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मुकुल से ‘प्यार’ करती थी सायमा, लेकिन कलमा पढ़वाकर ही किया निकाह: अम्मी-अब्बू संग मिल मुस्लिम बनवाया, 2 मौलाना भी पकड़े गए

उत्तर प्रदेश के बिजनौर में एक मुस्लिम लड़की ने हिन्दू लड़के से निकाह के लिए धर्मांतरण की शर्त रख दी। लड़की ने हिन्दू युवक को इस्लाम कबूल करने पर मजबूर कर दिया। उसका धर्मांतरण एक मस्जिद के मुफ़्ती और मदरसा संचालक ने मिलाकर करवा भी दिया। इसके बाद निकाह हुआ। जानकारी हिन्दू युवक के परिवार को हुई तो हंगामा मच गया। पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर अब मुस्लिम लड़की समेत 5 लोगों को जेल भेजा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, धामपुर का युवक मुकुल लम्बे समय से एक मेडिकल स्टोर पर काम करता है। उसकी जान पहचान कुछ समय पहले सायमा नाम की एक मुस्लिम लड़की से हुई थी। मुकुल इस लड़की से शादी करना चाहता था। हालाँकि, सायमा ने शर्त लगा दी कि मुकुल को इस्लाम कबूल करना होगा, तभी वह उससे शादी करेगी। मुकुल को इस्लाम कबूल करवाने की इस साजिश में सायमा के माता-पिता भी शामिल हो गए। कुछ ही दिनों में मुकुल का ब्रेनवॉश भी हो गया।

इसके बाद मुकुल को इस्लाम कबूल करवाने के लिए राजी कर लिया गया। मुकुल को धामपुर के ही एक मदरसे में ले जाया गया। यहाँ मौजूद मौलाना ने उसे कलमा पढ़वाया। उसका नाम बदल कर माहिर अंसारी रख दिया गया। उसके मुस्लिम बनने के बाद एक मुफ़्ती ने उसका निकाह सायमा से करवा दिया। इस बीच यह खबर मुकुल के परिजनों को लग गई। उन्होंने इस पर हंगामा काट दिया। मुकुल के पिता ने यह सूचना पुलिस के साथ ही हिन्दू संगठनों को दी। इसके बाद पुलिस ने FIR दर्ज की और कार्रवाई चालू की।

पुलिस ने इस मामले में मुस्लिम युवती सायमा, उसकी अम्मी रुकसाना और अब्बू शाहिद को गिरफ्तार कर लिया। मामले में मदरसा के मौलाना कारी इरशाद और मुफ़्ती गुफरान को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने कहा है कि मुकुल के धर्मांतरण में कानून का उल्लंघन हुआ है। ना इस विषय में प्रशासन को सूचना दी गई है और ना आपत्तियों को लेकर कोई नियम माने गए हैं। वहीं इस मामले के बीच धर्मांतरित युवक मुकुल सामने नहीं आ रहा है।

पुजारी की प्लेट में दक्षिणा वाले सिक्के भी सरकार के, मंदिर में आया एक-एक रुपया सरकारी खजाने में जमा करवाओ: तमिलनाडु सरकार, बवाल के बाद आदेश वापस

तमिलनाडु सरकार ने एक आदेश में कहा है कि मंदिर के पुजारी अपनी प्लेट में आने वाले सिक्कों को भी सरकारी खजाने में जमा करवाएँ। सरकारी आदेश में मंदिर के सुरक्षाकर्मियों को पुजारियों पर नजर रखने का निर्देश दिया गया है। हिन्दू संगठनों ने इसका विरोध किया है। बवाल के बाद सरकार ने आदेश वापस लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तमिलनाडु के हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ प्रबन्धन विभाग (HR&CE) ने 7 फरवरी, 2025 को एक आदेश जारी किया। आदेश विभाग की मदुरई शाखा ने धन्दायुथापानी मंदिर को जारी किया। इस आदेश में लिखा गया कि पुजारियों को उनकी प्लेट पे चढ़ाया गया एक भी रुपया नहीं लेना चाहिए।

आदेश में कहा गया कि पुजारी सरकार से सैलरी पाते हैं इसलिए मंदिर के भीतर आया हर दान सरकारी खजाने में जमा करवाया जाना चाहिए। इस आदेश में पुजारियों की गतिवधियों पर नजर रखने का निर्देश मंदिर के गार्ड को दिया गया था। अब इसको लेकर हिन्दू संगठन, हिन्दू तमिलार काची (HTK) ने विरोध जताया है। उन्होंने इसे बेहूदा करार दिया है।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में HTK के एक पदाधिकारी ने कहा, “यह नोटिस बेतुका और निंदनीय है। मंदिर के पुजारियों की थाली में आमतौर पर भक्त ₹1 या ₹5 तक के सिक्के चढ़ाते हैं, यह उस इलाके और वहाँ के स्थानीय रीति रिवाजों के अनुसार चढ़ाए जाते हैं।”

HTK ने कहा कि सिक्के भगवान के प्रति श्रद्धा और आभार प्रकट करने के लिए चढ़ाए जाते हैं और HR&CE का इस छोटे चढ़ावे के पीछे पड़ना गलत है, वह इस मामले का विरोध करेंगे। उन्होंने इस मामले में लड़ाई को कोर्ट तक ले जाने का ऐलान किया है।

वहीं भारी विरोध के चलते HR&CE विभाग ने यह नोटिस वापस ले लिया है। विभाग ने कहा है कि मंदिर के ट्रस्टी से बातचीत किए बिना ही यह नोटिस जारी कर दिया गया था। अब विभाग ने कहा है कि नया आदेश जारी करने की कोई जरूरत नहीं थी क्योंकि पुजारी लगातार पैसा जमा करते आए हैं ।

पुजारियों के खिलाफ कार्रवाई का ऐसा कोई यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले अप्रैल, 2024 में मंदिर के भीतर आए कुछ रूपए लेने के आरोप में 4 पुजारियों को तमिलनाडु की सरकार ने गिरफ्तार कर लिया था। इन पर भी थाली में चढ़ाए गए पैसे लेने का आरोप लगा था।

उस रब की कसम हँसते-हँसते, इतनी लाशें दफना देंगे… सुप्रीम कोर्ट ने समझाया अर्थ, कहा- यह कविता हिंसा का संदेश नहीं देती: कॉन्ग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी के खिलाफ FIR पर उठाए सवाल

कॉन्ग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी के खिलाफ गुजरात पुलिस द्वारा दर्ज की गई एक एफआईआर पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए हैं। प्रतापगढ़ी के खिलाफ यह एफआईआर एक विवादित कविता के कारण दर्ज हुई थी जिसकी ऑडियो पर कॉन्ग्रेस सांसद ने इंस्टा पोस्ट किया था। इसी मामले में सुनवाई करते हुए अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुलिस ने कविता का सही अर्थ समझने में गलती की है।

इससे पहले गुजरात हाईकोर्ट ने 17 जनवरी 2025 को इस एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने ‘कविता की पंक्तियाँ’ सुनने के बाद कहा था कि एक सांसद होने के नाते, प्रतापगढ़ी को अधिक संयम से व्यवहार करना चाहिए और किसी भी भारतीय नागरिक से अपेक्षा की जाती है कि वह सामाजिक या सांप्रदायिक सौहार्द्र को बिगाड़ने वाला कार्य न करे।

जस्टिस संदीप भट्ट ने कहा, “कविता की भाषा और लहजे से स्पष्ट है कि यह ‘सत्ता’ और ‘ताकत’ की बात करती है। इसके अलावा पोस्ट पर आए रिएक्शन भी बताते हैं कि यह साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाला संदेश है। सांसद के रूप में उनसे जिम्मेदारीपूर्ण व्यवहार की उम्मीद है।”

इस आदेश के बाद इमरान प्रतापगढ़ी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और जस्टिस एएस ओका के समक्ष ये मामला पहुँचा। सुप्रीम कोर्ट ने हर पक्ष सुनने के बाद पहले प्रतापगढ़ी को अंतरिम राहत देते हुए एफआईआर के आधार पर आगे की किसी भी कार्रवाई पर रोक लगा दी और आज इस केस में गुजरात पुलिस को फटकारा।

अदालत ने प्रतापगढ़ी की याचिका पर विचार करते हुए कहा कि कविता का संदेश सिर्फ ये है, ‘अगर कोई हिंसा करता है, तब भी हम हिंसा नहीं करेंगे।’ वहीं राज्य सरकार के वकील से अदालत ने कहा– “कृपया दिमाग लगाएँ, कविता का सही विश्लेषण करें और इसे रचनात्मकता के दृष्टिकोण से देखें। यह कविता किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं है और इसके अर्थ को गलत तरीके से समझा गया है।”

गौरतलब है कि इमरान प्रतापगढ़ी के खिलाफ ये मुकदमा तब दर्ज हुआ था जब उन्होंने जामनगर के एक कार्यक्रम की क्लिप पर कविता की ऑडियो के साथ अपनी वीडियो शेयर की थी। इस कविता के बोल थे “उस रब की कसम हँसते-हँसते, इतनी लाशें दफना देंगे।” इसी के बाद जामनगर पुलिस ने इस मामले को बीएनएस की उचित दर्ज किया और फिर कॉन्ग्रेस सांसद गुजरात हाई कोर्ट गए और बाद में सुप्रीम कोर्ट।

राम भक्त पर एक दिन में ठोक दिए 76 केस, ISI ने बम से उड़वा दिया: चिता की राख से निकली थी 40 कीलें; जानिए कौन थे काला बच्चा सोनकर, क्यों कहलाते थे ‘हिंदुओं के भौकाल’?

काला बच्चा सोनकर, एक ऐसे रामभक्त का नाम है, जिन पर उत्तर प्रदेश में ‘रामकाज’ के लिए एक ही दिन में 76 FIR ठोंक दिए गए। जिन्हें पाकिस्तान की कुख्यात खुफिया एजेंसी ISI ने 9 फरवरी 1994 को बम से उड़वा दिया। जिनकी चिता की राख से बम की करीब 40 कीलें मिली थीं। जिनका होना कानपुर में हिन्दुओं की सुरक्षा की गारंटी थी। जिन्हें ‘हिन्दुओं का भौकाल’ कहा जाता था।

कौन थे काला बच्चा सोनकर?

‘खटिक’ समाज से आने वाले मुन्ना सोनकर उर्फ़ ‘काला बच्चा’ सोनकर कानपुर के बिल्हौर के रहने वाले थे। खटिक समाज दलित समुदाय का एक बड़ा हिस्सा है। काला बच्चा सोनकर कानपुर में इसी का नेतृत्व करते थे। वह खटिकों के साथ ही पूरे हिन्दू समाज में काफी पॉपुलर थे। वह भाजपा से जुड़े हुए थे। इस्लामी कट्टरपंथियों के आतंक से हिन्दुओं को बचाने वाले काला बच्चा पहले सूअर पालने का काम करते थे। इसी के साथ ही वह स्थानीय राजनीति में भी सक्रिय थे।

काला बच्चा सोनकर

हिन्दुओं पर पकड़ और दलितों में बड़ा नाम मुन्ना सोनकर को भाजपा ने 1993 में बिल्हौर विधानसभा सीट से प्रत्याशी भी बनाया था। हालाँकि, वह समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी से हार गए थे। लेकिन वह हार के बाद भी कानपुर क्षेत्र में भाजपा के पोस्टर बॉय थे। काला बच्चा सोनकर के बेटे राहुल बच्चा सोनकर वर्तमान में इसी सीट से भाजपा के विधायक हैं। वह लगातार अपने पिता के बलिदान और हिन्दुओं के लिए किए गए कामों को याद दिलाते हैं।

राम मंदिर आंदोलन और काला बच्चा

काला बच्चा का नाम पहले से प्रसिद्ध तो था ही, वह हीरो बन कर तब उभरे जब उन्होंने बाबरी विध्वंस के बाद कानपुर के भीतर हिन्दुओं को बचाया था। 6 दिसम्बर, 1992 को अयोध्या में बाबरी ढाँचे के विध्वंस के बाद देश के बाकी हिस्सों के साथ कानपुर में भी दंगे भड़के थे। बाबूपुरवा, जूही समेत मुस्लिम बहुल इलाकों के अलावा कई जगह हिंसा हुई थी। 6 दिसम्बर के बाद मुस्लिमों ने एक मार्च निकाला था जिसके चलते खून खराबा हुआ। इस दंगे के दौरान आतातायी मुस्लिम भीड़ से काला बच्चा सोनकर ने हिन्दुओं को बचाया और मुस्लिमों का प्रतिरोध किया।

काला बच्चा सोनकर

1994 में हो गई हत्या

1992 में उनके ऊपर मुकदमे लगे लेकिन लोकप्रियता बढ़ती गई। काला बच्चा सोनकर को 1993 चुनाव में भाजपा ने बिल्हौर से टिकट दिया लेकिन वह हार गए। इस चुनाव के कुछ ही दिनों के बाद 9 फरवरी, 1994 को उनकी हत्या हो गई। हत्या के दिन काला बच्चा सोनकर स्कूटर पर जा रहे थे। उन पर कानपुर में बम चलाया गया था, इससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। पुरानी रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बम धमाके में उनके शरीर का एक ही हिस्सा बचा था। उन पर इतने शक्तिशाली बम मारे गए थे कि बाद में अस्थियों तक से 40 लोहे के टुकड़े निकले थे।

ISI का हाथ सामने आया, मुंबई से हुई थी फंडिंग

काला बच्चा की हत्या मामले में कुछ मुस्लिम आरोपित बनाए गए थे। इनमें से कुछ की बाद में हत्या भी हो गई। इस मामले में जाँच में सामने आया था कि काला बच्चा को निशाने पर लेने वाले ISI से जुड़े हुए लोग थे। सोनकर को मारने के लिए मुंबई से पैसा भेजे जाने की बात भी सामने आई थी। उनके बेटे राहुल सोनकर बताते हैं कि ₹10 लाख मुंबई से भेजे गए थे, जिनमें से ₹4 लाख का इस्तेमाल इस हत्या में हुआ।

मुलायम सिंह ने नहीं दिया शव, परिवार की पिटाई की

काला बच्चा सोनकर के परिवार पर भी मुलायम सिंह यादव की तब की सरकार ने काफी अत्याचार किए थे। काला बच्चा सोनकर के परिवार को उनका शव ही नहीं दिया गया। उनके शव को पुलिस ने जब्त किए रखा। भाजपा नेता ब्रह्मदत्त द्विवेदी भी कानपुर पुलिस से बातचीत करने पहुँचे। पहले पुलिस ने शव लौटाने की हामी भरी और भाजपा नेताओं से तैयारी करने को कहा। लेकिन बाद में मुलायम सरकार ने शव लौटाने से इनकार कर दिया। काला बच्चा को पुलिस ने सुबह 4 बजे चुपके से सिंधियों के शमशान में जला दिया।

इसके बाद जब काला बच्चा के परिवार ने प्रदर्शन किया और मामले में कार्रवाई की माँग की तो उनकी विधवा और बूढ़ी माँ को मुलायम सिंह यादव की पुलिस ने घेर कर मारा पीटा। प्रदर्शन करने पहुँचे भाजपा कार्यकर्ताओं को पकड़ लिया गया और उनकी बेरहमी से पिटाई हुई। काला बच्चा के परिवार के सड़क पर निकलने पर तक बैन लगा दिया गया। इस मामले में यह तक आदेश दिया गया कि हत्या का विरोध करने वालों को ऐसा सबक सिखाया जाए कि वह आगे विरोध करने लायक ना रहें।

काला बच्चा सोनकर

अब बेटे राहुल हैं विधायक, याद दिला रहे पिता का बलिदान

काला बच्चा सोनकर के बेटे राहुल बच्चा सोनकर को 2022 में भाजपा ने बिल्हौर विधानसभा से टिकट दिया था। उन्होंने अपने पिता के काम को आगे बढाते हुए प्रचार किया और 2022 में 1 लाख से अधिक अंतर से चुनाव जीता।

2021 में अपने पिता को ट्विटर पर राहुल सोनकर ने ‘कानपुर का भौकाल’ बताया था। वर्तमान में राहुल सोनकर अपने पिता की तरह इस इलाके में दलितों का बड़ा चेहरा हैं।

जब तक डेविड डिकॉस्टा जिंदा रहेगा, बीयरबायसेप्स आपको जकड़ेगा ही… समय आपको बर्बाद कर देगा

यह कहानी है डेविड डिकॉस्टा की। लंबा-चौड़ा था, लेकिन था गरीब। लाइफ लेकिन मस्त जी रहा था। मस्ती भरे जीवन की साथी थी उसकी सुंदर बीवी। नाम था मैरी डिकॉस्टा। शादी के बाद अमूमन जो होता है, वही हुआ। मैरी प्रेगनेंट हो गई। और कुछ महीनों के बाद उनके घर आया एक नन्हा-मुन्ना बेटा।

अब कहानी है चतुर्वेदी की। डेविड डिकॉस्टा और चतुर्वेदी का है कनेक्शन। चतुर्वेदी है नेता और डेविड है कार्यकर्ता – जान तक देने वाला कार्यकर्ता! वो चतुर्वेदी को हीरो मानता है हीरो! इसीलिए अपने बेटे का नाम खुद से रखने के बजाय सुंदर सी बीवी को लेते-देते पहुँच जाता है चतुर्वेदी के बंगले पर। बेटे का नाम रख दिया जाता है – जेम्स।

अब कहानी है जेम्स की। उस जेम्स की, जिसकी माँ का बलात्कार किया गया। किसने किया – चतुर्वेदी ने। क्योंकि सुंदर महिला को देख उसका हवस जाग गया था। कैसे किया – विश्वासघात करके। जान देने वाले कार्यकर्ता को रेल रोको आंदोलन में भेजा, उसको जेल भिजवाया, फिर उसकी बीवी का बलात्कार किया। पति जेल में, गोद में दूधमुँहा बच्चा और खुद रेप-पीड़ित। बेचारी मैरी आत्महत्या कर लेती है।

धीरे-धीरे समय बीतता है। 39 साल के बाद दो नाम आते हैं – रणवीर (Ranveer Allahbadia) और समय (Samay Raina)। ऊपर वाली कहानी से इस कहानी का दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है। क्योंकि वो ‘आखिरी रास्ता’ की कहानी है। अमिताभ वाली फिल्म। 1986 में रिलीज हुई थी। वास्ता इसलिए भी नहीं है क्योंकि वो रील थी, ये रियल है। रील में डेविड डिकॉस्टा सिर्फ एक था, रियल में लाखों-करोड़ों डेविड डिकॉस्टा हैं।

समय बदल गया है। सिंगल स्क्रीन से मल्टीपल स्क्रीन के बाद अब तो हाथम-हाथ स्क्रीन का जमाना आ गया है। ऐसे में कब कोई रणवीर आपको अपने बीयरबायसेप्स में जकड़ ले, कब कोई रैना आपका समय बदल दे – आपको पता भी नहीं चलेगा। क्योंकि आप भले उसे अपना आदर्श बना लें, उसके लिए आप सिर्फ और सिर्फ डेविड डिकॉस्टा हैं।

चतुर्वेदी के हवस और वासना और फिर बलात्कार से अगर आप रणवीर इलाहाबादिया या समय रैना को अलग करके देख रहे हैं, इसका मतलब है आप डेविड डिकॉस्टा की श्रेणी में फिट बैठते हैं। सोशल मीडिया पर किसको कितने लोग देखते-सुनते हैं, आप विश्वास मानिए इनकी यौन संतुष्टि का पैमाना ही यही है। “माँ की योनि”, “माँ-बाप को सेक्स करते देखना” जैसे शब्द इनके फोरप्ले हैं। इसके बाद ही इनको मिलता है व्यूज का चरम-सुख!

कोई रणवीर या समय रैना आज पहली बार आया, आज के बाद खत्म हो जाएगा – इस भुलावे में भी मत रहिएगा। जब तक इस मानव-समाज में हमारे-आपके जैसे डेविड डिकॉस्टा रहेंगे, रणवीर या समय जैसे लोग न सिर्फ रहेंगे बल्कि हमारे-आपसे ऊपर की श्रेणी में बैठेंगे। रील लाइफ में हम सब पर फ्लाइंग किस फेंक मन ही मन में चूतिया बना देने के अहसास से पुष्पित-पल्लवित होते रहेंगे।

अपने हीरो को भगवान बनाने वाली मानसिकता से पैदा होता है रणवीर या समय रैना। अपने हीरो को भगवान बनाने वाली मानसिकता के कारण शाहरुख खान को देखने के चक्कर में मारा जाता है कोई। अपने हीरो को भगवान बनाने वाली मानसिकता के कारण आत्महत्या कर लेते हैं कई लोग।

बदले में हीरो क्या करता है? धंधा करता है, धंधा। व्यूज का धंधा। गूगल-फेसबुक से पैसे का धंधा। आपको क्या मिलता है? वामपंथी हैं तो ध्रुव राठी। दक्षिणपंथी हैं तो एल्विश यादव। मनोरंजनपंथी हैं तो Ranveer Allahbadia या Samay Raina या Apoorva Mukhija… कॉमेडीपंथी हैं तो Tanmay Bhat या Munawar Faruqui – और ये सब आपको मिल कर बनाते हैं चूतिया।

पटकथा लेखक-हीरो-डायरेक्टर-प्रोड्यूसर सबने ‘आखिरी रास्ता’ का वास्ता देकर आपको समझाया था कि डेविड डिकॉस्टा नहीं बनने का। लेकिन यहाँ देखता-सुनता-गुनता कौन है? पहले सब के सब ‘है साला’ डायलॉग सुन के सीटी बजाते थे, टाइम पास करके घर चले आते थे… अब “माँ की योनि”, “माँ-बाप को सेक्स करते देखना” सुन कर ठहाके लगाते हैं… सिंपल!

जीवन में आपको डेविड डिकॉस्टा नहीं बनना है।

राजीव गाँधी फाउंडेशन-सैम पित्रोदा को USAID से मिला पैसा, भारत को तोड़ने के लिए जॉर्ज सोरोस को मिले ₹5000 करोड़? ऑपइंडिया ने जो सच बताया, संसद में उसी तूफान में घिरा गाँधी परिवार

जब से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने USAID पर ताला लगाया है लगातार इसकी करतूतें बाहर आ रही है। भारत विरोधी ताकतों को यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (USAID) से हुई फंडिंग का मामला 10 फरवरी 2025 को लोकसभा में बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने उठाया।

ट्विटर/एक्स पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा है, “आजादी से लेकर अब तक कॉन्ग्रेस ने सिर्फ देश को तोड़ने का काम किया है। राजीव गाँधी फाउंडेशन सहित कई NGO ने USAID से पैसे लेकर देश विरोधी तत्वों को फायदा पहुँचाया। विपक्ष देश तोड़ना चाहता है।” इसके साथ ही उन्होंने लोकसभा की कार्रवाई का एक वीडियो भी शेयर किया है, जिसमें वे इससे जुड़े सवाल उठा रहे हैं।

ये सवाल क्या हैं इन्हें नीचे पढ़ा जा सकता है-

“USAID ने ओपन सोसायटी फाउंडेशन के जॉर्ज सोरोस को 5000 करोड़ रुपया भारत को तोड़ने के लिए दिया या नहीं दिया?”

“USAID ने राजीव गाँधी फाउंडेशन चैरिटेबल ट्रस्ट को पैसा दिया कि नहीं दिया?”

“ओवरसीज कॉन्ग्रेस के जो अध्यक्ष हैं सैम पित्रौदा उनको USAID ने पैसा दिया या नहीं दिया?”

“बांग्लादेश में मोहम्मद युनूस, जिन्होंने वहाँ के लोकतंत्र को बर्बाद किया, उसके साथ गाँधी परिवार के साथ क्या संबंध हैं?”

“राजीव गाँधी फाउंडेशन में जो विजय महाजन है, उनकी संस्था को USAID पैसा दे रही है या नहीं दे रही है? कॉन्ग्रेस ने उसे राजीव गाँधी फाउंडेशन में देश के टुकड़े रखने के लिए रखा है या नहीं रखा है?

“ग्रामीण विकास ट्रस्ट जो कि जातिगत जनगणना की बात करता है यूएस उसको पैसा देता है कि नहीं देता है?”

“तालिबान को यूएसएड ने पैसा दिया कि नहीं दिया?”

“नेपाल में जो नास्तिकता के लिए मूवमेंट चला उसके लिए यूएसएड ने पैसा दिया कि नहीं दिया?”

“सामंता पावर से आपकी मुलाकात हुई कि नहीं हुई?”

“फलाह-ए-पाकिस्तान, एल खिदमत जैसे आतंकी संगठनों को यूएसएड ने पैसा दिया कि नहीं दिया?”

“वक्फ एक्ट को जो जकात फाउंडेशन चला रहा है जिसको कॉन्ग्रेस सपोर्ट करती है उसको यूएसएड ने पैसा दिया कि नहीं दिया?”

USAID को लेकर ऑपइंडिया की रिपोर्ट

बता दें कि जिस यूएसएड को लेकर भाजपा सांसद द्वारा सवाल खड़े किए गए हैं उसे लेकर ऑपइंडिया लगातार रिपोर्ट कर रहा है। हम आपको पहले की रिपोर्टों में बता चुके हैं कि कैसे इस यूएसएड ने अमेरिकी करदाताओं के करोड़ों रुपए आतंकवादियों को पोसने वाले संगठनों को देने में और धर्मांतरण को बढ़ावा देने वाली संस्थाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए खर्च किया। नेपाल में नास्तिकता का मूवमेंट चलाना हो या देश-विदेश में LGBTQ के एक्टिविज्म को बढ़ाना हो… इन सब पर यूएसएड ने खुलकर डॉलर उड़ाए।

कहने को ये संगठन मानव भलाई की दिशा में काम करता है लेकिन हकीकत यह है कि इनका फायदा अफगानिस्तान में बैठे तालिबान, पाकिस्तान में बैठे लश्कर-ए-तैयबा, फलाह-ए-पाकिस्तान और गाजा में बैठे हमास जैसे आतंकी संगठनों को भी हुआ है।

इसके अलावा यूएसएड का संबंध कॉन्ग्रेस से, गाँधी परिवार के करीबी सैम पित्रौदा से और जॉर्ज सोरोस से कैसे है इसे भी ऑपइंडिया अपनी रिपोर्ट में बता चुका है। 2024 में भी हमने ये खुलासा किया था कि सैम पित्रौदा की एनजीओ को USAID से फंड आता था। आज इसी मामले को निशिकांत दुबे ने फिर से उठाकर ताजा कर दिया है।

सूर्य स्नान, भोजन, फोकस और टाइम टेबल: PM मोदी ने ‘परीक्षा पे चर्चा’ में सुलझाई बच्चों की समस्या, आत्मविश्वास भी बढ़ाया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्कूली छात्रों की परीक्षाएँ शुरू होने से पहले एक बार फिर ‘परीक्षा पे चर्चा’ के जरिए कुछ बच्चों से मुलाकात की और उनकी समस्याएँ सुनकर उन्हें उसके समाधान बताए। इस दौरान उन्होंने बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ाते हुए उन्हें तनाव मुक्त करने का भी काम किया।

पीएम मोदी ने अलग-अलग राज्यों से आए बच्चों को सूर्य स्नान का महत्व समझाया और गेहूँ, बाजरा, चावल, मोटा अनाज सब कुछ खाने की सलाह दी। पीएम ने क्रिकेटर्स का उदाहरण देते हुए समझाया कि जैसे चारों ओर से शोर होते हुए भी क्रिकेटर का फोकस गेंद पर होता है वैसे ही बच्चों को भी अपना ध्यान सिर्फ लक्ष्य पर रखना चाहिए। बाहरी प्रेशर और लोगों की बातों का भार अपने दिमाग में न डालें।

लीडरशिप क्वालिटी पर सवाल किए जाने पर पीएम मोदी ने कहा “जब लोगों में आपके लिए विश्वास जागता है, तब लोग आपकी लीडरशिप को मान्यता देते हैं। आपमें विश्वास कर लीडर बनने के लिए धैर्य भी बेहद जरूरी है।” आगे प्रधानमंत्री मोदी ने माता-पिता और परिवार को भी सीख दी कि वो बच्चों को दीवारों में बंद करके किताबों का जेलखाना बना दें तो बच्चे कभी ग्रो नहीं कर पाएँगे। उसे खुला आसमान चाहिए। वहीं टीचर से कहा कि वो बच्चों की उस ताकत को पहचानें जिसमें वो सबसे अच्छा है।

उन्होंने बच्चों को लिखने वाली आदत डालने को कहा। वहीं ये भी कहा कि 24 घंटे ही सबके पास होते हैं, इसलिए अपने लक्ष्य पर फोकस करके मेहनत करें, जो काम करने हैं उनकी लिस्ट बनाएँ, उन्हें चेक करें ये हुए या नही। उन्होंने बच्चों को सलाह दी कि डिप्रेशन और एंग्जायटी से दूर रहने का सरल तरीका यही है कि अगर मन में दुविधा हो तो उसे कह डालें वरना एक समय पर विस्फोट हो जाएगा।

पीएम मोदी ने छात्रों को सकारात्मक सोच अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि लक्ष्य ऐसे बनाएँ जो पहुँच में हों लेकिन तुरंत हासिल न हों। इससे छात्रों को प्रेरणा मिलेगी और वे अपनी क्षमताओं पर विश्वास कर सकेंगे। परीक्षा के दौरान तनाव और डर से निपटने के लिए पीएम मोदी ने सलाह दी कि कठिन विषयों को पहले पढ़ें। इससे आत्मविश्वास बढ़ेगा और परीक्षा का अनुभव सुखद बनेगा। उन्होंने कहा कि असफलताओं से सीखना जरूरी है और इसे एक शिक्षक की तरह देखना चाहिए।

जिस रात बांग्लादेशी शरीफुल इस्लाम ने मारे चाकू, उस रात गीता ने बचाई सैफ अली खान की जान: बॉलीवुड अभिनेता ने बताया क्या-कैसे हुआ था, तैमूर साथ गया था अस्पताल

बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान पर हुए जानलेवा हमले को एक महीना होने वाला है। इस बीच उनपर, उनके परिवार पर क्या गुजरी ये सब जानकारी अब तक सूत्रों के हवाले से आती रही, मगर अब सैफ अली खान ने खुद आकर घटना वाली रात पर विवरण दिया है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने बताया कि उस रात हमलावर (मोहम्मद शरीफुल इस्लाम शहजाद) जहाँगीर के कमरे में चाकू लेकर खड़ा था और पैसे माँग रहा था। उन्हें उस समय कुछ समझ नहीं आया। उन्होंने फौरन उसे पकड़ा और उससे भिड़ गए। हमलावर ने भी उनकी गर्दन पर हमला किया। शुरू में सैफ को एहसास नहीं हुआ कि हमलावर ने उनकी गर्दन पर चाकू मारा है क्योंकि वो लगातार दो हथियारों से वार कर रहा था। सैफ चूँकि बचाव में हाथ-पाँव चला रहे थे इसलिए उनके हाथ और कलाई कट गई थी।

सैफ कहते हैं, “इस स्थिति में मैं बस दुआ कर रहा था कि कोई इस आदमी को मुझसे दूर कर दे, तभी मेरी हाउसहेल्प गीता वहाँ आईं। उन्होंने उसे मुझसे दूर खींचा और जेह के कमरे में धकेलकर दरवाजा बंद कर दिया। खून से लथपथ हाल में मुझे एहसास हुआ कि मेरे दाहिने पाँव में कुछ महसूस नहीं हो रहा है। ऐसा शायद इसलिए था क्योंकि मेरी रीढ की हड्डी में चोट लगी थी, लेकिन तब मुझे ये महसूस नहीं हुआ।

सैफ बताते हैं कि गीता ने जब हमलावर को धक्का देकर जेह के कमरे में बंद किया तो उनका दूसरा हाउसहेल्प घर में डेकोरेशन पर लगी दो तलवार लेकर आ गया था। उन लोगों ने हमलावर को पकड़ने के लिए गेट खोला तब तक वो उसी रास्ते से जा चुका था जिससे वो आया था।

इसके बाद करीना उन्हें और तैमूर को लेकर नीचे गईं। वहाँ चिल्ला-चिल्लाकर उन्होंने ऑटो वाला बुलाया। फिर करीना ने कहा- “तुम अस्पताल जाओ, मैं अपनी बहन के घर जाऊँगी।” सब परेशान थे इसलिए वो तैमूर को लेकर अपने साथ चले गए। तैमूर ने रास्ते में उनसे पूछा- ‘तुम मरने वाले हो क्या।’ सैफ ने जवाब दिया- ‘नहीं।’

सैफ अली खान बताते हैं कि उन्हें उस समय तैमूर की जरूरत थी। उन्हें लग रहा था कि अगर भगवान न करे कुछ उन्हें होता है तो तैमूर उनके साथ होना चाहिए। वो तैमूर को लेकर ऑटो में बैठे। ऑटो वाले ने भी उनकी हालत देखी तो आराम से, बिना झटका दिए ऑटो चलाया। कुछ समय बाद वो और तैमूर, लीलावती अस्पताल की इमरजेंसी में गए। उन्होंने अपना परिचय देकर स्ट्रेचर फटाफट मंगवाया और इलाज शुरू हुआ।

सैफ कहते हैं कि डॉक्टरों ने बड़ी सूझबूझ से उनका केस हैंडल किया, जाँच के बाद बताया कि जो चाकू गर्दन पर मारा गया था, स्पाइन के पास। अगर वो दो-तीन इंच और अंदर होता तो वो पैरालाइज हो सकते थे।

वहीं जब इंटरव्यू में उनसे ये पूछा गया कि सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि इतने बड़े सेलीब्रेटी के घर चोर कैसे घुस सकता है, उन्हें अस्पताल जाने के लिए ऑटो क्यों लेना पड़ा, क्या वो नाटक कर रहे आदि-आदि। इस पर सैफ ने जवाब दिया कि वो इसमें किसी की गलती नहीं देते, सिर्फ अपनी देते हैं कि उन्होंने प्रोटेक्शन टाइट नहीं रखी।

उन्होंने ये भी बताया कि उनके पास ड्राइवर है लेकिन रात में कोई घर नहीं रुकता। अगर वो फोन करते तो ड्राइवर को आने में समय लग सकता था। रही बात मजाक उड़ाने की तो उन्हें पहले से पता था कि उनके साथ हुई घटना का लोग मजाक बनाएँगे।

उन्होंने कहा कि वो इस घटना के बाद भी अपने शहर में सुरक्षित महसूस करते हैं। उनका परिवार इस मुश्किल की घड़ी में उनके साथ खड़ा रहा। जेह ने उन्हें एक प्लास्टिक की तलवार भी दी है और कहा है कि अगर अब चोर आए तो वो उसे इसी से मारें।

दिल्ली दारू घोटाले में फिर जेल जा सकते हैं केजरीवाल-सिसोदिया, CBI ने अदालत में दी अर्जी: पंजाब में CM भगवंत मान की कुर्सी पर खतरा, कॉन्ग्रेस का दावा- AAP के 30 MLA संपर्क में

दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) को मिली करारी हार के बाद उसकी मुश्किलें और बढ़ती जा रही है। पार्टी को अब राजनैतिक और कानूनी फ्रंट पर समस्याएँ आ रही हैं। दिल्ली के बाद उसका पंजाब का सिंहासन डोल रहा है।

कॉन्ग्रेस पंजाब में उसकी सरकार गिराने की फिराक में हैं। दूसरी तरफ शराब घोटाला मामले में मुखिया केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के खिलाफ CBI ने जल्दी मुकदमा चलाने को कदम बढ़ा दिए हैं। AAP को एकसाथ कई फ्रंट पर चुनौती मिलने वाली है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली में हार के बाद पंजाब की कॉन्ग्रेस ईकाई सरकार गिराने में जुट गई है। पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने रविवार (9 फरवरी, 2025) को दावा किया है कि सत्तारूढ़ AAP के 30 विधायक कॉन्ग्रेस के सम्पर्क में हैं।

उन्होंने दावा किया है कि यह सम्पर्क पिछले एक वर्ष से बना हुआ है। उन्होंने कहा है कि यह सभी विधायक AAP छोड़ कर कॉन्ग्रेस को समर्थन देने को भी तैयार हैं। उन्होंने पार्टी में भीतरी लड़ाई का भी हवाला दिया है।

प्रताप सिंह बाजवा ने दावा किया है कि केजरीवाल, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को पद से हटा कर खुद सीएम बनने का कदम उठा सकते हैं। बाजवा ने कहा है कि आगामी दिनों में पंजाब में एक सीट पर उपचुनाव होना है और इस सीट से केजरीवाल अपनी किस्मत आजमा सकते हैं।

उन्होंने कहा, “अपने करीबियों की बड़ी फ़ौज को समायोजित करने के साथ ही केन्द्रीय एजेंसियों की जाँच एवं कार्रवाई से बचें और फंड्स जुटाने को AAP मुखिया पंजाब का मुख्यमंत्री बनने की कोशिश करेंगे।”

बाजवा ने यह भी दावा किया कि भगवंत मान दिल्ली में भाजपा के हाईकमान से अपने संबंध सुधारने में जुटे हैं। बाजवा जैसे ही कुछ सुर पंजाब कॉन्ग्रेस के मुखिया और सांसद अमरिंदर सिंह ‘राजा वरिंग’ के हैं। उन्होंने कहा है कि आने वाले दिनों में राज्य के भीतर कई नेता AAP छोड़ सकते हैं।

उन्होंने कहा है कि अब पंजाब में कॉन्ग्रेस असफल ‘पंजाब मॉडल’ और असफल ‘दिल्ली मॉडल’ को लेकर सरकार पर हमलावर होगी। उन्होंने कहा है कि दिल्ली में AAP की हार, पंजाब में कॉन्ग्रेस के लिए ‘आपदा में अवसर’ जैसी है।

वरिंग ने कहा है कि AAP को पंजाब से भी अपना बोरिया बिस्तर बाँध लेना चाहिए। वहीं AAP ने पार्टी में टूट के सभी दावों को नकारा है। पंजाब AAP के प्रवक्ता नील गर्ग ने कहा, “केजरीवाल हमारे राष्ट्रीय संयोजक हैं और भगवंत मान पंजाब के मुख्यमंत्री हैं। कॉन्ग्रेस का ग्राफ रसातल को जा रहा है। दिल्ली में लगातार तीसरी बार उसका प्रदर्शन जीरो रहा है।”

नील गर्ग ने दावा किया कि 2027 चुनाव में कॉन्ग्रेस का प्रदर्शन 2022 के मुकाबले और भी बुरा होगा। गौरतलब है कि 117 सीटों वाली पंजाब विधानसभा में वर्तमान में AAP को प्रचंड बहुमत हासिल है। उसके पास 93 विधायक हैं जबकि कॉन्ग्रेस के पास मात्र 16 विधायक हैं।

राज्य में शिरोमणि अकाली दल के पास 3 जबकि भाजपा के पास 2 विधायक हैं। कॉन्ग्रेस लगातार कहती आई है कि उसका अधिकांश वोट AAP ने ही लिया है। वह अब दिल्ली में AAP की हर और पंजाब में अंदरूनी लड़ाई के शेयर वापसी करने के मूड में है।

AAP के लिए सिर्फ पंजाब ही नहीं बल्कि दिल्ली में भी मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। उसके दोनों बड़े नेताओं केजरीवाल और सिसोदिया पर चुनाव हारने के बाद जेल जाने की तलवार लटक रही है। दिल्ली शराब घोटाला मामले में जमानत पर चल रहे दोनों के खिलाफ जाँच एजेंसी CBI ने मुकदमा जल्दी चालू करने की अर्जी अदालत को दी है।

CBI की एक विशेष अदालत ने सिसोदिया और केजरीवाल के वकीलों से कहा है कि वह मुकदमे के कागजों की जाँच जल्दी पूरी कर लें ताकि जल्द से जल्द मुकदमा चालू किया जा सके। अदालत ने यह बात 3 फरवरी, 2025 को कही। इससे पहले CBI ने कहा है कि वह जल्द से जल्द इस मामले में 23 आरोपितों के खिलाफ मुकदमा चालू करना चाहती है।

गौरतलब है कि केजरीवाल समेत बाकी लोगों पर आरोप है कि उन्होंने दिल्ली की आबकारी नीति ने बदलाव किया जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। इस नीति बदलने से निजी विक्रेताओं फायदा पहुंचाया गया और उनसे वापसी में मिले ₹100 करोड़ को गोवा चुनाव में खपाया गया।

ससुराल में जिसे नंगा कर देखा ‘खतना’, बदले की आग में वो अब तक 4000+ घुसपैठियों को भिजवा चुका है बांग्लादेश: ‘खबरीलाल’ की असली कहानी

बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ पूरे देश में अभियान छिड़ा हुआ है। आए दिन खबरें आती हैं कि कभी बांग्लादेशी भारत में घुसते वक्त बॉर्डर से पकड़े गए तो कभी फर्जी पहचान के साथ देश के किसी कोने में सालों से रहते हुए। ताजा खबर है कि मुंबई में पुलिस ने 16 बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। ये लोग भारत में अवैध रूप से रह रहे थे।

डोंगरी पुलिस को इनकी जानकारी हुई तो उनकी टीम ने मानखुर्द, वासी नाका,कल्याण,मुंब्रा, कलंबोली,पनवेल, कोपरखैरने इलाके से 16 बांग्लादेशी नागरिक को गिरफ्तार किया

ये पहली बार नहीं है कि मुंबई पुलिस ने बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ एक्शन लिया हो। इससे पहले भी बड़ी-बड़ी कार्रवाई हुई हैं। दो दिन पहले ही मुंबई से 201 बांग्लादेशी गिरफ्तार हुए थे और उससे पहले भी इनकी धड़पकड़ तेज ही थी।

बता दें कि मुंबई में बांग्लादेशियों को पकड़ने में जितनी भूमिका पुलिस की है उतनी ही उन लोगों की भी है जो इनकी जानकारी देते हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही पुलिस के खबरी की दिलचस्प कहानी बताने जा रहे हैं जिन्होंने बीवी से धोखा मिलने के बाद ही अपने जीवन का उद्देश्य ही बांग्लादेशियों को पकड़वाना बना लिया। उनके प्रयास से पुलिस ने साल 2023 तक में 3500-4000 बांग्लादेशी पकड़कर वापस मुल्क भेजे थे।

46 वर्षीय इस पुलिस खबरी की पहचान रिपोर्टों में नहीं बताई गई है, पर ये जानकारी दी गई है कि इनकी बांग्लादेशी बीवी ने इन्हें धोखा दिया था। इसी के बाद इन्होंने बांग्लादेशियों को चुन-चुनकर वापस मुल्क भिजवाने का प्रण लिया। मिड-डे से बाचतीच के दौरान उन्होंने साल 2023 में बताया था कि वो ठाणे में रहते हैं। यही पले-बढ़े हैं। अबी अपनी पोल्ट्री की दुकान चलाते हैं। उन्होंने पुलिस मुखबिर के तौर पर करियर की शुरूआत 20 साल पहले की थी जब उनकी पहली बीवी सलेहा बेगम उन्हें धोखा देकर चली गई थी।

पुलिस के इस मुखबिर के मुताबिक जिस सलेहा बेगम को उन्होंने बीवी बनाया, वो पहले बार में डांसर का काम करती थी। उन्हें उससे प्यार हुआ तो उनकी मुलाकातें बढ़ीं। सलेहा ने बताया कि वो कोलकाता से है, लेकिन हकीकत में वो थी बांग्लादेश से। निकाह हुआ तो वो शादी के बाद उन्हें और दो बेटियों को बांग्लादेश लेकर गई। शुरू में उन्हें लगा कि वो लोग कोलकाता में है मगर बाद में एहसास हुआ कि ये तो बांग्लादेश है।

मुखबिर के अनुसार उनकी बीवी उनको बांग्लादेश के सतखीरा जिले के कोलारोआ थानांतर्गत आने वाले एक गाँव ले गई। सलेहा के परिजनों को नहीं पता था कि वो निकाह कर चुकी है। उसके परिजनों को लगा कि शौहर हिंदू है। मुखबिर ने बार-बार बताना चाहा कि वो मुस्लिम हैं, उन्हीं के मजहब के हैं, लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं मानी।

जाँच के लिए कपड़े उतारे, उनका खतना देखा, फिर भी यकीन नहीं किया और बाद पुलिस के भी हवाले कर दिया। पुलिस ने हिरासत में रखकर उन्हें खूब पीटा। इस बीच न सलेहा और न उनके परिवार का कोई शख्स उनसे मिलने आया। जब पुलिस ने रिहाई के लिए पैसे माँगे तो वहीं से उन्होंने अपने अब्बा को फोन किया। सारी बात सुनने के बाद अब्बा ने बंगाल में ले रखी एक जमीन को बेच दिया और कोलारोआ पुलिस को 5 लाख रुपए का भुगतान किया।

मुखबिर ने पुलिस के पास से छूटते ही सलेहा से वापस चलने को कहा, लेकिन उसने आने से मना कर दिया। वो उस समय अपनी बड़ी बेटी को लेकर अपने मुल्क लौट आए और यहाँ आकर कसम खाई कि एक भी बांग्लादेशी को भारत में नहीं रहने देंगे। मुखबिर ने बाद में दूसरी शादी कर ली। आज उनके तीन बच्चे हैं। वही बड़ी बेटी की शादी हो गई है।

20 साल से वो बांग्लादेशियों को पकड़वाने का काम कर रहे हैं। आज उन्हें इतना अनुभव हो गया है कि वो किसी भी बांग्लादेशी नागरिक के बातचीत करने के ढंग से जान जाते हैं कि कौन बांग्लादेशी है, कौन नहीं। वो ऐसे लोगों को आसान से पहचान जाते हैं और फिर उनकी जानकारी पुलिस को दी जाती है। उन्होंने अब तक इस दिशा में कई पुलिस एजेंसियों के साथ काम किया है। वो कहते हैं कि सरकार को बांग्लादेशी घुसपैठ रोकने के लिए सख्त कानून बनाने की जरूरत है।