Home Blog Page 4804

राहुल गाँधी ने एडिटेड वीडियो से ‘सच’ दिखाना चाहा: NDTV के पत्रकार ने भी नहीं दिया साथ, कर दिया भंडाफोड़

महाराष्ट्र में कोरोना संकट के बीच कॉन्ग्रेस के ‘युवा’ नेता राहुल गाँधी ने लाइव प्रेस कॉफ्रेंस में शिवसेना से अपनी राजनीतिक दूरी बना ली। यह कल मतलब 26 मई शाम की बात है। बाद में जब फजीहत हुई तो सफाई के तौर पर एक एडिटेड वीडियो शेयर कर दी, जिसमें उन्होंने दावा किया कि ऐसा कुछ कहा ही नहीं।

हालाँकि, उनके पार्टी पेज पर शेयर की गई, लाइव प्रेस कॉन्फ्रेंस की वीडियो ने इस बात को स्पष्ट कर दिया कि उनके द्वारा साझा की गई वीडियो एडिटिड है, जिसके जरिए वह अपने फॉलोवर्स को बरगलाना चाहते हैं।

दरअसल, राहुल गाँधी ने कल देर रात लाइव कॉन्फ्रेंस की एडिटेड वीडियो को अपने ट्विटर अकॉउंट पर शेयर किया। उन्होंने इस वीडियो के साथ लिखा, “इस वीडियो को देखें कि कैसे पेड मीडिया अपने आकाओं के लिए सच्चाई को विकृत करता है और वास्तविक मुद्दों से ध्यान भटकाता है।” लेकिन, उनके इस पोस्ट पर कॉन्ग्रेसी समर्थकों को छोड़कर कुछ यूजर्स ऐसे दिखे, जिन्होंने फौरन राहुल गाँधी के झूठ को पकड़ लिया और वीडियो की प्रमाणिकता पर संदेह व्यक्त किया।

अब, यदि हम वास्तविक प्रेस कॉनफ्रेंस की वीडियो को देखते हैं, जिसे कॉन्ग्रेस ने अपने पेज पर भी शेयर किया है, तो मालूम चलेगा कि 31:45 से 34:50 के स्लॉट पर राहुल गाँधी ने संजीत त्रिवेदी के सवालों का जवाब देते हुए महाराष्ट्र की स्थिति पर बात की।

इसके बाद दूसरे पत्रकार की बात शुरू होते ही उन्होंने वापस अपनी बात में सामंजस्य बिठाने के लिए संजीत से दोबारा कनेक्ट होकर बात की। बाद में इन्हीं दोनों के स्लॉट को मिक्स करके एडिट किया गया और उस एडिटेड वीडियो को शेयर किया गया।

वास्तविक वीडियो में राहुल गाँधी ने महाराष्ट्र में कोरोना के हालातों को देखते हुए स्पष्ट कहा कि महाराष्ट्र एक ऐसी जगह पर है, जहाँ कोरोना के सबसे ज्यादा होने की संभावना है। मगर, इसके बाद उन्होंने ये साफतौर पर कहा कि वो यहाँ एक फर्क बताना चाहते हैं कि महाराष्ट्र में वो शिवसेना को सपोर्ट कर रहे हैं, वहाँ वे निर्णायक भूमिका में नहीं है। जहाँ की स्थिति के लिए वे जवाबदेह हैं, वो जगह-पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पॉन्डिचेरी है। इतना ही नहीं, इसके बाद उन्होंने ये भी स्पष्ट रूप से बोला कि सरकार चलाने में और सरकार को समर्थन देने में फर्क़ होता है।

मगर, जब सोशल मीडिया पर लोगों ने इसे लेकर सवाल उठाए, तो उन्होंने कुछ मिनटों की वीडियो को शेयर कर दिया, जिसमें वे महाराष्ट्र को देश की एक प्रमुख धरोहर बोलते दिख रहे हैं और उसके मात्र 35 सेकेंड में ये भी बोल रहे हैं कि अगर उनकी सरकार महाराष्ट्र में है, तो भाजपा सवाल उठा सकती है, इसमें कोई गलती नहीं है। बल्कि उससे तो फायदा होता है, उससे तो उनकी सरकार सीख सकती है, लेकिन राज्य में बिना कोई वजह राष्ट्रपति शासन लागू करने की बातें करना तो रचनात्मक विरोध से बिलकुल अलग है।

यहाँ बता दें कि अब इस वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस की खूब फजीहत हो रही है। लोग इसी बात पर गौर करवा रहे हैं कि सच बताना था तो एडिट वीडियो शेयर करनी की क्या आवश्यकता थी? या आखिर क्यों 35 सेकेंड के बाद वीडियो में जंप है? और तो और, NDTV के पत्रकार भी राहुल गाँधी के इस एडिटेड वीडियो को लेकर कमेंट कर रहे हैं।

SC ने अयोध्या में बौद्धों का दावा स्वीकारा: मृणाल पाण्डे ने फैलाया भ्रम, लोगों ने कहा – ‘राक्षसी सेना वाली औसत वामपंथी’

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण शुरू हो गया है। इसके साथ ही वामपंथियों का गिरोह भी सक्रिय हो गया है। तमाम तरह के दुष्प्रचार फैलाए जा रहे हैं। वामपंथी नेता सुभाषिनी अली ने एक पुरानी ख़बर शेयर कर के बौद्धों को राम मंदिर को लेकर भड़काया। इसके बाद उसी ख़बर को आधार बनाते हुए मृणाल पांडेय ने प्रपंच फैलाया। मृणाल पाण्डे ने शेयर किया कि सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले में बौद्धों का दावा स्वीकार कर लिया है।

दरअसल, ये एक पुरानी खबर है। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के ही विनीत कुमार मौर्य की याचिका स्वीकार की थी, जिसमें उन्होंने राम मंदिर की जगह बौद्ध विहार होने की बात कही थी। इस याचिका में दावा किया गया था कि पुरातात्विक अवशेष भी इस ओर इशारा करते हैं कि वहाँ बौद्ध सम्बन्धी स्ट्रक्चर था। हालाँकि, कोर्ट में ये दावा ठीक उसी तरह ख़ारिज हो गया था, जिस तरह बाबरी मस्जिद वालों का हुआ।

बावजूद इसके दशकों तक लेखन और पत्रकारिता में सक्रिय रहीं मृणाल पाण्डे द्वारा इस तरह से लोगों को बरगलाना वामपंथी प्रपंच के सिवा कुछ भी नहीं है। इन दोनों के अलावा कई अन्य लोगों ने भी इस पुरानी खबर को जम कर शेयर किया। राम मंदिर मामले में फैसला आ चुका है, सैकड़ों साल पुराने विवाद का निपटारा हो चुका है- तो सोचने वाली बात है कि अब इस पर कोई याचिका यूँ ही कैसे स्वीकार कर ली जाएगी।

सोशल मीडिया में कई लोगों ने इस तरफ ध्यान भी दिलाया कि ये पुरानी खबर है। दिलीप मंडल ने भी 21 मई को एक खबर शेयर की थी, जिसमें अयोध्या में बौद्ध विहार होने के दावों के साथ सुप्रीम कोर्ट में गए व्यक्ति के बारे में जानकारी दी गई थी। मौर्य राम मंदिर विवाद में सुप्रीम कोर्ट में 14वें याचिकाकर्ता थे। इस याचिका में इलाहबाद हाईकोर्ट को चुनौती देते हुए एएसआई की रिपोर्ट के हवाले से दावा किया गया था कि उक्त स्थल पर बौद्ध स्तूप होने के प्रमाण मिले हैं।

मृणाल पाण्डे ने पुरानी खबर शेयर कर फैलाया झूठ

फ़िलहाल वहाँ राम मंदिर का निर्माण चालू है और नींव की पहली ईंट रखने के साथ ही लोगों ने कारसेवकों और मंदिर के लिए संघर्षशील रहे हस्तियों को याद किया। सोशल मीडिया पर कई लोग शिवलिंग और चक्र जैसी चीजों को नकारते हुए उनके बौद्ध धर्म से जुड़े होने की बात करते रहे, जो वहाँ समतलीकरण के दौरान मिला था। उदित राज जैसे दलितों के ठेकेदारों ने भी इस दावे पर अपनी मुहर लगाई और लोगों को बरगलाया।

सुभाषिनी अली तो ख़ुद को नास्तिक बताती हैं और कहती हैं कि किसी भी धर्म में उनका कोई इंटरेस्ट नहीं है क्योंकि उन्हें लगता है कि कुछ धर्मों में काफी कड़े नियम बना दिए गए हैं। अगर उनकी किसी भी धर्म में रूचि नहीं है तो फिर अचानक से बौद्ध धर्म से उनका प्रेम कैसे सामने आ गया? असल में यहाँ जितने भी नास्तिक वामपंथी हैं, ऐसा नहीं है कि वो सभी धर्मों में विश्वास नहीं रखते, बल्कि वो हिंदुत्व से घृणा करते हैं और इसे नीचा दिखाना चाहते हैं।

बांद्रा में भगदड़, अर्नब का शो, महाराष्ट्र सरकार फिर आहत: जाँच के बाद बंद मामले की भी CID जाँच के आदेश

बांद्रा में लॉकडाउन के बीच हुई भगदड़ पर शो करने के कारण महाराष्ट्र सरकार ने रिपब्लिक टीवी के संस्थापक अर्नब गोस्वामी के खिलाफ एक नई आपराधिक जाँच शुरू कर दी है। रिपब्लिक न्यूज़ के सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, रिपब्लिक टीवी को पूछताछ और जाँच के लिए महाराष्ट्र सरकार की ओर से पत्र भेजे गए हैं। यही नहीं एक अन्य पुराने मामले में भी अर्नब गोस्वामी पर CID द्वारा जाँच के आदेश भी दिए हैं।

गौरतलब है कि यह वही रिपब्लिक टीवी है, जिसने कल ही महाराष्ट्र राज्य में कोरोना वायरस के लॉकडाउन की अफरा-तफरी और बदहाली पर कई शो किए थे। इस बार मुंबई पुलिस ने बांद्रा में हुई भगदड़ रिपोर्टिंग के मामले में रिपब्लिक टीवी से पूछताछ की है।

रिपब्लिक टीवी के CFO को पिधोनी पुलिस स्टेशन उपस्थित होने के लिए कहा है। यह भी उल्लेखनीय है कि पिछली बार रिपब्लिक टीवी के संस्थापक अर्नब गोस्वामी से एक ऐसे अधिकारी द्वारा पूछताछ की गई थी, जो कोरोना वायरस से संक्रमित था।

रिपब्लिक भारत द्वारा पुलिस से कोरोना वायरस की महामारी के दौरान पूछताछ के बारे में चिकित्सा सलाह के अनुरोध के बावजूद पुलिस ने उन्हें नकारते हुए कहा है कि उन्हें इसकी परवाह नहीं और वो कंटेनमेंट इलाके में ही रिपब्लिक टीवी से पूछताछ करेगा।

जाँच के बाद बंद मामले में अर्नब के खिलाफ फिर से CID जाँच के आदेश

रिपब्लिक टीवी द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र के गृह मंत्री ने अर्नब गोस्वामी के खिलाफ CID जाँच के आदेश जारी किए हैं। हैरानी की बात यह है कि यह जाँच एक ऐसे मामले में की जा रही है, जो कि पहले ही अदालत द्वारा जाँच के बाद बंद कर दिया जा चुका है।

इससे पहले, आज ही कोरोना वायरस के संक्रमण के दौरान रिपब्लिक नेटवर्क को पुलिस स्टेशन में पूछताछ के लिए उपस्थित होने के लिए कहा गया था। अर्नब गोस्वामी से 12 घंटे की पूछताछ के बाद यह तीसरी बार की जा रही पूछताछ है। जिससे यह संकेत मिलता है कि महाराष्ट्र सरकार के लिए कोरोना वायरस के संक्रमण से भी बड़ी प्राथमिकता अर्नब गोस्वामी बन चुके हैं।

वहीं, महाराष्ट्र सरकार ने आज ही 53 वर्षीय इंटीरियर डिजाइनर और उसकी माँ की कथित तौर पर टीवी पत्रकार अर्नब गोस्वामी और दो अन्य लोगों द्वारा बकाया राशि का भुगतान नहीं करने के मामले में CID द्वारा फिर से जाँच का आदेश दिया है।

महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने भी एक ट्वीट में कहा है कि उन्होंने इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक की बेटी अदन्या नाइक की मौत के बाद पड़ोसी रायगढ़ जिले की अलीबाग पुलिस ने उस बकाया के भुगतान की जाँच नहीं की, जिसने उसके पिता और दादी को आत्महत्या के लिए बाध्य किया था।

देशमुख ने ट्वीट में लिखा है – “अदन्या नाइक ने मुझसे शिकायत की थी कि अलीबाग पुलिस ने अर्नब गोस्वामी के रिपब्लिक से बकाया भुगतान न करने के बारे में जाँच नहीं की है, जिसने मई 2018 में उसके बिजनेसमैन पिता और दादी को आत्महत्या के लिए उकसाया था।”

इस महीने की शुरुआत में, पुलिस ने रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ गोस्वामी और दो अन्य के खिलाफ आत्महत्या का मामला दर्ज किया था। कॉनकॉर्ड डिज़ाइन्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक अन्वय नाइक द्वारा कथित रूप से लिखे गए सुसाइड नोट में कहा गया था कि उन्हें तीन आरोपितों द्वारा 5.40 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं किए जाने के कारण अपनी जान लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।

इस पर रिपब्लिक टीवी ने आरोप का खंडन किया और कहा कि कुछ समूह उनके खिलाफ ‘एक गलत और दुर्भावनापूर्ण अभियान’ चला रहे हैं और ऐसी दुखद घटना का फायदा उठाकर कंपनी के खिलाफ गलत बयान दे रहे हैं। नाइक द्वारा छोड़े गए एक कथित सुसाइड नोट के आधार पर, पुलिस ने गोस्वामी, फ़िरोज़ शेख और स्मार्टवर्क के नितीश सारडा के ख़िलाफ़ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया था।

रिपब्लिक टीवी ने इन आरोपों से इनकार किया है कि मई 2018 में, अर्नब गोस्वामी के खिलाफ आत्महत्या के मामले में उन्हें अपमानित करने के लिए एक FIR दर्ज की गई थी। दरअसल, तब एक इंटीरियर डिजाइनर ने अलीबाग में अपने बंगले में आत्महत्या कर ली थी।

सोनिया से सवाल के कारण नाराज है महाराष्ट्र सरकार

ज्ञात हो कि हाल ही में महाराष्ट्र के पालघर में भीड़ द्वारा साधुओं की पीट-पीटकर हत्या के मामले पर एक शो के दौरान कॉन्ग्रेस नेता सोनिया गाँधी की चुप्पी पर सवाल पूछने के कारण अर्नब गोस्वामी के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार ने एफआईआर दर्ज तो की ही, साथ में उनके खिलाफ एक नियोजित अभियान चला रही है। बंद हो चुके मामलों की फिरसे जाँच के आदेश इसी बात का संकेत करते हैं।

मॉब लिंचिंग पर सोनिया गॉंधी की चुप्पी को लेकर अर्नब ने कहा था, “सोनिया गाँधी तो खुश हैं। वो इटली में रिपोर्ट भेजेंगी कि देखो, जहाँ पर मैंने सरकार बनाई है, वहाँ पर हिन्दू संतों को मरवा रही हूँ। वहाँ से उन्हें वाहवाही मिलेगी। लोग कहेंगे कि वाह, सोनिया गाँधी ने अच्छा किया। इनलोगों को शर्म आनी चाहिए। क्या उन्हें लगता है कि हिन्दू चुप रहेंगे? आज प्रमोद कृष्णन को बता दिया जाना चाहिए कि क्या हिन्दू चुप रहेंगे? पूरा भारत भी यही पूछ रहा है। बोलने का समय आ गया है।”

इसके बाद कॉन्ग्रेस ने अर्नब गोस्वामी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। उनके खिलाफ कई राज्यों में केस दर्ज करवाया गया, जिसमें से अधिकतर राज्य कॉन्ग्रेस शासित हैं। कॉन्ग्रेसियों ने अर्नब गाेस्वामी पर आराेप लगाया था कि महाराष्ट्र के पालघर जिले में दाे साधुओं समेत तीन की लिचिंग मामले में उन्होंने अपने टीवी चैनल के कार्यक्रम में देश के लोगों को गुमराह किया। धर्म, नस्ल, जन्मस्थान, निवास भाषा के आधार पर नफरत फैलाने की काेशिश की है।

‘चीन, पाक, इस्लामिक जिहादी ताकतें हो या नक्सली कम्युनिस्ट गैंग, सबको एहसास है भारत को अभी न रोक पाए, तो नहीं रोक पाएँगे’

आज सुबह-सुबह एक खबर आई कि अयोध्या में रामलला का भव्य मंदिर निर्माण शुरू हो गया। आज (26 मई, 2020) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल का एक साल पूरा हुआ है। मोदी 2.0 का प्रथम वर्ष पूरा हुआ। क्या शानदार एक साल, शायद स्वतंत्र भारत के इतिहास का सबसे ज्यादा अदभुत और ऐतिहासिक साल।

कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म हुई। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण शुरू हुए। देश के कृषि और आर्थिक क्षेत्र के सबसे बड़े इकोनॉमिक रिफार्म शुरू किए जा रहे हैं। भारत ने पाक अधिकृत जम्मू कश्मीर को पुनः वापस लेने की तरफ निश्चयात्मक कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। आतंकी और देश विरोधी शक्तियों का पूरा नेटवर्क ध्वस्त किया जा रहा है। पूरी दुनिया मे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में एक ‘नई इंडिया ब्रांड’ स्थापित होना शुरू हुआ है। मोदी इस ब्रांड इंडिया के विजिनरी भी हैं और प्रतीक भी।

कोरोना की खबरों के बीच एक ऐतिहासिक फैसला हुआ। किसान को APMC और एसेंशियल कमोडिटी की जंजीरों से आजाद करने का फैसला। 70 साल से अन्नदाता के हाथ पैर बाँध कर खेती करवाई जा रही थी। भारतीय किसानों की असली ताकत अब दुनिया को देखने को मिलेगी। भारतीय सेना आधुनिकतम हथियारों को खरीद रही है। जिसके लिए 15-20 सालों से सेना को इंतजार करवाया जा रहा था। लघु और कुटीर उद्योगों को भारत की आर्थिक प्रगति की रीढ़ के रूप में बनाने के लिए नींव डाली जा रही है।

भारत की संस्कृति और आध्यात्मिक शक्ति को अब सम्मान के साथ दुनिया देख रही है। ब्राजील के राष्ट्रपति जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हैं तो हनुमान जी का उदाहरण देते हैं। भारत अब याचक नहीं दाता की भूमिका में आ रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बराबरी से खड़ा राष्ट्र जिसको खुद पर भरोसा है।

कोरोना से लड़ने के लिए सार्क का नेतृत्व हो या G 20 देशों की रणनीति का संचालन, म्यांमार से आतंकवादियों का सौंपा जाना हो या अमेरिका द्वारा अलकायदा के आतंवादी को भारत को दिया जाना, रशिया से S 400 की डील हो या राफेल पर चमकता ‘ॐ’ का निशान- ये नया भारत है और गर्व से खड़ा है।

भारत एक राष्ट्र के रूप में उस मोड़ पर खड़ा है, जहाँ दुनिया का हर महान राष्ट्र और हर महान सभ्यता कभी ना कभी जरूर पहुँचती है। जब एक राष्ट्र के पास सक्षम दूरदर्शी और साहसी नेता होता हैं, बड़े सपने और उन सपनों को पूरा करने को तैयार करोड़ों देशभक्त नागरिक एक साथ एक यात्रा शुरू करते हैं।

अगले 15 से 20 साल भारत के लिए निर्णायक होंगे। आर्थिक, सामरिक, आध्यात्मिक सुपर पावर की ओर बढ़ता हुआ भारत।पिछले लगभग 1000 साल की जंजीरों को झटक कर पुनः अपने पूरे तेज के साथ मुस्कराती हुई भारत माता, मोदी 2.0 का पहला साल ये बताने के लिए काफी है कि भारत के दुश्मन भारत की इस यात्रा को असफल करने के लिए किसी भी हद्द तक जाने को तैयार हैं।

दुश्मनों में झुँझलाहट हैं। चीन हो या पाकिस्तान, इस्लामिक जेहादी ताकतें हो या नक्सली कम्युनिस्ट गैंग, सबको अहसास है कि भारत को अभी नहीं रोक पाए तो कभी नहीं रोक पाएँगे। झूठ, छल कपट, युद्ध, आंतरिक अस्थिरता सब हथियार चलाए जा रहे हैं।

परन्तु, पीएम मोदी के तेजस्वी नेतृत्व और भारत के करोड़ों नागरिकों के संकल्प के आगे इन सब षड्यंत्रों का ध्वस्त होना सुनिश्चित है। आत्मनिर्भर भारत का जो संकल्प पीएम मोदी ने देश को दिया है, ये उसी प्रकार का ऐतिहासिक संकल्प है, जैसा महात्मा गाँधी ने दिया था। जब उन्होंने “करो या मरो” का आह्वान किया था, या जब मार्टिन लूथर किंग ने “आई हैव ए ड्रीम” का भाषण दिया था या जब चर्चिल ने द्वितीय विश्वयुद्ध में “वी शेल फाइट ऑन द बीचेस” का आह्वान किया था।

एक करिश्माई नेतृत्व का सपनों से भरा, संकल्प शक्ति से पूर्ण आह्वान और पूरा राष्ट्र, पूरा समाज एक साथ एक अद्भुत यात्रा पर चल पड़ता है। इस शानदार एक वर्ष की बधाई, अगले चार साल अद्भुत होंगे। आइए इस यात्रा में उत्साह और संकल्प के साथ बढ़ते रहें।

सोशल मीडिया पर उद्धव ठाकरे के खिलाफ पोस्ट लिखने पर शिव सैनिकों ने दुकानों में की तोड़फोड़, देखें Video

महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के वानी शहर में सीएम उद्धव ठाकरे, एनसीपी प्रमुख शरद पवार और कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के खिलाफ पोस्ट करने के आरोप में दो लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। इसके अलावा शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने इनकी दुकानों में तोड़फोड़ भी की।

जानकारी के मुताबिक दोनों दुकानदारों ने राज्य में कोरोना संक्रमण के बढ़ते आँकड़ों को लेकर उद्धव सरकार के खिलाफ पोस्ट लिखा था। बता दें कि कोरोना के कहर से सबसे अधिक प्रभावित राज्य महाराष्ट्र है और यह संक्रमण रोकने में लगातार विफल नजर आ रही है। राज्य में कोरोना संक्रमित मरीजों का आँकड़ा 50,000 के पार पहुँच गया है। इसको लेकर प्रदेश के लोगों में असंतोष व्याप्त है।

इसी को लेकर वानी ग्रामीण समाचार व्हाट्सएप ग्रुप पर सतीश पिंपेर और फेसबुक पर विवेक पांडे ने उद्धव ठाकरे, शरद पवार और राहुल गाँधी की आलोचना करते हुए पोस्ट अपलोड किया था। हालाँकि, शिवसेना के कार्यकर्ताओं को यह नागवार गुजरा। वो अपने नेताओं के खिलाफ आलोचना को बर्दाश्त नहीं कर पाए और स्थानीय विधायक विश्वास नांदेकर के नेतृत्व में उनकी दुकान पर गए और जमकर उत्पात मचाया।

शिवसैनिक सबसे पहले सतीश पिंपेर की नंदपेरा मार्ग स्थित रासवंती की दुकान पर पहुँचे और तोड़फोड़ की। इसके बाद वो लोग जटाशंकर चौक की तरफ गए, जहाँ उन्होंने विकास पांडे की मोबाइल फोन की दुकान में तोड़फोड़ की।

घटना मंगलवार (मई 26, 2020) की है। इसका एक वीडियो भी सामने आया है। जिसमें देखा जा सकता है कि बड़ी संख्या में शिवसेना के कार्यकर्ता सड़क पर उतरे कुछ पुलिस की मौजूदगी में दुकान में घुसे। इसके बुाद उन्हें दुकान में तोड़-फोड़ करते और उपद्रव मचाते हुए देखा जा सकता है।

दुकान के बाद का दृश्य बेहद ही बर्बरतापूर्ण दृश्य देखा जा सकता है। कथित रूप से शिवसेना के कुछ कार्यकर्ताओं को तोड़ने के लिए कूलर फेंकते हुए भी देखा जा सकता है।

वैसे ये पहली बार नहीं है, जब फेसबुक पर उद्धव सरकार के खिलाफ पोस्ट किए जाने पर उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया हो। इससे पहले विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकर्ता राहुल तिवारी को शिव सैनिकों ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की आलोचना करने वाले पोस्ट के लिए पीटा था। इतनी ही नहीं, उनका सिर भी मुंडवा दिया गया था।

और तो और आदित्य ठाकरे अपनी पार्टी के गुंडों के बचाव में उत्तर आए थे। आदित्य ने पीड़ित राहुल तिवारी को ओछा और नीच ट्रोल करार दिया था। आदित्य ने अपने बयान में कहा था कि राहुल ने मुख्यमंत्री उद्धव के लिए असभ्य भाषा का प्रयोग किया, जबकि वो सीएए से उपजे असंतोष के बीच राज्य में शांति-व्यवस्था कायम करने में लगे हुए हैं। उन्होंने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं की गुंडई को गुस्से में दी गई त्वरित प्रतिक्रिया बताया। आदित्य ने साथ ही बिना नाम लिए कहा कि राहुल जैसे धमकीबाज और गालीबाज लोगों को जवाब देना हमारा काम नहीं होना चाहिए।

महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की BJP की माँग के पक्ष में ज्यादा मतदान के बाद लोकसत्ता ने डिलीट किया ट्विटर पोल

महाराष्ट्र में कोरोना का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है और राज्य सरकार इस पर काबू पाने में पूरी तरह से असफल दिख रही है। ऐसे में राज्य में मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने माँग की थी कि कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण पाने के लिए राष्ट्रपति शासन लगाया जाए।

बीजेपी की इस माँग को लेकर मराठी समाचार आउटलेट, लोकसत्ता ने अपने आधिकारिक ट्विटर पेज पर एक ट्विटर पोल चलाया, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि महाराष्ट्र राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की भाजपा की माँग उचित थी या नहीं। ट्विटर पोल में सवाल किया गया था, “क्या महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने की भाजपा की माँग उचित है?” इसका जवाब ‘हाँ’ या नहीं में देना था।

हालाँकि, जब लोगों ने भाजपा की माँग के पक्ष में अधिकतर वोट दिया तो तुरंत ही लोकसत्ता ने ट्वीट को डिलीट कर दिया। 24 घंटे तक चलने वाला पोल महज 5 घंटों में ही डिलीट कर दिया गया। ऐसा इसलिए क्योंकि लोगों ने महाराष्ट्र में महागठबंधन की सरकार को खारिज करते हुए राष्ट्रपति शासन के पक्ष में 51 प्रतिशत वोट डाले। 5 घंटे के भीतर ही 8000 से अधिक वोट डाले गए थे।

लोकसत्ता के हटाए गए पोल पर लोकप्रिय लेखिका शेफाली वैद्य ने गौर किया। लोकसत्ता द्वारा पोल डिलीट किए जाने के बाद शेफाली वैद्य ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन के संबंध में देश में लोगों की वर्तमान मनोदशा को समझने के लिए अपने ट्विटर पेज पर वही पोल चलाया।

अब तक कुल 8,373 लोगों ने मतदान किया है, जिसमें से 85 प्रतिशत लोगों ने भाजपा के राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की माँग के पक्ष में मतदान किया।

महाराष्ट्र के पूर्व सीएम और भाजपा नेता नारायण राणे ने सोमवार (मई 25, 2020) को राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से मुलाकात कर उनसे राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की माँग की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के पास अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने का कोई उपाय नहीं है।

राणे ने कहा ठाकरे सरकार कोरोना संकट को संभाल नहीं सकती है। इस सरकार के पास क्षमता नहीं है। यह सरकार कोरोना से निपटने में विफल रही है। इसलिए, यहाँ राष्ट्रपति शासन लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार लोगों के जीवन को बचाने में सक्षम नहीं है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री सरकार चलाने में सक्षम नहीं हैं। नारायण राणे ने कहा कि कोरोना राज्य में गहरा संकट पैदा कर रहा है।

शादी का झाँसा देकर युवती से सामूहिक दुष्कर्म: अहबाब, परवेज, हनीस, हुसैन और वसी के खिलाफ मामला दर्ज

हरिद्वार के सिडकुल इलाके में किराए पर रह रही एक युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है। पीड़िता के शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

पीड़ित युवती ने आरोप लगाया है कि फोटो और वीडियो क्लिप से छेड़छाड़ करने के का हवाला देकर उसे डराया-धमकाया गया, ब्लैकमेल किया गया और फिर ड्रग देकर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया।

जानकारी के मुताबिक पीड़िता ने वारदात के लगभग 20 दिन बाद सोमवार (मई 25, 2020) को शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने आरोपित कॉन्ट्रैक्टर अहबाब अली, उसके भाई परवेज और तीन दोस्तों के खिलाफ दुष्कर्म और हत्या की धमकी देने का मुकदमा दर्ज कर मामले की छानबीन शुरू कर दी है।

पुलिस ने बताया कि पीड़िता एक औद्योगिक कंपनी में काम करती थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात आरोपित कॉन्ट्रैक्टर अहबाब अली से हुई। उसने युवती से कहा कि कॉन्ट्रैक्टर है और उसकी जल्द ही नौकरी लगवा सकता है। इस पर युवती ने अपना मोबाइल नंबर युवक को दे दिया। 

हरिद्वार के पुलिस अधीक्षक कमलेश उपाध्याय ने इस बाबत जानकारी देते हुए बताया कि मुलाकात के बाद पीड़िता और अहबाब के बीच बात-चीत होने लगी। इसी बीच कॉन्ट्रैक्टर ने युवती का पहली कंपनी से काम छुड़ा दिया और अपना बिजनेस पार्टनर बनाने का लालच देकर युवती से कुछ रकम भी ले ली।

युवती ने आरोप लगाया कि अहबाब अली उसे शादी का झाँसा देकर बिजनेस टूर के नाम पर देहरादून और ऋषिकेश ले गया। जहाँ अलग-अलग होटलों में नशीला पदार्थ खिलाकर बेसुध हालात में उससे शारीरिक संबंध बनाकर अश्लील वीडियो और फोटो भी ले ली।

पीड़िता ने पुलिस को बताया कि कुछ दिन बाद जब उसने आरोपित अहबाब पर शादी करने का दबाव डाला तो वह लॉकडाउन में बिजनेस में नुकसान की बात कहकर शादी से मुकर गया। 

आरोप है कि होटल में बनाई गई अश्लील वीडियो और फोटो अहबाब ने अपने भाई परवेज को दे दी। फिर परवेज ने वीडियो से ब्लैकमेल कर कई बार जबरदस्ती उसके साथ दुष्कर्म किया। युवती ने आरोप लगाया कि 20 दिन पहले परवेज ने उसे कलियर थाना क्षेत्र में बुलाया जहाँ उसने अपने तीन साथियों के साथ मिलकर उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।

एसओ प्रशांत बहुगुणा ने बताया कि आरोपित अहबाब अली, उसके भाई परवेज, दोस्त हनीस, हुसैन और वसी के खिलाफ युवती के साथ शादी का झाँसा देकर शारीरिक शोषण, जान से मारने की धमकी देने सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। पुलिस अधीक्षक कमलेश उपाध्याय ने अहबाब के भाई का नाम परवेज बताया है, मगर कुछ मीडिया रिपोर्ट में उसका नाम शहजाद बताया जा रहा है।

झारखंड: आम चुनने गई बच्ची का ईदगर, शाहनवाज, एकरामुल शेख ने किया गैंगरेप; 1 गिरफ्तार

झारखण्ड, साहिबगंज जिले के राजमहल थाना क्षेत्र के नवाबडेरी में 3 मुस्लिम युवकों ने सोमवार (मई 25, 2020) रात एक नाबालिग हिन्दू बच्ची के साथ सामूहिक बलात्कार किया, जिसके बाद माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। पुलिस ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया कि तीन में से एक आरोपित एकरामुल उर्फ सोनू को गिरफ्तार कर लिया है और बाकी की तलाश की जा रही है।

प्राप्त सूचनाओं के अनुसार इस सामूहिक दुष्कर्म की घटना में शामिल एक आरोपित सेना से बताया जा रहा है, जो कि अभी पश्चिम बंगाल में कार्यरत है। पुलिस को आरोपित के घर से जो दुपहिया बुलेट बरामद हुई है, उस पर भी डिफेंस का चिन्ह बना हुआ है।

पीड़िता के पिता के बयान पर राजमहल थाने में सामूहिक दुष्कर्म मामले में ईदगर शेख (पिता स्व नईम खान), शाहनवाज शेख (पिता ताहिर मियाँ) और एकरामुल शेख उर्फ सोनू (पिता इस्लाम शेख) के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की गई है।

सामूहिक बलात्कार की इस घटना को लेकर राजमहल थाना कांड संख्या 206/20 दर्ज की गई है। थाना प्रभारी चिरंजीत प्रसाद ने कहा कि किसी भी सूरत में आरोपित बख्शे नहीं जाएँगे और जल्द ही उन सबकी गिरफ्तारी होगी।

नाबालिग पीड़िता के पिता ने बयान में कहा, “शाम चार बजे जब उनकी बेटी बगीचे में आम चुगने गई थी, उसी समय आरोपितों में से एक ने उसके मुँह पर कपड़ा लपेटकर उसे बाँस की एक झाड़ी में लेकर गए और वहाँ उसके साथ तीनों आरोपितों ने सामूहिक बलात्कार किया।”

पिता का बयान आप यहाँ वीडियो में सुन सकते हैं:

पुलिस ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया कि एक आरोपित 18 वर्षीय एकरामुल उर्फ सोनू को गिरफ्तार कर लिया गया है जबकि घटना में शामिल अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।

राजमहल थाना क्षेत्र के नौगच्छी नवाबडेरी में कल ही सोमवार शाम एक नाबालिक लड़की के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म के मामले की गंभीरता को देखते हुए आरक्षी अधीक्षक अनुरंजन किस्पोट्टा के दिशा निर्देश पर प्रशिक्षु महिला एसआई सुषमा कुमारी ने साहिबगंज से अनुमंडलीय अस्पताल राजमहल पहुँचकर पीड़िता का बयान लिया।

पीड़िता ने अपने बयान में बताया कि सोमवार शाम लगभग 4:00 बजे जब हल्की आँधी आई थी उस समय वह अपने घर के पीछे बागीचे में आम चुनने के लिए चली गई। वहीं आम के बागीचे में पीछे से एकरामुल ने उन्हें पकड़ लिया और शोर करने पर चाकू से गला काट देने की धमकी दी।

जान से मार देने की धमकी के बाद आरोपित उसे पकड़ कर बगल की ही एक झाड़ी में ले जाकर पटक दिया। पीड़ित युवती ने पुलिस को बताया कि आरोपित लड़के के साथ वहाँ उसी के समुदाय के और लड़के भी मौजूद थे।

पीड़िता ने बयान देते हुए बताया कि जब एकरामुल शेख ने उस के साथ बलात्कार किया, तब बाकी 2 ने उसे पकड़कर रखा था। उसके बाद बारी-बारी से उन्होंने भी उसके साथ बलात्कार किया। एकरामुल (पिता इस्लाम शेख) के अलावा वहाँ अन्य 2 आरोपित – ईदगर शेख (पिता स्व नईम खान) और शाहनवाज ( शेख पिता ताहिर मियाँ) भी मौजूद थे। सामूहिक दुष्कर्म के बाद तीनों युवक वहाँ से मोटरसाइकिल से फरार हो गए।

शोर करने के बाद तीनों ही आरोपित वहाँ से फरार हो गए। लेकिन, रात्रि में खेत से काम कर लौटने के बाद घटना की सूचना अपने माता-पिता को दी। पीड़िता ने पुलिस से कहा कि वह आरोपितों को देखने के बाद उस अज्ञात लड़के की पहचान कर सकती है।

राजमहल थाना क्षेत्र में इस नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने मंगलवार (मई 26, 2020) की सुबह राजमहल मंगलहाट नेशनल हाइवे- 80, नौगच्छी के समीप जाम लगाकर कर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने बीच सड़क पर टायर जलाकर घटना में शामिल सभी आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग की।

घटनास्थल पर एसपी अनुरंजन किस्पोट्टा उपायुक्त बरुन रंजन, एसडीओ करण सत्यार्थी, डीएसपी कृष्ण कुमार महतो, राजमहल थाना प्रभारी चिरंजीत प्रसाद,राधानगर थाना प्रभारी सहित पुलिस बल के जवानों ने स्थिति को नियंत्रित किया।

घटना में शामिल एक आरोपित को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, जबकि बाकी अभी फरार हैं। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है।

‘अभी लड़ाई कोरोना के खिलाफ है, हमें सरकार को उखाड़ फेंकने में कोई दिलचस्पी नहीं, यह अंतर्विरोधों से गिर जाएगा’

महाराष्ट्र के दिग्गज नेताओं के राज्यपाल के राजभवन दौरे के बाद राज्य में एक बार फिर से राजनीतिक हलचल बढ़ गई है। इस बीच भाजपा नेता और महाराष्ट्र के पूर्व सीएम देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार (मई 26, 2020) को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा कि राज्य में गलत प्रचार किया जा रहा है और केंद्र सरकार के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है। केंद्र सरकार की छवि धूमिल की जा रही है। फडणवीस ने कहा कि कोरोना की इस स्थिति में केंद्र अलग-अलग तरीकों से मदद कर रहा है। केंद्र ने राहत पैकेज का किया ऐलान किया है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान फडणवीस ने केंद्र सरकार द्वारा महाराष्ट्र को प्रदान की गई आर्थिक सहायता की राशि के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि केंद्र गरीबों को सस्ते खाद्यान्न की आपूर्ति कर रहा है। केंद्र ने 4,592 करोड़ रुपए के खाद्यान्न प्रदान किए। केंद्र ने श्रमिकों के शिविरों के लिए भुगतान किया है। रेलवे श्रमिकों के लिए लगभग 300 करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है। फडणवीस ने कहा कि केंद्र ने राज्य को 28,104 करोड़ रुपए की सहायता प्रदान की है।

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र को केंद्र से कुल 2 लाख 70 हजार करोड़ मिल रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि केंद्र पीपीई किट, मास्क, राशन, प्रवासी श्रमिकों के किराए का खर्च आदि देकर विभिन्न तरीकों से सहायता प्रदान कर रहा है। केंद्र सरकार ने राज्य को 10 लाख पीपीई किट प्रदान किए। लगभग 16 लाख N95 मास्क दिए। इसके अलावा, चिकित्सा उपकरणों की खरीद के लिए राज्य को 448 करोड़ रुपए प्रदान किए गए।

Evaluation of taxation के तहत केंद्र सरकार द्वारा एकत्र किए गए धन में से 41 प्रतिशत राज्यों को जाता है। प्रत्येक राज्य का अपना हिस्सा है। महाराष्ट्र का करों का हिस्सा 1148 करोड़ रुपए था। लेकिन केंद्र ने 5,648 करोड़ रुपए दिए। इसका मतलब है कि 4,500 करोड़ रुपए अधिक दिए गए। इसलिए ये नहीं कहा जा सकता कि पैसे के अभाव में मजदूरों की मदद नहीं की गई। कर्नाटक, गुजरात और कॉन्ग्रेस शासित राज्य छत्तीसगढ़ ने भी मदद की  है।

फडणवीस ने कहा, “राज्य सरकार को केंद्र द्वारा प्रदान की जाने वाली आर्थिक सहायता खर्च करना बाकी है। मैं वास्तव में यह नहीं समझ पा रहा हूँ कि राज्य सरकार की प्राथमिकता क्या है, आज राज्य को मुखर नेतृत्व की आवश्यकता है, मुझे उम्मीद है कि उद्धव जी साहसिक निर्णय लेंगे।”

राज्य में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम 35,000 करोड़ रुपए तक का ऋण ले सकते हैं। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री किसान योजना के तहत 1,726 करोड़ रुपए प्रदान किए। जनधन योजना के तहत, अब तक महिलाओं के खातों में 1308 करोड़ रुपए जमा किए गए हैं। इसके अलावा, अन्य 650 करोड़ रुपए एकत्र किए जा रहे हैं।

विकलांगों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए 16 करोड़ रुपए और 3800 करोड़ रुपए सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में जमा किए गए हैं। केंद्र सरकार ने उज्ज्वला योजना के तहत मुफ्त गैस सिलेंडर देने का फैसला किया।

आगे उन्होंने कहा, “वर्तमान में लड़ाई कोरोना के खिलाफ है। हमें सरकार को उखाड़ फेंकने में कोई दिलचस्पी नहीं है। यह अपने अंतर्विरोधों के माध्यम से खुद गिर जाएगा।”

वर्तमान में ऐसी खबरें कोरोना की लड़ाई से ध्यान हटाने के लिए दी जा रही हैं। सरकार में कोई समन्वय नहीं है। यदि हम इस अवधि के दौरान किए गए कार्यों को देखते हैं, तो यह देखना आसान है कि इस सरकार की प्राथमिकता क्या है?

इसके साथ ही उन्होंने राहुल गाँधी पर निशाना साधते हुए कहा, “राहुल गाँधी का आज का बयान बहुत गंभीर है। यह एक ऐसा बयान है जो अपनी जिम्मेदारी से भागता है। उनके बयान से कॉन्ग्रेस पार्टी मुख्यमंत्री और शिवसेना पर दोष मढ़ने की कोशिश कर रही है।”

दरअसल, राहुल गाँधी ने मंगलवार को प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में साफ किया कि महाराष्‍ट्र सरकार को कॉन्ग्रेस सपोर्ट कर रही है, मगर वहाँ के बड़े फैसलों में पार्टी की भूमिका नहीं है। यह कहकर राहुल ने ‘महाविकास अघाडी’ (MVA) की एकजुटता को लेकर अटकलों को हवा दे दी। राहुल ने कहा, “हम महाराष्‍ट्र में सरकार को सपोर्ट कर रहे हैं मगर वहाँ के डिसिजन मेकर नहीं हैं। हम पंजाब, छत्‍तीसगढ़, राजस्‍थान, पुदुचेरी में डिसिजन मेकर हैं। सरकार चलाने और सरकार का सपोर्ट करने में फर्क होता है।”

83 विदेशी तबलीगी जमातियों पर कसा शिकंजा, साकेत कोर्ट में 20 चार्जशीट दाखिल, 14 और दाखिल करने की तैयारी

निजामुद्दीन मरकज केस में दिल्ली पुलिस ने विदेशी जमातियों के खिलाफ शिकंजा कस दिया है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मंगलवार (मई 26, 2020) को साकेत कोर्ट में तबलीगी जमात के 83 विदेशी सदस्यों के खिलाफ 20 चार्जशीट दाखिल किया। यह सभी चार्जशीट विदेशी अधिनियम एक्ट के तहत दाखिल किए गए।

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि मामले में 20 चार्जशीट के अलावा 14 चार्जशीट और दाखिल किए जाएँगे। इस तरह इस हफ्ते कुल 34 चार्जशीट दाखिल किए जाएँगे।

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि जिन देशों के नागरिकों के खिलाफ भी चार्जशीट कोर्ट में पेश की गई हैं उसमें सऊदी अरब, चीन, अमेरिका, यूक्रेन, फिलीपींस, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, अफगानिस्तान, रूस, मोरक्को, फ्रांस, इजिप्ट, मलेशिया, ट्यूनीशिया और जॉर्डन के नागरिक शामिल हैं। यह सारे नागरिक निजामुद्दीन मरकज की तबलीगी जमात में शामिल होने के लिए भारत आए थे।

चार्जशीट में इनके खिलाफ 5 धाराओं के तहत चार्ज किया गया है। दरअसल, जब तक कोई आरोप पत्र न हो तब तक विदेशियों को देश में नहीं रोका जा सकता। इसीलिए दिल्ली पुलिस ने उन पर और शिकंजा कस दिया है।

बताया जा रहा है कि चार्जशीट में मरकज ट्रस्ट मैनेजमेंट का नाम भी शामिल है। दिल्ली पुलिस तमाम सबूत इकट्ठा करने के बाद चार्जशीट तैयार की है। विदेशी सदस्यों के खिलाफ वीजा नियमों के उल्लंघन के तहत केस दर्ज किया गया है।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि मुख्य चार्जशीट तबलीगी जमात के मुखिया मौलान साद और उनके सहयोगियों के खिलाफ है। विदेशी जमातियों के खिलाफ पूरक आरोप पत्र में पुलिस ने उन पर वीजा नियमों के उल्लंघन समेत कई गंभीर आरोप लगाए हैं।

उन पर टूरिस्ट वीजा पर भारत आने और मजहबी गतिविधियों में शामिल होकर वीजा शर्तों के उल्लंघन का आरोप है। इसके अलावा उन पर धारा 144 के उल्लंघन का भी आरोप है। उनके ऊपर धारा 188 के खिलाफ भी आरोप जोड़े गए हैं। महामारी ऐक्ट की धारा 217 के खिलाफ भी आरोप जोड़े गए हैं।

इन सभी लोगों से पूछताछ की गई था और पूछताछ के दौरान इनमें से कई लोगों ने माना कि इन लोगों ने जो जानकारी सरकार को दी थी वह सही नहीं थी।

गौरतलब है कि हाल ही में दिल्ली पुलिस ने 700 विदेशी जमातियों के डॉक्यूमेंट सीज किए थे। सभी के पासपोर्ट समेत कई दस्तावेज क्राइम ब्रांच ने सीज किया गया था, ताकि ये देश छोड़कर भाग नहीं सके।

तबलीगी जमात से जुड़े हजारों लोगों ने हाल ही में अपना कोरोना क्वारंटाइन पूरा किया है। दिल्ली सरकार ने पिछले हफ्ते जिलाधिकारियों को यह निर्देश दिया था कि वे तबलीगी जमात के 4000 सदस्यों को क्वारंटाइन सेंटरों से छोड़ दें, यानी सबको घर जाने की इजाजत मिल गई थी। इसमें भारत के अलग-अलग राज्यों के जमातियों को घर जाने की छूट थी।

उल्लेखनीय है कि तबलीगी जमात का निजामुद्दीन स्थित मरकज कोरोना संक्रमण का हॉटस्पॉट बनकर उभरा था। यहॉं हुए कार्यक्रम में भारत सहित कई देशों के जमाती शामिल हुए थे। मार्च में कई देशों के हजारों तबलीगी जमात के सदस्यों ने यहाँ आयोजित मजहबी कार्यक्रम में भाग लिया था, जिसमें कोरोना वायरस से जुड़े चेतावनियों और सावधानियों का खुलेआम उल्लंघन किया गया था।

इस मामले में जाँच में जुटी क्राइम ब्रांच ने मौलाना साद के बेटे को अपने कार्यालय में बुलाकर करीब 2 घंटे पूछताछ की थी। पूछताछ के दौरान उन्होंने साद के बेटे से 20 लोगों की जानकारी माँगी जो दिल्ली के मरकज में न केवल शामिल थे, बल्कि मरकज़ प्रबंधन टीम का हिस्सा थे।