Home Blog Page 4930

खाड़ी देशों में हिंदुओं को फँसाने का खेल: संघी और इस्लामोफोबिक बताओ, जेल भिजवाओ

इन दिनों ट्विटर पर दूसरे मजहब के भारतीय के एक खास वर्ग द्वारा हिंदुओं को निशाना बनाने का भयावह प्रयास चल रहा है। ये वर्ग खास तौर पर खाड़ी देशों में रहने वाले हिंदुओं को निशाना बना रहे हैं।

हाल ही में ये लोग यूएई में एक हिंदू व्यक्ति को मजहब विशेष के द्वारा बनाए गए टिकटॉक वीडियो पर कमेंट करने पर मुसीबत में डालने पर सफल हो गए। बता दें कि गुरुवार (अप्रैल 9, 2020) को राकेश बी कित्तूरमठ नाम के एक भारतीय नागरिक को दुबई में नौकरी से इसलिए निकाल दिया गया, क्योंकि उन्होंने फेसबुक पर भ्रम के शिकार कुछ मजहब विशेष के लोगों पर टिप्पणी की थी। दरअसल कुछ टिक टॉक यूजर्स ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा था कि कोरोना वायरस को हराने के लिए पाँच टाइम का नमाज पढ़ना काफी है। राकेश ने इसी पोस्ट पर आपत्ति जाहिर की थी। राकेश Emrill Services नामक कंपनी में जॉब करते थे, जिसका मुख्यालय दुबई में है। 

कट्टरपंथियों का दावा था कि राकेश ने इस्लाम का अपमान किया है, जबकि उन्होंने इस्लाम का अपमान नहीं किया था, बल्कि उनलोगों का मजाक उड़ाया था जो टिक टॉक पर कहते हैं कि कोरोना से बचने के लिए 5 टाइम का नमाज पढ़ना पर्याप्त है।

Islamists are creating a ‘hitlist’ documenting Indian Expats

इतना करने के बाद भी इस्लामवादियों की रुह को संतुष्टि नहीं मिली। वो और भी अधिक के लिए तरस रहे हैं। रिजवान नाम का एक ट्विटर यूजर ‘इस्लामिक देशों में रहने वाले इस्लामोफोबिक एक्सपैट की सूची’ तैयार कर रहा है। दूसरे शब्दों में, यह विदेशों में भारतीयों के स्वास्थ्य को खतरे में डालने का एक ठोस प्रयास प्रतीत होता है, जो इस्लाम के लिए महत्वपूर्ण है। रिजवान का ट्विटर यूजरनेम @RizwanRzaKhan है।

Islamists compile list of emails where Hindus can be reported to

इतना ही नहीं, ये इस्लामी मध्य पूर्व में काम कर रहे ‘हिंदुत्व आतंकवादियों’ की जानकारी इकट्ठा करने के लिए ओवरटाइम कर रहे हैं। इस कड़ी में संबंधित देशों के अधिकारियों के प्रासंगिक ईमेल की सूची एकत्रित की गई है, ताकि मध्य पूर्व में ‘छिपे हुए हिंदुओं’ को जेल भेजा जा सके या धमकी दी जा सके।

दिल्ली का रहने वाला 21 साल का रिजवान दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का समर्थक है। उसने इस रिपोर्ट को लिखने के समय तक केवल 58 ट्वीट किया था। रिजवान का इसी यूजरनेम के साथ उसका इंस्टाग्राम हैंडल है। उसने दिसंबर 2012 में ट्विटर ज्वाइन किया था।

Rizwan retweeted a tweet that called Arvind Kejriwal the best Chief Minister in the world

रिजवान ने अपने ट्वीट में जिस @DeadZedb नाम के यूजर को टैग किया है, उसने UAE में रहने वाले बालकृष्ण नक्का को फेसबुक पर तालिबान और तबलीगी जमात का मजाक उड़ाते हुए मीम्स साझा करने के लिए नौकरी से निकलवा दिया। उसने दावा किया बालकृष्ण द्वारा शेयर किए गए कार्टून में समुदाय विशेष को आत्मघाती हमलावर के रूप में दिखाया गया था और कहा गया था कि इन्होंने कोरोना वायरस को एक साजिश के तहत फैलाया। जबकि कार्टून में स्पष्ट रूप से तबलीगी जमात और तालिबान का उल्लेख किया गया था।

Islamists are engaging in targeted attacks against Hindus in the Middle East
A cartoon shared by Balakrishna that got him terminated from his job

इसके अलावा यूजर @DeadZedb जामिया मिल्लिया इस्लामिया के खिलाफ सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों के लिए हिंदुओं पर खाड़ी देशों में पुलिस को एकजुट करने का भी प्रयास कर रहा है। उसने मजहब के लोगों से उसे नौकरी से निकाल दिए जाने के लिए कंपनी के मालिक के पास यूजर के ट्वीट का स्क्रीनशॉट भेजने की भी अपील की। साथ ही उसने पुलिस को भी टैग किया ताकि उसे जेल भेजा जा सके।

The user wants to send Hindus to jail for criticizing Jamia Milia Islamia University

रिजवान के पोस्ट में जो दूसरा शख्स टैग किया है, वह @brumbyoz है। यह एक इस्लामवादी कट्टरपंथी है, जो हिंदुओं को ‘cow people’ के रूप में संदर्भित करता है। @brumbyoz भी मध्य-पूर्व में रहने वाले हिंदुओं के खिलाफ घृणा अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। वह इस्लामिक देशों को सभ्य कहता है, इसके अलावा हर दूसरे देश का अपमान करता है। उसका कहना है कि केवल इस्लामिक देशों को जहालत से मुक्त माना जा सकता है।

brumbyoz calls Hindus ‘cow people’

ऐसे लोगों के अलावा, पूर्व पत्रकार इरेना अकबर जैसे अन्य लोग भी मध्य पूर्व में हिंदुओं के खिलाफ घृणा अभियान में शामिल हैं। मध्य-पूर्व के अलावा भारत में भी हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है। जो भी हिंदू कोरोना वायरस के अत्यधिक तेजी से फैलने में तबलीगी जमात की भूमिका की ओर इशारा करता है, उसे निशाना बनाया जाता है।


यहाँ सोचने वाली बात यह है कि तबलीगी जमात जैसे संगठनों की आलोचना के लिए हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है, जिनके इस्लामी कट्टरवाद ने पूरे देशों के लोगों के स्वास्थ्य को खतरे में डाल दिया है। एक खास संगठन की आलोचना को इस्लामोफोबिया के रूप में चिह्नित नहीं किया जा सकता है। यह बात काफी स्पष्ट हो गया है कि यह इस्लामोफोबिया से लड़ने की आड़ में हिंदुओं के खिलाफ इस्लामी देशों के राज्य तंत्र को उकसाने की एक पहल है।

ऐसे परिदृश्य की कल्पना करना कोई बड़ी बात नहीं है, जब इस्लामवादियों द्वारा इस तरह की हरकतों से भारत में रहने वाले हिंदुओं और दूसरे मजहब के बीच सांप्रदायिक सद्भाव की भावना को ठेस पहुँची हो। यदि भारत में रह रहे मजहब विशेष का एक वर्ग मध्य-पूर्व में रहने वाले हिंदुओं को निशाना बनाने के लिए ओवरटाइम करता है, तो इसका मतलब है कि भविष्य में भारत में इसके कुछ भयावह परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

ग्रेटर नोएडा की मस्जिद में जुमे की नमाज के लिए जुटान, पुलिस को देखते ही भाग गया मौलाना

पूरे देश में संपूर्ण लॉकडाउन है। लेकिन, कुछ लोग मजहब के नाम पर सरेआम लॉकडाउन की धज्जियाँ उड़ा रहे हैं। ऐसे लोग अपनी जिंदगी से तो खिलवाड़ कर ही रहे हैं, औरों की जान भी संकट मे डाल रहे हैं। ताजा मामला उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा का है। यहाँ धारा 144 लगे होने के बावजूद 25 लोग मस्जिद में जुमे की नमाज पढ़ने के लिए जमा हुए। सूचना पर पहुँची पुलिस ने 7 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस को देखते ही नमाज पढ़ाने वाला मौलाना भाग खड़ा हुआ।

जानकारी के मुताबिक ग्रेटर नोएडा के जारचा इलाका स्थित कालोंडा गाँव में शुक्रवार (अप्रैल 10, 2020) को मस्जिद में करीब 25 लोग नमाज के लिए इकट्ठा हुए। पुलिस के एक प्रवक्ता ने बताया, “पुलिस जब मौके पहुँची तो मस्जिद के भीतर 20-25 लोग थे जो नमाज की तैयारी कर रहे थे। उनमें से सात को गिरफ्तार कर लिया गया है। बाकी लोग भाग गए, जिनमें एक मौलाना भी था।”

उन्होंने कहा कि गिरफ्तार किए गए लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 188, 269, 270 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

गौरतलब है कि 25 मार्च से देशभर में लॉकडाउन लागू है। इसमें लोगों के बिना उचित कारण घरों से बाहर निकलने और चार से ज्यादा लोगों के एक साथ एकत्रित होने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया गया है। सभी धार्मिक स्थल बंद हैं। धार्मिक आयोजनों पर पाबंदी है। केवल जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति और जरूरी सेवाओं में शामिल लोगों को ही छूट दी गई है।

इसके बावजूद लोग लॉकडाउन नियमों का उल्लंघन करने से बाज नहीं आ रहे हैं। आए दिन इसके अनेक उदाहरण देखने को मिल रहे हैं। इनसे निपटना पुलिस के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य साबित हो रहा है। अधिकारी लोगों से घरों में रहने तथा एक जगह जमा नहीं होने की अपील कर रहे हैं। मगर इसका इन पर कोई असर नहीं दिख रहा है।

शुक्रवार को अलग-अलग शहरों में ऐसे लोगों पर ड्रोन कैमरों की मदद से नजर रखी गई, ताकि ये लोग एक जगह इकट्ठे न होने पाएँ। लेकिन इसके बावजूद देश के अलग-अलग राज्यों में कई जगहों पर जुमे की नमाज के लिए लोगों की भीड़ जुटी। बता दें कि पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और मध्य प्रदेश में भी जुमे की नमाज के दौरान भीड़ देखी गई। मुर्शिदाबाद में सैकड़ों की संख्या में लोग मस्जिद में एकजुट हुए और नमाज अदा की। इस दौरान लोगों ने न मास्क पहन रखा था और न ही हाथ में ग्लव्स पहना था। 

‘भीलवाड़ा मॉडल’ पर राहुल की पीठ मत थपथपाइए सोनिया जी: महिला सरपंच ने दिया जनता और मोदी की अपील को क्रेडिट

राजस्थान के जिस भीलवाड़ा मॉडल के नाम पर गाँधी परिवार अपनी पार्टी, अपनी सरकार और अपने नेताओं की पीठ थपथपाने में लगा हुआ है, उसी भीलवाड़ा मॉडल पर राजस्थान की एक सरंपच ने गाँधी परिवार को करारा जवाब दिया है। महिला सरपंच ने कहा है कि जिस भीलवाड़ा मॉडल पर सोनिया गाँधी अपने बेटे राहुल गाँधी और राज्य सरकार की तारीफ कर रही हैंस वह वहाँ की जनता की मेहनत और पीएम मोदी द्वारा की गई अपील का परणाम है।

राजस्थान की महिला सरपंच किस्मत गुर्जर ने ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए कहा कि जब उन्हें जानकारी मिली कि भीलवाड़ा मॉडल का श्रेय सोनिया गाँधी द्वारा राहुल गाँधी और राज्य की सरकार को दिया जा रहा है तो बेहद दुःख हुआ। बल्कि हकीकत यह है कि जिसे भीलवाड़ा मॉडल कहा जा रहा है उसके पीछे भीलवाड़ा की जनता यानी किसान, नौजवान, महिला और स्वयंसेवी संस्थाओं की कड़ी मेहनत है।

मास्टर अब्दुल रहमान… इसलिए जयपुर में कोरोना संक्रमण पर बेअसर है ‘भीलवाड़ा मॉडल’

कमलनाथ ने 90 देशों में IIFA टेलिकास्ट के लिए रखे थे ₹700 करोड़, अब कोरोना से लड़ने पर खर्च होंगे

सरपंच किस्मत गुर्जर ने कहा, “पिछले कई दिनों से राज्य सरकार इस मॉडल का श्रेय लेने की कोशिश कर रही है, लेकिन मुझे तब दुख ज्यादा हुआ कि जब इसका श्रेय राहुल गाँधी को भी दिया जाने लगा। जबकि सच यह है कि भीलवाड़ा की जनता ने इसे एक मॉडल के रूप में स्थापित करने और कोरोना से लड़ने के लिए छोटी-छोटी बातों का कड़ाई से पालन किया और आत्मसंयम का परिचय दिया। हम लोग प्राधनमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा की गई अपील से बहुत प्रभावित हैं।”

महिला सरपंच ने आगे कहा कि पीएम मोदी की अपील का वहाँ के लोगों ने न सिर्फ पालन किया बल्कि जनता ने सोशल डिस्टेंशिग और साफ-सफाई का भी विशेष ध्यान रखा है। वहीं पीएम मोदी द्वारा मेडिकल स्टाफ का सहयोग करने को लेकर जनता से जो अपील की गई थी, उसका यहाँ की जनता पर गहरा प्रभाव पड़ा है। इसलिए यह समय राजनीति का नहीं है बल्कि सफलता और संयम के साथ और अधिक मेहनत करने का है।

इससे पहले सोनिया गाँधी ने भीलवाड़ा मॉडल को लेकर राहुल गाँधी और प्रदेश सरकार की तारीफ की थी। साथ ही इसे अन्य कॉन्ग्रेस शासित राज्यों में भी लागू करने की बात कही थी। वहीं प्रियंका गाँधी ने सीएम योगी को पत्र लिख उत्तर प्रदेश में भीलवाड़ा मॉडल को लागू करने और प्रदेश में टेस्ट बढ़ाने की माँग की थी।

अब आपको यह भी समझ लेना चाहिए कि आखिर भीलवाड़ा मॉडल क्या है, जिस पर कॉन्ग्रेस सरकार अपनी पीठ भी थपथपा रही है, साथ ही इसे पूरे देश में लागू करने की माँग भी कर रही है। दरअसल भीलवाड़ा में एक डॉक्टर के संक्रमित होने के बाद तेजी से कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढ़ी थी, लेकिन बाद में यह आँकड़ा 27 मरीजों से अधिक नहीं बढ़ा। पॉजिटिव मरीज सामने आते ही भीलवाड़ा में कर्फ्यू लगाकर सीमाओं को सील कर दिया गया था, जिससे 21 मराजों को ठीक कर लिया गया।

इतना ही नहीं भीलवाड़ा जिले के सभी निजी अस्पतालों और होटलों को अधिगृहीत कर उन्हे क्वारंटाइन सेंटर में तब्दील किया गया। इसके बाद लॉकडाउन का सख्ती से पालन कराने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स की तैनाती करके घर-घर लोगों की स्क्रीनिंग की गई थी। वहीं भीलवाड़ा में पिछले 17 दिनों से कर्फ्यू लगा हुआ है।

3 साल के रिशू को न इलाज मिला न एंबुलेंस, नेशनल हाईवे पर माँ की गोद में तोड़ दिया दम

कोरोना संक्रमण के चलते देशव्यापी लॉकडाउन के बीच बिहार के जहानाबाद से एक झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जहानाबाद जिला प्रशासन द्वारा एंबुलेंस उपलब्ध नहीं करवाने के कारण 3 साल के रिशु कुमार की शुक्रवार को मौत हो गई। रिशू को बुखार और सर्दी जुकाम था। इस दुखद घटना ने जिले के सबसे बड़े अस्पताल में से एक सदर अस्पताल की व्यवस्था पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है।

मौत के बाद भी बच्चे का शव घर ले जाने जाने को कोई साधन नहीं मिला। बच्चे के शव गोद में लिए उसके माता-पिता पैदल सड़कों पर भटकते रहे। फिर एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता ने उन्हें अपनी गाड़ी से घर पहुँचाया।

मीडिया के माध्यम से सामने आई जानकारी के अनुसार अरवल जिला अंतर्गत कुर्था थाना के शाहपुर गॉंव निवासी गिरजेश कुमार के 3 साल के बच्चे रिशू कुमार को पिछले कुछ दिनों से खाँसी-बुखार था। उन्होंने बेटे को पहले स्थानीय प्राथमिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र में दिखाया। सुधार नहीं होने पर उसे लॉकडाउन के बीच किसी प्रकार जहानाबाद सदर अस्पताल ले गए।

गिरजेश ने बताया कि जहानाबाद सदर अस्‍पताल में डॉक्टरों ने बच्‍चे की गंभीर हालत देखते हुए पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्‍पताल रेफर कर दिया। लेकिन एंबुलेंस का कोई इंतजाम नहीं किया, जबकि अस्पताल में दो-तीन एंबुलेंस खड़ी थीं। गिरजेश कहते हैं कि लॉकडाउन के कारण वे खुद भी किसी निजी गाड़ी का इंतजाम नहीं कर पाए।

मीडिया के अनुसार एंबुलेंस न मिलने पर बच्चे के माता-पिता उसको गोद में लिए पैदल ही निजी वाहन की तलाश में निकल पड़े। लेकिन अस्पताल से कुछ ही दूरी पर स्थित NH-83 पर बच्चे ने दम तोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने घर जाने के लिए एक बार फिर किसी वाहन की व्यवस्था की गुहार की, जो दुबारा अनसुनी कर दी गई।

इस दिल दहलाने वाले मामले के सामने आने के बाद अब अधिकारी जाँच कराने की बात कर रहे हैं। सदर अस्‍पातल में रेफर करने वाले डॉक्‍टर के अनुसार बच्‍चे की हालत गंभीर थी। उसे पटना मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था। सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार सिन्‍हा ने भी जाँच करवा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है। यही बात जिलाधिकारी नवीन कुमार ने भी कही है कि वे जाँच करवा कर एक्शन लेंगे।

चाँदनी महल की 13 मस्जिदों से निकले 52 कोरोना+ जमाती: पूरा इलाक़ा सील, 3 की मौत

दिल्ली के चाँदनी महल इलाक़े को सील कर दिया गया है। देशभर में लॉकडाउन के बाच कोरोना संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, ऐसे में कोरोना के कई हॉटस्पॉट भी सामने आ रहे हैं। बता दें कि पुरानी दिल्ली स्थित चाँदनी महल क्षेत्र के मस्जिदों से 102 जमातियों को निकाला गया था। इनमें से 52 कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इन जमातियों को इलाक़े के 13 मस्जिदों से निकाला गया था। ये सभी निजामुद्दीन स्थित मरकज़ के कार्यक्रमों में जाते रहते थे।

इनमें से कई के विदेशी होने की बात भी कही जा रही है। पिछले 3 दिनों में इस इलाक़े में 3 लोगों की कोरोना के कारण मौत हो चुकी है। अप्रैल 6, 2020 को 13 मस्जिदों से निकाले गए इन सभी जमातियों को गुलाबीबाग़ स्थित क्वारंटाइन सेंटर में रखा गया था। अब 52 लोगों को कोरोना वायरस का संक्रमण होने के बाद जिला प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पूरे इलाक़े को सील कर बाजार वगैरह बंद कराए जाएँ और लोगों के घरों तक ज़रूरी सामग्रियाँ पहुँचाने की व्यवस्था की जाए।

पूरे क्षेत्र को सैनिटाइज करने के लिए तैयारियाँ जोर-शोर से चल रही हैं। जो इन जमातियों के संपर्क में आए हैं, ऐसे लोगों की पहचान करने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन ने ‘डोर टू डोर’ जाकर सैम्पल लेने की कवायद शुरू की है। दिल्ली में अब तक 30 कन्टेनमेंट ज़ोन चिह्नित किए गए हैं। शुक्रवार (अप्रैल 10, 2020) को इनमें से 9 इलाक़ों को सील किया गया। इन क्षेत्रों में सख्ती बढ़ाई जाएगी और किसी को भी आने-जाने की अनुमति नहीं होगी। दिल्ली में कोरोना के मरीजों की संख्या 900 पार हो गई है। सीएम केजरीवाल भी इसके लिए तबलीगी जमात को जिम्मेदार बता रहे हैं।

फिलहाल चाँदनी महल में कर्फ्यू जैसे हालात हैं। चारों ओर सन्नाटा पसरा हुआ है और भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। बता दें कि जहाँ लॉकडाउन में आपको ये छूट रहती है कि आप दैनिक उपयोग की वस्तुएँ ख़रीदने के लिए तय समय पर दुकानों में जा सकते हैं, वहीं एरिया सील होने के बाद बाहर निकलने पर पूर्ण पाबन्दी रहती है और घरों तक चीजें मुहैया कराने की व्यवस्था की जाती है। कहा जा रहा है कि चाँदनी महल के इलाक़े में कई मस्जिदों में अभी भी जमाती छिपे हुए हैं, जो सामने नहीं आ रहे हैं और इलाज कराने से इनकार कर रहे हैं।

TikTok पर समीर खान ने कहा था – कपड़े के टुकड़े (मास्क) पर नहीं, अल्लाह पर भरोसा… हुआ कोरोना+

कुछ दिन पहले तक कोरोना संक्रमण से बचाव करने वाले मास्क का मजाक बनाने वाला टिकटॉक यूजर समीर खान अब खुद कोरोना संक्रमित निकला है। समीर खान मध्य प्रदेश के सागर जिले का रहना वाला है और सागर का पहला कोरोना पॉजिटिव केस है। कुछ दिन पहले इसका एक टिकटॉक वीडियो आया था, जिसमें ये पूरी जहालत नुमाया करता हुआ मास्क की हँसी उड़ाता है। एबीपी लाइव की रिपोर्ट अनुसार समीर खान अपने उस पुराने टिकटॉक वीडियो में कहता दिखता है कि वह कपड़े के इस टुकड़े पर भरोसा नहीं करता, वह अल्लाह पर भरोसा करता है।

अब जब समीर खान कोरोना से संक्रमित हो अस्पताल में पड़ा है, तब उसकी आवाज से सारी जहालत भरी अकड़ गायब है। नए वीडियो में वह अपने टिकटॉक फ़ॉलोवर्स से खुद के लिए दुआ करने की अपील करता हुआ दिखाई पड़ता है। अस्पताल में शूट किए गए इस वीडियो में समीर खान मरीजों वाले कपड़े पहने हुए है और खुद के कोरोना से संक्रमित होने की बात कर रहा है।

सागर का समीर खान इस जहालत का अकेला वारिस नहीं है जो कोरोना महामारी से लड़ने के लिए जारी किए दिशा-निर्देशों का मजाक बनाता दिखता है। दरअसल, लॉकडाउन के बावजूद देखा जा रहा है कि मुस्लिम समुदाय के लोग निरंतर लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं और कोरोना को लेकर हर तरह की अफवाहों को बढ़ावा दे रहे हैं।

‘कोरोना वायरस हमारे रब की NRC, कौन रहेगा और कौन जाएगा… अब वही फैसला करेगा’ – TikTok पर जहरीला ट्रेंड

#जिहाद_फैलाता_TikTok: अफवाह और जिहाद का अड्डा बन गया है टिकटॉक, उठी बैन करने की माँग

इन घटनाओं ने पुलिस और प्रशासन के काम को दोगुना कर दिया है। मुस्लिम समुदाय में ऐसी भी अफवाहें निरंतर देखने को मिल रही हैं, जिनमें कोरोना वायरस का इलाज सुन्नत और नमाज पढ़ना बताया जा रहा है। यही नहीं, कुछ मौलवी भी यह कहते देखे गए हैं कि ताबीज पहनकर कोरोना वायरस पर काबू पाया जा सकता है।

इस प्रकार की अफवाह और वीडियो का सबसे बड़ा स्रोत सोशल मीडिया पर टिकटॉक नामक मोबाइल एप्लिकेशन बनती जा रही है। हाल ही में कुछ ऐसे युवकों की गिरफ्तारी भी हुई है, जो टिकटॉक वीडियो के जरिए यह बताते देखे गए कि कोरोना अल्लाह का अजाब (कहर) है।

एक युवक को टिकटॉक पर एक ऐसा वीडियो बनाते हुए पकड़ा गया था, जो 500 रुपयों के नोटों की गड्डी पर अपनी नाक पोंछते हुए देखा गया था। ऐसा करने के पीछे युवक की मंशा इस वायरस के संक्रमण को बढ़ाने का सन्देश देना तो था ही, साथ में वह इस वायरस को अल्लाह का कहर भी कहते हुए देखा गया। हालाँकि, सोशल मीडिया पर इस वीडियो के वायरल होते ही इस मुस्लिम युवक को नासिक पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।

महाराष्ट्र: मस्जिद में छिपे 21 विदेशी जमाती को पकड़ने वाले पुलिस अधिकारी को कोरोना

देश में कोरोना वायरस का कहर अब उन डॉक्टरों, पुलिस अधिकारियों पर भी टूटने लगा है जो रात-दिन अपनी जान जोखिम में डालकर संक्रमण के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं। महाराष्ट्र में वह पुलिस अधिकारी कोरोना पॉजीटिव पाया गया है, जिसने तबलीगी जमात से जुड़े 21 विदेशियों को पकड़ा और उन्हें क्वारंटाइन कराया था। राज्य में पुलिस अधिकारी के कोरोना संक्रमित पाए जाने का यह पहला मामला है।

महाराष्ट्र पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी को जाँच ने बाद कोरोना पॉजीटिव पाया गया है। इस बात की जानकारी जैसे ही पुलिस-प्रशासन को हुई पूरे विभाग में हड़कंप मच गया। दरअसल कोरोना पॉजीटिव पाए गए पुलिस अधिकारी ने एक अभियान के तहत मस्जिद में छिपे तबलीगी जमात से जुड़े 21 विदेशी नागरिकों को पकड़ा था। फिलहाल कोरोना पीड़ित अधिकारी को महाराष्ट्र के नासिक के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

अभियान के दौरान तबलीगी जमात से जुड़े 8 मलेशियाई और 13 बांग्लादेशी जमातियों को पकड़ा गया था। इन्होंने 13 से 15 मार्च के बीच निजामुद्दीन स्थित मरकज में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। इन सभी ने पहले तमिलनाडु फिर महाराष्ट्र के मुंब्रा की यात्रा की थी। इसके बाद से ये एक मस्जिद और एक स्कूल में छिपे हुए थे। इनके पकड़े जाने के बाद महाराष्ट्र पुलिस ने विदेशी नागरिकों के बारे में जानकारी छिपाने के आरोप में मस्जिद और स्कूल संचालकों के खिलाफ में मुकदमा दर्ज किया था।

यहाँ यह भी बताना बेहद जरूरी है कि कई बार अधिकारियों ने मरकज से आए लोगों से सामने आकर जाँच कराने की अपील की थी। इसके बाद भी जमातियों के सामने नहीं आने पर पुलिस ने इनके खिलाफ तलाशी अभियान चलाया था। मुंब्रा में तबलीगी जमात के सदस्यों को पकड़े जाने के बाद से ही पुलिस अधिकारी में कोरोना के लक्षण दिखाई देने लगे थे।

इससे पहले नवी मुंबई के खारघर में सीआईएसएफ के 11 जवान कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे। इनमें से पाँच मुंबई एयरपोर्ट पर तैनात थे। इसके बाद यहाँ सीआईएसएफ के 146 अधिकारियों और कर्मचारियों को हॉस्पिटल में आइसोलेशन में भर्ती कराया गया था।

इससे पहले, झारखंड के रामगढ़ में पुलिस को सूचना मिली थी कि कुजू के जंगलों में कुछ तबलीगी जमाती जंगल के अंदर एक शिविर में छिपे हुए हैं। पुलिस ने इस स्थान पर छापा मारा और रामगढ़ जिले के मुंडू पुलिस थाने के तहत कुजू में ओरला, तेलेनिया के जंगल में एक ठिकाना मिला। हालाँकि पुलिस की छापेमारी से पहले ही टेंट में रह रहे जमाती फरार हो गए थे। पुलिस को जानकारी मिली थी कि इन जमातियों को गाँव के लोग खाना भी पहुँचा रहे थे।

पुलिस पर पत्थरबाजी करने वाला जावेद निकला कोरोना+: रासुका के तहत था जेल में बन्द, पुलिसकर्मी हुए आइसोलेट

मध्य प्रदेश के इंदौर में शासकीय कर्मचारियों पर पत्थरबाजी और हमले के मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका/NSA) के तहत जबलपुर जेल भेजे गए चार आरोपितों में से एक का टेस्ट कोरोना पॉजिटिव निकला है।

आरोपित जावेद को जिला अस्पताल ले जाकर आइसोलेट कर दिया गया है। जावेद के कोरोना पॉजिटिव निकलने के बाद जेल में संक्रमण बढ़ने की आशंका बढ़ गई है। साथ ही, इंदौर से इसे लाने वाले पुलिसकर्मियों पर भी संक्रमण का खतरा मंडरा रहा है।

जावेद के संपर्क में आए सभी लोगों को किया जाएगा आइसोलेट

उल्लेखनीय है कि इंदौर में पुलिस टीम पर हमला करने वाले आरोपितों को जबलपुर जेल ले जाया गया था, तभी से एक की तबीयत खराब थी, लेकिन सभी को अस्पताल में एडमिट कराया गया था। इसके बाद जब उनके सैंपल लिए गए तो इनमें एक आरोपित जावेद की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। जबकि अन्य तीन की रिपोर्ट निगेटिव आई, और उन्हें जेल में शिफ्ट किया गया।

इंदौर फिर शर्मसार: गश्ती करते वक़्त पुलिस को पत्थर मारे, चेकिंग के दौरान रोका तो थूका

हॉस्पिटल से भड़काऊ वीडियो बना भेज रहे थे मुल्तानी परिवार के 4 कोरोना+, इंदौर में अब तक 128 मामले

जावेद में संक्रमण की पुष्टि के बाद जो पुलिसकर्मी उसे लेकर जबलपुर जेल गए थे, उन्हें क्वारंटाइन करने के लिए कहा गया है। इसी के साथ MP के जबलपुर में 10 कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। जबकि इसमें से 5 मरीज अब तक स्वस्थ होकर घर जा चुके हैं।

जावेद की जाँच में वह कोरोना पॉजिटिव पाया गया है

लॉकडाउन के उल्लंघन में पुलिस के विरोध करने पर किया था पथराव

इंदौर पुलिस के अनुसार 7 अप्रैल की शाम को चंदन नगर थाना क्षेत्र में कुछ व्यक्ति एक सफेद रंग की मैजिक वैन क्रमांक एमपी 10T4559 में बैठे हुए थे। इन्हें थाना चंदन नगर में पदस्थ आरक्षक सुरेन्द्र अहाके और अन्य पुलिसकर्मियों द्वारा लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करने से मना किया गया। इसके साथ ही यह भी बताया जा रहा है कि जावेद टाटपट्टी बाखल में डॉक्टर्स पर पत्थरबाजी करने वालों में भी शामिल थे।

लेकिन आरोपितों ने पुलिसकर्मियों की बात मानने के बजाए पुलिसवाले से बदसलूकी की और साथ ही पत्थरबाजी भी की। उपद्रवियों ने पुलिस के वाहन में भी तोड़फोड़ की। जिसके बाद कलेक्टर मनीष सिंह ने चंदन नगर में हुई घटना पर कार्रवाई करते हुए 4 आरोपितों को रासुका (NSA) के तहत गिरफ्तार कर जबलपुर जेल भेज दिया था।

पुलिस पर पत्थरबाजी और बदसलूकी करने वालों में चंदन नगर के रहने वाले आरोपित सलीम उर्फ सल्लू (50) पुत्र लल्लू खान, जावेद (30) पुत्र नासिर खान, इमरान (24) पुत्र भुरू खान तथा समीर (22) पुत्र अनवर खान शामिल हैं।

कैदियों के कोरोना पॉजिटिव निकलने की इस खबर से सीख लेकर केंद्रीय जेल में जिस बैरक में कैदी को रखा गया था उसको सैनेटाइज किया जा रहा है और संपर्क में आने वाले अन्य कैदियों की जाँच भी की जा रही है।

उधर घटना से सबक लेते हुए भोपाल सेंट्रल जेल में नए कैदियों की एंट्री पर भी रोक लगाते हुए नए कैदियों को अब पुरानी जेल में रखने का फैसला लिया गया है। ताकि जेल में बंद कैदियों को कोरोना संक्रमण से सुरक्षित रखा जा सके।

कट्टरपंथियों का भ्रम दूर करने चले थे राकेश: दुबई में नौकरी गई, इस्लाम के अपमान में सजा भी संभव

राकेश बी कित्तूरमठ नाम के एक भारतीय नागरिक दुबई में मुश्किलों में फँस गए हैं। उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया है। उन्हें कथित तौर पर इस्लाम का अपमान करने के आरोप में जेल की सजा हो सकती है। उनकी गलती यह है कि उन्होंने फेसबुक पर भ्रम के शिकार मजहब के कुछ लोगों पर टिप्पणी की थी। दरअसल मजहब विशेष के कुछ टिक टॉक यूजर्स ने फेसबुक पोस्ट में लिखा था कि कोरोना वायरस को हराने के लिए पाँच टाइम नमाज पढ़ना काफी है। राकेश ने इस पर आपत्ति जाहिर की थी। राकेश Emrill Services नामक कंपनी में जॉब करते थे, जिसका मुख्यालय दुबई में है।

Comment by Kitturmath that sparked outrage on social media

बता दें कि सोशल मीडिया इस तरह के कई वीडियो को वायरल किया जा रहा है, जिसमें समुदाय के लोगों द्वारा दावा किया गया है कि सोशल आइसोलेशन एक साजिश है। यह कोरोना वायरस से बचाव में कोई मदद नहीं करता। इसके साथ ही इसमें दावा किया गया कि दिन में पाँच बार नमाज पढ़ना कोरोना वायरस से बचने का एकमात्र उपाय है। कोरोना वायरस का प्रकोप दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है और इसी को देखते हुए राकेश ने टिक टॉक यूजर्स द्वारा लोगों को बरगलाने पर आपत्ति जाहिर किया।

इसके बाद तो जैसे इस्लामवादियों और हिंदुओं से नफरत करने वाले लोगों के कमेंट्स की झड़ी लग गई, जैसे वो इसी ताक में बैठे थे। कोरोना वायरस से लड़ने में 5 बार नमाज पढ़ने का समर्थन करने वाले कट्टरपंथियों ने राकेश के कमेंट का स्क्रीनशॉट वायरल कर दिया। उनका कहना था कि राकेश ने इस्लाम का अपमान किया है। बाद में उन्हें उनकी नौकरी से निकाल दिया गया और उनके संगठन एमरिल सर्विसेज ने उन्हें पुलिस के हवाले कर दिया। कथित तौर पर इस्लाम का अपमान करने पर उन्हें जेल भी जाना पड़ सकता है।

Emrill Services के सीईओ स्टुअर्ट हैरिसन ने इस बाबत कहा, “कित्तूरमठ को तत्काल प्रभाव से नौकरी से निकाल दिया गया है। उसे दुबई पुलिस को सौंप दिया जाएगा। हमारे पास ऐसे हेट क्राइम के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति है।” आगे उसने कहा, “हमारे पास 8,500 से अधिक कर्मचारी हैं इसलिए इसमें कुछ समय लग सकता है। हमने उसे निकाल दिया है। यदि वह अभी भी देश में है, तो उसे दुबई पुलिस को सौंप दिया जाएगा।”

https://twitter.com/Sthomas_inc/status/1248462184692080642?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E1248462184692080642&ref_url=https%3A%2F%2Fwww.opindia.com%2F2020%2F04%2Fdubai-indian-man-sacked-may-face-jail-term-social-media-post-muslims-tiktok-coronavirus-misinformation%2F

कित्तूरमठ के खिलाफ शुरू की गई इस दंडात्मक कार्रवाई का समर्थन कॉन्ग्रेस के समर्थकों ने किया। इन्हीं कॉन्ग्रेस समर्थकों में से एक है- सेल्विन थॉमस। उसने राकेश के कमेंट को वायरल करने की कोशिश की और साथ ही दुबई पुलिस से उनके खिलाफ कार्रवाई की माँग की। इसके साथ ही उसने दुबई में भारतीय राजनयिक से उसे देश भेज देने की भी सिफारिश की।

इस्लामियों और हिंदू से घृणा करने वालों ने भी इस मौके को खूब भुनाया।

पूर्व पत्रकार इरेना अकबर, जिन्हें अक्सर भारत में हिंदुओं और दलितों के खिलाफ जहर उगलते हुए पाया जाता है, ने एक ट्वीट करते हुए लोगों से अपील किया कि अगर यूएई बेस्ड संघी द्वारा कोई भी “इस्लामोफोबिक” पोस्ट किया जाता है तो प्लीज गल्फ न्यूज के मजहर फारुकी को टैग करें। जिसके बाद ऐसे व्यक्तियों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की जा सकती है। इरेना का दावा है कि मजहर भारतीय समुदाय विशेष के लिए एक बड़ी संपत्ति है।

यहाँ यह उल्लेखनीय है कि इस्लामी राष्ट्रों के पास ईशनिंदा के खिलाफ सख्त कानून हैं। इसका दुरुपयोग अक्सर दूसरे धर्म के लोगों को अपनी राय व्यक्त पर लिए टारगेट करने के लिए होता है। ये कानून मनमाने हैं और आम तौर पर तुच्छ मुद्दों पर दूसरे धर्म के लोगों को निशाना बनाने और परेशान करने के लिए एक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है।

मस्जिद वाले इलाक़े में पुलिस पर पथराव: कोरोना हॉटस्पॉट सील करने पहुँचे मजिस्ट्रेट और दरोगा को लगी चोट

मेरठ के देहलीगेट थाना स्थित कोरोना वायरस संक्रमण हॉटस्पॉट जली कोठी क्षेत्र में पुलिस जैसे ही सील करने पहुँची, वहाँ स्थानीय लोगों ने पथराव शुरू कर दिया। काफ़ी जबरदस्त पत्थरबाजी हुई। सिटी मजिस्ट्रेट को भी चोटें आईं। असामाजिक तत्वों के इस अचानक हमले से इलाक़े में हड़कंप मच गया। उन्हें खदेड़ने के लिए कई थानों की पुलिस फोर्स को बुलाना पड़ा। सिटी मजिस्ट्रेट को इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। पुलिस ने मुकदमा दायर कर लिया है। कोरोना को रोकने के लिए इस इलाक़े का सील किया जाना ज़रूरी है।

उस क्षेत्र में 3 कोरोना पॉजिटिव मरीज मिले हैं। इसी की रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस ने इलाक़े को सील करने का निर्णय किया। सीलिंग की कार्रवाई के लिए पुलिस बल और थाना प्रभारी के साथ ख़ुद सिटी मजिस्ट्रेट पहुँचे थे। मेरठ में स्थिति बदतर है क्योंकि अब तक यहाँ कोरोना के 47 मामले सामने आ चुके हैं। हालाँकि, स्वास्थ्य विभाग ने बताया है कि 12 लोग इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं, जिन्हें जल्द ही घर वापस भेजा जाएगा। अस्पताल से छुट्टी के बाद भी उन्हें हम क्वारंटाइन में ही रखा जाएगा।

जहाँ हुआ डॉक्टरों पर पथराव, वहाँ 2 कोरोना पॉजिटिव: 6 को पुलिस ने दबोचा, अब तक कुल 13 गिरफ्तार

भागलपुर में शब-ए-बारात पर पुलिस बनी निशाना: कब्रिस्तान के पास इकट्ठा होने से रोका तो पथराव, फायरिंग

इंदौर: कोरोना वायरस संदिग्ध की जाँच करने गई मेडिकल टीम पर ‘मुस्लिम भीड़’ ने किया पथराव, पुलिस पर भी हमला

दैनिक भास्कर के पत्रकार आदित्य तिवारी ने ट्विटर पर इस घटना की सूचना देते हुए बताया कि जिस क्षेत्र में पत्थरबाजी हुई, वहाँ 3 जमाती कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। अब मौके पर पुलिस की तैनाती के बाद शांति है। पुलिस ने क्षेत्र के बुजुर्ग व ‘जिम्मेवार’ लोगों को बुला कर कहा है कि वो असामाजिक तत्वों को पुलिस के हवाले कर दें। जब पत्थरबाजी हुई, तब पुलिस के साथ-साथ वहाँ स्वास्थ्य विभाग की टीम भी पहुँची थी, जो मरीजों को लेने के लिए वहाँ गई थी। भीड़ ने नारेबाजी भी की। महाराष्ट्र से 24 जमातियों के मेरठ आने की ख़बर है।

दरोगा को भी ईंट लगने की सूचना है, लेकिन वो घायल नहीं हुए। मेरठ में पुलिस ने 11 हॉटस्पॉट चिह्नित किए हैं, जिन्हें सील किया जाना है। ये 11 कोरोना हॉटस्पॉट 9 थानों के अंतर्गत आए हैं। इनमें से 3 मस्जिद वाले इलाक़े हैं। इनमें से एक जली कोठी वाला इलाक़ा भी है, जहाँ की दरी वाली मस्जिद में 3 जमाती रुके हुए थे। पथराव की घटना शनिवार (अप्रैल 11, 2020) की सुबह हुई। बिहार के मधुबनी में भी मुस्लिमों के प्रभाव वाले इलाक़े में पुलिस पर पत्थरबाजी हुई थी। इंदौर और भोपाल में भी ऐसे ही इलाक़े में स्वाथ्यकर्मियों और पुलिस के जवानों पर पथराव हुआ था