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सीता माता पर अभद्र टिप्पणी: पायलट आसिफ खान ने सोशल मीडिया पर दी सफाई, GoAir ने बदला टर्मिनेशन का फैसला

सोशल मीडिया पर ट्विटर हैंडल से सीता माता पर अभद्र टिप्पणी करने के आरोप में एक ट्रेनी ऑफिसर को कुछ समय पहले गो एयर ने टर्मिनेट किया था। लेकिन, अब फेसबुक पर उनका पोस्ट आने के बाद गोएयर (GoAir) ने आसिफ नाम के अपने कर्मचारी का टर्मिनेशन वापस ले लिया है। अब उन्हें गो एयर ने केवल मामले की जाँच पड़ताल तक सस्पेंशन पर रखा है।

गोएयर का यह फैसला आसिफ के उस पोस्ट के बाद सामने आया है, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि हिंदू देवी सीता माता पर अभद्र टिप्पणी करने वाले वह नहीं थे। बल्कि वो आसिफ अलग है। इस पोस्ट में उन्होंने बताया था कि उनके ऊपर लगे आरोपों के कारण वह 2 दिन से नारकीय घटनाक्रम से गुजर रहे हैं।

विवादित पोस्ट के मद्देनजर आसिफ ने यह भी दावा किया कि उन्हें तो इस पोस्ट के बारे में उस समय मालूम चला था, जब वरिष्ठ अधिकारियों का उन्हें कॉल आया। उन्होंने जब ट्विटर देखा तो पता चला कि उनके नाम से अभद्र टिप्पणियाँ की गई हैं। इसके बाद उन्होंने इस संबंध में एफआईआर भी की।

5 जून को पूरे मामले पर अपना पक्ष रखते हुए आसिफ ने दावा किया कि वो उनका अकाउंट नहीं है। साथ ही उन्होंने GoAir से इस मामले में जाँच की गुहार लगाते हुए न्यायिक व्यवस्था में भरोसा जताने की बात कही। उनका कहना था कि उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।

उन्होंने लिखा, “मै स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मेरे नाम पर जो भी टिप्पणी की गई, वो उस पाखंडी की राय है। मेरा या मेरी कंपनी का इससे कोई लेना-देना नहीं है। मेरा बस यही कहना है कि इस मामले में निष्पक्ष तौर पर जाँच की जाए, क्योंकि इससे मेरे पूरे परिवार, काफी तनाव में आ गया है। खासतौर से मेरे पिता जो इस समय काफी बीमार हैं।”

उल्लेखनीय है कि इससे पहले ख़बर आई थी कि सोशल मीडिया पर सीता माता को लेकर अभद्र टिप्पणी करने वाले ट्रेनी ऑफिसर आसिफ खान को गोएयर (GoAir) ने बाहर का रास्ता दिखा दिया।

आसिफ खान के नाम वाले ट्विटर हैंडल से की गई अभद्र टिप्पणी

एयरलाइन ने कहा था कि किसी व्यक्ति या कर्मचारी के निजी विचारों से उसका कोई लेना-देना नहीं है। गोएयर ने कहा था कि उनकी नीति सभी कर्मचारियों के लिए शून्य सहिष्णुता की है, जिसमें कर्मचारियों को रोजगार नियमों का पालन करना पड़ता है, इसमें सोशल मीडिया पर व्यवहार भी शामिल है।

बता दें कि इससे पूर्व रूपा मूर्ति नाम की सोशल मीडिया यूजर ने एक ट्वीट शेयर किया था, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि जिस आसिफ खान ने ये हरकत की थी, वो GoAir के केबिन क्रू का हिस्सा है जबकि जिस आसिफ खान को GoAir ने निकाल बाहर किया है, वो पायलट है।

रूपा ने अभद्र टिप्पणी करने वाले आसिफ खान और पायलट आसिफ खान के प्रोफाइल का स्क्रीनशॉट शेयर किया। इसमें दिख रहा था कि आरोपित आसिफ खान ने खुद को GoAir के केबिन क्रू का हिस्सा बताया है और साथ ही राजनीतिक विज्ञान का छात्र भी लिखा है। उसने अपनी प्रोफाइल पर लिखा है कि वो सेक्युलर है और अंधभक्त नहीं है। वहीं पायलट आसिफ खान ने अपना लोकेशन मुंबई डाला हुआ है। उसकी प्रोफाइल पर दिलीप मंडल का ट्वीट रीट्वीट हुआ दिख रहा है।

योगी मॉडल अपनाए इमरान सरकार: UP के आँकड़ों से प्रभावित Pak के पत्रकार, कहा- फेल हुई महाराष्ट्र सरकार

कोरोना वायरस आपदा से निपटने की दिशा में उत्तर प्रदेश में किए गए कार्यों की धमक अब पाकिस्तान तक सुनाई दे रही है। पाकिस्तान में लोग योगी मॉडल की तारीफ कर रहे हैं और वहाँ उसी अनुरूप काम करने की सलाह दे रहे हैं। पाकिस्तानी अख़बार ‘डॉन’ के रेजिडेंट एडिटर फहद हुसैन ने एक ग्राफ शेयर किया। इस ग्राफ में पाकिस्तान और उत्तर प्रदेश में मृत्यु दर की तुलना की गई है। उन्होंने लिखा कि पाकिस्तान ने यूपी के मुकाबले काफ़ी घटिया प्रदर्शन किया है।

उन्होंने ध्यान दिलाया कि कमोबेश उत्तर प्रदेश और पाकिस्तान की जनसंख्या और साक्षरता दर सामान ही है। उलटा यूपी के मुकाबले पाकिस्तान में प्रति किलोमीटर जनसंख्या डेंसिटी कम है और प्रति व्यक्ति जीडीपी ज्यादा है। फहद ने आगे लिखा कि उत्तर प्रदेश की सरकार लॉकडाउन को लेकर सख्त थी और उसने इसका कड़ाई से पालन करवाया। उन्होंने अफ़सोस जताया कि पाकिस्तान में ऐसा संभव नहीं हो सका।

साथ ही उन्होंने पूछा कि आखिर पाकिस्तान में इतने लोगों को जान क्यों गँवानी पड़ी? अगर उत्तर प्रदेश और पाकिस्तान के आँकड़ों की तुलना करें तो जहाँ यूपी में 10261 कोरोना पॉजिटिव मरीज मिले हैं, वहीं पाकिस्तान में ये संख्या साढ़े 9 गुना से भी ज्यादा 98943 तक पहुँच चुकी है। पाकिस्तान में इससे मरने वालों की संख्या भी 2000 के पार हो गई है जबकि यूपी में ये आँकड़ा 275 है। फहद ने इसी अंतर की ओर ध्यान दिलाया।

योगी आदित्यनाथ के सूचना सलाहकार शलभ मणि त्रिपाठी ने यूपी सीएम को कर्मयोगी बताते हुए कहा कि उनके प्रयासों और सफलता की गूँज सीमा पार पड़ोसी मुल्कों में भी सुनाई दे रही है। शलभ मणि त्रिपाठी ने कहा कि पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार अब इमरान खान की सरकार को कोरोना से लड़ाई में योगी-मॉडल अपनाने की सलाह दे रहे हैं और इसके लिए प्रामाणिक तथ्य भी रख रहे हैं।

फहद ने इसके अलावा महाराष्ट्र से भी पाकिस्तान की तुलना की और दिखाया कि राज्य ने किस तरह काफ़ी बुरा प्रदर्शन किया है और सरकार वहाँ कोरोना से निपटने में नाकामयाब रही है। महाराष्ट्र में कोरोना के मरीजों की संख्या 85,975 तक पहुँच गई है, जो पाकिस्तान के आँकड़ों से बहुत ज्यादा कम नहीं है। मरने वालों की संख्या 3060 हो गई है, जो पाकिस्तान से डेढ़ गुना ज्यादा है। फहद ने लिखा कि महाराष्ट्र की सरकार इस मामले में एकदम फेल रही है।

24 घंटे में 9, 8 दिन में 18 आतंकियों का सफाया: J&K के शोपियाँ मुठभेड़ में मारा गया 4 दहशतगर्द

जम्मू-कश्मीर के शोपियाँ जिले में सिर्फ 24 घंटे के भीतर भारतीय सुरक्षाबलों ने आतंकियों के खिलाफ ताबड़तोड़ ऐक्शन लेते हुए 9 आतंकियों को मार गिराया है। इससे पहले रविवार को शोपियाँ के ही रेबन गाँव में 5 आतंकवादियों को ढेर किया गया था और आज 4 आतंकियों को पिंजूरा में मारा गया।

जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनुसार , पुलिस को कुछ वक्त पहले पिंजूरा में आतंकियों की मूवमेंट की खबर मिली थी। इस सूचना पर शनिवार शाम से ही यहाँ बड़े पैमाने पर सेना के जवान, CRPF और SOG तलाशी अभियान चला रहे थे।

ऐसे में सोमवार (जून 8, 2020) को आतंकियों ने घेराबंदी के बीच जंगली इलाके में भागने का प्रयास किया। लेकिन जवानों ने उन्हें ललकारा और आतंकियों ने सुरक्षाबल पर फायरिंग कर दी। बस, इसी के बाद जवाबी कार्रवाई में राष्ट्रीय राइफल्स के जवानों ने भी फायरिंग की।

करीब 3 घंटे के ऑपरेशन के बाद 4 आतंकी मौके पर मार गिराए गए। इस पूरे क्रम में कुछ जवान भी घायल हुए।

गौरतलब है कि पिछले महीने खूफिया एजेंसियों ने आतंकी घुसपैठ का अलर्ट जारी किया था। उसके बाद सुरक्षाबलों ने जम्मू-कश्मीर में तलाशी अभियान छेड़ दिया और 8 दिन के अंदर 18 आतंकियों को ढेर किया।

सबसे पहले 1 जून को नौशेरा सेक्टर में घुसपैठ की कोशिश करते हुए 3 पाकिस्तानी आतंकियों को सुरक्षा बलों मार गिराया था। 2 जून को त्राल इलाके में 2 आतंकी मारे गए। फिर 3 जून को कंगन इलाके में सुरक्षाबलों ने 3 आतंकियों को मारा। रजौरी में भी 5 जून को एक आतंकी मारा गया। 7 जून को पाँच आतंकी मरे और आज सुबह 8 जून को 4 आतंकियों का सफाया हुआ। इस प्रकार 8 दिनों के भीतर 18 आतंकियों को मारा गया।

इससे पहले मई महीने में 4 एनकाउंटर हुए थे और पुलिस ने 6 आतंकियों को मारा था। 31 मई को कुलगाम में 2 आतंकी मरे थे। 19 मई को श्रीनगर में हिजबुल के 2 आतंकी मारे गए थे। 16 मई को डोडा में सेना सी कार्रवाई में 5 घंटे की मुठभेड़ के बाद 1 आतंकी मरा था वहीं 6 मई को हिजबुल का टॉप कमांडर रियाज नायकू मारा गया था।

हथिनी, गाय के बाद अब तेंदुए को मारकर निकाला नाखून और दाँत, लटका कर गाँव में घुमाया: असम में 6 गिरफ्तार

केरल में गर्भवती हथिनी और हिमाचल प्रदेश में गाय के साथ दिखाई गई हैवानियत की खबर आने के बाद अब असम में एक तेंदुए के साथ दरिंदगी की खबर है। घटना असम के कताबरी एरिया में स्थित रिज़र्व फ़ॉरेस्ट की है। जहाँ कुछ लोगों ने पहले एक तेंदुए को जाल में फँसाकर उसे इतना मारा कि वो तड़प-तड़पकर मर गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना को अंजाम देने वाले लोगों ने तेंदुए को मारने के बाद उसके दाँत निकाल लिए, उसके नाखून निकाल लिए और बाद में उसके शव की पूरे इलाके में परेड भी कराई। इस मामले के प्रकाश में आने के बाद पुलिस ने 6 लोगों को अरेस्ट किया है।

इस वाकये का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में देख सकते हैं कि लोग किस तरह से तेंदुए को उलटा लटकाकर पूरे इलाके में घुमा रहे हैं।

पुलिस का कहना है कि इस मामले में छह लोगों को अरेस्ट किया गया है और बाकियों की तलाश जारी है। संभवत: यह तेंदुआ बहुत कमजोर था और कई दिनों से भूखा भी था। उस तेंदुए की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आनी है, इसके बाद हत्या की सही वजह सामने आ पाएगी।

अभी तक जो मालूम चला है, वो यह कि तेंदुआ बहुत दिनों से भूखा था। इसलिए मुमकिन है वो इलाके में खाना ढूँढते हुए आया और लोगों ने यह बात न समझ कर उस पर हमला बोल दिया।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार, जिला वन अधिकारी राजीब बरुआ बताते हैं कि यह सब गाँव के कुछ लोगों ने किया। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें लोग तेंदुए के शव को ले रहे हैं और शोर मचा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इनके खिलाफ अवैध शिकार का मामला भी दर्ज कराया जाएगा।

उन्होंने बताया कि वन विभाग अधिकारियों के पास रविवार सुबह 5 बजे कॉल अलर्ट आया था कि एक तेंदुए को पकड़ा गया है। जब अधिकारियों ने वहाँ जाकर देखा तो तेंदुए के पैरों पर एक पतली सी रस्सी बँधी हुई थी और वह किसी के बरामदे में सो रहा था। ऐसे में जैसे ही वन विभाग के लोग उसे बचाने पहुँचे, वो रस्सियों से छूटते ही भाग गया।

बाद में, स्थानीय लोगों ने उसका पीछा किया और 10 बजे वन अधिकारियों को सूचना आई कि तेंदुए को मार दिया गया है। बरुआ के अनुसार, तेंदुए ने किसी को किसी प्रकार का नुकसान नहीं पहुँचाया था और न ही किसी को तंग किया था।

उल्लेखनीय है कि यह घटना जिस इलाके में घटी वो फटासिल रिजर्व फॉरेस्ट के अंतर्गत आता है, जो कि एक अधिसूचित रिजर्व फॉरेस्ट है। इसलिए अधिकारियों का कहना है कि तेंदुआ ने कुछ गलत नहीं किया था। वो अपनी सही जगह पर ही था। लेकिन स्थानीय लोगों ने बिन कुछ सोचे-समझे उसे मार दिया। बता दें कि रिपोर्ट के अनुसार, असम के जोरहाट, डिब्रुगढ़ और गोलाघाट जिलों में पिछले कुछ दिनों में 4 तेंदुओं को मारने की खबर आई है।

शादीशुदा वसीम ने हिन्दू युवती को फँसाया, 2 साल तक दुष्कर्म करता रहा: दिनेश नाम से फर्जी दस्तावेज भी बना रखे थे

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में फिर से लव जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ के मुंडाली थाना क्षेत्र के अजराड़ा निवासी वसीम अहमद ने हापुड़ निवासी एक हिंदू युवती को पहले पहचान छिपाकर अपने प्रेमजाल में फँसाया और फिर 2 साल तक उसके साथ दुष्कर्म करता रहा।

पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर मुकदमा दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। उसके खिलाफ दो केस दर्ज किए गए हैं- एक आईटी एक्ट का और दूसरा युवती से दुष्कर्म का। बता दें कि आरोपित वसीम ने दुष्कर्म पीड़िता के वीडियो और फोटो भी सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए थे।

एसपी देहात अविनाश पांडेय ने बताया कि आरोपित युवक वसीम पहले से शादीशुदा है। उसके दो बच्चे भी हैं। आरोपित वसीम अहमद ने अपना नाम और पहचान छिपाकर मेरठ के नौचंदी क्षेत्र के एक अस्पताल में नौकरी करता रहा। इस दौरान उसने फर्जी तरीके से आधार कार्ड और अन्य कागजात बनवा लिए।

उन्होंने बताया कि वसीम की फेसबुक पर आईडी भी दिनेश रावत के नाम से है। फिलहाल उसके मोबाइल फोन को खँगाला जा रहा है। अविनाश पांडेय ने बताया कि वसीम अहमद ने दो साल पहले खुद को दिनेश बताकर हापुड़ निवासी युवती से दोस्ती की थी।

जानकारी के मुताबिक पुलिस से शिकायत करने पर वसीम ने पीड़िता को जान से मारने की धमकी भी दी। इतना ही नहीं किठौर सीओ रामानन्द कुशवाहा ने बताया कि जब पुलिस वसीम को गिरफ्तार करने पहुँची तो रौब झाड़ने के लिए वो खुद को पत्रकार बता रहा था। पुलिस ने उसके पास से दिनेश रावत और वसीम अहमद नाम की आईडी बरामद की है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों मेरठ में साल भर पुराने केस को सुलझाते हुए बिना सिर और हाथ के मिली लाश मामले में पुलिस ने 6 लोगों को गिरफ्तार किया था। साल भर पुराने लव जिहाद के इस मामले में एक 19 साल की युवती का सिर और धड़ अलग कर नृशंस हत्या कर दी गई थी। इस जघन्य हत्याकांड के मामले में शाकिब, मुस्सरत, मुस्तकीम, रेशमा, इस्मत और अयान नाम के 6 आरोपित गिरफ्तार किए गए। शाकिब ने खुद का नाम अमन बताकर युवती से दोस्ती की थी और फिर पोल खुलने पर उसकी नृशंस हत्या कर दी।

खालिस्तानी आतंकियों को हथियार सप्लाई करने वाला जावेद पकड़ा गया, यूपी एटीएस ने हापुड़ से दबोचा

खालिस्तानी आतंकियों को हथियार सप्लाई करने वाले जावेद को यूपी एटीएस ने रविवार (07 जून, 2020) को हापुड़ से गिरफ्तार किया। एटीएस ने जावेद से कुछ हथियार भी बरामद किए हैं। फिलहाल पुलिस जावेद से पूछताछ करने में जुटी है।

जानकारी के मुताबिक रविवार को एटीएस जावेद का पीछा करते हुए हापुड़ के राधना गाँव पहुँची। लेकिन इसकी भनक लगते ही जावेद फरार हो गया। इसके बाद भी एटीएस ने उसका पीछा नहीं छोड़ा और उसे तलाशती हुई हापुड़ तक पहुँच गई। इसी बीच हापुड़ के एक मार्बल गोदाम में छिपे बैठे जावेद को एटीएस ने धर दबोचा।

बताया जा रहा है कि जावेद के खिलाफ पंजाब में दर्ज मुकदमे में वह वांटेड चल रहा था। वहीं पंजाब पुलिस को इस शख्स की काफी दिनों से तलाश थी। फिलहाल एटीएस जावेद से मेरठ में पूछताछ कर रही है।

जानकारी के मुताबिक खालिस्तानी आतंकियों को हथियार सप्लाई करने वाला आरोपित जावेद मेरठ के किठौर का रहने वाला है। खबर है कि जावेद ने अमृतसर (पंजाब) के कई आरोपितों को करीब 35-40 अवैध हथियार सप्लाई कर चुका है। यूपी एटीएस की टीम ने जावेद की गिरफ्तारी की जानकारी पंजाब पुलिस को दी है।

दरअसल पंजाब पुलिस ने इससे पहले कुछ खालिस्तानी आतंकियों को पकड़ा था, जिनसे हथियार सप्लाई के तौर पर जावेद को लेकर जानकारी मिली थी। यूपी एटीएस इसे लेकर आरोपित की छानबीन करते हुए हापुड़ के देहात क्षेत्र स्थिति गढ़ रोड तक पहुँची थी।

पिछले दिनों मेरठ से खालिस्तानी आतंकी तीरथ सिंह दबोचा गया था। एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) और पंजाब पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने एक ज्वाइंट ऑपरेशन में मेरठ के थापर नगर से उसे गिरफ्तार किया था। पुलिस ने बताया था कि उसके पास से जरनैल सिंह भिंडरावाले के पोस्टर और कुछ अन्य संदिग्ध समान बरामद किए गए थे। वह सीमा पार से गोला-बारूद की खेप मॅंगाने के लिए एक हथियार तस्कर से भी जुड़ा था।

लद्दाख में 43 साल बंद रहा एयरस्ट्रिप, 2008 में वायुसेना ने खोला तो UPA सरकार ने पूछा- क्यों किया ऐसा?

आपने दौलत बेग ओल्डी एयरस्ट्रिप का नाम सुना है? यह लद्दाख में है। चीन के साथ हालिया तनाव के बीच इसी स्ट्रिप का इस्तेमाल कर इलाके में सैनिकों की तैनाती की गई थी। सेना को लॉजिस्टिक्स सपोर्ट समय से पहुॅंचाने के लिहाज से यह बेहद महत्वपूर्ण एयरस्ट्रिप है।

लेकिन, आपको यह जानकर हैरानी होगी यह एयरस्ट्रिप 43 साल तक बंद रही थी। 2008 में वायुसेना ने इसे दोबारा शुरू किया। तत्कालीन सरकार को जानकारी दिए बिना। सरकार को तब बताया गया, जब यह काम पूरा हो गया। इसके बाद सरकार ने पूछा कि ऐसा क्यों किया? 2008 में मनमोहन सिंह की अगुवाई में केंद्र में UPA की सरकार हुआ करती थी।

बता दें कि लद्दाख का दौलत बाग ओल्डी (DBO) दुनिया की सबसे ऊँची एयरस्ट्रिप है। यह 16,614 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। इसे एडवांस लैंडिंग ग्राउंड भी कहा जाता है। यह एयरस्ट्रिप 1965 से 2008 के बीच नॉन-ऑपरेशनल रहा था। 

मई 2008 में वायु सेना के तत्कालीन वाइस चीफ एयर मार्शल (retd) प्रणब कुमार बारबोरा ने इस एयरस्ट्रिप को फिर से शुरू किया। उन्होंने यहाँ पर AN-32 विमान की लैंडिंग करवाई। पीके बारबोरा उस समय पश्चिमी वायु कमांड के कमांडर इन चीफ थे। यह मिशन पूरी तरह से गुप्त था। कोई लिखित आदेश नहीं था और यहाँ तक कि तत्कालीन रक्षा मंत्री एके एंटनी को भी अँधेरे में रखा गया था। उन्हें भी मिशन पूरा होने के बाद ही पता चला था।

पीके बारबोरा ने इकोनॉमिक टाइम्स को दिए इंटरव्यू में इसका खुलासा किया कि आखिर उन्होंने ऐसा क्यों किया। जब उनसे 43 साल बाद एयरस्ट्रिप को फिर से चालू करने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि सबसे पहली बात कि यह दुनिया का सबसे ऊँचा लैंडिंग ग्राउंड है। दूसरा, यह काराकोरम दर्रे से कुछ ही किलोमीटर दूर है। एयरस्ट्रिप का निर्माण 1962 में चीनियों की गतिवियों की जाँच साथ ही ग्लेशियर की तरफ से पाकिस्तान से किसी भी तरह की घुसपैठ को रोकने के लिए किया गया था। लेकिन लैंडिंग ग्राउंड को 1965 में छोड़ना पड़ा। हालाँकि वहाँ सामग्री भेजने के लिए हेलिकॉप्टरों को भेजना जारी रखा गया था।

यह पूछे जाने पर कि 1965 में इस एयरस्ट्रिप को क्यों छोड़ना पड़ा, तो उन्होंने इसका जवाब देते हुए कहा कि 1962 के युद्ध के बाद, सेना के इंजीनियरों ने इस लैंडिंग ग्राउंड को बनाने में एक शानदार काम किया, लेकिन उस ऊँचाई पर किसी भी दो इंजन वाले विमान को नहीं उतारने का निर्णय लिया गया। क्योंकि टेक-ऑफ के दौरान, यदि एक इंजन विफल हो जाता है, तो सभी मारे जाते।

उस समय, Packet एकमात्र विमान था जो दौलत बेग ओल्डी के लिए उपयुक्त पाया गया था, चूँकि दो इंजन वाले विमानों में एक और छोटे इंजन को जोड़कर संशोधित किया गया था, तो व्यावहारिक रूप से यह तीन इंजनों वाला विमान था। लेकिन 1965 में Packet का लाइफ साइकल पूरा होते ही एयरस्ट्रिप का इस्तेमाल भी बंद हो गया। उन्होंने बताया कि इलाका अभी भी शत्रुतापूर्ण बना हुआ है। वहाँ ऑक्सीजन कम है, कोई वनस्पति नहीं है। चौकी तक पहुँचने के लिए कर्मियों को कई दिनों तक पैदल चलना पड़ता था।

इंटरव्यू के दौरान उनसे पूछा गया कि ऐसे में जब चीन की तरफ से लगातार धमकियाँ मिल रही हैं, तो फिर 43 साल में दौलत बेग ओल्डी को फिर से सक्रिय करने के लिए कोई प्रयास क्यों नहीं किया गया? उन्होंने इसका जवाब देते हुए कहा कि इस बीच कम से कम पाँच बार प्रयास किए गए थे।

वो कहते हैं, “जब मैंने एयरस्ट्रिप को फिर से खोलना चाहा, तो मैंने पाँच फाइलें देखीं। उन फाइलों को देखने के बाद मुझे एहसास हुआ कि अगर मैंने एक और फ़ाइल बनाई और लिखित रूप में अपना अनुरोध रखा, तो मुझे भी आने नहीं बढ़ने दिया जाएगा।। पहले की सभी फाइलें विभिन्न कारणों से ’नहीं’ के साथ बंद कर दी गईं थीं। इसलिए, मैंने बिना किसी लिखित अनुमति के दौलत बेग ओल्डी एयरस्ट्रिप को फिर से खोलने का फैसला किया।”

पीके बारबोरा आगे कहते हैं, “मैंने फैसला किया कि कोई फाइल नहीं बनने दूँगा, कुछ भी लिखित में नहीं होने दूँगा। क्योंकि यदि आप अनुमति माँगते हैं, तो सभी पुरानी फाइलें खँगाली जाएँगी आखिकार जवाब एक और ‘नहीं’ होगा। इसके बजाय, मैंने सेना में अपने समकक्षों से बात की और वायु सेना के अधिकारियों का चयन करके एयरस्ट्रिप और अन्य तैयारियों की स्थिति पर त्वरित अध्ययन किया।”

उन्होंने बताया कि इसके लिए उन्हें कुछ खास बातों का भी ध्यान रखना था। जैसे कि AN-32 को 14,000 फीट से ऊपर नहीं जाना चाहिए। इस तरह लैंडिंग से ज्यादा समस्या टेकऑफ की थी। उन्होंने अपनी सुरक्षा मानदंडों को बढ़ाने के लिए गुपचुप तरीके से विशेष प्रशिक्षण भी लिया। जैसे कि इंजन बंद हो जाए तो क्या करना होगा? बिना इंजन बंद किए टायर को बदलने की आवश्यकता पड़ी तो क्या करना होगा?

पीके बारबोरा कहते हैं, “आखिरकार वह तारीख करीब आ गई। मैंने 31 मई 2008 को वायु सेना के तत्कालीन प्रमुख (एयर चीफ मार्शल फली होमी मेजर) और दिल्ली के वायु सेना के गोल्फ कोर्स में सेना प्रमुख (जनरल दीपक कपूर) से बात की और उनकी मौखिक अनुमति ली। मैंने एयर स्टाफ के तत्कालीन उपाध्यक्ष प्रदीप नाइक को भी जानकारी दी। मगर रक्षा मंत्री (एके एंटनी) को तब ही पता चला था जब हमने मिशन पूरा कर लिया था।”

क्या हुआ था उस दिन?

पीके बारबोरा ने ET को बताया, “विमान में हम पाँच लोग थे – दो वायु सेना के पायलट, एक नेविगेटर, एक गनर और मैं। हमने चंडीगढ़ से AN -32 को उड़ाया। हम सुबह नौ बजे से पहले दौलत बेग ओल्डी पर उतरे। हमने पूरे ऑपरेशन को गुप्त रखा। मेरी पत्नी को किसी तरह भनक लग गई था, लेकिन अन्य चालक दल की पत्नी को मिशन के बारे में कुछ भी पता नहीं था।”

वो आगे कहते हैं, “हमने कुछ समय शीर्ष पर बिताया। लौटते समय सेना के एक बड़े अधिकारी हमारे साथ थे। जब हमने दौलत बेग ओल्डी से उड़ान भरी, तो यह एक ऊँचे मैदान पर ऊँट की सवारी की तरह था। लेकिन हमने विमान को सफलतापूर्वक उतार दिया। हमारे विमान की निगरानी के लिए एक अतिरिक्त विमान था। हम तुरंत दिल्ली पहुँचे। हाँ, हमने दौलत बेग ओल्डी को फिर से शुरू कर दिया था।”

अंत में वो कहते हैं, “हमने साबित किया कि हम सक्षम थे। हमने चीनियों को चौंका दिया। बाद में, 2013 में, एक चार इंजन वाला विमान C-130 हरक्यूलिस वहाँ उतरा। यह अब 2020 है, 1962 नहीं।”

कश्मीर: शोपियां में मार गिराए गए 5 आतंकी, हिज्बुल के टॉप कमांडर फारूक अहमद के ढेर होने की भी अटकलें

शोपियां में रविवार (07 जून, 2020) को जम्मू-कश्मीर पुलिस और सुरक्षाबलों ने 5 आतंकियों को मार गिराया। कश्मीर जोन के पुलिस आईजी विजय कुमार ने बताया कि शनिवार को शोपियां के पुलिस अधीक्षक को रेबन गॉंव में आतंकियों के छिपे होने की सूचना मिली थी।

उन्होंने बताया कि इसके बाद सेना, सीआरपीएफ और पुलिस की संयुक्त टीम ने इलाके की घेराबंदी कर दी। सुबह सर्च ऑपरेशन शुरू किया। आतंकियों ने इस दौरान सुरक्षा बलों पर फायरिंग की और जवाबी कार्रवाई में वे मार गिराए गए।

आतंकियों की पहचान की फिलहाल आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। कुछ मीडिया रिपोर्टों में इन्हें हिज्बुल मुजाहिद्दीन से जुड़ा बताया गया है। सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि मार गिराए गए आतंकियों में से एक हिज्बुल का टॉप कमांडर फारूक अहमद भट्ट है।

एनबीटी की रिपोर्ट के अनुसार फारूक को नाली नाम से भी जाना जाता है। वह कुलगाम का रहने वाला था। ये भी कहा गया है कि करीब दो सप्ताह पहले कुलगाम के येरिपोरा में हुई मुठभेड़ में वह भाग निकला था।

खबरों के मुताबिक ऑपरेशन फ़िलहाल चल रहा है। शोपियां और कुलगाम जिले में मोबाइल इंटरनेट सेवा को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। रक्षा प्रवक्ता कर्नल राजेश कालिया ने बताया कि अभियान के दौरान यह सुनिश्चित किया गया था कि आम नागरिकों को कोई नुकसान नहीं पहुँचे।

गौरतलब है कि बारामूला जिले में शनिवार (06 जून, 2020) को आतंकवादियों ने एक युवक की गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि आतंकवादियों ने अश्फाक अहमद नजर के उत्तरी कश्मीर के बोमई इलाके के आदिपुरा में स्थित घर पर रात करीब 9 बजकर 30 मिनट पर हमला किया। हमले में नजर घायल हो गया। उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई।

शौकत जहां ने ‘हनुमान’ को थप्पड़ मारा… वो दुम दबाकर भागा: नेटफ्लिक्स पर चल रही सफदर रहमान की Chippa

अमेरिकन ऑनलाइन मीडिया स्ट्रीमिंग कंपनी नेटफ्लिक्स पर एक बार फिर से हिंदुओं और हिंदू धर्म का अपमान करने का आरोप लगा है। नेटफ्लिक्स की लेटेस्ट मूवी ‘Chippa’ का एक क्लिप सामने आया है। इसमें हिंदुओं के भगवान हनुमान का मजाक उड़ाते हुए देखा जा सकता है। बता दें कि इस मूवी के निर्देशक और लेखक सफदर रहमान हैं।

फिल्म के क्लिप में दिखाया जाता है कि एक बुजुर्ग मुस्लिम शख्स एक बच्चे को अपनी परदादी मरहूम शौकत जहां की कहानी सुनाता है। वह कहता है कि उसकी परदादी शौकत जहां को बचपन से ही घुड़सवारी और लड़कों के साथ खेलने का काफी शौक था। वो नारियल को मुक्का मारकर ही फोड़ देती थी।

वह आगे कहता है कि एक दिन वो नारियल लेकर आ रही थी कि उनके सामने ‘हनुमान’ आ गया। हनुमान ने उनके हाथ से नारियल ले लिया और एक तरफ खड़े होकर हँसने लगा। परदादी शौकत जहां ने अपने हाथ की आस्तीन को मोड़ा, फिर उसके पास गई और एक जोर का थप्पड़ मारा और उसके हाथ से नारियल ले लिया। इसके बाद ‘हनुमान’ ने अपना सिर झुकाया, दुम दबाया और भाग गया।

कथित तौर पर फिल्म के अंत में उसी बच्चे को हनुमान चालीसा पढ़ने के दौरान थप्पड़ मारा जाता है। सोशल मीडिया पर लोग हिंदुओं के अपमान से खफा हैं। उनका कहना है कि यह अस्वीकार्य है। उन्होंने नेटफ्लिक्स प्लेटफॉर्म और निर्देशक सफदर रहमान के खिलाफ आपराधिक शिकायत की माँग की है।

लोगों ने यह भी कहा कि अगर फिल्ममेकर को यही दिखाना था कि परदादी ने बंदर को थप्पड़ मारा तो वो उसे ‘हनुमान’ कहने की बजाय बंदर कह सकते थे। मगर उन्हें तो हिंदू देवताओं का अपमान करना था, इसलिए ऐसा कहा गया।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है, जब नेटफ्लिक्स पर हिंदू देवी-देवताओं या उनके धर्म का अपमान करने का आरोप लगा हो। इससे पहले इसी प्लेटफॉर्म पर ‘लैला’ के जरिए हिन्दुओं के प्रति घृणा जगाने वाले नाम के रूप में परोसने का काम किया। शो में एक ऐसे काल्पनिक फ्यूचर की कल्पना की गई, जहाँ ‘हिन्दू राष्ट्रवादियों’ का राज्य की मशीनरी पर कब्ज़ा हो जाता है।

वहीं पिछले दिनों शिवसेना नेता रमेश सोलंकी ने भी नेटफ्लिक्स के ख़िलाफ़ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। उनका कहना था कि नेटफ्लिक्स कई शो के माध्यम से लगातार हिन्दू भावनाओं को आहत करने का काम कर रहा है। शिवसेना नेता ने अमेरिकी कम्पनी पर आरोप लगाया कि नेटफ्लिक्स के माध्यम से दुनिया भर में भारत की नकारात्मक छवि बनाई जा रही है। 

शिवसेना नेता ने अपनी शिकायत में सैफ अली ख़ान और नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी अभिनीत ‘सेक्रेड गेम्स’, हुमा कुरैशी की ‘लैला’, राधिका आप्टे की ‘Ghoul’ और स्टैंड-अप कॉमेडियन हसन मिन्हाज की ‘पेट्रियट एक्ट’ का नाम लिया था। सोलंकी ने कहा था कि नेटफ्लिक्स पर प्रसारित होने वाले लगभग सभी सीरीज में भारत को बदनाम करने की कोशिश की जाती है।

नलिनी श्रीहरण: राजीव गाँधी की हत्या की दोषियों में से एक, जब गिरफ्तार की गई तो 2 महीने की गर्भवती थी

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में एक आत्मघाती बम धमाके से हत्या कर दी गई थी। उनके साथ 13 अन्य लोगों ने भी अपनी जानें गँवाई थी। राजीव गाँधी हत्याकांड की एक दोषी नलिनी श्रीहरण अभी उम्र कैद की सजा काट रही है। बता दें कि राजीव गॉंधी की हत्या के आरोप में नलिनी को जब गिरफ्तार किया गया था, वह दो महीने की गर्भवती थी।

नलिनी ने जेल में रहने के दौरान ही अरिथ्रा मुरुगन नाम की बच्ची को जन्म दिया। कुछ समय तक अरिथ्रा उसके साथ जेल में रही। फिलहाल अरिथ्रा यूनाइटेड किंगडम में डॉक्टर है। इधर नलिनी ने राजीव गाँधी हत्याकांड मामले में अपनी भूमिका को लेकर लगभग तीन दशकों से जेल में बंद है।

मिनहाज मर्चेंट ने राजीव गाँधी की बॉयोग्राफी में नलिनी श्रीहरण की भूमिका के बारे में बताया है। बॉयोग्राफी के अनुसार, नलिनी उस कोर ग्रुप का हिस्सा थी, जिसने हत्या की साजिश रची थी। इस ग्रुप में श्रीनिवासन, मुरुगन, अरिवु, धनु, शुभा के साथ ही तीन स्थानीय लोग- भाग्यनाथन, नलिनी और पद्मा थे। जानकारी के मुताबिक धनु ने आत्मघाती हमलावर की भूमिका निभाई थी। इस कोर ग्रुप के पास प्लान की हर मिनट की खबर होती थी।

2019 में नलिनी को अपनी बेटी की शादी की व्यवस्था करने के लिए 30 दिन की पैरोल दी गई थी। उसने बताया कि वो 28 साल से जेल में है और इस दौरान उसे कभी भी एक महीने की छुट्टी का लाभ नहीं मिला, जो कि उम्र कैद की सजा काटने वाले मुजरिमों को मिलती है। इससे पहले उसने यह भी कहा था कि उसे राजीव गाँधी की हत्या का पछतावा है।

नलिनी, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की हत्या में खुद की संलिप्तता से पूरी तरह से इनकार करती है। जब प्रियंका गाँधी वाड्रा उससे मिलने गई थी और पूछा था कि उसने उनके पिता को क्यों मार दिया तो नलिनी ने बताया कि उसे प्लान के बारे में कुछ भी नहीं पता था। उसकी हत्या में कोई भूमिका नहीं थी, उसे तो ‘हालात’ ने कैदी बना दिया।

तमिलनाडु सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 161 के तहत सभी सात दोषियों- एजी पेरारिवलन, वी श्रीहरण उर्फ मुरुगन, टी सुतेन्द्रराज उर्फ संथान, जयकुमार, रॉबर्ट पायस, रविचंद्रन और वी श्रीहरण की पत्नी नलिनी श्रीहरण को रिहा करने का आदेश दिया है। मगर यह आदेश अभी भी राज्यपाल के पास लंबित है। इन दोषियों में से श्रीहरण, संथान, रॉबर्ट पायस और जयकुमार श्रीलंका के नागरिक हैं।

राजीव गाँधी हत्याकांड में भूमिका को लेकर शुरुआत में नलिनी को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई थी, लेकिन फिर उसकी बेटी की जन्म की वजह से कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने उसकी फाँसी की सजा को उम्रकैद में बदलने की अपील की थी। इसके बाद नलिनी की फाँसी की सजा उम्रकैद में बदल दी गई।

21 मई 1991 को जब तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में आत्मघाती बम हमले में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की हत्या कर दी गई थी, तब उनके साथ-साथ 13 अन्य लोगों की भी जान चली गई थी। और जब कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी सहित राजीव गाँधी के परिवार ने दोषियों को ‘माफ’ कर दिया और कहा कि हत्यारों को रिहा करने पर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, तो राजीव गाँधी के साथ मरने वालों के परिजन उनके इस कदम से खुश नहीं थे। राजीव गाँधी के साथ जान गँवाने वालों 13 लोगों के परिजनों की तरफ से सोनिया गाँधी या उनके बच्चे कैसे फैसला ले सकते हैं?

दंगा भड़काने के आरोप में सफूरा जरगर गिरफ्तार

जामिया मिलिया इस्लामिया की छात्रा सफूरा जरगर फिलहाल दिल्ली में सीएए-विरोधी दंगों में कथित संलिप्तता के लिए जेल में बंद है। सफूरा के गर्भवती होने के बावजूद जेल में बंद करने को लेकर सोशल मीडिया पर काफी उछाला गया। तरह-तरह की दलीलें दी जा रही है, रिहा करने के लिए ट्रेंड चलाए जा रहे हैं। जबकि कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि प्रथम दृष्टया यह नहीं कहा जा सकता कि उसके खिलाफ कोई मामला नहीं है।

इसके बावजूद सोशल मीडिया पर सफूरा के गर्भवती होने का हवाला देकर तत्काल रिहाई की माँग की जा रही है। जबकि राजीव गाँधी हत्याकांड मामले में देखा जा सकता है कि गर्भवती महिला को गिरफ्तार भी किया गया और उसके अपराध के लिए दोषी भी ठहराया गया।