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बिहार के क्वारंटाइन सेंटर में ‘एक चतुर नार’ पर धोती-बनियान में डांस, Video वायरल

देश ही नहीं पूरी दुनिया में कोरोना का खौफ जारी है, लेकिन इस बीच कुछ लोग ऐसे हैं कि इस पल को भी खुशी से जी रहे हैं। एक ऐसा ही वीडियो बिहार के क्वारंटाइन सेंटर से सामने आया है, जहाँ एक व्यक्ति गीत पर नृत्य करके क्वारंटाइन किए गए लोगों का मनोरंजन कर रहा है। यह वीडियो इंटरनेट खूब देखा जा रहा है।

सामने आए वीडियो में एक व्यक्ति को धोती और बनियान पहने हुए सुपरहिट गीत ‘एक चतुर नार’ पर नृत्य करते हुए देखा जा रहा है। 5 मिनट 59 सेकेंड के वीडियो में आप देख सकते हैं कि वह गाने पर पूरे हाव-भाव के साथ नृत्य कर रहे हैं।

इसका क्वारंटाइन सेंटर में भर्ती किए गए प्रवासी मजदूर पूरा आनंद ले रहे हैं। इतना ही नहीं वह बीच-बीच में ताली बजाकर उक्त व्यक्ति का उत्साहवर्धन भी कर रहे हैं। खास बात यह है कि इंटरनेट पर इस वीडियो को 3.5 मिलियन से अधिक बार देखा जा चुका है।

जानकारी के मुताबिक यह वीडियो बिहार के कटिहार जिले का बताया जा रहा है, जहाँ के सुजापुर में स्थित सर्व लक्ष्मण हाई स्कूल में प्रवासियों के लिए क्वारंटाइन सेंटर बनाया गया है।

उक्त व्यक्ति की पहचान रिंकू सिंह के रूप में हुई है, जो कि प्रवासियों के लिए बनाए गए क्वारंटाइन सेंटर में काम करता है। खबरों के मुताबिक रिंकू सिंह एक लोक कलाकार और प्रतिभाशाली थिएटर कलाकार रहे हैं।

गौर करने वाली बात यह कि कोरोना वायरस महामारी के बीच रिंकू सिंह की जिम्मेदारी सेंटर में भर्ती लोगों को भोजन की व्यवस्था करना है, लेकिन वह इसके अतिरिक्त भी अपनी कलात्मक प्रतिभा से सेंटर में भर्ती किए गए लोगों का भरपूर मनोरंजन कर रहे हैं।

इस बीच रिंकू सिंह का एक दूसरा वीडियो और सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। दूसरे वीडियो में आप देख सकते हैं कि रिंकू सिंह सलमान खान की हिट फिल्म के गीत ‘तेरी चुनरिया दिल ले गई’ पर जमकर झूम रहे हैं। इस वीडियो को भी सोशल मीडिया पर खूब सराहा जा रहा है।

बंगाल: देश का वह राज्य जहाँ कोरोना से मरने वालों के अंतिम दर्शन के लिए हाई कोर्ट को आना पड़ा

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार राज्य में कोरोना वायरस से जान गॅंवाने वाले लोगों के परिजनों को उनका शव देखने की इजाजत देने के लिए तैयार हो गई है। कलकत्ता हाई कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद राज्य सरकार ने इस संबंध में नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

अभी राज्य में जिनकी मौत कोरोना की वजह से हो रही थी उनके परिजनों को अंतिम दर्शन भी नहीं करने दिया जा रहा था। इसके बाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था।

कुछ लोगों ने तो अपनों के मौत के कई दिनों बाद इसकी सूचना देने का आरोप भी प्रशासन पर लगाया था। ऐसा ही एक मामला एमआर बांगुर अस्पताल में हरिनाथ सेन की मौत का है। उनके परिजनों के अनुसार सेना की मौत की खबर उन्हें चार दिन बाद लगी थी और अस्पताल प्रशासन ने उन्हें खबर किए बिना अंतिम संस्कार कर दिया था।

हाई कोर्ट के निर्देशानुसार शनिवार (6 मई 2020) को राज्य सरकार द्वारा संक्रमण से मारे गए मरीजों के अंतिम दर्शन को लेकर गाइडलाइन जारी किया गया।

इससे पहले शुक्रवार को हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से संक्रमण के कारण मारे गए लोगों के अंतिम संस्कार को लेकर रिपोर्ट दाखिल करने को भी कहा था। रिपोर्ट सही तरीके से अंतिम संस्कार नहीं किए जाने के आरोपों को लेकर मॉंगी गई है।

कोर्ट के निर्देश के बाद बंगाल सरकार ने जो गाइडलाइन जारी की है उसमें ये बातें कही गई है;

  • कोरोना से अब यदि किसी की मौत होती है तो मृतक के परिवार को शव के अंतिम दर्शन की इजाजत दी जाएगी।
  • अंतिम दर्शन के लिए मृतक के पार्थिव शरीर को अस्पताल में ही एक निर्दिष्ट स्थान पर रखा जाएगा। इसके बाद परिवार के सदस्यों को 1 घंटे में इसकी सूचना दे दी जाएगी।
  • परिवार के सदस्य उक्त निर्दिष्ट स्थान पर पहुॅंचेंगे और 10 से 12 फुट की दूरी से शव का अंतिम दर्शन करेंगे। अंतिम दर्शन के लिए केवल 30 मिनट दिया जाएगा।
  • शव को एक प्लास्टिक के बैग में सुरक्षित रखा जाएगा। शव का स्पर्श करने या पास जाने की इजाजत नहीं होगी।
  • मृतक के दर्शन से पहले अस्पताल द्वारा उन्हें सुरक्षा उपकरण जैसे कि ग्लव्स, मास्क आदि उपलब्ध कराया जाएगा।
  • परिजनों द्वारा अंतिम दर्शन के बाद ही शव का सरकार की तरफ से अंतिम संस्कार किया जाएगा।
  • जहॉं अंतिम संस्कार होगा वहॉं परिवार के किसी भी सदस्य को जाने की इजाजत नहीं रहेगी। सरकारी और निजी दोनों की अस्पतालों पर यह लागू होगा।

दरभंगा धमाका: नजीर के घर से भागा दाढ़ी वाला युवक कौन, आतंकी कनेक्शन भी खँगाल रही पुलिस

बिहार के दरभंगा जिले में शुक्रवार (जून 5, 2020) को हुए धमाके को लेकर लोगों में काफी आक्रोश है। 7 जून 2020 को प्रकाशित अखबार में इस हादसे को लेकर कई तरह के चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं। आरोपित मोहम्मद नजीर के घर से भागे संदिग्ध शख्स की पहचान से लेकर इसके आतंकी कनेक्शन तक की जाँच की जा रही है।

बता दें स्थानीय लोगों ने शनिवार (जून 6, 2020) को प्रदर्शन भी किया। निष्पक्ष जाँच की माँग कर रहे लोगों ने पुलिस के कामकाज पर सवाल उठाए।

साभार: दैनिक जागरण

जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक लोग प्रशासन से मुआवजे की माँग भी कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि मोहम्मद नजीर के घर हुए धमाके से पड़ोसियों का लाखों का नुकसान हुआ है। इसलिए क्षति की भरपाई के लिए मुआवजा दिया जाना चाहिए। उन्होंने तो यहाँ तक कह दिया कि यदि सरकार मुआवजा नहीं देगी तो आंदोलन जारी रहेगा। कुछ लोगों ने आरोपित नजीर के चल और अचल संपत्ति को जब्त कर क्षति की भरपाई कराने की माँग की।

बताया जा रहा है कि अगर नजीर के घर के पिछले भाग की जगह अगले हिस्से में ब्लास्ट हुआ होता तो पूरा शहर दहल जाता। कई लोगों की जानें चली जाती। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार लोगों ने आरोप लगाया कि नजीर अपने घर के पिछले भाग में ही काली करतूत करता था, इसीलिए विस्फोट भी उसी तरफ हुआ।

लोगों ने आतंकी गतिविधि का आशंका जाहिर करते हुए बड़ी एजेंसी से जाँच करवाने की माँग की। लोगों का कहना है कि जिस तरह से बम विस्फोट हुआ और तीन किलोमीटर तक का इलाका दहल गया, वह कोई साधारण बम नहीं हो सकता है। किसी बड़ी घटना को अंजाम देने के लिए नजीर अपने घर में बम बना रहा था। हो सकता है कि नजीर आंतकी गतिविधि से भी जुड़ा हो। उन्होंने अंदेशा जताया कि नजीर के घर की खुदाई करने पर कई और संदिग्ध सामान बरामद हो सकते हैं।

साभार: दैनिक जागरण

बता दें कि लोगों के आक्रोश के बीच एफएसएल और बम डॉग स्क्वॉयड की टीम ने नजीर के घर से भारी मात्रा में बारूद बरामद किया। इसके साथ ही सुतली लपेटे दो कार्टन बम और मिट्टी के नीचे से दो बोरा बारूद युक्त पाउडर बरामद हुए। इस बोरे में बम भी थे, जिसे पानी में रख दिया गया। इसके अलावा जाँच के दौरान उसके घर से सोना और चाँदी के ढाई किलो जेवरात और लैपटॉप जब्त किए। फिलहाल पुलिस लैपटॉप को खँगाल रही है।

साभार: दैनिक जागरण

मीडिया रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है कि नजीर के घर में एक भी खिड़कियाँ नहीं थी। अंदर-बाहर जाने के लिए सिर्फ एक दरवाजा था। इसकी वजह से उसके घर के अंदर कौन आ-जा रहा है और घर के अंदर क्या हो रहा है, इसकी जानकारी किसी को भी नहीं होती थी। पड़ोसियों ने बताया कि हमेशा संदिग्ध व्यक्तियों का उसके घर आना-जाना होता था।

बताया जा रहा है कि बम ब्लास्ट के बाद एक संदिग्ध युवक को जख्मी हालत में नजीर के घर से भागते हुए देखा गया। पड़ोसियों का कहना है कि वो मुहल्ले का नहीं था। स्थानीय लोग जब वीडियो बना रहे थे तो उसका चेहरा कैद हो गया था। दैनिक जागरण के अनुसार लाल टीशर्ट, जींस पैंट पहने दाढ़ी वाला युवक नंगे पॉंव भागा था और कुछ ही पल में गायब हो गया।

पूछताछ में नजीर ने दावा किया है कि घटना के वक़्त वह और उसकी पत्नी मुजफ्फरपुर अपने रिश्तेदार के यहाँ गए थे। उसका बेटा गुलाब नदाफ भी घर पर नहीं था। घर पर सिर्फ तीन बच्चे थे।

ऐसे में यह सवाल उठता है कि आखिर वह शख्स था कौन? और नजीर की अनुपस्थिति में उसके घर में क्या कर रहा था? पुलिस इसकी जॉंच में जुटी है। वहीं आइजी अजिताभ कुमार ने दैनिक जागरण को बताया कि यह बम कोई बड़ी घटना को अंजाम देने के लिए बनाया जा रहा था या फिर इसके तार किसी आतंकी संगठन से जुड़ा है, इस दिशा में पुलिस जाँच कर रही है।

गौरतलब है कि शनिवार (जून 6, 2020) की अखबारों में नजीर के घर में अवैध पटाखे बनाने की बात सामने आई थी और ऑपइंडिया को भी कुछ चश्मदीदों ने बताया था कि मोहम्मद नजीर काफी समय से पटाखा बनाने का कारोबार घर में ही कर रहा था। हालाँकि फिलहाल स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट होना बाकी है।

दुनिया जानती है सीमा की सुरक्षा करने में सक्षम है भारत: अमित शाह ने वर्चुअल रैली से बिहार की जनता को किया संबोधित

भारतीय जनता पार्टी ने देश के इतिहास में पहली सम्पूर्ण वर्चुअल रैली आयोजित करने का दावा किया है। इसे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी संबोधित किया।

इस दौरान बिहार भाजपा के अध्यक्ष संजय जायसवाल ने कहा कि वे बिहार को यह अवसर देने के लिए गृह मंत्री का धन्यवाद देते हैं। वहीं उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने समय पर लॉकडाउन कर स्पेन, अमेरिका और इटली जैसे हालात पैदा होने के बचाने के लिए धन्यवाद दिया।

इस दौरान सुशील मोदी ने कहा कि ये लालूवाद बनाम विकासवाद की लड़ाई है। उन्होंने लालूवाद को पलायन, नरसंहार, अपहरण और अँधेरे का प्रतीक करार दिया। अमित शाह ने अपने सम्बोधन की शुरुआत उनलोगों को श्रद्धांजलि देने के साथ की, जिन्होंने दुनिया भर में कोरोना के कारण अपनी जान गँवाई। उन्होंने कहा कि 2014 और 2019 में भाजपा को नरेंद्र मोदी के नेतृत्व को जनता ने जनादेश दिया। उन्होंने बिहार को बुद्ध-महावीर और चन्द्रगुप्त-चाणक्य की भूमि बताया।

शाह ने कहा कि जब भी नेतृत्व का संकट आया, बिहार ने देश को राह दिखाया। उन्होंने राजेंद्र प्रसाद, जगजीवन राम, डॉक्टर श्रीकृष्ण सिंह और जयप्रकाश नारायण को याद किया, जिन्होंने आज़ादी की लड़ाई में योगदान दिया। राजद पर तंज कसते हुए कहा कि कुछ लोगों ने देर-सबेर पीएम मोदी की अपील मानी और थाली बजाई। हालाँकि, उन्होंने इसे चुनावी रैली कहने से इनकार कर दिया और कहा कि ये जनसम्पर्क रैली है।

उन्होंने कहा कि जब कोरोना जैसी आपदा आई है, ऐसे में भाजपा अपना जनसम्पर्क का संस्कार नहीं छोड़ सकती। उन्होंने कहा कि जो लोग दिल्ली में बैठ कर तंज कस रहे हैं, वो पटना से दरभंगा तक वर्चुअल रैली ही कर लेते। उन्होंने बताया कि भाजपा ने कुल 75 वर्चुअल रैली की योजना बनाई है। उन्होंने इसे चुनावी रैली बताने वालों को वक्रदृष्टा बताया, जो सीधी चीज को भी टेढ़ी देखते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार ने हमेशा पीएम मोदी की झोली वोटों से भर दी है।

उन्होंने कहा कि पूर्वी भारत का योगदान आज़ादी के समय देश की जीडीपी में बहुत ज्यादा था, लेकिन बाद में यहाँ विकास रुक गया, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिर से चालू किया। उन्होंने कहा कि राजग सरकार गरीबों, दलितों और आदिवासियों के लिए काम कर रही है। आज 50 करोड़ लोग आयुष्मान भारत के अंतर्गत आए हैं, जिनमें से 1 करोड़ लोगों इलाज करा इसके लाभार्थी बने।

पूर्व भाजपा अध्यक्ष ने आँकड़े गिनाए कि अब तक 8 करोड़ महिलाओं को उज्ज्वला योजना के तहत गैस चूल्हे दिए गए, जिससे उन्हें प्रदूषण और बीमारी से मुक्ति मिली। साथ ही 2.5 करोड़ लोगों तक बिजली पहुँचाई गई। उन्होंने कहा कि सौभाग्य योजना के तहत उन 20,000 गाँवों में बिजली पहुँची, जहाँ आज़ादी से अब तक लालटेन का जमाना था। उन्होंने बताया कि 10 करोड़ घरों अंदर शौचालय बनवाकर पीएम मोदी ने माताओं-बहनों को सम्मान दिया।

अमित शाह ने जानकारी दी कि अब तक ढाई करोड़ लोगों को घर दिया जा चुका है और मोदी सरकार का संकल्प है कि स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगाँठ तक देश में एक भी व्यक्ति बेघर न रहे। उन्होंने कहा कि एक जमाना था जब हमारे सीमाओं में कोई भी घुस जाता था, लेकिन मोदी सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक कर साहस दिखाया। आज दुनिया मानती है कि अमेरिका और इजरायल के बाद भारत के पास ही अपनी सीमाओं की सुरक्षा की क्षमता है।

अमित शाह ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने वाले निर्णय के बारे में कहा कि हमने उन चीजों को निपटाया, जो 70 साल से अटके पड़े थे। इसी क्रम में उन्होंने तीन तलाक हटाने को भी गिनाया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने ट्रिपल तलाक को तलाक दिया। राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का रास्ता भी प्रशस्त हो गया, क्योंकि इससे पहले की सरकारों के पास इच्छाशक्ति ही नहीं थी। अब भव्य राम मंदिर बन रहा है। शाह ने कहा:

“करोड़ों शरणार्थी भाइयों-बहनों को नागरिकता देकर उनके सम्मान की चिंता राजग सरकार ने की है। 25 करोड़ लोगों तक पाइप पहुँचा कर शुद्ध पानी पहुँचाने की व्यवस्था की गई है। किसान सम्मान योजना के तहत किसानों के खातों में मदद भेजी गई। राहुल गाँधी कर्जमाफी की बातें करते थे। हमने 9.5 करोड़ किसानों के अकाउंट में 72 हज़ार करोड़ रुपया दिया। ये हर साल जाएगा। हमने सीडीएस के पद का सृजन कर तीनों सेनाओं में समन्वय बिठाया और ‘वन रैंक वन पेंशन’ की व्यवस्था की। पीएम मोदी ने छोटे किसानों, छोटे व्यापारियों और मछुआरों का ध्यान रखा।”

बिहार की रैली को सम्बोधित करते अमित शाह

अमित शाह ने जनता कर्फ्यू की सफलता की बात करते हुए पीएम मोदी की तुलना लाल बहादुर शास्त्री से की। उन्होंने याद दिलाया कि पहले ऐसी आपदाओं के दौरान सरकारें निष्क्रिय रहा करती थीं। लेकिन आज कोरोना के वैश्विक आँकड़े को देखें तो इतनी विशाल जनसँख्या वाला देश सुरक्षित नज़र आता है।

उन्होंने इस दौरान बिहार के मजदूरों की बात करते हुए कहा कि देश के कई विकसित राज्य उन्हीं के पसीनों से चल रहा है। उन्होंने बताया कि प्रवासी मजदूरों की व्यवस्था के लिए पीएम मोदी ने पहले ही फंड्स की व्यवस्था कर दी थी और सभी राज्य को कॉल कर मजदूरों का ध्यान रखने को कहा था। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने कोरोना आपदा के दौरान भी कई बार सभी राज्यों की सरकारों के साथ विचार-विमर्श किया।

जून अंत तक दिल्ली में 1 लाख कोरोना मरीज, जुलाई तक 42000 अतिरिक्त बेड्स की जरूरत: दिल्ली सरकार की कमिटी

जून का महीना ख़त्म होते-होते देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस मरीजों की संख्या 1 लाख तक पहुँच सकती है। ऐसा दिल्ली सरकार द्वारा बनाई गई कमिटी का ही कहना है। दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार द्वारा गठित 5 सदस्यीय कमिटी ने अनुमान लगाया है कि जून 2020 के अंत तक कोरोना संक्रमण के कुल मामले बढ़कर 1 लाख तक पहुँच जाएँगे।

कमिटी ने सरकार को सुझाव दिया है कि दिल्ली में मरीज़ों की जरूरत को पूरा करने के लिए 15,000 अतिरिक्त बेडों की व्यवस्था करनी पड़ेगी। अहमदाबाद, मुंबई और चेन्नई जैसे अन्य शहरों के रुझानों से संबंधित डेटा का अध्ययन करने के बाद कमिटी के अध्यक्ष डॉक्टर महेश वर्मा ने जानकारी दी कि उन्होंने सरकार को अपनी रिपोर्ट जमा करा दी है और उनका लक्ष्य है कि किसी भी मरीज को परेशानी न होने पाए।

डॉक्टर वर्मा ने बताया कि सरकार संक्रमितों की संख्या में वृद्धि से निपटने के लिए तैयार हो रही है। उन्होंने बताया कि अतिरिक्त बेड्स की व्यवस्था तो करनी ही पड़ेगी, भले ही इन्हें होटलों में ही क्यों न शिफ्ट करना पड़े। उन्होंने ये भी कहा कि ऐसी स्थिति में वहाँ ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था करनी पड़ेगी।

अधिकारियों का कहना है कि फ़िलहाल दिल्ली में कोरोना मामलों का डबलिंग रेट 15 दिन पहुँच गया है। यानी हर आधे महीने की दर से केस दोगुने हो रहे हैं।

अधिकारियों ने बताया कि अगर 15 जुलाई तक के आँकड़ों का अनुमान लगाया जाए तो 42,000 अतिरिक्त बेड्स की व्यवस्था करनी होगी। कमिटी ने ही सुझाव दिया था कि दिल्ली के स्वास्थ्य ढाँचे का इस्तेमाल सिर्फ़ दिल्लीवासियों के लिए ही होनी चाहिए, अन्य राज्यों के नागरिकों के लिए नहीं।

मुख्यमंत्री ने घोषणा भी कर दी है कि दिल्ली में रह रहे दूसरे राज्यों के लोग या दूसरे राज्यों के वे लोग जो यहाँ आकर इलाज करवाना चाहते हैं, वो सिर्फ केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र वाले अस्पतालों (जैसे AIIMS) में यह सुविधा उठा सकते हैं।

दिल्ली के अस्पतालों की हालत को लेकर सीएम केजरीवाल लगातार विपक्ष के निशाने पर हैं। कमेटी के सदस्यों में जीटीबी अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. सुनील कुमार, दिल्ली चिकित्सा परिषद के अध्यक्ष डॉ. अरुण गुप्ता, दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. आरके गुप्ता और मैक्स अस्पताल के ग्रुप मेडिकल डायरेक्टर निदेशक डॉ. संदीप बुद्धिराजा शामिल हैं। इस कमिटी के गठन का लक्ष्य कोरोना को लेकर तैयारियों की समीक्षा करना था।

फिलहाल दिल्ली में कोरोना वायरस से संक्रमितों की संख्या 27,654 तक पहुँच गई है। अकेले 6 जून को 1320 मामले आए, जो मुंबई से भी ज्यादा है। अभी भी यहाँ कोरोना के कुल 16,229 सक्रिय मरीज हैं। 53 नई मौतों के साथ मृतकों की संख्या भी 761 तक पहुँच गई है। 10,664 लोगों को ठीक किया जा चुका है लेकिन रिकवरी दर काफी नीचे है, जिसने सरकार की चिंताओं को बढ़ा दिया है।

PM मोदी से मिलकर वे जल्द ही बन जाएँगे मुंबई के सेलिब्रिटी मैनेजर: सोनू सूद पर बरसे शिवसेना सांसद संजय राउत

देश में जारी लॉकडाउन के बीच मुंबई शहर के आसपास और महाराष्ट्र के विभिन्न इलाको में फँसे श्रमिक मजदूरों को उनके घरों तक पहुँचाने में लगे फिल्म अभिनेता सोनू सूद को लेकर शिवसेना सांसद संजय राउत ने तीखी टिप्पणी की है।

राउत ने पार्टी के मुखपत्र सामना में सोनू सूद पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि जल्द ही वो प्रधानमंत्री पीएम मोदी से मिलकर मुंबई के सेलिब्रिटी मैनेजर बन जाएँगे।

संजय राउत ने सामना के एक लेख में कहा है कि लॉकडाउन में एक नए ‘महात्मा’ आ गए हैं, जिसे लोग सोनू सूद कहते हैं। कहा जा रहा है कि इस एक्टर ने लाखों प्रवासियों को उनके राज्यों में भेजा है। महाराष्ट्र के राज्यपाल ने भी ‘महात्मा सूद’ की तारीफ की है। ऐसा लग रहा है कि केंद्र और राज्य सरकारें प्रवासियों को भेजने के लिए कोई काम नहीं कर रही हैं।

राउत ने ये भी सवाल उठाया है कि जब राज्य सरकारें प्रवासियों को आने नहीं दे रही हैं तो फिर वो आखिर कहाँ जा रहे हैं। संजय राउत कहा, “सोनू सूद एक अच्छे अभिनेता हैं। जो काम उन्होंने किया है वह भी अच्छा है, लेकिन इस बात की संभावना है कि इसके पीछे कोई राजनैतिक निर्देशक हो।”

आपको बता दें कि इससे पहले 31 मई को सोनू सूद ने महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात की थी। इस दौरान राज्यपाल ने सोनू सूद के कामों की जमकर तारीफ की थी।

गौरतलब है कि बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद उन प्रवासियों के लिए बसों की व्यवस्था कर रहे हैं जो देश के अन्य हिस्सों में फँस गए हैं। उन्होंने सैकड़ों बसों की व्यवस्था की है और हजारों प्रवासी श्रमिकों को घर भेजा है। वह लगातार बिना रुके ये काम कर रहे हैं और अब तो उन्होंने एक हेल्पलाइन नंबर भी इसके लिए जारी कर दिया है।

उनके इस काम की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है। हालाँकि इससे पहले सोनू सूद कॉन्ग्रेस के निशाने पर भी आ चुके हैं। राज्यपाल से मुलाकात के बाद कॉन्ग्रेस समर्थकों ने उन पर हमला बोल दिया था।

कॉन्ग्रेस ने सोनू सूद को बीजेपी का एजेंट करार देते हुए कहा कि वो अच्छा काम इसलिए कर रहे हैं, ताकि राज्य में कॉन्ग्रेस, एनसीपी और शिवसेना की सरकार को बुरा दिखाया जा सके।

15 अगस्त से स्कूल-कॉलेज खोलने की तैयारी, किसी भी बच्चे को चिंता करने की जरूरत नहीं: HRD मंत्री डॉ पोखरियाल

कोरोना महामारी की वजह से हुए लॉकडाउन में सुरक्षा कारणों को देखते हुए सबसे पहले स्कूलों और कॉलेजों को बंद किया गया था। समय के साथ जिस तरह धीरे-धीरे पाबंदियों को हटाया जा रहा है, लोगों द्वारा स्कूल-कॉलेजों के खुलने को लेकर भी अलग-अलग अटकलें लगाए जा रहे हैं।

बच्चों की पढ़ाई को लेकर पैरेंट्स की इसी चिंता को दूर करने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ रमेश निशंक पोखरियाल ने एक इंटरव्यू के दौरान 15 अगस्त 2020 के आसपास स्कूल-कॉलेजों को खोले जाने की बात कही है। भारत में इस वक्त स्कूल व कॉलेजों को लेकर लगभग 3 करोड़ से अधिक विद्यार्थी अपने घर पर बैठे हैं।

स्कूल और कॉलेजों को किस तरह दोबारा से पटरी पर लाया जाए, इसको लेकर मानव संसाधन मंत्रालय, गृह मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर गाइडलाइंस तैयार कर रहे हैं। ताकि कोरोना काल में बच्चों को इससे सुरक्षित रखा जा सके।

कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए अब स्कूल का हुलिया बदल दिया जाएगा। जहाँ सोशल डिस्टेंसिग, साफ़-सफ़ाई, पढ़ने के तरीके आदि का विशेष ध्यान रखते हुए स्कूल को खोलने की अनुमति दी जाएगी।

बीबीसी को दिए गए एक इंटरव्यू में डॉ पोखरियाल ने कहा कि 15 अगस्त तक सभी छात्रों के रिजल्ट की घोषणा भी कर दी जाएगी। साथ ही 10वीं और 12वीं की बची हुई परीक्षाओं को 1 से 15 जुलाई के भीतर करवाया जाएगा। जहाँ विद्यार्थियों को पहले की तरह केंद्र पर परीक्षा देने के बजाए उनके स्कूलों में ही परीक्षा देने जाना होगा।

परीक्षा, सोशल डिस्टेंसिग, मेरिट इन सभी बातों को लेकर डॉ पोखरियाल ने कहा कि बच्चों को परिस्थितियों के अनुसार बिना किसी चिंता के परीक्षा देनी चाहिए। उनकी तैयारियों के लिए उन्हें पूरा समय दिया जाएगा।

मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ पोखरियाल ने कहा कि किसी को नहीं पता था कि ये होने वाला है, कोई तैयार नहीं था। फिर भी हमारे शिक्षा मंत्रालय ने कोशिश की कि घरों में रहकर ही बच्चों को ऑनलाइन शिक्षा दी जाए।

जिन बच्चों के पास इंटरनेट, स्मार्टफोन या सही लाइट की सुविधा नहीं है, उनके बारे में उन्होंने कहा, “हम अंतिम छोर पर रहने वाले बच्चों की भी चिंता कर रहे हैं, जिनके पास इंटरनेट और स्मार्टफ़ोन नहीं हैं, उन्हें भी चिंता करने की ज़रूरत नहीं है। हम उनके हिसाब से पाठ्यक्रम लाएँगे। ज़रूरत पड़ी तो रेडियो का भी प्रयोग करेंगे।”

बदलाव पर बात करते हुए अंत में उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में भारत के आत्मनिर्भर योजना को लेकर कहा कि कोरोना के इस दौर में जब दुनिया बदल रही है तो शिक्षा भी बदलेगी। विदेश जा रहे बच्चों को अब भारत में ही उच्च शिक्षा दिलाई जाएगी। उन्होंने कहा, “भारतीय विज़न और संस्कार, जीवन मूल्य दुनिया में छाएँगे, आज इनकी दुनिया को ज़रूरत है।”

30 पुलिसकर्मियों को जिंदा जलाने की कोशिश, 3 करोड़ रुपए का फंड: मेरठ दंगों का मुख्य आरोपित मुफ्ती शहजाद गिरफ्तार

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में 20 दिसंबर 2019 को उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुई हिंसा के मुख्य आरोपित मुफ्ती शहजाद को गिरफ्तार कर लिया गया है। मुफ्ती शहजाद चरमपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का सदस्य है। शहजाद को शनिवार (जून 6, 2020) को मुरादनगर में उसके घर से आतंकवाद विरोधी दस्ते (ATS) ने गिरफ्तार किया

जानकारी के मुताबिक शहजाद और उसके साथी परवेज के खिलाफ मेरठ के नौचंदी पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज किया गया था। इसके बाद से ही वह फरार था। अब ATS ने उसे पकड़कर आगे की पूछताछ के लिए नौचंदी पुलिस को सौंप दिया है।

पुलिस ने बताया कि शहजाद और उसके साथी ने मेरठ के शास्त्री नगर में किराए के घर में पीएफआई का ऑफिस भी खोल रखा था। सीएए विरोधी दंगों की जाँच के दौरान जब मुख्य साजिशकर्ता के रूप में उनके नाम सामने आए तो पुलिस ने इस ऑफिस पर भी छापा मारा, जहाँ से कई भड़काऊ संदेश देने वाले पोस्टर और बैनर बरामद हुए थे। इनमें से से कुछ पोस्टरों पर ‘बेखौफ जिओ’, ‘बाइज्जत जिओ’ जैसे स्लोगन लिखे थे, तो वहीं कई पोस्टर झारखंड में हुई तबरेज अंसारी की हत्या और बाबरी मस्जिद से संबंधित थे।

मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय साहनी ने कहा, “आरोपितों ने 20 दिसंबर को हिंसक विरोध प्रदर्शनों से पहले और उसके दौरान एक उत्तेजक की भूमिका निभाई थी। सीएए के खिलाफ अपनी भड़ास निकालने के लिए शहजाद और परवेज एक विशेष वर्ग को हिंसा करने के लिए उकसा रहे थे। हमने अब परवेज को ट्रेस करने के लिए एक मैनहंट लॉन्च किया है।”

पुलिस ने बताया कि हिंसा में 6 लोगों की मौत हो गई थी और पाँच दर्जन से अधिक घायल हुए थे। बता दें कि सीएए विरोध के नाम पर प्रदर्शनकारियों ने दंगे भड़काए थे। मेरठ पुलिस ने इसका वीडियो जारी किया था, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि किस तरह से दंगे के दौरान 30 पुलिसकर्मियों को ज़िंदा जलाने की कोशिश में थे वहाँ के दंगाई। हालाँकि वक़्त रहते उन्हें अपने इरादों में क़ामयाब होने से रोक लिया गया था और सभी पुलिसकर्मियों को सुरक्षित बचा लिया गया।

20 दिसंबर को हुए दंगे के दौरान दंगाइयों ने पुलिसकर्मियों पर बंदूकें भी तानी गई थीं। इसमें SDPI और PFI की अहम भूमिका सामने आई थी। बताया गया था कि मेरठ में PFI ने 12 खातों में रकम भेजी थी। यह रकम रिहैबिलिटेशन इंडिया एनजीओ के माध्यम से फंडिंग की गई थी। ये बात भी सामने आई थी कि PFI ने चार खातों में तीन करोड़ रुपए की रकम भेजी थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार में मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ला ने कहा है था कि दंगाइयों और गुंडों के ख़िलाफ़ ऐसी कार्रवाई की जाएगी कि उनकी सात पुश्तें याद रखेंगी। 

तिरंगे का अपमान: तजिंदर बग्गा ने दर्ज कराई शिकायत तो यूथ कॉन्ग्रेस ने डिलीट किया ट्वीट, नहीं माँगी माफी

दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने इंडियन यूथ कॉन्ग्रेस द्वारा भारत के तिरंगे झंडे का अपमान करने के सम्बन्ध में शिकायत दर्ज कराई थी। दिल्ली पुलिस के कमिश्नर को पत्र लिख कर शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद यूथ कॉन्ग्रेस ने अपने उस ट्वीट को डिलीट कर लिया। अब तजिंदर बग्गा ने कॉन्ग्रेस से इस हरकत के लिए माफ़ी माँगने की माँग की है। उन्होंने उसे ‘भगोड़ी यूथ कॉन्ग्रेस’ करार दिया।

यूथ कॉन्ग्रेस ने तिरंगे झंडे में कोरोना वायरस का प्रतीकात्मक चित्र बना कर लिखा था- “और ऐसे एक के बाद एक कोरोना से लड़ाई हारता गया भारत“। इसे एक वीडियो के रूप में शेयर किया गया था, जिसमें तिरंगे झंडे पर इधर-उधर कोरोना वायरस को दिखाया गया था। बग्गा ने अपनी शिकायत में लिखा था कि इसमें तिरंगे झंडे को अपमानजनक तरीके से दिखाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया था कि जानबूझ कर देश की छवि ख़राब करने के लिए ऐसा किया गया है।

तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने लिखा था कि राष्ट्रीय ध्वज का इस तरह से अपमान करना दंडनीय अपराध है। उन्होंने आईपीसी की सम्बद्ध धाराओं में यूथ कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की माँग की थी। इसके बाद यूथ कॉन्ग्रेस ने किसी तरह अपना बचाव करने की कोशिश की। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक फोटो शेयर की, जो योग दिवस का था। इसमें वो योग करने के दौरान अंगोछे से चेहरा साफ़ करते दिख रहे थे।

यूथ कॉन्ग्रेस ने दावा किया कि पीएम मोदी तिरंगे झंडे का अपमान कर रहे हैं। हालाँकि, जब तजिंदर बग्गा ने उन्हें याद दिलाया कि तिरंगा झंडा का अपमान तभी कहा जाएगा, जब उस पर अशोक चक्र बना हो, तब यूथ कॉन्ग्रेस की फिर से बेइज्जती हो गई। भद्द पिटने के बाद उन्होंने अपना ट्वीट डिलीट तो कर लिया लेकिन माफ़ी नहीं माँगी। इसके बाद ट्विटर पर यूथ कॉन्ग्रेस से लोग माफ़ी माँगने को कह रहे हैं।

तजिंदर बग्गा और यूथ कॉन्ग्रेस के बीच पहले से ही तनातनी चल रही है। तजिंदर बग्गा ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी को 5000 सिखों का हत्यारा बताया था, जिसके बाद कॉन्ग्रेस के लोग उन पर पिल पड़े थे। यूथ कॉन्ग्रेस द्वारा विरोध दर्ज कराए जाने के बाद रोज रात को बग्गा ने उन्हें टैग कर के राजीव गाँधी को ‘मास मर्डरर’ बताना शुरू कर दिया। वो राजीव गाँधी को ‘फादर ऑफ मॉब लिंचिंग’ भी बताते रहे हैं। इससे कॉन्ग्रेस के कई नेता उनसे ख़ासे नाराज़ हैं।

‘वह मुझे मार देगा, बचा लो’: नेहा जोगी का Video, मुस्लिम पति ने गौमांस खाने के लिए भी किया था प्रताड़ित

दिल्ली की नेहा जोगी ने अपने मुस्लिम पति नफीस खान से बचाने की गुहार लगाई है। एक वीडियो के जरिए उसने अपने और अपने परिवार की रक्षा के लिए लोगों से रो-रोकर गुहार लगाई है। नेहा ने कहा है कि जब वह मर जाएगी तो उसके बाद पुलिस कार्रवाई का क्या मतलब रहेगा।

वीडियो सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता करुणेश शुक्ला द्वारा शनिवार (06 जून 2020) को ट्विटर पर शेयर किया गया है। वीडियो में नेहा ने नसीफ खान से शादी करने का एक दुखदायी अनुभव सुनाया है।

महिला ने बताया कि वह दिल्ली के बुराड़ी की रहने वाली है उसे एक मुस्लिम युवक द्वारा शादी में धोखा दिया गया। पीड़िता ने बताया कि शादी के बाद से ही उसने (पति) ने मुझे बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया था और मुझ पर लगातार धर्म परिवर्तन करने के लिए दवाब बनाता रहा।

महिला ने वीडियो में अपना दर्द बयाँ करते हुए कहा कि उसने पहले तो मेरे होने वाले बच्चे का लिंग परीक्षण कराया। इसके बाद मुझे और मेरे परिवार को जान से मारने की धमकी देने लगा। महिला ने आरोप लगाया कि जब इस मामले में उसने पुलिस में शिकायत की तो उन्होंने शिकायत दर्ज करने से इनकार कर दिया और कहा कि जब तक काउंसलिंग नहीं हो जाती तब तक शिकायत नहीं ले सकते।

इसके बाद महिला ने बिलखते हुआ कहा, “अगर वह मुझे एक दिन मार ही देगा तो मैं परामर्श लेकर क्या करुँगी। मैं अपने हिंदू भाइयों और बहनों से भीख माँगती हूँ और सभी से मैं अपनी गलती (शादी) के लिए माफी माँगती हूँ। वह मार देगा। उसके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।”

नेहा का अनुसार नफीस के एक भाई पर बलात्कार का आरोप है। दूसरे भाई पर हत्या का मुकदमा दर्ज है। उसने कहा है, “अगर मैं मर ही गई तो पुलिस जाँच का क्या फायदा होगा? कृपया मेरी रक्षा करें मैं आप सभी से हाथ जोड़कर विनती करती हूँ।”

इतना ही नहीं नेहा ने बताया कि उसके घर पर हर दिन पथराव किया जाता है, लेकिन पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। “मैं कहाँ जाऊँगी? कृपया मेरी मदद करें। इसके बाद वीडियो में उसकी बुजुर्ग माँ भी दिखती है। उन्होंने रोते हुए हाथ जोड़कर लोगों से अपील की और कहा कि मैं हिंदू समाज से हाथ जोड़कर विनती करती हूँ। वे हमें मार देंगे। कृप्या हमारी सहायता करें।

दरअसल इससे पहले ऑपइंडिया से बात करते हुए नेहा के वकील करुणेश शुक्ला ने बताया था कि पुलिस ने इस मामले में आईपीसी की धारा 323 और 506 के तहत FIR दर्ज कर ली है। बताया जा रहा है कि जब नेहा ने इस मामले में FIR दर्ज करवाने की कोशिश की थी, तो बुराड़ी पुलिस ने मना कर दिया था। लेकिन वकील के हस्तक्षेप के बाद FIR दर्ज कर लिया गया है। यह FIR 14 मई को दर्ज की गई।

बुराड़ी पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR में कहा गया है कि नेहा खान ने मार्च 2018 में नफीस खान से शादी की थी। यह एक प्रेम विवाह था। 9 महीने बाद उसकी बेटी पैदा हुई थी। वह FIR में कहती है कि उसे शादी के बाद पता चला कि उसका पति पहले से ही शादीशुदा था।

नेहा कहती है कि शादी के कुछ ही महीनों बाद नफीस ने उसके साथ लड़ाई-झगड़ा और मारपीट करना शुरू कर दिया। लेकिन वो अपनी शादी बचाने के लिए इन सारे कष्टों को झेलती रही। आगे FIR में नेहा दावा करती है कि बेटी के जन्म के बाद से नफीस ने उसके साथ और भी अत्याचार करना शुरू कर दिया।

नेहा खान का कहना है कि नफीस खान ने उसे जान से मारने की धमकी दी थी। वह कहती है कि FIR दर्ज करने के एक सप्ताह पहले भी नफीस ने उसे बंदूक दिखाकर जान से मारने की धमकी दी थी। उन्होंने हमें यह भी बताया कि उन्हें पाकिस्तान से भी धमकियाँ मिल रही हैं। भद्दी-भद्दी गालियाँ दी जा रही हैं। उनकी जान को खतरा है।

एडवोकेट करुणेश ने बताया, “नफीस ने शादी से पहले नेहा से कहा था कि वो अपना पूजा-पाठ जारी रख सकती है, उसे इससे कोई ऐतराज नहीं है। लेकिन शादी के कुछ ही दिनों बाद से उसने उसे गाय का मांस खाने के लिए मजबूर करने लगा। नफीस उसे नमाज और कुरान पढ़ने के लिए कहता था और मना करने पर उसे मारता-पीटता था।”

नेहा का जो वीडियो सामने आया है उसमें भी वह इन बातों को दोहराती है। साथ ही वीडियो में वो यह भी बताती है कि उसके पति का भाई आम आदमी पार्टी (AAP) से जुड़ा हुआ है। वो कहती है कि उसका पति उसे घर से बाहर निकालने की धमकी देता है और साथ ही कहता है कि उसकी कब्र वहीं पर खोद देगा।