Home Blog Page 4961

जान-बूझकर इधर-उधर थूक रहे तबलीग़ी जमात के लोग, डॉक्टर भी परेशान: निजामुद्दीन से जाँच के लिए ले जाया गया

दिल्ली के निजामुद्दीन क्षेत्र में स्थित मस्जिद से 200 लोगों के मिलने के बाद से पूरी दिल्ली में हड़कंप मचा हुआ है। अरविन्द केजरीवाल ने बताया है कि राष्ट्रीय राजधानी में अभी तक सामुदायिक संक्रमण का एक भी मामला नहीं आया है। यहाँ कोरोना के कुल 97 मामले मिले हैं, जिनमें से 41 ऐसे हैं जिनकी कोई ट्रेवल हिस्ट्री है। यानी ये सभी विदेश से लौटे लोग हैं। 21 मरीज इनके परिवार वाले हैं। 10 मामले ऐसे हैं, जिनके बारे में सूचनाएँ इकट्ठी की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने लॉफ्टिनेंट गवर्नर से दरख्वास्त की है कि निजामुद्दीन मामले में एफआईआर दर्ज की जाए।

इधर निजामुद्दीन से ले जाए जा रहे सभी लोग बदतमीजी पर उतर आए हैं। उनके द्वारा वो सारी हरकतें की जा रही हैं, जिनसे संक्रमण फैलने का ख़तरा है। एक डॉक्टर ने बताया कि बस से ले जाए जा रहे ये सभी लोग इधर-उधर थूक रहे हैं और अधिकारियों की बात नहीं मान रहे हैं। ये सभी बस की खिड़कियों की तरफ़ से थूक रहे थे, जिससे अन्य लोगों में संक्रमण फैलने का ख़तरा है। मेडिकल कर्मचारी भी उनलोगों से परेशान हो गए हैं। भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने भी इस आरोप की पुष्टि की।

उधर दिल्ली के सीएम अरविन्द केजरीवाल ने कहा है कि एलजी द्वारा जल्द ही एफआईआर रजिस्टर करने का आदेश दिया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगर किसी भी अधिकारी के द्वारा किसी भी प्रकार की लापरवाही की बात सामने आएगी तो उसके ख़िलाफ़ त्वरित कार्रवाई की जाएगी। निजामुद्दीन में मिले विदेशियों ने वीजा नियमों का भी उल्लंघन किया है, ऐसा गृह मंत्रालय ने बताया है। यहाँ तबलीग जमात के मजहबी कार्यक्रम में न सिर्फ़ सैकड़ों लोग शामिल हुए बल्कि उन्होंने एम्बुलेंस को भी लौटा दिया था। इन्होने सतर्कता और सोशल डिस्टन्सिंग की सलाहों को भी जम कर ठेंगा दिखाया।

आरोप है कि स्थानीय लोगों ने मस्जिद में छिपे विदेशियों और अन्य लोगों का पूरा साथ दिया। बता दें कि वो समुदाय विशेष बहुल इलाक़ा है। वहीं मरकज लगातार दावा कर रहा है कि वो प्रशासन से लगातार संपर्क में है और उसने लगातार सरकार का सहयोग किया है। मरकज में कुल 2500 लोगों के एक मजहबी कार्यक्रम में शामिल होने की बात सामने आई थी। इनमें से 800 लोगों को हॉस्पिटल ले जाया गया है। कइयों को अभी भी ले जाया जा रहा है। इनमें से कुछ के यूपी जाने की आशंका है, जिनकी तलाशी के लिए सर्च अभियान चलाया जा रहा है।

मोहल्ला क्लिनिक का एक और डॉक्टर कोरोना +ve: प्रशासन ने जारी किया नोटिस, संपर्क में आए मरीजों को क्वारंटाइन का आदेश

दिल्ली में कोरोना के फैलते संक्रमण ने अब सबको सकते में डाल दिया है। एक ओर जहाँ दिल्ली सरकार लगातार लोगों को आश्वस्त कर रही है कि वे जनता को हर मुमकिन स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करवाएँगे। वहीं पर उन्हीं के मोहल्ला क्लिनिक के डॉक्टर इससे संक्रमित हो रहे हैं। जी हाँ, दिल्ली में मोहल्ला क्लिनिक का एक और डॉक्टर कोरोना से संक्रमित पाया गया है। डॉक्टर उत्तरी पूर्वी दिल्ली के बाबरपुर इलाके का बताया जा रहा है।

खबर के अनुसार डॉक्टर के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद प्रशासन ने नोटिस जारी किया हैं। नोटिस में बताया गया है कि जो भी मरीज या लोग 12 मार्च से 20 मार्च के बीच इस मोहल्ला क्लीनिक में इलाज कराने आए हो वो अगले 15 दिन तक अपने घर में ही क्वारनटीन रहें।

जानकारी के मुताबिक, बाबरपुर इलाके के मोहल्ला क्लिनिक के डॉक्टर में कोरोना के लक्षण पाए गए थे जिसके बाद उन्होंने कोरोना का टेस्ट करवाया। आज डॉक्टर की टेस्ट रिपोर्ट आई जिसमें वह कोरोना पॉजिटिव पाए गए। इसके बाद डॉक्टर और उनके परिवार के साथ उनके स्टाफ को भी आइसोलेट किया गया है।

गौरतलब है कि इससे पहले उत्तर पूर्वी दिल्ली के मौजपुरी के मोहनपुरी स्थित मोहल्ला क्लिनिक में एक डॉक्टर में कोरोना लक्षण पाए गए थे और जाँच के बाद उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने की खबर तो खुद स्वास्थ्य विभाग ने की थी। उस दौरान भी नोटिस जारी कर वहाँ की जनता को सूचित किया गया था, क्योंकि कम से कम 900 मरीज और लोग इसके संपर्क में आए थे। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने भी कहा था, कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए डॉक्टर के संपर्क में आने वाले सभी 900 लोगों को क्वारंटाइन यानी बाकी के समाज से अलग कर दिया गया है। इसके बाद डॉक्टर की बेटी और पत्नी भी कोरोना से संक्रमित पाए गए थे।

बता दें, मौजपुरी के मोहनपुरी स्थित मोहल्ला क्लिनिक के डॉक्टर गोपाल झा एक सऊदी से लौटी महिला के कारण संक्रमित हुए थे। जानकारी के मुताबिक दुबई से लौटने के बाद ये महिला अपने भाई (तबरेज) और अम्मी से मिली और भाई भी इस बीमारी से संक्रमित हुआ। बाद में महिला का भाई बहन से वह सीएए विरोधी प्रदर्शनों में भी जाता रहा और इस तरह एक महिला की लापरवाही के कारण 400-450 लोग इस खतरे के घेरे में माने जा रहे थे।

लखनऊ: अमीनाबाद की मरकजी मस्जिद में मिले 6 किर्गिस्तान और कजाकिस्तान के मुस्लिम, सभी को भेजा गया आइसोलेशन में

देश के अलग-अलग राज्यों में स्थित मस्जिदों में विदेशी नागरिकों के मिलने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। बीते दिनों पटना, राँची, दिल्ली और महाराष्ट्र के मस्जिद से मौलवियों के मिलने की खबर आई। अब इस सूची में लखनऊ का नाम भी जुड़ गया। खबर है कि यूपी की राजधानी के अमीनाबाद इलाके में डीएम के छापे के बाद इस खबर का खुलासा हुआ कि वहाँ के मरकजी मस्जिद में 6 विदेशी लोग रह रहे थे। जो किर्गिस्तान और कजाकिस्तान के नागरिक हैं और भारत में एक धार्मिक जलसे में भाग लेने आए थे। सभी के पास वैध वीजा है।

जानकारी के अनुसार, खुफिया और एलआईयू की सूचना के बाद पुलिस प्रशासन की टीमों ने मस्जिद में छापा मारा। इस दौरान डीएम के साथ पुलिस कमिश्नर भी थे। पुलिस अधिकारियों ने इन विदेशी नागरिकों के मिलने के बाद इन्हें हिरासत में ले लिया है। इनसे पूछताछ की गई है और अब इनकी मेडिकल जाँच कराई जा रही है। तब तक इन्हें आइसोलेशन में रखा गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मड़ियाँव और काकोरी इलाके की मस्जिदों में भी कई विदेशी नागरिकों के रुके होने की खबर है। बताया जा रहा है मड़ियाँव में 17 बांग्लादेशी नागरिकों के रुके होने की सूचना है। जो टूरिस्ट वीजा पर यहाँ आए हैं।

गौरतलब है कि यूपी सरकार इस समय कोरोना को रोकने के लिए सख्ती से काम कर रही है। इसी दिशा में उन्होंने अफसरों को सख्त संदेश देते हुए कहा कि लॉकडाउन में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। दिल्ली की तबलिगी जमात में शामिल होकर उत्तर प्रदेश आए लोगों की तेजी से तलाश कर उन्हें क्वारंटीन किया जाए। जिससे संक्रमण का खतरा न फैले।

बता दें, दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज में विदेशी नागरिकों के शामिल होने का मामला सामने आने के बाद विभिन्न राज्यों की पुलिस सतर्क हो गई है। क्योंकि जमात में शामिल होने आए वे लोग लॉकडाउन के ऐलान के बाद अलग-अलग राज्यों की ओर चले पड़े थे। इसी कड़ी में यूपी पुलिस प्रशासन दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज के आयोजन में शामिल हुए लोगों की तलाश कर रहा हैं चूँकि उन्हें सूचना मिली थी कि तबलीगी जमात में लखनऊ के 20 लोग शामिल हुए थे। पुलिस सूत्रों के अनुसार पता चला है कि ये 20 लोग अभी तक लखनऊ नहीं लौटे हैं, ये अभी नई दिल्ली में ही हैं।

जावेद अख्तर ने मस्जिदों को बंद करने के लिए किया ‘फतवा’ का समर्थन, यूजर्स ने पूछा- क्या सरकारी आदेश काफी नहीं?

वैश्विक महामारी बन चुके कोरोना वायरस के साथ लड़ाई में पूरे देश को लॉकडाउन किया गया है। सारी दुनिया इस खतरनाक वायरस से लड़ने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है। ऐसे में जब दिल्ली के निजामुद्दीन में तब्लीगी जमात के 2000 से ज्यादा लोगों के एक मजहबी सभा में शामिल होने की खबरें सामने आईं तो प्रशासन के होश उड़ गए। इस जलसे में शामिल होने वाले लोगों में मलेशिया, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और किर्गिस्तान से आए लोग शामिल हैं।

बता दें कि अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष ताहिर महमूद ने दारूल उलूम देवबंद से कहा है कि जब तक कोरोना का संकट खत्म नहीं होता है तब तक सभी मस्जिदों को बंद करने का फतवा जारी करें। ताहिर के इस बयान के कुछ ही वक्त बाद फिल्मकार जावेद अख्तर का इस पर बयान आया। जावेद अख्तर ने ट्वीट कर कहा, “ताहिर महमूद साहेब, जो कि एक स्कॉलर और अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष हैं, उन्होंने कहा है कि दारूल उलूम देवबंद कोरोना संकट खत्म होने तक के लिए मस्जिदों को बंद करने का फतवा जारी करे। मैं पूरी तरह से उनकी इस माँग का समर्थन करता हूँ अगर काबा और मदीना की मस्जिद बंद की जा सकती है तो भारत की मस्जिदों को क्यों बंद नहीं किया जा सकता?”

अख्तर का ट्वीट देखने के बाद कई सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें निशाने पर लिया। जाफर अली नाम के एक यूजर ने पूछा, “हमें मस्जिदों को बंद करने के लिए फतवे की जरूरत क्यों है? क्या भारत सरकार द्वारा किया गया अनुरोध और आदेश इसके लिए काफी नहीं है?”

आकांक्षा राव नाम की यूजर ने कमेंट कर पूछा, “फतवा क्यों, क्या हम मध्यकाल में रह रहे हैं? क्यों आप सिर्फ देश के कानूनों का पालन नहीं कर सकते?”

फिल्मेमकर विवेक अग्निहोत्री ने जावेद अख्तर से पूछा, “फतवा? यह देश फतवा के हिसाब से चलेगा या सरकार के आदेश के हिसाब से?” 

वहीं, ‘अंजाना-अंजानी’ और ‘कहानी’ जैसे फिल्में लिख चुकी अद्वैता काला पूछती हैं, “क्योंकि सऊदी अरब में निर्णय सऊदी प्रासशन द्वारा लिए गए हैं और लोग पालन भी कर रहे हैं। भारत में फतवा की जरूरत है। यह काफी समस्या पैदा करने वाला और इन परिस्थितियों के लिए खतरनाक है।”

साकेत नाम के एक यूजर ने लिखा, “क्या इस पढ़े लिखे समाज के लिए सरकार द्वारा दिए गए निर्देश काफी नहीं हैं या कुछ लोग ऐसे हैं जो सिर्फ मजहबी नेताओं और शरिया की ही बातें सुनते हैं?”

दिल्ली बीजेपी मीडिया प्रभारी पुनीत अग्रवाल ने जावेद अख्तर पर निशाना साधते हुए कहा, “निर्वाचित पीएम द्वारा लॉकडाउन की घोषणा के तुरंत बाद अन्य सभी धार्मिक स्थलों को बंद कर दिया गया था, लेकिन उनके धर्म को दारूल उलूम देवबंद के फतवे की जरूरत है ताकि वे अन्य मस्जिदों को बंद कर सकें। आपको लगता है कि हम शरिया कानून में हैं? निजामुद्दीन की घटना जानबूझकर की गई थी। यह भारत के खिलाफ युद्ध है।”

लेखिका शेफाली वैद्य ने लिखा, “मिलिए ‘नास्तिक’ जिहाद अख्तर से। जिहाद भारतीय सरकार के सभी पूजा स्थलों को बंद करने के आदेश से खुश नहीं है। जिहाद दारुल उलूम देवबंद से फतवा जारी करवाना चाहते हैं, ताकि मस्जिद बंद हो सके। तभी जिहाद मस्जिदों को बंद करने का समर्थन करेगा। क्योंकि मुस्लिमों के लिए इमान सबसे ऊपर है।”

एक यूजर ने लिखा कि मुस्लिमों को अलग से फतवे की जरूरत क्यों होती है? जब वो यहाँ पर रहकर सब्सिडी का लाभ उठाते हैं तो फिर उन्हें भी टैक्स जमा करना चाहिए और देश के कानून का पालन करना चाहिए।

एक अन्य यूजर ने लिखा, “अबे मुल्ले, ये मस्जिदे काबा की वजह से नहीं इंडियन महामारी कानून की वजह से बंद रहेंगे। इंडिया के हर एक नागरिक को संविधान कानून पे चलना है। दूसरे इस्लामिक देश से हमें क्या लेना देना। भारत का शासन दिल्ली से चलेगा काबा से नहीं।”

राजेश सिंह नाम के एक यूजर ने लिखा, “पूरा देश खतरे में है, सरकार ने लॉकडाउन घोषित कर रखा है, और तुम फतवे का इंतजार कर रहे हो? देश फतवे से चलेगा या लोकतांत्रिक रूप से चुनी हुई सरकार से चलेगा? यही तुम लोगों का असली चेहरा है, पूरी मानवता खतरे में है और तुम लोग फतवे के इंतजार में हो? शर्म आती है तुम जैसे जाहिलों पर।”

पश्चिम बंगाल: कोरोना से जंग लड़ रहे डॉक्टरों को ममता दीदी ने नहीं दी जरूरी किट, मिले बेड शीट के बने मास्क और रेन कोट

कोरोना वायरस विश्व में महामारी का रूप ले चुका है। आए दिन इसकी चपेट में आने से लोग मौत का शिकार हो रहे हैं। इसी तरह भारत में भी लगातार बढ़ते वायरस की रोकथाम के लिए पूरा देश कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहा है। इस जंग में अपनी जीत हासिल करने के लिए डॉक्टर, मेडीकल स्टाफ और पुलिस प्रशासन के लोग खास तौर पर अपनी जान जोखिम में जाकर अहम भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन आश्चर्य की बात यह कि ऐसे लोगों को ही सरकार सुरक्षा कवच नहीं दे पा रही हैं। कुछ ऐसा ही एक मामला पश्चिम बंगाल से सामने आया है, जहाँ के एक डाक्टर ने अपने ही विभाग पर आरोप लगाया है कि उन्हें कोरोना वायरस के पॉजिटिव मामलों की देखभाल के लिए बेडशीट के मास्क, सनग्लास और रेनकोट दिए गए हैं।

सिलीगुड़ी के उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर शहरियार ने आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें कोरोना वायरस के पॉजिटिव मामलों की देखभाल के लिए पीपीई, लेबोरेटरी ग्लास और सर्जिकल मास्क के बजाय बेडशीट के मास्क, धूप के चश्मे और रेनकोट दे दिए गए। इतना ही नहीं हमें रेनकोट धोकर और फिर से उसका उपयोग करने के लिए कहा गया। डॉक्टर ने कहा कि जब हमने इसकी शिकायत मेडिकल सुपरिंटेंडेंट कम वाइस प्रिंसिपल से की तो उन्होंने कहा कि पीपीई की हमारे पास कोई आपूर्ति नहीं है और इसकी आपूर्ति के लिए एक अनुरोध विभाग के लिए भेजा गया है।

वाइस प्रिंसिपल से संतुष्टीपूर्ण जवाब न मिलने पर डॉक्टरों ने एक बार फिर से पीपीई किट के लिए दबाव डाला। इसके जवाब में उन्होंने डॉक्टरों को ड्यूटी पर आने के लिए मना कर दिया। अब सवाल यह खड़ा होता है कि जब अपनी जान जोखिम में डालकर जो डॉक्टर कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं उन्हीं को हम अगर सुरक्षा नहीं दे पाए तो यह जंग आखिर हम कैसे इतनी जल्दी से जीत सकते हैं।

आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में अब तक कोरोना से मरने वालों की संख्या तीन है, जबकि इससे संक्रमिल लोगों की संख्या 26 हो गई है। वहीं अगर बात करें पूरे भारत की तो इससे मंरने वालों की संख्या 40, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 1300 के पार हो गई है। गौरतलब है कि देश में कोरोना की रोकथाम के लिए 14 अप्रैल तक लॉकडाउन जारी है।

निजामुद्दीन मरकज में जुटी भीड़ को छिपाने में स्थानीय लोगों का हाथ, मदद के लिए गई एंबुलेंस रास्ते से लौटाई?

21 दिनों के लॉकडाउन का तय दिशा-निर्देशों के तहत पालन करने वाला भारत का नागरिक इस उम्मीद में है कि जब वह दोबारा बाहर आजादी से सड़कों पर निकलेगा तो उसे संक्रमण रहित वातावरण मिलेगा। मगर, मजहब के नाम पर देश को महासंकट में डालने वाले चंद कट्टरपंथियों का इससे कोई लेना-देना नहीं है। वे सब कुछ जानते-समझते हुए परिस्थितियों को चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं। दिल्ली में निजामुद्दीन का मामला देखिए। यहाँ तबलीगी जमात के मजहबी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए सैंकड़ों लोग पहुँचे थे और कार्यक्रम खत्म होने के बाद भी मस्जिद में रुके रहे। लेकिन इसकी जानकारी किसी ने पुलिस या प्रशासन को नहीं दी। 

नतीजतन, थोड़े दिनों में इलाके में कोरोना के लक्षण वाले मामले दिखने लगे। नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार प्रशासन ने जब सूचना मिलते ही आवश्यक कार्रवाई करनी चाही, तो वहाँ के स्थानीय लोगों ने उनका साथ नहीं दिया और कड़ा विरोध करके एंबुलेंस को ही इलाके से लौटा दिया। बाद में जब मामला नियंत्रण से बाहर हो गया, तो डॉक्टरों की टीम को सहयोग करना शुरू किया गया। लेकिन पूरा मामला खुलासा होने के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या उस समय जब स्थानीय लोगों ने एंबुलेंस की गाड़ी लौटाई, तब क्या ये लोग इन लोगों को छिपाने का प्रयास कर रहे थे।

गौरतलब कि हजरत निजामुद्दीन स्थित मरकज में मलेशिया, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और किर्गिस्तान समेत कई देशों के करीब 2500 से अधिक लोगों ने 1 से 15 मार्च तक तब्लीग-ए-जमात में हिस्सा लिया था। जिनका पता लगने के बाद से पूरे इलाके की कड़ी निगरानी की जा रही है और हर संदिग्ध को अस्पताल में एहतियात के तौर पर भर्ती किया जा रहा है। इनमें से 24 लोगों की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव निकल आई है। जबकि 860 लोगों को अस्पतालों में भर्ती किया जा चुका है और 300 लोग और भी अस्पताल भेजे जाने हैं।

बता दें कि दिल्ली में सोमवार को 25 और नए मरीज सामने आए थे। इनमें 18 कोरोना पीड़ित निजामुद्दीन में तब्लीगी मरकज में शामिल होने वाले निकले। आज के 24 लोग अब इस संख्या में और जुड़ गए। मतलब दिल्ली में कोरोना पॉजिटिव के हालिया मामले में से 50% से ज्यादा मामले सिर्फ इस एक कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोग हैं। अब इन्हीं बिंदुओं को देखते हुए हजरत निजामुद्दीन के इस मरकज पर कानूनी कार्रवाई की तैयारी चल रही है। हालाँकि, मरकज में अपनी सफाई में कहा है कि वह लगातार प्रशासन के संपर्क में है।

20000 कोच, 320000 बेड्स: भारतीय रेलवे ने किया कमाल, क्वारंटाइन के लिए नहीं कमरों की कोई कमी

जहाँ एक तरफ दुनिया भर के कई देशों की प्रशंसा की जा रही है कि किसने कितने दिनों में कितने बिस्तरों वाला अस्पताल बनवा दिया, भारतीय रेलवे ने भी एक उल्लेखनीय कार्य किया है। भारत में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या डेढ़ हज़ार के पार जाने को है और उनमें से 47 की मौत हो चुकी है। ऐसे में भारत पर सबकी नज़र है क्योंकि कम जनसंख्या वाले विकसित देशों में कोरोना वायरस ने जिस तरह से तबाही मचाई है, उनके मुकाबले काफ़ी ज्यादा जनसंख्या और साधन-सुविधा का मामले में उनसे कम सम्पन्न भारत इससे कैसे निपटता है।

भारतीय रेलवे ने ट्रेनों के 20,000 कोच को क्वारंटाइन और आइसोलेशन कोच बना दिया है। इसके लिए पूरी तैयारी कर ली गई है। भारत में क्वारंटाइन फैसिलिटी के लिए बड़ी संख्या में कमरों की ज़रुरत है, इसी कमी को पूरा करने के लिए इंडियन रेलवे आगे आया है। कुल 5 जोनल रेलवे ने पहले ही उन क्वारंटाइन सेंटरों का प्रोटोटाइप तैयार कर लिया है। उन्हें ‘क्वारंटाइन/ आइसोलेशन कोचेज’ कहा जाएगा। इनमें आइसोलेशन की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए 3.2 लाख बिस्तर लगाए जा सकते हैं।

भारतीय रेल मंत्रालय ने जानकारी दी है कि इन 20 हजार कोच में कुल 3.2 लाख लोगों के लिए बेड्स की व्यवस्था की जा सकती है। भारतीय रेलवे अन्य तरीकों से भी इस आपदा की घड़ी में लोगों की सेवा करने में लगा हुआ है। हाल ही में पंजाब के मोगा से 390 टन खाद्य पदार्थों को एक पार्सल स्पेशल ट्रेन के जरिए असम के चंगसारी पहुँचाया गया। इनमें डेयरी प्रोडक्ट्स और नूडल्स सहित कई अन्य चीजें शामिल थीं। रेलवे ने जनता को जागरूक करते हुए बताया है कि भारतीय रेल सेवा कभी युद्धकाल में भी नहीं रुकी, ऐसे में वो स्थिति की गंभीरता को समझें और घरों में ही रहें।

भारत में अभी 15 अप्रैल तक लॉकडाउन चलेगा, जिसमें लोगों को घरों में ही रहने की सलाह दी गई है। रेलवे की सभी पैसेंजर ट्रेनों को बंद कर दिया गया है, ऐसे में उनका कोरोना वायरस के मरीजों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। सारी ट्रेनों को सैनिटाइज्ड कर लिया गया है।

कोरोना ने इस्लाम को ख़तरे में डाल दिया है, या अल्लाह! इसे काफ़िर मुल्कों की तरफ़ मोड़ दो: मौलाना ने की दुआ

जहाँ एक तरफ कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को हलकान कर रखा है और लोग इससे बचाव के उपाय करने में जुटे हैं, कुछ मुल्ला-मौलवी सिर्फ़ अन्धविश्वास की बातें कर अफवाह फैलाने में लगे हुए हैं। पाकिस्तान के एक मौलवी ने कबूतर के शरीर के एक विशेष स्थान को पका कर खाने को कोरोना वायरस से संक्रमण का इलाज बताया था। अब वहीं के एक और मौलवी ने अल्लाह से दुआ की है कि कोरोना वायरस ‘को काफिर मुल्कों’ की तरफ भेज दिया जाए।

समझा जा सकता है कि काफिर से उनका इशारा किस तरफ था। कट्टरपंथियों का मानना है कि इस्लाम को न मानने वाले लोग काफिर होते हैं। नीचे संलग्न किए गए वीडियो में आप उस पाकिस्तानी मौलवी को दुआ करते हुए देख सकते हैं। दुआ में वो कहता है कि “कोरोना वायरस ने इस्लाम को ख़तरे में डाल दिया है, या अल्लाह इसे काफिर मुल्कों की तरफ़ पलटा दे।” जहाँ पाकिस्तान ख़ुद कोरोना वायरस और कमजोर नेतृत्व के संकट से जूझ रहा है, वहाँ के मुल्ले-मौलवी लोगों को जागरूक करने की बजाए इसी तरह की हरकतों में लगे हुए हैं।

उक्त मौलवी ने कहा कि अल्लाह ने अगर मदद नहीं की तो कोरोना सब कुछ ख़त्म कर देगा। उधर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने पूरे देश में लॉकडाउन पर विचार करने से इनकार कर दिया है। उन्हें अर्थवयवस्था की चिंता सता रही है। वो पहले भी कह चुके हैं कि अगर पाकिस्तान में लॉकडाउन हुआ तो खाने के लाने पड़ जाएँगे। मुल्क में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या 2000 के पार होने को है लेकिन इमरान ने लोगों को घर में रहने और बीमार होने के बावजूद हॉस्पिटलों में लाइन न लगाने की सलाह दी है।

भारत में भी मौलवियों और मस्जिदों के नखरे नहीं थम रहे हैं। कई मस्जिदों को जानबूझ कर खुला रखा गया तो पटना, राँची और दिल्ली की मस्जिदों में विदेशी नागरिकों को छिपाया गया। इनमें से कई कोरोना पॉजिटिव मिले हैं। एक अन्य घटना के दौरान जब पुलिस एक मौलवी के पास मदद के लिए गई तो उसने लोगों को नमाज पढ़ने के लिए भीड़ न जुटाने की सलाह देने से इनकार कर दिया।

डॉक्टर ने गिनाई खामियाँ तो रातोंरात उठा कर ले गई पुलिस: ममता के बंगाल में चीन की तर्ज पर कार्रवाई

पश्चिम बंगाल के एक डॉक्टर को सरकार से शिकायत करने की सज़ा दी गई। कैंसर स्पेशलिस्ट इंद्रनील ख़ान ने शिकायत की थी कि पश्चिम बंगाल के अस्पतालों में डॉक्टर रेनकोट पहन कर अपना कार्य करने को विवश हैं। यहाँ तक कि वहाँ के डॉक्टरों को घटिया गुणवत्ता वाले मास्क पहनने को मजबूर होना पड़ रहा है। चूँकि कोरोना मरीजों का इलाज करने वाले डॉक्टर और मेडिकल कर्मचारी पहली पंक्ति में हैं, इसीलिए उनके संक्रमित होने का ज्यादा ख़तरा है। ऐसे में उन्हें ज़रूरी संसाधन और उपकरण न मुहैया कराया जाना ममता बनर्जी की सरकार की ग़लती है। इसी ग़लती को डॉक्टर ख़ान ने उजागर किया।

डॉक्टर ख़ान ने सीधा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से गुहार लगाई कि अगर स्थिति संभाली नहीं गई तो इससे बड़ी तबाही हो सकती है। उनकी इस शिकायत के बाद पश्चिम बंगाल के ‘स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग’ ने डॉक्टर ख़ान को इस मुद्दे को हाइलाइट करने के लिए धन्यवाद दिया। विभाग ने बताया कि डॉक्टरों को माइक्रो-फाइबर से बने ‘पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट’ देने की व्यवस्था की जा रही है, जो सभी मानकों पर खड़ा करें। इसके बाद डॉक्टर ख़ान ने विभाग को उनकी शिकायत सुनने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि मेडिकल कर्मचारी व डॉक्टर्स सबसे ज्यादा कोरोना की जद में हैं, ऐसे में उनके लिए ये व्यवस्थाएँ होनी चाहिए।

अब ख़बर आई है कि ऑन्कोलॉजिस्ट डॉक्टर इंद्रनील ख़ान को रातोंरात माहेस्थाला पुलिस उठा कर ले गई और उन्हें हिरासत में रख लिया गया। कहा जा रहा है कि सरकार की खामियों को उजागर करने की उन्हें सज़ा दी गई है। बता दें कि चीन में जिन भी डॉक्टरों या प्रबुद्ध जनों ने कोरोना वायरस को लेकर आवाज़ उठाई थी, उन्हें कार्रवाई का सामना करना पड़ा था। कइयों को तो गायब भी कर दिया गया था। भाजपा आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने डॉक्टर ख़ान के ख़िलाफ़ कार्रवाई किए जाने का विरोध किया है।

कहा जा रहा है कि डॉक्टर ख़ान को जिंजीरा बाजार इन्वेस्टीगेशन सेंटर में हिरासत में लेकर रखा गया। उन्हें रविवार (मार्च 29, 2020) को रात 9:30 बजे उठाया गया और रात 2 बजे तक हिरासत में रखा गया। साथ ही उनका फोन सीज कर लिया गया। मालवीय ने आरोप लगाया है कि गंभीर रूप से बीमार उनके कैंसर मरीजों को भी प्रताड़ित किया जा रहा है। बता दें कि सोमवार को उनके ट्विटर हैंडल से पश्चिम बंगाल सरकार की तारीफ़ में ट्वीट किया था। मालवीय का आरोप है कि उन्हें इसी शर्त पर छोड़ा गया कि वो ममता सरकार की तारीफ़ करें।

बता दें कि पश्चिम बंगाल में कोरोना के अब तक 26 मामले सामने आ चुके हैं और उनमें से 4 की मृत्यु हो चुकी है। कुल 22 सक्रिय मामले अभी भी मौजूद हैं। इनमें से किसी को भी ठीक नहीं किया जा सका है। ऐसे में तृणमूल कॉन्ग्रेस की सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं पर ध्यान देने की बजाए खामियों की तरफ ध्यान दिलाने वालों पर कार्रवाई करने में लगी हुई है।

पाकः इस्लामी प्रचारक तबलीगी जमात के 27 सदस्य कोरोना पॉजिटिव, टेस्ट के दौरान एक ने पुलिस पर किया चाकू से हमला

पाकिस्तान में इस्लामिक प्रचारक तबलीगी जमात के 27 सदस्यों में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई है। रायविंड के तबलीगी मरकज सेंटर में 35 लोगों की स्क्रीनिंग की गई थी। दरअसल, ऐसा संदेह था कि रायविंड रोड स्थित तबलीगी मरकज और विभिन्न मस्जिदों से कोरोना वायरस जगह-जगह फैला। इसके बाद ही स्थानीय प्रशासन ने तबलीगी के कई प्रचारकों को हिरासत में लेकर क्वारंटाइन किया था। 

पाकिस्तानी अखबार ‘द डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, जब क्वारंटाइन सेंटर में सभी तबलीगी जमातियों का टेस्ट किया जा रहा था तो उनमें से एक प्रचारक ने क्वारंटाइन से बचने के लिए पुलिस ऑफिसर SHO अशरफ मलिक माखी पर चाकू से हमला कर दिया और भागने की कोशिश की। हालाँकि, हमलावर को पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में स्वाबी जिले से पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। वहीं पुलिस अधिकारी को लेय्या में डीएचक्यू अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बताया जा रहा है कि फिलहाल पुलिस अधिकारी की हालत स्थिर बनी हुई है।

करीब 1200 तबलीगी जमात के प्रचारक 5 दिन के सम्मेलन में हिस्सा ले रहे थे जिनमें 500 विदेशी भी शामिल थे। इसके पहले फरवरी में प्रचार के लिए उन्होंने कई टीमें बनाई थीं। पंजाब सरकार ने आयोजकों से अपील की थी कि वह इस सम्मेलन को रद्द कर दें, लेकिन उन्होंने सरकार की नहीं सुनी। हालाँकि, बाद में उन्होंने मन बदल लिया और इसके बाद ही प्रांत में लॉकडाउन घोषित कर दिया गया था। जिसकी वजह से अब उनके घर जाने के लिए किसी तरह की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं थी। इसके बाद मरकज को सील कर दिया गया और 25 लोगों के आवास को क्वारंटाइन सेंटर में बदल दिया गया।

इससे पहले मार्च में तबलीगी जमात ने लाहौर के बाहरी इलाके में 1.5 लाख लोगों की एक मजहबी सभा का आयोजन किया था। इस सामूहिक सभा के परिणामस्वरूप कोरोना वायरस महामारी का भयंकर प्रसार देखा गया, क्योंकि इस सभा में हिस्सा लेने वाले लोगों ने सोशल डिस्टेंशिंग का पूर्ण रुप से उल्लंघन किया था।

इस मजहबी बैठक में भाग लेने वाले दो फिलिस्तीनी नागरिक कोरोना वायरस टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए, और इन दोनों के संक्रमित होने की पुष्टि के साथ ही गाजा में कोरोना संक्रमण का पहला केस सामने आया। संक्रमित मरीजों को रफा शहर के एक अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। इससे पहले इजराइल और मिस्र से गाजा में प्रवेश करने वाले लगभग 1,270 लोगों को क्वारंटाइन कर दिया गया था। वेस्ट बैंक में 55 लोगों में कोरोना वायरस का पता चला है। 

एहतियात के तौर पर वेडिंग हॉल और बाजार बंद कर दिए गए हैं। अब यहाँ पर सीमित परीक्षण क्षमताओं के साथ इस क्षेत्र में पैनिक की स्थिति पैदा हो गई है। गाजा में लगभग 20 लाख लोगों की देखभाल के लिए मात्र 60 ICU बेड हैं। कर्मचारियों की भारी कमी के कारण स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है।

वहीं भारत में दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्थित मरकज में मलेशिया, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और किर्गिस्तान समेत कई देशों के करीब 2500 से अधिक लोगों ने 1 से 15 मार्च तक तब्लीग-ए-जमात में हिस्सा लिया था। अब इनका पता लगने के बाद पूरे इलाके की कड़ी निगरानी की जा रही है और हर संदिग्ध को अस्पताल में एहतियात के तौर पर भर्ती किया जा रहा है। इनमें से 24 लोगों की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव निकल आई है।