Home Blog Page 488

जवानों ने 60 नक्सलियों को घेरा, ड्रोन से टारगेट लगा कर रहे ढेर: ₹1 करोड़ का इनामी कमांडर भी मारा गया, जानिए वामपंथी आंतकियों का कैसे सफाया कर रही BJP स्टेट (छत्तीसगढ़+ओडिशा) की पुलिस

ओडिशा-छत्तीसगढ़ की सीमा पर गरियाबंद जिले में जवानों ने करीब 60 नक्सलियों को घेर रखा है। 20 जनवरी से चल रहे एनकाउंटर में 16 नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है। यह संख्या लगातार बढ़ रही है। कुछ रिपोर्टों में 20 नक्सलियों के मारे जाने की भी बात कही गई है। मारे गए नक्सलियों में ₹1 करोड़ का इनामी कमांडर जयराम उर्फ़ चलापति भी है। इसके अलावा कुछ और बड़े कमांडर भी इस ऑपरेशन में मारे गए हैं। नक्सलियों के पास से कई हथियार भी बरामद हुए हैं। एनकाउंटर में 1 जवान के घायल होने की भी सूचना है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह एनकाउंटर गरियाबंद जिले के कुल्हाड़ीघाट इलाके में सोमवार (20 जनवरी, 2025) को चालू हुआ था। इस एनकाउंटर में पहले दिन 2 महिला नक्सियों के शव बरामद किए गए थे। जिस इलाके में यह एनकाउंटर हुआ है, वह ओडिशा से सीमा साझा करता है, इसलिए ओडिशा के नुआपाड़ा इलाके में सुरक्षाबल सर्च अभियान चला रहे हैं।

₹1 करोड़ का इनामी भी मारा गया

मंगलवार (21 जनवरी, 2025) को खबर लिखे 16 शव बरामद हो चुके थे। सुरक्षाबल लगातार इस इलाके में सर्च अभियान चला रहे हैं। मारा गया कमांडर जयराम उर्फ़ चलापति भी शामिल है। वह नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी का सदस्य था। उसके साथ ही ओडिशा में नक्सली आतंक के प्रुमख मनोज को भी सुरक्षाबलों ने मार गिराया है। बाकी नक्सलियों की सुरक्षाबल पहचान कर रहे हैं।

इन नक्सलियों के पास से सुरक्षाबलों को बड़ी मात्रा में हथियार और गोला बारूद बरामद हुए हैं। इस मुठभेड़ में घायल एक जवान को हेलिकॉप्टर से एयरलिफ्ट कर लिया गया है। उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। घायल जवान का राजधानी रायपुर में इलाज चल रहा है।

नक्सल विरोधी इस ऑपरेशन में 10 टीमें शामिल हैं। इनमें छत्तीसगढ़ और ओडिशा की पुलिस समेत DRG और CRPF की कोबरा बटालियन हिस्सा ले रही हैं। नक्सलियों को ठिकाने लगाने के लिए ड्रोन का सहारा लिया जा रहा है। सूचना है कि घेरे में फंसने वाला नक्सलियों का यह दल 60 लोगों का था, अभी इसके और लोग भी मारे जा सकते हैं।

2024 में 221 मारे, जनवरी 2025 में ही 42 का सफाया

सुरक्षाबलों के सामने अब नक्सलियों के पैर उखड़ रहे हैं। छत्तीसगढ़ में विष्णु देव साय के मुख्यमंत्री बनने के बाद से लगातार नक्सली बैकफुट पर है। 2024 में छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों ने 221 नक्सली मार गिराए थे। एक एनकाउंटर में 40 से अधिक नक्सली मारे गए थे।

नक्सलियों के इस सफाए में जनवरी में और भी तेजी आ गई है। जनवरी, 2025 में इस गरियाबंद एनकाउंटर को मिला कर छत्तीसगढ़ में 42 नक्सली खत्म किए जा चुके हैं। यह संख्या यह महीना खत्म होते-होते 50 पार हो सकती है। मात्र नक्सलियों को मार गिराने में ही नहीं बल्कि उनका नेटवर्क तोड़ने में भी कामयाबी मिली है।

छत्तीसगढ़ में 2024 में 925 नक्सली गिरफ्तार भी किए गए थे। इसके अलावा 738 ने नक्सलवाद की राह छोड़ कर आत्मसमर्पण की राह चुनी थी। इस तरह 2024 में ही इस नेटवर्क से 1800 लोग कम कर दिए गए थे। वर्तमान में छत्तीसगढ़ में 1000 के आसपास नक्सली होने के दावे हैं।

सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि पूरे देश में नक्सली नेटवर्क तबाह हो रहा है। 2024 में देश भर में 287 नक्सली (छत्तीसगढ़ सहित) खत्म किए गए थे। गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च, 2026 तक नक्सलियों को खत्म करने का लक्ष्य सुरक्षाबलों को दिया है।

CM, गृह मंत्री ने की तारीफ़

गरियाबंद में हुए एनकाउंटर में सुरक्षाबलों की सफलता पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और गृह मंत्री अमित शाह ने उनकी तारीफ़ की है। CM विष्णु देव साय ने ट्विटर पर जवानों की बहादुरी को सलाम किया है। गृह मंत्री अमित शाह ने इसे नक्सलवाद पर करारी चोट बताया है।

CM साय ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “गरियाबंद जिले के मैनपुर थाना अंतर्गत कुल्हाड़ीघाट क्षेत्र में सुरक्षाबलों की नक्सलियों के साथ रविवार रात से अब तक जारी मुठभेड़ में 10 से अधिक नक्सलियों के मारे जाने की खबर है। मार्च 2026 तक देश-प्रदेश में नक्सलवाद के खात्मे के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी एवं माननीय केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी के संकल्प को मजबूती प्रदान करते हुए सुरक्षाबल के जवान निरंतर सफलता हासिल कर लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। जवानों को मिली यह कामयाबी सराहनीय है।”

वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने लिखा, “नक्सलवाद को एक और करारा झटका। नक्सल मुक्त भारत बनाने की दिशा में हमारे सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। ओडिशा-छत्तीसगढ़ सीमा पर CRPF, SOG ओडिशा और छत्तीसगढ़ पुलिस ने संयुक्त ऑपरेशन में 14 नक्सलियों को ढेर कर दिया। नक्सल मुक्त भारत के हमारे संकल्प और हमारे सुरक्षा बलों के संयुक्त प्रयासों से आज नक्सलवाद अपनी अंतिम सांसें ले रहा है।”

हलाल के ठप्पे से हुई लाखों करोड़ की कमाई, सरिया-सीमेंट को भी दिया सर्टिफिकेट: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया- इसके चलते महँगे हुए सामान

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि हलाल सर्टिफिकेट का दायरा मांस से आगे बढ़ कर सरिया और सीमेंट जैसे घर बनाने के सामान तक पहुँच गया है। केंद्र सरकार ने बताया है कि हलाल सर्टिफिकेट देने के नाम पर कई एजेंसियों ने लाखों करोड़ों रूपए बनाए हैं।

केंद्र सरकार ने यह दलीलें सुप्रीम कोर्ट में उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के खिलाफ दायर याचिकाओं के मामले में दी है। योगी सरकार ने 2023 में उत्तर प्रदेश में हलाल सर्टिफिकेट वाले उत्पादों की बिक्री पर रोक लगा दी थी। इसके खिलाफ कुछ संगठन सुप्रीम कोर्ट पहुँच गए थे।

आटा-बेसन भी हलाल

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में यूपी सरकार के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं की सोमवार (25 जनवरी, 2025) को सुनवाई की। इस दौरान केंद्र की तरफ से हलाल मामले में जवाब दाखिल करने के लिए सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता पेश हुए। उन्होंने बताया कि सरिया और सीमेंट, यहाँ तक कि बेसन पर भी हलाल का प्रमाण पत्र लगा हुआ था।

SG तुषार मेहता ने कहा, “जहाँ तक हलाल मीट का सवाल है, किसी को इसमें कोई आपत्ति नहीं हो सकती। लेकिन कोर्ट को यह आश्चर्य होगा, जैसा कि कल मुझे हुआ, सीमेंट तक का भी हलाल-सर्टिफाइड होना ज़रूरी है। सरिया का भी हलाल-सर्टिफाइड होना ज़रूरी है। यहाँ तक कि पानी की भी हलाल-सर्टिफाइड होना ज़रूरी है।”

SG तुषार मेहता ने कहा कि बेसन और आटा तक का हलाल सर्टिफाइड होना जरूरी किया गया था। उन्होंने प्रश्न उठाया कि इसकी क्या जरूरत है। SG मेहता ने कहा कि इस हलाल सर्टिफिकेट के धंधे में कई एजेंसियों ने लाखो करोड़ रूपए बना लिए हैं।

कीमत बढ़ा रहा हलाल का ठप्पा

SG मेहता ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि हलाल के चलते कई उत्पाद महंगे दामों पर बिक रहे हैं क्योंकि हलाल का ठप्पा लगाने के लिए फीस देनी पड़ती है। उन्होंने प्रश्न उठाया कि जो गैर मुस्लिम लोग हलाल नहीं खाना चाहते, उनके लिए महंगे उत्पाद लेने की मज़बूरी क्यों हो।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई अब मार्च तक के लिए टाल दी है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र द्वारा इस मामले में दाखिल जवाब की कॉपी भी हलाल को बचाने के लिए पहुँचे संगठनों को देने को कहा है। इस मामले में कोर्ट ने इन एजेंसियों पर एक्शन को लेकर पहले ही रोक लगा दी थी।

योगी सरकार ने लगाई थी रोक

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने नवम्बर, 2023 में राज्य में हलाल सर्टिफाइड उत्पादों पर बैन लगा दिया गया था। यूपी सरकार ने तय किया था कि राज्य की सीमा के भीतर हलाल उत्पादों के उत्पादन, वितरण, भण्डारण पर संपूर्ण बैन लागू हो। इसके लिए आधिकारिक तौर पर आदेश भी जारी किया गया था।

उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा था हलाल सर्टिफिकेट किसी उत्पाद की गुणवत्ता से संबंधित नहीं है। ऐसे निशान गुणवत्ता को लेकर भ्रम की स्थिति ही पैदा करते हैं। जिन उत्पादों पर इस तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं, उनका उल्लेख राज्य सरकार द्वारा जारी पत्र में साफ तौर पर किया गया था। यूपी में हलाल सर्टिफाइड प्रोडक्ट बैन होने के बाद हलाल ट्रस्ट ने कोर्ट का रास्ता पकड़ा था।

घुसपैठियों के लिए बॉर्डर सील, WHO से अलग, थर्ड जेंडर खत्म: राष्ट्रपति बनते ही एक्टिव हुए डोनाल्ड ट्रंप, भारत के लिए ‘प्रीमियम’ सीट, कई देशों के प्रमुख बैठे पीछे

अमेरिका को नया राष्ट्रपति मिल गया है। डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। यह शपथ ग्रहण समारोह कैपिटल रोटुंडा के भव्य कक्ष में आयोजित हुआ। भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विशेष दूत के रूप में इस समारोह में शामिल हुए। अपने शपथ ग्रहण समारोह के साथ ही डोनाल्ड ट्रंप एक्शन मोड में आ गए और ताबड़तोड़ फैसले लिए, जिसमें मैक्सिको की सीमा पर इमरजेंसी लागू करना और डब्ल्यूएचओ से अमेरिका को हटाना शामिल है।

शपथ ग्रहण समारोह में विदेश मंत्री जयशंकर

भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से यह शपथ ग्रहण समारोह कई मायनों में महत्वपूर्ण है। शपथ ग्रहण समारोह में विदेश मंत्री एस जयशंकर सबसे आगे की पंक्ति में बैठे नजर आए। ट्रंप जब मंच से संबोधित कर रहे थे, तब उन्होंने जयशंकर की ओर मुखातिब होकर संवाद किया। अमेरिका के लिए भारत की बढ़ती अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शपथ ग्रहण जैसे महत्वपूर्ण मौके पर भारत को बेहद तवज्जो दी गई। उनके साथ इक्वाडोर के राष्ट्रपति भी बैठे। कई देशों के राष्ट्रध्यक्षों को पीछे बैठाया गया।

शपथ ग्रहण समारोह के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन में अमेरिका को ‘स्वर्ण युग’ की शुरुआत का वादा किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब किसी भी देश के सामने झुकेगा नहीं। ट्रंप ने कई कठोर फैसलों की घोषणा की, जैसे WHO से अलग होना, थर्ड जेंडर को मान्यता न देना और पेरिस जलवायु समझौते से बाहर होना। ये सभी फैसले उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति को स्पष्ट करते हैं।

डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल के दौरान कई ऐसे फैसले लिए, जिससे अमेरिका और दुनिया पर गहरा प्रभाव पड़ने वाला है। उनके 10 बड़े फैसलों को सरल तरीके से समझते हैं:

WHO को अलविदा: ट्रंप ने अमेरिका को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से बाहर कर लिया। उन्होंने इसे अमेरिका के हितों के खिलाफ बताते हुए फंडिंग रोक दी।

पेरिस समझौते से बाहर: जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते से हटने का ऐलान किया, जिसे उन्होंने ‘अमेरिका विरोधी’ बताया।

BRICS को चेतावनी: ब्रिक्स देशों (भारत, चीन, ब्राजील, रूस, दक्षिण अफ्रीका) को धमकी दी कि अगर वे अमेरिका विरोधी कदम उठाते हैं, तो परिणाम भुगतने होंगे।

टिकटॉक को मोहलत: चीन से जुड़े ऐप टिकटॉक को अमेरिकी कानूनों के पालन के लिए 75 दिन का समय दिया, हालाँकि ट्रंप की नजर टिकटॉक को अमेरिकी नियंत्रण में लाने की तरफ है।

थर्ड जेंडर को खत्म किया: ट्रंप ने अमेरिका में सिर्फ ‘पुरुष और महिला’ को मान्यता दी और थर्ड जेंडर को खारिज कर दिया।

मेक्सिको बॉर्डर सील: दक्षिणी सीमा पर इमरजेंसी लगाकर सेना तैनात की, ताकि अवैध प्रवासियों को रोका जा सके।

ग्रीनलैंड पर नजर: ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिका के लिए जरूरी बताते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम बताया।

फ्री स्पीच की पैरवी: उन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर नया आदेश जारी किया, ताकि सरकारी सेंसरशिप रोकी जा सके।

कैपिटल हिल हिंसा से जुड़े लोगों को माफी: डोनाल्ड ट्रंप कैपिटल हिल हिंसा में शामिल 1500 रिपब्लिकन समर्थकों को माफी दे दी है और उनकी जेल से रिहाई बी शुरू हो गई है।

कनाडा-मेक्सिको पर टैक्स: इन देशों से आयात पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की, जिससे व्यापारिक तनाव बढ़ा।

अमेरिका के नवनियुक्त राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने उद्घाटन भाषण में अमेरिकी नागरिकों को बेहतर भविष्य का भरोसा दिलाया है। उन्होंने कहा कि अब अमेरिका अपने हितों को सबसे ऊपर रखेगा और दूसरे देशों के दबाव में नहीं आएगा। यह भाषण न केवल अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण था, बल्कि यह संदेश भी था कि ट्रंप प्रशासन नई विश्व व्यवस्था बनाने की ओर अग्रसर है।

गर्भवती गाय का सर काटा, पेट फाड़ बछड़ा निकाला: माँस निकाल कर ले गए, कर्नाटक में गोवंश की क्रूरता से हत्या

कर्नाटक में गायों पर हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। गायों के थन काटने और मंदिर के बछड़े की पूँछ काटने के बाद अब एक गाय की हत्या कर दी गई। इस गर्भवती गाय का पेट फाड़ कर उसके गर्भ से बछड़ा निकाल दिया गया। इसके बाद उसके शरीर से माँस निकाल ले गए।

यह घटना कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में रविवार (19 जनवरी, 2025) को हुई। यहाँ के होनावर ताल्लुक में कृष्णा आचारी नाम के एक शख्स की गाय गाँव के बाहर घास खाने के लिए गई थी, जिस दौरान गोतस्करों ने इस घटना को अंजाम दिया। उन्होंने इस सूनसान इलाके में इस गर्भवती गाय का सर काटा, फिर उसका पेट फाड़ दिया।

उसके पेट से बछड़ा निकाला गया। उसके शरीर से माँस अलग कर हड्डियाँ और टाँगे वहीं छोड़ दी गईं। माँस लेकर गोतस्कर फरार हो गए। जब गोपालक यहाँ पहुँचा तो उसने अपनी गाय की क्षत-विक्षत देह देखी। इसके बाद उन्होंने बाकी गाँव वालों और पुलिस को इस घटना की सूचना दी।

कृष्णा आचारी ने बताया कि वह इस गाय को 10 वर्षों से पाल रहे थे और उसे अपने घर का सदस्य मानते थे। इस घटना के बाद हिन्दू संगठनों ने प्रदर्शन किया है। स्थानीय लोगो ने आरोप लगाया है कि इस इलाके में पिछले कुछ समय से गोतस्करी चरम पर है। मामले में पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है।

मामले में स्थानीय भाजपा विधायक दिनाकर शेट्टी ने पहुँच कर राज्य की सिद्दारमैया सरकार पर गोवंश की लापरवाही करने का आरोप लगाया है। राज्य भाजपा अध्यक्ष बीवाई विजयेन्द्र कहा कि गाय पर हमला करने वालों के लिए राज्य सरकार के मन में सहानुभूति है।

राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष R अशोक ने कॉन्ग्रेस सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा, ” तुष्टीकरण और अराजकता के कारण दम तोड़ रही कॉन्ग्रेस सरकार की कमजोरी का फायदा उठाते हुए कट्टरपंथी ताकतें गायों पर हमला करके हिंदुओं को चुनौती दे रही हैं।”

उन्होंने आगे कहा “मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, गायों पर बार-बार हो रहे इन हमलों को देखें तो लगता है कि इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क है। ऐसा लगता है कि यह कट्टरपंथी ताकतों की कोई बड़ी जिहादी साजिश है। अगर सरकार इसे गंभीरता से नहीं लेती और इन अत्याचारों पर अंकुश नहीं लगाती तो पूरे राज्य में बड़ा आंदोलन होगा।”

कर्नाटक में 10 दिनों के भीतर गायों पर यह तीसरा क्रूर हमला है। इससे पहले बेंगलुरु में तीन गायों के थन काट दिए गए थे और उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया गया था। इस हमले में सैयद नसरू नाम का एक कट्टरपंथी पकड़ा गया था। इसके अलावा मैसुरु के नंजानगुड़ में मंदिर के एक बैल की पूँछ काट दी गई थी।

ताहिर हुसैन जैसों के चुनाव लड़ने पर लगनी चाहिए रोक: सुप्रीम कोर्ट, प्रचार के लिए जमानत माँग रहा है दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों का ‘मास्टरमाइंड’, AIMIM ने दिया है टिकट

दिल्ली दंगों का आरोपित ताहिर हुसैन ‘ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन’ की ओर से टिकट पाने के बाद जेल से बाहर आने को बेताब है। इसी कारण से पहले उसने नामांकन के लिए बेल माँगी और अब चुनाव प्रचार के लिए जमानत माँग रहा है।

उसकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ सुनवाई करेगी। पहले ये सुनवाई आज ही होनी थी लेकिन फिर इसे कल के लिए सूचीबद्ध किया गया। इस बीच जजों को मामले का विवरण दिया गया जिसे सुन जस्टिस मित्तल ने कहा- “आजकल तो लोग चुनाव जेल में बैठकर चुनाव लड़ लेते है… जेल में बैठकर चुनाव जीतना आसान हो गया।”

लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, आगे जस्टिस मित्तल ने कहा कि हुसैन जैसे लोगों के तो चुनाव लड़ने पर ही रोक लगा दिया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि AIMIM उम्मीदवार ताहिर हुसैन ने कुछ समय पहले हाई कोर्ट से कस्टडी पेरोल दी गई थी ताकि वो चुनावों में नामांकन कर सके। उस समय दिल्ली पुलिस ने उसकी बेल का विरोध किया था ये कहकर कि ताहिर हुसैन दंगों का मुख्य साजिशकर्ता, सरगना और फंडिंग करना वाला है। वह UAPA और PMLA सहित तीन मामलों में जेल में हैं।

इसके अलावा उसके खिलाफ इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या का मामला दर्ज है। मार्च, 2024 में ट्रायल कोर्ट ने हुसैन और अन्य के खिलाफ धारा 147, 148, 153ए, 302, 365, 120बी, 149, 188 और 153ए आईपीसी के तहत आरोप तय किए हैं। हुसैन पर धारा 505, 109 और 114 आईपीसी के तहत भी आरोप लगाए गए है।

दिल्ली पुलिस का पक्ष सुनकर ताहिर हुसैन की बेल याचिका खारिज कर दी गई और सिर्फ नामांकन के लिए कस्टडी पैरोल दी गई। अब ताहिर हुसैन चुनाव प्रचार के लिए बाहर आना चाहता था। पहले उसने 14 जनवरी से 9 फरवरी तक जेल से बाहर रहने के लिए याचिका डाली थी।

उल्लेखनीय है कि साल 2020 में दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगा के बाद ताहिर हुसैन गिरफ्तार हुआ था। इसके बाद कड़कड़डूमा कोर्ट ने ताहिर हुसैन और 10 अन्य आरोपियों पर हत्या सहित कई गंभीर धाराओं के तहत आरोप तय किए हैं। कोर्ट ने कहा कि ताहिर हुसैन की गतिविधियाँ इस बात का संकेत थीं कि वह भीड़ को उकसाने का काम कर रहा था। हुसैन ने तब अपने बचाव में कहा था कि वो दंगाइयों को उकसाने नहीं, रोकने का प्रयास कर रहा था। हालाँकि सारे सबूत उसके खिलाफ थे।

अंग्रेजों ने 6 करोड़ भारतीयों को दी अकाल मौत, अफीम की खेती से कई इलाकों को किया बर्बाद: शिक्षा से मातृभाषा को बाहर निकाल अंग्रेजी थोपा, जाति की लगाई आग

ब्रिटिश राज में भारत में लगभग 6 करोड़ लोगों की असामयिक मौत हुई। अंग्रेजों की नीतियों के चलते भारतीय उपमहाद्वीप में रहने वालों के जीन तक बदल गए। उन्होंने भारत में जाति व्यवस्था को भी खूब बढ़ावा दिया और इसका रूप विकृत कर दिया।

इसके अलावा अंग्रेजों ने भारत में कई इलाकों में अफीम उगा कर उन्हें शैक्षणिक क्षेत्र में बर्बाद कर दिया। यहाँ तक भारत की स्थानीय बोलियों को भी शिक्षा व्यवस्था से बाहर करवा दिया। यह सारी बातें अंतरराष्ट्रीय संस्था ऑक्सफैम ने एक रिपोर्ट में बताई है।

ऑक्सफैम एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जो विश्व में गरीबी और अन्याय के खिलाफ काम करने का दावा करती है। यह इससे सम्बन्धित रिपोर्ट भी समय-समय पर प्रकाशित करती है। रिपोर्ट ‘टेकर्स, नॉट मेकर्स’ (लूटने वाले, ना कि बनाने वाले) नाम से प्रकाशित हुई है।

स्थानीय भाषाओं को अंग्रेजों ने किया खत्म

ऑक्सफैम ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि उपनिवेशवादी ताकतों ने शिक्षा को अपना हथियार बताया। उन्होंने शिक्षा का उपयोग लोगों में यूरोपियन मान्यताओं को डालने के लिए किया। इस उत्पीड़न के चलते कई देशों ने उनको गुलाम बनाने वालों की ही भाषा को अपना लिया और उनकी संकृति तक मानने लगे।

ऑक्सफैम की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के एक तिहाई लोग आज भी वह भाषा बोलते हैं, जो उनको गुलाम बनाने वालों की थी। भारत में भी स्थानीय भाषाओं का अस्तित्व मिटाने में बड़े तौर पर हाथ अंग्रेजों के शासन का रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में भारत में 0.14% मातृभाषाएँ ही शिक्षा में माध्यम में उपयोग की जाती हैं। इनको 1% विद्यालयों में भी नहीं पढ़ाया जाता।

इतना लूटा कि बदल गए जीन

अंग्रेजों ने भारतीयों को शिक्षा ही नहीं बल्कि खाने से भी दूर कर दिया। ऑक्सफैम की रिपोर्ट के अनुसार, अंग्रेजों की नीतियों की वजह से 1891 से लेकर 1920 के बीच भारत में 5.9 करोड़ असामयिक मौतें हुईं। अंग्रेजों ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारत में अनाज का अकाल होने दिया।

उन्होंने अपनी सेना का पेट भरने के लिए नस्लभेदीसोच के तहत अनाज के आयात पर प्रतिबन्ध लगा दिया। इसके चलते बंगाल के अकाल में 30 लाख (अनुमान) लोग मारे गए। यह ऐसा अकाल था कि जिसका असर अब बांग्लादेश और भारत में रहने वाले इससे प्रभावित लोगों की पीढ़ियों में हो रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस अकाल ने लोगों के जीन में बदलाव कर दिया। रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस अकाल के चलते यहाँ रहने वाले लोगों में मोटापे और डायबिटीज की समस्या आज भी बनी हुई है, क्योंकि जीन में अकाल को सहने की क्षमता उस समय विकसित हुई थी। अब वह जीन सामान्य खानपान के साथ तालमेल नहीं बिठा पाता।

जातीय भेदभाव भी अंग्रेजों की ही देन

ऑक्सफैम की रिपोर्ट में बताया गया है कि अंग्रेजों ने अपनी शक्ति बढ़ाने के लिए हर तरह के सामाजिक बँटवारे को इस्तेमाल किया। धर्म, जाति, नस्ल और रंग, हर प्रकार के हथकंडे समाज को बाँटने के लिए अपनाए गए। उन्होंने पहले से चले आ रहे भेदभावों को खत्म करने के बजाय अपने इस्तेमाल में लिया और उन्हें मजबूत कर दिया।

रिपोर्ट कहती है कि अंग्रेजों औपनिवेशिक काल के दौरान, जाति व्यवस्था को कानूनी और प्रशासनिक माध्यम से एकदम औपचारिक रूप दे दिया। इसके चलते इसकी सीमाएँ और भी कठोर हो गईं। इससे समाज में भेदभाव का स्थान भी पक्का हुआ। गौरतलब है कि अंग्रेज ही मार्शल रेस थ्योरी लाए थे।

भारत में अफीम उगा चीन को किया बर्बाद

अंग्रेजों ने सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि चीन को भी दशकों तक प्रताड़ित किया। चीन के लोगों को अफीम की लत अंग्रेजों ने ही लगवाई। यह अफीम उगाने के लिए उन्होंने भारत में किसानों को मजबूर किया। ऑक्सफैम की रिपोर्ट में बताया गया है कि 19वीं सदी आते-आते में, अफीम ब्रिटिश राज के लिए जमीन के लगान और नमक के टैक्स के बाद सबसे ज्यादा कमाई दे रहा था।

रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन इलाकों में अंग्रेजों ने अफीम उगाना चालू किया, वह शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में पीछे होते गए। रिपोर्ट में बताया गया कि इस अफीम उगाने का असर आज तक देखा जा रहा है और यह इलाके आज भी शिक्षा के क्षेत्र में पीछे हैं।

किसी की ऊँगलियाँ गायब, किसी को घसीटते हुए ले गए आतंकी… 15 महीने बाद हमास की कैद से मुक्त हुईं इजरायल की बहादुर बेटियाँ रोमी, डोरोन और इमीली: परिवार देख कभी रोईं… कभी हँसी

हमास-इजरायल के बीच सीजफायर ऐलान के बाद रविवार (20 जनवरी 2025) को गाजापट्टी से इजरायल की तीन लड़कियों को रिहा किया गया। 24 साल की रोमी गोनेन, 28 साल की इमीली डामरी और 31 साल की डोरोन।

15 महीने हमास की कैद में रहने वाली तीनों लड़कियों को सबसे पहले प्रारंभिक चिकित्सा जाँच के लिए आईडीएफ द्वारा तैयार बेस कैंप में रखा गया। बाद में उन्हें हाशोमर अस्पताल ले जाया गया।

लड़कियों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए सैंकड़ों इजरायली जुटे। वहीं अपने बच्चियों को वापस पाकर जहाँ उनके परिजन भावुक हो उठे, तो वहीं उन लड़कियों को अपने घर वापस लौटने का यकीन नहीं हो पाया कि वो लोग आजाद हैं।

अस्पताल ने उन्हें अच्छा महसूस कराने के लिए दवाइयों के लिए प्रसाधन सामग्री और मेकअप के सामान दिए। वहीं अस्पताल के बाहर खड़े लोगों ने उनका उत्साह बढ़ाने के लिए खूब गाने गए। सरजमीं पर वापस लौटने के बाद लड़कियाँ कभी तो हमास की कैद को याद कर रोती दिखीं तो कभी वापस लौटने की बात सोचकर खिलखिलाती।

इजरायली पीएम के कार्यालय से तीनों की तस्वीर और वीडियोज साझा किया गया है। इनमें एक फोटो इमीली की भी है जिसमें वो हाथ दिखाकर सबका अभिवादन कर रही थीं, लेकिन उनकी तस्वीर में सिर्फ दो उंगलियाँ दिख रही है।

फोटो साभार: टाइम्स ऑफ इजरायल

सवाल करने पर पता चला कि 7 अक्तूबर 2023 को जब इजरायल पर हमास ने हमला किया था तब आतंकियों ने उनके घर में घुसकर कुत्ते को गोली मारी थी। वहीं जब वह कुत्ते के पास झुकीं तो उनके भी हाथ में गोली लगी। इसके बाद उन्हें कैद कर लिया गया।

इसी तरह रोमी ने भी अपने घर लौट सभी का धन्यवाद दिया जिन्होंने उन्होंने छुड़ाने में मदद की। रोमी की माँ ने भी अपनी और अपनी बेटी की आखिरी बातचीत के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी झाड़ियों के पीछे छिपकर उन्हें कॉल करके कह रही थी- “मम्मी मुझे गोली मार दी गई है। मैं बच नहीं पाऊँगी।” इसके बाद कॉल पर कुछ सुनाई नहीं पड़ा क्योंकि गोलियों की तड़तड़ाहट शुरू हो गई थी।

डोरोन को भी 7 अक्तूबर को ही हमास ने अपना बंधक बनाया था। आखिरी बार डोरोन ने अपने घरवालों को वॉयस मैसेज भेज कहा था- “उन्होंने मुझे पकड़ लिया है।” इसके बाद वह कैद कर ली गईं। परिवार को पता तब चला जब उन्होंने एक वीडियो देखी जिसमें अन्य कैदियों के साथ वह दिख रही थीं।

हमास का हमला और बंधक बने लोग

गौरतलब है कि इजरायल और हमास के बीच 41 दिन युद्धविराम का समझौता हुआ है। यह समझौता 19 जनवरी से 1 मार्च तक के लिए लागू होगा। इस दौरान इजरायल 735 फिलिस्तीनियों को रिहा करेगा। वहीं हमास भी अपनी कैद से अमेरिकी नागरिक समेत इजरायली बंधकों को छोड़ेगा। अनुमान है कि हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को 251 लोगों को बंधक बनाया था जिसमें 91 को अब भी हमास ने बंधक बना रखा है।

उत्तराखंड में UCC लागू करने की सारी तैयारियाँ पूरी, पूर्व CJI रंजन गोगोई ने बताया राष्ट्रीय एकता के लिए महत्वपूर्ण: कहा- समान नागरिक संहिता का मजहब से कोई लेना-देना नहीं

उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की तैयारियाँ पूरी हो गईं हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जल्द ही UCC लागू करने की तारीखों का ऐलान करने की बात कही है। वहीं देश पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) और राज्यसभा MP ने UCC कानून को देश की एकता के लिए जरूरी है। उन्होंने इसे लागू किए जाने से पहले देश में आम सहमति बनाने जाने की अपील की है। जस्टिस गोगोई ने यह UCC के समर्थन की यह बातें सूरत लिटरेचर फेस्टिवल में कही हैं।

जस्टिस गोगोई ने संघ के मुखपत्र ऑर्गनाइजर के सम्पादक प्रफुल्ल केतकर के साथ बातचीत में UCC पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा, “UCC को मैं एक प्रगतिशील कानून मानता हूँ। इससे तमाम उन परंपराओं में बदलाव होगा जो अब कानून बन चुकी हैं। इस बात में कोई दोराय नहीं है कि यह संविधान में निहित लक्ष्य है और हमें इसे प्राप्त करना है।”

जस्टिस गोगोई ने कहा, “मैं समझता हूँ कि यह (UCC) देश की एकता के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे सामाजिक न्याय मिलेगा। यह बात साफ़ कर दी जानी चाहिए कि UCC संविधान के अनुच्छेद 25 एवं 26 (धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार) का उल्लंघन नहीं करता। यह शादी, तलाक और विरासत जैसे मामलों से जुड़ा होगा। यह गोवा में बढ़िया तरीके से काम कर रहा है।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं समझता हूँ कि इस कानून के लिए आम सहमति बनाना और गलत जानकारी को फैलने से रोकना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने शाहबानों मामले में समेत 5 मौकों पर पूछा है कि केंद्र UCC के मुद्दे पर क्या कर रहा। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आदेश जारी नहीं करेगा।”

जस्टिस गोगोई ने आगे बताया, “मैं इस देश के सांसदों और सरकार से एक बात कहना चाहता हूँ कि इस क़ानून के लिए जल्दबाजी ना करें। आम सहमति बनाएँ, इस देश के लोगों को बताए कि असल में UCC क्या है। समाज का एक तबका हमेशा ये कहेगा कि उसे समझ नहीं आएगा, वह ऐसा नाटक करेगा, उन्हें छोड़ दें।” जस्टिस गोगोई की यह बातचीत आप नीचे लगे वीडियो में 4 घंटा 2 मिनट से लेकर 5 घंटा 3 मिनट तक सुन सकते हैं।

UCC को लेकर जस्टिस गोगोई के अलावा उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी ही में एक बयान दिया है। उन्होंने कहा, “2022 के चुनाव में हमारा वादा था कि जीत पर हम UCC कानून लाएँगे। जीतने के बाद हमने 2022 में उत्तराखंड की जनता से वादा किया था कि हमारी सरकार बनते ही हम UCC बिल लाएँगे।”

उन्होंने कहा, “हम इसे लेकर आए। कमेटी ने इसका मसौदा तैयार किया, इसे विधानसभा में पास किया गया, राष्ट्रपति ने इसे मंजूरी दी और यह कानून भी बन गया। ट्रेनिंग की प्रक्रिया भी लगभग पूरी हो चुकी है। सब कुछ विश्लेषण करने के बाद हम जल्द ही इसे लागू करने की तारीखों का ऐलान करेंगे।”

गौरतलब है कि फरवरी, 2024 में उत्तराखंड विधानसभा में UCC क़ानून को मंजूरी मिली थी। इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी मंजूर कर लिया था। इसकी ट्रेनिंग और नियम की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है।

किसी ने खींचा हाथ, किसी ने दबोचा, कोई उतारने लगा कपड़े… 19 साल की लड़की को नोंचने लगा 30 बांग्लादेशियों का ग्रुप: पीड़ित ब्रिटिश छात्रा ने सुनाई यौन उत्पीड़न की भयावह कहानी

इटली के मिलान में ब्रिटिश यूनिवर्सिटी की 19 वर्षीय छात्रा के साथ 30 बांग्लादेशियों द्वारा यौन उत्पीड़न किए जाने का मामला सामने आया है। छात्रा ने हिम्मत दिखाते हुए मीडिया के सामने खुद आपबीती बताई है। पीड़िता के अनुसार, घटना मिलान के पियाजा डेल दुओमो में पर चर्च के पास तब हुई जब वो अपने दोस्तों के साथ नए साल का जश्न मना रही थीं।

पीड़िता के अनुसार, उसपर हमला करने वालों ने न केवल भीड़ में उसके साथ छेड़छाड़ की बल्कि उसे अकेले में ले जाकर उसके कपड़े उतारने का भी प्रयास किया। ये सब तब किया गया जब नए साल शुरू होने में दो मिनट थे और सब लोग आतिशबाजी देखने बाहर निकलते थे।

इसी बीच भीड़ में पीड़िता की बांह खींची गई और फिर हाथ पकड़ लिया गया। इसके बाद वो लोग उसे गलत ढंग से छूने लगा। थोड़ी देर में उन लोगों ने पीड़िता को उसके दोस्तों से अलग खींच लिया और अलग ले जाकर उसके कपड़े उतारने का प्रयास करने लगे।

लड़की ने इस बीच खुद को छुड़ाने के लिए विरोध किया तो आरोपित उसे छोड़ने की बजाय और तेजी से छेड़छाड़ करने लगे। उन्होंने पीड़िता पर एक लिक्विड फेंका जिससे उसकी आँख और नाक जलने लगी। उसने अपने आपको इतना छुड़ाने का प्रयास किया कि उसके खून तक निकल आया।

पीड़िता बताती है कि उस समूह में उसे जितने पुरुषों के पास फेंका गया सब करीबन 40 के आसपास थे, जो कभी उसे दबा रहे थे, कभी कपड़े उतार रहे थे। पीड़िता कहती है कि एक ने हाथ से उसका यौन उत्पीड़न किया जबकि दूसरे ने उसका रेप किया।

मीडिया को आपबीती सुनाते हुए लड़की ने कहा कि जब वो चंगुल से छूटी तब उसे एक और महिला की आवाज सुनाई पड़ी थी जिसके साथ वही हो रहा था जो उसके साथ हुआ। पीड़िता ने इतने के बावजूद उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन तभी उसे दोबारा पकड़ लिया और गंदी हँसी हँसते हुए उसके शरीर से छेड़खानी करने लगे।

पीड़िता कहती है कि जब उसने और उसके दोस्तों ने इस संबंध को पुलिस को बताया तो उन्होंने पहले यकीन नहीं किया, मगर बाद में खून दिखने पर पुलिस गंभीर हुई। जाँच के बाद सामने आया वो आरोपित बांग्लादेशी थी। महिला पुलिस अधिकारी ने लड़की को बताया भी बांग्लादेशी पुरुषों की ये समस्या जानी-मानी है।

पूरे लंदन में 4 बार बिछाई जा सकती है 50 पाउंड के नोटों की दरी… इतना पैसा भारत से लूटकर ले गए अंग्रेज: ‘गुलाम बनाकर ब्रिटेन ने किया विकास’ नैरेटिव भी आँकड़ों से ध्वस्त

अंग्रेजों ने भारत में अपने राज के दौरान इतना पैसा लूटा, जिससे लंदन शहर में 4 बार 50 पाउंड के नोटों से कालीन बिछाई जा सकती है। अंग्रेज भारत से 135 साल के भीतर ही इतना पैसा लूट चुके थे, जितना वर्तमान में विश्व के 10 शीर्ष देशों की मिला कर अर्थव्यवस्था है। इसमें से अधिकांश पैसा ब्रिटेन के अमीरों के पास गया। अंग्रेजों ने भारत की अर्थव्यवस्था को इस कदर निचोड़ा कि वह साल 1900 आते-आते बेदम हो गई।

यह सारी बातें एक हालिया रिपोर्ट में बताई गई हैं। यह रिपोर्ट ऑक्सफैम ने जारी की है। ऑक्सफैम एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जो विश्व में गरीबी और अन्याय के खिलाफ काम करने का दावा करती है। यह इससे सम्बन्धित रिपोर्ट भी समय-समय पर प्रकाशित करती है। रिपोर्ट ‘टेकर्स, नॉट मेकर्स’ (लूटने वाले, ना कि बनाने वाले) नाम से प्रकाशित हुई है। इस रिपोर्ट में इतिहास में उपनिवेशवाद और वर्तमान में वैसे ही प्रयासों का गरीब देशों पर पर क्या असर हुआ, इसकी बात की गई है। इस रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य बताए गए हैं।

भारत से लूट के ले गए 65 ट्रिलियन डॉलर

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 1765 और 1900 के बीच, भारत से इंग्लैंड में $64.82 ट्रिलियन (लगभग ₹5525 लाख करोड़) खींचे गए। इसी रिपोर्ट में बताया गया कि इस $64.82 ट्रिलियन में से $33.8 ट्रिलियन (लगभग ₹2873 लाख करोड़) उस समय के 10% अमीर अंग्रेजों के पास गए। यह अमीर अंग्रेज भारत से लूटी गई दौलत का 52% पाए।

रिपोर्ट में बताया गया कि यह पैसा इतना है जिससे लंदन शहर में 50 पाउंड के नोटों की 4 कालीन बिछाई जा सकती हैं। लंदन का क्षेत्रफल 1572 स्क्वायर किलोमीटर है। अमीरों के अलावा इंग्लैंड के नए बने मिडल क्लास को 32% लूटी हुई दौलत मिली। इन सबके वंशज भी इस पैसे का मजा लूट रहे हैं।

इसी रिपोर्ट में बताया गया है कि अंग्रेजों ने भारत से इतना पैसा लूटा कि दुनिया की औद्योगिक पैदावार (GIP) में इसका हिस्सा 25% से घट कर 2% पर आ गया। रिपोर्ट के अनुसार, “1750 में, भारतीय उपमहाद्वीप में विश्व GIP का लगभग 25% हिस्सा था। हालाँकि, 1900 तक यह आँकड़ा तेज़ी से घटकर मात्र 2% रह गया।”

लूटे पैसे ही बनाए रखा गुलाम

अंग्रेजों ने अपनी लूट को छुपाने के लिए लगातार यह मिथ फैला रखा है कि उन्होंने भारत को अपने शासन के दौरान विकसित किया। अंग्रेजी राज के समर्थक यह दावा करते हैं कि उन्होंने भारत में अपनी राज के दौरान ट्रेन लाइन, रोड, स्वास्थ्य और शिक्षा पर काम किया और इस पर निवेश किया। लेकिन ऑक्सफैम की रिपोर्ट में इस बात की सच्चाई भी सामने रख दी गई है।

इस रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी सैन्य शक्ति से ही भारत में अंग्रेजों का राज कायम हो सका। भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन काल में सेना पर खर्च, कुल खर्च का लगभग 75% था। रिपोर्ट में बताया गया कि जनता की समस्याओं पर मात्र केवल 3% हिस्सा खर्च किया गया।

रिपोर्ट में बताया गया कि ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी सिंचाई व्यवस्था की मरम्मत करने में विफल रहे, इसके चलते खेती में समस्याएँ आईं। रिपोर्ट में बताया गया कि इस सब के चलते भारत में अकाल पड़े और समस्या गंभीर होती गई।

ऑक्सफैम की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जब गुलाम बनाए गए देशों को आजादी भी मिली तो सत्ता ऐसे लोगों को सौंप दी गई, जो कि उन्हीं के चुने हुए कुछ अभिजात्य वर्ग के थे। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वर्ण व्यवस्था को अंग्रेजों ने कानूनी रूप दिया और इसे और भी विकृत बना दिया।