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5 पाकिस्तानी सैनिक ढेर, चौकी भी तबाह: सीजफायर उल्लंघन का भारत ने दिया जवाब

सीजफायर उल्लंघन से पाकिस्तान बाज नहीं आ रहा है। जवाबी कार्रवाई में उसके पॉंच सैनिक मारे गए हैं और एक चौकी तबाह हो गई। दो भारतीय जवान वीरगति को प्राप्त हो गए।

बारामूला जिला के उरी सेक्टर में शुक्रवार को बेवजह फायरिंग का भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तान को मुँहतोड़ जवाब दिया। हाजीपीर के निचले हिस्से में स्थित एक पाकिस्तानी चौकी को तबाह कर दिया। उसके पाँच सैनिकों के मारे जाने की भी सूचना है। सूत्रों के अनुसार क्षतिग्रस्त चौकी से पाकिस्तानी जवान अपने साथियों को निकालते देखे गए। वे घायल थे अथवा मृत इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। डॉन ने 34 साल के लांसनायक अली बाज के मारे जाने की पुष्टि की है।

कोरोना महामारी और रमज़ान के बावजूद पाकिस्तान लगातार संघर्षविराम का उल्लंघन कर रहा है। उसने कश्मीर के उरी सेक्टर में भारतीय सैन्य और नागरिक ठिकानों पर भारी गोलाबारी की। फायरिंग में भारत के चार सैनिक घायल हो गए। इन्हें तुरंत ही पास के मिलिट्री हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। शुक्रवार देर शाम इलाज के दौरान दो सैनिकों ने दम तोड़ दिया। इनके नाम हवलदार गोकर्ण सिंह और नायक शंकर एसपी है। जिन दो सैनिकों का इलाज चल रहा है उनके नाम हवलदार नारायण सिंह और नायक प्रदीप भट्ट हैं।

आम नागरिक भी हुए घायल

अधिकारियों के मुताबिक दोपहर करीब साढ़े तीन बजे गुलाम कश्मीर में हाजीपीर सेक्टर में पाक सैनिकों ने अपनी चौकियों से चुरुंडा, हथलंगा, सिलीकोट, बटगरान, शहूरा, नांबला और गरकोट को निशाना बनाते हुए गोलाबारी की। चरुंडा गाँव में कई मकान क्षतिग्रस्त हो गए। इसी गाँव में बशीर अहमद की 12 वर्षीय बेटी शहनाजा बानो व चार वर्षीय पुत्र तौसीफ अहमद और ताहिरा बानो पत्नी लियाकत अली जख्मी हो गई।

उरी के पास मलिक मोहल्ले में मुबशिर मलिक और आफताब अहमद के मकान को क्षति पहुँची है। नियंत्रण रेखा से सटे क्षेत्रों में लोग सामुदायिक सुरक्षा बंकरों में चले गए हैं। कुछ को प्रशासन द्वारा निकटवर्ती सुरक्षित जगहों पर पहुँचाया गया है।

पाकिस्तान की ओर से पिछले कुछ दिनों से जम्मू संभाग में राजौरी व पुंछ तथा कश्मीर संभाग में बारामुला, कुपवाड़ा व बांदीपोरा जिले में एलओसी पर लगातार गोलाबारी की जा रही है। गोलाबारी की आड़ में पाकिस्तान ज्यादा से ज्यादा आतंकियों को घुसपैठ कराने की फिराक में है।

मुरैना के शाहरुख और इमरान ने इलाज के नाम पर बनवाया पास, आगरा से ले आए बेगम, महिला निकली कोरोना+

मध्य प्रदेश के मुरैना के इस्लामपुरा में रहने वाले इमरान कुरैशी और शाहरुख कुरैशी ने इलाज के बहाने SDM से कार का पास लिया और आगरा जाकर दोनों भाई निकाह कर बेगम ले आए। इसका खुलासा 30 अप्रैल को मुरैना में एक महिला के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद हुआ। पुलिस ने इमरान और शाहरुख के साथ ही कोरोना पॉजिटिव महिला के पति समेत पाँच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

जानकारी के मुताबिक इमरान और शाहरुख का 23 अप्रैल को आगरा में मथुरा रोड पर निकाह होना था। दोनों ने निकाह की बात छिपाते हुए इलाज के नाम पर आगरा जाने की अनुमति एसडीएम से ली। दोनों 23 अप्रैल को आगरा गए और निकाह कर बीवियों को ले मुरैना आ गए।

लौटने के बाद दोनों ने पास गाड़ी मालिक पवन राठौर के पास ही छोड़ दिया। फिर पवन राठौर उसी गाड़ी से गोलू राठौर और आनंद राठौर को लेकर आगरा गया। इसके बाद आनंद राठौर अपनी पत्नी को आगरा से लेकर आया। जाँच के दौरान महिला के संदिग्ध पाए जाने पर 27 अप्रैल को सभी को आइसोलेट कर दिया गया। 30 अप्रैल को महिला की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव मिली। इसके चलते प्रशासन में हडकंप मच गया है। वार्ड में स्वास्थ्य कर्मचारियों से सर्वे करवाई जा रही है।

अनुमति पर उठ रहे सवाल

शहर से बाहर दिखाने के लिए डॉक्टर की अनुमति तभी मिल रही है जब जिला अस्पताल से डॉक्टर लिख कर दें। इस मामले में आगरा में मरीज को दिखाने के लिए पर्चा बनाने वाले डॉक्टर भी कार्रवाई के दायरे में हैं। बॉर्डर पर पुलिस का सख्त पहरा है। लेकिन किसी ने यह चेक नहीं किया कि गाड़ी पर अनुमति दो लोगों की है और उसमें चार लोग बैठकर आ रहे हैं। वहीं गाड़ी दूसरे दिन फिर से नाके से निकल रही है उसमें वापसी में फिर से संख्या अधिक रही, लेकिन किसी ने चेक नहीं किया। अगर बारीकी से चेक किया गया जाता तो मामला पकड़ा जाता।

अरब का धौंस दिखाने वाले जफरुल इस्लाम ने माँगी माफी: देशद्रोह का मामला दर्ज, जाकिर नाइक को बताया था हीरो

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गुरुवार (अप्रैल 30, 2020) को दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जफरुल इस्लाम खान के खिलाफ देशद्रोह के तहत मामला दर्ज किया। इस्लाम ने 28 अप्रैल को अपने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भड़काऊ बयान दिया था।

दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के संयुक्त आयुक्त नीरज ठाकुर ने बताया कि जफरुल इस्लाम के खिलाफ आईपीसी की धारा 124 ए और 153 ए के तहत FIR दर्ज की गई है। दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष की ओर से इस पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। उनका कहना है, “मैंने एफआईआर नहीं देखा है। जब मैं इसे देखूँगा या फिर इसके बारे में मुझे पता चलेगा, तभी कुछ टिप्पणी करूँगा।”

बता दें कि यह FIR वसंत कुंज के रहने वाले एक व्यक्ति की शिकायत पर दर्ज की गई है। सफदरजंग एनक्लेव के सहायक पुलिस आयुक्त के जरिए यह शिकायत लोधी कॉलोनी स्थित आतंकरोधी दल के स्पेशल सेल ऑफिस में पहुँची। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 28 अप्रैल को दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष जफरुल इस्लाम खान ने ट्विटर और फेसबुक पर एक सोशल मीडिया पोस्ट किया जो कि भड़काऊ है और इसका मकसद सौहार्द्र बिगाड़ना और समाज में भेदभाव को पैदा करना है।

जफरुल इस्लाम खान ने माँगी माफी

इससे पहले जफरुल इस्लाम खान ने 28 अप्रैल के अपने बयान को लेकर माफी माँगी है। उन्होंने बयान जारी करते हुए कहा, “मेरा इरादा गलत नहीं था।” उन्होंने कहा, “28 अप्रैल, 2020 को मेरे द्वारा जारी किए गए ट्वीट में उत्तर-पूर्वी जिले की हिंसा के संदर्भ में कुवैत को भारतीय मुस्लिमों के उत्पीड़न पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद दिया गया, कुछ लोगों को इससे पीड़ा हुई, जो कभी भी मेरा उद्देश्य नहीं था।”

इस्लाम ने आगे कहा, “मुझे महसूस हुआ कि जिस समय पूरा देश मेडिकल इमरजेंसी का सामना कर रहा है, उस समय मेरा ये ट्वीट असंवेदनशील था, मैं उन सभी से माफी माँगता हूँ, जिनकी भावनाएँ आहत हुईं।” उन्होंने कहा, “मैंने मीडिया के एक हिस्से को गंभीरता से लिया है जिसने मेरे ट्वीट के कंटेंट को गलत तरीके से पेश किया और मुझे उन चीजों के लिए जिम्मेदार ठहराया जो मैंने कभी नहीं कहा।” उन्होंने कहा कि इन न्यूज़ चैनल को वह लीगल नोटिस भी भिजवाएँगे। 

क्या है पूरा मामला?

28 अप्रैल को जफरुल इस्लाम ने ट्वीट कर कहा था कि कट्टर हिन्दुओं को शुक्र मनाना चाहिए कि भारत के समुदाय विशेष ने अरब जगत से कट्टर हिन्दुओं द्वारा हो रहे ‘घृणा के दुष्प्रचार, लिंचिंग और दंगों’ को लेकर कोई शिकायत नहीं की है और जिस दिन ऐसा हो जाएगा, उस दिन अरब के लोग एक आँधी लेकर आएँगे, एक तूफ़ान खड़ा कर देंगे।

खान ने पोस्ट में शाह वलीहुल्ला देहलवी, अबू हस्सान नदवी, बहुदुद्दीन खान और ज़ाकिर नाइक को हीरो की तरह पेश किया था। बता दें कि मलेशिया में रह रहे इस्लामी प्रचारक ज़ाकिर नाइक को वापस लाने के लिए भारत सरकार प्रयत्न कर रही है और उसके ख़िलाफ़ मनी लॉन्ड्रिंग से लेकर आतंकियों को भड़काने तक के आरोप हैं। 

विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने कहा था कि जफरुल इस्लाम के खिलाफ देश भर में FIR दर्ज करवाएगी। विहिप के प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा था कि देश के कोने-कोने में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी ताकि एमएफ हुसैन की तरह इस्लाम को भारत में सिर छुपाने की जगह न मिले। इससे पहले इस विवादित पोस्ट को लेकर हिंदू सेना ने उनके ख़िलाफ़ दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी।

2 महीने से लापता साजिद हुसैन की लाश नदी ​में मिली, पाकिस्तानी सेना के निशाने पर थे बलूच एक्टिविस्ट

पिछले 2 महीने से लापता पाकिस्तान के निर्वासित पत्रकार साजिद हुसैन (Sajid Hussain) की लाश स्वीडन के उप्साला (Uppsala) शहर की फाइरिस नदी में मिला है। यह सूचना स्वीडन पुलिस ने जारी की है। साजिद हुसैन बलूचिस्तान में पाकिस्तान की ओर से किए जा रहे मानवाधिकार उल्लंघनों पर बेबाकी से लिखते थे। वे पाकिस्तान सरकार की ज्यादतियों के खिलाफ लगातार आवाज उठाते रहते थे और उन्होंने स्वीडन में शरण ले रखी थी।

साजिद हुसैन पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के मूल निवासी थे और वहाँ सरकार की ओर से होने वाली ज्यादतियों के खिलाफ आवाज उठाते थे। साजिद हुसैन की हत्या में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के शामिल होने का शक जताया जा रहा है। साजिद हुसैन की मौत की खबर पहले बलूचिस्तान टाइम्स द्वारा पब्लिश की गई जिस न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकार द्वारा कन्फर्म किया गया।

स्टॉकहोम से लगभग 60 किलोमीटर उत्तर में उप्साला में साजिद हुसैन एक प्रोफेसर के तौर पर अंशकालिक सेवाएँ दे रहे थे। वह बलूचिस्तान टाइम्स के मुख्य संपादक भी थे। साजिद हुसैन ने एक ऑनलाइन मैगजीन शुरू की थी जिसमें वे नशा, तस्करी और जबरन लापता करने जैसे अपराधों और बलूचों के उत्पीड़न जैसे मुद्दों पर प्रमुखता से लिखते थे।

साजिद ने 2012 में ही पाकिस्तान छोड़ दिया था। इसके बाद वह ओमान, यूएई, युगांडा जैसे देशों से होते हुए स्वीडन में 2017 से रह रहे थे। पाकिस्तान छोड़ने के पीछे कारण यह था कि वह लगातार पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी आईएसआई के निशाने पर थे। साजिद को आखिरी बार स्टॉकहोम से उप्साला के लिए ट्रेन से जाते हुए देखा गया था। 

बलूचिस्तान (HRCB) की मानवाधिकार परिषद के अनुसार, “हुसैन स्टॉकहोम में रह रहे थे और अपने काम और पढ़ाई की वजह से उन्होंने 2 मार्च को उप्साला में निजी छात्र आवास में जाने का फैसला किया। उप्साला पहुँचने के बाद वह दोपहर 2 बजे तक अपने दोस्तों के संपर्क में रहे, उसके बाद उसका फोन बंद हो गया, जिस कारण वह अपने परिवार और दोस्तों के सम्पर्क में नहीं थे।”

साजिद हुसैन के रहस्यमय ढंग से गायब होने के बाद, उनके शुभचिंतकों द्वारा उनके ठिकाने की पहचान के लिए एक सोशल मीडिया अभियान चलाया गया था। कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट (सीपीजे), रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) जैसे समूहों ने स्वीडिश अधिकारियों से आग्रह किया कि वे उनका पता लगाएँ। RSF के बयान में विदेशों में रहने वाले पत्रकारों को निशाना बनाने में पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों की भागीदारी पर भी प्रकाश डाला गया था।

गोधरा में कंटेनमेंट जोन सील करने पहुँची पुलिस पर पथराव, असम की मस्जिद में सामूहिक नमाज रुकवाने पर हमला

लॉकडाउन के बीच पुलिस पर हमले का सिलसिला जारी है। गुजरात के गोधरा में कंटेनमेंट जोन सील करने पहुॅंची पुलिस पर पथराव किया गया। वहीं असम की एक मस्जिद में पुलिस ने जब लोगों को सामूहिक रूप से नमाज अदा करने से रोका तो उन्होंने हमला कर दिया। हमले में पॉंच पुलिसकर्मी घायल हो गए, जबकि गोधरा में एक अधिकारी के घायल होने की सूचना है।

जानकारी के मुताबिक असम के लखीमपुर जिले के दक्खिन पंडोवा गाँव की एक मस्जिद में गुरुवार रात को कुछ लोग लॉकडाउन का उल्लंघन कर नमाज अदा करने के लिए एकत्र हो गए। जानकारी मिलने पर नाओबीचा पुलिस चौकी के प्रभारी बिस्वजीत नाथ एक पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुँचे।

पुलिस ने मस्जिद के अंदर इमाम सहित 12 लोगों को मौके पर पाया। पुलिस ने सभी को लॉकडाउन का हवाला देते हुए इकट्ठा न होने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की बात कही। पुलिस अधिकारी के मुताबिक मस्जिद में पहुँचने से पहले इलाके में खुल रहे एक बाजार को पुलिस की टीम ने तत्काल प्रभाव से बंद करा दिया। इसके बाद जैसे ही पुलिस की टीम मस्जिद से निकली उस पर पथराव शुरू हो गया। इसमें ग्राम प्रधान सहित चार पुलिसकर्मी घायल हो गए। पथराव में पुलिस का वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गया।

इसके बाद गाँव में भारी पुलिस तैनात कर दी गई है। वहीं पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मस्जिद के इमाम सहित 12 लोगों के खिलाफ लखीमपुर पुलिस स्टेशन में प्राथमिकी दर्ज की है। साथ ही पुलिस अब मामले की जाँच में जुट गई है। बताया जा रहा है कि पुलिस को मस्जिद में नमाजियों के जुटने की जानकारी गाँव के प्रधान ने ही दी थी।

लखीमपुर के पुलिस अधीक्षक राजवीर ने पीटीआइ से कहा, “ऐसे समय में जब पूरा राज्य लॉकडाउन मानदंडों का पालन कर रहा है, ऐसी घटना अवांछित है और हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं। हम दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे।” एक अन्य अधिकारी ने कहा, “ग्राम प्रधान अब्दुल जलील फ़ारशी और ग्राम रक्षा दल ने उन्हें मस्जिद का दौरा न करने के लिए कई बार कहा और उनसे घरों में नमाज़ अदा करने को कहा। लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी और उन्हें अपमानित करने के साथ-साथ धमकी भी दी गई।”

स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक असम में कोरोना से एक की मौत है। अब तक राज्य में संक्रमण के 42 मामले सामने आए हैं। 29 लोग अस्पतालों से ठीक होकर अपने घरों को जा चुके हैं।

वहीं गुजरात के गोधरा के पंचमहल में पुलिस और स्थानीय लोगों के बीच उस समय झड़प हो गई जब पुलिस कंटेनमेंट जोन इलाके को सील करने पहुँची थी। इस दौरान स्थानीय लोगों ने पुलिस पर जमकर पथराव किया। हालात काबू करने के लिए पुलिस को आँसू गैस का प्रयोग करना पड़ा। पथराव में पुलिस निरीक्षक एमपी पांड्या घायल हो गए, उनके सिर में हल्की चोट आई है।

AAP विधायक विशेष रवि और उनके छोटे भाई कोरोना पॉजिटिव, संपर्क में आए लोगों की तलाश में जुटा प्रशासन

दिल्ली में सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के विधायक विशेष रवि और उनके छोटे भाई कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इसके बाद दिल्ली सरकार के साथ स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। रिपोर्ट आने के तत्काल बाद विधायक और उनके भाई को आइसोलेट कर दिया गया।

जानकारी के मुताबिक करोलबाग से विधायक विशेष रवि और उनके छोटे भाई की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है। इस बात की पुष्टि विधायक विशेष रवि ने खुद की है। साथ ही उन्होंने खुद को परिवार के साथ होम क्वारंटाइन कर लिया है। बुधवार को उनका सैंपल लिया गया था, जिसकी शुक्रवार को रिपोर्ट आई।

इसकी जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम उन लोगों की तलाश में जुट गई है, जो पिछले दिनों में विधायक या उनके भाई के संपर्क में आए थे। विधायक के कार्यालय में काम करने वाले कुछ कार्यकर्ताओं और कर्मचारियों को होम क्वारंटाइन की सलाह दी गई है। वहीं स्वास्थ्य विभाग की टीम विधायक कार्यालय के साथ इलाके को सैनेटाइज करने में जुट गई है।

बताया जा रहा है कि विधायक कार्यालय की ओर से लॉकडाउन के दौरान क्षेत्र में राशन वितरण किया गया था। आशंका जताई जा रही है कि राशन वितरण के कार्यों के निरीक्षण या कार्यकर्ताओं के संपर्क में आने से विधायक और उनके भाई को कोरोना का संक्रमण हुआ है। आपतो बता दें कि करोलबाग से विशेष रवि लगातार तीसरी बार चुनाव जीते हैं।

दिल्ली में किसी विधायक को कोरोना संक्रमित होने का यह पहला मामला है। इससे पहले दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की एक पार्षद को कोरोना पॉजिटिव पाया गया था।

आपको बता दें कि दिल्ली में गुरुवार को कोरोना के 76 नए मामले सामने आए थे। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में अब तक कोरोना से मरने वालों की संख्या 59, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 3500 के पार पहुँच गई है। राहत की बात यह कि अब तक 1094 कोरोना संक्रमित मरीज ठीक होकर घर जा चुके हैं।

गौरतलब है कि देश में लगातार बढ़ते कोरोना मरीजों की संख्या से चिंतित केन्द्र सरकार ने लॉकडाउन की अवधि का दो सप्ताह के लिए बढ़ा दिया है। अब देश में 17 मई तक लॉकडाउन जारी रहेगा।

शरजील इमाम की याचिका पर SC का नोटिस; न्यूजलॉन्ड्री का उस्मानी भी अब उसी राह पर

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को JNU के छात्र और देशद्रोह के आरोपित शरजील इमाम की याचिका पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने इस संबंध में दिल्ली सरकार से जवाब माँगा है। अब आगे इस मामले में दस दिन बाद सुनवाई होगी। 

बता दें, वर्तमान में गुवाहटी की जेल में बंद शरजील इमाम ने कोर्ट से अपने ख़िलाफ़ दर्ज सारे केसों को एक साथ जोड़ने की माँग की थी। इसके लिए उसके वकील दवे ने कोर्ट में अर्नब गोस्वामी के मामले का हवाला दिया। सुनवाई के दौरान जस्टिस अशोक भूषण ने कहा कि अगर पुलिस को कुछ संज्ञेय अपराध के बारे में पता चलता है तो एफआईआर दर्ज करने में गलत नहीं है।

गौरतलब है कि एक ओर जहाँ शरजील इमाम के ख़िलाफ़ मामला अभी चल ही रहा है, तो दूसरी ओर उसी की विचारधारा वाले शर्जील उस्मानी ने भी अपने इरादे खुलेआम स्पष्ट करने शुरू कर दिए हैं। उस्मानी ने ट्विट्स के जरिए जताया है कि वे मुस्लिमों को देश के पाँचवें स्तंभ के रूप में इस्तेमाल करना चाहता है और उनकी ‘व्यथा’ को विश्व के कोने कोने तक पहुँचाना चाहता है।

Sharjeel Usmani wishes to wage a propaganda war against India

ध्यान दिला दें, कि जामिया हिंसा के दौरान पहले शरजील इमाम के ‘चिकन नेक’ वाले बयान ने ये स्पष्ट किया था कि वह देश के मुस्लिमों को उकसाकर देश से नॉर्थ-ईस्ट को अलग करना चाहता था और अब उस्मानी का प्लान ये है कि वह वैश्विक स्तर पर देश के ख़िलाफ़ प्रोपगेंडा फैला सके।

1 मई को जहाँ शरजील की याचिका पर कोर्ट में सुनवाई हुई, वहीं दूसरी ओर उस्मानी ने ट्वीट कर बताया कि वह अपने दो दोस्तों के साथ मिलकर मुस्लिमों के ख़िलाफ़ हो रहे घृणित अपराधों को इंग्लिश सबटाइटल देगा। ताकि वे वीडियो विश्व के कोने-कोने तक जाए और लोग जान पाएँ कि भारत में क्या हो रहा है।

इस नए कारनामे के लिए उस्मानी ने लोगों से ये अपील भी की है कि वे उसे ऐसी वीडियोज में बस टैग करें और बाकी का काम यानी सबटाइटल वगैरह वे और उसके दोस्त खुद करेंगे। इसके बाद वे वीडियो को व्यापक स्तर पर फैलाएँगें।

अब बता दें न्यूज़लॉन्ड्री के लिए लिखने वाले शरजील उस्मानी को आयशा रेन्ना का समर्थन मिला है। उसने उसे अपने ट्वीट में लीडर बताया है। आयशा रेना वही कट्टरपंथी लड़की है, जिसे जामिया हिंसा में पोस्टर गर्ल बनाकर उभारा गया था और इसने व उस्मानी जैसे कइयों ने शरजील इमाम के समर्थन में पोस्ट लिखा था।

यहाँ बता दें कि इससे पहले सीएए और एनआरसी का विरोध करते-करते पूर्वोत्तर को भारत से अलग करने की बात कहने वाले शरजील इमाम के खिलाफ दिल्ली पुलिस द्वारा चार्जशीट दाखिल की गई थी। इस चार्जशीट में दिल्ली पुलिस ने शरजील को देशद्रोही भाषण देने और दंगे उकसाने के लिए आरोपित बनाया गया था। उसपर आरोप लगा था कि उसने 13 दिसंबर को जामिया में देशद्रोही भाषण दिया और दंगे भड़काए।

लॉकडाउन में कैसे जुटी भीड़? पालघर मॉब लिंचिंग पर सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से माँगी रिपोर्ट

पालघर में दो संतों और उनके ड्राइवर की निर्मम हत्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र पुलिस से रिपोर्ट मॉंगी है।16 अप्रैल की रात इनकी भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। इस घटना की सीबीआई जॉंच और शीर्ष शीर्ष अदालत की निगरानी एसआईटी गठन या फिर न्यायिक आयोग बनाने की मॉंग को लेकर दाखिल याचिका पर सु्प्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा था।

रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सीआईडी ​​द्वारा हो रही फिलहाल की जाँच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता से महाराष्ट्र सरकार के वकील को दलीलों की एक कॉपी सौंपने के लिए कहा है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से चार सप्ताह के भीतर जाँच से संबंधित रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।

जस्टिस अशोक भूषण और संजीव खन्ना की पीठ ने वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि अदालत अपराधियों के खिलाफ पुलिस द्वारा अब तक की गई कार्रवाई की स्थिति के बारे में जानना चाहती है। अदालत ने यह भी पूछा कि अधिकारियों ने लॉकडाउन के दौरान भीड़ को कैसे इकट्ठा होने दिया।

दलील में कहा, “जब पूरे देश में 25 मार्च से लॉकडाउन जारी था और किसी भी व्यक्ति को अपने घर से बाहर जाने की अनुमति नहीं थी। सभी लोगों से सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए कहा गया था, इसके वावजूद इतनी बड़ी घटना घटित होना स्थानीय पुलिस को संदेह के घेरे में खड़ा करती है।”

याचिकाकर्ता शशांक शेखर झा ने अपने वकील राशि बंसल के माध्यम से दायर याचिका में माँग की है कि सुप्रीम कोर्ट अपनी निगरानी में एसआईटी का गठन करे या फिर शीर्ष अदालत के रिटार्यड जज की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग का गठन किया जाए। याचिका में सीबीआई जाँच की भी माँग की गई है।

याचिका में संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ घटना को न रोक पाने के लिए एफआईआर दर्ज करने की भी माँग की गई है। याचिका में कहा गया है कि लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करते हुए भीड़ का इकट्ठा होना पुलिस के स्तर पर बड़ी विफलता है। याचिकाकर्ता ने मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि
पुलिस स्वयं इस घटना में उलझी हुई थी, जैसा कि पुलिस ने घटना को रोकने के लिए बल प्रयोग नहीं किया था।

याचिका में आरोप लगाया गया कि पूरी घटना पूर्व नियोजित थी और इसमें पुलिस की भागीदारी भी हो सकती है। साथ ही याचिका में अदालत से मामले को पालघर से दिल्ली के फास्ट ट्रैक कोर्ट में ट्रांसफर करने की माँग की गई है।

आपको बता दें कि 16 अप्रैल 2020 को जूना अखाड़े से जुड़े दो साधु 70 वर्षीय कल्पवृक्ष गिरि महाराज और 35 वर्षीय सुशील गिरि महाराज अपने ड्राइवर 30 वर्षीय नीलेश तेलगुदेवे के साथ एक अन्य साधु के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए मुंबई से गुजरात जा रहे थे। इसी बीच पालघर जिले के गढ़चिंचले गाँव के पास 100 से अधिक लोगों की भीड़ ने उन पर हमला किया था।

बंगाल के जिन इलाकों को बताया ग्रीन जोन, वहाँ मिले कोरोना संक्रमित: अपने ही पत्र से कठघरे में ममता सरकार

पश्चिम बंगाल में कोरोना वायरस संक्रमण की स्थिति लंबे समय से संदेह के घेरे में हैं। राज्य सरकार के बयानों और दावों के उलट लगातार ऐसे प्रमाण सोशल मीडिया पर सामने आ रहे हैं, जो सवाल पूछने पर मजबूर कर रहे हैं। राज्यपाल जगदीप धनखड़ का भी कहना है कि राज्य सरकार के मुताबिक, कोरोना से प्रदेश में 105 लोगों की मृत्यु हुई है, जबकि आँकड़ा इससे अधिक है। उन्होंने पूछा है कि सरकार मृत्यु की वास्तविक संख्या क्यों छिपा रही है? अगर लोगों को सही स्थिति पता होगी तो वे ज्यादा सावधान होंगे।

यहाँ बता दें, ममता सरकार की लापरवाही के मामलों में ताजा मामला इलाकों को तीन वर्गों में बाँटने को लेकर उजागर हुआ है। इस संबंध में भाजपा के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने ट्वीट किया है। उन्होंने अपने ट्वीट में कुछ रिपोर्ट्स और सरकार के पत्र को संकलित किया है और कहा है कि जिस मंशा से ममता सरकार ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय पर हमला बोलना चाहा, वो अब पूरी तरह उनपर उलटा पड़ गया है।

अमित मालवीय ने अपने ट्वीट में ममता सरकार का एक पत्र शेयर किया है। उन्होंने कहा है कि वीडियो कॉन्फ्रेंस में बंगाल के 10 जिलों को रेड जोन में दिखाया गया। हकीकत में वर्तमान में रेड जोन केवल 4 जिले हैं- कोलकाता, हावड़ा, नॉर्थ 24 परगना और पूर्व मेदिनीपुर। इसके बाद अगले पृष्ठ पर जिलों के नामों को रेड, ऑरेंज और ग्रीम जोन की सूची में वर्गीकृत करके केंद्र स्वास्थ्य मंत्रालय को रिपोर्ट पेश की गई। इसमें 4 जिलों को रेड जोन बताने के अलावा, 11 जिलों को ऑरेंज जोन में बताया गया और 8 जोन को ग्रीन जोन में। 

इस पत्र की ओर ध्यान आकर्षित करवाते हुए अमित मालवीय ने एक बंगाली समाचार पत्र में प्रकाशित खबर शेयर की है। उन्होंने कहा कि ममता सरकार द्वारा जारी पत्र में अलीपुरद्वार जिले को ग्रीन जोन में रखा गया है, जबकि बंगाली समाचार पत्र की खबर के अनुसार वहाँ कल ही 4 मामलों की पुष्टि हुई है। उनका कहना कि जब कल ही कोरोना मामलों की पुष्टि हुई है तो फिर ममता सरकार ने उसे ग्रीन जोन में क्यों रखा?

इसके बाद उन्होंने एक और ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने वायरल रिसर्च एवं डायगनॉस्टिक लैब में हुए कोरोना संदिग्धों की रिपोर्ट डाली। उन्होंने लिखा कि केवल अलीपुरद्वार ही नहीं बल्कि बीरभूम में भी कोरोना के संक्रमित मामले हैं। जिसे लेकर बंगाल सरकार ये दावे कर रही है कि वो ग्रीन जोन में आता है। उनका पूछना है कि आखिर ममता सरकार जनता को क्यों बरगला रही है और आखिर क्यों अभिमानियों की तरह पूरे मामले को हैंडल कर रही है।

गौरतलब है कि इससे पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था। यह कोलकाता के एमआर बंगूर अस्पताल का था। वीडियो में कोरोना मरीजों को लेकर लापरवाही और वार्ड में बदइंतजामी दिख रही थी। शवों के साथ मरीजों को एक वार्ड में रखा हुआ है और मरीज भी शव के आसपास घूम रहे थे।

यूपी के 30 लाख श्रमिकों के खाते में भेजे गए ₹1000, मजदूर दिवस पर CM योगी की सौगात

देश भर में जारी लॉकडाउन के बीच दिहाड़ी मजदूरों को सबसे अधिक मुश्किल हो रही है। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने आज मजदूर दिवस पर प्रदेश के कामगार और श्रमिकों को बधाई देते हुए कहा कि 30 लाख श्रमिकों को भरण-पोषण के लिए एक-एक हजार रुपए उनके खाते में ट्रांसफर किए जा रहे हैं।

इसके पहले भी 24 मार्च को 5 लाख 97 हजार श्रमिकों के खाते में एक-एक हजार रुपए भेजे गए थे। उन्होंने कहा कि विकास में श्रमिकों का महत्वपूर्ण योगदान है। उनके श्रम को सम्मान देने के लिए ही प्रत्येक वर्ष एक मई को अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस का आयोजन होता है। विकास में उनकी भूमिका के मद्देनजर उनको सम्मान और हर तरह की सुरक्षा देना हमारा फर्ज है। हम वही कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी सरकार ने निर्माण श्रमिकों, रोज कमाने वाले ठेली, खोमचा, रेहड़ी, रिक्शा, ई-रिक्शा, कुली, ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में 16 श्रेणी के कामगारों धोबी, मिस्त्री, मोची, नाई, कुम्हार, राजमिस्त्री आदि के लिए भरण-पोषण भत्ता देने की व्यवस्था की है।

साथ ही मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज’ के जरिए इस वर्ग के हित के लिए 17 हजार करोड़ रुपए का पैकेज दिया गया। इस पैकेज से कामगार, श्रमिक, किसान, युवा और उद्योग में कार्यरत श्रमिक लाभान्वित हुए हैं। उत्तर प्रदेश में संबंधित वर्ग के लोगों को इस योजना से लगातार लाभान्वित कराया जा रहा है। हमारा पूरा प्रयास है कि यह वर्ग चाहे ग्रामीण क्षेत्र का हो या शहरी, उसे कोई तकलीफ नहीं होने देंगे। योजना बनाकर इस पर लगातार अमल जारी है।

सीएम योगी ने आगे कहा कि आज हम उत्तर प्रदेश के 18 करोड़ लोगों को पोर्टेबिलिटी के माध्यम से खाद्यान्न उपलब्ध कराने की कार्य योजना को आगे बढ़ा रहे हैं। उत्तर प्रदेश का कोई भी कामगार या श्रमिक देश के किसी भी हिस्से में रहता है और उसके पास उसका राशन कार्ड नंबर है, तो वे वहाँ के कोटे की दुकान से भी राशन ले सकता है।