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मजदूरों से ज्यादा किराया वसूल रही है मोदी सरकार: श्रमिक एक्सप्रेस को लेकर पत्रकार रोहिणी सिंह ने फैलाया झूठ

भारत सरकार ने श्रमिक एक्सप्रेस चलाकर देश भर में फँसे मजदूरों को वापस उनके गृह राज्य भेजने का फ़ैसला लिया है। ये मजदूर लगातार घर भेजे जाने की माँग कर रहे थे। पत्रकार रोहिणी सिंह ने दावा किया है कि सरकार मजदूरों से 50 रुपए अतिरिक्त ले रही है, ताकि उन्हें घर पहुँचाया जा सके। उन्होंने ‘पीएम केयर्स’ लिख कर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा। रोहिणी इससे पहले भी इस तरह का प्रोपेगेंडा फैलाती रही हैं।

रोहिणी ने अफवाह फैलाई कि मजदूरों को कुल किराए से 50 रुपए ज्यादा देने होंगे, तभी उन्हें उनके घर पहुँचाया जा सकेगा। जबकि ऐसी कोई बात नहीं है। उन्होंने ‘द हिन्दू’ की जो ख़बर शेयर की, उसमें बताया गया है कि 30 रुपए ‘सुपरफास्ट चार्ज’ और 20 रुपए का अतिरिक्त चार्ज लिया जाएगा। ऐसा ‘साउदर्न रेलवे’ की विज्ञप्ति के आधार पर दावा किया गया है।

अब आते हैं सच्चाई पर। दरअसल, कुल किराए में कम्प्लीमेंटरी मील और पीने का पानी की भी व्यवस्था है, ख़ासकर लम्बी दूरी वाले ट्रेनों में। ये सारे किराए स्लीपर क्लास के लिए तय किए गए हैं। अब आते हैं असली मुद्दे पर। दरअसल, यात्रियों को रेलवे को एक रुपया भी देने की ज़रूरत नहीं है। किराया तो लगेगा लेकिन यह ख़र्च राज्य सरकारें वहन करेंगी। बता दें कि सीताराम येचुरी और पप्पू यादव समेत कई विपक्षी नेताओं ने भी ऐसा ही झूठ फैलाया था।

सारी जिम्मेदारी राज्यों को दी गई है, जिन्होंने इस कार्य के लिए अलग-अलग प्रदेशों में अपने नोडल अधिकारी तैनात किए हैं। राज्य ही अपने नागरिकों को रेलवे के पास लेकर जाएँगे, जिसके बाद उनकी यात्रा सुनिश्चित की जाएगी। गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप रेलवे ने ये फ़ैसला लिया है। इस सम्बन्ध में गृह मंत्रालय और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक भी हुई। सभी यात्रियों के लिए फेस मास्क पहनना अनिवार्य होगा और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए सारे काम होंगे।

अपने गृह राज्यों में पहुँचते ही वहाँ की सरकार यात्रियों के लिए स्क्रीनिंग और मेडिकल टेस्ट की व्यवस्था करेगी। इसके बाद अगर ज़रूरत पड़ी तो उन्हें क्वारंटाइन किया जाएगा। तत्पश्चात उन्हें उनके घर भेजने की व्यवस्था भी राज्य सरकारें ही करेंगी। रेलवे ने जब ख़ुद सारी बातें स्पष्ट कर दी है, तब भी जान-बूझकर अफवाहों के बाज़ार को गर्म रखा जा रहा है। मजदूरों के लिए सारी सेवाएँ एकदम मुफ्त हैं।

बता दें कि वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरिसया ने इसी तरह की हरकतों के कारण एक बार रोहिणी की क्लास लगाई थी। उन्होंने कहा था कि उनका परिचय किसी ने नीरा राडिया से नहीं कराया था और साथ ही वो रोहिणी की तरह डिजाइनर पत्रकार नहीं हैं। चौरसिया ने रोहिणी को करारा जवाब देते हुए यह भी कहा था कि उन्होंने आज तक किसी सरकार से 3BHK फ्लैट लेकर कोई ख़बर नहीं लिखी है।

सहारनपुर: मस्जिद में हो रही थी सामूहिक नमाज, पुलिस पहुँची तो उठ कर भागे नमाजी, 15 गिरफ्तार, 30 के खिलाफ FIR

उत्तर प्रदेश के जिला सहारनपुर की एक मस्जिद में कुछ लोग सामूहिक नमाज अदा करने के लिए पहुँच गए। सूचना पर पहुँची पुलिस को देख नमाजियों में भगदड़ मच गई। पुलिस ने मौके से 15 नमाजियों को गिरफ्तार किया है, साथ ही 30 लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

जानकारी के मुताबिक जिला सहारनपुर क्षेत्र के गाँव उमाही कला की जकरिया मस्जिद में शुक्रवार (मई 1, 2020) को बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करते हुए नमाज अदा करने के लिए इकट्ठा हो गए और सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियाँ उड़ाते हुए सामूहिक रूप से नमाज अदा करने लगे।

इस बात की जानकारी जैसे ही पुलिस को हुई वह तत्काल टीम के साथ मौके पर पहुँच गई। पुलिस को देख मस्जिद में नमाज अदा कर रहे लोगों के बीच भगदड़ मच गई। इस दौरान पुलिस ने सक्रीयता दिखाते हुए 15 लोगों को मौके से गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस ने मस्जिद से एहसान, शेरदिल, फरमान, शाकिर, परवेज, यामीन, हम्माद, इसराइल, सद्दाम, दिलशाद, मरगूब, सलमान, जरीफ, साबिर व आलिम को मौके से गिरफ्तार किया है, हालाँकि कुछ लोग मौके से भाग जाने में सफल रहे। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 15 नामजद और 15 अज्ञात मिलाकर 30 लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।

पुलिस अधिकारियों ने माहौल को देखते हुए गाँव में पीएसी बल तैनात कर दिया है। थाना प्रभारी जितेंद्र सिंह ने बताया कि 15 नामजद, जबकि 15 अन्य अज्ञात के खिलाफ धारा 188, 269, 270 सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। गिरफ्तार किए गए सभी लोगों को जेल भेज दिया है। 

एसपी (देहात) विद्यासागर मिश्रा ने बताया कि जिले में सभी को यह आगाह किया गया है कि कोई भी सामूहिक रूप से मस्जिद में नमाज नहीं पड़ेगा, क्योंकि इससे लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का उल्लंघन होता है। सोशल डिस्टेंसिंग न होने से कोरोना वायरस फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है। चेतावनी के बावजूद एक मस्जिद में सामूहिक नमाज हो रही थी, जो लोग पुलिस को देख भाग निकले उनकी पहचान कराई जा रही है।

इससे पहले भी गुरुवार को असम के लखीमपुर जिले के दक्खिन पंडोवा गाँव की एक मस्जिद में कुछ लोग लॉकडाउन का उल्लंघन कर नमाज अदा करने के लिए एकत्र हो गए थे। इसकी जानकारी मिलने पर जब पुलिस टीम मौके पर पहुँची तो उसमें मस्जिद में 12 लोगों को पाया। इसके बाद जैसे ही पुलिस की टीम मस्जिद से निकली उस पर पथराव शुरू हो गया।

इसमें ग्राम प्रधान सहित चार पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। वहीं पथराव में पुलिस का वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गया था। इस मामले में पुलिस ने इमाम सहित 12 लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।

राँची: 15 साल पहले बने ईसाई, मृत्यु के बाद कब्रिस्तान में दफनाने से इनकार, फादर ने कहा- कब्र खरीदनी होती है

झारखंड की राजधानी राँची में एक बुजुर्ग ईसाई के शव को दफनाने के लिए कब्रिस्तान में जगह नहीं दी गई। जिसके बाद परिजनो ने बुजुर्ग का हिंदू धर्म के रीति-रिवाज के अनुसार शमशान घाट में अंतिम संस्कार कर दिया। मृतक का परिवार 15 साल से ईसाई धर्म का पालन कर रहा है। बुजुर्ग की मौत के बाद उसे दफनाने के लिए कब्रिस्तान से संपर्क किया गया तो कहा गया कि वहाँ पर अब जगह ही बाकी नहीं है।

इस मामले में चर्च के फादर से संपर्क नहीं हो सका, लेकिन संत फ्रांसिस चर्च हरमू के सदस्य पी आईंद ने हिन्दुस्तान से कहा कि इस घटना की उन्हें जानकारी नहीं है। हालाँकि उन्होंने बताया कि संत फ्रांसिस चर्च का नियम है कि हर परिवार को कब्रिस्तान के लिए जगह खरीदनी होती है। इसके लिए चंदा देना होता है। यदि मृतक राँची के बाहर का होगा, तो उसने कब्रिस्तान के लिए चंदा नहीं दिया होगा। ऐसी स्थिति में चर्च प्रबंधन शव दफनाने से रोक सकता है।

इसका दुखद अहसास उस परिवार को तब हुआ जब राँची में एक ईसाई बुजुर्ग की मौत के बाद शव दफनाने के लिए कब्रिस्तान में जगह नहीं मिली। इसके बाद कोई रास्ता नही बचते देख परिजनों ने हिंदू रीति रिवाज के साथ हरमू मुक्ति धाम में उनकी अंत्येष्टि कर दी। हालाँकि, इस अंत्येष्टि में आस-पास के लोगों ने भरपूर सहयोग किया। जानकारी के मुताबिक राजधानी राँची की हरमू नदी के पास की बस्ती में रहने वाले रामशरण टूटी का निधन गुरुवार (अप्रैल 30, 2020) की देर रात को हो गया था।

निधन के बाद उनके परिजनों ने शव को दफनाने के लिए संत फ्रांसिस चर्च के प्रतिनिधियों से संपर्क किया। मृतक के पुत्र फिलिप टूटी ने बताया कि उनका परिवार 15 साल से ईसाई धर्म का पालन कर रहा है और सभी लोग नियमित संत फ्रांसिस चर्च जाते हैं। पिता के निधन के बाद दफनाने के लिए चर्च के फादर से बात हुई।

फादर ने कहा कि कब्रिस्तान में जगह नहीं है। संभव हो तो शव को अपने गाँव ले जाओ। जब फिलिप टूटी ने बताया कि वो शव को गाँव ले जाने में सक्षम नहीं हैं तो फिर फादर ने उससे आसपास के लोगों के सहयोग से कोई दूसरा रास्ता निकालने के लिए कहा। और कोई दूसरा विकल्प न देख ईसाई परिवार से पड़ोसियों की मदद से हरमू मुक्तिधाम ले जाकर शव का अंतिम संस्कार कर दिया। यह परिवार मूल रूप से खूंटी के फुदी के रहने वाला है। फिलहाल ये लोग राँची में किराए के मकान में रहते हैं।

इस मामले के सामने आने के बाद धर्म परिवर्तन कर ईसाई बने लोगों के बीच काफी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि जब मौत के बाद भी जगह नही मिलेगी तो फिर ऐसे धर्म को अपनाने से क्या फायदा। इस घटना से सभी दुखी हैं। लोगों ने कहा कि दफनाने के लिए जगह खरीदनी होगी और जो समर्थ नही होंगे उनका क्या होगा? ऐसे कई सवाल आज ईसाई धर्म अपनाने वाले पूछने लगे हैं।

उल्लेखनीय है कि ईसाई धर्मांतरण की खबरें लगातार सामने आती रहती हैं। 30 मार्च 2019 को राँची स्थित लालपुर थाना क्षेत्र के नागरा टोली में सरना धर्म से ईसाई धर्म में परिवर्तन कराने का मामला सामने आया था। धर्मांतरण के दौरान प्रार्थनाओं की आवाज़े सुनाई देने पर रोशनी मोहल्ले की अन्य महिलाओं के साथ उस घर में पहुँची जहाँ दो महिलाएँ प्रार्थना करवा रही थीं और बाक़ी दो महिलाएँ झूम रही थीं। पार्षद और अन्य महिलाओं ने मिलकर धर्मांतरण कराने के आरोप में करीना कुजूर व सुकरो मुंडा को पकड़ा और इन्हें लालपुर पुलिस के हवाले कर दिया गया। 

इसी तरह फरवरी 2020 में बिहार के नवादा जिले से खबर आई थी कि यहाँ 15 हिंदू परिवारों के 50 सदस्यों ने धर्म परिवर्तन कर ईसाई धर्म अपना लिया है। नवादा के ताराटाड टोला में अब हिदू धर्म को मानने वाले महज तीन परिवार ही बचे हैं, लेकिन उन पर भी धर्मातरण के लिए दबाव है। बताया गया कि कभी हिंदू धर्म और देवी-देवताओं में आस्था रखने वाले इन परिवारों ने अपना धर्म परिवर्तन कर लिया है।

उम्र या धूर्तता? 30 अप्रैल को कही बात से 1 मई को पलट गए! वो रवीश है, वो कुछ भी कर सकता है!

मजूदरों को अपने गृह राज्यों में पहुँचाने के लिए मोदी सरकार ने ट्रेनें चलाने का फ़ैसला लिया, जिससे एनडीटीवी के रवीश कुमार भड़क गए हैं। टेलीविजन न्यूज़ की दुनिया में रवीश कुमार अपने दोहरे रवैए के लिए जाने जाते हैं। वो अपनी बात को साबित करने के लिए जो तर्क देते हैं, अगली बार दूसरी बात को साबित करने के लिए उससे ही पलट जाते हैं। उनके इस इतिहास को देखते हुए जनता ने उन पर से अपना विश्वास खो दिया है।

रवीश ने पहले क्या कहा था?

रवीश कुमार ने पहले कहा था कि अगर सरकार ट्रेनें चला देती तो अच्छा रहता। ऐसा उन्होंने तब कहा था, जब लॉकडाउन 2.0 ख़त्म होने की ओर था और जो जहाँ हैं, उन्हें वहीं रहने की सलाह दी गई थी। रवीश ने तब कहा था कि एक ट्रेन में बस की तुलना में ज्यादा लोग आवागमन कर सकते हैं और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना भी ट्रेनों में आसान रहता। उन्होंने दावा किया था कि इससे ज्यादा लोगों को एक बार में पहुँचाया जा सकता था।

बकौल रवीश, कुछ मुख्यमंत्रियों ने इसकी माँग भी की थी लेकिन केंद्र सरकार ने अनसुनी कर दी। ऐसा रवीश कुमार ने अप्रैल 30, 2020 को कहा था। तब वो मजदूरों के बड़े हितैषी बन रहे थे और मोदी सरकार ओर तरह-तरह के आरोप लगा रहे थे। अब जब मोदी सरकार ने मजदूरों को ‘श्रमिक एक्सप्रेस’ के जरिए सारे नियमों का पालन करते हुए वापस भेजने का फ़ैसला लाया है, तो रवीश का टोन बदल गया है। ‘पॉलिटिकल कीड़ा’ के इस वीडियो में आप रवीश का दोहरा रवैया देख सकते हैं:

अपने ही बयान से पलटे रवीश कुमार

अब रवीश ने कहा है कि आखिरकार सरकार ने मजदूरों के लिए ट्रेनें चलाने की अनुमति दे ही दी। उन्होंने कहा कि इससे प्रतीत होता है कि तालाबंदी की प्रक्रिया और लम्बी खिंचेगी। उन्होंने कहा कि जब सरकार महीना भर से ज्यादा गुजर जाने के बाद मजदूरों को वापस पहुँचाने का फ़ैसला कर रही है तो क्या जब कारखाने और उद्योग-धंधे खुलेंगे तो इन मजदूरों को वापस लाने की व्यवस्था की जाएगी, वो भी पूरी रियायत के साथ?

यानी, पहले जब ट्रेनें नहीं चली थीं तो वो ग़लत। ट्रेनें चल रही हैं तो रवीश ने नया मुद्दा उठा कर लाया है कि वो जाएँगे तो वापस कब और कैसे आएँगे? यानी, अगर कुछ अच्छा हो रहा है तो भविष्य की बात कर के खोट निकालो। रवीश कुमार का दूसरा वीडियो भी तभी का है, जब लॉकडाउन 2.0 का अंतिम फेज चल रहा था, यानी पहले वाले वीडियो के ठीक 1 दिन बाद का। यानी, 1 दिन में अगर कोई पलट जाए तो उसे रवीश कुमार ही कह सकते हैं।

इससे पहले रवीश कुमार ने कोरोना वायरस मामले में चीन को क्लीनचिट दे दी थी। जिस वायरस को लेकर आज सारा विश्व चीन पर ऊँगली उठा रहा है, उस वायरस पर रवीश कुमार चीन को क्लीनचिट भी दे रहे हैं और कुछ विजुअल्स भी दिखा रहे की देखिए सब कुछ सामान्य है यहाँ। दिल्ली दंगों के दौरान भी रवीश ने पुलिस पर फायरिंग करने वाले शाहरुख को अपने प्राइम टाइम में अनुराग मिश्रा बता दिया था। 

प्रिय शेखर गुप्ता! 21वीं सदी के मनमोहन सिंह पता नहीं, लेकिन भारतीय मीडिया के जवाहर तुम ही हो

पंजाब में महाराष्ट्र के नांदेड़ से लाए गए सिख श्रद्धालुओं में कोरोना वायरस का संक्रमण मिलते ही शेखर गुप्ता से लेकर तमाम लिबरल गिरोह सक्रीय हो गया और तबलीगी जमात की कारस्तानी की भरपाई के लिए सिखों को निशाना बनाना शुरू कर दिया गया। सदियों से कॉन्ग्रेस की छत्र-छाया में पले-बढ़े नेहरुघाटी सभ्यता के पत्रकार शेखर गुप्ता जैसे कॉन्ग्रेसी बौद्धिक गुलाम कोरोना वायरस की महामारी के दौरान भी अपनी स्वामिभक्ति से पीछे नहीं हट रहे हैं।

नांदेड़ साहिब के सिखों की तबलीगी जमात से तुलना

महाराष्ट्र के नांदेड़ साहिब से पंजाब लाए गए सिख श्रद्धालुओं के कोरोना से संक्रमित पाए जाने के तुरंत बाद शेखर गुप्ता यह ट्वीट करते हुए देखे गए कि मजहब और कोरना के बीच कोई सम्बन्ध नहीं है। शेखर गुप्ता का निशाना वो तबलीगी जमात और मुस्लिम हैं, जिन्होंने डेढ़ महीने से ज्यादा समय से देशभर में उपद्रव कर शासन-प्रशासन और व्यवस्थाओं की नाक में दम कर रखा है।

शेखर गुप्ता ने तबलीगी जमातियों की भरपाई के लिए सिखों को निशाना बनाते हुए अपने एक ट्वीट को सबसे ऊपर ‘पिन’ कर लिया है ताकि अन्य लोगों तक भी यह नैरेटिव आसानी से पहुँच सके। सिखों को निशाना बनाने के साथ ही शेखर गुप्ता आजकल एक दूसरी स्वामीभक्ति में भी लगे हुए हैं। वह आजकल बता रहे हैं कि आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन किस तरह से अगले मनमोहन सिंह हो सकते हैं।

हालाँकि, शेखर गुप्ता इस प्रकार की तुलना करने से पहले एक बात यह ध्यान नहीं रखना चाहते हैं कि महज एक घंटे पहले के समाचार और महाराष्ट्र सरकार एवं पंजाब सरकार की गलती के कारण सिखों को तबलीगी जमात के सामान ही कोरोना वायरस का केंद्र साबित करना कितना सही है? क्या यह महाराष्ट्र और पंजाब सरकार की जिम्मेदारी नहीं बनती थी कि सिर्फ मीडिया की वाहवाही बटोरने के लिए जब वो श्रद्धालुओं को लाने का प्रबंध कर रहे थे, उससे पहले पूरी जाँच कर ली जाती और उन्हें आवश्यक संरक्षण दिया जाता?

सिखों श्रद्धालुओं की तुलना मुस्लिम तबलीगी जमातियों से करना इसलिए भी बेवकूफाना है क्योंकि –
1 – सिखों ने पुलिस पर थूका नहीं
2 – मोबाइल बंद कर के मस्जिदों में नहीं छुपे
3 – क्वारंटाइन में नर्सों के साथ अश्लील हरकतें नहीं की
4 – उन्होंने कोरोना को अल्लाह का अजाब नहीं बताया
5 – अस्पताल में बिरियानी की माँग नहीं की

दूसरा सवाल शेखर गुप्ता से व्यक्तिगत तौर से यह किया जा सकता है कि सिखों में से कितने ऐसे सिख हैं, जिन्होंने मुस्लिमों की ही तरह हर जगह पुलिस और डॉक्टर्स की टीम पर पथराव किए या इन पर थूका और मरकज से निकलकर देश-विदेश की मस्जिदों में छुप गए?

शेखर गुप्ता जैसे लोग सिर्फ एक ऐसे मौके के इन्तजार में रहते हैं कि कैसे वो मुस्लिमों के आतंक को ढकने के लिए इसके समानांतर हिन्दू आतंकवाद जैसे शब्दों को भी इस्लामिक आतंकवाद जितना ही मजबूती से स्थापित कर सकें।

‘Congress के लिए रघुराम राजन हैं 21वीं सदी के मनमोहन सिंह’

अगर देखा जाए तो शेखर गुप्ता जिस तेजी से रंग बदलते हैं। या यूँ कहें कि गिरगिट तो बेवजह बदनाम है। जिस तेजी से वो रंग बदलते हैं, गिरगिट को उनसे कुछ प्रेरणा लेनी चाहिए। कारण यह है कि जो पद्म भूषण शेखर गुप्ता आज रघुराम राजन में कॉन्ग्रेस का 21वीं सदी के मनमोहन सिंह को देख रहे हैं, वही रघुराम राजन कुछ साल पहले मनमोहन सिंह की असफलता पर ‘साहित्य’ लिख रहे थे।

‘इवन डेज़’ में The Print –

पद्म भूषण शेखर गुप्ता कुछ साल पहले बता रहे थे कि मनमोहन सिंह एक अच्छी चॉइस क्यों नहीं हो सकते हैं। जून 2019 को ही शेखर गुप्ता के ‘दी प्रिंट’ में प्रकाशित कुछ लेखों में कहा गया था कि मनमोहन सिंह के कार्यकाल पर गौरवान्वित महसूस नहीं किया जा सकता है। इसके साथ ही ‘दी प्रिंट’ ने मनमोहन सिंह को भारत रत्न ना दिए जाने की भी वकालत की थी।

‘ऑड डेज़’ में The Print –

अब सवाल यह उठता है, कि जो ‘दी प्रिंट’ और उनके ‘राजनीतिक विश्लेषक स्तम्भकार’ भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और 21वीं सदी में प्रधानमंत्री पद पर सबसे लम्बे समय तक कायम रहने वाले मनमोहन सिंह को ही किसी लायक नहीं समझता, वो अब रघुराम राजन को कॉन्ग्रेस का नया मनमोहन सिंह आखिर किसलिए साबित करना चाहता है और कॉन्ग्रेस के लिए वह इसमें कौनसी उम्मीद की किरण की तलाश करता है?

वास्तव में शाहीन बाग़ में चल रहे नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) विरोधी रैलियों में ‘दी वायर’ की प्रोपेगैंडा पत्रकार आरफा खानम शेरवानी मुस्लिमों के लिए कुछ गाइडलाइंस शेयर करते हुए देखी गईं थीं। वह उन्हें मुस्लिम होकर भी मुस्लिम ना नजर आने के दिशा निर्देश देते हुए देखी जा रही थीं। ठीक इसी तरह से शेखर गुप्ता अब कॉन्ग्रेस के लिए इसी प्रकार के दिशानिर्देश जारी करने का प्रयास कर रहे हैं। हालाँकि, ऐसा करते वक्त वो कॉन्ग्रेस को यह नहीं बताते कि वो मनमोहन सिंह को ही किसी लायक नहीं देखते।

लेकिन पद्म भूषण शेखर गुप्ता और उनके स्तम्भकारों की बातों को कितनी गंभीरता से लिया जाना चाहिए, जिनके खोजी ‘आसमानी’ विश्लेषण चुनाव के एक दिन पहले नरेंद्र मोदी की हार का दावा करते हैं और नतीजा आते ही कहते हैं कि 30 साल तक नरेन्द्र मोदी को कोई नहीं हरा सकता है?

घर से निकलते ही –

कुछ दूर चलते ही –

दुर्भाग्य यह है कि ‘ऑड-इवन डेज़’ वाली पत्रकारिता करने वाले पद्म भूषण शेखर गुप्ता को गम्भीरता से लेना तब जरुरी हो जाता है, जब यह स्मरण होता है कि वह एडिटर्स गिल्ड ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष होने के साथ-साथ सदियों से भारतीय पत्रकारिता के सबसे ऊँचे पदों पर आसीन रह चुके हों। शेखर गुप्ता की प्राथमिकताएँ तय हैं, जो आदेश उन्हें अपनी निजी सरकारों से मिलते हैं, उन्हें उन पर काम करना होता है। ऐसे ट्वीट ही पिन किए जाते हैं, जिन्हें देखकर उनके अन्नदाता उनकी पीठ थपथपाएँ और कहें कि 21वीं सदी के मनमोहन सिंह तो पता नहीं, लेकिन भारतीय मीडिया के जवाहर तुम ही हो।

मुंबई के कुर्ला में लॉकडाउन का पालन करने गई पुलिस टीम पर ‘समुदाय विशेष’ की भीड़ ने किया हमला, कोई गिरफ्तारी नहीं

मुंबई के कुर्ला में पुलिस पर हमला करने के आरोप में एक शख्स के खिलाफ आईपीसी की धारा 353, 188 और 269 के तहत FIR दर्ज की गई है। बता दें कि 29 अप्रैल को जब पुलिस की एक टीम कुर्ला में कोरोना प्रभावित इलाके में लॉकडाउन का पालन कराने पहुँची थी तो उन पर भीड़ ने हमला कर दिया गया था। FIR दर्ज होने के बावजूद मुंबई पुलिस ने मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं की है।

इससे पहले भीड़ द्वारा मुंबई के कुर्ला में पुलिस पर हमला किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में मुस्लिम समुदाय से संबंधित भीड़ को पुलिस के साथ बदसलूकी और गाली-गलौज करते हुए देखा जा सकता है।

वीडियो में स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है कि पुलिस इलाके में लॉकडाउन का पालन करवाने गई थी। इसी दौरान वहाँ के स्थानीय लोगों के साथ पुलिस की बहस छिड़ गई और देखते ही देखते मुस्लिमों की यह भीड़ गाली-गलौज पर उतारू हो गई और पुलिस के साथ बदसलूकी और मार-पीट करने लगी।

वीडियो में लगभग 15-16 सेकंड के आस-पास एक शख्स को पुलिस टीम पर हमला करते हुए देखा जा सकता है। इसके साथ ही वीडियो के अंत में एक व्यक्ति को अपने अपार्टमेंट से पुलिस को गालियाँ देते हुए आप देख सकते हैं।

पुलिस पर पथराव की यह पहली घटना नहीं है। देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसी घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। बुधवार (अप्रैल 29, 2020) को कानपुर में कोरोना संक्रमण के हॉटस्पॉट चमनगंज में पुलिस और मेडिकल टीम पर स्थानीय लोगों ने हमला किया। सीएम योगी ने कहा था कि आरोपितों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) और गैंगस्टर एक्ट के तहत भी सख्त कार्रवाई की जाए। कोरोना योद्धाओं पर हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएँगे।

मंगलवार (अप्रैल 28, 2020) को पश्चिम बंगाल के हावड़ा में लॉकडाउन का पालन करवाने गई पुलिस के ऊपर हमला किया गया था। आक्रामक भीड़ को काबू करने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स को बुलाना पड़ा था। सोमवार (अप्रैल 27, 2020) को महाराष्ट्र के औरंगाबाद में मस्जिद में नमाज पढ़ने से रोकने गई पुलिस पर लोगों ने पथराव किया। इस घटना में 1 पुलिसकर्मी घायल हो गए। मामले में पुलिस ने अब तक 15 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस पर पथराव करने वाली भीड़ में महिलाएँ भी शामिल थीं।

इससे पहले शुक्रवार को उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर लॉकडाउन का उल्लंघन कर सामूहिक रूप से नमाज अदा करके की गई। बहराइच, शाहजहाँपुर में नमाजियों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया। फिरोजाबाद में घंटों मजहबी नारे लगाए। इसके बाद एम्बुलेंस को निशाना बनाते हुए तोड़फोड़ की गई। इसी तरह दिहवाकला स्थित मस्जिद में नमाजियों ने सिपाहियों पर हमला बोल दिया

दिल्ली: CRPF के एक ही बटालियन के 122 जवान कोरोना संक्रमित, 150 की रिपोर्ट का इंतजार

दिल्ली में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 68 और जवान कोरोना पॉजीटिव पाए गए हैं। ये सभी जवान पूर्वी दिल्ली में बटालियन के एक कैंप से जुड़े हैं। इस बटालियन में अब तक कुल 122 जवान संक्रमित पाए गए हैं। कैंप को सील कर उसे सैनिटाइज किया जा रहा है।

वैसे CRPF में अब तक संक्रमण के 127 मामले सामने आए हैं। इनमें से एक जवान ठीक हो चुका है। 55 वर्षीय सब इंस्पेक्टर की मौत हो चुकी है। उनके निधन पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट कर शोक जाहिर किया था।

संक्रमित जवानों को पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार फेज-3 स्थित सीआरपीएफ की 31वीं बटालियन के बेस कैंप से कुछ दूर मंडावली में दिल्ली सरकार के एक केंद्र में क्वारंटाइन कर रखा गया है। अभी 150 जवानों की जाँच रिपोर्ट आनी बाकी है। स्वास्थ्य विभाग लगातार सभी की मॉनीटरिंग कर रहा है। सीआरपीएफ देश की सबसे बड़ी पैरामिलिट्री फोर्स है। इस महामारी में इन पर लॉकडाउन का ठीक से पालन करवाने की जिम्मेदारी है, लेकिन अब कोरोना इन्हें ही चेपट में ले रहा है।

दूसरी तरफ दिल्ली में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। पहले निजामुद्दीन स्थित मरकज से निकले जमातियों की वजह से पूरे देश में संक्रमण फैला। अब आजादपुर मंडी से अलग-अलग राज्य में फैला संक्रमण चिंता का विषय बना हुआ है। दिल्ली में अब तक संक्रमण के 4966 मामले सामने आ चुके हैं। 3738 मामले एक्टिव हैं। 61 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1167 लोग स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं।

हालात को देखते हुए केंद्र सरकार ने देशभर में लॉकडाउन 17 मई तक बढ़ा दिया है। हालॉंकि ग्रीन और ऑरेंज जोन में काफी ढील दी गई है। लेकिन, पूरी दिल्ली रेड जोन के अंतर्गत है।

तबलीगी जमात के लोगों ने बीमारी छिपाकर अपराध किया है, कार्रवाई करेंगे: CM योगी आदित्यनाथ की दो टूक

कोरोना वायरस और लॉकडाउन के बीच इंडिया टुडे ग्रुप के ई-एजेंडा आजतक ‘मुख्यमंत्री स्पेशल’ का आगाज उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ हुआ। इस दौरान उन्होंने हर सवाल का बेबाकी से जवाब दिया। सीएम योगी ने कहा कि तबलीगी जमात के लोगों ने संक्रमण के मामले छिपाए, जिसकी वजह से यह तेजी से फैला।

सीएम योगी ने कहा कि कोरोना से लड़ने में मीडिया ने अहम भूमिका निभाई है। इस वैश्विक महामारी के खिलाफ पूरे देश को एकजुट होकर लड़ना होगा। हम दुनिया के कई देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में हैं लेकिन अभी हमें और सतर्क रहने की जरूरत होगी। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए हम आर्थिक गतिविधियों को भी आगे बढ़ाने की शुरुआत कर रहे हैं।

जब सीएम योगी आदित्यनाथ से तबलीगी जमात द्वारा संक्रमण फैलाने के प्रकरण में पूछा गया तो उन्होंने कहा, “तबलीगी जमात का कार्य नि:संकोच बड़ा ही अशोभनीय था। बीमारी होना अलग बात है। बीमारी होना कोई अपराध नहीं है। लेकिन ऐसी संक्रामक बीमारी को छुपाना अपने आप में एक अपराध है और ये अपराध तबलीगी जमात से जुड़े हुए लोगों ने किया है। उत्तर प्रदेश या फिर देश के किसी भी भाग में जहाँ भी कोरोना का प्रसार देखने को मिला है, इसके पीछे तबलीगी जमात का हाथ है।”

ई-एजेंडा आजतक में योगी आदित्यनाथ

उन्होंने कहा, “अगर उन्होंने इस बीमारी को छुपाया नहीं होता और इसका कैरियर बनकर वो जगह-जगह नहीं गए होते तो संभवत: हमलोग पहले लॉकडाउन में काफी हद तक कोरोना को स्थिर कर चुके होते। लेकिन उन्होंने जो अपराध किया है, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।” इसे आप वीडियो में 22:10 से 23:40 के बीच सुन सकते हैं।

इसके बाद सीएम से पुलिसकर्मियों और स्वास्थ्यकर्मियों के ऊपर हमला और अभद्र व्यवहार को लेकर पूछा गया तो उन्होंने कहा कि जमात और तबलीगी से जुड़े बहुत से लोगों ने काफी जगहों पर अभद्र व्यवहार भी किया है। गाजियाबाद में नर्सों के साथ अभद्र कार्य किया जो काफी दुर्भाग्य की बात है।

ऐसे ही वाराणसी और कानपुर के साथ ही कई अन्य जगहों पर भी तबलीगी जमात के लोगों ने अभद्रता की, जिसके लिए पहले उन्हें समझाने का प्रयास किया गया, लेकिन जब वो नहीं माने तब कठोरतापूर्वक कार्रवाई की गई है और साथ ही सचेत भी कर दिया गया है तो कानून का उल्लंघन करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कार्यक्रम के दौरान यूपी के सीएम ने कहा कि हमारे पास पर्याप्त खाद्यान्न है। हमने लॉकडाउन के शुरुआत से ही किसानों की मदद के लिए सभी मशीनों को उनके खेतों तक पहुँचाया। उन्होंने कहा राज्य में अधिकांश खेतों में कटाई का काम पूरा हो चुका है। अगर किसी किसान के फसल का नुकसान हुआ है तो उन्हें 48 घंटे के भीतर मुआवजा देने की व्यवस्था की है।

योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम के दौरान कहा कि राज्य के अलग-अलग जनपदों में माइग्रेंट श्रमिकों की वापसी से कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। लोग ट्रकों और मालगाड़ियों में छुपकर आ रहे हैं जो सरकार के लिए एक चुनौती है। उन्होंने प्रवासी मजदूरों से अपील की है कि वो पैदल यात्रा न करें। इससे उनके साथ-साथ अन्य लोगों के स्वास्थ्य को भी खतरा है। उन्होंने मजदूरों को आश्वस्त करते हुए कहा कि केंद्र और यूपी सरकार उनके साथ है, वे चिंता न करें।

साथ ही उन्होंने लॉकडाउन को चरणबद्ध तरीके से ख़त्म करने की प्रक्रिया को भी बताया। उन्होंने कहा कि उनका मकसद है कि जल्द ही ऑरेंज जोन को भी ग्रीन जोन में बदल दिया जाए। इसके लिए चरणबद्ध तरीके से काम करना होगा, जिससे कि कोरोना का चेन भी टूटे और लोगों का जनजीवन भी अस्त-व्यस्त न हो।

गौरतलब है कि सीएम योगी ने दूसरे प्रदेशों से लॉकडाउन के दौरान अब तक यूपी में आए सभी प्रवासी श्रमिकों व युवाओं के लिए गाँवों, कस्बों और संबंधित जनपदों में ही 15 लाख रोजगार व नौकरियाँ उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई कमिटी की प्रगति की समीक्षा की थी और उन्हें इसमें गति प्रदान करने के लिए कहा था। इससे पहले सीएम योगी आदित्यनाथ ने खादी से मास्क बनाने का तरीका अपनाकर 20 लाख महिलाओं व 6 लाख बुनकरों को रोजगार उपलब्ध करवाया था।

पंजाब में अब कार सवार ने पुलिसकर्मी को घसीटा, इससे पहले ASI का काट दिया था हाथ

पंजाब के जालंधर में एक युवक ने चेकपोस्ट पर तैनात पुलिसकर्मी पर कार चढ़ा दी। मिल्क बार चौक स्थित चेकपोस्ट पर खड़े पुलिसकर्मी को कार सवार काफी दूर तक घसीट कर ले गया। आरोपित युवक गिरफ्तार कर लिया गया है।

पुलिस ने कार चला रहे युवक को रुकने का इशारा भी किया, लेकिन कार को रोकने की बजाए वह काफी दूर तक एएसआई मुल्ख राज को कार की बोनट पर घसीटता ले गया। सौभाग्य से पुलिसकर्मी को कोई गंभीर चोट नहीं आई हैं। इस घटना का वीडियो कैमरे में कैद हो गया है। एसएचओ सुरजीत सिंह ने बताया कि युवक की पहचान अमोल के रूप के हुई है। पुलिस ने युवक के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है और आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

उल्लेखनीय है कि देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान पंजाब से पहले भी पुलिस से बदसलूकी की कई खबरें आई हैं। कुछ दिनों पहले ही पंजाब के पटियाला शहर में स्थित सब्जी मंडी में कोरोना वायरस के चलते कर्फ्यू पास माँगने पर निहंग सिखों के एक समूह की पुलिस से झड़प हो गई थी। इस दौरान निहंग सिख ने हमला करके एएसआई हरजीत सिंह का हाथ काट दिया था।

‘तबलीगी हीरो’ ट्ववीट पर IAS अधिकारी को नोटिस, आम चुनावों के दौरान भी हुई थी मोहम्मद मोहसिन पर कार्रवाई

कर्नाटक सरकार ने शुक्रवार को आईएएस अधिकारी मोहम्मद मोहसिन को एक ट्वीट को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया। उन्होंने संक्रमण मुक्त हो चुके तबलीगी जमात के सदस्य द्वारा अन्य मरीजों के लिए प्लाज़्मा दान करने पर टिप्पणी की थी।

कर्नाटक कैडर के आईएएस अधिकारी मोहम्मद मोहसिन ने कोरोना से स्वस्थ हुए तबलीगी जमात के लोगों की ओर से अन्य मरीजों के इलाज के लिए प्लाज्मा दान करने को लेकर ट्वीट किया था। 27 अप्रैल को किए गए ट्वीट में उन्होंने लिखा था कि केवल दिल्ली में 300 से अधिक ‘तबलीगी हीरो’ देश की सेवा के लिए प्लाज्मा दान कर रहे हैं। लेकिन ‘गोदी मीडिया’ इन हीरो के मानवता कार्य को नहीं दिखाएगा। मूल रूप से बिहार के रहने वाले मोहम्मद मोहसिन इस समय पिछड़ी जाति कल्याण विभाग के सचिव के रूप में कार्यरत हैं।

राज्य सरकार ने मोहसिन के ट्वीट को गंभीरता से लेते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में उनसे पाँच दिन के भीतर अखिल भारतीय सेवा के नियमों (All India Services (Conduct) Rules, 1968) के उल्लंघन पर लिखित जवाब देने के लिए कहा गया है। कर्नाटक सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह शक्तिशाली अधिकारियों पर भी कार्रवाई करने से नहीं हिचकेगी, अगर उनकी गतिविधियाँ ऐसे समय में समरसता को खराब करती है जब कोविड-19 के लिए एकजुटता की जरूरत है। नोटिस में कहा गया है कि अगर वो पाँच दिनों के भीतर स्पष्टीकरण नहीं देते हैं, तो उनके खिलाफ All India Services (Discipline and Appeal) Rules, 1969 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि आईएएस अधिकारी मोहम्मद मोहसिन पिछले साल उस समय चर्चा में आए थे, जब अप्रैल में ओडिशा दौरे के दौरान चुनाव पर्यवेक्षक के नाते उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हेलीकॉप्टर की जाँच करने की कोशिश की थी और चुनाव आयोग ने उन्हें 17 अप्रैल को निलंबित कर दिया था।

गौरतलब है कि पिछले दिनों प्लाज़्मा थेरेपी से कोरोना वायरस (COVID-19) के उपचार की बात पर स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा था कि यह थेरेपी अभी सिर्फ प्रायोगिक चरण में ही है। इसके साथ ही उन्होंने कहा था कि कोरोना वायरस के उपचार में यदि प्लाज्मा थेरेपी का प्रयोग दिशा-निर्देशों के अनुसार नहीं हुआ तो यह जान के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है।

गौरतलब है कि दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज में तबलीगी जमात के मजहबी कार्यक्रम हुए, जिसमें प्रशासन के दिशा-निर्देशों और लॉकडाउन का खुला उल्लंघन किया गया। इसके बाद सैकड़ों लोग अलग-अलग राज्यों में जाकर छिप गए। उन्हें खोजने गए पुलिसकर्मियों और उनकी स्क्रीनिंग के लिए गई मेडिकल टीम पर हमले भी हुए। मजहबी कार्यक्रम में भाग लेने के बाद ये तबलीगी देश के कई हिस्सों में जाकर छिप गए। इसकी वजह से कोरोना संक्रमण मामले में धड़ल्ले से इजाफा होता दिखा। पिछले दिनों रायबरेली में 33 कोरोना पॉजिटिव मरीज मिले थे, जिसमें 31 के ताल्लुकात तबलीगी जमात से थे