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मधुबनी, कैमूर, सिवान में सामूहिक नमाज: मस्जिद के बाहर लाठी लेकर औरतें दे रही थी पहरा

कोरोना वायरस संक्रमण पर काबू पाने के लिए देशभर में 14 अप्रैल तक लॉकडाउन है। इसका उल्लंघन कर बिहार के मधुबनी, कैमूर और सिवान ​में शुक्रवार को सामूहिक रूप से नमाज अदा की गई। कैमूर में रोके जाने पर पथराव हुआ तो मधुबनी में समुदाय विशेष की औरतें मस्जिद के बाहर लाठी और मिर्च पाउडर लेकर पहरा दे रही थीं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मधुबनी जिले के अंधाराठाढ़ी प्रखंड के हरना गॉंव में सामूहिक रूप से नमाज अदा की गई। यहॉं से तबलीगी जमात के 11 सदस्य क्वारंटाइन में भेजे गए हैं। बताया जाता है कि वे भी नमाज में शामिल थे। पुरुष जब भीतर नमाज अदा कर रहे थे दर्जनों औरतें लाठी और मिर्च पाउडर लेकर बाहर खड़ी थीं।

सिवान के महाराजगंज के सिकटिया पंचायत के खानपुरा गॉंव की मस्जिद में भी शुक्रवार को नमाज अदा की गई। करीब 50 लोग इसमें शामिल हुए। मस्जिद के इमाम के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराए जाने की खबर है।

इसी तरह की घटना कैमूर जिले के मोहनियाँ थाना क्षेत्र स्थित अहिनौरा गाँव से भी सामने आई है। वहॉं की मस्जिद में दोपहर के वक्त नमाज पढ़ने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुट गए। सूचना मिलने पर पुलिस पहुॅंची। नमाजियों को चेतावनी देकर उनके घर भेज दिया। इसके बाद शाम में फिर बड़ी संख्या में लोग मस्जिद पहुॅंच गए। इस बार विरोध करने पर दो पक्षों के बीच मारपीट और पथराव हुआ।

दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर

महाराजगंज की सिकटिया पँचायत के खानपुरा गाँव की मस्जिद में भी शुक्रवार को करीब 50 लोगों ने एकत्रित होकर जुमे की नमाज अदा की। पुलिस ने इमाम के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।

उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग सबसे कारगर उपाय है। लोगों से एक जगह इकट्ठा नहीं होने की अपील प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर चुके हैं। मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी सामूहिक रूप से नमाज नहीं पढ़ने की अपील की है। बावजूद इसके इस तरह की घटनाओं का सिलसिला थम नहीं रहा।

शुक्रवार को ही उत्तर प्रदेश के कन्नौज में एक मकान की छत पर जुमे की नमाज अदा करने के लिए जुटान हुआ था। पुलिस रोकने पहुॅंची तो उस पर हमला कर दिया गया। इसमें कई पुलिसकर्मी जख्मी हो गए। इससे पहले अलीगढ़ की एक मस्जिद में गुरुवार की रात मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए लोग जुटे थे। यहॉं भी पुलिस पर हमला किया गया था। बुधवार को मुजफ्फरनगर से लॉकडाउन का पालन कराने पहुँची पुलिस टीम पर हमले की खबर आई थी। सहारनपुर के जमालपुर गाँव में भी नमाज पढ़ने को लेकर मस्जिद के बाहर इकट्ठा भीड़ को हटाने और छह लोगों को हिरासत में लेने पर लोगों ने पुलिस पर हमला कर दिया था। लाठी-डंडों का प्रयोग कर पकड़े गए लोगों को छुड़वा लिया था।

बिहार के मधुबनी की एक मस्जिद में सामूहिक नमाज रुकवाने पहुॅंची पुलिस को समुदाय विशेष की भीड़ ने एक किमी तक खदेड़ दिया था। जमकर पत्थरबाजी की थी। फायरिंग की और पुलिस की जीप को तलाब में पलट दिया था। गुजरात के अहमदाबाद स्थित गोमतीपुर में भी भीड़ ने पुलिस पर पत्थरबाजी की थी। गोमतीपुर में पुलिस उन लोगों की तलाश में गई थी, जिन्होंने तबलीगी जमात के कार्यक्रम में हिस्सा लिया था।

मजहबी मर्द न छेड़छाड़ कर सकते हैं, न ही बलात्कार: तबलीगी जमात की नंगई का स्तंभकार ने किया बचाव

तबलीगी जमात की लापरवाही ने भारत की बड़ी आबादी को कोरोना वायरस से बचाने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश के स्वास्थ्यकर्मियों की कोशिशों पर काफी हद तक पानी फेर दिया है। देशव्यापी लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के जरिए कोरोना वायरस संक्रमण पर काफी हद तक लगाम लगाने की उम्मीद थी, मगर अब आलम यह है कि तबलीगी जमात से जुड़े कोरोना वायरस मामले में लगातार वृद्धि देखने को मिल रही है।

तब्लीगी जमात द्वारा आयोजित मजहबी धर्मसभा में देश के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ विदेशों से भी तकरीबन 1500 लोगों ने हिस्सा लिया था। इस मजहबी सभा में भाग लेने वाले लोगों में से 10 की कोरोना वायरस की वजह से मौत भी हो चुकी है, वहीं 400 से अधिक तबलीगी जमात के सदस्यों का कोरोना टेस्ट पॉजिटिव आया है। दक्षिणी दिल्ली स्थित निजामुद्दीन मरकज भारत के विभिन्न भागों में कोरोना वायरस फैलने का एक केंद्र बन गया है। अभी तक तबलीगी जमात से जुड़े लगभग 9000 लोगों की पहचान कर क्वारंटाइन किया जा चुका है।

‘हैदराबाद चलो, वहाँ जन्नत की सैर कराऊँगा’ – नर्सों को देख सीटी बजाते, छूने की कोशिश करते जमाती: एक और हॉस्पिटल से आई शिकायत

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अब ये जाहिल जमाती इलाज के दौरान महिला मेडिकल स्टाफ के साथ बदतमीजियाँ कर रहे हैं और डॉक्टरों के ऊपर थूक कर उन्हें संक्रमित करने की बेहूदी कोशिश कर रहे हैं। एक तरफ जहाँ पूरा देश इन तबलीगी जमात द्वारा फैलाए गए संकट से लड़ने में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ इतना बड़ा क्राइम करने के बाद भी ये लोग अपनी बेहूदगी से बाज नहीं आ रहे। गाजियाबाद और कानपुर समेत कई जगहों से इनके द्वारा महिला स्टाफ के साथ बदतमीजियाँ की खबरें सामने आई। गाजियाबाद के एमएमजी हॉस्पिटल के आइसोलेशन वार्ड में रखे गए तबलीगी जमाती बिना कपड़ों, पैंट के नंगे घूम रहे थे, अश्लील वीडियो चलाने के साथ ही ये जमाती नर्सों को गंदे-गंदे इशारे कर रहे थे और नर्सों से बीड़ी-सिगरेट की माँग भी कर रहे थे।

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जैसे ही यह खबर सामने आई, इस्लामी कट्टरपंथियों की वकालत करने वाला समूह सक्रिय हो गया। इनको हमेशा माफ कर देने वाले समूह ने इनके समर्थन में उतरकर उनके बचाव की भरपूर कोशिश की। इन्हीं में से एक थे- वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) के स्तंभकार सदानंद धुमे। उन्होंने ये साबित करने का भरसक प्रयास किया कि देश को कोरोना संकट में डालने वाले तबलीगी जमात के सदस्य निर्दोष हैं।

सदानंद धुमे ने द वायर की पत्रकार आरफा खानम शेरवानी, जिन्होंने भी तबलीगी जमात के सदस्यों का बचाव किया और नर्सों पर झूठ बोलने का आरोप लगाया, के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वो तबलीगी जमात के विचारों के प्रशंसक नहीं है, लेकिन जिस किसी ने भी उनके साथ समय बिताया है, उनको पता है कि उनका रुढ़िवाद महिलाओं के लिए कितना उपयुक्त और पवित्र है। सदानंद धुमे यहीं पर नहीं रुके। उन्होंने आगे यह भी आरोप लगाया कि तबलीगी जमात के सदस्यों के अभद्रता की बातें झूठी हैं और सामान्य तौर पर समुदाय विशेष को बरगलाने की यह कोशिशें नीचता से परे है।

दरअसल धुमे अपने ट्वीट के माध्यम से यह कहना चाह रहे थे कि सबसे पहली बात तो ये कि मजहबी मर्द न तो छेड़छाड़ कर सकते हैं और न ही बलात्कारी हो सकते हैं और दूसरी बात उन्होंने कही कि जिन नर्सों ने तबलीगी जमात के सदस्यों के खिलाफ दुर्व्यवहार की शिकायत की थी, वे झूठ बोल रही थीं क्योंकि वो समुदाय विशेष की छवि को धूमिल करना चाहती थीं। धुमे ने समुदाय विशेष के लोगों को धार्मिक पुरुष साबित करने की कोशिश और उनके बचाव में नर्सों द्वारा लिखित शिकायत को नकार दिया।

इन जाहिलों और अशिष्ट व्यक्तियों के बचाव में उतरने पर कई लोगों ने उन्हें आड़े हाथों लिया। लोगों ने ना सिर्फ उनसे कट्टरपंथी इस्लाम के लिए माफी माँगने के लिए कहा, बल्कि उन्हें महिला के खिलाफ हो रहे अपराध के लिए भी जिम्मेदार ठहराया।

प्रत्याशा रथ नाम की एक ट्विटर यूजर ने कहा कि धूमे ने पीड़ितों को मजहबी कट्टरता के साथ दोषी ठहराया। उन्होंने कहा कि धूमे पीड़ितों पर अपने कथित अनुभवों के आधार पर दोषारोपण कर रहे हैं और उस अनुभव के कारण, वह इस बात की उपेक्षा कर रहे हैं कि उन पीड़िता के साथ दुर्व्यवहार किया गया, जो अपनी सुरक्षा की परवाह किए बिना ईलाज कार्य में जुटे थे।

ऋषा नाम की एक अन्य यूजर ने लिखा, “यह मानसिकता ही एकमात्र कारण है, जिसकी वजह से कई मामलों में इन धर्मगुरुओं द्वारा बलात्कार करते हुए देखा जाता है। हाँ, वे सभी सार्वजनिक स्थान पर अपनी कामुकता के बारे में आपसे अधिक पवित्र दिखते (दिखने की कोशिश करते हैं) हैं, फिर अपने पीड़ितों को यह कहते हुए ब्लैकमेल करते हैं कि “तुम पर विश्वास कौन करेगा”।”

दिलचस्प बात यह है कि ऋषा की यह बातें काफी प्रांसगिक हैं, क्योंकि धुमे ने मी टी मूवमेंट के दौरान भी अपनी इस मानसिकता का परिचय दिया था। हालाँकि उस समय उन्होंने धर्मगुरुओं के बारे में नहीं बोला था, लेकिन महिलाओं को लेकर अपनी मानसिकता दर्शाई थी। उन्होंने कहा था कि महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करने वाले शक्तिशाली पुरुष कैसे दूर हो जाते हैं क्योंकि महिलाएँ डर जाती हैं। पुरुषों के पास शक्ति थी और इसीलिए महिलाओं ने बात नहीं की क्योंकि उन्हें डर था कि शक्तिशाली पुरुषों के खिलाफ उनके आरोपों पर विश्वास नहीं किया जाएगा। अब धुमे अपनी इसी मानसिकता को आगे बढ़ाते हुए तबलीगी जमात के कट्टरपंथी इस्लामियों को बचाने के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं।

सदानंद धुमे ने अपने ट्वीट में कहा कि चूँकि उन्होंने तबलीगी जमात के कुछ लोगों से मुलाकात की है और उनके अनुसार वो लोग ‘पवित्र’ थे, तो इसका मतलब ये है कि तबलीगी जमात का कोई भी सदस्य महिलाओं के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकता है। इसलिए महिलाएँ झूठ बोल रही हैं।

दरअसल 2011 का एक मामला ही साबित करता है कि वास्तव में धूमे का ज्ञान कितना छिछला, तुच्छ और अधूरा है। 2011 में टोरंटो में एक इमाम पर यौन उत्पीड़न के लिए 13 मामलों के तहत आरोप लगाया गया था। 48 वर्षीय मोहम्मद मसरूर ने एक इमाम के रूप में काम किया और कई देशों का दौरा किया था, जिसमें बच्चों और युवाओं को कुरान की शिक्षा दी थी। पुलिस ने अपनी जाँच में मसरूर के पास से उसके खुद के पासपोर्ट के अलावा तीन अन्य नाम का पासपोर्ट पाया था। मसरूर के खिलाफ पाँच पूर्व छात्राओं ने खिलाफ दुर्व्यवहार के 13 आरोप लगाए गए थे। जानकारी के मुताबिक इमाम तबलीगी जमात का सदस्य था, जिसका उद्देश्य इस्लामिक आंदोलन को जमीनी स्तर पर चलाना था। यह आंदोलन काफी हद तक बांग्लादेश में सक्रिय है।

दरअसल इमामों और मौलवियों द्वारा बलात्कार और नाबालिग का यौन उत्पीड़न करने वाले इतने मामले सामने आए हैं कि एक थीसिस हो सकती है, और शायद इस पर लिखा जाना चाहिए कि इस्लामिक धर्मगुरु महिलाओं और नाबालिग लड़कों के खिलाफ अपराधों में लिप्त क्यों होते हैं। हालाँकि तबलीगी जमात के सदस्यों को बचाने की इनकी ये कोशिश दिखाती है कि ये सच्चाई को देखना ही नहीं चाहते हैं।

98 जमाती सिर्फ एक गाँव में, पुलिस ने पूरे गाँव को किया सील: आने-जाने के सभी रास्ते बंद, सभी के सैंपल जाँच के लिए भेजे

पूरे देश में कोरोना महामारी फैलाने का केन्द्र बने दिल्ली के निजामुद्दीन से निकले जमातियों ने हर किसी को संकट में डाल दिया है। यही कारण है कि मदरसों से लेकर मस्जिद तक स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन की टीमें दिल्ली से निकले जमातियों की खोज में लगी हुई हैं। इसी बीच उत्तराखंड पुलिस को जानकारी मिली कि हरिद्वार जिले के एक गाँव में दिल्ली से कई जमाती लौट कर आए हैं। सूचना पर पहुँची पुलिस ने इसे सही पाया। इसके बाद गाँव को तत्काल सील करके पुलिस फोर्स को तैनात कर दिया गया।

दरअसल हरिद्वार जिले के गैंडीखाता गुज्जर बस्ती में सूचना पर पहुँची पुलिस ने गाँव में बड़ी संख्या में जमातियों को देखा। इसके बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए पूरे गाँव को ही सील कर दिया। साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने सभी लोगों के सैंपल लेकर जाँच के लिए भेज दिए हैं। इतना ही नहीं, गाँव से कोई बाहर न जा सके और गाँव में कोई अंदर न प्रवेश करे, इसके लिए गाँव के बाहर कैंप लगाकर बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात कर दिया गया है।

मामल में श्यामपुर थाने के थानाध्यक्ष दीपक सिंह कठैत ने जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस प्रशासन की टीम को जानकारी मिली थी कि गैंडीखाता गुज्जर बस्ती में दिल्ली, देवबंद और अन्य स्थानों से लौटकर सैकड़ों जमाती आए हैं। इस जानकारी के बाद तत्काल पुलिस स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ गाँव में पहुँची तो यह जानकारी सही पाई गई। थानाध्यक्ष दीपक सिंह ने बताया कि पूरे गाँव में 98 जमाती पाए गए। इसके बाद गाँव के सभी लोगों को घर में ही क्वारंटीन कर दिया गया। साथ ही पूरे गाँव को एहतियात के तौर पर सील कर दिया गया।

वहीं दिल्ली निजामुद्दीन की घटना के बाद से ही लगातार उत्तराखंड पुलिस को अलग-अलग स्थानों पर तबलीगी जमात के लोगों के होने की सूचनाएँ मिल रही हैं। इन्हें गँभीरता से लेते हुए पुलिस ने मुस्लिम आबादी वाले थानों में सेक्टर मैजिस्ट्रेट और स्वास्थ्य विभाग की टीमों को तैनात किया है ताकि सूचना मिलते ही ऐसे लोगों की जाँच करके तत्काल क्‍वारंटाइन किया जा सके।

आपको बता दें कि इससे पहले भी पुलिस ने बहादराबाद के बौंगला गाँव स्थित आर्य इंटर कॉलेज में करीब 40 लोगों को क्वारंटाइन किया हुआ है। वहीं ज्वालापुर के मोहल्ला तेलियान कैथवाड़ा से एक जमात मरकज से होकर अंबाला गई थी। इसके बाद जमात वापस ज्वालापुर लौटकर आई। जानकारी मिलने पर पुलिस ने जमात के लोगों के साथ दो ड्राइवरों को भी क्वारंटाइन किया गया था। निजामुद्दीन मरकज से लौटे जमातियों को घर में ठहराने और इसकी जानकारी छिपाने के मामले में पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

डॉक्टरों के साथ जमातियों की बदसलूकी अब कानपुर मेडिकल कॉलेज में: थूक-थूक कर फैलाई गंदगी, बैठते हैं साथ

कोरोना कैरियर बन चुके तबलीगी जमातियों के सदस्य इलाज के दौरान अस्पताल के स्टाफ के साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं। मेडिकल स्टाफ के साथ अश्लील हरकतें करने के अलावा उनके द्वारा क्वारंटाइन के नियम-कायदे तोड़ने की खबरें भी लगातार देश के कई हिस्सों से आ रही हैं।

ताजा मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर से आ रहा है। यहाँ इलाज के दौरान जमाती वार्ड में इधर-उधर थूक रहे हैं। इतना ही नहीं स्टाफ को भी गालियाँ दे रहे हैं। अस्पताल प्रशासन ने इसकी शिकायत की है। बता दें कि कानपुर में तबलीगी जमात से लौटे 22 लोग कोरोना वायरस के संक्रमण के संदिग्ध होने के चलते क्वारंटाइन किए गए हैं।

‘हैदराबाद चलो, वहाँ जन्नत की सैर कराऊँगा’ – नर्सों को देख सीटी बजाते, छूने की कोशिश करते जमाती: एक और हॉस्पिटल से आई शिकायत

‘नर्स के सामने नंगे हो जाते हैं जमाती: आइसोलेशन वार्ड में गंदे गाने सुनते हैं, मॉंगते हैं बीड़ी-सिगरेट’

कोरोना मरीज बनकर फीमेल डॉक्टर्स को भेज रहे हैं अश्लील सन्देश, चैट में सेक्स की डिमांड: नौकरी छोड़ने को मजबूर है स्टाफ

फलों पर थूकने वाले शेरू मियाँ पर FIR पर बेटी ने कहा- अब्बू नोट गिनने की आदत के कारण ऐसा करते हैं

गाजियाबाद के बाद अब कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज के क्वारंटाइन वार्ड में जमातियों ने मेडिकल व पैरामेडिकल स्टॉफ का सहयोग न करते हुए उनके साथ बदसलूकी की है। थूक-थूककर गंदगी फैला दी है। सोशल डिस्टेंसिंग का भी मजाक उड़ाया गया। क्वारंटाइन में रहने के बावजूद ये लोग एक ही बेड पर बैठे रहते हैं। मना करने पर भी नहीं मानते हैं। ये जमाती डॉक्टरों से जाँच कराने से भी इंकार कर रहे हैं। मेडिकल कॉलेज की प्राचार्या डॉ आरती लाल चंद्दानी ने इस मामले पर शिकायत दर्ज कराई है।

प्राचार्या आरती लाल चंद्दानी ने कहा, “दिल्ली निजामुद्दीन तबलीगी मरकज में हुई जमात में शामिल 22 लोग हमारे यहाँ आए थे। डॉक्टरों की टीम के साथ वार्ड ब्वाय, नर्स, टेक्निशियन सभी पूरे सुरक्षा किट के साथ मरीजों की सेवा कर रहे थे। लेकिन जमात के लोग डॉक्टरों से बदसलूकी कर रहे हैं। इतना ही नहीं उनके साथ बात-बात पर बहस कर माहौल खराब करने का काम कर रहे है। इसके साथ ही क्वारंटाइन वार्ड में थूक-थूक कर गंदगी फैला रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “डॉक्टर कठिन परिस्थितियों में मरीजों की सेवा कर रहे हैं। यह बहुत ही कठिन काम होता है। सुरक्षा सूट 6 घंटे से ज्यादा पहना नहीं जाता है। इसके बाद भी यह रोटेशन से ड्यूटी करते हैं। एक अलग कमरे में रहना पड़ता है, वो अपने परिवारों से भी नहीं मिल पाते हैं और 21 दिन बाद इनकी ड्यूटी बदलती है। जिनकी सेवा में हमारे डॉक्टर लगे थे, उन्होने अच्छा बर्ताव नहीं किया है। इससे बहुत दु:ख हुआ है। उन्होने थूक-थूक कर गंदगी की। किसी की बात नहीं मान रहे थे। आपस में इकट्ठा हो रहे थे। इसके साथ ही डॉक्टरों को बुरा भला कह रहे थे।”

उल्लेखनीय है कि इससे पहले उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के एमएमजी हॉस्पिटल और सुंदरदीप आयुर्वेदिक कॉलेज में इस तरह की घटनाएँ सामने आई थी। एमएमजी हॉस्पिटल के आइसोलेशन वार्ड में रखे गए तबलीगी जमाती बिना कपड़ों, पैंट के नंगे घूम रहे थे, अश्लील वीडियो चलाने के साथ ही ये जमाती नर्सों को गंदे-गंदे इशारे कर रहे थे और नर्सों से बीड़ी-सिगरेट की माँग भी कर रहे थे। इनके खिलाफ FIR दर्ज कर ली गई है। वहीं सुंदरदीप आयुर्वेदिक कॉलेज में भी इन जमातियों ने महिला स्टाफ के साथ अभद्रता की और फब्तियाँ कसीं

800+ विदेशी जमाती दिल्ली की मस्जिदों में छिपे पाए गए: टेस्ट में कोरोना पॉजिटिव आने से हो सकती है संक्रामक चेन लंबी

दिल्ली के निजामुद्दीन से निकाले गए सैकड़ों जमातियों के बाद से देश के विभिन्न राज्यों में मौजूद मस्जिदों में स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर पुलिस की टीमें कोरोना से जंग लड़ने के लिए लगातार छापेमारी कर रही हैं। कुछ इसी तरह दिल्ली में भी यह क्रम जारी है। इसमें बीते दिन दिल्ली पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। स्वास्थ्य विभाग और दिल्ली पुलिस की टीम को छापेमारी के दौरान दिल्ली की विभिन्न मस्जिदों में छिपे 800 से अधिक विदेशी मिले हैं।

हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक एक अधिकारी ने कहा है कि दिल्ली की मस्जिदों में अभी और भी विदेशी जमातियों के छिपे होने की आशंका है। वहीं मस्जिदों से निकाले गए सभी 800 विदेशियों को राजधानी के अलग-अलग अस्पतालों में क्वारंटाइन किया गया है। इस सभी की कोरोना से जुड़ी जाँच होना बाकी है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने कहा कि डर इस बात का है कि अगर इनमें से कुछ कोरोना पॉजिटिव पाए गए तो यह चेन लम्बी भी हो सकती है, जोकि बेहद खतरनाक होगी।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सुरक्षा विभाग से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि दिल्ली के उत्तर-पूर्वी जिले की मस्जिदों में लगभग 100 विदेशी, दक्षिण-पूर्व जिले की मस्जिदों में 200 और साउथ दिल्ली जिले की मस्जिदों में 170 और पश्चिम दिल्ली जिले की मस्जिद में 7 विदेशी जमाती पाए गए।

सुरक्षा एजेंसियों ने जाँच में पाया है कि 1 मार्च से 18 मार्च के बीच 2100 से अधिक विदेशी नागरिकों ने निजामुद्दीन के मजहबी कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। गौर करने वाली बात यह कि अभियान के दौरान मरकज में 216 विदेशी जमाती पाए गए थे, जबकि 824 जमाती पहले ही देश के विभिन्न हिस्सों के लिए निकल चुके थे।

जानकारी के मुताबिक दिल्ली निजामुद्दीन से निकाले गए 2300 जमातियों के बाद दिल्ली पुलिस ने एक संदेश देते हुए कहा था कि दिल्ली की तमाम मस्जिदों की भी जाँच होनी चाहिए, क्योंकि उनमें विदेशी जमातियों के होने की आशंका है। इसके बाद दिल्ली में 16 मस्जिदों की छापेमारी के लिए एक लिस्ट तैयार की गई थी। इसके बाद जाँचकर्ताओं ने पाया कि निजामुद्दीन से निकलकर 187 विदेशी और दो दर्जन से अधिक भारतीय जमाती दिल्ली की विभिन्न मस्जिदों के लिए निकले थे।

आपको बता दें कि पिछले महीने के अंत में दिल्ली पुलिस और और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने निजामुद्दीन में तबलीगी जमात मुख्यालय से करीब 2361 जमातियों कोरोना निकाला था। इनमें बड़ी संख्या में विदेशी जमाती भी थे। वहीं यहाँ से निकालने जाने के बाद सभी जमातियों को दिल्ली के अगल-अगल अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। चौंकाने वाली बात यह कि इनमें से अभी तक की जाँच रिपोर्ट में 259 लोगों में कोरोना से संक्रमित पाया गया है।

राष्ट्रीय राजधानी में बीते 24 घंटों के दौरान कोरोना वायरस संक्रमण के 91 नए मामले सामने आए और उनकी कुल संख्या बढ़कर 384 हो गई है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि 384 नए मामलों में से 259 निजामुद्दीन मरकज से संबंधित हैं। वहीं दिल्ली में हुई अब 6 मौतों में से 3 मौत निजामुद्दीन से निकले जमातियों की हुई है।

Air India ने टिकट बुकिंग 30 अप्रैल तक रोकी, सोशल मीडिया पर लोगों ने पूछा- लॉकडाउन बढ़ेगा क्या?

कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए लागू किया गया 21 दिन का लॉकडाउन 14 अप्रैल को खत्म हो रहा है। सरकार भी लॉकडाउन की अवधि बढ़ाने की बात को खारिज कर चुकी है, लेकिन एयर इंडिया ने शुक्रवार (अप्रैल 3, 2020) को एक बयान जारी लॉकडाउन पर सस्पेंस बढ़ा दिया है। 

सरकारी एयरलाइन कंपनी ने 30 अप्रैल तक टिकट बुकिंग नहीं करने का फैसला किया है। जबकि एक दिन पहले ही नागरिक उड्यन मंत्रालय के सचिव प्रदीप सिंह खरोला ने कहा था कि सभी एयरलाइन कंपनियां 14 अप्रैल यानी लॉकडाउन के 21 दिन पूरे होने के बाद से किसी भी तारीख के लिए टिकट बुक करने के लिए स्वतंत्र हैं। इसके बाद भी एयर इंडिया ने टिकट बुकिंग नहीं करने का फैसला किया। एयर इंडिया ने कहा, “14 अप्रैल को सरकार क्या फैसला लेती है, हम उसका इंतजार कर रहे हैं।”

एयर इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “यदि हम उड़ानों के लिए बुकिंग स्वीकार करते हैं और कुछ उड़ानों (अप्रैल की) के लिए बहुत कम संख्या में यात्री हैं, तो उन उड़ानों को संचालित करने के लिए व्यावसायिक रूप से व्यावहारिक नहीं हो सकता है। उस स्थिति में हम रद्द उड़ानों के यात्रियों को पैसे वापस करने के लिए उत्तरदायी होंगे। इसलिए हम अप्रैल में उड़ानों के लिए टिकटें फिर से बुक करने से पहले लॉकडाउन पर सरकार के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।”

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि कंपनी ने 30 अप्रैल तक की बुकिंग लेना बंद कर दिया है। आगे टिकट बुकिंग का फैसला लॉकडाउन पर फैसले के बाद लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि कंपनी ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि अगर वो बुकिंग करने के बाद उड़ान नहीं भरते तो यात्री उनके ऊपर केस कर सकते हैं, इसलिए उन्होंने अपने दायित्व को कम करने के लिए 30 अप्रैल तक बुकिंग लेना बंद कर दिया।

वहीं ट्रेन की यात्रा के लिए ऑनलाइन बुकिंग जारी है। रेलवे के मुताबिक ट्रेन के लिए बुकिंग बंद हुई ही नहीं थी सिर्फ ऑफलाइन बुकिंग पर रोक लगी है, ऑनलाइन बुकिंग जारी है। 14 अप्रैल के बाद ट्रेन के चलाए जाने की संभावना है। हालाँकि कोरोना वायरस के डर के कारण रेल टिकट की बुकिंग 20 फीसदी से ऊपर नहीं हो रही है। तेजस समेत कुछ ट्रेनों के लिए बुकिंग्स मिले हैं। रेल मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार आगामी 15 अप्रैल की ई-टिकट की बुकिंग लगभग दो लाख हुई है।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि 31 मार्च तक जनता कर्फ्यू की घोषणा होने पर लोगों ने टिकट बुकिंग की, लेकिन बाद में 21 दिन का लॉकडाउन होने के बाद 80 फीसदी लोगों ने टिकट रद्द कराने शुरू कर दिए। उन्होंने बताया कि देश मे कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही है, इस कारण आम लोग एडवांस रेल टिकट बुक कराने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। 

बता दें कि दुनिया के साथ-साथ भारत में भी कोरोना वायरस का कहर तेजी से बढ़ता जा रहा है। 180 से ज्यादा देशों में फैल चुका यह वायरस अब तक 45,000 से ज्यादा जानें ले चुका है। दुनिया भर में करीब 10 लाख लोग इससे संक्रमित हुए हैं। भारत में इस वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या 2547 हो गई है। बीते 24 घंटों में कोरोना के 478 नए मामले सामने आए हैं। देश में अभी तक 62 लोगों की मौत हो चुकी है, हालाँकि 157 मरीज इस बीमारी को हराने में कामयाब भी हुए हैं। देश के सभी राज्यों से इसके मरीज सामने आ रहे हैं।

‘हैदराबाद चलो, वहाँ जन्नत की सैर कराऊँगा’ – नर्सों को देख सीटी बजाते, छूने की कोशिश करते जमाती: एक और हॉस्पिटल से आई शिकायत

एक तरफ जहाँ पूरा देश कोरोना वायरस संकट से लड़ने में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ तबलीगी जमात के कुछ सदस्य अपनी बेहूदगी से बाज नहीं आ रहे। ये जमाती अस्पताल की नर्सों के साथ बदतमीजी कर रहे हैं। बता दें कि गाजियाबाद के एमएमजी अस्पताल में नर्सों के साथ बदतमीजी करने, अश्लील इशारे करने और बिना कपड़ों के घूमने के बाद अब इन तबलीगी जमात के सदस्यों ने सुंदरदीप आयुर्वेदिक कॉलेज की महिला कर्मियों के साथ अभद्रता की है। 

जमाती इनके साथ बदतमीजी करने के साथ ही अश्लील टिप्पणियाँ भी कर रहे हैं। कोई कह रहा है कि हैदराबाद चलो, वहाँ जन्नत की सैर कराएँगे, तो वहीं कोई कुछ और कह रहा है। सुंदरदीप आयुर्वेदिक कॉलेज ने इस संबंध में कॉलेज प्रशासन से शिकायत की है। इसमें कहा गया है कि सभी आरोपित मरकज से निकले हुए हैं और ये तरह-तरह से नर्सिंग कर्मियों के साथ अभद्रता कर रहे हैं। इलाज के दौरान ये जमाती कभी इन्हें हाथ लगाने की कोशिश करते हैं तो कभी इनको देखकर सीटी बजाते हैं, जन्नत दिखाने की बात कहते हैं। इसके अलावा भी कई अन्य तरीके से ये जमाती इनके साथ अभद्रता कर रहे हैं।

‘नर्स के सामने नंगे हो जाते हैं जमाती: आइसोलेशन वार्ड में गंदे गाने सुनते हैं, मॉंगते हैं बीड़ी-सिगरेट’

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इस मामले पर गाजियाबाद के सीएमओ डॉ एनके गुप्ता का कहना है कि सुंदरदीप आयुर्वेदिक चिकित्सालय में महिला स्टाफ के साथ अभद्रता की सूचना मिली है। पूरे मामले की जाँच कराई जा रही है। मामले में कड़ी कार्रवाई की जाएगी। महिला स्टाफ के साथ अभद्रता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस अस्पताल में निजामुद्दीन के मरकज से लौटे जमातियों के अलावा अन्य कई जमातों से लौटे करीब दो दर्जन से अधिक जमाती क्वारंटाइन वार्ड में भर्ती किए गए हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले एमएमजी हॉस्पिटल में इस तरह की हरकतें सामने आई थी, जिसके बाद नर्स के सामने नंगा होने और बीड़ी-सिगरेट की डिमांड करने को लेकर जमात के 6 लोगों पर एफआईआर दर्ज की गई। साथ ही इन्हें एमएमजी अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड से राजकुमार गोयल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में भी शिफ्ट कर दिया गया।

यूपी सरकार ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए इनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। साथ ही यह फैसला किया गया है कि प्रदेश में जहाँ भी तबलीगी जमात के लोगों को क्वारंटाइन किया गया है या फिर आइसोलेशन में रखा गया है, वहाँ न तो महिला स्वास्थ्यकर्मी की ड्यूटी लगेगी और न ही किसी महिला पुलिसकर्मी की तैनाती होगी।

नर्सों के साथ दुर्व्यवहार पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था, “ये ना कानून को मानेंगे, ना व्यवस्था को मानेंगे। ये मानवता के दुश्मन हैं। इन्होंने महिला स्वास्थ्यकर्मियों के साथ जो किया है वो जघन्य अपराध है। इन पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया जा रहा है। हम इन्हें छोड़ेंगे नहीं।” 

मुंबई हवाईअड्डे पर तैनात CISF के 11 जवान निकले कोरोना पॉजिटिव, 142 क्वारन्टाइन में

कोरोना संक्रमण से जुड़ी एक बेहद बुरी खबर सामने आ रही है। हमारी सुरक्षा में तैनात सुरक्षा बलों के 11 जवान कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के ये जवान मुम्बई के छत्रपति शिवा जी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे की सुरक्षा में तैनात थे। याद रहे कि सबसे पहले देश में वुहान कोरोना संक्रमण के पॉजिटिव केसेस उन्हीं में पाए गए थे जो बाहर से आए थे अथवा जो उनके सम्पर्क में आए थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बीते कुछ दिनों में अब तक CISF के 142 जवानों को क्वारन्टाइन किया जा चुका है, इनमें से 4 जवान कल बृहस्पतिवार को कोरोना पॉजिटिव निकले हैं और शेष 7 की रिपोर्ट आज आई है जो कोरोना पॉजिटिव है।

कोरोना के बढ़ते संक्रमण और उसके खिलाफ लड़ाई में फ्रंट पर खड़े डॉक्टर्स, मेडिकल स्टॉफ के लिए प्रधानमंत्री द्वारा घोषित की गई 50 लाख की राशि के बाद आज शुक्रवार को महाराष्ट्र के डिप्टी चीफ मिनिस्टर अजीत पवार ने मुम्बई की एक बैठक के बाद घोषणा की कि यदि ड्यूटी पर रहते हुए किसी पुलिसकर्मी की कोरोना वायरस के कारण मृत्यु हो जाती है तो सरकार उन पुलिसकर्मियों के परिजनों को 50 लाख रुपए की ‘अनुग्रह राशि’ देगी। इसके अलावा इस बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में फ्रंट पर मौजूद पुलिस, हेल्थ, मेडिकल शिक्षा आदि विभागों को प्राथमिकता पर उनके शेष वेतन का भुगतान किया जाएगा।

वहीं दिल्ली में आज शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रेस से बातचीत में कोरोना मामलों के संदर्भ में सरकार की तरफ से जानकारी मुहैय्या करवाई। जिसके अनुसार अभी तक पूरे देश में कोरोना वायरस संक्रमण के 2301 पॉजिटिव मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 56 लोगों की इस महामारी के चलते मौत हो चुकी है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने यह भी बताया कि बीते दो दिनों में ही अब तक तबलीगी जमात के सदस्यों की वजह से 647 कोरोना संक्रमित मरीज सामने आ चुके हैं जो देश के 14 राज्यों में फैले हुए हैं। इसके अलावा पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के कारण हुई 12 मौतों में से भी कई तबलीगी जमात से जुड़े हुए हैं।

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क्या आप सोच सकते हैं कि ऐसे समय में, जब देश-दुनिया के तमाम लोग कोरोना की महामारी से आतंकित हैं, कुछ लोग व्यवस्था को बनाए रखने में अपना दिन-रात झोंक देने वाले डॉक्टर्स से बदसलूकी कर सकता है? खुद को कोरोना का मरीज बताकर महिला डॉक्टर्स को अश्लील संदेश भेज सकता है? उन्हें अपनी सेक्सुअल डिज़ायर्स बता सकता है? पाकिस्तान में कोरोना वायरस या उसके लक्षणों से पीड़ित लोगों की मदद करने को बनाए गए ऐप्स पर ऑनलाइन सेवा दे रहीं महिला डॉक्टरों को कुछ इस तरह कि मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है।

वर्तमान में डॉक्टर्स में से बहुत से लोग अस्पतालों में मरीजों की सेवा में अथक परिश्रम कर रहे हैं। अपने परिवारों से खुद को अलग रख रहे हैं और अपने जीवन को खतरे में डाल रहे हैं। रोगियों का परीक्षण और उपचार कर रहे हैं। कई लोगों ने जागरूकता बढ़ाने के लिए अपनी सेवाओं को स्वेच्छा से दिया है और संक्रमण के डर के बावजूद लोगों की किसी भी चिंता का जवाब देने के लिए खुद को उपलब्ध कराया है।

यह भी देखा जा रहा है कि सोशल मीडिया पर लोग स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति आभार व्यक्त कर रहे हैं, उन्हें नायक और योद्धा कह रहे हैं। निश्चित रूप से इस समय डॉक्टर्स वह सम्मान प्राप्त कर रहे हैं, जिसके वे हकदार हैं। खैर, यह पुरुष डॉक्टर की कहानी हो सकती है। लेकिन पाकिस्तान में महिला डॉक्टर्स के बारे में यह दावा करना जरा मुश्किल है।

एक डॉक्टर का आधा से ज्यादा कीमती समय ऐसे लोगों को ब्लॉक और रिपोर्ट करने में व्यतीत हो रहा है जो उनके लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग कर रहे हैं।

पाकिस्तानी समाचार पत्र डॉन की एक रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया पर पाकिस्तान की कई ऐसी डॉक्टर्स, नर्सों और महिला मेडिकल स्टाफ ने अपने बुरे अनुभव शेयर किए हैं। ये महिला डॉक्टर मोबाइल एप्लीकेशंस के जरिए या ऑनलाइन ही लोगों की मदद करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन इनसे आपत्तिजनक बातें की जा रही हैं। मरीज बनकर ये लंपट बात शुरू करते हैं और फिर निजी होने लगते हैं। यही नहीं, कई बार ये लोग डॉक्टर्स को अश्लील तस्वीरें और पॉर्न वेबसाइट्स के लिंक भी भेज रहे हैं।

दरअसल, ये ऐसे ऐप या पोर्टल्स हैं, जिसके माध्यम से मरीज सीधे महिला डॉक्टरों से जुड़ सकते हैं और चैट, ऑडियो या वीडियो कॉल के माध्यम से परामर्श ले सकते हैं। लेकिन लोग इसका भी दुरुपयोग करने से बाज नहीं आ रहे हैं।

डॉक्टर फिजा ने लिखा है कि आप टेक्स्ट को इग्नोर कर सकते हैं लेकिन कई बार ये लोग पैसे देकर अपॉइंटमेंट बुक करते थे और फिर अश्लील मेसेज किया करते थे। कभी उम्र पूछते थे, कभी मैरिटल स्टेटस तो कभी सीधा सेक्स की डिमांड करते थे। ये लोग रोग दूर करने के नाम पर ग्राफिक्स और अश्लील वीडियो से गेलेरी भर देते हैं।

घर बैठकर सिर्फ मस्ती करने के बहाने ये लोग स्टाफ की व्यक्तिगत जिंदगी को भी नुकसान पहुँचाते हैं क्योंकि कई नर्स और डॉक्टर्स को मानसिक रूप से इतना परेशान किया गया कि उन्हें अपना पेशा छोडना पड़ा।

एक डॉक्टर का कहना है कि पिछले शनिवार को उन्होंने अपने एप को अगले तीन महीनों के लिए मुफ्त कर दिया ताकि लोग इस महामारी के दौरान इसका इस्तेमाल कर सकें, और COVID-19 के लक्षणों, स्क्रीनिंग आदि के बारे में पूछने के लिए उन्हें तकलीफ उठाकर अस्पताल नहीं जाना पड़ेगा। लेकिन हुआ यह कि लोगों ने उनकी डॉक्टर्स से अश्लील बातें करनी शुरू कर दीं।

डॉक्टर्स का कहना है कि इस प्रकार की हरकतों के बढ़ने से स्टाफ को निराशा में अपनी नौकरी के बारे में सोचने पर मजबूर होना पड़ता है।

तीन दिन से भूखी लड़कियों ने PMO में किया फोन, घंटे भर में भोजन लेकर दौड़े अधिकारी, पड़ोसियों ने भी नहीं दिया साथ

घटना बिहार के भागलपुर जिले की है पर मरी हुई संवेदनाओं की ऐसी नजीरें हमारे आसपास भी खूब मौजूद हो सकतीं हैं जहाँ बिन माँ बाप की कुछ बच्चियाँ जो दूसरों के घरों में चूल्हा-चौका और बर्तन साफ करके स्वाभिमान पूर्वक अपना जीवन यापन करती आईं हों, आजकल लॉकडाउन जैसी विषम परिस्थितियों में काम न कर पाने के कारण भूख से मरने को अभिशप्त छोड़ दी गईं हों।

लेकिन भला हो वर्तमान सरकारों का जिन्होंने अपनी तरफ से कोई कसर बाकी रख नहीं छोड़ी है ऐसे लोगों की मदद करने में जिनके पास फिलहाल सरकार के अलावा कोई नहीं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह कहानी 18 साल की गौरी और उसकी दो छोटी बहनें आशा और कुमकुम की है। जो जिले के खंजरपुर इलाके में रहतीं हैं। ये बहनें पिछले तीन दिनों से भूखी थीं, काम आजकल था नहीं, माँ-बाप इनके अब जीवित हैं नहीं, और पड़ोसियों ने इन्हें जिन्दा रहने भर को भी रोटी देना गँवारा नहीं समझा था।

भूख से मरने की आई इस नौबत के बीच देवदूत की तरह काम आई विदेश मंत्रालय की वो हेल्पलाइन डेस्क जिसके कांटेक्ट नंबर को इन लड़कियों ने बृहस्पतिवार को अख़बार में छपा देखा था। जिसके बाद तीन दिन से भूखी इन बच्चियों ने काेविड-19 के लिए जारी केंद्र सरकार की हेल्प डेस्क 1800118797 पर फोन कर अपनी स्थिति के बारे में जानकारी दी। और जैसे चमत्कार ही हो गया। एक घंटे भीतर ही इन बच्चियों के पास अधिकारी भोजन लिए दौड़े-दौड़े आए।

तस्वीरों से साफ़ पता चलता है कि बच्चियों के चेहरे पर न सिर्फ भोजन पाने की ख़ुशी चमक रही है बल्कि वे सरकार के इस कदम से अनुग्रहीत भी मालूम देतीं हैं। तीन बहनों में सबसे बड़ी 18 वर्षीय गौरी बताती है कि उनके माँ-बाप कपड़े धोने का काम करते थे जिससे किसी प्रकार परिवार का जीवन-यापन हो जाया करता था पर उनकी मृत्यु के बाद उस पर ही खुद को तथा खुद की बहनों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी आ गई। गौरी बताती है कि वह तबसे चौका-बर्तन कर के गुजारा कर रही है जिसमें कभी कभार उसकी छोटी बहन उसकी सहायता कर दिया करती है। लॉकडाउन के बाद जहाँ एक दो दिन पड़ोसियों ने उनकी मदद की फिर उसके बाद उन्होंने भी अपने हाथ खींच लिए।

गौरी कहती है कि उसको इस बात का यकीन ही नहीं होता था कि वो फोन करेगी और कुछ ही देर बाद सरकार उसके लिए खाने का इंतजाम कर देगी। जगदीशपुर के सीओ सोनू भगत ने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय से बिहार आपदा प्रबंधन विभाग को फोन आया और इन तीनों लड़कियों को तत्काल मदद करने का निर्देश दिया गया। जिसके बाद वे आपदा प्रबंधन विभाग के निर्देश पर इन बहनों से मिले। ये लड़कियाँ भूखी थीं जिनके पास घर में खाने को कुछ भी नहीं था। सीओ ने बताया कि लड़कियों को राशन आदि भी उपलब्ध करवाया जाएगा।