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शी जिनपिंग के करीबी जनरल झाओ ने दिए थे भारतीय सेना पर हमले के आदेश: US खुफिया एजेंसी का खुलासा

गलवान घाटी पर भारत-चीन सेना के बीच हुई आपसी झड़प के बाद अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने एक बड़ा खुलासा किया है। इस खुलासे में मालूम चला है कि भारतीय सैनिकों पर हमला करने के लिए चीन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उन्हें आदेश दिए थे। यानी ये हमला पहले से सुनियोजित था।

यूएस न्यूज के अनुसार, चीन के सबसे ताकतवर जनरल झाओ जोंगकी ने ही इस पूरे ऑपरेशन के लिए सेना को आदेश दिएl जोंगकी वेस्टर्न थिएटर का प्रमुख है। वह इससे पहले भारत के साथ कई तनातनी (डोकलाम जैसी) वाली घटनाओं को अंजाम दे चुका है। उसका उद्देश्य इस बार भी कुछ ऐसा ही था।

वियतनाम, डोकलाम, गलवान...चीन की शर्मिंदगी के सबब बने जनरल झाओ जोंगकी

रिपोर्ट की मानें तो जोंगकी सोचता था कि चीन को USA और उससे जुड़े देशों के सामने कमजोर नहीं दिखाई पड़ना चाहिए। इसलिए वह इस हमले के जरिए भारत को सबक सिखाना चाहता था। लेकिन उसकी चाल उसपर उलटी पड़ गई और पूरे हमले में चीन के 40 से ज्यादा सैनिक मारे गए। इसके अलावा हमले के बाद भारतीयों ने काफी तादाद में चीनी सामान और चीनी तकनीक का बहिष्कार भी शुरू कर दिया।

रिपोर्ट कहती है कि इस कार्रवाई के जरिए चीन भारत पर दबाव बनाना चाहता था। उसे लग रहा था कि ऐसी कोशिशें करके वार्ता के दौरान भारतीय पक्ष को दबाया जा सकेगा। मगर, उसके प्लान के मुताबिक कुछ नहीं हुआ। अमेरिका की इंटेलीजेंस रिपोर्ट में दावा किया गया कि चीन की योजना इसलिए भी फेल रही क्योंकि भारत अमेरिका के पाले में आता दिखा।

क्या शी जिनपिंग को थी जानकारी?

यहाँ बता दें कि यूएस खुफिया एजेंसी की इस रिपोर्ट में इस बात को साफ नहीं किया गया है कि पूरी साजिश में राष्ट्रपति शी जिनपिंग किस सीमा तक शामिल थे। लेकिन चीनी सेना के विशेषज्ञों का यह मानना है कि उन्हें निश्चित रूप से इस हमले के आदेशों के बारे में सूचना रही होगी। क्योंकि आदेश देने वाले जनरल झाओ, शी जिनपिंग के बेहद करीबी माने जाते हैं।

दिलचस्प बात ये है कि अमेरिकी अनुमान के मुताबिक इससे पहले वर्ष 1979 में वियतनाम युद्ध के दौरान जनरल झाओ पीएलए में थे और माना जाता है कि उनके कुप्रबंधन की वजह से ही विवाद काफी बढ़ गया था। वर्ष 2017 में डोकलाम विवाद के दौरान भी जनरल झाओ शामिल थे। इस दौरान भी भारतीय सैनिकों ने सफलतापूर्वक चीनी सैनिकों को घुटने टेकने के लिए मजबूर कर दिया था।

याद दिला दें कि आपसी झड़प की खबर मीडिया में आने के बाद चीन के विदेश मंत्रालय ने बयान दिया था कि भारतीय सैनिकों ने चीनी सैनिकों पर पहले हमला किया। लेकिन अब यूएस खुफिया एजेंसी की यह रिपोर्ट उन दावों से बिलकुल उलट है।

इस मामले पर अमेरिका का ये भी कहना है कि जनरल झाओ ने इस हमले में मारे गए चीनी सैनिकों की याद में एक प्रार्थना सभा का आयोजन किया था। मगर, इस बारे में चीनी मीडिया में कुछ भी जानकारी जानबूझकर नहीं दी गई। यही नहीं चीन के सोशल मीडिया वेबसाइटों पर भी इस हार के बारे में काफी आलोचना की गई जिसे बाद में सेंसर कर दिया गया।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारत-चीन मामले पर क्या कहा?

14-15 जून की रात हुई इस झड़प को लेकर अमेरिका राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में कहा, “ये बहुत मुश्किल स्थिति है। हम भारत से बात कर रहे हैं। चीन से बात कर रहे हैं। उनके यहाँ बहुत समस्या है। वे लोग मारपीट पर उतर आए हैं। हम देखते हैं, आगे क्या होगा। हम उनकी मदद करने की कोशिश कर रहे हैं।”

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनों गलवान घाटी में भारत चीन सैनिकों के बीच जो कुछ भी हुआ। उसमें दोनों देशों के जवान हताहत हुए। इसी के मद्देनजर भारत सरकार ने चीन का रवैया देखते हुए आर्मी को अपने मुताबिक कार्रवाई करनी की छूट भी दी। साथ ही बातचीत का रास्ता भी खुला रखा।

इसके बाद LAC पर जारी खींचतान के बीच सोमवार को लेफ्टिनेंट जनरल स्तर की बातचीत हुई। एलएसी के दूसरी ओर चीन के हिस्से में मोल्डो इलाके में दोनों सेनाओं के अधिकारियों के बीच बैठक हुई। यह बैठक करीब 12 घंटे के बाद खत्म हुई। हालाँकि, इस बैठक के बाद कोई प्रभावी नतीजे नहीं निकलकर आए।

राहत की बात ये है कि चीन की नापाक इरादों को भाँपते हुए सीमा पर भारतीय सेना पहले से पूरी तरह से मुस्तैद हो गई है। वहीं, सैटेलाइट इमेज से पता चल रहा है कि चीन अपनी सीमा की ओर से कई तरह की हरकतें कर रहा है। जिसे देखते हुए भारतीय एयरफोर्स ने भी अपने फाइटर प्लेनों को तैनात कर दिया है।

झारखंड में धर्म परिवर्तन को लेकर बवाल, धनबाद में गुस्साए स्थानीय लोगों ने चर्च में की तोड़फोड़

झारखंड में कोरोना संकट के बीच जमकर धर्मांतरण का खेल चल रहा है। राज्य में ताजा मामला धनबाद झरिया का है, जहाँ लोगों के पुनर्वास के नाम पर दो दर्जन परिवारों का धर्म परिवर्तन कर उन्हें ईसाई बना दिया गया। ये मामला सामने आने के बाद हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों ने इसका जमकर विरोध किया और प्रशासन को शिकायत दर्ज कराई है। 

जानकारी के मुताबिक राज्य में कोरोना की आड़ में मिशनरीज धर्मांतरण करा रहे हैं। सोमवार (जून 22, 2020) को भी एक मामला सामने आया है। झरिया के विस्थापितों के लिए झरिया विहार के नाम से बसाए गए बेलगड़िया टाउनशिप में धर्म परिवर्तन को लेकर सोमवार को जमकर बवाल हुआ। स्थानीय लोगों ने यहाँ नवनिर्मित चर्च को घेर घंटों हंगामा किया। चर्च के ऊपर लगे धार्मिक चिन्ह (क्रॉस) को भी लोगों ने तोड़ दिया।

लोगों का आरोप है कि यहाँ पर धर्मांतरण का खेल काफी पहले से चल रहा है, मगर राज्य सरकार की तरफ से किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। और तो और, लोगों का कहना है कि चर्च बनाने के लिए जमीन भी धोखे से खरीदी गई है।

मामले की जानकारी मिलते ही सिंदरी विधायक इंद्रजीत महतो, विहिप के जिला मंत्री रमेश पांडेय, भाजपा नेता मुकेश पांडेय समेत कई लोग वहाँ पहुँचे। देखते-देखते वहाँ एक हजार से अधिक लोगों की भीड़ जमा हो गई।

स्थानीय लोगों ने बताया कि ईसाई मिशनरी से जुड़े कुछ लोग बेलगड़िया टाउनशिप के गरीब-गुरबा लोगों को बरगलाकर व पैसे का प्रलोभन दे कर धर्म परिवर्तन करा रहे हैं। सभी लोग धर्मांतरण के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग कर रहे थे।

हंगामे के दौरान ही ईसाई मिशनरी के दो युवा धर्म प्रशिक्षक काइना पंसल और सुशांत प्रधान पहुँचे। बताया जा रहा है कि काइना पंसल अरुणाचल प्रदेश के जबकि सुशांत प्रधान ओडिशा के रहने वाले हैं। फिलहाल पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।

सिंदरी विधायक ने धर्मांतरण पर आक्रोश जताते हुए कहा, “हेमंत सरकार बनते ही मिशनरी गतिविधियों में तेजी आई है। लग रहा है कि यह झामुमो नहीं, मिशनरियों की सरकार है। राज्य में धर्मांतरण पर रोक है। बावजूद दो दर्जन से अधिक परिवारों का धर्मांतरण कराया गया। इसके कारण समाज में अशांति फैल गई। पुलिस धर्मांतरण में लिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे अन्यथा भाजपा सड़क से सदन तक आंदोलन करेगी।” 

संवेदनशील माहौल को देखते हुए मौके पर पुलिस की भारी तैनाती कर दी गई है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। एसएसपी अखिलेश बी वारियर का कहना है कि जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सिंदरी डीएसपी की अगुवाई में पुलिस मामले की छानबीन में जुटी है। पता लगाया जा रहा है कि आखिर ऐसी परिस्थिति कैसे बनी। 

गौरतलब है कि झारखंड में धर्मांतरण की गतिविधियों को लेकर पहले भी विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा था कि झारखंड में बीजेपी सरकार के रहते आदिवासियों का जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए सख्त कानून लाया गया था। लेकिन, राज्य में झामुमो, कॉन्ग्रेस और राजद गठबंधन के सत्तासीन होते ही धर्मांतरण ने जोर पकड़ लिया है। 

TOI ने जिस दंपती को बताया मृत, वो निकला सकुशल; पत्नी ने कहा- पत्रकारिता का स्तर काफी नीचे गिरा

देश के सबसे बड़े मीडिया नेटवर्क्स में से एक ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ (TOI) ने अपनी वेबसाइट और अख़बार के पहले ही पन्ने पर एक सामूहिक हत्याकांड की ख़बर में ऐसे लोगों की तस्वीरें लगा कर चला दी, जो ज़िंदा हैं और सकुशल हैं। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने ख़बर प्रकाशित किया कि कोलकाता के एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी और सास की हत्या कर के ख़ुद को भी गोली मार ली। लेकिन, TOI ने इसमें शिल्पी अग्रवाल नामक फूड ब्लॉगर और उनके पति अमित अग्रवाल की तस्वीर लगा दी। नाम भी उनका ही डाल दिया। जबकि दोनों सकुशल हैं।

शिल्पी अग्रवाल फेसबुक पर ‘Food And Flavors’ नामक पेज चलाती हैं, जिसके माध्यम से वो लोगों को तरह-तरह के व्यंजन बनाने की रेसिपी से अवगत कराती हैं। वो तमाम तरह के वीडियो बना कर कई डिश बनाने की विधि लोगों को समझाती हैं। अचानक से जब ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ (TOI) ने उनकी और उनके पति की तस्वीर इस हत्याकांड वाली ख़बर में लगा दी तो उनके पास कई मैसेज आने लगे, जिसके बाद उन्हें सफाई देनी पड़ी कि वो ठीक हैं।

TOI ने पहले पन्ने पर छाप दी ग़लत फोटो के साथ तस्वीर

इसके बाद शिल्पी ने TOI की उस ख़बर को अपने लैपटॉप पर खोल कर उसका वीडियो बनाया और फेसबुक पर पोस्ट करते हुए लिखा कि देखिए भारत में पत्रकारिता का स्तर कितना नीचे गिर गया है। उन्होंने कहा कि TOI या भारतीय मीडिया में उनका जो भी थोड़ा-बहुत विश्वास बचा था, वो इस ख़बर के साथ ही उड़न-छू हो गया है। साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि वो और उनके पति अमित अग्रवाल पूरी तरह ठीक हैं और इस ख़बर से उनका दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है।

TOI की ख़बर के बाद शिल्पी अग्रवाल ने जारी किया बयान

मंगलवार (जून 23, 2020) को उन्होंने अपने पेज ‘Food And Flavors’ पर लिखा कि इस ख़बर के सामने आने के बाद सुबह से ही उनके और उनके परिवार के जीवन में हलचल मची हुई है क्योंकि लोगों के फोन कॉल्स आ रहे हैं और सभी बेचैन हैं। उन्होंने TOI से तुरंत अपनी ग़लती सुधारने और आधिकारिक रूप से माफ़ी माँगने को कहा। उन्होंने अपने जानने वालों से कहा कि वो और अमित ठीक हैं और साथ में ख़ुश हैं, पहले से भी ज्यादा।

TOI ने जिस ख़बर को प्रकाशित किया था, उसमें लिखा था कि अमित कोलकाता से अपनी पत्नी के पास बेंगलुरु गए और फिर उनकी हत्या कर दी। इसमें पुलिस के बयान से घर का पता तक दिया हुआ था। जॉइंट कमिश्नर का बयान भी था कि उन्हें घर से सुसाइड नोट मिला है। शिल्पी का मृत शरीर अपार्टमेंट से मिलने की बात कही गई। हालाँकि, TOI ने तस्वीर तो हटा दी है। साथ ही स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उन्होंने अनजाने में ग़लत फोटो अपलोड कर दी थी, जिसका उन्हें खेद है।

TOI ने बाद में फोटो बदल कर माँगी माफ़ी

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ (TOI) की इस ख़बर में भी पत्नी को गोली मार कर आत्महत्या करने वाले आरोपित का नाम अमित अग्रवाल ही है और साथ ही उसकी पत्नी का नाम शिल्पी अग्रवाल है, जो फूड ब्लॉगर शिल्पी अग्रवाल और उनके पति अमित के नाम के समान ही है। लेकिन, उसने एक ज़िंदा कपल की फोटो एक आपराधिक हत्याकांड वाली ख़बर में चला दी, जिससे न सिर्फ़ कपल बल्कि उनके पूरे परिवार को प्रताड़ना झेलनी पड़ी।

महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा चल पड़े: देखें रथयात्रा की मनमोहक तस्वीरें

सुप्रीम कोर्ट द्वारा हरी झंडी मिलने के साथ ही जगन्नाथ पुरी में रथयात्रा शुरू हो गई है और इसकी तस्वीरें सामने आने लगी हैं। पहले सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा के पुरी में होने वाली जगन्नाथ रथयात्रा पर रोक लगा दी थी लेकिन बाद में केंद्र सरकार के प्रयासों के बाद इसके आयोजन का मार्ग प्रशस्त किया जा सका। यहाँ हम आपको आज मंगलवार (जून 23, 2020) को आयोजित हो रही जगन्नाथ पुरी रथयात्रा की भव्य तस्वीरें दिखा रहे हैं।

सबसे पहले जगन्नाथ पुरी की इस तस्वीरों को देखिए, जिसमें रथयात्रा के पहले की तैयारियों के बारे में पता चलता है। इन तस्वीरों में रथ की सजावट से लेकर रस्सियों और रथ को खींचने तक की व्यवस्था कैसे की गई है, इस बारे में दिखाया गया है।

इन्हीं रथों से जाएँगे जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा
रथयात्रा में मजबूत और लम्बे रस्सियों की होती है ज़रूरत
रथों की सजावट देखते ही बन रही
रथ के ऊपर की संरचना
जगन्नाथ पुरी में मौसम भी रथयात्रा के अनुकूल बन कर भगवान जगन्नाथ को प्रणाम कर रहा
भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के लिए तैयारी पुख्ता
मंदिर के भीतर जाकर अनुष्ठान की तैयारियों का जायजा लेते ब्राह्मण
रथ में जुते घोड़े

बता दें कि इस बार कोरोना संक्रमण आपदा के कारण पुरी शहर को टोटल लॉकडाउन किया गया है और इसके बाद रथयात्रा को मंदिर के 1172 सेवकों द्वारा गुंडिचा मंदिर तक ले जाया जा रहा है। हालाँकि, आम लोगों को इस रथयात्रा में हिस्सा नहीं लेने दिया जाएगा और वो टीवी पर ही भगवान के दर्शन कर सकते हैं। लेकिन, अनुष्ठान और बाकी शास्त्र सम्मत प्रक्रिया वैसे ही होगी। देखें जगन्नाथ पुरी रथयात्रा की अन्य तस्वीरें:

इस बार कोरोना वायरस को देखते हुए पूरी सजगता भी बरती गई है। सभी सेवायतों का कोरोना टेस्ट कराया गया है, जिसके बाद ही रथयात्रा की प्रक्रिया शुरू हुई है। रथयात्रा की कुछ अन्य भव्य तस्वीरें देखें यहाँ:

रथयात्रा से जुड़े लोगों ने कहा था कि जगन्नाथ भगवान की पूजा स्कन्द पुराण और अन्य पवित्र पुस्तकों में वर्णित रीति-रिवाजों के अनुसार होती रही है। 1960 में ओडिशा सरकार ने जगन्नाथ पुरी का प्रबंधन अपने हाथों में लिया था। 1964 में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि मंदिर के सारे धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन किया जाए। हाईकोर्ट में भी ओडिशा सरकार ने कह दिया कि वो इस साल जगन्नाथ पुरी रथयात्रा के प्रबंधन में सक्षम नहीं है। अंत में रथयात्रा को सुप्रीम कोर्ट ने अनुमति दे दी। 

डॉ राहुल बन कॉल करता था अब्दुल करीम, ब्लड/प्लाज्मा डोनेशन का लालच दे चला रहा था पूरा गैंग

दिल्ली पुलिस ने ब्लड/प्लाज्मा डोनेशन स्कैम के आरोपित को धर-दबोचा है। इस मामले में पुलिस को दिल्ली विधानसभा के स्पीकर रामनिवास गोयल से शिकायत मिली थी, जिसके बाद ये कार्रवाई की गई। गोयल के पास एक कॉल आया था, जिसमें उस तरफ से प्लाज्मा डोनेशन की बात कही गई और साथ ही रुपए की भी माँग रखी गई।

उक्त कॉलर ने फोन पर कहा था कि वो ब्लड/प्लाज्मा डोनेशन करेगा और बदले में उसने पेटीएम से पेमेंट की माँग की थी। पुलिस ने आरोपित शख्स को पकड़ लिया है, उसकी पहचान अब्दुल करीम राणा के रूप में हुई है।

कॉलर ने दिल्ली विधान सभाध्यक्ष रामनिवास गोयल को बताया कि वो दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल में बतौर डॉक्टर कार्यरत है। गोयल ने उस कॉल की पूरी डिटेल्स और उक्त व्यक्ति का नंबर पुलिस को दे दिया, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने अब्दुल करीम राणा की पहचान की और फिर उसे गिरफ़्तार कर लिया

इस पूरे मामले में जो सबसे ज्यादा चौंकाने वाला एंगल है, वह है आरोपित का छद्म हिन्दू नाम का इस्तेमाल करना। आरोपित राहुल ठाकुर के छद्म हिन्दू नाम से लोगों को कॉल किया करता था।

आरोपित अब्दुल करीम राणा उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर का रहने वाला है, जो ब्लड/प्लाज्मा डोनेशन स्कैम में लिप्त है। उसके गैंग में कई अन्य साथ भी हो सकते हैं, जिसकी पहचान के लिए उससे पूछताछ जारी है।

पुलिस ने अन्य आरोपितों की गिरफ़्तारी के लिए तलाशी अभियान प्रारम्भ भी कर दिया है। आरोपित अब्दुल करीम राणा ने अपना गुनाह स्वीकार करते हुए कई निर्दोष लोगों को ठगे जाने की बात बताई है। उसने कइयों को चुना लगाया है।

वो सबसे पहले पता लगाता था कि किस व्यक्ति को ब्लड/प्लाज्मा डोनेशन की ज़रूरत है। इसके बाद वो ख़ुद ब्लड/प्लाज्मा डोनर बन कर उसे कॉल किया करता था और फिर बदले में रुपए की माँग करता था।

अब्दुल करीम राणा इतने शातिराना ढंग से लोगों से बातचीत करता था कि लोग उसके झाँसे में आ जाते थे। इससे पहले किडनी डोनेशन के नाम पर इस तरह के फर्जीवाड़े सामने आते थे। ब्लड/प्लाज्मा डोनेशन स्कैम को लेकर ये अपनेआप में अनोखा मामला है।

पता चला है कि आरोपित अब्दुल करीम राणा ने गोयल से कैब के किराए के नाम पर 950 रुपए भी ठग लिए थे। दरअसल, गोयल के भतीजे पुनीत अग्रवाल को अपने ससुर के लिए ब्लड/प्लाज्मा डोनेशन की जरूरत थी, जिसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर इस बारे में पोस्ट किया था। वहीं से अब्दुल ने उन्हें राहुल बन कर कॉल किया।

हालाँकि, पुनीत ने कहीं और से ब्लड/प्लाज्मा का इंतजाम कर लिया था लेकिन बाद में चाचा गोयल के किसी जानकर को जरूरत पड़ी तो उन्होंने आरोपित का ही नंबर दे दिया। गोयल ने अब्दुल को कॉल कर के मेदांता अस्पताल पहुँचने की बात की, लेकिन उससे पहले उसने कहा कि उसके गूगल पे खाते में कैब के 450 रुपए डाले जाएँ। इसके बाद उसने फिर 500 रुपए मँगाए।

पैसे ट्रांसफर होने के बावजूद आरोपित न तो अस्पताल पहुँचा और न ही उसने कॉल उठाया। पुलिस ने टेक्निकल सर्विलांस का सहारा लेते हुए हुए उसे धर-दबोचा। उसने दर्जनों को इसी तरह ठगने की बात स्वीकार की है।

‘आगरा में पिछले 48 घंटे में 28 मरे’: प्रियंका ने योगी सरकार को बदनाम करने के लिए फैलाया झूठ, प्रशासन ने खोली पोल

कॉन्ग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को बदनाम करने के लिए कोरोना वायरस से हुई मौतों को लेकर झूठ फैलाया। उन्होंने एक ख़बर का हवाला देते हुए ट्वीट किया कि उत्तर प्रदेश में सिर्फ़ 48 घंटे में भर्ती हुए 28 कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की मौत हो गई है।

प्रियंका गाँधी ने दावा किया कि सरकार की नो टेस्ट-नो कोरोना की नीति पर सवाल उठे थे लेकिन सरकार ने उसका कोई जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा कि अगर उत्तर प्रदेश की सरकार सच दबाकर कोरोना मामले में इसी तरह लगातार लापरवाही करती रही तो बहुत घातक होने वाला है।

राहुल गाँधी की बहन ने लिखा कि यूपी सरकार के लिए कितनी शर्म की बात है कि इसी मॉडल का झूठा प्रचार करके सच दबाने की कोशिश की गई। हालाँकि, प्रियंका गाँधी ने जो दावा पेश किया वो झूठा था और सन्दर्भ से हट कर था और प्रशासन ने ही उनके दावे को नकार दिया।

आगरा के डीएम ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से लिखा कि नवभारत टाइम्स द्वारा अब तक हुए कुल कोरोना पॉजिटिव मरीजों की मृत्यु के सम्बन्ध में डेथ ऑडिट का हवाला प्रियंका गाँधी वाड्रा ने दिया है। लेकिन उन्होंने जानकारी दी कि पिछले 109 दिनों में आगरा जिले में अब तक कुल 1136 कोरोना के केस आए हैं एवं 79 संक्रमितों की मृत्यु हुई है।

“पिछले 48 घंटों में भर्ती हुए 28 कोरोना मरीजों की मृत्यु” – खबर की सच्चाई

प्रियंका गाँधी ने ख़बर का लिंक तो शेयर कर दिया लेकिन उन्होंने हेडलाइन से आगे पढ़ने की जहमत नहीं उठाई, जिससे उन्होंने झूठा दावा कर दिया। दरअसल, यहाँ मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने के बाद के 48 घंटे की बात कही गई थी लेकिन प्रियंका गाँधी ने पिछले 48 घंटे समझ लिया।

‘नवभारत टाइम्स’ में ‘टाइम्स न्यूज़ नेटवर्क’ के हवाले से प्रकाशित की गई इस ख़बर की बात करें तो उसमें स्पष्ट लिखा है:

“आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में कोरोना के इलाज के लिए भर्ती हुए 28 कोरोना मरीजों की एडमिट होने के 48 घंटे के भीतर ही मौत हुई है। इस बात का खुलासा खुद योगी सरकार की एक ऑडिट रिपोर्ट में हुआ है। बताया जा रहा है कि इन मरीजों को अलग-अलग तारीखों पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था और भर्ती होने के 48 घंटे के भीतर इनकी मौत हुई। अधिकारियों ने स्वास्थ्य विभाग से उन 28 मरीजों की जानकारी माँगी है, जिनकी भर्ती होने के 48 घंटे के भीतर ही मौत हो गई।”

जैसा कि आप ऊपर देख सकते हैं, इन मरीजों को अलग-अलग तारीखों में भर्ती कराया गया था, पिछले 48 घंटे के भीतर इन लोगों की मृत्यु नहीं हुई है। आगरा में अब तक कुल 79 लोगों की मौत हुई है। इसीलिए 107 दिन में 51 मौतें और मात्र 48 घंटों में 28 मौतों का आँकड़ा वैसे भी विश्वसनीय नहीं है। प्रियंका गाँधी के इस ट्वीट के बाद लोगों ने उनकी आलोचना की और साथ ही कहा कि उन्हें कम से कम ख़बर तो पढ़ लेनी चाहिए थी।

आगरा में कोरोना से हुई मौतों को लेकर प्रियंका का भ्रामक ट्वीट

इससे पहले उत्तर प्रदेश में प्रवासी मजदूरों को घर भेजने के लिए 1000 बसें उपलब्ध करवाने के नाम पर भी प्रियंका गाँधी अपनी पार्टी की फजीहत करवा चुकी हैं। बसों की जो सूची यूपी सरकार को मुहैया कराई गई थी उसमें एंबुलेंस, निजी वाहन के साथ-साथ ऑटो रिक्शा भी शामिल थे। बाद में यह भी खबर आई कि राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार के विरोध में बस ड्राइवरों ने नारे लगाए। कई बस तो ख़राब भी थे।

…अब जापान के द्वीपों पर चीन का दावा, भेजे कई जहाज: अमेरिका ने 4 बड़े चीनी मीडिया को कहा – ‘विदेशी मिशन’

लद्दाख की गलवान घाटी में भारत से उलझने के बाद अब चीन के निशाने पर जापान हो सकता है। ऐसा सैन्य विशेषज्ञों का मानना है। इन्होंने आशंका जताई है कि चीन अब पूर्वी चीन सागर में भी जापान के साथ द्वीपों को लेकर उलझ सकता है।

दरअसल, चीन और जापान दोनों ही कुछ निर्जन द्वीपों पर अपना दावा करते हैं। जिन्हें जापान में सेनकाकु और चीन में डियाओस के नाम से जाना जाता है। इन द्वीपों का प्रशासन 1972 से जापान के हाथों में है। मगर, चीन का दावा है कि ये द्वीप उसके अधिकार क्षेत्र में आते हैं और जापान को अपना दावा छोड़ देना चाहिए। इतना ही नहीं चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी तो इसपर कब्जे के लिए सैन्य कार्रवाई तक की धमकी दे चुकी है।

सेनकाकु या डियाओस द्वीपों की रखवाली वर्तमान समय में जापानी नौसेना करती है। ऐसी स्थिति में अगर चीन इन द्वीपों पर कब्जा करने की कोशिश करता है तो उसे जापान से युद्ध लड़ना होगा।

गौरतलब है कि यदि जापान और चीन के बीच हालातों के मद्देनजर कोई ऐसा युद्ध होता है तो यह तीसरी सबसे बड़ी सैन्य ताकत वाले चीन के लिए आसान नहीं होगा। पिछले हफ्ते भी चीनी सरकार के कई जहाज इस द्वीप के नजदीक पहुँच गए थे जिसके बाद दोनों देशों में टकराव की आशंका भी बढ़ गई थी।

बता दें कि द्वीपों के पास चीन की बढ़ती उपस्थिति के जवाब में जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव योशीहिदे सुगा ने इन द्वीपों को लेकर टोक्यो के संकल्प को फिर से व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सेनकाकु द्वीप उनके नियंत्रण में है और निर्विवाद रूप से ऐतिहासिक और अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत यह जापान का ही है। अगर चीन कोई हरकत करता है तो उसका जवाब दिया जाएगा।

वहीं, चीन ने जापान पर पलटवार करते हुए लिखा कि डियाओस और उससे लगे हुए अन्य द्वीप चीन का अभिन्न हिस्सा हैं। इस कारण से यह उनके अधिकार-क्षेत्र में आता है और हम इन द्वीपों के पास पेट्रोलिंग और चीनी कानूनों को लागू किया जाएगा।

यहाँ ध्यान रखने की आवश्यकता है कि जिस प्रकार चीन अपनी विस्तारवादी मानसिकता के जरिए भारत और नेपाल पर मनमानियाँ करता दिख रहा है। वही चीन अगर जापान के साथ संबंध बिगाड़ने का प्रयास किया, तो ये कदम उस पर ही भारी पड़ सकता है।

बता दें कि अगर किसी भी मामले के मद्देनजर जापान और चीन आमने-सामने आए तो अमेरिका इसमें जरूर शामिल होगा। क्योंकि, जापान और अमेरिका के बीच 1951 में सेन फ्रांसिस्को संधि हुई थी, जिसके तहत जापान की रक्षा की जिम्मेदारी अमेरिका की है।

इस संधि में यह भी बात लिखी है कि जापान पर हमला अमेरिका पर हमला माना जाएगा। इस कारण अगर चीन कभी भी जापान पर हमला करता है तो अमेरिका को इनके बीच आना पड़ेगा। और चीन को लेकर अमेरिका का रवैया इन दिनों कितना सख्त है, इससे सब वाकिफ हैं।

कोरोना वायरस से सर्वाधिक प्रभावित होने वाले देश यानी अमेरिका के राष्ट्रपति कोरोना के लिए पूर्ण रूप से चीन को जिम्मेदार ठहरा चुके हैं। वहीं, ताजा खबर के अनुसार तो अमेरिका ने चीन के 4 मीडिया कंपनियों को विदेशी मिशन तक कह डाला है।

जी हाँ, ट्रंप प्रशासन ने सोमवार को बताया कि चीनी मीडिया की तरफ से यूएस ऑपरेशन के लिए यह मिशन तैयार किया गया है। अमेरिकी राज्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि चार चीनी मीडिया संगठन अनिवार्य रूप से चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के मुखपत्र हैं और उन्हें सामान्य विदेशी मीडिया की तरह नहीं माना जाना चाहिए।

जानकारी के मुताबिक, यह चार चीनी मीडिया संगठन इस प्रकार हैं- सीसीटीवी, चाइना न्यूज सर्विस, पीपल्स डेली न्यूजपेपर और ग्लोबल टाइम्स। यह चारों मीडिया संगठन चीनी कम्युनिस्ट पार्टी और सरकार के मुखपत्र हैं। अमेरिका के अनुसार इनको दूसरी विदशी मीडिया के तरह सामान्य नहीं मानना चाहिए।

ज्ञात हो कि अमेरिका ने यह कार्रवाई ऐसे समय पर की है, जब चीनी मीडिया संगठनों ने न केवल अमेरिका बल्कि भारत और ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ मनोवैज्ञानिक युद्ध छेड़ रखा है। जिसके मद्देनजर पूर्वी एशिया और प्रशांत मामलों के सहायक विदेश मंत्री डेविड स्टिलवेल ने कहा, “चीन की कम्‍युनिस्‍ट पार्टी हमेशा से ही चीन की आधिकारिक न्‍यूज एजेंसी को नियंत्रित करती है लेकिन शी जिनपिंग के राष्‍ट्रपति बनने के बाद पिछले कुछ सालों में यह नियंत्रण और ज्‍यादा बढ़ा है।” स्टिलवेल ने कहा, “ये संगठन केवल प्रोपेगेंडा ज्‍यादा कर रहे हैं।”

बता दें कि इससे पहले अमेरिका ने चीन के 5 अन्‍य मीडिया संस्‍थानों को विदेशी मिशन का दर्जा दे दिया था। यही नहीं, अमेरिका में काम कर रहे चीनी पत्रकारों की संख्‍या भी सीमित कर दी थी। इसके बाद चीन ने अमेरिका के कई पत्रकारों को देश छोड़कर जाने के लिए कह दिया था।

‘अनपढ़ लोग मुँह उठा कर सेना को गाली देने आ जाते हैं’: न्यूज डिबेट से भगाए गए उदित राज, बॉर्डर की कोई जानकारी नहीं

अपने आपको दलितों का सबसे बड़ा नेता बताने वाले उदित राज की एक टीवी न्यूज डिबेट के दौरान जम कर बेइज्जती हो गई। कॉन्ग्रेस नेता भारत-चीन तनाव मुद्दे पर चर्चा में हिस्सा लेने पहुँचे थे लेकिन पता चला कि न तो उन्हें सीमा का कोई ज्ञान है और न ही सेना के बारे में उनके पास कोई जानकारी है। जब न्यूज़ एंकर ने उनसे पूछा कि DSDBO रोड क्या है, जिसे लेकर पूरा विवाद खड़ा हुआ है। इस सवाल के बाद उदित राज बगले झाँकते हुए बात बदलते नज़र आए।

बता दें कि DSDBO रोड का अर्थ है दरबुक-श्योक डीबीओ मार्ग, जो वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) का पास से गुजरती है। DSDBO मार्ग लद्दाख़ की राजधानी लेह से चलकर दरबुक और श्योक घाटी मे स्थित श्योक गाँवों से होती हुई उत्तर में चीन की सीमा के समीप स्थित दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) तक जाती है। श्योक से डीबीओ तक का मार्ग 220 किलोमीटर लम्बा है और इसका निर्माण 2000 से 2019 के बीच सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने किया था।

कॉन्ग्रेस नेता उदित राज यूँ तो दावा करते रहे कि चीन ने हमारी जमीन पर कब्जा कर लिया है लेकिन उन्हें सीमा की कोई जानकारी नहीं थी। वो बार-बार कहते रहे कि ‘देश हमारा चला गया’ लेकिन DSDBO रोड को लेकर जवाब नहीं दे पाए। इससे पता चलता है कि उन्होंने न्यूज़ डिबेट में आने से पहले भी कोई रिसर्च नहीं किया था। न्यूज़ एंकर ने कहा कि उदित राज को गलवान घाटी का क-ख-ग भी नहीं पता है।

इसके बाद उदित राज से पूछा गया कि गलवान नदी का उद्गम स्थल कहाँ है? इस सवाल का भी उनके पास कोई जवाब नहीं था। बता दें कि गलवान नदी अक्साई चीन से लद्दाख में बहती है। ये काराकोरम रेंज में सैमजुंगलिंग के पूरी हिस्से से ऑरिजिनेट होती है। फिर वो पश्चिम की तरह बहते हुए श्योक नदी में मिल जाती है। 80 किलोमीटर की इस नदी को लेकर 1962 युद्ध में भी घमासान हो चुका है।

देखें उदित राज की बेइज्जती 26:00 के बाद से (साभार: Zee News)

जब उदित राज बार-बार इन सवालों को टाल कर अपनी अज्ञानता का परिचय देते रहे तो न्यूज़ एंकर ने कहा कि अनपढ़ लोग मुँह उठा कर बिना पढ़े-लिखे सेना को गाली देने आ जाते हैं। इसके बाद उदित राज ने न्यूज़ एंकर को ‘सेना का चमचा’ करार दिया। वो चीनी सेना पीएलए के बारे में भी कुछ नहीं बता पाए। LAC के इस तरह और उस तरफ भारत-चीन में कितना हिस्सा है, इसे लेकर भी उनके पास कोई जानकारी नहीं थी।

इससे पहले उदित राज बोल रहे थे कि मीडिया ने झूठ बोल-बोल कर देश का सत्यानाश कर दिया है। वो मीडिया को बार-बार सेना का चमचा बताते रहे। उदित राज की इस हरकत से नाराज़ न्यूज़ एंकर ने उन्हें फटकारा और कहा कि अगर देश की बात करने से कोई सेना का चमचा हो जाता है तो हाँ, वो ‘सेना के चमचे’ हैं। बाद में उदित राज को इस डिबेट से निकाल कर भगा दिया गया। एंकर ने उन्हें बुलाने के लिए जनता से माफ़ी भी माँगी।

हाल ही में उदित राज ने ट्विटर पर दावा किया था कि 17 कंपनियाँ 500 रुपए में कोरोना टेस्ट किट बनाकर देने के लिए तैयार थी, लेकिन पीएम मोदी ने इसका ठेका गुजरात की एक कंपनी को दिला दिया, जो इस कोरोना टेस्ट किट को 4500 रुपए में बेच रहा है। ये जानकारी पूरी तरह फेक निकली। CMR द्वारा PT-PCR के लिए स्वीकृत कीमत 740 से 1150 रुपए है जबकि रैपिड टेस्ट किट के लिए यह 528 से 795 रुपए है।

चर्च के टीचर को बीवी पर हुआ शक, अपनी ही 54 दिन की बेटी के साथ दिखाई हैवानियत, हालत गंभीर

केरल के अर्नाकुलम जिले के अंगमाली में 54 दिन की एक बच्ची के साथ क्रूरता का मामला सामने आया है। खबर है कि 40 वर्षीय शैजू थॉमस ने अपनी पत्नी के ऊपर शक होने के कारण अपनी 54 दिन की नवजात बेटी को पहले थप्पड़ मारे और फिर उसे जोर से पलंग पर फेंक दिया। अब बच्ची की हालत गंभीर बनी हुई है। वहीं, आरोपित पिता गिरफ्तार हो चुका है।

पुलिस के अनुसार, पिता के पीटने और पटकने के बाद बच्ची को नाजुक हालत में कोलेनचेरी के पास ही एक निजी अस्पताल के ICU में भर्ती कराया गया। पुलिस ने बताया कि आरोपित व्यक्ति स्वभाव से गुस्सैल और शराबी है। उसे अपनी पत्नी पर शक रहता था और उसे ये भी लगता था कि वो बेटी उसकी नहीं है। इसलिए, इससे पहले भी उसने बच्ची को कई बार थप्पड़ों से मारा था। लेकिन गुरुवार को रात को ऐसे ही थप्पड़ों के प्रहार से बच्ची अचेत हो गई। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया। 

कोलेनचेरी स्थित एमओएससी मेडिकल कॉलेज हास्पिटल के डॉक्टर सोजन आईपे ने कहा कि मस्तिष्क को हुई क्षति काफी गंभीर है। बच्ची को शुक्रवार को भर्ती किया गया था उस वक्त उसके मस्तिष्क में खून बह रहा था।

बता दें कि इस संबंध में पुलिस ने आरोपित व्यक्ति पर धारा 307 के तहत मामला दर्ज किया है। साथ ही उसके ऊपर बच्चे के साथ क्रूरता करने के आरोप में धारा 75 भी लगाई गई है। गिरफ्तारी के बाद उसे कोर्ट में पेश किया जा चुका है। अब फिलहाल वो न्यायिक हिरासत में है।

मुंबई मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, शैजू थॉमस, कन्नौर निवासी है और पेंटेकोस्टल चर्च से जुड़ा हुआ है। वह एक काउंसलिंग टीचर है, जो उत्तर भारत में कई जगह काम चुका है। इसी दौरान वह 33 वर्षीय नेपाली महिला सांचा माया से भी मिला। दोनों में प्रेम हुआ और दोनों ने मई 2019 में शादी कर ली। इसके बाद से दोनों अंगमाली में रहने लगे।

मगर, बच्ची के जन्म के बाद शैजू के व्यवहार में बदलाव आ गया। अंगमाली थाने के सब इंस्पेक्टर अशोक केएम ने मीडिया को बताया कि शैजू बच्ची के जन्म के बाद से ही नाराज था और उसे ये भी शक था कि बच्ची उसकी नहीं है। इसी नाराजगी के चलते उसने 18 जून को बच्ची को पलंग पर पटका। बाद में वे उसे पास के मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर भागे।

शुरुआत में तो शैजू ने अस्पताल प्रशासन को बताया कि बच्ची का एक्सिडेंट हुआ है। लेकिन जाँच के दौरान अस्पताल को संदेह हुआ और उन्होंने पुलिस को बुलवाया। इसके बाद बच्ची की गंभीर अवस्था देखते हुए उसे आईसीयू में भर्ती करवाया गया। लेकिन बच्ची के दिमाग में चोट आने से उसे दौरे आते रहे। स्कैन रिपोर्ट में यह भी आया कि उसे अंदरुनी ब्लीडिंग हुई।

रथ यात्रा रोकने की साजिश किसने की: अजीत भारती का सवाल | Ajeet Bharti on who wanted to stop Puri Rath Yatra

जून 22, 2020 को सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकालने की अनुमति दे दी। यात्रा पर रोक लगाए जाने के बाद कई याचिकाएँ दाखिल कर शीर्ष अदालत से पुनर्विचार का आग्रह किया गया था। इन याचिकाओं में कहा गया कि यात्रा को सिर्फ पुरी में ही निकालने की इजाजत दी जाए। जगन्नाथ यात्रा को रोकने के लिए ‘ओडिशा विकास परिषद’ की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी गई थी। 

‘ओडिशा विकास परिषद’ NGO का नाम शायद ही कभी पहले सामने आया हो। ये एक अनजाना सा ही नाम है, मगर इसने मुकुल रोहतगी, रंजीत कुमार जैसे वरिष्ठ वकील को अपना पक्ष रखने के लिए चुना। अगर ओडिशा विकास परिषद को कोरोना को फैलने से रोकने, इसके प्रति जागरुक करने या फिर उनकी स्वास्थ्य को लेकर इतनी ही चिंता थी, तो क्या उन्होंने पहले किसी प्रकार का अभियान चलाया? किसी तरह की सेवा प्रदान की?

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