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गुजरात: कोरोना संक्रमण रोकने के लिए मुस्लिम बहुल क्षेत्र में पाँच पुलों को किया बंद, कहा- घर पर मनाएँ रमजान

गुजरात के अहमदाबाद शहर में लगातार बढ़ते कोरोना मरीजों की संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन चिंतित है। इसके बाद संक्रमण की रोकथाम के लिए प्रशासन ने शहर के बीच से निकलने वाली साबरमती के पाँच पुलों को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है। साथ ही अल्पसंख्यक बाहुल्य इलाकों के लोगों से खास अपील करते हुए प्रशासन ने लोगों से घर में ही रमजान मनाने की अपील की है।

जानकारी के मुताबिक अहमदाबाद शहर में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों की रोकथाम के लिए शहर प्रशासन ने साबरमती के ऊपर बने दो और पुल, अम्बेडकर ब्रिज और सरदार ब्रिज पर वाहनों की आवाजाही को बंद कर दिया है। इससे पहले शहर प्रशासन ने नेहरू ब्रिज, दधीचि ब्रिज और गाँधी ब्रिज पर वाहनों की आवाजाही को बंद कर दिया था। इसी के साथ बंद किए गए पुलों की संख्या अब पाँच हो गई है।

दरअसल, सरदार ब्रिज जमालपुर को पालड़ी क्षेत्र को जोड़ता है और वहीं एक फ्लाईओवर क्षेत्र को स्टेट ट्रांसपोर्ट बस टर्मिनल से जोड़ता है, हालाँकि, 2002 में हुए भयानक गुजरात दंगों के दौरान भी इस पुल के यातायात को लिए बंद नहीं किया गया था।

घर पर ही मनाएँ रमजान

गुजरात के अहमदाबाद महानगरपालिका के कमिश्नर आईएएस अधिकारी विजय नेहरा ने रविवार(3 मई, 2020) मीडिया से बात करते हुए कहा कि बाहर निकलकर कोरोना संक्रमण का खतरा मोल लेने के बजाय घर पर रहकर ही पवित्र रमजान मनाएँ। मुस्लिम बहुल जमालपुर वार्ड के लोगों को विशेष एहतियात बरतने की जरूरत है क्योंकि अब तक शहर में हुई कुल मौतों में से 33 प्रतिशत अकेले वहाँ ही हुई हैं। कुल संक्रमितों का एक बड़ा हिस्सा भी वहीं से हैं।

विजय नेहरा ने कहा कि हमारे लिए यह जरुरी है कि हम अनुशासित में रहें और संकल्प लें कि हम 14 दिनों तक घर पर रहेंगे और अनावश्यक रूप से बाहर निकलकर संक्रमण का जोखिम नहीं उठाएँगे। हमने देखा है कि शहर के बहुत से लोगों ने 40 दिनों के लॉकडाउन को गंभीरता से नहीं लिया। हमें अब यह समझने की जरूरत है कि यह एक गंभीर बात है।

आपको बता दें कि अन्य महानगरों के साथ अहमदाबाद शहर को भी रेड जोन में रखा गया है। अब तक अहमदाबाद में कोरोना वायरस के रिकॉर्ड 3,500 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं, जो कि गुजरात राज्य में सबसे अधिक है। इनमें से 37 लोग वेंटिलेटर पर हैं और 2,815 सक्रिय मामले हैं।

राहत की बात यह कि इनमें से 525 मरीज ठीक होकर घर जा चुके हैं। वहीं अहमदाबाद में दस वार्डों को कंटेनमेंट जोन में रखा गया है, जिनमें दानी लिमडा, मणिनगर, जमालपुर, खड़िया, दरियापुर, शाहपुर, असरवा, बेहरामपुरा, गोमतीपुर और सरसपुर शामिल हैं।

तबलीगी जमात सबसे बड़ी समस्या

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने एक मीडिया हाउस के साथ बातचीत करते हुए कहा था कि राज्य में कोरोना वायरस पॉजिटिव मामले दिल्ली स्थित मरकज निजामुद्दीन में हुए तबलीगी जमात के से संबंधित है, क्योंकि जमात के लोगों ने अपनी यात्रा के संपर्कों को छिपाया था। उन्होंने कहा कि शहर की महज 10 प्रतिशत आबादी वाले पुराने अहमदाबाद में ही 90 प्रतिशत कोरोना संक्रमिल मामले मिले।

विजय रूपाणी ने राज्य में कोरोनो वायरस के बढ़ते मामलों के लिए तबलीगी जमात को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि राज्य सरकार इसे समझने में असफल रही।रुपाणी से पहले, यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के सीएम त्रिवेणी सिंह रावत, और मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान ने अपने-अपने राज्यों में कोरोनो वायरस के तेजी से बढ़ते मामलों के लिए तबलीगी जमात को ही जिम्मेदार ठहराया था।

आपको बता दें कि स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक गुजरात में कोरोना से मरने वालों की संख्या 262, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 5054 हो गई है। वहीं राहत की बात यह है कि राज्य में कुल 896 मरीज ठीक होकर अस्पतालों से घर जा चुके हैं।

मैंने ना तो माफी माँगी है और न ही ट्वीट डिलीट किया है: हिंदुओं को अरब की धौंस दिखाने वाले जफरुल इस्लाम

अरब के मजहब विशेष के नाम पर हिन्दुओं को धमकी देने वाले दिल्ली की अरविन्द केजरीवाल सरकार में माइनॉरिटी कमीशन (दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग) के अध्यक्ष जफरुल इस्लाम ख़ान ने कहा है कि उन्होंने न तो अपना ट्वीट डिलीट किया है और न ही इसके लिए माफी माँगी है। उन्होंने कहा है कि अपनी बात पर अब भी कायम हैं।

जफरुल इस्लाम का बयान

जफरुल इस्लाम ने कहा, “कुछ मीडिया हाउस ने इस तरह से रिपोर्ट किया कि मैंने अपने ट्वीट के लिए माफी माँगी और उसे डिलीट कर दिया है। मैंने अपने ट्वीट के लिए माफी नहीं माँगी है और न ही उसे डिलीट किया है। मैंने ट्वीट के लिए नहीं बल्कि मेडिकल इमरजेंसी के समय ट्वीट करने के लिए खेद जताया था। वो ट्वीट अभी भी मेरे ट्विटर और फेसबुक अकाउंट पर उपलब्ध हैं। 1 मई 2020 को अपने बयान में मैंने कहा था कि मैं अभी भी अपने विचार के साथ पूरी दृढ़ता के साथ खड़ा हूँ। मैं आगे भी देश में घृणित राजनीति के खिलाफ लड़ता रहूँगा। FIR, गिरफ्तारी या फिर जेल भी मुझे अपने रास्ते पर जाने से नहीं रोक सकती, जो रास्ता मैंने अपने देश को, अपने लोगों को भारतीय सेकुलर हुकूमत को और संविधान को बचाने के लिए अपनाए हैं।” 

बता दें कि 28 अप्रैल को जफरुल इस्लाम ने ट्वीट कर कहा था कि कट्टर हिन्दुओं को शुक्र मनाना चाहिए कि भारत में रह रहे दूसरे मजहब के लोगों ने अरब जगत से कट्टर हिन्दुओं द्वारा हो रहे ‘घृणा के दुष्प्रचार, लिंचिंग और दंगों’ को लेकर कोई शिकायत नहीं की है और जिस दिन ऐसा हो जाएगा, उस दिन अरब के लोग एक आँधी लेकर आएँगे, एक तूफ़ान खड़ा कर देंगे। इस पर माफी की बात आई थी लेकिन अभी उन्होंने इनकार कर दिया है। बता दें कि इस्लाम के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने देशद्रोह का केस दर्ज किया है।

खान ने पोस्ट में शाह वलीहुल्ला देहलवी, अबू हस्सान नदवी, बहुदुद्दीन खान और ज़ाकिर नाइक को हीरो की तरह पेश किया था। बता दें कि मलेशिया में रह रहे इस्लामी प्रचारक ज़ाकिर नाइक को वापस लाने के लिए भारत सरकार प्रयत्न कर रही है और उसके ख़िलाफ़ मनी लॉन्ड्रिंग से लेकर आतंकियों को भड़काने तक के आरोप हैं।

इसके बाद कुछ मीडिया हाउस ने बताया कि जफरुल इस्लाम ने अपने इस बयान के लिए माफी माँगी है। जिसमें कहा गया कि इस्लाम ने कहा, “28 अप्रैल, 2020 को मेरे द्वारा जारी किए गए ट्वीट में उत्तर-पूर्वी जिले की हिंसा के संदर्भ में कुवैत को भारतीय समुदाय विशेष के उत्पीड़न पर ध्यान देने के लिए धन्यवाद दिया गया, कुछ लोगों को इससे पीड़ा हुई, जो कभी भी मेरा उद्देश्य नहीं था। मुझे महसूस हुआ कि जिस समय पूरा देश मेडिकल इमरजेंसी का सामना कर रहा है, उस समय मेरा ये ट्वीट असंवेदनशील था, मैं उन सभी से माफी माँगता हूँ, जिनकी भावनाएँ आहत हुईं।” 

इंग्लिश बोलने से लेकर UPSC और बैंकिंग तक की FREE तैयारी करवा रही सरकार, 15 मई तक कर सकते हैं Apply

ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन (AICTE) नौकरी से संबंधित हुनर के लिए 49 कोर्स लेकर आई है। ये सारे कोर्स फ्री हैं और ऑनलाइन हैं। कोरोना वायरस के चलते हुए लॉकडाउन में खुद को अपग्रेड करने का यह शानदार ऑफर है। इनमें इनमें डिप्लोमा, सर्टिफिकेट और स्किल कोर्सेज शामिल हैं। इनमें से कुछ कोर्सेज सभी लोगों के लिए खुले हैं, जबकि कुछ विशिष्ट स्ट्रीम के छात्रों के लिए है। इन कोर्स में अप्लाई करने की अंतिम तारीख 15 मई है। इसके रजिस्ट्रेशन के लिए उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट aicte.org पर आवेदन करना होगा।

इस वक्त लॉकडाउन चल रहा है। ऐसे में सभी स्कूल, विश्वविद्यालय, कोचिंग सेंटर्स बंद हैं। छात्रों की पढ़ाई का नुकसान न हो, इसलिए स्कूल और सरकार विभिन्न प्रयास कर रहे हैं। छात्रों के लिए ऑनलाइन क्लासेज लगाई जा रही है। इसी बीच अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) ने एक नई पहल करते हुए विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन माध्यम से 49 फ्री कोर्सेज की सुविधा दे रही है। बता दें कि ये कोर्स अलग-अलग कंपनियों द्वारा ऑफर किए जा रहे हैं।

यह आवेदन ऑनलाइन रस्जिस्ट्रेशन के जरिए कोई भी व्यक्ति कर सकता है। आइए जानते हैं इनमें से कुछ कोर्सेज के बारे में जो सभी स्ट्रीम के लोगों के लिए मददगार है:

UPSC के लिए (NCERT से संबंधित)

UPSC परीक्षा की तैयारी करने वालों के लिए एनसीईआरटी की पुस्तकें आधार का काम करती हैं। इस पाठ्यक्रम में, सिविल सेवाओं में आवश्यक सभी एनसीईआरटी पुस्तकों की मूल अवधारणाओं को जानेंगे और इससे यूपीएससी तैयारी शुरू करने में मदद मिलेगी। इसमें करियर लॉन्चर की यूपीएससी संकाय से संबंधित सर्वश्रेष्ठ 150 घंटे से अधिक की वीडियो कक्षाएँ शामिल हैं।

बैंकिंग की शुरुआती तैयारी

ऐसे लाखों आकांक्षी हैं, जो सरकारी बैंकिंग परीक्षाओं के माध्यम से बैंकिंग में प्रवेश करना चाहते हैं। एंट्रेंस एग्जाम क्लियर करने के लिए सिर्फ नॉलेज की नहीं, बल्कि एग्जाम क्रैक करने की भी जरूरत होती है। इसके लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक अपने स्कोर को अधिकतम करने के लिए रणनीतियों को विकसित करने के साथ-साथ पर्याप्त संख्या में मॉक टेस्ट देना भी शामिल होता है। करियर लॉन्चर के बैंकिंग मॉक टेस्ट के साथ, आपको अपनी तैयारी के लिए 500 से अधिक ऑल इंडिया मॉक टेस्ट और कई बैंकिंग परीक्षाओं (40 से अधिक परीक्षाओं) के लिए 100 सेक्शनल मॉक टेस्ट प्राप्त होंगे।

इंटर्नशिप का मौका

इसमें छात्र लाइव डेटा और बिल्ड मॉडल पर काम करके मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सीख सकेंगे। यह एक स्व-पुस्तक पाठ्यक्रम है, जो सात मॉड्यूलों में विभाजित है, जहाँ छात्र समय के साथ काम करना सीख सकते हैं।

इंग्लिश पर पकड़ और इंटरव्यू की तैयारी

WordsMaya द्वारा पेश किया गया यह पाठ्यक्रम नि:शुल्क है। इस कोर्स का उद्देश्य अंग्रेजी बोलने और लिखने के साथ-साथ आपके आत्मविश्वास को मजबूत करना भी है। यह व्यक्तित्व विकास और साक्षात्कार प्रशिक्षण भी प्रदान करता है। पाठ्यक्रम में 50 घंटे की चैट-आधारित इंटरैक्टिव ऑडियो-विज़ुअल सामग्री है।

डिजिटल मार्केटिंग

यह कोर्स सर्च इंजन ऑप्टिमाइजेशन (SEO), सर्च इंजन मार्केटिंग (SEM), कंटेंट मार्केटिंग, ई-मेल मार्केटिंग, सोशल मीडिया मार्केटिंग, वेब एनालिटिक्स और एकीकृत डिजिटल मार्केटिंग जैसी सोशल मिडिया स्किल में आपकी धार को तेज करेगा। इसकी कक्षाओं में पीपीटी, क्लास नोट्स, कैसेट, वीडियो और असाइनमेंट भी शामिल होंगे।

अलाउद्दीन खिलजी भारत का रक्षक था, वो सेक्युलर था: जावेद अख्तर ने बोला झूठ पर झूठ

गीतकार जावेद अख्तर अपनी गलतबयानी के कारण जाने जाते हैं। हाल ही में एक टीवी शो के दौरान लेखक तारिक फतह से बहस के दौरान उन्होंने झूठ और भ्रम का पुलिंदा खड़ा कर दिया। उन्होंने अलाउद्दीन खिलजी का बचाव किया, बख्तियार खिलजी को अलाउद्दीन समझ लिया और उर्दू भाषा को लेकर भी झूठी बातें की। तारिक फतह पर व्यक्तिगत हमले करके उन्होंने अपने उग्र स्वभाव का भी परिचय दिया।

जब तारिक फतह ने कहा कि खिलजी ने नांलदा यूनिवर्सिटी को जलाया तो उनका आशय बख्तियार खिलजी से था। उसके नाम पर ही पटना में बख्तियारपुर शहर का नामकरण किया गया है। लेकिन, जावेद अख्तर का जवाब था कि अलाउद्दीन एक बड़ा डिफेंडर था। यानी, उनको दोनों खिलजियों के बीच कोई अंतर ही नहीं पता था। उन्होंने ये भी दावा किया कि अलाउद्दीन खिलजी सेक्युलर था और वो हजरत निजामुद्दीन औलिया के दरगाह पर नहीं गया था।

सोशल मीडिया पर इतिहासकार ‘ट्रू इंडोलॉजी’ के हैंडल द्वारा एक के बाद उनके फेक दावों के पीछे की सच्चाई बताई गई है। दरअसल, अल्लाउद्दीन खिलजी निजामुद्दीन दरगाह पर गया था। अमीर ख्वार्ड ने अपने ‘शीरत उल औलिया’ में भी इस बात का जिक्र किया है। जावेद अख्तर का ये दावा कि खिलजी निजामुद्दीन दरगाह नहीं गया था, कहीं भी वर्णित नहीं है। फिर कहाँ से उन्होंने ये बातें लाईं?

आज भी अलाउद्दीन खिलजी के हरजत निजामुद्दीन औलिया के दरबार में हाजिरी लगाने की बातें सुनी-सुनाई जाती हैं। जावेद अख्तर ने तो खिलजी को कंधार में किला बना कर भारत की मंगोलों से रक्षा करने वाले करार दिया। ये भी फर्जी दावा है। असल में कंधार उसके साम्राज्य का हिस्सा था ही नहीं। उसका राज्य सिंधु नदी पर ही ख़त्म हो जाता था और पश्चिम में मुल्तान तक ही उसकी सीमा थी। यहाँ तक कि पेशावर भी मंगोलों के कब्जे में था।

उस समय कंधार को तिगिनाबाद के नाम से जाना जाता था और उस पर पूरी तरह मंगोलों का कब्जा था। खिलजी ख़ुद खल्ज का रहने वाला हुआ करता था, जो अफ़ग़ानिस्तान में स्थित था और मंगोल के कब्जे में था। वहाँ के शासक अक्सर पंजाब पर हमले किया करते थे। इसीलिए, ये दावा ही झूठा है कि खिलजी ने भारत को बचाया। यहाँ तक कि खिलजी के अब्बा ख़ुद मंगोलों से बच कर भारत आए थे। अफ़ग़ानिस्तान पर मंगोलों ने कब्ज़ा किया और खिलजी परिवार कुछ नहीं कर पाया। खिलजी ने कभी ‘ग्रेट मंगोल एम्पायर’ को नहीं हराया।

खिलजी का शासन इतना क्रूर था कि हर हिन्दू को अपने उत्पादन का आधा माल उसे देना होता था। कोई हिन्दू गरीब हो या धनवान, उसके जानवरों पर भी टैक्स लगाया जाता था। हिन्दुओं को घोड़े रखने की इजाजत नहीं थी, वो अच्छे कपड़े नहीं पहन सकते थे और वो हथियार भी नहीं रख सकते थे। जावेद अख्तर ने इन बातों को पढ़ कर जवाब तो नहीं दिया लेकिन कहा कि वो भागेंगे नहीं और जवाब देंगे।

बात दें कि तारिक फतेह ने बच्चों का नाम तैमूर रखने पर आपत्ति जताई थी तो जावेद अख्तर ने जवाब दिया था कि तैमूर ने कभी दिल्ली में शासन ही नहीं किया। तारिक फतेह ने बाबर और औरंगजेब को मजहब के नाम पर लानत बताया था। जावेद अख्तर ने इस दौरान अश्वमेध यज्ञ की आलोचना की थी और कहा था कि ये साम्राज्यवाद की निशानी थी, जो आज नहीं चल सकती और ग़लत ही लगेगा। इसी तरह मुगलों ने भी जो किया, वो उस वक़्त के हिसाब से ठीक था। उन्होंने तबरेज की मौत को भी मुद्दा बनाया था

बरेली: मनरेगा में धाँधली के आरोप पर प्रधान समर्थकों ने की मारपीट, अपमानित साधु ने पीया जहर, हालत गंभीर

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के एक गाँव में चल रहे मनरेगा के कार्यों में मानकों की अनदेखी का एक साधु ने आरोप लगाया तो ग्राम प्रधान के समर्थकों ने साधु के साथ मारपीट की। इसके बाद साधु ने अपमान से झुब्ध होकर जहर खा लिया। अब साधु को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मामला बढ़ता देख अब बरेली पुलिस जाँच में जुट गई है।

जानकारी के मुताबिक बरेली जिले के बिशारतगंज के गाँव बेहटा बुजुर्ग में इन दिनों मनरेगा के तहत विकास कार्य कराए जा रहे हैं। इस बीच गाँव के ही मंदिर पर रहने वाले साधु विजय देव नाथ महाराज ने प्रधान पर अधिक मजदूरों की हाजिरी लगाने और मनरेगा के कार्य में कई तरह से भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। इसे लेकर साधु ने प्रधान से रजिस्टर दिखाने की बात कही। आरोप है कि इसके बाद प्रधान के समर्थकों ने साधु को घेरकर उनके साथ मारपीट शुरू कर दी।

अपने साथ हुई मारपीट की लिखित सूचना साधु ने पुलिस को दी, लेकिन इसके बाद भी पुलिस ने साधु की शिकायत पर कोई एक्शन नहीं लिया। इस पर साधु ने अपने अपमान से क्षुब्ध होकर जहर खा लिया। इसकी जानकारी जैसे ही पुलिस को हुई तो पुलिस ने साधु को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया। इसके बाद साधु की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें डॉक्टरों ने जिला अस्पताल में रेफर कर दिया है।

मामले पर थाना प्रभारी निरीक्षक राजेश कुमार का कहना है कि गाँव में राजनीति चल रही है, जिसके चलते बाबा से मारपीट हुई। उन्होंने आत्महत्या करने की कोशिश की है। पुलिस को दोनों ओर से तहरीर मिल गई है। मामले में आगे की जाँच के आधार पर ही मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

वहीं बेहटा बुजुर्ग के ग्राम प्रधान भगवान दास यादव का कहना है कि बाबा विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि 17 अप्रैल को भी साधु विजय देव नाथ महाराज ने गाँव में हो रहे विकास कार्यों की जाँच को लेकर अनशन शुरू किया था, लेकिन क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों के आश्वासन पर साधु ने अनशन को समाप्त कर दिया था।

गौरतलब हो कि महाराष्ट्र के पालघर में हुई दो साधुओं के साथ एक ड्राइवर की पीट-पीटकर हत्या के बाद उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में भी (अप्रैल 28, 2020) दो साधुओं का शव खून से लथपथ बरामद हुआ था। घटना अनूपशहर के गाँव पगोना में घटी थी। यहाँ स्थित शिव मंदिर के परिसर में सो रहे दो साधुओं पर सोमवार देर रात धारदार हथियार से वार कर इनकी हत्या की गई थी।

हालाँकि पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपित युवक को गिरफ्तार कर लिया था। आरोपित की पहचान मुरारी उर्फ राजू के रूप में हुई थी।

पंजाब: क‌र्फ्यू पास माँगने पर बाइक सवार युवकों ने ASI पर किया हमला, धक्का देकर जमीन पर गिराया, केस दर्ज

क‌र्फ्यू में नाकों पर तैनात पुलिस कर्मचारियों पर लगातार हमले हो रहे हैं। ऐसा ही एक हमला पंजाब के तरनतारन जिले के सीमावर्ती गाँव खालड़ा में लगे नाके पर हुआ। बाइक सवार दो युवकों को जब पुलिस ने कर्फ्यू पास दिखाने के लिए कहा तो आरोपितों ने ASI सरबजीत सिंह पर हमला कर दिया। इस मारपीट का एक वीडियो भी सामने आया है। जिसमें दो युवकों को साफ तौर पर पुलिसकर्मी पर हमला करते हुए देखा जा सकता है।

दो युवकों ने ASI के साथ की मारपीट

दरअसल, थाना खालड़ा की पुलिस टीम अनाज मंडी को जाने वाले रास्ते में क‌र्फ्यू के दौरान नाकाबंदी की हुई थी। अनाज मंडी में जाने वाले वाहनों को रोककर क‌र्फ्यू पास चेक किए जा रहे थे। नाके पर तैनात पुलिस पार्टी की अगुआई ASI सरबजीत सिंह कर रहे हैं। इस बीच, बाइक पर सवार दो युवकों चरणजीत सिंह और आकाशदीप सिंह को रोका गया। पुलिस ने उन्हें क‌र्फ्यू पास व बाइक के कागजात दिखाने को कहा। इस पर दोनों युवक पुलिस से गाली-गलौज करने लगे। आरोपितों ने ASI सरबजीत सिंह के साथ धक्कामुक्की की और उन पर हमला कर दिया। 

पुलिस ने दर्ज किया केस

आरोपितों युवकों में से एक ने ASI को धक्का देकर गिरा दिया और फिर उनके साथ मारपीट की। इस दौरान उनकी पगड़ी भी उतर जाती है। हालाँकि, इसके बाद भी ASI उठते हैं और उन दोनों का विरोध करते हैं, लेकिन दोनों आरोपित फरार होने में कामयाब हो जाते हैं। दोनों के खिलाफ आईपीसी की धारा 35, 186, 188 और 269 के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। दोनों की तलाशी की जा रही है। पुलिस उन्हें जल्द ही गिरफ्तार कर लेगी।

पुलिसकर्मियों को बनाया जा रहा निशाना

कोरोना वायरस संक्रमण के खतरों के बीच ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों से मारपीट की घटनाएँ सामने आ रही हैं। लॉकडाउन का पालन करवाने वाले पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया जा रहा है। तरनतारन से पहले पंजाब के जालंधर में एक युवक ने चेकपोस्ट पर तैनात पुलिसकर्मी पर कार चढ़ा दी थी। मिल्क बार चौक स्थित चेकपोस्ट पर खड़े पुलिसकर्मी को कार सवार काफी दूर तक घसीट कर ले गया। आरोपित युवक गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस ने कार चला रहे युवक को रुकने का इशारा भी किया, लेकिन कार को रोकने की बजाए वह काफी दूर तक एएसआई मुल्ख राज को कार की बोनट पर घसीटता ले गया।

पटियाला हमले में तलवार से काटा था ASI का हाथ

इससे पहले पटियाला में निहंगों ने तलवार से हमला कर ASI का हाथ काट दिया था। इस मामले में पुलिस ने आरोपित निहंगों को गिरफ्तार कर लिया है। ASI का हाथ पूरी तरह से अलग हो गया था। पीजीआई में सात घंटे से ज्यादा वक्त तक चले ऑपरेशन में एएसआई हरजीत सिंह का हाथ पूरी तरह से जोड़ दिया गया। अब उन्हें महकमे में प्रमोट भी कर दिया गया है, साथ ही वे अस्पताल से डिस्चार्ज भी हो गए हैं।

153 क्रूड बम बरामद, तृणमूल कॉन्ग्रेस समर्थक शेख कासमुद्दीन पश्चिम बंगाल में मिदनापुर से गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल में पूर्वी मिदनापुर जिले के लालपुर गाँव में शेख कासमुद्दीन नामक एक स्थानीय निवासी और तृणमूल कॉन्ग्रेस (टीएमसी) समर्थक के घर के पीछे से 153 क्रूड बम बरामद किया गया। भगवानपुर पुलिस ने बमों की बरामदगी के साथ ही इस मामले के सिलसिले में चार लोगों को भी गिरफ्तार किया। इसके बाद तीन को प्रारंभिक पूछताछ के बाद रिहा कर दिया गया और कासमुद्दीन को कांथी कोर्ट में पेश किया गया। उसे न्यायाधीश ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। उसके घर के पीछे से जो कच्चे बम बरामद किए गए थे, उन्हें भी डिफ्यूज कर दिया गया है।

एगरा के उप-विभागीय पुलिस अधिकारी शेख अख्तर अली ने कहा, “अवैध रूप से जमा किए गए बम बरामद हुए थे और इसमें एक व्यक्ति को गिरफ्तार भी किया गया है। हम आरोपितों से इन कच्चे बमों को जमा करने के पीछे के मकसद के बारे में पूछताछ कर रहे हैं।”

इस घटना ने लालपुर गाँव के निवासियों में दहशत की स्थिति पैदा कर दी है। स्थानीय लोगों ने पुलिस से सवाल किया है कि इतनी बड़ी मात्रा में कच्चे बमों को कैसे उनकी निगरानी में जमा किया गया। कोरोनो वायरस लॉकडाउन के बीच 153 क्रूड बमों की बरामदगी को लेकर पुलिस भी असमंजस की स्थिति में है।

तृणमूल कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं में आपस में झड़प

भगवानपुर ब्लॉक में तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यवाहक सहायक सचिव और भगवानपुर-1 पंचायत समिति के सदस्य हारुन रशीद (बाबूलाल) के समर्थकों के बीच हुए झड़प के बाद क्षेत्र में पुलिस सक्रिय हो गई है। जानकारी के मुताबिक आरोपी शेख कासमुद्दीन इलाके में हारुन रशीद का समर्थक माना जाता है। रिपोर्टों के अनुसार, 11 अप्रैल को दो समूहों के बीच हिंसक लड़ाई हुई, जिसके बाद अजीमुल और अन्य 44 लोगों को गिरफ्तार किया गया। साथ ही झगड़ा रोकने के लिए उन्हें जिला नेतृत्व और ब्लॉक नेतृत्व की तरफ से चेतावनी भी दी गई थी।

भगवानपुर -1 ब्लॉक के तृणमूल अध्यक्ष मदन मोहन पात्रा ने कहा, “पार्टी की ओर से बार-बार चेतावनी दिए जाने के बावजूद उन्होंने बात नहीं मानी। वे सत्ता के लिए लड़ रहे थे और अशांति पैदा करने के लिए वे बमों को जमा भी कर रहे थे। पुलिस को कानून के अनुसार उनके खिलाफ़ कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।”

अवैध आतिशबाजी कारखाने में विस्फोट

गौरतलब है कि इस साल जनवरी में, पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के नैहाटी में एक अवैध पटाखा निर्माण कारखाने में हुए विस्फोट में कम से कम चार लोग मारे गए थे और एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया था। तब फैक्ट्री का मालिक नूर हुसैन को गिरफ्तार किया गया था और उसके खिलाफ हत्या के साथ-साथ अन्य धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।

विस्फोट की तीव्रता को देखते हुए तब स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि अवैध पटाखे के कारखाने का उपयोग कच्चे बम बनाने के लिए किया जाता था।

अर्नब से 12 घंटे पूछताछ करने वाली कॉन्ग्रेस को याद आया ‘प्रेस फ्रीडम’, इमरजेंसी तो याद ही होगी, सोनिया?

कॉन्ग्रेस पार्टी ‘वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स‘ में भारत के रैंक की बातें करते हुए पत्रकारों को न डरने को कह रही है। वही कॉन्ग्रेस, जिसकी सरकार महाराष्ट्र में अर्नब गोस्वामी और ‘रिपब्लिक टीवी’ के पीछे हाथ धोकर पड़ी हुई है। वही कॉन्ग्रेस, जो आपातकाल अर्थात इमरजेंसी के दौरान ये तय करती थी कि मीडिया में क्या छपेगा। कॉन्ग्रेस ने दावा किया कि भाजपा लोकतंत्र के चौथे खम्भे मीडिया को ध्वस्त करने में जुटी हुई है।

देश का पहला संविधान संशोधन कॉन्ग्रेस ने किया था। जवाहरलाल नेहरू ने प्रेस (ऑब्जेक्शनबल एक्ट), 1951 के माध्यम से मीडिया पर अंकुश लगाया था। इसके अनुसार, अगर किसी अधिकारी को लगे कि कुछ ‘आपत्तिजनक’ प्रकाशित हुआ है तो वो सेशन जज से मीडिया संस्थान के ख़िलाफ़ शिकायत कर सकता है। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ के एक लेख के बारे में नेहरू ने कहा था कि उसमें उनकी काफ़ी आलोचना की गई है जो सही नहीं है। उस लेख को लिखने वाले को ही डिसकंटीन्यू कर दिया गया। तब कहाँ गया था ‘प्रेस फ्रीडम’?

कॉन्ग्रेस शायद जून 1975 को भूल गई है, जब उसने आपतकाल लगाया था। इंदिरा गाँधी ने मीडिया से स्पष्ट कहा था कि उसे कुछ सरकारी दिशानिर्देशों का अनुसरण करना होगा। अर्थात, प्रेस को बाँध दिया गया था। संविधान का हनन हो रहा था और अख़बारों पर सेंसरशिप लाद दी गई थी। ‘द गार्डियन’ और ‘द इकनॉमिस्ट्स’ के कॉरेस्पॉन्डेंट तो धमकी मिलने के बाद यूके भाग खड़े हुए। खबरों को सेंसर करने के लिए ‘चीफ प्रेस एडवाइजर’ का पद बनाया गया।

मीडिया को कहा गया कि अगर कुछ भी छापना है तो इसके लिए ‘चीफ प्रेस एडवाइजर’ से अनुमति लेनी होगी। मई 1976 में तो हद ही हो गई, जब 7000 से भी अधिक मीडियाकर्मियों को जेल में ठूँस दिया गया। उनका अपराध इतना ही था कि वो अपना काम कर रहे थे। वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नायर को गिरफ़्तार कर लिया गया था। लालकृष्ण आडवाणी ने जेल से निकलने के बाद मीडिया से ये ऐतिहासिक वाक्य कहा था- ‘आपको तो सिर्फ़ झुकने को कहा गया था, आप सब तो रेंगने लगे।‘

हालिया, अर्नब गोस्वामी प्रकरण से क्या जाहिर होता है? पालघर में साधुओं की भीड़ द्वारा पुलिस के सामने नृशंस हत्या कर दी गई और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी से सवाल पूछने के कारण पत्रकार अर्नब गोस्वामी को थाने बुला कर उनके साथ 12 घंटे तक पूछताछ की गई। उन पर और उनकी पत्नी पर कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने हमले किए सो अलग। देश भर में एफआईआर की झड़ी लगा दी गई। पत्रकारों को असली डर तो कॉन्ग्रेस से ही है।

यहाँ तक कि ‘रिपब्लिक टीवी’ के अन्य पत्रकारों को भी परेशान किया जा रहा है। ख़ुद पर हुए अटैक के बाद अर्नब ने एक पत्र में लिखा था कि कॉन्ग्रेस की इस हमले में भागीदारी है, जिसे पुलिस नज़रअंदाज़ कर रही है। अर्नब ने कहा था कि एफआईआर फॉर्म में सिर्फ़ पकड़े गए यूथ कॉन्ग्रेस के दोनों कार्यकर्ताओं का नाम है, जबकि उनके साथ इस साज़िश में शामिल अन्य लोगों के नाम नहीं हैं। महाराष्ट्र की मशीनरी किसके इशारे पर ये सब कर रही है? अगर कॉन्ग्रेस पाक-साफ़ है तो उसने विरोध क्यों नहीं किया?

पश्चिम बंगाल में पत्रकारों पर हमला कर के उन्हें मारा-पीटा जाता है, कॉन्ग्रेस चुप रहती है। कर्नाटक में कुमारस्वामी के मुख्यमंत्री रहते उनके ख़िलाफ़ लिखने वाले सम्पादकों पर कार्रवाई की जाती है लेकिन कॉन्ग्रेस साथ में सत्ता की मलाई चाभते रहती है। उस सरकार पर फोन टैपिंग के आरोप लगते हैं लेकिन कॉन्ग्रेस भी इसमें भागीदार होने के कारण चुप रहती है। कुमारस्वामी ने तो बेटे को भाव न दिए जाने पर मीडिया के बहिष्कार की ही चेतावनी दे डाली थी।

अगर ‘प्रेस फ्रीडम इंडेक्स’ की ही बात की जाए तो इसका रैंक गिराने में कॉन्ग्रेस का सबसे ज्यादा योगदान है। जब अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा सत्ता में थी, तब 2003 में भारत का 120वाँ रैंक था। अगले 10 वर्षों तक सोनिया गाँधी ने पर्दे के पीछे से सरकार चलाई और जब उसका शासन ख़त्म हुआ तो भारत फिसल कर 140वें स्थान पर आ गया। अगर आज रैंक 142 है तो इतना हंगामा क्यों?

कॉन्ग्रेस जहाँ सत्ता में हो, वहाँ प्रेस फ्रीडम का मुद्दा ही गायब कर दिया जाता है। जहाँ पार्टी विपक्ष में हो, वहाँ उसे पत्रकारों का दर्द नज़र आने लगता है। कॉन्ग्रेस महाराष्ट्र में अर्नब गोस्वामी के ख़िलाफ़ ‘विच हंट’ पर जाती है लेकिन भाजपा पर बिना किसी घटना का जिक्र किए पत्रकारों को डराने का आरोप लगा देती है।

2000 यौन दासियों के साथ किम जोंग उन महल में कैद, कोरोना वायरस से बचने को निकाला यह तरीका: मीडिया रिपोर्ट

उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन के बारे में कई रिपोर्ट आ चुकी है। उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए के अनुसार पहले यह बताया गया कि एक उर्वरक कारखाने के उद्घाटन में भाग लेने के लिए वो पिछले 21 दिनों में पहली बार सार्वजनिक तौर पर दिखे। इस बीच तानाशाह किम जोंग उन के स्वास्थ्य और संभावित मौत पर बढ़ती अटकलों ने तब तेज़ी पकड़ ली थी, जब वे उत्तर कोरिया के सबसे महत्वपूर्ण दिन यानी अपने दिंवगत दादा की जयंती में उपस्थित नहीं हुए थे।

अब एक नया खुलासा हुआ है। द सन द्वारा प्रकाशित एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उत्तर कोरियाई तानाशाह जनता की नज़रों से इसीलिए गायब थे, क्योंकि वह कोरोना वायरस से बचने के लिए कोरियाई प्रायद्वीप के पूर्वी हिस्से में स्थित वॉनसन में अपने निजी लक्जरी विला में 2000 सेक्स स्लेव्स के साथ जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

Satellite image © 2020 Maxar Technologies-38 North/Handout via REUTERS.

खबरों के मुताबिक, सैटेलाइट चित्रों के द्वारा किम जोंग उन की अपनी निजी ट्रेन के अलावा लग्जरी नावों को वॉनसन विला के पास तैनात देखा गया है।

वॉनसन में किम जोंग उन का निजी विला

कोरियन तानाशाह ने 2015 में अपने दिवंगत दादा के “प्लेजर स्क्वाड” (टॉप अधिकारियों के मनोरंजन के लिए नाबालिग लड़कियों के दस्‍ते बनाए जाते हैं, जिन्‍हें Pleasure Squad कहते हैं) या गुप्त सेक्स मनोरंजन के किप्पुमो को फिर से शुरू कर दिया। द सन ने बताया कि 2000 महिलाओं को किम ने “प्लेजर स्क्वाड” के रूप में विला में रखा है।

पिछला “प्लेजर स्क्वाड” दिसंबर 2011 में पुराने तानाशाह की मौत पर समाप्त कर दिया गया था, लेकिन आधिकारिक तीन साल की शोक अवधि समाप्त होने के बाद, किम ने 2015 में फिर अपना खुद का “प्लेजर स्क्वाड” शुरू किया।

अखबार ने बताया कि उनके अति-संरक्षित महलों की दीवारों के भीतर, उनकी “प्लेजर स्क्वाड” उच्च-रैंकिंग वाले उत्तर कोरियाई अधिकारियों के लिए मनोरंजन प्रदान करती है।

2000 लड़कियों के हरम को “राष्ट्र के कुलीन वर्ग के लिए गाने और नृत्य करने के लिए रखा जाता है- साथ ही वे अलग-अलग तरह के यौन संबंधित चीजों में भाग लेती हैं।” मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, किम को अपने लव ऑफ बूज़ (बढ़िया के शराब के शौक) और बढ़िया भोजन के लिए भी जाना जाता है और “प्लेजर स्क्वाड” को उनके इन सभी सुखों का हमेशा ध्यान रखना होता है।

कुछ लड़कियों के बारे में कहा जाता है कि वे नाबालिग थीं और उन्हें बहुत कम उम्र में सेक्स स्लेव बनने के लिए मजबूर किया गया था। उत्तर कोरिया के ही प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोप लगाया है कि लड़कियों को स्क्वाड का सदस्य बनने से पहले उनके कुँवारी होने की पुष्टि की जाती है, जिसके लिए उन्हें बहुत ही सघन मेडिकल परीक्षण से गुजरना पड़ता है।

उत्तर कोरिया के संस्थापक, किम इल-सुंग का “प्लेजर स्क्वाड”

देश (उत्तर कोरिया) के शाश्वत राष्ट्रपति माने जाने वाले व उत्तर कोरिया के संस्थापक किम इल-सुंग ने अपने शासनकाल के दौरान “प्लेजर स्क्वाड” की शुरुआत की थी। 1970 के दशक के अंत में, उन्होंने अपने अधिकारियों को क्लब में शामिल होने के लिए देश भर से सबसे आकर्षक महिलाओं और लड़कियों को ढूँढ निकालने के लिए भेजा।

किम इल-सुंग का कुँवारी लड़कियों के विषय में एक धारणा थी कि उनके साथ यौन संबंध बनाने से उन्हें लड़कियों की जीवन-शक्ति को अब्ज़ॉर्ब करने में मदद मिलती है। इसके लिए लड़कियों के माता-पिता को सूचित किया जाता था कि उनकी बेटियों को एक महत्वपूर्ण मिशन पर किम इल-संग (Kim il-sung) की सेवा के लिए चुना गया है, और इस मामले में उनकी तरफ से कोई आपत्ति नहीं होती थी। 20 वर्ष की उम्र में अपने यौन कर्तव्यों से “सेवानिवृत्त” होने के बाद उत्तर कोरिया की सेना में उच्च पदस्थ अधिकारी तब उन महिलाओं पर अपनी पत्नी होने का दावा करते थे।

किम जोंग उन के मौत की अफवाहें

रिपोर्ट्स के अनुसार, किम जोंग उन ने 11 अप्रैल को पार्टी पोलित ब्यूरो की अध्यक्षता की। राज्य के मीडिया ने अगले दिन रिपोर्ट किया कि नेता ने लड़ाकू जेट का निरीक्षण किया था। उसके बाद किम देश की मीडिया रिपोर्ट्स से गायब हो गए थे।

15 अप्रैल को अपने दादा के जन्मदिन के समारोह में न पहुँचने पर उनके खराब स्वास्थ्य और संभावित मृत्यु के बारे में अटकलें सामने आईं। उनकी अनुपस्थिति ने लोगों के दिमाग में काफ़ी सवाल पैदा कर दिए। एक ऑनलाइन मीडिया आउटलेट, जिसे उत्तर कोरियाई डिफेक्टर्स द्वारा चलाया जाता है, ने बताया कि तानाशाह का पिछले महीने हृदय का इलाज चल रहा था। इसमें यह भी कहा गया था कि 30 वर्षीय किम को भारी धूम्रपान, मोटापे और थकान के कारण तत्काल उपचार की आवश्यकता थी।

हंदवाड़ा मुठभेड़: वीरगति को प्राप्त हुए 5 जवान, कट्टरपंथियों ने ‘HaHa’ रिएक्शन से मनाया जश्न

उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा में स्थित हंदवाड़ा में आतंकियों के साथ एनकाउंटर के दौरान 5 भारतीय जवान वीरगति को प्राप्त हो गए, जिनमें एक कर्नल और एक मेजर रैंक के अधिकारी भी शमिल हैं। इन्होंने एक इमारत में छिपे आतंकियों से लोहा लेने के लिए बाहर से हमला करने के बजाय अंदर जाना मुनासिब समझा, ताकि नागरिकों की जानमाल की क्षति न हो। अब फेसबुक पर कई कट्टरपंथी इस ख़बर पर ‘हाहा’ रिएक्ट करते और जश्न मनाते मिले हैं।

सबसे पहले बात करते हैं ‘जी न्यूज़’ की ख़बर की, जिसमें जवानों के वीरगति को प्राप्त होने की सूचना दी गई। इस ख़बर पर समुदाय विशेष के दर्जनों लोगों ने ‘हाहा’ रिएक्शन दिया, जिनमें गुल खान, मोहम्मद इरफ़ान, आसिफ जमाल, मलिक मुस्तफा, सेहरिश खान, दानिश राशिद और नाइमा बुखारी जैसे कई शामिल हैं। जमाल पंजाब के फगवाड़ा स्थित एलपीयू से पढ़ा हुआ है, तो मुस्तफा पंजाब के पटियाला में पढ़ता है। इनमें से कुछ श्रीनगर और पुलवामा के हैं। कई पाकिस्तानी भी हैं।

हंदवाड़ा में मुठभेड़ के बाद भारतीय जवानों के बलिदान पर जश्न मनाते कट्टरपंथी

अगर ‘जी न्यूज़’ के ही दूसरी ख़बर की बात करें तो इसमें भी श्रीनगर के सोहैल अहमद और आसिफ मंजूर समेत 31 ने ‘हाहा’ रिएक्शन दिया है। इनमें से कई ने अपना नाम उर्दू में लिख रखा है। इस पोस्ट में जवानों के वीरगति को प्राप्त होने के बारे में विस्तृत सूचना दी गई थी। जश्न मनाने वालों में सुहैल, आदिल, अब्दुल्ला, इक़्तिदार, मशरिक़, हामिद, फैज़ान, फरहान, फ़ारूक़ और फरीद सहित कई शामिल हैं।

दिल्ली के जाफराबाद का शफीक अंजुम भी इस ख़बर के बाद जश्न मनाता पाया गया। ‘इंडिया टुडे’ ने हंदवाड़ा मुठभेड़ की सूचना से सम्बंधित ख़बर पोस्ट की थी। शफीक ने लिखा, ‘5 कुत्ते मारे गए। वाह! सुबह-सुबह ही अच्छी ख़बर मिल गई। मेरे स्वतंत्रता सेनानियों ने तो कमाल ही कर दिया।‘ शफ़ीक़ के फेसबुक कमेंट्स और उसके प्रोफाइल डिटेल्स को नीचे संलग्न की गई ट्वीट में देखा जा सकता है:

इसी तरह ‘एबीपी न्यूज़’ ने भी जब इस घटना की ख़बर पोस्ट की, ‘हाहा’ रिएक्शन देने वाले आ पहुँचे। यहाँ भी मलिक शाकिर, आदिल खान, आकिब खान, तामजामुल इस्लाम और मुहम्मद इक़बाल सहित 30 सभी अधिक लोगों ने ‘हाहा’ रिएक्ट किया, जिसमें इक्के-दुक्के को छोड़ कर लगभग सभी समुदाय विशेष के प्रतीत हो रहे हैं। इसमें हैदराबाद का आन और सैयद सलीम शामिल है, वहीं कश्मीर का सलीम बिन युसूफ और सज़्ज़ाद सहित कई हैं।

उधर पाकिस्तानी ट्विटर हैंडलों ने इस घटना की तुलना अभिनन्दन प्रकरण से की। बता दें कि शनिवार (मई 2, 2020) की रात वहाँ 12 घंटों तक मुठभेड़ चली।  सभी जवान चंजमुल्ला क्षेत्र में फँसे हुए थे। उनकी मुठभेड़ पाकिस्तान से घुसपैठ कर के आए आतंकियों से हुई।

रात भर संशय के माहौल के बाद अब उन जवानों के वीरगति को प्राप्त होने की ख़बर आई है। उन जवानों में एक जम्मू कश्मीर पुलिस से हैं और एक दूसरे सिक्यॉरिटी फोर्स के। शनिवार दोपहर 3:30 बजे सशस्त्र बलों और आतंकियों के बीच फायरिंग चालू हुई थी। हंदवाड़ा उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा में स्थित है। इससे 1 दिन पहले उरी में पाकिस्तान ने सीजफायर का उल्लंघन किया था, जिसमें 2 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे।