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ताहिर हुसैन के खिलाफ उसके ही 2 कर्मचारी मुख्य गवाह, खोले दिल्ली दंगों के दिन के कई राज

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के मामले में आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन के ख़िलाफ़ दायर चार्जशीट को लेकर एक नया खुलासा हुआ है। चार्जशीट में पुलिस ने ताहिर के यहाँ काम करने वाले दो कर्मचारियों को मुख्य गवाह बनाया है।

इन दोनों की पहचान गिरिष पाल और राहुल कसाना के रूप में हुई है। दोनों ने पुलिस को बताया है कि वे 24 फरवरी को खजूरी खास इलाके में हुसैन के कार्यालय में ही मौजूद थे। इन्होंने पुलिस को दिए बयान में बताया कि आखिर दंगों के दिन ताहिर हुसैन क्या कर रहा था और उस दिन उन लोगों ने क्या-क्या देखा।

चार्जशीट के मुताबिक, इन दोनों ने उस दिन ताहिर हुसैन के घर के बेसमेंट पर कई लोगों को इकट्ठा होते हुए देखा था और ताहिर उनके साथ बहुत ही गोपनीय तरीके से बात कर रहा था।

इन दोनों ने बताया कि ताहिर हुसैन जिनसे बात कर रहा था, उनमें आरोपित शाह आलम, इरशाद, आबिद, अरशद प्रधान, राशिद और शादाब भी अन्य आरोपितों के साथ वहाँ मौजूद थे।

इसमें कहा गया है कि पुलिस ने इन दोनों को मुख्य गवाह बनाया। जो बाद में बाहर भीड़ की आवाज सुनकर और कार्यालय में तनाव को परखते हुए वहाँ से चले गए थे।

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने पिछले महीने ताहिर हुसैन और 14 अन्य के खिलाफ मुख्य मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट पवन सिंह राजावत के समक्ष आरोप-पत्र दाखिल किया था। अब कोर्ट इस चार्जशीट पर अगस्त में सुनवाई करेगा।

इस चार्जशीट में राजबीर सिंह यादव नाम के शख्स को भी गवाह बनाया गया है। राजबीर ने अपने बयान में कहा है कि यादव हुसैन के घर के पास एक पार्किंग स्थल में शादी के लिए खाने की तैयारियों को देख रहे थे। मगर, भीड़ ने उनके दोस्त की बेटी की शादी के लिए तैयार खाने को बर्बाद कर दिया और आरोपित रियाकत अली ने उनसे 62,000 रुपए लूट लिए।

चार्जशीट में शाह आलम नाम के आरोपित की मौजूदगी का भी उल्लेख है। चार्जशीट में कहा गया है कि रियाकत के साथ उस दिन शाह आलम व कई अन्य लोग मौजूद थे और हुसैन भी उसी भीड़ का हिस्सा था।

एक अन्य गवाह के अनुसार, हुसैन उस दिन अपने घर की छत पर मौजूद रहकर न केवल पत्थर फेंक रहा था बल्कि साथ मौजूद अन्य लोगों को निर्देश भी दे रहा था, जो पार्किंग की तरफ पत्थर और पेट्रोल बम भी फेंक रहे थे।

चार्जशीट में बताया गया है कि जाँच के दौरान, निजी और सरकारी कैमरों से घटना के CCTV फुटेज को इकट्ठा करने की कोशिश की गई, लेकिन पास में कोई भी CCTV नहीं होने के कारण कोई वीडियो नहीं मिला।

यहाँ बता दें, 24 फरवरी के दिन चाँद बाग में हुई हिंसा मामले में ताहिर हुसैन को 14 अन्य लोगों के साथ आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत मामले में आरोपित बनाया गया है। उसपर कड़े आतंकवाद रोधी कानून गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा उसपर हिंसा में पूर्व निर्धारित साजिश का हिस्सा होने के मामले में अलग से मामला दर्ज हुआ है।

विकास दुबे एनकाउंटर पर लिबरलों का अनर्गल प्रलाप शुरू: अजीत भारती ने खोली कलई | Ajeet Bharti on Vikas Dubey encounter

60 से अधिक मामलों में वांछित और 8 पुलिसकर्मियों की हत्या के आरोपित विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद लिबरल गैंग सक्रिय हो गया और कहने लगा कि यूपी में गुंडा राज आ गया। जब पुलिस विकास दुबे को पकड़ने में सफल नहीं हो पा रही थी तो लिबरलों ने कहा कि योगी सरकार ब्राह्मण अपराधियों को बचाना चाह रही है। लिबरलों ने नैरेटिव फैलाया कि छोटे अपराधियों का एनकाउंटर किया जाता है, ऐसे दुर्दांत अपराधियों को पकड़ा जाता है, ताकि वो जेल में बैठकर शासन कर सके।

फिर अगले दिन कहा जाता है कि पुलिस उसका एनकाउंटर कर देगी और उसके साथ ही बड़े-बड़े राज दफन हो जाएँगे। द वायर ने अपने एक लेख में बताया कि योगी राज में ऐसे दुर्दांत अपराधियों का एनकाउंटर नहीं हो पाता है। और जैसे ही उसका एनकाउंटर होता है, लिबरल चिल्लाने लगता है कि उसके सीने में कई राज दफन थे, जो उसी के साथ चले गए।

पूरा वीडियो यहाँ क्लिक कर के देखें।

व्यंग्य: बकैत कुमार की स्क्रिप्ट लीक, विकास दूबे एनकाउंटर | Bakait Kumar’s Primetime script leaked

विकास दूबे एनकाउंटर पर बकैत कुमार की स्क्रिप्ट लीक हो गई। जानिए आज क्या बोलेंगे बकैत कुमार रात के प्राइमटाइम में, विकास दूबे एनकाउंटर वाली स्क्रिप्ट हमारे पास आ गई है।

पूरा वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करें

महिलाओं को बंधक बनाकर फरीदाबाद में रुका था विकास दुबे, बोले लल्लन वाजपेयी- सदियों बाद आज़ाद हुए

गैंगस्टर विकास दुबे आज (10 जुलाई) मार गिराया गया। उसे उज्जैन से गिरफ्तार किया गया था। कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या करने और उज्जैन पहुॅंचने से पहले वह फरीदाबाद में भी रुका था।

फरीदाबाद में उसको शरण देने के आरोप में अंकुर मिश्रा और उनके पिता श्रवण मिश्रा पहले ही गिरफ्तार किए जा चुके हैं। अब दैनिक जागरण के सुशील भाटिया ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया है कि कैसे विकास और उसके साथियों को मिश्रा के घर शरण मिली थी।

श्रवण मिश्रा की पत्नी शांति मिश्रा और बहू गुंजन मिश्रा के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि विकास उनका दूर का रिश्तेदार है। 6 जुलाई को वह अपने साथी प्रभात मिश्रा और अमर दुबे के साथ मिश्रा के घर में दाखिल हुआ था। चेहरे पर मास्क लगाए ये लोग जब उनके घर में घुसे तब घर के पुरुष सदस्य बाहर थे। महिलाओं ने उनसे जाने की गुजारिश की, लेकिन हथियार के बल पर उसने उन्हें बंधक बना लिया और उनके मोबाइल ले लिए। जब रात में अंकुर और श्रवण लौटे तो ये लोग उनके घर में ही थे।

रिपोर्ट में बताया गया है कि विकास ने श्रवण के पहचान पत्र ले लिए और अंकुर को अपने साथ लेकर होटल में कमरा बुक करने चला गया। वहीं इस दौरान प्रभात और अमर उनके घर ही रुके रहे। शांति और गुंजन ने उम्मीद जताई है कि विकास के एनकाउंटर में मारे जाने के बाद अंकुर और श्रवण जल्द बाहर आ जाएँगे। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जॉंच की मॉंग भी उच्चाधिकारियों से की है।

उल्लेखनीय है कि अमर दुबे को 8 जुलाई को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था। इसके बाद उसका वह बाप भी जिंदा पकड़ा गया था जो पॉंच साल से अपने मौत की अफवाह फैलाकर भूमिगत था

19 साल पहले भी हुई थी विकास को एनकाउंटर में मारने की तैयारी

इधर दैनिक भास्कर ने एक रिपोर्ट में दावा किया है कि विकास दुबे को 19 साल पहले भी एनकाउंटर में मार गिराने की तैयारी की गई थी। लेकिन वह बच गया था। यह दावा अमर उजाला की एक पुरानी रिपोर्ट और स्थानीय पत्रकारों के हवाले से किया गया है।

यह मामला तब का है जब विकास दुबे ने थाने में घुसकर संतोष शुक्ला की हत्या कर दी थी। शुक्ला को तत्कालीन राजनाथ सरकार में राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त था। इस मामले में उसके खिलाफ बाद में कोई गवाह नहीं मिले थे।

रिपोर्ट में एक पत्रकार के हवाले से बताया गया है कि तब के डीजीपी वीके गुप्ता ने विकास दुबे पर 50 हजार का इनाम घोषित कर कानपुर पुलिस को उसके एनकाउंटर के निर्देश दिए थे। उसकी तलाश में 120 पुलिसकर्मियों की टीम बनाई गई थी। बाद में जब उसके पकड़े जाने की खबर फैली तो आसपास के गॉंवों के लोगों ने थाने को घेर लिया था ताकि उसका एनकाउंटर न किया जा सके।

विकास दुबे की मौत के बाद शिवली के पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष लल्लन वाजपेयी चर्चा में आए हैं। साल 2002 में चुनावी रंजिश के चलते विकास दुबे ने लल्लन वाजपेयी पर हमला करवाया था। लेकिन उस कोशिश में भाजपा नेता संतोष शुक्ला मारे गए थे।

विकास दुबे की मौत पर लल्लन वाजपेयी ने कहा, “आज ऐसा लग रहा है जैसे हम सदियों बाद स्वतंत्र हुए हों। एक आतंक युग का अंत और शांत युग का प्रारंभ हुआ है। शाम को संगीत की व्यवस्था भी की गई है।”

गौरतलब है कि एसटीएफ ने अपने बयान में बताया है कि उज्जैन से लाते वक्त रास्ते में जानवरों को बचाने के चक्कर में वह गाड़ी पलट गई जिसमें विकास सवार था। एक पुलिसकर्मी की बंदूक छीन वह कच्चे रास्ते से भाग रहा था। इसी दौरान मुठभेड़ में वह मारा गया। कानपुर में 3 जुलाई को शूटआउट में आठ पुलिसकर्मी मारे गए थे। विकास दुबे इस घटना का मुख्य आरोपित था और इसके बाद से ही उसकी सरगर्मी से तलाश की जा रही थी।

Tiktok समेत 59 प्रतिबंधित चीनी एप को सरकार ने भेजे 70 सवाल, 22 जुलाई तक देना होगा जवाब

भारत सरकार ने पिछले दिनों सुरक्षा लिहाज से टिकटॉक समेत 59 चीनी एप को बैन करके फैसला लिया था। अब केंद्रीय इलेक्‍ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इस संबंध में इन सभी एप को 70 सवालों की सूची के साथ नोटिस भेजा है

इंडिया टुडे की रिपोर्ट में सवालों की संख्या 79 बताई गई है। साथ ही कहा है कि 22 जुलाई तक इनसे जवाब देने को कहा गया है। मंत्रालय ने नोटिस में कहा है कि अगर निर्धारित समय सीमा तक ये एप जवाब देने में विफल रहते हैं तो भारत में इन पर हमेशा के लिए बैन लगा दिया जाएगा।

रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय को इन एप्स की पृष्ठभूमि और इनके संचालन की सूचना भारतीय खुफिया एजेंसी व ग्लोबस साइबर वॉचडॉग से मिल रही है। इसलिए एक बार इन चीनी एप्स से जवाब हासिल होने के बाद उनका मिलान मंत्रालय को मिल रही जानकारियों से किया जाएगा। ऐसे में अगर इन एप्स से जुड़ी कोई संदिग्धता सामने आती है तो ये बिंदु इन एप्स के लिए मुसीबत का कारण बन सकती है।

जानकारी के मुताबिक इन सवालों की विस्तृत सूची में उनके कॉरपोरेट मूल, मूल कंपनियों की संरचना, धन, डेटा प्रबंधन, कंपनी प्रैक्टिस और सर्वरों के बारे में जानकारी माँगी गई है जो उनके द्वारा उपयोग किए जा रहे हैं। इसके अलावा सरकार ने इन कंपनियों से सुरक्षा सुविधाओं के साथ-साथ “अनधिकृत डेटा एक्सेस” के बारे में जानकारी प्रस्तुत करने के लिए कहा है, जिससे जासूसी और निगरानी गतिविधियों के लिए डेटा का दुरुपयोग हो सकता है।

सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि चीनी एप्स पर सारी कार्रवाई एक संप्रभु राष्ट्र की सरकार में निहित शक्तियों और आईटी एक्ट की धारा 69 के तहत की गई है और इन कंपनियों से प्राप्त होने वाले उत्तरों को विशेष समिति को भेज दिया जाएगा, जो इन जवाबों की जाँच करेंगी।

यहाँ गौरतलब हो कि चीनी एप्स को लेकर भारत सरकार के कड़े फैसले के बाद टिकटॉक समेत अन्य कंपनियों ने आश्वासन दिया था कि उपयोगकर्ताओं के डेटा की सुरक्षा उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता रही है और उनके खिलाफ डेटा के अनधिकृत उपयोग के आरोप निराधार हैं।

हालाँकि, बता दें कि पिछले साल जुलाई में भी, TikTok और Hello सहित कई चीनी एप्स को एक नोटिस में, सरकार ने “भारत विरोधी गतिविधियों” के लिए अपने प्लेटफार्मों का दुरुपयोग करने के आरोपों के बारे में 24 सवालों की एक सूची भेजी थी। लेकिन, इस बार मंत्रालय ने आश्वासन माँगा है कि भारतीय उपयोगकर्ताओं का डेटा किसी भी विदेशी सरकार या किसी तीसरे पक्ष या निजी संस्था को हस्तांतरित नहीं किया जाएगा।

उल्लेखनीय है कि पिछले महीने की 29 तारीख को भारत सरकार ने टिकटॉक समेत 59 चायनीज मोबाइल एप को प्रतिबंधित कर दिया था। सरकार ने कहा था कि ये एप गोपनीयता के लिहाज से सुरक्षित नहीं हैं।

इससे कुछ दिन पहले ही भारतीय खुफिया एजेंसियों ने सरकार को 52 एप्स को लेकर अलर्ट जारी किया था और देश के नागरिकों को भी इन एप्स को इस्तेमाल करने से मना किया था। खुफिया एजेंसियों के इस अलर्ट के बाद सरकार ने इन 52 एप्स समेत 59 एप्स पर प्रतिबंध लगा दिया और सरकार ने इन चाइनीज एप्स को राष्ट्र की सुरक्षा के लिए खतरा बताया।

व्यंग्य: विकास दुबे एनकाउंटर पर बकैत कुमार की प्राइमटाइम स्क्रिप्ट हुई लीक

नमस्कार, मैं बकैत कुमार! आखिर करोड़ों अल्पसंख्यकों को एनकाउंटर में मरवाने वाले योगी ने आज एक ब्राह्मण को भी मरवा ही दिया। मैंने देखा मीडिया के भी कई लोग बेतहाशा खुश हैं, जबकि मुझे लगता है एक समाज के तौर पर हम हार गए हैं।

यह एनकाउंटर कई सवाल उठाता है। यह एनकाउंटर कई बातें छुपाता भी है। अब कोई सीएए विरोधी रैलियों में मारे गए अल्पसंख्यकों को याद नहीं करेगा। अब सब बाबा की बूटी पी कर नाचेंगे कि देखो-देखो योगी ब्राह्मणों को भी नहीं छोड़ता। जबकि सत्य इसके बिलकुल ही विपरीत है।

विकास दुबे ब्राह्मण था ही नहीं। वो तो अल्पसंख्यक समुदाय का एक व्यक्ति था जिसका असली नाम था वकार दाऊद कनपुरिया। पिछले कुछ सालों में डर का माहौल कुछ ऐसा रहा कि वकार दाऊद को मजहब त्याग कर गोबर खिला कर हिंदू बनाया गया। उसे कहा गया कि यूपी में रहना है, तो योगी-योगी कहना है। साथ ही, यह भी कहा गया कि योगी-योगी तो सिर्फ़ हिन्दुओं में होता है, अतः हिन्दू बनना पड़ेगा। लेकिन गोदी मीडिया आपको ये सब नहीं बताएगा। सब मैनेज किया जा चुका है। हम एक समाज के तौर पर हार चुके हैं।

इस पूरे प्रकरण में मैं देख पा रहा हूँ अपने कमरे से कि एक साजिश रची गई, पूरी तरह से फिल्मी पटकथा बनाई गई। आप सोचिए कि जिस योगी के प्रदेश में कानून का इतना बोलबाला है, अपराधी स्वयं सरेंडर करने आते थे, उसमें आठ पुलिस वालों की हत्या हो जाती है? मैं पूछता हूँ क्या आपने वो लाशें देखी हैं? मेरा मतलब है पर्सनली देखी है जा कर?

फिर आप कैसे मान रहे हैं कि 8 पुलिस वाले सच में मरे या गोदी मीडिया में वकार दाऊद उर्फ विकास दुबे को मारने का एक कारण खोजते हुए यह खबर फैला दी गई? आप कहेंगे कि परिवार वालों के बयान हैं, तो मैं पूछूँगा कि क्या आप जानते हैं कि वही असली परिवार वाले हैं? उन्हें दो किलो गेहूँ दे कर भी तो तैयार किया जा सकता है। मीडिया वाले तो ऐसा अक्सर करते हैं। हाल ही में राजदीप ने आदिवासी बच्चियों पर जो कार्यक्रम किया था, वो तो ऐसे ही मैनेज हुआ है।

दूसरी बात, चलो मार भी दिया सच में, तो आपको नहीं लगता कि ये फिल्मी है? फिल्मों में ही तो पुलिस वाले मरते हैं। वो जाते हैं, कोई बता देता है कि आ रहे हैं, और फिर ऊपर से फायरिंग होती है, आठ लोग बलिदान हो जाते हैं। सवाल कई हैं, लेकिन ये राज भी विकास के ही साथ चला जाएगा।

मैं सोच नहीं पा रहा हूँ कि मेरे सवालों के उत्तर कौन देगा? 7 दिनों में 5 लोगों को एनकाउंटर में मार गिराया ताकि यह साबित किया जा सके कि यह सरकार ब्राह्मणों को भी नहीं छोड़ती। वैसे भी अजय सिंह बिष्ट तो क्षत्रिय हैं, ब्राह्मणों से तो बस वोट लेते हैं। ब्राह्मण लोग भी नहीं समझ पा रहे ये खेल।

जब तक वो पकड़ा नहीं गया था, मैंने स्क्रिप्ट बना ली थी कि नमस्कार मैं बकैत कुमार, आखिर इतने दिन क्यों लग रहे हैं एक अपराधी को पकड़ने में जबकि हर जगह भाजपा की ही सरकार है? क्या विकास दुबे को दुबे होने के कारण बचाया जा रहा है? क्या विकास दुबे को गुप्त रास्ते से नेपाल भेज दिया गया? क्या विकास दुबे को राजनैतिक संरक्षण मिला हुआ है?

अमूमन जो सरकार पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक करने में समय नहीं गँवाती उसे एक गुंडा जी नहीं मिल रहे? कहाँ हैं वो तमाम सैटेलाइट जो आकाश में छोड़े गए कि भाई चार मीटर ऊपर से फोटो खींच लेता है? मोदी जी तो खुद खड़े रह कर लॉन्च करते थे। कुछ भक्त तो यह भी कहते हैं मोदी जी ने स्वयं ही हाथों से कार्टोसैट कक्षा में स्थापित किया था। तो बोलो न मोदी जी को कि सैटेलाइट को फोन करें और विकास दुबे का पता लगा लें?

विकास दुबे को मारा नहीं जाएगा, जैसे कि बिजनौर के किसी सलमान को मार दिया जाता है। उसे जेल में रखने के नाम पर योगी सरकार उसे जेल से ही सत्ता चलाने का सुख देगी और एवज में ब्राह्मणों का वोट पाएगी। आप खेल समझिए सारा। जैसा कि कपिल देव जी कहते हैं कि ये थोड़ा कठिन जरूर है लेकिन मुश्किल नहीं।

अब आज सुबह खबर आई कि एनकाउंटर हो गया। स्क्रिप्ट बदलनी पड़ी। जज्बात बदल गए, हालात बदल गए, दिन बदल गया, शाम बदल गई! एनकाउंटर का एक ही मतलब होता है कि सत्ता में जो लोग हैं उनको बचाना। ये मैं नहीं जानता कि विकास दुबे के पास किसके संपर्क थे। मेरे सूत्रों ने मुझे तीन तस्वीरें दिखाई जिससे साबित हो जाता है कि इसके तार अमेरिका तक जुड़े हुए हैं।

मैंने तो देखा है कि एक फोटो में विकास दुबे अखिलेश यादव के साथ पोस्टर में है। वही अखिलेश यादव मोदी से मिल रहे हैं, और मोदी ट्रम्प से गले मिल रहे हैं। आप समझ रहे हैं बात को? एक आदमी, तीन तस्वीरें और एक अंतरराष्ट्रीय एंगल। आखिर ट्रम्प उस व्यक्ति से क्यों मिलेगा जो उस व्यक्ति से मिल चुका हो जिसका पोस्टर विकास दुबे के साथ है। उनका तो सीक्रेट सर्विस सब पता रखता है!

इसीलिए, उत्तर प्रदेश पुलिस ने डॉलर ले कर, ट्रम्प का नाम न आए, ऐसा सोच कर उसे निपटा दिया। आपको पता ही है कि इसी साल नवंबर में अमेरिका में चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में यूपी के किसी अपराधी से तार जुड़े होना, ब्लैक लाइव्स मैटर के दौर में, अमेरिकी राष्ट्रपति की छवि बर्बाद कर सकती है।

मैं आपको कुछ नहीं कह रहा, मैं बस तथ्य सामने रख रहा हूँ। अगर एनकाउंटर न होता, उससे पूछताछ होती तो बहुत नाम बाहर आ जाते। ये कोई नहीं जानता कि विकास दुबे के पीछे के असली अपराधी कौन थे। लेकिन जिस तरह से ‘असली अपराधी’ तो बच गया कहा जा रहा है, मुझे ऐसा लगता है कि किसी व्यक्ति का नाम ही ‘असली अपराधी’ है। लोग समझ रहे हैं कि ये जातिवाचक संज्ञा हैं, जबकि ये तो व्यक्तिवाचक भी हो सकता है।

ख़ैर जो भी हो, मेरे ख्याल से जो हुआ है, वो लोकतंत्र की हत्या है। न कोई न्यायिक प्रक्रिया, न कोई वकील, न जज… पुलिस की गाड़ी पलट गई, उसने पिस्तौल निकाली और भागने लगा, पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाई और बात खत्म! ये सब फिल्मी कथानक जैसा है। लेकिन दिल है कि मानता नहीं।

आप कहेंगे कि बकैत जी, आपने तो स्वयं ही कहा कि जेल में रहता तो राज चलाता, अब एनकाउंटर हो गया तो भी आपको दिक्कत है, आखिर चाहते क्या हैं आप? देखिए, हम पत्रकार हैं, हमारा काम है सवाल करना। फिर भी आप जवाब माँग रहे हैं तो सुनिए, ध्यान से:

विकास दुबे को जेल में डालने पर वो संरक्षण में अपराध करवाता, रंगदारी करता। उसको मार दिया तो असली अपराधी बच गए हैं। इसलिए उत्तम रास्ता तो यही होता कि उससे पूछताछ कर के छोड़ देते। न जेल में रहता, न भीतर से राज करता और जिंदा भी रहता तो असली अपराधी भी नहीं बचते। पूछताछ में कुछ बता देता तो भी ठीक, नहीं बताता तो कहते कि जेल में रखने पर तो भीतर से राज करने लगेगा…

हें हें हें… नमस्कार!

भैसों के सामने आने से पलटी गाड़ी, पिस्टल छीन कच्चे रास्ते से भाग रहा था विकास दुबे: यूपी STF

गैंगस्टर विकास दुबे आज सुबह मुठभेड़ में मारा गया था। यूपी एसटीएफ (STF) ने बयान जारी कर पूरे घटनाक्रम के बारे में जानकारी दी है। विकास दुबे के मामले में अब एक और पक्ष सामने आया है।

एसटीएफ के अनुसार लखनऊ एसटीएफ की टीम विकास दुबे को तेज बहादुर सिंह की अगुवाई में लेकर आ रही थी। कानपुर में आने वाले सचेंडी थाने के नज़दीक कन्हैया लाल अस्पताल के सामने राष्ट्रीय राजमार्ग पर भैंसों का एक झुंड सामने आ गया। उन्हें बचाने की कोशिश में वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया, जिसके बाद कुछ पुलिस अधिकारी और पुलिसकर्मी घायल हो गए। 

चोट लगने की वजह से कुछ पुलिसकर्मी अचेत हुए जिसका फायदा उठाकर विकास दुबे पुलिस निरीक्षक रमाकांत पचौरी की सरकारी पिस्टल उठा कर कच्चे रास्ते से भागने लगा। पीछे आ रहे बाकी पुलिसकर्मियों का वाहन यह देखकर दुर्घटनाग्रस्त वाहन के पास आकर रुका। घायल हुए पुलिसकर्मियों ने उन्हें बताया कि विकास दुबे कच्चे रास्ते से भागा है। 

घायल पुलिसकर्मियों को नज़दीकी अस्पताल भेजने के बाद शेष पुलिस कर्मियों को आदेश दिया गया कि वह विकास दुबे के पीछे जाएँ। पीछे करते हुए पुलिस जब उसके नजदीक पहुँची तो उसने फायर कर दिया। अभियुक्त को ज़िंदा पकड़ने की कोशिश में पुलिसकर्मी उसके नज़दीक गए भी लेकिन अंतिम क्षण में उसने फिर गोली चला दी। 

ऐसी स्थिति में कोई विकल्प न बचने के बाद पुलिसकर्मियों ने आत्मरक्षा और कत्वर्य का पालन करते हुए गोली चला दी। जवाबी कार्रवाई में विकास दुबे को गोली लगी और वह घायल होकर गिर पड़ा। पुलिस ने उसे मौके पर प्राथमिक उपचार दिया और इसके बाद सरकारी अस्पताल लेकर गए। चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया, फिलहाल घायल पुलिसकर्मियों का अस्पताल में इलाज चल रहा है।

विकास दुबे के पिता नहीं होंगे अंतिम संस्कार में शामिल, माँ ने भी कानपुर जाने से किया इनकार

कानपुर के बिकरु में 8 पुलिसवालों की हत्या का मुख्य आरोपित विकास दुबे आज सुबह पुलिस की गोली से मारा गया। उसकी मौत के बाद उसके शव को हैलट अस्पताल में ले जाया गया, जहाँ उसका पोस्टमार्टम हुआ।

पोस्टमार्टम के बाद परिजनों ने उसका शव को लेने से इनकार कर दिया और कोई भी पोस्टमार्टम हाउस तक नहीं पहुँचा। अब ताजा अपडेट के अनुसार माता-पिता ने उसके दाह संस्कार में शामिल होने से मना किया है।

सीएनएन न्यूज 18 के अनुसार, विकास दुबे के पिता ने उसके मारे जाने पर अपनी संतुष्टि व्यक्ति की है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा कि अगर पुलिस ऐसे तत्वों को बढ़ावा देती रहेगी तो आखिर शासन कैसे चलेगा। उन्होंने कहा कि विकास ने जो भी कुछ किया उसे वही मिला और वह उसके दाह संस्कार में नहीं जाएँगे।

उधर, विकास दुबे की माँ ने भी विकास की मौत की खबर सुनने के बाद कानपुर जाने से मना कर दिया है। विकास दुबे की माँ सरला दुबे से जब पुलिस ने कानपुर जाने के लिए पूछा तो सरला दुबे ने पुलिस से कहा, “मैं कानपुर नहीं जाना चाहती और न ही मेरा-उसका कोई संबंध है।” इससे पहले सरला दुबे ने कहा था कि अगर इतना गलत काम किया है तो पुलिस उसे पकड़ ले और उसका एनकाउंटर कर दे।

गौरतलब है कि विकास दुबे द्वारा पिछले हफ्ते 8 पुलिसकर्मियों को मारे जाने के बाद उसके करीबियों की धड़पकड़ जारी है। इस बीच उसकी पत्नी ऋचा से भी पूछताछ हुई है। यूपी पुलिस ने ऋचा दुबे से घंटों पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया है। 

मगर, इसी बीच ऋचा दुबे और विकास दुबे की शादी से जुड़ी कहानी मीडिया में सामने आई है। जो बताती है कि विकास दुबे ने किस तरह से ऋचा से शादी करने के लिए अपने सास-ससुर में डर बैठाया।

विकास दुबे और ऋचा दुबे की शादी

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, विकास के साले ज्ञानेंद्र ने पुलिस को बताया कि करीब 25 साल पहले वे और विकास अच्छे दोस्त थे। लेकिन 20 साल पहले उसने उसकी बहन ऋचा से शादी कर ली। ऋचा के पिता इस शादी के ख़िलाफ़ थे। लेकिन विकास फिर भी बंदूक की नोंक पर ऋचा को भगाकर ले गया।

रिपोर्ट बताती है कि ऋचा के पिता ने संबंधों के बारे में जानकारी होने के बाद घर में पाबंदियाँ लगा दी थीं और विकास को भी घर आने से मना कर दिया था। दरअसल वह दूसरी जाति में शादी के ख़िलाफ़ थे। इसी कारण से गुस्साए विकास ने उनकी कनपटी पर पिस्टल लगा दी और जान से मारने की धमकी दे दी। 

साल 1997 में उसने ऋचा को भगाकर उससे लव मैरेज की। लेकिन कुछ ही दिन में ऋचा विकास को छोड़कर वापस आ गई। पर, विकास की धमकियों के सामने ज्यादा दिन उसकी न चली। वह फिर उसी के साथ रहने रही। ऋचा का भाई भी विकास का सीधा हाथ बनकर काम करने लगा और उस पर भी कई केस दर्ज हो गए।

हालाँकि बता दें ऋचा के भाई ज्ञानेंद्र का कहना है कि दोनों की शादी के बाद उनका दोनों से कोई संबंध नहीं है। 10-15 साल से उनके बीच बात भी नहीं हुई। विकास ने उनके घर पर कब्जा कर लिया था, जो बड़ी मुश्किल से उन्होंने छुड़वाया था।

भारत के मजबूत तेवर देख चीनी राजदूत ने कहा- हमारी सेना पीछे हट चुकी है, धर्मशाला में धू-धू जला जिनपिंग

भारत के मजबूत और आक्रामक रवैए के बाद चीन नरम पड़ता जा रहा है। भारत में चीन के राजदूत सुन वेईडॉन्ग (Sun Weidong) ने कहा है कि भारत और चीन को आपसी सहयोग के ऐसे कदम उठाने चाहिए जिनसे दोनों का फायदा हो, न कि ऐसे काम करें जिनसे दोनों को नुकसान भुगतना पड़े।

उन्‍होंने कहा है कि सीमा का सवाल इतिहास में छोड़ा गया, एक जटिल और संवेदनशील मुद्दा है। हमें इस मुद्दे पर एक पक्षों की सहमति वाला शांतिपूर्ण समाधान ढूँढना होगा। सुन वेईडांग ने शुक्रवार (जुलाई 10, 2020) को वीडियो संदेश जारी कर कहा कि दोनों देशों के बीच कोई दुश्मनी नहीं बल्कि हमारे तो मित्रता के संबंध हैं।

भारत में चाइनीज राजदूत ने पूर्वी लद्दाख क्षेत्र स्थित गलवान घाटी में गत 15 जून को भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बारे में कहा कि वह ऐसी परिस्थिति थी जिसे भारत और चीन, दोनों ही देश नहीं देखना चाहते। उन्होंने कहा कि कमांडर लेवल की बातचीत में हुए समझौते के आधार पर अब हमारी सेनाएँ पीछे हट चुकी हैं।

चीनी राजदूत ने इस बात का भी संज्ञान लिया कि गलवान में भारतीय सैनिकों पर चीनी सैनिकों द्वारा धोखे से किए गए वार के बाद भारत में चीन के प्रति अविश्वास का माहौल बढ़ा है।

उन्होंने कहा, “15 जून को पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीनी सैनिकों के बीच जो हुआ ऐसी स्थिति के बारे में दोनों में से किसी देश ने भी नहीं सोचा था। 5 जुलाई को इस मामले में चीनी के विदेश मंत्री वांग यी और भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहाकार अजित डोभाल के बीच फोन पर बातचीत हुई थी। दोनों नेताओं ने सीमा पर जारी गतिरोध को कम करने को लेकर सहमति व्यक्त की थी।”

सुन वेईडॉन्ग ने एक बयान जारी कर कहा है कि भारत-चीन के बीच सीमा विवाद को शांतिपूर्ण बातचीत के जरिए ऐसा समाधान ढूँढना चाहिए जो दोनों पक्षों को स्वीकार हो।

चीनी राजदूत ने कहा, “लम्बे समय से चला आ रहा सीमा विवाद एक संवेदनशील और पेचीदा विषय है। हमें परामर्श और शांतिपूर्ण बातचीत के जरिए उचित और तार्किक समाधान खोजने की आवश्यकता है, जो दोनों देशों को स्वीकार हो।”

चीनी राजदूत ने अपने बयान के माध्यम से भारत-चीन के बीच दोस्ताना संबंधों के लिए तीन सुझाव दिए हैं। जिसमें पहला भारत और चीन को प्रतिद्वंदी के बजाए सहयोगी कि तरह रहने का परामर्श है।

दूसरा सुझाव यह है कि भारत और चीन को शांति की चाह रखनी चाहिए, ना कि संघर्ष की। चीनी राजदूत ने तीसरे सुझाव में कहा है कि भारत और चीन को पारस्परिक हित के प्रयास करने चाहिए, न कि दोनों को नुकसान पहुँचाने वाले।

इसके अलावा चीनी राजदूत का कहना है कि दोनों देशों को कोरोना संकट से मिलकर लड़ना चाहिए, ये संकट का समय है और हमें एक दूसरे की मदद करनी चाहिए।

हिमाचल प्रदेश में तिब्बती यूथ कॉन्ग्रेस का चीन के खिलाफ प्रदर्शन

तिब्बती यूथ कॉन्ग्रेस ने हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला मैक्लोगंज में चीन के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने भारत में चीनी उत्पादों के बहिष्कार के लिए नारे लगाए। तिब्बती स्वतंत्रता कार्यकर्ताओं द्वारा शी जिनपिंग और चीनी ध्वज भी जलाए गए।

कुछ ही दिन पहले भारत-चीन के बीच एलएसी पर गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद मैक्लोगंज स्थित तिब्बत निर्वासित सरकार के मुख्यालय मैक्लोगंज चौक पर तिब्बतियों ने चीन के खिलाफ विरोध जताया था।

तिब्बतियन यूथ कॉन्ग्रेस के सदस्यों ने मैक्लोगंज में चीन कि कम्युनिस्ट सरकार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया। संगठन के तिब्बती सदस्यों ने हाथ में बैनर लेकर निर्वासित तिब्बतियों, भारतीयों और पूरी दुनिया के लोगों से ‘बायकॉट चाइनीज गुड्स’ के आह्वान की माँग की।

विकास दुबे के एनकाउंटर को लेकर प्रियंका गाँधी और अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर साधा निशाना

गैंगस्टर विकास दुबे के एनकाउंटर के बाद विपक्षी पार्टियाँ लगातार उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर निशाना साधने की कोशिश कर रही है। कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 8 पुलिसकर्मियों की हत्या के मुख्य आरोपित दुबे की मौत के बाद अपना बयान दिया है।

प्रियंका गाँधी ने कहा, “बीजेपी की सरकार ने उत्तर प्रदेश को ‘अपराध प्रदेश’ में बदल दिया है। विकास दुबे जैसे अपराधी सत्ता में बैठे लोगों की देखरेख में आगे बढ़ रहे हैं और उन्हें बचाया भी जा रहा है। कॉन्ग्रेस पूरे कानपुर कांड की जाँच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से कराने की माँग करती है।”

प्रियंका गाँधी ने आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिल्कुल बिगड़ चुकी है। विकास दुबे जैसे अपराधी सत्ता में बैठे लोगों की संरक्षण में फल-फूल रहे हैं। उनके बड़े-बड़े व्यवसाय हैं। इस तरह के लोग खुलेआम अपराध कर रहे हैं और कोई रोकने वाला नहीं है। सभी को पता है कि इन्हें सत्ता के लोगों से ही संरक्षण प्राप्त है।”

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी प्रदेश में भाजपा सरकार को निशाना बनाने के लिए विकास के एनकाउंटर पर संदेह जता दिया। उन्होंने एनकाउंटर के बाद एक ट्वीट में लिखा, “दरअसल ये कार नहीं पलटी है, राज़ खुलने से सरकार पलटने से बचाई गई है।”

इसके अलावा अखिलेश यादव ने आजतक से बातचीत में विकास को निर्दोष तक कहा। उन्होंने बोला, “विकास दुबे, विकास दुबे नहीं बनता अगर उस समय सरकार ने उसे रोका होता। जहाँ तक ​​’ऑपरेशन क्लीन’ का सवाल है, क्या निर्दोष लोगों की हत्या करना, हिरासत में लोगों की मौत हो जाना। क्या सही कानून और व्यवस्था के संकेत है?”

यहाँ बता दें, अखिलेश यादव जिस विकास दुबे की मौत के लिए भाजपा को प्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार बता रहे हैं। उसी विकास दुबे को लेकर उसकी माँ ने बयान दिया था कि वह सपा से जुड़ा हुआ है। लेकिन. बावजूद इसके सपा प्रमुख केवल राजनीति के लिए योगी सरकार को दोषी ठहराने में जुटे हैं।

गौरतलब है कि गुरुवार को उज्जैन में पकड़े जाने के बाद यूपी पुलिस विकास दुबे को कानपुर लेकर आ रही थी। लेकिन रास्ते में अचानक उत्तर प्रदेश एसटीएफ की गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई और विकास दुबे ने मौका देखकर भागने की कोशिश की।

पुलिस ने इस दौरान उसे आत्मसमर्पण करने को कहा। मगर विकास दुबे ने पुलिस की बंदूक से उनपर गोली फायर कर दी। इसके बाद पुलिस को भी उसे रोकने के लिए जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी। इसी मुठभेड़ में विकास दुबे मारा गया और विपक्षी पार्टियों ने मौके का फायदा उठाकर यूपी सरकार पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।