Home Blog Page 4979

‘कोरोना से लड़ाई में कमांडर मोदी का अनुसरण पैदल सेना की तरह करो’: पी चिदंबरम ने किया 21 दिन के लॉकडाउन का समर्थन

पीएम मोदी द्वारा 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा के बाद अब हाल ही में घोटालों के आरोप में तिहाड़ गए पूर्व वित्त मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता पी चिदंबरम ने कॉन्ग्रेस से इतर लॉकडाउन का समर्थन किया है। चिंदबरम ने देशवासियों से अपील की है कि इस मुश्किल वक्त में वे प्रधानमंत्री को कमांडर समझें और पैदल सैनिक की तरह उनकी कही बातों का अच्छे से अनुसरण करते हुए कोरोना वायरस का मजबूती से सामना करें।

पी चिदंबरम की यह अपील इस कारण से भी महत्वपूर्ण मानी जा सकती है क्योंकि कोरोना वायरस के संक्रमण की रोकथाम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से देश में किए गए 21 दिनों के लॉकडाउन की घोषणा पर जहाँ कॉन्ग्रेस पार्टी और उसके कुछ नेता सवाल उठा रहे हैं, वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम इसकी सराहना की है।

लॉकडाउन पर अपनी राय देते हुए ट्वीटर पर 10 सूत्री प्लान में चिदंरबम ने कोरोना के खिलाफ देशव्यापी लॉकडाउन को ‘ऐतिहासिक मूवमेंट’ बताया है।

चिदंबरम ने लिखा- “24 मार्च से पहले हुई बहस को पीछे छोड़ देना चाहिए और एक नई लड़ाई की शुरुआत के तौर पर देशव्यापी लॉकडाउन को देखा जाना चाहिए, जहाँ लोग सिपाही हैं और पीएम कमांडर हैं। हमारा कर्तव्य है कि हम प्रधानमंत्री, केन्द्र और राज्य सरकारों को अपना पूरा समर्थन करें।”

केंद्र की मोदी सरकार को फौरन राहत की घोषणा करने का प्लान सुझाते हुए चिदंबरम ने कहा – “भारत में घर में रहना सबसे अच्छा है लेकिन घर में रहने के लिए लोगों को पैसे और खाने की जरूरत होगी। हमें न सिर्फ 21 दिनों के लिए सोचना और प्लान करना चाहिए बल्कि उसके अगले कुछ हफ्तों की भी योजना होनी चाहिए।”

चिदंबरम ने पैकेज के ऐलान के लिए सरकार से प्रधानमंत्री की किसानों के लिए योजना के तहत कहा कि किसानों को दोगुना भुगतान 12 हजार रुपए करने, ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत इसमें एनरॉल लोगों को 3,000 रुपए, सभी जनधन खातों में 6 हजार रुपए, सभी राशन कार्ड धारकों के घरों में 10 किलो चावल और गेहूँ की डिलीवरी करने के साथ ही सभी कर्मचारियों के खाते में वेतन देने और वह सरकार की ओर से रिम्बर्स होना चाहिए।

इसके साथ ही उन्होंने 1 अप्रैल से 30 जून, 2020 तक सभी आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी दरों में 5% की कटौती की माँग भी की है। उन्होंने आगे कहा कि ऐसे वक्त में प्रधानमंत्री, केंद्र और राज्य सरकारों को अपना पूरा समर्थन देना चाहिए और अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। हालाँकि, चिदंबरम ने स्पष्ट किया कि यह उनका निजी विचार है और उनकी पार्टी का इससे कुछ भी लेना-देना नहीं है।

मैंने 15 नॉन-मुस्लिम छात्रों को फेल कर दिया है: मिलिए जामिया के प्रोफेसर अबरार से, जाकिर नाइक का है फैन

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के एक प्रोफेसर ने दावा किया है कि उसने उन नॉन-मुस्लिम छात्रों को परीक्षा में फेल कर दिया है, जो सीएए के पक्ष में थे या जो सीएए विरोधियों का विरोध कर रहे थे। जहाँ एक तरफ शिक्षकों से उम्मीद की जाती है कि वो बिना किसी भेदभाव के छात्रों को पढ़ाएँ और उन्हें एक अच्छा नागरिक बनाएँ, लेकिन प्रोफेसर अबरार अहमद लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से सीएए समर्थक छात्रों को धमकी देने में लगा हुआ है। हाल ही में उसने ऐलान किया है कि परीक्षा में 15 सीएए समर्थक छात्रों को छोड़ कर बाकी सभी छात्र पास हैं। उसने सीएए के विरोध में उसके 55 छात्र होने का दावा किया।

हालाँकि, कई लोगों को शंका थी कि कॉपी चेक करते समय प्रोफेसरों को छात्रों की पहचान पता ही नहीं होती, ऐसे में वो कैसे किसी को पहचान कर जानबूझ कर पास या फेल कर सकते हैं? हमने जामिया के कुछ लोगों से बात की, जिन्होंने हमें बताया कि अटैंडेंस शीट प्रोफेसरों के पास ही होती है, इसीलिए उनके लिए ये पता लगाना कठिन नहीं है कि कौन सा रोल नंबर किस छात्र का है और कौन हिन्दू हैं और कौन मुस्लिम। अबरार अहमद ने भी ऐसा ही करने का दावा किया है। अबरार अहमद जामिया का असिस्टेंट प्रोफेसर है, जो बाटला हाउस क्षेत्र में रहता है। अबरार ज़ाकिर नाइक का भी अनुयाई है।’

वो ट्विटर पर ज़ाकिर नाइक को फॉलो करता है और उसकी विचारधारा भी कट्टर इस्लामी है। वह इससे पहले भी हिन्दुओं को लेकर भद्दी और आपत्तिजनक टिप्पणी कर चुका है। अपनी एक ट्वीट में उसने कहा था कि अगर भारत हिन्दू राष्ट्र बन गया तो फिर यहाँ की महिलाओं का क्या होगा? उसने कहा था कि अधिकतर बलात्कार आरोपित वही हैं, जो हिन्दू राष्ट्र या फिर रामराज की बात करते हैं। इससे पता चलता है कि वो हिन्दुओं से किस कदर नफरत करता है। साथ ही उसने कोरोना वायरस को लेकर भी सरकार के दावों और मेडिकल जगत की सलाहों पर पानी फेरने की कोशिश की थी।

अबरार ने कहा था कि कोरोना वायरस या फिर इस प्रकार की बाकी चीजें अल्लाह की परीक्षा है। उसने दावा किया था कि कोरोना वायरस से डरे बगैर सभी को सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रखना चाहिए। यहाँ सवाल ये उठता है कि ऐसे व्यक्ति पर आज तक जामिया ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की, जब वो खुले रूप से सोशल मीडिया को माध्यम बना कर इस तरह की घृणास्पद बातें कर रहा है। एक ऐसा प्रोफेसर, जो कोरोना वायरस को ‘अल्लाह का इम्तिहान’ बताता है।

बेटे के बाद अब मम्मी ने फैलाई फर्जी खबर: स्वघोषित ‘फैक्ट चेकर’ की मम्मी ने शेयर की फर्जी फोटो

अगर आपको लगता है कि माँ-बेटे का सबसे बुद्दिहीन जोड़ा अभी तक सिर्फ राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी ही हैं, तो देर से ही सही लेकिन ऑल्ट न्यूज़ के फाउन्डर परिवार भी गाँधी परिवार को तगड़ी चुनौती देते हुए देखा जा सकता है। हालाँकि, इसमें एकमात्र अच्छी खबर यह है कि राजनीति के बाद अब इस तरह के समीकरण ‘फैक्ट चेक’ जैसी जगहों पर भी तैयार होने लगे हैं।

दरअसल, फैक्ट चेक की आड़ में अपने हिन्दू-विरोधी और सरकार-विरोधी एजेंडे को हवा देने के चक्कर में लगातार 2 दिन क्रमशः प्रतीक सिन्हा (ऑल्ट न्यूज़ वेबसाईट फाउन्डर) और फिर निर्झरी सिन्हा (प्रतीक सिन्हा की मम्मी और ऑल्ट न्यूज़ की निदेशक) का ‘रिवर्स फैक्ट चेक’ करते हुए आम ट्विटर यूजर्स ने ही उन्हें आईना दिखा दिया है। अब अगर 26 मार्च को भी ये कोई दूसरा ‘कोरोना षड्यंत्र’ करते हुए देखे जाते हैं, तो यह फैक्ट चेक के इतिहास में लगाईं गई पहली हैट्रिक कहलाएगी।

क्या है मामला :

स्वघोषित ‘फैक्ट न्यूज़ चेकर’ गैंग यानी, ऑल्ट न्यूज़ के फाउन्डर प्रतीक सिन्हा की ‘कोरोना षड्यंत्र’ में भागीदारी पकड़े जाने के ही ठीक एक दिन बाद ऑल्ट न्यूज़ की निदेशक और प्रतीक सिन्हा की मम्मी ट्विटर पर कोरोना षड्यंत्र में अपनी मौजूदगी साबित करती हुई देखी गई हैं।

प्रतीक सिन्हा की मम्मी निर्झरी सिन्हा ने ट्विटर पर एक तस्वीर शेयर की, जिसमें कुछ गरीब बच्चों की तस्वीर ट्वीट करते हुए देखी गई। तस्वीर के साथ ‘फैक्ट चेकर’ प्रतीक सिन्हा की मम्मी यानी ऑल्ट न्यूज़ की निदेशक निर्झरी सिन्हा ने लिखा है – “PM मोदी का इनके लिए क्या सन्देश है, घर पर रहो और बाहर मत निकलो?”

दरअसल, इस चित्र में कुछ बच्चों को दिखाया गया है और निर्झरी सिन्हा ने इसी बहाने अपने उसी मर्म को बाहर निकालने की कोशिश की है, जिसके कारण वो अक्सर PM मोदी को गाली देने से लेकर हर प्रकार की दक्षिणपंथी सरकार विरोधी गतिविधि करती हुई देखी जाती हैं। निर्झरी सिन्हा यानी, प्रतीक सिन्हा की मम्मी ने इस तस्वीर के जरिए PM मोदी के 21 दिनों के लॉकडाउन के ऐलान का उपहास करने का प्रयास किया लेकिन दुर्भाग्यवश कुछ दिन से माँ-बेटों के षड्यंत्र को ज्यादा बल मिल नहीं पा रहा है। अपने दावे की वकालत में तथ्यों की कमी इस स्वघोषित फैक्ट चेकर गैंग के पास हमेशा ही रहती है इसलिए यह कहना भी गलत होगा कि यह षड्यंत्र पहली बार तथ्यों की कमी के कारण फ्लॉप हुए हैं।

क्या है तस्वीर की वास्तविकता –

ऑल्ट न्यूज़ के फाउन्डर प्रतीक सिन्हा और उनकी मम्मी यानी निर्झरी सिन्हा, जो कि ऑल्ट न्यूज़ की निदेशक भी हैं, ने जो तस्वीर ट्वीट की है, वह 2016 की है। अब एक प्रश्न उठता है जो कि निम्नलिखित है –

प्रश्न – आखिर 2016 की तस्वीर को 2020 में ट्वीट करते हुए उस पर सामाजिक ज्ञान देने का क्या कारण हो सकता है?

इसके 2 उत्तर हैं –

उत्तर 1 – बेटे प्रतीक सिन्हा की तरह ही कोरोना की वैश्विक महामारी के समय भी मोदी सरकार विरोधी कोई नया ‘कोरोना प्रपंच’ तैयार करना।
उत्तर 2 – लॉकडाउन के दौरान 24 घंटे घर में रहते हुए खाली समय का सदुपयोग कर मोदी सरकार विरोधी दलों (जो कि सर्वविदित ही हैं) की आँखों में अच्छे नम्बर हासिल करना।

ऑपइंडिया के सवाल-

प्रश्न 1- यदि फैलानी फेक न्यूज़ और प्रोपेगेंडा ही हो तो फिर खुद को फैक्ट चेकर कहना आवश्यक क्यों है?
प्रश्न 2- आखिर वह कौनसा वायरस है जो इंसान को मजबूर करता है कि वह ‘नासा तकनीक’ से पूरी दुनिया को ज्ञान देते हुए कहे कि गलत स्टोरी या मिसइन्फॉर्मेशन नहीं फैलानी चाहिए, जबकि आपने स्वयं ऑल्ट न्यूज़ के नाम से फेक न्यूज़ का कारखाना चला रखा हो?

खैर… निर्झरी सिन्हा के सामने कोरोना वायरस से भी बड़ी चुनौती बड़ी से बड़ी आपदा और महामारी के समय भी मोदी सरकार विरोधी अभियान जारी रखने की होती है। यह वही निर्झरी सिन्हा है जो ट्विटर पर अक्सर PM मोदी को खुली गालियाँ देते हुए भी देखी जाती है।

चाहे वह नोटबंदी के दौरान मोदी की कब्र खोदकर 500 और 1000 रुपए के नोटों से जला दिए जाने वाला ट्वीट हो या फिर उन्हें हत्यारा, अछूत और दंगे भड़काने वाला कहने वाला ट्वीट हो, निर्झरी सिन्हा ने हर समय साबित किया है कि वह ऑल्ट न्यूज़ जैसे स्वघोषित फैक्ट चेकर वेबसाईट की निदेशक होने की सबसे प्रबल दावेदार है।

लॉकडाउन के बाद भी रामपुर के मदरसे में पढ़ रहे थे बच्चे, पुलिस ने संचालक को लिया हिरासत में, FIR का आदेश

इन दिनों पूरा विश्व कोरोना वायरस के खिलाफ अपने-अपने तरीके से जंग लड़ रहा है। वहीं भारत में भी इसकी रोकथाम के लिए तरह-तरह के उपाय किए जा रहे हैं। यही कारण है कि भारत सरकार ने पूरे देश में 21 दिनों के लिए लॉकडाउन घोषित कर दिया है, लेकिन इन सभी घोषणाओं को भारत में कुछ लोग नजरअंदाज कर रहे हैं। कोई मदरसों में बच्चों को इस्लामी तालीम देने में लगा हुआ है तो कोई मस्जिदों में नमाज अदा करने में लगा हुआ है। कुछ ऐसा ही एक मामला सामने आया है उत्तर प्रदेश के जिला रामपुर से। जिले में घोषित लॉकडाउन के बाद भी एक मौलवी द्वारा मदरसे में बच्चों को पढ़ाया जा रहा था। इसकी जानकारी जब जिला प्रशासन को हुई तो उसने तत्काल कार्रवाई करते हुए मदरसा संचालक को हिरासत में ले लिया।

दरअसल जिले में लॉकडाउन की घोषणा के बाद भी टाँडा क्षेत्र के गाँव लांबा खेड़ा में मदरसा को बंद नहीं किया गया। इतना ही नहीं मदरसे में करीब 100 बच्चों को पढ़ाया जा रहा था। इसकी जानकारी जैसे ही जिले के जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह को हुई तो उन्होंने तत्काल संबंधित विभाग को जाँच के आदेश दे दिए। जाँच में शिकायत सही पाए जाने पर डीएम ने मदरसा संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दे दिए गए।

इसके बाद डीएम ने बताया कि जिले में लॉकडाउन का सख्ती से पालन कराया जाएगा, क्योंकि जनता के हित में है और जरा सी लापरवाही सभी को भारी पड़ सकती है। इसे देखते हुए किसी को भी घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। डीएम ने बताया कि इस दौरान इस दौरान गैस एजेंसी, पेट्रोल पंप और जरूरी सामानों की दुकानें खुली रहेंगी। वहीं लॉकडाउन की घोषणा के बाद भी बेवजह सड़कों पर घूम रहे 10 लोगों को रामपुर पुलिस ने हिरासत में लेकर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

रामपुर में खुले मदरसे की दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर की कटिंग

आपको बता दें कि बीते दिनों लॉकडाउन के दौरान मेरठ में पुलिस ने मस्जिदों में नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी थी। इसके बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने न तो 22 मार्च को जनता कर्फ्यू की पालन किया और न ही शाम के पाँच बचते ही ताली, थाली बजाकर अपनी जान जोखिम में डालकर काम करने वाले लोगों का अभिनंदन किया। इसके बाद भी शाम होने ही सैकड़ों की संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग सड़कों पर आए और पुलिस प्रशासन की अपील का विरोध करने लगे। घंटो समझाने के बाद भी लोग नहीं माने इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की चेतावनी दी तब कहीं जाकर मुस्लिम समुदाय के लोग अपने घरों को रवाना हुए।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में कोरोना से संक्रमित लोगों की संख्या 41 हो गई है। वहीं मोदी जी द्वारा 21 दिनों के लिए घोषित किए गए लॉकडाउन के बाद बाजारों में खरीददारी करने वालों लोगों की भीड़ जुट गई है, जिसे देखते हुए योगी सरकार ने लोगों को घर-घर जरूरी सामान पहुँचाने की बात कही है।

मोदी सरकार 80 करोड़ लोगों को देगी ₹2 और ₹3 प्रति किलो गेहूँ-चावल: 7 किलो प्रति व्यक्ति की दर से 3 महीने के लिए एडवांस राशन दिया जाएगा

पूरा विश्व कोरोना की महामारी से जूझ रहा है। इसी बीच मोदी सरकार ने कोरोना से जंग करने के लिए पूरी तरह से कमर कस ली है। पहले तो मोदी सरकार ने 21 दिनों का पूरे देश में लॉकडाउन घोषित किया अब सरकार कमर सकते हुए कोरोना से जंग लड़ने के लिए एक और बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने अब देश के 80 करोड़ लोगों को 2 रुपए प्रति किलो गेंहूँ और 3 रुपए प्रति किलो चावल देने का फैसला किया है। साथ ही राज्य सरकारों से तीन माह का राशन खरीदने की बात कही है। जिससे कि कोरोना के खिलाफ इस जंग में सभी देश वासियों को समय से राशन मिल सके।

पीएम मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया। कैबिनेट बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने प्रेस कॉन्फ्रेस करके कहा कि देश के 80 करोड़ लोगों को सस्ते दर पर राशन दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार देश के 80 करोड़ लोगों को हर महीने 7 किलो प्रति व्यक्ति राशन देगी, जोकि 3 महीने के लिए एडवांस होगा। वहीं जावड़ेकर ने मीडिया को बताया कि सरकार 80 करोड़ लोगों को 27 रुपए प्रति किलो वाला गेहूँ मात्र 2 रुपए प्रति किलोग्राम में और 37 रुपए किलोग्राम वाला चावल 3 रुपए प्रति किलोग्राम में देगी।

उन्होंने यह भी बताया कि इस पर 1 लाख 80 हजार करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। यह तीन महीने के लिए राज्यों को एडवांस में दिया जाएगा। इस दौरान जावड़ेकर ने कोरोना के बचाव के लिए लोगों से सामाजिक दूरी बनाए रखने की अपील की। साथ ही कहा कि किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। सरकार के पास पर्याप्त राशन का भंडार है। इसलिए किसी भी कीमत पर घरों से बाहन न निकलें साथ ही इस बीमारी से लड़ने के लिए कुछ भी काम करने से पहले हाथ धोना और बार-बार हाथ धोना। वहीं जावड़ेकर ने लॉकडाउन को सकारात्मक रूप से लेते हुए कहा कि आप लोगों के लिए परिवार के साथ समय बिताने का अच्छा मौका है और 21 दिनों तक घरों के अंदर ही रहे।

उन्होंने यह भी कहा कि आवश्यक सेवाओं जैसे दूध, पशुचारा राशन आदि की सभी दुकानें हर दिन खुली रहेंगी। इसलिए हमें दुकानों पर जाकर भीड़ करने की आवश्ययकता नहीं है। इस दौरान सभी लोग अपने बीच कम से कम 6 फुट का अंतर रखें। हमें डरने की नहीं बल्कि समझदारी से काम लेने की जरूरत है।

आपको बता दें कि कोरोना महामारी की चपेट में अब तक विश्व के 196 से अधिक देश आ चुके हैं। भारत में मरने वालों की संख्या 11, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 562 से अधिक हो गई है। इनमें से 41 मरीज ठीक हो चुके हैं। इन्ही आँकड़ों को देखते हुए भारत सरकार ने पूरे देश में 21 दिन यानी कि 14 अप्रैल तक के लिए लॉकडाउन घोषित कर दिया है। साथ ही मोदी ने लोगों से घरों में पहने की भी अपील की है उन्होंने कहा है कि अगर हम 21 दिन नहीं संभले तो हम 21 साल पीछे चले जाएँगे।

माँ शैलसुते के आशीर्वाद से संकट से बाहर निकलेगा देश: काशी के लोगों से बोले PM मोदी- दुनिया भर में 1 लाख लोग ठीक हो चुके हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (मार्च 24, 2020) को राष्ट्र के नाम अपने सम्बोधन में बड़ी घोषणा करते हुए पूरे देश में 21 दिनों के लिए सम्पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा की। अब पीएम मोदी ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी सम्बोधित किया है। जहाँ पूरे देश में कोरोना के अब तक 600 मामले आ चुके हैं, उत्तर प्रदेश में भी 35 मरीज मिले हैं। हालाँकि, पूरे देश में लगभग 40 ऐसे लोग भी हैं, जो कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद ठीक भी हो चुके हैं। पीएम मोदी ने कैबिनेट की बैठक भी आज ‘सोशल डिस्टन्सिंग’ का पालन करते हुए की, जहाँ सभी मंत्रियों के लिए थोड़ी-थोड़ी दूरी पर कुर्सियाँ रखी गई थीं।

पीएम मोदी ने कहा कि आज काबुल में गुरुद्वारे में हुए आतंकी हमले से मन काफी दुखी है। उन्होंने इस हमले में मारे गए सभी लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना जाते हुए अपने सम्बोधन की शुरुआत की। नवरात्री की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि पहले दिन माँ शैलपुत्री की पूजा की जाती है। माँ शैलपुत्री स्नेह, करुणा और ममता का स्वरूप हैं। उन्हें प्रकृति की देवी भी कहा जाता है। पीएम ने कहा कि आज देश जिस संकट के दौर से गुजर रहा है, उसमें हम सभी को माँ शैलसुते के आशीर्वाद की बहुत आवश्यकता है

प्रधानमंत्री ने वाराणसी की जनता से कहा कि आपका सांसद होने के नाते मुझे, ऐसे समय में आपके बीच होना चाहिए था। लेकिन आप यहाँ दिल्ली में जो गतिविधियाँ हो रही हैं, उससे भी परिचित हैं। पीएम मोदी ने कहा कि यहाँ की व्यस्तता के बावजूद वो वाराणसी के बारे में निरंतर अपने साथियों से अपडेट ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज कोरोनी के खिलाफ जो युद्ध पूरा देश लड़ रहा है, उसमें 21 दिन लगने वाले हैं। हमारा प्रयास है इसे 21 दिन में जीत लिया जाए। पीएम मोदी ने आगे कहा:

काशी का अनुभव शाश्वत, सनातन, समयातीत है। और इसलिए, आज लॉकडाउन की परिस्थिति में काशी देश को सिखा सकती है- संयम, समन्वय, संवेदनशीलता। काशी देश को सिखा सकती है- सहयोग, शांति, सहनशीलता। काशी देश को सिखा सकती है- साधना, सेवा, समाधान। संकट की इस घड़ी में, काशी सबका मार्गदर्शन कर सकती है, सबके लिए उदाहरण प्रस्तुत कर सकती है। देखिए इस बीमारी में जो बातें सामने आई हैं, उसमें सबसे बड़ी सच्चाई यही है कि ये बीमारी किसी में भेदभाव नहीं करती। ये समृद्ध देश पर भी कहर बरपाती है और गरीब के घर में भी कहर बरपाती है। कुछ लोग ऐसे हैं, जो अपने कानों से सुनते हैं, अपनी आँखों से देखते हैं और अपनी बुद्धि से समझते भी हैं। बस अमल नहीं करते हैं। ये एक प्रकार की दुर्योधन वृत्ति है।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दौरान काशी के लोगों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग भी की और उनके विभिन्न सवालों का जवाब दिया। पीएम मोदी ने बताया कि कोरोना से संक्रमित दुनिया में 1 लाख से अधिक लोग ठीक भी हो चुके हैं और भारत में भी दर्जनों लोग कोरोना के शिकंजे से बाहर निकले हैं।

पाक: कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़कर हुई 1000, लापरवाही पर इमरान सरकार को कोर्ट ने फटकारा

पाकिस्तान में सरकार की लापरवाही के कारण कोरोना का संक्रमण अब विकराल रूप लेने की कगार पर है। बुधवार तक वहाँ 1000 कोरोना संक्रमित केसों की पुष्टि हो गई है। इनमें से 413 मरीज अकेले सिंध प्रांत के हैं, जबकि 115 बलूचिस्तान के और 296 पंजाब के हैं। इसके अलावा खैबर पनख्तूख्वा से 78 और राजधानी इस्लाबाद से 16 मामले सामने आए हैं। देश में महामारी के कारण मरने वालों की संख्या अब तक 7 हो गई है जिसमें एक डॉक्टर भी शामिल है। अब इन्हीं हालातों में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदइंतजामी देखकर इमरान सरकार को लाहौर हाइकोर्ट ने फटकार लगा दी है।

दरअसल, हाई कोर्ट ने कहा कि इमरान सरकार पूरे मामले को लेकर गंभीर नहीं है। कोर्ट ने कहा कि सरकार ने ईरान से तीर्थयात्रियों को समय पर वापस लाने के लिए प्रयास नहीं किया। यही नहीं जो यात्री ईरान से लौटे उन्‍हें घर जाने दिया गया, जबकि उन्‍हें 14 दिन तक अलग-थलग रखने की जरूरत थी। हाई कोर्ट ने कहा कि ये ईरान से आए लोग अब देश में कोरोना वायरस के प्रसार के बड़े स्रोत बन गए हैं। कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि इस महाआपदा को सही तरीके से सँभालने को लेकर गंभीर नहीं है।

डॉन वेबसाइट का 3:15 बजे अपडेट हुआ स्क्रीनशॉट

यहाँ बता दें कि पाकिस्तान सरकार की लापरवाही के कारण वहाँ की हालत इस समय बेहद गंभीर बताई जा रही हैं। द डॉन में छपी एक खबर के मुताबिक यदि इस समय कोरोना पर लगाम नहीं लगाई गई तो जून तक संक्रमित लोगों की संख्या लाखों में हो सकती है। खबर में बताया गया है कि कोरोना वायरस पूरी दुनिया को तेजी से अपनी चपेट में ले रहा है। इसके साथ ही इससे लोगों में डर बैठ रहा है। मगर, अभी इसकी भयावह स्थिति आनी बाकी है। इसमें कहा गया है कि इससे निपटने के लिए पाकिस्‍तान को बड़े पैमाने पर एक्‍शन लेने की जरूरत है।

‘भय से मुक्त रहें, क्योंकि भय सबसे बड़ा पाप है’: कोरोना से जंग में जरूरी है स्वामी विवेकानंद का ‘प्लेग मैनिफेस्टो’ पढ़ना

ऐसा शायद पहली बार हुआ है जब पूरा विश्व किसी संक्रामक महामारी की चपेट में आया है। हालाँकि, कई बड़े देश अलग-अलग समय पर अकाल, प्लेग जैसे बड़े संकटों से गुजर चुके हैं। आज जब दुनिया कोरोना वायरस से उपजी बीमारी का सामना कर रही है, ऐसे में स्वामी विवेकानंद के 1899 के प्लेग घोषणा पत्र का जिक्र ज़रूरी हो जाता है।

मार्च, 1899 में जब कलकत्ता में प्लेग फैला था, तब स्वामी विवेकानंद ने प्लेग पीड़ितों की सेवा के लिए रामकृष्ण मिशन की एक समिति बनाई थी। उनके नेतृत्व में इस समिति में एक प्लेग घोषणा पत्र तैयार किया गया, ताकि स्वयंसेवकों के साथ आम जनता भी इससे अच्छी तरह परिचित हो सके कि किसी आपदा या महामारी के दौरान किन बातों पर किस तरह का संयम बरतने की आवश्यकता होती है। स्वामी विवेकांनंद का यह घोषणा पात्र (मैनिफेस्टो) हमें मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक रूप से समस्याओं से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है।

स्वामी विवेकानंद द्वारा जारी प्लेग मेनीफेस्टो (घोषणा पत्र) का मूल-पाठ

कलकत्ता के भाइयों,

  1. यदि आप प्रसन्न हों तो हमें भी प्रसन्नता का अनुभव होता है, और आपके दुःख में दुःख का। इसलिए इन कठिन विपरीत दिनों में हम आपके कल्याण के लिए प्रयास कर रहे हैं एवं अविराम प्रार्थना कर रहे हैं, आपको रोग से बचाने का तथा महामारी के भय से बचाने का।
  2. इस गंभीर रोग से – जिससे डरकर उच्च व नीच दोनों वर्ग के लोग, धनी और निर्धन नगर छोड़ कर भाग रहे हैं यदि हम पीड़ित हो जाते हैं और आपकी सेवा करते हुए विनष्ट हो जाते हैं तब भी हम अपने आप को भाग्यशाली समझेंगे क्योंकि आप सभी भगवान का स्वरूप हो। वह जो मिथ्याभिमान, अंध विश्वास या अज्ञानता से अन्यथा समझता है भगवान को आहत करता है और भयंकर पाप करता है। इस विषय में न्यूनतम संदेह नहीं है।
  3. हम आप से प्रार्थना करते हैं – निराधार भय के कारण संत्रास न करें। भगवान पर भरोसा करें और शांतिपूर्वक समस्या के समाधान का रास्ता खोजने का प्रयास करें। अन्यथा उन्हीं का साथ दें जो वैसा कर रहे हैं।
  4. डर कैसा ? प्लेग फैलने के कारण जो आतंक लोगों के दिलों में प्रवेश कर गया है उसका वास्तविक आधार नहीं है। प्रभु की इच्छा से जिस तरह का भयानक प्लेग अन्य स्थानों पर हुआ है वैसा कलकत्ता में नहीं है। सरकारी अधिकारी भी विशेषकर हमारे लिए मददगार साबित हुए हैं। फिर डर कैसा ?
  5. आइए, हम भय को त्यागें और भगवान के अनंत स्नेह पर विश्वास रखते हुए कमर कसें और कर्मक्षेत्र में उतरें। आइए हम शुद्ध और स्वच्छ जीवन जिएं। उसकी कृपा से रोग और महामारी का डर हवा में उड़न छू हो जायेगा।
  6. (क) हमेशा अपना घर, परिसर, कमरे, कपड़े, बिस्तर और नाली आदि स्वच्छ रखें।
    (ख) बासी और खराब हुआ भोजन न खाएं, इसके बजाय ताजा और पौष्टिक भोजन लें। निर्बल शरीर अधिक रोग प्रवण होता है।
    (ग) हमेशा मन प्रसन्न रखें। हर एक को एक बार मरना है। कायर मृत्यु की टीस से बार बार भुगतते हैं, केवल अपने मन के भय के कारण।
    (घ) डर उनको कभी नहीं छोड़ता जो अनैतिक साधनों से अपनी जीविका कमाते हैं या दूसरों को क्षति पहुंचाते हैं। इसलिए जब हम मृत्यु के बड़े भय के सामने हैं, हमें सब तरह के कदाचार से बचना है।
    (ङ) महामारी की अवधि में हम क्रोध और लोभ से विरत रहें – यद्यपि आप गृहस्थ हों।
    (च) अफवाहों पर ध्यान न दें।
    (छ) अंग्रेज सरकार किसी को जबरन टीका नहीं लागाएगी। केवल उन्हीं को टीका लगेगा जो तैयार हैं।
    (ज) पीड़ित रोगियों के इलाज में हमारे अस्पताल में हमारी परिचर्या और निगरानी में सभी पंथों, जातियों और महिलाओं के शील (पर्दा) का आदर करते हुए कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। धनिकों को भागने दीजिए! लेकिन हम गरीब हैं, हम गरीबों के दिल का दर्द समझते हैं। असहायों की सहायता ब्रह्मांड की मां स्वयं करती है। मां हमें विश्वास दिला रही है: डरो मत! डरो मत!

भगिनी निवेदिता और स्वामी विवेकानंद के अन्य मठवासी शिष्य ने कलकत्ता के लोगों की सेवा करने के लिए दिन रात मेहनत की। स्वामी विवेकानंद ने उनसे आग्रह किया – “भाई, यदि तुम्हारी सहायता के लिए कोई नहीं है, तो तुरंत बेलूर मठ में भगवान रामकृष्ण के सेवकों को सूचना भेजो। भौतिक रूप से जो संभव है ऐसी सहायता की कोई कमी नहीं होगी। माँ की कृपा से आर्थिक सहायता भी संभव होगी।”

प्लेग के दौरान स्वामी विवेकनंद ने बांग्ला भाषा में तैयार इस ‘प्लेग घोषणा पत्र’ को हिंदी में छपवाकर वितरित कराया था। इसका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागृत करना और रोगियों तक मदद पहुँचाना था। इस प्लेग मैनिफेस्टो में विवेकानंद ने कहा था- “भय से मुक्त रहें, क्योंकि भय सबसे बड़ा पाप है।”

(स्रोत : पूर्ण साहित्य / खण्ड 9/ लेख: गद्य एवं कविताएं। प्रबुद्ध भारत खण्ड 111; 1 मई 2006)

सड़क पर कोरोना संक्रमण के लिए चेकिंग: UP पुलिस लोगों को दे रही ग्लव्स व मास्क, गाड़ियों को कर रही सैनिटाइज

लोग लॉकडाउन का सख्ती से पालन करें और क़ानून तोड़ने वालों को सज़ा मिले, इसके लिए यूपी पुलिस तरह-तरह के क्रिएटिव आईडिया आजमा रही है। इससे पहले हमने देखा था कि कैसे इसका पालन न करने वालों और बेवजह सड़क पर भटकने वालों के हाथ में प्लाकार्ड थमा कर उनकी तस्वीरें क्लिक की जा रही है। इन प्लाकर्ड्स पर क़ानून तोड़ने वालों को कोरोना का दोस्त और समाज का दुश्मन बताया गया है। यूपी में कोरोना के अब तक 35 मामले सामने आ चुके हैं, इसीलिए पुलिस एहतियातन सख्त क़दम भी उठा रही है ताकि लोग इस खतरनाक वायरस के संक्रमण से बचें और घर में रहें। इधर, पुलिस ने मॉक-ड्रिल कर के भी अपने कर्मचारियों को लोगों के टेस्ट करने का प्रशिक्षण दिया।

लेकिन, साथ-साथ पुलिस अन्य तरीकों से भी लोगों का ख्याल रख रही है। पुलिस अनाउंसमेंट के लिए लाउडस्पीकर का प्रयोग कर रही है। नीचे संलग्न किए गए वीडियो में आप देख सकते हैं कि जैसे ही वो कार आई, पुलिस ने माइक से गाड़ी रोकने का निर्देश दिया ताकि अंदर के पैसेंजरों को चेक किया जा सके। जैसे ही लोग गाड़ी से उतरते हैं, पुलिस उनका टेम्परेचर चेक करती है। इसके लिए उन्हें एक निश्चित दूरी पर खड़ा किया जाता है और पुलिस अपने उपकरण से टेस्ट करती है।

इसके बाद लोगों को मास्क और ग्लब्स दिए जाते हैं और उन्हें पहनने को कहा जाता है। मामला संदिग्ध पाए जाने पर पुलिस उन्हें लेकर हॉस्पिटल जाती हैं। लेकिन हाँ, हॉस्पिटल ले जाने से पहले पुलिस स्प्रे मार कर गाड़ी को सैनिटाइज करना नहीं भूलती। ये है यूपी पुलिस। जहाँ एक तरफ वो अपराधियों को एनकाउंटर में मार गिराती है, वहीं दूसरी तरफ लोगों को संक्रमण से बचाने के लिए उनकी जाँच करती है और उन्हें ज़रूरी चीजें मुहैया कराती है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट निर्देश है कि लोगों को ज़रूरी चीजें उनके घर तक मुहैया कराई जाए ताकि उन्हें घर से बाहर निकल कर बाजार न जाना पड़े। उन्होंने कहा कि राज्य के स्टॉक में अनाज और सब्जियों या फलों व दूध की कमी नहीं है, इसीलिए जनता को पैनिक होने या घबरा कर अपने घर में स्टॉक जमा करने की आवश्यकता नहीं है। उत्तर प्रदेश के पुलिस व प्रशासन के इन क़दमों के कारण उनकी खूब वाहवाही हो रही है।

गुरुद्वारे पर IS का हमला: 27 की मौत, 6 घंटे की मुठभेड़ के बाद 4 आतंकी भी मार गिराए गए

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में सिखों को निशाना बनाकर भीषण आतंकी हमला किया गया। गुरुद्वारे को आतंकियों ने निशाना हुआ। सुबह के करीब 7:45 बजे हमला हुआ। उस वक्त वहॉं 150 श्रद्धालु मौजूद थे। हमले में 27 लोगों की मौत हो गई, जबकि आठ अन्य घायल हो गए।

सबसे पहले एक फिदायीन हमलावर ने खुद को उड़ा लिया। फिर उसके बंदूकधारी साथियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की। घटना की सूचना मिलते ही अफगान सुरक्षाबल एक्शन में आ गए। 6 घंटे की मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बलों ने 4 आतंकियों को मार गिराया। गुरुद्वारे में फँसे लोगों को रेस्क्यू कर लिया गया है। हमले की जिम्मेदारी आईएस ने ली है।

जानकारी के मुताबिक, हमले के वक़्त अरदास के लिए गुरुद्वारे में कई छोटे-छोटे बच्चे भी मौजूद थे। हमले के बाद हर तरफ चीख-पुकार मची हुई थी। सुरक्षाकर्मियों ने जब उन्हें बाहर निकाला, तब उनके चेहरे पर खौफ साफ दिखाई दे रहा था।

काबुल पुलिस ने कहा कि कम से कम 11 बच्चों को गुरुद्वारे से बचाया गया है। वहीं इस संबंध में सिख विधायक नरेंद्र सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि करीब 150 लोग गुरुद्वारे के अंदर प्रार्थना कर रहे थे, जब यह हमला हुआ। आंतरिक मंत्रालय के प्रवक्ता तारिक एरियन के हवाले से बताया गया कि अफगान सुरक्षा बलों ने अंदर फँसे कई लोगों को बचा लिया है।

मोहन सिंह ने अलजजीरा को बताया कि हमले के वक्त वे भी गुरुद्वारे में थे। पहले उन्होंने गोलियाँ चलने की आवाज सुनी तो खुद को टेबल के नीचे छिपा लिया। अचानक धमाका हुआ और छत का एक टुकड़ा उन पर आ गिरा, जिससे वे घायल हो गए। मंत्रालय ने हमले के बाद गुरुद्वारे की तस्वीरों को शेयर किया है। इनमें अफगान सुरक्षाबल द्वारा कई बच्चों को रेस्क्यू करते दिखाई पड़ रहे हैं।

गौरतलब है कि अफगानिस्तान में लंबे समय सिखों को व्यापक भेदभाव का सामना करना पड़ा है और कई बार आतंकवादियों ने भी उन्हें निशाना बनाया है। हालिया दिल्ली दंगों के बाद भी काबुल में सिखों की दुकान पर हमला हुआ था। अकाली दल के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने इस घटना का विडियो ट्विटर पर शेयर किया था। इसमें अधेड़ उम्र का सिख दुकानदार हाथ जोड़कर हताश खड़ा था और उसकी दुकान का सामान जमीन पर बिखरा था।

बता दें, अल्पसंख्यक सिखों पर यह पहला हमला नहीं है। पहले भी अफगानिस्तान में उन पर हमले होते आए हैं और डरकर वे भारत आने को मजबूर हुए हैं। 2018 में भी जलालाबाद में आत्मघाती हमला हुआ था जिसमें 13 सिख मारे गए थे। इस हमले की जिम्मेदारी भी इस्लामिक स्टेट ने ली थी। हमले से सिख समुदाय इतना डर गया था कि उन्होंने देश छोड़ने का फैसला कर लिया था। मौजूद जानकारी के मुताबिक, अफगानिस्तान में अब 300 से भी कम सिख परिवार बचे हैं। इनके पास दो ही गुरुद्वारा है। एक जलालाबाद और दूसरा काबुल में।