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आतंकवाद, कुर्बानी… कट्टरपंथियों से डरे बिना खरी-खरी बातें करने वाले इरफान खान

अपनी अदाकारी से हर किसी के दिल पर राज करने वाले बॉलीवुड अभिनेता इरफान खान का बुधवार (अप्रैल 29, 2020) को निधन हो गया। मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में इरफान खान ने 53 साल की उम्र में अंतिम साँस ली। इरफान काफी लंबे वक्त से बीमार थे और बीते दिनों ही उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। दिग्गज कलाकार के जाने से बॉलीवुड में शोक का माहौल है।

एक समय ऐसा भी था जब इरफान जैसे सुशिक्षित और समझदार व्यक्ति ने अपने मजहब को लेकर आतंकवाद, रोजा और रमजान के संबंध में अपनी राय रखी और इसकी वजह से वो कट्टरपंथियों के निशाने पर आ गए। एक डिबेट के दौरान उन्होंने इस पर खुलकर बोला।

25 जुलाई 2016 को टाइम्स नॉउ चैनल के एक डिबेट में आतंकवाद के संबंध में पूछे गए सवाल पर उन्होंने इस्लामी संगठनों द्वारा किए जा रहे आतंकवादी हमलों की भर्त्सना करते हुए कहा, “बहुत बड़ी संख्या में मजहब वाले आतंकवाद की ऐसी हरकतों का विरोध करते हैं। मैंने जैसा इस्लाम समझा है उसका अर्थ शांति और भाईचारा है, आतंकवाद नहीं। जो लोग यह करते हैं, वो इस्लाम को समझ ही नहीं पाए हैं।” इसे आप वीडियो में 1: 24 से 4:44 के बीच सुन सकते हैं।

इसके बाद जब उनसे बकरीद पर पशुओं की बलि को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने बकरीद पर बकरों व अन्य पशुओं की क्रूर बलि के स्थान पर आत्मचिंतन को बल दिया गया। उन्होंने कहा कि कर्मकांड अल्लाह तक पहुँचता है या वास्तविक हृदय की भावना? इसके अलावा रोजे रखने के संदर्भ में अपने बचपन की घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा था कि जब वे सात साल के थे तो उनके पिता ने उनका रोजा छुड़वा दिया था और उनकी माँ से कहा था कि अभी ये रोजा रखने के लिए तैयार नहीं है। इससे रोजा मत रखवाओ। इरफान के पिता ने उनसे कहा कि ख्यालों का रोजा भी होता है। मन पवित्र रखो। इरफान कहते हैं कि उस समय वो उनकी बात नहीं समझ पाए और रोजा रखने की जिद पर अड़ गए थे। मगर आज वो समझ रह हैं कि उन्होंने ऐसा क्यों कहा था। इसे आप 5:04 से 6: 30 के बीच सुन सकते हैं।

इरफान के बयान का कट्टरपंथी और रूढ़िवादी मुल्लाओं ने काफी विरोध किया। इसमें जमीयत उलेमा-ए-हिंद के मैलाना अब्दुल वाहिल खातरी ने कहा, “तुम अपने को अभिनय तक सीमित रखो और इस्लाम के बारे में अपनी राय बताने का साहस मत करो। वो इस तरह का बयान अपनी आने वाली फिल्म के प्रमोशन के लिए दे रहा है।” इसके जवाब में इरफान ने कहा था, “मैं धर्मगुरुओं से नहीं डरता। खुदा का शुक्र है कि मैं ऐसे देश में नहीं रहता, जहाँ धार्मिक ठेकेदारों का राज चलता हो। जो लोग मेरे बयान से खफा है उन्हें या तो आत्म विश्लेषण की जरूरत है या फिर वो बहुत जल्द ही किसी फैसले पर पहुँचना चाहते हैं।” 

वीडियो में 7: 20 से 7: 45 के बीच इस पर बात करते हुए इरफान ने कहा कि बकरीद के समय में जामा मस्जिद में था तो शहर के मुफ्ती ने उनसे कहा था कि बकरीद के पीछे के असली मकसद को समझो। फर्ज और शबाब को सीध-सीधा दुकानदारी मत बनाओ। ये नमाज़ में कहा गया है।

फिर आगे वो कहते हैं कि वो ये निर्णय करने वाले नहीं हैं कि इस्लाम को किस तरह से चलाया जाना चाहिए, लेकिन जितना उन्होंने इस्लाम को समझा है, वो अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा कर रहे हैं। इरफान का कहना था कि वह केवल अपनी व्यक्तिगत राय बता रहे हैं, जिसका उनको हक है। इसे आप 8: 10 से 8: 20 के बीच सुन सकते हैं।

तीन तलाक की प्रक्रिया पर उठाया सवाल

इसके बाद जब उनसे पूछा जाता है कि क्या वो इस बात से सहमत हैं कि तीन तलाक बैन होना चाहिए? तो उन्होंने कहा कि इस बारे में बाद में बात करेंगे, वरना ये कौम और भी मेरे पीछे पड़ जाएँगे। 9:50 पर आप सुन सकते हैं कि उन्होंने सीधा-सीधा तीन तलाक का विरोध तो नहीं किया, लेकिन ये सवाल जरूर उठाया कि जब शादी के वक्त काजी साहब लिखित दस्तावेज तैयार करवाते हैं तो फिर जुदा होने के वक्त क्यों नहीं?

वीडियो में 10:00 मिनट पर वो बकरीद पर कुर्बानी देने की बात पर प्रतिक्रिया देते हुए कहते हैं कि कुर्बानी के असली मकसद को समझना चाहिए। कुर्बानी करते वक्त दिल दुखता है। अगर आपके अंदर वो भावना ही नहीं आती है, तो फिर इसका क्या फायदा?

इस डिबेट के दौरान भी उन्हें निशाना पर लिया गया और तस्लीम रहमानी ने कहा कि वो अपनी मशविरा अपने घर पर क्यों नहीं रखते? इसका जवाब देते हुए इरफान कहते हैं कि उनसे उनकी राय पूछी गई तो देने में क्या हर्ज है। ये आप 39:00 मिनट पर सुन सकते हैं। 47:00 मिनट पर तस्लीम रहमानी बेतुकी बात करते हुए कहते हैं कि कल को अगर इरफान को शराब पीना होगा तो क्या वो इस्लाम को दोष देंगे? इरफान ने इसका जवाब देते हुए कहा कि इसके लिए वो इस्लाम को बीच में नहीं लाएँगे। 

गौरतलब है कि इरफान खान ने बकरीद पर बकरों व अन्य पशुओं को क्रूर बलि के स्थान पर आत्मचिंतन को बल दिया था। उन्होंने कहा था कि बकरे की कुर्बानी से पुण्य नहीं मिलता है। अपना अजीज छोड़ना ही कुर्बानी है। इसके साथ ही उन्होंने रोजा पर बयान देते हुए कहा था कि रोजा का मतलब भूखे रहना नहीं है। यह आत्मचिंतन के लिए है। यह भूखे मरने के लिए नहीं है। ये एक मेडिटेशन है। कुर्बानी की प्रथा जब शुरू हुई थी तब ये खाने का प्राथमिक स्रोत हुआ करता था। इसकी प्रथा इसलिए प्रचलित हुई ताकि लोगों में देने की भवना पैदा हो।

‘उसने कहा- आपकी मंजिल आ गई, मैं सोच रहा था कि नहीं, अभी नहीं’ – इरफान का पत्र

बॉलीवुड अभिनेता इरफान खान इलाज के दौरान पत्र के जरिए लम्बे समय से चल रही अपनी बीमारी के इलाज, भय और अपनी आशाओं के बारे में मीडिया से बात करते रहते थे। इरफ़ान ने इनमें से कुछ पत्र में अपने और इस बीमारी के बीच के संघर्ष तो कभी अपनी बेहतर होती स्थितियों के बारे में लिखा था। इरफान का लम्बी बीमारी के बाद आज 54 साल की उम्र में निधन हो गया।

लंदन से आया इरफान खान का वो पत्र

2018 में जब वो लन्दन में अपना उपचार करवा रहे थे तब इरफान ने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ को एक बेहद भावुक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने अपनी बीमारी और इससे जूझते हुए तनाव और सारी परेशानी को बताया। पत्र का एक हिस्सा कुछ इस तरह से है –

“काफ़ी समय बीत चुका जब मुझे हाई-ग्रेड न्यूरोएंडोक्राइन कैंसर बताया गया था। यह मेरे शब्दकोश में एक नया नाम है। मैं अब एक प्रयोग का हिस्सा बन चुका था। मैं एक अलग गेम में फँस चुका था। तब मैं एक तेज ट्रेन राइड का लुत्फ उठा रहा था, जहाँ मेरे सपने थे, प्लान थे, महत्वकांक्षाएँ थीं, उद्देश्य था और इन सब में मैं पूरी तरह से अस्त-व्यस्त था… और अचानक किसी ने मेरे कंधे को थपथपाया और मैंने मुड़कर देखा, वह टीसी था, जिसने कहा, ‘आपकी मंजिल आ गई है, कृपया उतर जाइए।’ मैं हक्का-बक्का सा था और सोच रहा था, ‘नहीं नहीं, मेरी मंजिल अभी नहीं आई है।’ उसने कहा, ‘नहीं, यही है।”

“अब मुझे दर्द की असली फितरत का पता चला”

“…जिंदगी कभी-कभी ऐसी ही होती है। इस आकस्मिकता ने मुझे एहसास कराया कि कैसे आप समंदर के तेज तरंगों में तैरते हुए एक छोटे से कॉर्क की तरह हो! और आप इसे कंट्रोल करने के लिए बेचैन होते हैं। तभी मुझे बहुत तेज दर्द हुआ, ऐसा लगा मानो अब तक तो मैं सिर्फ दर्द को जानने की कोशिश कर रहा था और अब मुझे उसकी असली फितरत और तीव्रता का पता चला। उस वक्त कुछ काम नहीं कर रहा था, न किसी तरह की सांत्वना, न कोई प्रेरणा… कुछ भी नहीं। पूरी कायनात उस वक्त आपको एक सी नजर आती है – सिर्फ दर्द और दर्द का एहसास जो ईश्वर से भी ज्यादा बड़ा लगने लगता है।”

“…जैसे ही मैं हॉस्पिटल के अंदर जा रहा था मैं खत्म हो रहा था, कमजोर पड़ रहा था, उदासीन हो चुका था और मुझे इस चीज तक का एहसास नहीं था कि मेरा हॉस्पिटल लॉर्ड्स स्टेडियम के ठीक दूसरी ओर था। क्रिकेट का मक्का जो मेरे बचपन का ख्वाब था। इस दर्द के बीच मैंने विवियन रिचर्डस का पोस्टर देखा। कुछ भी महसूस नहीं हुआ, क्योंकि अब इस दुनिया से मैं साफ अलग था….”

“..हॉस्पिटल में मेरे ठीक ऊपर कोमा वाला वार्ड था। एक बार हॉस्पिटल रूम की बालकनी में खड़ा इस अजीब सी स्थिति ने मुझे झकझोर दिया। जिंदगी और मौत के खेल के बीच बस एक सड़क है, जिसके एक तरफ हॉस्पिटल है और दूसरी तरफ स्टेडियम।”

“….न तो हॉस्पिटल किसी निश्चित नतीजे का दावा कर सकता है न स्टेडियम। इससे मुझे बहुत कष्ट होता है। दुनिया में केवल एक ही चीज निश्चित है और वह है अनिश्चितता… मैं केवल इतना कर सकता हूँ कि अपनी पूरी ताकत को महसूस करूँ और अपनी लड़ाई पूरी ताकत से लड़ूँ।”

इरफान पिछले कुछ समय से कैंसर जैसी बीमारी से जूझ रहे थे। साल 2018 में इस बीमारी का पता चलते ही इरफ़ान काम बीच में ही छोड़कर विदेश में अपना इलाज करा रहे थे। इरफान खान हाई ग्रेड न्यूरोएंडोक्राइन कैंसर की बीमारी से पीड़ित थे। अचानक तबीयत खराब होने के कारण उन्हें मंगलवार को मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था, जहाँ उन्होंने आखिरी साँस ली।

‘मेरे पिता का मर्डर हुआ है’: बुजुर्ग की मौत से फिर सवालों के घेरे में बंगाल का एमआर बंगुर अस्पताल

पश्चिम बंगाल में कोरोना संक्रमण को लेकर स्थिति लगातार संदिग्ध बनी हुई है। राज्य सरकार कुछ भी स्पष्ट कहने से बच रही है। इस बीच एक बुजुर्ग की मौत ने कोलकाता के एमआर बंगुर अस्पताल को फिर से सवालों के घेरे में ला दिया है।

कोलकाता वार्ड नंबर 36 के निवासी राज गुप्ता ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर अपने पिता की हत्या का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि उनके पिता अच्छे-भले कोलकाता के एमआर बंगुर अस्पताल में कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद भर्ती हुए थे। उन्हें आश्वासन दिया गया कि उनका इलाज सही से होगा। मगर, अगले ही दिन अस्पताल से खबर आई कि उनके पिता का देहांत हो गया है।

राज का कहना है कि जब उसके पिता एक रात पहले अच्छे-भले अपने पैरों से चलकर अस्पताल में भर्ती होने गए, तो उनकी मौत अगले कैसे हुई? अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इसका जवाब दे।

बता दें, इस मामले में राज के बयान के कई वीडियोज सोशल मीडिया पर आए हैं। इनमें से एक को बंगाल भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने भी शेयर किया है। इन वीडियोज में राज बताते हैं कि कैसे उनके पिता के साथ एमआर बंगुर अस्पताल में खिलवाड़ हुआ। पहले उनके पिता को कोविड पॉजिटिव बताया गया और कहा गया कि वे सब होम क्वारंटाइन हो जाएँ।

जब पिता के संक्रमित होने की सूचना मिलने पर सब लोगों ने खुद को घर में पृथक कर लिया, तो उनके पास फोन आया और कहा गया कि उनके पिता नेगेटिव हैं और उन्हें अस्पताल से ले जाएँ। इसके बाद 26 तारीख को उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया। मगर, फिर जब उनके पिता घर आ गए और परिवार के साथ रहने लगे तो अगले दिन फोन आया कि अस्पताल से गलती हो गई और उनके पिता संक्रमित ही हैं। 

https://m.facebook.com/story.php?story_fbid=1170643599940291&id=100009839851052

प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगते हुए राज ने कुछ वीडियो साझा किए हैं। इनमें उनके पिता भी नजर आ रहे हैं। वीडियो में उन्होंने अस्पताल द्वारा जारी डिस्चार्ज पेपर दिखाया। साथ ही सारी बात बताई। वीडियो में उनके पिता ने ये भी कहा कि वे बिलकुल ठीक हैं। उन्हें बस खाँसी-जुखाम हैं। इसलिए अगर अस्पताल के कारण कुछ होता है, तो वह उनका और उनके घरवालों का इलाज करेंगे।

पहली वीडियो में हम देख सकते हैं कि राज गुप्ता के पिता एकदम ठीक नजर आ रहे हैं। हल्के जुखाम की शिकायत कर रहे हैं। इसके बाद एक वीडियो में उन्हें अस्पताल जाते दिखाया जा रहा है और उनका परिवार उन्हें हिम्मत देता दिख रहा है। इस वीडियो में वे खुद चलकर अस्पताल जा रहे हैं और उनका परिवार लोगों को अस्पताल की लापरवाही बता रहा है। मगर, इसी क्रम की आखिरी वीडियो में राज उन्हें मृत बता रहा है और कह रहा है कि अस्पताल ने उन्हें ये जानकारी दी कि उनके पिता की मौत हो गई है।

उनका पूछना है कि अब जब उनके पिता एक रात पहले अच्छे-भले गए तो फिर उनकी मौत कैसे हुई? वे कहते हैं कि उन्हें अपने सवालों का जवाब चाहिए। क्योंकि ये सब लापरवाही है और उनके पिता का मर्डर हुआ है। राज का कहना है कि उन्हें इस संबंध में अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य मंत्रालय व उसके सर्वेसर्वा से जवाब चाहिए। वे कहते हैं कि अगर उन्हें यहाँ अपने सवालों का जवाब नहीं मिला तो वे इस बात को आगे तक ले जाएँगे।

वे बताते हैं कि उनके परिवार में 6 महीने का बच्चा समेत 5 लोग हैं। अब प्रशासन की गलती से वो भी संक्रमित हो सकते हैं। इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? अगर राज्य सरकार उनका ख्याल रखने को तैयार है तो वो आकर उनसे बात करे और बताए कि उनके लिए कैसे क्या किया जाएगा? इसके अलावा उन्हें उनके पिता की रिपोर्ट भी दी जाए, जिसमें वे कोरोना पॉजिटिव आए। नहीं तो वे मान चुके हैं कि प्रशासन ने उनका मर्डर किया। वे कहते हैं कि उनके पिता ने आखिरी वक़्त तक कहा कि वे अस्पताल नहीं जाएँगे। लेकिन उनके परिवार वालों ने कहा कि आप जाइए, अगर सरकार का साथ देंगे तो सरकार हमारा साथ देगी।

गौरतलब है कि इससे पहले एमआर बंगूर अस्पताल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था। इसमें दिखाया गया था कि वहाँ किस प्रकार आइसोलेशन वार्ड में कोरोना संदिग्धों को बदइंतजामी के बीच रखा जा रहा है।

बंगाल के आँकड़े भयावह, तुष्टिकरण की भेंट चढ़ी कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई: CM ममता बनर्जी को विजयवर्गीय का पत्र

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर आरोप लग रहे हैं कि उसने कोरोना वायरस के मरीजों से जुड़े आँकड़े में छेड़छाड़ किया है और टेस्टिंग में भी कमी कर दी है। भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने आरोप लगाया है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकार राज्य में कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ लड़ाई को कमजोर कर रही है। उन्होंने आग्रह किया कि तुष्टिकरण की राजनीति छोड़ कर अब पश्चिम बंगाल को बचाने की ओर ध्यान देना चाहिए।

पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिख कर भाजपा के बदले कोरोना से लड़ने की सलाह दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि मृतकों की संख्या से भी सरकार ने छेड़छाड़ की है। उनका कहना है कि भाजपा और केंद्र सरकार एवं राज्यपाल के समक्ष अड़ियल रवैया अपनाने की बजाए ममता को परस्पर सहयोग से काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वो गहरे दर्द में ये पत्र लिख रहे हैं।

विजयवर्गीय ने लिखा कि जहाँ एक तरह पश्चिम बंगाल की जनता कोरोना नामक आपदा को झेल रही है, ममता बनर्जी गन्दी राजनीति खेलने में व्यस्त हैं। उन्होंने सलाह दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्यपाल जगदीप धनखड़ से झगड़ने की बजाए वो राज्य पर ध्यान दें। उन्होंने लिखा कि ये भाजपा नेताओं से बदला लेने का समय नहीं है। ये समय है अपनी प्रशासनिक क्षमता दिखाने का। विजयवर्गीय ने पत्र में आगे लिखा:

“जो राशन पश्चिम बंगाल की जनता के लिए है, उसकी आक्रामक रूप से चोरी की जा रही है जो रुकनी चाहिए। सभी मेडिकल कर्मचारियों को पीपीई व अन्य सेफ्टी उपकरण मिलने चाहिए, जो कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई में पहली पंक्ति में हैं। भाजपा से लड़ने के लिए तो बहुत समय मिलेगा। ममता दीदी, कोरोना को लेकर पश्चिम बंगाल की जो स्थिति है, उसकी जरा अन्य राज्यों से तुलना कीजिए। कुल पॉजिटिव मामले, सक्रिय मामले और मृतकों की संख्या के आँकड़े की तुलना कीजिए। जो आँकड़े मैं प्रस्तुत कर रहा हूँ, वो बताते हैं कि स्थिति भयावह है। कोरोना के मामले में राज्य में टेस्टिंग की ही नहीं जा रही है।”

कैलाश विजयवर्गीय ने जानकारी दी कि 1 दिन पहले तक महाराष्ट्र में 1 लाख से भी अधिक लोगों की टेस्टिंग की जा चुकी थी और उसमें से 7000 पॉजिटिव निकले थे, जो 7% संक्रमण दर को दिखाता है। मध्य प्रदेश में 38,000 से भी अधिक टेस्ट हो चुके हैं और वहाँ इन्फेक्शन रेट 5.7% है। कर्नाटक में 43,000 लोगों की टेस्टिंग की जा चुकी है और वहाँ 1.17% लोग ही कोरोना पॉजिटिव निकले हैं, जिनकी कुल संख्या 503 है। (नोट: पत्र लिखे जाने से 1 दिन पहले के आँकड़े)

कैलाश विजयवर्गीय द्वारा रखे गए आँकड़ों के अनुसार, अप्रैल 27 तक पश्चिम बंगाल में मात्र 12,043 लोगों की ही टेस्टिंग की गई है, जिनमें से 5.79% इन्फेक्टेड निकले हैं। विजयवर्गीय के अनुसार, राज्य में टेस्टिंग नहीं हो रही है और इन्फेक्शन रेट भी ज्यादा है। उन्होंने पश्चिम बंगाल से पड़ोसी राज्यों असम और झारखंड की तुलना की, जहाँ रिकवर हो रहे मरीजों की संख्या भी उल्लेखनीय है।

कैलाश विजयवर्गीय ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि जिस दिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल में कोरोना से 18 लोगों की मौत होने की बात कही थी, उस दिन राज्य के अधिकारियों ने केंद्र द्वारा भेजे गए ‘इंटर-मिनिस्टीरियल सेंट्रल टीम’ के समक्ष स्वीकार किया था कि मृतकों के असली आँकड़े 57 हैं। विजयवर्गीय ने बताया कि इस टीम के साथ भी सरकार ने सहयोग नहीं किया। राज्य में लॉकडाउन का पालन भी नहीं कराया गया।

विजयवर्गीय का आरोप है कि पहले दिन से ही कुर्सी सँभालने के बाद ममता बनर्जी तुष्टिकरण की राजनीति में लग गई हैं। बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए राज्य को स्वर्ग बना दिया गया है। विजयवर्गीय ने ममता को वो बयान याद दिलाया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर दुधारू गाय लात भी मारे तो सह लेना चाहिए। भाजपा नेता ने कहा कि इसी ने दूसरे मजहब को लॉकडाउन का खुला उल्लंघन करने के लिए प्रेरित किया। कैलाश विजयवर्गीय ने आगे लिखा:

“जब प्रधानमंत्री ने सतर्कता बरतने की सलाह देते हुए होली न खेलने की सलाह दी थी, तब आपने इसे दिल्ली दंगों से जोड़ दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अच्छा काम कर रहे हैं और सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से राय-विमर्श कर सारे निर्णय ले रहे हैं। आपने राज्यपाल पद की गरिमा को भी ठेस पहुँचाई, सिर्फ़ अपने राजनीतिक फायदे के लिए। भाजपा का एक-एक कार्यकर्ता पूरी तत्परता से राहत-कार्य में लगा हुआ है। लगता है आपको निःस्वार्थ भाव से की जा रही सेवा पसंद नहीं आ रही है। केंद्रीय राज्यमंत्री देबश्री चौधरी को भी प्रताड़ित किया गया। उन्हें क्वारंटाइन अवधि के बाद भी पुलिस बाहर नहीं निकलने दे रही।”

विजयवर्गीय ने हावड़ा के टिकियापाड़ा में लॉकडाउन का पालन करा रही पुलिस पर कट्टरपंथियों के हमले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इस घटना से पुलिस के आत्मविश्वास को गहरी ठेस पहुँची है। साथ ही उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी तनिक भी आशा नहीं है कि सरकार दोषियों पर कार्रवाई करेगी। उन्होंने ममता को वोट बैंक पॉलिटिक्स को किनारे रखने की सलाह दी और दोषियों पर कार्रवाई करने को कहा।

अर्नब-सोनिया पर ‘नजमा आपी’ के Video से चिढ़े कट्टरपंथी, बचाव करने पर द प्रिंट को भी नहीं छोड़ा

19 साल की सलोनी गौर पहचान की मोहताज नहीं हैं। ‘नजमा आपी’ नाम से वह इंटरनेट की सनसनी बन चुकीं हैं। उनके वीडियोज आपने देखे ही होंगे। लेकिन, अर्नब गोस्वामी पर उनके वीडियो से विवाद खड़ा हो गया है। उनका बचाव करने पर इस्लामिक कट्टरपंथियों ने वेबसाइट द प्रिंट को भी लताड़ लगाई है।

नजमा आपी ने अपने ह्यूमर से किसी भी टॉपिक को इतना दिलचस्प बना देती हैं कि लोग उनकी तारीफ किए बिना नहीं रह पाते। लेकिन, इस बार जब उन्होंने अर्नब गोस्वामी और सोनिया गाँधी पर अपना वीडियो रिलीज किया तो उन्होंने इस्लामोफिबिया से ग्रसित बताया जाने लगा। कहा गया कि वे मुस्लिम महिला बनकर उनकी पहचान गिरा रही हैं। कुछ ने उन्हें संघी बताया। कइयों ने अनफॉलो भी कर दिया।

द प्रिंट ने इस पर रिपोर्ट की। रिपोर्ट शुभांगी मिश्रा ने लिखा। रिपोर्ट में उन्होंने इस्लामोफोबिया को वास्तविक चीज बताया। साथ ही ये भी कहा कि भले ही ये एक वास्तविक बात है, लेकिन आज के समय में ये आलोचन बहुत थकी हुई हो गई है। अपनी रिपोर्ट में आगे बताया कि कैसे सलोनी ने बस लोगों को हँसाने के लिए कुछ खास किस्सों को लेकर सिर्फ़ मिमिक्री की थी।

इस्लामिक सोच के उलट जाकर द प्रिंट का नजमा आपी का समर्थन करना ट्विटर पर कुछ लोगों को पसंद नहीं आया। ट्विटर पर इस्लामिक ट्रोल की पहचान बनाने वाली सिदराह ने इस पर आपत्ति जताई। सिदराह ने द प्रिंट को इस बात को लेकर घेरा कि वे एक गैर मुस्लिम महिला को ये निर्णय लेने का हक कैसे दे रहे हैं कि इस्लामोफोबिक क्या है। इसके बाद उसने आगे कैरिकेचर परिभाषा बताई और कहा कि कैरिकेचर नुकसानदेह नहीं होते। लेकिन सलोनी ने जो किया उसके पीछे प्रोपेगेंडा है।

कई अन्य सोशल मीडिया यूजर्स ने भी कहा कि सलोनी ने जानकर मुस्लिम महिला की छवि का इस्तेमाल प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए किया और थूकने वाली बात पर झूठ पर बोला। हालाँकि, कट्टरपंथियों का गुस्सा देखकर ये समझना मुश्किल है कि आखिर सलोनी ने अपने वीडियो में क्या झूठ बोला। ये तो जगजाहिर है कि तबलीगी जमात से जुड़े लोगों ने स्वास्थ्यकर्मियों और पुलिस के लिए परेशानी खड़ी की। इधर-उधर थूक कर संक्रमण फैलाने की कोशिश की।

इसके बाद, विद्या कृष्णन, जो एक स्वास्थ्य पत्रकार होने के बावजूद राजनैतिक मामलों में दखल करने से गुरेज नहीं करतीं, उन्होंने भी द प्रिंट के लेख और नजमा आपी के कैरेक्टर पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि एक कॉमेडियन को ये निर्णय लेने का अधिकार नहीं है कि इस्लामोफोबिक क्या होता है। ट्वीट में उम्मीद जताई की कि वे इस बात पर दोबारा विचार करेंगी।

अब ये गौर करने वाली बात है कि इस्लामिक कट्टरपंथियों का वास्तविक रवैया क्या है? दरअसल, उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता कि कौन उनके समर्थन में लिखता-पढ़ता-बोलता रहा है। उन्हें बस फर्क पड़ता है तो इस बात से कि वर्तमान में उनके लिए कौन क्या बोल रहा है। जैसे कि द प्रिंट जिसने 100 में से 99 बार उन्हें सपोर्ट किया, उन्होंने उसको भी अपना शिकार बना लिया और नजमा आपी के सपोर्ट में आर्टिकल लिखने पर उन्हें घेर लिया।

इस्लामिक कट्टरपंथियों की ऐसी हरकतों से जाहिर होता है कि वे लोग सिर्फ़ उसी पोर्टल, उसी चैनल, उसी पत्रकार, उसी शख्स का समर्थन करते हैं, जो उनके पक्ष में और उनके इच्छानुसार बातें करता है। लेकिन, जैसे ही कोई उनकी दिखाई लीक से भटकता है, वे उसे अपना दुश्मन व धूर्त बता देते हैं।

द प्रिंट के बारे में बता दें कि बीते दिनों शेखर गुप्ता ने खुलकर तबलीगी जमातियों का समर्थन किया था। उन्होंने जमातियों के कुकर्मों को ढकने के लिए भाजपा के आईटी सेल को विलेन साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। इतना ही नहीं, उन्होंने कुछ दिन दक्षिणपंथी जिहाद का नैरेटिव भी गढ़ने की कोशिश की। लेकिन इतने सबके बावजूद एक ‘गलती’ के कारण वो कट्टरपंथियों के निशाने पर आ गए और उन पर आरोप लग गया कि वे दुश्मनों का साथ दे रहे हैं।

इससे पहले द वायर की वरिष्ठ पत्रकार आरफा खानम शेरवानी को भी इस्लामिक कट्टरपंथियों ने अपना निशाना बनाया था, क्योंकि उन्होंने अपनी छवि से हटकर हिंदुओं को हैप्पी दशहरा विश कर दिया था। इसके अलावा राहुल कंवल को भी जमातियों का पर्दाफाश करने पर इस्लामिक कट्टरपंथियों की आलोचना झेलनी पड़ी थी।

उद्धव ठाकरे के 6 महीने होने वाले हैं खत्म, राज्यपाल नहीं दे रहे विधान परिषद में एंट्री

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को विधान परिषद में भेजने की कोशिश जारी है लेकिन राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी मन बना चुके हैं कि वो कैबिनेट की सिफारिश पर अमल नहीं करेंगे। बता दें कि महाराष्ट्र कैबिनेट ने फिर से ठाकरे को विधान परिषद में नॉमिनेट करने की सिफारिश राज्यपाल से की है। शिवसेना, एनसीपी और कॉन्ग्रेस की सत्ताधारी तिकड़ी लगातार राज्यपाल पर दबाव बनाने में लगी हुई है ताकि उद्धव की सीएम की कुर्सी बची रहे।

उद्धव ठाकरे ने जब मुख्यमंत्री की कमान सँभाली थी, तब वो किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे। ऐसे में उन्हें 6 महीने के भीतर दोनों सदनों में से किसी एक का सदस्य बनना था। अब जब उनके कार्यकाल के 5 महीने पूरे हो चुके हैं, अगर अगले महीने भी वो किसी सदन के सदस्य नहीं बने तो उनकी मुख्यमंत्री की कुर्सी जा सकती है। उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में फैसला लिया गया कि सीएम उद्धव ठाकरे को विधान परिषद में नामित करने के लिए राज्यपाल कोश्यारी को एक बार फिर सिफारिश की जाएगी। 

इस महीने की शुरुआत में भी ऐसी सिफारिश की गई थी लेकिन राज्यपाल ने हरी झंडी नहीं दी। हालाँकि, कहा जा रहा है कि उद्धव ठाकरे विधानसभा चुनाव जीत कर विधान मंडल का सदस्य बनना चाहते थे लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण आपदा के बीच सभी प्रकार के छोटे-बड़े चुनावों को स्थगित कर दिया गया। ऐसे में सत्ताधारी तीनों दलों के बड़े नेताओं ने फिर से राज्यपाल से मिल कर सिफारिश सम्बन्धी आवेदन सौंपा।

वहीं शिवसेना इसके लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहरा रही है। संजय राउत ने शिवसेना मुखपत्र ‘सामना’ में लिखे अपने कॉलम में दावा किया कि राज्यपाल ने भले ही उद्धव ठाकरे को विधानमंडल में नामित करने वाली कागज़ात पर हस्ताक्षर करने का फैसला ले लिया हो लेकिन उन्हें इसके लिए भी दिल्ली से पूछना पड़ेगा। एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री ने बताया कि कोश्यारी इस बार भी उद्धव को नामित करने के मूड में नहीं दिख रहे हैं।

विधान परिषद में दो सीटें खाली हैं, जिनके लिए कैबिनेट को राज्यपाल से सिफारिश करनी होती है। राजभवन ने तकनिकी खामियों की बात करते हुए फैसले में रुकावट की बात की है। एक कैबिनेट मंत्री ने बताया कि चुनाव आयोग के पास शक्ति है कि वो अगले 6 महीने तक चुनाव न होने वाली नोटिस में कुछ बदलाव कर सकता है, ताकि सरकार स्थिर बनी रहे। शिवसेना सुप्रीम कोर्ट जाने पर भी विचार कर रही है।

मेहुल चौकसी लोन मामला: निर्मला सीतारमण ने राहुल गाँधी को समझाया ‘राइट ऑफ’ और ‘वेव ऑफ’ का फर्क

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मेहुल चौकसी सहित कई अन्य लोगों का लोन ‘राइट ऑफ’ किए जाने के बाद कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी द्वारा फैलाए गए प्रोपेगेंडा का एक के बाद एक ट्वीट कर जवाब दिया। उन्हें लोन राइट ऑफ करने और माफ़ करने के बीच का अंतर समझाया। वित्त मंत्री ने विजय माल्या से लेकर नीरव मोदी तक की बात करते हुए जानकारी दी कि अब तक उनके ख़िलाफ़ मोदी सरकार ने क्या-क्या क़दम उठाए हैं।

उन्होंने राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस को आत्मनिरीक्षण की सलाह देते हुए पूछा कि आखिर वो इस पूरे मामले को सनसनीखेज बनाते हुए सन्दर्भ से अलग हट कर क्यों पेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस ने जनता को गुमराह करने का बेशर्मी भरा प्रयास किया है। उन्होंने यूपीए काल को याद करते हुए बताया कि 2009-10 और 2013-15 के बीच बैंकों ने 1,44,526 करोड़ रुपए का कर्ज ‘राइट ऑफ’ किया था।

निर्मला सीतारमण ने पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी से पूछा कि क्या उन्होंने ‘राइट ऑफ’ के बारे में ट्वीट करने से पहले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मशविरा किया? सीतारमण ने बताया कि एनपीए के लिए आरबीआई के कुछ नियम हैं, जिसके तहत 4 साल का चक्र तय किया जाता है। ये पूरा हो जाने के बाद ही बैंक उसे ‘राइट ऑफ’ में डाल देता है, जिसे ‘वेव ऑफ’ नहीं कहा जा सकता।

सीतारमण ने बताया कि किसी प्रकार का लोन माफ़ नहीं किया गया है, बल्कि बट्टे खाते में डाला गया है, जिसे ‘राइट ऑफ’ कहते हैं। जहाँ तक मेहुल चौकसी की बात है, वित्त मंत्री ने बताया कि उसकी 1,936 करोड़ रुपए की संपत्ति को अब तक अटैच किया जा चुका है। अब तक 597.75 करोड़ रुपए की संपत्ति सीज की जा चुकी है। साथ ही उसके ख़िलाफ़ रेड कॉर्नर नोटिस जारी की जा चुकी है।

लोन ‘राइट ऑफ’ किए जाने के बाद भी उधार लेने वाले से वसूली की कोशिश जारी रहती है, ऐसा केंद्रीय वित्त मंत्री ने समझाया। मेहुल चौकसी की जब्त की गई संपत्ति में से 67.9 करोड़ रुपए की विदेशी संपत्ति भी है। चौकसी के प्रत्यर्पण के लिए एंटीगुआ में अर्जी भी भेजी जा चुकी है, जहाँ वह फ़िलहाल रह रहा है। साथ ही उसे भगोड़ा घोषित करने की भी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इसके अलावा वित्त मंत्री ने विजय माल्या के बारे में भी जानकारी दी।

विजय माल्या की अब तक 8040 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की जा चुकी है। उसके 1693 करोड़ रुपए के शेयर जब्त भी किए जा चुके हैं। उसे भगोड़ा भी घोषित किया जा चुका है। इसके अलावा नीरव मोदी की भी 2387 करोड़ रुपए की संपत्ति को सरकार ने अटैच या सीज किया है। इसमें 961.47 करोड़ रुपए की विदेशी संपत्ति भी शामिल है। सीतारमण ने बताया कि वो फिलहाल यूके की एक जेल में है।

दरअसल, ये पूरा मामला एक आरटीआई अर्जी के जवाब के बाद शुरू हुआ। रिजर्व बैंक ने सितम्बर 2019 तक की स्थिति की जानकारी देते हुए बताया कि देश के बैंकों ने 50 बड़े विलफुल डिफाल्टर्स का 68,607 करोड़ रुपए का कर्ज राइट ऑफ किया है, जिसे ‘लोन माफ़ कर दिया गया’ कह कर दुष्प्रचारित किया गया। निर्मला सीतारमण ने बताया कि मोदी सरकार ने ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ एक्ट लाकर कर्ज न लौटाने वालों पर कार्रवाई का प्रावधान किया।

उन्होंने बताया कि अब तक 3515 एफआईआर दर्ज किया जा चुका है। उन्होंने पूछा कि राहुल गाँधी इस सिस्टम को बदलने में सहयोग करने में भी असफल क्यों रहे हैं? इस बारे में उन्हें आत्मनिरीक्षण करना चाहिए। सीतारमण ने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस भ्रष्टाचार और क्रोनिज्म के इकोसिस्टम को ध्वस्त करने में न तो सत्ता में रहते हुए और न ही विपक्ष में रहते हुए कोई प्रतिबद्धता दिखा पा रही है।

बता दें कि RBI कर्ज को राईट-ऑफ़ करने का काम नहीं करता है, बल्कि बैंकों द्वारा NPA के लिए यह प्रावधान किया जाता है। ना ही RBI ऐसी संस्था है जो गैर-सरकारी और गैर-बैंक संस्थाओं को कर्ज देती है, इस प्रकार अधिकतर मीडिया रिपोर्ट्स प्रथम स्तर पर ही भ्रामक और गलत हैं। विलफुल डिफाल्टर उन कर्जदारों को कहते हैं जो सक्षम होने के बावजूद जानबूझकर कर्ज नहीं चुका रहे होते हैं। लेकिन जब बैंक को इनसे दिया गया कर्ज वापस मिलने की उम्मीद नहीं रहती तो बैंक इनके कर्ज को ‘राइट ऑफ’ कर देते हैं यानी बट्टे खाते में डाल देते हैं।

उत्तराखंड: शाहरुख ने अरविंद बन हिंदू लड़की से बनाए शारीरिक संबंध, भेद खुला तो पूरे परिवार को मारने की धमकी दी

उत्तराखंड के कालसी थाना क्षेत्र में एक हिंदू लड़की को प्रेम जाल में फँसाने, उससे शारीरिक संबंध बनाने, उसका अपहरण करने व मुँह खोलने पर जान से मारने की धमकी देने के संबंध में पुलिस ने हरिद्वार से शाहरुख को गिरफ्तार किया। शाहरुख ने अरविंद अरविंद बन लड़की को प्रेम जाल में फॅंसाया था।

पीड़िता को जब उसकी सच्चाई का पता चला तो उसने दूरियाँ बनानी शुरू कर दी। इस पर शाहरुख भड़क गया और उसने लड़की को परिवार समेत मारने की धमकी दी। इसके बाद लड़की को न चाहते हुए भी उसके साथ जाना पड़ा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, युवती की गुमशुदगी के बाद उसके ने थाना कालसी में तहरीर दी। उन्होंने बताया कि 23 अप्रैल को वे अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ खेत में गेहूँ काटने गए थे और उनकी 21 वर्षीय पुत्री घर में अकेली थी। वापस आए तो पुत्री घर में नहीं थी। एक व्यक्ति ने उनकी बेटी को एक युवक के साथ बैठकर मोटरसाइकिल पर जाते देखा था। बहुत पड़ताल के बाद भी बेटी का सुराग नहीं मिलने पर उन्होंने शिकायत दर्ज करवाई।

पुलिस ने मामले की गंभीरता देखते गुए फौरन युवती की तलाश शुरू कर दी। युवती की लोकेशन हरिद्वार में मिली। इसके बाद पुलिस उपमहानिरीक्षक अरुण मोहन जोशी के निर्देश पर पुलिस टीम तत्काल हरिद्वार रवाना की गई। वहाँ कॉल डिटेल व मुखबिर की सूचना पर गुमशुदा को फेरूपुर तिराहे से सकुशल बरामद कर अपहरणकर्ता शाहरुख (निवासी: फेरूपुर, थाना: पथरी जनपद, हरिद्वार) को गिरफ्तार किया।

इसके बाद लिखित शिकायत व पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर गुमशुदगी में अपहरण, दुष्कर्म व जान से मारने की धमकी की धाराएँ जोड़ आरोपित को न्यायालय में पेश किया गया। जहाँ से उसे जेल भेज दिया गया। पूछताछ में शाहरुख ने बताया युवती करीब 2 वर्ष से अपनी बुआ के घर फेरूपुर हरिद्वार में रह कर स्विच बनाने की फैक्ट्री में काम करती थी, जहाँ पर उसकी मुलाकात सोनी नाम की महिला से हुई थी। 

उसके माध्यम से वह शाहरुख नाम के लड़के से मिली। उसने शुरू में अपना नाम अरविंद बताया था। आरोपित शाहरुख उससे रोजाना फोन पर काफी देर तक बात करता और मिलता भी था। काफी समय तक शादी का झाँसा देकर शारीरिक शोषण करता रहा। बाद में लड़की को मालूम चला कि उसका असली नाम शाहरुख है। इसके बाद उसने शाहरुख से दूरियाँ बनानी शुरू कर दी।

लेकिन, शाहरुख को ये नागवार गुजरा। उसने युवती को जान से मारने की धमकी दी। डर से लड़की अपने घर लौट गई। घर आने के कुछ दिन बाद शाहरुख ने उसे फिर फोन कर अपने पास आने को कहा। लड़की ने इनकार किया तो उसने न केवल उसे मारने की बात की, बल्कि उसके परिवार को खत्म करने की धमकी दी। बता दें, इस मामले के संबंध में पुलिस ने लिखित शिकायत और पर्याप्त साक्ष्यों के आधार पर धारा 366/376/506 के तहत मामले को दर्ज किया है।

दिल्ली CAA विरोधी दंगों में अरब देशों से हुई थी फंडिंग: ‘जामिया कनेक्शन’ से पूछताछ में खुलासा

दिल्ली पुलिस ने बताया है कि सीएए और एनआरसी विरोधी आन्दोलनों को मिडिल ईस्ट (अरब देशों) से फंडिंग मिली। इसमें जामिया मिल्लिया इस्लामिया और शाहीन बाग़ स्थित दिल्ली के अन्य इलाक़ों में हुए विरोध प्रदर्शन शामिल हैं। सोमवार (अप्रैल 27, 2020) को पटियाला हाउस कोर्ट में दिल्ली पुलिस ने ऐसा कहा। रविवार को जामिया एलुमनाई के अध्यक्ष शिफा उर रहमान को गिरफ़्तार किया गया था।

अब उसे कोर्ट ने 10 दिनों के लिए पुलिस कस्टडी में भेज दिया है। दिल्ली पुलिस के अनुसार, पूछताछ में पता चला है कि आरोपित शिफा उर रहमान को अरब देशों में बसे जामिया मिल्लिया इस्लामिया एलुमनाई एसोसिएशन के मेंबर्स से फंडिंग मिली। रहमान सभी प्रदर्शन स्थलों के बीच समन्वय बनाने का भी काम कर रहा था। फंडिंग देने वाले अरब के कई देशों में फैले हुए हैं। रहमान का नाम कॉन्ग्रेस नेता इशरत जहाँ से पूछताछ में सामने आया था।

इशरत जहाँ के साथ खालिद सैफई, मीरान हैदर, सफोरा जरगर, गुलिसीफा और ताहिर हुसैन को भी अब तक गिरफ़्तार किया जा चुका है। इन सब के अलावा प्रतिबंधित संगठन पीएफआई के 3 सदस्य भी पुलिस के शिकंजे में हैं। दिल्ली में विभिन्न प्रदर्शन स्थलों पर सीएए, एनआरसी और एनपीआर के विरोध में हुए प्रदर्शनों की रूपरेखा शिफा उर रहमान ने ही तय की थी। उसने हर जगह जाकर भड़काऊ भाषण दिए और फ़रवरी में दंगे फैलाने में उसका अहम रोल रहा।

रहमान ने अमीर और बद्री आलम नामक दो व्यक्तियों और जामिया कोआर्डिनेशन कमिटी के अन्य लोगों के साथ मिल कर दिल्ली के कई प्रदर्शन स्थलों का दौरा किया था। अभी उससे पूछताछ पूरी नहीं हुई है। इसीलिए, दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि कई अन्य संदिग्धों के नाम सामने आए हैं, जिनके डिटेल्स रहमान से और अच्छे से पूछताछ कर के निकाले जा सकते हैं। बताया गया कि इन प्रदर्शनों और दंगों में भारी-भरकम रक़म खर्च की गई थी।

रहमान के सामने अब टेक्निकल डेटा को रख कर कस्टडियल इंटेरोगेशन किया जाएगा। फ़रवरी में हुए हिन्दू-वरोधी दंगों में 53 लोगों की मौत हो गई थी। ये सब कुछ सीएए विरोधी प्रदर्शनों से शुरू हुआ था। इसके बाद ताहिर हुसैन जैसों ने दिल्ली में कत्लेआम मचाया। दंगों के पीछे की साज़िश की जाँच दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल द्वारा किया जा रहा है।

अभिनेता इरफान खान का निधन: ‘बॉलीवुड ने दी श्रद्धांजलि, 5 दिन पहले इनकी माँ का हुआ था देहांत

बॉलीवुड अभिनेता इरफान खान (Irrfan Khan) का निधन हो गया है। हिंदुस्तान टाइम्स और बॉलीवुड डायरेक्टर सुजीत सरकार ने भी उनकी मौत की खबर को सोशल मीडिया पर शेयर किया।

इरफान खान पिछले लंबे वक्त से मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में भर्ती थे, जहाँ अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने के कारण उन्हें आईसीयू में शिफ्ट किया गया। हालाँकि, मीडिया में शुरू के कुछ देर तक उनकी मौत पर भ्रम की स्थिति थी बनी हुई थी और कहा जा रहा था कि इरफान खान की स्थिति अब नियंत्रण में है। लेकिन बॉलीवुड के निर्देश सुजीत सरकार ने कुछ देर पहले ही ट्वीट करते हुए लिखा –

“मेरे प्रिय मित्र इरफान, तुम लड़े और लड़ते रहे। मुझे तुम पर हमेशा गर्व रहेगा। हम दोबारा फिर मिलेंगे। ॐ शांति ॐ शांति।”

इरफान खान की मौत पर उनके परिवार की ओर से भी आधिकारिक बयान जारी किया गया। इसमें कहा गया – ”मैं हार गया। इरफान खान अक्सर इन शब्दों का प्रयोग किया करते थे। साल 2018 में कैंसर से लड़ते समय भी इरफान ने अपने नोट में ये बात कही थी। इरफान खान बेहद कम शब्दों में अपनी बात कहा करते थे और बात करने के लिए आँखों का ज्यादा इस्तेमाल करते थे।”

हिंदुस्तान टाइम्स ने भी ट्वीट के जरिए इरफान खान की मौत की खबर को सच बताया है। ज्ञात हो कि इरफान खान न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर से जंग लड़ रहे थे। इसी कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

कुछ दिन पहले ही इरफान खान की माँ सईदा बेगम ने शनिवार को जयपुर में अपने निवास में अंतिम सांस ली थी। लॉकडाउन के कारण अभिनेता इरफान खान अपनी माँ के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके थे। तब उन्होंने कथित तौर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से माँ का अंतिम संस्कार किया था।