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धोनी, सचिन, रोजर फेडरर समेत फुटबॉलर्स ने कोरोना के लिए जमा किए करोड़ों

कोरोना वायरस के संकट ने देशवासियों को एकजुट होने का अवसर दिया है और कुछ लोग इस जिम्मेदारी को बखूबी निभा भी रहे हैं। इस महामारी के कारण गरीब, अमीर और मध्यम, सभी वर्ग प्रभावित हो सकते हैं यही वजह है कि काफी लोग आगे आकर आर्थिक मदद की घोषणा कर रहे हैं। हर संकट के समय बॉलीवुड से लेकर खेल की मशहूर हस्तियों से लोग उम्मीद करते हैं कि वो अपना सहयोग करेंगे, इसी कारण से बॉलीवुड और खेल जगत की हस्तियों से भी उम्मीद लगाई जा रहीं थी कि वो कोरोना की महामारी के समय भी सहयोग करेंगे।

ऐसे में लोग जिस नाम का बेसब्री से इन्तजार कर रहे थे वह था क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर का। आखिरकार सचिन तेंदुलकर ने कोरोना वायरस से जंग में 50 लाख रुपए की सहायता की है। विश्व क्रिकेट के लगभग सभी बड़े रिकॉर्ड्स अपने नाम करने वाले तेंदुलकर ने शुक्रवार (मार्च 27, 2020) को प्रधानमंत्री राहत कोष में 25 लाख तो महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री राहत कोष में भी इतने ही रुपए का सहयोग किया है।

उल्लेखनीय है कि स्विट्जरलैंड के दिग्गज टेनिस खिलाड़ी रोजर फेडरर और उनकी पत्नी मिर्का ने कोरोना वायरस महामारी से लड़ने के लिए करीब 8 करोड़ रुपए की धनराशि दान की है। जबकि पुर्तगाल के मशहूर फुटबॉल खिलाड़ी क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने 8.28 करोड़ दान दिए और लियोनल मेसी ने भी 8 करोड़ रुपए दान दिए हैं।

भारत में सचिन के अलावा इस जानलेवा महामारी के खिलाफ आगे आने वाले खिलाड़ियों में पठान बंधुओं का भी नाम प्रमुख है। इरफान और यूसुफ पठान ने बड़ौदा पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को 4000 फेस मास्क दान किए हैं। पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने पुणे स्थित एक एनजीओ के माध्यम से 1 लाख रुपए का योगदान दिया।

यूँ तो, कई लोग इस पर भी सवाल कर रहे हैं लेकिन कई बार सारी जानकारी हमारे पास नहीं होती। धोनी ने सिर्फ एक NGO को वेबसाइट के जरिए एक लाख दिए हैं। कई बार दान दाता अपना नाम नहीं बताना चाहते, या हम उनसे जिस समय उम्मीद लगाते हैं, उसके कुछ दिन बाद देते हों।

ज्ञात हो कि विश्व का सबसे धनी क्रिकेट बोर्ड भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने इस सन्दर्भ में अभी तक कोई पहल नहीं की है। हालाँकि, BCCI ने पहले भी CRPF समेत भारतीय सेनाओं को IPL के समारोह शुरु होने वाले दिन सहयोग राशि दी है। इस कारण, हम सवाल नहीं उठा सकते, हो सकता है आने वाले दिनों में वो भी कुछ करें। उसी तरह सेलिब्रिटीज भी गुप्त सहयोग भी करते हैं, या जो जब सक्षम महसूस करते हैं, तब अपने स्तर से मदद करते हैं। जरूरी बात यह है कि कोई भी, कितना भी सहयोग दे रहा है, वो एक बड़े कार्य में लगेगा। अतः, हम सब को अपने स्तर से आर्थिक या अन्य सहयोग देना चाहिए ताकि इस महामारी से लड़ा जा सके।

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से भारत सहित पूरी दुनिया प्रभावित है और देश में अब तक इससे संक्रमितों की संख्या 700 से ऊपर पहुँच चुकी है, जबकि अब तक 17 लोगों की मौत हो चुकी है। इस सम्बन्ध में भारत सरकार ने एहतियातन देश में 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा की हुई है।

18 जनवरी से 23 मार्च के बीच विदेशों से भारत आए 15 लाख से ज़्यादा यात्री, केंद्र ने राज्‍यों से कहा सब पर रखें निगरानी

देश के टॉप मोस्ट ब्यूरोक्रेट कैबिनेट सचिव राजीव गाबा ने आज सभी राज्‍यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के सचिवों से कहा कि बीती 18 जनवरी से 23 मार्च के बीच 15 लाख अंतरराष्ट्रीय यात्री भारत आए हैं, जिनकी सही प्रकार से निगरानी की जानी चाहिए थी, किन्तु ऐसा प्रतीत होता है कि जितने यात्रियों की निगरानी अपेक्षित थी और जितनों की मॉनिटरिंग की गई उस के बीच एक बड़ा फासला रह गया है, जो कोरोना महामारी के खिलाफ हमारी लड़ाई को काफी क्षति पहुँचा सकता है।

कैबिनेट सचिव गाबा ने राज्य सरकारों से यह भी कहा कि भारत में बाहर से आने वाली कामर्शियल फ्लाइट्स पर बैन लगाने के पहले जितने अंतरराष्ट्रीय यात्री बाहर से आए थे उनकी मॉनिटरिंग बढ़ाई जाए। मीडिया के अनुसार ये पहली बार नहीं है कि केंद्र ने राज्यों को उन भारतीय तथा गैर भारतीय लोगों पर निगाह रखने को कहा है जो बीते दिनों बाहर से आए हैं। इससे पहले भी स्वास्थ्य मंत्रालय राज्यों से इस संदर्भ में और अधिक प्रयास करने को कहता आया है लेकिन राज्यों से अपेक्षित प्रतिक्रिया न आने पर आज कैबिनेट सेक्रेटरी को इस बारे में दिशा निर्देश जारी करने पड़े।

ध्यातव्य है कि कोरोना से संबंधित मीडिया रिपोर्ट्स में लगातार ऐसे समाचार जगह बनाते रहें हैं जहाँ कहीं किसी बाहर से यात्री ने अपनी क्वारंटाइन मुहर इत्र से मिटा दी तो कहीं बाहर से आए लोग जाँच पड़ताल से बचने के लिए देश के भीतर हवाई यात्रा की जगह ट्रेनों और बसों के जरिए यात्रा करते पाए गए। मीडिया में आई एक रिपोर्ट में कहा गया था कि विदेशों से आने वाले कुछ यात्री अपना कोरोना संक्रमण छिपाने के लिए की जाने वाली थर्मल जाँच से पहले पैरासिटामॉल की दवाएं ले रहे थे। जानकारों के अनुसार कोरोना संक्रमित मरीज का यह बर्ताव न सिर्फ उसके खुद के लिए बल्कि सारे समाज और देश के लिए बेहद खतरनाक और गैर जिम्मेदाराना है।

याद रहे कि दिसंबर में चीन के वुहान से शुरू हुआ यह कोरोना वायरस संक्रमण आज पूरी दुनिया में फैल चुका है। जिसमें कोरोना के सबसे अधिक पॉजिटिव केसों के मामलों में अमेरिका अब चीन को भी पीछे कर पहले स्थान पर पहुंच गया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में कोरोना मरीजों की संख्या बढ़कर 81,321 हो गई है। पूरी दुनिया में जानलेवा कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या अब बढ़कर पाँच लाख से अधिक हो गई है जिसमें से 22,000 के ज्यादा लोग इस महामारी के कारण जान गँवा चुके हैं। इसकी वजह से दुनिया की एक तिहाई आबादी आज लगभग 2.8 अरब लोग पूरी दुनिया में लॉकडाउन की स्थिति में हैं। वहीं भारत में अबतक 724 कोरोना पॉजिटिव केसेस की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें से 17 की मौत इस बीमारी के कारण हुई है।

 

‘खाने का इंतजाम न हो तो थाने में आओ, लेकिन बाहर मत घुमो’: बेसहारा लोगों को खर्चा दे रही है UP पुलिस

लॉकडाउन के दौरान पूरे भारत भर में लोगों को घर से बाहर ना निकलने के सख्त निर्देश दीए गए हैं। कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए सरकार ने देश में 21 दिन के लॉकडाउन की घोषणा की है और लोगों को अपने घरों से बाहर ना निकलने की सलाह दी है। वायरस के संक्रमण का खतरा इतना अधिक है कि अनावश्यक रूप से बाहर देखे जा रहे लोगों के साथ पुलिस सख्ती से पेश आ रही है जिस कारण वह मीडिया के निशाने पर भी है। हालाँकि, पुलिस विभाग का मानवीय चेहरा भी इस लॉकडाउन के दौरान बाहर आया है। इन्हीं में से एक है सिद्धार्थ नगर, उत्तर प्रदेश पुलिस।

इस वीडियो में देखा जा रहा है कि सड़क पर घूम रहे एक गरीब, बेसहारा को पुलिसकर्मी अपनी जेब से 100 रुपए दे रहे हैं। बेसहारा आदमी पुलिसकर्मी के आगे हाथ फैलाते हुए देखा जा रहा है। पुलिसकर्मी उसे सौ रुपए देते हुए कह रहे हैं – “खाने का इंतजाम नहीं हो रहा है, तो थाने पर आ जाना, सुबह-शाम भोजन नहीं मिल रहा है तो थाना नजदीक है वहाँ आ जाना। लेकिन घर से बाहर मत निकलो, सुबह 10 बजे सिद्धार्थ नगर थाने पर आ जाना, वहीं भोजन हो जाएगा तुम्हारा।”

लॉकडाउन के दौरान देखा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात जैसे राज्यों में पुलिस कानून व्यवस्था बनाए रखने के साथ ही गरीब और बेसहारा लोगों की मदद कर रही है। दिल्ली सरकार ने भी गरीब लोगों के लिए सामूहिक भोजन का प्रबंध किया है। कई जगहों पर देखा जा रहा है कि लॉकडाउन तोड़कर सड़कों पर निकले युवकों से पुलिस ने पहले राष्ट्रगान गवाया के साथ ही लोगों को शपथ दिलवा रहे हैं कि वे बिना कारण घर से बाहर नही निकलेंगे।

ज्ञात हो कि आज लॉकडाउन का तीसरा दिन है। प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना वायरस के संक्रमण के लिए देशवासियों से 21 दिन तक घर से बाहर ना निकलने की सलाह दी है। पुलिस और प्रशासन निरंतर लोगों की निगरानी कर रही है और उनकी आवश्यकताओं का भी ध्यान रख रही है।

कोरोना से जंग: देश में कहीं भी हों यूपी के गरीब मजदूर लोग, खाने-पीने का खर्च उठाएगी योगी सरकार

24 मार्च से देश में लागू लॉकडाउन के बाद से ही पूरे देश में यातायात प्रतिबंधित है। इस बीच दूर दराज क्षेत्रों में फँसे गरीब, मजदूरों का अपने गंतव्यों तक पहुँचने के लिए पलायन जारी है। इसी बीच योगी सरकार ने एक बार फिर लोगों से अपील की है कि वह घबराएँ नहीं और यथास्थान रहें साथ ही योगी सरकार ने घोषणा की है कि हमने उत्तराखंड, हरियाणा और महाराष्ट्र के सीएम से बात कर कहा है कि उनके राज्यों में जो भी यूपी के रहने वाले लोग हैं उनके रहने और खाने के लिए इंतजाम किए जाएँ। ऐसे में इन सुविधाओं का खर्चा योगी सरकार द्वारा दिया जाएगा।

लॉकडाउन के बाद अपने गंतव्यों की ओर लगातार पैदल चल रहे लोगों को देख सीएम योगी ने अपील करते हुए कहा है कि जो जहाँ हैं वहीं रहे, दूसरे राज्यों के सीएम से हमने उनके लिए बेहतर व्यवस्था कराने के लिए बात की हैं। ऐसे लोगों से निवेदन है कि वह घबराएँ नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मजदूर वर्ग के लोग ज्यादा कर रहे हैं। इसके साथ ही योगी ने कहा कि दिल्ली, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, हरियाणा, गुजरात, जहाँ भी यूपी के लोग हैं उनसे अपील है कि वे घबराएँ नहीं। वे लोग सरकार की जिम्मेदारी हैं और उनके लिए इंतजाम किए जा रहे हैं। सीएम ने कहा कि यूपी के मुख्य सचिव ने भी राज्यों के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि यूपी के जो निवासी वहाँ रह रहे हैं, उन्हें सुविधाएँ दें। यूपी की सरकार हर किसी का ख्याल रखेगी।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार ऐसे लोगों पर पूरी तरह फोकस कर रही है, जो लोग घबराकर रात और दिन पैदल चल रहे हैं। उन्हें कोई समस्या नहीं आएगी। परिवार, देश समाज और सुरक्षित भविष्य के लिए उनका लॉकडाउन का पालन करना आवश्यक है। कोरोना के खिलाफ जो लड़ाई है जिसमें सबको सहभागी बनना है। सीएम योगी ने बताया कि प्रदेश में 12 राज्यों के लिए नोडल अधिकारी बनाए गए हैं। उन राज्यों के नागरिक किसी भी परेशानी पर उन नोडल अधिकारियों से सीधे संपर्क कर सकते हैं और उन राज्यों में फँसे लोग संबंधित नोडल अधिकारियों से सीधे संपर्क कर सकते हैं। इन लोगों के साथ एक आईपीएस अधिकारी को तैनात किया है जो 24 घंटे इन लोगों से जुड़े रहेंगे।

सीएम योगी ने कहा कि उन्होंने जिलों के सभी अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं कि डोर टू डोर डिलीवरी पर ध्यान दें। किरानों की दुकान खोलने को कहा है। इन किराने की दुकानों में सोशल डिस्टेंस के लिए भी विभागों को निर्देशित किया गया है। गौरतलब है कि योगी सरकार ने पिछले दिनों कहा था कि लोग घरों से बाहर नहीं निकलें। सरकार जरूरी सामान को उनके घरों तक पहुँचाएगी।

वहीं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने लॉकडाउन के चलते दिल्ली में फँसे अपने नागरिकों के भोजन, आवास और आवागमन की व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से 50 लाख रुपए देने की घोषणा की है।

वहीं लॉकडाउन के बाद उत्तराखंड में फँसे विभिन्न राज्यों के नागरिकों को उनके घरों तक सकुशल भेजने के लिए बसों का इंतजाम कर रही है। इसके लिए राज्य ने केन्द्र सरकार से अनुमति ली है। दरअसल एक आँकड़े के मुताबिक उत्तराखंड में 2100 से अधिक पर्यटक फँसे हुए हैं, जिनमें गुजरात और उत्तर प्रदेश के लोग सबसे अधिक शामिल हैं। गौरतलब है कि देश में 21 दिनों के लिए यानि कि 14 अप्रैल तक लॉकडाउन लागू है। वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की जनता से 21 दिनों तक घरों में रहने की अपील की है।

केरल से भागकर ISIS में शामिल हुआ था काबुल के गुरुद्वारे का आतंकी, कश्मीरी मुस्लिमों का बदला लेने के लिए था यह हमला

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में गुरुद्वारे पर हुए आतंकी हमले में कश्मीर कनेक्शन निकला है। साथ ही इस आतंकी के केरल से जुड़े होने की बात भी सामने आई हैं। बताया जा रहा है कि 150 सिखों पर हमला करने वाले आतंकियों में से एक भारत का जिहादी था, जिसने कश्मीर मुस्लिमों का बदला लेने की नियति से इसको अंजाम दिया।

काबुल के गुरुद्वारा में बुधवार (25 मार्च) को हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट खुरासान (ISKP) ने ली है और साथ में हमलावर की तस्वीर भी जारी की है। ISKP ने कहा कि इस हमले को अबू खालिद-अल-हिन्दी नाम के उसके एक फिदाईन ने अंजाम दिया है।

समाचार एजेंसी का दावा है कि यह अबू खालिद-अल-हिन्दी और कोई नहीं बल्कि केरल का ही एक दुकानदार मोहम्मद साजिद था, जो चार साल पहले चौदह लोगों के साथ ISIS ज्वाइन करने निकला था। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि अबू खालिद-अल-हिन्दी जिसका एक और नाम अब्दुल खयूम भी है, केरल के कासरगोड का रहने वाला है, जो साल 2015 में अफगानिस्तान में जाकर इस्लामिक स्टेट का आतंकी बन गया था।

एक रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा एजेंसी से जुड़े एक अधिकारी ने कहा, “हमें शक है कि अबू खालिद-अल-हिन्दी केरल के कासरगोड का है जो 2015 में इस्लामिक स्टेट में शामिल हो गया था। केरल से सीरिया और अफगानिस्तान गए आतंकियों के बारे में हम और जानिकारी इकट्ठी कर रहे हैं, जिससे अबू खालिद-अल-हिन्दी की असली पहचान के बारे में पता लगाया जा सके।”

समाचार एजेंसी के माध्यम से जारी एक बयान में बताया जा रहा है कि गुरूद्वारे पर हमले को कश्मीरी मुस्लिमों के लिए बदले की कार्रवाई के रूप में अंजाम दिया गया था। संदेह है कि यही अबू खालिद-अल-हिन्द केरल, वालापट्टनम के आईएसआईएस केस में भी आरोपित था। वर्ष 2017 में, NIA ने आईएस से तार जुड़े होने के मामले में कन्नूर जिले के वालापट्टनम में अबू खालिद सहित पाँच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

केरल के आईएसआईएस मॉड्यूल पर नजर रखने वाले अधिकारियों का मानना है कि काबुल के गुरुद्वारा पर हुए आतंकी हमले को ISI के इशारे पर लश्कर और हक्कानी नेटवर्क ने ही अंजाम दिया है और दुनिया को गुमराह करने के लिए ISKP से इस हमले की जिम्मेदारी लेने को कहा गया है। जाँच एजेंसियों को शक है कि अबू खालिद-अल-हिन्दी काबुल पर हमले से कुछ महीने पहले लश्कर ए तैयबा में शामिल हो गया था।

दुबई से लौटकर था क़्वारन्टाइन, गर्लफ्रेंड को मिलने के लिए भागा, कहा- घरवाले नहीं मान रहे थे

ऐसे समय में, जब सरकार देशभर में कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए लोगों के बाहर न निकलने की अपील कर रही है, कुछ लोग बेहद मूर्खतापूर्ण हरकतें करते हुए देखे जा रहे हैं और अपने साथ-साथ पुलिस और स्वास्थ्यकर्मियों की जान को भी खतरे में डाल रहे है। खासतौर पर विदेशों से लौट रहे लोग अन्य लोगों के लिए खतरा बन चुके हैं। ऐसा ही एक किस्सा मदुरै में देखने को मिला है, जहाँ क़्वारंटाइन किया हुआ एक युवक सिर्फ अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने के लिए भाग निकला।

22 साल के इस युवक को कोरोना वायरस होने की आशंका के कारण मदुरै जिले में क्‍वारंटाइन किया गया था, लेकिन वह वहाँ से फरार होकर अपनी गर्लफ्रेंड के घर जा पहुँचा। यह युवक हाल ही में दुबई से लौटा था, जिसके बाद उसे यहाँ पर संक्रमण से सुरक्षा के कारण पृथक रखा गया था। क्‍वारंटाइन सेंटर से उसके फरार होने की खबर मिलते ही पुलिस और तमाम स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों की चिंताएँ बढ़ गई हैं, जो इस संक्रामक रोग के प्रसार को रोकने और रोगियों के इलाज में दिन-रात एक किए हुए हैं।

पुलिस ने इस शख्‍स को शिवगंगा जिले में उसकी गर्लफ्रेंड के घर में पाया, जिसके बाद उसे वहाँ से वापस पृथक केंद्र लाया। युवक से मिलने के बाद अब लड़की को भी आइसोलेशन में (अलग) रखा गया है। यह युवक दुबई से 21 मार्च को मदुरै पहुँचा था।

युवक से पूछताछ के दौरान उसने पुलिस को बताया कि लड़की (गर्लफ्रेंड) के माता-पिता उनके रिश्‍ते के लिए तैयार नहीं है और वो उसकी शादी जबरदस्ती किसी अन्य युवक से करा रहे थे, जिस कारण उसे अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने के लिए क़्वारंटाइन से भागना पड़ा। युवक के खिलाफ क्‍वारंटाइन के नियमों की अवहेलना करने को लेकर केस दर्ज किया गया है। दरअसल, सरकार इस संक्रमण को रोकने के लिए हर कठोर कदम उठाने के लिए तैयार है और निरंतर लोगों से अपील कर रही है कि वह कुछ दिनों के लिए अपने दैनिक कार्यक्रमों को छोड़कर अपने घर पर रहें क्योंकि कोरोना वायरस के कम्युनिटी संक्रमण का सबसे ज्यादा ख़तरा मानव-से-मानव में होने वाला संक्रमण है।

देश में कोरोना से पीड़ित लोगों की संख्या 700 के पार पहुँच गई है। इस बीच इससे निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो 21 दिनों के लॉकडाउन का ऐलान किया है, उसका आज तीसरा दिन है। लॉकडाउन के चलते आम जनमानस को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है और हजारों मजदूर अपने घरों के लिए पैदल ही निकल रहे हैं।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन भी कोरोना पॉजिटिव, प्रिंस चार्ल्स पहले से ही हैं संक्रमित

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। इसकी जानकारी उन्होंने खुद ट्वीट के जरिए दी है। उन्होंने बताया कि उनमें कोरोना के हल्के लक्षण हैं और डाउनिंग स्ट्रीट में उन्हें क्वारंटाइन कर दिया गया है। इससे पहले प्रिंस चार्ल्स भी कोरोना से संक्रमित पाए गए थे। अब उनका स्वास्थ्य बेहतर है।

बता दें यूके में कोरोना वायरस से संक्रमित व्यक्तियों की संख्या बुधवार (25 मार्च) सुबह तक बढ़कर कुल 11,600 हो गई है। वहीं मरने वालों की संख्या 578 है।

इससे पहले यूके के डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ एंड सोशल केयर ने इस बात की जानकारी देते हुए कहा था कि मंगलवार (24 मार्च) के आधिकारिक आँकड़ों की तुलना में कुल 1,452 मामलों की वृद्धि देखने को मिली।

गौरतलब है कि सरकार के पिछले एक बयान के अनुसार, अधिकारी कोविड-19 संक्रमण के टेस्ट की संख्या बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं। पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड और नेशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) एक दिन में 25 हजार तक टेस्ट कर सकता है। डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ एंड सोशल केयर ने कहा कि पूरे देशभर के स्थानीय अस्पतालों में मंगलवार (24 मार्च) तक 1.5 करोड़ फेस मास्क वितरित किए गए थे।

‘चायनीज कोरोना’ के खिलाफ लड़ाई में स्पेन और चेक रिपब्लिक को चीन ने बेंचे घटिया टेस्टिंग किट्स, मरने वालों की संख्या बढ़ी

‘एव्री रियल क्राइसिस इज अ ऑपर्च्युनिटी’ ऐसी कुछ कहावत कहते हैं अंग्रेजी में जिसका मतलब है कि संकट हमेशा एक बढ़िया अवसर होता है जिसे भुनाने से चूकना नहीं चाहिए! यह कहावत वैश्विक कोरोना महामारी के इस कठिन दौर में चीन के क्रियाकलापों को देखते हुए, उस पर खरी उतरती है। एक तरफ उसने नोवेल कोरोना वायरस को दबाने की कोशिश कीं जबकि सही समय पर इस घातक वायरस से दुनिया को चेता कर वह दुनिया भर को इस महामारी से बचा सकता था, दूसरी तरफ वह इस संकट की घड़ी में दुनिया भर के सामने यह जताने की फ़िराक में लगा हुआ है कि वह इस महामारी के खिलाफ लड़ाई में उनके साथ है, उन्हें मेडिकल टीम्स, उपकरणों आदि के जरिए मदद कर रहा है।

हालाँकि मीडिया में आ रहीं रिपोर्ट्स के अनुसार सच्चाई इससे ठीक उलट है और चीन इस मौके को भी सिर्फ अपना धंधा बढ़ाने, मुनाफे कमाने के तौर पर देख रहा है। वह भी घटिया क्वालिटी के उपकरण बेंच कर जिनमें से ज्यादातर किसी काम के नहीं है। उदाहरण के लिए कोरोना के कारण मरने वालों की संख्या में इटली के बाद आने वाले स्पेन के स्वास्थ्य मंत्री ने बुधवार को बताया था कि उनके देश ने चीन से 467 मिलियन यूरो के चिकित्सा उपकरण खरीदे हैं, जिसमें 950 वेंटिलेटर्स, 5.5 मिलियन टेस्टिंग किट्स, 11 मिलियन ग्लव्स और 50 करोड़ से ज्यादा फेस मास्क्स शामिल हैं।

अब रिपोर्ट्स आ रहीं कि इन खरीदी गईं मेडिकल टेस्टिंग किट्स में से ज्यादातर किसी काम की नहीं हैं। कुल 55 लाख टेस्टिंग किट्स में से अबतक खराब किट्स की संख्या 6,40,000 पहुँच चुकी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बकौल स्पेन की लैब्स ये रैपिड टेस्टिंग किट्स मात्र 10 में से 3 मामलों में कोरोना संक्रमित व्यक्ति की पहचान कर पा रहीं हैं। यानी अगर 10 कोरोना संक्रमित व्यक्तियों का टेस्ट इन किट्स के जरिए होता है तो उसमें से महज 3 मामलों में ये किट सही परिणाम दे पातीं हैं। जानकारों के अनुसार जबकि टेस्ट परिणाम 80% होना चाहिए यानी हर 10 संक्रमित मरीज में से कम से कम 8 के टेस्ट सही आने चाहिए।

चीन ने इन घटिया किट्स के आरोपों को स्वीकार करते हुए कहा है कि जो टेस्टिंग किट्स उसने स्पेन को बेंची हैं वो Bioeasy नामक कम्पनी ने बनाई हैं जिसे ऐसी किट्स बनाने का लाइसेंस नहीं मिला हुआ है। यहाँ पर सवाल उठता है कि फिर उसने ऐसी लापरवाही की कैसे? जितना पैसा और जो समय स्पेन ने चीन से इन मेडिकल उपकरणों को हासिल करने में जाया किया है उसका बेहद बुरा प्रभाव उस पर पड़ सकता है जहाँ अभी तक कोरोना से मरने वालों की संख्या 4100 से ज्यादा हो चुकी है जो इटली के बाद सबसे ज्यादा है।

ठीक यही हाल चेक रिपब्लिक का है जिसने 300,000 रैपिड कोरोना वायरस किट्स चीन से मँगवायीं थीं पर अब मालूम पड़ रह कि इनमें से 80 फीसदी किसी काम की नहीं है। 1.83 मिलियन यूरो कीमत की ये किट्स कोरोना संक्रमण के नतीजे गलत तरह से दर्शा रहीं हैं यानी कोरोना पॉजिटिव को निगेटिव और कोरोना निगेटिव को पॉजिटिव। रिपोर्ट्स के अनुसार चेक रिपब्लिक से इन खराब किट्स के बावत यह सूचना यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल ओस्त्रावा के हाईजिनिस्ट्स के द्वारा सामने लाई गई है।

याद रहे कि अबतक विश्व में ‘चायनीज कोरोना वायरस’ से संक्रमित लोगों की संख्या 5 लाख 42 हजार से ज्यादा हो चुकी है जिनमें से 24,000 से ज्यादा लोग मर चुके हैं।

केरल: कोरोना पर जागरूकता फैलाने जा रहे स्वास्थ्यकर्मियों की मदद करने पर स्थानीय लोगों ने पुलिस को पीटा, 4 जख्मी

केरल में स्थानीय लोगों द्वारा पुलिसकर्मी के साथ मारपीट की खबर सामने आई है। केरल के कासरगोड जिले के डेलमपेडी में एक उप-निरीक्षक समेत चार पुलिसकर्मियों पर उस वक्त हमला किया गया जब ये लोग स्वास्थ्य विभाग की एक टीम की कॉलोनी में प्रवेश करने में मदद कर रहे थे। स्थानीय लोगों द्वारा किए गए इस हमले में पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। 

केरल के एक दैनिक समाचारपत्र केरल कौमुदी ने बताया कि स्वास्थ्यकर्मी कोरोना वायरस से संक्रमण के बचाव को लेकर जागरुकता अभियान के लिए कालीदुकु कॉलोनी में जा रहे थे, तभी स्थानीय लोगों का एक समूह इनके ऊपर टूट पड़ा। जिला कलेक्टर के आदेश पर पुलिस की एक टीम स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की मदद और बचाव के लिए वहाँ पर गई, लेकिन पुलिस की टीम भी हमले की चपेट में आ गई। स्थानीय लोगों ने उन्हें भी पीटना शुरू कर दिया। सभी घायलों को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है, वहीं इस घटना के सिलसिले में दो लोगों को हिरासत में लिया गया है।

गौरतलब है कि देश में कोरोना वायरस का कहर जारी है। हर रोज कोरोना के मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। इस महामारी की चपेट में लगभग 775 लोग आ चुके हैं, जबकि 20 लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य केरल और महाराष्ट्र है। केरल में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या 137 है, जबकि महाराष्ट्र में कोरोना के मरीजों की संख्या 130 है। इस महामारी ने यहाँ पर 3 लोगों की जान ले ली है। सबसे पहले केरल में ही कोरोना का संक्रमित मरीज मिला था।

मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने गुरुवार (मार्च 26, 2020) को कोरोना वायरस पर समीक्षा बैठक के बाद पत्रकारों से कहा था कि कन्नूर से सबसे अधिक नौ मामले सामने आए। इसके बाद कासरगोड और मलप्पुरम जिलों से तीन-तीन, जबकि इडुक्की और वायनाड से एक-एक मामला सामने आया। उन्होंने कहा कि राज्य में 1.20 लाख से अधिक लोगों को निगरानी में रखा गया है। साथ ही मुख्यमंत्री ने कोरोना वायरस के मद्देनजर केन्द्र सरकार की ओर से जारी राहत पैकेज का स्वागत किया।

भोपाल: पाबंदी के बावजूद कहीं मस्जिद तो कहीं घर में सामूहिक नमाज करवा रहे थे इमाम, 60 पर FIR

कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने के लिए देश में 21 दिनों का लॉकडाउन है। एक जगह लोगों से इकट्ठा नहीं होने को कहा जा रहा है। खुद प्रधानमंत्री सोशल डिस्टेंसिंग की अपील की है। असल में इस संक्रमण से बचाव का सबसे बेहतर उपाय सोशल डिस्टेंसिंग ही है। कई उलेमा ने भी समुदाय के लोगों से घर में ही नमाज पढ़ने और एक जगह जमा नहीं होने की अपील की है। साथ ही पुलिस-प्रशासन के निर्देशों को मानने की अपील की है। बावजूद समुदाय विशेष के एक वर्ग को यह बात समझ नहीं आ रही। वे सामूहिक रूप से नमाज पढ़ने के लिए इकट्ठा हो रहे हैं और रोके जाने पर प्रशासन से भिड़ने को तैयार हो जाते हैं।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से इसी तरह की दो घटना सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 60 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है। इनमें से एक मामले में मस्जिद में नमाज पढ़ी जा रही थी तो दूसरे मामले में इमाम अपने घर में लोगों को इकट्ठा कर नमाज पढ़वा रहा था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार गुरुवार रात शहर के टीला जमालपुरा इलाके में मस्जिद के इमाम शाहीद नासिर के घर में लोग इकट्ठा होकर नमाज अदा कर रहे थे। इसकी सूचना मिली तो पुलिस ने सभी के खिलाफ आईपीसी की धारा 188, 269, 270 के तहत केस दर्ज किया और इनमें से 20 का टेस्ट भी करवाया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस इलाके में गश्त कर रही थी। इसी दौरान देखा कि एक घर में सामूहिक रूप से 25 से लेकर 30 लोग नमाज अदा कर रहे हैं। इस मामले के सामने आने से पहले शहर के काजी ने इकट्ठा होकर नमाज नहीं पढ़ने की अपील की थी।

दूसरी घटना में भोपाल के तलैया स्थित जैनब मस्जिद इस्लामपुरा में इमाम सहित करीब 30 लोग रात के वक़्त जमा होकर नमाज अदा कर रहे थे। पुलिस ने इनके खिलाफ़ 144 धारा का उल्लंघन करने पर मामला दर्ज किया। जानकारी के अनुसार लॉकडाउन और कर्फ्यू आदेश का उल्लंघन करने पर भोपाल ज़िले में अब तक कुल 61 केस दर्ज किए गए हैं। इनमें से गुरुवार देर रात से लेकर शुक्रवार सुबह तक कुल 8 प्रकरण पंजीबद्ध किए गए हैं। 22 मार्च से आज तक धारा 188, 269, 270ipc एवं धारा 51 राष्ट्रीय आपदा अधिनियम के तहत कुल 61 मामले पुलिस ने दर्ज किए हैं। इनमें सरकारी आदेश का उल्लंघन कर दुकान खोलने, बेवजह रोड पर घूमने, सामूहिक नमाज़ अदा करने, दुकान के सामने भीड़ और सोशल डिस्टेंस का पालन न करना शामिल है।