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विकिपीडिया ने छत्रपति संभाजी महाराज पर नहीं हटाया विवादित कंटेंट, 4 संपादकों पर केस: ऑपइंडिया के डोजियर में पढ़े इसका काला-चिट्ठा, समझें पूरा मामला

महाराष्ट्र साइबर सेल ने विकिपीडिया के 4 संपादकों के खिलाफ केस दर्ज किया है। इन पर मराठा शासक छत्रपति संभाजी महाराज से जुड़ा आपत्तिजनक कंटेंट न हटाने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, विकिपीडिया पर किए गए संपादन में ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ की गई थी, जिससे कानून-व्यवस्था की समस्या खड़ी हो सकती थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, महाराष्ट्र साइबर सेल ने इससे पहले अमेरिका स्थित विकिमीडिया फाउंडेशन को नोटिस भेजकर विवादित सामग्री हटाने की माँग की थी। लेकिन विकिपीडिया की ओर से कोई जवाब नहीं मिलने के बाद यह कानूनी कार्रवाई की गई।

बता दें कि फिल्म ‘छावा’ की रिलीज़ के बाद यह विवाद तेज हुआ। यह फिल्म संभाजी महाराज के जीवन पर आधारित है, जिसमें विक्की कौशल ने संभाजी महाराज की भूमिका निभाई है और रश्मिका मंदाना ने महारानी येसुबाई का किरदार निभाया है। फिल्म के चलते संभाजी महाराज से जुड़ी डिजिटल जानकारी की समीक्षा बढ़ गई, और विकिपीडिया पर गलत तथ्यों की शिकायतें सामने आईं।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने साइबर सेल को इस मामले में ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया कि भारत में ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके बाद सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 79(3)(b) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 168 के तहत विकिपीडिया संपादकों पर कार्रवाई की है।

सरकार का कहना है कि संभाजी महाराज मराठा इतिहास का अहम हिस्सा हैं, और उनके बारे में गलत जानकारी फैलने से सांप्रदायिक तनाव पैदा हो सकता है। पुलिस के मुताबिक, विकिपीडिया पर बिना विश्वसनीय स्रोतों के गलत जानकारियाँ जोड़ी गईं, जो ऐतिहासिक तथ्यों से मेल नहीं खातीं

महाराष्ट्र साइबर सेल ने विकिपीडिया को भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस उपाय करने की हिदायत दी है। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि अगर विकिपीडिया जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म ऐतिहासिक विकृति को बढ़ावा देते हैं, तो उनके लिए कड़े नियम बनाए जा सकते हैं।

चूँकि विकिपीडिया एक अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म है और इसका भारत में कोई सीधा कार्यालय नहीं है, इसलिए सरकार कानूनी और नियामक विकल्पों पर विचार कर रही है। इस मामले में विकिपीडिया और संपादकों की जिम्मेदारी तय करने के लिए आगे की जाँच जारी है।

ऑपइंडिया के डोजियर में विकिपीडिया का काला-चिट्ठा मौजूद

बता दें कि ऑपइंडिया ने भारत के खिलाफ विकिपीडिया की कार्यशैली को लेकर डोजियर प्रकाशित किया है। इस डोजियर में विकिपीडिया किस तरह से भारतीय हितों के खिलाफ काम कर रहा है, उसे विस्तार से बताया गया है। ऑपइंडिया ने ये भी बताया है कि किस तरह से विकिपीडिया खुद को स्वतंत्र और संपादकीय हस्तक्षेप से मुक्त बताता है, लेकिन वो है नहीं।

बता दें कि विकिमीडिया फाउंडेशन का दावा है कि विकिपीडिया केवल एक मध्यस्थ है, यह पाया गया कि विकिपीडिया “प्रकाशकों” के लिए निर्धारित सभी मानकों को पूरा करता है, जैसा कि आईटी दिशा-निर्देशों में परिभाषित है।

इसका अर्थ यह होगा कि विकिमीडिया फाउंडेशन को विकिपीडिया पर सभी सामग्री के लिए उत्तरदायी ठहराया जाना चाहिए और भारतीय कानूनों के अधीन रहने के लिए भारत में अपनी उपस्थिति स्थापित करनी चाहिए, जिसमें एफसीआरए, एनजीओ, आईटी दिशा-निर्देश, वित्तीय प्रकटीकरण मानक और अन्य कानून शामिल हैं।

हालाँकि अब विकिपीडिया के खिलाफ महाराष्ट्र में चल रही कानूनी कार्रवाई पर सभी की नजर रहेगी, क्योंकि ऑपइंडिया के डोजियर में जो बातें कही गई है, कुछ उसी तर्ज पर ये जाँच आगे बढ़ रही है। ऐसे में इस केस के दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।

हिंदू बच्चियों का रेप करने वाले ‘मुस्लिम गैंग’ पर फूटा वकीलों का गुस्सा, 4 दिन में दूसरी बार किया हमला: पुलिस से भी धक्कामुक्की, कर रहे फाँसी की माँग

राजस्थान के ब्यावर में अजमेर रेपकांड जैसी वारदात के सामने आने के बाद से लोगों में गुस्सा है। इस बीच, स्कूली छात्राओं से रेप-ब्लैकमेल कांड के आरोपियों को पुलिस ने अजमेर पॉक्सो कोर्ट में पेश किया, जहाँ वकीलों ने 4 दिन में दूसरी बार आरोपितों पर हमला किया। वकीलों ने आरोपितों को पीटने के क्रम में पुलिस वालों के साथ भी धक्कामुक्की की। वहीं, कोर्ट ने 4 आरोपितों को 5 दिन की रिमाँड पर भेज दिया है। वहीं, दूसरी ओर बिजयनगर (ब्यावर) में रेप-ब्लैकमेल कांड के आरोपितों को फाँसी की सजा देने की माँग करते हुए सर्व समाज संघर्ष समिति ने शहर को बंद करा दिया है। इस मामले में 7 आरोपितों समेत 3 नाबालिग भी आरोपित हैं।

भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, अजमेर पॉक्सो कोर्ट में पेशी के दौरान अजमेर पॉक्सो कोर्ट ने लुकमान उर्फ सोहेब (20), सोहेल मंसूरी (19), रिहान मोहम्मद(20) और अफराज (18) को 5 दिन की हिरासत में भेज दिया है, तो आशिक, कैफे संचालक श्रवण और करीम को 7 दिनों की रिमाँड पर भेजा है। इस पूरे मामले में करीम रेकी का काम करता था। इसके अलावा 3 अन्य आरोपित बाल सुधार गृह भेजे गए हैं। पुलिस ने आरोपितों के फोन, उनकी गाड़ियाँ भी जब्त की है। अब पुलिस आरोपितों के फोन, कैफे की सीसीटीवी की भी जाँच कर रही है।

4 दिन में दूसरी बार फूटा वकीलों का गुस्सा

बता दें कि इस मामले में पुलिस 18 फरवरी 2025 को आरोपितों को लेकर पहली बार कोर्ट में पहुँची थी, जहाँ अजमेर पॉक्सो कोर्ट में वकीलों ने उन पर हमला कर दिया था। और अब शुक्रवार (21 फरवरी 2025) को भी आरोपितों को देखते ही वकीलों का गुस्सा फूट पड़ा।

वकीलों ने ASI पर कार्रवाई के लिए एसपी को दी शिकायत

कोर्ट परिसर में वकीलों और पुलिस के बीच मामले में शुक्रवार (21 फरवरी 2025) को वकीलों ने एसपी से मुलाकात की। वकीलों ने एसपी वंदिता राणा को एएसआई भीम सिंह के खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा। वकील प्रदीप कुमार ने कहा कि कोर्ट में आरोपितों को लाने के दौरान एएसआई भीम सिंह ने गाली-गलौच की।

बता दें कि इस मामले में रिहान, सोहेन, लुकमान, अरमान, साहिल और अफराज के अलावा 3 नाबालिगों को भी पुलिस ने पकड़ा है। पुलिस ने कोर्ट में पेश कर इनकी रिमांड माँगी थी, जो खत्म हो गई। इसके बाद इन्हें दूसरी बार कोर्ट में पेश किया गया था। गौरतलब है कि ये आरोपित हिंदू लड़कियों को सस्ते मोबाइल फोन देकर अपने जाल में फंसाते थे और फिर उन्हें कैफे-होटल लेकर जाकर उनका रेप कर वीडियो बना लेते थे। इसके बाद उन्हें ब्लैकमेल कर सहेलियों को भी लाने के लिए कहते थे। यही नहीं, आरोपित इन लड़कियों से वीडियो वायरल करने के नाम पर उगाही भी करते थे।

इस घटना ने 1992 के अजमेर सेक्स स्कैंडल की याद ताजा कर दी है। लोग सख्त सजा की माँग कर रहे हैं, ताकि ऐसी वारदात दोबारा न हों। पुलिस का कहना है कि जाँच तेजी से चल रही है और बाकी संदिग्धों की तलाश जारी है। समाज में तनाव बढ़ता जा रहा है और लोग चाहते हैं कि पीड़ित लड़कियों को जल्द इंसाफ मिले।

‘रमजान में 4 बजे दे दो छुट्टी’ : कर्नाटक में कॉन्ग्रेस नेताओं ने मुस्लिम कर्मचारियों के लिए उठाई माँग, केंद्रीय मंत्री ने कहा- अस्वीकार्य, हिंदू भी तो रखते हैं उपवास

तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की सरकारों द्वारा रमज़ान के महीने में मुस्लिम सरकारी कर्मचारियों को शाम 4 बजे के बाद दफ्तर से छुट्टी देने की घोषणा के बाद, अब कर्नाटक में भी ऐसी ही माँग उठी है। कॉन्ग्रेस के कर्नाटक प्रदेश उपाध्यक्ष ए. आर. एम. हुसैन और सैयद अहमद ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि मुस्लिम कर्मचारियों को इफ्तार के लिए घर जाने की अनुमति दी जाए। इस मामले में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कॉन्ग्रेस नेताओं के कदम को अस्वीकार्य बताया है और कहा है कि हिंदू भी तो व्रत रखते हैं, फिर मुस्लिमों ने ऐसी कोई माँग भी नहीं है। उन्होंने इसे तुष्टिकरण की राजनीति से जोड़ा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कॉन्ग्रेस नेताओं द्वारा गुरुवार (20 फरवरी 2025) को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को लिखे पत्र में कहा गया कि रमज़ान के दौरान मुसलमान दिनभर रोजा रखते हैं, ऐसे में उन्हें इफ्तार के लिए घर जाने की सुविधा मिलनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार मुस्लिम कर्मचारियों को सुबह 9 बजे काम शुरू करने और 4 बजे दफ्तर छोड़ने की अनुमति दे सकती है, जिससे उनकी नियमित कार्यक्षमता बनी रहे। अभी कर्नाटक में सरकारी कर्मचारियों के लिए सुबह 10 से शाम 5 बजे तक काम करना अनिवार्य है।

इस मुद्दे पर हुसैन ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक अनुरोध है और अंतिम निर्णय सरकार के हाथ में है। उन्होंने कहा कि रमज़ान 2 मार्च से 30 मार्च तक चलेगा और इस दौरान मुस्लिम कर्मचारियों को नमाज़ और इफ्तार के लिए जल्दी छुट्टी देने से उनकी मजहबी आस्था का सम्मान होगा।

इस मामले में बीजेपी ने तीखा पलटवार किया है। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा, ‘यह (मुस्लिमों की छुट्टी) अस्वीकार्य है क्योंकि आज भी कई हिंदू कई दिनों तक उपवास रखते हैं और विभिन्न परंपराओं का पालन करते हैं। यह सही नहीं है। यहाँ तक कि मुस्लिम समुदाय ने खुद इसकी माँग नहीं की है। हम इस तरह की तुष्टिकरण की राजनीति से सहमत नहीं है।”

तेलंगाना सरकार पहले ही 17 फरवरी को आदेश जारी कर चुकी है, जिसमें सभी सरकारी मुस्लिम कर्मचारी, शिक्षक, अनुबंधित कर्मचारी, आउटसोर्सिंग स्टाफ, बोर्ड, निगम और सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों को 2 मार्च से 31 मार्च तक शाम 4 बजे कार्यालय छोड़ने की अनुमति दी गई है। कुछ ऐसा ही आदेश आंध्र प्रदेश सरकार ने भी दिया है।

‘PM मोदी मेरे बड़े भाई, मैं उनसे सीखने आया हूँ’ : SOUL लीडरशिप कॉन्क्लेव में बोले भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे, कहा-‘मैं स्टूडेंट, पीएम मोदी मेंटर’

नई दिल्ली में चल रहे SOUL लीडरशिप कॉन्क्लेव में भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना ‘बड़ा भाई’ बताया। उन्होंने कहा कि जब भी वो मोदी से मिलते हैं, उन्हें बहुत खुशी होती है और वो प्रेरित होकर अपने देश के लिए और मेहनत करने का मन बनाते हैं।

भूटान के पीएम शेरिंग तोबगे ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना मेंटर भी कहा और उनकी तारीफ में बोले कि SOUL यानी स्कूल ऑफ अल्टीमेट लीडरशिप पीएम मोदी की सोच का नतीजा है। ये एक ऐसा मंच है जो सच्चे लीडर्स को तैयार करने और भारत को मजबूत बनाने में मदद करेगा। भूटान के पीएम ने कहा कि पीएम मोदी का विजन और मेहनत हर बार उन्हें प्रभावित करती है।

भूटान के पीएम टोबगे ने हिंदी में कहा कि उनके लिए ये ‘शानदार मौका’ है, क्योंकि वे दुनिया के ‘सबसे बड़े लीडर’ पीएम मोदी से नेतृत्व सीखेंगे। उन्होंने कहा, “मैं नेतृत्व पर कोई ज्ञान देने नहीं आया, बल्कि एक स्टूडेंट की तरह सीखने आया हूँ। मुझे नरेंद्र मोदी जैसे महान लीडर से सीखने का मौका मिला है, जो मेरे लिए बड़े भाई की तरह हैं और हमेशा मेरा मार्गदर्शन करते हैं।”

टोबगे ने पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी समझ, हिम्मत और शानदार नेतृत्व से 10 साल में भारत को तरक्की की राह पर ला दिया। वहीं, पीएम मोदी ने भी इस मौके पर कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए नागरिकों का विकास बहुत जरूरी है। उन्होंने बताया कि अलग-अलग क्षेत्रों में अच्छे लीडर्स तैयार करना भी उतना ही अहम है।

मोदी ने SOUL को ‘विकसित भारत’ की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने ये भी कहा कि जल्द ही SOUL का बड़ा कैंपस तैयार हो जाएगा, जहाँ लीडरशिप की ट्रेनिंग और बेहतर तरीके से होगी। इस कॉन्क्लेव में दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के साथ अपने मजबूत रिश्ते और भारत-भूटान की दोस्ती को भी दिखाया।

‘मुस्लिमों को विलेन दिखाना घिसा-पिटा कॉन्सेप्ट’ : फिल्ममेकर अब्बास टायरवाला का बयान, बोले- ये सब बहुत बढ़ता जा रहा है

फिल्ममेकर और राइटर अब्बास टायरवाला ने बॉलीवुड में मुस्लिम किरदारों को विलेन दिखाने के बढ़ती ट्रेंड को लेकर बयान दिया है। अब्बास टायरवाला ने कहा कि अब उन्हें फिल्मों का ऐसा रुख देखकर शर्मिंदगी होती है। अब्बास ने ‘जाने तू या जाने ना’ जैसी हिट फिल्म डायरेक्ट की और ‘वॉर’, ‘2.0’, और ‘पठान’ जैसी फिल्मों के डायलॉग लिखे हैं।

लल्लनटॉप से बातचीत में उन्होंने कहा कि पहले फिल्में इंडिविजुअल फिल्ममेकर्स बनाते थे और उनके साथ काम करते वक्त फिल्मों का राजनीतिक नजरिया या विलेन का किरदार उन्हें परेशान नहीं करता था। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। उन्होंने साफ किया कि ये बात वो इंडियन मुस्लिम होने की वजह से नहीं, बल्कि एक राइटर के नजरिए से कह रहे हैं। उनका मानना है कि बार-बार मुस्लिम विलेन दिखाना अब पुराना और बोरिंग हो गया है।

अब्बास इन दिनों पवन कल्याण की तेलुगु पीरियड ड्रामा ‘हरि हर वीरा मल्लू’ के हिंदी डायलॉग पर काम कर रहे हैं। इस फिल्म में मुगल बादशाह औरंगजेब को विलेन के तौर पर दिखाया गया है। हाल ही में रिलीज हुई हिंदी फिल्म ‘छावा’ में भी औरंगजेब विलेन था। अब्बास ने कहा कि औरंगजेब को विलेन दिखाने में एक अहमियत होती है क्योंकि इतिहास में उनकी सच्चाई को नकारा नहीं जा सकता। लेकिन फिल्मों के लिए इस सच्चाई को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है। उनका कहना है कि जो हुआ, वो हुआ, इसे झुठलाया नहीं जा सकता।

अब्बास ने अपने करियर की शुरुआत 2001 में ‘लव के लिए कुछ भी करेगा’ से बतौर लिरिसिस्ट की थी। इसके बाद ‘दम’ और ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ जैसे फिल्मों में उनके गाने हिट हुए। फिर 2008 में ‘जाने तू या जाने ना’ से डायरेक्शन में कदम रखा, जो सुपरहिट रही। इसके बाद उन्होंने ‘झूठा ही सही’ डायरेक्ट की। हाल के सालों में वो स्क्रीनराइटर बन गए और ‘बैंग बैंग’, ‘वॉर’, ‘2.0’, और ‘पठान’ जैसी बड़ी फिल्मों के डायलॉग लिखे।

संभल हिंसा की आड़ में वकील विष्णु जैन की हत्या करना था मकसद: UP पुलिस के सामने गुलाम ने उगला सचा, बताया- पहले ही दिखा दी गई थी फोटो

संभल हिंसा मामले में पुलिस ने वांछित आरोपित गुलाम को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने स्वीकारा कि उसका मकसद वकील विष्णु जैन की हत्या करना था।

एसपी विश्नोई ने बताया कि गुलाम ने स्वीकारा है कि इस हिंसा के साजिशकर्ता शारिक साठा और उसके गिरोह को पहले राजनीति संरक्षण प्राप्त था, जिसकी वजह से वह संभल के दीपा सराय में काम कर लेते थे, लेकिन अब पुलिस की सख्ती की वजह से काम करना मुश्किल हो गया है।

गुलाम ने खुलासा किया कि हिंसा से पहले पहचान के लिए वकील जैन की तस्वीर दिखाई गई थी। उसके नेताओं ने उसे हिंसा का फायदा उठाकर जैन की हत्या करने का जिम्मा सौंपा था।

पुलिस ने गुलाम के पास से भारी मात्रा में हथियार बरामद किए हैं, जिनमें जर्मनी, ब्रिटेन और चेकोस्लोवाकिया जैसे देशों में बने हथियार शामिल हैं। आरोपित देश भर में हथियारों की तस्करी करता था।

पूछताछ में ये भी सामने आया है कि गुलाम का आपराधिक इतिहास काफी पुराना है और उसने हिंसा के दौरान हमलावरों को हथियार मुहैया कराए थे। गुलाम के खिलाफ संभल समेत कई जिलों में करीब 20 आपराधिक मामले दर्ज हैं।

एसपी विश्नोई ने बताया कि हिंसा से एक दिन पहले यानी 23 नवंबर 2024 को गुलाम की अपने बॉस साठा से बातचीत हुई थी। साठा को एक स्थानीय व्यक्ति ने संभल जामा मस्जिद के कोर्ट द्वारा आदेशित सर्वे के बारे में बताया था, जो 24 नवंबर 2024 को होना था। इसी दौरान उसे विष्णु जैन की तस्वीर भी दिखाई गई थी ताकि मौका मिलते ही उन्हें मारा जा सके।

बता दें कि संभल हिंसा मामले में अब तक 79 आरोपितों को गिरफ्तार किया है और बाकी आरोपितों की तलाश लगातार जारी है। 24 नवंबर को इन उपद्रवियों ने पूर्व साजिश के तहत सर्वे करने आई टीम पर हमला बोला था। उनपर पथराव किया था और गोलियाँ चलाई थीं।

अमेरिका को देख कनाडा की हेकड़ी ढीली, 7 ग्रुपों को करना पड़ा ‘आतंकी समूह’ घोषित: मंत्री बोले- सीमा सुरक्षा बढ़ाने पर करेंगे ₹7939 करोड़ खर्च

कनाडा ने सात लैटिन अमेरिकी अपराधी संगठनों को आतंकवादी समूह घोषित किया है। ये कदम फेंटेनाइल नाम की खतरनाक ड्रग की तस्करी रोकने के लिए उठाया गया है। इनमें मेक्सिको के सिनालोआ कार्टेल, जालिस्को न्यू जेनरेशन कार्टेल और ला नुएवा फमिलिया मिचोआकाना जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कनाडा के सार्वजनिक सुरक्षा मंत्री डेविड मैकगुइंटी ने कहा कि इससे ड्रग्स को कनाडा और अमेरिका की सड़कों पर आने से रोका जा सकेगा। ये घोषणा अमेरिका के आठ लैटिन अमेरिकी अपराधी समूहों को आतंकवादी संगठन घोषित करने के एक दिन बाद हुई।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से आने वाली फेंटेनाइल और अवैध प्रवास की शिकायत की थी। उन्होंने कनाडा पर 25% टैरिफ की धमकी दी थी, जो अब 4 मार्च तक टाल दी गई है। हालाँकि, अमेरिकी डेटा के मुताबिक, उत्तरी सीमा पर सिर्फ 1% फेंटेनाइल पकड़ी जाती है। फिर भी, कनाडा ने मदद का भरोसा दिया है। बाकी आतंकवादी संगठनों में मेक्सिको के कार्टेल डेल गोल्फो, कार्टेलेस यूनिदोस, वेनेजुएला का ट्रेन डे अरागुआ और अल सल्वाडोर में सक्रिय एमएस-13 शामिल हैं।

इस कदम से इन संगठनों की संपत्ति जब्त होगी। बैंक और ब्रोकरेज उनके खाते फ्रीज करेंगे, और उनकी गतिविधियों में हिस्सा लेना अपराध माना जाएगा। कनाडा की पुलिस आरसीएमपी के मुताबिक, इन कार्टेल्स का जाल कनाडा तक फैला है। कुछ कनाडाई लोग मेक्सिको और दक्षिण अमेरिका में ड्रग्स की तस्करी में शामिल हैं।

इस बीच, कनाडा ने फेंटेनाइल रोकने के लिए केविन ब्रॉसो को अपना ड्रग्स नियंत्रण अधिकारी बनाया है। साथ ही सीमा सुरक्षा के लिए 1.3 अरब कनाडाई डॉलर (लगभग 910 मिलियन अमेरिकी डॉलर, भारतीय मुद्रा में 7939 करोड़ रुपये) खर्च करने का ऐलान किया है, जिसमें नए हेलिकॉप्टर, तकनीक और कर्मचारी शामिल हैं।

इजरायल में 3 बसों में एक के बाद एक बम धमाका, देश भर में रुकी यातायात सेवा: हमास के चैनल ने ली हमले की जिम्मेदारी, 2 बम डिफ्यूज किए गए

इजरायल के तेल अवीव शहर में गुरुवार (20 फरवरी 2025) शाम को तीन बसों में धमाके हुए, जिससे पूरे देश में हलचल मच गई। धमाके बाट याम इलाके में हुए। हालाँकि, इन धमाकों में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। पुलिस ने इस हमले को आतंकी साजिश बताया है और दो अन्य बसों में रखे बमों को समय रहते निष्क्रिय कर दिया गया। इन धमाकों के थोड़ी ही देर में इजरायल ने वेस्ट बैंक में कुछ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया है।

घटना के बाद परिवहन मंत्री मीरी रेगव ने देशभर में बस, ट्रेन और लाइट रेल सेवाओं को अस्थायी रूप से रोकने का आदेश दिया, ताकि सभी सार्वजनिक वाहनों की सुरक्षा जाँच हो सके।

सोशल मीडिया पर वीडियो

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक बस में आग लगी हुई थी और पास खड़ी एक कार भी जल रही थी। तेल अवीव जिले के पुलिस प्रमुख हेम सर्गारोफ ने बताया कि धमाके टाइमर से जुड़े विस्फोटक उपकरणों की मदद से किए गए। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, इन बमों पर “Revenge Threat” लिखा हुआ था। हमास के तुल्कारेम बटालियन से जुड़ा टेलीग्राम चैनल ने इस हमले को ‘बदले की कार्रवाई’ बताया है। हालाँकि, उसने सीधे तौर पर इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है।

अलर्ट पर इजरायली सुरक्षा बल

इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मामले की जानकारी ली और सुरक्षा अधिकारियों के साथ बैठक की। रक्षा मंत्री योव गालांट ने सेना को वेस्ट बैंक में अपनी सक्रियता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इजरायली पुलिस और खुफिया एजेंसी शिन बेट हमले की जाँच कर रही हैं। संदिग्धों की तलाश में बड़े पैमाने पर सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।

यह हमला ऐसे समय हुआ है जब इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम पर बातचीत चल रही है। अब तक हमास ने 19 इजरायली बंधकों को रिहा किया है, जबकि बदले में 1,100 से अधिक फिलिस्तीनी कैदी छोड़े गए हैं। इस हमले के बाद इजरायल की प्रतिक्रिया पर दुनिया की नजर बनी हुई है।

गली-गली घूम रहे लव जिहादी, शहर दर शहर पसर रहे ‘मुस्लिम गैंग’: अजमेर से ब्यावर तक हिंदू बच्चियों के शिकार का मॉडल वही, कब जागेंगी एजेंसियाँ

साल 1992 का अजमेर सेक्स स्कैंडल और 2025 में ब्यावर में लड़कियाँ फँसाने पर बवाल। दोनों घटनाओं के बीच 33 साल का वक्त बीता है लेकिन इतने लंबे अंतराल के बावजूद अपराध करने के तरीके में कुछ नहीं बदला है। तब भी, एक समुदाय के निशाने पर हिंदू लड़कियाँ थीं और आज भी वहीं हुआ है। फर्क बस इतना है कि तब मामला खुलने में,अपराधी पकड़ने में समय लगा था, मगर इस बार कार्रवाई भी तेज है और लोग भी इसके प्रति जागरूक है

ब्यावर में हिंदू लड़कियों को फँसाने में 15 लड़के शामिल थे। इन्होंने इंस्टाग्राम के जरिए एक के बाद एक करके 5 स्कूली लड़कियों को अपने निशाने पर ले लिया था। सारी छात्राएँ 10वीं की थीं। इस गिरोह ने उन बच्चियों को पहले झाँसे में फँसाया, फिर होटल बुलाकर उनकी तस्वीरें निकालीं, उनका यौन शोषण किया और बाद में उन्हें धमकाने, उनसे पैसे वसूलने का और धर्मांतरण के लिए मजबूर करने का सिलसिला शुरू हुआ।

अगर एक लड़की अपने घर से पैसे चुराते हुए नहीं पकड़ी जाती और सवाल-जवाब होने पर वो सारी सच्चाई नहीं बताती तो शायद 5 लड़कियों की संख्या बढ़कर 50 होती और फिर 500।

ये आँकड़े बढ़ा-चढ़ाकर या कल्पना करके नहीं कहे जा रहे। अजमेर कांड की पीड़िताओं की गिनती ही इस संख्या तक पहुँचने का आधार हैं। अजमेर कांड के वक्त 100 से ज्यादा लड़कियों का रेप हुआ था और 250 तो ऐसी थीं जिनकी नग्न तस्वीरें जगह-जगह वायरल हुई थी। उस गिरोह में भी एक समुदाय के लोगों की सक्रियता ज्यादा पाई गई थी। पीड़ितों के परिजनों की हालत ये हो गई थी कि परिवार रातोंरात गायब हो रहे थे।

ब्रिटेन में फैला ग्रूमिंग गैंग का कारोबार भी इसी विचारधारा का प्रमाण था। उस गैंग ने तो चुन-चुनकर गैर-इस्लामी लड़कियों को निशाना बनाया था और उन्हें कचरा कहते हुए उनके साथ ऐसी वीभत्सता की थी जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।

ब्यावर में भी शायद स्थिति ऐसी हो जाती अगर समय रहते ये मामला नहीं खुलता और पुलिस तक बात नहीं पहुँचती।

दरअसल छोटी उम्र की लड़कियों को लालच देकर फँसाना हमेशा से ऐसे गिरोहों के लिए आसान रहा है। कारण कई होते हैं। छोटे उम्र में लड़कियाँ नहीं समझ पातीं कि ऐसी स्थिति में फँसने पर उन्हें डील कैसे करना है।

एक बार झाँसे में आने बाद वो उस दलदल में इसलिए और अंदर धँसती जाती हैं क्योंकि उन्हें समाज में बदनामी और परिवार की प्रतिक्रिया दोनों का डर होता है। वे सामाजिक दबाव के कारण, अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं कर पातीं और अकेलेपन का सामना करती हैं। इसी मनोस्थिति का फायदा ये गिरोह उठाता है और लड़कियों को धमकाने, ब्लैकमेल करने, उनका यौन शोषण करना जारी रखता है। बातें अगर खुलती भी हैं तो भी कई बार कई मामलों को लोक-लाज का सोचकर दबाने का काम होता है। मगर इसका असर उन पीड़िताओं पर क्या पड़ता है इस पर कोई विचार नहीं करता।

आज सरकारें ऐसे दरिंदों को सजा देने के लिए कई कानून ला चुकी हैं। धर्मांतरण विरोधी कानून से लेकर लव जिहाद के खिलाफ तक कानून आ चुका है, लेकिन सवाल फिर वही है कि जब ऐसी घृणित मानसिकता के लोग गली-गली में बसे हैं तब इनसे कैसे लड़ा जाएगा। इनका ठिकाना सिर्फ राजस्थान के ब्यावर नहीं, अजमेर से लेकर ब्रिटेन का रॉदरहैम तक है। अजीब बात ये है कि एक तरफ इनका पैटर्न जानने के बावजूद भी लड़कियाँ सचेत नहीं हो रहीं और दूसरी तरफ ये अपना घिनौना खेल सोशल मीडिया के माध्यम से भी खेलने लगे हैं। इनकी बढ़ती रफ्तार देख जरूरत है अब जाँच एजेंसियाँ जागें और समय से पहले इनपर शिकंजा कसा जाए।

हाई कोर्ट जज पर आरोप- निजी कंपनी के पक्ष में फैसले के लिए सिफारिश की, पर जाँच से पहले सुप्रीम कोर्ट में लोकपाल के ‘अधिकार क्षेत्र’ पर लड़ाई: चिंताजनक बता केंद्र सरकार से माँगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने लोकपाल के एक आदेश पर रोक लगा दी है। लोकपाल ने कहा था कि वह हाई कोर्ट के जजों के खिलाफ दर्ज की गई शिकायत पर सुनवाई कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ये बहुत चिंताजनक बात है। सुप्रीम कोर्ट के इस रुख का समर्थन केंद्र सरकार ने भी किया है।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस अभय ओका और जस्टिस सूर्य कान्त की एक बेंच ने लोकपाल वाले मामले पर गुरुवार (20 फरवरी, 2025) को सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने इसे काफी परेशान करने वाला बताया और केंद्र सरकार को विषय में नोटिस भेजा है।

केंद्र सरकार की तरफ से इस मामले में मौजूद सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट के रुख का समर्थन किया है। उन्होंने कहा है कि हाई कोर्ट का हर एक जज अपने आप में संस्था है। उन्होंने कहा है कि कोई भी हाई कोर्ट या उसके जज कभी भी लोकपाल कानून, 2013 के दायरे में नहीं आ सकते।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में लोकपाल की कार्रवाई पर भी रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने लोकपाल की कार्रवाई के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेते हुए एक मामला चालू किया था। केंद्र सरकार के जवाब के बाद इस मामले में सुनवाई होगी और लोकपाल के अधिकार क्षेत्र पर बात होगी।

सुप्रीम कोर्ट ने यह मामला 27 जनवरी, 2025 के एक लोकपाल के फैसले पर चालू किया है। लोकपाल ने 27 जनवरी, 2025 को कहा था कि वह हाई कोर्ट के जजों के खिलाफ आई शिकायतों पर सुनवाई कर सकता है। लोकपाल ने कहा था कि उसके पास यह अधिकार क्षेत्र है क्योंकि हाई कोर्ट के जज ‘सरकारी कर्मचारी’ की परिभाषा के दायरे में आते हैं।

वर्तमान में भारत के लोकपाल जस्टिस AM खानविलकर हैं। उन्होंने ही लोकपाल सदस्यों के साथ मिलकर हाई कोर्ट के जजों के विषय में यह फैसला दिया था। लोकपाल ने यह फैसला हाई कोर्ट के एक जज के विरुद्ध मिली 2 शिकायतों पर दिया था।

हाई कोर्ट के जज पर आरोप था कि उसने एक जिला जज और एक हाई कोर्ट के दूसरे जज पर अपना प्रभाव जमाया। यह दबाव एक निजी कम्पनी के पक्ष में फैसला देने के लिए डाला गया था। शिकायत के अनुसार, इस कम्पनी के लिए पहले जज ने वकील रहते हुए काम किया था।

जज के खिलाफ मिली शिकायत इस आचरण पर की गई शिकायत को लेकर लोकपाल ने पहले अधिकार क्षेत्र तय करने को लेकर फैसला दिया था और शिकायत को CJI संजीव खन्ना को भेज दिया था। लोकपाल ने इससे पहले जनवरी, 2025 में ही सुप्रीम कोर्ट के जज और CJI के खिलाफ शिकायत सुनने से इनकार कर दिया था और कहा था कि वह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।