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विकास दुबे एनकाउंटर का शिवसेना ने किया समर्थन, संजय राउत ने कहा- अपराधी के मारे जाने पर आँसू बहाने की जरूरत नहीं

उत्तर प्रदेश के कानपुर में विकास दुबे के एनकाउंटर पर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। कॉन्ग्रेस समेत कई पार्टियाँ जहाँ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर सवाल दाग रही हैं। वहीं शिवसेना ने यूपी पुलिस की कार्रवाई का समर्थन किया है। शिवसेना सांसद संजय राउत का कहना है कि पुलिस के एक्शन पर प्रश्न चिन्ह नहीं लगाना चाहिए।

शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा यूपी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल ना उठाए जाए। जिन गुंडों ने पुलिस की हत्या की उस पर सवाल उठना चाहिए, पुलिस पर नहीं। विकास दुबे का एनकाउंटर लॉ एंड आर्डर का हिस्सा था।

संजय राउत ने कहा, “एक असामाजिक तत्व जो गुंडों का एक गिरोह चलाता है, जब कोई उसके जैसा आदमी वर्दीधारी पर हमला करता है, आठ को मारता है, तो उसे माफ नहीं किया जा सकता है। अगर वह मुठभेड़ में मारा गया है, तो मुझे लगता है कि पुलिस पर सवाल उठाना और उनका मनोबल गिराना सही नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा, “अगर 8 पुलिसकर्मी ऐसे मारे जाते हैं तो राज्य सरकार के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता। अगर पुलिस ने एनकाउंटर किया है तो किसी को भी सवाल नहीं उठाना चाहिए – चाहे वह मीडिया हो, राजनीतिक दल हो या फिर मानवाधिकार आयोग। जाँच किया जाए, लेकिन राजनीतिकरण न करें।”

संजय राउत ने कहा, ‘‘विकास दुबे ने आठ पुलिसकर्मियों की हत्या की थी। वर्दी पर हमला करने का मतलब है कि कोई कानून और व्यवस्था नहीं है। राज्य पुलिस द्वारा सख्त कार्रवाई करना आवश्यक है, चाहे वह महाराष्ट्र हो या उत्तर प्रदेश।’’ राज्यसभा सांसद ने आगे कहा, ‘‘एक मुठभेड़ में दुबे के मारे जाने पर आँसू बहाने की कोई जरूरत नहीं है। पुलिस कार्रवाई पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं?’’

गौरतलब है कि 2 जुलाई की रात कानपुर के बिकरु गाँव में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या करने का आरोपित और उत्तर प्रदेश का मोस्ट वांटेड गैंगस्टर विकास दुबे (Vikas Dubey) शुक्रवार (जुलाई 10, 2020) सुबह भागने की कोशिश करते हुए पुलिस एनकाउंटर में मारा गया।

बता दें कि महाराष्ट्र में शिवसेना और कॉन्ग्रेस सत्ता में साथी हैं, लेकिन दोनों की इस मुद्दे पर अलग लाइन है। कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा ने कहा, “बीजेपी की सरकार ने उत्तर प्रदेश को ‘अपराध प्रदेश’ में बदल दिया है। विकास दुबे जैसे अपराधी सत्ता में बैठे लोगों की देखरेख में आगे बढ़ रहे हैं और उन्हें बचाया भी जा रहा है। कॉन्ग्रेस पूरे कानपुर कांड की जाँच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से कराने की माँग करती है।”

इस एनकाउंटर पर कॉन्ग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी समेत कई विपक्षी दलों ने सवाल खड़े किए हैं। मायावती की ओर से माँग की गई है कि इस एनकाउंटर की जाँच की जाए और सुप्रीम कोर्ट उसकी निगरानी करे। वहीं अखिलेश यादव ने माँग की है कि विकास दुबे की फोन कॉल को सार्वजनिक कर देना चाहिए, ताकि उसके साथियों का नाम सामने आ जाए।

वामपंथी विश्वविद्यालयों को ट्रंप ने दी फंडिंग रोकने की धमकी, कहा- बच्चों को शिक्षा चाहिए, उन्हें गुमराह मत करो

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रेजरी विभाग से विश्वविद्यालयों और स्कूलों को कर में मिलने वाली छूट और केन्द्रीय फंडिंग की स्थिति की समीक्षा करने के लिए कहा है। उन्होंने एक ट्वीट में कहा कि बहुत सारे विश्वविद्यालय सिर्फ ‘रेडिकल लेफ्ट इनडॉक्टरिनेशन’ (कट्टर वामपंथी मत) हैं और उनका शिक्षा से कोई वास्ता नहीं।

ट्रंप प्रशासन विश्वविद्यालयों पर अगस्त से स्कूल खोलने का दबाव डाल रहा है, ताकि यह संदेश दिया जा सके कि कोरोना के बाद अब हालात नॉर्मल हो रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप चाहते हैं कि सारे विश्वविद्यालय, स्कूल और कॉलेज अगस्त में खुल जाएँ और उन्होंने धमकी दी है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो वे इन संस्थाओं में सरकारी अनुदान रोक देंगे।

ह्वाइट हाउस में एक कार्यक्रम में ट्रंप ने कहा कि वे सारे गवर्नर और संबंधित लोगों पर दबाव डालेंगे ताकि स्कूल जल्द से जल्द खुलें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनका प्रोपेगेंडा जारी रहता है तो उनकी फंडिंग रद्द कर दी जाएगी।

ट्रंप ने अपने ट्वीट में कहा, “हमारे बच्चों को शिक्षित होना चाहिए, न कि उन्हें प्रेरित कर गुमराह किया जाना चाहिए!”

‘कट्टरपंथी वाम नीतियों’ के लिए स्कूल और उनकी शिक्षा प्रणालियों पर हमला करते हुए, अमेरिकी राष्ट्रपति ने देश भर के स्कूलों से कहा कि वे कोरोना महामारी के बाद कुछ महीनों में कर्मचारियों और छात्रों के स्वास्थ्य को खतरे में डाले बिना सुरक्षित रूप से संस्थानों को फिर से खोल सकते हैं।

उन्होंने कहा कि कुछ स्कूल, जैसे कि न्यूयॉर्क सिटी पब्लिक स्कूल, एक हाइब्रिड मॉडल को अपना रहे हैं, जिसके तहत छात्र खुद और ऑनलाइन, दोनों तरह के कोर्स करेंगे।

ट्रंप ने ट्वीट कर कहा, “बहुत से विश्वविद्यालय और स्कूलों की प्रणाली सिर्फ कट्टर वाम प्रेरणा पर आधारित है ना कि शिक्षा पर। इस कारण मैं ट्रेजरी विभाग से इनकी टैक्स में छूट और फंडिंग की समीक्षा की माँग के लिए कह रहा हूँ। अगर सार्वजनिक नीतियों के विरुद्ध ये काम करते रहे तो इन्हें मिलने वाली फंडिंग से इन्हें वंचित किया जाएगा। हमारे बच्चों को शिक्षा चाहिए, ना कि उन्हें गुमराह किया जाना चाहिए।”

ट्रंप ने स्कूल के दिशा-निर्देशों को बदलने के लिए महामारी नियंत्रण केंद्रों पर दबाव बनाने की भी माँग की है, लेकिन यूएस सीडीसी के निदेशक रॉबर्ट रेडफील्ड ने कहा कि वह उन्हें संशोधित नहीं करेंगे।

मुझे भारत में ही रहने दो, मेरे देश में कोरोना से मची है अफरातफरी: हाई कोर्ट पहुँचा अमेरिकी पर्यटक

कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लगाए गए यात्रा प्रतिबंध के कारण कई विदेशी भारत में फँस गए और वे अपने देश वापस जाने के लिए बेताब हैं। लेकिन केरल में 5 महीने से रुके 74 साल के अमेरिकी नागरिक जॉनी पॉल पियर्स ऐसा बिल्कुल नहीं चाहते हैं। वे अपनी बाकी जिंदगी यहीं बिताना चाहते हैं।

कोच्चि में रह रहे पियर्स ने इसके लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने अपने टूरिस्ट वीजा को बिजनेस वीजा में बदलने की अपील की है।

जॉनी पॉल पियर्स कोरोना काल में भारत सरकार के अपने नागरिकों को लेकर अपनाए जा रहे रवैए से इतने खुश हैं कि वापस नहीं जाना चाहते हैं। उनका कहना है कि अमेरिका में कोरोना वायरस के कारण काफी अफरातफरी मची हुई है और भारत सरकार की तरह वहाँ की सरकार देखभाल नहीं कर रही है। ऐसे में वे यहीं रहना चाहते हैं।

पियर्स ने अपने टूरिस्ट वीजा को बिजनेस वीजा में बदलने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। जॉनी पियर्स ने कहा, “कोविड-19 बीमारी की वजह से अमेरिका में अफरातफरी मची है। अमेरिका की सरकार लोगों का उस तरह ख्याल नहीं रख रही है, जैसा भारत की सरकार रख रही है। मैं यहीं रहना चाहता हूँ।”

उन्होंने बताया, “मैं एक याचिका दायर कर रहा हूँ कि मुझे केरल में और 180 दिनों तक रहने और यहाँ एक ट्रैवल कंपनी शुरू करने के लिए बिजनेस वीजा दिया जाए। काश मेरा परिवार भी यहाँ आ पाता। यहाँ जो कुछ हो रहा है, उससे मैं बहुत प्रभावित हूँ। अमेरिका में लोग कोरोना वायरस की परवाह नहीं करते।”

जॉनी ने कहा, “निवासी बनने का सबसे आसान तरीका एक भारतीय से शादी करना है, लेकिन मैं 74 साल का हूँ और शायद यह विकल्प पीछे छूट गया है।” जॉनी विदेशियों के लिए एक केंद्र स्थापित करने और केरल में पर्यटन की संभावनाओं का पता लगाने की योजना बना रहे हैं।

वह 26 फरवरी को टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे, जो 26 जनवरी 2025 तक वैध है। हालाँकि इस पर वो लगातार 180 दिनों तक ही भारत में रह सकते हैं। उनके 180 दिन 24 अगस्त को समाप्त होने वाले थे, जिसे विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) ने 30 अगस्त तक बढ़ा दिया था।

एक पर्यटक के रूप में भारत की यह उनकी पाँचवीं यात्रा है। देश छोड़े बिना वह अपने पर्यटक वीजा को व्यवसाय वीजा में बदलने के लिए आवेदन नहीं कर सकते हैं। इस पर उन्होंने कहा, “74 साल की उम्र में अमेरिका की यात्रा करना जोखिम भरा है। वहाँ अराजकता है। मुझे केरल बहुत पसंद है। मैं वापस नहीं जाना चाहता हूँ। मैं यहाँ शांति से रहना चाहता हूँ।”

उन्होंने अपने गृह देश में वापस जाने के जोखिम के बारे में बात करते हुए कहा, “केरल में केवल 27 मौतें हैं और अमेरिका में 1.3 लाख से अधिक मौतें हुई हैं। मैं वापस अमेरिका नहीं जाना चाहता। मैं 74 साल का हूँ। ऐसे में अमेरिका की यात्रा करना जोखिम भरा है। यह मेरे लिए बहुत सुरक्षित जगह है। मुझे उम्मीद है कि भारत मुझे अपनाएगा और मुझे यहाँ रहने की अनुमति देगा।”

बता दें कि अमेरिका में इस समय पूरी दुनिया में कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित देश है। अमेरिका में इस समय 3,291,786 केस सामने आ चुके हैं जिसमें से 136,671 लोगों की मौत हो चुकी है। अब तक कुल 1,460,495 लोग ठीक हो चुके हैं और फिलहाल 1,694,620 केस एक्टिव हैं।

‘₹2000 करोड़ कमा सकते हैं’: गहलोत-पायलट को नोटिस, राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार पर संकट

राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। कॉन्ग्रेस विधायकों की खरीद-फरोख्त कर सरकार गिराने की कोशिश के मामले में पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने मुकदमा दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। अशोक गहलोत की अगुवाई वाली सरकार को गिराने के प्रयास में कॉन्ग्रेस और निर्दलीय विधायकों को 20-25 करोड़ रुपए का ऑफर देने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है।

एफआईआर के अनुसार, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप 13 जून को अवैध हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी को लेकर टेलीफोन टैपिंग कर रहा था। उस दौरान एक मोबाइल नंबर की कॉल रिकॉर्डिंग भी की गई, जिसमें यह खुलासा हुआ है कि अशोक गहलोत सरकार को गिराने की साजिश रची जा रही है। फ़ोन पर बातचीत में 2 लोग चर्चा करते हैं कि सरकार गिराने से वे 1,000-2,000 करोड़ रुपए कमा सकते हैं, लेकिन यह तभी हो सकता है जब सीएम अपनी इच्छा के अनुसार हो।

एफआईआर के अनुसार, दो पक्षों के बीच राजस्थान के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री में झगड़े की बात बताई जा रही है। साथ ही कॉन्ग्रेस और निर्दलीय विधायकों को तोड़कर सरकार गिराई जाने की भी बातें सामने आई हैं। कॉन्ग्रेस विधायकों और निर्दलीय विधायकों को 20 से 25 करोड़ रुपए देने के प्रलोभन की भी जानकारी सूत्रों से प्राप्त हुई है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, राजस्थान पुलिस ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनके डिप्टी सचिन पायलट को कॉन्ग्रेस सरकार को गिराने के कथित प्रयासों के संबंध में अपना बयान दर्ज करने के लिए नोटिस जारी किया है। उन्होंने कहा कि पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने सत्ता पक्ष के मुख्य ह्विप महेश जोशी को भी अपना बयान दर्ज करने के लिए नोटिस भेजा है।

बताया जा रहा है कि लगभग एक दर्जन विधायक और अन्य को भी जल्द ही नोटिस जारी किए जा सकते हैं। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि एसओजी ने दो मोबाइल नंबरों की जाँच से सामने आए तथ्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज की है। इससे संकेत मिलता है कि सत्तारूढ़ पार्टी के विधायकों को तोड़ने की कोशिश की जा रही थी।

एसओजी द्वारा अशोक गहलोत सरकार को गिराने के लिए कॉन्ग्रेस विधायकों की ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ में कथित रूप से शामिल होने के आरोप में एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद शुक्रवार (जुलाई 10, 2020) को यह कदम उठाया गया।

रिपोर्ट्स के अनुसार, कॉल रिकार्डिंग से प्राप्त सूचना से यह भी जानकारी में आया है कि कुशलगढ़ विधायक रमीना खड़िया को कथित तौर पर एक बीजेपी नेता द्वारा धन का प्रलोभन देकर अपने पक्ष में करने का प्रयास किया जा रहा है।

कॉल पर महेन्द्रजीत सिंह मालवीय के सम्बन्ध में भी बात होती है कि पहले वो उप मुख्यमंत्री के पाले में थे, अब उन्होनें पाला बदल लिया है। कॉन्ग्रेस विधायकों और निर्दलीय विधायकों को 20-25 करोड़ रुपए के प्रलोभन देने की जानकारी भी सूत्रों से प्राप्त हुई है।

एसओजी की सर्विलांस पर चल रहे नम्बरों की वार्ता में यह भी सामने आया है कि वर्तमान सरकार को गिराकर नया मुख्यमंत्री बनाया जाएगा, लेकिन बीजेपी का कहना कि मुख्यमंत्री हमारा होगा और उप मुख्यमंत्री को केंद्र में मंत्री बना दिया जाएगा। लेकिन उप मुख्यमंत्री का कहना है कि मुख्यमंत्री वो बनेंगे, यह खुलासा भी इन बातचीत में सामने आया है।

‘गायों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता’: कर्नाटक में जल्द पारित होगा गोहत्या पर पाबंदी से जुड़ा विधेयक

कर्नाटक में भी अब जल्द ही गोहत्या विरोधी विधेयक पारित होगा। राज्य के पशुपालन मंत्री प्रभु चौहान ने शुक्रवार (जुलाई 10, 2020) को इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि कई राज्यों ने गोहत्या विरोधी विधेयक पारित किया है, हम इसे कर्नाटक में भी लागू करने की तैयारी कर रहे हैं। राज्य सरकार जल्द ही कई अन्य राज्यों की तर्ज पर गोहत्या, बिक्री और गोमांस की खपत पर प्रतिबंध लगाएगी। 

बता दें कि बीजेपी ने 2018 के विधानसभा चुनावों के लिए अपने घोषणा पत्र में गोहत्या पर प्रतिबंध का वादा किया था। प्रभु चौहान ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि कर्नाटक सरकार गोहत्या और संरक्षण विधेयक 2012 को वापस लाने की तैयारी कर रही है और राज्य के अधिकारियों को गुजरात और उत्तर प्रदेश में भेजा जाएगा।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि एक बार कानून लागू हो जाने के बाद गायों को बेचने और उनके वध के साथ ही गायों को अन्य राज्यों में ले जाए जाने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया जाएगा।

पशुपालन मंत्री ने कहा, “गायों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। हमने पहले ही गोशालाओं को मजबूत करना शुरू कर दिया है।” मंत्री ने आगे कहा कि उन्होंने स्थानीय गाय की नस्लों की रक्षा के लिए चुनाव के दौरान गोसेवा आरोग्य शुरू करने की घोषणा की थी।

प्रभु चौहान ने कहा कि उन्होंने गोहत्या पर प्रतिबंध के लिए जमीनी स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि तेलंगाना, असम, बिहार, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों ने गोहत्या विरोधी कानून लागू किया है। कर्नाटक में भी इसे जल्द ही लागू किया जाएगा।

चौहान ने आगे कहा, “एक बार जब हम कोविड -19 संकट पर काबू पा लेते हैं, तो कानूनों का अध्ययन करने के लिए अधिकारियों को गुजरात और उत्तर प्रदेश भेजा जाएगा। जब बीजेपी सत्ता में थी, हमने 2010 में कानून पारित किया था। गृह मंत्रालय ने हमें कुछ संशोधन करने के निर्देश दिए थे। हालाँकि, जब सिद्धारमैया सरकार सत्ता में आई, तब उन्होंने इसका पालन नहीं किया।”

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, राज्य ने कर्नाटक पशु कल्याण बोर्ड का गठन किया है। वर्तमान में, लगभग 85.22 लाख मवेशी, 29.98 लाख भैंस, 110.91 लाख भेड़, 61.96 लाख बकरियाँ, 3.26 लाख सूअर और 617 लाख मुर्गी, और 4,214 पशु अस्पताल हैं। सरकार आवारा पशुओं के लिए पानी के टैंक और शेड के निर्माण को प्रोत्साहित कर रही है। लॉकडाउन अवधि के दौरान, ऐसी कई संरचनाएँ बनाईं गईं, और जानवरों और पक्षियों को बचाया गया।

चौहान ने कहा कि विभाग जल्द ही एंबुलेंस शुरू करने जा रहा है, जो जानवरों के इलाज के लिए खेतों तक पहुँचेगी। यह एम्बुलेंस स्कैनिंग, ऑपरेशन थिएटर और टेस्टिंग लैब की सुविधाओं से लैस होगी। इसके साथ ही उन्होंने टॉल फ्री नंबर के शुरुआत की भी बात कही, जिस पर कॉल करने के चार घंटे के भीतर टीम मौके पर पहुँच जाएगी।

भारत में गोहत्या पर प्रतिबंध

गोहत्या पर प्रतिबंध संविधान के अनुच्छेद 48 में निहित राज्य नीति का एक निर्देशक सिद्धांत है। इसमें लिखा गया है, “राज्य आधुनिक और वैज्ञानिक तर्ज पर कृषि और पशुपालन को संगठित करने का प्रयास करेगा और विशेष रूप से नस्लों के संरक्षण और सुधार के लिए कदम उठाएगा और गायों एवं बछड़ों और अन्य दुधारू पशुओं के वध को प्रतिबंधित करेगा”।

वर्तमान में, केरल, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों जैसे अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, मेघालय, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम के अलावा, भारत के अधिकांश हिस्सों में गौहत्या प्रतिबंधित है। मणिपुर में, अदालत ने गोहत्या पर प्रतिबंध लगा दिया, लेकिन गोमांस का व्यापक रूप से सेवन किया जाता है।

वायुसेना को अपाचे की आखिरी खेप भी मिली, माउंटेन वॉर फेयर में दुनिया का बेस्ट हेलीकॉप्टर

वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारत और चीन के बीच तनाव लगातार जारी है। इस बीच अमेरिका ने अपाचे हेलीकॉप्टरों की अंतिम खेप भी भारत पहुँचा दी है। इसके जुड़ते ही भारतीय वायु सेना के हमले की क्षमता और अधिक बढ़ गई है। इसके अलावा, चिनूक हैवी लिफ्ट हेलीकॉप्टर भी हाल ही में भारत को सौंपे गए थे।

बोइंग ने शुक्रवार (11 जुलाई, 2020) को जानकारी देते हुए कहा, “22 अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टरों में से आखिरी पाँच को पिछले महीने हिंडन एयर बेस पर भारतीय वायुसेना (IAF) को सौंप दिए गए।” यह भी बताया कि भारतीय वायुसेना को 15 सीएच -47F (I) चिनूक हेवीलिफ्ट हेलीकॉप्टर पहले ही मार्च में सौंपा चुका है।

15 जून को गलवान घाटी में हिंसक संघर्ष के बाद भारत ने सुखोई 30, मिग 29, मिराज 2000 और अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टरों पूर्वी लद्दाख के अग्रिम मोर्चो पर तैनात किया है। मई महीने में चीन की तरफ से बढ़ाए जा रहे सैन्यबल को देखते हुए भारतीय सेना ने भी टैंक और आर्टिलरी गन के साथ अपनी तैयारी सुनिश्चित की थी।

बता दें अपाचे को सबसे आधुनिक लड़ाकू हेलीकॉप्टरों में गिना जाता है। अपाचे ने हमले और एन्टी आर्मर ऑपरेशन वाले एमआई -35 हेलिकॉप्टरों की जगह ली है। एएच -64 E अपाचे नवीनतम संचार, नेविगेशन, सेंसर और हथियार प्रणालियों सहित एक ओपन सिस्टम आर्किटेक्चर से लैस है। माउंटेन वॉर फेयर के लिए यह दुनिया का बेस्ट हेलीकॉप्टर माना जाता है।

इसमें टार्गेट एक्विजिशन डेसिग्नेशन सिस्टम है, जो 24 घंटे हर मौसम में लक्ष्य की जानकारी उपलब्ध कराता है। साथ ही यह नाइट विजन से भी लैस है। इसके अग्नि नियंत्रण रडार को समुद्री वातावरण में संचालित करने के लिए अपडेट किया गया है। यह हमला करने के अलावा रीकनिस्संस, सुरक्षा, शांति व्यवस्था संचालन जैसे कई अभियानों के लिए काम कर सकता है।

पिछले साल सितंबर में अपाचे हेलिकॉप्टर का पहला बैच भारत को मिला था। इसमें आठ अमरीका निर्मित यह-64 E मल्टी-रोल लड़ाकू अपाचे हेलिकॉप्टर शामिल थे जो कि पठानकोट एयर बेस में पाकिस्तान पर नजर रखने के लिए भारतीय वायु सेना में शामिल किए गए थे। दूसरा एचयू 137 स्क्वाड्रन जोरहाट, असम में स्थित है।

रक्षा मंत्रालय ने सितंबर 2015 में 22 AH -64E अपाचे और 15 CH-47 F (I) चिनूक हेलीकॉप्टरों के लिए अमेरिकी कंपनी बोइंग के साथ सौदा किया था। इस साल की शुरुआत में, भारत और अमेरिका ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की दिल्ली यात्रा के दौरान भारतीय सेना के लिए छह अपाचे के अधिग्रहण के लिए एक कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किया था।

पहले चार चिनूक 25 मार्च 2019 को भारत में पहुँचाया गया था। जिसमें ट्विन रोटर हैवी लिफ्ट, मल्टी-मिशन ट्रांसपोर्ट हैं। ये हेलीकॉप्टर 11 टन और 45 सैनिकों का अधिकतम लोड उठा सकते है। कुल 15 हेलीकॉप्टरों को असम के दिनजान से बाहर स्थित सेकंड स्क्वाड्रन के साथ बल में शामिल किया गया है।

बोइंग के अनुसार कि भारत अपाचे का संचालन करने वाले 17 देशों में से एक है। अपाचे को भारतीय वायुसेना की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया गया है। ट्विन रोटर चिनूक 50 साल से अधिक समय से यह दुनिया का सबसे विश्वसनीय और भरोसेमंद हैवीलिफ्ट हेलीकॉप्टर बना हुआ है। दुनिया के 24 देशों के पास या तो चिनूक हेलीकॉप्टर सेवा में हैं या फिर उनके लिए सौदा किया गया है।

UP के देवेंद्र और भोला पांडे: इंदिरा गाँधी के लिए विमान अगवा किया तो कॉन्ग्रेस ने बना दिया MP-MLA

सियासत और अपराध का घालमेल नई बात नहीं है। इस मोर्चे पर भी कॉन्ग्रेस सबसे ज्यादा अनुभव रखती है। सत्तालोभ और तुष्टिकरण के लिए ऐसा कोई सिद्धांत नहीं है जिसे उसने ध्वस्त न किया हो।

इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण अतीत में मौजूद है, जब विमान अगवा करने वाले 2 लोगों को कॉन्ग्रेस ने माननीय बनाने में देर नहीं लगाई। दोनों को न केवल पार्टी में पद दिया गया बल्कि विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भी कई बार टिकट से ‘सम्मानित’ किया गया। बात हो रही है देवेंद्र और भोलानाथ पांडे की।

यह वाकया दिसंबर 1978 का है। किशन आर वाधवानी की पुस्तक ‘इंडियन एयरपोर्ट्स (शॉकिंग ग्राउंड रियलिटीज़)’ के अनुसार, भोलानाथ और देवेंद्र पांडे ने इंडियन एयरलाइंस के एक घरेलू उड़ान का अपहरण कर लिया था। देवेंद्र पांडे कॉन्ग्रेस के उन समर्थकों में से एक थे, जो अपने चहेते नेता के लिए कुछ भी कर गुजरने को तत्पर रहते थे।

भोलानाथ पांडे और देवेंद्र पांडे

इंदिरा गाँधी की रिहाई के लिए 27 साल के देवेंद्र पांडे ने भोला पांडे के साथ मिलकर फिल्मी स्टाइल में इंडियन एयरलाइंस के विमान को हाइजैक कर लिया। दोनों ने क्रिकेट बॉल को रुमाल से ढककर उसे बम बताते हुए प्लेन को अगवा किया। दिल्ली जाने वाले प्लेन को वाराणसी ले गए। उस वक्त प्लेन में 132 यात्री सवार थे।

विमान अपहरण के बदले उन्होंने भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी कि रिहाई की माँग की थी, जिन्हें कि आपातकाल के बाद गिरफ्तार किया गया था। इन दोनों ने यात्रियों को छोड़ने के लिए मुख्यतः तीन शर्तें रखी थीं –

  1. इंदिरा गाँधी को रिहा किया जाए।
  2. इंदिरा गाँधी और संजय गाँधी के खिलाफ लगे सारे आरोप खत्म किए जाएँ।
  3. इंदिरा गाँधी को गिरफ्तार करने वाली केंद्र की जनता पार्टी की सरकार इस्तीफा दे।

हालाँकि, इस विमान अपहरण कि घटना को राजनीतिक हास्य का नाम दिया गया क्योंकि पांडे भाइयों ने विमान अपहरण के लिए बच्चों के खिलौने वाले हथियार का इस्तेमाल किया था। कुछ घंटों के लिए 132 यात्रियों को बंधक बनाए रखने के बाद, उन्होंने मीडिया की मौजूदगी में वाराणसी उतरने पर आत्मसमर्पण कर दिया था।

देवन्द्र पांडे को इस मामले में 9 महीने, 28 दिन जेल में भी रहना पड़ा था। देश में जब फिर से इंदिरा गाँधी के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की सरकार बनी, तब इन पर लगे मुकदमों को वापस ले लिया गया।

गाँधी परिवार की भक्ति में उठाए गए इस कदम के कारण ही विमान अपहरण के इस संगीन अपराध के बावजूद ‘पुरस्कार स्वरूप’ कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा उन्हें पुरस्कृत किया गया था- पहले उन्हें 1980 में विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी का टिकट मिला और बाद में लोकसभा के लिए। इस चुनाव में पांडे जीत गए और उत्तर प्रदेश की विधान सभा के सदस्य बन गए।

इंदिरा गाँधी के साथ कॉन्ग्रेस नेता पांडे बंधु

भोलानाथ पांडे ने वर्ष 1980 से 1985 और 1989 से 1991 तक दोआबा, बलिया से कॉन्ग्रेस विधायक के रूप में कार्य किया। दूसरी तरफ देवेंद्र पांडे दो कार्यकाल तक संसद के सदस्य रहे और उत्तर प्रदेश के महासचिव के रूप में कॉन्ग्रेस पार्टी की सेवा की।

दोनों पांडे बंधुओं को भारत में आपातकाल के दौरान जेल में सभी विपक्षी नेताओं की हत्या के विचार के साथ ही कई अन्य आरोपों में गिरफ्तार किया गया था। भोलानाथ पांडे आजमगढ़ जिले से है, और देवेंद्र पांडे उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से। दोनों ही युवा कॉन्ग्रेस के सदस्य थे।

विमान का अपहरण करना कुछ सबसे बड़े अपराधों में से एक है और ऐसे व्यक्ति को आजीवन कारावास की न्यूनतम सजा से लेकर मौत की सजा तक हो सकती थी। लेकिन कॉन्ग्रेसी प्लेन अपहरणकर्ताओं को परिवार के लिए उठाए गए इस कदम के लिए संसद भेजकर सम्मानित किया गया।

विमान अपहरण की इस घटना के दशकों बाद, ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की 2014 की एक रिपोर्ट से पता चला कि विमान अपहरणकर्ता भोलानाथ पांडे लोकसभा चुनाव के दौरान सलेमपुर से कॉन्ग्रेस का उम्मीदवार था।

इसके अलावा, विमान अपहरण की एक अन्य घटना के आरोपित गजिंदर सिंह ने 4 कट्टर सिख संगठन ‘दल खालसा’ कार्यकर्ताओं के साथ सितंबर 29, 1981 को दिल्ली से श्रीनगर जा रही एक इंडिया एयरलाइन्स उड़ान को अगवा कर लिया था और इसे लाहौर में उतारा गया था जहाँ वो पाकिस्तानी बलों द्वारा एक कमांडो ऑपरेशन में पकड़ा गया था।

गजिंदर सिंह की किस्मत इंदिरा गाँधी की रिहाई के लिए विमान अपहरण करने वाले पांडे बंधुओं जितनी अच्छी नहीं थी। गजिंदर सिंह को पाकिस्तान की अदालत ने सजा सुनाई थी। उसके इस कृत्य के लिए 14 साल की जेल की सजा दी गई और नवंबर 1994 में रिहाई के बाद से वह निर्वासन में रह रहा था। इस तरह भारत में दो विमान अपहरणकर्ताओं की दो अलग-अलग नियति तय हुईं।

J&K: आबिद हक्कानी ने की थी BJP नेता वसीम बारी की हत्या, पाकिस्तान से लेकर आया था ट्रेनिंग

उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा में भाजपा नेता वसीम बारी और उनके परिवार के दो सदस्यों की हत्या करने वाले आतंकवादी की सुरक्षा बलों ने पहचान कर ली है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक आतंकी की पहचान आबिद हक्कानी के रूप में हुई है। वह बुधवार (जुलाई 8, 2020) रात 8:40 बजे बांदीपोरा पुलिस स्टेशन पर लगे एक सीसीटीवी कैमरे में कैद हुआ था।

बताया जा रहा है कि यह आतंकवादी वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान गया था। वहाँ उसने ट्रेनिंग ली और फिर भारत में घुस गया।

इससे पहले जम्मू-कश्मीर के आईजी विजय कुमार ने कहा था कि भाजपा नेता की सुरक्षा में काेई कमी नहीं की गई थी। बारी काे 10 पीएसओ उपलब्ध कराए गए थे। इनमें से 2 सुरक्षा विंग और 8 जिला पुलिस के जवान थे। यह सुरक्षा में चूक का मामला है। सुरक्षाकर्मी चाैकस रहते ताे आतंकी मार गिराए जाते।

जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सभी दस पुलिसकर्मियों को पूछताछ के लिए गिरफ्तार कर लिया गया है क्योंकि जब आतंकवादी बीजेपी नेता पर हमला कर रहे थे तो पुलिसकर्मी उनके आसपास नहीं थे। खबरों के मुताबिक, जब आतंकवादियों ने बीजेपी नेता पर गोलियाँ चलाई तो पुलिसकर्मी घर के अंदर थे।

आईजी विजय कुमार ने जानकारी देते हुए बताया, “उनके पास पर्याप्त सुरक्षा थी। ऑन ड्यूटी सुरक्षाकर्मियों से लापरवाही हुई। ड्यूटी पर मौजूद सभी 10 पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर दिया गया है। सीसीटीवी फुटेज को देखने पर ऐसा लग रहा है कि इस वारदात को पूरी योजना के तहत अंजाम दिया गया है।”

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले में आतंकियों ने बुधवार (जुलाई 08, 2020) देर शाम भाजपा के जिलाध्यक्ष वसीम बारी की हत्या कर दी थी। आतंकवादियों ने वसीम बारी के अलावा उनके पिता और भाई की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई। उमर भाजपा की जिला युवा इकाई का सदस्य थे, जबकि उनके पिता बशीर शेख भाजपा के जिला उपाध्यक्ष रह चुके थे।

पुलिस ने बताया कि इस घटना में उनके पिता और भाई की भी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि हमला करने के बाद आतंकी मौके से फरार हो गए। हालाँकि अब सीसीटीवी फुटेज से आतंकी की पहचान हो चुकी है।

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने संवेदना व्यक्त करते हुए कहा था, “वसीम बारी की हत्या से पार्टी को भारी नुकसान हुआ है। मैं उनके परिवार के प्रति गहरी संवेदना जाहिर करता हूँ। पूरी भाजपा पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है। मैं भरोसा देता हूँ कि उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।”

आतंकी फंडिंग के लिए केरल में लाया गया सोना? NIA ने दर्ज किया मामला, स्वप्ना सुरेश की अग्रिम जमानत का विरोध

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने केरल में बड़े पैमाने पर सोना तस्करी को देश की सुरक्षा और आर्थिक स्थायित्व पर खतरा बताते हुए आतंकी कार्रवाई करार दिया है। गृह मंत्रालय से हरी झंडी मिलने के बाद NIA ने गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम कानून (UAPA) की आतंकवाद से जुड़ी धाराओं के तहत FIR दर्ज की है। 

NIA ने प्रमुख संदिग्ध स्वप्‍ना सुरेश सहित चार लोगों के खिलाफ एक FIR दर्ज की। जाँच एजेंसी की तरफ से जारी एक बयान में कहा गया है कि केरल सोना तस्करी मामले में गैर कानूनी गतिविधि (निवारक) अधिनियम, 1967 की धारा 16, 17 और 18 के तहत चार आरोपितों– पीएस सरित, स्वप्‍ना प्रभा सुरेश, फाजिल फरीद और संदीप नायर के खिलाफ त्रिवेंद्रम अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे से पाँच जुलाई को कस्टम (प्रीवेंटिव) कमिशनरेट, कोचीन द्वारा 14.82 करोड़ रुपए मूल्य के 24 कैरेट के 30 किलोग्राम सोने की बरामदगी के सिलसिले में एक प्राथमिकी दर्ज की गई है।

इसके साथ ही स्वप्ना सुरेश की अग्रिम जमानत याचिका पर केरल उच्च न्यायालय ने मंगलवार तक सुनवाई स्थगित कर दी है। केंद्र सरकार के वकील रवि प्रकाश ने अदालत से NIA एक्ट की धारा 21 का जिक्र करते हुए कहा, “चूँकि इसकी जाँच एनआईए कर रही है, इसलिए उच्च न्यायालय जमानत याचिका पर विचार नहीं कर सकता है और मामले को विशेष अदालत द्वारा निपटाया जाना चाहिए।” वहीं, एनआईए ने भी इस मामले में अग्रिम जमानत याचिका का विरोध किया है।

सीजीसी ने कहा कि जाँच के लिए स्वप्ना सुरेश से हिरासत में पूछताछ आवश्यक थी। वहीं कस्टम्स को सोर्स के जरिए जानकारी प्राप्त हुई कि तीन व्यक्ति, पी आर सरित, संदीप नायर और स्वप्ना सुरेश ने डिप्लोमैटिक अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए सोने की तस्करी में शामिल थे।

बता दें कि तिरुवनंतपुरम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एयर कार्गो के माध्यम से यूएई (संयुक्त अरब अमीरात) से आए एक राजनयिक के सामान से 30 किलोग्राम सोना जब्त किया गया था। इसका मूल्य लगभग 15 करोड़ रुपए बताया जा रहा है।

इसके बाद उस व्यक्ति सरित कुमार को कस्टम विभाग ने हिरासत में ले लिया। पूछताछ में सरित ने बताया कि वह लगभग एक साल से हवाई अड्डे से इस तरह का सामान ले जा रहा था। सरित ने बताया कि उनकी एक सहयोगी केरल सरकार के आईटी विभाग की एक कर्मचारी है जिसका नाम स्वप्ना सुरेश है। सुरेश से पूछताछ करने के लिए जब विभाग हरकत में आया तो पता चला कि वो सामान खोले जाने के एक दिन पहले से लापता है।

सीजीसी ने आगे कहा कि सरित और संध्या (संदीप नायर की पत्नी) के बयान, सीमा शुल्क अधिनियम की धारा 108 के तहत दर्ज किए गए हैं। इन बयानों से पता चला कि स्वप्ना सुरेश सामान की डिलीवरी के लिए राजनयिक कागजात की व्यवस्था करने में शामिल थी।

स्वप्ना सुरेश के साथ मुख्यमंत्री के विजयन के नजदीकी को लेकर केरल में राजनीतिक घमासान मचा हुआ है। विपक्ष मुख्यमंत्री के इस्तीफे की माँग कर रहा है। एनआइए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में सोना तस्करी सीधे तौर पर देश की आर्थिक स्थिरता पर हमले की कोशिश है। साथ ही इसका उपयोग आतंकी फंडिंग के लिए किए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। 

मामला खुलने के बाद केरल के प्रमुख सचिव एम शिवशंकर को पद से हटा दिया गया है। स्वप्ना, एम शिवशंकर की करीबी है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री कार्यालय व सरकार के वरिष्ठ अधिकारी पूरे मामले को रफा-दफा करने के लिए कस्टम के अधिकारियों पर दबाव बना रहे थे।

गौरतलब है कि मामले में सरित को भी गिरफ़्तार कर लिया गया है। केरल भाजपा अध्यक्ष के सुरेंद्रन का कहना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय से कस्टम अधिकारियों को फोन कॉल्स किए गए ताकि जाँच रोकी जा सके। उनका कहना है कि ये फोन कॉल मुख्यमंत्री के किसी क़रीबी ने ही किया था। CM विजयन ने इसे एक ‘बेहूदा’ आरोप करार दिया। उन्होंने कहा कि संदिग्ध बैकग्राउंड वाले लोगों को सीएमओ में कोई काम दिया ही नहीं जाता है।

आंध्र प्रदेश: जहाँ रहते हैं केवल हिंदू वहाँ बनाया जा रहा चर्च, शिकायत पर प्रशासन ने ग्रामीणों का किया उत्पीड़न

पिछले आंध्र प्रदेश के सत्ताधारी दल के ही एक सांसद ने ईसाई धर्मांतरण को सरकारी संरक्षण दिए जाने का खुलासा किया था। अब एक ऐसे इलाके में चर्चा का निर्माण किए जाने का मामला सामने आया जहॉं केवल हिंदू ही रहते हैं। इतना ही नहीं जब ग्रामीणों ने इस पर आपत्ति जताई तो प्रशासन ने उनका कथित तौर पर उत्पीड़न किया।

आंध्र प्रदेश के मूलस्थानम अग्रहारम (Moolasthanam Agraharam) गाँव में इसाई मिशनरियों द्वारा पूर्वी गोदावरी जिले में एक अवैध चर्च का निर्माण कार्य शुरू किया गया है। निर्माण रिहायशी इलाके में चल रहा है और यहाँ केवल हिन्दू परिवार रहते हैं।

ट्विटर पर ‘लीगल राइट्स प्रोटेक्शन फोरम’ एकाउंट द्वारा इस बात की जानकारी दी गई है। इसके अनुसार, मूलस्थानम (वी), आलमुरु, ईजी जिला, आंध्र प्रदेश में जिला प्रशासन को कई शिकायतों और निरंतर याद दिलाने के बावजूद अवैध चर्च निर्माण हो रहा है।

इस मामले में ग्रामीणों ने राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, भारत (एनएचआरसी) को भी लिखा है कि अधिकारियों द्वारा उनके साथ द्वितीय श्रेणी के नागरिक जैसा व्यवहार किया जा रहा है। अब वे अपने अधिकारों की रक्षा हेतु NHRC की मदद का इन्तजार कर रहे हैं।

‘ऑर्गेनाइजर’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस चर्च निर्माण के अवैध होने के कारण ग्रामीणों ने इस पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि यह गाँव में शांति और सार्वजनिक व्यवस्था में व्यवधान पैदा कर रहा है। मिशनरियों द्वारा चर्च निर्माण रोकने के लिए ग्रामीणों की दलील अनसुनी कर दी गई और इसके बाद उन्होंने पंचायत और पुलिस से संपर्क करने का फैसला किया।

मूलस्थानम अग्रहारम के ग्रामीणों द्वारा स्थानीय अधिकारियों के पास एक आरटीआई भी दायर की गई थी। उम्मीद के अनुसार ही आरटीआई के जवाब में पता चला कि चर्च के निर्माण के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई थी।

संयोग से, नवम्बर 29, 2012 को आंध्र प्रदेश के पंचायत राज और ग्रामीण विकास विभाग द्वारा एक आदेश (GOMS 376) जारी किया गया था, जिसमें कहा गया था कि किसी भी धार्मिक स्थल के निर्माण की अनुमति केवल तभी दी जा सकती है जब पड़ोसी को इससे कोई ऐतराज ना हो और जिला कलेक्टर से अनुमति प्राप्त की गई हो।

लेकिन उक्त चर्च ने ऐसी कोई अनुमति नहीं ली थी और गाँव के निवासियों ने भी इसके निर्माण पर आपत्ति जताई थी। फिर भी यह निर्माण नहीं रोका गया। ग्रामीणों ने इसके बाद ग्राम राजस्व अधिकारी से संपर्क किया, फिर आवश्यक कार्रवाई के लिए मंडल राजस्व अधिकारी और जिला कलेक्टर सहित उच्च अधिकारियों से संपर्क किया। उनमें से किसी ने भी मामले में हस्तक्षेप नहीं किया और इसके विपरीत स्थानीय पुलिस ने शिकायत करने के लिए हिंदुओं को ही परेशान करना शुरू कर दिया।

प्रशासन के इस व्यवहार के बाद ग्रामीणों ने अवैध चर्च के निर्माण को रोकने के लिए भूख हड़ताल की। स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने फिर से शिकायत कर रहे ग्रामीणों को परेशान करना शुरू कर दिया। उन्हें बार-बार पुलिस स्टेशन बुलाया गया और बात न मानने पर आपराधिक मामले दर्ज करने की धमकी दी जाती थी। इससे ही स्पष्ट होता है कि इसाई मिशनरियों कि पुलिस और प्रशासन में कितनी गहरी पैठ है।

उत्पीड़न के बाद ग्रामीणों ने जिला पुलिस अधीक्षक से संपर्क किया और स्थानीय पुलिस के व्यवहार के बारे में उन्हें अवगत कराया। साथ ही उन्होंने पूरे मामले में न्याय की भी माँग की। लेकिन उन्हें यहाँ से भी कोई न्याय नहीं मिला। कोई विकल्प शेष ना बचने के बाद अब ग्रामीणों ने न्याय मिलने की उम्मीद में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) का दरवाजा खटखटाया है।

मूलस्थान अग्रहारम के ग्रामीणों ने एनएचआरसी के अध्यक्ष को पत्र लिखकर पूरे मामले की व्याख्या की है। इस पत्र में कहा गया है कि बिना किसी डर के शांतिपूर्वक जीवन जीने के उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन किया गया है।

पत्र के अनुसार, ग्रामीणों ने कहा है कि उनकी शिकायतों पर विचार ना करने और अपनी शिकायतों के कारण उन्हें निशाना बनाने को नजरअंदाज कर भी दिया जाए तो भी उनके साथ संविधान द्वारा प्रदत्त उनके समानता के अधिकार का हनन किया गया है।

मूलस्थान अग्रहारम के ग्रामीणों द्वारा एनएचआरसी को लिखा गया पत्र (साभार ऑर्गेनाइजर)

अपनी अपील में ग्रामीणों ने एनएचआरसी के पुलिस महानिदेशक, आंध्र प्रदेश के मुख्य सचिव, पूर्वी गोदावरी के जिला कलेक्टर, जिला पुलिस अधीक्षक से इस मामले में हस्तक्षेप करने की माँग की है और उनसे इस मामले में जाँच करने और सख्त कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह किया है। उन्होंने दलील दी है कि चर्च का निर्माण सार्वजनिक शांति और व्यवस्था के लिए हानिकारक है।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस की महामारी के दौरान इसाई मिशनरियों द्वारा देश के विभिन्न हिस्सों में अवैध चर्च निर्माण से लेकर धर्मांतरण के कई मामले सामने आए हैं। ऑपइंडिया की ही एक रिपोर्ट में हमने बताया था कि किस प्रकार उत्तराखंड राज्य में भी प्रलोभन देकर और युवाओं को गुमराह कर अनुसूचित जाति के लोगों को निशाना बनाकर उन्हें चर्च निर्माण और धर्मांतरण के लिए उकसाया जाता था है।