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तमिलनाडु: क्वारन्टाइन से नंगा भागा 34 साल का युवक, 90 साल की बुजुर्ग के गले में काटा, मौत

कोरोना संक्रमण के खिलाफ जारी वैश्विक लड़ाई के बीच तमिलनाडु से एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है। राज्य के थेनी से शुक्रवार की रात 34 साल का एक व्यक्ति अपने घर से भाग गया। 90 साल की एक महिला के गले में काट लिया जिससे उनकी मौत हो गई।

यह व्यक्ति पिछले हफ्ते ही श्रीलंका से लौटा था। उसे उसके घर में ही क्वारंटाइन किया गया था। पुलिस के अनुसार इसकी वजह से वह दिमागी रूप से असंतुलित हो चुका है। यह व्यक्ति टेक्सटाइल व्यापारी है।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की खबर के मुताबिक शुक्रवार देर रात यह व्यक्ति अपने घर से निर्वस्त्र भाग खड़ा हुआ। 90 वर्षीय नचियाम्मल नामक बुजुर्ग महिला जो अपने घर के बाहर सो रहीं थीं, उनके गले में काट लिया। बुजुर्ग की आवाज सुन लोग बाहर आए और इस व्यक्ति को पुलिस के हवाले कर दिया। महिला को तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहाँ उनकी मृत्यु हो गई।

याद रहे कि देश में इस समय 21 दिन का देशव्यापी लॉकडाउन चल रहा है। इसकी घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री ने लोगों से अपने-अपने घरों की देहरी को ही खुद के लिए लक्ष्मण रेखा मानने की अपील की थी। इसके बावजूद देश में लॉकडाउन तोड़ने के समाचार आ रहे हैं, जिनके खिलाफ पुलिस तथा स्थानीय प्रशासन एक्शन भी ले रहा है।

कोरोना से लड़ने को भारतीय रेल तैयार: ट्रेन की बोगियों को बनाया आइसोलेशन वार्ड

इस समय पूरी दुनिया कोरोना वायरस के खिलाफ जंग लड़ रही है। इस संक्रमण का प्रसार रोकने के लिए पूरे देश में 21 दिन का लॉकडाउन है। इस बीच भारतीय रेलवे ने सराहनीय कदम उठाया है। महामारी से लड़ने के लिए रेलवे ने एक कोच में आइसोलेशन केबिन तैयार किया है। इस संबंध में भारतीय रेलवे ने कहा है कि फिलहाल एक प्रोटोटाइप को आइसोलेशन वार्ड में बदला गया है। अगर इसे अंतिम रूप दिया जाता है तो रेलवे योजना बना रहा है कि हर जोन में हर हफ्ते 10 कोच को आइसोलेशन वार्ड में बदला जाए।

रेलवे ने एक कंपार्टमेंट में मौजूद रहने वाली कुल 8 सीटों में से 6 सीटों को निकाल दिया है। आइसोलेशन वॉर्ड के लिए बोगियों के एक कंपार्टमेंट में केवल दो सीट ही रखी गई है। इसके तहत मरीज के लिए केबिन तैयार करने के लिए एक तरफ से मिडिल बर्थ हटा दिया गया। वहीं मरीज के बर्थ के सामने की सभी तीनों बर्थों को हटाया दिया गया है। बर्थ पर चढ़ने के लिए लगाई गईं सीढ़ियों को भी हटाया गया है। आइसोलेशन कोच तैयार करने के लिए बाथरूम, गलियारे और दूसरी जगहों पर भी बदलाव किया गया है। रेलवे ने बोगियों में बनाए गए आइसोलेशन वॉर्ड के साथ ही मरीजों के लिए साफ-सुथरे टॉयलेट का भी प्रबंध किया है। टॉयलेट में नए नल के अलावा बाल्टी भी रखी गई है।

कुछ दिनों पहले भारतीय रेलवे ने घोषणा की थी कि कोरोना वायरस के मामले बढ़ने पर वह ट्रेन के कोच में आइसोलेशन केबिन तैयार करेगा। अब रेलवे ने इसे अमली जामा पहना दिया है। रेलवे कोरोना से संक्रमित मरीजों को इन आइसोलेशन कोच में रखेगा। इन ट्रेन कोचों में डॉक्‍टर्स और नर्स के लिए केबिन, मरीजों के लिए केबिन और चिकित्‍सा उपकरण व दवाओं को रखने के लिए अलग-अलग केबिन बनाए गए हैं। कोच में हर केबिन को कवर करने के लिए विशेष प्रकार के पर्दे लगाए गए हैं। 

ट्रेनों को सेनेटाइज करने के बाद उसके एक-एक कोच को एक वार्ड के रूप में इस्तेमाल करने पर विचार किया जा रहा है। आने वाले दिनों में मरीजों की संख्या बढ़ने की आशंका को देखते हुए इस तरह की तैयारियाँ की जा रही है ताकि बाद में संक्रमण बढ़ने पर पीड़ितों को ट्रेनों के आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट किया जा सके।  

देश भर में मंगलवार (मार्च 24, 2020) मध्य रात्रि से 21 दिनों के ‘लॉकडाउन’ की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद भारतीय रेल ने भी कहा था कि उसकी सभी यात्री सेवाएँ अब 14 अप्रैल तक बंद रहेंगी। हालाँकि, आवश्यक वस्तुओं को पहुँचाने के लिए माल ढुलाई जारी है। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भी ट्वीट कर बताया कि कोरोना वायरस के खिलाफ इस लड़ाई में रेलवे अपनी जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा के साथ निभा रहा है। पूरे देश में खाद्यान्न समेत अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को कंट्रोल रुम से मॉनिटर किया जा रहा है। रेलवे राज्य सरकारों के साथ लगातार सम्पर्क बनाए हुए है और यह सुनिश्चित करने में लगी हुई है कि जहाँ भी खाद्य आपूर्ति की जरूरत हो, वहाँ मालगाड़ी से सामान भेजा जा सके।

जहाँ मिला कोरोना संक्रमित युवक, वहाँ की मस्जिद में बैठ कर माइक से नमाज के लिए बुला रहा था मौलाना, गिरफ्तार

पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा के बाद लोग घर में रहकर कोरोना के खिलाफ जंग लड़ रहे हैं। नवरात्र के दौरान मंदिरों के कपाट बंद हैं। लोग घर में ही नव दुर्गा की उपासना करने में लगे हुए हैं। इसके विपरीत कुछ कट्टरपंथी सरकार की लाख कोशिशों के बाद भी मस्जिद में नमाज पढ़ने से बाज नहीं आ रहे। अब ऐसे लोगों पर पुलिस-प्रशासन ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसी बीच बागपत में एक मस्जिद से माइक द्वारा ऐलान कर रहे मौलवी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

देश में लॉकडाउन घोषित होने के बाद से ही सरकार लगातार लोगों से सोशल डिस्टेंश बनाए रखने की अपील कर रही है, लेकिन बागपत जिले के एक गाँव में बीते शुक्रवार को एक मौलाना मस्जिद में बैठकर माइक से लोगों को नमाज के लिए इकट्ठा करने का एलान कर रहा था। इसकी जानकारी किसी ग्रामीण ने पुलिस को दे दी। सूचना पर गाँव में पहुँची पुलिस ने मौके से आरोपित मौलाना को दबोच लिया।

दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक गाँव में पहले से ही एक युवक कोरोना पॉजीटिव पाया गया है। इसके बाद भी गाँव में समुदाय के लोग मस्जिद में एकत्र होकर नमाज अदा करने सा बाज नहीं आ रहे। कोतवाली प्रभारी अरविंद कुमार के मुताबिक गिरफ्तार किए गए मौलाना के खिलाफ में धारा 269 और 270 आईपीसी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर की कटिंग

वहीं गाजियाबाद के थाना मुरादनगर इलाके में स्थित मदरसे से पुलिस ने दो शिक्षक इमरान और मदन को गिरफ्तार कर लिया। दरअसल दे दोनों शिक्षक लॉकडाउन के बावजूद मदरसे में 20 बच्चों की परीक्षा करवा रहे थे। वहीं इटावा में लॉकडाउन और धारा 144 का उल्लंघन करना समुदाय विशेष के कुछ लोगो को पड़ा भारी। एक मस्जिद में जुमे की नमाज पढ़ रहे लोगों पर पुलिस ने जमकर लाठियाँ भाँजी और 7 लोगों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। उधर संभल कोतवाली इलाके के सैफ खां सराय में पाबंदी के बावजूद मस्जिद में सामूहिक नमाज को लेकर पुलिस ने 15 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

आपको बता दें कि कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते प्रकोप को देखते हुए देश की सबसे बड़ी इस्लामिक संस्था जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने जुमे की नमाज को लेकर लोगों से कहा था कि जुम्मे के दिन मस्जिद में इकट्ठा होकर नमाज न पढ़ें। साथ ही अपील की थी कि सभी लोग अपने घर के अंदर जाकर ही नमाज पढें। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में कोरोना के मरीजों की संख्या बढ़कर 41 हो गई है। वहीं पूरे देश में इससे 20 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 800 पार हो गई है।

मोजे, टेलीफोन बुक, नैपकिन और तौलिए: टॉयलेट पेपर की जगह इन चीजों का प्रयोग कर रहे हैं अमेरिकी

कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए क्वारंटाइन में रह रहे लोग तरह-तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन देशों में ऐसी समस्याएँ और ज्यादा हैं जो इससे काफी प्रभावित हैं। अमेरिका में कोरोना वायरस संक्रमण के अब तक 1 लाख से भी अधिक मामले सामने आ चुके हैं, जो किसी भी देश में सबसे ज्यादा है। 1700 से भी अधिक लोगों को इस खतरनाक संक्रमण के कारण अपनी जान गँवानी पड़ी। ऐसे में क्वारंटाइन में जी रहे अमेरिकियों को किसी एक चीज की कमी सबसे ज्यादा खल रही है तो वो है टॉयलेट पेपर।

एक वेबसाइट पर अमेरिकी इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि अगर किसी के घर में टॉयलेट पेपर ख़त्म हो गया है तो वो कैसे काम चला रहा है? एक व्यक्ति ने बताया कि वो इसके विकल्प के रूप में फेसिअल टिश्यू, पेपर टॉवल और नैपकिन्स का प्रयोग कर रहा है। अमेरिकी इस चिंता में डूबे हुए हैं कि जब टॉयलेट पेपर्स पूरी तरह ख़त्म हो जाएँगे तो वो क्या करेंगे? एक व्यक्ति ने बताया कि वो अकेले रह रहा है और उसने टॉयलेट पेपर का बड़ा बण्डल ख़रीद रखा है, जिससे उसका काम चल जाएगा।

अमेरिका में टॉयलेट पेपर की कमी से जूझते लोग इसके विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं

अमेरिका में मॉल्स और सुपरमार्केट खाली पड़े हुए हैं। दुकानें बंद हैं और लोगों को सामान नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में स्थिति और भी विकट है। वहीं कुछ लोग तो मोजे से काम चला रहे हैं। एक व्यक्ति ने अपना अनुभव साझा करते हुए सलाह दी कि मोजों के एक दर्जन पैकेट्स ख़रीद लो और उनका टॉयलेट पेपर के रूप में प्रयोग कर के फिर ‘ड्राई वाश’ कर के सूखने के लिए डाल दो, फिर टॉयलेट पेपर की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी। वहीं एक व्यक्ति ने टेलीफोन बुक को ही टॉयलेट पेपर के रूप में प्रयोग करने की सलाह दी।

कुछ लोगों ने तो अख़बारों तक को टॉयलेट पेपर के रूप में प्रयोग किया है। अमेरिका कोरोना वायरस के संक्रमण से निपटने के लिए चीन से डाटा लेने में लगा हुआ है। सूचनाएँ और जानकारियाँ इकट्ठी की जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फोन पर अपने चीनी समकक्ष शी जिनपिंग से बातचीत की। इससे पहले ट्रंप इसे लगातार ‘चाइनीज वायरस’ कहते रहे हैं।

श्रीनगर में कोरोना संक्रमण से मौत, यूपी में दहशत: 5 साथियों संग 4 दिनों तक देवबंद की मस्जिद में रहा था मृतक

जम्मू-कश्मीर में कोरोना वायरस के संक्रमण से एक 65 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। उसकी ट्रैवल हिस्ट्री से उत्तर प्रदेश में दहशत फैली हुई है। दरअसल श्रीनगर के हैदरपोरा निवासी इसे मृतक ने अपने पाँच साथियों के साथ यूपी के देवबंद का दौरा किया था। इतना ही नहीं वह चार दिनों तक यहाँ की मस्जिद में भी रुका था। इस बात की जानकारी मिलते ही देवबंद से लेकर लखनऊ तक स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। वहीं देवबंद की खानकाह मस्जिद को सील कर दिया गया है।

जानकारी के मुताबिक मृतक ने अपने पाँच साथियों के साथ देवबंद का दौरा किया था। इस दौरान इन लोगों का समूह 9 से 12 मार्च के बीच एक मस्जिद में रुका था। कश्मीर प्रशासन ने मृतक की पहचान सार्वजानिक नहीं की है। बताया जाता है कि 65 वर्षीय मृतक तबलीगी जमात से जुड़ा था। मूलत: उत्तरी कश्मीर में सोपोर का रहने वाला यह व्यक्ति बीते कई सालों से श्रीनगर के हैदरपोरा इलाके में रह रहा था।

मृतक कुछ दिन पूर्व दिल्ली में आयोजित एक मजहबी सम्मेलन में हिस्सा लेने गया था। इस सम्मेलन में मलेशिया, इंडोनेशिया, दुबई व अन्य कई मुल्कों से भी इस्लामिक विद्वान और प्रचारक आए थे। श्रीनगर लौटने से पूर्व यह व्यक्ति जम्मू के निकट एक मदरसे में भी रुका था। उसकी मौत के बाद इन सभी स्थानों पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ऐसे लोगों की तलाश कर उनको क्वारंटाइन करने में लगी हुई है, जो किसी न किसी माध्यम से इन लोगों के संपर्क में आए थे।

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या 42 पहुँच गई है, जिसमें सबसे अधिक नोएडा से 14 केस हैं। आगरा से आठ, गाजियाबाद से तीन, लखनऊ से आठ, पीलीभीत से दो और लखीमपुर खीरी, कानपुर, मुरादाबाद, वाराणसी, जौनपुर, बागपत और शामली से एक-एक मामले सामने आए हैं। वहीं जम्मू कश्मीर में 65 वर्षीय व्यक्ति की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जम्मू-कश्मीर के 5124 लोगों को निगरानी में रखा है। साथ ही 3061 लोगों को घरों में और 80 लोगों को अस्पतालों में क्वारंटाइन किया गया है। अब तक 326 सैंपल जाँच के लिए भेजे गए हैं, जिसमें 294 निगेटिव आए हैं।

भारत में 25 करोड़ लोगों को होगा कोरोना: NDTV ने जिस यूनिवर्सिटी के हवाले से चलाई ख़बर, उसी ने लगाई फटकार

आजकल लोगों को डराने का चलन चल निकला है। कई चैनलों पर फर्जी एपिडोमिलोजिस्ट बैठ कर ज्ञान दे रहे हैं। कोई कह रहा है कि भारत में इतने हजार लोग मर जाएँगे तो कई इसे लाख में बता रहे हैं। ‘फियर-मोंगरिंग’ कर के लोगों को डराया जा रहा है, बजाए उन्हें सावधान करने के। इसी क्रम में एनडीटीवी ने भी अपने हाथ धोए। NDTV ने लोगों को डराने के लिए एक विदेशी यूनिवर्सिटी का ‘अध्ययन’ क्रिएट किया और फिर उसे ख़बर की शक्ल दे दी। बाद में चोरी पकड़ी गई तो उसे ये ख़बर हटानी पड़ी।

दरअसल, एनडीटीवी ने एक ख़बर चलाई, जिसमें कहा गया कि अगले तीन महीने में भारत में कोविड-19 के 25 करोड़ मामले आ सकते हैं। चैनल द्वारा दिए गए आँकड़ों की मानें तो देश की 20% जनता कोरोना वायरस से पीड़ित होगी। बकौल प्रोपेगेंडा मीडिया संस्थान एनडीटीवी, ये आँकड़े जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के अध्ययन में सामने आए हैं। ऐसे ‘अध्ययन’ का हवाला दिया गया, जिसे करने वाले को ही इसके बारे में कुछ पता नहीं था। एनडीटीवी ने यूनिवर्सिटी के हवाले से लिखा कि अप्रैल-मई तक ऐसी तबाही आएगी। उसने बताया कि इस अध्ययन में एक स्वास्थ्य रिसर्च संस्था CDDEP भी शामिल है।

इस ख़बर के सामने आने के बाद जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी ने इसे नकार दिया। अमेरिका के मेरीलैंड में स्थित यूनिवर्सिटी ने स्पष्टीकरण जारी करते हुए बताया कि उसने ऐसा कोई रिसर्च प्रकाशित नहीं किया है। यूनिवर्सिटी ने लिखा कि इस कथित ‘रिसर्च’ में उसके लोगो और नाम का भी ग़लत इस्तेमाल किया गया है। लोगों ने ट्विटर पर जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी से इस बारे में पूछा था, जिसके बाद उसने ये स्पष्टीकरण दिया। लोगों ने यूनिवर्सिटी को टैग कर के पूछा था कि ये ‘रिसर्च’ भारत में खूब वायरल हो रहा है, क्या ये यूनिवर्सिटी के छात्रों का है? लेकिन यूनिवर्सिटी ने इसे स्पष्ट तौर पर नकार दिया।

बाद में पोल खुलने पर एनडीटीवी ने इस ख़बर को डिलीट कर दिया और ट्विटर पर बताया कि उसने जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के स्पष्टीकरण के बाद इस ख़बर को अपनी वेबसाइट से हटा दिया है। साथ ही प्रोपेगंडा पोर्टल ने इसके लिए अप्रत्यक्ष रूप से न्यूज़ एजेंसी IANS को दोष दिया और कहा कि ये ख़बर उसकी ही थी और ग़लत साबित होने के बाद इसे हटा दिया गया है। हालाँकि, ये पहले बार नहीं है जब एनडीटीवी इस तरह की हरकत करते धराया हो।

मेथनॉल पीने से मर जाता है कोरोना वायरस! 300 मरे-1000 बीमार, 5 साल के बच्चे की आँखों की रोशनी गई

ईरान दुनिया के उन देशों में शामिल है जो कोरोना महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। लेकिन, इस इस्लामिक मुल्क में लड़ाई दोहरी है। एक तरफ खतरनाक वायरस का संक्रमण और दूसरी ओर आग की तेजी से फैलते अफवाह। ये अफवाह भी जानलेवा साबित हो रहे हैं। असल में ईरान में लोगों के बीच यह बात फैल गई कि मेथनॉल (इंडस्ट्रियल अल्कोहल) पीने से कोरोना संक्रमण का इलाज हो सकता है। इसके सेवन से कोरोना के वायरस मर जाते हैं। बॉडी सैनिटाइज हो जाती है। इस अफवाह पर विश्वास कर कई लोगों ने जहरीली शराब का सेवन कर लिया। इसके कारण अब तक 300 लोग अपनी जान गँवा बैठे हैं, जबकि एक हजार से ज्यादा लोग बीमार हो चुके हैं।

इसमें एक पाँच साल का बच्चा भी शामिल है। उसकी आँखों की रोशनी चली गई है। उसे माता-पिता ने जबरन मेथनॉल पिला दिया था। शुक्रवार (मार्च 27, 2020) को ईरान में संक्रमण के 2926 नए मामले आए। 144 और मौतों के साथ मृतकों का आँकड़ा 2378 हो गया है। अब तक 32,300 लोगों के संक्रमित होने की खबर है।

बता दें कि ईरान में शराब पीना बैन है और लोग अवैध तरीके से इसे ले रहे हैं। सोशल मीडिया पर यह अफवाह ऐसे समय में फैल गई जब लोगों का सरकार पर से भरोसा कम होता जा रहा है। दरअसल, सरकार ने पहले कोरोना के हालात को कम गंभीर दिखाने की कोशिश की, लेकिन धीरे-धीरे हालात खराब होते चले गए। ओस्लो के क्लिनिकल टॉक्सिकॉलजिस्ट डॉ. नूट एरिक होवडा का कहना है कि वायरस से लोग मर रहे हैं और उन्हें यह भी नहीं पता कि इसके अलावा दूसरे खतरे भी उनके आस-पास हैं। उनका कहना है कि लोग अगर ऐसे ही पीते रहे तो और लोगों के बीच यह जहर फैल जाएगा।

वहीं ईरान के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री के सलाहकार डॉक्‍टर हुसैन हसनैन ने कहा कि दूसरे देशों में बस कोरोना वायरस महामारी ही अकेली समस्‍या है। मगर यहाँ सरकार को दो मुसीबतों से जूझना पड़ रहा है। उन्‍होंने बताया कि शराब पीकर आने वाले लोगों का इलाज भी करना है और फिर कोरोना से भी उन्‍हें बचाना है। हसनैन ने बताया कि दुर्भाग्‍य से कुछ प्रांतों मे मेथनॉल पीने से मरने वाले लोगों की संख्‍या में इजाफा हो रहा है।

जानकारी के मुताबिक ईरान में सोशल मीडिया पर यह मैसेज फॉरवर्ड किया गया कि एक ब्रिटिश स्कूल टीचर और दूसरों ने ह्विस्की और शहद से कोरोना वायरस को ठीक कर लिया। अल्कोहल बेस्ड हैंड-सैनिटाइजर्स के मैसेज से भी लोगों ने यह अंदाजा लगा लिया कि अल्कोहल पीने से उनके शरीर के अंदर का वायरस मर जाएगा। वायरस का डर पहले ही था अब कम शिक्षा के कारण इंटरनेट पर उड़ रही अफवाहों के चलते दर्जनों ने ईरान के खुजेस्तान और शिराज में मेथनॉल युक्त अल्कोहल पीना शुरू कर दिया जो किसी जहर से कम नहीं।

50 लोगों को जमा कर छत पर पढ़वा रहा था जुमे की नमाज, UP पुलिस ने सगे भाइयों दीन और आस को किया गिरफ्तार

कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए देश भर में जारी लॉकडाउन के कारण सभी धर्मस्थलों को बंद कर दिया गया है। किसी को भी धार्मिक आयोजन करने की अनुमति नहीं है। मुस्लिम समुदाय से भी जुमे की नमाज घर पर ही पढ़ने के लिए कहा गया है। मुस्लिम धर्मगुरुओं ने भी इसे लेकर ऐलान किया था। हालाँकि कुछ जगहों पर इसका पालन भी हुआ, लेकिन कुछ लोगों ने गुपचुप तरीके से सामूहिक नमाज भी पढ़ी।

ऐसा ही एक मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के परतापुर क्षेत्र के डूंगरावली में देखने को मिला, जहाँ दो भाइयों ने अपने घर की छत पर 50 लोगों को सामूहिक नमाज पढ़वाई। इसकी सूचना गाँव वालों ने पुलिस को दी। पुलिस ने दोनों भाइयों को गिरफ्तार कर लिया है।

जागरण के मेरठ संस्करण में प्रकाशित खबर

बता दें कि गाँव के दो सगे भाइयों दीन मोहम्मद और आस मोहम्मद ने जुमे की नमाज के लिए लोगों को अपनी छत पर इकट्ठा किया था। थाना प्रभारी आनंद प्रकाश मिश्रा के मुताबिक इसके लिए गाँव वालों ने मना भी किया था। इस पर दोनों भाइयों की गाँव वालों के साथ बहस हो गई और फिर ग्रामीणों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। 

सूचना पर पहुँची पुलिस को देखकर नमाज पढ़ रहे लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई। कई लोग छत से लटककर कूद गए। पुलिस ने दोनों भाई दीन और आस मोहम्मद को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए दोनों भाइयों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।

गौरतलब है कि मेरठ में बुधवार (मार्च 25, 2020) को भी 200 लोगों को नमाज पढ़ा रहे मौलाना के साथ तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। डाबका गाँव में बुधवार को मौलाना एक साथ दो सौ लोगों को नमाज पढ़ा रहे थे। बुधवार को गाँव के मस्जिद में करीब 200 लोग नमाज पढ़ने के लिए पहुंँच गए। कुछ क्षेत्रवासियों ग्रामीणों और बुजुर्गो ने इसका विरोध भी किया, लेकिन लोग नहीं माने। जिसके बाद गाँव के ही कुछ लोगों ने इसकी जानकारी पुलिस को दे दी। मौके पर पहुँचे इंस्पेक्टर ने मौलाना सलीम, सुलेमान और मोहम्मद शहजाद को गिरफ्तार कर लिया।

इसके अलावा पुलिस ने हरदोई पाली कस्बे के काजीसराय उत्तरी मोहल्ले की मस्जिद में सामूहिक नमाज पढ़ने पर पुलिस ने 20 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की। वहीं भावनपुर स्थित जामा मस्जिद में मौलाना जियाउल हक ने नमाज अदा करवाई। जिसके बाद पुलिस ने मौलना के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज करा दिया। इसके साथ ही मुजफ्फरनगर के पुरकाजी व सिसौली की मस्जिदों में सामूहिक नमाज अदा करने के आरोप में मौलाना समेत 36 लोगों को हिरासत में लेकर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। 

रामपुर के टांडा नगर में नमाज अदा करने के लिए एकत्रित हुए लोगों का पुलिस ने पाँच-पाँच सौ का चालान काटा। इधर अमरोहा के हसनपुर में मस्जिद में सामूहिक नमाज पढ़ने के मामले में पुलिस ने इमाम समेत 3 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। वहीं बदायूँ की मस्जिद में शुक्रवार को सामूहिक नमाज अदा करने को लेकर 16 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई और साथ ही मस्जिद के इमाम दीदार शाह को हिरासत में लिया गया, क्योंकि इमाम ने ही मस्जिद खोलकर नमाज अदा करवाई थी।

1000 स्पेशल बसों के साथ घर तक पहुँचाने का फैसला: बिहार-UP के मजदूरों के लिए ‘मसीहा’ बने CM योगी

कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए देशभर में लागू लॉकडाउन के कारण सैकड़ों-हजारों प्रवासी अपने घरों को लौटने के लिए मजबूर हैं। ट्रेन और बसें बंद होने से इन प्रवासियों के सामने भूखे-प्यासे पैदल ही अपने घरों की ओर लौटने की मजबूरी है। इनमें से ज्यादातर लोग उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वाले हैं। लिहाजा अब इन असहाय लोगों की मदद के लिए उत्तर प्रदेश की सरकार ने अहम कदम उठाया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पैदल अपने घर को पलायन होने वाले मजदूरों के लिए बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने सभी मजदूरों को उनके घर भेजने के लिए 1000 बसों से मजदूरों को उनके घर भेजने का निर्णय किया है। 

मजदूरों की सुरक्षा को देखते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने रात में मीटिंग कर मजदूर हित में यह बड़ा फैसला लिया है। बस का इंतजाम नोएडा, गाजियाबाद, अलीगढ़ समेत कई अन्य जिलों में किया गया, जहाँ से मजदूर पलायन कर सकेंगे। मुख्यमंत्री के इस बड़े फैसले से उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग अपने अपने घर तक पहुँच सकेंगे।

सीएम योगी की मीटिंग के बाद रातों रात घरों से जगाकर परिवहन अधिकारियों को बुलाया गया। फिर ड्राइवर और कंडक्टरों के साथ रातों रात 1000 बसों का इंतजाम किया गया। कोरोना वायरस महामारी के कारण हुए लॉकडाउन में आमजन की सुविधा के लिए की जा रही व्यवस्थाओं को बिती रात को सीएम योगी ने सतत समीक्षा की। इस क्रम में उन्होंने मंडलायुक्तों/जिलाधिकारियों/पुलिस अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर कई दिशा-निर्देश दिए। बता दें कि बसें पूरी तरह से निशुल्क भेजी जा रही है। प्रशासन द्वारा बसों के भेजने पर यात्री भी काफी खुश हैं।

मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, इन आश्रय स्थलों में भारत सरकार के स्वास्थ्य प्रोटोकॉल का अनुपालन करते हुए यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि ऐसे मजदूरों और व्यक्तियों को भोजन, दवा तथा अन्य जरूरी सुविधाओं की कोई कमी न हो। इस मद में समस्त 75 जनपदों को कुल 13.50 करोड़ की धनराशि निर्गत की गई है। मुख्यमंत्री ने दूसरे प्रदेश या जनपदों से मजदूरों अथवा अन्य जनों की आवाजाही की सूचना के दृष्टिगत समस्त जनपदों को आश्रय स्थल/स्क्रीनिंग कैम्प स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा फँसे हुए लोगों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है। इस नंबर के जरिए लोग अपनी मुसीबत को बता सकेंगे।

पूरी दुनिया में कंडोम की कमी, सप्लाई में 50% तक की गिरावट: सिर्फ 2 महीने तक का और बचा है भंडार

जब पूरी दुनिया कोरोना की महामारी से जूझ रही है, तो इसी बीच कंडोम की सबसे बड़ी निर्माता कंपनी ने वैश्विक कमी की चेतावनी दी है। कंपनी का कहना है कि आपूर्ति में लगभग 50% की गिरावट आई है, जबकि इसका भंडार केवल दो महीने तक और चल सकता है।

मलेशिया स्थित कंपनी कैरेक्स, जो दुनिया भर में हर पाँच में से एक कंडोम बनाती है, ने एक सप्ताह तक लगातार बंद होने के बाद शुक्रवार को अपने कारखानों को फिर से चालू कर दिया है। वहीं कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन का पालन करते हुए कंपनी मात्र आधे कर्मचारियों के साथ काम कर रही है। कंपनी ने कहा कि कंडोम मुख्य रूप से चीन और भारत में बनाए जाते हैं, जबकि दोनों ही देश महामारी से बुरी तरह से जूझ रहे हैं।

इस बीच कंडोम की माँग बढ़कर दहाई में पहुँच रही है, क्योंकि दुनिया भर की सरकारें लॉकडाउन घोषित कर लोगों को घरों में रहने के निर्देश दे रही है। ऐसे में लोग घरों में रहकर भविष्य के ताने बाने में और अधिक बच्चे पैदा करने से परहेज कर रहे हैं।

दरअसल यह कंपनी ड्यूरेक्स जैसे ब्रांडों के लिए उत्पादन करती है और साथ ही ड्यूरियन-फ्लेवर्ड वाले अपने खुद के विशेष कंडोम का भी उत्पादन करती है। वहीं यह कंपनी प्रति वर्ष 5 बिलियन से अधिक कंडोम का उत्पादन करती है और उन्हें 140 से अधिक देशों को निर्यात करती है। अब यह और अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है, क्योंकि सरकारें अपने देशों की सीमाओं को बंद कर रही हैं, साथ ही विभिन्न एयरलाइंस जहाजों की उड़ानें रद्द कर रही हैं।

गोह ने शुक्रवार को एक इंटरव्यू में कहा, “मैं निश्चित रूप से कहूँगा कि यह एक अभूतपूर्व स्टेज है क्योंकि हमने कभी इस तरह की मुश्किल पहले नहीं देखी। कंडोम और भी महँगा हो सकता है। हम अभी भी अपने सभी कर्मचारियों को पूरा वेतन दे रहे हैं, जबकि कंपनी के कर्मचारी केवल आधे समय ही काम कर रहे हैं। इसलिए आगामी समय में कंडोम की कीमतों में वृद्धि हो सकती है।”