कोरोना संक्रमण के खिलाफ लड़ाई में गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यों में क्वारन्टाइन सुविधाओं और दूसरे इंतजामों के लिए आज 11,092 करोड़ रूपए की संस्तुति कर दी है।
Home Minister Amit Shah approves release of Rs 11,092 cr to states to set up quarantine facilities, other steps: MHA
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार गृह मंत्री ने बताया कि बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री द्वारा राज्य के मुख्यमंत्रियों को दिए गए आश्वासन के अलोक में यह निर्णय लिया गया है। मंत्रालय ने अपने स्टेटमेंट में कहा कि राज्यों को यह पैसा ‘स्टेट डिजास्टर रिस्क मैनेजमेंट फंड’ के अंतर्गत आवंटित हुआ है।
केंद्र सरकार ने यह पैसा वर्ष 2020-21 के लिए तय ‘स्टेट डिजास्टर रिस्क मैनेजमेंट फंड’ की पहली अग्रिम किश्त के रूप में राज्यों के लिए रिलीज किया है जिससे राज्यों के पास कोरोना महामारी से लड़ने के लिए मौजूद फंड में बढ़ोत्तरी हो सके।
इस फंड का इस्तेमाल क्वारन्टाइन सुविधाओं को बढ़ाने, सैंपल कलेक्शन, स्क्रीनिंग; अतिरिक्त लैब सुविधाओं की व्यवस्था करने, वेंटिलेटर्स आदि की खरीदी में तथा डॉक्टर्स, स्वास्थ्य कर्मियों पुलिस आदि की निजी सुरक्षा जैसे मास्क्स आदि खरीदने में किया जाएगा। साथ ही थर्मल स्कैनर्स, सरकारी अस्पतालों में एयर प्योरिफायर आदि की व्यवस्था में भी इस पैसे का उपयोग किया जाएगा।
इसके साथ-साथ वित्त मंत्रालय ने भी कुल 17,287 करोड़ रूपये राज्यों के लिए रिलीज कर दिए हैं जिससे वे Covid-19 महामारी से जूझने में अधिक सक्षम हो सकें। इसमें से 6,195 करोड़ रूपये 15 वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार ‘राजस्व घाटा’ मद में 14 राज्यों को मुहैय्या करवाया गया है।
कोरोना वायरस के प्रकोप से एक ओर जहाँ पूरे देशभर में लोग एकजुट होकर एक दूसरे की सुरक्षा का खयाल रख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे भी मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें कुछ लोग जानबूझकर जगह-जगह पर इस वायरस के संक्रमण को आगे बढाने की कोशिश करते हुए देखे जा रहे हैं। दुर्भाग्य की बात यह है कि ऐसा करने वालों में अब तक मुस्लिम समुदाय के लोगों के नाम सामने आए हैं।
कल ही नासिक पुलिस ने एक ऐसे युवक को गिरफ्तार किया, जो रुपयों की गड्डी से अपने नाक-मुँह पोंछकर कोरोना वायरस को अल्लाह का अजाब बता रहा था। इसके बाद एक वीडियो सोशल मीडिया पर देखा गया, जिसमें ठेले पर फल बेचने वाला फलों को जूठा कर रहा है और उस पर अपना थूक लगा रहा है।
पुलिस ने शेरू मियाँ के खिलाफ धारा 269 और 270 के तहत मामला दर्ज किया है। फिलहाल शेरू मिया रायसेन में अपने घर पर हैं। शेरू मिया की बेटी ने कहा है कि अब्बू की तबीयत खराब है और ऐसा वो नोट गिनने की आदत के कारण करते हैं।
FIR की कॉपी –
(मीडिया फाइल )
सोशल मीडिया पर यह वीडियो वायरल होते ही इसके खिलाफ एक युवक ने पुलिस से शिकायत की। जाँच में पता चला कि यह ठेले वाला मध्य प्रदेश के रायसेन में तिपट्टा बाजार के पास टीन वाली मस्जिद के पास ठेली लगाने वाला शेरू मियाँ है जो कभी-कभार रायसेन के मुख्य बाजार में फलों का ठेला लगाते हैं।
दैनिक भास्कर की एक ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि शेरू मियाँ की गिरफ्तारी के बाद उसकी बेटी फिजा का कहना है कि पुलिस ने उनके अब्बू पर मामला दर्ज करने के बाद उनकी पिटाई कर घर वापस भगा दिया।
उसने कहा कि सोशल मीडिया पर यह वीडियो वायरल होने के बाद उनके पास कई जगह से फोन आए। बेटी ने शिकायत करते हुए कहा कि आखिर वो एकाएक गुनाहगार क्यों बन गए हैं? फलों पर थूक लगाने वाले शेरू मियाँ की बेटी फिजा का कहना है कि किसी ने उनसे पहले पूछा क्यों नहीं और उनके अब्बू की हालत क्यों नहीं देखी। साथ ही उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि ऐसे माहौल में आगे क्या होगा?
रिपोर्ट के अनुसार, फिजा ने कहा कि उनके अब्बू वीडियो में जैसा करते दिख रहे हैं वह सिर्फ उनकी नोट गिनने की पुरानी आदत है और वो अकसर घर में भी कभी भी ऐसी हरकतें करते रहते हैं। फिजा ने कहा कि जब उनके अब्बू ज्यादा तनाव में होते हैं तो ऐसा करने लगते हैं।
फिजा का कहना है कि उसके अब्बू का यह वीडियो कुछ महीने पुराना है और वह अब तबियत खराब होने के कारण कभी कभार ही फलों की ठेली लगाते हैं।
दरअसल, सोशल मीडिया पर निरंतर ऐसे वीडियो सामने आ रहे हैं जिसमें मुस्लिम युवक या तो कोरोना को अल्लाह का अजाब बताते देखे जा रहे हैं या फिर कुछ मौलवी कोरोना से भारत में 50 करोड़ लोगों की मौत की दुआ माँग रहे हैं। कुछ युवाओं का टिकटोक पर यह कहते हुए भी देखा जा रहा है कि नमाज पढ़कर ही कोरोना वायरस से ठीक हो सकते हैं।
ऐसे में शेरू मियाँ के इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर लोगों को दहशत में डाल दिया था। पहली बार देखने पर यह वीडियो यही संदेश देते नजर आ रहे हैं कि मुस्लिम समुदाय जानबूझकर इस वायरस को फैलाने का प्रयास कर रहा है। इसका सबसे ज्यादा नुकसान मुस्लिम समुदाय की छवि को होते नजर आ रहा है। खासतौर से तबलीगी जमात के कारनामे के बाद से लोग बेहद घबराए हुए हैं।
कोरोना महामारी से लड़ने के लिए लागू किए गए देशव्यापी लॉकडाउन के बावजूद देश में कोरोना वायरस संक्रमण तेजी से बढ़ता जा रहा है। जिसके पीछे मुख्य वजह तबलीगी जमात नजर आती है। आज शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रेस से बातचीत में कोरोना मामलों के संदर्भ में सरकार की तरफ से जानकारी मुहैय्या करवाई। जिसके अनुसार अभी तक पूरे देश में कोरोना वायरस संक्रमण के 2301 पॉजिटिव मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 56 लोगों की इस महामारी के चलते मौत हो चुकी है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने यह भी बताया कि बीते दो दिनों में ही अब तक तबलीगी जमात के सदस्यों की वजह से 647 कोरोना संक्रमित मरीज सामने आ चुके हैं जो देश के 14 राज्यों में फैले हुए हैं। इसके अलावा पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के कारण हुई 12 मौतों में से भी कई तबलीगी जमात से जुड़े हुए हैं।
संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि देश में पिछले 24 घंटों में 336 नए कोरोना पॉजिटिव मामले सामने आए हैं। उनके अनुसार मरकज के एक कार्यक्रम से इतने सारे मामले बढ़ गए हैं जिसने हमारे अब तक के सारे प्रयास फेल कर दिए हैं। दिल्ली में कोरोना के 141 नए मामलों में से 129 तबलीगी जमात से जुड़े हुए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने प्रेस से यह भी कहा कि हमें समझना होगा कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई चल रही है। ऐसे में हमारी एक गलती की वजह से हम और पीछे चले जाएँगे।
प्रेसवार्ता में मौजूद गृह मंत्रालय की अधिकारी पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने तबलीगी जमात के विदेशी सदस्यों पर वीजा नियमों की अवहेलना करने पर, की गई कार्यवाही के संबंध में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तब्लीगी जमात के 960 विदेशियों के वीजा कैंसिल कर दिए गए हैं, तथा उन्हें ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। साथ ही उन्होंने डॉक्टरों और मेडिकल स्टॉफ पर हो रहे हमलों के संदर्भ में जानकारी दी कि गृह मंत्रालय ने सभी राज्य सरकारों को पत्र लिखकर मेडिकल स्टॉफ तथा स्वास्थ्यकर्मियों आदि पर हो रहे हमलों के विषय में कठोर एक्शन लेने और कोरोना महामारी के विरुद्ध जारी इस लड़ाई में शामिल डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों आदि की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।
कल्पना कीजिए आप गैर हिंदी भाषी प्रदेश में हैं। आपको जाँच के लिए अस्पताल ले जाया जाता है। आपको वहॉं की भाषा समझ में नहीं आती। तो आप क्या करेंगे? आप डॉक्टर पर थूकेंगे? आप नर्स के सामने अपनी पतलून उतार लेंगे? आप बीड़ी-सिगरेट मॉंगेंगे? या फिर आप अश्लील गाने सुनेंगे और अस्पताल की महिला कर्मचारियों को भद्दे इशारे करेंगे?
आप यह सब कर सकते हैं, क्योंकि आपको वहॉं की भाषा समझ में नहीं आती। ये हम नहीं कह रहे। ऐसा मानना है कि दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन का। जैन केजरीवाल कैबिनेट में स्वास्थ्य विभाग का जिम्मा सॅंभालते हैं। बकौल जैन, “एक तो भाषा की परेशानी है। ज्यादातर लोगों को ना तो हिंदी आती है और ना ही अंग्रेजी आती है। वे दूर-दूर के राज्यों के हैं। कई विदेशी हैं। दूसरा उनको लगता है कि हमको अस्पताल में क्यों रखा गया है। पुलिस से मदद मॉंगी गई है।” जैन ने यह बात तबलीगी जमात के सदस्यों द्वारा अस्पताल स्टाफ के साथ दुर्व्यवहार को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कही।
उल्लेखनीय है कि नियम-कायदों की धज्जियॉं उड़ाकर तबलीगी जमात ने दिल्ली में मजहबी कार्यक्रम का आयोजन किया था। इसमें देश के अलग-अलग राज्यों के लोगों के अलावा विदेशियों ने भी शिरकत की। खुद दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बताया था कि निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के मरकज से अभियान चलाकर 2361 लोगों को निकाला गया था। ये दिल्ली के अलग-अलग अस्पतालों और क्वारंटाइन में हैं। हालत यह है कि बीते दो दिनों में देश के 14 राज्यों में 647 कोरोना वायरस संक्रमण के ऐसे मामलों की पुष्टि हुई है जो मरकज से जुड़े हैं।
If we look at cases related to Tableeghi Jamaat,in last 2 days around 647 confirmed cases related to it found in 14 states-Andaman & Nicobar, Assam, Delhi, Himachal, Haryana, J&K, Jharkhand, Karnataka, Maharashtra, Rajasthan, Tamil Nadu, Telangana, Uttarakhand & UP: Lav Aggarwal pic.twitter.com/clXPB28rGk
जब इनलोगों को यहॉं से निकाला जा रहा था तो उन्होंने सड़क और पुलिसकर्मियों पर थूक कर संक्रमण फैलाने की कोशिश की। इसके बाद भी इनकी मनमानी जारी है। दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में जॉंच में इनकी आनकानी देखते हुए पुलिस तैनात करनी पड़ी। यह मामला केवल दिल्ली तक ही सीमित नहीं है। दिल्ली से सटे गाजियाबाद के एक अस्पताल में तो जमात के लोग हदें पार करते हुए नर्सों के सामने नंगे हो गए। हैदराबाद के गॉंधी अस्पताल में यहॉं से संक्रमित होकर गए एक शख्स ने डॉक्टर पर हमला किया। उस पर थूका।
आप गिनते जाएँगे, लेकिन पिछले कुछ दिनों में सामने आए जमात सदस्यों के कारनामें खत्म नहीं होंगे। बावजूद इनकी करतूतों पर पर्दा डालने की कोशिश करते हुए ‘भाषा’ का जैन का तर्क समझ से परे है। वैसे जमात की करतूत पर पर्दा डालने की कोशिश करने वाले जैन आप के अकेले नेता नहीं है। मुख्यमंत्री केजरीवाल के करीबी माने जाने वाले विधायक अमानतुल्लाह खान ने ट्वीट कर कहा है, “मुख़्तार अब्बास नक़वी और आरिफ़ मुहम्मद खॉं जैसे दलाल बताएँगे कि मौलाना साद साहब जैसे बुज़ुर्ग क्या हैं और मरकज़ निज़ामुद्दीन में क्या होता है। इन जैसे लोगों ने कोरोना को भी मुस्लिम बना दिया अफ़सोस।” नकवी केंद्र सरकार में मंत्री और आरिफ मुहम्मद केरल के राज्यपाल हैं। जिस मौलाना साद का अमानतुल्लाह बचाव कर रहे हैं, वह मुकदमा दर्ज होने के बाद से फरार है। जिस मरकज के लिए वे नकवी और आरिफ मुहम्मद को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं, वह देश में कोरोना वायरस संक्रमण का एपिक सेंटर बनकर उभरा है।
मुख़्तार अब्बास नक़वी और आरिफ़ मुहम्मद खां जैसे दलाल बताएंगे कि मौलाना साद साहब जैसे बुज़ुर्ग क्या हैं और मरकज़ निज़ामुद्दीन में क्या होता है इन जैसे लोगों ने कोरोना को भी मुसलमान बना दिया अफ़सोस।
— Amanatullah Khan AAP (@KhanAmanatullah) April 2, 2020
यह भी दीगर है कि लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों के पलायन और यूपी बॉर्डर पर अचानक जुटी भीड़ को लेकर भी दिल्ली की आप सरकार आरोपों के घेरे में है। घर लौटे मजदूरों का कहना है कि उनके बिजली-पानी के कनेक्शन काट दिए गए। उनसे कहा गया कि बॉर्डर से बसें उन्हें लेकर उनके घरों तक जाएगी। डीटीसी की बसों से उन्हें वहॉं तक पहुॅंचाया गया।
आज जिस तरह से तबलीगी जमात के लोगों की करतूतों पर पर्दा डालने की कोशिश हो रही है, ऐसा उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के हिंदू विरोधी दंगों के दौरान भी देखने को मिला था। पार्षद ताहिर हुसैन इन दंगों का मुख्य सूत्रधार बनकर उभरा था। उसके घर से हिंदुओं को निशाना बनाकर पेट्रोल बम फेंके गए। आईबी के अंकित शर्मा की हत्या में भी उसका हाथ बताया जाता है। हालॉंकि जब ताहिर की संलिप्तता को लेकर लगातार तथ्य सामने आने लगे तो आप ने उसे निलंबित कर पल्ला झाड़ने की कोशिश की। लेकिन, अमानतुल्लाह जैसे आप विधायक फिर भी उसका बचाव करते रहे। अमानतुल्लाह ने आरोप लगाया था कि मुसलमान होने के कारण ताहिर को फॅंसाया गया है।
देश में जारी लॉकडाउन और कोरोना महामारी से जंग लड़ने के दौरान विभिन्न समस्याओं के लिए जूझ रहे देश वासियों के लिए तमाम तरह की सामाजिक संस्थाएँ सहयोग के लिए सामने आ रही हैं। कुछ इसी तरह अपनी पहचान के अनुरूप विश्व का सबसे बड़ा सामाजिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ इस समय असहाय लोगों की मदद करने में जुटा हुआ है। इसी के तहत दिल्ली के जीबी रोड़ स्थित रेडलाइट इलाके में आरएसएस के कार्यकर्ता वैश्यावृत्ति से जुड़ी महिलाओं को खाद्य सामग्री वितरित की।
Delhi: RSS workers distribute ration among sex workers in GB Road. “We prepared a list of 986 sex workers living here & categorized them into 250 joints (groups of workers living together). Today, we distributed 250 kits,” says Anil Gupta, Joint General Secretary, Delhi RSS. pic.twitter.com/09grZBCx1Q
दिल्ली के रेडलाइट एरिया से आई तस्वीरों में आप देख सकते हैं कि आरएसएस के कार्यकर्ता वैश्यावृत्ति से जुड़ी महिलाओं को आवश्यक वस्तुओं की एक किट वितरित कर रहे हैं। दिल्ली प्रांत कार्यवाहक अनिल गुप्ता के मुताबिक जीबी रोड़ इलाके में 986 सेक्स वर्कर कार्य करती हैं। इन सभी की संघ के कार्यकर्ताओं ने पहले एक सूची तैयार की और फिर इनको 250 जोड़ों में विभाजित किया। इसके बाद सभी 250 जोड़ों को आवश्यक वस्तुओं की एक-एक किट वितरित की।
यह पहली बार नहीं इससे पहले भी देश में लॉकडाउन होने के बाद से ही संघ के स्वयंसेवक और दायित्ववान कार्यकर्ता पात्र लोगों की मदद करने में लगे हुए हैं। पिछले दिनों ऐसी ही एक खबर राजस्थान के एक जिले आई जहाँ संघ के स्वयंसेवक एक स्थान पर बड़ी मात्रा में गरीब मजदूरों के लिए भोजन पैकेट बनाते हुए देखे गए। वहीं पिछले दिनों एक केरल के एक अस्पताल में संघ के स्वयंसेवक साफ-सफाई करते हुए नजर आए।
इससे पहले भी आरएसएस के स्वयंसेवक सिर पर काली टोपी और खाकी हाफ नेकर पहने हाथ में सेनेटाइजर लेकर लोगों के हाथ साफ कराने में लगे हुए थे। वहीं दूसरी दूसरी तस्वीर में स्वयंसेवक हाथ में लाउडस्पीकर लिए लोगों को कोरोना से बचाव के उपाय बता रहे थे। साथ ही लोगों को घरों से न निकलने की अपील कर रहे थे। इतना ही नहीं स्वयंसेवक घर-घर जाकर लोगों को मास्क भी बाँटे।
आपको बता दें कि संघ नेतृत्व ने देश में लॉकडाउन घोषित होते ही अपने स्वयंसेवकों से अपने घरों में ही शाखा, मिलन, मंडली जैसे कार्यकर्म आयोजित करने का अपील की थी। साथ ही स्वयंसेवकों से आह्वाहन किया था कि वह घरों से निकलकर अपने आस-पास यथासंभव लोगों की मदद करें।
प्रधानमंत्री मोदी ने जब से वुहान कोरोना वायरस से लड़ने के लिए PM CARES फण्ड की स्थापना की है, PM CARES फंड और PMNRF फंड के बीच मौजूद समानताओं और विषमताओं पर विचार विमर्श शुरू है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय सहायता कोष यानी PMNRF की स्थापना 1948 में की गई थी जिसका प्रारम्भिक उद्देश्य विभाजन की विभीषिका के बाद पाकिस्तान से खदेड़े गए, जान बचाकर भागे लोगों की सहायता करना था। आज के समय में PMNRF का उपयोग मुख्यतः प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, चक्रवात, भूकंप, आदि में मारे गए बेघर हुए लोगों की सहायता करना, साथ ही बड़ी दुर्घटनाओं, दंगों के पीड़ितों की सहायता करना हो चुका है।
इसके अतिरिक्त इस फंड का प्रयोग असहाय अथवा निर्धन व्यक्तियों के लिए आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं यथा हार्ट सर्जरी किडनी ट्रांसप्लांटेशन कैंसर के इलाज आदि में मदद करने के लिए भी किया जाता है। यह फंड पूर्णतः जन सहयोग पर निर्भर करता है जिसके लिए बजटीय प्रावधानों की व्यवस्था नहीं है। यह कोष कामर्शियल बैंकों और दूसरी एजेंसियों के द्वारा निवेशित किया जाता है जिससे धन की निकासी प्रधानमंत्री की सहमति से ही होती है।
यहाँ यह भी ध्यान रखने की जरूरत है कि PMNRF फंड संसद द्वारा गठित नहीं किया गया है। देश के विभाजन के समय प्रधानमंत्री नेहरू ने कहा था कि हालाँकि भारत सरकार अपने कोष का उपयोग कर विस्थापितों को दोबारा बसाने में लगी हुई है, किन्तु यह कोष पूरा नहीं पड़ रहा। अतः विस्थापितों को दोबारा खड़ा करने के लिए राष्ट्र के सामूहिक प्रयासों की जरूरत है। इस उद्देश्य के साथ PMNRF की स्थापना की गई थी जो कालांतर में सभी प्रकार की आकस्मिक दुर्घटनाओं, आपदाओं आदि के समय उपयोग किया जाने लगा।
हालाँकि, जो तथ्य तबसे आज तक कम ही लोग जानते हैं, वह है – PMNRF कोष की मैनेजिंग कमेटी में हमेशा से कॉन्ग्रेस पार्टी के अध्यक्ष की मौजूदगी थी। जिस समय फंड बनाया गया उसकी मैनेजिंग कमेटी में निम्न लोग शामिल थे :
i) भारत का प्रधानमंत्री ii) भारतीय राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस का अध्यक्ष iii) देश के उप प्रधानमंत्री iv) देश का वित्त मंत्री v) टाटा ट्रस्ट का प्रतिनिधि vi) FICCI द्वारा चुना गया, इंडस्ट्री और कॉमर्स जगत का प्रतिनिधि
1948 Notification announcing formation of PMNRF by PM Jawaharlal Nehru
यहाँ तक की 1985 में किसी समय इस कोष की मैनेजिंग कमेटी ने कोष के प्रबंधन से संबंधित सभी अधिकार प्रधानमंत्री को सौंप दिए। प्रधानमंत्री को अधिकार मिल गया कि वह अपने प्रतिनिधि के रूप में किसी को “कोष का सचिव” नियुक्त कर सकता था जिसके पास अन्य बातों के अलावा यह भी कोष के बैंक अकाउंट संचालित करने का भी अधिकार था। बतातें चलें कि यह निर्णय उस वक्त लिया गया जब राजीव गाँधी देश के प्रधानमंत्री थे।
वुहान कोरोना वायरस के इस संकट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने PM CARES फंड लॉन्च किया है, जिसमें सहयोग करने के लिए उन्होंने पूरे देश का आह्वाहन किया है। यह एक आपातकालीन कोष है जिसका उपयोग कोरोना वायरस से निपटने के लिए किया जाएगा। PM CARES यानी ‘प्राइम मिनिस्टर सिटीजन्स असिस्टेंस एंड रिलीफ इन इमरजेंसी सिचुएशन’ कोष की स्थापना पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट के रूप में की गई है। प्रधानमंत्री जहाँ इस ट्रस्ट के चेयरमैन हैं, वहीं देश के रक्षा मंत्री, वित्त मंत्री तथा गृह मंत्री इस ट्रस्ट के सदस्य हैं।
जैसे ही यह कोष लॉन्च हुआ, देश के हर ख़ास ओ आम से इसे अपार सहयोग मिलना प्रारम्भ हो गया। जिसमें आम जनता से लेकर उद्योगपतियों फिल्म स्टार्स आदि ने अपना अपना अंशदान करना शुरू कर दिया। यहाँ ये सवाल लगातार पूछा जा रहा कि आखिर PM CARES फंड नामक नए फंड की जरूरत क्या थी जब कि PMNRF मौजूद था ही।
बिजनेस स्टैंडर्ड ने अपने एक आर्टिकल में लिखा है कि PM CARES फंड PMNRF की तुलना में कहीं ज्यादा लोकतान्त्रिक है। वो लिखता है:
PMNRF के अंतर्गत कोष से पैसे का वितरण पूरी तरह प्रधानमंत्री के निर्देशों पर आधारित था। जबकि मोदी के PM CARES में निर्णयकर्ताओं में मोदी के साथ भारत सरकार के तीन महत्त्वपूर्ण पोर्टफोलियो संभालने वाले मिनिस्टर भी शामिल हैं। ट्रस्ट के चेयरमैन होने के नाते अभी भी मोदी के ही पास अपने मंत्रियों की किसी भी सलाह आदि पर अंतिम निर्णय लेने का अधिकार सुरक्षित है लेकिन PMNRF की भाँति मोदी ही ‘जज वकील और जल्लाद’ की भूमिका में नहीं हैं। इस तरह से मोदी ने खुद ही खुद के ऑफिस की शक्तियों पर अंकुश लगाने का काम किया है।
PMNRF और PM CARES के बीच का अंतर:
Difference between PM CARES Fund and PMNRF (By Business Standard)
संक्षेप में PM CARES, PMNRF की तुलना में कहीं ज्यादा पारदर्शी और सक्षम है हालाँकि, PMNRF भी समय-समय पर नागरिकों की मदद के लिए आगे आता रहा है। यहाँ यह भी बताते चलें कि PM CARES में 13 विशेषज्ञों को भी शामिल करने का प्रावधान है जो अपनी सेवाएं देश के लिए निःशुल्क प्रदान करेंगे। इसमें सलाहकारी बोर्ड के तौर पर भी 10 व्यक्तियों को शामिल करने की व्यवस्था है- जिन्हें ट्रस्टीज द्वारा डॉक्टरों, स्वास्थ्य सेवा प्रोफेशनलों, अकादमिक जगत के लोगों, अर्थशास्त्रियों और वकीलों में से चुना जाएगा।
बीजेपी के एक सीनियर नेता ने PM CARES पर कॉन्ग्रेस के विरोध को खुद के स्वार्थों से प्रेरित बताते हुए कहा कि वे सिर्फ इसलिए विरोध कर रहे हैं क्योंकी PM CARES में PMNRF की भाँति कॉन्ग्रेस अध्यक्ष को जगह नहीं दी गई है। बीजेपी नेता ने आगे कहा, ” इस फंड में बीजेपी से भी कोई नहीं है- ट्रस्ट में जो भी लोग हैं वो सरकार में अपनी पोजीशन की वजह से हैं।”
तबलीगी जमात के नेता मौलाना साद कांधलवी पर शिकंजा कसता जा रहा। दिल्ली पुलिस ने मौलाना समेत 7 लोगों को नोटिस जारी किया है। इसमें इनसे 26 सवालों के जवाब मॉंगे गए हैं। मुक़दमा दर्ज के बाद से ही दिल्ली पुलिस इनकी तलाश में जगह-जगह छापेमारी कर रही है।
दिल्ली पुलिस के क्राइम ब्रांच ने नोटिस जारी कर मौलाना साद से 26 सवालों को जवाब माँगे हैं। दिल्ली पुलिस ने जमात से जुड़े पदाधिकारी, कमेटी में शामिल लोग, तीन साल में भरे गए आयकर, संस्था का पैन नंबर सहित बैंक अकाउंट का स्टेटमेंट, 1 जनवरी से अब तक आयोजित मजहबी सभाओं की संख्या, परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की संख्या, मरकज में शामिल होने वाले लोगों का ऑडियो या वीडियो का ब्यौरा, 12 मार्च के बाद विदेशियों सहित आने वाले श्रद्धालुओं की लिस्ट को लेकर जानकारी माँगी है।
12 से मार्च के बाद समारोह में शामिल होने वाले लोगों के रिकॉर्ड का रजिस्टर, इस बीच क्या कोई जमाती बीमार पड़ा, साथ ही इमारत खाली कराने के लिए मरकज की ओर से उठाए गए कदम, लॉकडाउन लगने के बाद प्रबंधन की ओर से उठाए गए कदम, जिन लोगों को अस्पताल ले जाया गया उनकी तारीखवार सूची, 12 मार्च के बाद मस्जिदों या अन्य स्थानों पर ले जाने वालों की तारीखवार सूची, मरकज में शामिल होने और उसके बाद मरने वाले लोगों का ब्यौरा भी माँगा गया है।
इसके साथ ही पुलिस ने लॉकडाउन के दौरान किसी को भी जारी किए गए कर्फ्यू पास का ब्यौरा, 12 मार्च के बाद मरकज में आने वाले किसी भी सरकारी एजेंसी के लोगों का ब्यौरा और ऐसे कोई भी कागजात भी पुलिस ने अपने नोटिस के माध्म से जमात से माँगे हैं।
गौरतलब है कि निजामुद्दीन स्थित मरकज को बुधवार को खाली कराकर यहाँ से कुल 2361 लोगों को निकाला गया था। इसके बाद दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बताया था कि मरकज में 36 घंटे का सघन अभियान चलाकर कुल 2361 लोग बाहर निकाले गए। इनमें से 617 को अस्पतालों में और बाकी को अलग-अलग जगहों पर क्वारंटाइन किया गया है।
मौलाना साद फरार है। उसके भी कोरोना संक्रमित होने की आशंका जताई जा रही है। असल में मौलाना ने एक ऑडियो जारी कर कहा था कि वह डॉक्टर के कहने पर घर पर ही क्वारंटाइन हैं। साथ ही उसने जमात के लोगों से भी सरकारी गाइडलाइन पालन करने को कहा। इसके बाद से यह सवाल उठ रहा है कि मौलाना खुद भी तो संक्रमित नहीं हो गया है। या फिर गिरफ्तारी से बचने के लिए वह क्वारंटाइन की बात कह रहा है। उल्लेखनीय है कि इस ऑडियो से पहले उसने कोरोना संक्रमण को लेकर जमात के लोगों को गुमराह करने का काम किया था।
भूल-सुधार: त्रुटिवश इस रिपोर्ट में कुछ समय के लिए मौलाना साद की जगह, मीडिया में चलती भ्रमित करने वाले तस्वीरों के कारण, किसी और व्यक्ति की तस्वीर लगा दी गयी थी। उसे अब सुधार लिया गया है। हमें इसका खेद है और इसका उद्देश्य किसी भी व्यक्ति की छवि को क्षति पहुँचाना नहीं था।
कोरोना वायरस का असर तेजी से देश भर में बढ़ता जा रहा है। अब तक कोरोना वायरस के चलते 2000 से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं। वहीं 56 लोग इस वायरस के चलते अपनी जान गँवा चुके हैं। राजधानी दिल्ली में भी निजामुद्दीन स्थित मरकज की वजह से लगातार कोरोना के पॉजिटिव केस बढ़ते जा रहे हैं।
इस बीच निजामुद्दीन इलाके से 74 साल के एक दुकानदार की मौत की खबर आई। दरअसल, बुजुर्ग की मौत सोमवार को ही मरकज के पास वाली गली में हो गई थी। अब उसकी जाँच रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें मृतक के कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई और साथ ही कहा गया कि उसकी मौत इसी जानलेवा वायरस की वजह से हुई। इस दुकानदार की मौत इसलिए ज्यादा अहम है क्योंकि इसी दुकान से जमात के कई लोग सामान खरीदते थे।
इस खुलासे ने खतरे की एक और घंटी बजा दी है। इस खबर के बाद अब पूरी निजामुद्दीन बस्ती में कोरोना का खतरा बढ़ गया है, क्योंकि इस बुजुर्ग की मरकज के पास दुकान थी और दुकान पर जमात के लोगों के साथ ही बस्ती के लोग भी काफी संख्या में सामान लेने के लिए आते थे। अब पूरी बस्ती में लोगों की संक्रमण की जाँच की जाएगी। बुजुर्ग की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद बस्ती में हड़कंप मच गया। इसे दिल्ली में दुकानदार की पहली मौत बताया जा रहा है।
बुजुर्ग मरकज से करीब 50 मीटर दूर स्थित घर में अपने परिवार के साथ रहते थे। उनकी यहीं पर दुकान थी जिसमें वह खुद बैठते थे। मृतक की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आने के बाद से अब पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। दरअसल, दुकान चलाने के कारण बुजुर्ग के संपर्क में रोजाना सैकड़ों लोग आते रहे होंगे। सामान लेते होंगे, नोट व सिक्कों का आदान-प्रदान होता होगा। बुजुर्ग के पास मरकज के जमाती भी सामान लेने आते थे। बुजुर्ग खुद भी मरकज के अंदर सामान देने जाते थे।
अब पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन सभी लोगों को ट्रेस करने की है जो यहाँ आते-जाते थे। अब इस कॉलोनी के आसपास हजारों लोगों में कोरोना संक्रमण फैल जाने का खतरा पैदा हो गया है। पुलिस के मुताबिक अब दुकानदार के पूरे परिवार के सदस्यों की जाँच कराई जाएगी। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम को निर्देश दिए गए हैं।
बता दें कि निजामुद्दीन मरकज में तबलीगी जमात में शामिल हुए कोरोना संदिग्ध राजधानी समेत पूरे देश के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। गाजियाबाद में जमातियों के दुर्व्यवहार के बाद अब दिल्ली के कई अस्पतालों के डॉक्टरों ने शिकायत की है कि जमात के लोग जाँच और इलाज कराने को तैयार नहीं हैं। यहाँ तक कि ये लोग डॉक्टरों को धमकियाँ तक दे रहे हैं। इन लोगों का कहना है कि वे बिल्कुल स्वस्थ हैं और इनको इलाज या भर्ती करने की जरूरत नहीं है।
दिल्ली के कई अस्पतालों ने दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग को तबलीगी जमातियों द्वारा किए जा रहे व्यवहार के विषय में जानकारी दी। जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने पत्र लिखकर अस्पतालों और क्वारंटाइन केंद्रों की सुरक्षा बढ़ाने का दिल्ली पुलिस से आग्रह किया। सरकार के आग्रह के बाद अस्पतलाओं और क्वारंटाइन केंद्रों में अतिरिक्त पुलिस बल को तैनात किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के सचिव ने स्पष्ट रूप से दिल्ली पुलिस को लिखा था कि तबलीगी जमात के लोग डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों के साथ बदसलूकी कर रहे हैं और साथ ही उन पर थूक भी रहे हैं।
कोरोना वायरस की महामारी के दौरान देशभर में कुछ ऐसी घटनाएँ भी जारी हैं, जिनसे देश का वामपंथी समाज घर पर बैठे-बैठे आहत हो रहा है। वामपंथियों को सबसे ताजा दर्द दूरदर्शन पर फिरसे प्रसारित हो रहे रामायण धारावाहिक से हो रहा है। इस धारावाहिक ने एक बार फिरसे लोकप्रियता के नए मुकाम हासिल कर लिए हैं और इसी कारण सोशल मीडिया से लेकर व्हाट्सएप ग्रुप्स तक में कुछ लोग इसकी चर्चा से भी घबरा कर लोगों से ‘डिस्टेंस’ बना रहे हैं।
ऐसे ही एक घटना के शिकार अनिल बिस्वाल ने ट्विटर पर अपनी आपबीती बताते हुए लिखा है कि किस तरह से उन्हें व्हाट्सएप समूह से एक वामपंथी ने सिर्फ इसलिए बाहर कर दिया क्योंकि उन्होंने वहाँ रामायण धारावाहिक की सफलता की चर्चा की।
अनिल बिस्वाल ने लिखा है – “अगर आप यह कहते हैं कि रामायण सबसे ज्यादा देखा जाने वाला धारावाहिक बन गया है तो वामपंथी आपको साम्प्रदायिक कहकर आपको व्हाट्सएप ग्रुप से निकाल देते हैं।”
If you say that #Ramayana became the most viewed TV programme, then the Communists will remove you from WhatsApp group blaming you as Communal.
Bhalachandra Sarangi, a hard core CPIML leader from Odiaha did so to me. Screenshot attached. pic.twitter.com/PrwA4qf90F
अपने ट्वीट में व्हाट्सएप समूह के एडमिन की जानकारी देते हुए उन्होंने लिखा है- “ओडिसा के भालाचंद्रन सारंगी जो कि एक कट्टर CPIM लीडर हैं, ने यह काम किया है। स्क्रीनशॉट संलग्न है।”
उल्लेखनीय है कि रामायण सीरियल पिछले पाँच सालों में यानी 2015 से लेकर अब तक जनरल एंटरटेनमेंट केटेगरी (जीईसी) में बेस्ट सीरियल बन गया है। इस बात की जानकारी प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो ने ट्वीट कर दी है। BARC रेटिंग में रामायण के रिपीट शो ने बाजी मारी है। इसे 4 शोज में ही 170 मिलियन व्यूज यानी 17 करोड़ दर्शक मिले।
सोशल मीडिया पर भी एक वर्ग-विशेष द्वारा निरंतर रामायण धारावाहिक के प्रसारण पर आपत्ति जताते हुए देखा जा सकता है।
दिल्ली में नियम-कायदों को ताक पर रखकर कार्यक्रम आयोजित करने और निजामुद्दीन स्थित अपने मरकज में सैकड़ों लोगों को रखने वाले तबलीगी जमात के इरादे महाराष्ट्र में भी बड़ा जुटान करने के थे। उसने 12-13 मार्च को वसई सनसिटी में 50,000 लोगों को इकट्ठा करने की योजना बनाई थी। लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण के दो मामले सामने आने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने इस आयोजन की अनुमति से इनकार कर दिया था।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राज्य सरकार ने प्रारंभ में 6 फरवरी को इस जलसे के लिए अपनी अनुमति दे दी थी। बाद में इस निर्णय को बदल दिया गया, क्योंकि संक्रमण के मामले सामने आने के बाद सतर्कता बरतने की जरूरत समझी गई। राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने बताया कि जब तबलीगी जमात ने अपने जलसे को लेकर अड़ने की कोशिश की तो उन्होंने सख्त लहजे में क़ानूनी एक्शन लेने की चेतावनी दी।
कोंकण रेंज के इंस्पेक्टर जनरल निकट कौशिक ने कहा, “हमने 6 मार्च को अपनी अनुमति वापस ले ली और उन्हें इसके बाबत सूचना दे दी।” तबलीगी जमात के एक सदस्य ने बताया कि उनकी योजना महाराष्ट्र के पुणे, रत्नागिरी और रायगढ़ में ऐसे ही जलसों को आयोजित करने की थी।
रिपोर्ट्स के अनुसार ठाणे के राबोडी पुलिस स्टेशन में लॉकडाउन का उलंघन करने पर एक समूह के 12 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है जो नमाज अदा करने के लिए इकट्ठे हुए थे। 15 बांग्लादेशी और 12 मलेशियाई नागरिकों के विरुद्ध भी एफआईआर दर्ज की गई है। ये निजामुद्दीन के मरकज में गए थे। राज्य के मंत्री जितेंद्र अहृवाड ने बताया कि फिलहाल इन सभी को अभी होम क्वारन्टाइन में रखा गया है।
287 में से उन 211 विदेशी नागरिकों के पासपोर्ट जब्त किए जा चुके हैं जो मार्च 13-15 के बीच तबलीगी जमात के कार्यक्रम में शामिल हुए थे। ये सारे विदेशी उत्तर प्रदेश की अलग-अलग मस्जिदों में छिपे हुए थे। इनके खिलाफ कुल 34 एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उन 960 विदेशी नागरिकों के वीजा को भी निरस्त कर दिया जिन्होंने नियमों की अवहेलना करते हुए तबलीगी की गतिविधियों में हिस्सा लिया था। यह भी रिपोर्ट्स में आ रहा है कि कल बृहस्पतिवार को एक दिन में सबसे ज्यादा कोरोना संक्रमण के जो मामले सामने आए हैं, उनमें 60% मामले उनसे संबंधित हैं जो मरकज में शामिल हुए थे।