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कोलकाता न्यूज केबल से हटने के बाद ABP संपादक को पुलिस ने भेजा समन: प्रेस फ्रीडम को लेकर ममता पर उठे सवाल

क्या पश्चिम बंगाल में ममता सरकार की नीतियों के कारण प्रेस की स्वतंत्रता खतरे में आ चुकी है? क्या ममता सरकार कोरोना संकट के बीच प्रेस को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है? क्या बंगाल में राज्य सरकार के ख़िलाफ़ आवाज उठाने का मतलब अब नौकरी से हाथ धो बैठना हो गया है?

उक्त सभी सवाल आनंद बाजार पत्रिका के संपादक अनिबार्न चट्टोपाध्याय के इस्तीफे के बाद पैदा हुए हैं। जिन्होंने कुछ समय पहले कोरोना संकट के बीच ममता बनर्जी सरकार के ख़िलाफ़ अपने समाचार पत्र में एक न्यूज प्रकाशित करने की इजाजत दी थी और इसके बाद कोलकाता पुलिस ने उन्हें इस मामले के संबंध में समन भेज दिया था।

बाद में खबर आई थी कि 31 मई को अनिबार्न चट्टोपाध्याय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और उनकी जगह अब ईशानी दत्ता 1 जून से एक्टिंग एडिटर की तरह काम करेंगी।

बता दें, चटर्जी को पुलिस द्वारा भेजे गए के समन की खबर तब सामने आई थी जब राज्यपाल जगदीप धनकड़ ने 28 मई को ट्वीट कर बताया था कि उन्होंने इस मामले में मुख्य सचिव से अपडेट माँगा है।

एक ओर जहाँ अनिबार्न के फैसले के पीछे गवर्नर ने सीएम ममता को जिम्मेदार बताया था। वहीं सीपीआई (एम) के एक नेता ने इसके लिए मोदी सरकार को उत्तरदायी कह दिया था।

इससे पहले 25 मई को हारे स्ट्रीट पुलिस स्टेशन से चट्टोपाध्याय के पास नोटिस आया था कि उन्हें पूछताछ के लिए थाने आना है। मगर, यहाँ अनिबार्न ने पुलिस स्टेशन जाने की बजाय, उन्हें अपनी ओर से एक लेटर लिखा और बताया कि वह थाने में खुद नहीं आ पाएँगे।

उन्होंने पत्र में ये भी लिखा कि वे हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर कर चुके हैं और उनकी उम्र की वजह से उन्हें इस कोरोना काल में सार्वजनिक स्थानों पर जाने की मनाही है।

अपने पत्र में समाचार पत्र के पूर्व संपादक ने लिखा कि पुलिस समन पर उनके ऑफिस का लीगल डिपार्टमेंट देख रहा है और फिलहाल अभी इससे आगे वह कुछ नहीं कहेंगे।

इस पत्र को 1 जून को शेयर करते हुए भाजपा बंगाल ने ममता सरकार पर निशाना साधा था। भाजपा बंगाल के ट्विटर पर इसे शेयर करते हुए लिखा गया, “बंगाल में प्रेस स्वतंत्रता के बारे में बात करनी है? अगर आप यहाँ ममता बनर्जी के इशारों पर नहीं नाचेंगे तो वह पुलिस का इस्तेमाल करेंगी और आपको आपकी नौकरी छोड़ने पर मजबूर कर देगी।”

गौरतलब है कि अनिबार्न के इस्तीफे के बाद से ही सोशल मीडिया पर ये प्रेस स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी का मुद्दा गरमाया हुआ है। हालाँकि, ABP के पूर्व संपादक की पत्नी ने ममता सरकार पर लगाए जा रहे इन आरोपों से इंकार किया है। इस संबंध में उन्होंने पोस्ट करके बताया है कि उनके पति इस इस्तीफे पर पहले से विचार कर रहे थे। इसलिए ये मामला मीडिया की स्वतंत्रा का नहीं है।

वहीं, वामपंथी पोर्टल द क्विंट के अनुसार, चटर्जी ने इस मामले पर उनसे कहा,” आनंदबाजार पत्रिका के एडिटर पद से इस्तीफा देने का फैसला मैंने काफी पहले लिया था। मैं एक साल से भी ज्यादा समय से खुद को इस जिम्मेदारी से मुक्त करने की सोच रहा था, लेकिन कुछ मुद्दे थे जिन्हें सुलझाना था।”

उल्लेखनीय है कि भले ही अनिबार्न और उनकी पत्नी इस मामले के संबंध में अपने ऊपर कोई भी राजनैतिक दबाव न होने की बातों का बयान दे रहे हों और ममता सरकार पर लग रहे सभी आरोपों को खारिज कर रहे हों। लेकिन ये ध्यान रखने वाली बात है कि ये पहला मामला नहीं है, जब बंगाल में प्रेस स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठे हों।

इससे पहले कोलकाता न्यूज का मामला पिछले माह प्रकाश में आया था, जब सरकार से सवाल पूछने पर कई केबल नेटवर्क से कोलकाता न्यूज गायब कर दिया गया था। जिसके बाद लोगों ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाए थे कि ममता सरकार द्वारा ही कोलकाता न्यूज को प्रतिबंधित किया गया है।

गर्भवती हथिनी की हत्या पर केंद्र ने केरल सरकार से माँगी रिपोर्ट, अज्ञात के खिलाफ FIR

केरल में पटाखों से भरा अनानास खिलाए जाने के बाद गर्भवती हथिनी की मौत को केंद्र सरकार ने गंभीरता से लिया है और कहा कि इसकी आवश्यक जाँच की जाएगी। केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इस सम्बन्ध में केरल सरकार से पूरी रिपोर्ट माँगते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया।

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने अपनी नाराजगी जताते हुए माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर लिखा, “केंद्र सरकार ने मल्लापुरम, केरल में एक हथिनी की हत्या के मामले पर बहुत गंभीरता से ध्यान दिया है। हम सही तरीके से जाँच करने और अपराधी को पकड़ने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। पटाखे खिलाना और मारना भारतीय संस्कृति नहीं है।”

दरअसल, 27 मई को एक 15 वर्षीय गर्भवती हथिनी एक अमानवीय कृत्य का शिकार हो गई। उसे किसी उपद्रवी शख्स ने एक पटाखों से भरा अनानास खिलाया, जिससे हथिनी के मुँह में विस्फोट हो गया और वह बुरी तरह जख्मी हो गई। हथिनी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि वह गर्भवती थी। उसका जबड़ा टूट गया था और मुँह में विस्फोट के कारण वह अनानास चबाने के बाद कुछ खा नहीं पा रही थी।

इस विस्फोट से उसकी जीभ और मुँह पर गंभीर चोटें आईं। इसके बाद वह एक नदी में चली गई और तीन दिनों के बाद आखिर में उसने प्राण त्याग दिए। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने हथिनी की मौत पर रिपोर्ट माँगी है और कहा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

हथिनी की हत्या मामले में एफआईआर दर्ज

गर्भवती हथिनी के साथ हुई इस अमानवीय घटना के खिलाफ सोशल मीडिया पर काफी आक्रोश नजर आ रहा है। इस प्रकरण में गर्भवती हथिनी की हत्या के मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। मन्नरक्कड फॉरेस्ट रेंज के अधिकारी के अनुसार, गर्भवती हथिनी को पटाखे से भरे अनानास खिलाकर हत्या करने के मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ वाइल्ड लाइफ ऐक्ट की संबद्ध धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

कर्नाटक: मुस्लिम और पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने पर महिला पर दर्ज हुआ FIR

कर्नाटक की कोडागु पुलिस ने फेसबुक प्रोफाइल पर मुस्लिमों और पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने पर विंध्य पूनाचा नाम की एक महिला के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, महिला पर आईपीसी की धारा 153 (A) (धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) और 105 (सम्पत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

शिकायतकर्ता अजीज जीई ने अपनी शिकायत में कहा कि महिला मुस्लिमों और पैगंबर मुहम्मद के खिलाफ घृणित और अपमानजनक टिप्पणी पोस्ट करती रहती हैं।

वहीं मंगलवार (2 मई, 2020) शाम को एक ट्विटर यूजर ने विंध्य पूनाचा के खिलाफ़ एक कैम्पेन चलाया जिसमें उन्होंने पूनाचा द्वारा शेयर किए गए पोस्ट का स्क्रीनशॉट लगाया। जल्द ही, ट्विटर पर महिला की गिरफ्तारी की माँग का हैशटेग ट्रेंड करने लगा। कई ट्विटर यूजर ने #ArrestHatemongerVindhya लिखकर महिला की गिरफ्तारी की माँग की। साथ ही कुछ यूज़र्स ने अजीज जीई द्वारा मादिकेरी साइबर सेल में महिला के खिलाफ़ किए गए पुलिस एफआईआर की फ़ोटो भी शेयर की।

सोशल मीडिया यूज़र्स ने इस मुद्दे को अधिकारियों नोटिस में लाने के लिए अपने सभी ट्वीट्स में डिप्टी कमिश्नर और कोडागु जिले के सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस को टैग किया।

आरोप यह भी लगाया जा रहा है कि कुशालनगर पुलिस स्टेशन के पुलिस निरीक्षक ने शुरुआती संपर्क के दौरान आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने से इनकार कर दिया था।

पहले की घटनाएँ

पिछले साल सोशल मीडिया पर इस्लाम और पैगम्बर मुहम्मद के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियाँ करने के आरोप में एक मलेशियाई नागरिक और अन्य तीन लोगों को 10 साल जेल की सज़ा काटनी पड़ी थी।

वहीं साल 2017 में, हैदराबाद में सोनू डांगर नाम की एक गुजराती महिला पर पैगंबर मुहम्मद और इस्लाम खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने पर मामला दर्ज किया गया था। दरअसल, सोनू की एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी।

जिसमें उसने कथित रूप से इस्लाम के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी। वीडियो वायरल होते ही हैदराबाद के ओल्ड सिटी इलाके में बड़े पैमाने पर लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया गया था। कई मुस्लिम संगठनों ने चारमीनार से दक्षिण क्षेत्र के पुलिस उपायुक्त के कार्यालय तक रैली भी निकाली थी। प्रदर्शनकारियों ने महिला की फ़ोटो को चप्पलों से मारा था। और उसके खिलाफ नारे लगाने के अलावा उसकी गिरफ्तारी की माँग की थी।

दिल्ली दंगों में ताहिर हुसैन से लेकर तबलीगी जमात की भूमिका तक: चार्जशीट की वो बातें जो आपको जाननी चाहिए

फरवरी 2020 में हुए दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के सिलसिले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मंगलवार (2 मई 2020) को चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद गहरी साजिशों को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व काउंसलर ताहिर हुसैन की इस पूरे मामले में भूमिका बेहद स्पष्ट है।

चार्जशीट में जिन लोगों की दंगों के पीछे मुख्य भूमिका बताई गई है, उनमें एक नाम जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद का भी है। साथ ही धुर वामपंथी संगठन पिंजड़ा तोड़ की जाफरबाद दंगों में भूमिका को लेकर भी चार्जशीट दायर की गई है।

इस रिपोर्ट में हम हर मामले के हालिया घटनाक्रमों पर गौर करेंगे।

ताहिर हुसैन ने की आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या की प्लानिंग

चार्जशीट के अनुसार इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के कॉन्स्टेबल अंकित शर्मा की हत्या के पीछे गहरी साजिश थी। इसके मुताबिक उन्हें ताहिर हुसैन की अगुवाई वाली भीड़ ने जान-बूझकर निशाना बनाया। चार्जशीट के अनुसार अंकित शर्मा की हत्या 25 फरवरी को पूर्व आप पार्षद के घर के बाहर खजूरी खास में की गई थी।

शर्मा की बॉडी पर डॉक्टरों को गहरे घाव के 51 निशान मिले। औएक गवाह ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो अपने फोन में बनाया था जिसमें भीड़ नाले में शव फेंकती नजर आ रही है। अगली सुबह उनका शव बरामद किया गया था। हत्या में प्रयुक्त चाकू और खून से सने हत्यारों के कपड़े भी मिले थे।

चार्जशीट में अंकित शर्मा की हत्या का जिक्र

चार्जशीट में यह भी कहा गया है कि जनवरी के दूसरे सप्ताह में ताहिर हुसैन ने शेल कंपनियों को 1.1 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए थे, जो बाद में दंगों की तैयारी के लिए कैश के रूप में वापस ले लिए गए। जाँच में पाया गया कि ताहिर हुसैन ने मीनू फेब्रिकेशन और एसपी फाइनेंशियल सर्विसेज के खातों में 92 लाख रुपए, शो इम्पैक्ट प्राइवेट लिमिटेड को 20 लाख रुपए और युधवी इम्पेक्स को 20 लाख रुपए ट्रांसफर किए थे।

जहॉं तक सिमी के पूर्व नेता के बेटे उमर खालिद की भूमिका का सवाल है तो चार्जशीट बताती है कि उसने आप के पूर्व काउसंलर से कहा था, “ट्रम्प की यात्रा के समय कुछ बड़े/ दंगों के लिए तैयार रहें”, और ” वह तथा PFI के अन्य सदस्य उसकी (हुसैन) आर्थिक रूप से मदद करेंगे।”

चार्जशीट में कहा गया है, “हुसैन ने दावा किया कि सैफी ने उसे तैयारियों के लिए पैसे दिए थे। उसने जनवरी के दूसरे सप्ताह में अपनी कंपनियों के खाते से 1.10 करोड़ रुपए फर्जी कंपनियों को ट्रांसफर किए थे। इसके बाद उसने (हुसैन) लेनदेन के माध्यम से नकद राशि प्राप्त की और तैयारी शुरू कर दी। साथ ही उसने सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों को पैसे भी बाँटे थे।” चार्जशीट में यह भी कहा गया कि उसके साथ के और इलाके के कई अन्य लोगों ने भी अपने समर्थकों को बड़ी कार्रवाई के लिए तैयार रहने को कहा था।

चार्जशीट में कहा गया है कि ताहिर हुसैन सहित पंद्रह लोग दिल्ली के खजूरी खास में हुसैन के घर के बाहर हुए दंगों में मुख्य रूप से शामिल थे। उसके छोटे भाई, शाह आलम को पहले भी गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने जाँच के दौरान दंगे में इस्तेमाल हुए हुसैन की लाइसेंसी पिस्टल को भी जब्त कर लिया है।

हुसैन और उसके अन्य साथियों को दंड संहिता की धारा 109, 114, 147, 148, 149, 186, 353, 395, 427, 435, 436, 452, 454, 153A, 505, 120B इंडियन पीनल कोड और 3 4 आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

चार्जशीट में लिखा है कि आप के पूर्व पार्षद ने दिल्ली में हुए दंगों के एक दिन पहले 22 फरवरी 2020 को खजूरी खास के पुलिस स्टेशन से अपनी पिस्तौल छुड़वाई थी। हुसैन दिल्ली में दंगे भड़काने में शामिल लोगों के एक बड़े समूह के हिस्से उमर खालिद और खालिद सैफी के संपर्क में भी था।

दिल्ली हिंसा में तबलीगी जमातियों का हाथ

राजधानी स्कूल मामले में बुधवार (2मई 2020) को एक और चार्जशीट दायर किया गया। इसमें दिल्ली के मुस्तफाबाद के शिव विहार में राजधानी स्कूल के परिसर के बाहर 24 फरवरी को हुए दंगों में 5 मार्च को एफआईआर दर्ज की गई थी। एफआईआर डीआरपी कॉन्वेंट स्कूल के मालिक और प्रबंधक के शिकायत पर दर्ज की गई थी, जो राजधानी स्कूल से सटा हुआ है।

चार्जशीट के अनुसार, 24 फरवरी को मुस्लिम परिवारों के कई बच्चों को उनके माता-पिता स्कूल खत्म होने से पहले ले गए थे। इससे इस बात का पता लगाया जा सकता है कि इस दंगे को पहले से ही प्लान किया गया था। चार्जशीट में बताया गया कि मोलोटोव कॉकटेल काँच के बोतलों और राजधानी स्कूल की छत पर रस्सी और लोहे की गुलेल की मौजूदगी दूसरे पक्ष पर हमला करने के लिए पहले से की गई रणनीति की ओर इशारा करती है।

चार्जशीट में राजधानी स्कूल का जिक्र

दंगाइयों पर यह भी आरोप है कि उन्होंने डीआरपी कॉन्वेंट स्कूल के कंप्यूटर और अन्य महँगे सामान भी लूट लिए। साथ ही भीड़ ने स्कूल के सामने स्थित अनिल मिठाई की इमारत को भी जला दिया। बिल्डिंग में आग लगने से उसके अंदर फँसे कर्मचारी दिलबर नेगी की मौत हो गई, जिसका शव पुलिस को बाद में मिला।

इस मामले में राजधानी स्कूल के मालिक फैसल फारूक के साथ अठारह अन्य व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया था। जाँच में पता चला था कि फैसल फारूक ने ही राजधानी स्कूल क्षेत्र में और उसके आसपास दंगों को अंजाम देने की योजना बनाई थी। गवाहों के अनुसार उसी के निर्देश पर, डीआरपी कॉन्वेंट स्कूल और अनिल स्वीट की इमारत में आग लगाई गई थी।

पुलिस ने बताया कि जाँच के दौरान यह पाया गया कि हिंसा बड़ी साजिश के तहत हुई और राजधानी स्कूल का मालिक फैसल फारूक हिंसा के ठीक पहले पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के कई नेताओं, पिंजरा तोड़ ग्रुप, निज़ामुद्दीन मरकज़, जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी और देवबंद के कई मौलवियों-आलिमों के संपर्क में था। उसके मोबाइल से इस बात के सबूत मिले हैं।

जाफराबाद दंगे से धुर वामपंथी समूहों का कनेक्शन

23 मई को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पिंजरा तोड़ की नताशा नरवाल और देवांगना कलिता को दिल्ली दंगों के मामले में गिरफ्तार किया था। दोनों महिलाएँ पिंजरा तोड़ की संस्थापक सदस्य हैं, जिसे 2015 में स्थापित किया गया था।

क्राइम ब्रांच की स्पेशल इनवेंस्टिगेशन टीम ने दोनों को 22 फरवरी की शाम को नागरिकता संशोधन एक्ट (सीएए) के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन के लिए स्थानीय निवासियों को भड़काने और उन्हें जाफराबाद मेट्रो स्टेशन पर इकट्ठा होने के लिए कहने जैसे आपराधिक साजिश के आरोपों के तहत गिरफ्तार किया था।

उनके ख़िलाफ़ पुलिस ने आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 186, 353, 332, 333, 323, 283, 188, 427, 307, 302, 120B, 34 और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचने के तहत मामला दर्ज किया गया है। दोनों एक बड़ी साजिश का हिस्सा थीं और साथ ही “इंडिया अगेंस्ट हेट” ग्रुप और उमर खालिद के साथ भी जुड़ी थीं।

चार्जशीट का अंश

इस चार्जशीट में जिक्र किया गया है कि आरोपितों के मोबाइल में व्हाट्सऐप द्वारा भेजे गए कुछ संदेश, जिनसे उनके दिल्ली दंगों में हाथ होने का प्रमाण मिलता है, इस प्रकार थे –

  1. घर में गर्म खौलते हुए पानी और तेल का इंतजाम करें
  2. बिल्डिंग की सीढ़ियों पर तेल, शैंपू या सर्फ डाल दें
  3. लाल मिर्च गर्म पानी में या पाउडर के रूप में प्रयोग करें
  4. दरवाजों को मजबूत करें, जल्द से जल्द ग्रिल या लोहे के गेट लगवाएँ
  5. तेजाब की बोतलें घर में रखें
  6. बालकनी व छत पर ईंट और पत्थर रखें
  7. कार व बाइक से पेट्रोल निकाल कर रखें
  8. लोहे के दरवाजों में स्विच से करंट का इस्तेमाल करें
  9. एक इमारत से दूसरी इमारत में जाने के लिए रास्ते का इंतजाम करें
  10. बिल्डिंग के सारे मर्द हजरात एक साथ इमारत ना छोड़े, कुछ लोग महिला सुरक्षा के लिए रुकें

‘अमेरिका की तरह भारत में सड़कों पर लोग उतरें और दंगे करें, देश में दंगे भड़काने की तैयारी कर रहा है The Quint’

अमेरिका में अश्वेत नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। लोग सड़कों पर उतारकर अमेरिकी सरकार का विरोध कर रहे हैं। लेकिन भारत का वामपंथी प्रोपेगेंडा मीडिया तंत्र इन दंगों का फायदा अपनी विचारधारा के पोषण के लिए करता नजर आ रहा है।

भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द क्विंट’ की एक ऐसी ही अपील के स्क्रीनशॉट ट्विटर पर पोस्ट करते हुए लिखा है कि किस प्रकार ‘द क्विंट’ भारत के लोगों को उकसाकर उन्हें सड़कों पर उतर आने की अपील कर रहा है।

इस ट्वीट में कपिल मिश्रा ने लिखा है – “The Quint ने देश भर में हजारों ईमेल भेजी हैं। अपील की हैं – अमेरिका की तरह भारत में सड़कों पर लोग उतरें और दंगे करें। ये सीधे सीधे देश में दंगे भड़काने की तैयारी हैं। इस तरह की ईमेल भेजने वालो की जगह जेल हैं। #DeshdrohiQuint”

कपिल मिश्रा द्वारा जो स्क्रीनशॉट शेयर किए गए हैं उनमें द क्विंट की पोडकास्ट प्रोड्यूसर शोरबोरी पुरकायस्था ने अपने पाठकों से अपील की है कि भारतीयों ने भी अमेरिका में जॉर्ज फ्लोएड की मौत की तर्ज पर ही भारी मात्रा में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन क्यों नहीं किए? साथ ही उकसाने वाली भाषा में लिखा गया है कि आखिर हमें घर-घर न्याय पहुँचाने के लिए किस चीज का इन्तजार है?

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इस संदेश के साथ ही यह भी ध्यान देने की बात है कि प्रोपेगेंडा वेबसाईट द क्विंट की वेबसाइट पर यदि जाएँ तो ऐसे कई आर्टिकल मिलते हैं, जिनमें अमेरिका में हो रहे दंगों की तुलना भारत की बेहद अप्रासंगिक घटना से जोड़ने के प्रयास किए गए हैं।

सिर्फ लेख ही नहीं बल्कि पोस्टर्स के जरिए भी मासूम युवाओं की भावनाओं को भड़काने वाली पोस्टर और स्लोगन राघव बहल की वेबसाइट ‘द क्विंट’ पर देखे जा सकते हैं। इन्हीं में से एक उदाहरण इस पोस्टर में भी देख सकते हैं।

इस पोस्टर में एक ओर अमेरिका और दूसरी ओर भारत की एक काल्पनिक घटना का जिक्र करते हुए लिखा गया है कि अमेरिका में एक अश्वेत द्वारा एक महिला को कुत्ते का पट्टा बाँधने की अपील करने पर उसे पुलिस बुलाने की धमकी दी गई, जबकि क्विंट के अनुसार, भारत में भी सब्जी बेचें वालों को परेशान किया गया और उन पर कोरोना वायरस फैलाने का आरोप लगाया गया। ऐसे ही अन्य बेहद अतार्किक तुलनाएँ द क्विंट ने इस ‘रिपोर्ट‘ में करने के प्रयास किए हैं।

मानो देश के इस प्रोपेगेंडा मशीनरी ने मन बना लिया हो कि सत्ता के विरोध के लिए ये तथ्यों को साफ़ तौर पर इनकार कर अपने एजेंडा को सबसे ऊपर रखेंगे। क्योंकि भारत में कोरोना वायरस फैलाने के आरोप जिन भी घटनाओं में किसी सब्जी बेचने वालों पर लगे हैं, उसके पीछे कारण या तो सही पाए गए, या फिर वो वास्तव में फल और सब्जियों पर थूक लगाते हुए पाए गए, जो कि कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलाने में मददगार साबित हो सकता है।

हालाँकि, झारखंड में कुछ ऐसे सब्जीवालों को वास्तव में परेशान किया गया, जिनकी दुकानों पर भगवान या फिर धार्मिक संगठनों के झण्डे लगे हुए थे। लेकिन इस मामले में किसी भी तरह का कोई विरोध वामपंथी मीडिया द्वारा सामने नहीं आया था। उनका सारा रोना केवल ‘समुदाय विशेष’ के लिए ही होता है।

महात्मा गाँधी की प्रतिमा को दंगाइयों ने किया खंडित: भारतीय दूतावास के समाने हुई घटना, जाँच में जुटी पुलिस

अमेरिका में एक अश्‍वेत नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस के हाथों हुई हत्या के बाद कई राज्‍यों में प्रदर्शन दिन प्रतिदिन उग्र होता जा रहा है। इसी दौरान कई जगह आगजनी, हिंसा और लूटपाट की घटनाएँ भी सामने आई हैं। वहीं अब बुधवार (4 मई, 2020) को प्रदर्शनकारियों ने अमेरिका के वॉशिंगटन में भारतीय दूतावास के सामने लगी गाँधी जी की प्रतिमा को नुकसान पहुँचाया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, वॉशिंगटन डीसी में भारतीय दूतावास के बाहर स्थित महात्‍मा गाँधी की प्रतिमा को कुछ दंगाई लोगों द्वारा क्षति पहुँचाई गई है। अभी इसका पता नहीं लगाया जा सका है कि प्रदर्शन के दौरान महात्मा गाँधी की मूर्ति तोड़ने के पीछे किन लोगों का हाथ है। माना यही जा रहा कि इस प्रदर्शन के दौरान भीड़ की आड़ में ही गाँधी की प्रतिमा को खंडित किया गया है।

एएनआई ने सूत्रों के अनुसार बताया है कि मामले की जानकारी मिलते ही यूनाइटेड स्टेट्स पार्क पुलिस ने इस मामले में जाँच शुरू कर दी है। साथ ही दोषी व्‍यक्तियों की खोज की जा रही है।

अमेरिका में हो रहे हिंसक प्रदर्शन में आईएसआईएस समर्थक और उससे सहानुभूति रखने वाले ऑनलाइन अराजक तत्व भी विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इतना ही नहीं, आईएसआईएस समर्थक इन प्रदर्शनों पर अपनी खुशी भी जाहिर कर रहे हैं।

विरोध प्रदर्शनों के चलते अमेरिका में कानून-व्यवस्था बिगड़ती जा रही है। ISIS समर्थकों ने इसे ‘मजहब वालों के साथ किए जा रहे सलूक के लिए ईश्वरीय सहायता’ बताया है और कहा है कि सोमालिया, अफगानिस्तान, यमन, इराक, सीरिया और फिलिस्तीन में लोगों के साथ जो किया गया, अल्लाह उन्हें उसका मजा चखा रहा है।

वहीं कुछ दिन पहले दंगे के दौरान ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ के नारे भी लगाए गए। इसका एक वीडियो भी सामने आया था। जिसमें देखा जा सकता है कि दंगाई लगातार इस्लामिक नारे लगा रहे हैं। वे ‘ला इलाहा इल्लल्लाह’ के साथ ही ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लगाते हुए देखे और सुने जा सकते हैं।

वायरल हुए एक दूसरे वीडियो में आप देख सकते है कि किस तरह इस विरोध प्रदर्शन के दौरान महिला प्रदर्शनकारी अपने कपड़े उतारते दिख रही है। सैकड़ों की संख्या में सड़क पर जुटे प्रदर्शनकारियों के बीच बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को अर्धनग्न अवस्था में देखा जा सकता है।

गौरतलब है कि विवादित पत्रकार और MeToo के आरोपित विनोद दुआ ने सोमवार (जून 1, 2020) को अपने डेली शो में भारतीयों को उसी तरह से हिंसा और दंगा करने के लिए उकसाया, जैसा कि फिलहाल अमेरिका में हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय अपने अधिकार से अनजान हैं।

इसी हिंसक प्रदर्शन का एक वीडियो और सामने आया था, जहाँ ANTIFA से जुड़े वामपंथियों और दंगाइयों ने एक बेघर इंसान के पास जो भी था, उसे जला डाला था। जिसके बाद लाचार और बेबस गद्दे का मालिक राख में बदलती अपनी चीजों को किसी तरह बचाने की असहाय कोशिश करता रहा। वो आदमी अपने सामानों को जलता हुआ देख चिल्लाते हुए कहता है – “मैं यहाँ रहता हूँ।

बता दें कि पिछले दिनों 46 वर्षीय अश्वेत जॉर्ज फ्लॉयड की मिनिपोलिस में पुलिस अधिकारी के हाथों मौत हो गई थी। मिनिपोलिस में पुलिस अधिकारी ने फ्लॉयड की गर्दन पर लगभग 9 मिनट तक अपना घुटना रखा था। जॉर्ज फ्लॉयड इस दौरान घुटना हटाने की गुहार लगाता रहा। उसने यह भी कहा कि वह साँस नहीं ले पा रहा है। लेकिन पुलिस अधिकारी नहीं पिघला और फ्लॉयड की मौत हो गई। इसके बाद लोगों का गुस्सा पुलिस के प्रति भड़क गया और हिंसक रुप ले लिया।

कर्नाटक: स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला करने वाले 126 दंगाइयों का कॉन्ग्रेस MLA जमीर अहमद ने किया भव्य स्वागत, दिए ₹10000

कर्नाटक के पडरायनपुरा में बीते महीने स्वास्थ्य कर्मचारियों पर हमला किया गया था। इस घटना के आरोपित 126 दंगाइयों का बुधवार को कॉन्ग्रेस विधायक बीजेड जमीर अहमद खान ने भव्य स्वागत किया।

कॉन्ग्रेस विधायक ने दंगाइयों का हज हाउस से रिहाई के बाद न केवल भव्य स्वागत किया, बल्कि प्रत्येक को कथित तौर पर 10 हजार रुपए की राशि भी दी। दंगाइयों ने 19 अप्रैल को स्वास्थ्य कर्मचारियों के ऊपर हमला किया था। इसके बाद 126 आरोपितों को हज हाउस में न्यायिक हिरासत में क्वारंटाइन किया गया था।

जब इन दंगाइयों को हज हाउस से रिहा किया गया तो इनके स्वागत में बुधवार (03 मई 2020) को कॉन्ग्रेस विधायक बीजेड अहमद खान हाथ जोड़कर सामने खड़े हो गए। इसके बाद आरोपियों को कॉन्ग्रेस विधायक की फर्म से जुड़ी एक बस में ले जाया गया। इस दौरान कॉन्ग्रेसी विधायक ने उन्हें पैसे के अलावा राशन किट और हैंड सैनिटाइजर भी दिए।

कथित तौर पर सभी 126 आरोपितों को 1 लाख रुपये की राशि पर जमानत दी गई है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक कॉन्ग्रेस विधायक ने ही आरोपियों को जमानत पर बाहर निकालने के लिए पैसे दिए हैं। उच्च न्यायालय ने 29 मई को उन्हें जमानत दी थी।

वायरल हुए वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे कॉन्ग्रेस विधायक क्वारंटाइन सेंटर से बाहर आ रहे आरोपित दंगाइयों का स्वागत कर रहे हैं।

गिरफ्तार किए गए 126 में से कुछ आरोपित कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे। यहाँ तक ​​कि पडरायनपुरा के जेडीएस पार्षद इमरान पाशा भी कोरोना जाँच में पॉजिटिव पाए गए थे, जिन्हें आइसोलेट करने के लिए बेंगलुरु के विक्टोरिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

अधिकारियों द्वारा आइसोलेशन में ले जाए जाने के वक़्त जेडीएस नेता ने अपने घर के पास हाईवोल्टेज ड्रामा किया था। पाशा के सैकड़ों समर्थकों ने उनके घर के पास जमा होकर नारेबाजी की थी। इस मामले में शनिवार को पाशा के खिलाफ सोशल डिस्टेंसिंग के उल्लंघन के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था।

इसी इलाके में 19 अप्रैल की शाम को में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और बीबीएमपी अधिकारियों की एक टीम पर हिंसक भीड़ ने हमला कर दिया था। दरअसल स्वास्थ्य विभाग की टीम कोरोना पॉजिटिव पाए गए मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों को क्वारंटाइन करने के लिए गई थी।

इस दौरान कोरोना वायरस रोगियों के संपर्क में आने वाले लोगों ने खुद को क्वारंटाइन करने से इनकार कर दिया था और इसी का विरोध करते हुए हिंसक भीड़ ने पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम पर हमला बोल दिया था। भीड़ ने पुलिसकर्मियों और स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला करते हुए अधिकारियों द्वारा बनाए गए बैरिकेड्स, टेंट और अन्य सेटअप को तहस-नहस कर दिया था।

बीबीएमपी डॉक्टरों, नर्सों और आशा कार्यकर्ताओं का एक समूह सरकार द्वारा संचालित क्वारंटाइन सेंटर में कोरोना पॉजिटिव पाए गए मरीजों के संपर्क में आए 58 लोगों को लेने के लिए पडरायनपुरा इलाके में पहुँचा था।

पडरायनपुरा इलाका बेंगलुरु के कोरोना से सबसे प्रभावित इलाकों में से एक है। इसीलिए इसे हॉटस्पॉट घोषित किया गया था और पुलिस द्वारा इलाके को सील करने के लिए बैरिकेड्स लगाए गए थे, जिसे हिंसक भीड़ द्वारा तोड़ दिया गया। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार निजामुद्दीन मरकज से लौटे दो तबलीगी जमातियों को कोरोना पॉजिटिव पाया गया था और फिर उनके संपर्क में आने वाले 15 अन्य लोग भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे।

19 अप्रैल को स्वास्थ्य कर्मियों पर किए गए हमले के आरोप में कुल 126 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इन्हें अदालत द्वारा न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद नजदीकी रामनगर जिला जेल भेज दिया गया था। बाद में रामनगर के निवासियों द्वारा आपत्ति उठाए जाने के बाद उन्हें बेंगलुरु के हज हाउस में स्थानांतरित कर दिया गया था।

‘सीता माता पर अपशब्द… शिकायत करने पर RSS कार्यकर्ता राजेश फूलमाली की हत्या’ – अनुसूचित जाति आयोग से न्याय की अपील

बकरी चराने को लेकर दो गुटों में हुए विवाद में RSS कार्यकर्ता राजेश फूलमाली (Rajesh Phoolmali) की मौत को लेकर अब सोशल मीडिया पर उन्हें न्याय दिलाने के लिए आवाज उठनी शुरू हो गई है। राजेश फूलमाली गत 18 मई को हुए विवाद में घायल हो गए थे और इलाज के दौरान 31 मई को इंदौर में उनकी मौत हो जाने की खबर से मृतक के गाँव में आक्रोश का माहौल है।

वहीं सोशल मीडिया पर सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रशांत पटेल उमराव ने मृतक राजेश फूलमाली (Rajesh Phoolmali) को न्याय दिलाने की बात कहते हुए लिखा है – “आरएसएस कार्यकर्ता राजेश एससी समुदाय से थे। हम पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए अनुसूचित जाति आयोग के पास जा रहे हैं।”

प्रशांत पटेल ने अपने ट्वीट में लिखा है कि एससी समुदाय को भारत में सबसे ज्यादा ‘शांतिप्रियों’ द्वारा सताया जाता है। बाबा साहब ने इसके बारे में चेतावनी दी थी। इस ट्वीट में ही राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष राम शंकर कठेरिया को टैग करते हुए उन्होंने एक्शन लेने की माँग की है।

एक अन्य ट्वीट में प्रशांत पटेल ने लिखा है – “खंडवा, MP में संघ कार्यकर्ता राजेश फूलमाली (26) द्वारा फेसबुक में सीता माता पर अपशब्द की शिकायत पुलिस से करने पर 18 मई को रोजेदारों नें लिंचिंग की थी, इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। 15 नमाजियों को अरेस्ट किया गया है, हमारी टीम राजेश के परिवार को न्याय दिलाने के लिए वहाँ तत्पर है।”

पहले था बकरी विवाद

मध्य प्रदेश के खंडवा जिला स्थित दीपला गाँव के जंगल में बकरी चराने की बात पर विवाद हो गया था। यह विवाद बाद में मारपीट तक पहुँच गया। पथराव के दौरान राजेश फूलमाली, निवासी दीपला को गंभीर चोट आई थी। इसके बाद उन्हें जिला अस्पताल लाया गया था, जहाँ उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें इंदौर रेफर किया गया था।

18 मई को दो पक्षों के बीच हुए इस विवाद में घायल युवक की रविवार (मई 31, 2020) को इलाज के दौरान इंदौर में मौत हो गई। राजेश फूलमाली की मौत की खबर खंडवा पहुँचते ही अफरा-तफरी मच गई। स्थिति को देखते हुए सुरक्षा की दृष्टि से दीपला गाँव में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया।

खांडवा जिले के एसपी ने इस संबंध में न्यू इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि इस मामले के मद्देनजर 22 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इनमें से 19 को पुलिस ने गिरफ्तार भी कर लिया है। बाकी बचे आरोपितों को पकड़ने का भी प्रयास जारी है।

जिहाद उनका, नेटवर्क उनका, शिकार आप और नसीहतें भी आपको ही…

प्रीति ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि एक दिन 9 और 5 साल के अपने बच्चों को उसे छत से फेंकना होगा ताकि उनकी जिंदगी बच जाए। सोचा तो विवेक ने भी नहीं होगा कि एक मजहबी उन्मादी भीड़ उसके सिर में ड्रिल मशीन से छेद कर देगी। दिलबर नेगी ने ही कब सोचा होगा कि उसके हाथ-पैर काट एक दिन जिंदा उसे आग में झोंक दिया जाएगा।

ठीक ऐसे ही एकता ने भी नहीं सोचा होगा कि वह जिसे अमन समझ रही, वह असल में शाकिब है। जिसके साथ वह खुशहाल जिंदगी के सपने बुन रही, वही उसे एक दिन काट डालने वाला है।

आपने भी तो कभी सोचा नहीं होगा कि ऐसे गुनाहों से उसी पहचान वाले लोगों के हाथ क्यों रंगे हैं, जिसकी हालत सच्चर कमिटी ने दलितों से भी बदतर बताई है। वजह साफ है कि आप शुतुरमुर्ग की तरह जमीन में सिर गाड़े बैठे हैं और इस उम्मीद में हैं कि अगली एकता आपके परिवार की नहीं होगी। आपको लगता है कि कश्मीरी पंडितों के साथ जो हुआ, वह मैथिल ब्राह्मणों के साथ नहीं हो सकता। इसलिए, जरूरी है कि इस खतरे को सिलसिलेवार तरीके से समझिए।

पहले कुछ हेडलाइन पर गौर करें;

  • मोहम्मद रियाज़ ने सोनू बनकर की शादी, भेद खुलने पर दिया तीन तलाक, 15 लाख लेकर फरार
  • हिंदू लड़की को गर्भवती किया, कहा- शादी के लिए इस्लाम अपनाओ बनो, आईएस के पास जाकर काम करो
  • शामली में लव जिहाद: ‘बिंदास आशिक़’ ने शादी के बाद लड़की का किया 3 लाख में सौदा
  • लव जिहाद मामले में शादीशुदा युवक ने हिन्दू लड़की को किया अगवा, हालात बेक़ाबू
  • कलावा पहन ख़ालिद ने 14 साल की हिन्दू लड़की को फँसाया: ‘4 बार रेप किया, वीडियो भी बनाया’
  • अजमल बना ‘अजय’, MBA लड़की को फँसाया: निकाह के बाद भाई के साथ किया गैंगरेप
  • हमारी तरह रहो, पूजा-पाठ बंद करो: पूजा को पति कामरान और ससुराल वालों की धमकी
  • अजहर ने खुद को हिंदू बता की शादी, फिर MMS बनाकर दोस्तों के साथ सोने पर करने लगा मजबूर
  • असलम ने सोनू बन की शादी, 6 साल बाद राज खुला तो भाइयों संग मिल पत्नी को प्रताड़ित किया
  • ‘गौमांस खा, तब जाकर तू पक्की मु#$%न बनेगी’, हिंदू महिला ने लगाए प्रताड़ना, धर्मांतरण के आरोप

ये 10 हेडलाइन तो लव जिहाद के चुनिंदा मामले को बयाँ करते हैं। आप कहीं ज्यादा बड़े खतरे से घिरे हैं। इसे समझने के लिए पाँच कहानियाँ,

पहली कहानी: उस कुत्ते को ईश्वर पंडित ने देखा न होता तो शायद ही पता चलता एकता मार डाली गई

आजकल सोशल मीडिया में एकता देशवाल मर्डर सुर्खियों में है। लव जिहाद का ताजातरीन उदाहरण। मीडिया रिपोर्टों की भरमार है जो बताती है कि कैसे शाकिब ने अमन बनकर उसे फँसाया। फिर एक दिन लुधियाना से बीकॉम की छात्रा एकता को लेकर भागा और ईद के दिन उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने हत्या की गुत्थी कैसे सुलझाई। वगैरह, वगैरह।

लेकिन, मेरठ के लोइया गॉंव में एकता को मारकर गाड़ देने की बात एक साल भी शायद ही खुलती, यदि 13 जून 2019 को ईश्वर पंडित ने शबी अहमद के खेत से एक कुत्ता को मानव अंग लेकर भागते न देखा होता। पंडित ने पुलिस को खबर की। खेत की खुदाई हुई तो एक लाश मिली, जिसका सिर और दोनों हाथ गायब थे। पुलिस ने कड़ियों को जोड़ना शुरू किया। आखिर में एक सुराग मिला कि पंजाब के लुधियाना से एक लड़की गायब है।

तफ्तीश के बाद राज खुला कि 5 जून 2019 को शाकिब ईद वाले दिन एकता को लेकर लोइया गॉंव के अपने घर पहुँचा। यहाँ एकता को पहली बार पता चला कि वह अमन नहीं शाकिब है। दोनों में इस बात को लेकर झगड़ा हुआ। फिर शाकिब पूरे परिवार को घुमाने की बात कहकर घर से बाहर ले जाता है। रास्ते में एकता को नशीली कोल्डड्रिंक पिलाई जाती है। खेत में ले जाकर रेशमा और इस्मत (दोनों शाकिब की भाभी) ने उसके कपड़े उतारे। शाकिब ने सिर काटे। हाथ भी, क्योंकि एकता ने अपने एक हाथ पर अपना नाम और दूसरे पर प्यारे ‘अमन’ का नाम गुदवा रखा था। फिर खेत लाश को गाड़कर नमक डाल दिया, ताकि वह जल्दी गल जाए।

25 लाख के जो गहने लेकर एकता अपने घर से भागी थी उसे रख लिया। उसके परिजनों को झॉंसा देने के लिए शाकिब समय-समय पर उसके व्हाट्सएप के फोटो बदलता रहता। एकता बनकर उसके परिजनों से चैटिंग करता रहा। ताकि किसी को यह खबर न लगे कि एकता अब इस दुनिया में नहीं रही।

दूसरी कहानी: डॉक्टर बनना था जिस निमिषा को वह फातिमा बन काबुल की जेल में सड़ रही है

उत्तर से दक्षिण के राज्य केरल चलते हैं। निमिषा आपके पड़ोस की आम लड़की जैसी ही थी। आँखों में बड़े सपने पलते थे। डॉक्टर बनना चाहती थी। लेकिन पड़ गई सज्जाद सलीम के इश्क में। 2012 में निकाह के बाद धर्म बदला तो नाम मिला फातिमा। जब गर्भवती हुई तो सज्जाद ने तलाक दे दिया। फिर एक मजहबी संगठन ने मदद के नाम पर दोबारा निकाह करवाया। गर्भवती फातिमा फिदायीन बम बनाकर अफगानिस्तान भेज दी गई।

2016 से लापता निमिषा उर्फ फातिमा की खबर 2020 में सामने आई। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने बताया कि और अब वह आईएसआईएस आतंकी होने के आरोप में काबुल की जेल में बंद है। निमिषा की मॉं बिंदु बताती हैं, “मेरी बेटी को बहकाया गया। उस पर दबाव डाला गया। ये सब उसी सज्जाद सलीम ने किया। वो भी उसी कॉलेज से MBBS कर रहा था। सज्जाद अपनी माँ और पूरे परिवार के साथ 2012 से मेरी बेटी से मिल रहा था। उसकी माँ ने कहा कि अगर तुम इस्लाम कबूल कर लो, तो मैं तुम्हारे परिवार से बात करूँगी और अपने बेटे से शादी करवा दूँगी। मेरी बेटी की गलती यही थी कि उसने मुझे कुछ नहीं बताया। अगर उसने मुझे बताया होता तो मैं कुछ करती। उन्होंने जबरन शादी करवाई, उसे बाहर ले जाया गया। वो गर्भवती हो गई, तो उसे तलाक दे दिया।”

तीसरी कहानी: अपने बच्चों की ऊँगली भी आतंकी को थमा देते हैं ताकि वे आँखों में धूल झोंक सकें

उनके गुनाह कैसे भी हों, मजहब के नाम पर मददगार हर जगह मौजूद हैं। ऐसे ढेरो मामले आपने देखे, पढ़े और सुने होंगे। कमलेश तिवारी के मर्डर की प्लानिंग से लेकर हत्यारों को सुरक्षित भगाने में आपने अलग-अलग प्रदेशों और शहरों में फैला इनका यह नेटवर्क बीते साल भी उजागर हुआ था।

लेकिन यह कहानी जलीस अंसारी की है जो आज जेल में बंद है। बम बनाने के अपने हुनर के कारण वह डॉ. बम के नाम से ज्यादा जाना जाता है। जलीस 50 से अधिक बम धमाकों में शामिल रहा है। 1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा है। सिमी और हिजबुल मुजाहिद्दीन के आतंकियों को बम बनाना सिखा चुका है।

मुंबई धमाकों का गुनहगार जलीस पिछले साल के अंत में 21 दिनों के परोल पर अजमेर के केंद्रीय कारागार से निकला। मुंबई अपने घर पहुॅंचा। नियम के अनुसार उसे परोल के दौरान रोज थाने में एक बार हाजिरी लगानी थी। वह ऐसा कर भी रहा था। 17 जनवरी 2020 को उसकी परोल खत्म होनी थी। अचानक 16 जनवरी को वह लापता हो गया। तलाश शुरू हुई तो घरवालों ने कहा कि नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद जाने की बात कहकर निकला था।

मुंबई पुलिस की अपराध शाखा और महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ता उसकी तलाश में जुटी। उसे कानपुर के एक मस्जिद से बाहर निकलते गिरफ्तार किया गया। मस्जिद के बाहर सादे कपड़ों में खड़े एसटीएफ अधिकारी ने जब आवाज दी- अंसारी चच्चा कैसे हो… तो एक बच्चा आतंकी जलीस अंसारी की ऊँगली थामे चल रहा था। ये बच्चा कौन था? किसका बच्चा था? इस बच्चे की पहचान जानने से ज्यादा जरूरी यह समझना है कि दूर-दूर तक इस बच्चे से जलीस अंसारी का कोई रिश्ता नहीं था।

गिरफ्तारी के बाद जब एनआईए ने उससे पूछताछ की तो पता चला कि जलीस अपनी पहचान बदलकर पाकिस्तान जाने वाला था। वहॉं से लौट असम में ठिकाने बनाता, जहॉं से देश के बड़े शहरों में आतंकी घटनाओं को अंजाम दिया जाता। मस्जिद के बाहर वह धराया न होता तो उसके सम्पर्क सूत्रों ने उसके फरार होने की पूरी तैयारी कर रखी थी।

चौथी कहानी: आप की आँखों के सामने एक जिला बन गया ‘मिनी पाकिस्तान’

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू होने के साथ कई आँकड़े हमारे सामने आए। इन आँकड़ों से पता चला कि किस तरह पाकिस्तान और बांग्लादेश में प्रताड़ना की वजह से हिंदुओं की आबादी सिमटती गई। कुछ ऐसा ही हाल हरियाणा के मेवात का है, जो देश की राजधानी दिल्ली से करीब 100 किमी ही दूर है। महिलाओं को अगवा करना, दुष्कर्म और जबरन धर्म परिवर्तन की घटनाओं से यह ‘मिनी पाकिस्तान’ बन गया है।

खास समुदाय बहुल मेवात में हिंदुओं खासकर दलितों पर हो रहे अमानवीय अत्याचारों को उजागर किया है पूर्व जस्टिस पवन कुमार की अगुवाई वाली 4 सदस्यीय टीम की जाँच की रिपोर्ट ने। इस जॉंच कमिटी का गठन हरियाणा की श्री वाल्मीकि महासभा ने किया था। कमिटी की रिपोर्ट बताती है कि मेवात के 103 गाँव हिंदू विहीन हो चुके हैं। 84 गॉंव में केवल 4-5 हिंदू परिवार बचे हैं। स्कूल में हिंदू बच्चों का धर्म परिवर्तन हो या नमाज पढ़ने के लिए दबाव बनाना, समुदाय विशेष द्वारा हिंदुओं की जमीन पर कब्जा करना हो या फिर उनके घर में घुस कर गैंगरेप करना या फिर संतों पर हमले। मेवात जब भी सुर्खियों में होता है वजहें यही होती हैं।

पाँचवीं कहानी: एक जिहाद ऐसा भी कि 26 साल में शहर में 3 से 100 हो गए मस्जिद

कश्मीर घाटी से हिंदुओं को भगाने और उनके साथ हुई बर्बरता की फेहरिस्त लंबी है। कुछ ऐसी ही साजिशें जम्मू शहर और उसके कई जिलों में डेमोग्राफिक चेंज के लिए भी चल रही हैं। ‘एकजुट जम्मू’ नामक संगठन ने कुछ महीने पहले ही इससे जुड़े सनसनीखेज तथ्य सामने रखे हैं।

मसलन, जम्मू में 1990 के बाद 1,00,000 घरों का निर्माण हुआ। 50 लाख कनाल सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हुआ। एक कनाल 505.857 वर्गमीटर के बराबर होता है। 1994 में जम्मू शहर में केवल 3 मस्जिद थे। लेकिन अब 100 से ज्यादा हैं। भटिंडी, नरवाल, सुंजवाम, कालुचक, पीर बाबा मोहल्ला, पूँछी मोहल्ला, छन्नी रामा, छन्नी हिम्मत, रायका, सिधरा, रंगूरा, खानपुर, नगरोटा, गुज्जर मोहल्ला, कासिम नगर जैसे इलाकों में देखते ही देखते जनसंख्या का अनुपात बदल गया। आज छन्नी हिम्मत और कासिम नगर में हिंदू और दूसरे मजहब का अनुपात 50-50 का है। अन्य इलाको में अब 80 प्रतिशत से ज्यादा आबादी समुदाय विशेष की है। जम्मू-श्रीनगर हाईवे और जम्मू-पूँछ हाईवे पर ढाबा, रेस्तरां, सब्जी की दुकान, हैंडक्राफ्ट शॉप, होटल के व्यवसायों से भी डेमोग्राफिक तौर पर व्यापक बदलाव आया है।

इस लैंड जिहाद को सुनियोजित तरीके से अब केंद्र शासित प्रदेश में बदल चुके जम्मू-कश्मीर के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों फारूक अब्दुल्ला और गुलाम नबी आजाद की छत्रछाया में अंजाम दिया गया। रिपोर्ट कहती है कि दोनों नेताओं ने हिंदू बहुसंख्यक इलाकों में मजहबी आबादी को स्टेट स्पॉन्सर्ड तरीके से लाकर बसाया। देखते ही देखते अपने ही इलाकों में हिंदू अल्पसंख्यक हो गए।

सोचिएगा… क्योंकि वक्त जमीन से आपके सिर निकालने का इंतजार नहीं करेगा

नजर दौड़ाएँगे तो पता चलेगा कि आपके पड़ोस में भी कई ‘मिनी पाकिस्तान’ हैं। आपके शहर के कई मोहल्लों का डेमोग्राफी आपके देखते-देखते बदल गया होगा और हिंदू बहुसंख्यक से अल्पसंख्यक हो गए होंगे। आपके पड़ोस की किसी निमिषा को डॉक्टर की जगह फिदायीन बम बनाने के लिए एक नेटवर्क सक्रिय होगा। कोई अब्दुल अपने बच्चे को लेकर खड़ा होगा ताकि किसी डॉक्टर बम के हाथ उसे थमा दे।

सोचिएगा! क्योंकि वक्त आपका इंतजार नहीं करेगा। यदि करता तो वह केरल जहॉं 300 साल पहले तक 99% हिन्दू निवास करते थे, उसकी मौजूदा आबादी में आप केवल 54.7% ही न हो गए होते। उस मल्लपुरम में जहाँ की 70% फीसदी आबादी मूर्ति पूजा को हराम मानती है, वहॉं एक गर्भवती हथिनी को पटाखे खिलाकर उसकी जान लेने वाले की निंदा करने के लिए ‘हिन्दुओं की आस्था’ का सहारा न लिया जाता। न यह बताया जाता कि आप गणेश को पूजते हैं और न यह कि उस हथिनी का नाम उमा था, जो देवी पार्वती का भी एक नाम है।

यदि आपको लगता है कि यह सब कश्मीर, केरल, असम जैसे कुछ जगहों तक ही सीमित है, तो दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों में दाखिल चार्जशीट की एक-एक लाइन पढ़ लीजिएगा। मौकापरस्त राजनीति, सिकुलरों और लिबरलों की जमात जब देश की राजधानी को जला सकती है, तो भला आपका घर उनकी लपटों से कितना महफूज होगा? सोचिएगा!!!

‘अगर मजदूरों को पैसा देंगे तो उनकी आदत खराब हो जाएगी, सरकार के लोगों ने कहा’ – एक लाइन में राहुल के 2 झूठ

राहुल गाँधी ने बजाज ऑटो के मैनेजिंग डायरेक्टर राजीव बजाज से भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर आज (4 जून, 2020) बातचीत की। इसमें उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था और श्रमिकों को लेकर अपनी चिंताएँ व्यक्त कीं।

बातचीत की शुरुआत में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने राजीव बजाज से पूछा- “किसी ने सोचा नहीं होगा कि दुनिया इस तरह लॉक हो जाएगी, विश्व युद्ध में भी ऐसा नहीं हुआ?”

इस पर राजीव बजाज ने जवाब में कहा कि जापान, सिंगापुर में उनके दोस्त हैं, इसके अलावा दुनिया के कई देशों में भी उनकी बात होती है। इसके बाद बजाज ने कहा कि भारत में एक तरह का ‘ड्रैकोनियन लॉकडाउन’ है, ऐसा लॉकडाउन कहीं पर भी नहीं हुआ है। दुनिया के कई देशों में बाहर निकलने की अनुमति थी, लेकिन हमारे यहाँ स्थिति अलग रही।”

उन्होंने कहा- ”हमने कठिन लॉकडाउन लागू करने की कोशिश की, जो अभी भी कमजोर था। हम दोनों विकल्पों के बुरे परिणामों के बीच फँस गए। एक तरफ कमजोर लॉकडाउन यह सुनिश्चित करता है कि वायरस अभी भी मौजूद रहेगा। सरकार ने उस समस्या को हल नहीं किया है।”

मजदूर पर राहुल गाँधी का झूठ

प्रवासियों के घर लौटने के विषय पर राहुल गाँधी ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि सरकार लोगों के हाथ में पैसा क्यों नहीं दे रही है। उनका मानना है कि अभी राजनीति को भूल लोगों को पैसे देने की जरूरत है। राहुल गाँधी ने बताया कि सरकार के किसी व्यक्ति ने उनसे कहा कि इस वक्त चीन के मुकाबले भारत के सामने काफी मौका है। ऐसे में अगर सरकार मजदूरों को पैसा देगी तो उनकी आदत खराब हो जाएगी और वो गाँव से काम पर नहीं आएँगे।

राहुल गाँधी निरंतर यही बात मीडिया के सामने रखते नजर आ रहे हैं कि सरकार को प्रवासियों को रुपए देने चाहिए। आज की बातचीत में भी वो यह कहते देखे गए हैं कि सरकार के लोगों ने उन्हें पैसा नहीं देने के पीछे कारण गिनाए हैं।

जबकि राहुल गाँधी के बयान से हटकर अगर वास्तविकता को देखा जाए तो सरकार ने श्रमिकों को सीधे उनके खातों में रुपए ट्रांसफर किए हैं। साथ ही, अर्थव्यवस्था और हर छोटे-बड़े उद्योग के लिए आत्मनिर्भर भारत के तहत बड़े आर्थिक पैकेज की भी घोषणा की है। ऐसे में, जब सरकार ने यह किया है, तो फिर राहुल गाँधी को उन्हें ऐसा ना करने का स्पष्टीकरण देने का कोई कारण शेष नहीं रहता है।

इसका सीधा सा अर्थ है कि राहुल गाँधी द्वारा किए गए दोनों दावे एकदम झूठे और बेबुनियाद हैं। पहला दावा जो उनका झूठा है वो यह कि सरकार ने श्रमिकों को रुपए नहीं दिए हैं। और दूसरा यह कि ‘सरकार के लोगों ने’ उन्हें इस बारे में स्पष्टीकरण दिया है।

इस बातचीत के दौरान राहुल गाँधी ने अपने साथी वक्ता को लेकर दिलचस्प वाकया सुनाया। उनके अनुसार जब उन्होंने लोगों को बताया कि राजीव बजाज अर्थव्यवस्था के बारे में बात करने वाले हैं तो सबने कहा कि वाकई में उनमें (राजीव बजाज) में दम है।

स्वीडन की नीतियों का फिर किया जिक्र, जबकि कुछ और ही है हकीक़त

राहुल गाँधी ने कहा,

“हमारी स्थिति को देखते हुए, यह पूरी तरह से अलग है। हमारे पास प्रवासी और दैनिक मजदूर हैं। किसी कारण से, हम पश्चिम की ओर देखते हैं तो, मेरे लिए दिलचस्प सवाल यह है कि हम अपने समाधान के लिए अपने भीतर क्यों नहीं देखते हैं?”

आसमानी दावे करने के शौक़ीन राहुल गाँधी ने आज एक बार फिर यह बात भी दोहराई कि COVID-19 के कारण जारी लॉकडाउन को लेकर भारत बीच में फँस गया है और हमें स्वीडन की तरह नीति अपनानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि वहाँ पर नियमों का पालन हो रहा है, लेकिन लोगों के लिए जीवन को मुश्किल नहीं बनाया जा रहा है।

जबकि इसके उलट वास्तविकता यह है कि स्वीडन की ‘नो-लॉकडाउन नीति’ बनाने वाले वैज्ञानिकों ने खुद यह तथ्य स्वीकार किया है कि स्वीडन की लॉकडाउन की नीति असफल रही और यह और ज्यादा कठोर होनी चाहिए थी।

स्वीडन के वैज्ञानिकों ने स्वीकार किया है कि पूर्ण लॉकडाउन ना करने के स्वीडन के विवादास्पद फैसले को यदि सख्त बनाया जाता तो कोरोनोवायरस से होने वाली मौतों में वृद्धि को रोका जा सकता था। स्वीडन में अपने पड़ोसी देशों की तुलना में अधिक मौतें दर्ज की गई हैं।

उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस महामारी के दौरान राहुल गाँधी ने इससे पहले RBI के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन, नोबेल विजेता अभिजीत बनर्जी से भी चर्चा की थी। उन्होंने इन बातचीत में प्रवासियों को लेकर चिंताएँ व्यक्त की हैं।