Home Blog Page 4692

चीन के हस्तक्षेप से हिली पीएम ओली की कुर्सी, अब सत्ता बचाने के लिए पार्टी टूटने की कगार पर, पाक भी दे रहा समर्थन

भारत के खिलाफ नेपाल को मोहरा बना रहे चीन और पाकिस्तान ओली को राजनीतिक संकट में देख बेचैन है और उसे बचाने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। नेपाल की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी में ज्यादातर लोग ओली के खिलाफ हैं। भारत विरोधी टिप्पणी करने को लेकर प्रधानमंत्री पद से ओली के इस्तीफे की माँग के मद्देनजर बुधवार (जुलाई 8, 2020) को स्थाई समिति की मीटिंग रखी गई थी, जिसे फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।

पीएम ओली और कम्युनिस्ट पार्टी के उपाध्यक्ष प्रचंड के बीच मंगलवार (जुलाई 7, 2020) दोपहर मीटिंग हुई थी। दो घंटे की बैठक के अंत में केवल एक ही फैसला हुआ कि बुधवार को स्थाई समिति की बैठक होगी। इसका अर्थ यह लगाया गया कि पीएम ओली 44-सदस्यीय स्थाई समिति का सामना करने के लिए तैयार थे।

हालाँकि, बताया जा रहा है कि पार्टी की स्टैंडिंग कमिटी के 44 में से 30 लोगों ने ओली से इस्तीफा देने के लिए कहा है। अब ओली अपनी कुर्सी बचाए रखने के लिए नया पैंतरा चलने वाले हैं। लगातार उठ रही इस्तीफे की माँग के बीच ओली ने अपनी ही पार्टी को तोड़ने और विपक्षी पार्टी का साथ लेकर सरकार में बने रहने का प्लान तैयार किया है और इसमें चीन और पाकिस्तान उन्हें खुला समर्थन दे रहा है।

बजट सत्र को स्थगित करने के बाद अब केपी ओली एक अध्यादेश लाकर पार्टी को तोड़ सकते हैं। इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक ओली वहाँ मुख्य विपक्षी पार्टी नेपाली कॉन्ग्रेस के संपर्क में हैं, जिससे उन्हें समर्थन मिल सके। दरअसल, ओली अध्यादेश लाकर पॉलिटिकल पार्टीज ऐक्ट में बदलाव कर सकते हैं। इससे उन्हें पार्टी को बाँटने में आसानी होगी। यह सब चीन और पाकिस्तान के समर्थन से हो रहा है।

उल्लेखनीय है कि नक्शे पर विवाद के बीच ओली भारत के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं। इसके बाद ही पाकिस्तानी पीएम इमरान खान ने ओली से संपर्क साधा था। दूसरी तरफ नेपाल में मौजूद चीनी राजदूत भी इसकी कोशिशों में लगी हैं कि ओली को सत्ता में बनाए रखा जा सके। हाल में ओली द्वारा उठाए गए कुछ कदमों के पीछे चीनी राजदूत का रोल अहम बताया जाता है।

नेपाल कम्यूनिस्ट पार्टी में ज्यादातर लोग इस वक्त ओली के खिलाफ हैं। पार्टी की स्टैंडिंग कमिटी के 44 में से 30 लोगों ने ओली से इस्तीफा देने को कहा था। अध्यादेश के बाद ओली को अपनी स्थिति मजबूत करने का वक्त मिलेगा और जबतक उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी नहीं लाया जा सकेगा और जरूरत पड़ने पर वह पार्टी को बाँट भी सकेंगे। पार्टी में कुछ खास नाम हैं जिनसे ओली की नहीं बन रही। इसमें पुष्प कमल दहल, बामदेव गौत, झाला नाथ और माधव कुमार नेपाल शामिल हैं।

अगर पार्टी टूटती है तो ओली को अपने समर्थन में 138 सांसद दिखाने होंगे। लेकिन अध्यादेश के बाद उन्हें सिर्फ 30 प्रतिशत सांसद का समर्थन दिखाना होगा। ऐसे में ओली के लिए चीजें आसान होंगी क्योंकि 40 प्रतिशत सांसद उनकी तरफ हैं।

बता दें कि नेपाल में चीनी हस्तक्षेप से देश की भौगोलिक क्षति होने के साथ ही राजनीति स्थिरता भी देखने को मिली और अब तो पार्टी भी टूटने के कगार पर खड़ी नजर आ रही है।

पिछले दिनों खबर आई थी कि चीन एक के बाद एक नेपाल की जमीन हड़पता जा रहा है। पहले तो चीन ने नेपाल के गोरखा जिले के रुई गाँव पर कब्जा किया, जो कि अब चीन के स्वायत्त क्षेत्र तिब्बत के कब्जे में आ चुका है। ये अलग बात है कि नेपाल सरकार इस सच्चाई को बताने से गुरेज कर रही है। इसके बाद खबर आई कि हुम्ला जिले में 10 हेक्टेयर की नेपाली जमीन पर चीन ने कब्जा किया है। रासुवा जिले में नेपाल की 6 हेक्टेयर जमीन चीन ने हड़प ली। इसी तरह नेपाल के अन्य कई हिस्सों में कुल मिलाकर 33 हेक्टेयर जमीन चीन ने हड़प ली है।

राहुल गाँधी की सांसदी में हुआ टॉयलेट घोटाला, स्मृति ईरानी पर इल्जाम लगा कॉन्ग्रेस खुद बुरे फँसी

कॉन्ग्रेस पार्टी इन दिनों ट्विटर के जरिए केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की छवि को धूमिल करने में प्रयासरत है। हालाँकि, ये बात और है कि ऐसी कोशिशों के दौरान उनकी स्वयं की मंशा पर सवाल उठने लगे हैं। 

जानकारी के अनुसार, कॉन्ग्रेस ने स्मृति इरानी पर टॉयलेट स्कैम का आरोप मढ़ा है। इस संबंध में उन्होंने कल अपने आधिकारिक अकॉउंट से एक ट्वीट करते हुए दावा किया कि अमेठी में शौचालय निर्माण भ्रष्टाचार के साथ किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस सेवादल ने अपने ट्वीट में लिखा, “स्मृति इरानी जी यह शौचालय का घोटाला अंताक्षरी के बीच में हुआ है या उससे पहले? इस घोटाले से जाहिर है कि अमेठी के लोग शौच के लिए खेतों का इस्तेमाल कर रहे होंगे।” 

इस ट्वीट को पार्टी ने एक लेख के साथ शेयर किया। मगर, कॉन्ग्रेस के ऐसे दावे देखकर लगता है जैसे उन्होंने स्वयं इस आर्टिकल को एक बार ढंग से पढ़ना मुनासिब नहीं समझा। जिसकी वजह से शायद उन्हें ये नहीं पता चल पाया कि आरोपित मुख्यत: कौन है? उन्होंने बस घोटाले के बारे में पढ़ा और उसे स्मृति इरानी से जोड़ दिया।

अब आखिर सच्चाई क्या है? कॉन्ग्रेस के ट्विटर हैंडल से शेयर किए गए आर्टिकल के अनुसार अमेठी के विकास खंड भादर के एक गाँव के प्रधान ने करोड़ों रुपए का घोटाला किया। इसमें यह भी लिखा है कि यह मामला प्रकाश में उस समय आया जब ग्रामीणों ने इस संबंध में जिलाधिकारी अरुण कुमार के पास हलफनामा दायर करते हुए मामले में जाँच की माँग की।

आर्टिकल के अनुसार, “मोचवा गाँव के ग्राम प्रधान ने शौचालय निर्माण में जमकर गोलमोल किया। यही नहीं, अपात्र लोगों का नाम कई बार सूची में शामिल किया गया तथा कई पति पत्नी के नाम पर शौचालय बना दिखाकर पैसा निकाल लिया गया।  शिकायत पत्रों के अनुसार, जिला पंचायत राज विभाग की तरफ से गाँव में वित्तीय वर्ष 2018 में 1920 और 2019 में 240 शौचालय निर्माण का लक्ष्य दिया गया था। इसमें कई शौचालयों का निर्माण तक नहीं हुआ और जो हुआ भी, वह मानक के विपरीत है।”

अब इसी मामले को कॉन्ग्रेस ने भाजपा केंद्रीय मंत्री पर मढ़ा है और ये जताने की कोशिश की है कि उनके राज में यह सब हुआ। लेकिन यदि शिकायतकर्ताओं की शिकायत का समय देखें, तो वह 2018-2019 का है। यानी जब राहुल गाँधी अमेठी के सांसद हुआ करते थे और वहाँ होने वाले हर प्रकार के विकास कार्य के लिए जिम्मेदार थे।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष मई माह में हुए लोकसभा चुनाव में स्मृति इरानी ने कॉन्ग्रेस का गढ़ कहे जाने वाले अमेठी में राहुल गाँधी को हराकर वो सीट अपने नाम की थी। इसलिए, शौचालय स्कैम के नाम पर, इस तरह के निराधार आरोप केंद्रीय मंत्री के अपमान से अतिरिक्त कुछ नहीं हैं। अगर कॉन्ग्रेस सेवादल वाकई ग्रामीणों की भलाई चाहता है तो उन्हें राहुल गाँधी से प्रश्न करना चाहिए कि उनकी नाक के नीचे ऐसे कितने स्कैम हुए।

‘हिंदुस्तान जिंदाबाद’ – इंडियन ‘प्लेयर’ ने चायनीज से बुलवाया, टाइम्स ऑफ इंडिया के MensXP की खबर: Fact Check

कुछ मीडिया हाउस खुद को आगे दिखाने की दौड़ में अपनी सारी जिम्मेदारियों को भूल जाते हैं और मीडिया के उसूलों से भी समझौता करने से नहीं चूकते। यहाँ तक कि कुछ मीडिया हाउस मनोरंजन की खबरों और गंभीर खबरों में अंतर ही नहीं कर पा रहे हैं। ऐसी ही एक खबर सामने आई है, जहाँ टाइम्स ऑफ इंडिया के MensXP ने मनोरंजन की खबर को अपनी वेबसाइट पर गंभीरता के साथ पेश किया।

CisTheta Global पर एक खबर आई, जिसमें एक भारतीय PUBG गेमर द्वारा अपने चीनी टीम-मेट से कथित तौर पर ‘हिंदुस्तान जिंदाबाद’ कहलवाने की बात कही गई। CisTheta Global पर प्रकाशित खबर के मुताबिक एक भारतीय PUBG मोबाइल गेमर ने अपने चीनी टीम के साथी को खेलते समय पुनर्जीवित नहीं किया और PUBG में अपना जीवन बचाने से पहले उससे “हिंदुस्तान ज़िंदाबाद” कहने के लिए कहा।

उक्त वेबसाइट पर प्रकाशित खबर में कहा गया है कि जरूरी नहीं कि सीमा पर रहकर ही देशभक्त बना जाए बल्कि कुछ इस खेल की तरह भी देशभक्ति की जा सकती है। वेबसाइट के मुताबिक भारतीय PUBG गेमर ने कहा, “मैं अपने सभी भारतीय PUBG खिलाड़ियों से अनुरोध करता हूँ कि चीनी और पाकिस्तानी खिलाड़ियों को पुनर्जीवित से पहले उनसे हिंदुस्तान जिंदाबाद कहलवाना उनका कर्तव्य है।”

इतना ही नहीं, भारतीय गेमर ने इसी तरह से 1000 चीनी खिलाड़ियों को हिंदुस्तान जिंदाबाद कहलवाने का लक्ष्य रखा है। यह देशभक्ति दिखाने का एक अनूठा तरीका है और यह लाखों भारतीय PUBG खिलाड़ियों की प्रेरणा बन सकता है।

इस खबर को आधार बनाते हुए टाइम्स ऑफ इंडिया के MensXP ने इसे गंभीरतापूर्वक लिखा कि भारत और चीन के बीच गलवान घाटी के टकराव के बाद बहुत तनाव है। भारत द्वारा देश में 59 चीनी ऐप के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने के बाद यह तनाव और बढ़ गया है।

देशभक्त बनने के लिए आपको सीमा पर रहने की आवश्यकता नहीं है, यह साबित करते हुए बहुत सारे भारतीयों ने अपना समर्थन दिखाने के लिए आगे कदम बढ़ाया है। MensXP ने इस भूमिका के बाद PUBG खिलाड़ी की एक मनगढ़ंत कहानी को खबर के रूप में पेश कर दिया। टाइम्स ऑफ इंडिया के MensXP ने लिखा कि एक भारतीय PUBG खिलाड़ी ने अपने चीनी साथी को पुनर्जीवित करने और खेल में वापस लाने से पहले उससे ‘हिंदुस्तान ज़िंदाबाद’ कहलवाया। यह देशभक्ति दिखाने का एक तरीका है।

क्या है इसकी हकीकत

दरअसल CisTheta Global मनोरंजन और व्यंग्य की एक साइट है। इस वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक इस साइट का उद्देश्य अपने पाठकों का मनोरंजन करना है। इस पर आप मनोरंजन या व्यंग्य से जुड़ी बहुत सी खबरें देख सकते हैं।

साभार-CisTheta Global

इसमें गौर करने वाली बात यह भी है कि PUBG गेमर से जुड़े इस आर्टिकल को मनोरंजन के सेक्शन में रखा गया है। इसके बावजूद टाइम्स ऑफ इंडिया के MensXP द्वारा इस खबर को गंभीरता से लेना बहुत ही हास्यास्पद है और उनकी खबरों की समझ पर सवालिया निशान लगाता है।

साभार-CisTheta Global

13 जुलाई 2002 के पहले इंडियन क्रिकेट टीम… और टी-शर्ट लहराने के बाद की टीम… और वो इंसान!

नब्बे का दशक था। तब क्रिकेट की दुनिया में कुछ ही टीमों का दबदबा था। जिन टीमों का सिक्का चलता था, उनके साथ कुछ चलन भी मशहूर थे – कुछ अच्छे तो कुछ बुरे। उस दौर का एक ऐसा ही चलन था ‘स्लेजिंग’। जिन क्रिकेट टीमों का दबदबा था, हर वह टीम स्लेजिंग में पारंगत थी। स्लेजिंग का हासिल भले कुछ नहीं था लेकिन विरोधी टीम पर दबाव खूब बनता था। 

नब्बे के एक दशक बाद का सीन – ऑस्ट्रेलियाई टीम मैदान में सामने वाली किसी भी टीम पर दबाव बना लेती थी। मैच के हर अहम पड़ाव पर उनकी टीम का कोई न कोई खिलाड़ी स्लेजिंग शुरू कर देता था। जिससे उनके विरुद्ध खेलने वाले खिलाड़ी पर भरपूर दबाव बने। उस दौर में भारतीय क्रिकेट टीम अपने नवीनीकरण के दौर से गुज़र रही थी, फिक्सिंग के मामलों से बाहर आई भारतीय क्रिकेट टीम के मुखिया बने थे सौरव गांगुली उर्फ़ ‘दादा’। 

एक समय के बाद दादा ने किसी भी टीम को भारतीय टीम पर हावी होने का मौक़ा नहीं दिया था। दादा की अगुवाई में टीम ने एक हुनर बखूबी सीखा कि मानसिक दबाव में रहते हुए कैसे बेहतर प्रदर्शन करना है। इस बात की तस्दीक करनी हो तो युवराज, हरभजन, सहवाग, कैफ और ज़हीर जैसे किसी भी खिलाड़ी की दादा पर राय सुनिए। ऐसी बातों का उल्लेख करते हुए साल 2002 के दौरान लॉर्ड्स में हुआ भारत और इंग्लैंड का मुकाबला कैसे भूला जा सकता है? 

इस जीत को भारतीय क्रिकेट टीम के इतिहास में सबसे यादगार क्षणों में एक माना जाता है। 13 जुलाई साल 2002 को हुए इस मुकाबले में इंग्लैंड मेज़बान था। इंग्लैंड की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम को 325 रनों का लक्ष्य दिया था। भारतीय टीम ने लक्ष्य पूरा किया जबकि एक समय पर टीम 146 रन बना कर 5 विकेट खो चुकी थी। भले गांगुली और सहवाग ने टीम को अच्छी शुरुआत दी थी लेकिन बीच में पूरी टीम लड़खड़ा गई थी। 

लॉर्ड्स की बालकनी में बैठ कर सभी मैदान की तरफ निगाहें गड़ाए हुए थे और जैसे ही भारत ने लक्ष्य पूरा किया, हज़ारों की भीड़ के सामने दादा ने टी शर्ट उतार कर लहरा दी। फिरंगी धरती पर हुए इस मुकाबले के ज़रिए यह संदेश भी दिया कि इस भारतीय टीम का मिज़ाज कुछ और है। काफी लोग इस कदम को विवादित भी मानते हैं लेकिन उस वक्त के लिए जीत पर जज़्बात हावी थे, सिर्फ दादा के नहीं बल्कि क्रिकेट पसंद करने वाले हर इंसान के ज़हन पर। भारतीय क्रिकेट टीम को दादा की तरफ से मिला स्वभाव का यह हिस्सा भुलाया नहीं जा सकता है। 

नैटवेस्ट ट्रॉफ़ी के बाद भारतीय टीम कुछ ऐसी बदली कि पीछे मुड़ कर नहीं देखा। इसके बाद चाहे पाकिस्तान का दौरा रहा हो, इंग्लैंड का दौरा रहा हो या ऑस्ट्रेलिया का दौरा रहा हो, भारतीय क्रिकेट टीम दादा के कलेवर में ही नज़र आई। सौरव गांगुली ने भारतीय क्रिकेट टीम को जो दिया, 2007 का T-20 विश्व कप और 2011 का विश्व कप उसका ही नतीजा है। 

बेशक आज भारतीय टीम जितनी मज़बूत नज़र आती है, उसके पीछे तमाम लोगों का योगदान है। लेकिन दादा के हिस्से का संघर्ष सबसे पहले देखा और सुना जाएगा। आखिर ऐसा कप्तान शायद ही नज़र आए, जिसने गोरों की ज़मीन पर भारतीय टीम की टी-शर्ट लहराई हो। वाकई टाइगर दो ही तरह के होते हैं, पहले जंगल में और दूसरे 22 गज की पिच पर।

‘पढ़ाने के बहाने बुलाकर फादर ने छुए मेरे प्राइवेट पार्ट, संभोग का टॉपिक पढ़ाकर करना चाहा यौन शोषण’

अरुणाचल प्रदेश में एक पादरी पर फिर यौन उत्पीड़न का इल्जाम लगा है। पीड़िता ने फेसबुक के जरिए लोगों से मदद की गुहार लगाई है। नैनी रिला (Nani Rila) नाम की लड़की ने फेकबुक ग्रुप NEWS & VIEWS OF ARUNACHAL पर आपबीती को साझा किया है। इस पोस्ट में उन्होंने महिला थाने में कराई FIR की कॉपी भी शेयर की है।

इस कॉपी के अनुसार 22 वर्षीय नैनी ईटानगर में चाइल्डलाइन के डॉन बोस्को कॉलेज की छात्रा हैं। वे वहाँ वोकेशनल कोर्स पढ़ती हैं। उनका आरोप है कि उनके कंपाउंड में ही रहने वाले चाइल्डलाइन के निदेशक फादर डॉ साइरियक ने उनका यौन उत्पीड़न किया।

एफआईआर की कॉपी
एफआईआर की कॉपी

नैनी लिखती हैं, “12 जून को मुझे करीब 8 बजे साइरियक ने पढ़ाने के नाम पर डाइनिंग हॉल में बुलवाया और मेरे प्राइवेट पार्ट्स को छूने लगे। मैं हैरान हो गई और वहाँ से भाग आई। इसके बाद मेरा फोन उन लोगों ने छीन लिया और कैंपस का गेट भी बंद कर दिया। मैं चाहकर भी अपने माता पिता से ये बात साझा नहीं कर पाई।”

“13 जून को फिर सुबह 10 बजे, जब मैं पढ़ रही थी। फादर साइरियक एक किताब लेकर आए। इस किताब का नाम, ‘कॉल्ड टू क्लाइंब हायर’ था। उन्होंने मुझे कहा कि ये किताब कैथोलिक पादरी ने लिखी है। तुम्हें इसे पढ़ना चाहिए। इसके बाद उन्होंने मुझे उस किताब का 2 चैप्टर शुरू करवा दिया जो मुख्यत: पार्टनर फॉर लाइफ और महिला-पुरुष के बीच मानसिक और शारीरिक संबंधों पर आधारित था।”

“फिर, वो मुख्यत: मुझे किताब के पृष्ठ नंबर-37 पर ले गए। जहाँ संभोग के बारे में लिखा था। इसके बाद उन्होंने मेरा यौन उत्पीड़न करने का प्रयास किया। मैंने उनके इरादे समझते हुए उनका विरोध किया और 14 जून को अपने पिता को सब बताने की हिम्मत जुटाई। मगर, तब फादर ने मेरा फोन मुझसे छीन लिया।”

नैनी के मुताबिक, इस घटना के शाम को उसकी माँ उससे मिलने आईं। हालाँकि, वो उस दिन अपने पिता से मिलना चाहती थीं। ताकि वह फादर के इरादे उन्हें बता सके। लेकिन तब ऐसा नहीं हुआ। करीब 6-6:15 बजे उन्होंने उनके कुक से एक छोटा सा फोन लिया और अपने पिता को फोन करके सारी बातें बताईं।

नैनी लिखती हैं कि सब कुछ जानने के बाद भी जब उनके पिता अनुमानित समय तक नहीं आए। तो वह कैंपस से भाग निकलीं और पुलिस को सब बताया। नैनी की बात सुनकर पुलिस उनके साथ फादर को पकड़ने कैंपस में भी आई। लेकिन, फादर ने खुद को कमरे में बंद कर लिया और कहने लगे कि जब तक मजिस्ट्रेट नहीं आते गेट नहीं खुलेगा।

अब अपनी इस शिकायत के जरिए नैनी ने गुहार लगाई है कि इस मामले पर उचित कार्रवाई होनी चाहिए। क्योंकि फादर केवल उनके लिए ही नहीं, बल्कि कंपाउंड भी लड़की/महिला के लिए सुरक्षित इंसान नहीं है।

ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती पर टिप्पणी: अमीश देवगन के खिलाफ गिरफ्तारी पर लगी रोक बढ़ी, मामले की जाँच रहेगी निलंबित

सुप्रीम कोर्ट ने न्यूज 18 इंडिया के पत्रकार और एंकर अमीश देवगन की सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करने के मामले में गिरफ्तारी पर लगी रोक को अगले आदेश तक बढ़ा दिया है। साथ ही अदालत ने कहा कि मामले की जाँच भी निलंबित रहेगी।

न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की खंडपीठ ने बुधवार (जुलाई 8, 2020) को अमीश देवगन के वकील सिद्धार्थ लूथरा की दलीलें सुनने के बाद याचिकाकर्ता के खिलाफ जाँच एवं दंडात्मक कार्रवाई पर रोक अगले आदेश तक लिए बढ़ा दी। लूथरा ने दलील दी कि जाँच की स्थिति रिपोर्ट दाखिल कर दी गई है, जैसा कि पिछली सुनवाई में निर्देश दिया गया था।

इसके बाद खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वे उन शिकायतकर्ताओं को भी याचिका की प्रतियाँ दे दें, जिन्हें आज तक नहीं उपलब्ध कराई जा सकी है। पीठ ने शिकायतकर्ता को दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद याचिकाकर्ता रिजॉइंडर (जवाबी हलफनामा) दाखिल कर सकता है।

गौरतलब है कि 26 जून को सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती पर अपनी टिप्पणी के बाद न्यूज 18 एंकर अमीश देवगन के खिलाफ दर्ज कई एफआईआर पर जाँच और इन एफआईआर पर कठोर कार्रवाई करने पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख तक रोक लगा दी थी।

देवगन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा था कि उनके मुवक्किल ने अपने शो के दौरान अनजाने में गलती की थी जिसके लिए उन्होंने बाद में सार्वजनिक माफी माँगी थी। पत्रकार के खिलाफ “जुबान फिसलने” के कारण एफआईआर दर्ज करना अन्यायपूर्ण है और उत्पीड़न के दायरे में है।

लूथरा ने कहा था, “अगर ऐसा होने लगे, जहाँ लोगों को जुबान फिसलने के कारण समस्या से सामना करना पड़े तो क्या होगा? लोग गलती करते हैं। उन्होंने माफी भी माँगी है।”

उल्लेखनीय है कि 15 जून को अपने शो ‘आर पार’ पर पूजा स्थल विशेष प्रावधान अधिनियम के संबंध में पीआईएल के बारे में एक बहस की मेजबानी करते हुए, अमीश ने ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती, जिन्हें ख़्वाजा ग़रीब नवाज़ के रूप में जाना जाता है, उन्हें “हमलावर” और “लुटेरा” कहकर बुलाया था। हालाँकि, अमीश देवगन ने सूफी संत को “लुटेरा” के रूप में संदर्भित करने के लिए भी माफी माँगी थी और इसे “अनजाने में हुई गलती बताया था।

बता दें कि इससे पहले बॉम्बे हाईकोर्ट ने रिपब्लिक भारत न्यूज़ चैनल के मुख्य सम्पादक अर्नब गोस्वामी के खिलाफ महाराष्ट्र पालघर में हुई साधुओं की हत्या के मुद्दे पर कथित साम्प्रदायिकता फैलाने के आरोप में और मुंबई के बांद्रा रेलवे में प्रवासी कामगारों के जमा होने को लेकर मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज की गई 2 FIR पर रोक लगा दी है।

दिल्ली दंगों का आरोपित फैसल फारूक निकला मौलाना साद का बेहद करीबी, चार्जशीट में सामने आई दोनों के बीच कनेक्शन की बात

दिल्ली पुलिस द्वारा पूर्वोत्तर दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के संबंध में दायर चार्जशीट में एक और खुलासा हुआ है। जहाँ विवादास्पद इस्लामिक मौलवी और निजामुद्दीन मरकज का मास्टरमाइंड मौलाना साद दिल्ली दंगों के आरोपित राजधानी स्कूल के मालिक फैसल फारूक का बेहद करीबी निकला है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चार्जशीट में तबलीगी जमात के प्रमुख मौलाना का नाम पहली बार लिया गया है। उसमें यह भी कहा गया कि, जहाँ एक तरफ मौलाना साद ने तबलीगी जमात के सत्ता को हासिल किया। वहीं राजधानी स्कूल के मालिक फैसल फारूक और हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों के मुख्य आरोपित ने पूर्वोत्तर दिल्ली में अपने रियल एस्टेट अधिग्रहण को भी बढ़ाया था।

चार्जशीट में मीडिएटर के रूप में मुस्तफाबाद के आप (APP) विधायक हाजी यूनुस का भी उल्लेख किया गया है।

जमाती मुखिया मौलाना साद मार्च में कोरोना वायरस के शुरुआती दौर में चर्चा में आया था। जब दिल्ली के निज़ामुद्दीन मरकज़ में उसने तबलीगी जमातियों के लिए मजहबी कार्यक्रम का आयोजन किया था। जिसके बाद बड़ी तादाद में वहाँ से कोरोना वायरस संक्रमितों को निकाला गया था। जिसके बाद अब आरोप है कि उसका संबंध दिल्ली दंगों के मास्टरमाइंड फैसल फारूक से भी है।

चार्जशीट में 2014 में साद के मरकज की सत्ता में आने के बाद फारूक और उनके पिता द्वारा खरीदी गई संपत्तियों की एक सूची का उल्लेख किया गया है। जिसमें लिखा है, “मौलाना साद 2014 में तब्लीगी जमात में सत्ता में आए। फ़ारूक़ मरकज़ आने वाले नियमित प्रतिभागियों में से एक है। इसके साथ ही वह तबलीगी जमात के अब्दुल अलीम के बेहद करीबी भी है। वहीं अब्दुल अलीम मौलाना साद का खास सहयोगी था, जो उससे सीधे संपर्क में था।”

चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि दिल्ली दंगों में तबलीगी जमात से जुड़े संबंधों को मद्देनजर रखते हुए आगे की जाँच की जा रही है। इस बीच, आम आदमी पार्टी के विधायक यूनुस ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज कर दिया है। और यह भी कहा है कि दिल्ली पुलिस द्वारा अभी तक उस पर लगाए गए आरोपो को साबित नहीं किया गया हैं।

मौलाना साद और फैसला फारूक का कनेक्शन

गौरतलब है कि राजधानी स्कूल के मालिक फैजल फारुख से पूछताछ के लिए कड़कड़डूमा कोर्ट ने पुलिस को एक दिन का रिमांड सोमवार (जुलाई 6, 2020) को दे दिया है। हालाँकि, इससे पहले मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने फारुख का पुलिस रिमांड देने से इनकार कर दिया था।

पुलिस ने रिमांड माँगते हुए कहा था कि आरोपित से यह पूछताछ करनी है कि दंगों में बड़ी गुलेल को राजधानी स्कूल की छत पर कैसे लगाया गया और इस गुलेल का प्रयोग इलाके में आगजनी के लिए कैसे किया गया।

करीब डेढ़ घंटे दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि इस मामले की जाँच जरुरी है और पुलिस के पास जाँच के लिए एक दिन का ही हिरासत लेने का अधिकार बचा है। उसके बाद कोर्ट ने फैसल फारुख को एक दिन की पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया था।

कथित तौर पर दिल्ली पुलिस ने अदालत में दायर चार्जशीट में फैजल फारुख को एक मुख्य साजिशकर्ता के रूप चिन्हित करते हुए कहा था कि जब पूर्वोत्तर दिल्ली में दंगे हो रहे थे, उस समय वो तबलीगी जमात के प्रमुख मौलाना साद के करीबी अब्दुल अलीम के संपर्क में था।

दंगे के दौरान फैजल फारुख के स्कूल की छत पर एक बड़ा गुलेल लगाया गया था। इसकी मदद से हिंदुओं और उनकी संपत्तियों और पेट्रोल बम से निशाना बनाया गया था। दंगों में इस स्कूल को कोई नुकसान नहीं पहुॅंचा था। लेकिन इसके ठीक बगल में स्थित डीआरपी पब्लिक स्कूल तबाह हो गया था। पुलिस को राजधानी स्कूल की छत की चारदीवारी पर लगाई गई गुलेल और अन्य ज्वलनशील पदार्थ बरामद हुए थे।

जाँच के दौरान यह पाया गया था कि हिंसा बड़ी साजिश के तहत हुई और राजधानी स्कूल का मालिक फैजल फारुख हिंसा के ठीक पहले पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के कई नेताओं, पिंजरा तोड़ ग्रुप, निज़ामुद्दीन मरकज़, जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी और देवबंद के कई मौलवियों-आलिमों के संपर्क में था। उसके मोबाइल से इस बात के सबूत मिले हैं।

चार्जशीट में अल हिन्द हॉस्पिटल के मालिक डॉक्टर एमए अनवर का नाम भी शामिल

बता दे इससे पहले दिल्ली में फरवरी में हुए हिंदू विरोधी दंगे के दौरान 20 वर्षीय दिलबर नेगी की हत्या मामले में दाखिल चार्जशीट से नया खुलासा हुआ था। इसमें मुस्तफाबाद में हुए दंगों का मास्टरमाइंड डॉक्टर एमए अनवर को भी बताया गया था।

पुलिस द्वारा दायर आरोप-पत्र के अनुसार फारुकिया मस्जिद में होने वाले विरोध-प्रदर्शन के आयोजक अरशद प्रधान और अल हिन्द हॉस्पिटल के मालिक डॉक्टर एमए अनवर थे। जिसमें दंगाइयों की भीड़ ने दिलबर को तलवार से काटने के बाद जलते हुए घर में आग के हवाले कर दिया था।

15 जनवरी के बाद से ही फारुकिया मस्जिद से कई वक्ताओं ने लोगों को उकसाना शुरू कर दिया था। यहाँ पर अवैध रूप से CAA और NRC का विरोध चल रहा था, जिसमें अलग-अलग तारीख में भाषण देकर लोगों को यह कहा जाता था कि NRC लागू होने के बाद उन्हें नागरिकता नहीं दी जाएगी, उन्हें डिटेंशन कैंप में डाल दिया जाएगा।

रवीश कुमार जैसे दूसरे धर्म वाले, चाहे वो कितना भी हमारे पक्ष में बोलें, नरक ही जाएँगे: जाकिर नाइक

इस्लामी उपदेशक (हालाँकि कट्टरपंथी) ज़ाकिर नाइक का एक नया वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो अपने ही पक्ष में बोलने वालों को बद्दुआ देता दिख रहा है। भगोड़ा ज़ाकिर नाइक फ़िलहाल भारत से फरार है और मलेशिया में रह रहा है। उसके वीडियोज देख कर कई युवक आतंक का रुख कर लेते हैं। अब एक नए वीडियो में ज़ाकिर नाइक रवीश कुमार जैसे पत्रकारों पर तल्ख़ टिप्पणी करता दिख रहा है।

दरअसल, ज़ाकिर नाइक ने सवाल पूछा गया था कि दूसरे धर्म वालों का क्या होगा? सवाल था कि आजकल रवीश कुमार जैसे ‘अच्छे दिल वाले’ पत्रकार भी हैं, जो सच्चाई दिखाते हैं, सच्चाई का साथ देते हैं और दूसरे मजहब वालों का पक्ष लेते हुए ‘दमनकारियों’ के खिलाफ बोलते हैं। सवाल में ये भी कहा गया था कि मीडिया में रवीश ऐसे अकेले पत्रकार नहीं हैं बल्कि और भी हैं जो समुदाय विशेष से तो नहीं हैं लेकिन उनका पक्ष लेते हैं।

सवाल था कि अगर ये पत्रकार इस्लाम का अनुयायी बने बिना ही मरें तो उनका क्या होगा, अल्लाह उनके साथ क्या करेगा? क्या उन लोगों का भी यही अंजाम होगा, जो अन्य काफिरों का होता है? ज़ाकिर नाइक ने इस पर कहा कि सवाल पूछने वाले के मन में ये था कि दूसरे धर्म वालों में भी कई प्रकार के लोग होते हैं, यानी कुछ बहुत अच्छे दिल वाले भी हैं, होते हैं। सवाल को समझाने के बाद ज़ाकिर नाइक ने जो उत्तर दिया, वो सुनने लायक है।

बकौल ज़ाकिर नाइक, रवीश कुमार हों या ‘समुदाय विशेष का पक्ष लेने वाले’ अन्य दूसरे धर्मों वाले, उन सभी के लिए समान सज़ा की ही व्यवस्था है। ज़ाकिर नाइक ने अपने अनुयायियों को समझाया कि जन्नाह अलग-अलग तरह के होते हैं, जैसे फिरदौस और फिरदौस आला। नाइक ने कहा कि जब कोई जन्नत में जाता है तो सबके लिए अलग-अलग लेवल की व्यवस्था की गई है, सारे जन्नाह समान नहीं होते।

ज़ाकिर नाइक ने कहा कि मजहब के सभी लोग भले ही उच्च-कोटि वाले जन्नाह में नहीं जाएँगे लेकिन मजहब के सारे सच्चे लोग जन्नाह में ही जाएँगे। दूसरे धर्म वालों के बारे में उसने कहा कि जन्नाह की तरह नरक भी अलग-अलग प्रकार के होते हैं और दूसरे धर्म वाले दिल के कितने भी अच्छे क्यों न हों, उन्हें जाना नरक में ही है। ज़ाकिर नाइक ने स्पष्ट कहा कि दूसरे धर्म वालों का नरक में जाना तय है। बकौल नाइक, अगर कोई मरते समय इस्लाम का अनुयायी नहीं है तो उसके लिए नरक की ही व्यवस्था है।

इससे पहले एक वायरल वीडियो में ज़ाकिर नायक की तारीफ करते हुए महेश भट्ट ने कहा था, “मैं शुरुआत में डॉ. ज़ाकिर नाइक को शक्तिशाली ब्रिटिश साम्राज्य का सामना करने के लिए उनकी हिम्मत को सलाम करता हूँ। मैं उनके साहस को सलाम करता हूँ, जो उनके इमान से आता है। अगर उनके दिल में कुछ गलत होता, तो वह इन गुंडों के साथ लड़ने का जोखिम नहीं उठाते। दुनिया जानकारी नहीं सिर्फ मनोरंजन चाहती है। हम भारतीयों के लिए हमारे भाई (ज़ाकिर नाइक) राष्ट्रीय गौरव हैं, इसके साथ ही एक बेशकीमती खजाना भी।”

उमड़ने लगा ‘बुरहान वानी प्रेम’… आतंकवादी को ‘शहीद’ साबित करने में जुटे अलगाववादी

आज ट्विटर पर तमाम पाकिस्तानी और कश्मीर अलगाववादी एक आतंकवादी को याद कर रहे हैं। आज से ठीक चार साल पहले भारी सेना ने आतंकवादी बुरहान वानी को मार गिराया था। उसी की मौत को आज अलगावादियों का एक बड़ा समूह याद कर रहा है। ट्विटर पर उसकी तारीफ में यह समूह जुटा हुआ है। साथ ही ये लोग कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा हटाने का विरोध भी कर रहे। 

आज ट्विटर पर इस तरह के ट्वीट की भरमार है, जिसमें सिर्फ बुरहान वानी का ज़िक्र हो रहा है। लेकिन अफ़सोस एक आतंकवादी के तौर पर नहीं बल्कि एक शहीद के तौर पर। 

पाकिस्तान के लोग बुरहान वानी को शहीद का दर्जा दे रहे हैं। 

इनमें से कुछ लोग उसे नस्लीय घृणित वामपंथी चे ग्वेरा का भी दर्जा दे रहे हैं। 

संभावित रूप से पाकिस्तान का ट्वीटर एकाउंट, तुर्की महिला के नाम से बुरहान वानी की प्रशंसा कर रहा है। 

सकीबुल नाम का व्यक्ति, जिसके ट्विटर नाम के ठीक आगे बंग्लादेश का झंडा लगा है, वह बंग्लादेश से होने का दावा कर रहा है। उसने बुरहान वानी को शहीद बताया है। 

एक और ट्विटर एकाउंट जो खुद कश्मीर से होने का दावा कर रहा है, उसने यह लिखा कि वानी के मरने के बाद घाटी में कई वानी पैदा होंगे।

साल 2016 के जुलाई महीने में सुरक्षाबलों और आतंकवादी बुरहान वानी के बीच काफी गोलीबारी हुई थी। अनंतनाग ज़िले के कोंकणनाग में चली इस गोलीबारी के दौरान सुरक्षाबलों ने बुरहान वानी को मार गिराया था।

पिछले कई सालों से सुरक्षाबल इस आतंकवादी की तलाश में जुटे हुए थे। हैरानी की बात यह थी कि वानी की मौत के बाद तमाम लोग और मीडिया समूह उसकी छवि बतौर ‘शहीद’ स्थापित करने में जुट गए थे। 

मशहूर ‘पत्रकार’ बरखा दत्त ने बुरहान वानी को ‘स्कूल के हेडमास्टर का बेटा’ बताया था। जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सेना को शुभकामनाएँ देने की जगह बुरहान वानी की चिंता में अधिक व्यस्त थे। सामाजिक कार्यकर्ता कविता कृष्णन ने इस कार्रवाई पर खेद जताते हुए इसे असंवैधानिक बताया था।

छत्तीसगढ़: सड़कों के अभाव में एंबुलेंस नहीं पहुँची गाँव, स्वास्थ्यकर्मियों ने गर्भवती महिला को टोकरी में बैठाकर पहुँचाया अस्पताल

छत्तीसगढ़ के कोंडागाँव के मोहनबेड़ा ग्राम से एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में कुछ स्वास्थ्यकर्मी एक गर्भवती महिला को टोकरी में बैठाकर डिलीवरी के लिए अस्पताल लेकर जाते दिख रहे हैं।

समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, गाँव की सड़कों के कारण एंबुलेंस गाँव तक नहीं पहुँच सकती थी। इसलिए महिला को टोकरी में बैठाकर अस्पताल तक ले जाया गया।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, गर्भवती महिला की नाजुक हालत देखते हुए 7 जुलाई को उसके पति ने महतारी एक्प्रेस को फोन लगाया। इसके बाद 102 नंबर से दो स्वास्थ्यकर्मी आए।

मगर, गाँव तक का रास्ता खराब होने के कारण आगे जाना संभव नहीं हुआ। दोनों इस दौरान लगभग 3 किलोमीटर चले। वहाँ के हालात देखते हुए उन्होंने गाँव वालों से मदद माँगी।

फिर, उन दोनों ने ग्रामीणों की मदद से टोकरी और रस्सियों से एक डोला बनाया और महिला को उसमें बैठाकर 3 km तक चलकर उसे गाड़ी तक लाए। इसके बाद वे उसे लेकर अस्पताल पहुँचे। यहाँ उन्होंने उसकी डिलीवरी करवाई।

कोंडागाँव के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी टीआर कंवर ने बताया कि उन्होंने 102 नंबर पर एंबुलेंस को कॉल किया था। लेकिन एंबुलेंस वहाँ तक नहीं पहुँच पाई। वह रिमोट एरिया है। सड़क की अनुपलब्धता के कारण वाहन वहाँ नहीं जा सकते। डिलीवरी जिला अस्पताल में हो चुकी है। बच्चा और माँ दोनों सुरक्षित हैं।

गौरतलब है कि इस घटना के सामने आने के बाद जहाँ स्वास्थ्यकर्मियों को लेकर कहा जा रहा है कि उन्होंने मानवता की मिसाल पेश की। वहीं गाँव में सड़कों के अभाव को देखकर लोग सरकार की आलोचना कर रहे हैं। और कुछ का कहना है कि छत्तीसगढ़ में गावों का विकास तभी हो पाएगा, जब वहाँ नक्सलियों का समूल विनाश होगा।