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‘सेक्युलर’ केजरीवाल: कोरोना बुलेटिन से हटा दिया ‘मरकज़’ वाला कॉलम, DMC के सामने घुटने टेके

कोरोना वायरस संक्रमण पर दिल्ली सरकार रोज अपडेट देती है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के रोजाना प्रेस कॉन्फ्रेंस के अलावा यह होता है। तबलीगी जमात के निजामुद्दीन स्थित मरकज से संक्रमण के मामले सामने आने के बाद से दिल्ली सरकार रोज बताया करती थी कि संक्रमितों में कितने जमात से जुड़े हैं। लेकिन अब उसने ऐसा करना बंद कर दिया है।

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग (DMC) की माँगों के आगे झुकते हुए राज्य सरकार ने डेली हेल्थ बुलेटिन से तबलीगी जमात का नाम हटा दिया है। अब जमाती ‘स्पेशल ऑपरेशन्स’ के अंतर्गत आते हैं। वैसे यह कोई नई बात नहीं है। ‘सेकुलरिज्म’ के कारण पहले भी समुदाय विशेष को ‘समुदाय विशेष’ ही कहा जाता रहा है।

दिल्ली सरकार ने बताया है कि ‘स्पेशल ऑपरेशन्स’ के तहत केवल मरकज ही नहीं, कई और भी क्षेत्र हैं। लिहाजा तबलीगी जमात या मरकज़ जैसे शब्दों का प्रयोग अब नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री कार्यालय ने शनिवार (अप्रैल 11, 2020) को जो अपडेट्स जारी किए, उसमें बताया गया कि दिल्ली में फिलहाल कोरोना के 1069 मामले हैं। इनमें से 712 ‘स्पेशल ऑपरेशन्स’ के तहत आते हैं। यानी, दिल्ली के कुल मामलों में से 66% (दो तिहाई) जमाती ही हैं। 27 लोग इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं, वहीं 19 लोगों की मौत हुई है। गुरुवार को जो बुलेटिन जारी किया गया था उसमें मरकज़ का नाम है।

डीएमसी के अध्यक्ष ज़फरुल इस्लाम ख़ान ने केजरीवाल की सरकार से माँग की थी कि डेली बुलेटिन में ‘मरकज़ से संबंधित’ वाले कॉलम को हटा दिया जाए। उनके पत्र के बाद दिल्ली सरकार ने इसे बदल दिया। इस्लाम ने अपने पत्र में लिखा था:

“कोरोना वायरस पर दिल्ली सरकार के डेली बुलेटिन में ‘मरकज़ रिलेटेड’ वाला कॉलम इस्लामोफोबिया को बढ़ावा देने वाला है। ऐसा बेहूदा वर्गीकरण गोदी मीडिया और हिंदुत्ववादी ताकतों के आगे सरेंडर करने के सामान होगा। इसके बाद देश भर में मु###नों पर हमलों की वारदातों में वृद्धि आ जाएगी। नार्थ-ईस्ट दिल्ली के हरेवली गाँव में एक मुस्लिम लड़के की लिंचिंग कर दी गई। कहीं-कहीं मु###नों का बॉयकॉट किया जा रहा। इसे बदल दिया जाए।”

साथ ही ख़ान ने दिल्ली सरकार को ‘वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन’ की उस सलाह की याद दिलाई, जिसमें दुनिया भर के देशों को कोरोना का नाम किसी मजहब या संप्रदाय से न जोड़ने की बात कही गई है। बता दें कि तबलीगी जमात के लगभग 2500 लोग दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज़ से निकाले गए थे। मरकज़ के कार्यक्रमों में इसके समर्थकों को सलाह दी गई थी कि वे मेडिकल सलाह न मानें और अल्लाह पर भरोसा रखें।

5 ‘मजहबी’ इलाक़े और कोरोना के 5 हॉटस्पॉट्स: जानिए कैसे जमातियों ने मचाई तबाही

देश भर में कोरोना वायरस के कई हॉटस्पॉट हैं। इनमें यूपी और दिल्ली से लेकर राजस्थान और बिहार तक के इलाक़े शामिल हैं। यूपी और दिल्ली में तो पुलिस ने ऐसे हॉटस्पॉट्स को चिह्नित कर के इलाक़े को सील करने की कवायद शुरू कर दी है। ये भी देखा गया है कि जहाँ पूरा क्षेत्र सील किया गया, वहाँ कोरोना वायरस के मामलों में कमी आई।

दिल्ली में हाल ही में चाँदनी महल एरिया को सील किया गया, जहाँ की मस्जिदों से निकले 52 जमाती कोरोना पॉजिटिव पाए गए। राजधानी में अब तक 30 ऐसे इलाक़ों को सील किया जा चुका है। दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज़ मस्जिद वाला एरिया सिर्फ़ राजधानी ही नहीं बल्कि पूरे देश में कोरोना वायरस का हॉटस्पॉट बना।

यहाँ हुए मजहबी कार्यक्रमों में 2500 लोगों ने शिरकत की, जहाँ लोगों को डॉक्टरों की सलाह न मानने को कहा गया। इस मस्जिद से जितने लोगों को निकाला गया, उनमें से 712 संक्रमित निकले। अब ये लोग जिन-जिन के संपर्क में आए होंगे, उन्हें भी पुलिस क्वारंटाइन करने में लगी है।

चाँदनी महल की 13 मस्जिदों से निकले 52 कोरोना+ जमाती: पूरा इलाक़ा सील, 3 की मौत

मास्टर अब्दुल रहमान… इसलिए जयपुर में कोरोना संक्रमण पर बेअसर है ‘भीलवाड़ा मॉडल’

जाँच में पता चला है कि 50 लोगों ने अपना फ़र्ज़ी पता दे रखा था, जबकि कइयों ने फोन बंद कर लिए हैं। यहाँ के लोग देश के अलग-अलग राज्यों में गए, जहाँ कोरोना के मामलों में भारी बढ़ोतरी होनी शुरू हो गई।

जयपुर में भी कोरोना वायरस के मामलों की संख्या 250 पार होने को है। यहाँ का रामगंज कोरोना के हॉटस्पॉट में शामिल है, जहाँ स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला कर के उन्हें खदेड़ दिया गया था। आशा कर्मियों के साथ भी दुर्व्यवहार किया गया था। मेडिकल स्क्रीनिंग के लिए गई टीम को भी ग़लत बताया गया।

जयपुर में जितने मामले आए हैं, उसके आधे लगभग रामगंज से ही हैं, जहाँ पुलिस ने कर्फ्यू लगा दिया है। यहाँ से 6 अप्रैल को 250 ,ऐसे लोगों को क्वारंटाइन किया गया, जो कोरोना पॉजिटिव लोगों के संपर्क में आए थे। बताया गया कि मरकज़ से आए एक व्यक्ति ने और जमात के लोगों ने यहाँ कोरोना फैलाया। रहमानी मस्जिद और मस्जिद एरिया में सैकड़ों लोग रुके हुए थे।

इसी तरह राजस्थान के जोधपुर में नागौरी गेट कोरोना का हॉटस्पॉट बना। यहाँ 22 वर्षीय नगमा नामक महिला कोरोना वायरस की पहली संक्रमित थी, जिसके बाद ये पूरे इलाक़े में फ़ैल गया। यहाँ सघन बसावट और ज्यादा जनसँख्या होने के कारण न तो ‘सोशल डिस्टन्सिंग’ की अपील काम आई और न ही पुलिस की तैनाती।

आलम ये है कि जोधपुर में अब तक कोरोना के 43 मामले सामने आए हैं और सभी इसी इलाक़े के हैं। यहाँ 36 हज़ार लोगों की स्क्रीनिंग हुई। एक अब्दुल हामिद तो छोटे से घर में अपने 30 सदस्यीय परिवार के साथ रह रहा था। स्थिति ये है कि उस परिवार के 9 लोग फ़िलहाल कोरोना के शिकार हैं। ऐसे कई घर यहाँ पर हैं।

जोधपुर के नागौरी गेट को लेकर ‘दैनिक भास्कर’ के स्थानीय संस्करण में छपी ख़बर

इंदौर के टाटपट्टी बाखल में मेडिकल टेस्ट के लिए पहुँचे स्वास्थ्यकर्मियों पर हमला कर दिया गया और उन्हें वहाँ से खदेड़ दिया गया। इसके अलगे ही 3 दिनों में वहाँ से कोरोना वायरस के 18 नए मरीज निकले। इनमें से 12 लोग तो एक ही घर में रहते थे।

प्रशासन ने पूरे एरिया को सैनिटाइज करने की व्यवस्था की। यहाँ तक कि जिन लोगों ने डॉक्टरों पर पत्थरबाजी की, उनमें से एक जावेद ख़ान नामक व्यक्ति कोरोना पीड़ित पाया गया। इंदौर में कोरोना वायरस के संक्रमितों की संख्या 300 पार हो गई है। मध्य प्रदेश में जितने लोगों की मौत हुई है, उनमें से 72% इंदौर के हैं। बाखल की तरह खजराना से भी डॉक्टरों को लौटा दिया गया।

बिहार के सीवान में कोरोना वायरस के अब तक 29 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 23 रघुनाथपुर के ही हैं। यहाँ ओमान से लौटे एक व्यक्ति ने पार्टियाँ की और क्रिकेट खेलता रहा, जिसके बाद उसके ही परिवार के 14 सदस्य संक्रमित पाए गए।

बिहार में कोरोना वायरस के 64 मामलों में से लगभग आधे सीवान के ही हैं। लॉकडाउन की घोषणा के बावजूद यहाँ के मैरवा स्थित एक मस्जिद में 200 लोग नमाज पढ़ने पहुँच गए थे। पुलिस ने उन्हें समझा-बुझा कर वापस लिया।

अगर ऊपर के सभी हॉटस्पॉट्स पर नज़र डालें तो हमें पता चलता है कि हर जगह या तो समुदाय विशेष बहुल इलाक़ों में ये वायरस तेज़ी से फैला और इसने आसपास के क्षेत्रों को भी अपने चपेट में ले लिया, या फिर पहला मरीज कोई मजहब विशेष से ही निकला। चाहे वो जोधपुर की युवती हो या सीवान का युवक। स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले भी मजहबी के प्रभाव वाले क्षेत्रों में ही हुए, पुलिसकर्मियों को भी ऐसे ही इलाक़ों में निशाना बनाया गया। मस्जिदों में जुटे लोगों को समझाने-बुझाने में प्रशासन को ताक़त झोंकनी पड़ी।

पंजाब: गुरुद्वारे से दबोचे गए 7 निहंग, कर्फ्यू पास मॉंगने पर ASI का काट दिया था हाथ

पंजाब के पटियाला में रविवार की सुबह पुलिस पर हमला किया गया था। हमले में एक एएसआई का हाथ कट कर अलग हो गया तो कई अन्य जख्मी हो गए। इस मामले में सात निहंग सिख (परंपरागत हथियार रखने वाले और नीली लंबी कमीज पहनने वाले सिख) गिरफ्तार किए गए हैं। इन्हें बलबेरा गाँव के गुरुद्वारे से दबोचा गया।

इनमें से एक पुलिस फायरिंग में घायल हो गया और उसे अस्पताल ले जाया गया है। यह पूरा ऑपरेशन पटियाला जोन के आईजी जतिंदर सिंह औलख की देखरेख में चला। पुलिस पर हमले के बाद ये लोग गुरुद्वारे में छिप गए थे। अंदर से गोलीबारी भी की। बाद में कमांडो टीम ने गुरुद्वारे से 7 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया।

पंजाब के स्पेशल चीफ सेक्रेटरी केबीएस सिद्धू ने बताया कि घायल एएसआई हरजीत सिंह की प्लास्टिक सर्जरी शुरू कर दी गई है।

बता दें कि रविवार (12 अप्रैल, 2020) सुबह निहंग सिखों की एक भीड़ ने पुलिस की टीम पर हमला बोल दिया था। हमले में एक एएसआई का हाथ कलाई से कट गया। वहीं कई अन्य पुलिसकर्मी भी घायल हो गए। घायल पुलिसकर्मियों को पटियाला के अस्पताल में ले जाया गया, जबकि जिस एएसआई का हाथ कटा है उनके इलाज पीजीआई चंडीगढ़ में चल रहा है।

पटियाला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मनदीप सिंह सिद्धू ने बताया था कि निहंग सिखों का एक समूह गाड़ी में सवार होकर सब्जी मंडी पहुँचा। जब उनसे कर्फ्यू पास दिखाने के लिए कहा गया तो उन्होंने सब्जी मंडी स्टाफ के साथ झगड़ा करते हुए बैरिकेड तोड़ गाड़ी भगाने की कोशिश की। इसके बाद बाद पुलिस ने इनकी गाड़ी को घेर लिया। इससे गुस्साए निहंग ने तलवार लेकर पुलिस पर हमला कर उन्हें जख्मी कर दिया और मौके से फरार हो गए।

पटियाला एसएसपी मनदीप सिंह सिद्धू के मुताबिक हमले के बाद ये लोग वहाँ से भाग गए। पुलिस टीम ने जब इन लोगों का पीछा किया तो ये लोग बलबेरा के पास एक गुरुद्वारे में छिप गए। गुरुद्वारे से आरोपितों ने कथित तौर पर फायरिंग भी की और पुलिसवालों को वहाँ से चले जाने के लिए कहा। इस दौरान आरोपितों ने पुलिस वालों को गालियाँ और धमकी भी दी।

विदेशी मौलवियों पर योगी सख्त: क्वारंटाइन ख़त्म होते ही जेल भेजे गए इंडोनेशिया और थाइलैंड के जमाती

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार न सिर्फ़ कोरोना वायरस से पीड़ित मरीजों के इलाज की समुचित व्यवस्था कर रही है, बल्कि क़ानून तोड़ने वाले जमातियों पर भी कार्रवाई कर रही है। यूपी पुलिस ने बहराइच में ऐसे 17 जमातियों को जेल की हवा खाने भेज दिया है, जिन्होंने क़ानून तोड़ा। इन जमातियों को क्वारंटाइन ख़त्म होने के बाद जेल भेजा गया है।

इन जमातियों को वीजा और पासपोर्ट नियमों के उल्लंघन के मामले में गिरफ़्तार किया गया है। सभी 17 आरोपित इंडोनेशिया और थाइलैंड के नागरिक हैं। विदेशी जमातियों पर वीजा नियमों के उल्लंघन का आरोप तय किया गया। बता दें कि उत्तर प्रदेश के कई अस्पतालों में जमातियों का इलाज चल रहा है। इस दौरान गाजियाबाद में इनके द्वारा नर्सों के साथ बदसलूकी करने की ख़बर आई थी। तब यूपीए सीएम योगी आदित्यनाथ ने इनके ख़िलाफ़ एनएसए लगाने की बात कही थी।

बहराइच पुलिस ने शहर के ताज और कुरैश मस्जिद से 17 विदेशियों समेत 21 तबलीगी जमातियों को 31 मार्च को हिरासत में लिया था। क्वारंटाइन में रखने के बाद इन सबका मेडिकल टेस्ट किया गया, जिसमें इनकी रिपोर्ट नेगेटिव आई। क्वारंटाइन की अवधि ख़त्म होते ही इन्हें जेल भेज दिया गया।

इन सभी पर धारा 269, 270, 271, 188, महामारी अधिनियम (1897) की धारा 03, पासपोर्ट अधिनियम (1967) की धारा 12(3), विदेशियों विषयक अधिनियम 1946 की धारा 14(b), 14(c) के अलावा आपदा प्रबंधन अधिनियम (2005) की धारा 56 के तहत मामला दर्ज किया गया है। उत्तर प्रदेश में कोरोना वायरस के अब तक 452 मामले सामने आए हैं, जिनमें से 5 की मौत और 45 के ठीक होने के बाद 402 सक्रिय मामले बचे हुए हैं। इनमें से बड़ी संख्या में जमाती हैं।

तलवार से काटे ASI के हाथ, लॉकडाउन में मार्केट जाने से रोका तो भड़के निहंग: देखें Video

पंजाब के पटियाला में निहंग सिखों (परंपरागत हथियार रखने वाले और नीली लंबी कमीज पहनने वाले सिख) ने पुलिस पर हमला कर दिया। घटना रविवार (12 अप्रैल, 2020) सुबह की है। इस हमले में एक एएसआई का हाथ कलाई से कट गया है। वहीं कई अन्य पुलिसकर्मी भी घायल हैं। घायल सभी पुलिसकर्मियों को पटियाला के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जिस एएसआई का हाथ कटा है उन्हें पीजीआई चंडीगढ़ रेफर कर दिया गया है।

पंजाब के डीजीपी दिनकर गुप्ता ने बताया कि हमले में ASI हरजीत सिंह का हाथ कट गया। इसके बाद उन्हें चंडीगढ़ पीजीआई में एडमिट कराया गया है। हमले में कई अन्य पुलिसकर्मी और मंडी बोर्ड के अधिकारी घायल हुए हैं। पटियाला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मनदीप सिंह सिद्धू ने बताया कि निहंग सिखों का एक समूह गाड़ी में सवार होकर सब्जी मंडी पहुँचा था। जब उनसे कर्फ्यू पास दिखाने के लिए कहा गया तो उन्होंने सब्जी मंडी के स्टाफ के साथ झगड़ा करते हुए पुलिस की नाकाबंदी पर लगा बैरिकेड तोड़ गाड़ी भगाने की कोशिश की। इसके बाद बाद पुलिस ने इनकी गाड़ी को घेर लिया। इससे गुस्साए निहंग ने तलवार लेकर पुलिस पर हमला कर इन्हें जख्मी कर दिया और मौके से फरार हो गए।

सिद्धू ने कहा, “तलवार से एक सहायक उप निरीक्षक (ASI) का हाथ काट डाला गया। पटियाला सदर थाने के प्रभारी की कोहनी में चोट आई है, जबकि एक अन्य पुलिस अधिकारी की बाँह में भी इस हमले में चोट आई है। ASI को राजेंद्र अस्पताल ले जाया गया जहाँ से उन्हें पीजीआईएम चंडीगढ़ के लिए रेफर कर दिया गया।”

वारदात के बाद निहंग सिंह गुरुद्वारे में छिप गए हैं तो वहीं पुलिस ने भी पूरे क्षेत्र को घेर रखा है। लगातार पुलिस आरोपितों को आत्मसमर्पण के लिए लाउडस्पीकर से कह रही है। वहीं गुरुद्वारे के भीतर से निहंग सिख भी लाउडस्पीकर से प्रशासन पर जुबानी हमला कर रहे हैं। वो गालियाँ देते हुए धमकियाँ दे रहे हैं। फिलहाल वहाँ का माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। एडीजीपी राकेश चंद्र और कमांडो फोर्स भी मौके पर पहुँच चुकी है। डीजीपी दिनकर गुप्ता ने कहा कि आरोपितों को जल्द ही गिरफ्तार कर कार्रवाई की जाएगी। यह वारदात तब हुई जब कोरोना वायरस के प्रकोप के मद्देनजर राज्य में पाबंदियाँ लागू हैं।

जमातियों ने नहीं फैलाया कोरोना, उन्हें बदनाम मत करो: CAA विरोधी ‘वैज्ञानिकों’ का नया दावा

बुधवार (अप्रैल 8, 2020) को तथाकथित भारतीय वैज्ञानिकों के एक समूह ने एक बयान दिया। इस बयान में उन्होंने भारत में कोरोना वायरस के संक्रमण के लिए तबलीगी जमात को जिम्मेदार बताए जाने की आलोचना करते हुए उसे क्लीनचिट दे दी। अगर आप सोच रहे हैं कि इस निष्कर्ष के पीछे उन्होंने कोई अध्ययन किया या रिसर्च किया तो आप ग़लत हैं। ये वो समूह है जो कुछ भी बक देता है और मीडिया इसे ‘वैज्ञानिकों का बयान’ कह कर ऐसे चलाता है, जैसे इन्हें सालों से नोबेल पुरस्कार मिलता आ रहा हो।

ये तथाकथित वैज्ञानिक ध्रुव राठी की तरह हैं। यूट्यूबर ध्रुव राठी ‘फिलीपींस को आज़ादी कैसे मिली’ से लेकर ‘कोरोना वायरस कैसे काम करता है’ तक, हर मामलों का विशेषज्ञ माना जाता है। तभी उसकी तुलना ‘राजा बाबू’ फिल्म के गोविंदा से होती है। ऐसे ही, इन वैज्ञानिकों ने कहा है कि उनके पास कोई ऐसा डेटा नहीं है, जिससे ये साबित हो कि तबलीगी जमात वालों ने भारत में कोरोना फैलाया है। धूर्तों का ये समूह इस तथ्य से आँख मूँद लेता है कि भारत में कोरोना वायरस के मामलों में एक तिहाई तो जमातियों के कारण ही आए हैं। दिल्ली में तो दो तिहाई मामलों के लिए जमाती ही जिम्मेदार हैं।

धूर्त समूह इसके बाद पंजाब के एक सिख गुरु की कोरोना से हुई मौत की बात करता है। उनसे ये पूछा जाना चाहिए कि सिख गुरु के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद हज़ारों लोगों को क्वारंटाइन किया गया, उनमें से कितनों ने मेडिकल टेस्ट कराने से इनकार किया? उनमें से कितने अल्लाह के नाम पर मेडिकल सलाहों को धता बता रहे थे। कितने गंदे रहन-सहन को फॉलो कर रहे थे। कितनों ने पुलिस पर पत्थरबाजी की? कितनों ने नर्सों के साथ बदसलूकी की? कितनों ने हॉस्पिटल में ही मल-मूत्र त्याग दिया? कितनों ने हॉस्पिटल में ‘सोशल डिस्टेंसिंग’ को धता बताते हुए अस्पताल में ही नमाज पढ़ा? कितनों ने खाने-पीने को लेकर कर्मचारियों को तबाह किया? कितनों ने इधर-उधर जान-बूझकर थूका? जमातियों ने ये सब किया।

ये धूर्त ऐसी ही तुलना कर के अपनी बात रखते हैं। उदाहरण के लिए- “जमातियों के कारण हज़ारों कोरोना के नए मरीज पैदा हुए लेकिन फलाँ हिन्दू साधु ने 1720 में एक मुस्लिम को थप्पड़ मारा था, उसका क्या?‘ ऐसे ही इन ‘वैज्ञानिकों’ ने मीडिया और नेताओं पर आरोप लगाया है कि वो जमातियों को बदनाम कर रहे हैं। अगर स्वास्थ्य मंत्रालय के ही आँकड़ों की बात करें तो 4 अप्रैल के बाद से आए कुल मामलों में 30% जमात से जुड़े हैं जबकि धूर्त ‘वैज्ञानिकों’ ने बिना कोई आँकड़ा दिए कुछ भी बक दिया। इन वैज्ञानिकों में बायोलॉजी या मेडिकल क्षेत्र का कोई भी विशेषज्ञ शामिल नहीं है। अधिकतर पत्रकार हैं और ‘सोशल साइंटिस्ट’ हैं।

आईएसआरसी (इंडियन साइंटिस्ट्स रिस्पांस टू कोविड-19) नामक ग्रुप रितिका सूद ने बनाया है, जिसमें ‘वैज्ञानिकों’ के नाम पर फालतू लोगों को ठूँस कर एक प्रकार का इम्प्रेशन बनाने की कोशिश की गई है। इनमें से कई ऐसे ‘वैज्ञानिक’ हैं, जिन्होंने सीएए को हटाने की माँग की थी। अब सीएए को ग़लत साबित करने के लिए उन्होंने कौन से केमिकल रिएक्शन का प्रयोग किया था, ये वो ही जानें। उनका कहना था कि ‘मुस्लिमों को नज़रअंदाज़ करना प्लुरलिस्टिक भारत के लिए सही नहीं है।’ सार ये कि इन कथित वैज्ञानिकों को हर चीज में दिलचस्पी है, सिवाए ‘विज्ञान’ के।

सारे गंदे काम करते हैं जमाती, साफ़-सफाई का नहीं रखते ध्यान: आंध्र प्रदेश के डिप्टी CM

आंध्र प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री के. नारायण स्वामी ने शनिवार (अप्रैल 11, 2020) को तबलीगी जमात के सदस्यों पर भारत में कोरोना वायरस फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जमातियों ने खुलेआम इधर-उधर घूम कर कोविड-19 का संक्रमण पूरे देश में फैलाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जमाती न तो स्वास्थ्यकर्मियों के साथ सहयोग कर रहे हैं और न ही पुलिस-प्रशासन की बात मान रहे हैं। तिरुपति में उन्होंने ये बयान दिया। हालाँकि, हंगामा होने पर उन्होंने माफ़ी माँग ली।

मीडिया से बातचीत करते हुए स्वामी ने जमातियों के न सिर्फ़ खानपान पर सवाल खड़े किए, बल्कि उनकी दिनचर्या और रहन-सहन की भी आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया में सर्कुलेट हो रहे वीडियोज का हवाला देते हुए ये ऑय बातें कही। बता दें कि दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज़ में जमाती एक-दूसरे का जूठा खाते हैं। उन्हें यह भी सिखाया जाता है कि मल-मूत्र का त्याग कैसे करना है। सेक्स कैसे करना है। वहाँ एक ही पानी में सभी हाथ-मुँह धोते हैं और 6-7 लोग बैठ कर एक ही थाली में खाते हैं। इन्हीं कारणों से जमातियों में कोरोना तेज़ी से फैला।

के. नारायण स्वामी ने दावा किया कि आंध्र प्रदेश में 25-26 से ज्यादा कोरोना वायरस के मरीज नहीं होते, लेकिन जमातियों ने यहाँ आकर सब गुड़-गोबर कर दिया। राज्य में फ़िलहाल कोरोना वायरस के 405 मामले हैं, जिनमें से 6 की मौत हो चुकी है। अब तक मात्र 10 लोग ही इलाज के बाद ठीक हो सके हैं। स्वामी ने तबलीगी जमात और आंध्र प्रदेश में कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते मामलों को लेकर कहा:

“मेरे मन में मुस्लिम अल्पसंख्यकों के ख़िलाफ़ कोई दुर्भावना नहीं है। वो अल्लाह से दुआ कर सकते हैं। अल्लाह दयालु है। लेकिन, वे सारे गंदे काम करते हैं। खानपान में वे शुद्धता का पालन नहीं करते। साफ़-सफाई का भी ध्यान नहीं रखते। उन्होंने अपनी आदतों के कारण आज कोरोना से उपजी आपदा को यहाँ लाकर खड़ा कर दिया है। उन्होंने गलियों में और दुकानों में घूम कर इस रोग को फैलाया। मैं उन सबसे आग्रह करता हूँ कि आप डॉक्टरों का सहयोग कीजिए और अपना इलाज करवा कर ठीक होइए। दूसरों को आपसे संक्रमण न हो, इसके लिए ऐसा करना आवश्यक है।”

वाईएसआर कॉन्ग्रेस अध्यक्ष और मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी द्वारा तबलीगी जमात का बचाव किए जाने के बाद स्वामी का यह बयान सामने आया है। रेड्डी का कहना था कि देश में कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के लिए किसी एक मजहबी कार्यक्रम या किसी एक संगठन को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने सद्गुरु जग्गी वासुदेव, श्री श्री रविशंकर और माता अमृतानंदमयी के कार्यक्रमों की बात करते हुए कहा कि जो मरकज़ में हुआ, वो इन तीनों संतों के कारण हुए जुटाव में भी हो सकता था।

हालाँकि, शनिवार को ही बाद में एक ट्वीट कर नारायण स्वामी ने अपना बयान वापस ले लिया। साथ ही कहा कि अगर किसी को उनके बयान से ठेस पहुँची है तो वो इसके लिए माफी माँगते हैं। कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री के कहने का बाद उन्होंने ऐसा किया। जगन ने कहा था कि कोरोना के ख़िलाफ़ लड़ाई में मजहब और जाति को लेकर कोई बहस नहीं होनी चाहिए और सबको मिलकर इससे लड़ना चाहिए।

कोरोना संदिग्ध की जाँच करने पहुँची मेडिकल टीम को बनाया बंधक, छुड़ाने आई पुलिस पर पथराव

कोरोना वायरस संक्रमण पर काबू पाने में लगी मेडिकल टीम के साथ बदसलूकी, मारपीट और पथराव की खबरें आए दिन सामने आ रही है। अब कश्मीर से ऐसी ही खबर आई है। शनिवार (अप्रैल 11, 2020) को मध्य कश्मीर के बडगाम जिले के वाथुरा गाँव के शेखपुरा इलाके में एक मेडिकल टीम को भीड़ ने बंधक बना लिया।

जानकारी के मुताबिक, उप-जिला अस्पताल (SDH) चदूरा की मेडिकल टीम एक कोरोना संदिग्ध की स्क्रीनिंग के लिए वाथुरा गाँव गई थी। लेकिन वहाँ के स्थानीय लोगों ने टीम को घर के अंदर बंधक बना लिया। SDH चदूरा के एक अधिकारी ने बताया कि जब मेडिकल टीम ने ट्रेवल हिस्ट्री को लेकर पूछताछ की तो संदिग्ध के परिवार के सदस्यों ने उन्हें घर में ही बंधक बना लिया।

जम्मू-कश्मीर पुलिस के अधिकारी ने कहा कि गाँव के एक व्यक्ति को स्क्रीनिंग के लिए ले जाया जाना था, लेकिन उसके परिवार के सदस्यों ने मना कर दिया। मेडिकल टीम को घर के अंदर बंधक बना लिया। उन्होंने कहा कि जैसे ही घटना के बारे में जानकारी मिली, एक पुलिस टीम को गाँव में भेजा गया। लेकिन उन पर पत्थरों से हमला किया गया। पुलिस दल के गाँव में पहुँचते ही ग्रामीणों ने उन पर पथराव करना शुरू कर दिया।

हालाँकि, मेडिकल टीम को पुलिस ने सुरक्षित बचा लिया। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों के हमले में तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए। मेडिकल टीम को बंधक बनाए जाने वालों के खिलाफ आईपीसी की धारा 188, 269 और 353 के तहत FIR दर्ज की गई है। फिलहाल मामले की जाँच की जा रही है।

बता दें कि जम्मू-कश्मीर में अब तक कुल 207 लोगों को कोरोना पॉजिटिव पाया गया है। इनमें से 6 मरीज ठीक हो चुके हैं, जबकि 4 की मौत हो चुकी है।

उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले हरियाणा के इंदिरा कॉलोनी में आशा वर्करों की एक टीम पुलिसकर्मियों के साथ सर्वे के लिए गई थी। वहाँ भीड़ ने पुलिस का कॉलर पकड़ लिया और आशा वर्करों व पुलिसकर्मियों की टीम पर हमला किया।

इसी तरह यूपी के बरेली में जमातियों की सूचना मिलने पर पहुँची पुलिस लगभग 200 लोगों की भीड़ ने हमला कर दिया। पुलिस चौकी को भी फूँकने का प्रयास किया। वहीं मध्य प्रदेश के इंदौर में विशेष समुदाय की भीड़ ने पुलिस पर धारदार हथियारों से हमला बोला और कई पुलिसकर्मियों को घायल कर दिया था।

अब्दुल मजीद को आधी रात फाँसी: जानिए, हाउस नंबर 677 में कैसे गिरी थी 20 लाशें

बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान की हत्या में शामिल अब्दुल मजीद को फाँसी की सज़ा दे दी गई है। उसे ढाका सेंट्रल जेल में फाँसी दी गई। इंस्पेक्टर जनरल (जेल) ब्रिगेडियर जनरल एकेएम मुस्तफा कमाल पाशा ने बताया कि उसे शनिवार रात 12:10 पर लटकाया गया। उन्होंने बताया कि इस सज़ा-ए-मौत के प्रत्यक्षदर्शी के रूप में एक मजिस्ट्रेट और एक पुलिस अधिकारी उपस्थित थे। ढाका सेंट्रल जेल को केरानीगंज में स्थानांतरित किए जाने के बाद यह पहली फाँसी है।

हालाँकि, आधी रात को ही कई लोग कोरोना वायरस के कारण लगे प्रतिबंधों की अवहेलना करते हुए जेल के सामने भीड़ बनाकर इकट्ठे हो गए। अब्दुल मजीद को फाँसी से पहले उसकी पत्नी को उससे मिलवाया गया, क्योंकि यही उसकी अंतिम इच्छा थी। उसके मृत शरीर को दफनाने के लिए भोला ले जाया जाएगा। हालाँकि, छात्र लीग के नेता सहित वहाँ के दो सांसदों ने कहा है कि वे अपने एरिया में ऐसा नहीं होने देंगे। क़ानून मंत्री अनिसुल हक़ ने फाँसी की सज़ा के बाद कहा:

“हमने लोगों से वादा किया हुआ है कि हम उस सज़ा के क्रियान्वयन में देरी नहीं करेंगे, जो देश की अदालतों ने दिया है। हम फरार रहे छठे दोषी के मामले में भी ऐसा करने में सफल रहे हैं। जब तक जजमेंट को पूरी तरह अमल में नहीं हो जाता, यह जारी रहेगा।”

बंगबंधु रहमान के 5 अन्य हत्यारे भी हैं जो फ़िलहाल फरार हैं। शुक्रवार को अब्दुल मजीद के परिवार के 5 लोगों ने उससे मुलाक़ात की थी, जिसमें उसकी बीवी शामिल नहीं थी। उसे ढाका से 7 अप्रैल को गिरफ़्तार किया गया था। फ़ौज में सेवा देने के बाद विभिन्न सरकारी पदों पर रहा मजीद 20 वर्षों से फरार चल रहा था। मजीद शेख मुजीबुर रहमान के 12 हत्यारों में शामिल था। वो पाकिस्तान और भारत में डेरा जमाने से पहले लीबिया में छिपा हुआ था।

उसने 20 साल से भारत में होने की बात पूछताछ में स्वीकार की थी। बीते 4 सालों से वह कोलकाता में रह रहा था। शेख मुजीबुर रहमान बांग्लादेश की आज़ादी के प्रमुख शिल्पकारों में से एक थे। उनकी बेटियाँ प्रधानमंत्री शेख हसीना और और शेख रेहाना उस हत्याकांड में बच गई थीं, क्योंकि ये दोनों उस समय विदेश में थीं। शेख हसीना की आवामी लीग ने सत्ता में आते ही हत्यारों को फाँसी दिए जाने की पहल शुरू कर दी थी।

अगर इस हत्याकांड की बात करें तो इसे बांग्लादेश की राजधानी ढाका के धनमंडी स्थित रोड नंबर 32 के हाउस नंबर 677 में 15 अगस्त 1975 को अंजाम दिया गया था। उस घर में एक साथ 20 लाशें गिरी थीं। इस नरसंहार से पहले 1971 में धनमंडी के इस घर को पाकिस्तानी सैनिकों ने घेर रखा था। एक परिवार करीब नौ महीने से घर में बंधक बना हुआ था। किसी भी वक्त उस परिवार के हर सदस्य मौत के घाट उतारे जा सकते थे। लेकिन एक भारतीय कर्नल ने अपने तीन जवानों के साथ मिलकर उस परिवार को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

बंगबंधु के साथ उनके परिवार को बचाने वाले भारतीय कर्नल थे अशोक तारा। लेकिन, 15 अगस्त 1975 को बांग्लादेश की सेना के ही कुछ बागी अफसरों ने बंगबंधु सहित उनके पूरे परिवार को मौत के घाट उतार दिया।अशोक रैना की किताब ‘इनसाइड रॉ’ के मुताबिक आरएन काव ने उस वक्त शेख मुजीब से कहा था कि उनकी हत्या की साजिश को लेकर पुख्ता सूचनाएँ हैं और वे इससे जुड़े विवरण उन्हें भेजेंगे। मार्च 1975 में रॉ के एक शीर्ष अधिकारी ने ढाका पहुॅंच कर शेख मुजीब को इस साजिश में शामिल अधिकारियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। लेकिन, वे फिर भी नहीं माने।

सलील त्रिपाठी ने अपनी किताब ‘द कर्नल हू वुड नॉट रिपेंट’ में बताया है कि बागी अधिकारियों के अपने मिशन पर निकलने के बावजूद शेख मुजीब को अंदाजा तक नहीं था कि उनकी हत्या का मिशन शुरू हो चुका है। बांग्लादेश के सेनाध्यक्ष जनरल शफीउल्ला को सेना की दो बटालियन के बिना किसी आदेश के शेख मुजीब के घर की ओर बढ़ने की सूचना मिली।

उन्होंने शेख मुजीब को फोन मिलाया, लेकिन लाइन व्यस्त थी। बहुत कोशिशों के बाद उनका शेख मुजीब से संपर्क हुआ। शेख मुजीब गुस्से में बोले, “शफीउल्ला तोमार फोर्स आमार बाड़ी अटैक करोछे। तुमि जल्दी फोर्स पठाओ (तुम्हारे फोर्स ने मेरे घर पर हमला किया है, जल्दी सेना भेजो)।” इसी दौरान पीछे से गोलियों की आवाज सुनाई पड़ी और पूरे परिवार का सफाया हो गया।

एंथनी मैस्करेनहास अपनी किताब ‘बांग्लादेश ए लेगसी ऑफ ब्लड’ में इस घटना का जिक्र करते हुए लिखते हैं, “शेख मुजीब को देखते ही मोहिउद्दीन नर्वस हो गया। उसके मुॅंह से केवल इतना ही निकला, सर आपनी आशुन (सर आप आइए)। मुजीब ने चिल्ला कर कहा-क्या चाहते हो? क्या तुम मुझे मारने आए हो? भूल जाओ। पाकिस्तान की सेना ऐसा नहीं कर पाई। तुम किस खेत की मूली हो?”

तभी स्टेनगन लिए मेजर नूर ने प्रवेश किया और मोहिउद्दीन को धक्का देते हुए पूरी स्टेनगन खाली कर दी। मुजीब मुँह के बल गिरे। उनका पसंदीदा पाइप उनके हाथ में था।

‘द कर्नल हू वुड नॉट रिपेंट’ के मुताबिक एक नौकर शेख मुजीब को गोली लगने की खबर दौड़कर उनकी बीवी को देता है। पीछे से सैनिक भी वहॉं आ धमके और गोली चलानी शुरू कर दी। देखते-देखते सारे लोग मारे गए। तभी एक जीप शेख मुजीब के घर के सामने आकर रुकी और उसमें से मेजर फारूक रहमान बाहर निकला। मेजर हुदा ने उसके कान में फुसफुसाकर कहा ‘सब खत्म हो गए।’

कोरोना हॉटस्पॉट में सर्वे कर रही नर्सों से छेड़खानी, कहा- बाहर नहीं जाने देंगे, यहीं हत्या कर देंगे

कानपुर का चमनगंज कोरोना वायरस संक्रमण का हॉटस्पॉट है। इस इलाके में संदिग्धों की जाँच करने गई मेडिकल टीम की नर्सों से छेड़छाड़ करने की घटना सामने आई है। इस मामले में कलीम, अमजद अंसारी, बजी अहमद और सलीम को गिरफ्तार किया गया है। इनके खिलाफ छेड़खानी, अश्लीलता, जान से मारने की धमकी और सरकारी कार्य में बाधा डालने आदि धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।

घटना शनिवार (अप्रैल 11, 2020) दोपहर की है। चमनगंज निवासी ये आरोपित पिछले कई दिनों से नर्सों के साथ छेड़छाड़ कर रहे थे। शनिवार को भी जब मेडिकल टीम वहाँ पर संदिग्धों की जाँच करने पहुँची तो आरोपितों ने नर्सों के साथ अभद्रता की। गाली-गलौज करते हुए उन पर फब्तियाँ कसी, साथ ही अश्लील हरकतें भी की। 

दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर

इतना ही नहीं, जब नर्सों ने इसका विरोध किया तो चारों आरोपितों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। छेड़खानी का विरोध करने पर आरोपितों ने कहा कि चमनगंज से बाहर नहीं निकलने देंगे। यहीं हत्या कर देंगे। इससे सहमी नर्सों ने अपने अधिकारियों और चमनगंज पुलिस को जानकारी दी। सूचना मिलते ही चमनगंज पुलिस मौके पर पहुँची और चारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया।

इस घटना को लेकर मेडिकल स्टाफ में नाराजगी है। स्टाफ का कहना है कि आए दिन मारपीट, गाली-गलौज और अभद्रता से वे परेशान हैं। उन्होंने ऐसे माहौल में सर्वे न करने की चेतावनी दी है। इसके साथ ही उन्होंने सीएमओ से सुरक्षा की माँग भी की है। मेडिकल स्टाफ का कहना है कि उन्हें सुरक्षा मिलेगी तभी वे क्षेत्र में घर-घर जाकर सर्वे कर सकेंगे।

गौरतलब है कि इससे पहले कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के क्वारंटाइन वार्ड में जमातियों द्वारा मेडिकल व पैरामेडिकल स्टॉफ के साथ बदलूकी की खबरें सामने आई थी। इसी तरह बिहार के सहरसा में आइसोलेशन सेंटर में जमातियों ने नर्स के साथ बदतमीजी की, अश्लील फब्तियाँ कसीं, उनकी फोटो खींच वायरल करने की धमकी दी थी।

स्वास्थ्यकर्मियों की टीम जब यूपी की राजधानी लखनऊ के कसाईबाड़ा में जाँच के लिए पहुँची थी तो भी स्थानीय निवासियों ने उन पर हमला बोल दिया था। दस्तावेजों को फाड़ने की कोशिश की थी। पहले तो स्थानीय लोगों ने गाली-गलौज की और फिर इन पर हमला कर दिया।