपेगेंडे को आगे बढ़ाया गया, जिससे सरकार नाराज़ है। 7 करोड़ रुपए के सालाना करार के साथ भारत सरकार PTI की सबसे बड़ी सब्सक्राइबर है।

वहीं अगर PTI को मिले ताज़ा नोटिस की बात करें तो इसे केंद्रीय आवास मंत्रालय के ‘लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस’ द्वारा मंगलवार (जुलाई 7, 2020) को जारी किया गया था। PTI से कहा गया है कि वो 1 महीने के भीतर सारे बकाए को क्लियर करे वरना उसे 10% जुर्माने के रूप में अलग से देना पड़ेगा। सरकार से अपने सवालों के जवाब या स्पष्टीकरण पाने के लिए भी एजेंसी को 1 सप्ताह का समय दिया गया है।

PTI को मंत्रालय का नोटिस

याद हो कि समाचार एजेंसी के साथ हुए एक साक्षात्कार में चीनी राजदूत सन वीडोंग ने गलवान घाटी में हुए टकराव के लिए पूरे दोष को भारत के ऊपर डाल दिया था। लेकिन आश्चर्य यह कि इस दौरान एक बार भी PTI ने चीनी राजदूत को सवालों से नहीं घेरा या उनके प्रोपेगेंडा फैलाने पर अंकुश लगाने की कोशिश की। मौजूदा विवाद के अलावा पीटीआई का फर्जी खबरों को फैलाने का एक लंबा इतिहास रहा है।

बता दें कि PTI को विभिन्न की फीस के रूप में प्रसार भारती से दशकों से करोड़ों रुपए प्राप्त होते रहे हैं। इस उसे भारी फायदा होता रहा है। सूत्रों के अनुसार PTI को प्रसार भारती से प्रत्येक वर्ष 9 करोड़ रुपए प्राप्त होते हैं। इसके अलावा PIB (प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो) से भी PTI को भारी रकम मिलती आई है। PTI की ‘देश विरोधी’ रिपोर्टिंग देख प्रसार भारती का मानना है कि इस करार के साथ आगे बढ़ना ठीक नहीं होगा।

‘मानव हथियार’ की तरह दंगाइयों का किया प्रयोग: ताहिर हुसैन को बेल नहीं देने से पहले जज ने दिए 6 महत्वपूर्ण बयान

उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों में मारे गए आईबी के अंकित शर्मा की हत्या के आरोपित व आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन की जमानत याचिका को कल (जुलाई 13, 2020) दिल्ली कोर्ट ने खारिज कर दिया।

ताहिर हुसैन ने अपनी बेल याचिका इस आधार पर माँगी थी कि अंकित शर्मा की हत्या में उससे जुड़े कोई सबूत नहीं मिले हैं। मगर, इस याचिका को खारिज करते हुए अतिरिक्त सत्र के न्यायाधीश विनोद यादव ने कई बिंदुओं को मद्देनजर रखा और 6 महत्वपूर्ण बातें कहीं:

ताहिर हुसैन ने समुदाय विशेष के लोगों को भड़काया

ताहिर हुसैन की याचिका को खारिज करते हुए दिल्ली कोर्ट ने सुनिश्चित किया उनके पास इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि आरोपित घटनास्थल पर था और समुदाय विशेष के दंगाइयों को उकसा रहा था।

ताहिर ने दंगाइयों को ‘मानव हथियार’ की तरह प्रयोग किया

कोर्ट ने ताहिर के लिए कहा, “इसने भले ही अपने हाथों का इस्तेमाल नहीं किया हो लेकिन इसने दंगाइयों को ‘मानव हथियार’ की तरह प्रयोग किया। जो इसके भड़काने पर किसी को भी मार सकते थे।”

गवाहों को धमका सकता है ताहिर

कोर्ट ने आगे अपना फैसला सुनाते वक्त प्रत्यक्षदर्शियों की सुरक्षा का भी हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि इस मामले के गवाह उसी इलाके के हैं, जहाँ ताहिर रहता हैं। ऐसे में मुमकिन है अगर ताहिर बेल पर छूटे तो वह उन्हें धमकाए, क्योंकि वह वहाँ की ताकतवर शख्सियत रह चुका है।

CCTV फुटेज न होने के बावजूद ताहिर के ख़िलाफ़ कई सबूत

कोर्ट ने इस फैसले को सुनाते हुए उन गवाहों के बयान को भी ध्यान में रखा, जिन्होंने कहा था कि हुसैन उस दिन घटनास्थल पर मौजूद था जब अंकित शर्मा को दंगाइयों ने मारा। कोर्ट ने इन बयानों को आधार रखते हुए और सीसीटीवी फुटेज की अनुपलब्धता पर कहा, “भले ही इस संबंध में कोई सीसीटीवी फुटेज नहीं है, जो साबित करे कि याचिकाकर्ता घटना पर था। लेकिन इसके अतिरिक्त बहुत से सबूत ऑन रिकॉर्ड हैं।”

प्राथमिक दृष्टया में ताहिर की भूमिका संदिग्ध

दिल्ली कोर्ट ने कहा कि दिल्ली में दंगे गहरी साजिश के नतीजे थे और इन्हें बहुत ही सुनियोजित ढंग से अंजाम दिया गया। प्राथमिक दृष्टया में इस साजिश में AAP के निलंबित पार्षद की भूमिका संदिग्ध है।

पिंजरा तोड़ जैसे कई संगठनों के साथ ताहिर हुसैन की भूमिका पर जाँच

इसके बाद दिल्ली कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए ताहिर से जुड़े अन्य मामलों में चल रही जाँच का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि अभी पिंजरा तोड़, जामिया कॉर्डिनेशन कमेटी और यूनाइटिड अगेंस्ट हेट ग्रुप आदि के साथ ताहिर की भूमिका में जाँच की जा रही है।

गौरतलब है कि इस याचिका के खारिज होने से पहले दिल्ली दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों के मुख्य आरोपित ताहिर हुसैन ने न्यायिक हिरासत के दौरान पुलिस के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया था, जिसमें उसने जानकारी दी कि उसने मुस्लिम भीड़ को अपनी छत पर खड़े होकर गोलीबारी और पत्थरबाजी करने को कहा क्योंकि उसे लगता था कि उसका घर ऊँचा है तो वो हिंदुओं को आसानी से निशाना बना सकता है।

उसने कबूल किया था कि भीड़ पेट्रोल बम लेकर आई थी। उसने बताया कि उसके भाई शाह आलम ने समर्थकों संग मिल कर महक सिंह की पार्किंग में आग लगाई थी। अपने बयान में उसने माना था कि उसने हिंदुओं को सबक सिखाने के लिए दंगों को करवाया था। इसके अलावा उसने कहा था कि इन दंगों के लिए ‘इंडिया अंगेस्ट हेट’ के खालिद सैफी ने मलेशिया जाकर जाकिर नाईक से भी मुलाकात की थी।