अयोध्या में राम मंदिर के लिए प्रस्तावित भूमि-पूजन कार्यक्रम को फिलहाल टाल दिया गया है। भूमि-पूजन 30 अप्रैल को होने की उम्मीद थी। अब इसके लिए नई तारीख का ऐलान श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट जल्द ही करेगा।
कोविड-19 से उपजे खतरों को देखते हुए ऐसा किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लॉकडाउन की अवधि बढ़ाए जाने के बाद 3 मई तक कोई भी धार्मिक आयोजन या जुटान नहीं हो सकता। जल्द ही नई तारीख का ऐलान होगा।
संत समुदाय ने कहा कि जब तक माहौल सामान्य नहीं हो जाता, तब तक भूमि-पूजन नहीं किया जाएगा। पिछली बार हुई सभी बैठकों और चर्चाओं में 30 अप्रैल की तारीख पर ही सहमति बनी थी। हालाँकि, आधिकारिक रूप से कुछ भी फाइनल नहीं किया गया था।
अब लॉकडाउन और कोरोना के खतरों के कारण इस तारीख पर भूमि-पूजन नहीं किया जाएगा। अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण की तैयारियाँ चालू हैं। इसके लिए गठित ट्रस्ट संत समुदाय के साथ मिल कर सारे कामकाज देख रहा है।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने कोरोना वायरस से संक्रमण से उपजी आपदा के बीच पीएम केयर्स फंड में भी दान दिया था। विहिप ने कहा था कि ये दान राम मंदिर की तरफ से देश को दिया गया है।
श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने कहा है कि अभी राम मंदिर बनने में कितने रुपए लगेंगे इसका कोई अंदाज़ा नहीं है, लेकिन मंदिर ने निर्माण से पहले ही देश के लिए दान देकर सनातन का महत्व दिखाया है।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का लोगो आज जारी किया गया @VHPDigital@RSSorg Its not only construction of huge Ram Temple, the plan is to develop ayodhya as a holy city. The plan to hold Bhoomi Pujan on April 30 likely to be put on hold till #corona crisis is over@News18Indiapic.twitter.com/8eSd9xI3CZ
ट्रस्ट ने हल ही में अपना लोगो भी जारी किया था। प्रतीक चिह्न की ऊपरी परिधि में ट्रस्ट का नाम लिखा है, जबकि नीचे ‘रामो विग्रहवान धर्म:’ अंकित किया गया है। इसके अर्थ है- भगवान श्रीराम धर्म के साक्षात् साकार रूप हैं। इस तस्वीर में भगवान अभयदान की मुद्रा में दिख रहे हैं।
लोगो में लाल और पीले रंग के अलावा भगवा रंग का भी प्रयोग किया गया है। किसी भी तरह के पत्राचार या अन्य ज़रूरी चीजों के लिए ट्रस्ट अब इसी लोगो का प्रयोग करेगा। आधिकारिक कार्यों में इस लोगो का प्रयोग किया जाएगा।
कोरोना वायरस के संक्रमण में दुनियाभर में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। इस बीच कोरोना वायरस का संक्रमण अफगानिस्तान के राष्ट्रपति भवन तक पहुँचने की खबर आ रही है। राष्ट्रपति भवन के करीब 20 कर्मचारी संक्रमित बताए जा रहे हैं।
हालाँकि अभी तक इस बात की जानकारी नहीं मिल सकी है कि राष्ट्रपति अशरफ गनी संक्रमित हैं या नहीं। दो अधिकारियों ने शनिवार (अप्रैल 18, 2020) को इसकी जानकारी दी।
एक अधिकारी ने बताया, “राष्ट्रपति के पैलेस में काम करने वाले करीब 20 लोग कोरोना से संक्रमित हैं। लेकिन इस बात को जाहिर नहीं किया जा रहा है ताकि लोगों में पैनिक न हो।” वहीं दूसरे अधिकारी ने भी कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या की पुष्टि की। साथ ही यह भी कहा कि राष्ट्रपति के प्रशासनिक कार्यालय के 12 लोग इस वायरस से संक्रमित हैं।
अशरफ गनी के प्रवक्ता सादिक सिद्दीकी ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय से इस बाबत जानकारी लेने के लिए कहा। स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी यह कहते हुए प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया कि वह रोगियों की पहचान को उजागर नहीं कर सकते।
एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर रॉयटर्स को बताया कि दूसरे सरकारी विभाग की तरफ से एक संक्रमित फाइल राष्ट्रपति भवन के अंदर भेजा गया और इसी फाइल के संपर्क में आने से कर्मचारी संक्रमित हुए हैं।
एक अधिकारी ने बताया कि रिजल्ट आने के बाद भी काफी कर्मचारी ऑफिस में काम कर रहे थे। लेकिन अब उन्हें और उनके परिवार को क्वारंटाइन कर दिया गया है। सादिक सिद्दीकी ने कहा कि सिविल सेवा आयोग ने पहले ही सरकारी कर्मचारियों को परीक्षण किए जाने तक घर पर रहने के लिए कहा है। इस आदेश को अगले तीन सप्ताह के लिए बढ़ा दिया गया है।
एक सरकारी सूत्र ने रायटर को बताया कि राष्ट्रपति, जो पहले पेट से संबंधित स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से ग्रसित रह चुके हैं, उनका कर्मचारियों के साथ सीमित संपर्क है। वो वीडियो कॉन्फ्रेंस कॉल के जरिए ही अधिकांश बैठकें करते हैं और अपने सर्किल में भी काफी कम लोगों से मिलते-जुलते हैं।
अफगानिस्तान में शनिवार तक कोरोना वायरस के 933 पॉजिटिव मामले दर्ज किए गए हैं। बता दें कि अफगानिस्तान पहले से ही तालिबान के साथ हिंसक झड़पों की वजह से भोजन और दवा की कमी से जूझ रहा है। अभी तक देश में 30 लोग वायरस से मर चुके हैं, लेकिन स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि इसकी संख्या अधिक हो सकती है। टेस्ट सीमित मात्रा में ही हुए हैं, इसलिए इसकी संख्या भी कम रिपोर्ट की गई।
दिल्ली में एक डॉक्टर ने आत्महत्या कर ली। अपने सुसाइड नोट में उन्होंने आम आदमी पार्टी के विधायक प्रकाश जारवाल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। घटना नेब सराय थाना क्षेत्र की है। सुसाइड नोट में डॉक्टर ने लिखा है कि वे आप विधायक की उगाही से परेशान होकर आत्महत्या कर रहे हैं।
पोस्टमॉर्टम के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया है। विधायक जारवाल और उनके साथी कपिल नागर के ख़िलाफ़ उगाही और जान से मारने की धमकी का मामला मृत डॉक्टर के बेटे ने दर्ज कराया है।
दक्षिणी दिल्ली के पुलिस उपयुक्त अतुल कुमार ठाकुर ने मुकदमा दर्ज किए जाने की पुष्टि की है। सुसाइड नोट को जाँच के लिए भेज दिया गया है।
पुलिस ने बताया कि 52 वर्षीय डॉक्टर राजेंद्र कुमार देवली के दुर्गा विहार में क्लीनिक चलाते थे। उनका घर भी वहीं पर है। शनिवार (अप्रैल 18, 2020) की सुबह उनका किराएदार जब छत पर गया तो उसने पाया कि डॉक्टर का शव कमरे में लटक रहा था। उसने तत्काल परिजनों को सूचना दी। इसके बाद पुलिस वहाँ पहुँची।
शव के पास से ही सुसाइड नोट मिला। इसमें विधायक जारवाल और उनके सहयोगी कपिल नागर पर आरोप लगाए गए थे। जारवाल का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की मौजूदगी में दिल्ली के तत्कालीन मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ बदसलूकी के मामले में वो गिरफ़्तार किए जा चुके हैं। इसके अलावा उन पर राजद की एक महिला के शोषण करने का भी आरोप लगा था। वो सीएम केजरीवाल के साथ ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ में भी जुड़े हुए थे।
आरोप है कि विधायक ने डॉक्टर से पिछले 5 सालों में 5 लाख रुपए लिए। डॉक्टर उन्हें रुपए देते रहे, ताकि उनके परिवार को परेशान न किया जाए। लेकिन, फिर भी विधायक व उनके सहयोगियों द्वारा बार-बार रुपए की माँग की गई। डॉक्टर ने सुसाइड नोट में अपनी अंतिम इच्छा यही बताई है कि विधायक व उसके साथी को कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाए। इस पर सफाई देते हुए विधायक जारवाल ने कहा:
“मुझे मीडिया के माध्यम से डॉक्टर की आत्महत्या और सुसाइड नोट की बात पता चली है। मैं निर्दोष हूँ। पिछले 8-10 महीनों ने न तो मैं उनसे मिला हूँ और न ही हमारी कोई बातचीत हुई थी। 2017 में जब कुछ मीडिया चैनलों ने टैंकर माफिया के ख़िलाफ़ स्टिंग किया था, तो उसमें उनका नाम आया था। इसके बाद उनकी सभी गाड़ियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था। मुझे पहले भी फँसाने की कोशिश की जाती रही है और अब ऐसा ही हो रहा है। मैं किसी भी जाँच के लिए तैयार हूँ। मैं पुलिस का सहयोग करूँगा।”
‘दैनिक जागरण’ के राष्ट्रीय संस्करण में प्रकाशित ख़बर
वहीं परिजनों का आरोप है कि उन्होंने गाँव की ज़मीन बेच कर विधायक के साथी कपिल नागर को मोटी रकम दी थी। इसके बावजूद उन्हें धमकियाँ मिलती रहीं। डॉक्टर राजेंद्र के परिजनों ने आरोप लगाया कि उनके 5 टैंकर दिल्ली जल बोर्ड में लगे थे, जिसे विधायक ने हटवा दिया। जल बोर्ड से उनकी लाखों रुपए की पेमेंट रुकवा देने की बात भी कही गई है। मृत डॉक्टर के बेटे ने बताया कि उनके पास जुलाई 2019 का एक ऑडियो क्लिप भी है, जिसमें विधायक धमकी देते हुए सुने जा सकते हैं।
दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज से लौटे एक व्यक्ति ने शनिवार (अप्रैल 18, 2020) को अपने दो साथियों और कुछ ग्रामीणों के साथ मिलकर ओडिशा के जाजपुर जिले के एक गाँव में राज्य सरकार के दो अधिकारियों पर हमला कर दिया और उन्हें बंधक बना लिया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। बाद में तीनों को हिरासत में लेकर क्वारंटाइन के लिए भेज दिया गया।
घटना कुआखिया पुलिस थाने के अंतर्गत आने वाले गोपीनाथपुर गाँव में उस समय हुई, जब जिला अधिकारी रंजन कुमार दास अन्य अधिकारियों के साथ लॉकडाउन के दिशा-निर्देशों के पालन का जायजा लेने और यह सुनिश्चित करने पहुँचे थे कि लोगों ने मास्क पहना है या नहीं।
जिलाधिकारी ने कहा, “जब बीडीओ और तहसीलदार गलियों में लोगों की जाँच-पड़ताल कर रहे थे, उसी समय मोटरसाइकिल पर सवार बिना मास्क पहने तीन लोग नहीं रूके और गोपीनाथपुर गाँव की ओर भाग निकले।”
50 लोगों को इकट्ठा कर बनाया बंधक
पुलिस ने कहा कि जब दोनों अधिकारियों ने उनका पीछा किया तो तीनों ने भीड़ एकत्र कर उन पर हमला कर दिया और उन्हें बंधक बना लिया। भीड़ में तकरीबन 50 लोग थे। बाद में पुलिस ने मौके पर पहुँचकर अधिकारियों को बचाया। रंजन दास ने कहा कि बाद में जाँच में सामने आया कि इनमें से एक आरोपित ने मार्च में दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में आयोजित तबलीगी जमात के कार्यक्रम में हिस्सा लिया था।
जिलाधिकारी का कहना है कि बाइक सवार तीनों ने सोचा होगा कि उनके निजामुद्दीन लिंक के कारण अधिकारी उन्हें रोकने की कोशिश कर रहे हैं, इसलिए वह फरार हो गए और फिर ग्रामीणों को इकट्ठा कर बंधक बना लिया।
पुलिस ने बताया कि फिलहाल निजामुद्दीन से लौटे शख्स और उसके दोनों सहयोगियों को हिरासत में लेकर क्वारंटाइन कर दिया गया है। सैंपल परीक्षण के बाद उनके संपर्क में आए लोगों का पता लगाया जाएगा।
घटना के बाद गाँव में तनाव का माहौल उत्पन्न हो गया था। जाजपुर के एसपी चरण सिंह मीणा ने गाँव में फ्लैग मार्च किया। इस बीच पुलिस ने राज्य में पिछले 24 घंटों में लॉकडाउन दिशा-निर्देशों और अन्य मानदंडों का उल्लंघन करने के आरोप में 67 लोगों को गिरफ्तार किया है।
बता दें कि राजधानी दिल्ली में पिछले महीने तबलीगी जमात के मजहबी कार्यक्रम में भाग लेने वालों में से कई लोगों को बाद में कोरोना पॉजिटिव पाया गया। राज्य के 61 कोरोना वायरस मामलों में से कम से कम 6 का निजामुद्दीन की घटना से ताल्लुक है।
एक अधिकारी ने बताया कि मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की एक अपील के बाद राज्य के 42 लोग, जो निज़ामुद्दीन कार्यक्रम में शामिल हुए थे, स्वेच्छा से कोरोना वायरस परीक्षण के लिए आगे आए। लेकिन शनिवार को हिरासत में लिया गया व्यक्ति उनमें शामिल नहीं था।
गौरतलब है कि कश्मीर के बडगाम जिले के वाथुरा गाँव के शेखपुरा इलाके में कोरोना संदिग्ध की जाँच करने पहुँची एक मेडिकल टीम को भीड़ ने बंधक बना लिया था और फिर छुड़ाने पहुँची पुलिस पर भी पथराव किया गया था। हैदराबाद के गॉंधी हॉस्पिटल में जमातियों ने डॉक्टर पर हमला बोल दिया था, जिसके बाद वहाँ पर पुलिस को तैनात किया गया है।
कॉन्ग्रेस नेता अलका लाम्बा ने कहा कि अगर कॉन्ग्रेस ने 2002 में ही ‘दोनों को नाप दिया होता’ तो आज भारत को ये दिन नहीं देखने पड़ते। लोगों ने कहा कि वो पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की बात कर रही हैं। बता दें कि 2002 की बात कर वे गुजरात दंगों का जिक्र कर रही थीं।
जब इन दंगों की जाँच चल रही थी और मोदी से सीबीआई ने घंटों पूछताछ की थी, तब केंद्र में यूपीए की सरकार थी। भाजपा आईटी सेल के अध्यक्ष अमित मालवीय ने कहा कि इस ट्वीट से पता चलता है कि कॉन्ग्रेस ने कोशिश तो ख़ूब की, पर सफल नहीं हुए।
अलका लाम्बा ने ट्वीट कर लिखा कि कॉन्ग्रेस से बहुत बड़ी ग़लती हुई। उन्होंने लिखा कि ‘दोनों’ आज सत्ता में फन फैला कर बैठे हैं, जो कॉन्ग्रेस द्वारा उन्हें तभी ‘न नाप देने’ का नतीजा है। मालवीय ने कहा कि लाम्बा ने देश को इस बात की जानकारी देकर अच्छा किया है कि कॉन्ग्रेस ने पूरी कोशिश की।
एक व्यक्ति ने उन्हें रिप्लाई करते हुए याद दिलाया कि कॉन्ग्रेस ‘नापने’ में एक्सपर्ट रही है और ख़ुद के नेताओं को भी नहीं छोड़ती। जैसे लाल बहादुर शास्त्री, संजय गाँधी और माधवराव सिंधिया। एक ने कहा कि देश तो आनंद मना रहा है, खामियाजा तो आज कॉन्ग्रेस पार्टी भुगत रही है।
बाद में अलका लाम्बा ने अपने इस बयान का बचाव भी किया। उन्होंने 1971 भारत-पाकिस्तान युद्ध की बात करते हुए दावा किया कि कॉन्ग्रेस की कोशिशें कभी नाकाम नहीं होतीं। उन्होंने 90,000 पाकिस्तानी सैनिकों के आत्मसमर्पण की बात कर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की याद दिलाई।
उन्होंने कहा कि कड़वी सच्चाई ये है कि कोशिश ही नहीं हुई और कोशिश होती तो ज़रूर कामयाब होते, जिससे देश को आज ‘ये दिन’ नहीं देखने पड़ते। एक व्यक्ति ने अलका को याद दिलाया कि जिस पाकिस्तान का नाम लेकर वो राजनीतिक रोटी सेंक रही हैं, कॉन्ग्रेस के नेता पीएम मोदी को हटाने के लिए फिर उसी पाकिस्तान के पास चले गए।
कांग्रेस की कोशिशें कभी नाकाम नहीं होती:), 1971 में पाकिस्तान की 90,000 सेना को घुटनों के बल लाकर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी ने विश्व को दिखा दिया था, दुःख तो इस बात का है कि कोशिश हुई ही नहीं, कामयाब तो जरूर होते और आज देश को यह दिन ना देखने पड़ रहे होते.. कड़वी सच्चाई. https://t.co/j1Ktw62KGU
— Alka Lamba – अलका लाम्बा?? (@LambaAlka) April 18, 2020
अलका लाम्बा इससे पहले भी पीएम मोदी की फोटो लगा कर भाजपा नेताओं को ‘संघ की नाजायज पैदाइश’ बता चुकी हैं। उन्होंने हाल ही में पहलवान योगेश्वर दत्त के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग किया था। उन्होंने लिखा था, “अबे योगेश्वर दत्त, अपनी माँ से पूछ कि तेरा बाप कौन है? लगता है कि अपने बाप के साथ तस्वीर लगाने में भी तुझे शर्म आती है? ऐसा क्या? जिसके साथ तूने तस्वीर लगा रखी है, अगर तेरी माँ कहती है कि वही तुम्हारा बाप है तो मान जाना। ऐसा इसीलिए, क्योंकि तेरी माँ झूठ नहीं बोलती। यूँ ही दर्द नहीं हुआ है तुझे?”
जुलाई 2019 में भी उन्होंने पीएम मोदी पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए कहा था कि जो पति न हुआ, वो पिता कैसे होगा? तब वो आम आदमी पार्टी में थीं।
भारत में कोरोना वायरस (COVID-19) का सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरे तबलीगी जमात पर देशवासियों की प्रतिक्रिया को लेकर सबा नकवी, आरफा खानम, राणा अयूब जैसे मजहब विशेष के सोशल मीडिया प्रतिनिधियों की पाकिस्तान स्थित कराची के पूर्व मेयर और पाकिस्तान के मानवाधिकार कार्यकर्ता आरिफ अजाकिया (Arif Aajakia) ने जमकर क्लास लगाई है।
आरिफ अजाकिया ने यूट्यूब पर अप्रैल 16 को एक वीडियो जारी किया है। इसकी शुरुआत में वे कहते हैं कि यह वीडियो भारत में उनकी बहन सबा नकवी वीडियो के जवाब में है। इसमें वे कहते हैं कि सबा नकवी पकिस्तान के मजहब विशेष के एहसानों को भी गिना रहीं थीं तो मुझे जरूरी लगा कि कुछ चीजों को हमें सही कर लेना चाहिए।
वीडियो में आरिफ अजाकिया कहते हैं, “90 के दशक में कराची-सिंध में जब मिलिट्री ऑपरेशन हो रहा था, उस वक्त हम पर जो जुल्म हो रहा था, उस वक्त भारत से बहुत कम लोग लिखते थे। उस समय सबा साहिबा के वालिद बड़े पैमाने पर हमारे लिए लिखते थे और हमें बहुत हौंसला मिलता था। लेकिन जब हक और सच की बात आती है तो इनके वालिद समेत हर हकपरस्त का यह संदेश होता है कि वो हक़ की बात करें।”
सबा नकवी द्वारा शेयर किए गए वीडियो का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वो बात कर रहीं थीं कि इंडिया में आजकल समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है। आरिफ अजाकिया ने कहा कि अगर इंडिया ना होता तो और भी बहुत बड़े स्तर पर आपको निशाना बनाया जाता, यह तो कुछ भी नहीं है।
आरिफ अजाकिया ने कहा, “सेक्युलरिज्म के अनुसार तो आपके यहाँ तबलीगी जमात का नाम लेने से भी समस्या आ रही है, इसे सिंगल सोर्स (एक ही स्रोत से) कहा जा रहा है। जब वहाँ नाम तक लेने की इजाजत नहीं है, जबकि इसी बेवकूफी से यह सब हो रहा है। देश के सभी लोग कुर्बानी दे रहे हैं, सब घर में हैं, और इतने लोगों की कुर्बानी अगर सिर्फ एक तरफ के लोगों से हो रहा है। बदसलूकी और पथराव तो उसी एक समुदाय ने किया है न। ये सब आपके सामने है। फिर भी आपका संविधान इजाजत नहीं दे रहा उस समुदाय का नाम लेने का। पाकिस्तान में एक-एक पत्रकार कह रहा है कि तबलीगियों को रोको, इनकी वजह से आ रहा है। आप इसको फ़ौरन इस्लामोफोबिया कह रही हैं?”
“बदकिस्मती से सबा साहेबा, आरफा, राना इन सबकी जो पत्रकारिता मैं देखता हूँ, तो यह सिर्फ एक समुदाय का बचाव करती हैं, बात यहाँ पर बेवकूफी की हो रही है। क्योंकि आपके मुल्ला निजी जगहों पर नमाज पढ़ रहे हैं, सब जगह नजर आ रहे हैं। क्या फोटोशॉप से उनके सर से टोपी हटा दें? उनकी दाढ़ियाँ हटा दें? क्या करें? और जब बात करते हैं तो आप उसे इस्लामोफोबिया कहते हैं।”
उन्होंने आगे कहा है, “अब आपके कहे हुए एहसानों पर आते हैं – सबसे पहले आते हैं शाहरुख खान! किंग खान- वो पाकिस्तान में होते तो पल्ले दर्जे के एक्टर होते। वो इंडियन हैं इसी कारण वो मशहूर हैं दुनिया में। यह भारत पर शाहरुख़ का एहसान नहीं, बल्कि भारतीय होना शाहरुख़ खान का विशेषाधिकार है। यह उसका अपना मत भी है। उसने इंटरव्यू में यह बातें खुद कहीं हैं। उसने अपने बच्चों का धर्म हिन्दुस्तान बताया है। शाहरुख़ का सारा पैसा हिन्दुस्तान का है, उसमें से अगर उसने चैरिटी की है तो और लोगों ने भी की है। अक्षय ने भी की। दूसरों ने भी की, लिस्ट भरी पड़ी है।”
अजाकिया ने कहा, “मजहब की जब बात आती है तब आप फ़ौरन नाम लेना शुरू कर देते हैं। हिन्दुस्तान की जरूरत दुनिया को है, हॉलीवुड के स्टार पसंद करते हैं भारत में काम करना, क्रिकेट खेलने लोग इंडिया जाना चाहते हैं। टैलेंट को मजहब में तौलना हराम है वैसे भी। शाहरुख को अपने टैलेंट के बदले अच्छी कीमत मिली है। आपने सलमान का नाम क्यों नहीं लिया? उसने जम के चमाटें मारी हैं आजकल के वीडियो में।”
“आप कहती हैं, इंडिया में मुस्लिमों को मसला है… इंडिया में सिर्फ कुछ मुस्लिमों को मसला है भई! जिनकी वजह से इंडिया की एकता को मसला हो रहा है। उसमें मुस्लिम समुदाय को बहुत हो रहा है। खासकर लिबरल को मसला हो रहा है, मुस्लिम उनको काफिर कहता है और हिन्दू उन्हें कट्टरपंथी कहते हैं। आप जैसे लोगों की वजह से उन्हें समस्या आती हैं।”
“आप जैसे पत्रकारों का फर्ज है, इस समय गलती मुस्लिम नहीं बल्कि मुस्लिम लीडर्स की है। आप जैसे लोग का तो फर्ज है इसमें गलती आम मुस्लिम की नहीं है, चाहे वो धार्मिक नेता हैं, चाहे आप जैसे पत्रकार हैं, जो वकालत करती हैं, तमाम मुस्लिमों की। उनका फर्ज है कि पहले अपने समुदाय को समझाओ, आपका घोड़ा खुद आपके नियंत्रण में नहीं है। पहले उनको तो घरों में बंद करो भाई। जहाँ देखो वहाँ पथराव कर रहे हैं, घेराव कर रहे हैं।”
“हमने इतिहास में सुना है कि पुलिस पर पथराव होते हैं, फ़ौज पर पथराव होते हैं ये दुनिया की बदकिस्मत कौम है इंडिया की ये ‘सिंगल सोर्स’ कौम, जो अपने डॉक्टर्स पर, पुलिस पर पथराव कर रहे हैं। खुदा का खौफ करो…”
“पाकिस्तान का मीडिया भरा पड़ा है जो कह रहे हैं तबलीगियों को निकालने और टार्गेट करने के लिए। आपके यहाँ तो मीडिया नहीं बल्कि सोशल मीडिया कर रहा है। सोशल मीडिया तो आम आदमी की बात है। उसमें से अगर एक वर्ग को निकाल दो तो वो लोग भारत को रिप्रजेंट नहीं करते। आप खुद नफरत की दीवार बनाना चाह रही हैं।”
आरिफ अजाकिया ने सबा नकवी को भारत के उन मुस्लिमों की याद दिलाते हुए कहा, जिन्हें भारत में हिन्दुओं ने खूब स्नेह दिया, “आपके सदर रहे हैं इंडिया के मुस्लिम, उन्होंने सम्मान हासिल किया है। आज भी कलाम साहब लोग हिन्दुओं से लेकर सबके रोल मॉडल हैं। कई ऐसे मुस्लिम हैं, जिन्हें हिन्दू बहुत पसंद करते हैं। वहाँ मजहब नजर नहीं आता आपको?
“आप जावेद अख्तर को लिरिक्स लिखना छोड़ने को कह रहे हैं? उनको उनके एक-एक लफ्ज़ की कीमत दी गई है मोहब्बत की सूरत में, आर्थिक रूप से और फैन्स के रूप में। जावेद साहब तो खुद कहते हैं कि वो नास्तिक हैं, तो फिर आपसे सवाल पूछा जाना चाहिए कि फिर आपने उन्हें मुस्लिमों की लाइन में खड़ा क्यों किया?”
“अब आपके मुख्य मुद्दे पर आते हैं। ताजमहल! मुझे सिर्फ इतना बता दो कि ताजमहल क्या मंगोलिया से उठाकर लाया गया था? या वहाँ से पैसे लेकर आए थे और उनसे बनाया गया था? या पैसे, मजदूर, पत्थर लेकर आए थे और उनसे मुस्लिमों ने बनाया था?”
ताजमहल के इतिहास पर बात करते हुए आरिफ कहते हैं, “जिस मुहब्बत की निशानी को आप ये ताजमहल बताती हैं, वो मल्लिका 16वें बच्चे को जन्म देते हुए मरी थी, जिसकी मोहब्बत के गम में ये ताजमहल बना था। और उसी गम में फिर उसकी बहन से शादी की थी, और ये मल्लिका जिसके मरने के गम में ये महल बनाया गया था उसके शौहर को जंग में भेजा था। उसका कत्ल करवाया था और उससे फिर ये शादी रचाई गई थी… ये है आपके गम की निशानी।”
“इस्लाम की तारीख को ना कुरेदो… बहुत गंद है इसमें। इसी मोहब्बत के देवता शाहजहाँ के बेटे ने अपने भाइयों का कत्ल किया था। विनती है तारीखों को ना कुरेदें। ताजमहल की बुनियाद में करोड़ों हिन्दुओं की कब्रें हैं।”
“ताजमहल बनने में साल-दो-साल नहीं बीस साल लगे थे। हजारों मजदूरों ने कुर्बानी दी। वो सब मजदूर हिन्दुस्तानी थे। मुगल वहाँ से ‘कुछ’ लेकर नहीं आए थे… भर-भर के लाए थे। तमाम ताशकंद और बुखारा समरकंद में तरक्कियाँ हुईं थीं। इसी हिन्दुस्तान से लूटकर ले गए थे।”
आरिफ अजाकिया मुस्लिमों के इतिहास पर विस्तृत बात कहना चाहते थे लेकिन ‘वीडियो के लम्बे’ हो जाने की वजह से उन्होंने खुद को समेटते हुए कहा, “मुगलों का सेकुलरिज्म भी हमें ना दिखाया करें। सबको पता है। वीडियो लम्बी हो जाती हैं वरना मैं बैठकर चार-चार घंटे के आपको लेक्चर दे सकता हूँ।”
आरफा खानम शेरवानी और साम्प्रदायिक नारे
“जहाँ आपके जैसे पत्रकार और आरफा खानम कहती हैं कि भारत माता की जय मत कहो, यह सांप्रदायिक है… इसमें देवी की पूजा आ जाती है। भारत माता की जय का मतलब भारत माता जिंदाबाद… पाकिस्तान जिंदाबाद… यह तो हर मुल्क में है।”
“नागरिकता कानून के समय भी ये ट्वीट करती हैं कि ‘ला इलाहा इलल्लाह’ साम्प्रदायिक हैं। नहीं हैं, सेक्युलर हैं क्योंकि यह एक समूह के लोगों की ताकत है। इस तरह की राजनीति कर के आप इंडिया के लोगों को और तकलीफ में डाल देती हैं। अभी सिर्फ मुस्लिमो को ट्यूशन की जरूरत है, ना कि हिन्दुओं को। बाद में इस्लामोफोबिया और बाकी सारी चीजें करते रहें लेकिन इस समय सबसे पहली जरूरत आम मुस्लिम को समझाने की है।”
भारत में तबलीगी जमात के कारण हुए कोरोना वायरस के संक्रमण के तथ्य बताते हुए उन्होंने कहा, “33% कोरोना वायरस इंडिया में तबलीगी जमात की बेवकूफियों की वजह से फैला है। फिर आप बहाने बनाते नजर आते हैं कि सरकार ने ये क्यों नहीं किया, वो क्यों नहीं किया… आपकी कोई जिमेम्दारी नहीं थी क्या? समुदाय के रूप में आपकी क्या जिम्मेदारी है? ताने मारना? मुस्लिमों के एहसान गिनवाना?”
“इसके बाद आरिफ अजाकिया ने हाल ही में मुरादाबाद में डॉक्टर्स की टीम पर हुए हमले का जिक्र भी किया। और सवाल किए कि सबा नकवी जैसे लोगों ने अपने समुदाय को यह क्यों नहीं बताया कि आपका दुश्मन डॉक्टर्स नहीं, इन्डियन नहीं, बल्कि कोरोना वायरस है। उन्होंने कहा कि सबा नकवी ने उल्टा यह संदेश दिया कि देश मुस्लिमों का दुश्मन है। इस समय ताने मरना और एहसान जताना नहीं है।”
उन्होंने कहा कि हमें अपने गिरेबान में झाँकने की जरूरत है। इसके बाद मजहब में राजस्व तलाशने की बात करते हुए उन्होंने कहा, “ताजमहल से जो राजस्व आता है वह एक शासक के बनाए हुए स्मारक से आता है। उसे कभी भी मजहबी पैमाने में मत तौलिए। स्टेच्यू ऑफ़ यूनिटी, सरदार वल्लभ भाई पटेल का स्मारक भी अब एक राजस्व का स्रोत है। तो आप उसे सिर्फ हिन्दू स्मारक नहीं कह सकते हैं न?”
“स्मारकों के मजहब सिर्फ मजहबी जगहों पर होते हैं, जैसे मक्का में हैं, मदीना में हैं। वरना मजहबी नहीं होते। आपके अजमेर में एक मजार पे शायद मुस्लिमों से ज्यादा हिन्दू जाते हैं। मेरा उसी समुदाय से आने के कारण मेरी जिम्मेदारी बढ़ जाती है इस वजह से मैं इन सब बारे में बात कर रहा हूँ।”
एक तरफ पूरा देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है। दूसरी ओर आतंकी अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। जम्मू-कश्मीर के सोपोर में घात लगाए आतंकवादियों ने CRPF के काफिले पर हमला किया। हमले में CRPF के तीन जवान वीरगति को प्राप्त हो गए। वहीं दो जवान गंभीर रूप से घायल हैं। पूरे इलाके में सेना सर्च अभियान चला रही है।
#UPDATE Two jawans have lost their lives & another injured in a terrorist attack in Sopore, Baramulla in Jammu & Kashmir. https://t.co/u8vrWA6hm5
जानकारी के मुताबिकउत्तरी कश्मीर के बारामुला जिला के सोपोर में पहले से घात लगाए बैठे आतंकवादियों ने अचानक से CRPF के काफिले पर हमला बोल दिया। हमले के बाद आतंकी फरार हो गए। इसके बाद से ही सेना ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर सर्च अभियान चलाया हुआ है। आशंका जताई जा रही है कि जंगलों में कई आतंकी छिपे हो सकते हैं।
हमला सोपोर में नूराबाद इलाके में अहद बाबा क्रॉसिंग के पास हुआ था। इस दौरान CRPF और पुलिस का संयुक्त दल क्रॉसिंग पर ड्यूटी पर तैनात था। वीरगति को प्राप्त हुए जवानों की पहचान हेड कॉन्स्टेबल राजीव शर्मा, कॉन्स्टेबल खरड़े, कॉन्स्टेबल सतपाल के रूप में हुई है। घायलों में हेड कॉन्स्टेबल एमसी घोष व कॉन्स्टेबल जावेद शामिल है।
डीजीपी पुलिस दिलबाग सिंह ने हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि ये सुरक्षाकर्मी रोजाना की तरह सोपोर कस्बे की मुख्य सड़क पर अपने वाहन के साथ ड्यूटी पर तैनात थे। आतंकवादियों को शायद इस बारे में पता था और उन्होंने पूरी योजना के साथ हमले को अंजाम दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों की धर-पकड़ के लिए सर्च ऑपरेशन जारी है। सेना, CRPF और पुलिस के एसओजी के जवानों ने इलाके की घेराबंदी कर रखी है।
गौरतलब हो कि कोरोनावायरस संकट के बीच पिछले कुछ दिनों से जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियाँ बढ़ गई हैं। दूसरी ओर पाकिस्तान भी लगातार सीमा पार से सीज फायर का उल्लंघन कर रहा है। शुक्रवार को भी जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के नीवा इलाके में CRPF की टुकड़ी पर आतंकी हमला किया गया था। इस हमले में गोली लगने की वजह से एक जवान घायल हो गया था। हालाँकि इस बीच चली मुठभेड़ में चार आतंकवादियों को जवानों ने मार गिराया था।
उलजुलूल बयनाबाजी, माफ़ी माँगना, सेना को बलात्कारी बताना, राफेल को विमानवाहक पोत (??????- ???????? ??????? ????) बताना, आदिवासियों की भूमि पर अवैध कब्जा… संस्थाओं के खिलाफ लोगों को भड़काना। इस सबके बावजूद यदि कोई यह मानता है कि अरुंधति रॉय (Arundhati Roy) की पहली दुश्मनी सामान्य तर्क क्षमता, बुद्धि-विवेक के साथ ना होकर दक्षिणपंथ और हिदुओं से है तो वह गलत है। कोरोना वायरस ने अरुंधति रॉय को एक बार फिर हिन्दू-मुस्लिम का मुद्दा भुनाने के लिए चर्चा में आने का अवसर दिया है। लेकिन उनके नाम के साथ ही गूगल में साल-दर-साल कुछ अलंकरण जुड़ते जाते हैं, जिनके बारे में बात की जानी चाहिए।
Google की एक ख़ासियत है कि वह वामपंथियों की तरह चीजों को भूलता नहीं है। यदि आप गूगल में अरुंधति रॉय सर्च करते हैं तो अरुंधति रॉय से जुड़े हर साल किए गए कुछ ना कुछ गैरकानूनी या अवैध काम आपके सामने नजर आने लगते हैं। इस तरह से एक ‘अर्बन नक्सल विचारक’केदोहरेपन कीपूरी सिलसिलेवार टाइमलाइन तैयार हो जाती है। हालाँकि, एक वामपंथी ‘अर्बन नक्सल’ के लिए यह एक उपलब्धि ही हो सकती है कि उसका नाम हर बार किसी ना किसी कानून के उल्लंघन और विवाद के कारण चर्चा का विषय रहा।
आपको यह जानकार हैरानी होगी (या, हो सकती है) कि बातों और विचारों में गरीब-पिछड़ों के उद्धारक नजर आने वाले वामपंथी जिस बंगले में रहते हैं वह किसी आदिवासी की वन भूमि का गैरकानूनी अधिग्रहण और दस्तावेजों में हेर-फेर कर बनाया गया है।
कानूनन अवैध है अरुंधति रॉय का आलीशान बंगला
दिसम्बर 2010 – बुकर पुरस्कार से सम्मानित पर्यावरण प्रेमी लेखिका अरुंधति रॉय के फिल्म निर्माता पति प्रदीप कृष्ण के मध्य प्रदेश पचमढ़ी में बने विवादास्पद बंगले (Dream Home) के नामांतरण को वैध ठहराने की अपील होशंगाबाद की कमिश्नर कोर्ट ने खारिज कर दी है। कोर्ट ने प्रदीप कृष्ण के साथ ही तीन अन्य बंगलों का नामांतरण भी अवैध माना था। ख़ास बात यह है कि यह भूमि उन्होंने वर्ष 1994 में किसी आदिवासी से ‘खरीदी’ थी।
अरुंधति रॉय के पति प्रदीप कृष्ण ने मध्य प्रदेश के पचमढ़ी से सात किमी दूर बारीआम गाँव में एक खूबसूरत बंगला बनवाया था। दिलचस्प बात यह है कि यह क्षेत्र पचमढ़ी वन्यजीव अभयारण्य का हिस्सा है और केंद्रीय वन व पर्यावरण मंत्रालय ने इसे पर्यावरण संरक्षण कानून के तहत इको-संवेदी क्षेत्र घोषित कर रखा है।
इस मामले में पचमढ़ी स्पेशल एरिया डवलपमेंट अथॉरिटी ने कहा था कि अरुंधती रॉय के पति प्रदीप कृष्ण समेत चारों लोगों ने इस जमीन का लैंड यूज (भू-उपयोग) गलत तरीके से बदलवाया था। इसके बाद वन विभाग ने भी इन बंगलों को अभयारण्य क्षेत्र में होने के कारण अवैध करार दे दिया था।
क्या यह हास्यास्पद नहीं है कि जल-जंगल-जमीन जैसे कर्णप्रिय ‘वामपंथी मुहावरों’ के मसीहा नजर आने वाले लोगों ने अपनी छुट्टियों का पूरा लुत्फ़ लेने के लिए आदिवासी इलाकों में वन भूमि के दस्तावेजों में हेर-फेर कर एक आलीशान बंगला बनाकर रखा है?
इसके बाद कोर्ट द्वारा इस अवैध बंगले को तोड़ने के भी आदेश जारी किए गए थे। लेकिन वामपंथी अरुंधति रॉय और उनके पति निरंतर इसके खिलाफ याचिका दायर करते नजर आए हैं, जो कि हर बार खारिज होती रही है।
हिन्दू विरोधी होने के लिए तार्किक होना पहली आवश्यकता नहीं
तारीफ़ अगर किसी चीज की कि जानी चाहिए तो वह अरुंधति रॉय जैसे सभ्यता और अधिकारों की आड़ में अपनी विषैली विचारधारा की रोटियाँ सेंकने वाले लोगों के आत्म सम्मान की! क्योंकि तमाम फर्जीवाड़ों, आडम्बरों में सर से पाँव तक घिरे होने के बावजूद ये लोग सफलतापूर्वक इस बात का दिखावा करने में सहज रहते हैं कि ये सामाजिक चिन्तक और विचारक हैं।
अरुंधति रॉय अपनी सहूलियत के अनुसार ही बिल से बाहर निकलती हैं। इस बार भी वह हिन्दू-मुस्लिम के मुद्दे पर ही बाहर निकली हैं। उनका मानना है कि सरकार ने कोरोना की महामारी के द्वारा मुस्लिमों की छवि को नुकसान पहुँचाने का काम किया है, जबकि होना यह चाहिए था कि वो यह कहती कि मुस्लिमों को ऐसे काम नहीं करने चाहिए जिससे उनके समुदाय का नाम और छवि खराब होती है।
पहले भी वो राफेल को विमानवाहक पोत बताकर अपने विवेक का परिचय अपने भगत-जनों को दे चुकी हैं। यही नहीं, हिन्दू, दक्षिणपंथ और उसके समर्थकों के लिए उनके भीतर भरे हुए जहर को बाहर निकालते हुए वह अक्सर कहती देखी गई हैं कि पूर्वोत्तर में आदिवासी, कश्मीर में मुस्लिम, पंजाब में सिख और गोवा में ईसाइयों से भारतीय राज्य लड़ रहा है।
गोआ पर 450 सालों से चले आ रहे पुर्तगाली स्वामित्व के बाद 1961 में भारतीय सेना द्वारा चलाए गए गोवा मुक्ति संघर्ष ऑपरेशन को इसी अरुंधति रॉय ने सवर्ण भारतीय सेना का क्रिश्चियनों के खिलाफ साजिश बताते हुए कहना था कि ऐसा लगता है जैसे यह अपरकास्ट हिंदुओं का ही स्टेट हो। अरुंधति रॉय जैसे लोग जानते हैं कि उनका विषय तबलीगी जमात या मुस्लिमों की छवि नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के प्रयासों को ढकना है। यदि वो ऐसा नहीं करते हैं तो फिर प्रश्नचिन्ह उस विलुप्त होती विचारधारा पर लग सकता है, जिसके मसीहा आज अरुंधति रॉय जैसी हस्तियाँ हैं।
आपने अक्सर सिर्फ माँ को ही अपने बच्चों के लिए दुख, दर्द अपने सिर लेते देखा होगा। मगर बिहार के नालंदा से माँ-बेटे के रिश्ते की एक भावुक कर देने वाली खबर सामने आई है। माँ को भूखा देख एक बेटा सारे कानून तोड़कर चोर बन गया और माँ का पेट भरने के लिए चोरी तक कर डाली। यहाँ तक कि इस अपराध की सजा को माफ़ करते हुए खुद जज ने उसे राशन और कपड़े दिलवा दिए।
कोरोना के कारण देशव्यापी लॉकडाउन से गरीब वर्ग को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में शुक्रवार (अप्रैल 17, 2020) को बिहार के नालंदा जिले स्थित बिहारशरीफ में चोरी के आरोप में एक नाबालिग किशोर का राशन चोरी का मामला सामने आया।
नालंदा जिले के बिहारशरीफ में एक नाबालिग बच्चे को चोरी के आरोप में पुलिस ने जज के सामने पेश किया। लेकिन जज को जब पता चला कि युवक ने भूख से तड़प रही अपनी माँ के लिए खाना जुटाने के लिए चोरी की तो उन्होंने उसे सजा देने की बजाय शाबाशी दी। इतना ही नहीं, रिहाई के समय किशोर को पर्यवेक्षण गृह के अधीक्षक ने खाने का सामान, चावल, आटा, आलू, तेल व विधवा माँ के लिए कपड़े भी दिए।
नालंदा जिले के इस्लामपुर में रहने वाले नाबालिग को पुलिस ने किशोर न्याय परिषद के प्रधान न्यायिक दंडाधिकारी मानवेंद्र मिश्र की कोर्ट में पेश किया। बच्चे पर आरोप था कि उसने चोरी की है। जज ने पूरी बात सुनी और चोरी का कारण सुन किशोर को मुक्त कर दिया। साथ ही पदाधिकारियों को उसे हरसंभव मदद करने और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ देने का आदेश दिया।
इसके साथ ही अदालत ने हर 4 महीने में किशोर से जुड़ी प्रगति रिपोर्ट सौंपने के निर्देश पुलिस को दिए हैं। जज ने बीडीओ को परिवार को राशन कार्ड, सभी सदस्यों के आधार कार्ड, किशोर की माँ को विधवा पेंशन, गृह निर्माण के लिए अनुदान राशि समेत सभी जरूरी दस्तावेज तैयार कराने के लिए कहा है।
परिवार में सिर्फ विधवा माँ और छोटा भाई
रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपित किशोर के पिता की कुछ वर्ष पहले ही मृत्यु हो गई थी। उसके परिवार में उसकी माँ के अलावा एक छोटा भाई भी है। परिवार में आय का स्रोत सिर्फ यही युवक था, जो मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण कर रहा था। कोरोना वायरस के कारण घोषित देशव्यापी बंद के कारण उन्हें राशन और खाने की समस्या हुई। इसी दौरान आरोपित युवक को चोरी के आरोप में इस्लामपुर पुलिस ने गिरफ्तार कर किशोर न्याय परिषद में भेजा था।
बंद के दौरान पर्यवेक्षण गृह में जज मानवेंद्र मिश्रा, जिला जज श्याम किशोर झा, एडीजे वन आलोक राज व जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव आदित्य पांडेय युवक से मिले थे। जहाँ इस युवक ने उन्हें चोरी के पीछे कारण बताकर चोरी की बात को स्वीकार किया। इसके बाद की गई जाँच में जब युवक की आर्थिक हालात की बातें सच निकलीं, तो जज ने यह फैसला लिया।
देश में लगातार बढ़ते कोरोना मरीजों की संख्या के बीच तबलीगी जमात से जुड़े एक के बाद एक चौंकाने वाले आँकड़े सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक देश में कुल सामने आए कोरोना मरीजों में से 29 प्रतिशत मामले दिल्ली मरकज से निकले तबलीगी जमात से जुड़े हुए हैं। शनिवार को आई स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट उनलोगों की आईना दिखाती है जो मीडिया पर जमातियों को बदनाम करने का आरोप लगा रहे हैं।
#WATCH Out of total 14378 cases, 4291 (29.8%) cases are related to Nizamuddin Markaz cluster from single source&affected 23 States&UTs. 84% cases in TN, 63% cases in Delhi, 79% cases in Telangana, 59% cases in UP & 61% in Andhra Pradesh are related to the event: Health Ministry pic.twitter.com/UMsz1hx3tz
स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने शनिवार मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि देश में अब तक कोरोना के 14378 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें से 4291 यानी कि 29 फीसदी मामले तब्लीगी जमात से जुड़े हुए हैं। दिल्ली में कोरोना के 63 फीसदी, तेलंगाना में 79 फीसदी, उत्तर प्रदेश में 59 फीसदी और आंध्रप्रदेश में 61 फीसदी मामले तबलीगी जमात से जुड़े हुए हैं।
संयुक्त सचिव ने बताया कि दिल्ली, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश सहित देश के 23 राज्यों मे जमात से जुड़े ज्यादातर मामले सामने आए हैं। उन्होंने बताया है कि पिछले 24 घंटे में देश में कोरोना के 991 नए मामले सामने आए हैं और 43 लोगों की मौत हुई है। उन्होंने बताया कि अब तक कुल 1992 कोरोना संक्रमित मरीज ठीक हो चुके हैं।स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि कोरोना के कारण देश में मृत्यु की दर 3.3 फीसदी है और सबसे अधिक 75 फीसदी मौत बुजुर्गों की हुई है।
गौरतलब है कि दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में मार्च माह में हुए तबलीगी जमात एक कार्यक्रम में 9000 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया था। यहाँ से दिल्ली पुलिस ने 2300 जमातियों को बाहर निकालकर सभी को क्वारंटाइन कराया था। यह जगह कोरोना वायरस का हॉटस्पॉट बनकर उभरा है। इतना ही नहीं इससे पहले देशभर में प्रचार के लिए मरकज से निकले जमातियों के कारण महामारी एक के बाद एक दूसरे राज्यों में फैलती चली गई।
वहीं इनमें सैकड़ों की संख्या में विदेशी जमाती भी शामिल हुए थे। इसके बाद सभी राज्यों में इनकी तलाशी के लिए पुलिस ने विशेष अभियान चलाकर सभी को क्वारंटाइन कराया। इस दौरान कई स्थानों पर जमातियों ने कोरोना योद्धाओं पर जानलेवा हमले भी किए।
इस दौरान गृह मंत्रालय की प्रवक्ता ने बताया कि कोरोना संकट के चलते भारत में फँसे विदेशियों की वीजा अवधि बढ़ाई जाएगी। बिना शुल्क वीजा अवधि बढ़ाई जाएगी। फँसे विदेशी तीन मई तक आवेदन कर सकते हैं। साथ ही गृह मंत्रालय ने जानकारी देते हुए बताया कि किसी भी तरह की मदद के लिए 112 पर कॉल कर सकते हैं।
आपको बता दें कि देश में कोरोना महामारी से अब तक 488 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 14,378 हो गई है। यही कारण है कि सरकार ने इसकी रोकथाम के लिए लॉकडाउन की अवधि को बढ़ाकर 3 मई कर दिया है।