महाराष्ट्र ATS ने विकास दुबे के साथी गुड्डन त्रिवेदी को ठाणे से धर-दबोचा है। सपा के मुखिया अखिलेश यादव के साथ उसकी तस्वीरें वायरल हो रही हैं। उसे सपा के बड़े नेताओं का क़रीबी बताया जा रहा है। उसके अलावा विकास दुबे के एक अन्य क़रीबी को भी ठाणे से ही गिरफ़्तार किया गया। गुड्डन त्रिवेदी को सारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उत्तर प्रदेश लाया जाएगा। महाराष्ट्र ATS ने गुड्डन त्रिवेदी और सोनू तिवारी की गिरफ़्तारी की पुष्टि की है।
अखिलेश यादव के साथ गुड्डन
महाराष्ट्र ATS द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, मुंबई पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी की कानपुर एनकाउंटर मामले में एक आरोपित ठाणे में छिपा हुआ है। गुड्डन त्रिवेदी पर यूपी पुलिस ने 25 हज़ार रुपए का इनाम रखा हुआ था। ‘दैनिक जागरण’ की ख़बर के अनुसार, एटीएस की जूहू यूनिट ने कोलशेट रोड पर छापा डालकर आरोपी अरविंद उर्फ ‘गुड्डन रामविलास त्रिवेदी’ और उसके ड्राइवर सोनू तिवारी की गिरफ़्तारी को अंजाम दिया।
अखिलेश यादव और सपा नेताओं के साथ गुड्डन त्रिवेदी
यूपी एसटीएफ इस मामले में महाराष्ट्र एटीएस के संपर्क में है। गुड्डन त्रिवेदी के बारे में बता दें कि उसने अपनी फेसबुक प्रोफाइल पर बायो में ‘समाजवादी पार्टी ज़िंदाबाद’ लिख रखा है। वो कानपुर का रहने वाला है। गुड्डन त्रिवेदी को पता था कि विकास दुबे मामले में पुलिस को इसकी तलाश है और वो छिपने के लिए ठाणे पहुँचा हुआ था। वो ठिकाने की तलाश में था। सोनू तिवारी उसका ही ड्राइवर था।
गुड्डन त्रिवेदी के बारे में बता दें कि वो 2001 में राज्यमंत्री संतोष शुक्ला हत्याकांड में भी शामिल रहा है। विकास दुबे के साथ मिल कर उसने कई हत्याकांड व अन्य वारदातों को अंजाम दिया था। गुड्डन के पकड़े जाने के बाद विकास दुबे से जुड़े राजनेताओं का भी नेक्सस सामने आएगा, ऐसी उम्मीद जताई गई है। गुड्डन त्रिवेदी का नाम उस पोस्टर में भी शामिल है, जिसमें विकास दुबे के 12 सहयोगियों की तस्वीर लगाई गई है और सूचनाएँ दी गई हैं।
गुड्डन त्रिवेदी की गिरफ़्तारी पर महाराष्ट्र ATS का बयान
उधर शुक्रवार (जुलाई 11, 2020) को चौबेपुर पुलिस ने कानपुर हत्याकांड में शामिल अपराधियों को शरण देने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया। दोनों लोगों को उनके आवास से गिरफ्तार किया गया है। 6 जुलाई को ही कानपुर पुलिस को एक पत्र भेजकर आदेश दिया था कि वो मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत विकास के परिजनों और उसके सहयोगियों से उसकी चल और अचल संपत्ति की जानकारी लेकर एजेंसी को दें।
आतंकी संगठन तहरीक-उल-मुजाहिदीन ने बीजेपी से जुड़ने वाले लोगों की हत्या करने की धमकी दी है। उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा में 8 जुलाई को भाजपा नेता वसीम बारी और उनके पिता तथा भाई की हत्या के बाद यह धमकी दी गई है।
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार आतंकी संगठन ने धमकी भरे पोस्टर कई इलाकों में लगाए हैं। इसमें बीजेपी से जुड़े लोगों को पार्टी से नाता तोड़ने की चेतावनी दी गई है। ऐसा नहीं करने पर वसीम बारी जैसा हश्र करने की धमकी दी गई है।
तहरीक-उल-मुजाहिदीन के पर्चे (साभार: दैनिक जागरण)
इससे पहले वसीम बारी और उनके परिवार के सदस्यों की हत्या करने वाले आतंकवादी की सुरक्षा बलों द्वारा पहचान किए जाने की खबर सामने आई थी। मीडिया रिपोर्ट में बताया गया था कि आतंकी की पहचान आबिद हक्कानी के रूप में हुई है। वह बुधवार (जुलाई 8, 2020) रात 8:40 बजे बांदीपोरा पुलिस स्टेशन पर लगे एक सीसीटीवी कैमरे में कैद हुआ था।
बताया जाता है कि हक्कानी वाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान गया था। वहाँ से ट्रेनिंग लेने के बाद वह भारत में घुस गया था।
जम्मू-कश्मीर के आईजी विजय कुमार ने कहा था कि भाजपा नेता की सुरक्षा में काेई कमी नहीं की गई थी। बारी काे 10 पीएसओ उपलब्ध कराए गए थे। इनमें से 2 सुरक्षा विंग और 8 जिला पुलिस के जवान थे। यह सुरक्षा में चूक का मामला है। सुरक्षाकर्मी चाैकस रहते ताे आतंकी मार गिराए जाते।
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सभी दस पुलिसकर्मियों को पूछताछ के लिए गिरफ्तार कर लिया गया है क्योंकि जब आतंकवादी बीजेपी नेता पर हमला कर रहे थे तो पुलिसकर्मी उनके आसपास नहीं थे। खबरों के मुताबिक, जब आतंकवादियों ने बीजेपी नेता पर गोलियाँ चलाई तो पुलिसकर्मी घर के अंदर थे।
आईजी विजय कुमार ने जानकारी देते हुए बताया, “उनके पास पर्याप्त सुरक्षा थी। ऑन ड्यूटी सुरक्षाकर्मियों से लापरवाही हुई। ड्यूटी पर मौजूद सभी 10 पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर दिया गया है। सीसीटीवी फुटेज को देखने पर ऐसा लग रहा है कि इस वारदात को पूरी योजना के तहत अंजाम दिया गया है।”
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले में आतंकियों ने बुधवार (जुलाई 08, 2020) देर शाम भाजपा के जिलाध्यक्ष वसीम बारी की हत्या कर दी थी। आतंकवादियों ने वसीम बारी के अलावा उनके पिता और भाई की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई। उमर भाजपा की जिला युवा इकाई का सदस्य थे, जबकि उनके पिता बशीर शेख भाजपा के जिला उपाध्यक्ष रह चुके थे।
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में शुक्रवार (10 जुलाई, 2020) को मंदिर तोड़ने की घटना सामने आई है। जानकारी के अनुसार इंदौरा थाना क्षेत्र में समुदाय विशेष के कुछ लोगों ने मंदिर को तहस-नहस कर दिया। जिसके चलते हिन्दू समुदाय के लोग भड़क गए और माहौल तनावपूर्ण हो गया। माहौल बिगड़ता देख मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 1 हफ्ते पहले इलाके में हिन्दू समुदाय के लोगों ने मिलकर एक छोटा सा पूजा स्थल तैयार किया था। जिसके पास की बस्ती में रहने वाले अल्पसंख्यक समुदाय लोगों ने विरोध किया और रात में मंदिर को ध्वस्त कर दिया। सुबह जब लोगों ने देखा तो वहाँ मंदिर का नामोनिशान नहीं था।
जिसके बाद दोनों समुदायों के बीच झड़प शुरू हो गया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अल्पसंख्यक समुदाय के 30-40 लोगों ने शिकायतकर्ता और दूसरों लोगों के साथ गली-गलौज किया, साथ ही उनपर पथराव भी किया और उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी।
मंदिर तोड़ने की बात फैलते ही हिन्दू समाज के लोग इलाके में इकट्ठा होने लगे। घटना की जानकारी लगते ही स्थानीय पुलिसबल ने भी मौके पहुँच कर लोगों को शांत करने की कोशिश की। लेकिन माहौल बिगाड़ता देख पुलिसबल को नजदीकी थानों से अतिरिक्त पुलिस बटालियन को बुलाना पड़ा। जिसके बाद कहीं जाकर हालात को काबू किया गया।
दोनों समुदायों को समझाकर मामला शांत कराती पुलिस ( साभार-न्यूज़ 18)
वहीं हालात की गंभीरता को देखते हुए उच्च अधिकारियों को भी सूचना दे दी गई। जिसके बाद डीएसपी नूरपुर, डॉ साहिल अरोड़ा को भी स्थिति का जायजा लेने के लिए मौके पर पहुँचना पड़ा। डीएसपी ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस ने शिकायतकर्ता के बयानों के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया है।
अज्ञात आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 295, 504, 506 व 147 के तहत मुकद्दमा दर्ज कर उनकी तलाश की जा रही है। इसके साथ पुलिस आगे की जाँच में जुटी है। उन्होंने लोगों से आपस में शांति बनाए रखने की अपील भी की।
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा पर अपनी सरकार गिराने का आरोप लगाते हुए कहा है कि BJP ने मानवता की सारी हदें पार कर दी हैं। उन्होंने कहा कि हम सब साथ मिल कर कोरोना की लड़ाई लड़ रहे हैं, जीवन और आजीविका बचाने में लगे हैं और दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी (BJP) गिराने में लगी है।
वहीं भाजपा ने भी गहलोत के आरोपों का करारा जवाब दिया है। राजस्थान भाजपा अध्यक्ष सतीश पूनियाँ ने कहा कि अशोक गहलोत इतने चतुर राजनेता हैं कि वे अपनी पौने दो साल की विफलताओं को भाजपा के मत्थे मढ़ना चाहते हैं। पूनियाँ ने कहा कि मुख्यमंत्री गहलोत के आरोपों में किसी तरीके का कोई आधार नहीं है। उन्होंने पूछा कि जब संख्या बल उनके पास है तो कौन उनकी सरकार गिराएगा?
पूनियाँ ने गहलोत को सलाह दी कि झगड़ा खुद का है अपने घर को सँभाल लें, हमें तोहमत न दें। वहीं सीएम गहलोत ने कहा कि ऐसा वाजपेयी जी के समय पर नहीं था, लेकिन 2014 के बाद धर्म के आधार पर विभाजन करने में गर्व किया जा रहा है। विधायकों की खरीद-फरोख्त मामले में ब्यावर के दो भाजपा नेताओं भरत मालानी और अशोक सिंह पर आरोप लगा है। इन्हें उदयपुर से स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने गिरफ्तार कर लिया है।
अशोक गहलोत ने दावा किया कि राजस्थान में सरकार स्थिर है और पूरे 5 वर्ष चलेगी। उन्होंने कहा कि हमने तो अगला चुनाव जीतने की तैयारी भी शुरू कर दी है और इसी हिसाब से बजट पेश किया गया। इसी के अनुरूप शासन दिया जा रहा है। गहलोत ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियाँ, नेता प्रतिपक्ष गुलाब चंद कटारिया और उप नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ पर आरोप लगाए।
अशोक गहलोत जी इतने चतुर राजनेता हैं कि वो अपनी पौने दो साल की विफलताओं को भाजपा के मत्थे मढ़ना चाहते हैं। इसमें किसी तरीके का कोई आधार नहीं है। संख्या बल उनके पास है कौन इनकी सरकार गिराएगा। झगड़ा खुद का है अपने घर को संभाल लें हमें तोहमत न दें: सतीश पूनिया राजस्थान भाजपा अध्यक्ष pic.twitter.com/Tww5SRH8sq
एफआईआर के अनुसार, स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप 13 जून को अवैध हथियारों और विस्फोटकों की तस्करी को लेकर टेलीफोन टैपिंग कर रहा था। उस दौरान एक मोबाइल नंबर की कॉल रिकॉर्डिंग भी की गई, जिसमें यह खुलासा हुआ है कि अशोक गहलोत सरकार को गिराने की साजिश रची जा रही है। फ़ोन पर बातचीत में 2 लोग चर्चा करते हैं कि सरकार गिराने से वे 1,000-2,000 करोड़ रुपए कमा सकते हैं, लेकिन यह तभी हो सकता है जब सीएम अपनी पसंद का हो।
एफआईआर के अनुसार, दो पक्षों के बीच राजस्थान के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री में झगड़े की बात बताई जा रही है। साथ ही कॉन्ग्रेस और निर्दलीय विधायकों को तोड़कर सरकार गिराई जाने की भी बातें सामने आई है। कॉन्ग्रेस विधायकों और निर्दलीय विधायकों को 20 से 25 करोड़ रुपए देने के प्रलोभन की भी जानकारी सूत्रों से प्राप्त हुई है। राजस्थान पुलिस ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उनके डिप्टी सचिन पायलट को कॉन्ग्रेस सरकार को गिराने के कथित प्रयासों के संबंध में अपना बयान दर्ज करने के लिए नोटिस जारी किया है।
वायरोलॉजी और इम्यूनोलॉजी की विशेषज्ञ डॉक्टर ली मेंग यान ने हॉन्कॉन्ग छोड़ दिया है। वे हॉन्गकॉन्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में कार्यरत थीं। WHO से सम्बद्ध लैब की को-डायरेक्टर ली मेंग यान ने चीन के डर से यह कदम उठाया है। उन्होंने कोरोना से जुड़े खुलासे को लेकर अपनी जान को खतरा बताया है।
यान ने आरोप लगाया था कि चीन को कोरोना वायरस संक्रमण और उससे उपजने वाले खतरों के बारे में पहले से पता था। ‘वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन’ के एडवाइजर प्रोफेसर मलिक पेरिस के पास भी इसकी जानकारी होने और कुछ नहीं करने की बात भी उन्होंने कही थी।
यान का कहना है कि चीन ने दुनिया को जब कोरोना के बारे में बताया, उससे काफ़ी पहले उसे इसके बारे में सब कुछ पता था। उन्होंने बताया था कि कोरोना पर उन्होंने जो शुरूआती रिसर्च किया था, उसे उनके आला अधिकारियों ने नज़रअंदाज़ कियाए वरना कई ज़िंदगियाँ बच सकती थीं।
हालाँकि, चीन दावा करता रहा है कि उसने वैश्विक समुदाय से समय पर सारी जानकारियाँ शेयर की। ली मेंग यान दुनिया की उन डॉक्टरों में से हैं, जिन्होंने सबसे पहले कोरोना वायरस का अध्ययन किया था। उन्हें दिसंबर 2019 में इस ह्यूमन टू ह्यूमन ट्रांसमिशन वाले वायरस के बारे में कुछ साथियों ने बताया था।
Hong Kong Dr Li Meng Yan claims that this man, Professor Malik Peoria, knew of the dangers COVID19 presented yet said nothing. pic.twitter.com/HaEEhq6XaR
9 जनवरी 2020 को WHO ने अपने बयान में कोरोना वायरस के मानवीय ट्रांसमिशन की बात नकार दी थी। साथ ही उसने ये भी कहा था कि इस वायरस के बारे में फिलहाल सीमित सूचनाएँ ही उपलब्ध हैं, जिससे इसके खतरे और इससे निपटने के तौर-तरीकों का अभी तक अंदाज नहीं लग सका है।
यान ने कहा, ‘मेरे सुपरवाइजर्स फील्ड के कुछ टॉप एक्सपर्ट्स हैं, जो रिसर्च में महामारी के शुरुआत में कर रही थीं, उन्होंने भी इसे नजरअंदाज किया, जिससे कई जानें बच सकती थीं।’ उनका आरोप है कि अचानक से सारे डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने कोरोना वायरस के बारे में बात करना ही बंद कर दिया था, जो शक पैदा करता है।
लगभग 6 महीने पहले WHO चीफ डॉ. टेड्रोस ऐडनम ने दावा किया था कि संस्था को चीन ने कोरोना वायरस संक्रमण आपदा के बारे में बताया था। चीन में इस वायरस को लेकर आवाज उठाने वाले लोग या तो रहस्यमयी तरीके से गायब हो गए या मार डाले गए।
इस बात का खुलासा न्यूजवीक की रिपोर्ट के जरिए भी हुआ था। इस रिपोर्ट का नाम ‘UN-China: WHO Mindful But Not Beholden to China’ है। दो CIA ऑफिशियल ने इस रिपोर्ट को कन्फर्म किया है। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी (US) खुफिया एजेंसी CIA के पास इस बात के पक्के सबूत हैं कि चीन के दबाव की वजह से ही वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने वक़्त रहते दुनिया के देशों के लिए कोरोना वायरस की चेतावनी जारी नहीं की।
उत्तर प्रदेश के कानपुर के बिकरू गाँव में 8 पुलिसकर्मियों की हत्या करने वाले हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे के एनकाउंटर में मारे जाने के बाद पुलिस ने उसके मददगारों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। शुक्रवार (जुलाई 11, 2020) को चौबेपुर पुलिस ने कानपुर हत्याकांड में शामिल अपराधियों को शरण देने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया। दोनों लोगों को उनके आवास से गिरफ्तार किया गया है।
Kanpur encounter: Kanpur’s Chaubepur Police y’day arrested 2 people with criminal backgrounds – Om Prakash Pandey & Anil Pandey – for helping hide 2 wanted criminals – Shashikant Pandey & Shivam Dubey – at their residences in Gwalior of Madhya Pradesh. Further action being taken.
जानकारी के मुताबिक, कानपुर की चौबेपुर पुलिस ने मध्य प्रदेश के ग्वालियर से आपराधिक पृष्ठभूमि वाले दो लोगों को गिरफ्तार किया है। दोनों की पहचान ओम प्रकाश पांडेय और अनिल पांडेय के रूप में की गई। आरोप है कि दोनों ने विकास दुबे के मददगार और वांछित अपराधी शशिकांत पांडेय और शिवम दुबे को अपने यहाँ पनाह दी थी। गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपितों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा रही है। दोनों के खिलाफ चौबेपुर थाने में मामला पंजीकृत कर लिया गया है।
इसके साथ ही विकास दुबे और उसके गैंग से जुड़े लोग अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रडार पर हैं। ED जल्द ही प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत मामला दर्ज कर विकास दुबे और उसके गैंग से जुड़े लोगों की संपत्ति के मामलों की जाँच कर सकती है। ED के लखनऊ ऑफिस के अधिकारियों की एक टीम ने हाल ही में कानपुर रेंज आईजी मोहित अग्रवाल से इस सिलसिले में मुलाकात की है।
ED के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि विकास दुबे की संपत्तियों से संबंधित जानकारी इकट्ठा करने के लिए एक टीम कानपुर गई थी। इस दौरान उससे जुड़े लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाई गई है। ED अपराध के जरिए हुई कमाई के निवेश के बारे में पता कर रही है। अधिकारी ने कहा कि प्राप्त सूचना के आधार पर अगर लगेगा कि मामला जाँच के लायक है तो केस दर्ज किया जाएगा। ED ने कहा कि टीम विकास दुबे और उसके परिवार के सदस्यों और उनके अन्य सहयोगियों के संपत्तियों और बैंक खातों के बारे में जानकारी एकत्र कर रही है।
6 जुलाई को ही कानपुर पुलिस को एक पत्र भेजकर आदेश दिया था कि वो मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत विकास के परिजनों और उसके सहयोगियों से उसकी चल और अचल संपत्ति की जानकारी लेकर एजेंसी को दें। इसके अलावा ED ने पुलिस से विकास दुबे के खिलाफ चल रहे आपराधिक मुकदमों की भी जानकारी माँगी थी।
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक पिछले तीन साल में विकास दुबे ने 14 देशों की यात्राएँ की और इस दौरान उसने अपने खास लोगों के जरिए संयुक्त अरब अमीरात और थाईलैंड में संपत्तियाँ खरीदी। बताया जा रहा है कि विदेश में उसकी संपत्ति की कीमत करीब 30 करोड़ रुपए है। हाल ही में विकास दुबे ने लखनऊ के आर्या नगर में एक आलीशान बंगला खरीदा था, जिसकी कीमत करीब 23 करोड़ रुपए बताई जा रही है। सूत्रों का कहना है कि अकेले यूपी में ही विकास दुबे के पास बेनामी संपत्ति के तहत 11 मकान और 16 फ्लैट हैं।
गौरतलब है कि 2 जुलाई की रात कानपुर के बिकरू गाँव में 8 पुलिसकर्मियों की बेरहमी से हत्या के मामले के मुख्य आरोपित विकास दुबे का शुक्रवार (जुलाई 10, 2020) को एनकाउंटर कर दिया गया। मध्य प्रदेश के उज्जैन से गिरफ्तारी के बाद कानपुर ले जाने के दौरान पुलिस की गाड़ी पलट गई। इस दौरान विकास ने पुलिस की पिस्टर छीनकर भागने की कोशिश की थी, जिसके बाद एनकाउंटर में मारा गया। विकास के पाँच साथी पहले ही एनकाउंटर में मारे जा चुके हैं।
अपराधी का अंत हो गया, अपराध और उसको सरंक्षण देने वाले लोगों का क्या?
यह सवाल उस कॉन्ग्रेस पार्टी की महासचिव प्रियंका गॉंधी का है, जिनकी पार्टी राजनीति और अपराध का कॉकटेल तैयार करने में सबकी उस्ताद है। उस जैसा हुनरबाज कोई नहीं।
प्रियंका ने यह ट्वीट कानपुर शूटआउट में 8 पुलिसकर्मियों की हत्या के मुख्य आरोपित और 60 से अधिक मामलों में नामजद गैंगस्टर विकास दुबे के एनकाउंटर को लेकर किया था। प्रियंका पार्टी की उत्तर प्रदेश की प्रभारी हैं। लिहाजा अपनी पार्टी की दागदार अतीत को भूल इस मामले में सियासी रोटी सेंकने का कोई अवसर उन्होंने नहीं छोड़ा।
कॉन्ग्रेस का इतिहास केवल सियासी फायदे के लिए अपराधियों को संरक्षण देने का ही नहीं रहा है। बल्कि, उसकी संस्कृति आपराधिक छवि वाले लोगों को बचाने और उन्हें आगे बढ़ने का भरपूर अवसर मुहैया कराने वाले की रही है।
जवाहर लाल नेहरू के 13 साल तक निजी सचिव रहे एमओ मथाई के संस्मरणों के हवाले से वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र किशोर बताते हैं कि एक बार एक कॉन्ग्रेसी केंद्रीय मंत्री के बेटे ने यूपी में हत्या कर दी। यह घटना 1950 से पहले की है। हत्यारा बेटा कथित सरकारी प्रभावों की वजह से जेल से छूटकर विदेश चला गया। उसके बाद मामले की सुनवाई पर कभी कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ और बाद के वर्षों में मामला रफा-दफा हो गया।
आपातकाल के बाद इंदिरा गॉंधी की रिहाई के लिए विमान अगवा करने वाले देवेंद्र और भोला पांडे को को कॉन्ग्रेस ने न केवल पार्टी में आगे बढ़ाया, बल्कि वे माननीय कहला सकें इसके लिए उन्हें सांसदी और विधायकी का अवसर भी दिया।
इसी तरह राजीव गॉंधी पर एक अपराधी को बचाने के लिए दूसरे अपराधी को छोड़ देने का सौदा करने के आरोप उनके राजनीतिक विरोधी लगाते रहे हैं। कहा जाता है कि उन्होंने प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने भोपाल गैस कांड के गुनहगार वॉरेन एंडरसन को इसलिए अमेरिका जाने दिया, क्योंकि उन्हें अपने दोस्त आदिल शहरयार को रिहा करवाना था। 80 के दशक में अमेरिका में शहरयार को बम विस्फोट, फर्जीवाड़े, ड्रग्स रैकेट से जुड़े होने के आरोपों के चलते 35 साल कैद की सजा सुनाई गई थी।
शायद इसी संस्कृति का असर था कि कॉन्ग्रेस के बड़े नेताओं के बच्चे और युवा नेता समय समय पर जघन्य अपराधों को लेकर चर्चा में रहे हैं। चाहे जेसिका लाल मर्डर हो या नैना सहनी की हत्या या फिर बॉबी सेक्स कांड। हर मामले में कॉन्ग्रेस परिवार के लोग आरोपित रहे हैं। लिहाजा मामलों पर लीपापोती की कोशिश भी हुई। कुछ बच गए। लेकिन कुछ को पीड़ितों के अथक संघर्ष और मीडिया के दबाव की वजह से अपने गुनाहों की सजा भोगनी पड़ी।
शुरुआत बिहार से करते हैं। श्वेतनिशा त्रिवेदी उर्फ बॉबी बेहद आकर्षक थी। बिहार विधानसभा में टेलीफोन ऑपरेटर के पद पर काम करती थी। 1983 में एक दिन रहस्यमयी हालात में उसकी मौत हो गई और उसे गुपचुप कब्रिस्तान में दफन कर दिया गया।
उस समय पटना के एसपी रहे किशोर कुणाल को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने कब्र से शव निकलवाया। शुरुआती जॉंच में जहर का इंजेक्शन देकर मारने और यौन शोषण की बात सामने आई। जिन पर आरोपों के छींटे पड़े उनमें तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष और कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता रहे राधानंदन झा के बेटे रघुवर झा भी थे।
केंद्र से लेकर प्रदेश तक कॉन्ग्रेस की सरकार थी। मशीनरी फटाफट सक्रिय हो गई। कुणाल को किनारे कर जॉंच सीबीआई को सुपुर्द कर दिया गया। बाद में जॉंच एजेंसी ने एक बेसिर पैर की कहानी गढ़ इसे आत्महत्या करार दिया और फाइल बंद कर दी।
रघुवर झा तक तो कानून की आँच कभी नहीं पहुॅंची। लेकिन, कॉन्ग्रेस के एक और बड़े नेता और हरियाणा में मंत्री रहे विनोद शर्मा के बेटे मनु की किस्मत ऐसे नहीं थी। हालॉंकि उसने भी जेसिका को मारा तो इसी रुआब में था कि वह बड़े नेता का बेटा और देश के राष्ट्रपति रहे शंकरदयाल शर्मा का नाती है।
जेसिका लाल की 29 अप्रैल 1999 की रात दिल्ली के टैमरिंड कोर्ट रेस्टोरेंट में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। कारण उसने मनु शर्मा को यह कहते हुए शराब परोसने से मना कर दिया था कि अब बार बंद हो चुका है। हत्या को कई लोगों की नजरों के सामने अंजाम दिया गया था। बावजूद फरवरी 2006 में सभी आरोपी बरी हो गए।
लेकिन जेसिका के परिवार की कोशिशों और मीडिया के दबाव की वजह से यह केस दोबारा खोलना पड़ा। फास्ट ट्रैक कोर्ट में केस चला और मनु शर्मा को उम्र कैद हुई। अप्रैल 2010 में सुप्रीम कोर्ट ने भी मनु शर्मा की सजा बरकरार रखी। लेकिन इस बीच अपने पिता के राजनीतिक प्रभाव की वजह से फर्लो पर जेल से निकल उसने शादी रचाई। दिल्ली की शीला दीक्षित के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस सरकार पर उसे पैरोल देने के मामले में दरियादिली के आरोप भी लगे थे।
अब बात नैना साहनी की। उनकी हत्या का मामला तंदूर कांड के नाम से भी जाना जाता है। हत्या कर नैना को तंदूर की भट्ठी में झोंकने वाला उसका ही प्रेमी सुशील शर्मा था। दोनों लिव इन में रहते थे। कई लोगों का दावा है कि चुपचाप दोनों ने शादी भी कर रखी थ। सुशील यूथ कॉन्ग्रेस का उस समय उभरता हुआ नेता था। बताते हैं कि सीधे हाईकमान तक पहुॅंच थी उसकी।
सुशील के इस कारनामे की दुनिया को भनक भी नहीं लगती यदि 2 जुलाई 1995 की उस रात दिल्ली पुलिस के कॉन्स्टेबल अब्दुल नज़ीर कुंजू और होमगार्ड चंदर पाल गश्त पर ना होते। रात के करीब साढ़े ग्यारह बज रहे थे। होटल अशोक यात्री निवास में स्थित बगिया रेस्टोरेंट से दोनों ने आग और धुआँ निकलता देखा। मौके पर पहुॅंचे तो बताया गया कि कॉन्ग्रेस पार्टी के पुराने बैनर पोस्टर जलाए जा रहे हैं। पर वे नहीं माने। पुलिस बुलाई। फायर ब्रिगेड को बुलाया गया और पता चला कि तंदूर में एक महिला की लाश जल रही है।
उस महिला की पहचान नैना साहनी के तौर पर हुई। नैना को घर में गोली मारने के बाद सुशील शर्मा जलाने के लिए लाया था। मामला खुलने के बाद सुशील ने पुलिस से बचे रहने के लिए अपने राजनीतिक संपर्कों का भरपूर इस्तेमाल किया। लेकिन, जनआक्रोश की वजह से उसे सरेंडर करना पड़ा और बाद में सजा भी हुई।
स्पष्ट है कि अपराधियों के सहयोग से सियासत करने की कॉन्ग्रेस की आदत पुरानी है। लेकिन, ऐसे वक्त में जब पार्टी अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है, उसका शीर्ष नेतृत्व चिंतन करते हुए खुद से ही सवाल करता- ‘अपराध और उसको सरंक्षण देने वाले लोगों का क्या?’, तो बेहतर होता। शायद, इससे राजनीति को अपराधियों से मुक्त कराने का रास्ता भी निकलता।
वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने शनिवार (जुलाई 10, 2020) को कहा कि राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी के ‘करिश्माई’ नेतृत्व के तहत कॉन्ग्रेस के नेतृत्व को पार्टी संगठन की ईंट से ईंट जोड़कर बनाने की चुनौती उठानी चाहिए। दिग्विजय सिंह ने कहा कि इन दोनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की अजेय जोड़ी पर बढ़त बनाने की हिम्मत है।
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने केंद्र में मोदी सरकार और यूपी में योगी सरकार के खिलाफ आक्रामक तरीके से आवाज उठाने को लेकर राहुल और प्रियंका गाँधी का पुरजोर समर्थन करते हुए ट्वीट की एक श्रृंखला में कहा –
“कॉन्ग्रेस लीडरशिप को पार्टी संगठन को जोड़ने की चुनौती उठानी चाहिए। यही हमें राहुल जी और प्रियंका जी के करिश्माई नेतृत्व की जरूरत है। मुझे यकीन है कि इन दोनों में मोदी-शाह की जोड़ी का मुकाबला करने की हिम्मत है।”
उन्होंने केंद्र सरकार को घेरने के लिए कई मुद्दों पर राहुल और प्रियंका द्वारा उठाए गए आक्रामक रुख की सराहना की।
दिग्विजय सिंह ने अगले ट्वीट में लिखा, “मैं व्यक्तिगत रूप से राहुल और प्रियंका गाँधी के उस आक्रामक रुख का समर्थन करता हूँ, जिसमें वो राष्ट्रीय और उत्तर प्रदेश के हित के मुद्दों पर उठा रहे हैं। अगर कॉन्ग्रेस में कुछ नेता इसकी सराहना नहीं कर सकते तो वे कॉन्ग्रेस में क्यों हैं?”
I personally support the aggressive stand which Rahul ji and Priyanka ji are taking on issues of National interest in India and UP. If this is not appreciated by some leaders in Congress then why are they in Congress? I
उन्होंने पार्टी के कुछ विद्रोहियों को भी निशाने पर लिया, जो पिछले कुछ महीनों से पलटवार कर रहे हैं। दिग्विजय सिंह ने कहा, “कॉन्ग्रेस पार्टी में कोई भी उनका विरोधी नहीं है। यह धारणा आप लोगों में से अधिक मीडिया में है। कॉन्ग्रेस में कौन लोग हैं, जो मोदी पर नरम रुख अपनाना चाहते हैं, उनके मन में पार्टी के साथ या अगर उनके पास हिम्मत है तो वे सार्वजनिक रूप से बोलने की हिम्मत रखें।”
नेहरू-गाँधी परिवार के बचाव में दिग्विजय सिंह ने कहा – “मोदी-शाह एक गलत धारणा में हैं कि वे ईडी/आईटी/सीबीआई की धमकियों से नेहरू-गाँधी परिवार को धोखा दे सकते हैं। उनके पूरे परिवार ने अंग्रेजों से निर्भय होकर जेल में वर्षों बिताए हैं और बहुत बहादुर हैं। इसलिए किसी भी भ्रम में मत रहिए मोदी-शाह जी।”
ModiShah are under a misconception that they can browbeat Nehru Gandhi Family by threats of ED/IT/CBI. Their whole Family have fought the British fearlessly spent years in jail and are a brave lot. So don’t be under any of illusion ModiShah ji.
राहुल गाँधी और प्रियंका की समर्थन में दिग्विजय ने कहा – “यह मामले की जड़ है और सोनिया जी, राहुल जी और प्रियंका जी के सामने यह चुनौती है। मुझे यकीन है कि वे ऐसा करेंगे। पूरी कॉन्ग्रेस पार्टी, जवान-बूढ़े, हर कोई आपके पीछे खड़ा है और आप जो भी बलिदान माँगें ,वो करने के लिए तैयार हैं। तो राहुल जी प्लीज नेतृत्व करें।”
This is the crux of the matter and this is the challenge before Sonia ji Rahul ji and Priyanka ji. I am certain they would do it. The whole Congress Party Young Old everyone stands behind you and are ready to make whatever sacrifice you demand. So Rahul ji please LEAD.
तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन (Recep Tayyip Erdogan) ने शुक्रवार (10 जुलाई, 2020) को इस्तांबुल में 1500 साल पुराने ऑर्थोडॉक्स क्रिश्चियन कैथेड्रल हागिया सोफिया को मस्जिद में बदलने की घोषणा की है। तुर्की के एक अदालत ने पहले यह निर्देश दिया था। इससे पहले कैथेड्रल को म्यूजियम में बदलने का निर्देश दिया गया था।
शीर्ष अदालत ने पुराने आदेश को ख़त्म करते हुए चर्च को मस्जिद के रूप में आवंटित करने का निर्देश दे दिया। अदालत ने कहा 1934 में कैबिनेट के फैसले के अनुसार मस्जिद के रूप में इसे उपयोग को समाप्त कर दिया गया था। साथ ही इसे एक संग्रहालय के रूप में परिभाषित किया था। उस समय लिया गया निर्णय कानूनों का अनुपालन नहीं करता था।
रिपोर्ट के अनुसार, एर्दोगन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा है कि यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल का रूपांतरण तुर्की के ‘संप्रभु अधिकार’ के भीतर ही था। उन्होंने बताया कि हागिया के परिसर के अंदर 24 जुलाई को पहला नमाज पढ़ा जाएगा। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि यह ऐतिहासिक इमारत स्थानीय लोगों और गैर-मुस्लिमों सहित विदेशियों के लिए भी खुला रहेगा। अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया को देखते हुए एर्दोगन ने दावा किया कि जो लोग उसके फैसले से सहमत नहीं हैं, वे तुर्की की संप्रभुता की आलोचना कर रहे है।
कथित तौर पर, हागिया सोफिया में प्रार्थना करने के लिए आह्वान किया गया था। इसके साथ इसे न्यूज़ चैनलों पर प्रसारित किया गया था। वहीं तुर्की के अधिकारियों ने इस बात को स्पष्ट किया कि चर्च के सुनहरे गुंबद पर वर्जिन मैरी के मोज़ाइक को नहीं हटाया जाएगा। यह ऐतिहासिक इमारत हर साल 37 लाख विजिटर्स को आकर्षित करता है।
कंज़र्वेटिव मुस्लिम बैकग्राउंड से आने वाले एर्दोगन का हाथ इस फैसले के पीछे बताया जा रहा है। उन्होंने हाल ही में तुर्की की धर्मनिरपेक्ष परंपराओं को तोड़ने की अध्यक्षता की थी। लोगों का मानना है कि एर्दोगन ने तेजी से बढ़ते इस्लामीकरण के चलते अपने अनुयायियों के कट्टरपंथी विचारों को पूरा करने के लिए राजनीति का फायदा उठाते हुए, इस पूरे घटनाक्रम को अंजाम दिया है।
हागिया सोफिया का इतिहास
इस इमारत को बाइजेंटाइन सम्राट जस्टिनियन I के आदेश से 537 में एक भव्य चर्च के रूप निर्मित किया गया था। इसे दुनिया का सबसे बड़ा चर्च माना जाता था। 1453 में ओटोमन शासन के दौरान इसे मस्जिद में परिवर्तित कर दिया गया। उससे पहले बाइजेंटाइनों ने इसे सदियों तक संभाला था।
सुल्तान मेहमेद II के कब्जा करने से पहले इसे इस्ताम्बुल शहर को कॉन्स्टेंटिनोपोल के नाम से जाना जाता था। उसने ही तब गिरजाघर के भीतर जुमे की नमाज शुरू की थी। जिसके बाद चार मीनारों को मूल संरचना के साथ में जोड़ा गया था। इतना ही नहीं ईसाई मोज़ेक को इस्लामी चित्रकला के साथ ढक दिया गया था।
इसे 1453 में मॉडर्न तुर्की के संस्थापक केमल अतातुर्क द्वारा एक संग्रहालय का दर्जा दिया गया था। लेकिन, अब यहाँ के सभी चीजों को बदलने की तैयारी की जा रही है। हालाँकि, हागिया सोफिया लंबे समय से मुस्लिम-ईसाई प्रतिद्वंद्विता का प्रतीक रही है।
लगभग 900 वर्षों तक, हागिया सोफिया को पूर्वी ईसाइयों के लिए का तीर्थस्थल माना जाता था। तीर्थ स्थल पर रखे गए कलाकृतियों में ईसा मसीह का मूल क्रॉस भी शामिल था। सदियों से, ईसाई तीर्थयात्री इन सभी वस्तुओं से आत्मिक शांति प्राप्त करते आ रहे हैं।
यूनेस्को ने की इस कदम की आलोचना
1500 साल पुराने चर्च को मस्जिद में बदलने के फैसले को लेकर संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) ने दुख व्यक्त किया है। इसके साथ ही उन्होंने तुर्की से इस मुद्दे पर बातचीत करने का फैसला लिया। उन्होंने तुर्की से विश्व विरासत को संरक्षित करने और परिवर्तन न करने का आग्रह किया। कथित तौर पर, तुर्की के इस फैसले की पूर्वी रूढ़िवादी चर्च, ग्रीस और रूस के चर्च ने भी आलोचना की थी।
Hagia Sophia: UNESCO deeply regrets the decision of the Turkish authorities, made without prior discussion, and calls for the universal value of #WorldHeritage to be preserved.
गौरतलब है कि केगल अतातुर्क ने जब हागिया सोफिया को संग्रहालय की स्थिति के साथ उसकी धर्मनिरपेक्ष विरासत का पता लगाने की कोशिश की थी, तब एर्दोगन ने उसे इसके लिए धमकी दी थी। खबरों के अनुसार, राष्ट्रपति एर्दोगन ने देश में मुस्लिम कट्टरपंथियों को खुश करने और देश में कोरोनावायरस महामारी के गंभीर स्थिति से सबका ध्यान भटकाने के लिए यह फैसला लिया है।
उत्तर प्रदेश के कानपुर में विकास दुबे के एनकाउंटर पर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं। कॉन्ग्रेस समेत कई पार्टियाँ जहाँ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर सवाल दाग रही हैं। वहीं शिवसेना ने यूपी पुलिस की कार्रवाई का समर्थन किया है। शिवसेना सांसद संजय राउत का कहना है कि पुलिस के एक्शन पर प्रश्न चिन्ह नहीं लगाना चाहिए।
शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा यूपी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल ना उठाए जाए। जिन गुंडों ने पुलिस की हत्या की उस पर सवाल उठना चाहिए, पुलिस पर नहीं। विकास दुबे का एनकाउंटर लॉ एंड आर्डर का हिस्सा था।
संजय राउत ने कहा, “एक असामाजिक तत्व जो गुंडों का एक गिरोह चलाता है, जब कोई उसके जैसा आदमी वर्दीधारी पर हमला करता है, आठ को मारता है, तो उसे माफ नहीं किया जा सकता है। अगर वह मुठभेड़ में मारा गया है, तो मुझे लगता है कि पुलिस पर सवाल उठाना और उनका मनोबल गिराना सही नहीं है।”
If 8 Policemen are killed like that then state govt has no other option. If Police did the encounter then no one should raise a question – be it media, political parties or Human Rights Commission. Investigate but don’t politicise: Sanjay Raut, Shiv Sena on #VikasDubey (10.07) https://t.co/skBgiNbU4u
उन्होंने आगे कहा, “अगर 8 पुलिसकर्मी ऐसे मारे जाते हैं तो राज्य सरकार के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता। अगर पुलिस ने एनकाउंटर किया है तो किसी को भी सवाल नहीं उठाना चाहिए – चाहे वह मीडिया हो, राजनीतिक दल हो या फिर मानवाधिकार आयोग। जाँच किया जाए, लेकिन राजनीतिकरण न करें।”
संजय राउत ने कहा, ‘‘विकास दुबे ने आठ पुलिसकर्मियों की हत्या की थी। वर्दी पर हमला करने का मतलब है कि कोई कानून और व्यवस्था नहीं है। राज्य पुलिस द्वारा सख्त कार्रवाई करना आवश्यक है, चाहे वह महाराष्ट्र हो या उत्तर प्रदेश।’’ राज्यसभा सांसद ने आगे कहा, ‘‘एक मुठभेड़ में दुबे के मारे जाने पर आँसू बहाने की कोई जरूरत नहीं है। पुलिस कार्रवाई पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं?’’
गौरतलब है कि 2 जुलाई की रात कानपुर के बिकरु गाँव में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या करने का आरोपित और उत्तर प्रदेश का मोस्ट वांटेड गैंगस्टर विकास दुबे (Vikas Dubey) शुक्रवार (जुलाई 10, 2020) सुबह भागने की कोशिश करते हुए पुलिस एनकाउंटर में मारा गया।
बता दें कि महाराष्ट्र में शिवसेना और कॉन्ग्रेस सत्ता में साथी हैं, लेकिन दोनों की इस मुद्दे पर अलग लाइन है। कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा ने कहा, “बीजेपी की सरकार ने उत्तर प्रदेश को ‘अपराध प्रदेश’ में बदल दिया है। विकास दुबे जैसे अपराधी सत्ता में बैठे लोगों की देखरेख में आगे बढ़ रहे हैं और उन्हें बचाया भी जा रहा है। कॉन्ग्रेस पूरे कानपुर कांड की जाँच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज से कराने की माँग करती है।”
इस एनकाउंटर पर कॉन्ग्रेस, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी समेत कई विपक्षी दलों ने सवाल खड़े किए हैं। मायावती की ओर से माँग की गई है कि इस एनकाउंटर की जाँच की जाए और सुप्रीम कोर्ट उसकी निगरानी करे। वहीं अखिलेश यादव ने माँग की है कि विकास दुबे की फोन कॉल को सार्वजनिक कर देना चाहिए, ताकि उसके साथियों का नाम सामने आ जाए।