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MP: कर्ज माफी योजना की समीक्षा करने को शिवराज सरकार तैयार, कॉन्ग्रेस के धोखे के खिलाफ केस दर्ज कराए किसान

साल 2018 में किसानों की कर्जमाफी को बड़ा मुद्दा बनाकर सत्ता में आने वाली मध्य प्रदेश की पूर्ववर्ती कमलनाथ सरकार के ख़िलाफ़ शिवराज सिंह चौहान की सरकार एक्शन में आ गई है। ताजा सूचना के अनुसार, शिवराज सिंह सरकार ने पूर्ववर्ती कमलनाथ सरकार की कर्जमाफी योजना की समीक्षा करने का फैसला किया है। इसकी जानकारी प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल ने दी है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए दो टूक कहा है कि कॉन्ग्रेस सरकार ने कर्ज माफी के नाम पर किसानों के साथ धोखा किया। इसलिए वे अब किसानों से कहेंगे कि कमलनाथ सरकार पर केस दर्ज कराएँ।

एनडीटीवी की खबर के अनुसार पटेल ने उन्हें बताया, “कमलनाथ के नेतृत्‍व वाली कॉन्ग्रेस सरकार ने कर्ज माफी के नाम पर किसानों के साथ धोखा किया था। हम किसानों से कमलनाथ और कॉन्ग्रेस सरकार पर केस दर्ज कराने के लिए कहेंगे। किसान केस दर्ज कराएँ, सरकार केस दर्ज करेगी।”

इसके अतिरिक्त उन्‍होंने ये भी कहा कि हम कर्ज माफी की समीक्षा करेंगे, हमने कृषि क्षेत्र और खरीद प्रक्रिया में गोदाम और परिवहन से संबंधित भ्रष्टाचार की जाँच शुरू कर दी है।

बता दें, एक ओर जहाँ मध्यप्रदेश में दोबारा सत्ता की कमान सँभालने के बाद शिवराज सरकार कॉन्ग्रेस के कार्यों की समीक्षा में जुटी है। वहीं कॉन्ग्रेस पार्टी को भाजपा सरकार का ये फैसला पसंद नहीं आया। जैसे ही पटेल ने समीक्षा संबंधी बयान दिया, तो कॉन्ग्रेस सरकार में मंत्री रह चुके जीतू पटवारी ने इसपर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि किसानों की कर्ज माफी योजना को शिवराज सरकार बंद करेगी तो किसान सड़क पर उतरेंगे।

उल्लेखनीय है कि साल 2018 में विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस ने किसानों को कर्जमाफी का लालच देकर सत्ता हथियाई थी। उस समय चुनावों से पहले राहुल गाँधी ने ऐलान किया था कि चुनाव जीतने के मात्र दस दिन में वे कर्ज माफ कर देंगे। उस समय उन्होंने ये भी कहा था कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो वे राज्य में सीएम बदलने से भी नहीं हिचकेंगे। मगर, जब सरकार बनी तो कॉन्ग्रेस अपने वादे पर खरी नहीं उतर पाई और न ही उन्होंने अपने कहे अनुसार सीएम बदला। जिसके कारण कुछ ही दिनों में मध्यप्रदेश की जनता कमलनाथ सरकार से तंग आ गई। इसके बाद सोशल मीडिया पर शिवराज सिंह चौहान के लौटने की माँग उठने लगी और परिस्थितियाँ ऐसी बनीं कि इस वर्ष 23 मार्च को एक बार फिर से राज्य में शिवराज सरकार लौट आई

पुणे में ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी पर पत्थरों से हमला: युनुस, मतिन और मोइन के खिलाफ मामला दर्ज

पुणे के पिंपरी-चिंचवाड़ के कालेवाडी इलाके में सोमवार (अप्रैल 27, 2020) शाम को ड्यूटी पर तैनात पुणे पुलिस एक कांस्टेबल की पिटाई करने के आरोप में पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इस घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

पुणे पुलिस ने आरोपितों की पहचान युनुस अत्तार (50) और उसके 28 वर्षीय बेटे मतिन एवं 24 वर्षीय मोइन के रुप में की है। सभी कालेवाडी के रहने वाले हैं।

लॉकडाउनका पालन करवा रही पुलिस से की पिटाई

आरोपितों ने ड्यूटी पर तैनात पुणे पुलिस कांस्टेबल शंकर कलकुटे के साथ मारपीट की। जिसमें वो घायल हो गए। शंकर कलकुटे पिंपरी-चिंचवाड़ के अतिक्रमण विरोधी दस्ते से हैं। वो वहाँ पर लॉकडाउन को पालन करवाने के लिए तैनात किए गए थे। शंकर कलकुटे ने इस मामले में वकाड पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई।

उन्होंने अपनी FIR में कहा कि लॉकडाउन के प्रतिबंधों के बावजूद युनुस शाम के तकरीबन 5:30 बजे बिना किसी कारण के घूम रहा था। कांस्टेबल शंकर ने उसे समझाया और घर में रहने के लिए कहा। मगर युनुस और उसके दोनों बेटे कांस्टेबल के साथ उलझ गए और उनकी पिटाई कर दी।

शंकर कलकुटे ने अपनी FIR में यह भी कहा कि 28 वर्षीय मतिन ने उनके ऊपर छड़ी से हमला किया। तीनों आरोपितों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम और महामारी रोग अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल मामले की आगे की जाँच की जा रही है।

नमाज रोकने गई औरंगाबाद पुलिस पर पथराव

सोमवार को ही महाराष्ट्र के औरंगाबाद में मस्जिद में नमाज पढ़ने को रोकने गई पुलिस पर लोगों ने पथराव किया। औरंगाबाद ग्रामीण में सोमवार रात 8 बजे हुई इस घटना में तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए। मामले में पुलिस ने अब तक 15 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि पुलिस पर पथराव करने वाली भीड़ में महिलाएँ भी शामिल थीं।

संभाजी मार्ग पर स्थित एक मस्जिद में करीब 100 लोग नमाज पढ़ने जा रहे थे। पुलिस ने पहले उन्हें रोका और लॉकडाउन का हवाला देकर अपने-अपने घर लौट जाने की अपील की। इस दौरान कुछ लोग भड़क गए और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। पथराव की खबर पाकर मौके पर मौके पर भारी संख्या में फोर्स पहुँच गई और लोगों को हटाया। साथ ही घायल पुलिसकर्मियों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।

लॉकडाउन का पालन कराने गई पुलिस पर पथराव की यह पहली घटना नहीं है। देश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसी घटनाएँ सामने आ चुकी हैं। शुक्रवार को उत्तर प्रदेश में कई स्थानों पर लॉकडाउन का उल्लंघन कर सामूहिक रूप से नमाज अदा की गई। बहराइच, शाहजहाँपुर में नमाजियों ने पुलिस टीम पर हमला कर दिया। फिरोजाबाद में घंटों मजहबी नारे लगाए। इसके बाद एम्बुलेंस को निशाना बनाते हुए तोड़फोड़ की गई। इसी तरह दिहवाकला स्थित मस्जिद में नमाज पढ़ने की सूचना मिली तो नमाजियों ने सिपाहियों पर हमला बोल दिया

WHO के नक़्शे में लद्दाख को बताया चीन का हिस्सा: J&K को शेष भारत से अलग दिखाया

‘वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन’ ने भारत के नक़्शे के साथ छेड़छाड़ करते हुए लद्दाख को चीन का भाग दिखाया है। WHO की आधिकारिक वेबसाइट पर पूरे अक्साई चीन को ही चीन का हिस्सा बता दिया गया। बता दें कि जम्मू कश्मीर और लदाख पूर्णतः भारत का हिस्सा है और ये दोनों अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश हैं। जम्मू कश्मीर और लद्दाख के कुछ भूभाग पर पाकिस्तान और चीन का भी अवैध कब्जा रहा है।

इससे पहले ‘यूनाइटेड नेशंस’ के कई नक्शों में जम्मू कश्मीर को ‘विवादित प्रदेश’ के तौर पर भी रखा जाता रहा है। लेकिन, ये पहली बार है जब नक़्शे में जम्मू कश्मीर और लद्दाख को अलग रंग का दिखाया गया है, और शेष भारत के नक़्शे को अलग रंग का। भारत, पाकिस्तान और भूटान में भारतीय राजदूत रह चुके गौतम बम्बावाले ने बताया कि WHO ने जो भारत का नक्शा दिखाया है, वो UN के ‘स्टैण्डर्ड नक़्शे’ से काफ़ी अलग है।

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ में WHO के ग़लत नक़्शे को लेकर छपी ख़बर

यहाँ तक कि दोनों प्रदेशों के जिन हिस्सों पर अवैध कब्ज़ा नहीं है, उन्हें भी भारत का भाग नहीं दिखाया गया है। उन्होंने इसे विचित्र, गलत और चौंका देने वाला करार दिया। इससे पहले चीन ने अरुणाचल प्रदेश को अपने देश का हिस्सा बता दिया था। वो इसे साउथ तिब्बत का एक भाग मानता है। उसने ‘स्काई मैप’ को अपडेट कर के ऐसा किया था। WHO की चीनपरस्ती के कारण उसका पहले से ही विरोध हो रहा है।

WHO की फंडिंग पर लग चुकी है रोक

बता दें कि अमेरिका ने भी विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को मिलने वाले फंड पर रोक लगा दी है। इसका ऐलान करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उन्होंने अपने प्रशासन को WHO की फंडिंग को रोकने के निर्देश दिए हैं। साथ ही ट्रंप ने कहा था कि कोरोना वायरस के चीन में उभरने के बाद इसके प्रसार को छिपाने और गंभीर कुप्रबंधन में संगठन की भूमिका की समीक्षा की जा रही है।

कुछ ऐसी ही हरकत ‘इंडिया टुडे’ ने भी की थी। एक वायरल वीडियो में राजदीप सरदेसाई ‘इंडिया टुडे’ पर अपने प्राइम टाइम शो की मेजबानी करते हुए देखे जा सकते हैं। इसमें भारत का गलत नक्शा प्रदर्शित किया गया। वीडियो में एक ग्राफिकल प्रस्तुति में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) के बिना भारतीय मानचित्र को दर्शाया गया। इतना ही नहीं पाकिस्तान के नक्शे में कश्मीर के भारतीय क्षेत्र को शामिल करके दिखाया गया।

इंडोनेशियाई जमाती मुंबई पहुँचकर 22 दिनों तक मस्जिदों में घूमते रहे, पुलिस ने किया हत्या के प्रयास में मुकदमा दर्ज

दिल्ली के तबलीगी जमात से निकलकर मुंबई के बांद्रा पहुँचने वाले 10 इंडोनेशियाई जमातियों पर पुलिस ने हत्या के प्रयास की धारा 307 समेत कई संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। इनपर आरोप है कि ये लॉकडाउन होने के बावजूद उसके नियमों का उल्लंघन किया और ये इंडोनेशियाई जमाती धारावी सहित कई जगहों की मस्जिदों में घूमते रहे।

पुलिस ने 307 के अलावा इनके ऊपर धारा 304 यानी हत्या की श्रेणी में न आने वाली गैर इरादतन हत्या के लिए दण्ड, धारा 188 (आदेश की अवज्ञा), और धारा 269 के तहत केस तैयार किया है।

बता दें, ये 10 विदेशी इंडोनेशियाई जमाती उसी 12 लोगों के समूह का हिस्सा हैं, जिन्होंने दिल्ली के मरकज़ में हुए कार्यक्रम में भाग लिया। मगर, वहाँ से लौटने के बाद बांद्रा पश्चिम के एक अपार्टमेंट में 29 मार्च से रहने लगे। इनमें 12 जमातियों में 6 महिलाएँ भी शामिल थी। पुलिस ने बताया कि इनके ख़िलाफ़ अप्रैल के शुरुआती हफ्ते में मामला दर्ज हुआ था और अभी फिलहाल उस शख्श की जानकारी जुटाई जा रही है जिसने इनके रहने का इंतजाम किया।

एक अधिकारी ने इस संबंध में बताया, “हमें यह पता चला कि ये दो जत्थे में 29 फरवरी एवं 3 मार्च को भारत आए थे और बाद में जलसे में शामिल होने के लिए मरकज पहुँचे।’’ अधिकारी ने बताया कि ये विदेशी नागरिक 7 मार्च को मुंबई पहुँचे और 29 मार्च से अपार्टमेंट में रहने लगे। इसका मतलब यह हुआ कि वह 22 दिन तक घूमते रहे।

इसके अतिरिक्त पुलिस ने ये भी जानकारी दी कि ये लोग टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे। जिनका पता लगने के बाद मेडिकल जाँच करवाई गई और बाद में इनमें से 2 लोग कोरोना पॉजिटिव निकले थे। जबकि अन्य दस को बिल्डिंग से निकालकर 20 दिन के लिए क्वारंटाइन करवा दिया गया। जब इनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई तो 22 अप्रैल को सबकी गिरफ्तारी हुई। इसके बाद 23 अप्रैल को अदालत में पेश करके इन्हें रिमांड पर लिया गया।

गौरतलब है कि इस समय महाराष्ट्र में कोरोना का कहर सबसे अधिक है। ऐसे में बीते दिनों पुलिस ने महाराष्ट्र में 21 विदेशियों को पकड़ा था और उन्हें क्वारंटाइन भी कराया था। मगर जिस पुलिसकर्मी ने उन्हें क्वारंटाइन करवाया था। बाद में वे भी कोरोना संक्रमित हो गए थे। इस बात की जानकारी मिलने के बाद वहाँ की पुलिस में हड़कंप मच गया था।

औरंगाबाद की मस्जिद से नमाजियों ने किया पुलिस पर हमला, 1 घायल: पत्थरबाजों में कई महिलाएँ भी शामिल

महाराष्ट्र के औरंगाबाद स्थित बिदकीन गाँव में नजामियों ने पुलिस पर हमला कर दिया। घटना के समय पुलिस गाँव में पहुँची हुई थी। सूचना मिली थी कि वहाँ की एक मस्जिद में लॉकडाउन का सरेआम उल्लंघन किया जा रहा है और नमाज पढ़ने के लिए भीड़ जुटी हुई है। पुलिस के जाँच दल को देखते ही नमाजियों ने पथराव शुरू कर दिया। इस घटना में एक पुलिसकर्मी को चोटें भी आईं

पुलिस अधीक्षक मोक्षदा पाटिल ने इस घटना की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि आरोपितों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कर लिया गया है। नमाज पढ़ने के लिए क़रीब 40 लोग एकत्रित हुए थे। अब तक इस मामले में 15 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। पत्थरबाजों में कई महिलाएँ भी थीं। बता दें कि देश भर में लॉकडाउन के दौरान किसी भी प्रकार के धार्मिक या मजहबी गैदरिंग की अनुमति नहीं है। ऊपर से महाराष्ट्र में स्थिति सबसे ज्यादा ख़राब है

महाराष्ट्र में अब तक कोरोना वायरस के 8590 मामले सामने आ चुके हैं। पूरे भारत के कोरोना मामलों का 29% अकेले महाराष्ट्र में है। राजधानी मुंबई की तो स्थिति सबसे बुरी है। यहाँ कोरोना के कुल 5776 मामले हैं, जो राज्य के कुल मामलों का अकेले 64% है। देश भर में कोरोना मरीजों की जितनी संख्या है, उसका लगभग 20% अकेले मुंबई में है। जहाँ ये घटना हुई, उस औरंगाबाद की स्थिति भी सही नहीं है। वहाँ अब तक 52 मामले सामने आ चुके हैं।

रमजान शुरू होने के बाद ऐसी घटनाओं में वृद्धि आई है। बहराइच जिले के खैरीघाट थाना क्षेत्र के गाँव तेलियानपुरवा की मस्जिद के अंदर मौलवी की अगुवाई में सामूहिक रूप से जुमे की नमाज अदा की गई थी। इसकी जानकारी जब पुलिस को हुई तो वह तत्काल पहुँची, जिसके बाद पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए मौलवी सहित नौ नमाजियों को गिरफ्तार कर लिया था। दिल्ली में भी रमजान की खरीदारी के लिए चाँदनी चौक इलाके में भीड़ उमड़ पड़ी थी।

बुलंदशहर में साधुओं की हत्या का पालघर मॉब लिंचिंग से तुलना करने में जुटा गिरोह: CM योगी से माँगा इस्तीफा

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में चिमटा चुराने के विवाद में एक नशेड़ी युवक ने दो साधुओं की हत्या कर दी। अनूपशहर के एक मंदिर परिसर में यह घटना तब हुई, जब साधु सो रहे थे। गाँव के ही एक नशेड़ी युवक मुरारी का इस मामले में नाम सामने आया, जिससे पूछताछ की जा रही है। मुरारी लम्बे समय से भाँग के नशे का आदी है और साधुओं के साथ उसकी कहासुनी भी हुई थी। उसने साधुओं को ‘अंजाम भुगतने’ की चेतावनी भी दी थी। पकड़े जाने समय भी वो नशे में ही था।

पालघर बनाम बुलंदशहर: लिबरल प्रोपेगेंडा

लिबरलों ने इस घटना की तुलना पालघर मॉब लिंचिंग से करनी शुरू कर दी, जहाँ सैकड़ों की भीड़ ने जमा होकर 2 साधुओं की पुलिस के सामने निर्मम हत्या कर दी थी। उस इलाक़े में शराब माफियाओं और ईसाई मिशनरियों का वर्चस्व होने के कारण साधु-संतों के ख़िलाफ़ काफ़ी पहले से घृणा फैलाई जा रही थी। वहाँ रावण को पूजे जाने का भी इतिहास रहा है। सरकार भी तब हरकत में आई, जब घटना के 3 दिन बाद वीडियो वायरल हुआ।

कॉन्ग्रेस नेता श्रीवत्स ने कहा कि बुलन्दशहर के मंदिर में दो साधुओं की हत्या एक क्रूर अपराध है और ये चौंका देने वाला है। उन्होंने एक नशेड़ी के आरोपित होने की चर्चा करते हुए लिखा कि लॉकडाउन चल रहा है, फिर भी ऐसी हत्याएँ कैसे हो जा रही हैं? साथ ही उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोगों के जीवन को बचाने में असफल रहे हैं और इसलिए उन्हें अब तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।

शिवसेना सांसद और पार्टी मुखपत्र ‘सामना’ के संपादक संजय राउत ने लिखा कि बुलंदशहर के मंदिर में दो साधुओं को मार दिया जाना डरावना है। साथ ही उन्होंने कहा कि वो सबसे अपील करते हैं कि इस घटना को सांप्रदायिक रंग न दिया जाए। साथ ही राउत ने इसकी तुलना पालघर हत्याकांड से करते हुए दावा किया कि उस घटना को सांप्रदायिक चश्मे से देखा गया था।

सुमित कश्यप झा ने दावा किया कि भाजपा बुलंदशहर हत्याकांड में साम्प्रदायिक एंगल निकलने के इंतजार में बैठी हुई है। उन्होंने पूछा कि क्या इस सम्बन्ध में उन्हें अब तक कोई व्हाट्सप्प फॉरवर्ड नहीं मिला है? उन्होंने पूछा कि इस बार समुदाय विशेष को दोषी ठहरना है या ईसाईयों को? झा ने दावा किया कि भाजपा इस बार ईसाईयों को दोषी ठहराएगी क्योंकि आज के समय में यही सबसे उम्दा विकल्प लग रहा है उनके लिए

कॉन्ग्रेस नेता शरद पटेल ने अर्नब गोस्वामी के शो ‘नेशन वांट्स टू नो’ का मजाक बनाते हुए पूछा कि क्या वो इस मामले में यूपी सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सवाल पूछेंगे। साथ ही उन्होंने योगी आदित्यनाथ को उनके पुराने नाम ‘अजय सिंह बिष्ट’ कह कर सम्बोधित किया। बता दें कि अर्नब ने सोनिया गाँधी को उनके पुराने नाम ‘एंटोनिया माइनो’ से सम्बोधित किया था, जिस कारण उनके ख़िलाफ़ दर्जनों एफआईआर हुए और साढ़े 12 घंटे पूछताछ भी हुई।

कॉन्ग्रेस नेता सलमान निजामी ने भी बुलंदशहर में दो साधुओं की हत्या वाली ख़बर की चर्चा की। सलमान ने कहा कि वो अर्नब गोस्वामी का इंतजार कर रहे हैं कि वो इस मामले में सोनिया गाँधी या समुदाय विशेष को दोष दें। साथ ही उन्होंने दावा किया कि अर्नब गोस्वामी में सच्चाई दिखाने का दम नहीं है और न ही वो भाजपा से सवाल पूछने की हिमाकत कर सकते हैं।

गुजरात के कॉन्ग्रेस नेता हार्दिक पटेल ने कहा कि महाराष्ट्र में दो साधुओं की मॉब लिंचिंग के बाद अब उत्तर प्रदेश में साधुओं की हत्या हुई है। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र की घटना पर दो-दो घंटे टीवी डिबेट करने वाले, उत्तर प्रदेश की घटना पर चुप हैं। उन्होंने पूछा कि योगी आदित्यनाथ का इस्तीफ़ा क्यों नहीं माँगा जा रहा है? उन्होंने आरोप लगाया कि ‘भाजपा के चमचे’ हर गुनाह को राजनीति के चश्मे से देखते हैं।

पालघर में साधुओं की हत्या के मामले में वीडियो वायरल होने से पहले अलग-अलग अख़बारों में पुलिस के अलग-अलग बयान छपे थे। हत्याकांड के तीन दिन बाद वीडियो वायरल होने से पहले मीडिया ने ‘चोरी के शक में हत्या’ कह कर इस मामले को दबा दिया था। वीडियो वायरल होने के बाद ही मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इस घटना पर बयान दिया था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी उसे इस मुद्दे पर बात की थी।

36 कोरोना+ जमाती, फिर भी एक साथ पढ़ते हैं नमाज: भोपाल हज हाउस के अंदर झाँकने से भी घबराते हैं गार्ड

मध्य प्रदेश के भोपाल के हज हाउस में 139 जमातियों को क्वारंटाइन किया गया है। इस जगह को भोपाल का सबसे हॉट क्वारंटाइन सेंटर कहा गया है। हज हाउस में रखे गए जमातियों में से 36 की रिपोर्ट अब तक पॉजिटिव आ गई है। जबकि 29 की रिपोर्ट नेगेटिव है और 74 जमातियों की रिपोर्ट आनी बाकी है।

भोपाल के हज हाउस को क्वारंटाइन सेंटर में बदल दिया गया है। मगर, इसके अंदर सोशल डिस्टेंसिंग का, साफ सफाई का कितना ख्याल रखा जाता है, ये यहाँ के गार्ड को तो कम से कम नहीं मालूम। यहाँ के हालात ऐसे हैं कि मेन गेट पर खड़े होम गार्ड भी अंदर जाकर देखने में घबराते हैं। यहाँ अब तक 36 पॉजिटिव केस आने के बाद भी सभी जमाती लगातार एक दूसरे के संपर्क में बने रहते हैं और एक साथ नमाज पढ़ते हैं।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, हज हाउस में रहने वाले सभी नमाजी इन दिनों रोजा रख रहे हैं। इन्हें खाना व चाय आदि पहुँचाने का काम वहाँ तैनात एक गार्ड सैय्यद महमूद का है। वहीं हज हाउस के मेन गेट से 100 गज पहले तैनात होम गार्ड मनेंद्र सिंह कहते हैं कि उनके एक साथी की रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई है। इसलिए अब वे मेन गेट को भी नहीं लाँघते। मनेंद्र के अलावा मुख्य द्वार पर तैनात सुशील अर्गल और अभिलाष कुमार भी कहते हैं कि भीतर क्वारंटाइन सेंटर के कमरों में क्या होता है, इस पर किसी का कोई वश नहीं है। 

दैनिक भास्कर में प्रकाशित संबंधित खबर

बता दें कि हज हाउस के अंदर रहने वालों के दावे हैं कि भीतर सब सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हैं, लेकिन इस बात को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता कि वे लोग बाहर की गतिविधि पर सीसीटीवी कैमरे के जरिए नजर रखते हैं। जिससे उन्हें मालूम होता है कि बाहर से कौन अंदर आने वाला है। लेकिन अगर कोई ये जानना चाहे कि अंदर क्या चल रहा है, तो उसके लिए ये मुमकिन नहीं।

क्वारंटाइन सेंटर को लेकर कहा जा रहा है कि यहाँ जमातियों के कमरों के पंखें बंद हैं और साफ-सफाई की भी व्यवस्था नहीं है। पर जमातियों का कहना है कि उनका ख्याल आसिफ मसूद रख रहे हैं और मसूद कहते हैं कि निगम के सफाईकर्मी यहाँ नहीं आते। इसलिए वे खुद पीपीई किट के साथ सफाई कर्मी भेज रहे हैं। इसके अतिरिक्त वे सुबह की सेहरी के लिए सुबह 3 बजे तक यहाँ खाना भी पहुँचा देते हैं।

उल्लेखनीय है कि इंदौर में हज हाउस के अलावा ईंटखेड़ी और ताजुल मसाजिद में भी जमातियों के लिए क्वारंटाइन सेंटर बनाया गया है। हज हाउस के बाद सबसे ज्यादा जमाती ईंटखेड़ी में बने क्वारंटाइन सेंटर में रुके हैं। जिनकी संख्या 131 है। हालाँकि यहाँ पर अभी तक कोई पॉजिटिव नहीं आया है। लेकिन ताजुल मसाजिद सेंटर में जो 70 जमाती रखे गए हैं, उनमें से पाँच की रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई है।

इससे पहले भोपाल में 10 अप्रैल को तबलीगी जमात के लोगों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए 74 जमातियों पर केस दर्ज किया गया था। इनमें 64 विदेशी और 10 देशी जमाती शामिल थे। इनके अलावा जमातियों का सहयोग करने वाले 13 अन्य लोगों पर भी केस दर्ज हुए थे। इस तरह पुलिस ने 64 विदे‍शी जमातियों समेत 87 लोगों पर FIR दर्ज की थी। ये एफआईआर ऐशबाग, मंगलवारा, श्यामला हिल्स और पिपलानी तलैया थानों में मामले दर्ज किए गए थे। 

…अब बुलंदशहर मंदिर में 2 साधुओं की निर्मम हत्या: सोते हुए तलवार से काट डाला, CM योगी का सख्त कार्रवाई का निर्देश

महाराष्ट्र के पालघर के बाद उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में आज (अप्रैल 28, 2020) दो साधुओं का शव खून से लथपथ बरामद हुआ। घटना अनूपशहर के गाँव पगोना में घटी। यहाँ स्थित शिव मंदिर के परिसर में सो रहे दो साधुओं पर सोमवार देर रात धारदार हथियार से वार कर इनकी हत्या की गई। आरोपित युवक की पहचान मुरारी उर्फ राजू के रूप में हुई है। आरोपित को ग्रामीणों ने पकड़कर पुलिस को सौंप दिया है। 

बताया जा रहा है कि आरोपित आदतन नशेड़ी है और कुछ दिन पहले उसकी बहस एक चिमटे को लेकर दोनों साधुओं से हुई थी। उस समय दोनों साधुओं ने उसे जमकर डाँटा था। जिसके कारण माना जा रहा है कि उसी ने साधुओं की हत्या की। इसके अलावा कुछ ग्रामीणों ने उसे तलवार हाथ में ले जाते हुए भी देखा था। इसलिए जैसे ही साधुओं की हत्या की बात फैली, वैसे ही ग्रामीणों ने उस पर शक जाहिर किया और उसे पकड़वाकर पुलिस को दे दिया।

जानकारी के अनुसार, बुलंदशहर स्थित अनूपशहर कोतवाली के गाँव पगोना में स्थित शिव मंदिर में पिछले करीब 15 वर्षों से साधु जगनदास (55 वर्ष) और सेवादास (35 वर्ष) रहते थे। दोनों साधु मंदिर में रहकर पूजा-अर्चना करते थे। ऐसे में जब मंगलवार सुबह ग्रामीण मंदिर में पहुँचे तो उन्हें साधुओं के खून से लथपथ शव पड़े मिले। इसे देखकर कोहराम मच गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण मंदिर पर पहुँच गए।

एसएसपी संतोष कुमार ने बताया कि इस मामले में गाँव के ही एक युवक राजू को नशे की हालत में पुलिस ने घटनास्थल से करीब 2 किलोमीटर दूर दूसरे गाँव से अर्द्धनग्न अवस्था में गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। बताया गया है कि 2 दिन पूर्व आरोपी युवक ने साधुओं का चिमटा गायब कर दिया था, जिसको लेकर साधुओं ने उस पर अपना गुस्सा जताया था। इसलिए आशंका है कि इसी बात से नाराज होकर उसने दोनों साधुओं की हत्या की। पुलिस मामले की गहराई से छानबीन कर रही है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना पर संज्ञान ले लिया है। उन्होंने जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को तुरंत मौके पर पहुँच कर घटना के संबंध में विस्तृत रिपोर्ट देने और दोषियों के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

याद दिला दें कि बीते 17 अप्रैल को महाराष्ट्र के पालघर में भी दो साधुओं की हत्या की गई थी। यहाँ 200 लोगों की भीड़ ने उन्हें अपना निशाना बनाया था। इनके साथ एक ड्राइवर की भी हत्या कर दी गई थी।

साढ़े 12 घंटे तक मुंबई पुलिस की अर्नब से पूछताछ: कॉन्ग्रेस नेता ने गोस्वामी की जाति पर किया कॉमेंट

मुंबई पुलिस ने ‘रिपब्लिक टीवी’ के संस्थापक अर्नब गोस्वामी से क़रीब 12:30 घंटों तक लगातार पूछताछ की। मंगलवार (अप्रैल 27, 2020) को दोनों चैनलों पर आने वाले अपने नियमित कार्यक्रमों में भी अर्नब उपस्थित नहीं हो सके। हालाँकि, पूछताछ के बाद वो फिर से चैनल पर दिखे और सोनिया गाँधी से सवाल पूछे। पूछताछ के बाद अर्नब गोस्वामी ने कहा कि वो अपने बयान पर अब भी कायम हैं।

अर्नब ने कहा कि उन्होंने पुलिस का पूरा सहयोग किया है और अगर उन्हें फिर से बुलाया जाता है तो भी वो जाएँगे। साथ ही उन्होंने कहा कि उन्हें गिरफ़्तार होने का भी डर नहीं है। अर्नब गोस्वामी ने कहा कि मुद्दा वो नहीं हैं बल्कि असली मुद्दा पालघर में दो साधुओं सहित तीन लोगों की भीड़ द्वारा निर्मम हत्या का है। इस दौरान अर्नब के वकील सुजय कान्तवाला भी उनके साथ मौजूद रहे। अर्नब ने पूछताछ के दौरान कहा कि उन्होंने जो भी बयान दिया है, वो सच है।

अर्नब गोस्वामी ने कहा कि उनसे जो भी सवाल किए गए, उन सबका जवाब उन्होंने दिया और साथ ही अपने बयानों की सत्यता साबित करने के लिए सारे सबूत भी पेश किए। उन्होंने अपने वकील और मुंबई पुलिस का आभार जताते हुए कहा कि सच्चाई की अंततः जीत होगी। उनके वकील सुजय ने भी कहा कि अर्नब ने जाँच में पूर्ण सहयोग दिया है। पूछताछ के बाद स्टूडियो लौटते हुए गोस्वामी ने ‘सोनिया स्पीक अप नाउ’ टैग के साथ न्यूज़ शो में एंकरिंग की।

इधर कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने भी अर्नब गोस्वामी को भला-बुरा कहा और इस पूरी कार्रवाई में जाति घुसा दी। उन्होंने अर्नब को ‘गोस्वामी जी’ कह कर सम्बोधित करते हुए ट्विटर पर लिखा कि अब वो ज़माना गया, जब किसी खास जाति का होने से प्रिविलेज मिल जाता था। उन्होंने अर्नब गोस्वामी के ‘थाने में हाजिरी लगाने’ पर ख़ुशी जताई। उदित राज ने कहा कि अब देश में मनुस्मृति नहीं बल्कि ‘बाबासाहब का संविधान’ चलता है।

इधर ‘रिपब्लिक टीवी’ ने इस बात पर नाराज़गी जताई कि अर्नब गोस्वामी के बार-बार आग्रह करने के बाद भी उनके और उनकी पत्नी सामिय गोस्वामी पर हमला करने वाले दोनों कॉन्ग्रेस नेताओं को ₹15,000 पर जमानत दे दी गई। अर्नब और उनकी पत्नी पर किया गया हमला कॉन्ग्रेस की सोची-समझी साजिश थी और मुंबई पुलिस ने उनके खिलाफ केस दर्ज करने से मना कर दिया। अर्नब गोस्वामी ने आरोप लगाया था कि मुंबई पुलिस उन पर हुए हमलों के मामले में कॉन्ग्रेस की साज़िश को कवर-अप करने में जुट गई है। 

4 दिनों तक गैंगरेप करते रहे शाहनवाज, अजहर, बरियान, सुफियान और पीटर खान: गुमला पुलिस तलाश में

झारखण्ड के गुमला में एक महिला के साथ गैंगरेप का मामला समाने आया है। ये घटना सदर थाना क्षेत्र का है, जहाँ 5 युवकों ने मिल कर एक विवाहिता का अपहरण कर लिया। विवाहिता को 4 दिनों तक बँधक बना कर रखा गया और इस दौरान गैंगरेप किया जाता रहा। जब परिजनों को इस बात की सूचना मिली तो किसी तरह पीड़िता को दरिंदों के चंगुल से छुड़ाया गया। गुमला पुलिस ने पाँचों आरोपितों के ख़िलाफ़ नामजद केस दर्ज किया है।

फ़िलहाल सभी आरोपित फरार हैं, जिनकी पुलिस तलाश कर रही है। ये घटना अप्रैल 17, 2020 शाम 6:30 की है। गुमला में महिला घर से 200 मीटर की दूरी पर शौच करने गई थी, तभी पाँच युवक उसे वहाँ से जबरन उठा कर ले गए। पीड़िता के साथ चार दिनों तक सामूहिक दुष्कर्म किया जाता रहा। साथ ही वो धमकी भी दे रहे थे कि अगर किसी को कुछ पता चला तो जान से मार डाला जाएगा। पीड़िता को एक घर में बंद कर के रखा गया था।

परिजनों को जब इस बात की सूचना मिली को पीड़ित महिला को बचाया गया। लेकिन लोकलाज और बदमाशों के डर के कारण परिजन चुप रहे। पुलिस में भी शिकायत नहीं दर्ज कराई गई थी। लेकिन रविवार (अप्रैल 26, 2020) को पीड़िता के बयान के आधार पर केस दर्ज किया गया। शाहनवाज खान, बरियान खान, अजहर खान, सुफियान खान और पीटर खान के ख़िलाफ़ मामल दर्ज किया गया। आरोपितों के ख़िलाफ़ मामले दर्ज होने की सूचना मिलते ही वो भाग निकले

पुलिस उनकी तलाश के लिए छापेमारी कर रही है। पीड़िता ने बताया कि शाहनवाज ने पिस्टल के दम पर उसे अगवा किया था। वो भागते-भागते गिर गई थी। शाहनवाज और उसके दोस्त पीड़िता को स्कूटी पर बिठा कर दूर ले गए। उसे अजहर के घर में रखा गया था। इसके तीन दिन बाद वो लोग पीड़िता को जंगल में ले जाकर मार डालने की बातें भी कर रहे थे। परिजनों के वहाँ पहुँचने पर सब भाग निकले

‘दैनिक भास्कर’ के राँची संस्करण में प्रकाशित ख़बर

जाते-जाते शाहनवाज ने धमकी दी थी कि अगर पीड़िता ने मुँह खोला तो घरवालों को गोली मार दी जाएगी। पीड़िता ने कहा कि अब उसे मरने का डर नहीं है और वो आरोपितों को कड़ी से कड़ी सज़ा दिलाना चाहती है। उसने कहा कि वो दोषियों को सज़ा दिलाने के लिए ही पुलिस के पास आई है।

उधर आज ही उत्तर प्रदेश के शामली से एक ख़बर आई, जहाँ एक मुस्लिम युवक द्वारा एक हिन्दू लड़की से छेड़खानी के बाद उसके दोनों भाइयों को जख्मी कर दिया गया। जहाँ तक झारखण्ड की बात है, हाल के दिनों में वहाँ हिन्दुओं के ख़िलाफ़ अपराध की घटनाओं की कई ख़बरें आई हैं। हाल ही में राँची की ऋचा भारती को मुस्लिमों और स्थानीय पुलिस द्वारा प्रताड़ित किए जाने की खबर आई थी।