प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राज्यों और निजी सेक्टर से अपील की है कि वह बड़े कॉन्सर्ट आयोजित करने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करें। उन्होंने हाल ही में मुंबई और अहमदाबाद में आयोजित बड़े कॉन्सर्ट की तारीफ़ की है। पीएम मोदी ने यह बातें ओडिशा में आयोजित एक कार्यक्रम में कही है।
पीएम मोदी ने उत्कर्ष ओडिशा कॉन्क्लेव में कहा, “जिस देश में म्यूजिक, डांस और स्टोरीटेलिंग की इतनी समृद्ध विरासत और युवाओं का इतना बड़ा पूल है, यह कॉन्सर्ट का बहुत बड़ा ग्राहक है। यहाँ कॉन्सर्ट इकॉनमी की बहुत संभावनाएँ हैं। पिछले 10 वर्षों लाइव इवेंट और चलन और माँग तेजी से बढ़ी है।
पीएम मोदी ने इसके बाद मुंबई और अहमदाबाद में हाल ही में आयोजित कोल्डप्ले बैंड के कॉन्सर्ट का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, “पिछले कुछ दिनों में आपने मुंबई और अहमदाबाद में हुए कोल्डप्ले कॉन्सर्ट की शानदार तस्वीरें देखी होंगी। ये इस बात का प्रमाण है कि लाइव कॉन्सर्ट के लिए भारत में कितना स्कोप है।”
उन्होंने आगे कहा, “दुनिया के बड़े-बड़े आर्टिस्ट भारत की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। कॉन्सर्ट इकॉनमी से रोजगार भी पैदा होता है और टूरिज्म भी बढ़ता है। मेरा राज्यों और निजी क्षेत्र से आग्रह है कि वह कॉन्सर्ट इकॉनमी के लिए जरूरी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर फोकस करें।”
पीएम मोदी ने कहा कि इवेंट मैनेजमेंट, सिक्युरिटी और आर्टिस्ट की ग्रूमिंग आदि में कई संभावनाएँ बन रही हैं। पीएम मोदी ने बोलते हुए WAVES समिट की चर्चा भी की। इसका आयोजन गोवा में फरवरी, 2025 में होगी।
गौरतलब है कि कोल्डप्ले एक ब्रिटिश रॉकबैंड है जिसके रविवार (27 जनवरी, 2025) को अहमदाबाद में हुए कॉन्सर्ट में 1.34 लाख लोग शामिल हुए थे। यह 21वीं शताब्दी में किसी भी कॉन्सर्ट की भीड़ का रिकॉर्ड है। अहमदाबाद की व्यवस्थाओं को सोशल मीडिया पर काफी तारीफ़ भी मिली थी। मुंबई कॉन्सर्ट में भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे।
पाकिस्तान सीमा से लगे गुजरात के गाँवों में जनसांख्यिकी तेजी से बदल रही है। कच्छ के रण में बसे गाँव हिन्दुओं से खाली हो रहे हैं। इन गाँवों में मुस्लिम परिवार लगातार रह रहे हैं। कई गाँव ऐसे हैं, जहाँ एक भी हिन्दू अब नहीं रहता। तमाम गाँवों से हिन्दू तेजी से पलायन कर रहे हैं। इससे सुरक्षा चिंताएँ भी पैदा हो गई हैं।
दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात के कच्छ जिले में पाकिस्तान सीमा से मात्र कुछ ही किलोमीटर दूर स्थित 6 गाँव हिन्दूविहीन हो चुके हैं। यह बात इन गाँवों की वोटर लिस्ट से भी सामने आई है। 17 गाँव ऐसे हैं, जहाँ हिन्दू आबादी बहुत कम हो चुकी हैं। भास्कर ने यह रिपोर्ट 23 गाँव में की है।
रिपोर्ट के अनुसार, कच्छ में मोटा दिनारा गाँव में मात्र 1 ही हिन्दू परिवार अब रहता है। यहाँ पहले 30 हिन्दू परिवार रहा करते थे लेकिन धीमे-धीमे सारे ही पलायन कर चुके हैं। यह सारे परिवार एक 500 साल पुराने मंदिर के पास रहा करते थे। यह परिवार यहाँ से पलायन करके आसपास के उन गाँवों में गए हैं जहाँ पर मूलभूत सुविधाएँ अच्छी हैं।
यह परिवार तब वापस आते हैं मंदिर में कोई बड़ा कार्यक्रम होता है। इनमें से तमाम हिन्दू 2001 में आए भूकम्प के बाद विस्थापित हुए थे। उन्हें इस गाँव से दूर घर बनाकर दिया गया था। वह वहीं अब अपने जीवन की गुजर बसर करते हैं। जो घर इस भूकम्प में टूटे थे, उनकी भी कई लोगों ने कोई मरम्मत नहीं करवाई।
यहीं के शेह गाँव में मात्र 8 हिन्दू वोटर हैं। जबकि यहाँ मुस्लिम वोटर 152 हैं। यहाँ से अच्छी अस्पताल और स्कूल सुविधाएँ दूर हैं, इसके चलते परिवार बाहर गए हैं। अच्छा अस्पताल भी भुज में हैं। भुज यहाँ से 150 किलोमीटर दूर है। ऐसे में लोग पलायन को मजबूर हैं।
रिपोर्ट बताती है कि सुठारी गाँव में हिन्दुओं की आबादी कुछ वर्ष पहले तक 2500 हुआ करती थी, यह घट कर अब 1000 के आसपास आ चुकी है। गाँव से जहाँ हिन्दू बाहर गए हैं तो वहीं कुछ मुस्लिम बाहर से आकर बसने लगे हैं। लखपत और कनेर जैसे गाँवों से लोग सूरत और मुंबई काम करने जाने लगे हैं।
यहाँ के हिन्दू संगठन लगातार पलायन का मुद्दा उठा रहे हैं। हिन्दू संगठन इन इलाकों में ड्रग तस्करी और देशविरोधी गतिविधियाँ होते रहने का आरोप लगाते रहे हैं। कुछ लोगों का आरोप है कि मुस्लिमों ने गाँवों में सरकारी समेत तमाम जमीन भी कब्जाई है। इस संबंध में पीएम मोदी को पत्र भी लिखा जा चुका है।
हिन्दू संगठनों की माँग है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और यहाँ की जनसांख्यिकी को देखते हुए पलायन रोका जाना चाहिए।
चीन के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफ़ॉर्म DeepSeek के चलते अमेरिकी बाजारों में तबाही आई है। AI के चलते हजारों करोड़ बनाने वाली कम्पनियों के शेयर DeepSeek के आने के चलते गोता लगा रहे हैं। बाकी AI मॉडल्स की तरह DeepSeek भी लोगों के सवालों के जवाब देता है। लेकिन इस पर भी चीन ने एक तगड़ा कंट्रोल लगाया है। DeepSeek उन सवालों के जवाब नहीं देता है, जिन को चीन लगातार दबाता आया है। तिआनमेन नरसंहार से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक यह खामोशी साध लेता है।
क्या है DeepSeek?
DeepSeek एक चीनी कम्पनी है। यह AI के क्षेत्र में काम करती है। DeepSeek ने भी OpenAI और Perplexity AI जैसी कम्पनियों की तरह ही अपना AI मॉडल तैयार किया है। यह कम्पनी लियांग वेंगफेंग ने बनाई है। DeepSeek ने अपना नया मॉडल R1 भी हाल ही में लॉन्च किया है।
इसका कहना है कि जो जवाब OpenAI बिना कुछ सोचे हुए देती है, वही जवाब DeepSeek AI पहले सोचती और उस पर अपनी तर्कक्षमता लगा कर देती है। DeepSeek ने हाल ही में अपना एप और चैटबॉट लॉन्च किया है। यह तेजी से पॉपुलर हो रहा है।
अमेरिकी बाजारों में DeepSeek से क्यों मचा कोहराम?
अमेरिका समेत दुनिया भर के टेक्नोलॉजी से सम्बन्धित शेयर बीते DeepSeek के चलते गोता लगा रहे हैं। इसका सबसे बड़ा असर सेमीकंडक्टर बनाने वाली कम्पनी Nvidia पर पड़ा है। यह सेमीकंडक्टर AI मॉडल बनाने के लिए लगते हैं। इसके चलते Nvidia की मार्केट वैल्यू 593 बिलियन डॉलर (₹4.8 लाख करोड़) गिर चुकी है।
इसके अलावा माइक्रोसॉफ्ट और गूगल जैसी बड़ी कम्पनियों के शेयर भी गिरे। इसके पीछे निवेशकों का इन कम्पनियों में डिगा हुआ भरोसा है। निवेशकों को लगता है कि अब Nvidia की उतनी हैसियत नहीं रह जाएगी। दावा है कि DeepSeek में लगाई जाने वाली लागत भी OpenAI और बाकी कम्पनियों से कहीं कम है।
DeepSeek पर विवाद क्यों?
DeepSeek AI लॉन्च होने और जनता के बीच पॉपुलर होने के साथ ही विवादों में भी घिर गई है। जहाँ बाकी AI मॉडल उन सभी प्रश्नों का जवाब देते हैं, जिनके विषय में जानकारी इंटरनेट पर उपलब्ध है तो वहीं DeepSeek कुछ विषयों में जानकारी नहीं देता या फिर जवाब देकर गायब कर देता है। यह अधिकांश विषय ऐसे हैं जिन पर चीन भी नहीं बोलता या फिर कतराता है।
DeepSeek में चीन के दखल का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह अरुणाचल प्रदेश तक के विषय में नहीं बताता। जहाँ यह विश्व के बाकी हिस्सों की विशेषताएँ, वहाँ कैसे पहुँचे और बाकी जानकारी कुछ सेकंड के भीतर दे देता है, वहीं अरुणाचल प्रदेश के विषय में पूछने पर यह जवाब देता है, “सॉरी, यह मरे स्कोप से बाहर है। किसी और विषय पर बात करते हैं।”
यही जवाबा DeepSeek का लद्दाख पर है। गौरतलब है कि अरुणाचल को चीन अपना हिस्सा बताता है और अपने नक़्शे में शामिल कर इस पर दावा ठोंकता रहता है। इसी तरह DeepSeek चीन की भारत में घुसपैठ पर भी चुप्पी साध लेता है। वह यह तक नहीं बताता कि कितने बार भारत ने चीन पर घुसपैठ का आरोप लगाया है।
DeepSeek तिब्बती धर्मगुरु, दलाई लामा पर भी नहीं बोलता। यह उन्हें महान व्यक्तित्व मानने वाले प्रश्न पर भी रटा रटाया जवाब देता है। यहाँ तक कि वह उनकी शिक्षाओं को भी बताने से इनकार कर देता है। DeepSeek अगर कुछ चीजों का जवाब देता भी है तो कुछ ही सेकंड के भीतर उन्हें मिटा देता है।
सिर्फ अंतरराष्ट्रीय विवादों पर ही नहीं बल्कि DeepSeek चीनी नीतियों और बोलने की स्वतंत्रता पर भी जवाब नहीं देता। जब अमेरिकी AI ChatGPT से पूछा जाए कि क्या अमेरिकी एजेंसियाँ खबरों में दखल देती हैं और मीडिया को रोकती हैं, तो यह स्पष्ट जवाब देता है कि ऐसा हुआ है।
वहीं DeepSeek इसका जवाब भी देने से मना कर देता है।
कई मौकों पर यह जवाब देकर मिटा भी देता है। ऐसा ही इसे दलाई लामा पर पूछे गए प्रश्न के संबंध में किया।
How is DeepSeek working?
Is it providing accurate information to people through AI or is it filtering the answers through Chinese-controlled policies?
See in this video (after 1:20) how a question is quickly deleted after answering it: pic.twitter.com/OCBdOE2k3z
DeepSeek के AI के इन जवाब के चलते अब इस पर प्रश्न उठ रहे हैं। लोगों का कयास है कि इस AI पर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) का पूरा नियंत्रण है और यह उसी की नीतियों अपर चल रहा है। भविष्य में अमेरिका जैसे देश इसमें चीनी सरकार के दखल के चलते इस पर बैन भी लगा सकते हैं।
हिन्दुओं के खिलाफ लगातार घृणा फ़ैलाने वाली राणा अयूब के खिलाफ FIR दर्ज हुई है। यह FIR हिन्दू देवी-देवताओं के अपमान और भारत विरोधी माहौल बनाने के लिए दर्ज की गई है। FIR दर्ज करने का आदेश दिल्ली की एक अदालत ने दिया था, इसके बाद दिल्ली पुलिस ने यह कार्रवाई की।
दिल्ली की साकेत कोर्ट ने राणा अयूब के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश सोमवार (27 जनवरी, 2025) को दिया है। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट में वकील अमिता सचदेव की एक याचिका पर दिया गया।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “तथ्यों को देखते हुए, शिकायत में संज्ञेय अपराध की बात सामने आई है और इसके लिए FIR दर्ज करना आवश्यक है। धारा 156(3) CRPC के तहत यह आवेदन मंजूर किया जाता है। SHO साइबर पुलिस स्टेशन, दक्षिण को निर्देश दिया जाता है कि शिकायत को FIR में बदल दें और मामले की निष्पक्ष जाँच करें।”
अमिता सचदेव का कहना था कि वह 2 महीने से विषय में कार्रवाई की माँग कर रही हैं लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। इसके बाद वह अदालत पहुँची थी। कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली पुलिस ने साइबर थाने में राणा अयूब के खिलाफ अलग-अलग धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
अमिता सचदेव ने इस मामले में नवम्बर, 2024 में राणा अयूब के खिलाफ साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करवाई थी। अमिता सचदेव का आरोप है कि राणा अयूब ने लगातार अपने एक्स अकाउंट से भारतीय सेना और हिन्दू धर्म के खिलाफ लगातार अपमानजनक पोस्ट किए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि अयूब के ट्वीट के चलते देश में नफरत का माहौल पनपता है।
राणा अयूब लगातार माता सीता, रामायण और महाभारत को लेकर अपमानजनक ट्वीट करती आई है। वह भारतीय सेना का अपमान भी करती आई हैं। ऐसे कई पोस्ट पर लोगो ने सोशल मीडिया पर आपत्ति भी जताई है। इससे पहले भी राणा अयूब के खिलाफ कई FIR हो चुकी है।
Rana Ayyub is a repeat offender with history of targeting Hindus to disturb communal harmony & even attacking Indian Army.
I hope necessary action will be taken against her and she will be investigated properly. There are high chances she is in contact with enemy foreign… pic.twitter.com/y8kQrZ2hZD
राणा अयूब के खिलाफ कोविड के नाम पर चंदा इकट्ठा कर उसे अपनी मौज मस्ती में लगाने का आरोप भी है। इस मामले में उसकी ₹1.7 करोड़ की सम्पत्ति भी ED ने जब्त की थी।
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और AAP संयोजक केजरीवाल ने हरियाणा पर दिल्ली आने वाले पानी को जहरीला बनाने का आरोप लगाया था। दिल्ली जल बोर्ड ने ही उनके इन आरोपों को नकार दिया है। DJB ने कहा है कि केजरीवाल का बयान से तथ्यों से परे और भ्रामक है।
DJB ने कहा है कि ऐसे आरोपों से दिल्ली शहरियों में डर पैदा होता है। वहीं चुनाव आयोग ने इस मामले में हरियाणा सरकार से जवाब माँगा है। वहीं हरियाणा सरकार इस मामले में अब केजरीवाल पर मानहानि का केस करेगी।
दिल्ली जल बोर्ड की मुखिया शिल्पा शिंदे ने सोमवार (27 जनवरी, 2025) को एक पत्र जारी करके केजरीवाल के बयान का खंडन किया है। शिल्पा शिंदे ने कहा, “ये बयान तथ्यात्मक रूप से गलत, निराधार और भ्रामक हैं। सच तो यह है कि DJB नियमित रूप से आने वाले पानी की गुणवत्ता की निगरानी करता है और विभिन्न मापदंडों के आधार पर आपूर्ति को नियंत्रित करता है।”
DJB ने बताया, “हर सर्दियों के मौसम में, अक्टूबर से फरवरी के दौरान यमुना नदी में अमोनिया बढ़ जाती है। DJB वाटर ट्रीटमेंट प्लांट 1 PPM तक अमोनिया का ट्रीटमेंट करने के लिए डिज़ाइन किया गया है… दिल्ली सब ब्रांच से मिले अमोनिया वाले पानी को सही करके 2 से 2.5 PPM तक के अमोनिया का भी जल उपचार संयंत्रों में उपचार किया जा रहा है।”
पत्र में कहा गया है कि अमोनिया का स्तर वजीराबाद नहर में जल्द ही घट जाएगा जिसके बाद सप्लाई सही हो जाएगी। जल बोर्ड ने बताया है कि ऐसा पहले भी लम्बे समय से होता है। केजरीवाल के इस बयान को DJB ने दिल्ली के निवासियों में डर पैदा करने वाला बताया है। DJB ने इस मामले को दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना को भेजा है।
वहीं इस मामले में AAP प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक के बाद चुनाव आयोग ने इन आरोपों पर हरियाणा सरकार से जवाब माँगा है। यह जवाब उसे मंगलवार (28 जनवरी, 2025) तक देना होगा। वहीं हरियाणा सरकार ने अब केजरीवाल के खिलाफ मानहानि का मुकदमा ठोंकने का ऐलान किया है।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि वह इस मामले में चुनाव आयोग से शिकायत करेंगे और मानहानि का मुकदमा करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल ने उस मिट्टी का अपमान किया जिसमें वह स्वयं पैदा हुए हैं। उन्होंने कहा कि झूठे आरोप लगा भाग जाना केजरीवाल की आदत है।
केजरीवाल ने सोमवार (27 जनवरी, 2025) को आरोप लगाया था कि हरियाणा की भाजपा सरकार दिल्ली आने वाले पानी में जहर मिलाकर भेज रही है। उन्होंने कहा था कि यदि यह पानी दिल्ली में होता तो बड़े स्तर पर लोग मरते और ‘नरसंहार‘ होता।
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर दी गई है। उत्तराखंड ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे नए युग का शुभारंभ बताया है। सीएम धामी ने UCC जुड़ी सेवाएँ लेने के लिए एक पोर्टल भी लॉन्च किया है।
देहरादून में सोमवार (27 जनवरी, 2025) को सीएम पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में UCC पोर्टल लॉन्च करके इसके लागू होने की घोषणा की है। उन्होंने बताया है कि उत्तराखंड में भाजपा ने 2022 के चुनाव में यह वादा किया था और पूरा भी कर दिया।
जो कहा, वो किया !
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के कुशल नेतृत्व एवं केंद्रीय गृह मंत्री श्री @AmitShah जी के मार्गदर्शन में हमारी सरकार ने आज उत्तराखण्ड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर दिया है। आज का दिन उत्तराखण्डवासियों के साथ ही समस्त देशवासियों के लिए भी… pic.twitter.com/VmcNSUVsiC
पुष्कर सिंह धामी ने इस मौके पर कहा, “UCC किसी धर्म और पंथ के खिलाफ नहीं है। बार-बार दावा होता है कि किसी को निशाने पर लिया जा रहा है। ऐसा नहीं है। यह समाज से कुप्रथाओं को मिटा कर समानता और समरसता स्थापित करने का कानूनी प्रयास है। इससे केवल कुप्रथाओं को खत्म किया गया है।”
CM धामी ने इसे कानूनी मामले में भेदभाव को अंत करने का उपाय बताया है। उन्होंने कहा कि इससे महिला सशक्तिकरण भी होगा और बालविवाह, तीन तलाक और हलाला जैसी कुप्रथाओं पर रोक लगाई जा सकेगी। उन्होंने UCC सेवाओं के लिए तैयार किए गए पोर्टल ucc.uk.gov.in का भी शुभारम्भ किया है।
इस पोर्टल पर राज्यवासी विवाह, तलाक, लिव इन रिलेशनशिप, इसे तोड़ने और विरासत जैसी सेवाओं का फायदा ले पाएँगे। इसके लिए राज्य कर्मचारियों को ट्रेनिंग भी दी गई है और विशेष अधिकारी तैनात किए गए हैं। उत्तराखंड में UCC को फरवरी, 2024 में विधानसभा में मंजूरी मिली थी।
उत्तराखंड में UCC लागू होने के बाद लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को ऑनलाइन इसका रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। इसे खत्म करने की भी सूचना देनी होगी। यदि ऐसा नहीं होता तो जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा विवाह का भी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा।
UCC आने के बाद मामा-मौसी आदि की बेटी से निकाह समेत 4 निकाह पर भी रोक लग जाएगी। UCC के तहत राज्य में अब बेटियों को भी सम्पत्ति का भी हिस्सा मिलेगा। UCC में तलाक को लेकर भी नियम बनाए गए हैं। हलाला पर भी रोक लगेगी। राज्य में लागू किए गए कई प्रावधानों से जनजातीय समुदायों को छूट दी गई है।
वक्फ संशोधन बिल को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) से मंजूरी मिल गई है। लोकसभा और राज्यसभा सांसदों से मिलाकर बनाई गई इस समिति ने महीनों तक इस पर चर्चा और कई पक्ष सुनने के बाद इसे मंजूरी दी है। नए वक्फ अधिनियम में इस JPC ने 14 खंड में बदलाव किए हैं।
नई दिल्ली में सोमवार (27 जनवरी, 2025) को वक्फ बिल के अंतिम ड्राफ्ट को JPC ने बहुमत से स्वीकार किया है। इस बिल के मूल स्वरुप में 14 बदलाव, JPC में शामिल NDA सांसदों ने प्रस्तावित किए थे। इन्हें JPC की बैठक में मंजूरी मिल गई। यह 14 खंड में बदलाव बिल के अलग-अलग नियमों को लेकर किए गए हैं।
वहीं विपक्ष ने भी इस वक्फ बिल में कई बदलाव प्रस्तावित किए थे लेकिन उन्हें मतदान में मंजूरी हासिल नहीं हुई। समिति में 16 सदस्य NDA जबकि 10 बाकी दलों के लोग शामिल थे। ऐसे में मतदान के दौरान विपक्ष द्वारा सुझाए गए बदलाव 16:10 के बहुमत से गिर गए।
विपक्ष के सदस्यों ने बिल के सभी 44 खंड में संशोधन के प्रस्ताव दिए थे। इनकी संख्या सैकड़ों में थी। हालाँकि, वह सफल नहीं हुए। NDA द्वारा किए गए बदलावों में वक्फ ट्रिब्यूनल में सदस्यों की संख्या और सरकारी अधिकारियों की वक्फ संपत्तियों को लेकर अधिकार से जुड़े हुए थे।
वक्फ संशोधन अधिनियम के लिए बनाई गई JPC के मुखिया और सांसद जगदम्बिका पाल ने कहा कि बदलाव को लेकर अपनाई गई पद्धति पूरी तरीके से लोकतांत्रिक थी। उन्होंने कहा कि इससे ज्यादा लोकतांत्रिक तरीका कुछ नहीं हो सकता था।
विपक्ष के सांसद और वक्फ बिल का विरोध करने वाले नेता कल्याण बनर्जी ने पूरी प्रक्रिया को ही गड़बड़ करार दिया। उन्होंने दावा किया कि सब कुछ पहले से तय था और सरकार की मर्जी से ही काम हुआ है। उन्होंने कहा कि विपक्षी सांसदों को बोलने का भी मौका नहीं दिया गया।
इससे पहले कई बार हुई वक्फ की बैठकों में विपक्ष के सांसदों ने हंगामा भी काटा। कल्याण बनर्जी ने एक बार ग्लास तोड़ हाथ चोटिल कर लिया था। वक्फ बिल को अब संभवतः संसद के बजट सत्र में पेश किया जा सकता है। बजट सत्र 31 जनवरी, 2025 से लेकर 13 फरवरी, 2025 तक चलेगा। इसका मसौदा पेश किए जाने से पहले जनता के सामने भी आएगा।
बांग्लादेश में हिन्दुओं का निशाना बनाने का सिलसिला जारी है। उन पर हमलों से लेकर अपहरण जसी घटनाएँ लगातार हो रही हैं। अब बांग्लादेश में तीन हिन्दू अपहरण का निशाना बने हैं। इनका अपहरण करने वाले इस्लामी कट्टरपंथी पार्टी BNP से जुड़े लोग हैं।
यह घटना बांग्लादेश के चटगाँव में हुई है। शनिवार (25 जनवरी) को इस्लामी कट्टरपंथियों यहाँ हिलव्यू रिहायशी इलाके से तीनों हिन्दू का अपरहण किया। पीड़ितों की पहचान रुबेल रुद्र (42), केशब मित्रा दास (43) और समीर दास (45) के रूप में हुई है। समीर और रुबेल धोबी का काम करते हैं,जबकि केशब एक हिंदू मंदिर में पुजारी हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, चार इस्लामिक कट्टरपंथियों ने इस अपहरण की घटना को अंजाम दिया और पीड़ितों के परिवारों से फिरौती की माँग की। उनकी पहचान बशीर अहमद राणा, मोहम्मद जिहाद, मोहम्मद आरिफ और मोहम्मद इमोन उर्फ सद्दाम के रूप में हुई है।
चारों आरोपितों ने शनिवार (25 जनवरी, 2025) को क्रमशः रुबेल रुद्र और समीर दास को उनकी दुकान से उठाया। इसके बाद शाम को उन्होंने मंदिर के पुजारी केशव मित्रा दास का अपहरण कर लिया। पीड़ितों को एक निर्माणाधीन इमारत की चौथी मंजिल पर ले जाया गया और पीटा गया।
इन अपहरणकर्ताओं ने तीनों हिन्दुओं को छोड़ने के लिए फिरौती के तौर पर 9 लाख टका की भी माँग की। मामले की जानकारी इसी दौरान पुलिस को दी गई जो हरकत में आई। चटगाँव पुलिस ने रात में इस इमारत पर छापा मारा और तीनों हिंदुओं को बचा लिया।
पुलिस ने इन चारों इस्लामी कट्टरपंथियों को भी गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से 12 धारदार हथियार और 5 मोटरसाइकिलें भी बरामद की हैं। चारों आरोपित बीएनपी की छात्र शाखा छात्र दल से जुड़े हैं। बशीर अहमद राणा, मोहम्मद जिहाद, मोहम्मद आरिफ और मोहम्मद इमोन, आतंकवादी सैफुल इस्लाम उर्फ बर्मा सैफुल के अनुयायी हैं।
ये सभी हिस्ट्रीशीटर हैं और इनके खिलाफ कई पुलिस थानों में चोरी, डकैती, डकैती और वसूली के कई मामले पहले से दर्ज हैं।
दिल्ली HC ने हाल ही में एक ऐतिहासिक फैसला देते हुए कहा कि पुरुष भी महिलाओं की तरह क्रूरता और हिंसा से समान सुरक्षा के हकदार हैं। यह फैसला उन अनगिनत पुरुषों की तकलीफों को मान्यता देता है, जिनकी आवाजें सदियों से दबाई जाती रही हैं।
हमारे समाज में पुरुषों को हमेशा ताकत और सहनशीलता का प्रतीक माना गया है। उन्हें सिखाया जाता है कि रोना कमजोरी है और दर्द को सह लेना मर्दानगी की निशानी। लेकिन, जो समाज उनके आंसुओं को कमजोरी समझता है, वह यह भूल जाता है कि भावनात्मक, मानसिक और शारीरिक अत्याचारों का दर्द पुरुष भी महसूस करते हैं।
पुरुष आयोग की अध्यक्ष बरखा त्रेहन ने इस फैसले को क्रांतिकारी बताते हुए कहा, “यह केवल एक कानूनी निर्णय नहीं, बल्कि समाज की जड़ों में बैठे अन्याय के खिलाफ एक आंदोलन की शुरुआत है। हर आत्महत्या करने वाले पुरुष के पीछे एक अनसुनी चीख होती है, जिसे अब अनदेखा नहीं किया जा सकता।”
भारत में झूठे आरोपों के कारण न केवल पुरुषों की गरिमा, बल्कि उनकी जिंदगियां भी दांव पर लग जाती हैं। क्या उन बेटों, पतियों और पिता के बलिदानों को यूँ ही भुला दिया जाएगा, जो समाज और कानून की कठोरता के शिकार हुए?
यह फैसला पुरुषों के लिए न्याय की दिशा में पहला बड़ा कदम है। यह उन सभी लोगों को चेतावनी है जो कानून का दुरुपयोग कर पुरुषों को फँसाने की साजिश करते हैं। समाज को अब यह स्वीकार करना होगा कि समानता का मतलब केवल महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा नहीं, बल्कि पुरुषों के दर्द और उनके अधिकारों को भी पहचानना है।
इस फैसले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हर इंसान का दर्द मायने रखता है—चाहे वह महिला हो या पुरुष। अब समय आ गया है कि समाज अपनी सोच बदले और यह समझे कि न्याय और सुरक्षा पर हर किसी का हक है।
छत्तीसगढ़ में हिन्दू संगठनों ने दो अलग-अलग शहरों में चल रहे ईसाई धर्मांतरण रैकेट पकड़े। हिन्दू संगठनों ने राजधानी रायपुर और बलरामपुर में प्रार्थना के नाम पर ईसाई धर्मांतरण के रैकेट का भंडाफोड़ किया। मामले में हिन्दू संगठनों ने प्रदर्शन भी किया। दोनों घटनाओं में 2 पादरियों समेत 7 लोग गिरफ्तार हुए हैं।
रायपुर में पंडरी थाना क्षेत्र के मितान विहार कॉलोनी में जबरन धर्मांतरण की जानकारी बजरंग दल समेत हिंदू संगठनों को मिली थी। इसके बाद वह उस घर में पहुँच गए जहाँ धर्मांतरण गतिविधियाँ करवाए जाने का आरोप लगाया गया था। यहाँ हिन्दू संगठनों ने जय श्री राम के नारे लगाए। इसके बाद मौके पर कुछ पुलिसकर्मी भी पहुँचे।
रायपुर ACP लखन पटेल इसके बाद कई थानों की फ़ोर्स के साथ मौके पहुँचे। यहाँ उस घर से दस लोगों को निकाला गया, इनमें पुरुष, महिलाएँ, बच्चे और एक नाबालिग शामिल थे। पुलिस ने कीर्ति कुमार केशवानी, महारथी बंजारे और जीवन लाल साहू नाम के तीन लोगों को हिरासत में लिया और बाद में जेल भेज दिया।
इस मामले में पुलिस ने छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 4 के तहत FIR दर्ज की है। हिंदू संगठनों का आरोप है कि इलाके में लंबे समय से धर्मांतरण हो रहा है। उन्होंने पादरी पर प्रार्थना की आड़ में कमजोर लोगों को प्रभावित करने का आरोप भी लगाया है।
वहीं धर्मांतरण की दूसरी ऐसी ही घटना बलरामपुर जिले के वड्रफनगर ब्लॉक के सरुआत गाँव में हुई। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि एक पादरी और उसके साथी ग्रामीणों को बीमारियों के इलाज और पैसे का वादा करके लालच दे रहे थे। इस मामले में उन्होंने पुलिस को भी सूचना दी।
पुलिस ने इसके बाद छापा मारकर धर्मांतरण वाले घर से एक पादरी सहित 4 लोगों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने इन के पास से बड़ी संख्या में बाइबिल, प्रचार सामग्री और राष्ट्रीय ईसाई संघ का एक पहचान पत्र भी जब्त किया। स्थानीय लोगों के अनुसार, पादरी ने लोगों को इकट्ठा करने के लिए “हीलिंग मीटिंग” आयोजित की थी। और
पुलिस ने कहा है कि दोनों मामलों में जाँच चल रही है। इन दो घटनाओं के साथ छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण का मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया है। पिछले कुछ सालों में, राज्य में धर्मांतरण के बड़े पैमाने पर मामले देखे गए हैं, इनमें मिशनरियों ने आदिवासियों सहित पिछड़े लोगों को लालच देकर धर्मान्तरित करवाया है।