केरल में गर्भवती हथिनी को पटाखों से भरा अनानास खिलाने की घटना के बाद अब हिमाचल प्रदेश में गाय को बम खिलाने की घटना सोशल मीडिया पर सामने आई है।
सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे इस वीडियो में हिमाचल प्रदेश के गुरदयाल सिंह इस जख्मी गाय के साथ नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि लोग गौरक्षा की बात कर रहे हैं जबकी एक गर्भवती गाय को विस्फोटक खिला दिया है।
अपना नाम गुरदयाल सिंह बता रहे इस व्यक्ति ने किसी नंदलाल को इस हरकत का जिम्मेदार बताया है। गुरदयाल का कहना है कि नंदलाल उनके पड़ोस में रहता है और मिस्त्री का काम करता है। साथ ही, उन्होंने कहा कि गाय के साथ ऐसी हरकत करने के बावजूद नंदलाल का कहना है कि उन्हें अब जो करना है करे लें और प्रधान से लेकर तमाम लोग उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकते।
हालाँकि, सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे इस वीडियो के बारे में हमें इस क्रूर कृत्य के होने के समय की जानकारी नहीं है। लेकिन हम अपने स्तर से उक्त व्यक्ति तक पहुँचने की कोशिश कर रहे हैं।
वीडियो में देखा जा सकता है कि गाय का मुँह बहुत गंभीर रूप से जख्मी है और उससे बहुत खून भी निकल रहा है। यह वीडियो शेयर किए जाने के पीछे एक वजह केरल में गर्भवती हथिनी को पटाखों से भरा अनानास खिलाने के बाद उसकी मौत की घटना भी है। जिसे लेकर देशभर में लोग पहले से ही आक्रोशित हैं।
सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे इस वीडियो को आप इस लिंक पर देख सकते हैं। ज़ख्मी गाय का यह वीडियो संवेदनशील है।
गर्भवती हथिनी की मौत से पहले से ही आक्रोशित हैं लोग
केरल में पटाखों से भरा अनानास खिलाए जाने के बाद गर्भवती हथिनी की मौत को केंद्र सरकार ने गंभीरता से लिया है और कहा कि इसकी आवश्यक जाँच की जाएगी। केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इस सम्बन्ध में केरल सरकार से पूरी रिपोर्ट माँगते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया।
पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने अपनी नाराजगी जताते हुए माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर लिखा, “केंद्र सरकार ने केरल में एक हथिनी की हत्या के मामले पर बहुत गंभीरता से ध्यान दिया है। हम सही तरीके से जाँच करने और अपराधी को पकड़ने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। पटाखे खिलाना और मारना भारतीय संस्कृति नहीं है।”
दरअसल, 27 मई को एक 15 वर्षीय गर्भवती हथिनी एक अमानवीय कृत्य का शिकार हो गई। उसे किसी उपद्रवी शख्स ने पटाखों से भरा अनानास खिलाया, जिससे हथिनी के मुँह में विस्फोट हो गया और वह बुरी तरह जख्मी हो गई। हथिनी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि वह गर्भवती थी। उसका जबड़ा टूट गया था और मुँह में विस्फोट के कारण वह अनानास चबाने के बाद कुछ खा नहीं पा रही थी।
इस विस्फोट से उसकी जीभ और मुँह पर गंभीर चोटें आईं। इसके बाद वह एक नदी में चली गई और तीन दिनों के बाद आखिर में उसने प्राण त्याग दिए। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने हथिनी की मौत पर रिपोर्ट माँगी है और कहा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
आज सुबह ही कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया है कि गर्भवती हथिनी की मौत को लेकर देश भर में जारी आक्रोश के बीच पुलिस ने इस मामले में एक शख्स को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि केरल राज्य के वन मंत्री के राजू ने यह जानकारी देते हुए बताया कि आरोपित का नाम पी विल्सन है और वह नकदी फसलों और मसालों के एक फार्म में काम करता है। एक अन्य शख्स को भी हिरासत में लिया गया है।
दिल्ली पुलिस ने बृहस्पतिवार (जून 04, 2020) को पाँचवीं चार्जशीट कड़कड़डूमा कोर्ट में दायर कर दी है। पुलिस ने दिलबर नेगी की हत्या के मामले में 12 लोगों को आरोपित बताया है। पुलिस ने अदालत को बताया कि गत फरवरी में पूर्वोत्तर दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा के दौरान मुस्लिम भीड़ ने हिंदुओं की संपत्तियों को निशाना बनाते हुए उसकी मिठाई-दुकान के अंदर एक व्यक्ति (दिलबर नेगी) को जिंदा जला दिया गया था।
Charge sheet filed in connection with the Gokulpuri murder case which was registered after the body of a man, Dilbar Negi was found in mutilated condition in Anil Sweet House, Brijpuri on 26th February, during the Delhi violence.
क्राइम ब्रांच ने मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ऋचा परिहार के समक्ष चार्जशीट दायर की है। कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के लिए 18 जून की तारीख तय की है। वो सभी आरोपित फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं, जिन पर हत्या, दंगा, धर्म के आधार पर दो समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए हैं।
इस चार्जशीट के अनुसार, मुस्लिम समुदाय की एक भीड़ ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के बृजपुरी पुलिया की तरफ से आई और हिंदुओं की संपत्तियों को निशाना बनाते हुए दंगा करना शुरू कर दिया और 24 फरवरी की देर रात तक उनमें आगजनी करती रही।
पुलिस ने कहा कि भीड़ ने अनिल स्वीट्स नाम की एक दुकान में आग लगा दी थी, जहाँ से पुलिस ने 26 फरवरी को दिलबर नेगी का शव बरामद किया था। हत्या के वक्त नेगी लंच और आराम करने के लिए दुकान के गोदाम में गया था, जहाँ उसे दंगाइयों ने काटकर आग में झोंक दिया था।
उल्लेखनीय है कि जिस दिन उत्तराखंड के निवासी दिलबर नेगी के साथ यह क्रूर हादसा हुआ, उसी समय वहाँ मौजूद दंगाइयों की भीड़ से किसी तरह भाग निकलने में सफल रहे उसके साथियों ने जीटीबी अस्पताल से ऑपइंडिया से सम्पर्क कर इस बारे में विस्तृत रूप से बताया था।
दिलबर सिंह नेगी उत्तराखंड के पौड़ी जिले स्थित थलीसैण ब्लॉक से सम्बन्ध रखते थे। उनके करीबी श्याम सिंह ने ऑपइंडिया को बताया कि 23 फ़रवरी की शाम कुछ दंगाई शाहदरा इलाके में शोर मचाते हुए घुसे। दंगाइयों ने नेगी को अपना पहला निशाना बनाया। उनके हाथ-पैर काट दिए। फिर पास की दुकान में लगी आग में झोंक दिया।
इस घटना को देख वहाँ के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। अपनों के बीच चीख-पुकार शुरू हो गई। दहशत में लोग अपनी जान बचाकर भागे। फ़ोन पर ऑपइंडिया के साथ बातचीत में भी दिलबर के परिजन बेहद डरे लग रहे थे। उन्होंने बताया कि वे अभी भी GTB अस्पताल में मौजूद हैं और दिलबर की बॉडी मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
दिलबर नेगी के शरीर की राख अनिल स्वीट्स के गोदाम से बरामद हुई थी। जिसमें स्पष्ट देखा जा सकता था कि बिना हाथ और पैरों का शरीर राख के ढेर में तब्दील हो चुका था।
दंगाइयों ने पहचान छिपाने को नष्ट किए थे CCTV कैमरे, तीसरी चार्जशीट में हुआ खुलासा
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के दौरान समुदाय विशेष की भीड़ के निशाने पर दूसरे समुदाय की संपत्ति थी। दंगाइयों की भीड़ ने देर रात तक उत्पात मचाते हुए शिव विहार तिराहे के आसपास की एक समुदाय के लोगों की संपत्तियों में तोड़-फोड़ करने के साथ आगजनी की थी।
क्राइम ब्रांच के आरोप पत्र के मुताबिक उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों की शुरुआत कर्दमपुरी, मौजपुर और चाँद बाग में हुई थी। इसके बाद दंगाईयों की भीड़ उत्तर-पूर्वी जिले के विभिन्न इलाकों में और उसके बाद डीआरपी स्कूल और राजधानी पब्लिक स्कूल के पास शिव विहार तिराहा पर पहुँची थी। दोपहर बाद लगभग तीन बजे बृजपुरी पुलिया की तरफ से समुदाय विशेष के लोगों की भीड़ आ गई और दंगा शुरू कर दिया। दंगाई भीड़ ने देर रात तक उत्पात मचाया।
आज ऑपरेशन ब्लू स्टार की 36वीं बरसी है, 3 से 6 जून 1984 तक भारतीय सेना द्वारा चलाए गए इस सैन्य ऑपरेशन का मकसद अमृतसर (पंजाब) में हरिमंदिर साहिब परिसर को खालिस्तान समर्थक जनरैल सिंह भिंडरांवाले और उनके समर्थकों से मुक्त कराना था और इसमें अहम भूमिका निभाई थी अजीत डोभाल ने, जो कि आज देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं।
भारत ने पाकिस्तान से बांग्लादेश को आजाद करवाया था और इसी बात का बदला लेने के लिए पाकिस्तान ने भारत से पंजाब को अलग करवाने की योजना बनाई। पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI ने इस काम के लिए पंजाब में सिख आतंकवाद और कट्टरपंथ को हवा दी और भिंडरांवाले को अपना हथियार बनाया जिसके नेतृत्व में अलगाववादी ताकतों को पाकिस्तान से लगातार समर्थन मिल रहा था। ऑपरेशन ब्लू स्टार के पीछे जो बातें सबसे अहम रहीं, उनमें खालिस्तानी अलगाववादियों के पंजाब की स्वायत्तता की माँग का उग्र रूप में सामने आना प्रमुख वजह रहा।
नतीजा यह हुआ कि पंजाब को भारत से अलग कर खालिस्तान बनाने की माँग तेजी से जोर पकड़ने लगीं थीं। गलियों में आवाजें सुनाई पड़ रही थीं- ‘पंजाब को भारत से अलग करने के लिए सशस्त्र संघर्ष के लिए तैयार रहें।’ इसकी एक तरह से आधिकारिक घोषणा तब हुई जब मार्च, 1981 को एक नए स्वायत्त खालिस्तान का झंडा पंजाब स्थित आनंदपुर साहिब पर फहराया गया।
पंजाब में बिगड़ते हालातों के बीच 1982 में इंदिरा गाँधी ने एक बड़ा राजनैतिक फैसला लिया और गृह मंत्री ज्ञानी जैल सिंह को राष्ट्रपति बना दिया। वही जेल सिंह जिन्होंने गृह मंत्री रहते 1981 में भिंडरांवाले की रिहाई की घोषणा करते हुए कहा था कि भिंडरांवाले के खिलाफ कोई सबूत ही नहीं है। जून 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार के समय उन पर मूक दर्शक बनने का आरोप भी लगे थे।
जनरैल सिंह भिंडरांवाले चरमपंथी के रूप में उभरने लगा था
आखिर एक दिन जनरैल सिंह भिंडरवाले ने हथियारों से लैस आतंकवादियों के साथ स्वर्ण मंदिर पर कब्जा कर लिया। सभी हालातों को देखते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने समझौते के प्रयास किए, लेकिन जब कोई समझौता नहीं हो पाया तो उन्होंने फैसला किया कि अब कार्रवाई की जाए और स्वर्ण मंदिर को भिंडरांवाले के हाथ से निकाला जाए।
ऑपरेशन ब्लू स्टार
01 जून को खालिस्तान समर्थक आतंकियों ने तत्कालीन सरकार के साथ किसी भी समझौते में विफल होने के बाद आखिर में 3 जून को भारतीय सुरक्षा बलों को स्वर्ण मंदिर घेरना पड़ा। इसके पीछे एक बड़ी वजह यह भी थी कि जून 03, 1984 को हजारों भक्त गुरु अर्जुन देव का शहीदी दिवस मनाने के लिए अमृतसर में इकट्ठे होने वाले थे।
हरिमंदिर साहब परिसर में भिंडरांवाले और उसके साथियों की मोर्चाबंदी और परिसर के बाहर सुरक्षाबलों की मोर्चाबंदी ने अमृतसर के उस इलाके को छावनी की शक्ल दे दी।
4 जून को सेना ने मंदिर में छुपे आतंकियों की स्थिति जानने के लिए गोलीबारी शुरू कर दी थी, जिसके बाद 5 जून को आतंकियों और सेना में जमकर टकराव हुआ, भारी गोलीबारी और संघर्ष में 83 भारतीय सैनिकों ने अपनी जान गँवाई और 249 घायल हुए थे।
ऑपरेशन ब्लू स्टार में सेना का नेतृत्व तत्कालीन लेफ्टिनेंट जनरल केएस बरार ने किया था। जनरल बरार ने इस बारे में कहा था –
“मुझे बताया गया था कि हालात इतने खराब हो गए हैं कि अगले दो-चार दिन में खालिस्तान की घोषणा हो जाएगी। जिसके बाद पंजाब पुलिस खालिस्तान में मिल जाएगी। फिर दिल्ली और हरियाणा में जो सिख हैं वो फौरन पंजाब की ओर बढ़ेंगे और हिंदू पंजाब से बाहर निकलेंगे। 1947 की तरह दंगे हो सकता है। पाकिस्तान भी सीमा पार कर सकता है, यानी पाकिस्तान से बांग्लादेश के अलग होने की घटना भारत में दोहराई जा सकती है।”
जनरल बरार ने आपने अपनी किताब में भी इस बात का जिक्र किया कि इस ऑपरेशन के बारे में उन्हें पता नहीं था। तब वो मेरठ में थे और 90 इनफैंट्री डिविजन को कमांड कर रहे थे। उन्होंने लिखा है कि मई 30 की शाम उन्हें फोन आया कि जून 01 को चंडीमंदिर एक मीटिंग के लिए पहुँचना है, जबकि उसी शाम उनका प्रोग्राम मनीला जाने का था, टिकटें बुक हो चुकी थीं लेकिन इस कार्यक्रम को रद्द करना पड़ा।
इस ऑपरेशन के दौरान बरार को महसूस हुआ था कि स्वर्ण मंदिर में छुपे अलगाववादियों के पास राकेट लॉन्चर जैसे हथियार थे और तमाम प्रयासों के विफल होने और भीतर मौजूद खालिस्तानी आतंकियों की तैयारी को देखकर साफ था कि वो आत्मसमर्पण के मूड में बिल्कुल भी नहीं हैं। तब तक भारतीय सुर्ख बल भी अपने कई जवानों को खो चुकी थी। ऐसे में मेजर जनरल केएस बरार के एक कमांडिंग ऑफिसर ने उनसे टैंक बुलाने की माँग की।
बरार ने भी यह बात मानी की अब इसके अलावा कोई अन्य उपाय फिलहाल उनके पास नहीं था। वो चाहते थे कि सुबह होते ही यदि इस ऑपरेशन की खबर फ़ैल गई तो पंजाब उबल पड़ेगा, इसलिए वो इन्तजार भी नहीं करना चाहते थे।
आख़िरकार बरार ने सरकार से टैंक इस्तेमाल करने की इजाजत माँगी। परमिशन मिलते ही मौके पर टैंक बुलाए गए और सुबह 5 बजकर 21 मिनट पर टैंक ने पहला गोला दागा।
आखिरकार जून 06, 1984 को जरनैल सिंह भिंडरांवाले की मौत की खबर आई, जिसने अप्रैल 1983 से ही स्वर्ण मंदिर को अपना हेडक्वार्टर बना लिया था, और सेना इस मंदिर को अलगावादियों के चंगुल से मुक्त करने में सफल रही। हालाँकि सिखों के इस पवित्र मंदिर में सेना के ऑपरेशन ने दुनियाभर के सिखों को नाराज कर दिया था।
इसी सैन्य ऑपरेशन का परिणाम यह हुआ कि अक्टूबर 31, 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के दो सिख अंगरक्षकों, सतवंत सिंह और बेअंत सिंह ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी। इंदिरा गाँधी की हत्या के तुरंत बाद देश के कई हिस्सों में सिख विरोधी दंगे भड़के उठे। इन दंगों में हज़ारों लोगों की जान गई।
ऑपरेशन ब्लू स्टार में कुल 493 आतंकी मारे गए थे और 86 घायल हुए थे, जबकि गिरफ्तार किए गए आतंकियों की संख्या 1592 थी। जून 06, 1984 का वह दिन था, जब अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में की गई भारतीय सेना की इस कार्रवाई को ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार’ का नाम दिया गया।
ऑपरेशन ब्लैक थंडर
ऑपरेशन ब्लू स्टार के कुछ समय बाद ऑपरेशन ब्लैक थंडर (Operation Black Thunder) को अंजाम दिया गया, जिसका मकसद स्वर्ण मंदिर से बाकी आतंकवादियों को बाहर निकालना था। ऑपरेशन ब्लू स्टार के करीब 4 साल बाद एक बार फिर खालिस्तान समर्थक आतंकवादी स्वर्ण मंदिर में अकाल तख्त के पास पहुँच गए।
यही वो समय था, जिसमें भारत के वर्तमान NSA अजित डोभाल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। स्वर्ण मंदिर में छुपे हुए आतंकवादियों के बारे में पता लगाने के लिए ऑपरेशन ब्लैक थंडर के दौरान अजीत डोभाल रिक्शे वाले की भेष में स्वर्ण मंदिर के अंदर गए। इस ‘रिक्शावाले’ को खालिस्तानियों को ये विश्वास दिलाने में दस दिन लग गए कि उसे आईएसआई ने उनकी मदद के लिए भेजा है।
यही रिक्शावाला ऑपरेशन ब्लैक थंडर से ठीक दो दिन पहले स्वर्ण मंदिर के अहाते में घुसा और जब 2 दिन बाद स्वर्ण मंदिर से बाहर निकला तो उनके पास आतंकियों के हथियारों से लेकर, उनकी योजना, लड़ाकों की छिपे होने की सटीक जानकारी अजीत डोभाल के पास थीं। अजित डोभाल के इस कारनामे से ही ऑपरेशन सफल रहा और पंजाब सिख आतंकवादियों के प्रभाव से मुक्त हो पाया।
ऑपरेशन ब्लू स्टार के चार साल बाद स्वर्ण मंदिर से आतंकियों को बाहर निकालने के लिए ‘ऑपरेशन ब्लैक थंडर’ चलाया गया था। यह ऑपरेशन ब्लू स्टार से कहीं ज्यादा कुशलतापूर्वक बिना किसी रक्तपात और मंदिर को नुकसान पहुँचाए ही सफलतापूर्वक पूरा किया गया। अंततः सिख लोगों के बीच बढ़ रहे उग्रवादी खालिस्तानी आंदोलन की विश्वसनीयता और लोकप्रियता को समाप्त कर पंजाब से आतंकवाद के संकट को समाप्त किया। इन सभी कारकों के कारण ब्लैक थंडर को 1984 में भारतीय सेना द्वारा शुरू किए गए ब्लू स्टार की तुलना में अधिक सक्षम और क्लीनर ऑपरेशन के रूप में देखा गया, जिसने सिख समुदाय पर विशेष प्रभाव छोड़ा।
जम्मू-कश्मीर में गुरुवार (4 जून,2020) देर रात को राजौरी जिले के मेहारी गाँव में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच हुए मुठभेड़ में एक आतंकी मारा गया और उसके पास से भारी मात्रा में गोला बारूद बरामद किया गया। इसके अलावा कुछ आतंकियों के घिरे होने की जानकारी सामने आ रही है। सुरक्षाबलों ने जंगल के करीब एक किलोमीटर क्षेत्र को घेर कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। गौरतलब है कि कालाकोट तहसील के मियाडी जंगल में संदिग्ध हलचल देखे जाने के बाद स्थानीय लोगों ने सेना को सूचित किया था। जिसके बाद आरआर बटालियन के जवानों ने जंगल में सघन तलाशी अभियान शुरू किया।
Jammu & Kashmir: One terrorist neutralised in an encounter with security forces in Kalakote area of Rajouri last night. The area has been cordoned off. Search operation is underway. (Visuals deferred by unspecified time) pic.twitter.com/hRy9lXIVk4
मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि सेना को जंगलों में 2 से 3 आतंकियों के छुपे होने की सूचना मिली है। जिसके चलते सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को चारों तरफ घेर लिया है और सर्च ऑपरेशन अब भी जारी है। मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार गाँव के कुछ लोगों को कालाकोट तहसील के मियाडी जंगल में संदिग्ध लोगों की हलचल दिखी। जिसके बाद उन्होंने सेना को इसकी जानकारी दी। आरआर बटालियन के जवानों द्वारा इस पर तुरंत कार्रवाही करते हुए एक तलाशी अभियान कासो (Cordon and Search Operation, CASO) कालाकोट इलाके में चलाया गया। जिसमें एक आतंकी के मारे जाने के बाद उसके ठिकाने से सुरक्षाबलों को बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद मिला है।
मीडिया सूत्रों के अनुसार ये आतंकी उन्हीं लोगों में से है जिन्हें 28 मई सुरक्षाबलों ने कलाल सेक्टर में सीमा से अंदर घुसपैठ करने पर मार गिराया था। अनुमान ये भी लगाया जा रहा है कि साथियों के मारे जाने और सुरक्षाबलों की कड़ी तैनाती को देखते हुए आतंकी जान बचाने के लिए जंगल में छुप गए थे।
शोपियां में हमला
वहीं गुरुवार को श्रीनगर के शोपियां पुलिस स्टेशन पर आतंकियों ने ग्रेनेड फेंक कर हमला किया। मगर वह ब्लास्ट नहीं हुआ। और आतंकी वहाँ से भाग गए। जिसके बाद मौके पर मौजूद पुलिसबल तुरंत आतंकियों के तलाश में जुट गए।
कुलगाम में हमला
गुरुवार को ही कुछ आतंकवादियों ने कुलगाम के यारीपोरा इलाके में पुलिसदल पर हमला हमला कर दिया था। जिसमें आतंकवादियों की गोली लगने से एक स्वास्थ्य कर्मी घायल हो गया। और आतंकी वहाँ से भाग निकले। जिस गाड़ी से आतंकी आए थे उसे बरामद कर लिया गया है। फिलहाल छाती पर गोली लगने की वजह से स्वास्थ्य कर्मी की हालत नाजुक बनी हुई है।
एलओसी पर हमला
वहीं एक अन्य घटना गुरुवार रात सुंदरबनी सेक्टर में हुई। जहाँ आतंकियों ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर भारी गोलाबारी शुरू कर दी। सेना की तरफ से की गई जवाबी कार्यवाही में एक सेना का जवान हवलदार एमएम करण वीरगति को प्राप्त हो गए। आतंकियों ने इस हमले में अपना मुख्य निशाना भारतीय सैन्य चौकियों के साथ रिहायशी क्षेत्रों को बनाया था।
पाकिस्तान के इस्लामाबाद में तैनात शीर्ष भारतीय राजनयिक गौरव अहलूवालिया को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के जरिए परेशान किए जाने का मामला सामने आया है।
भारतीय प्रभारी गौरव अहलूवालिया की कार का पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के एक सदस्य ने मोटरसाइकिल से पीछा किया है, जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है।
#WATCH Islamabad: Vehicle of India’s Chargé d’affaires Gaurav Ahluwalia was chased by a Pakistan’s Inter-Services Intelligence (ISI) member. ISI has stationed multiple persons in cars and bikes outside his residence to harass and intimidate him. pic.twitter.com/TVchxF8Exz
रिपोर्ट्स के अनुसार, ISI ने गौरव अहलूवालिया का उत्पीड़न करने और उन पर नजर रखने के लिए उनके घर के बाहर कई कारों और बाइकों का जमावड़ा लगा रखा है। इसमें बैठे ISI के जासूस हर वक्त भारतीय राजनयिक पर नजर रख रहे हैं।
भारत ने इस पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है और पाकिस्तान से जाँच की माँग की है।
यह मामला जून 02, 2020 का है, जब पाकिस्तान में भारत के डिप्टी चीफ गौरव अहलूवालिया से बदसलूकी की गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, जब अहलूवालिया अपने घर से बाहर निकल रहे थे, तभी वहाँ ISI के लोग कार और बाइक के साथ खड़े थे और बाद में उनका पीछा भी करने लगे। भारतीय राजनयिकों को परेशान करने का आईएसआई का ये पुराना पैंतरा है।
भारत ने गत मार्च माह में ही उत्पीड़न की 13 घटनाओं के बारे में बताया और पाकिस्तान से कहा कि इस तरह की घटनाएँ बंद हो और मामले की जाँच की जाए। भारत ने पाकिस्तान के अथॉरिटीज से कहा था कि वे फौरन इन मामलों की जाँच करे और संबंधित एजेंसियों को यह निर्देश दे कि दोबारा ऐसी घटनाएँ न हों।
इसमें आगे कहा गया कि ऐसी उत्पीड़न की घटनाएँ स्पष्ट तौर पर विएना कन्वेंशन ऑन डिप्लोमेटिक रिलेशंस ऑफ 1961 का उल्लंघन है और भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों, स्टाफ सदस्य और उनके परिवारों की सुरक्षा की जिम्मेदारी पाकिस्तान सरकार की है।
जासूसी करते पकड़े गए पाकिस्तानी उच्चायोग के अफसर
उल्लेखनीय है कि कुछ ही दिन पहले नई दिल्ली में पाकिस्तानी उच्चायोग के दो कर्मचारियों को भारतीय सेना की जासूसी करते हुए पकड़ा गया, जिसके बाद उन्हें वापस पाकिस्तान भेज दिया गया था। पाकिस्तान अपनी इस खुन्नस में किसी न किसी बहाने भारतीय उच्चायोग के अफसरों को परेशान कर रहा है।
सोशल मीडिया पर सीता माता को लेकर अभद्र टिप्पणी करने वाले ट्रेनी ऑफिसर आसिफ खान को गोएयर (GoAir) ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है। एयरलाइन ने कहा कि किसी व्यक्ति या कर्मचारी के निजी विचारों से उसका कोई लेना-देना नहीं है।
The airline doesn’t associate itself with personal views expressed by any individual or employee.With immediate effect,GoAir is terminating employment contract of trainee 1st Officer Asif Khan:GoAir statement on the trainee officer’s alleged objectionable comments on social media pic.twitter.com/TQLyVUHftL
आसिफ खान ने सोशल मीडिया पर हिंदू देवताओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसके स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे। आसिफ खान ने अपने प्रोफाइल में उल्लेख किया था कि वह GoAir में केबिन क्रू मेंबर है।
आसिफ खान द्वारा की गई अपमानजनक टिप्पणियों के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद गो एअर ने घोषणा की थी कि वह इस बात की पुष्टि करने में लगे हैं कि आसिफ खान उनकी एयरलाइन के साथ जुड़ा हुआ है या नहीं। गोएयर ने कहा था कि हमारी नीति सभी कर्मचारियों के लिए शून्य सहिष्णुता की है, जिसमें कर्मचारियों को रोजगार नियमों का पालन करना पड़ता है, इसमें सोशल मीडिया का भी व्यवहार शामिल है।
नेटिज़ेंस ने आसिफ खान को कंपनी से बाहर का रास्ता दिखाने के लिए गोएअर के प्रति आभार व्यक्त किया है। नेटिजेंस ने कहा कि आसिफ खान ने हिंदू देवताओं पर बहुत ही अभद्र टिप्पणी की थी और इसके परिणामस्वरूप उसे अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ा।
इससे पहले सोशल मीडिया पर सीता माता के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की पुलिस में शिकायत करने वाले संघ (RSS) कार्यकर्ता की पीटकर हत्या करने का मामला सामने आया था। सोशल मीडिया पर सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रशांत पटेल उमराव ने लिखा था, “खंडवा, MP में संघ कार्यकर्ता राजेश फूलमाली (26) द्वारा फेसबुक में सीता माता पर अपशब्द की शिकायत पुलिस से करने पर 18 मई को रोजेदारों नें लिंचिंग की थी, इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। 15 नमाजियों को अरेस्ट किया गया है, हमारी टीम राजेश के परिवार को न्याय दिलाने के लिए वहाँ तत्पर है।”
प्रशांत पटेल उमराव ने मृतक राजेश फूलमाली (Rajesh Phoolmali) को न्याय दिलाने की बात कहते हुए लिखा था कि “आरएसएस कार्यकर्ता राजेश एससी समुदाय से थे। हम पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए अनुसूचित जाति आयोग के पास जा रहे हैं।”
दिल्ली की एक अदालत ने जामिया मिलिया इस्लामिया की छात्रा सफूरा जरगर की जमानत याचिका को एक बार फिर खारिज कर दी है। दिल्ली के पटियाला कोर्ट में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने मेडिकल आधार पर जमानत देने की उसकी दलीलें ठुकरा दी।
बता दें, इसी साल फरवरी के महीने में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस ने सफूरा को 10 अप्रैल को गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया था। इसके बाद, उसने पटियाला कोर्ट में स्वास्थ्य का हवाला देकर बेल की गुहार लगाई थी।
सफूरा जरगर के वकील ने उसके गर्भवती होने की बात का उल्लेख करते हुए कहा कि सफूरा पॉलीसिस्टिक ओवेरी सिंड्रोम से पीड़ित है। इससे गर्भपात की आशंका बढ़ जाती है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि ऑन रिकॉर्ड बातों को ध्यान में रखते हुए, ये नहीं कहा जा सकता कि अभियुक्त के ख़िलाफ़ कोई प्रथम दृष्टया मामला नहीं है। इसके अलावा उन्होंने जेल अधिकारियों को आदेश दिया कि गर्भवती सफूरा जरगर को उपयुक्त मेडिकल सुविधाएँ दी जाएँ।
गौरतलब है कि इससे पहले भी दो बार सफूरा जरगर की याचिका को खारिज की जा चुकी है। इससे पूर्व पटियाला कोर्ट ने जरगर की बेल याचिका को खारिज करते हुए उसकी न्यायिक हिरासत की अवधि 25 जून तक बढ़ा दी थी। उससे पहले 23 अप्रैल को मेट्रोपोलिटियन मजिस्ट्रेट वसुंधरा छौंकर ने सफूरा को आरोपों को मद्देनजर राहत देने से मना कर दिया था।
बता दें कि सफूरा जरगर के खिलाफ यूएपीए के तहत मामला चल रहा है। उसपर आरोप है कि उसने जाफराबाद-सीलमपुर में 50 दिनों के हंगामा की साजिश रची थी और वहाँ महिलाओं-बच्चों को बिठाने के लिए पूरा जोर लगाया था। यहाँ तक कि कॉन्ग्रेस पार्टी के फिरोज ख़ान ने भी सफूरा जरगर को रिलीज करने की माँग की है। उन्होंने दिल्ली पुलिस पर अपनी शक्ति का दुरूपयोग करने और लोगों के अधिकारों का हनन करने का आरोप लगाया है।
उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों में चार्जशीट दाखिल होने के बाद आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान ने पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन का बचाव किया है। ताहिर के कुकृत्यों पर मजहब का पर्दा डालने की उसने कोशिश की है।
अमानतुल्लाह खान ने ट्वीट कर कहा, “दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्जशीट में ताहिर हुसैन को दिल्ली दंगों का मास्टरमाइंड बनाया है, जबकि पूरा देश जनता है कि दंगे किसने कराए। असल दंगाइयों से अभी तक पुलिस ने पूछताछ तक नहीं की। मुझे लगता है कि ताहिर हुसैन को सिर्फ मुस्लिम होने की सज़ा मिली है।”
दिल्ली पुलिस ने अपनी चार्ज शीट में ताहिर हुसैन को दिल्ली दंगों का मास्टर माइंड बनाया है, जबकि पूरा देश जनता हैं कि दंगे किसने कराये असल दंगाइयों से अभी तक पुलिस ने पूछ ताछ तक नही की, मुझे लगता है कि ताहिर हुसैन को सिर्फ मुस्लिम होने की सज़ा मिली है।
— Amanatullah Khan AAP (@KhanAmanatullah) June 4, 2020
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदेश कुमार गुप्ता ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया है, “अमानतुल्लाह खान, दिल्ली पुलिस ने अभी ताहिर हुसैन को पकड़ा है तो इतनी बौखलाहट। तब क्या हाल होगा तुम्हारा जब पर्दे के पीछे के असली किरदार पकड़े जाएँगे। चिंता मत करो, दिल्ली पुलिस ईमानदारी से कार्य कर रही है। दिल्ली जलाने वाले 1 भी व्यक्ति को छोड़ेंगे नहीं।”
अमानतुल्लाह खान, दिल्ली पुलिस ने अभी तो ताहिर हुसैन को पकड़ा है तो इतनी बौखलाहट, तब क्या हाल होगा तुम्हारा जब पर्दे के पीछे के असली किरदार पकड़े जाएंगे । चिंता मत करो,दिल्ली पुलिस ईमानदारी से कार्य कर रही हैं,दिल्ली जलाने वाले 1 भी व्यक्ति को छोड़ेंगे नही । https://t.co/jzEWqMsVlM
बता दें, 2 जून को दिल्ली पुलिस ने दंगों के मामले में 2 चार्जशीट दायर की थी। इस चार्जशीट में ताहिर को मुख्य आरोपित बनाया गया है। चार्जशीट में दिल्ली पुलिस ने कहा है दंगे कराने के लिए ताहिर हुसैन ने करोड़ों ख़र्च किए थे। इस दौरान वह जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद से लगातार संपर्क में था।
उसने उमर खालिद से कहा था कि जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत आने वाले हैं, तब कुछ बड़ा होने वाला है, जिसके लिए सबको तैयार रहना है। उसने अपने समर्थकों को ‘बड़े एक्शन’ के लिए तैयार रहने को कहा था। उसने सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों के बीच भी रुपए बाँटे थे।
बता दें कि अमानतुल्लाह ने इससे पहले भी मार्च महीने में एक ट्वीट कर ताहिर का बचाव किया था। जिसमें उन्होंने ताहिर के खिलाफ़ होती कार्रवाई को देखकर कहा कि ये सब इसलिए हो रहा है क्योंकि ताहिर एक मुस्लिम है।
अमानतुल्लाह ने कहा था, “आज ताहिर हुसैन सिर्फ इस बात की सजा काट रहा है कि वो एक मुस्लिम है। शायद आज हिंदुस्तान में सबसे बड़ा गुनाह मुस्लिम होना है। ये भी हो सकता है कि आने वाले वक्त में ये साबित कर दिया जाए कि दिल्ली की हिंसा ताहिर हुसैन ने कराई है।”
हालाँकि, स्पष्ट हो कि न्यायिक प्रक्रियाओं के बीच अपने मजहब को लाने वाले अमानतुल्लाह जैसे लोग आज तक यह साबित नहीं कर सके हैं कि अगर सिर्फ मुस्लिम होने के कारण किसी को निशाना बनाया जाता है तो फिर उन्हीं के जैसे दंगाई मानसकिता के लोग बाहर खुले घूमकर इस तरह का जहर कैसे उगलते आ रहे हैं।
गत फरवरी माह में पूर्वोत्तर दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों की लगभग सभी परतें खुल चुकी हैं। इसमें यह भी स्पष्ट हो चुका है कि किस तरह से शाहीनबाग से लेकर जामिया, JNU के उग्रवादियों ने इसमें अहम भूमिका निभाई।
वही शाहीनबाग, जहाँ ‘फक हिंदुत्व’ से लेकर गाय और गोमूत्र के बहाने हिंदुओं की आस्था का उपहास बनाया गया। फ़ैज़ और इकबाल के बहाने काफिरों के खिलाफ तमाम बातें की गईं।
जब यही शाहीनबाग दंगों के रूप में बाहर आया, तब ‘काफिरों’ पर तमाम क्रूरता की हदों को लांघा गया। महज 20 साल के दिलबर नेगी के हाथ और पाँव काटकर शरीर के भाग को जिंदा जलती आग में झोंक दिया गया। IB अधिकारी अंकित शर्मा को इसी दंगाई ताहिर हुसैन के घर के बाहर मारा गया। उनके शरीर पर घाव के 51 गहरे निशान थे।
वीजा मानकों के उल्लंघन के चलते तबलीगी जमात से जुड़े 2200 से अधिक विदेशियों के 10 साल तक भारत में प्रवेश करने पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पाबंदी लगा दी है। इससे पहले अप्रैल महीने में 960 विदेशी लोगों को भी मोदी सरकार ने ब्लैकलिस्ट किया था। इनमें चार अमेरिका, नौ ब्रिटिश और छह चीन के नागरिक थे। ये सभी पर्यटक वीजा पर निजामुद्दीन मरकज में हुए कार्यक्रम में शामिल हुए थे।
#UPDATE More than 2,200 blacklisted foreign nationals banned for 10 years from travelling to India for their involvement in Tablighi Jamaat activities: Government Sources https://t.co/9b4t5QpkSt
फिलहाल 1,000 से अधिक लोगों को गृहमंत्रालय ने वीजा नियमों का उल्लंघन करने के चलते 10 साल के लिए भारत आने पर प्रतिबंध लगाया है। इसके साथ तबलीगी जमात से जुड़े प्रतिबंधित विदेशियों की संख्या 2,200 से अधिक हो गई है। दिल्ली पुलिस पहले ही बता चुकी है कि 960 विदेशियों ने मरकज में हुई इस्लामिक सभा में हिस्सा लेकर वीजा नियमों का उल्लंघन किया था।
दरअसल जिन विदेशी लोगों के कोरोना पॉजिटिव पाया गया था उन्हें देश के विभिन्न हिस्सों में क्वारंटाइन किया गया था। ब्लैकलिस्ट किए गए विदेशियों में 379 इंडोनेशियाई, 110 बांग्लादेश के, 63 म्यांमार के और 33 श्रीलंका के शामिल थे।
अधिकारियों के मुताबिक किर्गिस्तान के 77 नागरिक, 75 मलेशियाई, 65 थाईलैंड, 12 वियतनाम, 9 सऊदी अरब और 3 फ्रांसीसी नागरिक भी वीजा नियमों का उल्लंघन करने वालों में शामिल थे। गृहमंत्रालय ने इन सभी विदेशियों के अगले 10 वर्षों के लिए भारत में प्रवेश करने पर प्रतिबंध लगा दिया है।
सभी 960 विदेशी तबलीगी सदस्यों को अस्पताल से छुट्टी मिलने और क्वारंटाइन की अवधि पूरी होने पर देश से निकाल दिया जाएगा।
दिल्ली पुलिस अपराध शाखा ने कम से कम 700 जमात से जुड़े सदस्यों के पासपोर्ट और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किर लिए हैं। इस मामले को लेकर दिल्ली पुलिस उनसे पहले ही पूछताछ कर चुकी है। पूछताछ में क्राइम ब्रांच ने यह पता लगाने की कोशिश की थी कि उन्हें किस आधार पर वीजा मिला है और उन्हें वीजा दिलाने में किसने मदद की थी।
इसी तरह, 287 में से 211 विदेशी नागरिकों के पासपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार ने जब्त कर लिए हैं। ये वो विदेशी हैं, जिन्होंने 13 से 15 मार्च के बीच निजामुद्दीन मरकज़ में तबलीगी जमात द्वारा आयोजित इस्लामिक सभा में हिस्सा लिया था।
दरअसल दिल्ली के निजामुद्दीन में तबलीगी जमात की ओर से एक इस्लामिक कार्यक्रम का आयोजन मार्च के महीने में किया गया था। इसमें हजारों की संख्या में देश-विदेश के जमातियों ने हिस्सा लिया था। इस कार्यक्रम से निकले लोगों के कारण ही देश में तेजी से कोरोना मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ था।
स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक तबलीगी जमात द्वारा दिल्ली के निज़ामुद्दीन मरकज़ में हुए कार्यक्रम के दौरान यानी अप्रैल के मध्य तक देश में कुल 14,378 कोरोना वायरस के मामलों सामने आए थे, इनमें से करीब 30% यानी 4291 मामले मरकज से जुड़े हुए थे।
स्वास्थ्य मंत्रालय में संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया था कि कुल 14,378 मामलों में से 4291 (29.8%) मामले निजामुद्दीन मरकज से संबंधित हैं। यहाँ से निकले जमातियों ने कम से कम 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को प्रभावित किया। उन्होंने यह भी कहा था कि तमिलनाडु में 84% मामले, दिल्ली में 63% मामले, तेलंगाना में 79% मामले, उत्तर प्रदेश में 59% मामले और आंध्र प्रदेश में 61% मामले इस घटना से संबंधित हैं।
केरल में पटाखों से भरा अनानास खिलाए जाने के बाद एक गर्भवती हथिनी की मौत हो गई थी। इस घटना के बहाने टाइम्स ऑफ़ इंडिया (TOI) की पत्रकार समीना शेख ने हिंदुओं के प्रति अपनी घृणा प्रदर्शित की है। हिंदुओं को शर्मिंदा करने के मकसद से उसने ट्विटर पर गणपति की एक तस्वीर शेयर की। इस तस्वीर को साझा करते हुए लिखा, “जिसकी पूजा करते हो, उसी को तकलीफ पहुँचाते हो।”
इस तस्वीर के जरिए समीना ने ये बताना चाहा कि जो लोग गणपति पूजन करते हैं, उन्होंने हथिनी को मारा है। यहाँ बता दें, हिंदू धर्म के अनुसार भगवान श्री गणेश का मुख हाथी के समान है और लोगों के मन में उनके प्रति अपार श्रद्धा है। इसके कारण समीना को ट्वीट करने के कुछ देर बाद ही उसे डिलीट करना पड़ा।
हालाँकि बाद में समीना अपनी सफाई देने दोबारा ट्विटर पर आई। उन्होंने कहा कि जो तस्वीर उन्होंने भगवान गणेश की साझा की, उसे पहले उनके हिंदू दोस्त ने शेयर किया था। पर, उनके मजहब के कारण अंधभक्तों ने उन्हें ट्रोल कर दिया।
वे अपने ट्वीट में लिखती हैं, “चिंता मत करो, इस बात को समझते हुए कि हम भारतीय कभी समझदार नहीं होंगे, मैंने ये तस्वीर डिलीट कर दी है।”आगे समीना ने ये भी दावा किया कि केवल हिंदू नहीं, बल्कि हर कोई हाथी की पूजा करता है।
A picture of elephant’s potrait was shared by me, which was actually shared by a friend of mine who’s Hindu, but since I shared it – every andhbhakt had to come to troll me! Don’t worry, I have deleted the pic understanding that we Indians will never mature & blocked all idiots
यहाँ बता दें कि हिंदू धर्म में हाथी के अलावा गाय का भी पूजनीय स्थान है। लेकिन तब भी पिछले साल केरल के कन्नूर में यूथ कॉन्ग्रेस के एक कार्यकर्ता ने बीच सड़क में बछड़े को काट दिया था। इसके अलावा एक अन्य कॉन्ग्रेस नेता ने भी सेकुलरिज्म को मजबूत करने के नाम पर एकता का प्रदर्शन करते हुए केरल में बीफ पार्टी की थी।
उल्लेखनीय है कि गणपति की तस्वीर शेयर करते हुए हिंदुओं को शर्मसार करने की कोशिश करने वाली टाइम्स ऑफ इंडिया की पत्रकार ने इससे पहले भी हिंदू घृणा से सने न केवल अपने ट्विटर हैंडल से किए हैं, बल्कि टाइम्स का ऑफिशियल हैंडल भी इस एजेंडे के लिए प्रयोग किया।
समीना शेख बॉम्बे टाइम्स की संपादक हैं। ईटी टाइम्स की डिप्यूटी एडिटर हैं और फेमिना मैगजीन से भी जुड़ी हुई है। उनके कारनामों का खुलासा पिछले महीने हुआ था, जब उन्होंने एक ही ट्वीट अपनी आईडी से किया था और वही ट्वीट टाइम्स के अकाउंट से भी शेयर किया गया था।
गर्भवती हथिनी की मौत
समीना शेख का ये विवादित ट्वीट हाल में केरल में हुई घटना को साझा करने के लिए था। जहाँ से एक प्राणी पर मानवीय अत्याचार की एक ऐसी खबर आई थी, जिसने चारों ओर सबको झकझोर दिया। दरअसल, केरल के मल्लपुरम के पलक्कड़ में एक अत्याचारी ने गर्भवती मादा हाथी को धोखे से अनानास में पटाखे रख कर खिला दिया था, जो उसके मुँह में ही फट गया। अत्यंत पीड़ा और असहनीय दर्द के कारण गर्भवती मादा हाथी नदी के पानी में जाकर खड़ी हो गई और वहीं उसकी मौत हो गई।