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मौलाना खैरुल इस्लाम के भीड़ भरे जनाजे में शामिल होने पर कॉन्ग्रेस सांसद और AIUDF के अमीनुल इस्लाम पर FIR दर्ज

असम के नगाँव ज़िले में मौलाना खैरुल इस्लाम के अंतिम संस्कार के दौरान हजारों की संख्या में लोग जुटे। जिसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए इस अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले कॉन्ग्रेस सांसद और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) विधायक अमीनुल इस्लाम के खिलाफ एफ़आईआर दर्ज़ की है।

इसकी जानकारी नगाँव के एसपी ने दी। उन्होंने बताया कि मौलाना खैरुल इस्लाम के अंतिम संस्कार के दौरान लॉकडाउन गाइडलाइन के उल्लंघन के मामले में कॉन्ग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के विधायक अमीनुल इस्लाम के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। वे इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।

गौरतलब है कि अमीनुल इस्लाम के पिता खैरुल इस्लाम का 2 जुलाई को लंबी बीमारी के बाद देहांत हो गया था। खैरुल इस्लाम ने अखिल भारतीय जमीयत उलेमा के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया और इसे पूर्वोत्तर भारत में “आमिर-ए-शरीयत” माना जाता है। सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें वायरल हो गई, जिसमें सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियाँ उड़ते हुए देखा जा सकता है। साथ ही किसी ने मास्क भी नहीं लगाया था।

अमीनुल इस्लाम ने ही अपने पिता के अंतिम संस्कार की तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की थीं। इन तस्वीरों में भारी भीड़ दिखाई दे रही थी। प्रशासन का मानना है कि अंतिम संस्कार में लगभग दस हजार लोग शामिल हुए थे।

कोरोना वायरस का प्रकोप देश में थमने का नाम नहीं ले रहा है। रोजाना हजारों की संख्या में संक्रमित मामले सामने आ रहे हैं। वहीं सैकड़ों की संख्या में मौत हो रही हैं। संक्रमण से बचने के लिए लोग सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन कर रहे है ऐसे में किसी भी अंतिम संस्कार में 20 से ज्यादा लोगों को जाने की इजाजत नहीं है। लेकिन असम के नगांव ज़िले में मौलाना खैरुल इस्लाम के अंतिम संस्कार के दौरान हजारों की संख्या में लो जुट थे। जिसके बाद कोरोना वायरस के संक्रमण के फैलने के खतरे को देखते हुए तीन गाँवों को सील कर दिया गया।

वहीं Legal Rights Protection Forum नाम के एक NGO ने असम के राज्यपाल को पत्र लिखकर धींग निर्वाचन क्षेत्र के विधायक अमीनुल इस्लाम के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की थी।

उल्लेखनीय है कि अमीनुल इस्लाम को 7 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था। उन पर कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिए सरकार के प्रयासों को सांप्रदायिक रूप देने का आरोप लगाया गया था।

ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के विधायक ने एक वीडियो क्लिप के माध्यम से असम के लोगों को संबोधित करते हुए दावा किया था कि निजामुद्दीन मरकज से लौटने वालों में से किसी का भी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं आया था। अमीनुल इस्लाम ने यह भी कहा था कि कोरोना वायरस के लिए आइसोलेशन वार्ड, डिटेंशन सेंटर की तरह हैं और यह सरकार की एक खास समुदाय के लोगों को मारने की साजिश है।

SHO विनय तिवारी और बीट इंचार्ज केके शर्मा गिरफ्तार: ‘विकास दुबे एनकाउंटर’ में साथियों को मरता छोड़ भागे थे

8 पुलिसकर्मियों की बेरहमी से हत्या करने वाले खूंखार गैंगस्टर विकास दुबे की मदद और दबिश की मुखबरी करने के आरोपों में निलंबित चल रहे चौबेपुर के पूर्व SHO विनय तिवारी को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं सब इंस्पेक्टर केके शर्मा की भी गिरफ्तारी हुई है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार विकास दुबे को भगाने के पीछे विनय तिवारी और केके शर्मा का हाथ बताया जा रहा है। इन लोगों ने ही दबिश के दौरान पुलिस की जान खतरे में डाली थी। और उन्हें मरता हुआ छोड़ कर भाग गए थे।

पुलिस अधिकारियों के गिरफ्तारी की पुष्टि आईजी मोहित अग्रवाल ने की है। गैंगस्टर विकास दुबे को बचाने में चौबेपुर थाने के एसएचओ विनय तिवारी और अन्य पुलिसकर्मियों पर संलिप्तता के आरोप लगने के बाद इसकी जाँच के आदेश दिए गए थे।

गौरतलब है कि कुख्यात अपराधी को पकड़ने के लिए एसटीएफ, क्राइम ब्रांच और जिला पुलिस ज़मीन आसमान एक कर जाँच पड़ताल में जुटी है। वहीं पुलिस इस बात की भी आशंका जता रही थी कि महकमे के ही किसी शख्स ने इस बात की मुखबिरी की है। इसी सिलसिले में आईजी मोहित अग्रवाल ने चौबेपुर थाना प्रभारी विनय तिवारी को सस्पेंड कर दिया गया था।

पुलिस ने इन्वेस्टिगेशन के चलते 2200 नम्बरों को सर्विलांस पर लगाया है। जिससे मुठभेड़ रात तक मतलब 24 घंटे के भीतर विकास ने जिस भी किसी शख्स से बातचीत की हो उसका पता लगाया जा सके। रेड से पहले विकास गुप्ता को इसकी पल-पल की जानकारी मिल रही थी। काल डिटेल में कई पुलिसकर्मियों के भी नम्बर सामने आए थे। जिसके चलते चौबेपुर के दरोगा, सिपाही और होम गार्ड की तहकीकात की जा रही थी।

दबिश की सूचना को लीक करने का शक थानाध्यक्ष विनय तिवारी पर गया था। यहाँ तक इलाके की पूरी जानकारी होने के बावजूद दबिश के समय विनय तिवारी पीछे चल रहे थे और गोलीबारी के समय वे जेसीबी के पीछे छुप गए थे। और वहाँ से बच कर निकल गए थे। जिससे इस बात का साफ पता चलता है कि विनय तिवारी को पहले से ही इस हमले की जानकारी थी।

खबर की जानकारी होने की वजह से विकास ने अपने आदमियों को पहले से ही सेट कर लिया था। उसे पता था कि कितनी संख्या में पुलिस कितने बजे तक आ रही है। पुलिस फ़ोर्स की जानकारी मिलने के बावजूद वह भागा नहीं। उसके गिरोह के लोग इलाके में घुसने वाले रास्तों की छतों पर पहले से खड़े होकर पुलिस का इंतजार कर रहे थे। वे सभी अत्याधुनिक हथियारों से लैस थे। और जैसे ही पुलिस इलाके के नज़दीक पहुँची तो उनलोगों ने अंधाधुंध गोलियों की बौछार कर दी।

उल्लेखनीय है कि विकास दुबे का मामला धीरे धीरे अब पुलिस अफसरों पर भी भारी पड़ रहा है। मंगलवार को योगी सरकार ने एसटीएफ के डीआईजी अनंतदेव तिवारी का तबादला कर दिया। साथ ही तीन अन्य अधिकारियों को भी इधर से उधर किया गया है।

दूसरी ओर विकास दुबे की मदद और दबिश मुखबरी जैसे कई गंभीर आरोपों का सामना कर रहे चौबेपुर थाने के सभी 68 पुलिसकर्मी लाइन हाजिर कर दिए गए हैं। मंगलवार शाम एसएसपी दिनेश कुमार ने ये कार्रवाई की है। कानपुर के चौबेपुर थाने में पोस्टेड सभी सब इंस्पेक्टर, कॉन्स्टेबल और हेड कॉन्स्टेबल का पुलिस लाइंस में ट्रांसफर कर दिया गया है। वहीं अब थाने में नए पुलिस कर्मियो की तैनाती की गई है।

बेटों ने अपनाया ईसाई धर्म तो पिता ने संपत्ति से बेदखल कर थाने में दर्ज कराया मुकदमा, कहा- नहीं देंगे फूटी कौड़ी

झारखंड मे लगातार बढ़ रही धर्म परिवर्तन की घटनाओं के खिलाफ विश्व हिंदू परिषद, झारखंड ने अभियान चलाया हुआ है। एक बार फिर झारखंड में लातेहार के एक गाँव से धर्म परिवर्तन की खबर सामने आई है, जहाँ के पाँच युवकों ने 23 सदस्यों के साथ अपने पिता के विरोध के बाद भी धर्म परिवर्तन कर लिया। इसकी जानकारी मिलते ही पिता ने अब अपने बेटों को संपत्ति से बेदखल करते हुए थाने में धर्म परिरवर्तन कराने वाले के खिलाफ में मुकदमा दर्ज कराया है।

इससे पहले धर्म परिवर्तन करने वाले बेटों के पिता ने एक स्वर में धर्म परिवर्तन करने पर उन्हें संपत्ति से बेदखल करने की चेतावनी दे थी। साथ ही विवाद बढ़ने पर पुलिस ने हस्तक्षेप कर दोनों को शांत करा दिया, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ और इसके बाद ही 23 सदस्यों के साथ हिदू से ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया।

जागरण की खबर के मुताबिर 5 जुलाई को झारखंड के लातेहार जिले के कुलगड़ा गाँव में अनुसूचित जा‍ति के 5 लोग, रंजीत भुइयां पुत्र शंकर भुइयां, लल्लू भुइयां पुत्र करीमन भुइयां, जोगिंद्र भुइयां पुत्र लंगरू भुइयां, राजेंद्र भुइयां व सीटू भुइयां अपने परिवार के साथ धर्म परिवर्तन करने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन आखिर समय में जब इसकी जानकारी इन लोगों के पिता को हुई तो उन्होंने धर्मांतरण नहीं करने और अपने पूर्वजों को नहीं छोड़ने की अपील की, लेकिन इसके बाद भी वे नहीं माने तो उन्होंने अपने बच्चों से धर्म बदलने पर अपनी संपत्ती से बेदखल करने की चेतावनी दे डाली।

इसके बाद बाप-बेटों के बीच विवाद गहरा गया और मामले को सुलझाने पहले गाँव में 5 जुलाई को पंचायत बुलाई गई। जब बैठक में कोई हल नहीं निकला तो मौके पर पुलिस बुलानी पड़ी, लेकिन इसके बाद भी लोग अपनी मर्जी से धर्म परिवर्तन करने की बात पर अड़े रहे।

वहीं धर्म परिवर्तन की तैयारी करने वाले लोगों के पिता का आरोप है कि भूसुर गाँव के एक व्यक्ति द्वारा हमारे बटों को प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है। इसलिए हमने निर्णय लिया है कि यदि हमारे बेटे ने धर्म परिवर्तन किया तो उन्हें पैतृक संपत्ति से बेदखल कर दिया जाएगा।

सूचना पर गाँव पहुँची पुलिस ने दोनों ओर से पूरा मामला सुनने के बाद सभी से कानून को हाथ में नहीं लेने की बात करते हुए कहा कि अगर किसी को कोई तकलीफ है तो न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लें। इसके बाद पुलिस दोनों पक्षों को समझाकर वापस लौट गई।

अब विश्व हिंदू परिषद पलामू, गुमला विभाग के संगठन मंत्री कन्हैयालाल के मुताबिक कुल मिलाकर पाँच युवकों के साथ उनकी पत्नी और उनके बच्चे सहित कुल 23 हिंदू सदस्यों ने अपने पिता के विरोध के बाद भी क्रिश्चियन धर्म अपना लिया है। इसके बाद पिता शंकर भुईयां ने लातिहार सदर थाने में धर्म परिवर्तन कराने वाले आर्सेल तिर्की के खिलाफ में जबरन धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया है और साथ ही पूर्व में दी गई चेतावनी के अनुसार बेटों को संपत्ति से बेदखल करने की तैयारी में लग गए हैं।

पिता शंकर भुईयां द्वारा थाने में दर्ज कराई शिकायत की कॉपी

इससे पहले झारखंड धनबाद झरिया पुनर्वास के नाम पर दो दर्जन परिवारों का धर्म परिवर्तन कर उन्हें ईसाई बना दिया गया। ये मामला सामने आने के बाद हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों ने इसका जमकर विरोध किया और प्रशासन को शिकायत दर्ज कराई थी।

दरअसल, 22 जून को झरिया के विस्थापितों के लिए झरिया विहार के नाम से बसाए गए बेलगड़िया टाउनशिप में धर्म परिवर्तन को लेकर जमकर बवाल हुआ था। स्थानीय लोगों ने यहाँ नवनिर्मित चर्च को घेर घंटों हंगामा किया। चर्च के ऊपर लगे धार्मिक चिन्ह (क्रॉस) को भी लोगों ने तोड़ दिया था।

‘न्यूज़लॉन्ड्री’ के इन्वेस्टर, #MeToo आरोपित महेश मूर्ति पर लिख सकेगा मीडिया, पीड़िताएँ: कोर्ट ने रद्द किया स्टे

दिल्ली उच्च न्यायालय ने न्यूज़लॉन्ड्री के इन्वेस्टर महेश मूर्ति पर लगे यौन उत्पीड़न (MeToo) के मामले पर एक बड़ा फैसला सुनाया है। दिल्ली उच्च न्यायालय ने अप्रैल 2017 के अंतरिम आदेश को रद्द कर दिया है जिसके तहत तमाम समाचार समूहों पर महेश मूर्ति पर लगाए गए आरोपों से संबंधित ख़बरें प्रकाशित करने पर रोक लगाई गई थी। न्यायालय ने आरोप लगाने वाली महिलाओं को इस मामले से जुड़ी ख़बरें न प्रकाशित करने के आदेश पर रोक लगा दी है।

खबरों के मुताबिक़ सिंगल जज बेंच के मुखिया जयंत नाथ ने इस मामले पर आदेश जारी किया। सोमवार के दिन आदेश जारी करते हुए उन्होंने कहा, तथ्यों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि बचाव पक्ष (महेश के खिलाफ लिखने वाले) के अनुसार 1, 2, 15, 16 (चारों अभियुक्त) का अनुभव शिकायतकर्ता के साथ अत्यंत अप्रिय या शायद उससे भी ज़्यादा बुरा रहा है। बचाव पक्ष के तथ्यों को मद्देनज़र रखते हुए उन्हें पब्लिक डोमेन (सामाजिक विमर्श के मंच) में जगह मिलनी चाहिए।’

महेश मूर्ति जो बतौर वेंचर कैपिटलिस्ट उद्यमों में पूँजी लगाने के लिए जाने जाते हैं और घोर वामपंथी समाचार समूह न्यूज़लॉन्ड्री के निवेशक हैं। उन्होंने समाचार समूह न्यूज़ 18 के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है, जिसमें उनका आरोप है न्यूज़ 18 उन पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों की कवरेज कर रहा है।

महेश मूर्ति ने मानहानि का यह मुकदमा रश्मि बंसल, पूजा चौहान और मीरा (बदला हुआ नाम) पर भी दायर किया है। जिन्होंने महेश द्वारा किए गए ज़्यादती भरे व्यवहार पर खुल कर बात की थी। महेश मूर्ति द्वारा दायर किए गए मानहानि मुक़दमे में कुछ पत्रकारों और कई मशहूर प्रकाशन जैसे डेक्कन क्रोनिकल, योर स्टोरी और शी द पीपल से जुड़े लोगों का भी नाम शामिल था। न्यायाधीश जयंत नाथ ने यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा नहीं कहा जा सकता है कि बचाव पक्ष ने शिकायत कर्ता (महेश) का अपमान करने के लिए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया है। 

न्यायालय ने मूर्ति के उन दावों को भी सिरे से खारिज किया है जिसमें उन्होंने यह कहा था कि शिकायत करने वालों ने निजी दुर्भावना के चलते इस तरह के आरोप लगाए हैं। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि महेश मूर्ति ने उनके वेंचर में पूँजी नहीं लगाई थी। इसके अलावा न्यायालय ने यह भी कहा कि महेश द्वारा दायर की गई याचिका में कई घटनाओं का उल्लेख बहुत बेतरतीब तरीके से था। और तो और वह एक ही मामले में सारे आरोपों से राहत चाहते थे। 

वहीं दूसरी तरफ महेश मूर्ति का यह कहना है कि तमाम समाचार समूहों ने उनके विरोध में ऐसी ख़बरें चलाई जैसे उन्हें युवा महिला उद्यमियों और महिलाओं के साथ उत्पीड़न की आदत हो। उस तरह की ख़बरों से आम जनता में उनको लेकर बहुत गलत संदेश जाएगा जो की असलियत में सही नहीं है। महेश ने उन पर आरोप लगाने वाली महिलाओं को और उन पर लगाए गए आरोपों पर खबर लिखने वालों को अपने मुक़दमे में एक ही श्रेणी में रखा था। इसके अलावा महेश ने अपने दो पार्टनर्स पर भी मुकदमा दर्ज कराया है। 

न्यायालय का यहाँ तक कहना है कि बचाव पक्ष के पास अभिव्यक्ति की आज़ादी का अधिकार है। अगर मामलों की सुनवाई के बाद बचाव पक्ष की दलीलें और तथ्य गलत साबित होते हैं तब शिकायत कर्ता हानि का भुगतान करने के लिए स्वतंत्र होंगे। मानवाधिकार कार्यकर्ता और अधिवक्ता दीपिका नारायण भारद्वाज ने आदेश का स्वागत करते हुए ट्वीट किया। ट्वीट में उन्होंने कहा महेश मूर्ति के झूठे मुक़दमे के चलते उनके अलावा बचाव पक्ष के तमाम लोग कुछ कह या लिख नहीं पा रहे थे लेकिन अब ऐसा नहीं है। 

साल 2017 के दौरान 6 महिलाओं ने न्यूज़लॉन्ड्री के मुखिया महेश मूर्ति पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। जिसकी कवरेज ऑपइंडिया समेत कई समाचार समूहों ने की थी। इन 6 महिलाओं में से 3 ने सामने आकर आरोपों का ज़िक्र किया और अपने अनुभव साझा किए। सारे आरोपों के मामले साल 2003 से 2016 के बीच के थे। तकनीकी वेबसाइट फैक्टर डेली के फाउंडर ने ट्वीट की शृंखला में महेश मूर्ति पर आरोप लगाया था। 

तमाम रिपोर्ट्स में महेश मूर्ति पर लगाए गए आरोपों के मामले से जुड़ी कई जानकारी प्रकाशित हुई। जिसमें यह लिखा था कि रश्मि बंसल नाम की लेखक और एक महिला पत्रकार के साथ उन्होंने ज्यादती और दुर्व्यवहार किया था। इसमें संदेश, मौखिक उत्पीड़न और शारीरिक उत्पीड़न का भी उल्लेख था। महेश मूर्ति ने दिल्ली की एक प्रशासनिक अधिकारी को कुछ ऐसा संदेश भी भेजा था 

 “Hey babe, one’s supposed to ce।ebrate Diwali by b।owing a pataka. So can I go down on you p।ease? :-)”

इसके अलावा महेश मूर्ति ने एक डिजिटल मीडिया कंपनी की कर्मचारी को साल 2006 में यह संदेश भेजा था

 “Are you a virgin”   

दक्षिण एशिया, बांग्लादेश के लोगों में कोरोना का अधिक खतरा: निएंडरथल के साथ यौन संबंध रखने वाले प्राचीन मनुष्यों का मिला डीएनए

न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक एक नए अध्ययन में पता चला है कि 60,000 साल पहले निएंडरथल मानवों के जीनोम में गंभीर कोरोना वायरस पाया गया है। शोधकर्ताओं के अनुसार, 60,000 साल पहले हुआ इंटरब्रैडिंग प्रभाव आज भी असरकारी है। उन्होंने पता लगाया कि जीनोम का एक विशेष खंड, जोकि क्रोमोसोम 3 पर छह जीनों तक फैलने वाला है, कोरोना वायरस के चलते गंभीर बीमारी की वजह हो सकता है।

यह अध्ययन अस्पताल में भर्ती 3,199 कोरोना रोगियों और कण्ट्रोल रोगियों के आँकड़ों के आधार पर किया गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि पूरे मानव इतिहास में विशेष रूप से यह जीनोम खंड बड़े पैमाने पर विरासत में मिला है। इसके अलावा अध्ययन से यह भी पता चला है कि 63 प्रतिशत बांग्लादेशियों में इसकी कम से कम एक कॉपी पाई जाती है।

49.4 किलोबेसेस (kilobases) आकार का यह जीनोम सेगमेंट हालाँकि दुनिया के अन्य हिस्सों में उतना नहीं पाया जाता है जितना एशिया, खासकर बांग्लादेश में पाया जाता है। यह केवल आठ प्रतिशत यूरोपीय और चार प्रतिशत पूर्वी एशियाई लोगों में पाया जाता है। दिलचस्प बात यह है कि यह विशेष जीन अफ्रीकियों में मौजूद नहीं है।

शोधकर्ता यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि कोरोना वायरस कुछ लोगों के लिए दूसरों की तुलना में अधिक खतरनाक क्यों है? नए आँकड़ों से पता चलता है कि इस बीमारी और क्रोमोसोम 3 खंड के बीच एक मजबूत संबंध है। जिन लोगों में इन जीनों की दो प्रतियाँ पाई जाती हैं, वे उन लोगों की तुलना में गंभीर बीमारी से तीन गुना अधिक पीड़ित होते हैं, जिनमें यह नहीं पाया जाता है।

क्रोमोसोम 3 निएंडरथल से आधुनिक मनुष्यों के तक गया

स्वीडन में कारोलिंस्का इंस्टीट्यूट के एक आनुवंशिकीविद् ह्यूगो ज़ेबर्ग, जो प्रकाशित होने जा रहे अध्ययन में सह-लेखक हैं, के मुताबिक करीब 60,000 साल पहले यूरोप, एशिया और ऑस्ट्रेलिया में आधुनिक मानवों के कुछ पूर्वज बसे थे। इन लोगों ने निएंडरथल का सामना किया और उनके साथ संबंध बनाए। निएंडरथल डीएनए के रूप में हमारे जीन पूल में प्रवेश किया और यह पीढ़ियों तक फैलता गया, जबकि निएंडरथल विलुप्त हो गए।

हालाँकि, निएंडरथल जीन आधुनिक मनुष्यों के लिए हानिकारक साबित हुए और लोगों के स्वास्थ्य पर बोझ बन गए, साथ ही इससे बच्चे पैदा करना भी कठिन हो गया। परिणामस्वरूप विकास के चलते निएंडरथल जीन विलुप्त होने लगे और हमारे जीन पूल से भी गायब होने लगे, लेकिन कुछ जीन एक विकासवादी बढ़त बनाते हुए काफी सामान्य हो गए हैं। वैज्ञानिक अनुमान लगाते हैं कि इसने कुछ विशेष क्षेत्रों में वायरस के खिलाफ एक बेहतर प्रतिरक्षा प्रदान की है।

मई में जर्मनी के लीपज़िग में मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट के डॉ ज़ेबर्ग और उनके सह-लेखक डॉ पाबो और डॉ जेनेट केलो को पता चला कि कम से कम एक-तिहाई यूरोपीय महिलाओं में निएंडरथल हार्मोन रिसेप्टर है। यह बढ़ी हुई प्रजनन क्षमता और कम गर्भपात से जुड़ा हुआ है।

जब डॉ ज़ेबर्ग ने निएंडरथल जीनोम के एक ऑनलाइन डेटाबेस में क्रोमोसोम 3 को देखा, तो उन्होंने पाया कि जो संस्करण लोगों में गंभीर कोरोना वायरस के जोखिम को बढ़ाता है। वही संस्करण उन निएंडरथल में पाया जाता है, जो 50,000 साल पहले क्रोएशिया में रहते थे।

अब तक हुए अनुसंधान में यह बात सामने आई है कि इस वायरस का महिलाओं की तुलना में पुरुषों को अधिक खतरा है और युवा लोगों की तुलना में बूढ़े लोगों को अत्यधिक खतरा होता है। जोखिम की स्थिति पर उनके प्रभाव के बारे में जानने के लिए अब सामाजिक परिस्थितियों और यहाँ तक ​​कि रक्त के प्रकारों का अध्ययन किया जा रहा है।

वैज्ञानिकों ने कहा है कि यह भी संभव है कि निएंडरथल का जीनोम खंड, जिसने हजारों साल पहले वायरस से प्रतिरक्षा प्रदान की थी, अब नए कोरोना वायरस के खिलाफ ‘ओवररिएक्शन’ शुरू कर रहा है।

यह बात भी सामने आई है कि कोरोना वायरस के जिन गंभीर मामलों में फेफड़ों के नुकसान के साथ बढ़ी हुई सूजन भी मिलती है, यह कुछ व्यक्तियों में उत्तेजित प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के कारण होते हैं। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि यूनाइटेड किंगडम में कोरोना वायरस के कारण बांग्लादेशी वंश के लोगों में अधिक मृत्यु दर दर्ज की जा रही है।

शी जिनपिंग को उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री ने भेजी रामायण, कहा- विस्तारवाद ने ही किया था रावण का सर्वनाश!

उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को रामायण की प्रति भेजी है। ऐसा करके उन्होंने चीन को संदेश दिया है कि वह अपनी विस्तारवादी नीति से बाज आ जाएँ क्योंकि ऐसी ही नीति के कारण रावण का सर्वनाश हुआ था। सतपाल महाराज ने कमला सुब्रमणियम की अंग्रेजी में लिखी प्रति चीन राष्ट्रपति को भेजी है।

उत्तराखंड सरकार के मंत्री ने गलवान घाटी में भारतीय सैनिकों पर हुए हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि गलवान घाटी में जिस प्रकार से चीन सैनिकों ने अपनी विस्तारवादी सोच के चलते निहत्थे भारतीय जवानों पर हमला बोला, वो बहुत निंदनीय है। सतपाल महाराज का कहना है कि वो राष्ट्रपति शी जिनपिंग को प्राचीन ग्रंथ रामायण भेजकर ये बताना चाहते हैं कि दस सिर वाले रावण का इसी सोच के कारण क्या हश्र हुआ था।

वे कहते हैं कि उन्हें आशा है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग रामायण से शिक्षा लेकर रावण की विस्तारवादी सोच से हुए उसके पतन से कुछ सबक लेंगे। उन्होंने कहा कि उनका चीन को यह भी संदेश है कि चीन की जनता का जो भारी भरकम पैसा वह अपनी सैनिक शक्ति बढ़ाने पर खर्च कर रहे है। उसे उस बीमारी की रोकथाम पर खर्च करें जिससे आज पूरी दुनिया त्रस्त है।

उन्होंने बताया कि भारत की विस्तारवादी सोच नहीं है। भारत ने बांग्लादेश को जीतने के बावजूद उसपर अपना अधिकार छोड़ दिया। जबकि चीन का रवैया प्रारंभ से ही विस्तारवादी रहा है। उन्होंने तिब्बत का उल्लेख करते हुए कहा कि चीन अपना विस्तारवादी रवैया तिब्बत की ओर दर्शा चुका हैं। इसलिए वह उम्मीद करते हैं कि रामायण को पढ़कर शी जिनपिंग में सदबुद्धि आएगी।

यहाँ बता दें, भारत सरकार द्वारा चीनी ऐप बैन किए जाने के बाद उत्तराखंड पर्यटन मंत्री ने भी पर्यटन क्षेत्र में चीन की कंपनियों के खिलाफ एक्शन लेने के लिए, उनके साथ हुए करार को लेकर सचिव से पूरा ब्योरा माँगा था। इस दौरान सबका उद्देश्य सिर्फ़ चीन को राजनीतिक, कूटनीतिक और आर्थिक रूप से घेरने का था।

फरार गैंगेस्टर विकास दुबे की इनामी राशि बढ़कर हुई पाँच लाख, ग्रेटर नोएडा में आत्म समर्पण की अटकलें, हाई अलर्ट जारी

कानपुर के चौबेपुर के बिकरू गाँव में नक्सलियों की तरह 8 पुलिसकर्मियों की बेरहमी से हत्या करने वाला मोस्टवांटेड हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे पर अब इनाम की रकम 5 लाख रुपए कर दी गई है। इससे पहले यह इनाम राशि 2.5 लाख रुपए थी। इनामी रकम की बुनियाद पर अब विकास यूपी का सबसे ज्यादा इनामी मुजरिमी बन गया है। सबसे पहले विकास 50 हजार का इनाम रखा गया था।

उत्तर प्रदेश के अपर पुलिस महानिदेशक, कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने लखनऊ में बुधवार (8 जुलाई, 2020) को एक प्रेस कांफ्रेंस की। इस दौरान विकास दुबे से संबंधित मामलों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि इस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसी कार्रवाई होगी जिसके बाद अपराधियों को भी अपने किए पर पछतावा होगा।

वहीं प्रशांत कुमार ने आगे कानपुर, हमीरपुर और फरीदाबाद (हरियाणा) में हुई गिरफ्तारियों और मारे गए बदमाश के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दबिश वाले दिन दो अपराधी पुलिस मुठभेड़ में मारे गए थे। और पुलिस ने उनके पास से लूटे गए बंदूक को भी बरामद किया था। वहीं बुधवार की सुबह वारदात के मुख्य आरोपी विकास दुबे के करीबी अमर दुबे को हमीरपुर जिले में पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने मुठभेड़ में मार गिराया।

गौरतलब है कि पुलिस को फरीदाबाद में फरार विकास दुबे के छुपे होने की खबर मिली थी। इस सूचना के बाद मंगलवार (7 जुलाई, 2020) की शाम को फरीदाबाद के दिल्ली मथुरा हाईवे बडख़ल चौक स्थित होटल ओयो ‘श्री सासाराम‘ में छापा मारा गया था। लेकिन, पुलिस के पहुँचने से पहले ही विकास दुबे वहाँ से भाग निकला।

मगर फरीदाबाद पुलिस ने विकास दुबे के 2 साथियों को गिरफ्तार कर लिया। उसने इस बात की पुष्टि की है, कि विकास दुबे उसके साथ था। पकड़े गए अपराधियों के पास से 2 पिस्टल बरामद की गई है। पुलिस ने अब तक कुल अब तक कुल आठ आरोपितों को जिंदा पकड़ा है। इसके साथ पुलिस मुठभेड़ में 3 बदमाशों को मार गिराया है।

वहीं पुलिस का मानना है कि विकास दुबे फरीदाबाद से भागने के बाद ग्रेटर नोएडा में आत्म समर्पण कर सकता है। जिसको मद्देनजर रखते हुए पुलिस ने गौतमबुद्ध नगर में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। साथ ही सावधानी बरतते हुए पुलिस द्वारा सूरजपुर जिला कोर्ट में आने-जाने वाले सभी लोगों का मास्क हटवाकर जाँच की जा रही है।

पुलिस किसी भी कीमत पर अब कोई मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहती। इसलिए कोर्ट के बाहर भी पुलिस ने अतिरिक्त पुलिसबल वहाँ तैनात कर दिया है। और संदिग्ध लग रहे हर शख्स की तलाशी भी ली जा रही है। कोर्ट के सभी गेट पर सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। विकास दुबे के दिल्ली एनसीआर में होने की खबर से जिला गौतमबुद्ध नगर पुलिस भी हाई अलर्ट पर है। विकास दुबे की तलाश में यूपी से लेकर मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और हरियाणा तक की पुलिस को अलर्ट कर दिया गया है।

गौरतलब है कि विकास दुबे पर नकेल कसने की दिशा में यूपी पुलिस ने विकास के सबसे बड़े सहयोगी अमर दुबे को एनकाउंटर में मार गिराया है। हमीरपुर में बुधवार (जुलाई 8, 2020) की सुबह यूपी एसटीएफ और हमीरपुस पुलिस को एक संयुक्त ऑपरेशन के दौरान ये सफलता मिली। अमर दुबे मध्य प्रदेश की सीमा में घुस कर फरार होने की कोशिश में लगा था।

इस एनकाउंटर में दो पुलिसकर्मियों भी घायल हुए हैं। एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (ADG, लॉ एंड आर्डर) प्रशांत कुमार ने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ को बताया कि कानपुर में पुलिसकर्मियों की हत्या मामले में अमर दुबे नामजद आरोपित था। उन्होंने बताया कि अमर दुबे के ऊपर 25,000 रुपए का इनाम रखा गया था। उसके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।पुलिस ने उन सभी को खँगालना शुरू कर दिया है।

बताया गया है कि पुलिस उसे ज़िंदा पकड़ना चाहती थी लेकिन सरेंडर करने की अपील के बावजूद उसने फायरिंग की, जिसके बाद पुलिस को भी मजबूरन जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी। उधर विकास दुबे भी अपने वकीलों की सलाह के बाद कोर्ट में सरेंडर की फिराक में है क्योंकि उसे डर है कि एनकाउंटर में उसे मार गिराया जा सकता है। फरीदाबाद में उसके दो क़रीबी हिरासत में हैं, जिनसे पूछताछ चल रही है।

विकास दुबे के बारे में पता चला है कि वो मंगलवार को फरीदाबाद स्थित एक होटल में छिपने के लिए पहुँचा था। शक है कि उसने अपनी वेशभूषा बदल रखी थी। जब होटल के कर्मचारी ने उससे कहा कि उसे अपनी आईडी दिखा कर पेमेंट करना होगा, तो वो वहाँ से निकल गया।

उल्लेखनीय है कि विकास दुबे का मामला धीरे-धीरे अब पुलिस अफसरों पर भी भारी पड़ रहा है। मंगलवार को योगी सरकार ने एसटीएफ के डीआईजी अनंतदेव तिवारी का तबादला कर दिया। साथ ही तीन अन्य अधिकारियों को भी इधर से उधर किया गया है।

दूसरी ओर विकास दुबे की मदद और दबिश मुखबिरी जैसे कई गंभीर आरोपों का सामना कर रहे चौबेपुर थाने के सभी 68 पुलिसकर्मी लाइन हाजिर कर दिए गए हैं। मंगलवार शाम एसएसपी दिनेश कुमार ने ये कार्रवाई की है। कानपुर के चौबेपुर थाने में पोस्टेड सभी सब इंस्पेक्टर, कॉन्स्टेबल और हेड कॉन्स्टेबल का पुलिस लाइंस में ट्रांसफर कर दिया गया है। वहीं अब थाने में नए पुलिस कर्मियो की तैनाती की गई है।

हमने कंगना को मौका नहीं दिया होता तो? पूजा भट्ट ने कहा- हमने उतनों को लॉन्च किया, जितनों को पूरी इंडस्ट्री ने नहीं की

बॉलीवुड अभिनेत्री पूजा भट्ट ने सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद चल रहे विवाद के बीच नेपोटिज्म का बचाव किया है। पूजा भट्ट ने कंगना रनौत का भी नाम लेकर नेपोटिज्म के पक्ष में झंडा बुलंद करने का प्रयास किया। बकौल पूजा भट्ट, उन्होंने कहा कि उनसे कई लोगों ने हालिया नेपोटिज्म विवाद पर टिप्पणी करने को कहा था। उन्होंने दावा किया कि फैक्ट को कोई नहीं जानना चाहता, फिक्शन में सबकी रूचि है। हालाँकि, कंगना रनौत ने पूजा भट्ट को अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है।

एक के बाद एक किए ट्वीट्स में पूजा भट्ट ने दावा किया कि वो एक ऐसे ‘परिवार’ से आती हैं, जिसने उतने प्रतिभाशाली अभिनेताओं, संगीतकारों और टेक्नीशियनों को लॉन्च किया है, जितनों को पूरी फिल्म इंडस्ट्री ने मिल कर भी नहीं किया होगा। उन्होंने कहा कि उन्हें नेपोटिज्म वाली बातें सुन कर हँसी आती है। पूजा ने कहा कि एक ऐसा समय भी था जब भट्ट कैम्प को स्थापित अभिनेताओं के खिलाफ बताया जाता था।

पूजा भट्ट ने दावा किया कि तब के समय में भट्ट कैम्प पर आरोप लगाया जाता था कि ये लोग सिर्फ नए अभिनेता-अभिनेत्रियों के साथ काम करते हैं और उन्हें ही लॉन्च करते हैं, इसके लिए उन्हें नीचा भी दिखाया जाता था। बकौल पूजा, भट्ट परिवार बड़े सितारों का पीछा नहीं करता था। उन्होंने कहा कि आज ऐसे ही लोग नेपोटिज्म के बारे में बात करते हैं जिनका काम है गूगल सर्च कर के ट्वीट करना, उनके पास सोचने और बोलने की क्षमता नहीं है। पूजा ने कहा:

“तो ये नेपोटिज्म शब्द से किसी और को जलील करने की कोशिश करो दोस्तों। जिन लोगों को हमने दशकों से मौक़ा दिया है, जिन्हें हम स्प्रिंगबोर्ड देकर आगे बढ़ने का मौक़ा देते आए हैं, वो लोग जानते हैं कि हम कैसे हैं। और अगर ये लोग भूल भी गए हैं तो ये उनकी समस्या है। ये हमारी समस्या नहीं। आप सभी का दिन शुभ हो।”

इसके बाद पूजा भट्ट ने कंगना रनौत का नाम लेकर अपने परिवार की वाहवाही की। पूजा भट्ट ने कहा कि उदाहरण के तौर पर कंगना रनौत को ही ले लीजिए जो काफ़ी प्रतिभाशाली हैं। उन्होंने पूछा कि अगर ‘विशेष फिल्म्स’ ने उन्हें ‘गैंगस्टर’ फिल्म से लॉन्च नहीं किया होता तो? पूजा भट्ट ने दावा किया कि भले ही कंगना रनौत को अनुराग बासु ने ढूँढ़ा था, ‘विशेष फिल्म्स’ ने बासु की सोच को बल दिया और उसमें निवेश किया।

एक के बाद एक ट्वीट कर के पूजा भट्ट ने किया नेपोटिज्म का बचाव

साथ ही उन्होंने अपनी आगामी फिल्म ‘सड़क 2’ पर भी बात की, जिसके बॉयकॉट की अपील की जा रही है। इस फिल्म का निर्देशन महेश भट्ट ने किया है, जिन्होंने 1999 की ‘कारतूस’ के बाद पिछले 21 सालों से किसी फिल्म का निर्देशन नहीं किया था। इस फिल्म में सुनील दत्त के बेटे संजय दत्त, महेश भट्ट की बेटी आलिया भट्ट और सिद्धार्थ रॉय कपूर के भाई आदित्य रॉय कपूर मुख्य किरदारों में हैं।

पूजा भट्ट का दावा है कि ‘सड़क 2’ में चंडीगढ़ के संगीत शिक्षक सुनील जीत को मौक़ा दिया गया है, जो बिना किसी अपॉइंटमेंट उनके दफ्तर में आए थे और उनके पास हारमोनियम, कुछ सपने और एक अच्छा गाना था- ‘इश्क़ कमाल’ नाम का। पूजा भट्ट ने जानकारी दी कि महेश भट्ट ने इस गाने को सुन कर इसे फिल्म में ले लिया। पूजा की माँ सोनी राजदान ने भी एक तस्वीर के जरिए लोगों की आलोचना का मजाक बनाया था।

इससे पहले सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद प्रतिक्रिया देते हुए कंगना रनौत ने कहा था कि न्यूज में ब्लाइंड आइटम लिखे ही इसलिए जाते हैं, ताकि जब कोई झूठ बोले, तो उसके ख़िलाफ़ कोई कानूनी कार्रवाई न हो सके। मगर, उसके भीतर में जो व्यक्ति से जुड़ा विवरण होता है। वो सभी बातों को स्पष्ट कर देता है। जैसे यदि मेरे बारे में कोई लिखे तो उसमें लिखेगा– वो लड़की जिसके घुंघराले बाल हैं, नेशनल अवॉर्ड मिला हुआ, साइकोटिक है, मनाली से है… इस तरह मेरे ख़िलाफ़ लिखते हुए मेरा विवरण पूरा लिख दिया जाएगा लेकिन नाम नहीं लिखा जाएगा।”

दिल्ली एम्स की लापरवाही: परिवारों को दिए गलत शव, हिंदू महिला दफ़नाई गई और मुस्लिम महिला का हुआ अंतिम संस्कार

दिल्ली में कोरोना के हालात कितने भयावह हो चुके हैं इसका अंदाज़ा लगा पाना मुश्किल है। दिल्ली में कोरोना के मरीज़ों के साथ जिस तरह लापरवाही बरती जा रही है उसका एक उदाहरण सामने आया है। मंगलवार के दिन दिल्ली एम्स के ट्रामा सेंटर में कोरोना की वजह से मरने वाले दो लोगों के शरीर ही बदल गए। अस्पताल प्रबंधन की तरफ से हुई इस लापरवाही के चलते हिंदू परिवार ने एक मुस्लिम महिला का अंतिम संस्कार कर दिया और मुस्लिम परिवार के व्यक्तियों ने एक हिंदू महिला को दफ़न कर दियाl

7 जुलाई के दिन आएशा (परिवर्तित नाम) के परिजनों को अस्पताल बुलाया गया और एम्स दिल्ली के ट्रामा सेंटर वालों ने उन्हें सूचित किया कि उसकी मृत्यु हो चुकी है। अब वह शव ले जा सकते हैं, जैसे ही आएशा के परिजन मौके पर पहुँचे अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें बताया, “हम शव देने की तैयारी पूरी कर चुके हैं, अंतिम क्रिया की तैयारी शुरू कर दीजिए।”

इसके बाद आएशा के भाई ने अपनी बहन का चेहरा देखने की बात कही, जिस पर अस्पताल प्रशासन ने कहा कि चेहरा दफ़नाने की जगह पर ही दिखाया जाएगा। फिर कोरोना वायरस के आधिकारिक प्रोटोकॉल के तहत शरीर प्लास्टिक में बंद करके आएशा  के परिजनों को दे दिया गया। 

दफ़नाने के ठीक पहले आएशा के बच्चों ने एक अंतिम बार चेहरा देखने का निवेदन किया। जिस पर उसके भाई का कहना था कि ‘हमें दिल्ली गेट कब्रिस्तान पर एक कर्मचारी ने बताया कि हमें चेहरा देखने के लिए 500 रूपए देने पड़ेंगे। जैसे ही मैंने चेहरा देखने के लिए 500 रूपए दिए उसके बाद हम सभी दंग रह गए क्योंकि वह आएशा नहीं थी। वह एक हिन्दू परिवार की महिला, सरिता (परिवर्तित नाम) थी। 

ऐसा होने के बाद आएशा के परिजनों ने वापस एम्स दिल्ली से संपर्क किया। जिस पर अधिकारियों ने कहा कि कोई गलती हुई है, हम एक घंटे के भीतर सही शरीर देंगे। लेकिन एक घंटे बाद उन्हें यह पता चला कि आएशा का अंतिम क्रिया हिंदू रीति रिवाज़ों से हो चुकी है। वहीं दूसरी तरफ जिस हिंदू परिवार ने दिल्ली के पंजाबी बाग़ में आएशा का अंतिम संस्कार अपनी बेटी समझ कर किया था।

उन्हें भी जैसे इस बात का पता चला वह हैरान रह गए लेकिन ऐसी सूरत में वह असहाय थे। इस पर एक समाचार समूह से बात करते हुए एम्स ट्रामा सेंटर के अधिकारी ने कहा, हम इस मामले की जाँच कर रहे हैं। एक कर्मचारी को निकाला जा चुका है और दूसरे को निलंबित किया गया है। 

प्रतीकात्मक चित्र

पिछले महीने भी कुछ इस तरह के मामले दिल्ली के अस्पताल में सामने आ चुके हैं। इन मामलों में भी महामारी को लेकर अस्पताल की तरफ से होने वाली लापरवाही का साफ़ उदाहरण पेश हुआ था। गुज़रे महीने न्यूज़ 18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में शवों की अदला-बदली हो गई थी।

जिसके चलते एक परिवार अपनी माता का अंतिम संस्कार नहीं कर पाया था और वहीं दूसरे परिवार ने कुल 2 शवों का अंतिम संस्कार कर दिया था। जिसके बाद दोनों परिवारों ने अस्पताल प्रशासन पर आरोप लगाया कि उनके परिजनों को सही देखभाल नहीं मिली। साथ ही वह अपने लोगों का सही से अंतिम संस्कार तक नहीं कर पाए। 

इस तरह के एक और मामला लोकनायक अस्पताल से सामने आया था जिसमें दो एक तरह के नाम वालों का शव बदल गया था। नतीजतन कलीमुद्दीन नाम के व्यक्ति ने अपने पिता को दो बार दफन कर दिया था। दरअसल 7 जून के दिन मोइनुद्दीन नाम के दो व्यक्तियों की मृत्यु हुई थी, जिसके बाद इस तरह की लापरवाही हुई थी।

मामले पर अस्पताल के एक अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा ‘कभी-कभी हमारे लिए यह काम बहुत मुश्किल हो जाता है। क्योंकि मरने के बाद एक इंसान का चेहरा पूरी तरह बदल जाता है उस पर कोई भाव नहीं रह जाते हैं। हम पूरी कोशिश करेंगे कि हमारी तरफ से इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो।’           

जानिए चीन में उपजे ब्यूबॉनिक प्लेग के बारे में, जिसने ली थी 20 करोड़ जानें… कोरोना से 3-4 गुणा खतरनाक!

चीन में ब्यूबॉनिक प्लेग (Bubonic plague) के संदिग्ध पाए गए मरीजों के बाद वहाँ कई जगहों पर हाई अलर्ट है। चाइना डेली के अनुसार मंगोलिया में अधिकारियों ने प्लेग के रोकथाम और नियंत्रण के तीसरे स्तर की घोषणा साल 2020 के अंत तक कर दी है। 

रिपोर्ट में बताया जा रहा है कि गिलहरी का माँस खाने के कारण यह प्लेग एक 27 वर्षीय युवक और उसके 17 वर्षीय भाई में पाया गया। 

लैब द्वारा इन केसों की पुष्टि के बाद ही वहाँ के स्वास्थ्य अधिकारी इस पर सचेत हुए और इलाके में मीट न खाने की अपील की गई। अभी तक इन दोनों युवकों के संपर्क में आने वाले 146 लोगों को आइसोलेट करके उनका इलाज किया जा रहा है।

Bubonic plague epidemic warning issued in China's inner Mongolia ...

अब हालाँकि पूरी दुनिया पहले से ही कोरोना की मार के कारण पस्त हो चुकी है। उस बीच में ऐसी बीमारी के अस्तित्व में आने की बात वाकई भयभीत करने वाली है। मीडिया प्लैटफॉर्म्स पर इसे लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। 

कुछ रिपोर्ट्स बताती हैं कि ब्यूबॉनिक प्लेग न केवल कोरोना से भी खतरनाक है बल्कि इसमें मृत्यु दर का आँकड़ा कोरोना से 3-4 गुणा ज्यादा होता है। ये बीमारी ऐसी है कि एक समय में इसके कारण कई करोड़ लोगों ने अपनी जान गँवा दी थी।

अब आखिर इन बातों में क्या सच्चाई है? और ब्यूबॉनिक प्लेग क्या है? इसकी शुरुआत कहाँ से हुई थी? आज इन्हीं कुछ सवालों के जवाब हम आपको देने जा रहे हैं।

ब्यूबॉनिक प्लेग को वैसे ब्लैक डेथ भी कहा जाता है। हम इसकी गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि चीन में इसके अभी तक दो मरीज दिखे हैं और तुरंत वहाँ पर अलर्ट जारी कर दिया गया है।

ऐसा इसलिए क्योंकि ये प्लेग नया नहीं है। इससे पहले भी ब्यूबॉनिक प्लेग फैला था और उस समय पीपीई किट मौजूद नहीं हुआ करती थे। जिसके कारण लोगों को चिड़िया की तरह चोंच वाले मास्क पहनने पड़ते थे।

साभार: न्यूज 18

कहाँ से, किससे और कैसे शुरु हुआ ब्यूबॉनिक प्लेग

ये बात सन् 1347 की है। यही वो वर्ष था जब ब्यूबॉनिक प्लेग तेजी से फैला। इतिहास के पन्नों में इसे सबसे संक्रामक बीमारी माना जाता है। कुछ रिपोर्ट्स यह भी दावा करती हैं कि इस दौरान 20 करोड़ (200 मिलियन) लोग मरे। तो कुछ यह बताती हैं कि पिछली 2 सदी में इससे 5 करोड़ (50 मिलियन) तक की जानें गईं।

कारण? लोगों को उस समय इस प्लेग के बारे में खासी जानकारी नहीं थी। पता था तो बस ये कि ये बीमारी बेहद संक्रामक है और ये मरीज से निकलने वाली दूषित हवा के कारण होती है। जिसे Miasma कहते हैं।

हालाँकि, कुछ समय बाद इस बात का खंडन किया गया कि ब्यूबॉनिक प्लेग हवा से नहीं फैलता। बल्कि इसके फैलने का कारण येर्सिनिया पेस्टिस बैक्टीरिया है। जिससे सेप्टिकैमिक प्लेग और न्यूमोनिक प्लेग भी होता है।

China reports suspected bubonic plague case in Inner Mongolia ...
साभार: ग्लोबलन्यूज

ये बैक्टेरिया चूहे, खरगोश, गिलहरी आदि से फैलता है। मगर ये इतना खतरनाक होता है कि यदि एक वयस्क का समय पर इलाज न किया जाए तो यह उस वयस्क को मात्र 24 घंटे के भीतर मार सकता है।

इस बीमारी से जुड़े आँकड़े बताते हैं कि इसका मृत्यु दर अनुपात 30% से लेकर 60% है। वहीं सेप्टिकैमिक प्लेग और न्यूमोनिक प्लेग तो ऐसी बीमारियाँ हैं, जहाँ मृत्यु दर 100 प्रतिशत तक पहुँचा हुआ है।

इस बैक्टेरिया से होने वाली बीमारियों में संक्रमित व्यक्ति के मुर्गी की अंडे जितनी बड़ी गाँठे पड़ जाती है। उसे बुखार आता है, खराश होती है, पसलियों में दर्द होता है इत्यादि।

Bubonic plague - Wikipedia
साभार: विकीपीडिया

इस बैक्टेरिया के कारण जो गाँठ शरीर में उभरी दिखती हैं, उन्हें ब्यूबोस कहा जाता है। इनमें मरीज के शरीर में पस का भरना और खून निकलना आम बात होती है। इसके अतिरिक्त जो व्यक्ति इससे संक्रमित होता है, उसमें ये सभी लक्षण संक्रमण होने के 1-7 दिन में दिखने लगते हैं। साथ ही संक्रमित व्यक्ति से यह 5-7 लोगों में फैलने का खतरा होता है।

इंटरनेट पर ब्लैक डेथ पर मौजूद जानकारी के अनुसार, इस बीमारी ने 1347 से लेकर 1351 तक जनजीवन को बहुत प्रभावित किया। स्थिति ऐसी थी कि शायद किसी भी अन्य बीमारी ने इतने लोगों को तब तक कभी मारा हो।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस प्लेग की शुरुआत भी चीन से हुई थी। लेकिन जहाजों के जरिए यह बाद में यह फैलते-फैलते अन्य देशों तक पहुँच गया। इस महामारी को लेकर अनुमान है कि उस वक्त इसकी वजह से यूरोप की लगभग 25-60 प्रतिशत आबादी का सफाया हो गया था और 5 करोड़ लोगों की मौत हुई थी।

इस महामारी को लेकर लोगों में भ्रम बैठ गया था कि यह सब ईश्वर के प्रकोप के कारण हो रहा है। यानी ईश्वर किसी बात से नाराज है। जिसके कारण ये महामारी फैली।

भारत में भी दी थी इस प्लेग ने दस्तक

यहाँ बता दें कि ब्यूबॉनिक प्लेग का असर भारत में भी देखने को मिला था। सबसे पहले भारत में इससे जुड़ा मामला 23 सितंबर 1896 को बॉम्बे में रिपोर्ट किया गया था। ये भारत में तीसरे प्लेग के रूप में देखा गया था। कलकत्ता, कराची, पंजाब समेत कई बंदरगाह वाले राज्यों में यह संक्रमण जहाजों के जरिए पहुँचा था।

इसने उस समय भारत के करीब 1.2 करोड़ लोगों को अपनी चपेट में लिया। इसके बाद स्थिति को संभालने के लिए यहाँ महामारी रोग अधिनियम 1897 बना। इस अधिनियम में खतरनाक बीमारी रोग के रूप में विशेष उपाय और नियमों की निर्धारित करने की शक्ति थी।

इस कानून का इस्तेमाल अंग्रेजों ने उन संक्रमित जगह व प्रॉपर्टी को विध्वंस करने में उपयोग किया। इसके बाद साल 1994 में यर्सेनिया नाम के बैक्टेरिया ने भारत पर एक बार फिर हमला बोला। मगर इस बार यह विषाणु ब्यूबॉनिक प्लेग नहीं, बल्कि निमोनिया लेकर आया।

आज क्या है प्लेग का इलाज

प्लेग के शुरुआती में इसका कोई इलाज नहीं था। उस समय लोग गिल्टियों पर उबलता पानी डालकर गाँठों को पिघलाने का प्रयास करते थे। या फिर गर्म सलाख से उन्हें दागते थे।

मगर, विज्ञान क्षेत्र में तरक्की के बाद कई ऐसी एंटीबॉयोटिक्स इस समय दुनिया में मौजूद हैं, जिनसे इस संक्रमण को महामारी बनने से पहले रोका जा सकता है। साथ ही बीमार व्यक्ति को उपयुक्त उपचार भी दिया जा सकता है।

हालाँकि इन दवाइयों को लेकर यह कहना मुश्किल होता है कि इनसे पूरी तरह प्लेग खत्म होता है या नहीं। लेकिन WHO के डेटा पर गौर करें तो हर साल प्लेग 1000 से 2000 लोगों में होता है। बावजूद इसके कि इसके लिए कोई प्रभावी वैक्सीन नहीं है। अब डॉक्टर्स इसे फैलने से रोकने में सक्षम होते हैं और ये बड़ी महामारी का रूप नहीं ले पाता।