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हमले वाली रात से पहले भी सैफ अली खान के घर आ चुका था शहजाद, हिंदू पहचान से पुलिस को गुमराह कर रहा था ‘बांग्लादेशी’: नकाब से चेहरा छिपा फ्लैट में घुसा था

बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान पर हमला करने वाले ‘मोहम्मद शरीफुल इस्लाम शहजाद’ ने गिरफ्तारी के बाद कई खुलासे किए हैं। पूछताछ के दौरान पता चला कि शुरुआत में इस्लाम ने हिंदू नाम ‘बिजय दास’ बताकर पुलिस को बरगलाना चाहा जबकि उसका अन्य नाम मोहम्मद इलियास भी है। सबसे बड़ी बात न्यूज में ये बताई जा रही है कि वो घटना वाले दिन पहली बार सैफ के घर नहीं आया था, उससे पहले भी वो घर का दौरा कर चुका था। हालाँकि पुलिस का इस बिंदु पर अभी स्पष्ट बयान नहीं आया है।

सूत्रों के चलाई जा रही खबरों के अनुसार, आरोपित हाउसकीपिंग कंपनी में काम करने के दौरान घर पर आया था और 16 जनवरी को लूटपाट के इरादे से घर में घर में घुसा था। अपार्टमेंट में आने से पहले उसने देखा कि बिल्डिंग का सुरक्षाकर्मी सो रहा था। उसने मौके का फायदा उठाकर एंट्री ली और मुँह नकाब से ढककर ऊपर तक चढ़ता गया।

11वीं मंजिल पर पहुँचने के बाद उसने शाफ्ट का इस्तेमाल करके सैफ अली खान के फ्लैट में एंट्री की और बाद में बच्चों के कमरे से सटे बाथरूम में छिप गया।

खबरों के मुताबिक, हमलावर 5-6 महीने पहले मुंबई आया था और हाउसकीपिंग एजेंसी में काम करता था। उसका ठिकाना वर्ली में था, लेकिन घटना के लिए उसने ठाणे जाने के लिए ट्रेन ली थी। उसके बाद उसे कोई बाइक पर लेने आया था। अब पुलिस ने उसे अरेस्ट कर लिया है। उसकी गिरफ्तारी के बाद मुंबई पुलिस के डीसीपी दीक्षित गेडम ने बताया कि उन्होंने उसके विरुद्ध केस को दर्ज कर लिया है।

उन्होंने कहा, “मोहम्मद शरीफुल इस्लाम शहजाद ने सैफ के निवास स्थान पर लूट की नीयत से प्रवेश किया था। उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा। प्रथम दृश्टया में पता चलता है कि वो बांग्लादेश से है। उसके पास कोई भारतीय दस्तावेज नहीं है। उसने विजय दास के नाम से पहचान बताई हुई थी”

उल्लेखनीय है कि 16 जनवरी 2025 को सैफ अली खान के घर पर हमला करने के बाद शरीफुल इस्लाम 3 दिन से न्यूज देख देखकर लोकेशन बदलकर पुलिस को चकमा दे रहा था। आखिर में गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने ठाणे वेस्ट के हीरानंदानी एस्टेट के पास छापा मारा और वह टीसीएस कॉल सेंटर के पीछे चल रहे मेट्रो निर्माण स्थल पर लेबर कैंप में मिला। पुलिस ने उसे पकड़ने के बाद भारतीय पासपोर्ट अधिनियम के तहत उचित धाराएँ जोड़ी हैं।

बाइक से आए और फूँक दिया पाकिस्तान का सुरक्षा पोस्ट, फौजी को भी किया ढेर: बलूचिस्तान के तुरबत की घटना, बंधक बना हथियार-उपकरण छीने

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के केच जिले के तुरबत इलाके में शनिवार (18 जनवरी 2025) को हथियारबंद लड़ाकों ने पुलिस पोस्ट पर हमला किया और उसे आग के हवाले कर दिया। अधिकारियों के अनुसार, मोटरसाइकिल सवार लड़ाके तुरबत शहर के बाहरी इलाके में स्थित पुलिस पोस्ट पर पहुँचे और हमला किया।

हमलावरों ने पुलिसकर्मियों को बंदूक की नोक पर बंधक बना लिया और उनके सरकारी हथियार, वायरलेस रेडियो और अन्य उपकरण छीन लिए। इसके बाद पोस्ट को लूटकर पूरी तरह आग लगा दी। इस हमले की जिम्मेदारी बलोचिस्तान लिबरेशन फोर्स ने ली है। बीएलएफ ने 2 अन्य हमले भी किए, जिसमें 1 पाकिस्तानी फौजी मारा गया, तो कई घायल हो गए।

डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस अधिकारियों ने बताया, “पुलिस पोस्ट पूरी तरह जलकर खाक हो गई।” घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फ्रंटियर कॉर्प्स (एफसी) के जवान मौके पर पहुँचे, लेकिन तब तक हमलावर फरार हो चुके थे। गनीमत यह रही कि इस हमले में कोई भी पुलिसकर्मी घायल नहीं हुआ। सुरक्षाबलों ने इलाके में तलाशी अभियान शुरू कर दिया है और हमलावरों को पकड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। दो अन्य हमलों के बारे में पाकिस्तानी अखबारों, सुरक्षा बलों ने चुप्पी साध ली है, जिसमें पाकिस्तानी फौजियों को नुकसान पहुँचा है।

बीएलएफ ने ली हमलों की जिम्मेदारी, पाकिस्तानी फौजी भी ढेर

इस हमले की जिम्मेदारी बलोचिस्तान लिबरेशन फोर्स ली है। बीएलएफ ने बताया कि शुक्रवार और शनिवार को उसके लड़ाकों ने तीन हमले किए। पहले पहले में कई सुरक्षाकर्मी मारे भी गए। बीएलएफ के प्रवक्ता मेजर ग्वाहरम बलोच ने कहा, “इन हमलों में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को काफी नुकसान हुआ और हमने काफी हथियार भी जब्त किए हैं।” उन्होंने कहा कि बीएलएफ के लड़ाके पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के खिलाफ ऐसे अभियान जारी रखेंगे।

पहला हमला 17 जनवरी की दोपहर को बीएलएफ के स्नाइपर टैक्टिकल टीम ने जमुरान के चुर मुबारकी कोह इलाके में यहाँ, जिसमें पाकिस्तानी फौजी मारा गया। इस हमले के बाद ऑटोमेटिक हथियारों से फौजियों के मूवमेंट पर हमला किया, जिससे वो बिखर गए। इनसे में भी पाकिस्तानी फौजियों को नुकसान पहुँचा।

दूसरा हमला जमुरान इलाके के ही पगंजन इलाके में किया गया, जो मिलिटरी चेकप्वॉइंट था। इस हमले में 2 पाकिस्तानी फौजी घायल हुए और तीसरा हमला तुरबत के सिंगानी सार में किया गया, जिसमें बीएलएफ के लड़ाकों ने चौकी से हथियार उठा लिए और पूरी चौकी को आग के हवाले कर दिया।

तुरबत कहाँ हैं?

तुरबत पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रांत में है। ये बलोचिस्तान में क्वेटा के बाद सबसे बड़ा शहर है। तुरबत केच जिले में आता है, जो ईरान की सीमा से सटा है। ये पूरा इलाका ग्वादर के इलाके के आसपास ही है, जहाँ बलोच लड़ाके पाकिस्तानी सेना पर हमला करते रहे हैं। हमले की जगह तुरबत शहर के बाहरी इलाके में स्थित पुलिस पोस्ट थी, जो फिलहाल खाक में मिल चुकी है।

गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में भी तुरबत के उपनगरीय इलाके में एक बस को निशाना बनाकर किए गए विस्फोट में 47 लोगों की मौत हो गई थी और 32 लोग घायल हुए थे। इस हमले में अधिकतर पाकिस्तानी सेना के जवान थे। हमले की जिम्मेदारी बलोच राष्ट्रवादी संगठनों ने ली थी, जिन्हें पाकिस्तान आतंकवादी मानना है।

बंगाल के सियालदह में अवैध रूप से घुसे 3 रोहिंग्या मुसलमान, ₹20-20 हजार देकर बनवाए फर्जी दस्तावेज: दिल्ली और जम्मू-कश्मीर पहुँचने से पहले हुए गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल बांग्लादेशी और म्यांमार के रोहिंग्या घुसपैठियों का जंक्शन बन गया है। पुलिस ने कोलकाता के सियालदह रेलवे स्टेशन से तीन रोहिंग्या मुस्लिमों को गिरफ्तार किया है। ये तीनों अवैध रूप से घुसे हैं और वे जम्मू-कश्मीर या नई दिल्ली में अपने परिचितों के पास जा रहे थे। इसके पहले वे बांग्लादेश के शरणार्थी कैंप में रह रहे थे। भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने मामले की जाँच NIA से कराने की माँग की है।

गिरफ्तार लोगों में 2 महिलाएँ और एक पुरुष हैं। घुसपैठियों की पहचान नूर फातिमा, सबू पानेकर और अब्दुल रहमान के रूप में हुई है। दोनों महिलाओं की उम्र 18 साल से कम बताई जा रही है। दरअसल, सियालदह पुलिस स्टेशन के कर्मियों को स्टेशन परिसर में तीनों की गतिविधियों पर संदेह हुआ। इसके बाद उनके पहचान दस्तावेज माँगे तो उनकी असली पहचान उजागर हुई।

तीनों घुसपैठिए आपस में रिश्तेदार हैं और म्यांमार के रखाइन प्रांत के निवासी हैं। ये सभी बिना वीजा और वैध दस्तावेजों के अवैध रूप से भारत में घुसे हैं। उसने बताया कि पश्चिम बंगाल की एक खुली सीमा से से तीनों भारत में घुसे थे। इसके बाद वे शनिवार (18 जनवरी 2025) की सुबह ट्रेन से सियालदह स्टेशन पहुँचे थे और यहाँ से वे दिल्ली या जम्मू-कश्मीर जाने वाले थे। यहाँ उन्हें पकड़ लिया गया।

म्यांमार में हिंदुओं एवं बौद्धों के खिलाफ हिंसा करने वाले इस्लामी आतंकी समूहों के खिलाफ वहाँ की सेेना की कार्रवाई के बाद मुस्लिम वहाँ से भाग रहे हैं। इस दरम्यां ये तीनों भी भागकर बांग्लादेश के शरणार्थी शिविर में ठहरे। इसके बाद वहाँ एक एजेंट को प्रति व्यक्ति 20,000 देकर बिना दस्तावेज के अवैध रूप से भारत की सीमा में घुस आए।

जाँच अधिकारी पता कर रहे हैं कि वे भारत में किन संपर्कों के जरिए घुसे और किसके पास जाने वाले थे। पुलिस ने उनका भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि किनकी मदद से वे अवैध रूप से भारत की सीमा पार करने में कामयाब रहे थे। जाँच अधिकारी महिला तस्करी और आतंकवाद के ऐंगल से भी इस मामले की जाँच कर रही है।

भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने इस मामले में NIA जाँच की माँग की है। भाजपा ने सोशल मीडिया साइट X पर लिखा, “ये अवैध अप्रवासी पहले म्यांमार से भागकर बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में बालूखाली कैंप में रह रहे थे। वे किसी एजेंट को कुछ रकम देकर भारत में घुस आए। वे कोलकाता से नई दिल्ली जाकर बसने की योजना बना रहे थे। उन्होंने कैमरे पर स्वीकार किया है कि वे नई दिल्ली में बसे कई रोहिंग्याओं को जानते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, मैं दिल्ली के माननीय उपराज्यपाल से आग्रह करता हूँ कि वे वहाँ रोहिंग्याओं के बसने के मामले की जाँच NIA और दिल्ली पुलिस से करवाएँ कि पश्चिम बंगाल दिल्ली की ओर जाने वाले ऐसे लोगों के लिए सुरक्षित मार्ग कैसे बन गया है। ED को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के तहत अवैध भुगतान और प्राप्तियों के मामले की भी जाँच करनी चाहिए, जो इस तरह के अवैध सीमा अतिक्रमण को सुविधाजनक बना रहे हैं।”

सुवेंदु अधिकारी ने आगे कहा कि पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश सीमा पर 600 किलोमीटर के क्षेत्र में बाड़ नहीं लगाई गई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को ज़मीन उपलब्ध नहीं कराई है। उन्होंने एक सोशल मीडिया यूजर को जवाब देते हुए कहा, “ममता बनर्जी से पूछिए कि वह यहाँ 600 किलोमीटर क्षेत्र में बाड़ लगाने के लिए BSF को ज़मीन क्यों नहीं दे रही हैं।”

सैफ अली खान पर हमला करने वाला बांग्लादेशी, नाम ‘शरीफुल इस्लाम शहजाद’: ठाणे में झाड़ियों के बीच से पुलिस ने दबोचा, न्यूज देखकर बदल रहा था लोकेशन

बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान पर उनके बांद्रा स्थित घर में हमले के केस का बांग्लादेशी एंगल भी निकला है। मुंबई पुलिस ने हमलावर मोहम्मद शरीफुल इस्लाम शहजाद उर्फ विजय दास, उर्फ बीजे को ठाणे से गिरफ्तार किया है। मुंबई पुलिस ने मामले में गिरफ्तार आरोपित के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि वह बांग्लादेशी है और भारत में अवैध तरीके से घुसा था। आरोपित ने अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी नाम का इस्तेमाल किया। मुंबई पुलिस ने अब इस केस में पासपोर्ट एक्ट की धाराएँ भी जोड़ दी हैं।

मुंबई के डीसीपी जोन 9, दीक्षित गेडम ने बताया, “16 जनवरी की रात 2 बजे अभिनेता सैफ अली खान पर उनके बांद्रा स्थित घर में हमला हुआ। इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी और एक आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपित का नाम मोहम्मद शरीफुल इस्लाम शहजाद है और उसकी उम्र 30 वर्ष है। उसने चोरी के इरादे से घर में घुसपैठ की थी। आरोपित को कोर्ट में पेश किया जाएगा और उसकी रिमांड की माँग की जाएगी। मामले की आगे जाँच जारी है।”

डीसीपी दीक्षित गेडम ने आगे कहा, “प्रथम दृष्टया, आरोपित बांग्लादेशी है। उसने भारत में प्रवेश करने के बाद अपनी पहचान बदल ली थी। उसका असली नाम मोहम्मद शरीफुल इस्लाम शहजाद है। शुरुआत में उसने कुछ दिनों तक मुंबई में काम किया और फिर मुंबई के आसपास के इलाकों में चला गया। आरोपित हाउसकीपिंग एजेंसी में काम करता था।” मुंबई पुलिस ने इस मामले में पासपोर्ट एक्ट की धाराएँ जोड़ते हुए अपनी जाँच का दायरा बढ़ा दिया है।

पुलिस की शुरुआती जाँच में यह भी पता चला है कि आरोपित पिछले कुछ समय से अलग-अलग नामों का इस्तेमाल कर रहा था। गिरफ्तारी से पहले वह ठाणे के हीरानंदानी एस्टेट के पास बने लेबर कैंप की झाड़ियों में छिपा हुआ था। पुलिस ने वहाँ सर्च ऑपरेशन चलाकर उसे गिरफ्तार किया। सैफ पर हमला करके फरार होने के बाद से वह लगातार न्यूज चैनल देख रहा था और पुलिस एक्शन के हिसाब से लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था। पुलिस ने यह भी बताया कि आरोपित ने अपराध को अंजाम देने के लिए सैफ अली खान के अपार्टमेंट की इमरजेंसी सीढ़ियों का इस्तेमाल किया और दमकम विभाग की सीढ़ियों की तरह हल्की सीढ़ियों के बल पर वो अंदर घुसा।

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपित के पास से कोई पहचान पत्र, जैसे आधार कार्ड या वोटर आईडी, नहीं मिला। उसकी हरकतें एक साधारण मजदूर के बजाय एक शातिर अपराधी जैसी थी, तभी वो इतने समय तक मुंबई पुलिस को चमका देता रहा। उसे पकड़ने के क्रम में मुंबई से लेकर एमपी और छत्तीसगढ़ तक युवकों को पकड़ा गया। ऐसे में पुलिस अब इस एंगल से भी जाँच कर रही है कि क्या इस हमले के पीछे कोई बड़ी साजिश है।

बता दें कि सैफ अली खान पर गुरुवार (16 फरवरी 2025) सुबह मुंबई के बांद्रा स्थित उनके फ्लैट में चाकू से जानलेवा हमला किया गया था। 54 वर्षीय अभिनेता की गर्दन और रीढ़ पर कई वार किए गए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। तत्काल उन्हें लीलावती अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनकी इमरजेंसी सर्जरी की गई। डॉक्टरों ने बताया कि अब उनकी हालत स्थिर है और उन्हें आईसीयू से सामान्य वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। डॉक्टरों ने यह भी बताया कि सैफ अली खान जल्द ही चल-फिर सकते हैं और उन्हें तीन-चार दिनों में अस्पताल से छुट्टी मिलने की संभावना है।

सैफ अली खान पर अटैक मामले में 2 संदिग्ध हिरासत में… एक छत्तीसगढ़ के दुर्ग से, दूसरा MP से: CCTV फुटेज में ईयरफोन खरीदते दिखा था हमलावर

बॉलीवुड एक्टर सैफ अली खान पर हुए जानलेवा हमले के मामले में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से दो संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। छत्तीसगढ़ के दुर्ग में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने ग्यानेश्वरी एक्सप्रेस ट्रेन में एक संदिग्ध को पकड़ा। पुलिस द्वारा जारी सीसीटीवी फुटेज और तस्वीरों के आधार पर इस व्यक्ति की पहचान की गई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में आरपीएफ ने संदिग्ध को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर पकड़ा और फिर जीआरपी थाने में भेज दिया, जहाँ उससे पूछताछ की जा रही है। दूसरी ओर मध्य प्रदेश में मुंबई पुलिस ने स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर एक अन्य संदिग्ध को हिरासत में लिया। इन दोनों गिरफ्तारियों को लेकर पुलिस को उम्मीद है कि सैफ अली खान पर हुए हमले की गुत्थी जल्द ही सुलझाई जा सकेगी।

इस बीच, पुलिस को दादर स्थित एक मोबाइल शॉप से सीसीटीवी फुटेज मिला था, जिसमें एक संदिग्ध व्यक्ति ईयरफोन खरीदते हुए देखा गया। पुलिस के अनुसार, यह व्यक्ति हमले के बाद स्टेशन के पास देखा गया था। मुंबई पुलिस ने इस आधार पर रेलवे स्टेशनों की निगरानी बढ़ाई और अन्य राज्यों में भी सूचना साझा की। इस संदिग्ध की शक्ल छत्तीसगढ़ के दुर्ग में पकड़े गए व्यक्ति से मिलती जुलती दिख रही है।

मुंबई पुलिस की 35 से अधिक टीमें इस मामले की जाँच में जुटी हैं। अधिकारियों ने बताया कि हमलावर हमले के बाद कपड़े बदलकर भागने की कोशिश कर रहा था। सीसीटीवी फुटेज में उसे लकड़ी की छड़ी और हेक्सा ब्लेड के साथ देखा गया है। पुलिस ने फुटेज के आधार पर कई संदिग्धों से पूछताछ की और आखिरकार दो संदिग्धों को हिरासत में लेने में सफलता प्राप्त की। पुलिस ने बताया कि हमलावर ने हमले से पहले अभिनेता के फ्लैट की रेकी की थी और उसे सैफ के घर के बारे में पूरी जानकारी थी।

बता दें कि सैफ अली खान पर गुरुवार (16 फरवरी 2025) सुबह मुंबई के बांद्रा स्थित उनके फ्लैट में चाकू से जानलेवा हमला किया गया था। 54 वर्षीय अभिनेता की गर्दन और रीढ़ पर कई वार किए गए, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। तत्काल उन्हें लीलावती अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनकी इमरजेंसी सर्जरी की गई। डॉक्टरों ने बताया कि अब उनकी हालत स्थिर है और उन्हें आईसीयू से सामान्य वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। डॉक्टरों ने यह भी बताया कि सैफ अली खान जल्द ही चल-फिर सकते हैं और उन्हें तीन-चार दिनों में अस्पताल से छुट्टी मिलने की संभावना है।

सैफ अली खान पर हमले के बाद से हमलावर फरार था। जिसके बाद पुलिस ने हमलावर को पकड़ने के लिए 35 टीमें बनाई थी। इससे पहले, एक अन्य व्यक्ति को हमले के दूसरे ही दिन हिरासत में लिया गया था, लेकिन उसका सैफ के मामले से कोई लेना-देना नहीं निकला था।

फ्लाइट बुकिंग में 162% का उछाल, होटल कारोबार 3 गुना बढ़ा: प्रयागराज महाकुंभ आध्यात्मिक ही नहीं, कारोबार को भी कर रहा मजबूत; ₹4 लाख करोड़ के बिजनेस का अनुमान

प्रयागराज महाकुंभ 2025 में प्रशंसा हर तरफ हो रही है। कुंभ ना सिर्फ सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह अर्थव्यवस्था को भी निखारने का काम कर रहा है। महाकुंभ के आयोजन के दौरान भारत के कई व्यवसायिक क्षेत्रों में भारी उछाल देखने को मिला है। इनमें सबसे अधिक उछाल होटल इंडस्ट्री में देखने को मिल रहा है। इससे प्रयागराज के व्यवसायी काफी खुश हैं।

महाकुंभ मेले के कारण प्रयागराज के कारोबार में दो से तीन गुना तक की बढ़ोतरी हो गई है। होटलों में अगले कई दिनों तक कमरे खाली नहीं हैं। होटल के साथ-साथ खान-पान के सामान, स्थानीय उत्पाद, कंबल, ऊनी कपड़ों और इलेक्ट्रॉनिक सामानों की बिक्री में वृद्धि देखी जा रही है। प्रयागराज में फ्लाइट्स की बुकिंग में 162 प्रतिशत का उछाल देखने को मिल रहा है।

फ्लाइट्स के अलावा रेलवे, बसों, टैक्सियों आदि की कमाई में भी जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। ट्रेनों से लेकर बसों एवं टैक्सियों तक में लोग खचाखच भर करके कुंभ नहाने के लिए प्रयागराज पहुँच रहे हैं। छोटे-छोटे व्यवसाय करने वाले लोगों से लेकर होटल-रेस्टोरेंट और ऑनलाइन बुकिंग का काम करने वाली कंपनियाँ भी इस बूम से काफी खुश हैं। कुंभ खत्म होने तक यानी 45 दिनों में उन्हें भारी मुनाफा होने की उम्मीद है।

प्रयागराज होटल एंड रेस्टोरेंट वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह ने अमर उजाला को बताया कि श्रद्धालु और पर्यटकों द्वारा बुकिंग कराने के कारण होटल इंडस्ट्री को 30 से 40 फीसदी तक का मुनाफा हो रहा है। उनका मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुनाफा बढ़कर 50 प्रतिशत तक पहुँचने की उम्मीद है। थोक और खुदरा व्यापारी भी कुछ ऐसी ही उम्मीद कर रहे हैं।

कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र गोयल का मानना है कि महाकुंभ के अवसर पर सिर्फ होटल और टेंट सिटी का कारोबार 2,500 से लेकर 3,000 करोड़ रुपए तक का हो सकता है। केंद्रीय व्यापार मंडल के महामंत्री शिवशंकर सिंह का मानना है कि एफएमसीजी उत्पाद, ऑटोमोबाइल, सीसीटीवी कैमरा, केबल और खाने-पीने के सामान की बिक्री में भारी वृद्धि हुई है।

शिवशंकर सिंह का कहना है कि मकर संक्रांति के स्नान तक खुदरा व्यापार में भी 20 से 25 प्रतिशत वृद्धि देखने को मिली है। व्यापारियों को उम्मीद है कि कुंभ स्नान में विशेष स्थान रखने वाले मौनी अमावस्या पर यह बिक्री और भी अधिक बढ़ने की उम्मीद है। हस्तशिल्पी इस बार 35 करोड़ रुपए तक का कारोबार कर सकते हैं। व्यापार मंडल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष मोहम्मद कादिर का भी ऐसा ही मानना है।

मोहम्मद कादिर का कहना है कि महाकुंभ मेले के कारण प्रयागराज में खाद्य सामग्री, अनाज, पूजा सामग्री, कपड़े, कंबल, गद्दे, इलेक्ट्रॉनिक सामान, टेंट के कपड़े आदि के व्यापार में दोगुना की बढ़ोतरी हुई है। मोहम्मद कादिर का कहना है कि मेले में जैसे श्रद्धालुओं और पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी वैसे-वैसे वृद्धि में और भी अधिक वृद्धि होगी और व्यापारियों को फायदा होगा।

कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के अनुमान के मुताबिक, सिर्फ होटलों, धर्मशालाओं और टेंट से ही 40,000 करोड़ रुपए के व्यापार की संभावना है। पैक खाद्य सामग्री, पानी, बिस्किट, जूस, और भोजन से जुड़ा 20,000 करोड़ रुपया का कारोबार होगा। वहीं तेल, दीपक, गंगाजल, मूर्तियाँ, अगरबत्ती, धार्मिक पुस्तकों आदि की बिक्री से 20,000 करोड़ रुपए का व्यापार होगा।

इसी तरह परिवहन यानी रेलवे-टैक्सी आदि से 10,000 करोड़ रुपए का व्यवसाय होने का अनुमान है। टूर गाइड, ट्रैवल पैकेज और पर्यटक सेवाओं से 10,000 करोड़ रुपए का व्यापार अनुमानित है। वहीं, विज्ञापन और प्रचार गतिविधियों से 10,000 करोड़ रुपए के व्यापार का अनुमान है। स्थानीय उत्पादों, कपड़ों, गहनों और स्मृति चिन्हों से 5,000 करोड़ रुपए का व्यापार हो सकता है।

CAIT ने अनुमान लगाया है कि अस्थायी मेडिकल कैंप, आयुर्वेदिक उत्पाद और दवाइयों से 3,000 करोड़ रुपए का व्यापार होगा। इसी तरह डिजिटल भुगतान सेवा, वाई-फाई सेवा और ऑनलाइन टिकटिंग बुकिंग यानी ई-टिकटिंग से 1,000 करोड़ का व्यापार होने का अनुमान लगाया गया है। बता दें कि इस महाकुंभ में डाबर, मदर डेयरी और आईटीसी जैसे बड़े ब्रांडों ने 3,000 करोड़ रुपए खर्च किए हैं।

इस तरह 26 फरवरी तक चलने वाले 45 दिनों के इस महाकुंभ मेले में 2 लाख करोड़ रुपए का बिजनेस होने का अनुमान लगाया गया है। हालाँकि, इंडस्ट्री के जानकार इस व्यापार को 4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा बता रहे हैं। वहीं, सरकार का अनुमान है कि मेले से उसे 25,000 करोड़ रुपए का राजस्व मिल सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार ने कुंभ मेले में करीब 6,900 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। 

दरअसल, कुंभ मेले में दुनिया भर से 40 करोड़ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आने का अनुमान है। अगर हर पर्यटक औसतन 5000 रुपए खर्च करता है तो महाकुंभ से 2 लाख करोड़ रुपए का व्यापार हो सकता है। वहीं, इंडस्ट्री का अनुमान है कि मेले में औसतन प्रति व्यक्ति खर्च 10,000 रुपए हो तो यह आँकड़ा 4 लाख करोड़ रुपए को पार सकता है। इससे देश की जीडीपी एक फीसदी से भी अधिक बढ़ सकती है। 

मुसीबुल शेख ने ‘प्रदीप’ नाम से बनवाए फर्जी दस्तावेज, लिव-इन में रहने लगा हिंदू लड़की के साथ: खुफिया इनपुट पर सूरत पुलिस ने पकड़ा, पूछताछ में बोला- ‘निकाह’ का था इरादा

गुजरात के सूरत में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहाँ 26 वर्षीय मुसीबुल मकबूल शेख ने खुद को हिंदू प्रदीप क्षेत्रपाल बताकर एक हिंदू लड़की को प्रेमजाल में फंसाया। पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले के रहने वाले मुसीबुल ने सूरत में हिंदू इलाके में झूठी पहचान के सहारे एक मकान किराए पर लिया और नेपाली मूल की हिंदू लड़की के साथ लिव-इन में रहने लगा। यह साजिश तब खुली, सूरत पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) को उसकी फर्जी पहचान के बारे में गुप्त सूचना मिली।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मुसीबुल ने मोबाइल एप्लिकेशन की मदद से एक फर्जी आधार कार्ड तैयार किया था, जिसमें उसने अपना नाम प्रदीप सुजय क्षेत्रपाल बताया। यह सब उसने इसलिए किया क्योंकि मुस्लिम पहचान के कारण उसे हिंदू बहुल इलाके में मकान किराए पर नहीं मिल रहा था और उसे अपनी पहचान भी छिपानी थी। पुलिस जाँच में पता चला कि वह पिछले पाँच महीने से झूठे दस्तावेजों के सहारे हिंदू बनकर वहाँ रह रहा था।

जानकारी के मुताबिक, करीब डेढ़ साल पहले मुसीबुल ने मुंबई में एक हिंदू लड़की से मुलाकात की थी। देश गुजराती की रिपोर्ट के मुताबिक, लड़की नेपाली मूल की है। उसे फाँसने के लिए मुसीबुल ने खुद को प्रदीप बताकर लड़की का विश्वास जीता और उसे शादी और बेहतर जीवन का सपना दिखाया। लड़की उसके जाल में फंस गई और वह उसके साथ सूरत आ गई। मुसीबुल ने हिंदू इलाके में रहने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए और लड़की के साथ लिव-इन में रहने लगा।

पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि रांदेर इलाके में एक व्यक्ति झूठे दस्तावेजों के सहारे रह रहा है। इसके बाद SOG ने कार्रवाई करते हुए मुसीबुल को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि उसने हिंदू बनकर लड़की को धोखा दिया। पुलिस ने मुसीबुल के पास से दो आधार कार्ड, एक पैन कार्ड, एक आरसी बुक और ₹15,000 नकद बरामद किए हैं। मुसीबुल ने कबूल किया कि उसने यह साजिश सिर्फ इसलिए रची क्योंकि मुस्लिम पहचान के कारण उसे हिंदू इलाके में मकान नहीं मिल रहा था और वो जल्द ही ‘निकाह’ भी करने वाला था।

एएसआई जालूभाई मगनभाई की शिकायत पर एसओजी सूरत सिटी ने BNS की धाराओं 319, 336(2), 336(3) और 338 के तहत उस पर केस दर्ज किया है। पुलिस इस मामले को लव जिहाद के एंगल से जाँच रही है। अधिकारियों का मानना है कि मुसीबुल की इस साजिश में और भी लोग शामिल हो सकते हैं। पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि मुसीबुल का संपर्क किसी बड़े नेटवर्क से तो नहीं है। फिलहाल उसे रांदेर पुलिस को सौंप दिया गया है, जहाँ उससे आगे की पूछताछ की जा रही है।

कर्नाटक में 45% बढ़ा मेट्रो का किराया, पहले बस फेयर में हुआ था 15% इजाफा: लोगों ने कॉन्ग्रेस सरकार से पूछा- क्या यही आपका ‘खटाखट मॉडल’

कर्नाटक सरकार द्वारा फ्री बस यात्रा की रेवड़ी बाँटने के बीच अब आम जनता पर और बोझ डालने की तैयारी हो गई है। सरकार द्वारा फ्री यात्रा की सुविधा का ऐलान करने के बाद सरकार का खजाना खाली हो गया था और अब इसे भरने के लिए कर्नाटक सरकार ने जनता के परिवहन खर्च को बढ़ाने का कदम उठाया है। कर्नाटक में राज्य परिवहन निगम द्वारा बसों का किराया 15 प्रतिशत बढ़ाए जाने के बाद अब बेंगलुरु मेट्रो (Namma Metro) के किराए में भी 45 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की जाएगी। यह वृद्धि 20 जनवरी से लागू होने की संभावना है, जिससे मेट्रो में सफर करने वालों को बड़ा झटका लगेगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैंगलोर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMRCL) ने 17 जनवरी को अपनी बोर्ड मीटिंग में मेट्रो किराए में 45 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव मंजूर किया है। इस वृद्धि के तहत, मेट्रो का न्यूनतम किराया 10 रुपये से बढ़कर 15 रुपये हो जाएगा, जबकि अधिकतम किराया 60 रुपये से बढ़कर 85 रुपये हो जाएगा। इस वृद्धि का कारण मुख्य रूप से ऑपरेशनल खर्चों में बढ़ोतरी बताया जा रहा है। बिजली के खर्च और पुराने बुनियादी ढाँचे की मरम्मत में हो रही वृद्धि को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।

BMRCL अधिकारियों के अनुसार, नए किराए की घोषणा जल्दी ही की जाएगी और यह बढ़ोतरी 20 जनवरी से लागू हो सकती है। इसके अलावा स्मार्टकार्ड उपयोगकर्ताओं को 5 प्रतिशत की छूट दी जाएगी, जो मेट्रो यात्रा को थोड़ा सस्ता बनाए रखने में मदद करेगा। हालाँकि यह फैसला यात्रियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है, क्योंकि 45 प्रतिशत की वृद्धि एक बड़ा बदलाव है और इस कारण बेंगलुरु में मेट्रो के उपयोगकर्ता खर्च बढ़ने से परेशान हो सकते हैं।

इस फैसले का सोशल मीडिया पर विरोध भी हो रहा है। लोग कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार की मुफ्त की रेवड़ियों को लेकर तंज भी कस रहे हैं।

शिल्पा नाम की एक्स यूजन ने इसे ‘खटा खट कॉन्ग्रेस मॉडल’ करार दिया।

सिद्दाराम नाम के यूजर ने इसे कॉन्ग्रेस की कार्यप्रणाली करार दिया है। उन्होंने नम्मा मेट्रो के किराए की बढ़ोतरी को जनता के साथ धोखा कहा।

बसों में बढ़ाया गया था 15% किराया

इससे पहले, कर्नाटक सरकार ने 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी बसों के किराए में की थी, और इसके पीछे भी वही कारण थे – ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और कर्मचारियों के खर्च में वृद्धि। कर्नाटक के कानून और संसदीय मामलों के मंत्री एच.के. पाटिल ने बताया था कि इन बढ़ती लागतों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है, ताकि राज्य परिवहन निगमों की वित्तीय स्थिति को मजबूत किया जा सके। इन परिवहन सेवाओं में लगातार बढ़ती लागत के कारण राज्य सरकार को यह निर्णय लेना पड़ा। उन्होंने बताया कि ईंधन और कर्मचारियों के खर्च में बढ़ोतरी के कारण राज्य परिवहन निगमों को लगभग 74.84 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था, जिसे भरने के लिए यह कदम जरूरी था।

मेट्रो और बसों के किराए में बढ़ोतरी का यह कदम तब उठाया गया है, जब कर्नाटक सरकार ने अपने नागरिकों को मुफ्त बस यात्रा की सुविधा दी थी और अब इसे भरने के लिए आम आदमी को और अधिक खर्च उठाना पड़ रहा है। इस बढ़ोतरी का प्रभाव केवल मेट्रो और बसों के यात्रियों पर नहीं पड़ेगा, बल्कि बेंगलुरु शहर के ट्रैफिक और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था पर भी इसका असर देखने को मिलेगा। कई लोग पहले ही बढ़ते हुए किराए की वजह से मेट्रो और बसों के उपयोग में संकोच कर सकते हैं, जिससे निजी वाहन उपयोग में वृद्धि हो सकती है और इससे शहर में ट्रैफिक की समस्या और बढ़ सकती है।

PM मोदी के सुरक्षा चूक मामले में 25 लोगों की गिरफ्तारी तय, एक आरोपित की अग्रिम जमानत याचिका खारिज: फिरोजपुर कोर्ट ने बताया गंभीर मामला, प्रदर्शन की आड़ में फ्लाईओवर को किया था जाम

पंजाब के फिरोजपुर जिले की अदालत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा में 2022 में हुई चूक के मामले में बड़ा फैसला करते हुए एक प्रदर्शनकारी की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने इसे गंभीर मामला बताते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया। बता दें कि फिरोजपुर कोर्ट ने 25 लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था और पुलिस को आदेश दिया था कि वो सभी आरोपितों को 22 जनवरी 2025 तक कोर्ट में पेश करे, लेकिन गिरफ्तारी से बचने के लिए एक व्यक्ति ने अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीएम मोदी की सुरक्षा चूक मामले में फिरोजपुर के सेशन जज विरिन्दर अग्रवाल ने कथित प्रदर्शनकारी कमलजीत सिंह की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया है और पुलिस को आदेश दिया है कि वो सभी आरोपितों को गिरफ्तार करे। इस मामले में मुख्य आरोपित किसानों में से एक कमलजीत सिंह ने अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी, जिसे खारिज करते हुए अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा में इस प्रकार की चूक बेहद गंभीर मामला है और इसमें किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जा सकती।

अदालत ने पाया कि आरोपित कई बार समन और वारंट जारी होने के बावजूद पेश नहीं हुए। इसके बाद अदालत ने सभी आरोपितों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया और फिरोजपुर के कुलगढ़ी पुलिस स्टेशन के एसएचओ को निर्देश दिया कि वह आरोपितों को गिरफ्तार कर 22 जनवरी 2025 तक अदालत में पेश करें।

इस मामले में 3 जनवरी 2025 को गिरफ्तारी वारंट जारी किया। अदालत ने यह आदेश उस एफआईआर के आधार पर दिया, जो 6 जनवरी 2022 को इस घटना के संबंध में दर्ज की गई थी। शुरुआत में यह एफआईआर अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज की गई थी, लेकिन विशेष जाँच दल (एसआईटी) द्वारा की गई जाँच के बाद 25 किसानों की पहचान की गई। इन किसानों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास), 353 (सरकारी कर्मचारी पर हमला), 341 (गलत तरीके से रोकना), 186 (सरकारी काम में बाधा), 149 (गैरकानूनी सभा) और नेशनल हाईवे एक्ट की धारा 8-बी के तहत आरोप लगाए गए हैं।

बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी उस दिन हुसैनीवाला में शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए जा रहे थे। इसके साथ ही उन्हें पीजीआई फिरोजपुर के सैटेलाइट सेंटर का शिलान्यास भी करना था। लेकिन खराब मौसम और रैली में अपेक्षित भीड़ न होने के कारण उन्होंने हेलीकॉप्टर से यात्रा करने के बजाय सड़क मार्ग से जाने का फैसला किया। जब प्रधानमंत्री का काफिला फ्लाईओवर पर पहुँचा, तो भारतीय किसान यूनियन (क्रांतिकारी) और क्रांतिकारी पेंडू मजदूर यूनियन के प्रदर्शनकारियों ने सड़क को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया। इस अवरोध के कारण प्रधानमंत्री को अपनी यात्रा बीच में ही रोकनी पड़ी और उन्हें बठिंडा एयरपोर्ट लौटकर दिल्ली जाना पड़ा।

इस घटना के बाद सुरक्षा चूक को लेकर भारी विवाद हुआ। केंद्र सरकार ने इसे प्रधानमंत्री की सुरक्षा के प्रति गंभीर लापरवाही करार दिया। इस मामले की जाँच के लिए पंजाब पुलिस की एक विशेष जाँच दल का गठन किया गया। इस एसआईटी की अगुवाई फिरोजपुर के एसपी (इन्वेस्टिगेशन) कर रहे हैं। जाँच के दौरान कुल 26 लोगों की पहचान हुई थी, जिनमें से एक आरोपित, मेजर सिंह की मौत हो चुकी है। अब कुल 25 लोगों को इस मामले में आरोपित बनाया गया है।

इस घटना के बाद राज्य और केंद्र सरकारों के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए थे। विपक्ष ने इसे पंजाब सरकार की लापरवाही करार दिया था, जबकि पंजाब सरकार ने कहा था कि यह प्रदर्शन किसानों के आंदोलन का हिस्सा था। इस बीच, एसआईटी की जाँच में यह पाया गया कि प्रदर्शनकारियों ने योजना बनाकर फ्लाईओवर को जाम कर दिया था, जिससे प्रधानमंत्री के काफिले को वहाँ से गुजरने में मुश्किल हुई।

‘VHP की पुस्तकें विवादास्पद और संवेदनशील, अशांति फैलने का खतरा’: कोलकाता पुस्तक मेले में स्टॉल देने से इनकार, हाई कोर्ट पहुँचा विश्व हिंदू परिषद

पश्चिम बंगाल में आयोजित हो रहे 48वें अंतर्राष्ट्रीय कोलकाता पुस्तक मेले में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) को स्टॉल लागने की अनुमति नहीं दी गई है। इसको लेकर विहिप ने शुक्रवार (17 जनवरी) को कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इस हिंदू संगठन ने पिछले साल अक्टूबर में प्रकाशक और पुस्तक विक्रेता गिल्ड के पास एक स्टॉल के लिए आवेदन किया था।

अपने आवेदन में विश्व हिंदू परिषद ने कहा था कि वह कई वर्षों से पुस्तक मेले में भाग लेता रहा है और इस बार भी एक स्टॉल लगाना चाहता है। विहिप के आवेदन को ना ही स्वीकृत किया गया और ना ही खारिज किया गया। विहिप का कहना है कि उसके आवेदन को लंबित रखा गया। विहिप के बार-बार कहने के बावजूद प्रकाशक एवं पुस्तक विक्रेता गिल्ड की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।

प्रकाशक एवं पुस्तक विक्रेता गिल्ड अब दावा कर रहा है कि 28 जनवरी 2025 से 9 फरवरी 2025 तक आयोजित होने वाले पुस्तक मेले में स्टॉल के लिए विहिप द्वारा दिया गया आवेदन ‘निर्दिष्ट फॉर्म में नहीं है’। इसलिए उसके आवेदन को अस्वीकार कर दिया गया है। गिल्ड का यह भी आरोप है कि हिंदू अधिकार संगठन विहिप ने इस कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आवश्यक ‘शर्तों को पूरा नहीं किया’ है।

सुनवाई के दौरान गिल्ड की ओर से पेश वकील ने दावा किया, “विश्व हिंदू परिषद द्वारा प्रकाशित पुस्तकें संवेदनशील और विवादास्पद हैं। ये पुस्तकें अशांति फैला सकती हैं।” उन्होंने आगे कहा, “गिल्ड ऐसी कोई अशांति नहीं चाहता। इसलिए उसने इस साल के मेले में वीएचपी को कोई स्टॉल आवंटित नहीं करने का फैसला किया है।”

कलकत्ता हाई कोर्ट की जस्टिस अमृता सिन्हा ने पूछा, “क्या गिल्ड को पता है कि वीएचपी के पास उसके प्रकाशन हैं? गिल्ड ने पहले भी वीएचपी को स्टॉल आवंटित किए थे। अचानक ऐसा क्या हुआ कि गिल्ड को लगने लगा कि वीएचपी के प्रकाशन इतने संवेदनशील और विवादास्पद हैं कि वे परेशानी खड़ी कर सकते हैं?” इस पर अगली सुनवाई सोमवार (20 जनवरी) को होगी।