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पाकिस्तान में जमाती मौलाना की मौत: मलेशिया और ब्रूनेई में भी तबलीगी ने फैलाया कोरोना

तबलीगी जमात के फैसलाबाद यूनिट के प्रमुख की कोरोना वायरस की वजह से मृत्यु हो गई है। फैसलाबाद पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में स्थित है, जहाँ कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या 1100 के पार हो गई है। 69 वर्षीय मौलाना सुहैब रूमी फैसलाबाद में तबलीगी जमात का कामकाज सँभालता था और उस क्षेत्र के जमातियों का मुखिया भी था। बुजुर्ग मौलवी ने लाहौर के रायविंड में हुए जमात के मजहबी कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। भारत की तरह पाकिस्तान में भी जमातियों के कारण कई मामले बढ़ गए हैं।

जमातियों ने पाकिस्तान में फैलाया कोरोना

मौलाना सुहैब के परिवार के 5 अन्य लोग भी कोरोना वायरस से संक्रमित हैं, जिनमें उसके 2 पोते भी शामिल हैं। फैसलाबाद के डिप्टी कमिश्नर मुहम्मद अली ने बताया कि मौलाना के सभी परिवार वालों को एक आइसोलेशन सेंटर में रखा गया है। पाकिस्तान स्थित पंजाब के स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि प्रान्त के 1100 से भी अधिक लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। पाकिस्तान में उन सभी मौलानाओं को ट्रैक किया जा रहा है, जिन्होंने रायविंड में हुए जमात के कार्यक्रम में हिस्सा लिया था।

पाकिस्तान की सरकार ने पहले ही जमात को सलाह दी थी कि वो अपने वार्षिक कार्यक्रम को स्थगित कर दे। लेकिन उसने इन सलाहों के ख़िलाफ़ जाते हुए आयोजन किया और इसमें पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि विदेशी मौलाना भी शामिल हुए थे। हज़ारों लोगों ने भाग लिया था। भारत के अलावा पाकिस्तान, मलेशिया और ब्रूनेई में तबलीगी जमात वाले ही कोरोना के सबसे बड़े कैरियर बन कर उभरे हैं। पाकिस्तान की बात करें तो वहाँ पंजाब की जेलों में भी कोरोना फ़ैल रहा है। क़रीब 100 कैदी संक्रमित हो चुके हैं।

पाकिस्तान में बड़ी संख्या में डॉक्टर भी कोरोना संक्रमित

पाकिस्तान में अब तक 140 लोग कोरोना वायरस के कारण अपनी जान गँवा चुके हैं, जबकि 7500 लोग संक्रमित हैं। टेस्टिंग की प्रक्रिया शिथिल होने के कारण माना जा रहा है कि संक्रमितों की संख्या इससे काफ़ी अधिक हो सकती है। लाहौर के एक कार्डियक हॉस्पिटल में 12 मेडिकल कर्मचारी ही संक्रमित हो गए हैं। पूरे पाकिस्तान में 110 मेडिकल कर्मचारी कोरोना के शिकार हुए हैं, जिनमें से 53 डॉक्टर्स हैं। युवा डॉक्टर लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं और पाकिस्तान सरकार पर आरोप लगा रहे हैं कि वो उन्हें ज़रूरी चीजें एवं उपकरण मुहैया नहीं करा रही है।

हाल ही में पाकिस्तानी डॉक्टरों का चिट्टी-गोला गाने पर मरीजों के सामने नृत्य करने वाला वीडियो वायरल हुआ था। वहाँ लोगों को राशन देने में भी भेदभाव किया जा रहा है। प्रशासन अल्पसंख्यकों को राशन देने से न केवल मना कर रहा है, बल्कि राशन के लिए उनपर धर्मांतरण का दबाव भी बना रहा है। इन्हीं खबरों के आधार पर पाकिस्तान की आलोचना विश्व का हर देश करने लगा है। इसी कड़ी में दुनियाभर के धार्मिक मसलों पर राय देने वाले अमेरिकी आयोग ने भी पाकिस्तान से आ रही इन खबरों की निंदा की थी।

योगी सरकार देगी 4-4 लाख रुपए का मुआवजा: 48 घंटों में मिले आर्थिक सहायता, DM को आदेश

उत्तर प्रदेश में आँधी, भारी बारिश और ओले गिरने से मची तबाही पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लिया है। योगी सरकार ने प्रदेश के कई जिलों में आकाशीय बिजली गिरने की घटना पर दुख जताया। योगी सरकार ने मुआवजा के तहत प्रशासन को तत्काल हरसंभव मदद पहुँचाने के निर्देश दिए। 

उन्होंने संबंधित अधिकारियों को बारिश और ओलावृष्टि के कारण हुए हादसों में मारे गए लोगों के परिजन को चार-चार लाख रुपए की सहायता मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि मकान व पशुधन की क्षति के मामलों में भी आर्थिक सहायता प्रदान की जाए। जिलाधिकारी स्वयं पर्यवेक्षण करें कि 48 घंटे में पीड़ितों को आर्थिक सहायता प्राप्त हो जाए।

जिला अधिकारियों को घायलों को सभी चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार करने के लिए भी कहा गया है। बता दें कि शुक्रवार (अप्रैल 17, 2020) की देर रात बारिश के बाद आई आँधी के कारण अलीगढ़, कानपुर देहात, औरैया और आस-पास के अन्य स्थानों पर खड़ी फसलें क्षतिग्रस्त हो गईं।

किसानों ने सरकार से लगाई मदद की गुहार

बेमौसम बारिश और तेज तूफान के कारण कानपुर में खड़ी गेहूँ की फसल खराब हो गई। इस पर किसानों ने सरकार से मदद की गुहार लगाते हुए कहा था, “हम सरकार से हमारी मदद करने का आग्रह करते हैं। हम लॉकडाउन के कारण प्रभावित हुए हैं और अब बारिश ने हमारी फसल को नुकसान पहुँचाया है। अब हम क्या खाएँगे?”

जानकारी के मुताबिक कानपुर के ननर्वल थाना क्षेत्र के चकेरी पाल्हेपुर मार्ग स्थित पाली के पास बिजली गिरने से राजेंद्र नामक युवक की मौत हो गई। वहीं बेंहटा सकट का रहने वाला वंशी पाल झुलस गया। दोनों खेतों से सुबह 7 बजे घर वापस लौट रहे थे, तभी तेज कड़क के साथ बिजली गिरी और दोनों चपेट में आ गए। बिधनू के पिपरगवा गाँव में भी बिजली गिरने से एक की मौत हुई है। मुख्यमंत्री ने इनकी मौत पर शोक व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवार को सांत्वना देते हुए आर्थिक सहायता देने का भी ऐलान किया है।

पंजाब में भी ओलावृष्टि ने फसल पर डाला असर

इसी के साथ पंजाब के गुरदासपुर में भी बेमौसम बारिश की वजह से फसल की कटाई में देरी हो गई है। पंजाब के कुछ हिस्सों में गेहूँ के सुरक्षित भंडारण का काम किया जा रहा है। पंजाब के किसानों का कहना है कि यदि लगातार बारिश होती रही तो खड़ी फसल बर्बाद हो जाएगी। लॉकडाउन और बारिश ने उन्हें बुरी तरह से प्रभावित किया है।

वहीं लुधियाना में किसानों ने कहा कि बेमौसम बारिश और भीषण तूफान की वजह से खड़ी गेहूँ की फसल का 20-25 फीसदी हिस्सा बर्बाद हो गया है। आने वाले दो-तीन दिनों में फसल की कटाई होनी थी। गौरतलब है कि पंजाब में 15 अप्रैल से गेहूँ की खरीद का काम शुरू हुआ है।

इससे पहले योगी सरकार ने 11 लाख मजदूरों के खाते में ₹1-1 हजार डालकर 4 लाख शहरी वेंडर्स को भी मदद पहुँचाई थी। इसके साथ ही सीएम ने घोषणा की थी कि देश में कहीं भी रहने वाले यूपी के गरीब मजदूरों के खाने-पीने का खर्च सरकार उठाएगी।

मो. माहिर, इरफ़ान ने 60 गुंडों के साथ वारिसलीगंज दलित बस्ती में की गोलीबारी: 1 की हत्या, कई महिलाएँ घायल

बिहार के नवादा स्थित वारिसलीगंज से एक हत्या की घटना सामने आई है। यहाँ वारिसलीगंज के मुड़चालक में दो पक्षों के बीच मारपीट और गोलीबारी हुई। इस घटना में मुख्य आरोपित मोहम्मद इरफान ने 55 वर्षीय रविदास की गोली मार कर हत्या कर दी। एक महिला सहित 6 अन्य लोग घायल हैं। पुलिस ने 8 आरोपितों को हिरासत में लिया है लेकिन इरफ़ान अभी भी फरार बताया जा रहा है। गाँव में पिछले 20 दिनों से दोनों पक्षों के बीच तनातनी चल रही थी, जिसके बाद शुक्रवार (अप्रैल 18, 2020) को इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया।

ये विवाद मुख्यतः किशोर राजा रविदास और मोहम्मद माहिर के बीच हुई थी। विवाद का कारण स्पष्ट नहीं है। ये विवाद विवेकानंद पब्लिक स्कूल के पास हुई। इसके बाद मोहम्मद माहिर के परिजन रविदास के घर पहुँच गए और उन्हें बाहर निकाल कर उनके साथ मारपीट की। इस घटना की सूचना तब तक पुलिस को नहीं दी गई थी। रविदास दलित टोले में रहते थे, जहाँ शुक्रवाह की सुबह मोहम्मद माहिर 60 लोगों के साथ पहुँच गया और उसने मारपीट शुरू कर दी।

जब दलितों ने इसका विरोध किया तो मुस्लिम पक्ष की ओर से ईंट-पत्थर चलाना शुरू कर दिया गया। दलितों ने भी उन गुंडों को भगाने के लिए पत्थरबाजी की लेकिन बस्ती में लगातार तोड़फोड़ मचाया जाता रहा। इसके बाद मोहम्मद इरफ़ान ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। गोलीबारी में घायल हुए सभी लोग दलित ही थे, जिसमें से रविदास की इलाज के दौरान मौत हो गई। घायलों में 20 वर्षीय पापु माँझी और महिलाएँ भी शामिल थीं। उन सभी का इलाज जारी है। पप्पू और रविदास की हालत चिंताजनक होने के कारण दोनों को विम्स पावापुरी रेफेर कर दिया गया था।

‘दैनिक जागरण’ के नवादा संस्करण में प्रकाशित ख़बर

वारिसलीगंज में पहले भी हुई थी मारपीट

विम्स में ही इलाज के दौरान दलित रविदास की मौत हुई। गाँव स्थित एक गड्ढे में मछली मारने को लेकर दोनों पक्षों के बीच 29 मार्च को भी झड़प हुई थी। उस समय भी 8 लोग जख्मी हो गए थे। स्थानीय बुद्धिजीवियों ने पंचायत कर के किसी तरह मामले को ठीक कर दिया था। तब दोनों ही पक्षों द्वारा कोई मामला दर्ज नहीं कराया गया था लेकिन पुलिस ने सावधानी से काम लेते हुए दोनों पक्षों के कई लोगों के ख़िलाफ़ लॉकडाउन के उल्लंघन का मामला दर्ज किया था। हालाँकि, कोई गिरफ़्तारी नहीं की गई थी।

घटना की सूचना मिलते ही एएसपी और स्थानीय थानाध्यक्ष दल-बल के साथ घटनास्थल पर पहुँचे। जिला मुख्यालय से अतिरिक्त जवानों को मँगाया गया। आरोपितों के पास से चार बड़े तलवार भी जब्त किए गए। सघन छापेमारी और नाकाबंदी कर के आरोपितों को शिकंजे में लिया गया। इरफ़ान की तलाश अभी भी जारी है। हाल ही में मधुबनी में 5 अप्रैल की रात सुलेमान नदाफ, मलील नदाफ और शरीफ नदाफ ने 70 वर्षीय दलित महिला काला देवी (उर्फ कैली देवी) की हत्या कर दी थी। सरपंच फकरे आलम हत्यारों को बचाने की पूरी कोशिश की थी और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तक बदलवाने का प्रयास किया था।

जिन रोहिंग्याओं को दी रहने की जगह, वो भी गए मरकज में: गृह मंत्रालय ने पुलिस को कहा – सबको ढूँढो

देश में जारी कोरोना के कहर के बीच शुक्रवार (अप्रैल 17, 2020) को गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चिट्ठी लिखकर रोहिंग्याओं का पता लगाने का आदेश दिया है। इसमें कहा गया है कि ऐसी रिपोर्ट मिली है कि निजामुद्दीन मरकज की शिविर में तबलीगी जमात के लोगों के साथ कुछ रोहिंग्या भी शामिल हुए थे। मंत्रालय ने इन रोहिंग्याओं को खोजने के लिए चार राज्यों को प्रमुख स्थानों के रूप में चिह्नित किया है। ये राज्य हैं- नई दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, पंजाब और हरियाणा।

गृह मंत्रालय द्वारा राज्य पुलिस प्रमुखों और मुख्य सचिवों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि रोहिंग्याओं ने तबलीगी जमात के ‘इज्तेमास’ और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया है और उनके कोरोना वायरस से संक्रमित होने की संभावना है। पत्र में हैदराबाद, तेलंगाना, दिल्ली, पंजाब, जम्मू और मेवात में शिविरों में रोहिंग्या शरणार्थियों की पहचान के लिए विशेष ध्यान देने के लिए कहा गया है, जहाँ पर अधिकतर रोहिंग्या रहते हैं।

सभी राज्यों के पुलिस प्रमुखों को रोहिंग्या शरणार्थियों का पता लगाने के लिए एक गहन अभ‍ियान चलाने को कहा गया है क्योंकि उनमें से कई अपने निर्धारित श‍िविरों से लापता हैं। मंत्रालय ने कहा कि हैदराबाद के शिविर में रहने वाले रोहिंग्या हरियाणा के मेवात में आयोजित तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए थे और वे दिल्ली के निजामुद्दीन में स्थित मरकज भी आए थे। इसी तरह, दिल्ली के श्रम विहार और शाहीनबाग इलाके में रह रहे रोहिंग्या भी तबलीगी जमात के कार्यक्रम में गए थे लेकिन वे वापस अपने शिविरों में नहीं लौटे।

मंत्रालय ने बताया कि ऐसी खबर है कि पंजाब के डेराबस्सी और जम्मू-कश्मीर के जम्मू इलाके में रोहिंग्या मुस्लिम रहते हैं और वे तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल होकर लौटे हैं। राज्यों से किए गए संवाद में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा है कि रोहिंग्या मुस्लिमों और उनके संपर्क में आने वालों की कोविड-19 जाँच कराने की जरूरत है और इसी के अनुरूप प्राथमिकता के आधार पर कदम उठाने की जरूरत है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुताबिक देश में 40 हजार रोहिंग्या दिल्ली, जम्मू और हैदराबाद सहित देश के विभिन्न हिस्सों में रहते हैं। पिछले महीने जम्मू में रहने वाले आठ रोहिंग्या मुस्लिमों को निजामुद्दीन स्थित मरकज में शामिल होकर लौटने के बाद क्वारंटाइन में रखा गया था। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, देश में 500 से अधिक कोरोना वायरस पॉजिटिव केस और देश में लगभग 20 मौतें दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में तबलीगी जमात कार्यक्रम से जुड़े पाए गए।

कौन हैं रोहिंग्या

रोहिंग्या मुस्लिम जाति (ज्यादातर, कुछ हिंदू भी) एक का समुदाय है, जो म्यांमार के रखाइन राज्य से ताल्लुक रखता है। पलायन से पहले म्यांमार में रोहिंग्याओं की जनसंख्या लगभग 10 लाख थी। इनकी अपनी भाषा और संस्कृति है। म्यामांर इन्हें सिर्फ गैरकानूनी बांग्लादेशी प्रवासी मानता है।

भड़काऊ बयान देने वाले एजाज खान को शिवसेना का समर्थन, कभी संजय राउत को बताया था कुत्ता

आपत्तिजनक और भड़काऊ बयान देने वाले अभिनेता एजाज खान का शिवसेना ने समर्थन किया है। जहाँ एक तरफ लोग उनकी हरकतों की आतंकियों से तुलना करते हुए उनकी गिरफ़्तारी की माँग कर रहे हैं, महाराष्ट्र की सत्ताधारी पार्टी ने उनका समर्थन कर के ये जता दिया है कि राज्य में अब ऐसे बयान देने वालों को सत्ता का साथ प्राप्त है। शिवसेना ‘युवा सेना’ की कोर कमिटी के सदस्य राहुल कनाल ने एजाज खान के समर्थन में ट्वीट किया है। कनाल बीएमसी की एजुकेशन कमिटी के भी सदस्य हैं।

एजाज ख़ान को ‘भाई’ कह कर सम्बोधित करते हुए कनाल ने लिखा कि आपको और शक्ति मिले। साथ ही कनाल ने लिखा कि सच्चाई के साथ रहने वाले का कुछ ग़लत नहीं होगा। उन्होंने कहा कि एजाज ख़ान यूँ ही चमकते रहें। वहीं सोशल मीडिया पर एजाज की गिरफ़्तारी की माँग करने वाले लोगों का मखौल उड़ाते हुए कनाल ने कहा कि एजाज ख़ान ने सच्चाई और अच्छे की तारीफ़ की है, इसीलिए ये नाराज़ हैं। कनाल ने आगे लिखा कि एजाज ने कुछ ग़लत नहीं किया है।

कनाल ने एजाज की हरकतों को लेकर ख़बर प्रकाशित करने वालों को ‘भक्त मीडिया’ करार दिया। कनाल ने ये सब तब किया, जब एजाज ख़ान एक समय में शिवसेना के कट्टर आलोचक रहे थे। उन्होंने शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत को ‘कुत्ता’ कह कर सम्बोधित किया था। कनाल से लोगों से पूछा कि क्या वो एजाज ख़ान द्वारा पूर्व में शिवसेना और पार्टी के नेताओं के बारे में कहे आपत्तिजनक बातों का भी समर्थन करते हैं?

ये पूरा मामला एजाज ख़ान के एक फेसबुक लाइव वीडियो से जुड़ा हुआ है। इसमें एजाज ने दुआ की थी कि जो भी लोग तबलीगी जमात की हरकतों की निंदा कर रहे हैं, उन्हें कोरोना हो जाए। उन्होंने दावा किया था कि एक चींटी के मर जाने पर भी समुदाय विशेष को जिम्मेदार बता दिया जाता है। एजाज ने कहा था कि वो सीएम उद्धव ठाकरे पर भरोसा करते हैं।

एजाज ख़ान ने अक्टूबर 2019 में संजय राउत को अपशब्द कहे थे

एजाज खान विवादित क्यों?

ट्विटर पर काफ़ी देर तक ‘अरेस्ट एजाज़ ख़ान’ नंबर एक पर ट्रेंड होता रहा। एजाज ने आरोप लगाया था कि कोरोना से ध्यान हटाने के लिए इस पूरे मामले को जमात से जोड़ा जा रहा है। इससे पहले अपनी ऐसी ही हरकतों के कारण एजाज खान जेल भी जा चुका है, जिसके बाद वो लँगड़ाते हुए निकला था। ताज़ा वीडियो में एजाज ने कहा था कि एजाज खान ने ना सिर्फ पीएम मोदी को समुदाय विशेष के खिलाफ पूर्वग्रह से ग्रसित होने का आरोपित बताया बल्कि रजत शर्मा, सुधीर चौधरी, अर्नब गोस्वामी जैसे पत्रकारों को गाली देते हुए कहा कि उनको, उनके परिवार को और उनकी पूरी टीम को कोरोना वायरस हो जाए।

‘मारना और मरना चाहता हूँ, रसूल अल्लाह की भी यही कामना’ – पाकिस्तानी डॉक्टर अमेरिका में अरेस्ट

आईएसआईएस की मदद करने की कोशिश और हमले की इच्छा व्यक्त करने के मामले में एक पाकिस्तानी डॉक्टर अमेरिका में गिरफ्तार किया गया। अमेरिका के मिनेसोटा जिला अटॉर्नी एरिका मैक्डोनल्ड और राष्ट्रीय सुरक्षा सहायक अटॉर्नी जनरल जॉन डेमर्स ने जानकारी दी कि मोहम्मद मसूद (28) आईएसआईएस के प्रति वफादार है। जनवरी और मार्च के बीच मसूद ने कई बयान दिए और आतंकवादी समूह के लिए लड़ने के लिए पाकिस्तानी डॉक्टर अमेरिका से सीरिया जाने की भी इच्छा जता चुका था।

अधिकारियों ने बताया कि मसूद ने अमेरिका में ‘लोन वुल्फ’ (मतलब अकेले ही आतंकी घटना को अंजाम देना) आतंकवादी हमले करने की भी मंशा जताई थी। मसूद को मिनियापोलिस-सेंट पॉल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर गिरफ्तार किया गया। मसूद पाकिस्तान का एक लाइसेंसधारी चिकित्सक है और वह एच1 बी वीजा के तहत मिनेसोटा में एक मेडिकल क्लीनिक के लिए अनुसंधान समन्वयक के तौर पर भी काम कर चुका है।

FBI ने जनवरी 2020 में एक जाँच शुरू की। यह एन्क्रिप्टेड सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (SMP) यूजर ‘BB’ द्वारा आईएसआईएस को सामग्री व समर्थन प्रदान करने की योजना बनाने से संबंधित खोजबीन थी। यूजर BB ने आईएसआईएस ग्रुप और उसके नेता के प्रति अपनी निष्ठा दिखाने के लिए हिजड़ा (माइग्रेशन) बनाने में सहायता का अनुरोध किया था। बाद में जाँच के दौरान इस बात का खुलासा हुआ कि ‘BB’ नाम का यूजर कोई और नहीं बल्कि डॉक्टर मसूद ही था।

पाकिस्तानी डॉक्टर अमेरिका में ऐसे फँसा

अभियोजकों का कहना है कि अदालत के हलफनामे में दिए गए तथ्य, दो विश्वसनीय गोपनीय ह्यूमन सोर्स द्वारा प्रदान की गई जानकारी पर आधारित हैं। जिनकी पहचान गुप्त रखने के लिए “CHS-1” और “CHS-2” के रूप में संदर्भित किया गया है। BB इन दोनों गवाहों CHS-1 और CHS-2 को ISIS का सदस्य मानता था। दोनों गवाहों द्वारा दी गई जानकारी में कानून प्रवर्तन अधिकारियों के साथ बातचीत की रिकॉर्डिंग और एफबीआई के विशेष एजेंटों द्वारा की कई समीक्षाएँ शामिल हैं। इसके अलावा BB के अन्य लोगों के साथ की गई बातचीत के कंप्यूटर रिकॉर्ड भी हैं।

24 जनवरी 2020 को, BB ने CHS-1 से संपर्क किया और CHS-1 के साथ खिलाफत (इस्लामी खिलाफत) और अल-दावला अल-इस्लामिया (इस्लामिक राज्य) पर चर्चा की। BB ने CHS-1 को बताया कि वो हिजड़ा इसलिए बनाना चाहता है ताकि उसे काफिरों के सामने झूठमूठ के हँसने से आजादी मिले। और वो ऐसा सिर्फ इसलिए करता था ताकि किसी को उस पर शक न हो।

बीबी ने आईएसआईएस और उसके नेता के प्रति निष्ठा या ‘बयात’ (निष्ठा की शपथ) की शपथ ली और संयुक्त राज्य अमेरिका के भीतर ‘लोन वुल्फ’ हमलों को अंजाम देकर सीरिया की यात्रा करने और आईएसआईएस के लिए लड़ने की अपनी इच्छा को कबूल किया।

मसूद की गिरफ्तारी से पहले बीबी की “CHS-1” और “CHS-2” के साथ कई बार बातें हुईं। BB का मानना था कि “CHS-1” और “CHS-2” दोनों आईएसआईएस के सदस्य थे, जो उसकी सीरिया की यात्रा को सुविधाजनक बनाने में मदद करेंगे। रिकॉर्डिंग में BB उन दोनों को ‘भाइयों’ के रूप में संदर्भित करता है। उसने कहा कि वो मुजाहिदीन की मदद करना चाहता है। BB ने कहा था, “मेरे जैसे इंसान को कहीं और नहीं बल्कि अग्रिम पंक्ति में होना चाहिए।” BB ने CHS-1 को समझाया कि वह हिजड़ा बनाना चाहता था क्योंकि वह कफ़र (काफिर) पर मुस्कुराने से नफरत करता है, ताकि उन्हें शक न हो। बातचीत के दौरान वह आत्मघाती ड्रोन बनाने की भी बात कहता है।

25 जनवरी 2020 को मसूद (BB) के साथ एक बातचीत में CHS-1 ने मसूद से कहा, “मैं भाइयों से बात करूँगा और मैं हिजड़ा प्रक्रिया अखी (भाई या मेरा भाई, दो मुस्लिम पुरुषों के बीच संबंध का एक शब्द) पर काम करना शुरू कर दूँगा।” मसूद ने इस पर सहमति जताते हुए कहा, “ठीक है इंशाअल्लाह।” इसके बाद BB ने CHS-1 से पूछा कि क्या “भाइयों ने उसके लिए यात्रा की कोई व्यवस्था की है।” मसूद बिना किसी शक के हिजड़ा बनाना चाहता था और अमेरिकी अधिकारियों से अपने असली इरादों को छिपा रहा था।

इस तरह बनाई गई थी योजना

मसूद ने आगे बताया कि उसे ISIS में शामिल होने के लिए हथियारों के प्रशिक्षण की आवश्यकता होगी। इसके साथ ही उसने छोटे ड्रोन के उपयोग पर चर्चा की, जिसे ऑनलाइन खरीदा जा सकता है और इसे सीरिया या संयुक्त राज्य अमेरिका में उपयोग के लिए ‘इत्तिशादी’ (शहीद या आत्महत्या) ड्रोन में तब्दील किया जा सकता है।

वह चाहता था कि उसका अंतिम गंतव्य सीरिया हो, क्योंकि उसका मानना ​​था, “क़ियामह (फैसले का दिन) बहुत करीब हो सकता है… और इंशाअल्लाह मैं उस सेना का हिस्सा बनना चाहता हूँ जो डबिक या अमाक में रम से मिलती है। इंशाअल्लाह… क्योंकि अगर आप जिहाद नहीं करते हैं और जिहाद करने का इरादा नहीं रखते हैं तो आप निफ़ाक (पाखंड) की डाल पर मर जाते हैं।” बता दें कि डबिक और अमाक एक लड़ाई है, जो जिहादी विचारधारा में अंतिम समय से पहले होती है।

“मैं मारना और मरना चाहता हूँ”

CHS-1 ने मसूद से कहा, “आप हिजड़ा अखी को दावला करने जा रहे हैं और आपको लोगों को मारना पड़ सकता है और यह आपके और आपके ईमान के लिए महत्वपूर्ण क्षण है। इसलिए आपको यह अखी करना पड़ सकता है और मैं नहीं चाहता कि आप यह सोचें कि अखी ने आपकी कुछ ऐसी मदद की, जिसके बारे में आप निश्चित नहीं हैं।” मसूद ने इसका जवाब देते हुए कहा, “अखी”, “मैं मारना और मरना चाहता हूँ… मारना और मरना चाहता हूँ, बार-बार चाहता हूँ। रसूल अल्लाह सास ने भी यही कामना की है (अल्लाह के दूत की यही इच्छा है) यहाँ तक कि अल्लाह ने कहा कि वाल्का यासिमुका मिन नाज़ (और अल्लाह तुम लोगों की रक्षा करेगा)।”

CHS-1 से बातचीत के दौरान ही उसने अमेरिका में ‘लोन वुल्फ’ हमले का भी जिक्र किया। साथ ही उसने यह भी जानने की कोशिश की कि आईएसआईएस में विदेशी लड़ाकों की भर्ती किस तरह से की जाती है। FBI ने बताया कि मसूद, पॉल इंटरनेशनल एयरपोर्ट (MSP) से लॉस एंजिल्स के लिए उड़ान भरने से पहले वह एक व्यक्ति से मिलने जा रहा था, जो संभवतः सीरिया में आईएसआईएस क्षेत्र में कार्गो जहाज से यात्रा करने में मदद कर सकता था।

लॉकडाउन: आदिवासियों से नक्सली माँग रहे राशन, नहीं देने पर लूटपाट-मारपीट, पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा

लॉकडाउन में आदिवासियों और गरीबों से नक्सली माँग रहे राशन! सुनने में अजीब लग रहा होगा, लेकिन वामपंथी आतंकियों ने हमेशा सर्वहारा के नाम पर ऐसे ही घटिया काम किए हैं। दरअसल लॉकडाउन के चलते भूखे घूम रहे नक्सली आदिवासियों के घरों से राशन और रुपए माँग रहे हैं। इतना ही नहीं राशन नहीं देने पर वह घरों में लूटपाट भी कर रहे हैं और परिवार के लोगों के साथ मारपीट भी कर रहे हैं। इसकी सूचना मिलते ही पुलिस ने गाँव में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।

दरअसल लॉकडाउन के बीच राशन नहीं होने से नक्सलियों के खाने के लाले पड़ गए हैं। इसके बाद वह हथियारों के साथ गाँव में भूखे घूम-घूमकर आदिवासियों के घरों से राशन के साथ पाँच सौ रुपए भी माँग कर रहे हैं। आदिवासियों द्वारा राशन और रुपया नहीं देने पर उनके घर में हथियारों के बल पर लूटपाट की जा रही है और फिर पुलिस मुखबिरी का आरोप लगाकर उनके साथ मारपीट भी की जा रही है।

इसे लेकर ग्रामीण ज्यादा बोलने काे तैयार नहीं हैं, लेकिन इसके बाद भी कुछ शिकायतें पुलिस के पास आई हैं। इसकी जानकारी मिलते ही पुलिस ने ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी है। साथ ही छत्तीसगढ़ से लगे मध्य प्रदेश बॉर्डर पर पुलिस नजर बनाए हुए है। गाँव में पुलिस की सुरक्षा को बढ़ता देख नक्सली परेशान हैं और भूखे होने के कारण उनकी टोलियों में हड़कंप मचा हुआ है।

दरअसल कोरोना संक्रमण के चलते हुए लॉकडाउन के दौरान आदिवासी लोगों को राज्य सरकार दो माह का राशन एक साथ दे रही है। इसका मकसद यह है कि आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में लोगों को परेशानी नहीं हो। ग्रामीणों को मिलने वाले दो महीने के इसी राशन को नक्सली दो हिस्सो में बाँट रहे हैं। एक हिस्सा अपने लिए और दूसरा ग्रामीणों काे दे रहे हैं। बात नहीं मानने पर ग्रामीणों से मारपीट की जा रही है। 

बालाघाट एसपी अभिषेक तिवारी ने बताया कि लगातार ये सूचना आ रही थी कि राशन के लिए नक्सली, गाँव वालों को परेशान कर रहे हैं. जिन इलाकों से यह सूचनाएँ मिली हैं, वहाँ सभी जगह सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। पुलिस की सख्ती की वजह से अब इस तरीके की शिकायत कम हो गई हैं। जिन ग्रामीण इलाकों में राशन की कमी है, वहाँ पर पुलिस की मदद से राशन गाँव वालों तक पहुँचाया भी जा रहा है।

खबरों के मुताबिक छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में पुलिस के बढ़ते दबाव के बाद नक्सली मध्य प्रदेश को अपनी पनाहगार बना रहे हैं। नक्सली संगठन छत्तीसगढ़ अक्सर पेंच-कान्हा कॉरीडोर से बालाघाट में प्रवेश कर मंडला-अमर कंटक की ओर आते हैं। बालाघाट के बैहर और मंडला के बिछिया-मवई तहसील में ग्रामीणों ने पुलिस को भी संदिग्ध लोगों को देखे जाने की सूचना कई बार दी है।

भारत में 80% कोरोना मरीज हो रहे हैं स्वस्थ, राज्यों को मोदी सरकार दे रही है 5 लाख रैपिड टेस्ट किट: स्वास्थ्य मंत्रालय

देश में भले ही लगातार कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन इस बीच स्वास्थ्य मंत्रालय ने देशवासियों को राहत भरी खबर दी है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने कहा है कि अन्य बड़े देशों की तुलना में भारत में 80 प्रतिशत मरीज ठीक हो रहे हैं। मंत्रालय ने जानकारी देते हुए बताया कि पिछले 24 घंटे में देश में 1007 नए कोरोना के मामले सामने आए हैं और 24 घंटे में 23 लोगों की मौत हुई है, इसी के साथ देश में कोरोना से मौत का आँकड़ा बढ़कर 452 हो गया है।

भारत लगातार कोरोना के खिलाफ एक लंबी लड़ाई लड़ रहा है। इस दिशा में सफलता मिलती भी दिख रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने आज देश का हेल्थ बुलेटिन जारी करते हुए कहा कि अन्य बड़े देशों की तुलना में भारत में 80 प्रतिशत मरीज ठीक हो रहे हैं। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस के 1,007 नये मामले सामने आए और 23 लोगों की मौत हुई है।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने शुक्रवार मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि कोरोना से जंग लड़ने के लिए हमें हर मोर्चे तैयार रहना होगा। इसीलिए कोशिश की जा रही है कि इसकी वैक्सीन जल्द से जल्द अपने देश में तैयार हो सके। हम बीसीजी, प्लाज्मा थेरेपी, मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज पर काम कर रहे हैं, क्योंकि हमारे लिए एक भी मौत बेहद चिंता का विषय है। उन्होंने आगे कहा कि कोरोना वायरस के मामलों में दूसरे देशों की तुलना में भारत की स्थिति बेहतर है।

अग्रवाल ने जानकारी देते हुए कहा कि कोरोना के केसों के ग्रोथ फैक्टर में 40 फीसदी की कमी आई है। इतना ही नहीं कोरोना के मामले दोगुने होने की दर में भी पिछले 7 दिनों के अंदर कमी आई है और कोरोना महामारी की चपेट में आए अब तक 13.06 फीसदी लोग रिकवर हुए हैं। वहीं स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि केंद्र की और से राज्यों को पाँच लाख रैपिट टेस्ट किट दिया जा रहा है, जिससे मात्र 30 मिनट में कोरोना की रिपोर्ट आ जाएगी।

वहीं गृह मंत्रालय ने जानकारी देते हुए बताया कि फसलों की कटाई के लिए लॉकडाउन में छूट मिलेगी। कोऑपरेटिव क्रेडिट सोसयटी और गैर बैंकिंग वित्तीय संस्थानों को न्यूनतम स्टाफ के साथ काम करने की अनुमति दी गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों के लिए जलापूर्ति, बिजली, दूरसंचार से जुड़ी परियोजनाओं को छूट है। इसमें भारतीय डाक सेवा की महत्वपूर्ण भूमिका है। देश के विभिन्न हिस्सों में मोबाइल पोस्ट ऑफिस काम कर रहे हैं।

बात करें पूरे भारत की तो देश में अब तक कोरोना मरीजों की संख्या स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक 11616, इससे मरने वालों की संख्या 452 हो गई है। राहत की बात यह कि इनमें से 1766 मरीज ऐसे हैं जो कि अस्पतालों से ठीक होकर अपने घरों को लौट चुके हैं। वहीं देश में कोरोना वायरस से सबसे अधिक मौतें 194 लोगों की मौत महाराष्ट्र में हुई हैं। यहाँ अब इस महामारी से पीड़ितों की संख्या 3205 हो गई है। 

बिहार DGP की चेतावनी उपद्रवी ‘समुदाय विशेष’ पर बेअसर, अब दरभंगा में आशा कार्यकर्ताओं पर हुआ हमला, फाड़े गए फॉर्म

बिहार से एक के बाद एक कोरोना योद्धाओं पर हमले की खबरें सामने आ रही हैं। कुछ इसी तरह बिहार के दरभंगा से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। यहाँ एक गाँव में सर्वे के लिए गई कुछ आशा कार्यकर्ताओं की टीम पर समुदाय विशेष के लोगों ने हमला कर दिया। इतना ही नहीं उपद्रवियों ने पहले तो आशा कार्यकर्ताओं के हाथों में लगे कागजों को फाड़ा और फिर उनके कपड़े भी खींचने की कोशिश की। हालाँकि, पुलिस ने एक आरोपित को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया।

जानकारी के मुताबिक दरभंगा भालपट्टी के ओपी गाँव में शुक्रवार को कोविड-19 का सर्वे करने के लिए कुछ आशा कार्यकर्ताएँ पहुँची हुई थीं, जो कि अपना सर्वे करते हुए पाँच घरों के बाद छटे घर में सर्वे कर ही रही थीं कि अचानक से घर के बाहर से आए एक अल्पसंख्यक समुदाय के युवक ने आशा कार्यकर्ताओं के हाथ से कागजों को छीनकर और उन्हें फाड़कर फेंक दिया। इस दौरान युवक ने महिला कार्यकर्ताओं के साथ बदसलूकी करते हुए उनके कपड़े खींचने की भी कोशिश की।

इसके बाद घटना की सूचना पर स्थानीय पुलिस के साथ ओपी प्रभारी मोहम्मद मोहसिन खान, सदर बीडीओ रवि सिन्हा और सीओ अरुण कुमार सक्सेना मौके पर पहुँच गए। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मौके से आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। इस पर पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों को ग्रामीणों के विरोध का सामना भी करना पड़ा। यहाँ तक कि ग्रामीणों ने आरोपित को पुलिस की गाड़ी से उतारने का भी प्रयास किया।

वहीं सूचना पर कई थानों की पुलिस फोर्स के साथ गाँव पहुँचे एसडीपीओ अनोज कुमार ने लोगों को समझा बुझाकर शांत किया। इसके बाद आरोपित युवक को गिरफ्तार कर थाना ले जाया गया। वहीं दंगा नियंत्रण बल के जवानों के साथ पुलिस ने गाँव में फ्लैग मार्च किया। मामले में डीएम डॉक्टर त्यागराजन एसएम ने कहा कि आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। गाँव की स्थिति नियंत्रण में है।

न्यूज 18 की खबर के मुताबिक खंड विकास अधिकारी रवि सिन्हा ने बताया कि कोविड-19 के संक्रमण के खतरे को देखते हुए प्रवासियों के लिए एक सर्वे चल रहा है। इसी बीच जानकारी मिली थी कि इस गाँव में बाहर से कुछ लोग आए हुए हैं, इसकी जानकारी पर आशा और आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा पाँच दिनों तक सर्वे किया जाना है। इसी क्रम में कुछ कार्यकर्ता भालपट्टी पंचायत के वार्ड नंबर 4 में गई थीं तभी हम लोगों को इनके साथ हुई बदसलूकी की सूचना मिली।

बता दें कि बिहार के औरंगाबाद में हेल्थ टीम पर बुधवार को ग्रामीणों ने अचानक हमला बोल दिया था। गोह थाना क्षेत्र के एकौनी गाँव की इस घटना में स्वास्थ्य परीक्षण करने पहुँची टीम के कई कर्मियों को चोटें भी आईं थीं। मोतिहारी में लोगों को जागरूक करने गए अफसरों पर ग्रामीणों ने हमला किया था, इसमें बीडीओ घायल हो गए थे।

वहीं बिहार से लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों पर बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने सख्त रुख अपनाते हुए बुधवार को कहा था कि जो लोग ऐसा करेंगे उनको जेल में सड़ा देंगे। उन्होंने कहा था कि ऐसे लोगों का नाम गुंडा पंजी में भी दर्ज होगा और स्पीडी ट्रायल के जरिए सजा दिलाई जाएगी। लेकिन उनका आदेश बिहार में समुदाय विशेष पर कोई असर नहीं दिखा रहा है।

तबलीगी जमात के इज्तिमा से कई रोहिंग्या नहीं लौटे हैं अपने कैम्प, गृह मंत्रालय ने जारी किए जाँच के आदेश

तबलीगी जमात के बाद अब कोरोना वायरस से रोहिंग्या का भी सम्बन्ध सामने आया है। इस सम्बन्ध में गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को चिट्ठी लिखकर निर्देश दिया है कि रोहिंग्या और तबलीगी जमात के बीच कनेक्शन की जाँच की जाए। गृह मंत्रालय ने निर्देश दिए हैं कि रोहिंग्या और उनके परिचितों का भी कोरोना टेस्ट होना चाहिए। साथ ही, पत्र में यह भी कहा है कि इसके संबंध में जरूरी कदम भी उठाए जाएँ।

गृह मंत्रालय के अनुसार तबलीगी जमात के मजहबी कार्यक्रमों में हिस्सा लेकर इनमें से कई लोग अभी तक अपने कैंप में नहीं लौटे हैं। ये कैंप तेलांगना, पंजाब, दिल्ली और जम्मू में हैं। गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को इनकी कांटेक्ट ट्रेसिंग का आदेश जारी किया है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पत्र में लिखा गया है कि ऐसी रिपोर्ट आई है कि रोहिंग्याओं ने तबलीगी जमात के इज्तिमा और अन्य धार्मिक आयोजनों में हिस्सा लिया था। ऐसे में उनके भी कोरोना से संक्रमित होने की आशंका है।

उल्लेखनीय है कि रोहिंग्या कैंप हैदराबाद में भी हैं। तेलंगाना में रहने वाले रोहिंग्या समुदाय के लोगों ने तबलीगी जमात के जलसे में हरियाणा के मेवात में हिस्सा लिया था। यही लोग दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में भी शामिल हुए थे। यही नहीं, रोहिंग्या समुदाय से जुड़े लोग श्रम विहार और शाहीनबाग भी गए थे।

गौरतलब है कि तबलीगी जमात के लोग पहले से ही देश-विदेश में संक्रमण का सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरे हैं। इनका पता लगाने और जाँच करने में पुलिस-डॉक्टर्स और सरकारी कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा खासा परेशान रहा है।

इससे पहले भी एक रिपोर्ट में बताया गया था कि पिछले दिनों झारखंड के लोहरदगा में रोहिंग्या और बांग्लादेशियों के छिपी होने की बात सामने आई थी। इस संबंध में रिपोर्ट देने वाले विशेष शाखा (खुफिया विभाग) के डीएसपी जितेंद्र कुमार का तबादला कर दिया गया है। उनकी जगह इमदाद अंसारी लेंगे। उन्हें लातेहार से यहॉं भेजा गया है।

इस बीच, देश में कोरोनावायरस संक्रमितों की संख्या 14 हजार 192 पहुँच गई है जबकि मृतकों का आँकड़ा 468 है। केरल में शुक्रवार को सिर्फ एक कोरोना पॉजिटिव मिला। जबकि सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य महाराष्ट्र में 34 नए मामले सामने आए।