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लॉकडाउन में राहत: 30 करोड़ लोगों के खातों में केंद्र ने ट्रांसफर किए ₹28,256 करोड़

केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने आज जानकारी दी कि कोरोना वायरस महामारी के बीच प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के अंतर्गत 30 करोड़ गरीब लोगों के बैंक खातों में कुल 28,256 करोड़ रुपए ट्रांसफर कर दिए गए हैं। वित्त मंत्रालय ने एक ट्वीट के जरिए यह जानकारी दी। याद रहे कि 21 दिनों के देशव्यापी लॉकडाउन के चलते केंद्र सरकार ने गरीबों के लिए 1.70 लाख करोड़ के राहत पैकेज की घोषणा की थी।

केंद्र सरकार द्वारा घोषित किए गए राहत पैकेज में जहाँ निर्धन परिवारों के लिए अन्न उपलब्ध करवाने की बात कही गई थी, वहीं निर्धन महिलाओं व वरिष्ठ नागरिकों के लिए सीधे बैंक खातों में ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ के जरिए कैश ट्रांसफर की बात थी। सरकार ने यह राहत पैकेज इसलिए घोषित किया था जिससे तीन हफ्तों के लिए देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान गरीब परिवारों को दिक्क्तों का सामना न करना पड़े।

वित्त मंत्रालय ने अपने ट्वीट में कहा है, “प्रधाानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 30 करोड़ लाभार्थियों को डायरेक्ट ​बेनिफिट ट्रांसफर के तौर पर 28,256 करोड़ रुपए जारी किए जा चुके हैं।”

वित्त मंत्रालय के इस ट्वीट में स्पष्ट किया गया है कि कुल 28,856 करोड़ में से 13,855 करोड़ रुपए पीएम-किसान योजना के अंतर्गत पहली किस्त के तौर पर जारी की गई। इसमें कुल 8 करोड़ किसान लाभार्थियों में से 6.93 करोड़ किसानों के बैंक खातों में 2,000 रुपए की पहली किस्त भेजी जा चुकी है।

न्यूज़ 18 रिपोर्ट के अनुसार उपरोक्त के अलावा केंद्र सरकार ने महिला जन धन अकाउंट होल्डर्स के 19.86 करोड़ खातों में भी 500 रुपए की राशि ट्रांसफर की है। जो कुल मिलाकर 9,930 करोड़ रुपए बैठती है। इसके अतिरिक्त वरिष्ठ नागरिक, विधवा महिलाओं और विकलांग व्यक्तियों की सहायता के लिए ‘सोशल ​असिस्टेंस प्रोग्राम’ के अंतर्गत कुल 2.82 करोड़ लोगों को 1,400 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए हैं। इस योजना के तहत इन सभी 2.82 करोड़ लाभार्थियों में से प्रत्येक के खाते में सरकार ने 1,000 रुपए ट्रांसफर किया है।

वित्त मंत्रालय के इस ट्वीट द्वारा केंद्र सरकार ने 2.16 करोड़ कन्स्ट्रक्शन वर्कस को बिल्डिंग एंड कन्स्ट्रक्शन वर्कर्स फंड की तरफ से 3,066 करोड़ रुपए जारी करने की सूचना भी दी है। इस वर्कर्स फंड का प्रबंधन राज्य सरकारें करती हैं। इसके अलावा अप्रैल से जून महीने के​ दौरान केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत 1.20 करोड़ मिट्रिक टन अनाज प्रोसेस कर रही है। इसके अंतर्गत 80 करोड़ लोगों को मुफ्त में 5 किलो प्रति माह अनाज मिलेगा। इनमें से अभी तक 2 करोड़ लाभार्थियों को मुफ्त राशन मिल चुका है।

इसके अलावा एक दूसरे घटनाक्रम में न्यूज़ एजेंसी के हवाले से नवभारत टाइम्स ने रिपोर्ट की है कि सभी केंद्रीय मंत्रियों को सोमवार से दफ्तर आकर कामकाज सँभालने को कहा गया है जिससे इकोनॉमी को तेजी से पटरी पर लाया जा सके। रिपोर्ट के अनुसार जॉइंट सेक्रटरी और उससे ऊपर रैंक के अधिकारी सोमवार से मंत्रालयों में फिर से काम करना शुरू करेंगे। स्पष्ट है कि सभी कर्मचारियों को दफ्तर आने को नहीं कहा गया है सिर्फ एक तिहाई आवश्यक स्टाफ को मंत्रालयों में आकर उपस्थिति दर्ज करवाने को बोला गया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार का फोकस अभी हॉटस्पॉट्स पर है ताकि कोरोना वायरस महामारी को और फैलने से रोका जा सके। इसके अतिरिक्त सरकार प्रयास कर रही है कि जब देश इस लॉकडाउन से बाहर आए तब इकोनॉमी पटरी पर आ जाए।

देशव्यापी 21 दिनों का लॉकडाउन 14 अप्रैल तक लागू है। हालाँकि कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए पूरी संभावना जताई जा रही है कि ये लॉकडाउन आगे बढ़ाया जा सकता है। ज्ञातव्य है कि भारत में कोरोना संक्रमित मरीजों की कुल संख्या 7,447 हो गई है। आज महाराष्ट्र में 92, गुजरात में 54, राजस्थान में 18, कर्नाटक में सात, उत्तर प्रदेश में छह और झारखंड में तीन नए मामले सामने आए हैं।

मदरसों में पुलिस से छिपा कर रखे गए हैं बच्चे: मीडिया ने दिखाया तो वामपंथी कविता कृष्णन हुई खफा

सच्चाई बहुत चुभती है। वामपंथियों को थोड़ी ज्यादा। लॉकडाउन को लेकर सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन हो रहा है या नहीं, यह जानने के लिए ‘इंडिया टुडे’ ने अपने कुछ पत्रकारों को अलग-अलग जगहों पर भेजा। इन पत्रकारों ने पाया कि दिल्ली के मदरसों में छात्रों को कमरों में भेंड़-बकरियों की तरह रखा जा रहा है। मदरसा के शिक्षकों ने बताया कि वे छात्रों को छिपा के रखते हैं, ताकि पुलिस उन्हें लेकर नहीं जाए। उन्होंने कुछ पुलिसकर्मियों को घूस तक देने का दावा किया, ताकि मदरसा के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई न हो। ‘इंडिया टुडे’ ने अपनी इस इन्वेस्टीगेशन को ‘मदरसा हॉटस्पॉट्स’ नाम दिया।

बस, फिर क्या था! वामपंथी कविता कृष्णन इस बात से चिढ़ गई कि मेडिकल सलाहों को धता बताते हुए मदरसों में चल रही गतिविधियों को दुनिया के सामने क्यों लाया जा रहा है। कविता कृष्णन का मानना है कि मदरसों में जो गतिविधियाँ चल रही हैं उसके खिलाफ आवाज़ नहीं उठाई जानी चाहिए, जबकि इससे कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के फैलने का ख़तरा बढ़ जाता है। कविता इस बात से भी नाराज़ हैं कि तबलीगी जमात की हरकतों की निंदा क्यों की जा रही है। उनका कहना है कि उन्होंने पत्रकार राहुल कँवल और मीडिया संस्थान ‘इंडिया टुडे’ के इंवेस्टिगेटिंग कार्यक्रम को ‘तथाकथित’ कह कर सम्बोधित किया और साथ ही कहा कि कोरोना महामारी के बीच ये घृणा फैलाने वाला काम है।

कविता ने कहा कि वो कँवल से कहना चाहती हैं कि वो चिकने-चुपड़े चेहरे के पीछे ख़ुद को इज्जतदार कहना छोड़ दें, क्योंकि उनका नकाब उतर गया है। वे क्या हैं, ये दुनिया ने देख लिया है। बता दें कि दूसरों के रूप और चेहरे पर भद्दी टिप्पणियाँ करने वाले यही वामपंथी ख़ुद को रेसिज्म के ख़िलाफ़ लड़ाई का मसीहा मानते हैं। वामपंथी ख़ुद तो सुविधानुसार किसी के भी चहेरे या चरित्र को लेकर टिप्पणी करते हैं, लेकिन दूसरों की बातों को फेमिनिज्म के चश्मे से देख कर उसमें खोट निकालना नहीं भूलते। ट्विटर पर जारी किए गए अपने जहरीले वीडियो में कविता कृष्णन ने आगे कहा:

आप पत्रकारों में नहीं बल्कि नफरतकारों में हैं। इतिहास आपको ‘रिपब्लिक टीवी’ के अर्नब गोस्वामी और ‘ज़ी न्यूज़’ के सुधीर चौधरी के साथ ही गिनेगा। इतिहास आपको ‘छी’ कहेगा।आज जब पूरी दुनिया में कोरोना जैसी वैश्विक महामारी फैली हुई है, सभी देख रहे हैं कि कैसे कोविड-19 के नाम पर आप जैसे नफरतकार पत्रकारिता की आड़ में पीड़ितों को धर्म के आधार पर बाँट कर अपना कारोबार चला रहे हैं। आप सरकार से मजदूरों और रोजगार के बारे में सवाल नहीं कर रहे हैं। आप स्वास्थ्य संकट और टेस्टिंग के बारे में सवाल करने की बजाए नफरत की इंजन में तेल डालने का काम कर रहे हैं। अगर ‘इंडिया टुडे’ और ‘एडिटर्स गिल्ड’ के बाकी लोग इसके ख़िलाफ़ आवाज़ नहीं उठाते तो उन्हें लेकर भी मेरा यही मत होगा।

बता दें कि पत्रकारिता की परिभाषा तय करने की बात करने वाली कविता कृष्णन से ये पूछा जाना चाहिए कि वो जिस स्वास्थ्य संकट की बात कर रही हैं, वो सिर्फ़ भारत में ही है क्या? ये संकट पूरी दुनिया में है और भारत तुलनात्मक रूप से कई विकसित देशों से अच्छे तरीके से इसे हैंडल कर रहा है, ऐसा कई विशेषज्ञों ने माना है। ऐसे में, सवाल क्या सरकार से ही होना चाहिए? क्या उन गैर-जिम्मेदार संगठनों और लोगों से सवाल नहीं होंगे, जो जान-बूझकर इधर-उधर थूक रहे हैं, कहीं भी मल-मूत्र त्याग दे रहे हैं और नर्सों के साथ बदसलूकी कर रहे हैं? क्या महामारी फैलाने वालों की बजाए माहमारी की रोकथाम के लिए लगे लोगों से सवाल होना चाहिए?

दरअसल, वामपंथी गैंग पहले से ही इस बात से चिढ़ा हुआ था कि इसे ‘चीनी वायरस’ क्यों कहा जा रहा है। ‘इंडिया टुडे’ की रिपोर्ट में बताया गया कि जहाँ एक तरफ कई स्कूलों में ‘डिस्टेंस लर्निंग’ के जरिए ऑनलाइन क्लासेज की व्यवस्था की गई है, मदरसों में स्थिति बद से भी बदतर है। दारुल उल उलूम के एक मदरसा में वहाँ के मौलाना बताते हैं कि उन्होंने पुलिस से छात्रों की संख्या को लेकर झूठ बोला है कि बच्चों को छुट्टी देकर घर भेज दिया गया है। पुलिस रोज वहाँ आती है, लेकिन वे रोज झूठ बोलते हैं।

एक मदरसा में तो 18 बच्चे हैं और पड़ोस में 6 को छिपाया गया है। बता दें कि बच्चों और बुजुर्गों में कोरोना के संक्रमण का ख़तरा तुलनात्मक रूप से ज्यादा है। ऐसे में छात्रों के साथ इस तरह का ख़तरनाक खेल खेलने को लेकर आवाज़ नहीं उठाई जानी चाहिए? मदरसा के लोग निजामुद्दीन के मरकज़ से जुड़े हुए हैं, जो तबलीगी जमात का मुख्यालय है। बच्चों को भी मरकज़ ले जाया जाता है। ज्ञात हो कि इसी एक इमारत में हुए मजहबी कार्यक्रमों के कारण देश भर में कोरोना वायरस के मामलों की संख्या में अचानक से इजाफा हो गया है। मदरसे के छात्र और शिक्षक उससे जुड़े हैं, लेकिन उनका मेडिकल टेस्ट कराने की बजाए उन्हें छिपा कर रखा गया है।

‘इंडिया टुडे’ ने दिखाया सच तो भड़क पड़ीं कविता कृष्णन

पुलिस को घूस देने की बात भी स्वीकार की गई। यहाँ तक कि मदरसा में दावत भी होती है, जहाँ ‘सोशल डिस्टेंसिंग’ के तमाम नियमों का उल्लंघन करते हुए बच्चों को झुंड में खाना खिलाया जा रहा था। लेकिन नहीं, वामपंथियों को इन बच्चों के भविष्य की कोई चिंता नहीं। कविता जैसे लोग चाहते हैं कि बच्चों को नरक में मरने के लिए छोड़ दिया जाए और इसकी ख़बर न दिखाई जाए, क्योंकि इससे उनके ‘सेकुलरिज्म’ पर आँच आती है। जबकि ये मजहब विशेष के बच्चे ही हैं, जिस कौम के हितैषी होने का दावा अक्सर ये वामपंथी करते रहते हैं।

इसी तरह ग्रेटर नोएडा के एक मदरसे का भी बुरा हाल है। ये सब तब हो रहा है, जब वो एनसीआर के उन इलाक़ों में है, जहाँ ज्यादा सख्ती है। वहाँ छात्र झुंड के झुंड बनाकर मदरसे में रह रहे हैं। सावधानी और बचाव के सारे उपायों को धता बताया जा रहा है। मेडिकल चेकअप की बातों को नकारते हुए मदरसा के मौलवी कहते हैं कि मेडिकल टेस्ट के बाद 15 दिनों के लिए क्वारंटाइन हो जाता है, जो लोचा-लफड़ा वाली बात जो जाती है। यही बहाना बना कर वो कहते हैं कि अल्लाह का शुक्र है कि बच्चों को यहाँ कोई समस्या नहीं हो रही है।

मदरसों में छात्रों के साथ खिलवाड़ हो रहा है। कोरोना जैसी महामारी के बीच उन्हें जानवरों की तरह रखा जा रहा है। लेकिन वामपंथी कविता कृष्णन चाहती हैं कि मदरसों की इस हरकत पर मीडिया चुप्पी साध ले और बच्चों को मरने दे। यही वामपंथी ख़ुद को समुदाय का हितैषी भी बताते हैं। जब ‘इंडिया टुडे’ ने तबलीगी जमात के कारण कोरोना वायरस के मामलों को आँकड़ों के जरिए दिखाया था, तब इन्हीं कविता कृष्णन और राणा अयूब जैसों ने ‘इंडिया टुडे’ पर आरोप लगाए थे कि वो कोरोना वायरस को मजहबी बना रहा है।

इमरान सरकार से घर वापसी की फरियाद लगा रहे पाकिस्तानी, दुबई में दूतावास के सामने प्रदर्शन

कोरोना संकट के बीच दुबई में फँसे पाकिस्तानी अपने वतन लौटने के लिए सरकार से फरियाद लगा रहे हैं। फिर भी न तो पाकिस्तान की इमरान खान सरकार उनकी सुन रही और न यूएई के अधिकारी कोई मदद कर रहे। इससे निराश पाकिस्तानी दुबई में दूतावास के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं।

वीडियो में आप देख सकते हैं कि सैकड़ों पाकिस्तानी दुबई में दूतावास के सामने देश लौटने की माँग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। कुछ अधिकारी समझाते हुए सुनाई दे रहे हैं कि विरोध करने का यह तरीका सही नहीं हैं। इससे आपको भी परेशानी होगी और हमें भी। इससे पाकिस्तान का भी नाम ख़राब होगा।

वीडियो में अधिकारी लगातार पाकिस्तानियों को समझाते हुए कह रहे हैं कि आपको यह समझना होगा कि हम पाकिस्तान में नहीं बल्कि दूसरे मुल्क में रह रहे हैं। इसलिए हमें यहाँ के कानूनों का पालन करना होगा। अधिकारियों ने आगे कहा कि हम आपकी हर संभव मदद कर रहे हैं। अभी कितनों को राशन दिया है और भी राशन देंगे।

इसके बाद फिर से पाकिस्तानी लोग विरोध करते हुए बस एक ही बात करते रहे कि हमें राशन नहीं चाहिए हमें पाकिस्तान जाना है। लेकिन यूएई के अधिकारियों ने राशन देने के सिवाय किसी भी तरह की मदद करने से साफ इनकार कर दिया है। अब कोरोना संकट में दुबई में फँसे पाकिस्तान के लोगों को न तो यूएई भेजने के लिए तैयार है और न ही उन नागरिकों को अपने देश पाकिस्तान से किसी भी तरह की मदद मिल रही है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी चीन में भी फँसे अपने छात्रों को पाकिस्तान ने बेसहारा छोड़ दिया था। इसके उलट भारत ने चीन सहित कई देशों में फँसे अपने हजारों नागरिकों को वतन लाकर उनको सुरक्षित घर तक पहुँचाया है।

जब चीन से भारतीय छात्रों को निकाला गया था तब एक वीडियो काफी वायरल हुआ था। इसमें चीन में फँसे पाकिस्तानी छात्र कह रहे थे, “ये भारतीय छात्र हैं और ये बस इन्हें लेने आई है, जो इनके दूतावास ने भेजी है। वुहान की यूनिवर्सिटी से इस बस से इन छात्रों को एयरपोर्ट ले जाया जाएगा और वहाँ से फिर इन्हें इनके घर पहुँचाया जाएगा। बांग्लादेश वाले भी आज रात यहाँ से ले जाए जाएँगे। एक हम पाकिस्तानी हैं, जो यहाँ पर फँसे हैं। जिनकी सरकार कहती है कि आप मरो या जियो, हम आपको नहीं निकालेंगे। शेम ऑन यू पाकिस्तान, सीखो भारत से कुछ सीखो।”

लॉकडाउन न होता तो 15 अप्रैल तक भारत में होते 8.2 लाख कोरोना संक्रमित, 1 लाख आइसोलेशन बेड रेडी

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को पत्र लिख कर कहा है कि वो अपने-अपने प्रदेशों में उन डॉक्टरों स्वाथ्यकर्मियों को सुरक्षा मुहैया कराएँ, जो क्वारंटाइन, मेडिकल स्क्रीनिंग और इलाज सम्बन्धी गतिविधियों में लगे हुए हैं। ऐसा उन पर हो रहे हमलों को देखते हुए कहा गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपनी डेली प्रेस ब्रीफिंग में बताया है कि देश में अब तक कोरोना वायरस के कारण 239 लोगों की मौत हुई है। अब तक 642 लोग ठीक होकर घर जा चुके हैं। एक और चौंकाने वाला आँकड़ा ये है कि अगर लॉकडाउन नहीं हुआ होता तो देश में 15 अप्रैल तक कोरोना के 8.2 लाख मामले होते।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड-19 से निपटने की भारत की तैयारियों की भी बात की। मंत्रालय ने कहा कि भारत में फिलहाल 586 कोविड समर्पित अस्पताल हैं। साथ ही जानकारी दी कि अब तक 1 लाख से भी अधिक आइसोलेशन बेड और 11,500 आईसीयू बेड तैयार किए जा चुके हैं। फ़िलहाल 7447 लोगों के कोरोना संक्रमित होने की बात बताई गई है। शुक्रवार (अप्रैल 10, 2020) से लेकर अब तक सबसे ज्यादा 17 मौतें मध्य प्रदेश में हुई हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी बताया कि लॉकडाउन की बजाए यदि कुछ सीमित कदम ही उठाए गए होते तो भी भारत में संक्रमितों की संख्या 2 लाख के पार हो जाती। केंद्र सरकार ने ये भी कहा है कि वो विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों द्वारा लॉकडाउन बढ़ाने के सुझाव पर विचार कर रही है। वहीं गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा कि कुछेक आर्थिक गतिविधियों को चालू किया जाना चाहिए, जबकि लॉकडाउन जारी ही रहे। वहीं ‘वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन’ भी स्वीकार कर चुका है कि लगातार बढ़ते मामलों के बावजूद भारत में ‘कम्युनिटी ट्रांसफर’ अभी रुका हुआ हैं, जो राहत की बात है।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने आँकड़ों में बताया है कि पिछले 24 घंटे में कोरोना पॉजिटिव के 1035 नए मामले सामने आए हैं और 40 लोगों की मौत हुई है। उधर दिल्ली सरकार ने ऑटो रिक्शा, टैक्सी, ग्रामीण सेवा, फटफट सेवा, मैक्सी कैब, ईको फ्रेंडली सेवा, ई-रिक्शा और स्कूल कैब ड्राइवर को 5000 रुपए की मदद देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए सोमवार (अप्रैल 13, 2020) को आवेदन स्वीकार किए जाएँगे। केंद्रीय मंत्रिपरिषद ने कहा है कि सोमवार से सभी मंत्रालयों में कामकाज शुरू हो जाएगा। संयुक्त सचिव और उससे ऊपर रैंक के अधिकारी पूर्व की भाँति कामकाज शुरू कर देंगे।

उस जमाने में सोशल मीडिया होता तो क्या होता बता रहे हैं रामायण वाले ‘दुग्गल साहब’

दूरदर्शन पर दोबारा प्रसारित होने के बाद रामायण ने लोकप्रियता के नए आयाम गढ़े हैं। रामायण के लगातार ट्रेंड करने के कारण इससे जुड़ी कई बातें आजकल सुर्खियाँ बटोर रहीं हैं। इसके हर किरदार, हर संवाद की चर्चा हो रही है। खासकर, सोशल मीडिया में।

चर्चा का एक विषय रामायण में एक ही एक्टर द्वारा निभाए गए कई सारे किरदार भी हैं। बात हो रही है असलम खान की। उन्होंने रामायण सीरियल में राक्षस, ऋषि, सीता स्वयंवर में भजन गायक, गुप्तचर, समुद्र देव जैसे कई अहम किरदार निभाए हैं।

नारद को फोन पर दिए गए इंटरव्यू में रामायण में भिन्न-भिन्न भूमिकाएँ निभाने वाले असलम खान ने अपने जीवन के बारे में भी बताया है। उन्होंने बताया कि वे पहले एक्टिंग के क्षेत्र में नहीं आना चाहते थे। उनकी रेलवे में नौकरी भी लग गई थी। लेकिन पिता ने रेलवे ज्वाइन नहीं करने दी और कहा कि कोई प्राइवेट नौकरी तलाशो। इसी दौरान उन्होंने कुछ छोटे-मोटे रोल किए और फिर रामायण में काम करने का मौका मिल गया।

नारद को दिया गया असलम खान का इंटरव्यू

झाँसी में जन्मे और मुंबई में परवरिश पाए असलम खान इस इंटरव्यू में बड़े मलाल के साथ कहते हैं यदि उन दिनों सोशल मीडिया होता तो उन्हें करियर में काफी मदद मिलती। बावजूद इसके 33 साल बाद वापस से चर्चा में आने और लोकप्रियता पाने पर असलम खान बेहद खुश हैं और सभी देशवासियों का शुक्रिया अदा करते हैं।

यूँ तो असलम खान पिछले कई दिन से सोशल मीडिया पर वायरल हैं, लेकिन आज प्रसारित एपिसोड में जब वे समुद्र देव के रूप में नजर आए, तबसे उन पर मजेदार कमेंट्स और मीम्स की बाढ़ आ गई। वे टॉप ट्रेंडिंग में आ गए।

उपासना भट्ट नामक यूजर ने लिखा, ‘समुद्र देव, अब तो मुझे ऐसा लग रहा है दुग्गल जी मेरे घर में भी कहीं हो सकते हैं। हर जगह दुग्गल जी।’

एक अन्य यूजर ने ट्वीट में लिखा कि असलम खान हर रोल के लिए खुद को परमानेंट बताते होंगे।

वहीं असलम खान के बेटे ने अपने पिता की उपलब्धि पर गर्व जताते हुए एक ट्वीट किया जिसमें उन्होंने लिखा- मुझे काफी गर्व है कि दूरदर्शन पर रामायण का फिर से टेलीकास्ट हो रहा है। मेरे पिता सर असलम खान ने इस शो में कई बड़े सपोर्टिंग रोल्स निभाए। रामायण की टीम को बेहद शुक्रिया।

जामिया की सफूरा ज़रगर गिरफ्तार, सीमा रिजवी पर हुए हमले में थी शामिल

जामिया मिल्लिया इस्लामिया की एमफिल स्टूडेंट सफूरा ज़रगर को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वह जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी की सदस्य है। संशोधित नागरिकता कानून तथा नेशनल सिटिजन रजिस्टर के खिलाफ चलाए गए विरोध-प्रदर्शनों में काफी सक्रिय रही है। उसे पूछताछ के लिए कल बुलाया गया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उसको किन कारणों के चलते गिरफ्तार किया गया है, यह अभी तक साफ़ नहीं हो सका है। हालाँकि फरवरी में यह रिपोर्ट आई थी कि एक मुस्लिम एक्टिविस्ट सीमा ऐमन रिज़वी पर कथित हमले के आरोपों में सफूरा ज़रगर समेत 7 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। रिज़वी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि जब वह जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्थित धरना स्थल से अपने घर को लौट रही थी उसी समय जामिया मस्जिद के नजदीक गेट नंबर 7 पर उसको कुछ प्रदर्शनकारियों ने रोक लिया था। आरएसएस का एजेंट बताते हुए हमला किया था।

इससे पहले जामिया कोऑर्डिनेशन कमेटी के सदस्य मीरन हैदर को भी दिल्ली पुलिस ने 2 अप्रैल को गिरफ्तार किया था। उसको उत्तर-पूर्व दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों के संबंध में षड्यंत्र रचने के आरोपों के अंतर्गत गिरफ्तार किया गया था। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 400 से ज्यादा घायल हुए थे। मीरन हैदर राष्ट्रीय जनता दल की यूथ विंग की दिल्ली शाखा का अध्यक्ष है।

PM मोदी से माँ की अपील: ऑटिज्म पीड़ित बच्चे तक पहुँचा 20 लीटर ऊँट का दूध

नेहा कुमारी नामक महिला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपने बच्चे को लेकर अपील की थी। इसके बाद उन तक सहायता पहुँचाई गई। नेहा का एक 3.5 वर्षीय बच्चा है, जो ऑटिज्म से पीड़ित है। इसके अलावा उसे कई प्रकार की फ़ूड एलर्जी भी है।

ऐसे में उसकी माँ के सामने एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई। उक्त बच्चा केवल दाल और ऊँट के दूध पर ही ज़िंदा रह पाता है। वह कुछ और नहीं खाता-पीता। जब लॉकडाउन की घोषणा हुई, तब नेहा के सामने ये समस्या खड़ी हो गई कि वो ऊँट का दूध कहाँ से मँगाएँगी। उनके पास दूध का पर्याप्त स्टॉक नहीं था और लॉकडाउन के कारण वो बाहर से जाकर नहीं ला सकती थीं। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील करते हुए कहा कि उनके बच्चे के लिए ऊँट के दूध की व्यवस्था की जाए।

उन्होंने बताया कि ऊँट के दूध के पाउडर से भी उनका काम चल जाएगा। इसके बाद आईपीएस अधिकारी अरुण बोथरा ने उनसे सारे डिटेल्स माँगे और वादा किया कि वो अपनी ओर से हरसंभव कोशिश करेंगे। बोथरा ने बाद में जानकारी दी कि ट्रेन से 20 लीटर ऊँट का दूध मुंबई पहुँचा दिया गया है। पीड़ित परिवार ने इस दूध को उनके साथ भी साझा किया, जिन्हें नेहा के बच्चे की तरह ही इसकी ज़रूरत थी। बोथरा ने इसके लिए भारतीय रेलवे का धन्यवाद किया।

इस पूरे मामले में नॉर्थ-वेस्ट रेलवे के सीपीटीएम तरुण जैन ने मदद की, जिनका बोथरा ने धन्यवाद दिया। जैन ने ये सुनिश्चित किया कि ऊँट का दूध बिना किसी गड़बड़ी और रुकावट के मुंबई तक पहुँचे। बोथरा ने कहा कि बच्चे की मेडिकल ज़रूरत पूरी करने में मदद करने के बाद उन्हें अपनी खाकी वर्दी पर और भी गर्व हो रहा है। मुंबई में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या 1000 के पार हो गई है और पूरे महाराष्ट्र में स्थिति भयावह बनी हुई है।

गोमाँस के साथ धरे गए करीमुल्लाह और फैजल आलम: देर से पहुँची पुलिस, ग्रामीणों ने जताया आक्रोश

बिहार के बेतिया रोड में दो लोग गोमाँस ले जाते हुए पकड़े गए। एक प्रत्यक्षदर्शी ने ऑपइंडिया से बातचीत करते हुए बताया कि पश्चिम चम्पारण के साठी थाना स्थित हरनहिया गाँव में शुक्रवार (अप्रैल 9, 2020) की सुबह 2 लोग गोमाँस लेकर जा रहे थे। जब उन्हें शक के आधार पर ग्रामीणों द्वारा पकड़ा गया और पूछताछ की गई तो उन्होंने इस बात को स्वीकार किया। सूचना देने के 5 घंटे बाद पुलिस आई।

ग्रामीणों का दावा है कि पुलिस ने समुदाय विशेष के लोगों से कहा कि वे ₹2 लाख दे दें तो मामला रफा-दफा कर दिया जाएगा। ग्रामीणों को सूचना मिली कि अंत में ₹60,000 पर सब तय हुआ। पत्रकारों को पहले ही कह दिया गया था कि वो वीडियो कहीं नहीं भेजें। चूँकि, इलाके में समुदाय विशेष के लोग बहुतायत में हैं, लोग भी डर से कुछ नहीं बोल रहे। ग्रामीणों का आरोप है कि एफआईआर दर्ज करने में भी पुलिस ने काफ़ी आनाकानी की है। हमने पुलिस से संपर्क करने का प्रयास किया लेकिन उनकी तरफ़ से कोई जवाब नहीं आया।

ग्रामीण इस बात से आक्रोशित हैं कि पुलिस आख़िर इतनी देर से क्यों पहुँची। गुस्साए लोगों ने नरकटियागंज-बेतिया मार्ग को जाम कर दिया। हंगामा की ख़बर मिलते ही पुलिस वहाँ पर पहुँची और ग्रामीणों को समझा-बुझा कर मामला शांत कराया। पुलिस ने करीमुल्लाह और फैजल आलम को मौके पर से गिरफ़्तार किया। नरकटियागंज के पशु चिकित्साधिकारी के पास माँस के सैम्पल को जाँच हेतु भेजा गया। हालाँकि, ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्होंने कड़ाई से पूछताछ की तो दोनों ने गोमाँस होने की बात स्वीकार कर ली थी।

स्थानीय समाचारपत्रों में प्रकाशित ख़बर

वहीं पुलिस का कहना है कि प्राथमिकी दर्ज करने के बाद दोनों आरोपितों को जेल भेज दिया गया है। दोनों आरोपित प्लास्टिक के झोले में प्रतिबंधित माँस रख कर साइकिल से जा रहे थे, तब ग्रामीणों ने शक के आधार पर उन्हें पकड़ा था। उनके पास दो झोले थे, जिनकी तलाशी लेने के बाद पुलिस को सूचना दी गई। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि इस रास्ते से पहले भी ये लोग गोमाँस ले जाते होंगे।

ममता राज में मनमानी पर केंद्र सख्त: मजहबी जमावड़े, लॉकडाउन नियमों का उल्लंघन करने पर फटकारा

कोरोना वायरस संक्रमण पर काबू पाने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन है। लेकिन, पश्चिम बंगाल में इसकी शर्तों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के एक पत्र से यह बात सामने आई है। राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी को लिखे गए इस पत्र में लॉकडाउन का पालन नहीं होने पर सख्त आपत्ति जताई गई है।

पत्र में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में गैर जरूरी चीजों की दुकानें खोलने और मजहबी जमावड़े के लिए इजाजत दिए जाने की सूचना मिली है। इसको लेकर एतराज जताया गया है। साथ ही कहा गया है कि राशन प्रशासन की बजाए नेता बॉंट रहे हैं।

पत्र में यह भी कहा गया है कि राज्य में सब्जी, मछली और मांस बाजारों पर लॉकडाउन के लिहाज से कोई अंकुश नहीं लगाया है। सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों का उल्लंघन किया जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा है कि सुरक्षा एजेंसियों से मिल रहीं रिपोर्ट्स के मुताबिक पश्चिम बंगाल में लॉकडाउन का असर धीरे-धीरे घट रहा है। राज्य सरकार की तरफ से दी जा रही छूट का दायरा बढ़ता ही जा रहा है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा लिखा गया पत्र

गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल में लॉकडाउन के उल्लंघन पर सख्त नाराजगी जताते हुए लिखा कि पश्चिम बंगाल पुलिस ने लॉकडाउन के दौरान धार्मिक जमावड़े की अनुमति दी है। इसके साथ ही मंत्रालय ने कहा कि पश्चिम बंगाल में लॉकडाउन का असर धीरे- धीरे घटता जा रहा है। यहाँ तक कि राज्य पुलिस के द्वारा  मुस्लिम बाहुल्य वाले बाजारों में लॉकडाउन के दौरान गैरजरूरी सामग्री से जुड़ी दुकानों को खोलने की अनुमति भी दी गई।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव और डीजीपी से कहा कि लॉकडाउन के दौरान सब्जी, मछली और मटन बाजार में कोई नियम नहीं है और राज्य में इन स्थानों पर सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। कोलकाता के राजा बाजार, नरकेल डांगा, तोपसिया, मेटियाबुर्ज, गार्डेनरीच, इकबालपुर और मनिकटाला का उल्लेख करते हुए कहा गया है इन जगहों पर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो रहा।

इसके साथ ही पत्र में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि बंगाल मुफ्त राशन को संस्थागत तरीकों के बजाए राजनेताओं द्वारा वितरित करवाया गया है, जिससे कि कोरोना महामारी के वायरस को संक्रमण में वृद्धि हुई होगी। गृह मंत्रालय ने चेताते हुए लिखा है कि पत्र में शामिल की गई सभी शिकायतें आपदा प्रबंधन कानून, 2005 का उलंघन करती हैं और इस पर कार्रवाई की जा सकती है। गृह मंत्रालय ने पत्र के माध्यम से कहा है कि आदेशों को नजरअंदाज करने वालों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई कर मंत्रालय को इसकी रिपोर्ट सौंपी जाए।

हाल ही में जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से तबलीगी जमात से जुड़े केस या उनसे जुड़े लोगों की मौजूदगी को लेकर सवाल पूछा गया था तो उन्होंने कहा था कि सांप्रदायिक सवाल ना पूछें, ये बंगाल है और ये एक सेक्युलर राज्य है। मुस्लिम तुष्टिकरण और केंद्र सरकार के विरोध में ममता बनर्जी के राज में लॉकडाउन के कायदों से छेड़छाड़ सिर्फ बंगाल ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी ख़तरा बन सकता है।

तबलीगियों पर केजरीवाल सरकार सख्त, संक्रमण फैलाने को ठहराया जिम्मेवार: स्थिति को संभालने के लिए और वक्त की माँग

देश के साथ-साथ दिल्ली में तेजी से कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ाने के लिए जिम्मेवार तबलीगी जमात को लेकर केजरीवाल ने पहली बार सच को स्वीकार कर लिया है। पीएम मोदी से वीडियो कॉन्फ्रेंसिग जरिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि तबलीगी जमातियों के चलते कोरोना से जूझने के लिए सरकार को और वक्त चाहिए। केजरीवाल ने पीएम मोदी से लॉकडाउन की सीमा बढ़ाकर 30 अप्रैल तक करने की भी माँग की।

कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए देश में जारी लॉकडाउन के 21 दिन की सीमा समाप्ती की ओर है। इसे लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के सभी मुख्यमंत्रियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए से बात की और कोरोना से जंग लड़ने के लिए सुझाव भी माँगे। इस दौरान दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा लॉकडाउन को लेकर बनाई गई सभी नीतियों का दिल्ली सरकार पालन करेगी।

30 अप्रैल तक लॉकडाउन बढ़ाने की बात: विपक्षी मुख्यमंत्रियों ने PM से की सिफारिश, राष्ट्रीय स्तर पर फैसले का सुझाव

PM मोदी ने लिया लॉकडाउन की अवधि बढ़ाने का निर्णय, CM केजरीवाल ने सराहा

इस बीच केजरीवाल ने कहा कि तबलीगी जमात से जुड़े सभी लोगों और उनके संपर्क में आने वाले लोगों को जानने के बाद स्थिति को पूरी तरह से नियंत्रित करने के लिए कम से कम दो सप्ताह की जरूरत होगी। इसी के साथ केजरीवाल ने लॉकडाउन को दो सप्ताह तक बढ़ाने को लेकर पीएम मोदी से चर्चा की। इस दौरान दिल्ली और पंजाब के मुख्यमंत्री सहित देश के कई मुख्यमंत्रियों ने पीएम मोदी से लॉकडाउन की अवधि बढ़ाने की माँग की।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि “मैं 24 घंटे उपलब्ध हूँ। कोरोना वायरस की रोकथाम को लेकर कोई भी मुख्यमंत्री किसी भी समय मुझे कोई सुझाव दे सकता है। हमें इस मुद्दे पर कंधे से कंधा मिलाकर चलना होगा।” बैठक के दौरान कई मुख्यमंत्री मास्क पहने दिखाई दिए, लेकिन मोदी ने अपने गमछे को ही मुँह पर मास्क की तरह लपेट रखा था।

आपको बता दें कि दिल्ली निजामुद्दीन की घटना के बाद से दिल्ली सहित देश के दूसरे राज्यों तक कोरोना को फैलाने और देश में तेजी से कोरोना संक्रिमत लोगों की संख्या बढ़ाने में तबलीगी जमातियों का बहुत बड़ा हाथ रहा है।