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21 साल के भारतीय युवक का चीनी सेना ने किया अपहरण: अंतरराष्ट्रीय नियमों की उड़ाई धज्जियाँ, भारतीय एजेंसियाँ सख्त

अरुणाचल प्रदेश की द तागिन कल्चरल सोसाइटी ने राज्य के गवर्नर को दिए मेमोरेंडम में आरोप लगाया है कि राज्य के अपर सुबनसिरी जिले में मैकमोहन लाइन के पास असपिला सेक्टर से 21 साल के युवक को पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने अगवा कर लिया है। तोगले सिंग्कम और उसके दोस्त गाम्शी चादर और रोन्या नाडे तागिन समुदाय के ना कबीले से सम्बद्ध जमीन से परम्परागत जड़ी बूटी और मछली पकड़ने गए थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तागिन सोसाइटी ने राज्यपाल को दिए अपने मेमोरेंडम में कहा- 19 मार्च की दुर्भाग्यशाली सुबह जब तीनों दोस्त मछली पकड़ने में व्यस्त थे, चीनी सैनिकों ने उन्हें घेर लिया और बंदूख की नोंक पर तोंगले का अपहरण कर लिया, जबकि बाकी दोनों भागने में कामयाब रहे। मेमोरेंडम में कहा गया कि उसने वास्तविक नियंत्रण रेखा या कोई भी अंतर्राष्ट्रीय रेखा नहीं लाँघी थी, जबकि चीनी सैनिक इस पार घुस कर आए और अमानवीय तरीके से उसे अपह्रत कर के ले गए, जो अंतर्राष्ट्रीय नियमों की धज्जियाँ उड़ाना है।

याद रहे कि मैकमोहन लाइन ही तिब्बत को अरुणाचल प्रदेश से अलग करती है। और जिस प्रकार चीन दूसरे देशों के क्षेत्रों को अपना कहने में माहिर है उसी प्रकार वह भारत के इस उत्तर पूर्वी राज्य को भी अपना बताता रहता है। मेमोरेंडम के अनुसार इस अगवा किए गए युवक के दोस्तों ने लौट कर इस घटना की जानकारी इसके परिजनों को दी, जिसके बाद उन्होंने 23 मार्च को नाचो पुलिस स्टेशन में जाकर इसकी रिपोर्ट लिखवाई।

इस मामले पर सुबनसिरी के एसपी तारु गूसर ने पीटीआई को बताया है कि मामले की छानबीन के लिए नाचो थाने के इंचार्ज को घटना स्थल पर भेजा गया है। वहीं सेना के पूर्वी कमाण्ड के कोलकाता स्थित मुख्यालय में मौजूद अधिकारियों ने बताया कि वे उस क्षेत्र में तैनात सैन्य कर्मियों से इस मामले की जानकारी जुटा रहे हैं। मेमोरेंडम मिलने की पुष्टि गवर्नर कार्यालय ने कर दी है।

तागिन कल्चरल सोसाइटी ने गवर्नर से प्रार्थना की है कि वो इस मामले को केंद्र के सामने उठाएं और शीघ्रतापूर्वक सिंग्कम की रिहाई सुनिश्चित करें। यह भी कहा गया है कि तागिन समुदाय सीमावर्ती इलाकों में रहता है, जिसका जीवन इस तरह की घटनाओं से बेहद दुष्प्रभावित हो जाता है। यह कथित अपहरण ऐसे समय हुआ है जब पूरी दुनिया चीनी वायरस से बेहाल हो रखी है। जबकि विश्व का ध्यान अभी भी कोरोना संक्रमण पर है, चीन खराब चिकित्सा उपकरण बेंचने और अमानविक गतिविधियों को बढ़ाने में लगा है।

लाल सलाम की फट गई डफली, जिस अंबानी-अडानी को देते थे गाली… वही उद्योगपति आज कर रहे देश की मदद

वामपंथी अक्सर कॉर्पोरेट हस्तियों को गालियाँ देते हैं। यहाँ तक कि पीएम मोदी पर भी निशाना साधने के लिए अम्बानी-अडानी से उनके कथित नजदीकी संबंधों का हवाला दिया जाता है। ये सच है कि पीएम मोदी के अधिकतर कॉर्पोरेट हस्तियों के साथ अच्छे सम्बन्ध हैं क्योंकि जब वो गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तभी से वो राज्य में निवेश के लिए देश-विदेश के उद्योगपतियों के साथ बैठकें करते रहे हैं। ‘वाइब्रेंट गुजरात’ से लेकर तमाम तरह के कार्यक्रमों के जरिए उद्योगपतियों को गुजरात में निवेश के लिए बुलाया जाता था। उस दौरान नरेंद्र मोदी चीन वगैरह की भी यात्रा करते थे और वहाँ से भी बिजनेस डील हुआ करते थे।

भारत में टाटा-बिरला और अम्बानी जैसे कई ऐसे बड़े उद्योगपति हैं, जिनका परिवार दशकों से देश के विकास में योगदान देता रहा है। सरकारें बदलीं और देश पर अलग-अलग समय में कई आपदाएँ आईं, जहाँ इन लोगों ने जो भी सरकार रही, देश की मदद की है। वामपंथी कॉर्पोरेट हस्तियों का ऐसे विरोध करते हैं, जैसे उन्होंने पैसे लूट लिए हों। किसी ने अगर कोई कम्पनी खड़ी की है तो उसके पीछे उसकी मेहनत और दिमाग होता है। अगर वामपंथियों को लगता है कि अम्बानी-अडानी ने उनके पैसे लूट लिए हैं तो वो केस करें। यही लोग तो संविधान-संविधान की रट लगाते रहते हैं। वो अलग बात है कि संविधान के नियमों का पालन करते हुए बने क़ानून को नहीं मानते।

देश कोरोना वायरस के महासंकट से जूझ रहा है। रतन टाटा ने इसे अब तक का सबसे बड़ा संकट करार दिया है। देश में मरीजों की संख्या 1200 के पार हो गई है, जिनमें से 29 को अपनी जान गँवानी पड़ी है। महाराष्ट्र (215) और केरल (202) इस संक्रमण से सबसे ज्यादा जूझ रहे हैं। ऐसे समय में घर में खाली बैठे वामपंथियों के पास एक ही काम बचा है- जहाँ-तहाँ से जो भी मिले, उसकी आलोचना करते रहो और नकारात्मकता फैलाते रहो। कोई अम्बानी को गाली दे रहा है, कोई मोदी को तो कोई बीसीसीआई को।

टाटा परिवार ने इस संकट की घड़ी में 1500 करोड़ रुपए की मदद कर के देशहित में अपना योगदान किया है। ऐसा नहीं है कि उसने सिर्फ़ वित्तीय मदद देकर इतिश्री कर ली है बल्कि टाटा फाउंडेशन के लोग भी लोगों की मदद करने में लगे हुए हैं। मेडिकल कर्मचारियों के लिए उपकरणों की व्यवस्था की जा रही है क्योंकि कोरोना से लड़ने वालों का सबसे ज्यादा सुरक्षित रहना ज़रूरी है। टाटा ने 5 सूत्रीय कार्यक्रम बना कर काम शुरू कर दिया है। क्या किसी ने टाटा को इसके लिए मजबूर किया? नहीं। उन्होंने स्वेच्छा से अपने धन का देशहित में इस्तेमाल करने का निर्णय लिया है। वो सिर्फ़ बकैती नहीं कर रहे।

इसी तरह रिलायंस ने कुछ ही दिनों में देश का पहला ‘कोरोना वायरस डेडिकेटेड अस्पताल’ तैयार कर दिया। अपने अन्य अस्पतालों में कोरोना के इलाज और लोगों को क्वारंटाइन करने की व्यवस्था की। ऐसे समय में वित्त से भी ज्यादा ज़रूरी संसाधन है क्योंकि देश-विदेश का व्यापार ठप्प पड़ा हुआ है। ऐसे में रिलायंस ने प्रतिदिन एक लाख मास्कों का उत्पादन करने का फ़ैसला लिया। देश भर में ग़रीबों को अलग-अलग स्थानों पर खाना खिलाने का उपक्रम भी रिलायंस द्वारा चलाया जा रहा है। हाँ, अम्बानी को गाली देने वाले ज़रूर अपने घर का एसी ऑन कर के उनके ख़िलाफ़ लेख लिख रहे होंगे।

इसी तरह आनंद महिंद्रा ने भी अपनी 100% सैलरी कोरोना से लड़ने के लिए देने का निर्णय लिया है। साथ ही उन्होंने महिंद्रा हॉलिडे रिसॉर्ट्स को क्वारंटाइन सेंटर्स के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। साथ ही वो उन छोटे व्यापारियों की भी मदद करेंगे, जिन पर इस आपदा का सबसे ज्यादा असर हुआ है। इसी तरह वेदांता लिमिटेड के अनिल अग्रवाल ने 100 करोड़ रुपए की मदद का ऐलान किया है। साथ ही उन्होंने दिहाड़ी मजदूरों की व्यथा का जिक्र करते हुए उनकी भी मदद करने की घोषणा की। इसके अलावा अल्कोहल ब्रांड ‘Diageo India’ ने 3 लाख लीटर सैनिटाइजर उपलब्ध कराने की घोषणा की। जब बाजार में सैनिटाइजरों की कमी है, ऐसे में ये मदद कारगर सिद्ध होगी। इसके सीईओ आनंद कृपालु ने बताया कि ऐसे समय में उनकी कम्पनी सैनिटाइजर की उपलब्धता के लिए दिन-रात एक कर देगी।

‘हीरो साइकल्स’ ने भी 100 करोड़ रुपए के कंटिंजेंसी फण्ड की घोषणा की है। ऐसे समय में कॉर्पोरेट जगत की हस्तियों को गाली देने वाले वामपंथी क्या कर रहे हैं? वो विदेशी पोर्टलों में लेख लिख कर उन लोगों को बदनाम कर रहे हैं, जो असल में लोगों की मदद कर रहे हैं। डफली बजाने से अगर कोरोना से लड़ाई लड़ ली जाती तो शायद आज जेएनयू के वामपंथी ब्रिगेड से ही सबसे ज्यादा डॉक्टर और वैज्ञानिक निकलते। अगर प्रोपेगेंडा पोर्टलों में लेख लिखने से कोरोना भाग जाता तो राणा अयूब, सदानंद धुमे और बरखा दत्त जैसे लोगों ने अब तक वैक्सीन का अविष्कार कर लिया होता। प्रमुख बात ये है कि अगर आप सच में देशहित में काम करने वालों का सम्मान नहीं कर सकते तो कम से कम उनका विरोध करने का अधिकार तो आपको नहीं है।

गौतम अडानी ने भी 100 करोड़ रुपए पीएम केयर्स फंड में देने की घोषणा की है। आज जब देश संकट से जूझ रहा है, तब जिसके पास जो है उससे ही मदद की जानी चाहिए, आरोप-प्रत्यारोप नहीं होना चाहिए। आपके पास संसाधन हो सकता है, वित्त हो सकता है या फिर श्रमबल हो सकता है- आप तीनों से मदद कर सकते हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सहित कई संगठनों के लोग राहत कार्य में लगे हैं लेकिन वामपंथी चुन-चुन कर उन्हें ही गालियाँ देते रहे हैं, जिन्होंने मौका पड़ने पर देश की मदद की है, आगे बढ़ कर जनता के दुःख को मिटाने का काम किया है।

पादरी ने कोरोना को सुनाया मौत का फरमान, ईश्वरीय उपचार के लिए TV स्क्रीन छूने को बोला: देखें मजेदार Video

अमेरिका के ईसाई धर्म प्रचारक पादरी केनेथ कोपलैंड जिसे लोगों को बेवकूफ बना कर ठगने के लिए जाना जाता है, ने घोषणा की कि वुहान कोरोना वायरस को गॉड ने ‘समाप्त’ कर दिया है। एक भीड़ को सम्बोधित करते हुए कोपलैंड ने जीसस के नाम पर COVID-19 को सजा देने का ऐलान किया। हास्यास्पद रूप से कोपलैंड ने वुहान वायरस को सम्बोधित करते हुए कहा- मैं तुम्हारे खिलाफ जजमेंट देता हूँ, ऐ शैतान, ऐ विध्वंसक, ऐ हत्यारे, भाग जा यहाँ से। भाग जा इस राष्ट्र से। मैं तेरे खिलाफ निर्णय देता हूँ।

ईसाई धर्म प्रचारक केनेथ कोपलैंड ने आगे इस वायरस के लिए तुरंत वैक्सीनेशन की भी माँग की। कोपलैंड कहता है, “मैं तुम्हें अँधेरा कहता हूँ। तुमने मुझे क्रोधित किया है। जिस तरह गॉड ने ईडन के बगीचे में तुम्हारे सिर पर पैर रख तुम्हें आदेश दिया था उसी तरह मैं तुम्हें आदेश देता हूँ कि अपने पेट के बल लेट कर घिसटो। ये समाप्त हो गया। ये खत्म हो गया। और संयुक्त राज्य अमेरिका फिर से स्वस्थ और अच्छा हो गया है।”

मंच पर मौजूद कोपलैंड के सहयोगी ने इसके बाद कहना शुरू कर दिया कि कोरोना COVID-19 की रूह अब खत्म हो चुकी है। उसने कहा “अब ये मर चुका है, ये खत्म हुआ।”, जिस पर कोपलैंड ने अपनी सहमति दी। कोपलैंड का सहयोगी यहीं नहीं रुका। उसने आगे कहा कि इस वायरस ने अपनी इच्छाशक्ति खो दी है और यह अप्रासंगिक हो चुका है। जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए कोपलैंड ने अपनी घड़ी पर नजर डाली और कहा,”हाँ ठीक 12 बजे दोपहर, 29 मार्च को इस वायरस का खात्मा हो गया है।”

कोरोना वायरस को “समाप्त” कर देने के बाद वो सब एक सुर में, “ईश्वर की प्रशंसा करो, जीसस को शुक्रिया कहो” चिल्लाने लगे। जबकि वर्ल्डमीटर ( Worldometer ) के हिसाब से अमेरिका में 29 से 30 मार्च के बीच 333 नए कोरोना संक्रमण के केस सामने आए।

पहली बार ऐसा नहीं है कि कोपलैंड ने कोई अजीबोगरीब बयान दिया है। इस महीने के शुरुआत में भी उसने टेलीविजन के माध्यम से ही कोरोना वायरस को ठीक करने का दावा किया था। उसने अपने दर्शकों से कहा था कि ईश्वरीय उपचार पाने के लिए बस अपनी टेलीविजन स्क्रीन को ही छू लें।

यूएस बेस्ड मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कोपलैंड एक धोखेबाज और फ्रॉड है, जो जादू के जरिए उपचार करने का दावा करता है। इस पर ये भी आरोप है कि इसने 2006 के हैती भूकंप पीड़ितों के लिए फंडिंग करने का झूठ कहा था। ये कोरोना वायरस को लेकर भी लगातार भ्रामक जानकारियाँ फैला रहा है।

सैफ के कारण पत्नी, उसका भतीजा, साली समेत 10 लोग हुए संक्रमित: बिहार में बढ़ा कोरोना के सामुदायिक संक्रमण का ख़तरा

कतर से लौटे मुंगेर के जिस 38 वर्षीय युवक सैफ की एम्स पटना में गत 22 मार्च को मौत हुई थी, उसके संपर्क में आने वालों में 10 लोग अब तक कोरोना संक्रमित निकल चुके हैं। इन कोरोना पॉजिटिव मामलों में सैफ की पत्नी, उसका भतीजा और साली के अलावा मुंगेर स्थित अस्पताल के 4 और पटना स्थित शरणम् अस्पताल के भी तीन कर्मचारी शामिल हैं, जिन अस्पतालों में सैफ का इलाज हुआ था।

सैफ के मामले में हुई घोर लापरवाही के कारण पहले से ही इस बात की आशंका बनी हुई थी कि कहीं ये बिहार में सामुदायिक संक्रमण की वजह न बन जाए। अब जबकि सैफ के सम्पर्क में रहे 10 लोगों के कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि हो चुकी है, बिहार के शासन-प्रशासन के माथे पर बल पद चुके हैं। इन नए मामलों के आने के बाद से वहाँ का स्वास्थ्य विभाग अब इस जाँच-पड़ताल में लगा है कि इन 10 कोरोना संक्रमित लोगों के सम्पर्क में कौन-कौन आया था। जाँच का दायरा बढ़ता जा रहा है। हालाँकि, इन 10 संक्रमित व्यक्तियों के सम्पर्क में आए लोगों में से अब तक जितने व्यक्तियों की जाँच करवाई गई है वे सभी कोरोना निगेटिव निकले हैं।

कल रविवार को पटना के उस शरणम अस्पताल की महिला कर्मी की माँ, बहन तथा दो भाइयों के नमूने जाँच को लिए गए, उसके परिवार के अन्य सदस्यों के नमूने जाँच के लिए सोमवार को लिए जाएंगे। याद रहे कि इस शरणम अस्पताल में ही सैफ को मुंगेर से लाकर भर्ती करवाया गया था। इस बीच मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक तरफ जहाँ बिहार में कोरोना के सामुदायिक संक्रमण की आशंकाएँ बढ़ती जा रही हैं, वहीं लोगों की लापरवाही और गैर जिम्मेदार रवैये में कोई परिवर्तन आता नहीं दिख रहा। यहाँ तक कि कोरोना से संक्रमित व्यक्ति उन लोगों की भी ठीक-ठीक जानकारी नहीं दे रहे जिनसे बीते दिनों वे सम्पर्क में आए थे।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, अभी तक जिन 15 व्यक्तियों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है वे भी जाँच पड़ताल में सहयोग नहीं कर रहे जिस कारण स्वास्थ्य विभाग को अन्य संभावित कोरोना संक्रमित व्यक्तियों तक पहुँचने में काफी मुश्किलें आ रही हैं। बतौर उदाहरण पटना के जिस युवक में कोरोना का संक्रमण पाया गया था उसके परिवार के सदस्यों के नमूने तुरंत एकत्र कर लिए गए थे लेकिन उसके सम्पर्क में रहे दूसरे 6 लोगों को ढूंढ़ने में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को पाँच दिन लग गए। जाहिर है यदि इनमें से कोई कोरोना पॉजिटिव निकला तो वह बीते दिनों कितनों से मिला होगा!!

पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के आइसोलेशन वार्ड में रविवार को आठ नए कोरोना संक्रमित आशंकितों को भर्ती किया गया। वर्तमान में इस अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में कुल 22 लोग भर्ती हैं। इसके अलावा सात लोगों के नमूने जाँच के लिए भेजे गए हैं। देर से आने के कारण एक आशंकित का नमूना सोमवार को जांच के लिए भेजा जाएगा। इसी तरह पटना के इंदिरा गाँधी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के वायरोलॉजी लैब में अब तक 64 नमूनों की जाँच की गई जिनमें से 4 में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है।

लॉकडाउन के बीच बमबारी: वार्ड पार्षद शम्स इकबाल और आलम अंसारी के खिलाफ FIR दर्ज

एक तरफ जहाँ पूरा देश कोरोना वायरस के महामारी से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ सोमवार (मार्च 30, 2020) को कोलकाता में दो वार्ड पार्षदों के खिलाफ मापीट करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। जानकारी के मुताबिक शहर के वार्ड नंबर 134 और 137 की सड़कों पर पूरी रात तक भयंकर लड़ाई चली। जब मामला काफी आगे बढ़ गया तो फिर स्थानीय लोगों ने मजबूरन इसकी शिकायत पुलिस से की। जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की।

कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि वार्ड नंबर 134 के पार्षद शम्स इकबाल और वार्ड नंबर 137 के पार्षद रहमत आलम अंसारी के खिलाफ मारपीट और लॉकडाउन का उल्लंघन करने का मामला दर्ज किया गया है। इन पार्षदों के समर्थकों को एक-दूसरे पर बमबारी करते और यहाँ तक कि गाली-गलौज करते हुए भी देखा गया था।

पुलिस ने बताया कि हिंसा के सिलसिले में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है और स्थिति अब शांतिपूर्ण है। जब भी चुनाव का समय नजदीक होता है, अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्र में हिंसा होते हुए पाया गया है। हालाँकि यह काफी चिंताजनक घटना है, क्योंकि ये ऐसे समय में हुआ है, जब पूरा देश कोरोना जैसी महामारी से निपटने के लिए प्रयासरत है। देश में 47 नए केस सामने आने के बाद अभी तक कुल कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 1071 हो गई है, जबकि 29 लोगों की मौत हो चुकी है।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (मार्च 24, 2020) को देशभर में 21 दिनों के लिए लॉकडाउन की घोषणा की। लॉकडाउन का ऐलान करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से जहां हैं वहीं रहने की अपील की थी। पीएम मोदी ने कहा था कि इस खतरनाक वायरस का अभी तक कोई इलाज नहीं खोजा गया है। इसलिए लॉकडाउन और एक दूसरे से दूरी ही सबसे सफल उपाय है। इसके बावजूद कई लोग ऐसे हैं जो सब कुछ जानकर भी अनसुना कर रहे हैं। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इसे रोकने के लिए अपनी भागीदारी निभानी होगी। वरना वो समाज का नुकसान तो करेंगे ही, खुद को भी नहीं बचा पाएँगे।

प्रवासी मजदूरों का हरसंभव सहायता कर रही योगी सरकार को आपके सहयोग की जरूरत – ये रहा बैंक डिटेल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने भी कोरोना से लड़ने को आम जन से सहयोग माँगा है। योगी आदित्‍यनाथ ने भी ‘मुख्यमंत्री पीड़ित सहायता कोष’ की शुरुआत की है। इस राहत कोष में लोग मदद के लिए राशि भेज सकते हैं। मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है।

मुख्‍यमंत्री ने ट्वीट के माध्‍यम से कहा, “कोरोना वायरस महामारी से संघर्ष में सरकार व समाज की सम्मिलित शक्ति की आवश्यकता है। मेरी आप सभी से अपील है कि ‘मुख्यमंत्री पीड़ित सहायता कोष’ द्वारा पीड़ितों की सहायता व उन्हें राहत प्रदान करने हेतु अपनी सामर्थ्य के अनुसार सहयोग करें और हम सभी के इस महासंघर्ष को शक्ति प्रदान करें।”

जो लोग उत्‍तर प्रदेश सरकार की ओर से जारी ‘मुख्यमंत्री पीड़ित सहायता कोष’ में मदद करना चाहते हैं वह Central Bank of India के खाता संख्‍या 1378820696 पर अपनी मदद भेज सकते हैं। इस कोष में जमा की गई राशि आयकर अधिनियम 1961 की धारा 80 G के तहत पूर्ण रूप से कर रहित यानी कि टैक्स फ्री होगी। इस संबंध में मुख्यमंत्री के विशेष सचिव सुरेंद्र सिंह द्वारा रविवार (मार्च 29, 2020) को पत्र जारी किया गया। 

यूपी मुख्यमंत्री द्वारा जारी पत्र

पत्र में उन्होंने कहा है कि इस संकट की घड़ी में प्रदेश सरकार सभी नागरिकों को आर्थिक मदद पहुँचा रही है। संक्रमित व संदिग्ध मरीजों के नि:शुल्क इलाज के साथ-साथ भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए भी आवश्यक प्रबंध किए जा रहे हैं। मानवीय संवेदनाओं का उत्कृष्ट व अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हुए अनेक औद्योगिक, व्यापारिक व सामाजिक संगठन मदद के लिए आगे आए हैं। प्रदेश सरकार इनके सहयोग व योगदान के लिए कृतज्ञ है। उन्होंने कहा है कि मुख्यमंत्री कार्यालय में मुख्यमंत्री पीड़ित सहायता कोष नामक कोष है। इसमें जनता या स्वैच्छिक संस्थाओं द्वारा दिया गया दान/ चंदा जमा होता है। इसका उपयोग पीड़ितों की सहायता व राहत प्रदान करने में किया जाता है। 

उन्होंने दान देने के लिए बैंक का खाता नंबर व अन्य जानकारियाँ भी दीं हैं। इस पीड़ित सहायता कोष का सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में खाता संख्या 1378820696 है। खाते का नाम CHIEF MINISTER’S DISTRESS RELIEF FUND और ब्रांच का नाम C.B.I. CANTT. ROAD, LUCKNOW है। इसका IFSC कोड CBINO281571 और ब्रांच कोड 281571 है। इसके साथ ही जो लोग विदेशों में रह रहे हैं, वो अगर इस राहत कोष में दान देना चाहते हैं तो उसके लिए SWIFT CODE भी जारी किया है। विदेशी लोग SWIFT CODE- CBININBBLKO का इस्तेमाल कर मदद कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारियों को कोष का आम लोगों में व्यापक प्रचार-प्रसार करने का आग्रह किया है।

उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) ने कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ने के लिए मुख्यमंत्री पीड़ित सहायता कोष में 1 लाख रुपए का दान दिया है। इसके साथ ही महामारी के रूप में फैल चुके कोरोना संक्रमण से जंग में बड़ा दिल दिखाते हुए तमाम प्रदेशवासी आगे आए हैं। उन्होंने इस आपदा में व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए अपनी क्षमता के अनुसार आर्थिक सहयोग सरकार को दिया है। गरीब-मजदूरों, किसान, वृद्ध और महिलाओं को भरण पोषण भत्ता देने के साथ ही सभी कोरोना संक्रमित मरीजों का नि:शुल्क इलाज करा रही सरकार ने इस सहयोग को काफी अहम माना है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सहयोग देने वालों का आभार जताया है।

रेल यात्रा, नमाज, 2 शादी फंक्शन, फिर हॉस्पिटल से भागा: एक मरीज के कारण मेरठ व नागपुर में मच सकती है तबाही

कोरोना वायरस ने उत्तर प्रदेश में अपने रंग दिखाने शुरू कर दिए हैं। अकेले रविवार (मार्च 29, 2020) को मेरठ शहर में कोरोना के 8 मरीज मिले, जिससे वहाँ हड़कंप मच गया है। पहले माना जा रहा था कि सिर्फ़ 3 कालोनियों तक ही संक्रमण सिमटा हुआ है लेकिन अब पूरे शहर में ये ख़तरा फ़ैल गया है। 24 स्वास्थ्य केंद्रों को काम पर लगा दिया गया है, ताकि वो अपने-अपने इलाक़ों में कोरोना वायरस के मरीजों का पता लगा सकें। साथ ही पुलिस और नगर निगम की भी मदद ली जा रही है। पुलिस का कहना है कि खुर्जा निवासी और मुंबई से लौटे एक शख्स ने पूरे शहर में कोरोना को फैलाने का काम किया है।

अभी तक शहर में कुल 13 लोग हैं, जो कोरोना के संक्रमण से पीड़ित हैं। अंदेशा जताया गया है कि एक दर्जन और मरीज सामने आ सकते हैं, जिनका पता लगाया जा रहा है। ये मरीज शहर के विभिन्न क्षेत्रों में घुमते रहे हैं। एक मरीज तो 20-21 मार्च को हापुड़, मोतीमहल और चुंगी में हुई दो शादियों में पहुँचा था। इसके बाद उसने तहसील कॉलनी और जाकिर कॉलनी जाकर वहाँ नमाज पढ़ा। वहाँ के मौलवी की भी जाँच की गई है, जो सामान्य मिला है। पूरे शहर को सर्विलांस पर लेकर काम किया जा रहा है। मरीजों से पूछताछ की जा रही है कि वो कहाँ-कहाँ घूमे।

उक्त मरीज जब मेरठ आ रहा था, तो रास्ते में ही उसकी तबियत बिगड़ गई थी और उसे बुखार होने लगा था। बुखार से काँपते हुए उसने नागपुर में 5 घंटे रुक कर ट्रेन बदली थी। महाराष्ट्र सरकार को पत्र लिख कर उसकी यात्रा के बारे में सूचित कर दिया गया है। छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से सफर करने वाले उस यात्री के बारे में कहा जा रहा है कि उसने नागपुर में भी कई लोगों में संक्रमण फैलाया होगा। रविवार को वो हॉस्पिटल से भाग निकला, जिसके बाद उसे घर से उठा कर लाया गया। इलाज के बाद उस पर एफआईआर भी दर्ज की जाएगी। उसने अपने परिवार के लोगों को भी संक्रमित कर दिया है। फ़िलहाल अन्य संक्रमित मरीजों को हॉस्पिटल में रखा गया है और उनकी स्थिति सामान्य है।

इन मरीजों को तभी छोड़ा जाएगा, जब 24 घंटे के भीतर 2 बार उनकी जाँच होगी और दोनों बार रिपोर्ट नेगेटिव आए। एहतियातन हर मरीज की तीन बार जाँच की जाएगी। उन्हें पौष्टिक भोजन दिया जा रहा है। अब तक 3533 घरों की पड़ताल की जा चुकी है। कुल 20,751 लोगों को कवर किया जा चुका है। विभाग कोरोना के लक्षणों के बारे में हर छोटी जानकारी ले रहा है। वह वार्ड से क्यों भागा, इस सम्बन्ध में उसने कुछ नहीं बताया है।

इससे पहले हमने मेरठ जिलाधिकारी के हवाले से बताया था कि संक्रमित व्यक्ति का मेरठ में ससुराल है। वह अपनी पत्नी के साथ महाराष्ट्र से मेरठ आया था। शुक्रवार को मेरठ मेडिकल अस्पताल में उसके कोरोना पॉजिटिव की पुष्टि हुई थी। इसके बाद संपर्क में रह रही पत्नी और 3 सालों को भी शुक्रवार को भर्ती कराया गया। अब उसकी पत्नी और तीन सालों के भी कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई है। 

मेरठ लॉकडाउन: मवाना और सरधना के मस्जिदों में छिपे थे 19 विदेशी मौलवी, प्रशासन को धोखा देने के लिए बाहर से बंद था ताला

कोरोना वायरस का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। उत्तर प्रदेश में संक्रमण का आँकड़ा 80 के पार पहुँच चुका है। बीते 24 घंटे में मेरठ से इसके 13 मामले आए हैं। संक्रमण की मार झेल रहे मेरठ में लॉकडाउन के बीच जहाँ लोगों को घर में ही रहने की अपील की जा रहा है। वहीं जिले की दो मस्जिदों में 19 विदेशी नागरिकों के मिलने के बाद हड़कंप मच गया है। बताया जा रहा है के ये विदेशी नागरिक जमात के संग 17 और 21 मार्च को मेरठ पहुँचे थे। ये सभी धर्म प्रचारक बताए जा रहे हैं।

ये विदेशी मौलवी इंडोनेशिया, केन्या, सूडान और जिबूती समेत अन्य देशों से हैं। हैरान कर देने वाली बात ये है कि ये सभी लॉकडाउन के दौरान मस्जिद में ही रह रहे थे और इन्हें शरण देने वालों ने भी पुलिस को जानकारी देना मुनासिब नहीं समझा। एलआईयू की जाँच के बाद मामले का खुलासा करते हुए फिलहाल इन्हें क्‍वारंटाइन कर दिया गया है। इसके साथ ही इनकों शरण देने वालों के खिलाफ FIR भी दर्ज कर ली गई है।

दरअसल, नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में हो रहे विरोध-प्रदर्शन के बाद से मवाना में विदेशी लोगों के होने की सूचना मिल रही थी। तभी से यहाँ खुफिया विभाग सक्रिय था और फिर वहाँ पर कोरोना के लगातार बढ़ रहे केसों को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। पुलिस के साथ ही एलआईयू के अधिकारी भी चप्पे-चप्पे पर नजर रख रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान पुलिस और एलआईयू की टीम को जानकारी मिली थी कि सरधना और मवाना क्षेत्र की मस्जिदों में कुछ विदेशी नागरिक रह रहे हैं। इसके बाद सीओ यूएन मिश्रा, इंस्पेक्टर राजेंद्र त्यागी की अगुवाई में पुलिस टीम ने दबिश दी। जहाँ वो लोग आराम फरमाते हुए मिले।

दैनिक जागरण के मेरठ संस्करण में प्रकाशित खबर

फिर पुलिस की टीम ने कार्रवाई करते हुए मवाना स्थित बिलाल मस्जिद में देर रात 10 और सरधना में आजाद नगर स्थित मस्जिद में 9 विदेशी मौलवियों को पकड़ा। इनके कागजात और पासपोर्ट कब्जे में ले लिए गए हैं। ये सभी 17 मार्च से यहाँ रह रहे हैं। पुलिस ने इनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली है। बिलाल मस्जिद में यह जमात 17 मार्च को सूडान और केन्या से आई थी। किसी को पता न चले, इसलिए मस्जिद के बाहर ताला लगा रखा था। इंस्पेक्टर राजेंद्र त्यागी ने बताया कि सभी 10 विदेशी जमातियों को उसी मस्जिद के अलग-अलग कमरों में आईशोलेट कर दिया गया है। थर्मल स्क्रीनिंग में सभी सामान्य पाए गए हैं। फिर भी एहतियात के तौर पर उनका कोरोना सैंपल सोमवार को लिया जाएगा। मस्जिद के इमाम मौलाना शौकत व अन्य से भी पूछताछ की गई।

इसी तरह पुलिस ने मेरठ के मवाना क्षेत्र स्थित एक मस्जिद से 9 विदेशी मौलवियों को पकड़ा, जो इंडोनेशिया के रहने वाले हैं। ये सभी जमाती 21 मार्च को यहाँ पहुँचे थे और तभी से यहाँ ही रह रहे थे। दारोगा राजवीर सिंह ने विदेशी जमातियों की सूचना नहीं देने पर मस्जिद के मोहतमिम हारून व इमरान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। इसके साथ ही इन जमातियों के परीक्षण के लिए स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी गई है।

इसके साथ ही मवाना में दारोगा नरेंद्र सिंह ने शहर काजी मौलाना नफीस, एडवोकेट असलम, नईम सौफी समेत अन्य के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस ने आईपीसी की धारा 188, 269, 270 व 14 विदेशी अधिनियम, महामारी एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। शहर काजी मौलाना नफीस ने बताया कि विदेश से जमात आती हैं। दुनिया में जो भी जमात चलती है सबसे पहले मरकज निजामुद्दीन दिल्ली में आती है। वहाँ से ही निजाम बनाकर जमातों को भेजते हैं। पूरा रिकार्ड रहता है। फिलहाल पुलिस इनके मंसूबों के बारे में पता लगाने में जुटी है।

धर्म-प्रचार के लिए राँची की मस्जिद में छिपे हुए थे 19 विदेशी सहित 24 लोग: पुलिस ने गिरफ्तार कर क्वारंटाइन सेंटर भेजा

कोरोना वायरस को लेकर भारत में स्थिति दिनोंदिन गंभीर होती जा रही है। इससे पहले ख़बर आई थी कि पटना की एक मस्जिद में कई विदेशी छिपे हुए थे। अब राँची में पुलिस ने 19 विदेशी नागरिकों को क्वारंटाइन किया है। हिन्दपीढ़ी क्षेत्र में छिपे हुए मिले ये सभी ब्रिटिश नागरिक हैं। ये सब स्थानीय ‘बड़ी मस्जिद’ में रुके हुए थे। इन विदेशी नागरिकों के साथ-साथ पुलिस ने दिल्ली व राँची के दो-दो और हैदराबाद के एक युवक को भी आइसोलेशन में शिफ्ट किया गया है। कुल 24 लोग थे।

पूछताछ में सभी विदेशी नागरिकों ने बताया है कि वो सभी तबलीग जमात के लिए राँची आए थे। कुछ लोगों ने इसकी सूचना डीसी को दी, जिसके बाद उन्हें शिकंजे में लिया गया। इन सभी को हिरासत में लेकर क्वारंटाइन किया गया है। साथ ही एक मेडिकल टीम ने इन सबकी जाँच भी की है। इससे पहले राँची के बुंडू में पुलिस ने चीनी नागरिक समेत 11 विदेशी नागरिकों को क्वारंटीन के लिए भेजा था। डीएसपी को सूचना मिली थी कि चीन और अन्य देश के कुछ मौलवी तमाड़ के रणगाँव के पास एक मस्जिद में रुके हैं, जिसके बाद ये कार्रवाई की गई थी।

इन विदेशी नागरिकों में पोलैंड, अफ्रीका, मलेशिया और इंग्लैंड सहित कई देशों के लोग थे। सबसे ज्यादा मलेशिया से 8 लोग थे। इन सभी को खेलगाँव में स्थित आइसोलेशन सेंटर में भेजा गया है। देर रात 12 बजे के बाद इन्हें पुलिस ने शिकंजे में लिया। ये सभी मजहबी प्रचार के लिए मस्जिद में छिपे हुए थे। जिला प्रशासन इस बारे में और जानकारी पता लगा रहा है।

झारखण्ड में अभी तक कोरोना वायरस का एक भी मरीज सामने नहीं आया है लेकिन पुलिस एहतियातन पूरी सतर्कता बरत रही है। सभी स्कूल-कॉलेजों को बंद कर दिया गया है और शैक्षिक संस्थानों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वो इस अवधि में बच्चों के अभिभावकों से फी व किसी अन्य प्रकार का शुल्क न लें। ऐसा करने पर कड़ी कार्रवाई की बात कही गई है। पूरे देश में अब तक कोरोना वायरस के 1190 मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 102 ठीक हुए हैं और 29 की जान चली गई है।

पहले बुलाया और जहाँ से चले थे, बसों में ठूँस फिर वहीं पहुँचाया: केजरीवाल के धोखे से बिलख-बिलख कर रोए प्रवासी मजदूर

हजारों लोगों के लिए घर पहुँचने की आस बना आनंद विहार का इलाका अब सुनसान हो गया है। पुलिस ने पूरे इलाके से लोगों को हटा दिया है। अब वहाँ पर केवल सूनी सड़कें, खाली बस स्टेशन ही दिखाई पड़ रहा है। असल में इलाके को खाली कराने की तैयारी रविवार की दोपहर 12 बजे के आसपास ही शुरू हो गई थी। वहाँ पर प्रशासन का पूरा अमला पहुँच गया था और लाउडस्पीकर से लोगों को इलाका खाली करने के निर्देश दिए जा रहे थे। खाली कराने की दोपहर बाद शुरू हुई प्रक्रिया तीन बजे तक पूरी कर ली गई और पूरा इलाका सुनसान हो गया।

बता दें कि भारत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का एक संघ है, जहाँ शक्ति केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच बँटी होती है। राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों का काम होता है कि वह केंद्र सरकार के साथ मिलकर राज्य की जनता के लिए काम करे। जब किसी प्रकार की आपदा-विपदा आती है तो यह जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। लेकिन अभी कोरोना के समय में दिल्ली की हालत कुछ और ही है। दिल्ली में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ऐसी तबाही मचाई, जिसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। केजरीवाल ने न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि बिहार के लोगों की भी जान खतरे में डाल दी है।

दिल्ली सरकार ने बस अड्डे पर लोगों को इकट्ठा करने के बाद फिर से उन्हें वहीं पर पहुँचा दिया, जहाँ से ये काफी जद्दोजहद करके यहाँ पर आए थे। कई लोग दिल्ली के दूरदराज के इलाकों से वहाँ पर पैदल पहुँचे थे, तो वहीं सैकड़ों लोग फरीदाबाद, गुरुग्राम, मानेसर, बल्लभगढ़ से आनंद विहार तक पहुँचे थे। केजरीवाल सरकार ने इन गरीब मजदूरों को पहले तो यहाँ पर इकट्ठा किया और फिर उन्हें बिना ये बताए कि वो उन्हें कहाँ ले जा रहे हैं, बस के अंदर बैठाकर दिल्ली-एनसीआर के ही अलग-अलग इलाकों में ले जाकर छोड़ दिया। जब उन लोगों को ये पता चला कि गाँव भेजने का आश्वासन दिलाकर यहाँ लाने के बाद उन्हें फिर से वहीं भेजा जा रहा है, जहाँ से पैदल चलकर वो इतनी दूर आए, उनको रोना आ गया। कई लोग तो बिलख-बिलख कर रो पड़े कि केजरीवाल ने उन्हें दिलासा तो गाँव भेजने का दिलाया था, लेकिन फिर से उसे वहीं पर लाकर पटक दिया।

दरअसल अरविंद केजरीवाल ने कोरोना जैसी विपदा के समय में भी अपनी गंदी राजनीति नहीं छोड़ी और दिल्ली में रह रहे उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों के मन में ऐसी भय और घर जाने का लालच दिया कि देखते ही देखते UP और दिल्ली के बॉर्डर पर हजारों की तादाद में अपने घर जाने वाले जमा हो गए।

देश में लॉकडाउन लगा हुआ है और दिल्ली ने तो केंद्र सरकार से भी पहले लॉकडाउन लगा दिया था लेकिन फिर भी ऐसा माहौल बनाया गया, जिससे दिल्ली में काम करने वाले सभी, गरीब से लेकर पढ़ने वाले तक घर जाने की चाहत में आ गए। बताया गया कि दिल्ली में इन लोगों के बिजली-पानी के कनेक्शन काट दिए गए और केजरीवाल सरकार के अधिकारियों ने उनसे कहा कि बॉर्डर पर उनको घर ले जाने के लिए बसों की व्यवस्था की गई है। यूपी सरकार ने बयान जारी कर कहा है कि इन लोगों के दिल्ली सरकार ने बिजली-पानी के कनेक्शन काट दिए। लॉकडाउन के दौरान उन्हें भोजन, दूध नहीं मिला जिस कारण भूखे लोग सड़कों पर उतरे।

यहाँ तक कि दिल्ली सरकार के अधिकारी बक़ायदा एनाउंसमेंट कर अफ़वाह फैलाते रहे कि यूपी बॉर्डर पर बसें खड़ी हैं, जो उन्हें यूपी और बिहार ले जाएँगी। इसके बाद बहुत सारे लोगों को मदद के नाम पर डीटीसी की बसों से बॉर्डर तक पहुँचाकर छोड़ दिया गया। दिल्ली से गाजियाबाद तक बच्चों को गोद में लिए व सामान सिर पर लादे लोगों की कतारें लगी रहीं। माहौल ऐसा हो चुका था कि अगर एक भी कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति होता तो यह महामारी देश के 2 सबसे बड़े आबादी वाले राज्य में तबाही मचा सकते थे। कई दावे किए गए थे जिसमें यह कहा गया था कि दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने कोरोना वायरस की स्थिति सँभालने के लिए बढ़िया काम किया है। लेकिन ऐसा क्या हुआ कि इतने सारे प्रवासी एक साथ दिल्ली छोड़कर जाने को मजबूर हुए?

बड़ी संख्या में पलायन की खबरें 24 मार्च से ही आने शुरू हुए, तब से लेकर अगले 4 दिनों तक किसी भी तरह के का कोई कदम वापस जाने वालों के लिए नहीं उठाया गया। इसके उलट अफवाह फैलाई गई कि उन्हें घर छोड़ने वाली बसें उनका इंतजार कर रही हैं। जब उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने स्थिति को और बिगड़ने नहीं दिया और भीड़ को देखते हुए तुरंत बसों को लगाया तब केजरीवाल यह कहते फिर रहे हैं कि वो दिल्ली छोड़कर न जाएँ और यह भी दावा कर रहे है कि दिल्ली में पूरे इंतजाम कर लिए गए हैं।

जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को यह खबर मिली तो उन्होंने 1000 बसें लगाकर सभी प्रवासियों को गंतव्य तक पहुँचाने की व्यवस्था की। शुक्रवार व शनिवार रात भर बसों से लोगों को उनके जिले पहुँचाया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद इसकी मॉनिटरिंग करते रहे। रात में ही मजदूरों और बच्चों के लिए भोजन का इंतजाम भी कराया गया। साथ ही दिल्ली से आने वाले लोगों की स्क्रीनिंग भी की गई और यह सुनिश्चित किया गया कि जो स्वस्थ होगा, उसे निगरानी में घरों को भेजा जाएगा। जिसमें कोरोना के लक्षण पाए जाते हैं, उन्हें जिलों के वार्डों में क्वारंटाइन किया जाएगा।

बावजूद इसके केजरीवाल के मंत्री योगी सरकार के बारे में अफवाह फैलाते रहे। आम आदमी पार्टी के विधायक राघव चड्डा ने तो यह आरोप लगा दिया कि दिल्ली से जाने वाले लोगों को योगी जी पुलिस से पिटवा रहे हैं। हालाँकि जब लोगों ने खरी-खोटी सुनाना शुरू किया तो ट्वीट डिलीट कर भाग गए। उनके खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज कर लिया गया है। अरविंद केजरीवाल के इस दोहरी राजनीति के लिए लोगों ने ट्विटर पर जमकर कोसा और खरी-खोटी भी सुनाई।

जिस दिल्ली को इन प्रवासियों की ऐसे आपदा के समय मदद करनी चाहिए, वैसे समय में केजरीवाल ने उल्टा DTC बसें लगा कर UP बार्डर पार पहुँचा दिया और उन्हें वापस जाने पर मजबूर कर दिया। यह सभी को पता है कि कोरोना के समय में कहीं भी आना जाना किसी खतरे से खाली नहीं है लेकिन फिर भी इस तरह से राजनीति कर अरविंद केजरीवाल ने फिर से अपना रंग दिखा दिया है। इस तरह से अरविंद केजरीवाल ने अपनी गंदी राजनीति को चमकाने के लिए लाखों लोगों की जिंदगी के साथ खेलकर उसे दाँव पर लगा दिया। उल्लेखनीय है कि अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान पूर्वांचल के लोगों को लक्ष्य बनाकर इन्हीं दो मुद्दों, बिजली-पानी पर ही विशाल बढ़त के साथ जीत हासिल की थी।

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