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मक्का से लौटे, क्वारंटाइन का नियम तोड़ा, मुहर मिटाई: माँ-बेटे पॉजिटिव, पीलीभीत के 35 लोगों पर मुकदमा

कोरोना वायरस ने जब तक भारत में प्रवेश भी नहीं किया था उसके पहले से ही सरकार ने भारत के अधिकांश हवाई अड्डों को सील कर दिया था, जहाँ से विदेशों से आने वाले लोगों को जाँच के बाद ही भारत में प्रवेश करने दिया जा रहा था। इसी बीच कुछ वायरस को गंभीरता से न लेकर कुछ यात्रियों द्वारा की गई लापरवाही आज पूरे देश के लिए भारी पड़ रही है। यही कारण है कि अब ऐसे लोगों के खिलाफ प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। कुछ ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के जिला पीलीभीत से आया है। सऊदी अरब के मक्का से लौटने के बाद क्वारंटाइन का नियम तोड़ने वाले पीलीभीत के 35 लोगों के खिलाफ पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है।

पीलीभीत के डीएम वैभव श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए बताया कि थाना अमरिया क्षेत्र के रहने वाले 35 लोग 25 फरवरी को उमरा करने के लिए सऊदी अरब गए थे, जो कि 20 मार्च को सऊदी अरब से मुंबई के एयरपोर्ट पहुँचे थे, जहाँ सभी की स्क्रीनिंग की गई। जाँच में संदिग्ध पाए जाने पर सभी लोगों को कोरोना वायरस संदिग्ध की मुहर लगाई गई और सभी लोगों को घरों में पृथक रहने के निर्देश दिए गए थे साथ ही 14 दिनों तक अपने घरों से न निकलने की भी सलाह दी गई थी, लेकिन सभी ने गाँव में पहुँचते ही एयरपोर्ट पर लगाई गई मुहर को एक खास स्प्रे से मिटा लिया।

वहीं बाद में इन 35 लोगों में से एक माँ और बेटे के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई, तो इस बात का खुलासा हुआ कि सभी लोगों ने क्वारंटाइन का पालन नहीं किया और हाथ पर लगाई गई मुहर को भी हटा लिया था। इसके बाद सभी 35 लोगों के खिलाफ नियमों का उल्लंघन करने पर मामला दर्ज कराया गया है। अमरिया के थाना अध्यक्ष उदयवीर सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की तहरीर के आधार पर 35 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। इसमें कोरोना संक्रमित माँ-बेटे का नाम भी शामिल है। उधर उत्तर प्रदेश में कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या 100 के पार हो गई है। साथ ही योगी सरकार मस्जिदों में छापेमारी कराकर दूसरे प्रदेशों से आए जमातियों पर शिकंजा कसने में लगी हुई है।

जम्मू कश्मीर पर भारत को बदनाम करने में लगा है ध्रुव राठी, बलूचिस्तान पर साध लेता है चुप्पी

ध्रुव राठी ख़ुद को विश्व के सभी मामलों का जानकार मानता है। भूत और भविष्य से लेकर वर्तमान तक पर उसकी पकड़ उसके ‘भक्तों’ की नज़र में इतनी मजबूत है कि उसका एक-एक वीडियो को प्रोपेगंडा फैलाने के लिए हथियार बनाया जाता है। इससे पहले हमने बताया था कि किस तरह राठी पहले कोरोना वायरस को मीडिया द्वारा फैलाया गया हौवा बता रहा था और दावे कर रहा था कि चीन से बाहर के लोगों को इससे जरा भी डरने की ज़रूरत नहीं है। अब यही ध्रुव राठी कोरोना के इलाज से लेकर इसके प्रसार तक पर भाषण देता है और ‘भक्तगण’ बड़े चाव से प्रवचन की तरह सुनते हैं।

इसी बीच उसका एक और प्रोपेगंडा सामने आया है। वो कई देशों के स्वतंत्रता संग्राम पर भी वीडियो बनाता रहा है। इस दौरान वो जम्मू कश्मीर का नाम तो लेता है लेकिन कभी भी बलूचिस्तान के बारे में कुछ नहीं कहता। जबकि सच्चाई ये है कि पाकिस्तान में बलूचिस्तान के लोग आज़ादी के लिए कई दशकों से संघर्ष कर रहे हैं और पाकिस्तानी फ़ौज लम्बे समय से उनका दमन करती आई है। ध्रुव राठी ने एक वीडियो बना कर जम्मू कश्मीर में कर्फ्यू लगाने और वहाँ हिरासत में लिए जाने पर सवाल खड़ा किया था।

साथ ही ध्रुव राठी तिब्बत और हॉन्गकॉन्ग पर वीडियो बनाता है तो कश्मीर की भी चर्चा करता है। नीचे संलग्न की गई तस्वीरों में आप देख सकते हैं कि वो किस तरह कश्मीर मुद्दे पर भारत को बदनाम करता है। अपनी वीडियो में ध्रुव राठी ने यहाँ तक दावा किया था कि जम्मू कश्मीर में लोगों को भारत के बाकी राज्यों की तरह अधिकार नहीं मिलते। जबकि ये बिलकुल असत्य है। वहाँ सरकार सारी सुविधाएँ पहुँचाने के लिए कार्यरत रहती है और सेना वहाँ इसीलिए है ताकि पाकिस्तानी आतंकियों से वहाँ के नागरिकों को बचाया जा सके।

जब चीन में भारतीय छात्र फँसे हुए थे, तब उनमें कई कश्मीरी भी थे। वहाँ कोरोना वायरस के बढ़ते ख़तरे को देखते हुए भारत ने सभी कश्मीरी छात्रों को वहाँ से निकाला और उन्हें वापस लाया। एक कश्मीरी छात्र ने पीएम मोदी को इसके लिए धन्यवाद भी दिया। निज़ाम नामक मेडिकल छात्र ने बताया कि वो और उसके साथी भारत में उनलोगों के लिए किए गए इंतजामों से पूर्णतया ख़ुश थे। बावजूद इसके राठी जैसे लोग प्रोपेगंडा फैलाने में व्यस्त रहते हैं।

इस्लाम का राज स्थापित करना चाहता है तबलीगी जमात, आतंकियों से हैं सम्बन्ध: जानिए इसका पूरा इतिहास

बीते कुछ दिनों से दिनों से आप लगातार तबलीगी जमात का नाम सुन रहे होंगे। आपके मन में आ रहा होगा कि ये क्या है और इसका मतलब क्या है। निजामुद्दीन में इसके कई लोग एक मस्जिद में छिपे हुए पकडे गए हैं, तब से लोग इसके बारे में जानना चाह रहे हैं। कहा जाता है कि 2010 में तबलीगी जमात के 150 देशों में 8 करोड़ अनुयाई थे। इस शब्द का अर्थ हुआ एक ऐसा समाज, जो एक प्रकार की आस्था को फैला रहा है। ये एक वैश्विक सुन्नी इस्लामिक संगठन है, जिसकी जड़ें भारत में जमी हुई हैं। मौलाना मुहम्मद इल्यास कांधलवी इस जमात का संस्थापक था।

तबलीगी जमात का उद्देश्य है कि फिर से इस्लाम का राज्य स्थापित किया जाए, खिलाफत का राज स्थापित किया जाए और लोगों को इस्लाम के उस रूप की तरह ले जाया जाए, जैसे पैगम्बर मुहम्मद ने कहा था। चाल-ढाल से लेकर मजहबी प्रक्रियाओं तक, ये चाहता है कि सभी लोग पुराने सुन्नी तौर-तरीकों की ओर लौटें। इस आंदोलन की शुरुआत ही हुई थी हिन्दुओं से जूझने के लिए। इसका मानना है कि आधुनिक इस्लाम ‘हिन्दुओं से निपटने’ में नाकाम रहा है, इसीलिए गाँव-गाँव घूम कर सुन्नी इस्लाम की विचारधारा को फैलाया जाए। हालाँकि, इसके लोगों का कहना है कि धर्मान्तरण का वो कोई कार्य नहीं करते बल्कि सिर्फ अपने अनुयायियों पर ही फोकस रखते हैं।

इसकी शुरुआत 1926 में हुई थी। पहले इस्लामिक उपदेशकों का समूह बनाया गया था, जो इसके समर्थकों को घर-घर जाकर इस्लाम की शिक्षा देता था। ये लोग मस्जिदों में डेरा डालते हैं और फिर स्थानीय लोगों को नमाज और इज्तेमा के लिए बुलाते हैं, जहाँ उन्हें सिखाया-पढ़ाया जाता है। ये इस्लामिक उपदेशक अधिकतर 40 दिनों की यात्रा पर निकलते हैं और मस्जिदों में ही रुकते हैं। हालाँकि, ये उनके अनुभव पर निर्भर करता है कि वो और ज्यादा दिनों की यात्रा पर जाएँ या नहीं- जैसे 120 दिनों की। जम्मू कश्मीर में अचानक से कोरोना वायरस के मामले बढ़ जाने के पीछे भी तबलीगी जमात ही कारण है।

तबलीगी जमात ख़ुद के ग़ैर-राजनीतिक होने के दावे भी करता रहा है। पाकिस्तानी क्रिकेटर शाहिद अफरीदी से लेकर आईएसआई के प्रमुख रहे जावेद नसीर तक इसका अनुयायी रहे हैं। कई अन्य पाकिस्तानी सेलेब्रिटी भी तबलीगी जमात में शामिल हैं। हालाँकि, समुदाय विशेष में इस जमात को लेकर आपस में ही सिर-फुटव्वल चलती रहती है। सऊदी अरब में सुन्नी वहाबी उलेमाओं ने तो मुल्क में तबलीगी जमात द्वारा मजहबी उपदेश की गतिविधियाँ करने पर रोक लगाई ही है। इसके लिए फतवा भी जारी किया गया था।

तालिबान और अलकायदा से लेकर तमाम आतंकवादी संगठनों से इस जमात के सम्बन्ध सामने आते रहे हैं और उनके साथ इनकी बैठकें होती रहती हैं। ग्लासगो एयरपोर्ट पर हुए हमले में कफील अहमद नामक भारतीय नागरिक गिरफ़्तार किया गया ता, जो तबलीगी जमात से जुड़ा हुआ था। लश्कर-ए-तैयबा का सूडानी सरगना हामिर मोहम्मद जमात का सदस्य बन कर ही पाकिस्तान पहुँचा था। अलकायदा के कई बड़े आतंकी भी तबलीगी जमात के नाम पर अपनी गतिविधियाँ संचालित करते रहे हैं।

तबलीगी जमात पर पूरी चर्चा इस वीडियो में सुन सकते हैं

मेरठ में मौलाना के घर से पकड़े 14 जमाती, एक भी पॉजीटिव निकला तो टूट सकता है पूरे गाँव पर कहर

दिल्ली के निजामुद्दीन में हुई घटना ने पूरे देश में हड़कंप मचा दिया है। यही कारण है कि पहले तो मरकज में शामिल होने वाले जमातियों को खोज-खोजकर क्वारंटीन किया जा रहा है। वहीं योगी सरकार ने भी अपने प्रदेश में ऐसे जमातियों को खोजने का अभियान शुरू कर दिया है, जो लॉकडाउन के बाद भी दूसरे देशों या प्रदेशों से उत्तर प्रदेश में आकर इस्लाम के प्रचार के नाम पर गाँव-गाँव लोगों से मिलते हुए घूम रहे हैं या फिर मस्जिदों में ठहर रहे हैं। इसी कार्रवाई के तहत यूपी पुलिस ने मेरठ के मौलवी के घर से 14 जमातियों को हिरासत में लिया है। इसके बाद सभी को जाँच के लिए क्वारंटीन किया गया है।

न्यूज 18 हिंदी की खबर के मुताबिक मेरठ के काशी में एक मौलाना के घर से पकड़े गए 14 जमाती नेपाल, बिहार, दिल्ली और महाराष्ट्र के हैं, जो कि एक मस्जिद में रह रहे थे, लेकिन निजामुद्दीन में हुई घटना के बाद से मस्जिदों पर हो रही छापेमारी के बाद एक मौलाना ने इन जमातियों को अपने घर में छिपा लिया था। जानकारी के मुताबिक इंटेलीजेंस इनपुट के बाद पुलिस ने इन सभी को पकड़ा है। इसके बाद सभी को पुलिस ने क्वारंटीन करके सैंपल जाँच के लिए भेज दिए हैं। वहीं यूपी पुलिस अब आरोपी मौलाना के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की तैयारी कर रही है।

दूसरी ओर गाँव में छापेमारी के दौरान पकड़े गए जमातियों को देख गाँव में हड़कंप मच गया है और लोगों को भय है कि इनमें से अगर एक भी जमाती को कोरोना पॉजीटिव पाया जाता है तो एक मौलाना की गलती पूरे गाँव पर भारी पड़ सकती है, क्योंकि जमातियों ने मस्जिद में रहने के दौरान कई बार गाँव में भ्रमण किया था और सैकड़ों लोगों से अलग-अलग समय में मुलाकात भी की थी। अब सभी को रिपोर्ट का इंतजार है। दरअसल, इन सभी जमातियों ने दिल्ली में हुए मजहबी सम्मेलन में हिस्सा लिया था।

आपको बता दें कि निजामुद्दीन में हुए मजहबी सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के 157 जमातियों ने हिस्सा लिया था। इसके बाद से यूपी सरकार ने सभी की पड़ताड़ करके क्वारंटीन करने का निर्देश दे दिया है। इसेक बाद से ही यूपी पुलिस जगह-जगह मस्जिदों में छापेमारी कर रही है। वहीं जमात से लौटे तेलंगाना के 6 लोगों समेत 10 की कोरोना वायरस के चलते मौत हो चुकी है।

निजामुद्दीन तबलीगी मरकज मामले में दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, मौलाना साद सहित कई अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज

दिल्ली के निजामुद्दीन में कानून को ताक पर रख आयोजित किए गए मजहबी सम्मलेन और फिर उसके बाद आयोजकों द्वारा की गई लापरवाही को लेकर दिल्ली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। दिल्ली पुलिस ने तबलीगी जमात के मौलाना साद सहित कई अन्य के खिलाफ कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। दरअसल, दिल्ली पुलिस ने यह कार्रवाई उपराज्यपाल के आदेश पर की है। इससे पहले दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने उपराज्यपाल को पत्र लिख आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की थी।

वहीं निजामुद्दीन मरकज मामले में दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने जानकारी देते हुए बताया कि इस मामले में दिल्ली पुलिस को एलजी की तरफ से दिशा निर्देश मिलने के बाद मौलाना साद सहित कई के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। इन सभी लोगों पर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। इनके खिलाफ आईपीसी की धारा 269, 270, 271 के तहत मामला दर्ज किया गया है। अब दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच आगे इस मामले की जाँच करेगी।

आपको बता दें कि दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्थित मरकज में मलेशिया, इंडोनेशिया, सऊदी अरब और किर्गिस्तान समेत कई देशों के करीब 2500 से अधिक लोगों ने 1 से 15 मार्च तक तबलीग-ए-जमात में हिस्सा लिया था। जिनका पता लगने के बाद से पूरे इलाके की कड़ी निगरानी की जा रही है और हर संदिग्ध को अस्पताल में एहतियात के तौर पर भर्ती किया जा रहा है। इनमें से 24 लोगों की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव पाई गई है, इतना ही नहीं इसमें शामिल होने वाले तेलंगाना के 6 जमातियों की अभी तक मौत भी हो चुकी है। वहीं जम्मू कश्मीर में हुई 65 वर्षीय मृतक ने भी इस मजहबी सम्मेलन में हिस्सा लिया था।

बताया जा रहा है कि दिल्ली स्थित कार्यक्रम में शामिल होने वाले विदेशी जमातियों का ग्रुप दिल्ली आने से पहले 27 फरवरी से 1 मार्च के बीच मलेशिया गया था, जहाँ ये लोग एक धार्मिक जलसे में शामिल हुए थे। वहीं आपको बता दें कि दिल्ली में कोरोना के अभी तक 97 केस सामने चुके हैं, जिनमें से 24 मामले निज़ामुद्दीन मरकज़, 41 मामले विदेश की यात्रा करने वालों के और 22 विदेशी यात्रियों के परिवार के सदस्य हैं, जबकि 10 मामले ऐसे हैं, जिनका अभी तक पता नहीं चल सका है। वहीं पूरे देश में कोरोना से मरने वालों की संख्या 32, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 1300 के पार हो गई है।

70000 फरिश्ते अगर नहीं बचा पाए तो डॉक्टर क्या करेगा? निज़ामुद्दीन के तबलीगी मौलाना का लॉजिक

कोरोना वायरस को लेकर समुदाय विशेष में किस तरह से गलतफहमी फैलाई जा रही है और ये काम उनके मौलाना-मौलवी ही कर रहे हैं, ये आपको निजामुद्दीन मरकज मौलाना के एक वीडियो से पता चल जाएगा। इस वीडियो में उसके ‘उपदेश’ सुने जा सकते हैं जो मजहब वालों के लिए हैं। इसमें वो कहता है कि दुनिया में कौन सी ऐसी जगह है, जहाँ आपदा नहीं आई है? क्या वहाँ से भाग जाओगे? इसके बाद वो कुरआन की आयतों का हवाला देते हुए पूछता है कि मौत से भाग कर कहाँ जाओगे, वो तो तुम्हारे आगे-आगे चल रही है, पीछे नहीं। मौत इंसान के आगे रखा है अल्लाह ने, सामने, पीछे नहीं। इसीलिए, मौलाना ‘न भागने’ की सलाह देता है।

इस वीडियो में मौलाना कहता है कि इस हालात में भागना अल्लाह के गुस्से को और बढ़ा देगा। इसके बाद उसने एक कहानी सुनाई। इस कहानी में एक कातिल होता है, जो खून करने के बाद अदालत में पेश किया जाता है तो जज को ही मार डालने की धमकी देता है। इसके बाद मौलाना ने पूछा कि क्या उस मुजरिम को छोड़ दिया जाएगा? फिर वो बताता है कि अदालत में अपील की जाती है, माफ़ी माँगी जाती है, जज का क़त्ल नहीं किया जाता। फिर वो समझाता है कि अल्लाह की तरफ़ से जब ऐसी कोई स्थिति आए तो ये मौका अल्लाह-ताला से माफ़ी माँगने का है।

साथ ही मौलवी लोगों को डॉक्टरों की सलाह न मानने की भी सलाह देता है। वो कहता है कि उनके कहने पर मिलना-जुलना नहीं छोड़ना चाहिए और नमाज भी जारी रखना चाहिए। मौलवी का कहना है कि अगर बीमारी है तो 70 हज़ार फरिश्तों से दुआ करो, किसी भी डॉक्टर से नहीं। वो कहता है कि अगर 70 हज़ार फ़रिश्ते साथ हैं तब बचाव नहीं हो पाया तो कोई मेडिकल विशेषज्ञ या डॉक्टर क्या कर लेगा? वो बार-बार लोगों को कहता है कि जब ऐसी आपदा आए तो अल्लाह की ज्यादा इबादत करो।

ये ‘दिल्ली मरकज’ के यूट्यब पेज पर मौलाना के भाषण का पूरा वीडियो का स्क्रीनशॉट है

मौलवी ने कहा कि आज मस्जिदों को बंद करने को कहा जा रहा है, जो ग़लत है। उसने डॉक्टरों की सलाहों की बात करते हुए लोगों से पूछा कि उन्हें इस बात पर कैसे यकीं आ गया कि मिलेंगे-जुलेंगे तो बीमारी फैलेगी, उन्हें इस बात पर यकीन क्यों नहीं आया कि इस समय अल्लाह उनकी हिफाजत करेगा? मौलाना ने कोरोना पर डॉक्टरों की सलाहों को इस्लाम के ख़िलाफ़ साज़िश करार दिया। उसने कहा कि ये सब एक तय कार्यक्रम के तहत किया जा रहा है ताकि मजहब के लोग एक थाली में न खाएँ और साथ न बैठें।

https://www.youtube.com/watch?v=24yPKrrDmKU
मौलाना निजामुद्दीन मरकज का कोरोना पर अजोबोग़रीब भाषण

मौलाना ने समुदाय के लोगों को दिलासा दिया कि ये बीमारी तो गुजर जाएगी लेकिन उनका इस्लाम में यकीन बने रहना चाहिए। उसने कोरोना को मजहब के लोगों को अलग करने की साज़िश करार दिया। उसने सलाह दी कि मजहब के लोगों को एक-दूसरे के साथ रहना चाहिए और नमाज पढ़ना कभी बंद नहीं करना चाहिए। वीडियो में 3 मिनट के बाद आप सुन सकते हैं, कैसे मौलाना फरिश्तों की बातें कर के डॉक्टरों को नकार रहा है। मौलाना का कहना है कि दुनिया की कोई भी बीमारी लाइलाज नहीं है। उसका दावा है कि नई बीमारियाँ इसीलिए पैदा हो रही है, क्योंकि गुनाह भी नए-नए हो रहे हैं। बकौल मौलाना, ऐसी बीमारी दवा नहीं बल्कि दुआ से ठीक होती है। इस पूरे तक़रीर में जमात के लोगों को खाँसते हुए भी सुना जा सकता है।

नेपाल हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर नेपाली-चीनी मजदूरों के बीच झड़प, लगाए ‘गो बैक टू चीन’ के नारे

नेपाल में काम करने वाले चीनी और स्थानीय नेपाली लोगों के बीच मंगलवार (मार्च 31, 2020) को झड़प हो गई। दोनों के बीच झड़प ऐसे समय पर हुई है जब कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए हिमालयी देश में लॉकडाउन की घोषणा की गई है। इसके अलावा सरकार ने पड़ोसी देशों के साथ लगने वाली अपनी सीमाओं को सील किया हुआ है।

लामजुंग में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट का निर्माण करने वाली एक चीनी कंपनी के मालिकों के साथ नेपाल के मार्यांगडी के स्थानीय लोग भिड़ गए। ग्रामीणों ने लामजुंग जिले के मंगरंगी ग्रामीण नगर पालिका-6 में थुलोबेसी स्थित न्यादी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के लिए निर्माण सामग्री ले जाने वाले ट्रकों की आवाजाही का विरोध किया। साथ ही लोगों ने ‘गो बैक टू चीन’ के नारे भी लगाए। यह जानकारी एक ऑनलाइन मीडिया पोर्टल खाबारहुब ने दी।

स्थानीय लोगों ने उनका विरोध इसलिए किया क्योंकि वे सभी चीन से वापस लौटे हैं। चीन को कोरोना वायरस के प्रसार के लिए जिम्मेदार माना जाता है क्योंकि पिछले साल वुहान में इसका पहला मामला सामने आया था। वहाँ से यह वायरस पूरी दुनिया में फैला और अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है। साथ ही यह महामारी कई देशों की अर्थव्यस्था को प्रभावित कर चुका है। 

गाँव वालों ने चीनी नागरिकों को अपने गाँव में प्रवेश करने से रोक दिया ताकि अनावश्यक आवाजाही को रोका जा सके। हालाँकि, जब हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की निर्माण सामग्री में इस्तेमाल किए जा रहे दो ट्रकों ने ब्लॉकेज (रोकने के लिए लगाई गई तारों) को हटाकर गाँव में प्रवेश करने की कोशिश की तो गुस्साए युवक बाहर आ गए और विरोध शुरू कर दिया। 

चीनी नागरिकों ने स्थानीय लोगों को धमकाने के लिए स्वदेशी खंजर ‘खुखरी’ दिखाई। नेपाली पत्रकार नबीन कुइनकेल ने कहा कि स्थानीय लोगों ने उस समय अपना आपा खो दिया जब निर्माणाधीन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के लिए निर्माण सामग्री लाने के लिए परिवहन ने सड़क किनारे लगाए गए कंटीले तारों को हटा दिया।

स्थानीय नागरिक करण थापा ने कहा कि जब स्थानीय प्रशासन ने लॉकडाउन के उल्लंघन पर आपत्ति जताई तो चीनी नागरिकों ने हम पर हमला किया। उन्होंने कहा, “स्थानीय लोगों ने चीन के लोगों द्वारा सरकारी आदेश का उल्लंघन करने पर विरोध किया।” इस बीच पुलिस ने दोनों पक्षों के बीच बैठक कर समाधान निकालने की कोशिश की।

कोरोना से जंग: भारत की मस्जिदों में छुपाए गए ये विदेशी तबलीगी कौन हैं, कहाँ से आए हैं? सख्त एक्शन की तैयारी में सरकार

देश में जारी लॉकडाउन और सरकार की लाख कोशिशों के बाद भी भारत में कोरोना मरीजों की संख्या लगातार और तेजी से बढ़ती चली जा रही है। इस बीच चौंकाने वाली बात यह कि अचानक से इसकी संख्या में आई तेजी के पीछे हाल ही में दिल्ली के निजामुद्दीन में हुए एक मजहबी सम्मेलन को वजह माना जा रहा है, जो कि सही भी है, क्योंकि दिल्ली में आधे से अधिक कोरोना मरीजों की संख्या मरकज में शामिल होने वालों की है। इतना ही नहीं एक से बाद एक हो रहे नए खुलासों ने देश के कई राज्यों को संकट में डाल दिया है, क्योंकि यहाँ से निकले जमाती देश के अलग-अलग हिस्सों में इस्लाम का प्रचार करने के लिए निकले थे।

अब ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि जब कोरोना से विश्व के कई देश जूझ रहे थे तो भारत में आए विदेशी मुस्लिमों की जाँच के लिए आयोजकों ने सरकार को अवगत क्यों नहीं कराया? इतना ही नहीं मजहबी समम्लेन के बाद ये लोग पूरे देश के अलग-अलग हिस्सों में इस्लाम के प्रचार के लिए निकले और फिर वहाँ की मस्जिदों में भी रुके और वहाँ के लोगों से भी मिले। इस बीच देश में लॉकडाउन भी घोषित हो गया। चौंकाने वाली बात यह कि इस संबंध में किसी भी लोकल मुस्लिम या फिर मस्जिद के मुल्ला मौलवी ने क्षेत्रीय प्रशासन तक को अवगत नहीं कराया।

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि देश के मुस्लिमों द्वारा मस्जिदों में छुपाए गए ये विदेशी आखिर कौन हैं और कहाँ से आए हैं और इनका उद्देश्य धर्म का प्रचार करना ही या फिर कि कुछ और? एक साथ इतने सवाल उठना जरूरी भी इसलिए हो जाता है कि जब लॉकडाउन के बाद पूरे देश के प्रसिद्ध मंदिर और चर्च के दरवाजे बंद हो गए। यहाँ तक कि नवदुर्गा के दौरान देश के सभी मंदिरों के कपाट बंद हो गए। ऐसे समय में भी मस्जिदों में नमाज के लिए भीड़ एकत्र होती रही और मस्जिदों से इस्लाम का प्रचार जारी रहा। आज इस गुनाह का परिणाम पूरे देश को भुगतना पड़ रहा है।

वहीं एबीपी की रिपोर्ट के मुताबिक मरकज में पूरे देश से 1830 जमाती शामिल हुए थे, जिनमें से अब तक 10 जमातियों की मौत हो चुकी है। मरकज में शामिल होने वाले 55 मुस्लिम हैदराबाद, 45 कर्नाटक, 15 केरल, 109 महाराष्ट्र, 5 मेघालय, 107 मध्यप्रदेश, 15 ओडिशा, 9 पंजाब, 19 राजस्थान, 46 राँची, 501 तमिलनाडु, 34 उत्तराखंड, 156 उत्तर प्रदेश, 73 पश्चिम बंगाल, 456 असम से मुस्लिम लोग शामिल हुए थे। इसके साथ ही कार्यक्रम मे 281 विदेशी शामिल हुए थे, जिनमें से 1 जिबूती, 1 किर्गिस्तान, 72 इंडोनेशिया, 71 थाईलैंड और 34 श्रीलंका, 19 बांग्लादेश, 3 इग्लैंड, 1 सिंगापुर, 4 फिजी, 1 फ्रांस, 2 कुवैत के विदेशी मुस्लिम शामिल थे।

उधर निजामुद्दीन तब्दीली जमात मरकज से अब तक 1200 लोगों को निकाला जा चुका है, जिनमें से 200 विदेशी लोग शामिल हैं। वहीं सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए विदेशों से पर्यटन के नाम पर इस्लाम का प्रचार करने वाले 255 विदेशियों के वीजा को रद्द कर दिया है। ये लोग अब कभी भारत की यात्रा नहीं कर सकेंगे। साथ ही दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने इसे गंभीर अपराध करार देते हुए कहा कि आयोजकों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी इसके लिए केन्द्र सरकार को भी पत्र लिखकर माँग की गई है।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने द हिंदू को बताया कि दक्षिण दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में तबलीगी जमात के मुख्यालय अलमी मरकज बंग्लेवाली मस्जिद में इस महीने की शुरुआत में देश भर से लगभग 8,000 लोग शामिल हुए थे, जिसमें 16 देशों के इस्लामी प्रचारकों ने हिस्सा लिया था। इनमें से 800 इंडोनेशियाई प्रचारकों को भारत ब्लैकलिस्ट करने जा रहा है, ताकि भविष्य में वे देश में प्रवेश न कर सकें।

गौरतलब है कि इससे पहले भी कई स्थानों से पुलिस ने मस्जिदों से विदेशी मुस्लिमों को इस्लाम का प्रचार करते हुए गिरफ्तार किया है, जिनमे बिहार की राजधानी पटना से भी 12 विदेशी, जो कि तजाकिस्तान से भारत में इस्लाम धर्म प्रचार करने आए थे। महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के नेवासा नगर की एक मस्जिद से 10 विदेशी मुस्लिमों को पुलिस ने हिरासत में लिया था। झारखंड की राजधानी राँची के स्थित मस्जिद से भी 11 विदेशी मौलवियों को पुलिस प्रशासन ने हिरासत में लिया था।

तबलीगी जमात के आतंकवादी संगठनों अलकायदा, तालिबान और कश्मीरी आतंकवादियों से भी संबंध

भारत के कई राज्यों में वुहान कोरोना वायरस के प्रसार में तबलीगी जमात की भूमिका सामने आई है। दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्थित मरकज में इस्लामी संगठन द्वारा आयोजित एक इस्लामी मजहबी आयोजन में भाग लेने के बाद कम दस लोगों की मौत हो गई है। वैसे भारत अकेला ऐसा देश नहीं है जो तबलीगी जमात की लापरवाही से प्रभावित है। अन्य दक्षिण एशियाई देश भी इसका खामियाजा भुगत रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में, अलकायदा जैसे आतंकवादी संगठनों के साथ तबलीगी जमात के संबंध बेहद अर्थपूर्ण हो जाते हैं।

2011 में विकिलिक्स द्वारा जारी गुप्त अमेरिकी दस्तावेजों से पता चला है कि अलकायदा के कुछ गुर्गों ने जमात का इस्तेमाल अपनी पाकिस्तान की यात्रा के लिए वीजा और फंड हासिल करने के लिए किया। दस्तावेजों में कहा गया है कि वे दिल्ली या फिर इसके आस-पास भी रहते थे। ‘एक अनुभवी जिहादी’ के रूप में सऊदी अरब के अब्दुल बुखारी का हवाला देते हुए, क्यूबा में ग्वांतानामो बे के अमेरिकी अधिकारियों द्वारा तैयार रिपोर्ट में कहा गया है कि 1985-1986 में वह जिस जमात के सदस्य से मिले थे, उसने पाकिस्तान के लिए वीजा में उनकी मदद की। 25 जुलाई, 2007 की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जमात तबलीगी के एक सदस्य ने एक बंदी के लिए पाकिस्तान का वीजा खरीदा, जिसके बाद वो बंदी और अन्य सऊदी लोग लाहौर गए।

विकीलीक्स में खुलासा किया गया है कि उस बंदी को फिर नई दिल्ली में जमात तबलीगी के नेता से मिलवाया गया संगठन के लिए एक जीवन समर्पित करने के लिए कहा गया। बंदी ने जमात तबलीगी से कहा कि उसे इस बारे में सोचने की जरूरत है क्योंकि वह अपना जीवन सेवा, तीर्थयात्रा और मिशनरी कार्यों में नहीं लगाना चाहता। इसके बाद वो दो सप्ताह के लिए लाहौर लौटा और फिर सऊदी अरब चला गया।

1 सितंबर, 2008 को सोमालियाई बंदी मोहम्मद सोलिमन बर्रे पर प्रकाशित एक रिपोर्ट में धर्मांतरण करवाने वाली संस्था जमात तबलीगी की पहचान अलकायदा कवर स्टोरी के रूप में की गई है। अलकायदा, जमात तबलीगी के सदस्यों की अंतर्राष्ट्रीय यात्रा को सुविधाजनक बनाने और फंड देने का काम करती है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उसे भारत में संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी का दर्जा देने से इनकार कर दिया गया था, लेकिन उसने जमात तबलीगी के प्रायोजन के तहत पाकिस्तान जाने के लिए वीजा लिया था। बंदी ने कहा कि उसका मिशनरी कर्तव्यों को पूरा करने या जमात तबलीगी के साथ सेवा करने का कोई इरादा नहीं है, उन्होंने तो सिर्फ वीजा प्राप्त करने के लिए समूह का इस्तेमाल किया था।

एक अन्य रिपोर्ट में भी तबलीगी जमात का उल्लेख है। 27 जनवरी 2008 को तैयार किए गए सूडान के अमीर मुहम्मद पर एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 1991 की शुरुआत में बंदी ने सुडान ने केन्या के रास्ते भारत की हवाई यात्रा की। भारत के लिए उड़ान भरते समय बंदी ने तबलीगी जमात के एक प्रतिनिधि से मुलाकात की, जिसने उसे नई दिल्ली के एक बड़े तबलीगी सेंटर के बारे में बताया, जहाँ वह सहायता के लिए जा सकता था। रिपोर्ट में कहा गया है कि बंदी ने पाकिस्तानी वीजा प्राप्त करने के लिए खुद को एक तबलीगी के रूप में पेश किया।

इस तरह से यह स्पष्ट है कि इस्लामिक संगठनों ने तबलीगी जमात का इस्तेमाल अपने सदस्यों की यात्राओं को सुविधाजनक बनाने के लिए एक पाइपलाइन की तरह इस्तेमाल किया। 2003 में ब्रुकलिन ब्रिज को नष्ट करने के लिए एक आतंकवादी साजिश के आरोपित ओहियो ट्रक ड्राइवर आयमान फारिस ने अल कायदा के लिए एक काम पूरा करने के लिए जमात का इस्तेमाल पाकिस्तान की सुरक्षित यात्रा के लिए किया। तबलीगी जमात का नाम संयुक्त राज्य अमेरिका में 9/11 आतंकवादी हमले के बाद के बाद जाँचकर्ताओं की नजर में आया। इसके बाद कम से कम चार हाई-प्रोफाइल आतंकवाद मामलों में इसका नाम सामने आया था।

एक प्रतिष्ठित जिओपोलिटिकल इंटेलीजेंस प्लेटफॉर्म स्ट्रैटफ़ोर ने तबलीगी जमात और ग्लोबल जिहाद की दुनिया से इसके संबंध पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की। रिपोर्ट में कहा गया है कि जमात और शिया विरोधी संप्रदाय समूहों, कश्मीरी आतंकवादियों और तालिबान के बीच ‘अप्रत्यक्ष कनेक्शन’ का सबूत है। इसमें कहा गया है कि तबलीगी जमात संगठन इस्लामिक चरमपंथियों के लिए और नए सदस्यों की भर्ती के लिए अलकायदा जैसे समूहों के लिए एक वास्तविक समूह के रूप में कार्य करता है। तबलीगी कट्टरपंथी इस्लामवाद की दुनिया से तब रूबरू होते हैं जब वे अपना शुरुआती ट्रेनिंग लेने के लिए पाकिस्तान जाते हैं। एक बार पाकिस्तान में भर्ती होने के बाद, तालिबान, अल कायदा और हरकत-उल-मुजाहिदीन जैसे आतंकवादी संगठन उन्हें अपने में शामिल करने की कोशिश करते हैं।

दुनिया भर में वुहान कोरोना वायरस के प्रसार में अपनी भारी भागीदारी सुनिश्चित करने से पहले तबलीगी जमात से जुड़े लोगों ने आतंकवादी हमलों में नियमित रूप से भाग लिया। 2017 के लंदन ब्रिज हमले में हमलावरों में से एक, यूसुफ ज़ाग्बा को तबलीगी जमात से जुड़ा था। 2005 में लंदन बम धमाकों को अंजाम देने वाले 7/7 आतंकवादियों के सरगना मोहम्मद सिद्दीकी खान और सहयोगी शहजाद तनवीर को भी तबलीगी जमात से जुड़ा था।

वुहान कोरोना वायरस के प्रसार में तबलीगी जमात के संदिग्ध तरीके और आतंकवादी संगठनों के लिंक उसके इतिहास को देखते हुए यह संभावना जताई जा रही है कि यह ‘बायोलॉजिकल टेरर’ का एक हिस्सा हो सकता है। पाकिस्तान, मलेशिया और अब भारत में भी तबलीगी जमात के मजहबी कार्यक्रमों ने दक्षिण एशियाई देशों में वायरस फैला दिया है। यदि यह सच में जानबूझकर फैलाने का मामला था, तो यह उन घटनाओं के सबसे खतरनाक मोड़ को दर्शाता है जो अब देशों के अधिकारियों को झेलनी पड़ेंगी। साथ ही उनके लापरवाही के इस घिनौने कृत्य की वजह से कई जीवन खतरे में पड़ गए हैं।

6.6 लाख लोगों के लिए 21000 कैम्प, 23 लाख को खिलाया जा रहा खाना: कोरोना पर स्वास्थ्य व गृह मंत्रालय के आँकड़े

स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना वायरस को लेकर अब तक के अपडेट्स और सूचनाओं के साथ-साथ सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों से जनता को अवगत कराया है। मंत्रालय ने बताया है कि पिछले 24 घंटों में देश में कोरोना के 227 नए मामले सामने आए हैं। देश में लॉजिस्टिक्स आइटम्स की कमी न हो इसके लिए दक्षिण कोरिया, टर्की और वियतनाम से सप्लाई ली जा रही है। स्वास्थ्य मंत्रालय के जनरल सेक्रेटरी लव अग्रवाल ने बताया कि डीआरडीओ स्थानीय उत्पादन कंपनियों के साथ मिल कर एन-95 मास्क की सप्लाई बढ़ाने के लिए लगातार कार्य कर रहा है।

इधर दिल्ली सरकार ने ‘एपिडेमिक डिजीज एक्ट’ के तहत सभी डीएम, म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन और पुलिस को कहा है कि जहाँ भी डॉक्टरों अथवा नर्सों को उनके मकान-मालिकों द्वारा घर खाली करने के लिए दबाव बनाया जा रहा हो, वहाँ कार्रवाई की जाए। उधर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि हर एक जिले में तलाशी अभियान चला कर उन लोगों को खोजा जाए, जिन्होंने दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित मरकज़ इमारत में हुए मजहबी कार्यक्रम में हिस्सा लिया हो। संभावना है कि उनमें से कुछ लोग यूपी में हो सकते हैं, जो कोरोना के करियर भी हो सकते हैं।

अब तक 42,788 सैम्पलों की टेस्टिंग की जा चुकी है। इनमें से 4346 सैम्पलों की टेस्टिंग तो 1 दिन पहले ही की गई है। आईसीएमआर ने बताया कि ये उनकी 36% क्षमता को दर्शाता है। अब तक 133 लैब्स सक्रिय हो गए हैं। साथ ही 49 प्राइवेट लैब्स को भी अनुमति दे दी गई है। सोमवार (मार्च 29, 2020) को 399 लोगों की टेस्टिंग उन प्राइवेट लैब्स में ही की गई। स्वास्थ्य मंत्रालय ने निजामुद्दीन क्षेत्र में कई कोरोना मरीजों के मस्जिद में छिपे मिलने वाली घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ये फाल्ट-फाइंडिंग का समय नहीं है बल्कि जल्द से जल्द एक्शन लेने का वक़्त है।

इधर गृह मंत्रालय ने भी जानकारी दी है कि देश भर में अब तक 21,064 कैम्पस स्थापित किए जा चुके हैं। इनमें अलग-अलग प्रदेशों में मजदूरों और बेघर लोगों को आसरा दिया जा रहा है। फ़िलहाल इन कैम्पों में 6.6 लाख लोग रह रहे हैं और 23 लाख लोगों के लिए खाने का इंतजाम किया जा रहा है। ये वो लोग हैं, जो गरीब हैं, भूख की समस्या से जूझ रहे हैं, दूसरे प्रदेशों से आए हैं या फिर कई ऐसे भी हैं जो अपने गृह राज्य में पहुँचने के बाद क्वारंटाइन किए गए हैं।