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लॉकडाउन में झाड़-फूँक कर रही थी स्वयंभू देवी, पुलिस पहुॅंची तो तलवार निकाल कर खड़ी हो गई

पूरा विश्व कोरोना की महामारी से जूझ रहा है। इसका संक्रमण रोकने के लिए देश में 21 दिनों का लॉकडाउन है। इसके बाद भी कुछ अंधभक्त लॉकडाउन को नजरअंदाज कर खुद के साथ दूसरों की जान के लिए भी संकट पैदा कर रहे हैं। कुछ ऐसा ही मामला सामने आया है यूपी के देवरिया जिला से। यहाँ खुद को माँ काली का रूप बताने वाली महिला लॉकडाउन के बाद भी सैकड़ों लोगों का इलाज करने के बहाने झाड़-फूँक करने में लगी हुई थी। जब पुलिस पहुँची तो महिला तलवार लेकर खड़ी हो गई। इसके बाद पुलिस ने लाठी चार्ज कर मौजूद लोगों को खदेड़ा साथ ही महिला सहित 12 लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस के सामने तलवार लहराते हुई इस महिला का विडियो अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।

दरअसल पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा के बाद भी देवरिया क्षेत्र के मेहड़ा पुरवां गाँव में एक महिला बीते दिन अपने घर ही सैकड़ों लोगों की भीड़ को इकट्ठा कर झाड़-फूँक कर रही थी। जब इसकी जानकारी पुलिस को हुई तो तत्काल एसडीएम और सीओ फोर्स के साथ मौके पर पहुँच गए। पुलिस ने देखा कि सैकड़ों की संख्या में लोग महिला के घर के अंदर बैठे हुए हैं। पुलिस ने सभी से अपने-अपने घर जाने को कहा। इतना सुन खुद को माँ काली का रूप मानने वाली महिला लाल साड़ी पहने हाथ में तलवार लेकर पुलिस के सामने आकर खड़ी हो गई और पुलिस को जोर-जोर से ललकारने लगी।

महिला ने तलवार लहराते हुए पुलिस से कहा कि हिम्मत है तो मुझे हटाकर दिखाओ। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। पुलिस एक्शन को देख वहीं मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई। पुलिस ने लाठी भाँजते हुए भीड़ को खदेड़ दिया और महिला, उसके पति-बेटे समेत 12 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही मौके से एक तलवार, एम्पीफायर और साउण्डबॉक्स भी बरामद किया। इस मामले में गिरफ्तार महिला के पति शिव प्रसाद यादव शिक्षक हैं। उन्हें निलंबित कर दिया गया है। बीएसए प्रकाश नारायण श्रीवास्तव ने कहा कि पत्नी के साथ मिल कर आडम्बर फैलाने के आरोप में यह कार्रवाई की गई है।

बताया जा रहा है कि मेहड़ा पुरवा गाँव की रहने वाली सुभद्रा यादव खुद को माँ आदि शक्ति दुर्गा का रूप बताते हुए पिछले कई वर्षों से झाड़-फूँक का काम कर रहीं थी। उसके यहाँ आए दिन लोगों की भीड़ लगी रहती थी। इस काम में शिक्षक पति भी उसकी मदद करता था। इसी क्रम में बुधवार को भी लोगों की भीड़ महिला के घर में जमा थी। वहीं पुलिस ने आरोपित महिला और उसके पति सहित गिरफ्तार 12 लोगों के खिलाफ जानलेवा हमला समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक सभी को न्यायालय में पेश किया गया, जिसके बाद सभी को जेल भेज दिया गया है।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस के चलते देश में अब तक 13 मौत हो चुकी है। साथ ही इससे संक्रमित लोगों संख्या 649 हो गई है।

लॉकडाउन में दूरदर्शन पर लौटेगा रामायण और महाभारत का वो दौर!

80 और 90 के दशक में जीने वाले लोग जानते हैं रामायण और महाभारत का वो दौर! जब टीवी पर इनका प्रसारण शुरू होते ही सड़के खाली हो जाती थीं और लोग धर्म-मजहब से ऊपर उठकर इसे एक साथ बैठकर देखा करते थे। आज उस दौर की बातें एक बीता कल है। सब अपनी जिंदगी में व्यस्त हैं। मगर, कोरोना वायरस के कारण हुए 21 दिनों के लॉकडाउन से लोगों की जिंदगी में ठहराव आया है। ऐसे में इस बीच माँग उठी है कि दूरदर्शन पर रामायण और महाभारत को फिर से प्रसारित किया जाए। अब इन्हीं माँगों को देखते हुए इस पर विचार होना शुरू हो गया है।

खबर है कि रामायण और महाभारत को फिर से रिलीज करने की तैयारी की जा रही है। इस बात की पुष्टि भी हो गई है। दरअसल, बीते काफी दिनों से सोशल मीडिया पर लोग रामानंद सागर द्वारा बनाई गए रामायण और बीआर चोपड़ा के महाभारत को दोबारा टीवी पर प्रसारित करने की माँग कर रहे थे।

इसे देखते हुए बुधवार को प्रसार भारती के सीईओ शशि शेखर ने कहा कि लोगों की माँग को देखते हुए डीडी नेशनल पर इन धारावाहिकों के प्रसारण के लिए इनके राइट होल्डरों से बात की जा रही है। उन्होंने ट्वीट के जरिए इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने ये भी बताया कि अगर ऐसा होता है तो इनका प्रसारण दिन के अंत तक किया जाएगा।

बता दें कि एक दौर में रामायण और महाभारत को लेकर लोगों में ऐसा क्रेज था कि इनमें लीड किरदार निभाने वाले एक्टर्स को देखकर लोग अगरबत्ती जलाने लगते थे, उन्हें प्रणाम करने लगते थे। 78 एपिसोड वाले रामायण का जब प्रसारण टीवी पर शुरू होता था तब लोग काम-काज छोड़कर टीवी के सामने बैठ जाते थे। अगर ये शोज दोबारा प्रसारित हुए तो लोगों को वो पुराने दिन जरूर याद आ जाएँगे।

सऊदी से लौटी तबरेज की बहन से मोहल्ला क्लीनिक के डॉक्टर को कोरोना संक्रमण, मरीजों पर भी खतरा

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के एक मोहल्ला क्लीनिक के डॉक्टर को कोरोना पॉजिटिव पाया गया। बुधवार (मार्च 25, 2020) को स्वास्थ्य अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी। डॉक्टर के साथ उनकी पत्नी और बेटी में भी कोरोना संक्रमण के लक्षण पाए गए हैं। इसके बाद इन्हें भी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

दिल्ली सरकार द्वारा जारी एडवाइजरी में इसकी सूचना दी गई। इस एडवाइजरी में उन लोगों से क्वारेंटाइन होने के लिए कहा गया जो 12 मार्च से लेकर 18 मार्च तक डॉक्टर के संपर्क में आए। साथ ही ये भी कहा गया कि कोरोना के लक्षण दिखते ही वे डॉक्टर से संपर्क करें।

गौरतलब है कि इससे पहले डॉक्टर के सऊदी से लौटी महिला यानी दिल्ली के 10 वें केस के संपर्क में आने की बात सामने आई थी। इसके बाद ही डॉक्टर के वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। बताया जा रहा है कि इस डॉक्टर ने उस महिला मरीज का 12 मार्च से 17 मार्च तक इलाज किया था।

शाहदरा के सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) के एक आदेश में कहा गया है कि मौजपुरी के मोहनपुरी स्थित मोहल्ला क्लिनिक के डॉक्टर गोपाल झा कोरोना वायरस से संक्रमित हो गए हैं। इसलिए क्लीनिक बंद कर दिया गया है और उसे साफ किया जा रहा है। इस आदेश में 12 मार्च से 18 मार्च तक डॉक्टर के संपर्क में आने वाले लोगों को 15 दिन का क्वारेंटाइन पीरियड सख्ती से फॉलो करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही ये भी कहा गया है कि लक्षण दिखने पर वह कंट्रोल रूम में संपर्क करें।

उल्लेखनीय है कि जिस सऊदी से लौटी महिला के कारण मोहल्ला क्लीनिक के डॉक्टर, उनकी पत्नी, बेटी समेत कई लोगों पर ये आफत आ बनी है, वो दिल्ली में कोरोना का 10वाँ केस है। जानकारी के मुताबिक दुबई से लौटने के बाद ये महिला अपने भाई (तबरेज) और अम्मी से मिली। दोनों जहाँगीरपुरी इलाके में रहते हैं। महिला का भाई बहन से मिलने के बाद कोरोना से संक्रमित हुआ। वह सीएए विरोधी प्रदर्शनों में भी जाता रहा और इस तरह एक महिला की लापरवाही के कारण 400-450 लोग इस खतरे के घेरे में आ गए।

बता दें, ये पहला मामला नहीं है जहाँ किसी एक संक्रमित व्यक्ति की गलती के कारण किसी शहर में संक्रमण कम्यूनिटी के बीच फैलना शुरू हुआ हो। साउथ कोरिया के बिगड़े हालात के लिए वहाँ का 31वाँ केस जिम्मेदार था। उसके कारण 1000 से ज्यादा लोग संक्रमण की चपेट में आए और अब वहाँ 8,799 के करीब संक्रमित लोग हैं।

जामिया का प्रोफेसर अबरार सस्पेंड, CAA समर्थक 15 गैर मुस्लिम छात्रों को फेल करने का किया था दावा

जामिया मिलिया इस्लामिया ने असिस्टेंट प्रोफेसर अबरार अहमद को सस्पेंड कर दिया है। उसने नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन करने वाले 15 गैर मुस्लिम छात्रों को फेल करने का दावा किया था। अबरार ने एक ट्वीट में ऐसा करने का दावा किया था। यूनिवर्सिटी ने ट्वीट कर उसे सस्पेंड करने की जानकारी दी है। इसमें कहा गया है कि अबरार ने जो दावा किया है वो गंभीर और अस्वीकार्य है। इसलिए जाँच पूरी होने तक उसे निलंबित कर दिया गया है।

प्रोफेसर अबरार ने ट्वीट करते हुए लिखा था कि मेरे सभी विद्यार्थी पास हो गए, सिर्फ 15 गैर मुस्लिमों को छोड़कर, जो सीएए के समर्थन में थे या फिर सीएए का विरोध करने वालों के खिलाफ में थे।

जामिया के प्रोफेसर डॉ. अबरार द्वारा किए गए ट्वीट का स्क्रीन शॉट

इतना ही नहीं उसने अपनी कक्षा के 15 गैर-मुस्लिम छात्रों को धमकी दते हुए कहा था कि 55 छात्र उसके समर्थन में हैं। अगर उन्होंने सीएए विरोधी प्रदर्शनों का विरोध नहीं बंद किया तो 55 छात्र उन्हे दंगों के माध्यम से सबक सिखाएँगे। वहीं जामिया के एक सूत्र ने कहा कि प्रोफेसरों को गैर मुस्लिम छात्रों के रोल नंबर पता है इसलिए प्रोफसर को गैर-मुस्लिम छात्रों की पहचान करना आसान है। हालाँकि बाद में अबरार ने अपने ट्वीट पर सफाई देते हुए इसे मजाक बताया था।

जामिया के प्रोफेसर डॉ. अबरार द्वारा किए गए ट्वीट का स्क्रीन शॉट

अबरार ज़ाकिर नाइक का भी अनुयायी है। वो ट्विटर पर ज़ाकिर नाइक को फॉलो करता है और उसकी विचारधारा भी कट्टर इस्लामी है। वह इससे पहले भी हिन्दुओं को लेकर भद्दी और आपत्तिजनक टिप्पणी कर चुका है। अपनी एक ट्वीट में उसने कहा था कि अगर भारत हिन्दू राष्ट्र बन गया तो फिर यहाँ की महिलाओं का क्या होगा? उसने कहा था कि अधिकतर बलात्कार आरोपित वही हैं, जो हिन्दू राष्ट्र या फिर रामराज की बात करते हैं। इससे पता चलता है कि वो हिन्दुओं से किस कदर नफरत करता है। साथ ही उसने कोरोना वायरस को लेकर भी सरकार के दावों और मेडिकल जगत की सलाहों पर पानी फेरने की कोशिश की थी।

अबरार ने कहा था कि कोरोना वायरस या फिर इस प्रकार की बाकी चीजें अल्लाह की परीक्षा है। उसने दावा किया था कि कोरोना वायरस से डरे बगैर सभी को सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रखना चाहिए। यहाँ सवाल ये उठता है कि ऐसे व्यक्ति पर आज तक जामिया ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की, जब वो खुले रूप से सोशल मीडिया को माध्यम बना कर इस तरह की घृणास्पद बातें कर रहा है। एक ऐसा प्रोफेसर, जो कोरोना वायरस को ‘अल्लाह का इम्तिहान’ बताता है।

कश्मीर में ‘कोरोना बम’: विदेश से आए सैकड़ों चकमा दे घर पहुँचे, अब संक्रमण का बड़ा खतरा बने

चीन के वुहान से कोरोना वायरस का संक्रमण शुरू हुआ था। आज पूरी दुनिया इस महामारी के चपेट में है। भारत में भी तेजी से इसका संक्रमण बढ़ रहा है। प्रसार रोकने के लिए देश में 21 दिन का लॉकडाउन है। इस बीच, जम्मू-कश्मीर से हैरान करने वाली जानकारी सामने आ रही है। प्रशासन को 400 से ज्यादा लोगों के बारे शिकायत मिली है। इन पर विदेश यात्रा की हिस्ट्री छिपाने का आरोप है। ऐसे लोगों की लापरवाही की वजह से राज्य में बड़े स्तर पर संक्रमण का खतरा पैदा हो गया है।

बताया जाता है कि विदेश से लौटे ये कश्मीरी आइसोलेट होने से बचने के लिए चकमा देकर अपने घर पहुॅंचे। बाद में समाज के बीच खुलेआम घूमते रहे। उल्लेखनीय है कि घाटी में अब तक संक्रमण के आठ मामले सामने आ चुके हैं। संक्रमित मरीज या तो विदेश से लौटे हैं या फिर उनके संपर्क में रहे हैं। प्रशासन को मिली शिकायतों में से अब तक 200 वाजिब मिलीं हैं और विदेश यात्रा से लौटे 150 लोग क्वारेंटाइन में भेजे गए हैं।

ये कैसे घर पहुँचे? कुछ वाकए पढ़िए। सभी जम्मू-कश्मीर/श्रीनगर के हैं। एक शख्स इटली से लौटता है, मगर किसी दूसरी जगह से होते हुए पहले नई दिल्ली आता है, फिर वह दिल्ली से जम्मू आने के लिए ट्रेन पकड़ता है। इसके बाद रेलवे स्टेशन से घर आने के लिए कैब लेता है। अपने घर जाने के लिए इतना लंबा रूट वह सिर्फ़ इसलिए लेता है ताकि ट्रैवल हिस्ट्री छिपा सके और 14 दिन के क्वारेंटाइन पीरियड से बच सके। हालाँकि बाद में पुलिस उसे ट्रेस कर पकड़ लेती है।

इसी तरह एक और मामला है। दो भाइयों का। दोनों बांग्लादेश के एक ही मेडिकल कॉलेज में पढ़ते हैं। एक फ्लाइट से आता है और दूसरा सड़क के रास्ते। जो फ्लाइट से आता है वह चेकिंग स्टॉफ को अपनी ट्रैवल हिस्ट्री बताता है और क्वारेंटाइन कर दिया जाता है। मगर, दूसरा भाई सड़क का रास्ता पकड़कर सीधे घर पहुँच जाता है और घर की बनी मिठाइयों का स्वाद ले रहा होता है। इसी बीच किसी समझदार पड़ोसी को इसकी भनक लगती है और वह कंट्रोल रूम में कॉल कर देता है। कुछ देर में टीम पहुँचती है और उस शख्स में कोरोनावायरस के लक्षण दिखते हैं। आखिर में उसे आइसोलेट कर ही दिया जाता है। 

ऐसे केवल दो मामले नहीं हैं। ऐसे अनेकों मामले हैं जिनके कारण जम्मू-कश्मीर में पुलिस प्रशासन को दिक्कतों का सामना कर पड़ रहा है। सरकार गुहार लगा-लगाकर थक गई है कि समाज को खतरे से बचाएँ, कोरोना के लक्षण दिखते ही स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठाएँ। लेकिन नहीं, इंसानियत के दुश्मनों की बुद्धि में ये बातें समझ नहीं आती। मेडिकल का स्टूडेंट होने के बावजूद लोग ऐसी हरकतें कर रहे हैं, तो सोचिए जाहिलपना किस हद तक भीतर है।

इन्हीं जाहिलों से लड़ने के लिए श्रीनगर के डिप्टी कमिश्नर शाहिद चौधरी ट्वीट के जरिए विदेश यात्रा कर वापस अपने घर लौटने वाले और ट्रैवल हिस्ट्री छिपाने वाले कश्मीरियों को चेतावनी दे रहे हैं। रविवार को एक के बाद एक कई ट्वीट के जरिए शाहिद ये बताना चाह रहे थे कि लोग चाहे ट्रैवल हिस्ट्री छिपा लें, लेकिन प्रशासन की सतर्कता और लोगों की समझदारी से वे बच नहीं सकते।

कल रात की बात करें तो कंट्रोल रूम के ट्रेसिंग सिस्टम ने 400 प्राप्त शिकायतों में से 200 का सत्यापन किया और उनके सामने 150 ऐसे अघोषित लोगों के मामले सामने आए जो विदेश घूम कर लौटे, लेकिन किसी को भी इसका पता नहीं चला। अब फिलहाल इन सभी को कोरोंटाइन किया गया है। शाहिद चौधरी ने अपील किया है कि ऐसे लोग आगे आएँ और खुद रिपोर्ट करें। वरना ट्रेसिंग सिस्टम उन्हें ट्रैक कर ही लेगा।

रविवार को शाहीद चौधरी के एक ट्वीट से 4 लोगों के बारे में जानकारी सामने आई। ये दुबई और कजाकिस्तान की यात्रा कर लौटे, लेकिन प्रशासन को अपनी ट्रैवल हिस्ट्री बताना जरूरी नहीं समझा। हालाँकि उनका पता बाद में आईटी ने लगा लिया। लेकिन ऐसी हरकतों को देखकर डिप्टी कमिश्नर ने तंज कसते हुए कहा, “हे मेरे स्वास्थ्य संगठन के गाइडलाइन्स वाले दोस्तों, क्या आप मुझे प्रवचन जैसा कुछ भेज सकते हैं ताकि मैं ऐसे लोगों को समझा पाऊँ?”

हम यदि शाहिद चौधरी के ट्विटर हैंडल पर एक नजर डालें तो मालूम पड़ेगा कि प्रशासन ऐसे लोगों की बेवकूफियों के कारण कितना परेशान हो रहा। जो अपने ट्रैवल हिस्ट्री को छिपा रहे हैं उन्हें ट्रेस किया जा रहा है, जो अस्पताल से भाग रहे हैं उन्हें पकड़ा जा रहा है और ये काम एक दो बार नहीं लगातार हो रहा है।

शाहिद चौधरी के ट्विट्स का स्क्रीनशॉट

शाहिद लगातार ट्विटर पर निवेदन कर रहे हैं कि इस महामारी की गंभीरता को समझें। इस वायरस को फैलने से रोकने के लिए प्रशासन को सही जानकारी दें। अभी भी देरी नहीं हुई है। परिस्थितियों को देखते हुए उनका यहाँ तक कहना है कि डॉक्टर्स के मुताबिक हो सकता है कम्यूनिटि में मौजूद केस पॉजिटिव आए केसों से भी ज्यादा हों। इसलिए भगवान के लिए घर में रहें और ट्रैवल हिस्ट्री होने पर या लक्षण दिखते ही तय अस्पतालों में संपर्क करें।

चौधरी के मुताबिक उनके पास इस समय ऐसे संदेशों का ढेर लग गया है जिनमें उन लोगों की जानकारी दी गई है जो अपनी ट्रैवल हिस्ट्री को छिपाकर खुलेआम घूम रहे हैं। प्रशासन ने उन्हें चेतावनी दी है कि वे जिम्मेदार नागरिक का फर्ज निभाएँ और ध्यान रखें कि ये अपीलें निराधार नहीं हैं। कंट्रोल रूम और टीम भी इस समय मुश्किल समय से गुजर रही है।

हालाँकि, इस समय ये बात सब जानते हैं कि सरकार और पुलिस प्रशासन सिर्फ़ लोगों को इस महामारी से बचाने के लिए इतनी सख्ती दिखा रहा है। मगर फिर भी कुछ लोग ऐसे हैं जिनका मानना है कि ऐसे लोगों के बारे में सोशल मीडिया पर बात नहीं होनी चाहिए, उन्हें शर्मसार नहीं किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि जरूरी नहीं कि जिसने विदेशों में ट्रैवल किया हो, वो कोरोना पॉजिटिव हो ही।

कश्मीर में एयरपोर्ट से बिन स्क्रीनिंग कराए, अस्पताल से भागकर, ट्रैवल हिस्ट्री छिपाकर, घर में छिपने वालों की तादाद बढ़ती जा रही हैं। 23 मार्च को 65 लोगों को ट्रैक किया गया था। उससे पहले बैंकाक, यूके, दुबई, बांग्लादेश, कजाकिस्तान से आने वाले 29 लोगों के बारे में पता लगाया गया था जो रास्ता बदलकर या फिर ट्रैवल हिस्ट्री छिपाकर घरों तक पहुँचे थे।

इसके अलावा गुरुवार से शनिवार तक श्रीनगर लौटने वाले कुल 1166 लोगों को इस तरह ही 20 होटलों में क्वारेंटाइन किया गया है। कश्मीर में सुरक्षा बल हमेशा आतंकी खतरों से निपटने के लिए सतर्क रहते हैं। लोगों की आवाजाही का पता लगाने के लिए यहाँ इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग सिस्टम हैं। यह नेटवर्क उन लोगों से निपटने के लिए भी काम आ रहा है जो आइसोलेशन सेंटर से भाग रहे हैं। पिछले शनिवार को ही ऐसे 3 पीएचडी स्कॉलर्स जो बिना बताए क्वारेंटाइन सेंटर से गायब हो गए थे, उन्हें पकड़ लिया गया और एग्जामिनेशन के लिए हेल्थ सेंटर में डाल दिया गया। ये तीनों अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्र थे, जो 18 मार्च को ही यूएई से लौटे थे। इन्हें यूनिवर्सिटी में ही क्वारेंटाइन किया गया था, लेकिन ये भागकर कश्मीर आ गए। 

यहाँ बता दें  जम्मू-कश्मीर प्रशासन ट्रैवल हिस्ट्री छिपाने वाले यात्रियों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दे चुका है। लेकिन हालात सुधरते नहीं दिख रहे। सिर्फ प्रशासन के प्रयासों से क्या होगा, अगर जनता ही सहयोग नहीं करेगी। हाल ही में श्रीनगर एयरपोर्ट पर बांग्लादेश से आए कुछ मेडिकल स्टूडेंट्स ने जाँच का विरोध करते हुए तोड़फोड़ की थी। कश्मीर के डिविजनल कमिश्नर पीके पोल ने इस पर कहा था कि प्रक्रिया का उल्लंघन करने वालों को प्रशासन बर्दाश्त नहीं करेगा। जो भी शख्स नियमों का पालन नहीं करेगा, उस पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

शाहिद चौधरी का कहना है, “यकीन कीजिए अगर मैं रोज इस तरह के लोगों की जानकारी साझा करूँगा तो कश्मीर में कोई सो भी नहीं पाएगा। अपने अहंकार को एकतरफ रखें, समस्या को बढ़ाने की बजाय मिलजुल कर काम करें और एक-दूसरे की मदद करें। जो अभी चल रहा है वो तीसरे विश्वयुद्ध से कम नहीं है। यह खत्म हो जाए तो हम अपनी बाकी समस्याओं को आपस में निपटाते रहेंगे।”

लॉकडाउन में कोई भूखा न सोए: 1 करोड़ BJP कार्यकर्ता हर दिन 5 करोड़ गरीबों को खिलाएँगे खाना

कोरोना वायरस के संक्रमण का प्रसार रोकने के लिए देश में 21 दिनों का लॉकडाउन है। इससे उन लोगों के सामने रोटी का संकट पैदा हो गया है जो रोज कमाते और खाते हैं। इन्हें राहत पहुॅंचाने के लिए केंद्र से राज्य सरकारें तमाम कदम उठा रही हैं। इसी कड़ी में बीजेपी ने भी एक कैंपेन की घोषणा की है। महाभोजन अभियान का मकसद है कि लॉकडाउन के दौरान कोई भूखा न सोए।

इस अभियान के दौरान पार्टी के 1 करोड़ कार्यकर्ता हर रोज देश के 5 करोड़ गरीबों के भोजन का प्रबंध करेंगे। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इस संबंध में निर्देश दिए हैं। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने को भी कहा गया है। उल्लेखनीय है कि सोशल डिस्टेंसिंग कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई में सबसे बड़ा अस्त्र है।

बुधवार को बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक में निर्णय लेते हुए कहा कि गुरुवार से पूरे देश में 5 करोड़ गरीब लोगों को लॉकडाउन के दौरान भोजन कराया जाएगा। इसके लिए पार्टी के 1 करोड़ कार्यकर्ताओं को तैयार किया जाएगा। हरेक कार्यकर्ता पाँच लोगों के भोजन का प्रबंध करेगा। उन्होंने कहा कि यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि 21 दिनों तक देश के पाँच करोड़ गरीबों को आसानी से भोजन मिल सके।

24 मार्च को रात आठ बजे राष्ट्र के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के वुहान शहर से निकले घातक कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए पूरे भारत में 21 दिनों के लिए लॉकडाउन की घोषणा की थी। इस दौरान मोदी ने लोगों से अपील की थी कि वह 21 दिनों तक अपने घरों से बाहर न निकलें। भारत में कोरोना वायरस की चपेट में आने से अब तक 11 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 606 से अधिक हो गई है। पूरे विश्व में अब तक 20 हजार से अधिक लोगों की मौत कोरोना वायरस की चपेट में आने से हो चुकी है।

उद्दंडों को मुर्गा भी बना रही है, बेसहारा लोगों को भोजन, बुजुर्गों को दवा तक भी उपलब्ध करा रही है पुलिस

कोरोना के संक्रमण में एक ओर जहाँ कई लोग पुलिस की भूमिका को नकारात्मक रूप से दर्शाने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि वास्तविकता कुछ और ही कह रही है। ट्विटर पर लगभग हर बड़े-छोटे राज्य की पुलिस लॉकडाउन की सीमाओं का उल्लंघन करने वालों को दंड भी दे रहे हैं और वही पुलिसकर्मी लॉकडाउन के कारण हो रही समस्याओं से गुजर रहे लोगों के लिए मसीहा की भूमिका भी अदा कर रहे हैं। इसी का एक उदाहरण है उत्तराखंड पुलिस!

उत्तराखंड पुलिस ने ट्विटर पर कुछ तस्वीरें शेयर की हैं, जिनमें उन्हें भूखे लोगों के लिए भोजन का प्रबंध करते हुए देखा जा रहा है। उत्तराखंड पुलिस ने अपने आधिकारिक ट्विट्टर अकाउंट से ट्वीट में लिखा है- “घबराओ मत #UttarakhandPolice हैं ना। लॉकडाउन के दौरान असहायों एवं बेसहारा लोगों को हरिद्वार IRB के जवानों द्वारा सामूहिक किचन लगाकर खाना खिलाया जा रहा है।”

उत्तराखंड के हरिद्वार जिले में पुलिस ने बेसहारा और गरीब लोगों के लिए सामूहिक किचन की व्यवस्था की है जिसमें लॉकडाउन के दौरान गरीब और खाने के लिए जूझ रहे लोगों को खिलाने का प्रबंध किया गया है। उत्तराखंड पुलिस को शायद इसी कारण ‘मित्र पुलिस’ भी कहा जाता है।

वहीं, उत्तर प्रदेश में पुलिस ने एक ट्वीट के द्वारा बताया कि उन्होंने व्हाट्सएप के जरिए बुजुर्ग की दवा मँगवाकर उनके घर तक पहुँचाई। इसी के साथ जरूरतमंद लोगों के घरों तक किचन से सम्बंधित खाने की वस्तुएँ भी उपलब्ध करवा रही है। सोशल मीडिया पर देखा जा सकता है कि बंद के दौरान पंजाब पुलिस भी लोगों को भोजन आदि उपलब्ध करवाती देखी जा रही है।

पीएम मोदी द्वारा 21 दिनों के लिए लॉकडाउन की घोषणा करने के बाद से पुलिस और प्रशासन दोनों अनावश्यक सड़कों पर घूम रहे लोगों से सख्ती से निपटना शुरू कर दिया है, जिस कारण मीडिया का एक ख़ास वर्ग पुलिस की भूमिका पर संदेह खड़े करने का प्रयास भी कर रहा है। बेवजह घर से बाहर घूम रहे लोगों की फ़ौरन जाँच से लेकर उन पर दंडात्मक कार्रवाई के आदेश का भी पुलिस ने गंभीरता से पालन कर रही है।

मैं तो मजाक कर रहा था: आलोचना के बाद जामिया प्रोफेसर अबरार ने हिन्दू छात्रों को फेल करने वाली बात पर दी सफाई

हिन्दू छात्रों को फेल करने का दावा करने वाला जामिया मिल्लिया इस्लामिया का असिस्टेंट प्रोफेसर अबरार अहमद अब अपने ही बयान से पलट गया है। उसने अपनी ही ट्वीट्स को पैरोडी या मजाक बताया है। उसने इसे ‘सरकाज्म’ करार दिया है। उसे कहा कि वो तो मजाक कर रहा था। चारों तरफ से काफ़ी आलोचना होने के बाद उसने ऐसा किया। बकौल अबरार, वो हिन्दू छात्रों को फेल करने की बात कह के ये दिखाना चाह रहा था कि कैसे सरकार विभिन्न समुदायों के बीच भेदभाव कर रही है। सफाई देते हुए भी उसने सीएए के विरोध में बातें कही।

बता दें कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया के प्रोफेसर ने दावा किया था कि उसने उन नॉन-मुस्लिम छात्रों को परीक्षा में फेल कर दिया है, जो सीएए के पक्ष में थे या जो सीएए विरोधियों का विरोध कर रहे थे। जहाँ एक तरफ शिक्षकों से उम्मीद की जाती है कि वो बिना किसी भेदभाव के छात्रों को पढ़ाएँ और उन्हें एक अच्छा नागरिक बनाएँ, लेकिन प्रोफेसर अबरार अहमद लगातार सोशल मीडिया के माध्यम से सीएए समर्थक छात्रों को धमकी देने में लगा हुआ था। हाल ही में उसने ऐलान किया था कि परीक्षा में 15 सीएए समर्थक छात्रों को छोड़ कर बाकी सभी छात्र पास हैं। उसने सीएए के विरोध में उसके 55 छात्र होने का दावा किया।

हालाँकि, कई लोगों को शंका थी कि कॉपी चेक करते समय प्रोफेसरों को छात्रों की पहचान पता ही नहीं होती, ऐसे में वो कैसे किसी को पहचान कर जान-बूझकर पास या फेल कर सकते हैं? हमने जामिया के कुछ लोगों से बात की, जिन्होंने हमें बताया कि अटैंडेंस शीट प्रोफेसरों के पास ही होती है, इसीलिए उनके लिए ये पता लगाना कठिन नहीं है कि कौन सा रोल नंबर किस छात्र का है और कौन हिन्दू हैं और कौन मुस्लिम। अबरार अहमद ने भी ऐसा ही करने का दावा किया है। अबरार अहमद जामिया का असिस्टेंट प्रोफेसर है, जो बाटला हाउस क्षेत्र में रहता है। अबरार ज़ाकिर नाइक का भी अनुयायी है।’

अब वो अपने ही बयान से पलट गया है और आलोचना होने के बाद इसे मजाक बता रहा है। वो ट्विटर पर ज़ाकिर नाइक को फॉलो करता है और उसकी विचारधारा भी कट्टर इस्लामी है। वह इससे पहले भी हिन्दुओं को लेकर भद्दी और आपत्तिजनक टिप्पणी कर चुका है। अपनी एक ट्वीट में उसने कहा था कि अगर भारत हिन्दू राष्ट्र बन गया तो फिर यहाँ की महिलाओं का क्या होगा? उसने कहा था कि अधिकतर बलात्कार आरोपित वही हैं, जो हिन्दू राष्ट्र या फिर रामराज की बात करते हैं। इससे पता चलता है कि वो हिन्दुओं से किस कदर नफरत करता है।

कंटेजियन फिल्म में मेडिकल कन्सलटेंट रहे विषाणु विज्ञानी भी कोरोना से संक्रमित, कहा- अगर ये मुझे हो सकता है तो किसी को भी हो सकता है

हर देश में आम नागरिकों का एक बड़ा हिस्सा अभी भी ऐसा है, जो कोरोना वायरस के संक्रमण की क्षमता को गंभीरता से नहीं ले रहा है। जबकि विभिन्न देशों से ऐसे कई मामले सामने आ गए हैं, जिनमें देखा गया कि कई राजनीतिक हस्तियों से लेकर हॉलीवुड के कलाकार और नामचीन खिलाड़ी भी इस वायरस के संक्रमित पाए गए हैं।

कोरोना वायरस से संक्रमितों में ऐसा ही एक नया नाम सामने आया है। यह नाम है विषाणुओं की खोज में महारत हासिल करने वाले दुनिया के शीर्ष विशेषज्ञों में शामिल डॉ. डब्ल्यू इयान लिपकिन का! विषाणु विज्ञानी डॉ. लिपकिन भी कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं।

ख़ास बात यह है कि कोरोना वायरस के कारण एकबार फिर चर्चा में आई वर्ष 2011 में स्टीवन सोडरबर्ग के निर्देशन में बनी हॉलिवुड फिल्म ‘कंटेजियन’ (Contagion)में फिल्म निर्माण के दौरान मेडिकल सलाहकार यही डॉ. डब्ल्यू इयान लिपकिन ही थे। वायरस से संक्रमित पाए जाने के बाद उनका कहना है कि अगर यह मुझे हो सकता है तो फिर यह किसी को भी हो सकता है। डॉ. लिपकिन का कहना है कि वो ये नहीं जानते कि उन तक यह वायरस कब और कैसे पहुँचा लेकिन यह वायरस पूरे यूनाइटेड स्टेट में फ़ैल चुका है।

कोलंबिया यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ इन्फेक्शन एंड इम्यूनिटी में डायरेक्टर डॉ. लिपकिन ने हाल ही में एक टीवी को दिए इंटरव्यू में उन्होंने अपने संक्रमित होने का खुलासा किया।

उन्होंने कहा, “मैं इस शो पर आज रात कहना चाहूँगा, यह मेरे लिए बेहद पर्सनल भी है। क्योंकि मैं कोविड-19 से संक्रमित हूँ और यह बहुत तकलीफदेह है। मैं इस शो के जरिए एक संदेश देना चाहता हूँ कि अगर यह वायरस मेरे ऊपर हमला कर सकता है, तो यह किसी को भी संक्रमित करने में सक्षम है।”

डॉ. लिपकिन ने कहा कि इस वायरस को नियंत्रित करने का सिर्फ एक ही तरीका है कि नियमति तौर पर सामाजिक अलगाव (सोशल डिस्टेंसिंग) और आइसोलेशन (एकांतवास) अपना लिया जाए। उन्होंने कहा, “हम वास्तव में नहीं जानते कि इस वायरस को नियंत्रित करने में कितना समय लगेगा। दुनिया में राज्यों और शहरों के बीच कई छोटी-बड़ी सीमाएँ हैं, और जब तक हम अटल नहीं होते हैं, इस चीज़ से आगे नहीं बढ़ने वाले हैं।”

3 सप्ताह की देरी, 6 गायब लोग, 350 पर कार्रवाई और इटली-अमेरिका पर आरोप: चीन का सबसे बड़ा ‘कोरोना कवर-अप’

कोरोना वायरस के कारण पूरी दुनिया में कोहराम मचा हुआ है। अब तक इसके 3 लाख से भी अधिक मामले आ चुके हैं और 19,600 से भी अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इस सवाल का उठना जायज है कि आख़िर चीन ने शुरुआत में इसे कवर-अप क्यों किया? यहाँ तक कि ‘वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन’ की आँखों में भी धूल झोंका गया, जिसके बाद उसने भी इसे बड़ा ख़तरा नहीं माना। यहाँ हम इन्हीं चीजों पर बात करेंगे और जानेंगे कि कैसे चीन ने शुरुआती दिनों में इस वायरस के ख़तरों से दुनिया को अनजान रखा। एक अध्ययन के अनुसार, अगर चीन ने 3 सप्ताह पहले भी एक्शन लिया होता तो इस ख़तरे को 95% कम किया जा सकता था।

कब क्या हुआ? चीन के कवर-अप की टाइमलाइन

दिसंबर 10, 2019 को ही चीन में कोरोना का पहला मरीज बीमार पड़ने लगा था। इसके एक दिन बाद वुहान के अधिकारियों को बताया गया कि एक नया कोरोना वायरस आया है, जो लोगों को बीमार कर दे रहा है। वुहान सेन्ट्रल हॉस्पिटल के डायरेक्टर ने 30 दिसंबर को इस वायरस के बारे में वीचैट पर सूचना दी। उन्हें जम कर फटकार लगाई गई और आदेश दिया गया कि वो इस वायरस के बारे में किसी को कुछ भी सूचना न दें। इसी तरह डॉक्टर ली वेलिआंग ने भी इस बारे में सोशल मीडिया पर विचार साझा किए। उन्हें भी फटकार लगाई गई और बुला कर पूछताछ की गई। इसी दिन वुहान हेल्थ कमीशन ने एक ‘अजीब प्रकार के न्यूमोनिया’ के होने की जानकारी दी और ऐसे किसी भी मामले को सूचित करने को कहा।

इसके बाद 2020 के शुरूआती हफ्ते में 2 जनवरी को ही चीन के सूत्रों और वैज्ञानिकों ने इस कोरोना वायरस के जेनेटिक इनफार्मेशन के बारे में सब कुछ पता कर लिया था लेकिन इसे सार्वजनिक नहीं किया गया। एक सप्ताह तक इसे यूँ ही अटका कर रखा गया। जनवरी 11-17 तक वुहान में हेल्थ सेक्टर के अधिकारियों की बैठकें चलती रहीं। जनवरी 18 को नए साल के जश्न के दौरान हज़ारों-लाखों लोगों ने जुट कर सेलिब्रेट किया। इसके एक दिन बाद बीजिंग से विशेषज्ञों को वुहान भेजा गया। जनवरी 20 को दक्षिण कोरिया में कोरोना वायरस का पहला मामला सामने आया और उसी दिन चीन ने घोषणा की कि ये ह्यूमन टू ह्यूमन ट्रांसफर होने वाला वायरस है।

जनवरी 21 को चीन के सरकारी अख़बार ने इस बीमारी को लेकर राष्ट्रपति शी जिनपिंग के एक्शन प्लान के बारे में बताया। इसके 2 दिन बाद वुहान के कुछ शहरों में लॉकडाउन की घोषणा की गई। लेकिन, इन सबके बावजूद 24-30 जनवरी तक चीन में नए साल का जश्न मनाया गया, लोगों ने अपने सम्बन्धियों के यहाँ यात्राएँ की और सारे सेलिब्रेशन ऐसे ही चलते रहे। इसी बीच चीन लॉकडाउन का क्षेत्र भी बढ़ाता रहा और वुहान में इस वायरस से लड़ने के लिए एक नया अस्पताल तैयार किया गया। अब वही चीन ये दावे कर रहा है कि उसने इस आपदा को नियंत्रित कर के एक उदाहरण पेश किया है। वही चीन जो महीनों तक दुनिया की आँखों में धूल झोंकता रहा।

चीन की इस करनी से न सिर्फ़ उसे नुकसान हुआ बल्कि आज 100 से ज्यादा देश हलकान हैं। सेलिब्रेशनों की अनुमति देकर और जश्न पर रोक न लगा कर उसने लोगों की आवाजाही जारी रखी, जिससे इस वायरस के फैलने की रफ़्तार बढ़ गई। अगर सही समय पर इस पर लगाम लगाया गया होता तो आज पूरी दुनिया में तबाही का ये आलम नहीं देख रहे होते हम। इसके बावजूद कुछ लोग इस बात पर आपत्ति जता रहे हैं कि इसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ‘चाइनीज वायरस’ क्यों कहते हैं? ये वुहान से ऑरिजिनेट हुआ लेकिन WHO जानबूझ कर इसके नामकरण में वुहान या चीन जैसे शब्द नहीं लाया।

चीन का पुराना इतिहास: हमेशा से चीजों को ढकने में माहिर

चीन का ये सब करने का पुराना इतिहास रहा है। उसने 2003 में SARS वायरस (Severe acute respiratory syndrome) के सामने आने के बाद भी कुछ ऐसा ही किया था। अबकी कोरोना वायरस के सामने आने के बाद भी चीन ने एक्शन लिए लेकिन वायरस को रोकने के लिए नहीं बल्कि इसकी सूचना सार्वजनिक करने वालों के ख़िलाफ़। वायरस के सामने आने के 7 सप्ताह बाद कुछ शहरों को लॉकडाउन करना और इस वायरस को लेकर चीन द्वारा ऐसा जताना कि ये कोई छोटी-मोटी चीज है, दुनिया को भारी पड़ा। ख़ुद चीन के प्रशासन ने स्वीकार किया है कि लॉकडाउन से पहले ही क़रीब 50 लाख लोग वुहान छोड़ चुके थे।

2019 में लिखे एक लेख में ‘चाइनीज एक्सप्रेस’ ने SARS या फिर MERS की तरह कोई खतरनाक वायरस के सामने आने की शंका जताई थी और कहा था कि इसकी वजह चमगादड़ ही होंगे लेकिन बावजूद इसके लगातार लापरवाही बरती गई। उस लेख में ये भी कहा गया था कि ये वायरस चीन से ही आएगा। 2019 तो छोड़िए, 2007 में ही एक जर्नल में प्रकाशित हुए आर्टिकल में बताया गया था कि साउथ चीन में चमगादड़ जैसे जानवरों को खाने का प्रचलन सही नहीं है क्योंकि उनके अंदर खतरनाक किस्म के वायरस होते हैं। उस लेख में इस आदत को ‘टाइम बम’ की संज्ञा दी गई थी। चीन में जनता बड़े स्तर पर इससे प्रभावित हुई है लेकिन दोष वहाँ की सरकार व प्रशासन का है।

एक तो चीन ने इस वायरस के प्रसार को नहीं रोका और बाद में ‘उलटा चोर कोतवाल को डाँटे’ की तर्ज पर अमेरिका और इटली को दोष देने में भी देरी नहीं की। चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कई ऐसे लेख वायरल हुए, जिनमें दावा किया गया कि ये वायरस चीन नहीं बल्कि इटली से आया। इसके बाद तब हद हो गई जब चीन ने अमेरिकी सेना पर आरोप मढ़ दिया कि अमेरिका ही इस वायरस को चीन तक लाया है। एक तरह से एक प्रोपेगंडा कैम्पेन चलाया गया, ताकि किसी और को दोष दिया जा सके। चीनी मीडिया ने इटली के एक डॉक्टर का इंटरव्यू खूब चलाया और उसके आधार पर ही इटली को दोष देना तेज कर दिया।

उस डॉक्टर के बयान के आधार पर दावे किए गए कि इटली में बुजुर्गों में न्यूमोनिया की तरह कुछ फ़ैल रहा था, जो बताता है कि ये वायरस वुहान में पहली बार नहीं आया। इस लेख को चीनी सोशल मीडिया पर 50 करोड़ लोगों ने देखा और इसे ‘एक्सपर्ट की राय’ कह कर पेश किया गया। यानी चीन पूरी तरह उस थ्योरी पर चल रहा है कि किसी भी चीज को लेकर इतने अफवाह फैला दो कि लोगों को सच्चाई पता ही न चले। हज़ार ‘कांस्पीरेसी थ्योरी’ फैला कर एक सच्चाई को ढक दो। वुहान और इटली के बीच कई फ्लाइट्स चलते हैं, जिससे चीनी वायरस तेजी से यूरोप में फैला। आज स्थिति ये है कि इटली में 6000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं।

ट्रम्प द्वारा इसे ‘चाइनीज वायरस’ कहने से बौखलाए चीनी अधिकारियों ने इसे अमेरिकी सेना की साजिश करार दिया और कहा कि अमेरिका में इसे स्टोर कर के रखा गया था ताकि समय आने पर चीन को तबाह किया जा सके। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजान ने इसे अमरीका की साजिश करार दिया और पूछा कि अमेरिका में इससे कितने लोग प्रभावित हैं, वो डेटा सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है? उन्होंने उलटा अमेरिका से ही कहा कि वो चीन को सब कुछ एक्सप्लेन करे।

जिसने भी आवाज़ उठाई, उसे चुप करा दिया गया

चीन में 5-6 लोग ऐसे हैं जो कोरोना वायरस के बारे में सूचना सार्वजनिक करने या सवाल उठाने के बाद गायब हो गए या कर दिए गए। चीन के प्रोफेसर झु झिंग्रन ने इस बारे में बहुत कुछ बताया था। कुछ दिनों बाद उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया और सारे सोशल मीडिया वेबसाइट्स से उनके एकाउंट्स गायब हो गए। ऐसे ही एक वीडियो ब्लॉगर का कुछ अता-पता नहीं चला। इन सभी को कोरोना वायरस के बारे में सवाल पूछना या सूचना देने की सज़ा मिली। डॉक्टर ली वेलिआंग ने जब स्थानीय पुलिस को कोरोना के बारे में बताया, उलटा उन्हें ही चुप करा दिया गया। कोरोना वायरस के कारण ही उनकी मौत हो गई।

चीन में ख़बरों का कोई स्वतंत्र स्रोत नहीं है, सब कुछ सरकार द्वारा नियंत्रित किया जाता है। जब भी कोई ऐसी परिस्थिति आती है, चीन सभी सोशल मीडिया साइट्स और मीडिया की ख़बरों को खँगालने में तेज़ी कर देता है, ताकि कहीं कुछ ऐसा सार्वजनिक न हो जाए जो वहाँ की सरकार छिपाना चाहती हो। ‘ह्यूमन राइट्स डिफेंडर्स’ ने आँकड़ा गिनाते हुए बताया कि चीन के विभिन्न शहरों में 350 ऐसे लोग हैं, जिन्हें कोरोना के बारे में कुछ भी बोलने की सज़ा दी गई। एक युट्यूबर फांग ने कुछ लाशों के बारे में वीडियो बनाया था और उसे सार्वजनिक किया था, जिसके बाद उन्हें गायब कर दिया गया। उसके परिवार वाले कहते हैं कि ये सब कम्युनिस्ट पार्टी की करनी है।

कुल मिला कर बात ये है कि इसे चीनी वायरस कहना कोई रेसिज्म नहीं है। इसका अर्थ हुआ कि जिस जगह से ये वायरस पहली बार निकल कर आया, उस स्थान पर इसका नामकरण हो। ऊपर से जब चीन ने इसे ढकने की गलती करके दुनिया भर को परेशानी में डाला है तो फिर इसमें उन्हें क्यों दोष दिया जा रहा, जो इस वायरस के ऑरिजिनेट होने के स्थान के नाम पर इसे सम्बोधित कर रहे हैं? भारत-चीन की सीमा लगती है, भारत में कई लोग चीनी की तरह दिखते भी हैं और चीन से आवाजाही भी कम नहीं रही है। इसे ‘चीनी वायरस’ या ‘वुहान वायरस’ कहना ग़लत कैसे है, इसका किसी के पास कोई जवाब नहीं।