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कोरोना संकट के लिए अजीम प्रेमजी ने दिया ₹50000 करोड़? लोगों ने इसमें भी ढूँढ लिया हिंदू-मुस्लिम – Fact Check

कोरोना वायरस संकट के बीच शुक्रवार (मार्च 27, 2020) को सोशल मीडिया पर खबर उड़ी कि विप्रो के संस्थापक अजीम प्रेमजी ने बड़ी रकम चैरिटी के लिए दी है। दावा किया गया कि उन्होंने कोरोना महामारी के लिए 50 हजार करोड़ रुपए चैरिटी में दिए हैं। इसी बीच कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में भी ऐसी ही बात कही गई। सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर काफी खबरें फैलीं। सोशल मीडिया पर अजीम प्रेमजी की तारीफ की गई। इसके अलावा अजीम प्रेमजी के दान को लेकर लोग कुछ लोग धर्म के नाम पर राजनीति करने से भी बाज नहीं आए। अशोक स्वैन ने लिखा कि अभी तक ‘हिंदू’ अरबपति अंबानी और अडाणी ने दान क्यों नहीं दिया। इसके लिए इससे बेहतर समय और क्या हो सकता है?

अशोक स्वैन के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

सच क्या है? 

अजीम प्रेमजी ने 50 हजार करोड़ रुपए का दान किया है लेकिन क्या यह कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई के लिए दिया गया? उनकी कंपनी से जब इस वायरल दावे के बारे में पूछा गया तो जवाब ‘नहीं’ में था। CNBC-TV18 से बातचीत में विप्रो ने कहा, “यह ऐलान मार्च 2019 में हुआ था। आज ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई है।” करीब एक साल पहले मार्च 2019 में जब अजीम विप्रो के चेयरमैन थे, तो उन्होंने अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के लिए 52750 करोड़ रुपए दान किया था। उन्होंने विप्रो में अपनी हिस्सेदारी का 34 पर्सेंट दान करने का फैसला किया था। CNBC-TV18 पर यह खबर 14 मार्च 2019 को प्रकाशित हुई थी। प्रेमजी फाउंडेशन ने कहा कि प्रेमजी के दान का कुल मूल्य उस समय 1.45 लाख करोड़ रुपए था, जिसमें विप्रो का 67 प्रतिशत आर्थिक स्वामित्व शामिल था।

2019 में किए गए इस दान को लोग अभी फिर से रिपोर्ट कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर भी इसी लगभग एक साल पुरानी खबर को शेयर किया जा रहा है। अशोक स्वैन ने भी इसी एक साल पुरानी खबर को शेयर करके अंबानी और अडाणी पर निशाना साधा है। बता दें कि अपनी माँ के सामाजिक कार्यों एवं चैरिटेबल कामकाज से प्रेरित होकर प्रेमजी ने 2001 में अपनी दान यात्रा शुरू की थी। उन्होंने 875 करोड़ रुपए के साथ ‘द अजीम प्रेमजी फाउंडेशन’ की शुरुआत की थी।

इससे पहले 22 मार्च को प्रेमजी ने टि्वटर संदेश के जरिए देशवासियों से अपील की थी, “मैं आप सभी से कहना चाहता हूँ कि आप सभी सुरक्षित रहें। आप सभी एक्सपर्ट्स और सरकार के प्रयासों का सहयोग करें। हम सभी इस संकट (कोरोना) में फँसे हैं। आप अपने आप का, परिवार व दोस्तों का और आसपास के लोगों का ख्याल रखें।”

दूरदर्शन पर रामायण का पहला एपिसोड: वामपंथियों की गाली के बीच वेबसाइट क्रैश, गूगल-ट्विटर पर टॉप ट्रेंड

देश में जारी 21 दिनों के लॉकडाउन के बीच जनता की माँग पर दूरदर्शन ने शनिवार से रामायण और महाभारत को प्रसारित कर लोगों का मनोरंजन करने का फैसला किया। रामानंद सागर की ‘रामायण’ और बी आर चोपड़ा निर्देशित ‘महाभारत’ को भला कोई भूल सकता है! 80 के दशक के आखिर में इस सीरियल ने सफलता की जो इबारत लिखी, वह ऐतिहासिक साबित हुआ। टीवी की दुनिया में वैसा जादू फिर से दोहराया न जा सका। शनिवार को बेहद लोकप्रिय टीवी सीरियल ने दूरदर्शन पर वापसी की और रामायण का पहला एपिसोड आज सुबह 9 बजे प्रसारित किया गया।

गूगल टॉप सर्च

जैसे ही रामायण का पहला एपिसोड शुरू हुआ, लोगों ने गूगल पर रामानंद सागर की रामायण सर्च करना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से यह गूगल में टॉप सर्च में आ गया। दरअसल लोग यह जानने को काफी उत्सुक थे कि इसका प्रसारण कब शुरू होगा और वो इसे ऑनलाइन कैसे देख पाएँगे। इसके लिए लोग लगातार ऑनलाइन लिंक सर्च कर रहे थे।

ट्विटर ट्रेंड्स
ट्विटर ट्रेंड्स

बता दें कि सिर्फ गूगल पर ही नहीं, बल्कि सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर भी टॉप 10 ट्रेंड में रामायण, रामानंद सागर और दूरदर्शन से संबंधित चीजें ही शामिल रहीं।

उल्लेखनीय है कि रामानंद सागर की रामायण का प्रसारण साल 1987 में पहली बार दूरदर्शन पर हुआ था। वहीं बीआर चोपड़ा की महाभारत का प्रसारण भी साल 1988 में पहली बार दूरदर्शन पर हुआ था।  रामायण और महाभारत को लोग इतने चाव से देखते थे कि सड़कों पर एकदम सन्नाटा होता था। इन धार्मिक कार्यक्रमों के प्रसारण के वक्त बाहर सड़कों का माहौल एकदम कर्फ्यू की तरह ही होता था।

1987-88 में रामायण और महाभारत को लोग बड़े ही चाव से देखते थे। कहा जाता है कि उस दौर में अफसर से लेकर नेता तक किसी से मिलना तो क्या किसी का फोन भी उठाना पसंद नहीं करते थे। 78 एपिसोड वाले रामायण का प्रसारण जब होता था, तो देश की सड़कों और गलियों में कर्फ्यू जैसा सन्नाटा छा जाता था। भारत के तमाम शहरों और गाँवों में रामायण के टेलीकास्ट के समय लोग अगरबत्ती जलाकर बैठा करते थे। चप्पलें कमरे के बाहर उतार दी जाती थीं। 

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…जब इलाके में मास्क की कमी हुई तो सिलाई मशीन लेकर खुद मास्क बनाने जुट गईं BJP विधायक कमलेश

कोरोना की महामारी से पूरा विश्व जूझ रहा है। वहीं भारत में घोषित लॉकडाउन के बाद हर कोई कोरोना के खिलाफ जंग छेड़े हुए है। यही कारण है कि हर एक भारतीय नागरिक किसी न किसी तरह इस लड़ाई में भारत सरकार की मदद करना चाहता है। कोई अपने घरों में रहकर तो कोई अपनी जान की परवाह किए बिना घरों से बाहर निकलकर। कुछ ऐसा ही और दूसरों को भी प्रेरणा देने वाली तस्वीर देश के छोटे से राज्य हिमाचल प्रदेश से आई, जहाँ देश में घोषित लॉकडाउन के बीच मास्क की कमी होने पर हिमाचल की एक महिला विधायक घर में ही सिलाई मशीन लेकर मास्क बनाने में जुट गईं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील के बाद देश का हर एक नागरिक कोरोना के खिलाफ जंग लड़ने के लिए तैयार है। इसी का परिणाम हिमाचल प्रदेश में देखने को मिला। दरअसल हिमाचल प्रदेश के भोरंज विधानसभा से कमलेश कुमारी विधायक हैं, जोकि इन दिनों लॉकडाउन के बीच अपने घर पर ही सिलाई मशीन से लोगों के लिए मास्क बनाने में जुटी हुई हैं। कमलेश कुमारी बताती हैं कि लॉकडाउन की घोषणा के बाद हर कोई घर में सेनेटाइजर लाने के लिए और मुँह पर मास्क लगाने के लिए बाजारों में भीड़ लगाए हुए था। इसी बीच बाजार से मास्क समाप्त हो गए। मैंने देखा कि इलाके के अधिकांश लोग बिना मास्क लगाए ही घूम रहे थे।

कमलेश आगे बताती हैं कि जब वो मास्क के बिना लोगों को बाहर घूमते देखीं तो मन बनाया कि इनके लिए घर पर ही मास्क बनाएँगी और इसी के साथ वो अपने काम में जुट गईं। जैसे-जैसे वो मास्क बनाती गईं, वैसे-वैसे पास के पुलिस प्रशासन और क्षेत्र की जनता को बाँटती भी गईं। साथ ही महिला विधायक अपने प्रयासों से लोगों को सेनेटाइजर भी उपलब्ध करवा रही हैं। इसके बाद भी बहुत से लोगों के पास मास्क नहीं हैं, जिस पर विधायक ने समाजसेवियों और सामाजिक संस्थाओं से आह्वान किया कि वह सरकार की अपील का पालन करें और कोरोना के खिलाफ इस जंग में लोगों की हर संभव मदद करें। वहीं महिला विधायक को घर में लोगों के लिए मास्क बनाता देख बहुत से लोग प्रेरणा ले रहे हैं और अपने बचाव के लिए खुद ही मास्क बना रहे हैं।

भाजपा विधायक कमलेश कुमारी ने कहा कि एक भूल के कारण पूरा विश्व इस महामारी से जूझ रहा है। ऐसे समय में हमें सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए लॉकडाउन को दौरान अपने घरों में ही रहना चाहिए। इस समय यही सहयोग सबसे बड़ी देशभक्ति होगी। साथ ही इस महामारी से घबराकर भाग-दौड़ कर रहे लोगों से उन्होंने कहा कि वह धैर्य रखें और अफवाहों पर ध्यान न देकर पुलिस-प्रशासन का सहयोग करें। इतना ही नहीं महिला विधायक ने एक माह का वेतन भी राहत कोष को दिया है। आपको बता दें कि विधायक कमलेश कुमारी जिला परिषद सदस्य और पंचायत प्रधान भी रह चुकी हैं। 

कोरोना+ आदमी, परिवार में 32 लोग, 12 दिन तक मस्जिद में नमाज: संपर्क में आए हजारों लोग की खोज में प्रशासन

21 दिन के लॉकडाउन के बीच गुरुवार (मार्च 26, 2020) को जयपुर में एक नया कोरोना पॉजिटिव केस सामने आया। जिसके बाद शुक्रवार (मार्च 27, 2020) शाम से रामगंज इलाके में रहमानिया मस्जिद से एक किलोमीटर के दायरे में कर्फ्यू लगा दिया गया, क्योंकि वो वहाँ पर नमाज पढ़ने जाया करता था। इस संबंध में डीसीपी नार्थ डॉ राजीव पचार ने आदेश जारी किए। उन्होंने बताया कि शुक्रवार शाम सात थानों में कर्फ्यू लगा दिया गया है। जिसमें सुभाष चौक, रामगंज, कोतवाली, माणकचौक, ब्रह्मपुरी, नाहरगढ़ व गलता गेट इलाके शामिल हैं।

बता दें कि रामगंज में पॉजिटिव केस सामने आने के बाद जयपुर में संक्रमित लोगों का आँकड़ा 9 के करीब पहुँच गया, जबकि राज्य में लगभग 50 लोग संक्रमित पाए गए हैं। रामगंज से पीड़ित व्यक्ति की पत्नी व बच्चों सहित करीब 32 जनों को एक बस में बैठाकर आईशोलेट करने के लिए एसएमएस और प्रताप नगर के आरयूएचएस अस्पताल भेज दिया गया। रामगंज का रहने वाला यह 45 वर्षीय मरीज 12 मार्च को ओमान से भारत आया था। खाँसी व बुखार के लक्षण मिलने के बाद 24 मार्च को एसएमएस अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। जिसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद आइसोलेशन में शिफ्ट गिया गया।

रामगंज में इस केस सामने आने के बाद यहाँ आवाजाही बंद कर दी गई है। अब बड़ी चौपड़ से रामगंज की तरफ रास्ता बंद कर दिया गया है। पुलिस कमिश्नर आनंद श्रीवास्तव, अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर अजयपाल लांबा व डीसीपी डॉ राजीव पचार सहित जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुँचे। तब करीब तीन घंटे चली मीटिंग के बाद देर रात 12 बजे कर्फ्यू की घोषणा कर दी गई।

ओमान से लौटने के बाद सीएमएचओ और मेडिकल टीम ने इस व्यक्ति को क्वारंटाइन में रहने के लिए कहा था। लेकिन, वह न केवल परिजनों और खुद के बच्चों से मिलता रहा, बल्कि दोस्तों और रिश्तेदारों से भी मिला। यहाँ तक कि नमाज पढ़ने रहमानिया मस्जिद भी गया। यहाँ नमाज पढ़कर कई लोगों से मिला। लापरवाही का नतीजा यह हुआ कि गुरुवार को उसके कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद उसके संपर्क में आए 200 से ज्यादा लोग दहशत में आ गए। इसके अलावा पूरा प्रशासन और सरकार सकते में आ गई है कि परिवार के 32 लोग जिन हजारों लोगों से मिले, उन्हें कहाँ और कैसे ढूँढा जाए। 

पुलिस उन लोगों को ढूँढ़ने की पूरी कोशिश कर रही है, जो इस परिवार के 32 लोगों के संपर्क में आए थे। इसी बीच जयपुर में शुक्रवार को सामने आए एक 50 वर्षीय कोरोना मरीज ने खुद को ओमान से लौटा 45 वर्षीय कोरोना मरीज का दोस्त बताया है। उसने डॉक्टरों को बताया कि उसका दोस्त (ओमान से आए कोरोना पॉजिटिव) ने उसे बताया था कि उसकी जाँच हो चुकी है और वह पूरी तरह स्वस्थ है। इसलिए वो उससे मिलने चला गया। उसने बताया कि वो ओमान से आए कोरोना पॉजिटिव मरीज दोस्त से 3-4 बार मिला था, क्योंकि उसने कहा था कि वो बिल्कुल ठीक है, उसके रिपोर्ट नॉर्मल हैं।

इधर पुलिस कोरोना पॉजिटिव मरीज के मोबाइल की कॉल डिटेल व लोकेशन के आधार पर संपर्क में आने वाले व्यक्तियों के बारे में पता लगा रही है। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील भी की है कि अगर किसी व्यक्ति ने संक्रमित से मुलाकात की हो, तो प्रशासन को सूचना जरूर दे। इन दिनों कोरोना संक्रमण का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है, इसे रोकने के लिए सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है और बार-बार लोगों से अपील कर रही है कि वो घरों में रहें और विदेश से आने के बाद 14 दिन तक आइसोलेशन में रहें, लेकिन यहाँ पिछले 3 दिनों से लॉकडाउन होने के बाद भी नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही थी। लोग बेपरवाह होकर सड़कों पर निकल रहे थे। सब्जी सामान राशन की दुकानों पर भीड़ लगी हुई थी।

बहरहाल 45 साल के इस व्यक्ति ने चिकित्सा विभाग का आदेश न मानकर पूरे शहर को खतरे में डाल दिया। ओमान से लौटने के बाद व्यक्ति को क्वारैंटाइन होना था, लेकिन वह दोस्तों से मिलता रहा, मस्जिद जाकर नमाज पढ़ता रहा और शहर में घूमता रहा। उसने दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने के बाद वह बस से जयपुर आया था। अब पुलिस बस में यात्रा करने वाले अन्य यात्रियों की तलाश में जुटी है।

दिल्ली में लॉकडाउन के बाद भुखमरी के डर से पैदल ही पलायन को मजबूर लोग, देखें वीडियो

कोरोना संक्रमण के चलते लागू देशव्यापी लॉकडाउन के बाद भी लोगों का आवागमन पूरी तरह बाधित नहीं हो सका है। आज समाचार एजेंसी एएनआई ने एक वीडियो ट्वीट किया है जिसमें भारी संख्या में लोग दिल्ली-यूपी सीमा को गाजीपुर के पास क्रॉस करके, उत्तर प्रदेश में दाखिल होते देखे जा सकते हैं। जहाँ हैं वहीं बने रहने की, प्रधानमंत्री की अपील भी लोगों को रोक पाने में असफल हुई है।

ये पलायन कर रहे लोग भूखों मरने के डर से सैंकड़ों हजारों किलोमीटर पैदल चल कर भी अपने गाँव पहुँच जाना चाहते हैं। याद रहे कि महामारी से निपटने के लिए 24 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी ने पूरे देश में अगले 21 दिनों के लिए लॉकडाउन लगाने की घोषणा की थी। इसके साथ उन्होंने सभी को अपने-अपने घरों में बने रहने और घरों की सीमाओं को ही लक्ष्मण रेखा मानने का निर्देश दिया था। इसके अलावा दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने भी कहा है कि जो दिल्ली में हैं उन्हें कहीं भी जाने की जरूरत नहीं है, हमने आज 2 लाख लोगों तक खाने के पैकेट्स पहुँचाए हैं, और कल के लिए हमने 4 लाख फूड पैकेट्स का लक्ष्य रखा है।

केजरीवाल ने उन लोगों से भी वापस आने की अपील जो दिल्ली से अपने अपने गाँवों की तरफ पलायन कर रहे हैं। जानकारों के अनुसार लॉकडाउन ही कोरोना संक्रमण से लड़ने का सबसे प्रभावी उपाय है। लेकिन इस लॉकडाउन के दौरान भी बड़ी संख्या में लोगों का पैदल ही दिल्ली से अपने अपने जिलों के लिए चल देने का यह दृश्य न सिर्फ विचलित कर देने वाला है बल्कि कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के हमारे संकल्प को नुकसान पहुँचाने वाला हो सकता है।

याद रहे कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले से ही सभी प्रदेश के बाहर रह रहे सभी प्रदेश वासियों से वहीं बने रहने की अपील आकर चुके हैं। साथ ही योगी ने विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात कर प्रदेश के लोगों के लिए समुचित व्यवस्था करने का भी निवेदन किया है।

लिबरल ब्रीड को रामायण-महाभारत में दिख रहा हिंदुत्व और गुंडागर्दी, हिन्दूघृणा की उलटी में नहा रहे

कोरोना वायरस की कड़ी को तोड़ने के लिए देशभर में लॉकडाउन की घोषणा की गई है और लोगों से अपील की गई है कि 21 दिन की इस अवधि तक लोग अपने ही घरों में रहें और बाहर ना निकलें। ऐसे में विश्वभर के देशों में ऑनलाइन वीडियो स्ट्रीमिंग वेबसाइट्स से लेकर टीवी सीरीज लोगों को घर पर बैठकर अपना समय बिताने के लिए कई रोचक पहल कर रहे हैं।

ऐसे में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी शुक्रवार को पहल करते हुए स्पष्ट किया कि जनता की माँग पर दूरदर्शन में शनिवार (मार्च 28, 2020) से बीते हुए दौर के मशहूर रामायण सीरियल का प्रसारण होगा। इसका पहला एपिसोड कल सुबह 9 बजे और दूसरा कल ही रात 9 बजे दिखाया जाएगा। लेकिन इस एक फैसले ने हिन्दुफोबिया से ग्रसित कुछ ‘विचारकों’ को घर में बैठे बैठे अनावश्यक सरदर्द दे दिया है।

ट्विटर से लेकर तमाम सोशल मीडिया पर इस धारावाहिक के प्रसारण में भी केंद्र की दक्षिणपंथी सरकार के किसी छुपे हुए ‘एजेंडा’ को तलाशने का नैरेटिव जोर पकड़ता जा रहा है। कुछ लोगों का मानना है कि सरकार ने इस फैसले से कोरोना के कारण छवि को होने वाले नुकसान की भरपाई का जरिया बनाते हुए यह भी साबित करने का प्रयास किया है कि रामानंद सागर द्वारा निर्मित इस धारावाहिक के पीछे आरएसएस के हिंदुत्ववादी विचारधारा का प्रचार-प्रसार था। उल्लेखनीय है कि दूरदर्शन पर पहली बार रामायण सीरियल का प्रसारण 25 जनवरी, 1987 में शुरू हुआ और इसका आखिरी एपिसोड 31 जुलाई, 1988 को दिखाया गया था।

रामायण सीरियल के दोबारा प्रसारण से वैचारिक उलटी करने वालों में एक प्रमुख नाम है कॉन्ग्रेस राज में प्रसार भारती की पूर्व अध्यक्ष और 2006 में पद्म श्री से नवाजी जा चुकी मृणाल पांडे का। ट्विटर पर अक्सर मोदी सरकार विरोधी करतबों के कारण चर्चा में रहने वाली मृणाल पांडे ने केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर का ट्वीट शेयर करते हुए लिखा है- “Bwahahahaha…धन्य हो ! घर में नहीं खाना, पर्दे पर रामायना!” इसके साथ ही उन्होंने घंटी और हँसने की इमोजी के माध्यम से अपनी भवनाओं को सामने रखा है।

हालाँकि, मृणाल पांडे के ट्वीट के जवाब में प्रशांत पटेल उमराव ने निंदनीय जवाब देते हुए लिखा है- “रामायण के नाम पर रावण की बहन सूर्पनखा के पेट में मरोड़ उठना स्वाभाविक है।”

एक अन्य ट्वीट में जग्गी वासुदेव द्वारा ब्लॉक किए जाने को अपनी पहचान बताने वाले स्वघोषित इतिहासकार अद्वैद (@Advaidism) ने लिखा है- “नई बोतल में पुरानी शराब। 1980 के आखिर में रामायण एक अभियान था, जिसने हिंदुत्व को आरएसएस की शाखाओं से बाहर लाकर आम भारतीयों के मस्तिष्क में बिठाने में मदद की। लगता है केंद्र सरकार इस लॉकडाउन के कारण कुछ पिछड़ने का अनुमान लगा रही है और यह फैसला इसी की भरपाई के लिए लिया गया है।”

@hadiyashafin ने ट्वीट में लिखा है – “21 दिन के लॉकडाउन के कारण दूरदर्शन कल से रामायण सीरियल दिखाने जा रहा है। रामायण एक ऐसा सीरियल था, जिसने हिंदुत्व आंदोलन और भारत में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के बीज बोए थे। हिंदुत्व के गुंडे, जो अब कोरोना वायरस से थक चुके हैं, घर पर बैठ सकते हैं और अपनी नफरत को तरोताजा कर सकते हैं।”

@alokkirti1990 नाम के एक ट्विटर अकाउंट ने, जिसके बायो में “जय भीम, नमोबुद्धाय, जय संविधान, जय भारत” लिखा है, ने रामायण के प्रसारण से आहत होकर कटाक्ष करते हुए ट्वीट में लिखा है – “क्या दुनिया का सबसे बड़े सामाजिक संगठन आरएसएस कहीं कुछ सेवा करते हुए नजर आया है?” उनके इस ट्वीट के जवाब में कुछ लोगों ने उन्हें आरएसएस स्वयंसेवकों को, टोपी पहने हुए एक युवक को सेनीटाइजर देते हुए तस्वीर पोस्ट की है।

रामानंद सागर की रामायण का प्रसारण 25 जनवरी 1987 में शुरू हुआ था दूरदर्शन पर इसका आखिरी एपिसोड 31 जुलाई 1988 को देखने को मिला।

लॉकडाउन तोड़ने वाले 11,317 लोगों के खिलाफ 3710 FIR, 5732 गिरफ्तार, कालाबाजारी पर भी योगी सरकार ने लिया एक्शन

कोरोना महामारी से देश को बचाने के लिए घोषित किए गए 21 दिन के लॉकडाउन का उत्तर प्रदेश में पूरी सतर्कता के साथ पालन करवाने के प्रति राज्य प्रशासन अडिग नजर आ रहा है। राज्य सरकार की इस विषय पर मुस्तैदी से लॉकडाउन का पालन न करने वालों के विरुद्ध लगातार जारी कार्यवाहियों को देखा जा सकता है। प्रदेश के अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने शुक्रवार को प्रेस से बातचीत में बताया कि अबतक लॉकडाउन का पालन न करने वाले ऐसे 11,317 लोगों के खिलाफ 3710 एफआईआर दर्ज की गई है। वहीं 5732 लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है। लॉकडाउन के उल्लंघन करने वालों के अतिरिक्त प्रदेश में कालाबाजारी के खिलाफ भी 20 एफआईआर दर्ज की गई है।

याद रहे कि कल 26 मार्च को ही प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कालाबाजारी के खिलाफ कड़े एक्शन लेने की बात कही थी। बुधवार को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में उन्होंने लॉकडाउन से आम लोगों को मुश्किलों का सामना न करना पड़े इसलिए घर-घर सामान की डिलीवरी करवाने और कालाबाजारी, जमाखोरी करने वालों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत सख्त एक्शन लेने का निर्देश दिया था।

अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने आज शुक्रवार को अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस की। अवनीश अवस्थी ने कोरोना से लड़ाई में प्रदेश सरकार की तैयारियों को पर्याप्त बताया। और, यह भी बताया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री ने जहाँ एक तरफ दूसरे राज्यों में फँसे हुए प्रदेशवासियों से उन्हीं प्रदेशों में बने रहने की अपील की है, वहीं उनके लिए समुचित व्यवस्था करने के लिए भी देश के भिन्न-भिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बात कर निवेदन किया है। इसके अतिरिक्त 12 प्रदेशों के लिए प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों को नोडल अधिकारी भी बना दिया गया है जिससे इन 12 प्रदेशों में फँसे हुए उत्तर प्रदेश के लोगों को किसी प्रकार की असुविधा से बचाया जा सके।

इसके अलावा इस प्रेस कॉन्फ्रेन्स में धार्मिक स्थलों पर भीड़ न लगाने के लिए जारी दिशा-निर्देश, कम्युनिटी किचन शुरू करना, फूड पैकेट्स का वितरण आदि सरकारी पहलों की विस्तार से जानकारी दी गई। संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेन्स के दौरान मौजूद प्रदेश के प्रमुख सचिव कृषि देवेश चतुर्वेदी ने बताया कि इस 21 दिनों के लॉकडाउन के दौरान भी प्रदेश में उर्वरक की दुकानें खुली रहेंगीं, साथ ही हार्वेस्टर के लिए भी पास जारी किए जाएंगे। जिससे सावधानी रखते हुए फसल की कटाई का काम सुचारु ढंग से चलता रह सके।

इसके साथ ही योगी ने गायों के लिए बनाए गए आश्रय स्थलों, मुर्गी, बतख, मछलियों आदि के लिए चारे की व्यवस्था सुनिश्चित करने का आदेश दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार प्रदेश में एम्बुलेंस व्यवस्था को भी लॉकडाउन के मद्देनजर अलर्ट मोड पर रखा हुआ है जिससे अस्पताल जाने वाले मरीजों को कोई परेशानी न हो। साथ ही सरकारी अस्पतालों में ओपीडी सेवाओं को सिर्फ गर्भवती महिलाओं के लिए ही जारी रखा गया है। प्रदेश सरकार ने चिकित्सा इमरजेंसी के लिए अस्पताल जाने वालों को 108 नंबर पर फोन करने और गर्भवती महिला को जरूरत पड़ने पर 112 नंबर पर फोन कर एम्बुलेंस बुलाने की बात कही।

घर में क्वारंटाइन को मैंने घर जाने की अनुमति समझ ली: केरल IAS अफ़सर हुए सस्पेंड

कोरोना वायरस के संक्रमण की कड़ी को तोड़ने के लिए पूरा देश वर्तमान में लॉकडाउन है। ऐसे में एक जूनियर आईएएस अधिकारी बेहद मूर्खतापूर्ण बहाने के साथ नियमों का मजाक उड़ाते हुए एकांतवास यानी क्वारंटाइन से भाग निकला। कोरोना वायरस के संदिग्ध और केरल के आईएएस अधिकारी (सब कलेक्टर) अनुपम मिश्रा को निर्देशों का उलंघन करने के कारण निलंबित कर दिया गया है। उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले अनुपम मिश्रा ने बताया कि उन्होंने घर में क्वारंटाइन को अपने घर जाने की अनुमति समझ लिया था। लेकिन उनकी इस भूल को जिला प्रशासन ने मानने से साफ़ इनकार कर दिया है।

अनुपम मिश्रा के निलंबन की जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से दी गई है। अनुपम मिश्रा विदेश से हनीमून मना कर 19 मार्च को स्वदेश लौटे थे, जिसके बाद उनमें कोरोना के लक्षण मिलने के बाद उनको घर में ही क्वारंटाइन किया गया था। 21 मार्च को वो बिना किसी का सूचना दिए वहाँ से गायब हो गए थे।

अनुपम मिश्रा, 2016 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और हाल ही में केरल के कोल्लम में सब कलेक्टर का पदभार संभालने के लिए आए थे। उन्होंने अपने वरिष्ठों को सूचित किया कि वह अपनी पत्नी के साथ हनीमून पर सिंगापुर में थे, तब उन्हें वहाँ से लगभग 70 किलोमीटर दूर कोल्लम स्थित सरकारी आवास में आइसोलेशन में अलग-थलग रहने का निर्देश दिया गया था। लेकिन ऐसा करने की बजाए वह उस जगह से निकल गए और बाद में पता चला कि मिश्रा उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में स्थित अपने घर पहुँच गए हैं।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने अनुपम मिश्रा को कम से कम दो सप्ताह तक घर में रहने की सलाह दी थी, लेकिन वे बिना किसी को बताए वहाँ से लापता हो गए। उनके लापता होने की सूचना तब मिली जब स्वास्थ्य अधिकारी बृहस्पतिवार (मार्च 26, 2020) को उनके सरकारी आवास पर उनकी स्थिति के बारे में पूछताछ करने पहुँचे। बिना किसी को सूचना दिए क्वारंटाइन से लापता होने को लेकर उनके खिलाफ धारा 188, 269, 270, 271 के तहत मुकदमा भी दर्ज किया।

कोल्लम के जिला कलेक्टर बी अब्दुल नासर ने शुक्रवार (मार्च 27, 2020) को मीडिया से बात करते हुए बताया कि उनकी तरफ से स्पष्टीकरण दिया गया है कि जब उन्हें क्वारंटाइन रहने के लिए कहा गया था तो उन्होंने कानपुर अपने घर जाने की बात कही थी। नासर ने कहा कि यह प्रोटोकॉल का गंभीर उल्लंघन है और उन्होंने सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी है। उन्होंने कहा कि यह बड़ी भूल एक ऐसे व्यक्ति ने की है जिसे कि ऐसे समय में उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए था।

घरों से बाहर निकलो, भीड़ में छींक कर कोरोना फैलाओ, कहने वाला इन्फोसिस कर्मी मुजीब मोहम्मद हुआ गिरफ्तार

वैश्विक महामारी कोरोना से लड़ने के लिए जहाँ एक तरफ सारी दुनिया एक साथ खड़ी नजर आ रही है वहीं कुछ लोग इस मौके पर भी घृणात्मक विचार फैलाने से बाज नहीं आ रहे। इन्फोसिस में काम करने वाला मुजीब मोहम्मद नामक व्यक्ति ऐसे ही लोगों में शुमार है, जिसे आज पुलिस ने नफरत फैलाने वाले विचारों के आरोप में गिरफ्तार किया।

यह व्यक्ति कोरोना संक्रमण से मानवता की लड़ाई के इस वक्त में भी उलटे सीधे बयान देकर लोगों में नफरत फैलाने का काम कर रहा था। अंशुल सक्सेना ने एक ट्वीट के जरिए यह जानकारी दी। अंशुल ने अपने ट्वीट के जरिए बताया कि मुजीब मोहम्मद ने अपनी फेसबुक पोस्ट के माध्यम से लोगों से अपील की थी कि आओ घर से बाहर निकलो, कोरोना को फैलाने में हाथ मिलाएँ और पब्लिक के बीच मुँह खोल कर छींकें जिससे यह कोरोना वायरस और फ़ैल सके।

अंशुल के अलावा एक अन्य ट्विटर यूजर ने भी इस बारे में ट्वीट कर अंशुल सक्सेना के ट्वीट की पुष्टि की। इन ट्वीट्स पर अन्य ट्विटर यूजर्स की प्रतिक्रिया बेहद आक्रामक और गुस्से से भरी आ रही हैं। कुछ लोगों ने इसे जहाँ जिहाद का एक फॉर्म बताया, तो कुछ ने इसके जरिए मीडिया गैंग की पुअर हेडमास्टर संस थ्योरी को याद किया।

फाइंडिंग लाइफ नाम के इस ट्विटर यूजर ने लिखा कि बरखा दत्त को इसकी खबर देनी चाहिए, शायद इसकी भी कोई दर्दनाक स्टोरी हो इसके पास्ट से जुड़ी हुई जहाँ क्लास 5th में किसी क्लासमेट ने इसे पीटा हो या ऐसा कुछ।

याद रहे कि कोरोना वायरस को लेकर इस तरह की नफरत फैलाने वाली बात कहने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इसके पहले भी चरमपंथी इस्लामिस्ट्स राणा अयूब ने भी कोरोना के संबंध में पूरे देश को बद्दुआ देते हुए कहा था कि जो देश इतना नैतिक रूप से पतित हो चुका हो उसका कोरोना भी क्या करेगा? जिस पर मीडिया गैंग की भी तरफ से काफी तीखी प्रतिक्रिया आई थी। लेकिन बरखा दत्त की जिहादिनों ने जिसका समर्थन किया था।

लखनऊ से निकला, गलत बस में बैठा, नहीं मिली जब कोई मदद तो ‘हाथ गाड़ी’ के सहारे ही पहुँच गया जौनपुर

देश में लॉकडाउन के ऐलान के बाद दूसरे राज्य में फँसे लोग पैदल ही अपने घर की ओर निकल पड़े हैं। सोशल मीडिया पर इन लोगों की कई तस्वीरें वायरल हो रही हैं। इनके लिए प्रशासन से मदद माँगी जा रही है, ताकि इन्हें सही सलामत इनके घर पहुँचाया जा सके। मगर, इसी बीच एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है। जहाँ एक विकलांग युवक बिना किसी की मदद के अपने घर भी पहुँच गया, वो भी सिर्फ़ हाथ गाड़ी के सहारे। ये युवक गोखपुर से निकलकर गाजीपुर और फिर जौनपुर के मुफ्तीगंज इलाके पहुँचा। लेकिन, इस बीच किसी ने इसकी मदद नहीं की।

न्यूज 18 की खबर के अनुसार, ये युवक जौनपुर के मछलीशहर थाना क्षेत्र के देवरिया गाँव का निवासी है। जो लखनऊ की किसी सड़क पर पान गुटका बेचकर अपना और अपने परिवार का पेट पालता था। मगर, कोरोना के कारण लॉकडाउन का हल्ला सुनकर बस में बैठ गया, लेकिन वो बस जौनपुर न जाकर सीधे गोरखपुर चली गई। 

इसके बाद इस शख्स ने गोरखपुर से गाजीपुर की बस पकड़ी और फिर वहाँ पहुँचा। पर जब गाजीपुर से इसे कोई साधन नहीं मिला और न ही किसी ने उसे वहाँ कोई सहारा दिया। बस फिर क्या? अगले दिन वह गाजीपुर से बुधवार की सुबह-सुबह अपनी हाथ गाड़ी के सहारे अपने घर थाना मछली शहर के लिए निकल पड़ा और गुरुवार देर शाम जौनपुर पहुँच गया।

गौरतलब है कि इस समय दूसरे राज्यों में रहकर कमाने वाले लोग अपने गाँव, घर, शहर की ओर कूच कर चुके हैं। इन लोगों के लिए उत्तरप्रदेश में सीएम योगी ने मुख्य सचिव, अपर मुख्य सचिव गृह, पुलिस महानिदेशक, प्रमुख सचिव परिवहन तथा प्रमुख सचिव को निर्देश दिया है। जिसमें कहा गया है कि मानवीय आधार पर ऐसे व्यक्तियों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था की जाए और स्वास्थ्य संबंधी पूरी सावधानी बरतते हुए इन लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जाए।