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चेन्नई अस्पताल से रिहा कोरोना मरीज ने किया ISIS आतंकियों जैसा इशारा, जानिए क्या है इसका मतलब

देश-विदेश में कोरोना वायरस के कहर और खासकर इसमें तबलीगी जमात की भागीदारी के बीच कोरोना वायरस के इलाज के बाद चेन्नई के एक अस्पताल से डिस्चार्ज किए जाने वाले रोगियों की आज एक पत्रकार द्वारा कुछ तस्वीरें जारी की गईं। रिपब्लिक टीवी के पत्रकार संजीव सदगोपन ने चेन्नई अस्पताल से रिहा होने वाले मरीजों की तीन तस्वीरें ट्वीट कीं, इन तस्वीरों में ज्यादातर मुस्लिम थे।

इन तस्वीरों में एक ख़ास बात सामने आई है, जिसने सबका ध्यान आकर्षित किया है; वो ये कि दो मरीज अपनी तर्जनी को आसमान की ओर उठाकर वही इशारा करते हुए नजर आए, जिसका प्रयोग आतंकवादी संगठन ISIS वाले भी करते नजर आते हैं।

चेन्नई के अस्पताल से डिस्चार्ज किए जा रहे मरीजों की तस्वीर
चेन्नई के अस्पताल से डिस्चार्ज किए जा रहे मरीजों की तस्वीर

चेन्नई के अस्पताल से डिस्चार्ज किए जा रहे मरीजों की तस्वीर

माइक्रो-ब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर पर कई लोगों ने इन मरीजों के इस इशारे का अर्थ आईएसआईएस के साथ संबंध या फिर सहानुभूति से जोड़ा है। कुछ लोगों ने यह तस्वीर देखने के बाद ट्वीट करते हुए लिखा है कि राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) को इसका संज्ञान लेकर इसकी जाँच करनी चाहिए क्योंकि 3 जमाती आतंकवादी संगठन आईएसआईएस को सलामी देते हुए नजर आ रहे हैं।

क्या है इस्लाम में तर्जनी उठाने का अर्थ

फॉरेन अफेयर्स पर एक लेखक ने स्पष्ट किया है- “जब आईएसआईएस इस इशारे का प्रयोग करता है, तो यह एक ऐसी विचारधारा का समर्थन कर रहा होता है जो पश्चिम के साथ-साथ, किसी भी प्रकार के बहुलवाद (Pluralism) के भी विनाश की माँग करता है। दुनिया भर में संभावित जिहादी लड़कों के लिए भी यह उनके इस विश्वास को दर्शाता है कि वे दुनिया पर हावी हो जाएँगे।”

अमेरिका की केंद्रीय खुफिया एजेंसी सीआईए की वेबसाइट पर एक लेख में ‘तौहीद’ के बारे में बताया गया है:

“वस्तुतः तौहीद का अर्थ है अद्वैत, एकीकरण या ‘एकता पर जोर देना’, और यह एक अरबी क्रिया (वहाड़ा) से आता है, जिसका अर्थ खुद को एकजुट करना, या समेकित करना है। हालाँकि, जब तौहीद शब्द का उपयोग अल्लाह के संदर्भ में किया जाता है, तब अल्लाह (यानी, तौहीदुल्लाह) का अर्थ है, मनुष्य के सभी कार्यों में अल्लाह की एकता को महसूस करना और बनाए रखना जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से उससे संबंधित है।”

शरीअत की शब्दावली में तौहीद की परिभाषा है कि अल्लाह तआला को उस के साथ विशिष्ट उलूहियत (उपास्यता, देवत्व), रूबूबियत (प्रभुता) और नामों एवं गुणों में एकता और अकेला मानना। यानी, अल्लाह को इस प्रकार भी परिभाषित कर सकते हैं कि यह विश्वास और आस्था रखना कि अल्लाह तआला अपनी रूबूबियत, उलूहियत और नामों एंव गुणों में अकेला है उसका कोई साझी नहीं।

सीआईए की वेबसाइट पर यह लेख लिखने वाली नथानियल जेलिंस्की का मत था कि आसमान की ओर तर्जनी का यह इशारा चरमपंथी आतंकवादी ‘तौहीद’ के साथ वर्णित अल्लाह के उस संदेश को ही जताने के लिए करते हैं, जिसमें किसी भी अन्य सत्ता की कल्पना को भी कुफ़्र बताया गया है।

एक अन्य वेबसाइट www.dar-alifta.org, जिसमें इस्लाम के प्रचलित रिवाजों का विवरण मिलता है, पर भी तर्जनी आसमान की ओर उठाने और तौहीद के बारे में लिखा है। वेबसाइट के अनुसार, आसमान की ओर उठाई गई तर्जनी इस्लाम के जिन तीन सिद्धांतों का संकेत देती हैं। वो हैं:

तशहुद में एक की तर्जनी को उठाने से तौहीद (एकेश्वरवाद) का संकेत मिलता है।

  • तर्जनी को ‘इल्ला अल्लाह’ कहते समय उठाया जाना चाहिए।
  • ‘ला इल्हा’ (कोई देवता नहीं है)।
  • इल्ला अल्लाह ‘तौहीद’ को ही दर्शाता है।

इसके अलावा, वेबसाइट कुरान से उदाहरणों का हवाला देती है जहाँ इमाम द्वारा ऊँगली उठाकर किए गए इशारे के महत्व के बारे में बताया गया है –

1- अल-बहाकी ने अल-सुन्न अल-कुबरा में इब्न ‘अब्बास के माध्यम से सूचना दी कि इस्लाम के पैगंबर ने कहा: ‘यह’, और उन्होंने अपनी तर्जनी की ओर इशारा किया ‘इखलास’ (विश्वास की ईमानदारी) और ‘यह’, और उन्होंने उसे उठाया। उसके कंधों पर हाथ ‘दुआ’ को दर्शाता है। और ‘यह’, और उसने अपने हाथों को ऊँचा किया ‘इब्तिहाल’ (आह्वान) को दर्शाता है।
2- हदीस के एक अन्य वाक्यांश में, इमाम अबू बक्र इब्न अबू शायबा और अल-सुअन अल-कुबरा में अल-सुन्न अल-कुबरा ने इब्न ‘अबास के माध्यम से सूचना दी कि इस्लाम के पैगंबर ने कहा: ‘यह इख़लास है’ अर्थात इल्ला अल्लाह कहते समय तर्जनी उठाना।
3- इब्न शायबा ने इब्राहिम अल-नखाई के माध्यम से सूचना दी, जिन्होंने कहा था: “अल्लाह अल्लाह कहते समय ऊँगली उठाना तौहीद है। लेकिन दो उँगलियाँ उठाना ठीक नहीं।”

जेलिंस्की ने इस लेख में लिखा है – “ऐसे ही इशारों का इस्तेमाल वर्षों से जिहादियों द्वारा किया जा रहा है, जिसमें ओसामा बिन लादेन जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। जिहादी संदर्भ में भी उठी हुई तर्जनी राजनीतिक रूप में मानी जाती है, अर्थात हर उस सत्ता का विरोध, जो शरिया कानून के तहत नहीं आती है”। इसके बाद से यह इशारा सिर्फ ISIS तक ही सीमित नहीं रहा बल्कि, उनके हर समर्थक ने इसका इस्तेमाल किया।

उल्लेखनीय है कि यही इशारा इस्लामी सिद्धांतों में निहित है और शायद इसी कारण आतंकवादी संगठन आईएसआईएस के साथ भी गहराई से जुड़ा हुआ है। आईएसआईएस द्वारा मोसुल पर कब्जा करने के बाद भी बगदादी ने अपने पहले जुमे के भाषण में इसी इशारे का इस्तेमाल किया था।

मोसुल पर कब्जा करने के बाद बगदादी

यहाँ तक कि तर्जनी उठाने का यह तरीका खोजी और ऐसे पत्रकारों ने भी लोगों की पहचान के लिए इस्तेमाल किए हैं, जो ISIS समर्थक रहे हैं। जिससे यह स्पष्ट होता है कि तर्जनी उठाने का यह इशारा सिर्फ कट्टरपंथी जिहादी ही नहीं बल्कि सभी चरमपंथियों के बीच प्रचलित है।

चेन्नई के मरीज का ‘तौहीद’ से क्या रिश्ता है

चेन्नई के अस्पताल से डिस्चार्ज किए गए इन दो मरीजों के द्वारा किए गए तौहीद के इस इशारे ने इसी वजह से सबका ध्यान आकर्षित किया है। ब्रिटेन में इस्लामोफोबिया अवेयरनेस माह को मुस्लिम एंगेजमेंट एंड डेवलपमेंट (MEND) नामक संस्था द्वारा चलाया जाता है। MEND का कहना है कि एक तर्जनी का ऊपर की ओर इशारा करते हुए लोगो ‘इस्लामिक प्रार्थना अनुष्ठान में एकेश्वर अल्लाह’ को दर्शाता है, लेकिन आईएसआईएस के साथ इशारे के जुड़ाव के कारण, बेडफोर्डशायर पुलिस द्वारा एक बार लोगों की प्रतिक्रिया के बाद ऐसे ही एक पोस्टर को ट्वीट करने के बाद डिलीट कर दिया गया था।

बेडफोर्डशायर पुलिस द्वारा यह पोस्टर डिलीट कर दिया गया था

इस प्रकार चेन्नई के इन मरीजों के तर्जनी के इशारे का सिर्फ यही अर्थ नहीं होता कि उनका सम्बन्ध आईएसआईएस से हो, क्योंकि यह इशारा कट्टरपंथी एकेश्वरवादी मुस्लिमों द्वारा भी इस्तेमाल किया जाता है।

राजस्थान: क्या केवल कॉन्ग्रेस MLA की कार रोकने के कारण ही IAS अधिकारी तेजस्वी राणा का हुआ तबादला?

टाइम्स ऑफ इंडिया ने शुक्रवार को एक रिपोर्ट प्रकाशित की। इसके अनुसार राजस्थान में एक कॉन्ग्रेस विधायक की कार रोकने पर IAS अधिकारी तेजस्वी राणा का तबादला कर दिया गया। विधायक जिस गाड़ी में सवार थे उसके ड्राइवर के पास लाइसेंस नहीं था। आईएस अधिकारी ने विधायक के ड्राइवर पर लगाया जुर्माना, तबादला (IAS officer fines MLA’s driver, transferred) शीर्षक से यह खबर प्रकाशित की गई है। इसमें कहा गया है कि राणा ने 14 अप्रैल को बेगूं से विधायक राजेंद्र बिधूड़ी की कार के ड्राइवर पर जुर्माना लगाया। इसके बाद राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार ने उनका तबादला कर दिया।

रिपोर्ट के अनुसार आईएएस अधिकारी राणा चित्तौड़गढ़ के एसडीएम के तौर पर तैनात थीं। इस घटना के एक दिन बाद ही उन्हें जयपुर में राज्य स्वास्थ्य आश्वासन प्राधिकरण में संयुक्त निदेशक के पद पर स्थानांतरित कर दिया गया। इस खबर ने लोगों को चौंका दिया।

लेकिन, टाइम्स ऑफ इंडिया यहाँ एक जरूरी बात बताना भूल गई। असल में इस घटना से दो दिन पहले से ही राणा चित्तौड़गढ़ में व्यापारियों और स्थानीय नेताओं के विरोध का सामना कर रही थीं। शायद यही तबादले की असली वजह थी। दरअसल मंगलवार को एसडीएम राणा सब्जी बाजार गईं थी। यहॉं उन्होंने कथित तौर पर दुकानदारों के साथ दुर्व्यवहार किया। यहॉं तक ​​कि कुछ दुकानों में तोड़फोड़ भी की। यह पूरा घटनाक्रम वहाँ लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया।

बाजार में राणा ने कोरोनावायरस के प्रसार को रोकने के लिए अनिवार्य रूप से सामाजिक दूरी बनाए रखने के लिए लोगों को डाँट फटकार लगाई। जब विक्रेताओं ने इसके जवाब में उनके द्वारा जारी पास दिखाए, तो गुस्से में उन्होंने पास भी फाड़ दिए। इसके बाद, दुकानों के रजिस्टरों को फेंकने के लिए आगे बढ़ीं और कुर्सियों और मेजों को भी दूर फेंक दिया।

इस घटना के बाद गुस्साए व्यापारियों ने डीसी के पास जाकर उनकी शिकायत की। डीसी ने सभी सबूतों के आधार पर घटना की रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार को भेज दी। रिपोर्टों के अनुसार, मुख्य सचिव ने रिपोर्ट के आधार पर तेजस्वी राणा को स्थानांतरित करने का फैसला किया।

दिलचस्प बात तो यह है कि टाइम्स ऑफ इंडिया के हिंदी संस्करण नवभारत टाइम्स के प्रकाशन में 14 अप्रैल की घटना को सीसीटीवी फुटेज सहित बताया गया है। वीडियो में स्पष्ट रूप से राणा, रजिस्टर को फाड़ते और फर्नीचर फेंकते नजर आती हैं।

इसके अलावा, टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में खुद बिधूड़ी के हवाले से कहा गया है कि अधिकारी के स्थानांतरण में उनकी कोई भूमिका नहीं है। मीडिया से बात करते हुए, बिधूड़ी ने बताया कि वे एक कार्यकर्ता के वाहन से अपने क्षेत्र में जा रहे थे तो गाड़ी रोकी थी। ड्राइवर के पास लाइसेंस नहीं था और उन्होंने जुर्माना अदा कर दिया था। बकौल विधायक इस दौरान अधिकारी उनके साथ बेहद नम्रता से पेश आईं।

बिधूड़ी ने कहा कि उन्हें तबादले का कारण नहीं पता है। उन्होंने कहा, “मैंने किसी से कोई शिकायत नहीं की है। वे अपनी ड्यूटी कर रही थीं। मैंने उन सभी अधिकारियों की सराहना की है जो इस वक्त COVID-19 से लड़ रहे हैं।”
संभव है कि कॉन्ग्रेस विधायक के ड्राइवर पर जुर्माना भी तबादले की एक वजह हो। लेकिन, इसका मुख्य कारण बाजार में हुई घटना ही नजर आती है। इसकी औपचारिक शिकायत भी हुई थी और आधिकारिक रिपोर्ट भी तैयार की गई थी।

पूछता है भारत- मौलाना साद बनाम अर्नब के बीच एक जंग: ड्रामा, सस्पेंस, थ्रिल और हाइवोल्टेज एंटरटेनमेंट का तड़का

देश का ध्यान इन दिनों कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ छिड़ी जंग को जीतने पर था और दूसरी ओर एक टीवी चैनल पर अलग ही जंग छिड़ी हुई थी। ये जंग चल रही थी रिपब्लिक टीवी के सीईओ अर्नब गोस्वामी और मरकज़ के मुखिया मौलाना साद के बीच। इस जंग में आप जितना ड्रामा, सस्पेंस, थ्रिल और हाइवोल्टेज एंटरटेनमेंट की कल्पना कर सकते हैं, वो सब था। दरअसल, जबसे मरकज़ का मामला खुला तबसे अर्नब गोस्वामी एक अलग ही फॉर्म में नजर आए। अभी तक उन्हें सिर्फ़ उनके ‘नेशन वॉन्ट्स टू नो’ के लिए जाना जा रहा था। मगर मौलाना साद की जमात का खुलासा होने के बाद जैसे उनकी शब्दावली में और आक्रमकता आ गई । उन्होंने मार्च से लेकर अब तक तबलीगी जमात पर ‘पूछता है भारत’ के तले 15 शो कर डाले और अपने शो में उन्होंने साद के लिए जो शब्द इस्तेमाल किए- उसने अर्नब गोस्वामी के साथ रिपब्लिक टीवी को किसी और ही स्तर तक पहुँचा दिया। 

उनके डिबेट के शीर्षकों से ही ये समझ आने लगा कि आखिर शो पर किस मुद्दे को लेकर बात होने वाली है। जैसे एक शो का शीर्षक था-लुटेरा साद, देश करेगा बर्बाद? इसके बाद एक था कोरोना से खतरनाक वायरस मरकज़? 

रिपब्लिक भारत इस बीच जनता को शो देखने के लिए आमंत्रित करने वाले मोनोलॉग पर भी इतनी ही आक्रमक भाषा का प्रयोग करता दिखा। रिपब्लिक भारत की ओर से ट्विटर पर भी वीडियोज शेयर करते हुए लिखा, “जो मौलाना देश को बीमार कर रहा है, वो अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं हुआ? देखिए ‘पूछता है भारत’ अर्नब के साथ रिपब्लिक भारत पर LIVE” और “अगर मौलाना साद कोरोना से नहीं डरता, तो अपना इलाज क्यों करा रहा है? देखिए ‘पूछता है भारत’ अर्नब के साथ रिपब्लिक भारत पर LIVE”

निराली शब्दावली के साथ किया मौलाना साद का बखान

अर्नब गोस्वामी अपने शो में साद के लिए नए-नए शब्दों का भी प्रयोग करते दिखे। उन्होने अपने शो में साद के लिए सुपारी किलर, मौत का मौलाना, भगौड़ा, डरपोक, प्रोफेशनल किलर, डंडेबाज, लुटेरा, मक्कार, कायर, देश विरोधी, बुजदिल जैसे शब्दों का प्रयोग किया। अपने इन कार्यक्रमों में वे कुछ सवाल लगातार पूछते रहे। जैसे- जो हजारों लोगों को बीमार करे वो मौलाना कैसे बना। इसी तरह उन्होंने हर बार पूछा कि ये भाग क्यों रहा है?

तबलीगी जमातियों के लिए  उन्होंने पूछा, “ये (तबलीगी जमात सदस्य) बिल में चूहे की तरह छिपे हैं। ये बिल में, बुरा न मानें, चूहे की तरह क्यों छिपें हैं? ” 

इसके बाद उन्होंने मौलाना साद के समर्थकों को भी अपने शो में आड़े हाथों लिया और उन्हें बताया इस देश का नाम भारत है। उन्होंने एक कार्यक्रम में ये भी कहा, “हम तुम्हारा इलाज करें और तुम हमें बीमारी दो, ये अब देश को बर्दाश्त नहीं है।” अपने कार्यक्रम के एक स्लॉट में अर्नब गोस्वामी ने कहा, “पूरा देश अब कोरोना की बजाए ‘जमात वायरस’ से पैदा संक्रमण के खतरे को निपटने के उपाय तलाश रहा है। क्योंकि देश जितना कोरोनावायरस को हराने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तबलिगी जमात के सदस्य देश को उतना ही पीछे ले जा रहे हैं।”

शाहीन बाग को भी लिया आड़े हाथ

अपने इन कार्यक्रमों में अर्नब गोस्वामी ने शाहीन बाग को भी नहीं बख्शा। अर्नब ने शाहीन बाग को अपनी रडार पर लेते हुए देश से एक कार्यक्रम में पूछा कि शाहीन बाग के लोग क्या इस देश में कोरोना फैलाना चाहते थे? वहीं दूसरे में कहा, कोरोना फैलाएगा शाहीन बाग?

धमकियों के बाद में अर्नब ने ध्वस्त किया लेफ्ट का अजेंडा

पूरे मीडिया समूह से हटकर इस मामले पर कवरेज करने वाले अर्नब गोस्वामी को कई बार कई आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि उन्हें अपनी इस रिपोर्टिंग के कारण धमकियाँ सुननी पड़ रही हैं। लेकिन साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि उन्हें इन दो कौड़ी के लोगों से कोई फर्क नहीं पड़ता। ये गौर करने वाली बात है जब हर संस्थान इस खबर को छिपाने और जमातियों को निर्दोष दिखाने के लिए आगे बढ़ता दिखा। वहीं अर्नब ने खुलेआम मौलाना साद के लिए भगौड़ा, कायर शब्द का प्रयोग किया।

तबलीगी जमात पर अर्नब का गुस्सा क्यों फूटा?

गौरतलब है कि ये गुस्सा, ये नाराजगी जो हमें अर्नब के शो में उनके चेहरे पर पिछले कुछ दिनों में दिखाई पड़ी। उसका कारण उनकी कोई निजी दुश्मनी नहीं है। बल्कि इसकी वजह उन जमातियों का जाहिलपना है जिसके कारण आज देश भर में कोरोना बुरी तरह फैला। रिपोर्ट्स पर गौर करें तो साफ पता चलता है कि इससे पहले देश में कोरोना के मामले बहुत कम थे। मगर इनका खुलासा होते ही हड़कंप मच गया। खुद दिल्ली में इतने ही मामले आ गए कि जरूरी रोकथाम होने के बावजूद दिल्ली महाराष्ट्र के बाद दूसरे नंबर पर आगई। जनता कर्फ्यू के दिन मरकज में 2500 लोग मौजूद थे। 1500 लोग 23 मार्च से रवाना हुए और उसके बाद के हालात किसी से छिपे नहीं हैं।

RBI ने खोली सम्भावनाएँ: PM मोदी ने बताया उद्योग-कृषि के लिए बेहतरीन अवसर, शाह ने कहा- कोई कसर नहीं छोड़ेंगे

COVID-19 वायरस के संक्रमण के कारण चालू वित्तीय वर्ष में देश की आर्थिक विकास दर के मात्र 1.9% रहने का अनुमान जताते हुए RBI गवर्नर ने प्रेस वार्ता में शुक्रवार (अप्रैल 17, 2020) को रिवर्स रेपो दर में कमी करते हुए अर्थव्यवस्था में तेजी के लिए कुछ प्रमुख उपायों की घोषणा की है। साथ ही उन्होंने आश्वस्त किया कि नकदी (Cash) की कमी नहीं होने दी जाएगी।

इस दौरान आरबीआई (RBI) गवर्नर शक्तिकांत दास ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रेस वार्ता कर वित्तीय संस्थाओं के साथ ही रेपो रेट और लोन जैसे विषयों पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आरबीआई कोरोना वायरस को लेकर सतर्क है और रिजर्व बैंक इसकी करीबी से निगरानी कर रहा है।

RBI गवर्नर ने कहा कि वैश्विक मंदी के अनुमान के बीच भारत की विकास दर अब भी सकारात्मक रहने का अनुमान है और IMF के मुताबिक यह 1.9% रहेगी। उन्होंने यह भी कहा कि G-20 इकोनॉमी में भारत की जीडीपी ग्रोथ सबसे बेहतर रहने की उम्‍मीद है।

शक्तिकांत दास ने नाबार्ड (NABARD) को 25 हजार करोड़ देने का ऐलान किया। हाउसिंग सेक्टर को 10 हजार करोड़ रुपए देने का ऐलान किया गया। उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था बुरे दौर में है।

लिक्विडिटी मैनेजमेंट के लिए RBI देगा 50,000 करोड़ रुपए

टार्गेटेड लॉन्ग टर्म रेपो ऑपरेशंस (TLTRO) के तहत 50,000 करोड़ रुपए की मदद एमएफआई (MFI) और एनबीएफसी (NBFC) को जारी की जाएगी। इस तरह से आरबीआई TLTRO के जरिए सिस्‍टम में 50,000 करोड़ रुपए डालेगा।

MSME उद्योगों के लिए धनराशि पर PM मोदी ने की तारीफ

RBI ने छोटे और मध्यम उद्योगों को धनराशि देने का फैसला किया है। शक्तिकांत दास ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि बैंकों को अपने फंड का 50% TLTRO-2 के तहत छोटे और मध्यम साइज NBFC में निवेश करना होगा। वहीं राज्यों को लॉकडाउन के बाद आर्थिक संकट से निकालने के लिए WMA लिमिट को 60% तक बढ़ा दिया गया है। बढ़ी हुई लिमिट 30 सितंबर तक के लिए होगी।

इस फैसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आरबीआई की तारीफ करते हुए ट्वीट में लिखा है –

“आज के आरबीआई के फैसले देश में काफी अच्छी तरह लिक्विडिटी को बढ़ाएँगे और क्रेडिट सप्लाई में सुधार आएगा। ये कदम हमारे छोटे कारोबारों, एमएसएमई, किसानों और गरीबों को मदद करेंगे। इसके अलावा WMA सीमा बढ़ाने से हमारे सभी राज्यों को भी मदद मिल पाएगी।”

वहीं नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने भी कहा था कि आरबीआई ने बैंकों को एक बार फिर से प्रोत्साहित किया है कि वो आरबीआई के पास अपना पैसा न रखकर उद्योगों और लोगों को कर्ज दें, जिससे इस संकट की स्थिति में देश की इकोनॉमी को थोड़ा सहारा मिल सके।

RBI गवर्नर शक्तिकांत दास द्वारा की गई कुछ प्रमुख घोषणाएँ

  1. रिवर्स रेपो रेट 0.25% से घटाकर 3.75% कर दी गई।
  2. रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह 4.4% पर स्थिर है।
  3. TLTRO 2.0 की शुरुआत 50 हजार करोड़ रुपए से की है। जरूरत पड़ने पर इसे 50 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा भी बढ़ाया जा सकता है। 
  4. TLTRO 2.0 के तहत आरबीआई ने एमएफआई और एनबीएफसी को 50 हजार करोड़ रुपए की मदद का एलान किया।
  5. कोरोना वायरस महामारी के कारण सामने आई वित्तीय कठिनाइयों के चलते बैंक आगे किसी लाभांश का भुगतान नहीं करेंगे।
  6. आरबीआई ने नाबार्ड को 25 हजार करोड़ रुपए, SIDBI को 15 हजार करोड़ रुपए और नेशनल हाउसिंग बैंक (NHB) को 10 हजार करोड़ रुपए देने का एलान किया है।
  7. NBFC द्वारा रियल एस्टेट कंपनियों को दिए गए कर्ज पर भी अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों द्वारा दिए गए कर्ज की तरह ही समान लाभ उपलब्ध होंगे।
  8. देश के पास विदेशी मुद्रा का पर्याप्त भंडार है। हालाँकि, मार्च में देश के निर्यात के हालात बेहद खराब रहे हैं। फॉरेक्स रिजर्व अभी 476.5 अरब है।
  9. G-20 देशों में भारत की स्थिति बेहतर रहेगी। 
  10. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार, देश की आर्थिक वृद्धि दर 1.9% रहने का अनुमान है।
  11. वैश्विक अर्थव्यवस्था में नौ खरब डॉलर का नुकसान हो सकता है, जो जापान और जर्मनी की जीडीपी के बराबर हो सकता है।
  12. बैंकों द्वारा मौजूदा ऋणों की वापसी पर लगाई गई रोक पर 90 दिन का एनपीए नियम लागू नहीं होगा। 
  13. देश में बैंकिंग कारोबार सामान्य बनाए रखने की कोशिश जारी है। वित्तीय संस्थानों ने विशेष तैयारी की है। 
  14. देश में 91% ATM काम कर रहे हैं। लॉकडाउन में मोबाइल और नेट बैंकिंग में कोई परेशानी नहीं है।
  15. प्रोडक्शन सेक्टर्स में हालात काफी खराब हैं, जो आईआईपी के आँकड़ों में शामिल नहीं है। कोरोना वायरस का असर अभी आईआईपी के आँकड़ों में शामिल नहीं है, इसलिए आंकड़ों से किसी तरह की गलतफहमी नहीं होनी चाहिए।
  16. लॉकडाउन के बावजूद कृषि क्षेत्र में बुवाई की स्थिति बेहतर रही है। 

क्या है रिवर्स रेपो रेट घटाने का मकसद

रिवर्स रेपो रेट वह दर होती है, जिस पर बैंकों को उनकी ओर से आरबीआई में जमा धन पर ब्याज मिलता है। यह बाजारों में नकदी की तरलता (Cash Flow) को नियंत्रित करने में काम आती है। ऐसे में आरबीआई ने रिवर्स रेपो रेट में कमी करने के बाद अब बैंकों को आरबीआई में पैसा रखने की जरूरत नहीं है। जिसका अर्थ है कि कारोबार के लिए और अन्य आर्थिक उपक्रमों में इन्वेस्टमेंट के लिए अब बाजार में अधिक धन उपलब्ध रहेगा। जिससे यह नए उद्योग और रोजगार के लिए बेहतर सम्भावनाएँ तैयार करेगा। रिवर्स रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की कमी की गई है, यह अब 3.75% पर आ गया है।

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रिजर्व बैंक की घोषणाओं के बारे में कहा है कि मोदी सरकार कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई में कोई कसर नहीं छोड़ रही है, जिससे आने वाले दिनों में एक मजबूत और स्थिर भारत को बनाते समय लोगों के जीवन में कम से कम व्यवधान सुनिश्चित हो सके। भारतीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए आरबीआई द्वारा आज उठाए गए कदम, पीएम मोदी के विजन को और मजबूत करते हैं।

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा – “मेक इन इंडिया कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए RBI ने नाबार्ड को 20,000cr क्रेडिट सुविधा देने का फैसला किया, SIDBI को 15,000cr करने से हमारे किसानों को बहुत मदद मिलेगी, MSMEs और स्टार्ट अप्स को बहुत आवश्यक वित्तीय स्थिरता मिलेगी।”

पाकिस्तान: कराची में हिंदू परिवार के इस्लाम कबूल करने से इनकार करने पर जान से मारने की धमकी

पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का प्रकोप फैला हुआ है, वहीं पाकिस्तान में इस्लामी कट्टरपंथियों ने एक कराची हिंदू परिवार को इस्लाम धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया। सभी लोग इससे निजात पाने की कोशिश में जुटे हुए हैं, मगर इस बीच भी पकिस्तान के कट्टरपंथी मौलवियों का अल्पसंख्यकों को इस्लाम में परिवर्तित होने के लिए डराने-धमकाने का सिलसिला नहीं रूका है।

कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान 12 अप्रैल 2020 को कराची में एक हिंदू परिवार के इस्लाम कबूल करने से इनकार कर देने पर उसके ऊपर हमला किया गया। मामला कराची के PIA बस्ती का है, जहाँ हिंदू परिवार के इस्लाम अपनाने से मना कर देने के बाद उस्मान नाम के एक मौलवी ने उस परिवार के पड़ोसी शाहिद के साथ मिलकर उस पर हमला किया।

आदेश की अवहेलना करने पर बसंत कुमार (पीड़ित हिंदू) और उनकी माँ को भी मारने की धमकी दी गई। बसंत के भाई ने एक वीडियो के जरिए इस घटना के बारे में बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि 4-5 मजहबी धर्म प्रचारकों ने उन्हें धमकी दी और इस्लाम धर्म कबूल करने के लिए उन पर हमला किया। बसंत के भाई वीडियो में दावा करते हैं कि मौलाना उस्मान ने उनकी घर की बुजुर्ग माँ को पकड़ लिया और थप्पड़ मारा। इसके साथ ही वह बार-बार उनसे कलमा पढ़ने और इस्लाम कबूल करने के लिए कहा। 

कराची हिंदू परिवार की दुर्दशा

वीडियो में मौजूद शख्स का दावा है कि उनके भाई बसंत कुमार और उनकी माँ को मौलाना उस्मान ने पीटा था। वह कहते हैं कि उसकी माँ की पिटाई करने के बाद, उस्मान ने उन्हें इस्लाम धर्म अपनाने के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक दायित्व कलमा पढ़ने के लिए कहा। हमलावर मौलाना उस्मान की एक मौलाना टोपी हिंदू परिवार के घर के फर्श पर देखी जा सकती है। बसंत के भाई ने कहा कि हमलावरों ने उनसे कहा कि आपलोगों को छोड़ा नहीं जाएगा, मार दिया जाएगा।

बसंत के भाई ने आगे वीडियो में कहा कि लॉकडाउन होने के बावजूद मौलाना उस्मान और शाहिद अन्य लोगों को उनके घर की छत पर नमाज पढ़वा रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने इसके खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं करवाया, क्योंकि ये मजहबी देश है। उन्हें डर था कि आगे जाकर बात बढ़ सकती थी। बसंत के भाई ने यह भी आरोप लगाया कि तीन दिन पहले उसी मौलाना और बसंत के बीच हाथापाई हो गई थी, जब मौलाना ने कहा था कि वह जल्द ही परिवार के साथ हिसाब-किताब करेगा। बहरहाल, कराची पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर ली है और आगे की जाँच की जा रही है।

उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान से जबरन धर्म परिवर्तन की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। बता दें कि पिछले दिनों पाकिस्तान में ईसाई पत्रकार गोनिला गिल को नौकरी छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। 38 वर्षीय गिल ने एक समुदाय विशेष के युवक से शादी की है। लेकिन, उन्होंने अपना धर्म नहीं बदला। इसके कारण ऑफिस के सहकर्मी ही उन्हें प्रताड़ित करते थे। अंत में वे इतनी परेशान हो गईं कि उन्हें दुनिया न्यूज यानी अपना ऑफिस ही छोड़ना पड़ा। 

एक अन्य घटना में 15 साल की महक को अगवा कर जबरन इस्लाम कबूल करवाया गया था। सिंध प्रांत के जैकोबाबाद जिले से कक्षा नौ में पढ़ने वाली 15 वर्षीय महक को अली रजा ने 15 जनवरी को अगवा कर लिया था। उसे इस्लाम कबूल करने के लिए मजबूर किया गया और फिर दूसरे समुदाय से निकाह करवा दिया गया। इस मामले में पुलिस ने भी लड़की की कोई मदद नहीं की।

इसी तरह 14 साल की ईसाई नाबालिग लड़की हुमा यूनुस का पहले अपहरण किया गया फिर जबरन धर्म परिवर्तन कराके उससे इस्लाम कबूल करवाया गया। और तो और, अपहरण के आरोपित अब्दुल जब्बार से ही उसका निकाह भी करा दिया गया।

कोरोना संक्रमण में केरल को पछाड़ कैसे तेजी से नंबर 1 बन गया महाराष्ट्र, देखिए यह वीडियो ग्राफ

कोरोना वायरस के केस भारत में देशव्यापी बंद (lockdown) के दौरान अलग-अलग राज्यों में किस तरह से बढ़ते गए इसका चित्रण अभिषेक मुखर्जी ने एक कोरोना संक्रमण ग्राफ के द्वाराकिया है। इसमें सबसे ज्यादा जरुरी बात यह है कि केरल, जो शुरूआती दौर में सबसे आगे चल रहा था, महाराष्ट्र का ग्राफ अचानक से इसे पीछे छोड़ता हुआ सबसे आगे बढ़ता चला गया।

मार्च 01, 2020 को केरल में कोरोना संक्रमण के 3 केस थे। यह देश में पहला मामला था। 2 मार्च को दिल्ली और तेलंगाना में पहले केस सामने आए। और अब पूरे देश में कुल 5 कोरोना संक्रमित मामले हो चुके थे। 5 मार्च को 3 केस दिल्ली और 3 केस केरल में होकर दोनों ग्राफ साथ हो गए थे, वहीं उत्तर प्रदेश में भी अब तक 3 केस सामने आ गए थे।

– Please wait for the moving graph i.e. data visualization to load below –

ग्राफ का यह तुलनात्मक चित्रण अभिषेक मुखर्जी द्वारा बना गया है। अभिषेक वर्तमान में जर्मनी में RWTH यूनिवर्सिटी में अध्ययनरत हैं। भारत में अब तक कोरोना के कुल 13835 मामले सामने आ चुके हैं जिनमें से सबसे ज्यादा 3205 अकेले महाराष्ट्र में हैं।

8 मार्च को महाराष्ट्र में पहला केस सामने आता है, इस समय केरल और उत्तर प्रदेश में कोरोना का संक्रमण तेज होने लगता है। 11 मार्च तक देशभर में 55 केस हो जाते हैं और इस बीच महाराष्ट्र तेजी से बढ़त बनाकर दूसरे स्थान पर उत्तर प्रदेश के साथ आ जाता है। इस समय भी केरल 17 संक्रमित लोगों के साथ पहले स्थान पर है। 12 मार्च को महाराष्ट्र में कुल 12 संक्रमित सामने आते हैं और केरल में यह संख्या 18 हो जाती है।

यहाँ केरल में संक्रमण के मामले स्थिर तो नहीं होते लेकिन 14 मार्च को महाराष्ट्र में संक्रमितों का ग्राफ एक बार फिर तेजी से सबसे आगे आ जाता है और अब यहाँ महाराष्ट्र में कुल संक्रमितों की संख्या 22 हो जाती है। यहाँ से महाराष्ट्र में सामने आने वाले कोरोना के मामले कहीं नहीं रुकते और निरंतर सभी राज्यों को पीछे छोड़ते हुए सबसे ऊपर बना रहता है।

17 मार्च को महाराष्ट्र का ग्राफ अन्य राज्यों की तुलना में बहुत आगे निकल जाता है और कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 38 हो जाती है। यहाँ पर यदि तुलनात्मक देखें तो एक और जहाँ अब तक अन्य राज्य संक्रमण पर रोक लगाने के प्रयास करने लगे थे वहीं महाराष्ट्र में यह आँकड़ा बहुत आगे बढ़ता नजर आता है। इस समय केरल में जहाँ 25 केस हैं वहीं महाराष्ट्र में अब 38 मामले हो जाते हैं।

22 मार्च को केरल में संक्रमण के मामलों में तेजी देखी जा सकती है और केरल में अब 51 केस हैं, वहीं महाराष्ट्र में 67 केस हो जाते हैं, महाराष्ट्र अभी भी पहले स्थान पर है।

26 मार्च को केरल (127) में यह संख्या महाराष्ट्र (126) से आगे निकलती है और केरल पहले नम्बर पर आ जाता है और महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर। लेकिन ठीक एक दिन बाद महाराष्ट्र एक बार फिर सबसे ऊपर नजर आता है।

इस ग्राफ में 17 अप्रैल के सबसे ताजा डेटा में देखा जा सकता है कि एक ओर जहाँ केरल सबसे ऊपर था, वही केरल अब ग्राफ में 395 केस के साथ सबसे नीचे आ जाता है जबकि इसके साथ ही नजर आ रहा महाराष्ट्र अब 3205 केस के साथ ग्राफ में सबसे ऊपर आ चुका है। यह ग्राफ इस कारण भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जब महाराष्ट्र के उद्धव ठाकरे सरकार सोशल मीडिया पर अपने पेड कैम्पेन चला रही थी, उस समय महाराष्ट्र में कोरोना के मामले तेजी से अपने लिए जगह बनाते जा रहे थे।

साड़ी चैलेंज जैसे ट्रेंड का हिस्सा बनने से पहले जान लें डीप न्यूड पोर्न के बारे में: एक ऐसी वेबसाइट जो कर रही है तस्वीरों का गलत इस्तेमाल

महाराष्ट्र की साइबर सेल ने डीप न्यूड जैसी वेबसाइट और उसके कई संस्करणों के ख़िलाफ़ सूचना देते हुए आम जनता को चेताया है। जानकारी के मुताबिक ऐसी वेबसाइट्स सोशल मीडिया से किसी के भी द्वारा अपलोड की गई नॉर्मल फोटो को उठाती हैं और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग करके उस तस्वीर को नग्न तस्वीर बनाती हैं। बाद में इनका प्रयोग वसूली, पोर्नोग्राफी और ब्लैकमेलिंग आदि के लिए किया जाता है।

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार एक साइबर पुलिस अधिकारी ने चेतावनी दी, ”साड़ी चैलेंज जैसे हालिया ट्रेंड, जिनमें महिलाएँ अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर अपनी तस्वीरें अपलोड करती हैं और अपने दोस्तों को टैग करती हैं, एक चेन बनाती हैं। वे आपराधिक तत्वों को डीप न्यूड जैसी वेबसाइटों का इस्तेमाल करने का मौका देती हैं। इसलिए इन वेबसाइटों से बचने के लिए बेहतर है सोशल मीडिया पर प्राइवेसी सेटिंग का प्रयोग किया जाए, ताकि अजनबियों को अपनी तस्वीरों तक पहुँचने से रोका जा सके।”

डीप न्यूड: साइबर क्रिमिनल्स ने फिर शुरू किया बिजनेस

बता दें मौजूदा जानकारी के अनुसार जिन विवादित प्लैटफॉर्म्स ने पिछले साल इन सब चीजों पर काम करना बंद कर दिया था, उन्होंने फिर से इस काम को अपना व्यापार बना लिया है। यानी भारतीय साइबर क्रिमिनल एक बार फिर सोशल मीडिया के जरिए आम यूजर्स को अपना शिकार बनाने के लिए ऐसी तस्वीरों का प्रयोग कर रहे हैं। इसके अलावा ये लोग शादीशुदा पुरुषों को भी अपना निशाना बना रहे हैं। ताकि हनी ट्रैप में फँसा कर, उनसे चैट करके, तस्वीरें मँगवाकर, उनसे वसूली कर सकें और उन्हें ब्लैकमेल कर सके। 

महाराष्ट्र साइबर सेल के एसपी बलसिंघ राजपूत ने बताया कि इन साइटों की निगरानी के लिए एक टीम का गठन किया गया था ताकि गंभीर अपराध के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सके।

सोशल मीडिया पर तस्वीरें डालने का खतरा

उल्लेखनीय हैं कि रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरों को साइबर क्रिमिनल्स अपराधों अंजाम देने के लिए सबसे जल्दी इस्तेमाल करते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक डीप न्यूड जैसी वेबसाइट्स से सबसे बुरा खतरा ये है कि इनके अलग-अलग संस्करण मौजूद हैं। हिंदू रिपोर्ट में मुताबिक इनके संस्करण एक ऐप और यहाँ तक ​​कि एक ट्विटर हैंडल में भी शामिल है। 

बता दें, इससे पहले, सिंगापुर सरकार ने ऑनलाइन वीडियो के लिए जूम वीडियो कम्युनिकेशंस इंक की कॉन्फ्रेंसिंग ऐप के उपयोग को निलंबित कर दिया था, क्योंकि हैकर्स ने उसमें चालू एक लेसन (पाठ) को हाईजैक कर लिया था और बाद में छात्रों को अश्लील तस्वीरें दिखाए थे। जिसके बद सिंगापुर के शिक्षा मंत्रालय ने इसे गंभीर घटना बताया था और इस संबंध में 9 अप्रैल को कहा था कि वह विच्छेद की जाँच की जाँच कर रही हैं। इसके बाद सिंगा पुर के शिक्षकों ने भी ये शिकायत की थी कि कुछ अंजान लोग अचानक ऐप से जुड़ गए और नारे लगाने लगे। बता दें ताइवान ने भी इस ऐप को बैन कर दिया था और भारत सरकार ने ने भी कहा था कि ये ऐप इस्तेमाल के लिए सुरक्षित नहीं हैं।

कट्टरपंथियों और सेकुलरों को बबीता फोगाट ने दिया जवाब, कहा- मैं जायरा वसीम नहीं हूँ कि डरके घर पर बैठ जाऊँगी

कुश्ती चैंपियन बबीता फोगाट देश में कोरोना संक्रमण के अधिकतर मामलों के लिए जिम्मेदार माने जा रहे रहे तबलीगी जमात पर एक ट्वीट करने के कारण चर्चा में आ गई। सोशल मीडिया पर उनके एक ट्वीट हलचल मचा दी। इस ट्वीट में उन्होंने तबलीगी जमात को जाहिल कहा था। जिसे देखकर कट्टपंथी उनपर हमलावर हो गए और उन्हें तरह-तरह के मैसेज करके ट्रोल करने लगे।

और जब ट्रोल करके मन नहीं भरा तो उन्हें फोन पर धमकी भी दी गई। अब यही बर्दाश्त से बाहर होने के बाद बबीता फोगाट ने इन लोगों को जवाब देने के लिए एक वीडियो जारी कर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि वह ‘जायरा वसीम’ नहीं हैं और न ही वह किसी तरह की धमकी से डरने वाली हैं।

बबीता द्वारा जारी की गई वीडियो में वो कह रही हैं “कान खोलकर एक बात सुन लो और दिमाग में बिठा लेना कि मैं कोई जायरा वसीम नहीं हूँ कि तुम्हारी धमकियों से डरकर घर पर बैठ जाऊँगी। मैं तुम्हारी धमकियों से नहीं डरने वाली। मैं असली बबीता फोगाट हूँ। मैं जो ट्वीट किया है, मैंने उसमें कुछ भी गलत नहीं लिखा है। मैं उस पर अभी भी कायम हूँ। मैंने सिर्फ उन लोगों के बारे में लिखा है, जिन्होंने कोरोना संक्रमण को फैलाया। क्या तबलीगी जमात वाले नंबर वन पर नहीं बने हुए हैं। तबलीगी जमात ने कोरोना संक्रमण नहीं फैलाया होता, तो अब तक लॉकडाउन खुल गया होता।”

ज्ञात हो कि सोशल मीडिया पर बबीता का ट्वीट आने के बाद मीडिया गिरोह के लोग उनपर अचानक हमलावर हो गए। कल से लगातार उनके ख़िलाफ़ रिपोर्टिंग हुई और उनपर आरोप लगा दिए गए कि वे नफरत फैलाने का काम कर रही हैं। जबकि हकीकत ये है कि अपने ट्वीट में उन्होंने सिर्फ़ जमातियों के बारे में टिप्पणी की है। जिनके कारण हर राज्य में कोरोना तेजी से फैला।

मगर, फिर भी इस बीच द वायर के एक्स पत्रकार प्रशांत कनौजिया ने उनपर कई टिप्पणियाँ की। वहीं प्रिंट के शहबाज अंसार ने भी उन्हें उनके एक ट्वीट पर छिछोरा बोला। शहबाज ने बबीता के ट्वीट पर, जिसमें उन्होंने रंगोली के बारे में लिखा था, उसपर लिखा, “मारी छोरी छिछोरों से कम हैं क्या?”

बता दें, इन विरोधियों के अलावा बबीता के ट्वीट पर कई लोग ऐसे भी थे जिन्होंने उनका खुलकर समर्थन किया। पहलवान बजरंग पूनिया भी बबीता के बचाव में उतरे। उन्होंने ट्रोलर्स से पूछा कि खिलाड़ी देश के लिए हर रोज संघर्ष करते हैं, लेकिन आप क्या कर रहे हैं। इसके अलावा उनकी बहन गीता फोगाट ने भी उनका समर्थन किया। नतीजतन देखते ही देखते आज सुबह सोशल मीडिया पर दो ट्रेंड चलने लगे। एक उनके समर्थन में और एक उनका अकाउंट सस्पेंड करवाने के लिए।

वुहान ने रातों-रात 50% बढ़ाई कोरोना से हुई मौतों की संख्या, WHO के दबाव की आशंका

COVID-19 वायरस से हुई मौत के आँकड़ों को छिपाने को लेकर हो रही आलोचनाओं के बीच चीन ने वुहान प्रान्त में हुई मौत के नए आँकड़े जारी किए हैं। नए आँकड़ों में चीन में वुहान में हुई कुल मौतों में 50% की बढ़ोत्तरी करते हुए 1,290 नए नाम और जोड़े हैं। अब वुहान में मृतकों का आँकड़ा बढ़कर 4,632 हो गया है।

उल्लेखनीय है कि दुनियाभर में कोरोना वायरस का संक्रमण सबसे पहले चीन के वुहान शहर से ही शुरू हुआ था। चीन के सरकारी समाचार पत्र ग्‍लोबल टाइम्‍स के अनुसार कोरोना वायरस से वुहान में अब तक 3,869 लोगों की मौत हुई है। चीन ने यह भी बताया कि वुहान प्रान्त में मौतों का प्रतिशत 7.7% रहा, जो कि पहले घोषित किए गए 5.8% के आँकड़े से ज्‍यादा है।

चीन के वुहान प्रान्त में हुई मौत के नए आँकड़ों पर चीनी सरकार ने अपनी सफाई में कहा है कि कई मामलों में मौत का कारण जानने में उनसे गलती हुई या कई मामलों का उन्हें पता नहीं चल पाया। ज्ञात हो कि वुहान प्रशासन की ओर से केवल मृतकों के आँकड़ों में ही बढ़ोतरी नहीं की गई है, बल्कि उसने कुल संक्रमितों की संख्या में भी इजाफा किया है। वुहान प्रशासन की ओर से संक्रमितों की संख्या में 325 की वृद्धि की गई है। इसके साथ ही अब वुहान में संक्रमितों की कुल संख्या 50,333 हो गई है।

कोरोना को लेकर विश्वभर के नेताओं ने की चीन की आलोचना

चीन में हुई मौतों को लेकर कई प्रकार के अटकल पहले से ही लगाए जा रहे थे। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी बृहस्पतिवार को कहा था कि कई देश कोरोना वायरस से होने वाली मौतों की संख्या छिपा रहे हैं। ट्रंप ने कहा है कि क्या आपको लगता है कि दुनिया भर के कई देश अपने यहाँ होने वाली मौतों की जानकारी ईमानदारी से साझा कर रहे हैं? ट्रम्प ने सपष्ट शब्दों में चीन पर निशाना साधते हुए कहा कि वह इस मामले में ईमानदार नहीं है।

यह भी कयास लगे जा रहे हैं कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा WHO पर उसके पक्षपाती रवैये को लेकर की गई फंडिंग बंद करने की घोषणा के बाद ही चीन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दबाव में आकर यह आँकड़े जारी किए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने WHO पर चीन का पक्ष लेने और कोरोना पर सही समय पर दुनिया को जानकारी न देने का आरोप लगाते उसकी फंडिंग रोक दी थी।

डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि WHO ने चीन में फैले कोरोना वायरस की गंभीरता को छिपाया और यदि संगठन ने बुनियादी स्तर पर काम किया होता तो यह महामारी पूरी दुनिया नहीं फैलती और मरने वालों की संख्या काफी कम होती।

अमरीका विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) को सबसे ज़्यादा फ़ंड देता है। अमरीका ने पिछली बार भी विश्व स्वास्थ्य संगठन को क़रीब 40 करोड़ डॉलर का फ़ंड दिया था जो सबसे ज़्यादा है। वर्तमान में अमरीका दुनिया में कोरोना वायरस से सबसे ज़्यादा प्रभावित देश है।

चीन के रहस्यमयी रवैये को लेकर फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने भी ‘फाइनेंशियल टाइम्स’ को बताया था कि यह सोचना गलत होगा कि चीन ने महामारी का अच्छी तरह से मुकाबला किया था। उन्होंने कहा कि स्पष्ट रूप वहाँ कई ऐसी चीजें हुईं हैं, जिनका दुनिया को पता ही नहीं है।

कोरोना वायरस को लेकर चीन के नजरिए पर ब्रिटेन के विदेश मंत्री डोमनिक राब ने भी कहा कि ब्रिटेन और उसके सहयोगी, चीन से कोरोना वायरस प्रसार के बारे में कठोर प्रश्न पूछेंगे। उन्होंने कहा, ”इस संकट के बाद हमारे बीच कामकाज पहले जैसा नहीं रहेगा।” डाउनिंग स्ट्रीट में प्रेस वार्ता के दौरान चीन के साथ भावी संबंधों को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में राब कहा, ”हमें यह कठोर प्रश्न पूछना ही होगा कि यह कैसे आया और इसे पहले क्यों नहीं रोका जा सका?”

चीन के वुहान प्रान्त से ही कोरोना वायरस की शुरुआत हुई थी और अब यह दुनिया के बड़े हिस्से में फैल चुका है। चीन शुरुआत से ही कोरोना वायरस पर हो रहे शोध से लेकर इसके संक्रमण और मौतों पर पूरी दुनिया को गुमराह करता आया है। अब नए आँकड़ों ने एक बार फिर पूरे विश्व ने चीन को शंका की दृष्टि से देखना शुरू कर दिया है।

लॉकडाउन की गोली कड़वी पर कोरोना वायरस के पक्के इलाज के लिए बेहद जरूरी

130 करोड़ से ज्यादा लोगों को जब एक साथ घरों में रहने का हुकुम दिया जाता है, तो सवाल उठने लाजिमी हैं। इस लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था का क्या होगा? छोटे दुकानदारों और कारोबार का क्या होगा? नौकरयाँ जाएँगी या रहेंगी? सबसे ऊपर गरीब का पेट कैसे भरेगा? सवाल तीखे हैं और मुकम्मल तौर पर अभी जवाब किसी के पास नहीं। पर इनसे भी कड़वा और बड़ा, एक सवाल और भी है, क्या देश को यूँ ही कोरोना महामारी से मरने छोड़ दिया जाए?

दुनिया की सभी प्रमुख स्वास्थ्य संस्थाएँ इस बात पर सहमत हैं कि कोरोना वायरस से बचाव का अभी बस एक ही तरीका है और वो है सोशल डिस्टेंसिंग। सोशल डिस्टेंसिंग को अमल में लाने का बस एक ही तरीका है और वो है लॉकडाउन। लॉकडाउन को बेवजह की कवायद कह कर, जिन देशों और उनकी मीडिया ने लॉकडाउन का मजाक उड़ाया था। उन्होंने उसकी बड़ी कीमत चुकाई है। हजारों लोग मारे जा चुके हैं और आज वही देश लॉकडाउन को सख्ती से लागू कर रहे हैं। ब्रिटेन, इटली, स्पेन और अमेरिका इसकी मिसाल हैं।

लॉकडाउन इस बीमारी के फैलाव को रोकने में कितना कारगर है? इसे अमेरिका के कोरोना मरीजों के आँकड़ों से समझा जा सकता है। कोरोना संक्रमितों की संख्या 1 हजार से 9 हजार पहुँचने में जहाँ भारत को 16 दिन लगे, वहीं अमेरिका ने 9 हजार का आँकड़ा मात्र 9 दिनों में ही छू लिया। ध्यान रहे कि इस पूरी अवधि में भारत में लॉकडाउन था।

एक से नौ हजार का आँकड़ा छूने में भारत और अमेरिका के बीच कुछ दिनों का यह अंतर कई लोगों को छोटा लग सकता है। पर इसकी गंभीरता तब समझ आएगी, जब आपको यह पता लगेगा कि अगले 9 दिनों में अमेरिका में कोरोना संक्रमितों की संख्या 9 हजार से 1 लाख 4 हजार हो गई। उसके अगले 18 दिनों में कोरोना संक्रमितों की संख्या अमेरिका में 6 लाख 13 हजार से भी ज्यादा हो गई। शुक्र मनाइए कि भारत में लॉकडाउन बढ़ा दिया गया, नहीं तो अगले कुछ दिनों में हमारे अस्पताल हजारों, लाखों कोरोना मरीजों से पटे पड़े होते। अमेरिका, स्पेन, इटली, ब्रिटेन और फ्रांस की तरह भारत में भी लाशों के ढेर लगे होते।

मार्च में तीसरे हफ्ते के अंत तक दुनिया भर में कोरोना कहर बरपा रहा था। खासकर यूरोप में। स्पेन, इटली और अमेरिका जैसे देशों में बहुत तेज गति से कोरोना के रोगी बढ़ रहे थे। ये वो देश हैं जिनके पास दुनिया की सर्वश्रेष्ठ मेडिकल सुविधाएँ हैं। आबादी के लिहाज से भी ये मुल्क भारत से बहुत छोटे हैं।

जनसंख्या के साथ गरीबी हमारे यहाँ एक बड़ी समस्या है। तब लॉकडाउन के सिवा हमारे पास चारा ही क्या था। एक रिपोर्ट के मुताबिक, जिन रोगियों की कोरोना से मृत्यु हुई है उनमें कोरोना के लक्षण दिखाई देने से लेकर मरीज के मरने तक औसतन 14 दिन का ही वक्त लगता है। जरा टाइमलाइन पर गौर करें। अमूमन 5वें दिन लक्षण दिखते हैं, 7वें दिन अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है, 8वें या 9 वें दिन रोगी आइसीयू पहुँच जाता है और उसके बाद कभी भी मृत्यु संभव है। इस भयावह परिपरिस्थिति से बचने के लिए हमें वक्त चाहिए था। लॉकडाउन ने हमें वह कीमती वक्त मुहैया कराया।

लॉकडाउन से हमें जो बहुमूल्य समय मिला, उसमें हमने कोरोना वायरस से लड़ने की क्षमताएँ विकसित की हैं। आज 602 डेडिकेटिड अस्पतालों में 1,06,719 आइसोलेशन बेड की व्यवस्था है। 12,024 आइसीयू बेड भी कोरोना के लिए आरक्षित हैं। लॉकडाउन से पूर्व हमारे यहाँ मात्र 18 सरकारी लैब्स में ही कोरोना टेस्टिंग की सुविधा थी। 14 अप्रैल तक सरकारी और प्राइवेट लैब्स मिलकर यह संख्या 244 हो गई हैं। हजारों वेंटिलेटर, लाखों पीपीई और करोड़ों मास्क का ऑर्डर भी इस बीच ही हमने किया है।

हमें सोचने का समय मिला इसलिए कोरोना पूल टेस्टिंग, कोरोना पेशेंट पूलिंग, महाकर्फ्यू आदि अनेक इनोवेटिव आइडिया भी इसी लॉकडाउन से निकले। डॉक्टर्स, नर्सों, वार्ड बॉय, पैरामेडिकल स्टाफ से लेकर आशा वर्कर तक की ट्रेनिंग का इंतजाम भारत ने किया। सामाजिक स्तर पर भी भारत ने कमर कस ली है, कोरोना के खिलाफ थाली बजा कर अभिनंदन और दीपक जला कर सम्मान, जैसे कार्यक्रमों से सरकार ने जनता को सीधे जोड़ लिया।

सवाल यह है कि जब सब व्यवस्था सरकारों ने बना ही दी है, तो फिर लॉकडाउन बढ़ाने का क्या मतलब है? दरअसल अब लड़ाई दूसरे दौर में हैं। पहले दौर में भारत ने कमियाँ दूर की, अपनी क्षमताएँ बढ़ाई। दूसरे दौर में हमें संक्रमण के दायरे को छोटे से छोटा करना है। जिला स्तर पर संक्रमण की इस लड़ाई को हॉटस्पॉट तक सीमित करना है। कोरोना से बढ़ती मृत्यु दर को कम करना है। एक भी मरीज छूट ना जाए इस लक्ष्य को लेकर सरकारों को जिला स्तर पर आगे बढ़ना होगा। नरेंद्र मोदी ने लॉकडाउन की कड़वी गोली देश को खिलाई है, पर मर्ज के पक्के इलाज के लिए यह जरूरी था।