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50 क्विंटल फूलों से सजा राम मंदिर, 56 प्रकार के भोग लगे: अयोध्या में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के 1 साल पूरे, हुई 3 दिवसीय उत्सव की शुरुआत

अयोध्या में भगवान रामलला की स्थापना 22 जनवरी 2024 को हुई थी। हालाँकि, हिंदी पंचांग के आधार पर देखें तो आज शुक्रवार (11 जनवरी 2025) को प्राण प्रतिष्ठा के एक साल पूरे हो गए हैं। आज इसे प्रतिष्ठा द्वादशी उत्सव के रूप में मनाया जा रहा है। यह उत्सव तीन दिनों तक चलेगा। पिछले साल 22 जनवरी को जो मुहूर्त था, वही मुहूर्त 11 जनवरी को है।

प्राण प्रतिष्ठा द्वादशी उत्सव आज 11 जनवरी से शुरू होकर 13 जनवरी तक चलेगा। कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उपस्थित रहे और भगवान राम का पूजन किया। इसके अलावा, उत्सव में कई साधु संन्यासी भी शामिल हुए हैं। सीएम योगी ने राम मंदिर में रामलला की विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक और आरती की।

इस उत्सव में कई तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें रामलीला और भजन-कीर्तन शामिल है। इन आयोजनों में भारत की प्राचीन संस्कृति के दर्शन के साथ-साथ भारतीय लोक गीतों और लोक नृत्यों को भी शामिल किया गया है। इन सबके लिए स्थानीय प्रशासन की ओर से अयोध्या में बड़े स्तर पर तैयारियाँ की गई हैं।

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की ओर से बताया गया है, “प्रतिष्ठा द्वादशी के पावन पर्व पर आयोजित श्री राम राग सेवा के अंतर्गत आज लब्धप्रतिष्ठित श्रीमती ऊषा मंगेशकर, श्रीमती गौरी यादवाडकर तथा गायक श्री मयूरेश पई द्वारा प्रभु के समक्ष श्री राम भजन प्रस्तुत किए जाएँगे।”

राम मंदिर में आयोजित उत्सव को लेकर मंदिर परिसर को 50 क्विंटल फूलों से सजाया गया है। भगवान राम को 56 प्रकार के भोग लगाए गए और इस भोग को श्रद्धालुओं में वितरित किए जाने की बात कही जा रही है। इस दिन भगवान श्रीराम को सलोने रंग के वस्त्र पहनाए गए हैं, जिसमें सोने की आभा वाले हैं। मंदिर में दीपोत्सव को लेकर भी तैयारी की गई है।

फ्रिज में 6 महीने सड़ी पिंकी की लाश, बाल-बच्चेदार प्रेमी हत्या करके हुआ था फरार: गिरफ्तारी के बाद गुनाह कबूला, MP की घटना

मध्य प्रदेश के देवास में लिव इन रिलेशनशिप में रह रही एक लड़की की हत्या का मामला सामने आया है। मृतका का नाम पिंकी/प्रतिभा है। पुलिस ने इस मामले में पिंकी के शादीशुदा प्रेमी संजय पाटीदार को गिरफ्तार कर लिया है। संजय ने 6 माह पहले ही पिंकी को मारकर लाश फ्रिज में रख दी थी। हत्याकांड का खुलासा शुक्रवार (10 जनवरी 2025) को हुआ। हत्या की वजह मृतका द्वारा अपने शादीशुदा व 2 बच्चों के पिता प्रेमी पर शादी का दबाव बनाना बताया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना देवास के वृन्दावन धाम इलाके की है। यहाँ दुबई में रहने वाले धीरेन्द्र नाम के एक व्यापारी का 2 मंजिला मकान है। जुलाई 2024 में इस मकान के ग्राउंड फ्लोर को बलवीर नाम के व्यक्ति ने किराए पर लिया था। इस फ्लोर के 2 कमरों को बलवीर प्रयोग इसलिए नहीं कर पा रहे थे क्योंकि उसमें पुराने किराएदार ने अपना सामान रख रखा था। काफी दिन तक किरायेदार के न आने पर मकान मालिक की सहमति से गुरुवार (9 जनवरी) को ताले को तोड़ा गया।

बलवीर ने पाया कि लम्बे समय से पुराने किराएदार ने अपने फ्रिज को ऑन ही रखा था। उन्होंने फ्रिज को बंद कर दिया। अगले दिन शुक्रवार को फ्रिज के अंदर से तेज बदबू उठने लगी। किसी अनहोनी की आशंका में पुलिस को फोन किया गया। पुलिस की मौजूदगी में फ्रिज को खोला गया तो अंदर चादर से लिपटी एक महिला की लाश निकली। लाश काफी हद तक सड़ चुकी थी। मृतका की पहचान पिंकी उर्फ़ प्रतिभा प्रजापति के तौर पर हुई। पुलिस ने केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी।

जाँच में पता चला कि बलवीर से पहले धीरेन्द्र के मकान में संजय पाटीदार अपनी प्रेमिका प्रतिभा के साथ लिव इन रिलेशनशिप में पिछले 5 वर्षों से रह रहा था। इस से पहले दोनों 3 साल तक उज्जैन में एक साथ रहे थे। संजय पहले से ही शादीशुदा और 2 बच्चों का बाप था। प्रतिभा उस पर लगातार शादी का दबाव बना रही थी जिसके लिए संजय तैयार नहीं था। जून 2024 में संजय और प्रतिभा में एक बार फिर से इसी बात को लेकर झगड़ा हुआ।

आखिरकार संजय ने प्रतिभा को रास्ते से हटाने की ठान ली। उसने इस साजिश में अपने एक साथी विनोद दवे को भी शामिल कर लिया। जून में ही दोनों ने प्रतिभा की गला दबा कर हत्या कर दी। लाश को फ्रिज के डीप कूल मोड में डाल कर संजय ने एक कमरे में छोड़ दिया। कमरे में ताला लगा कर उसने इसी माह घर खाली करते हुए बचे सामान को जल्द ले जाने का भरोसा दिया। बीच-बीच में मकान मालिक द्वारा याद दिलाए जाने के बावजूद संजय आज-कल कह कर टालता रहा।

फ़िलहाल पुलिस ने पिंकी उर्फ़ प्रतिभा हत्याकांड में मुख्य आरोपित संजय पाटीदार को गिरफ्तार कर लिया है। संजय का साथी विनोद दवे एक अन्य आपराधिक मामले में राजस्थान की जेल में बंद है। पुलिस उस से भी पूछताछ की तैयारी में जुट गई है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई जारी है।

‘विधायकी का चुनाव लड़ना है, जमानत दे दो’ : दिल्ली दंगों का आरोपित ताहिर हुसैन AIMIM से टिकट पाकर पहुँचा हाईकोर्ट, IB अधिकारी की हत्या का लगा था आरोप

दिल्ली में फरवरी 2020 के हिंदू विरोधी दंगों के मामले में जेल में बंद आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन ने अंतरिम जमानत माँगी है। ताहिर हुसैन अब एआईएमआईएम में शामिल हो चुका है, उसे दिल्ली विधानसभा चुनाव में मुस्तफाबाद सीट से AIMIM ने टिकट दिया है। इसके बाद उसने चुनाव लड़ने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में अंतरिम जमानत की याचिका दायर की है। ताहिर हुसैन ने याचिका में 14 जनवरी से 9 फरवरी 2024 तक का समय माँगा है, ताकि वो चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा ले सके।

याचिका पर सुनवाई पहले जस्टिस अमित शर्मा के सामने होनी थी, लेकिन उन्होंने खुद को मामले से अलग कर लिया। इसके बाद इसे जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की अदालत में भेजा गया, लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी। अब यह मामला 13 जनवरी को सुना जाएगा।

अरविंद केजरीवाल के मामले का दिया हवाला

ताहिर हुसैन की दलील है कि वह चार साल नौ महीने से जेल में हैं और अब तक मुकदमे में अभियोजन पक्ष के केवल 20 गवाहों की गवाही हुई है, जबकि कुल गवाहों की संख्या 114 है। उनका तर्क है कि मुकदमे के लंबा खिंचने के कारण उन्हें अंतरिम जमानत दी जाए ताकि वह चुनाव प्रचार कर सकें। हुसैन ने याचिका में यह भी कहा कि चुनाव प्रचार प्रक्रिया का हिस्सा बनना उनके लिए जरूरी है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक पुराने फैसले का हवाला दिया, जिसमें AAP नेता अरविंद केजरीवाल को 2024 के लोकसभा चुनाव में हिस्सा लेने के लिए जमानत दी गई थी।

हुसैन पर दिल्ली दंगों के समय खुफिया ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या का आरोप है। 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान शर्मा का शव खजूरी खास नाले से बरामद हुआ था, जिनके शरीर पर 51 चोटों के निशान पाए गए थे। उनके पिता रविंदर कुमार ने पुलिस को बताया था कि उनका बेटा 25 फरवरी 2020 से लापता था। अगली सुबह उनका शव खजूरी खास नाले से बरामद हुआ। शर्मा के शरीर पर कई चोटों के निशान मिले, जो उनके साथ हुई क्रूरता को दर्शाते हैं। इस मामले के साथ ही हुसैन पर कई अन्य आरोप भी हैं।

जानकारि के मुताबिक, हुसैन ने अब तक अपने खिलाफ दर्ज 12 मामलों में से 8 में जमानत हासिल की है। हालाँकि, वह अभी भी 3 मामलों में हिरासत में हैं, जिनमें प्रवर्तन निदेशालय (ED) का एक मनी लॉन्ड्रिंग मामला और दिल्ली दंगों से संबंधित बड़ी साजिश का मामला शामिल है।

मंदिर के अतिरिक्त धन का इस्तेमाल नहीं हो सकता शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनवाने में: मद्रास HC ने तमिलनाडु सरकार के निर्णय पर लगाई रोक, कहा- धार्मिक स्थलों को रखो मुकदमे से दूर

मद्रास हाई कोर्ट ने हाल ही में तमिलनाडु हिंदू धार्मिक एवं धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग को मंदिर के अधिशेष कोष (Surplus Fund) से शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाने से रोक दिया है। यह शॉपिंग कॉम्प्लेक्स अरुलमिघु नंदीश्वरम थिरुकोइल की भूमि पर बनाया जा रहा था। कोर्ट ने यह भी कहा कि जहाँ तक हो सके मंदिरों को मुकदमेबाजी से दूर रखा जाना चाहिए।

मद्रास हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केआर श्रीराम और न्यायमूर्ति सेंथिलकुमार राममूर्ति की पीठ ने संभावित मुदकमेबाजी के कारण शॉपिंग कॉमप्लेक्स बनाने पर रोक लगाई। बेंच ने कहा कि यदि वाणिज्यिक परिसरों को अनुमति दी जाती है तो इससे निवेश पर लाभ, लाइसेंसधारियों/किराएदारों की बेदखली, बकाया किराए की वसूली और अतिक्रमण को रोकने जैसी जटिलताएँ पैदा हो सकती हैं।

कोर्ट ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अदालत ने कहा कि एचआर एंड सीई अधिनियम के अनुसार, मंदिर के अधिशेष धन का उपयोग केवल धारा 66(1) या अधिनियम की धारा 36ए या धारा 36बी के तहत निर्दिष्ट उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है और किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं। शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण किसी भी श्रेणी में नहीं आता है। इसलिए निर्णय को रद्द कर दिया जाना चाहिए।

दरअसल, पी. भास्कर नाम के एक व्यक्ति ने याचिका दायर की थी और कहा था कि वे मंदिर के अनुयायी हैं। उन्होंने दावा किया कि वे अधिनियम की धारा 6(15)(बी) के तहत परिभाषित हितधारक व्यक्ति हैं। याचिकाकर्ता ने बंदोबस्ती विभाग के निर्णय को चुनौती दी थी। भास्कर ने दावा किया था कि बंदोबस्ती को केवल अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार ही विनियोजित किया जा सकता है।

इस पर बंदोबस्ती विभाग ने दलील दी कि शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के निर्माण के लिए मंदिर से संबंधित अधिशेष निधि का उपयोग किया जा रहा है। हालाँकि, विशेष सरकारी वकील ने दलील दी कि अधिनियम की धारा 36 के पहले प्रावधान के अनुसार, ट्रस्टी निर्दिष्ट उद्देश्य को प्राथमिकता देंगे, लेकिन अधिशेष निधि का उपयोग किसी भी उद्देश्य के लिए कर सकते हैं, जिसे वे उचित समझते हैं, जिसमें शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण भी शामिल है।

हालाँकि, अदालत ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि मंदिर के फंड का उपयोग करके शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण संस्था के धार्मिक सिद्धांतों के प्रचार को इंगित नहीं करता है। इन कानूनी प्रावधानों का उद्देश्य धार्मिक सिद्धांतों का प्रचार है। अतिरिक्त भूमि कि इस्तेमाल को लेकर कोर्ट ने सुझाव दिया कि पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए विभाग इस पर देशी पेड़ लगाने पर विचार कर सकता है।

चूँकि उसे बताया गया कि संपत्ति में निर्माण का एक हिस्सा पहले ही बनाया जा चुका है और वह बर्बाद हो सकता है, इसलिए न्यायालय ने फैसला सुनाया कि शेष निर्माण इस तरह से किया जा सकता है कि इसका उपयोग गरीबों को भोजन देने में किया जा सके।

न्यायालय ने यह भी कहा कि भवन का उपयोग गरीब और जरूरतमंद हिंदुओं के बीच विवाह आयोजित करने के लिए किया जा सकता है। हालाँकि, न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि हर मामले में अधिशेष धन का उपयोग विवाह हॉल के निर्माण के लिए नहीं किया जा सकता है।

न जाएँगे जेल, न देंगे जुर्माना: पोर्न स्टार केस में दोषी करार होने के बाद भी डोनाल्ड ट्रंप को मिली राहत, फैसला सुन बोले- ये डेमोक्रेट्स की हार

अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को हश मनी केस में राहत मिली है। न्यूयॉर्क की अदालत ने उन्हें किसी भी सजा से बरी कर दिया। 78 वर्षीय ट्रंप को जुर्माना नहीं देना होगा और न ही उन्हें जेल जाना पड़ेगा। इस फैसले के बाद ट्रंप ने इसे ‘डेमोक्रेट्स की चाल’ बताया और कहा कि यह मामला कभी था ही नहीं। उन्होंने फैसले को अपने खिलाफ चलाए गए ‘शिकार अभियान – Witch Hunt’ का अंत करार दिया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जस्टिस जुआन मर्चन ने शुक्रवार (10 जनवरी 2024) को ट्रंप को ‘अनकंडीशनल डिस्चार्ज’ दिया, जिसका मतलब है कि उनके खिलाफ दोषसिद्धि तो रहेगी, लेकिन कोई कानूनी सजा नहीं दी जाएगी। अदालत ने कहा कि इस फैसले के बाद ट्रंप के खिलाफ यह मामला बंद हो गया।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए ट्रंप ने खुद को निर्दोष बताया। उन्होंने इस फैसले को ‘डेमोक्रेट्स की एक और हार’ करार दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर ट्रंप ने लिखा, “यह एक निराधार मामला था। यह साबित हो गया कि कोई केस था ही नहीं। आज का दिन अमेरिकी न्याय प्रणाली के लिए अहम है।” ट्रंप के वकीलों ने कहा है कि वे इस दोषसिद्धि के खिलाफ अपील करेंगे।

बता दें कि मई 2024 में ट्रंप को व्यवसायिक रिकॉर्ड के 34 मामलों में दोषी ठहराया गया था। आरोप था कि उन्होंने 2016 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले पोर्न स्टार स्टॉर्मी डेनियल्स को चुप रहने के लिए 1.30 लाख डॉलर की रकम दी थी। इस भुगतान को छुपाने के लिए व्यावसायिक दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ की गई। अभियोजन पक्ष का दावा था कि यह सब ट्रंप की चुनावी संभावनाओं को बेहतर बनाने के लिए किया गया। हालाँकि, ट्रंप ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया और डेनियल्स के आरोपों को झूठा बताया। ट्रंप के वकीलों ने भी अदालत में दलील दी कि इस तरह के आरोप लगाने का मकसद ट्रंप को राजनीतिक नुकसान पहुँचाना था।

क्या है हश मनी केस?

हश मनी केस में ट्रंप पर आरोप था कि उन्होंने स्टॉर्मी डेनियल्स को 2016 के चुनाव से पहले एक कथित निजी मामले को सार्वजनिक न करने के लिए पैसे दिए। अभियोजकों का दावा था कि यह भुगतान चुनावी नियमों का उल्लंघन करता है।

इस मामले में अधिकतम चार साल की सजा का प्रावधान है, लेकिन ट्रंप को दोषसिद्धि के बावजूद किसी भी सजा से राहत दी गई। अदालत का यह फैसला अमेरिका के इतिहास में पहला मौका है जब किसी पूर्व राष्ट्रपति को आपराधिक मामले में दोषी साबित होने के बावजूद राष्ट्रपति पद पर बने रहने की अनुमति मिली है। वो पहले राष्ट्रपति या पूर्व राष्ट्रपति भी हैं, जिन्हें किसी मामले में दोषी पाया गया है।

‘असम में लड़कियाँ तंत्र से लड़कों को बना देती हैं बकरी… रात में संभोग करती हैं’: यूट्यूबर अभिषेक के भ्रामक दावे पर भड़के CM हिमंता, कार्रवाई का दिया आदेश

असम सरकार ने शुक्रवार (10 जनवरी 2025) को राज्य पुलिस को फाइनांशियल इनफ्लुएंसर अभिषेक कर के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया। कर के खिलाफ यूट्यूब पर पॉडकास्ट में गलत सूचना फैलाने का आरोप लगाया है। असम के DGP जीपी सिंह ने साफ किया है कि राज्य के अपराध जाँच विभाग (CID) को इस शख्स के खिलाफ़ कानूनी कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।

हाल ही में YouTube पॉडकास्ट की एक क्लिप वायरल हुई है। इसमें अभिषेक कर अतिथि थे। इसमें वे असम की महिला को अपमानित एवं बदनाम करने के उद्देश्य से प्रोपगेंडा फैलाते नजर आए। कर ने कहा कि किसी गाँव की महिलाएँ पुरुषों को दूसरे जीवों में तब्दील कर देती हैं और फिर रात में उसे पुरुष बनाकर संभोग करती हैं। ये सब तांत्रिक गतिविधियाँ की जाती हैं।

यह वीडियो वायरल हुआ तो शुक्रवार (10 जनवरी 2025) को CMO ने इसका संज्ञान लिया। CMO ने सोशल मीडिया साइट X पर लिखा, “रिया उप्रेती नामक यूट्यूब चैनल का एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें अभिषेक कर नामक व्यक्ति असम के इतिहास और परंपराओं पर अस्वीकार्य टिप्पणी करता हुआ दिखाई दे रहा है। गलत सूचना फैलाने के लिए उक्त व्यक्ति के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सकती है।”

वायरल वीडियो में अभिषेक को असम के मोरीगाँव जिले के मायोंग गाँव के बारे में बात करते हुए सुना जा सकता है। अभिषेक कहता है, “असम में एक गाँव है। वहाँ की लड़कियों को इतनी ज्यादा सिद्धियाँ हासिल हैं कि they have the power कि आप इंसान बनकर जाते हो And they convert you into बकरी और Any other animal और रात को वापस आपको इंसान बनाकर संभोग करती हैं आपके साथ। Why? Because lots of Tantrik practices, जिसका रूट यहाँ से चलता है।”

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, मध्य असम का मायोंग क्षेत्र लंबे समय से रहस्यवाद और ‘तांत्रिक’ प्रथाओं से जुड़ा हुआ है। हालाँकि, ये मुख्य रूप से लोक चिकित्सा पर केंद्रित हैं। अभिषेक सुनी-सुनाई बातों को स्टेबलिश करने की कोशिश कर रहा था। उसका अपना YouTube चैनल है, जिसके 18.6 लाख सब्सक्राइबर हैं। वह शेयर बाजार, ट्रेडिंग, वित्त और व्यापार से संबंधित वीडियो अपलोड करता है। इंस्टाग्राम पर उसके 2.9 मिलियन फॉलोअर्स हैं।

असम के मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा कार्रवाई का निर्देश देने के बाद अभिषक कर ने ऑनलाइन आकर माफी माँगी है। अभिषेक ने अपने वीडियो में कहा, “मैं जनता, असम के मुख्यमंत्री कार्यालय और डीजीपी जीपी सिंह से सहित हर संबंधित पक्ष से माफ़ी चाहता हूँ जो आहत हुए हैं। मेरा इरादा किसी को चोट पहुँचाने का नहीं था और आगे भी इस बात का ध्यान रखूँगा कि ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों।”

अभिषेक कर का कहना है कि उन्होंने ये सब कुछ जानबूझकर नहीं किया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने सब कुछ रिसर्च के बाद दावा किया था। इसको लेकर अपने ट्विटर थ्रेड में एक लिंक भी शेयर किया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस तरह का दावा करने से पहले वह हर पहलू की गंभीरता से जाँच करेंगे।

4 साल में 64 लोगों ने किया नाबालिग का यौन शोषण, सहपाठी से लेकर टीचर और रिश्तेदार भी शामिल: केरल में 2 FIR दर्ज, 6 पकड़े गए

केरल के पथानामथिट्टा जिले में एक 18 वर्षीया लड़की ने दावा किया है कि पिछले 4 वर्षों में उसके साथ 64 लोगों ने यौन शोषण किया। इन आरोपितों में लड़की के सहपाठी, रिश्तेदार, पड़ोसी और कोच भी शामिल हैं। इस खुलासे के बाद पुलिस ने केस दर्ज करके जाँच शुरू कर दी है। अब तक कुल 6 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है। वारदात का खुलासा शुक्रवार (10 जनवरी 2025) को पुलिस की एक प्रेस कॉन्फ्रेस में हुआ।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वर्तमान समय में पीड़िता की उम्र 18 साल 2 महीने है। छात्रा की काउंसिलिंग कर रहे पथानामथिट्टा बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष राजीव एन ने बताया कि साल 2019 में पीड़िता पहली बार यौन शोषण का शिकार बनी थी। तब यह हरकत पीड़िता के ही स्कूल में पढ़ने वाले एक सहपाठी छात्र ने की थी। बाद में आरोपित छात्र ने यही करतूत अपने कुछ अन्य साथियों को बुला कर दोहराई थी। पीड़िता चुप रही और यह बात किसी के सामने नहीं आ पाई।

खेलों में रूचि रखने वाली पीड़िता का एडमिशन कुछ दिनों बाद स्पोर्ट्स स्कूल में हुआ। यहाँ पीड़िता के साथ खेल की प्रैक्टिस कर रहे कुछ छात्रों ने उसके साथ यौन शोषण किया। सबसे दुखद पहलू यह रहा कि पीड़िता के कोच और ट्रेनर भी इस अपराध में शामिल हो गए। दर्ज करवाए गए बयान में पीड़िता ने अपने कुछ रिश्तेदारों के नाम भी बताए हैं जो उसके यौन शोषण में शामिल रहे। कुल मिला कर पिछले 4 वर्षों में लगभग 64 आरोपितों ने तब नाबालिग रही पीड़िता को अपनी हवस का शिकार बनाया।

इस मामले के सामने आते ही पुलिस ने 2 अलग-अलग थानों में 2 FIR दर्ज की है। यह केस पॉक्सो एक्ट सहित अन्य धाराओं में दर्ज हुआ है। जाँच के दौरान पुलिस को पता चला कि पीड़िता अपना खुद का कोई मोबाइल फोन प्रयोग नहीं करती। वह अपने पापा के फोन से बात करती थी। इसी फोन में पीड़िता ने अपना यौन शोषण करने वाले 40 आरोपितों के नंबर सेव कर रखे हैं। पुलिस ने अब तक कुल 6 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

शुक्रवार (10 जनवरी) को गिरफ्तार आरोपितों में 24-24 वर्षीय सुबिन और सुधी श्रीनी, 30-30 वर्षीय संदीप और वी के विनीत और 21 वर्षीय के आनंदु के नाम सामने आए हैं। ये सभी चेन्नीरकारा के रहने वाले हैं। एक अन्य आरोपित को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। इसमें से सुधी श्रीनी पर पहले से ही एक अन्य नाबालिग लड़की के यौन शोषण का केस चल रहा है। पुलिस सभी आरोपितों को चिन्हित करके उनकी गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी हुई है। मामले में जाँच व अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई जारी है।

छत्तीसगढ़ में अब ‘आज तक’ के पत्रकार के माता-पिता और भाई को कुल्हाड़ी से काटा: पुश्तैनी जमीन बना विवाद की वजह, दूसरे भाई ने भाग कर बचाई जान

छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में संपत्ति विवाद के चलते एक पत्रकार के परिवार के तीन सदस्यों की बेरहमी से हत्या कर दी गई। मृतकों में पत्रकार संतोष कुमार टोपो के माता-पिता और भाई शामिल हैं। इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये वारदात शुक्रवार (10 जनवरी 2024) को दोपहर करीब 1 बजे खड़गवाँ थाना क्षेत्र के जगन्नाथपुर गाँव में हुई। आज तक न्यूज चैनल के पत्रकार संतोष कुमार टोपो के माता-पिता माघे टोपो (57) और बसंती टोपो (55), तथा भाई नरेश टोपो (30) खेत में काम करने पहुँचे थे। तभी संपत्ति विवाद को लेकर परिवार के दूसरे पक्ष के छह से सात लोग वहाँ पहुँचे।

दोनों पक्षों में बहस होने लगी, तभी दूसरे पक्ष के लोगों ने माघे टोपो और उनके परिवार पर कुल्हाड़ी और लाठियों से हमला कर दिया। सिर में गंभीर चोट लगने से बसंती और नरेश की मौके पर ही मौत हो गई। माघे टोपो को गंभीर हालत में अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहाँ उन्होंने दम तोड़ दिया। इस दौरान संतोष के दूसरे भाई उमेश टोपो ने भागकर अपनी जान बचाई और ग्रामीणों को घटना की सूचना दी।

पुलिस की शुरुआती जाँच में पता चला है कि विवादित पुश्तैनी जमीन पत्रकार के परिवार और उनके रिश्तेदारों के बीच लंबे समय से तनाव का कारण बनी हुई थी। जिस खेत पर पीड़ित परिवार काम कर रहा था, उस पर पहले हमलावर परिवार का कब्जा था, लेकिन कोर्ट केस में मिली जीत के बाद माघे टोपे और उनके परिवार को कब्जा मिला था और वो खेती करने पहुँचे थे। ऐसे में जब शुक्रवार (10 जनवरी 2025) को पत्रकार संतोष के परिवार ने खेत पर खेती शुरू की, तो यह विवाद हिंसक झगड़े में बदल गया।

घटना के बाद जगन्नाथपुर गाँव में डर और गम का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि दोनों पक्षों में पहले भी संपत्ति विवाद के चलते झगड़े हुए थे, लेकिन इसका अंजाम इतना भयावह होगा, किसी ने सोचा नहीं था।

घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस अधीक्षक और अन्य अधिकारी मौके पर पहुँचे। तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और आरोपितों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। वारदात के बाद से आरोपित लोग फरार हैं। पुलिस ने उनकी तलाश में कई जगह दबिश दी है और जल्द गिरफ्तारी का आश्वासन दिया है।

बता दें कि कुछ दिन पहले ही छत्तीसगढ़ में पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या कर दी गई थी। उस हत्याकांड में कॉन्ग्रेस नेता और ठेकेदार सुरेश चंद्राकर को गिरफ्तार किया गया था। मुकेश चंद्राकर को मार कर सेप्टिंक टैंक में चुनवा दिया गया था।

खत्म हो जाएगी जापान की पूरी आबादी, इस साल तक नहीं बचेगा एक भी जापानी: समस्या के लिए 2012 से ही चल रही एक घड़ी

जापान तकनीकी और विज्ञान के क्षेत्र में बहुत आगे है, लेकिन उसके सामने अपनी आबादी को बचाने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। दरअसन, जापान में जन्मदर (बच्चों का जन्म) की गिरावट से उनके ऊपर विलुप्ति का खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह स्थिति जारी रही तो आने वाले समय में जापान की आबादी खत्म हो सकती है। तोहोकू यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर हिरोशी योशिदा ने चेतावनी दी है कि अगर यही हाल रहा तो 5 जनवरी 2720 तक जापान में 14 साल से कम उम्र का सिर्फ एक बच्चा बचेगा।

प्रोफेसर योशिदा ने इसकी मॉनिटरिंग के लिए एक खास ‘टिकिंग क्लॉक’ बनाई है, जो हर साल के आँकड़ों के आधार पर दिखाती है कि जापान में बच्चों की संख्या कितनी तेजी से घट रही है। आँकड़ों के अनुसार, हर साल बच्चों की आबादी में 2.3% की कमी हो रही है। अगर यही दर जारी रही तो 695 साल बाद जापान में एक भी व्यक्ति जीवित नहीं बचेगा। यह घड़ी 2012 से अपडेट हो रही है और इसका मकसद इस गंभीर समस्या की ओर ध्यान खींचना है।

जापान की जन्मदर 2023 में 1.20 तक गिर गई, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। 2024 की पहली छमाही में केवल 3,50,074 बच्चों का जन्म हुआ, जो 2023 की तुलना में 5.7% कम है। यह आँकड़ा साल 1969 के बाद का सबसे कम है।

विशेषज्ञों का कहना है कि लोग अब शादी और बच्चों में कम रुचि ले रहे हैं। आर्थिक असुरक्षा, बच्चों की परवरिश की बढ़ती लागत और सिंगल लाइफ का बढ़ता चलन इसके प्रमुख कारण हैं। कई युवा करियर और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे शादी और बच्चे पैदा करने का फैसला टलता जा रहा है।

जापान सरकार ने जन्मदर बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए हैं, जैसे माता-पिता को आर्थिक मदद और बच्चों की देखभाल के लिए सब्सिडी। लेकिन इन नीतियों का प्रभाव अभी तक दिखाई नहीं दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो जापान का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।

जिस चर्च में हर महीने 3000 हिंदुओं का धर्मांतरण, उस पर चलेगा बुलडोजर: एशिया के दूसरे सबसे बड़े चर्च को लेकर आंध्र प्रदेश सरकार का फैसला

आंध्र प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने गुंटूर जिले में स्थित कैल्वरी टेम्पल चर्च को गिराने के आदेश जारी किया है। यह चर्च पेडकाकनी मंडल के नम्बुरु गाँव में स्थित है। इस चर्च को अवैध रूप से संचालन किया जा रहा था। एक जाँच के बाद इसका खुलासा हुआ था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, केवल उन संरचनाओं को ध्वस्त किया जाएगा जो बिना कानूनी अनुमति के चल रही हैं।

दरअसल, नवंबर 2024 में इस चर्च के खिलाफ प्रधानमंत्री कार्यालय को एक शिकायत दी गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि इसका संचालन पंचायती राज, राजस्व, पुलिस और ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड जैसे सरकारी विभागों से कानूनी अनुमति के बिना किया जा रहा है। इसमें ये भी कहा गया था कि पादरी डॉक्टर सतीश कुमार ने टैक्स का भुगतान किए बिना दान के जरिए लोगों को लूटा।

शिकायत के बाद जाँच में पाया गया कि यह चर्च अवैध रूप से संचालित हो रहा था और गरीबों को किराने का सामान देकर तथा फर्जी दावे करके हिंदुओं को ईसाई धर्म में परिवर्तित कर रहा था। अक्टूबर में बताया गया था कि हैदराबाद के पादरी डॉक्टर सतीश कुमार के नेतृत्व में कैल्वरी चर्च ने हर महीने लगभग 3,000 हिंदुओं को ईसाई धर्म में धर्मांतरित किया है।

पादरी सतीश कुमार ने विशेष रूप से दावा किया कि उन्होंने अब तक 3.5 लाख से अधिक हिंदुओं को ईसाई धर्म में परिवर्तित किया है। सतीश कुमार ने अगले 10 वर्षों में पूरे भारत में 40 ऐसे चर्च स्थापित करने की योजना बताई थी। CBN न्यूज़ (द क्रिश्चियन ब्रॉडकास्टिंग नेटवर्क इंक) का एक वीडियो 26 अक्टूबर 2024 को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर वायरल हुआ।

इस वीडियो में कैल्वरी टेम्पल चर्च की धर्मांतरण गतिविधियों के बारे में बात की गई थी। बाद में 28 अक्टूबर 2024 को लीगल राइट्स प्रोटेक्शन फ़ोरम (LRPF) ने X पर साझा किया कि काकीनाडा के जिला कलेक्टर के आदेश के बाद राजस्व अधिकारियों ने कैल्वरी टेम्पल चर्च को ज़ब्त कर लिया है। चर्च पर भूमि कब्जाने, संदिग्ध समझौतों के ज़रिए नए चर्च बनाने, कानून का उल्लंघन सहित कई आरोप हैं।

कैल्वरी टेंपल चर्च एशिया के सबसे बड़े चर्चों में से एक है, जिसके सदस्यों की संख्या 4 लाख से अधिक है। वहीं, साप्ताहिक उपस्थिति 20,000 से अधिक होती है। चर्च के अलावा, सतीश कुमार का संगठन कैल्वरी बाइबल कॉलेज, कैल्वरी अस्पताल और कैल्वरी स्कूल चलाता है। पादरी सतीश कुमार का आंध्र प्रदेश और उसके बाहर राजनीति से लेकर हर क्षेत्र में काफी प्रभाव माना जाता है।

इसके साथ ही राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय ईसाई समुदायों में भी सतीश कुमार की तगड़ी पहुँच है। वह मिशनरी गतिविधियों के लिए अक्सर अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका, कोरिया सहित विभिन्न देशों में आते-जाते रहते हैं। अमेरिका के तत्कालीन उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने साल 2018 में सतीश कुमार से मुलाकात की तस्वीरें सोशल मीडिया साइट X पर शेयर की थी और मुलाकात को प्रेरणादायक बताया था।

चर्च की स्थापना

कैल्वरी टेम्पल इंडिया की स्थापना 2005 में सतीश कुमार ने की थी। उन्हें अक्सर एक सम्मानित पादरी, लेखक और अंतरराष्ट्रीय वक्ता बताया जाता है। उन्हें दूरदर्शी नेतृत्व और ईमानदार बताया जाता है। हालाँकि, जाँच में उनके मिशनरी कामों का पता चला। पादरी सतीश ‘बाइबिल के मानकों’ पर जोर देते हैं, जो रणनीतिक रूप से उनके अनुयायियों को बढ़ाने के लिए तैयार किया गया लगता है।

यह भारत में आक्रामक तरीके से धर्मांतरण को बढ़ावा देने के उनके लक्ष्य को दिखाता है। चर्च की वेबसाइट पर कैल्वरी के बारे में खूब प्रशंसा की गई है। इसमें चर्च के 400,000 सदस्य होने का दावा किया गया है। ये सब कुछ हिंदुओं को लक्षित करने के लिए धन जुटाने की रणनीति के तहत किया गया लगता है। कैल्वरी चर्च का यह भी दावा है कि चर्च का निर्माण केवल 52 दिनों में किया गया था।

जब कैल्वरी बाइबिल कॉलेज और कैल्वरी अस्पताल जैसी पहलों के साथ-साथ प्रदान किए जाने वाले मुफ़्त भोजन पर विचार किया जाता है, तो यह परोपकार के बारे में कम और धार्मिक साम्राज्य के निर्माण के बारे में अधिक प्रतीत होता है। पादरी सतीश कुमार अपनी कई गतिविधियों के कारण कुख्यात हो चुके हैं। हालाँकि, ईसाई उनकी गतिविधियों को समुदाय के लिए एक बड़ी सेवा मानते हैं।