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मरकज पर चलेगा बुलडोजर, अवैध है 7 मंजिला बिल्डिंग: जमात ने किया गैर-कानूनी निर्माण, टैक्स भी नहीं भरा

भारत में कोरोना संक्रमण के बड़े स्रोत बने राजधानी दिल्ली स्थित निजामुद्दीन इलाके में तबलीगी जमात के मुख्यालय के ‘अच्छे दिन’ आखिरकार अब समाप्त होने जा रहे हैं। दरअसल इस कार्यक्रम के सामने आने के बाद से एक-दो नहीं बल्कि कई ऐसे मामलों से पर्दा उठा है, जिन्हें लेकर अब तक किसी का भी ध्यान इनकी ओर नहीं गया था।

गृह मंत्रालय ने ऐसे जमातियों, जिन्होंने हाल ही में भारत की यात्रा की है और वीजा नियमों व शर्तों की अवहेलना की है, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उनके वीजा निरस्त करने के साथ ही उन्हें ब्लैकलिस्ट किया। इसके बाद सबसे बड़ी गाज अब इस मरकज के मूल, यानी इस बिल्डिंग पर गिरने वाली है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, शासन ने अपनी जाँच में पाया है कि दक्षिणी दिल्ली में निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के मरकज का निर्माण नियमों को ताक पर रखकर किया गया है। यही नहीं, जिस जमीन पर इस मरकज का निर्माण हुआ है, उसके मालिकाना हक से जुड़े कागजात भी दक्षिण दिल्ली नगर निगम (South Delhi Municipal Corporation) के पास नहीं हैं। दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की स्टैंडिंग कमिटी के डिप्टी चेयरमैन राजपाल सिंह ने बताया कि बिल्डिंग को सील कर दिया गया है। अब इसे ढहाने की कार्रवाई के लिए फाइल तैयार की जा रही है। 

बताया जा रहा है कि स्थानीय लोगों ने इसके अवैध निर्माण की बार-बार शिकायत भी की, लेकिन न तो निगम ने कोई कार्रवाई की और न ही पुलिस या अन्य किसी विभाग ने इस पर ध्यान दिया। ज्ञात हो कि भाजपा नेता प्रवेश वर्मा ने भी अक्सर दिल्ली में मौजूद अवैध मस्जिद, कब्रिस्तान आदि के मामलों को उठाया है। उन्होंने बताया था कि 54 सरकारी जमीनों पर मस्जिदों का अवैध कब्जा है।

कागज और वैधता के सबूत माँगने पर मुशर्रफ (जो कि इंतजामिया कमिटी, मरकज के सदस्य हैं) का कहना है कि मरकज का निर्माण नियमानुसार किया गया है, और उनके पास इसके सभी कागज भी हैं। लेकिन 21 दिन के लॉकडाउन के कारण उन्हें कागज ढूँढने में परेशानी आ रही है। मुशर्रफ का कहना है कि हालात सामान्य होते ही वो दस्तावेज (कागज) पेश कर देंगे।

तबलीगी मस्जिद के इस मामले के प्रकाश में आने के बाद अब नया सवाल यह है कि ऐसे और भी कितनी मजहबी जगह हो सकती हैं, जिनके निर्माण से लेकर उनमें होने वाली गतिविधियाँ भी संदेह के घेरे में आती हैं।

जागरण की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली स्थित मरकज की इमारत को नियमों का उल्लंघन कर बनाया गया था। इस मामले में दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (SDMC) कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि मरकज की इमारत दो प्लॉट जोड़कर बनाई गई है, जबकि यह कुल 7 मंजिला इमारत है। इस इमारत के निर्माण के लिए मात्र दो फ्लोर का नक्शा ही पारित है, इसके बावजूद इसे सात मंजिला बनाया गया है। यही नहीं, मरकज की इस इमारत का कभी हाउस टैक्स और प्रॉपर्टी टैक्स भी नहीं भरा गया। बताया जा रहा है कि इस हिसाब से मरकज की बिल्डिंग पर लाखों रुपए का हाउस टैक्स बकाया निकल सकता है।

दक्षिणी दिल्ली नगर निगम (SDMC) के अनुसार, मरकज से पहले इस जगह सिर्फ एक मस्जिद थी और वर्ष 1992 में मदरसे को तोड़कर इस जगह पर एक मदरसे का निर्माण किया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि धीरे-धीरे इस जगह पर तकरीबन 70% हिस्से का अवैध निर्माण कर मरकज की इमारत तैयार की गई। घनी आबादी में बनी इस बिल्डिंग में आग से सुरक्षा के भी कोई इंतजाम नहीं है और न ही कभी अग्निशमन विभाग से एनओसी ली गई है।

इन विवादों के बीच जानकारी मिल रही है कि दक्षिणी दिल्ली नगर निगम इस इमारत से संबंधित दस्तावेजों को खंगाल रहा है और अब इस इमारत के अवैध निर्माण को तोड़ने की तमाम कागजी कार्रवाई शुरू हो चुकी है।

मरकज की बिल्डिंग रिहायशी इलाके में करीब 2,000 गज में बनी है। जबकि नियमानुसार इसकी ऊँचाई 15 मीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए, वहीं इसकी ऊँचाई 25 मीटर पाई गई है। ख़ास बात यह है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) की बिल्डिंग इस मरकज के पास ही स्थित होने के बावजूद यहाँ पर अवैध रूप से सात मंजिला भवन का निर्माण कर लिया गया।

उल्लेखनीय है कि तबलीगी जमात के देशी-विदेशी ‘कार्यकर्ता’ साल भर देश के अलग-अलग इलाकों में मजहबी उपदेश देने या ‘चिल्ला’ के लिए दौरे पर रहते हैं। इंडोनेशिया, मलेशिया, थाईलैंड, नेपाल, म्यांमार, बांग्लादेश, श्रीलंका और किर्गिस्तान समेत विभिन्न राष्ट्रों से लोग तबलीगी गतिविधियों के लिए आते हैं। भारत में ये लोग पर्यटक वीजा के नाम पर धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने के अपराधी पाए गए हैं।

अफवाह और जिहाद का अड्डा बन गया है टिकटॉक, उठी बैन करने की माँग

देश में कोरोना वायरस से संक्रमितों की संख्या आज तीन हजार के आँकड़े को पार कर गई है। इसमें तबलीगी जमात की घटना के बाद मुख्यधारा की मीडिया और सोशल मीडिया पर निरंतर सवाल भी उठने शुरू हुए। इस मामले ने नई करवट तब ली, जब ट्विटर पर रविवार (अप्रैल 05, 2020) को ‘जिहाद फैलाता टिकटॉक’ (#जिहाद_फैलाता_TikTok) ट्रेंड करने लगा।

दरअसल, लॉकडाउन के बावजूद देखा जा रहा है कि समुदाय विशेष के लोग निरंतर लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं और कोरोना को लेकर हर तरह की अफवाहों को बढ़ावा दे रहे हैं। इन घटनाओं ने पुलिस और प्रशासन के काम को दोगुना कर दिया है। समुदाय विशेष में ऐसी भी अफवाहें निरंतर देखने को मिल रही हैं जिनमें कोरोना वायरस का इलाज सुन्नत और नमाज पढ़ना बताया जा रहा है। यही नहीं, कुछ मौलवी भी यह कहते देखे गए हैं कि ताबीज पहनकर कोरोना वायरस पर काबू पाया जा सकता है।

इस प्रकार की अफवाह और वीडियो का सबसे बड़ा स्रोत सोशल मीडिया पर टिकटॉक नामक मोबाइल एप्लिकेशन बनती जा रही है। खास बात यह है कि कोरोना वायरस की महामारी के बीच भी टिकटॉक पर इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा हिन्दू लड़कियों से शादी कर उन्हें इस्लाम अपनाने जैसे वीडियो भी जारी हैं।

ट्विटर पर टिकटॉक को बैन करवाने की माँग के पीछे एक अन्य कारण चीन भी है। कुछ लोगों के गुस्से का कारण चीन से शुरू हुआ कोरोना वायरस है, इसलिए उनकी माँग है कि भारत सरकार ‘टिक टॉक’ पर प्रतिबंध लगाए क्योंकि यह ऐप भी चायनीज कंपनी बाइटडांस की है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि ट्विटर पर टिकटॉक को जिहादी बताया जा रहा है और इसे बैन करने की माँग की जा रही है। ट्विटर पर इस समय #जिहादी_TikTok टॉप ट्रेंड चल रहा है।

ट्विट्टर यूजर्स का कहना है कि टिकटॉक ऐप जिहाद और अफवाहों का मुख्य स्रोत बन चुका है, इसलिए इसे बंद करना जरूरी है। लोगों का मानना है कि टिकटॉक पर 70-80% समुदाय के लोग हैं। जिन्हें टिकटॉक एप्लीकेशन जिहाद करने के लिए कपड़े, जूते और पैसे देता है।

कुछ लोगों का कहना है कि ज्यादातर हिन्दू लड़कियाँ ‘जिहादी टिकटकियों’ की फैन बन जाती हैं और उनसे बातचीत करने लगती हैं। जिसके बाद मामला मुलाक़ात तक पहुँच जाता है। और फिर बाद में वो इस्लाम कबूल कर के जिहाद का शिकार हो जाती हैं।

टिकटॉक पर निरंतर ऐसे वीडियो वायरल होते रहते हैं, जो जिहाद को बढ़ावा देते हुए देखे जाते हैं और लोग इस बारे में पहले भी अपनी आपत्ति दर्ज करते देखे जा चुके हैं। लेकिन अब शायद यह मामला गंभीर होता नजर आ रहा है।

इसके अलावा, कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर भी टिकटॉक पर कई ऐसे वीडियो वॉयरल हो रहे हैं, जिन्हें देखकर आम जनता आसानी से भ्रमित भी हो जाती है और ऐसी अफवाहों का शिकार होने में उन्हें देर नहीं लगती।

उल्लेखनीय है कि कई देशों में टिकटॉक प्रतिबंधित है। मद्रास हाईकोर्ट ने भी टिकटॉक पर बैन लगाया था। हालाँकि मद्रास हाईकोर्ट ने इसके पीछे अश्लीलता को बढ़ावा देने जैसे तर्क दिए थे।

हाल ही में कुछ ऐसे युवकों की गिरफ्तारी भी हुई है, जो टिकटॉक वीडियो के जरिए यह बताते देखे गए कि कोरोना अल्लाह का अजाब (कहर) है। एक युवक को टिकटॉक पर एक ऐसा वीडियो बनाते हुए पकड़ा गया था, जो 500 रुपयों के नोटों की गड्डी पर अपनी नाक पोंछते हुए देखा गया था। ऐसा करने के पीछे युवक की मंशा इस वायरस के संक्रमण को बढ़ाने का सन्देश देना तो था ही, साथ में वह इस वायरस को अल्लाह का कहर भी कहते हुए देखा गया। हालाँकि, सोशल मीडिया पर इस वीडियो के वायरल होते ही इस युवक को नासिक पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था।

लॉकडाउन के दौरान कट्टरपंथियों की हरकतों ने पहुँचाया नुकसान

देखा गया है कि भारत में कट्टरपंथी समूह सामाजिक दूरी और महामारी के प्रसार का मुकाबला करने के लिए सामान्य उपायों का पालन नहीं कर रहे हैं। कुछ विचलित कर देने वाले वीडियो सामने आ रहे हैं, जिसमें समुदाय के पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं पर पथराव करते हुए, उन पर थूकते हुए और व्यवस्था बनाए रखने की कोशिश करने वाले पुलिसकर्मियों के साथ भी अभद्रता करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

5 विदेशी मुस्लिम महिलाओं को छिपा रखा था, जमात का है कनेक्शन: जिन-जिन ने दी थी पनाह, सब पर UP पुलिस द्वारा FIR

कल हिरासत में भेजे गए 10 इंडोनेशियाई नागरिकों के खिलाफ आज गाजियाबाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। इनके खिलाफ यह एफआईआर टूरिस्ट वीजा नियमों के उल्लंघन करने के आधार पर दर्ज हुई है। इन्हें क्वारंटाइन में पहले ही भेजा जा चुका है। गाजियाबाद के एसएसपी कलानिधि मारन ने बताया कि एक लोकल गाइड और उन चार लोगों के खिलाफ भी केस दर्ज कर लिया गया है, जिन्होंने इन सभी को छुपाए रखने की कोशिश की थी।

गाजियाबाद पुलिस ने इस विषय में और जानकारी देते हुए कहा कि दिल्ली में तबलीगी जमात में शामिल हुए 10 इंडोनेशियाई नागरिक, जिनमें 5 औरतें भी शामिल थीं, को आईपीसी के सेक्शन 188, 269 तथा 270 के साथ-साथ महामारी अधिनियम और विदेशी नागरिक अधिनयम 1897 के उपयुक्त सेक्शंस के अंतर्गत भी बुक किया गया है।

याद रहे कि ये सभी लोग 10 लोग जनवरी को इंडोनेशिया से भारत आए थे। हालाँकि, इस दौरान ये लोग निज़ामुद्दीन स्थित जमात के मरकज़ में नहीं गए थे। लेकिन, देश के कई शहरों में इनका मूवमेंट रहा है। फ़िलहाल ये सभी 10 लोग साहिबाबाद इलाक़े में छिप कर रह रहे थे। जिन्हें पुलिस ने कल क्वारंटाइन के लिए भेजा था। आज इनके पनाहगारों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की जा चुकी थी जिसकी संभावना पहले से ही थी।

बता दें कि दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के मरकज़ से दो हजार से ज्यादा निकाले गए थे। करीब 1500 लोग यहॉं से देश के अलग-अलग प्रदेशों में गए हैं। इनमें से कई की अभी भी तलाश की जा रही है। मरकज देश में कोरोना संक्रमण का केंद्र बनकर उभरा है। पिछले कुछ दिनों में जो मामले सामने आए हैं उनमें से ज्यादातर जमात से जुड़े हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय की संयुक्त सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने शनिवार को बताया कि तबलीगी जमात के सदस्य और उनके संपर्क में आए अब तक करीब 22 हजार लोग देश भर में क्वारंटाइन किए जा चुके हैं।

जाँच एजेंसियों ने देश को कोरोना संकट में डालने वाले रुढ़िवादी इस्लामी संगठन तबलीगी जमात के फंडिंग के स्त्रोत की जाँच शुरू कर दी है। जमात से फंडिंग के स्त्रोत और विदेशियों की डिटेल माँगी है। जमात ने पिछले तीन सालों में कितना टैक्स भरा है, उसके बैंक खातों में कहाँ-कहाँ से कितने पैसे आए हैं, इन सब डिटेल्स के साथ पैन नंबर का विवरण भी माँगा है। इसके अलावा मरकज प्रमुख मौलाना साद और 6 अन्य सदस्यों से उन विदेशियों और भारतीय जमातियों की लिस्ट भी माँगी गई है, जिन्होंने 12 मार्च के बाद मरकज में शिरकत की थी।

जमात के सदस्य अपनी करतूतों को लेकर भी चर्चा में है। गाजियाबाद के अस्पताल में नर्सों के सामने नंगा होकर इन्होंने हदें पार कर दी थी। इसके अलावा यूपी के अलग-अलग जिलों से जमातियों द्वारा हॉस्पिटल में बदतमीजी किए जाने की ख़बरें आ रही हैं। बिजनौर में 8 इंडोनेशियाई जमातियों ने अंडा-करी और बिरयानी की माँग की थी। साथ ही उन्होंने सफाई कर्मचारियों के साथ भी अभद्रता की थी। बस्ती और आगरा में भी बिरयानी माँग कर हॉस्पिटल कर्मचारियों को परेशान किया। मुरादाबाद में जमातियों ने दाल-रोटी खाने से इनकार कर दिया। दिल्ली के एलएनजेपी हॉस्पिटल और हैदराबाद के गॉंधी हॉस्पिटल में इनके उपद्रव के बाद पुलिस की तैनाती करनी पड़ी। इनलोगों ने सड़कों पर, अस्पतालों में, डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों पर थूक कर संक्रमण तक फैलाने की कोशिश की है।

वैष्णो देवी में 145 को कोरोना! अली सोहराब के फेक न्यूज़ को शेयर करने वाला अबरार हुसैन गिरफ्तार

सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर फेक न्यूज शेयर करने के आरोप में वडोदरा पुलिस ने 35 वर्षीय मुहम्मद अबरार हुसैन शेख को गिरफ्तार किया है। अबरार ने जो फर्जी न्यूज शेयर की थी, उसमें कहा गया था कि वैष्णो देवी के मंदिर में फँसे 400 लोगों में से 145 लोगों का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव पाया गया है। बाकियों का टेस्ट जारी है और नए मामले भी सामने आ सकते हैं।

अबरार का फेसबुक पोस्ट

ऑनलाइन पोर्टल DeshGujarat की रिपोर्ट के मुताबिक शहर के साइबर सेल पुलिस स्टेशन ने अबरार शेख के खिलाफ आईपीसी की धारा 502 (2) और आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 54 के तहत केस दर्ज किया गया है। जानकारी के मुताबिक शेख ने कथित पत्रकार अली सोहराब के एक फेसबुक पोस्ट को शेयर किया था। सोहराब का अफवाहें फैलाने और झूठे ट्वीट व पोस्ट करने का पुराना इतिहास है। वह आपत्तिनजक ट्वीट करने के आरोप में यूपी पुलिस की कार्रवाई का सामना भी कर चुका है।

बता दें कि माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने पहले ही ऐसी किसी भी खबर को नकार दिया है, जिसमें मंदिर में श्रद्धालुओं के फँसे होने की बात कही गई है। कटरा में भी कोई श्रद्धालु नहीं फँसा हुआ है। यात्रा पहले ही रोकी जा चुकी है। 18 मार्च को मंदिर बंद हो गई थी। कई लोग मीडिया पर आरोप लगा रहे थे कि जब किसी हिन्दू धार्मिक स्थल में श्रद्धालु होते हैं तो उन्हें ‘फँसा हुआ’ बताया जाता है जबकि मस्जिद के मामले में ‘छिपा हुआ’ कहा जाता है। इसके बाद फेक न्यूज़ का दौर शुरू हुआ, जिसे अली सोहराब जैसों ने हज़ारों तक फैलाया।

दरअसल अली सोहराब ने ये सब तबलीगी जमात की हरकतों को ढकने के लिए किया। वो झूठी खबर फैला कर ये साबित करना चाहता था कि जैसे दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज़ में हज़ारों जमाती इकट्ठे होकर पुलिस-प्रशासन के निर्देशों की अवहेलना कर रहे थे, उसी तरह वैष्णो देवी मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने ऐसी ही हरकत की है। जमातियों के कारण भारत में कोरोना वायरस के मामलों में अचानक से तेज वृद्धि हुई है और इसलिए लिबरल गिरोह के कई पत्रकार मजहब और कौम को जिम्मेदार न ठहराने की बात करते हुए घूम रहे हैं।

‘दिल्ली पुलिस फरिश्ता बनकर आई, यदि कोई कहता है कि वे मदद नहीं कर रहे तो यह गलत है’

लॉकडाउन के कारण सभी अपने घरों में कैद हैं लेकिन इन सब के बीच दिल्ली पुलिस अपने कर्तव्य को पूरा करने में दिन-रात लगी हुई है। कोरोना महामारी के इस संकट में दिल्ली पुलिस देवदूत बनकर आम जनता के सामने आ रही है। कोरोना से जंग के बीच दिल्ली पुलिस पूरी तरह सहायता करती हुई नजर आ रही है। कहीं गरीब लोगों को खाना बाँटा जा रहा है तो कही जरूरतमंदो को दवाइयॉं मुहैया करवाई जा रही है। ताजा मामला दिल्ली के बदरपुर का है।

जहाँ पुलिस ने समय पर एक गर्भवती महिला को अस्पताल पहुँचाया। नवजात बच्ची के पिता पंकज ने इसके लिए दिल्ली पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए कहा, “1 अप्रैल को जब मेरी पत्नी को प्रसव पीड़ा हुई तो मैंने 108,102,1031 आदि कई हेल्पलाइन नंबर पर कॉल किया। मगर संपर्क नहीं हो सका। इसके बाद मैंने दिल्ली पुलिस को कॉल किया, जो 20 मिनट में हमारे पास पहुँची और हमें अस्पताल ले गई। हम उनके आभारी हैं।” 

वहीं नवजात बच्ची की माँ कहती हैं, “कोरोना वायरस फैला हुआ है और दिल्ली पुलिस हमारे लिए फरिश्ता बनकर आई है। हम तहे दिल से उनका शुक्रिया अदा करना चाहते हैं। दिल्ली पुलिस का काम बहुत अच्छा है। अगर कोई बोलता है कि वो मदद नहीं कर रहे हैं तो ये गलत है।” 

बता दें कि लॉकडाउन के दौरान 25 मार्च से अब तक एंबुलेंस नहीं मिलने पर पीसीआर पुलिस की यूनिट ने विभिन्न क्षेत्रों से 139 गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुँचाया। डीसीपी पीसीआर शरत कुमार सिन्हा के मुताबिक, सबसे ज्यादा 43 गर्भवती महिलाओं को सफदरजंग अस्पताल पहुँचाया गया, जबकि 17 को संजय गाँधी अस्पताल और 12 को दादा देव अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

उन्होंने बताया कि इसके अलावा अन्य 19 अस्पतालों में भी गर्भवती महिलाओं को पहुँचाया गया है। पीसीआर पुलिस के लगभग सभी जोन की पुलिस यूनिट ने अपने इलाके में प्रसव पीड़ा से कराह रही महिला को सूचना मिलने पर अस्पताल भिजवाया है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसी कॉल मिलने पर तुरंत मदद देने के आदेश सभी यूनिट को दिए गए हैं। ऐसे में जैसे ही किसी यूनिट को उसके आसपास की कॉल मिलती है तो वो मौके पर पहुँच जाते हैं।

इटली से दान में मिला माल वापस उसे ही बेच डाला, दुनिया को कोरोना दे अब धंधा चमका रहा चीन

जहाँ एक तरफ दुनिया कोरोना वायरस के संक्रमण के प्रकोप से जूझ रही है, वहीं दूसरी ओर इस वायरस का जन्मदाता चीन इसमें भी राजनीति खेल रहा है। जिस वुहान से ये वायरस पूरी दुनिया में फैला, वहाँ के अधिकतर मरीज अब ठीक होकर घर जा चुके हैं। ऐसे में चीन अब मास्क से लेकर सैनिटाइजर और टेस्टिंग किट तक दूसरे देशों को बेच रहा है। इनमें से कई ऐसे देश हैं, जिन्होंने चीन में आपात स्थिति को देखते हुए कुछ दिनों पहले ऐसे संसाधन डोनेट किए थे। अब चीन उसी माल को उसी देश को बेचने का प्रयास कर रहा है, जिसने डोनेट किया था।

इटली ने मानवता के नाते चीन को पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट्स की एक बड़ी खेप डोनेट की थी, लेकिन चीन अब उसी माल को वापस इटली को बेच दिया है। पहले कहा जा रहा था कि चीन ने डॉक्टरों और नर्सों सहित कोरोना से बचाव के लिए नागरिकों तक के लिए प्रयोग में आने वाले उन उपकरणों को इटली को डोनेट किया था। लेकिन, अब पता चला है कि इटली को उसने ये चीजें बेचीं हैं। बता दें कि 1.25 लाख मरीजों के साथ इटली में स्थिति काफ़ी बिगड़ी हुई है और साथ ही 15,300 से भी अधिक लोगों की वहाँ मौत हो चुकी है।

वैसे ये पहली बार नहीं है जब चीन ने इस तरह की हरकत की है। चीन इस मौके को भी सिर्फ अपना धंधा बढ़ाने, मुनाफे कमाने के तौर पर देख रहा है। वह भी घटिया क्वालिटी के उपकरण बेच कर, जिनमें से ज्यादातर किसी काम के नहीं है। कुछ ही दिनों पहले स्पेन ने चीन से 467 मिलियन यूरो के चिकित्सा उपकरण खरीदे थे, जिसमें 950 वेंटिलेटर्स, 5.5 मिलियन टेस्टिंग किट्स, 11 मिलियन ग्लव्स और 50 करोड़ से ज्यादा फेस मास्क शामिल थे। इन खरीदी गईं मेडिकल टेस्टिंग किट्स व उपकरणों में से ज्यादातर किसी काम के नहीं थे।

इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी कोरोना को चाइनीज वायरस कहते रहे हैं लेकिन चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से एक फोन कॉल पर बातचीत के बाद उन्होंने बड़ी पलटी मारी थी। भारत में भी लिबरल जमात के वामपंथी इसे चाइनीज वायरस कहने वालों के ख़िलाफ़ ज़हर उगलने में लगे हुए हैं। चीन में 77,000 लोग इस वायरस के प्रकोप से कैसे ठीक हुए, इस बारे में भी कुछ स्पष्ट नहीं बताया गया है।

हॉस्पिटल से भड़काऊ वीडियो बना भेज रहे थे मुल्तानी परिवार के 4 कोरोना+, इंदौर में अब तक 128 मामले

मध्य प्रदेश के इंदौर में शनिवार (अप्रैल 4, 2020) को कोरोना वायरस के 16 नए मामले सामने आए। इसके साथ ही वहाँ कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या 128 हो गई है। इनमें से सबसे ज्यादा 10 मरीज टाटपट्टी बाखल क्षेत्र से मिले हैं। ये वही इलाक़ा है जहाँ 1 अप्रैल को स्वास्थ्यकर्मियों पर पथराव हुआ था और उन्हें खदेड़ दिया गया था। मरने वालों में 42 वर्षीय व्यक्ति से लेकर 80 साल की बुजुर्ग महिला तक शामिल हैं। कहा जा रहा है कि महिला की मौत की जानकारी अधिकारियों ने देर से बताई।

इंदौर में डॉक्टर अभी भी डरे हुए हैं। एक युवती किसी से लिफ्ट लेकर सीधा अपने घर चली गई, जबकि वो कोरोना पॉजिटिव होने के कारण अस्पताल में भर्ती थी। इसके बाद बाद पुलिसकर्मियों को उसे लाने के लिए उसके घर भेजा गया। उसे लिफ्ट देने वाले की भी तलाश की जा रही है।

चार ऐसे लोगों पर भी केस किया गया है जो आइसोलेशन सेंटर से ही भड़काऊ विडियो बनाकर भेज रहे थे। सद्दाम मुल्तानी, अब्दुल गफ्फार मुल्तानी, मोहम्मद शाकिब और आफताब मुल्तानी के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया। ये भी खजराना के निवासी हैं। इन सभी ने आइसोलेशन सेंटर में न सिर्फ़ सोशल डिस्टेंसिंग की अवहेलना की, बल्कि उसके बारे में भ्रामक जानकारियाँ देकर ऑनलाइन लोगों को भड़काया।

इन सभी कोरोना मरीजों को स्वस्थ होते ही गिरफ़्तार किया जाएगा। ये सभी एक ही परिवार के हैं। खजराना वही इलाक़ा है, जहाँ एक ही परिवार के 13 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इंदौर में कोरोना ने सबसे ज्यादा तबाही यहीं मचाई है। अब लगातार कई केस सामने आने के बाद लोग ख़ुद घरों में बंद रह रहे हैं। तंजीम नगर और अशफाक नगर जाने वाली गलियों को भी सील कर दिया गया है। इलाक़े के समुदाय विशेष के कुछ लोगों ने कहा कि वो लॉकडाउन का पालन कर रहे हैं। हालाँकि, कुछ दिनों पहले तक पुलिस को इन्हें समझाने में काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी थी, तब भी बात नहीं बन पा रही थी।

‘दैनिक भास्कर’ के इंदौर संस्करण में प्रकाशित ख़बर

इससे पहले शुक्रवार की देर रात पुलिस की एक टीम ने टाटपट्‌टी बाखल में जाकर विडियो के आधार पर पथराव करने वाले आरोपितों को चिन्हित किया और उनका इलाके में जुलूस भी निकाला था। यहाँ पर 17 और 55 साल की दो महिलाएँ कोरोना पॉजिटिव भी मिली हैं। सीएसपी डीके तिवारी ने बताया कि गुरुवार को हुई गिरफ्तारी के अलावा 6 और आरोपितों को उनकी टीम ने पकड़ा था। इनमें मोहम्मद नावेद, मोहम्मद साजिद, मोहम्मद युसूफ, मोहम्मद सावेज, मोहम्मद अनस और नफीस का नाम शामिल है। ये भी टाटपट्‌टी बाखल के निवासी हैं। 

इंदौर में पुलिस और प्रशासन वो हर कुछ कर रहा है, जिससे लोग घरों से न निकलें। लोगों के दरवाजे तक राशन सामग्री पहुँचाई जा रही है। किराना व्यापारियों से नगर निगम बात कर रहा है, ताकि उन्हें होलसेल माल लेने में कोई परेशानी न हो। बैंकों में सुचारू रूप से काम होता रहे और सोशल डिस्टेंसिंग भी बना रहे, इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। किराना व्यापारियों को कर्फ्यू पास प्रदान किए गए हैं।

मुस्लिम होने के कारण गर्भवती को अस्पताल से निकाला? कॉन्ग्रेसी मंत्री के झूठ को खुद महिला ने दिखाया आइना

शनिवार को राजस्थान के पर्यटन मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता विश्वेन्द्र सिंह ने ट्विटर पर दावा किया कि एक गर्भवती मुस्लिम स्त्री को भरतपुर के डॉक्टर मुनीत वालिया ने अस्पताल में भर्ती करने से मना कर दिया क्योंकि औरत मुस्लिम थी। मंत्री ने यह भी दावा किया कि मुस्लिम होने के कारण उस औरत को जयपुर जाकर सारे टेस्ट्स करवाने को कहा गया।

मंत्री के इस दावे पर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने आश्चर्य जताया कि बिना किसी जाँच कमिटी से जाँच करवाए कैसे मंत्री जी डॉक्टर पर आरोप लगाने बैठ गए। हालाँकि डॉक्टर द्वारा मरीज को दी गई ट्रांसफर स्लिप जल्दी ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जो अलग ही कहानी कहती है।

जर्नलिस्ट सौम्यदीप्त ने मुस्लिम औरत को दी गई रेफरल स्लिप साझा की, जिससे पता चलता है कि 7वीं बार गर्भवती इस मरीज में खून की बेहद कमी थी, जिसके कारण यह केस बेहद जटिल हो गया था।

रेफरल स्लिप के अनुसार रोगी Antepartum Haemorrhage (APH) एन्टिपार्टम हैमरेज नामक रोग से ग्रस्त है, जिसमें प्रसव के पहले रक्तस्राव होता है। वह एनेमिक थी और 7वीं बार गर्भ से थी। मरीज के केस की जटिलताओं को देखते हुए उसे जयपुर के बड़े अस्पताल के लिए रेफर किया गया क्योंकि मरीज की स्थितियों को देखते हुए उसके लिए जरूरी इलाज क्लीनिक में उपलब्ध नहीं था।

एक दूसरे सोशल मीडिया यूजर और खुद एक डॉक्टर, डॉ अमित थडानी ने भी इस रेफरल स्लिप पर लिखे वाक्य “कोई जाँच मौजूद नहीं” को समझाते हुए लिखा कि इस वाक्य का मतलब हुआ कि इस महिला की ये 7वीं गर्भावस्था है और अब तक के प्रसवों का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।

OpIndia से बात करते हुए एक डॉक्टर ने कहा कि ये औरत 26-28 हफ्ते की प्रेग्नेंट थी और सामान्यतः प्रेग्नेंसी 38-40 हफ्तों की रहती है। वह एक जटिल प्रेग्नेंसी थी जिसमें माँ और बच्चे दोनों का जीवन खतरे में पड़ सकता था। हिंदुस्तान टाइम्स के ब्यूरो चीफ राकेश अवस्थी ने भी इस मरीज के साथ मौजूद रही स्त्री की बाईट ट्विटर पर शेयर की, जिसने स्पष्ट किया कि उन्हें मुस्लिम होने के कारण जयपुर अस्पताल रेफर नहीं किया गया।

यह औरत साफ़-साफ़ कहती दिखती है कि डॉक्टर ने उन्हें तुरंत वहाँ से चले जाने को कहा क्योंकि मरीज की स्थिति गंभीर थी और देरी होने पर मरीज को नुकसान हो सकता था। इस घटना के बाद लोग हतप्रभ हैं कि क्या राज्य सरकार ने लिबरल धड़े की नजर में कुछ क्रेडिट पॉइंट्स कमाने के चक्कर में डॉक्टर को बदनाम कर उनके करियर को रिस्क में डाल दिया। सत्य क्या है, यह केवल एक निष्पक्ष पारदर्शी जाँच से ही पता चल सकेगा।

लेटरहेड पर राष्ट्रीय प्रतीक का इस्तेमाल: पूर्व त्रिपुरा कॉन्ग्रेस अध्यक्ष पर FIR

त्रिपुरा कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष गोपाल चंद्र रॉय के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। नॉर्थ त्रिपुरा के बनमालीपुर सीट से विधायक रहे रॉय पर यह कार्रवाई अपने लेटरहेड पर राष्ट्रीय प्रतीक का इस्तेमाल करने को लेकर की गई है। वे पेशे से वकील हैं और फिलवक्त प्रदेश कॉन्ग्रेस समिति के सलाहकार हैं। वह अगरतला से छपने वाले समाचार पत्र गणेशंबद पत्रिका के मालिक और संपादक भी हैं।

रॉय के लेटरहेड में देखा जा सकता है कि फिलहाल वो किसी आधिकारिक पद पर नहीं हैं। बावजूद वह अपने लेटरहेड पर राष्ट्रीय प्रतीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेटरहेड पर उल्लेख है कि वे त्रिपुरा कॉन्ग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे हैं। त्रिपुरा ओलंपिक संघ के अध्यक्ष हैं। कॉन्ग्रेस विधायक दल के पूर्व नेता, त्रिपुरा उच्च न्यायालय में अधिवक्ता और गणेशंबद पत्रिका के मालिक एवं संपादक हैं। बता दें कि इनमें से कोई भी पद उन्हें कानून के अनुसार राष्ट्रीय प्रतीक का उपयोग करने के लिए अधिकृत नहीं करता है।

दरअसल राष्ट्रीय प्रतीक भारत सरकार का प्रतिनिधित्व करता है। भारत के राज्य प्रतीक (अनुचित प्रयोग का निषेध) अधिनियम, 2005 के अंतर्गत किसी व्यक्ति और निजी संगठन के लिए इसका उपयोग प्रतिबंधित किया गया है। आधिकारिक पत्राचार के लिए किसी व्यक्ति या निजी संगठन को प्रतीक का उपयोग करने की अनुमति नहीं है।

यह प्रतीक भारत सरकार के आधिकारिक लेटरहेड का एक हिस्सा है। सभी भारतीय मुद्रा पर भी यह होता है। यह कई स्थानों पर भारत के राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में भी कार्य करता है और भारतीय पासपोर्ट पर प्रमुख रूप से होता है। कोई निजी व्यक्ति, संस्था या राजनीतिक दल राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न का इस्तेमाल नहीं कर सकता। भारत के राज्य प्रतीक (अनुचित प्रयोग का निषेध) अधिनियम, 2005 की धारा- 3 के तहत इस पर रोक लगाई गई है। अगर कोई प्रतीक चिह्न का गलत इस्तेमाल करता है तो इस अधिनियम की धारा- 7 में दो साल तक की सजा और पाँच हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।

जनवरी 2017 में बीजेपी नेता और विराट हिंदुस्तान संगम (VHS) के संस्थापक सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्विटर पर खुलासा किया था कि उन्होंने सूचना और प्रसारण मंत्रालय को एक पत्र लिखकर अर्णब गोस्वामी द्वारा कानून के उल्लंघन को लेकर आगाह किया था। टाइम्स नाउ के पूर्व एडिटर अर्णब ‘रिपब्लिक’ नाम से अपना वेंचर शुरू करने वाले थे। इसी शब्द के इस्तेमाल को लेकर स्वामी ने आगाह किया था। बाद में कानूनी पचड़े से बचने के लिए अर्णब ने ‘रिपब्लिक टीवी’ के नाम से चैनल शुरू किया।

कश्मीर में पिता को दिल का दौरा, मुंबई से साइकिल पर निकल पड़े आरिफ: CRPF और गुजरात पुलिस बनी फरिश्ता

मुंबई में रहने वाले एक वॉचमैन को जब पिता की बीमारी सूचना मिली तो वो सीधा जम्मू-कश्मीर के राजौरी स्थित अपने घर के लिए निकल गया। ये 4 दिन पहले की बात है। सबसे बड़ी बात कि मोहम्मद आरिफ ने साइकिल से ही राजौरी तक की यात्रा करने का निश्चय किया। 36 वर्षीय आरिफ मुंबई वेस्ट स्थित लिब्रा टावर में काम करता है।अब उन्हें गुजरात पुलिस से मदद मिली है। गुजरात पुलिस ने उनके दुःख को समझा और उन्हें कश्मीर भेजने के लिए एक ट्रक में बिठाया।

आरिफ ने बताया कि वो रात भर साइकिल चला कर गुजरात-राजस्थान सीमा तक पहुँचे थे। उन्हें लगातार कई अधिकारियों के फोन कॉल्स आ रहे थे, जिन्होंने उन्हें साइकिल से जम्मू-कश्मीर न जाने की सलाह दी क्योंकि कोरोना वायरस के संक्रमण के प्रकोप से बचने के लिए पूरे देश में लॉकडाउन लागू है। लेकिन, आरिफ अपने घर जाने के लिए बेचैन थे और उन्होंने अपनी यात्रा जारी रखी। अगली सुबह गुजरात पुलिस के कुछ जवान उन्हें मिले। उन्होंने उनके लिए न सिर्फ़ जम्मू-कश्मीर जाने का प्रबंध किया, बल्कि भोजन की भी व्यवस्था की।

उधर उनके घर पर भी सीआरपीएफ के जवानों ने जाकर उनके पिता के इलाज की व्यवस्था की। सीआरपीएफ ने ‘मददगार योजना’ के तहत आरिफ के पिता को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। उन्हें हाल ही में दिल का दौरा पड़ा था। उनकी स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। रविवार (अप्रैल 5, 2020) को कई मेडिकल जाँच व प्रक्रिया पूरी हुई है। सीआरपीएफ ने बताया कि अगर ज़रूरत पड़ी तो उन्हें कटरा स्थित नारायणा हॉस्पिटल में शिफ्ट किया जा सकता है। आरिफ ने बताया कि उनके पास साइकिल भी नहीं थी। साथी गार्ड से उन्होंने 500 रुपए में साइकिल ख़रीदी और अपने घर के लिए निकल पड़े।

अगर सीआरपीएफ से उनके पिता को मदद नहीं मिलती तो शायद उन्हें 2100 किलोमीटर तक साइकिल चलाना पड़ता। वो रास्ते भर बिस्किट खाते और पानी पीते हुए आ रहे थे क्योंकि अधिकतर दुकानें बंद थीं। सीआरपीएफ ने उन्हें बता दिया था कि उनके पिता का ख्याल रखा जा रहा है और सारी जिम्मेदारी निभाई जा रही है। लेकिन आरिफ फिर भी वहाँ जाने को बेचैन थे। पंजाब-जम्मू सीमा पर स्थित लखनपुर तक तो आरिफ पहुँच सकते हैं लेकिन वहाँ से आगे जाने पर उन्हें 14 दिनों के लिए क्वारंटाइन में रहने के बाद ही राजौरी जाने की अनुमति मिलेगी क्योंकि प्रशासन ने ऐसा अनिवार्य कर रखा है।

आरिफ को आशंका है कि हो सकता है कि उनके पिता की मृत्यु निकट हो और वो एक बार उनसे मिलना चाहते हों। हालाँकि, सीआरपीएफ ने वहाँ इलाज की पूरी व्यवस्था कर रखी है। आईआरपीएफ के डॉक्टर्स लगातार जिला अस्पताल से संपर्क में हैं और उनके स्वास्थ्य के अपडेट्स ले रहे हैं।