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41 दिन के लिए टला हमास-इजरायल युद्ध, PM नेतन्याहू ने दी मंजूरी: 2 अमेरिकी नागरिक समेत 33 इजरायली होंगे रिहा, 735 जिहादी सौंपे जाएँगे

फिलिस्तीन के आतंकी संगठन हमास के हमले के बाद इजरायल पिछले 15 महीनों से इस्लामी आतंकी समूहों पर कार्रवाई कर रहा है। अब हमास और इजरायल के बीच सीजफायर को लेकर समझौता हुआ है। इजरायल सरकार ने शनिवार (18 जनवरी 2025) को युद्धविराम समझौते को मंजूरी दे दी। यह समझौता रविवार (19 जनवरी) से प्रभावी होगा। इस समझौते के तहत बंधकों की अदला-बदली भी होगी।

इजरायल की सरकार ने शनिवार को इस मामले पर लगभग छह घंटे तक विचार-विमर्श किया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने बताया कि इजरायली कैबिनेट ने इस शांति समझौते को हरी झंडी दे दी है। इस समझौते में छह सप्ताह के लिए युद्धविराम की बात कही गई है। इस दौरान दोनों तरफ के बंधकों और कैदियों को तीन चरण में रिहा किया जाएगा।

हालाँकि, इस समझौते को लेकर इजरायल में ही विरोध के सुर उठ रहे हैं। इजरायल सरकार में इस समझौते के खिलाफ कुछ धुर दक्षिणपंथी मंत्रियों ने कड़े विरोध विरोध किए और इसके खिलाफ मतदान किया। इसके बावजूद प्रधानमंत्री नेतन्याहू के 24 कैबिनेट सदस्यों ने युद्धविराम का समर्थन किया। इजरायली सुरक्षा कैबिनेट ने शुक्रवार (17 जनवरी) को इस समझौते को मंजूरी दे दी थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, 15 जनवरी 2025 को हमास और इजरायल के बीच हुए इस समझौते की मध्यस्थता मिस्र, कतर और अमेरिका ने की है। समझौते के बाद जी-7 देशों ने इसका स्वागत किया और कहा कि ईरान और उसके सहयोगियों को इजरायल के खिलाफ किसी भी तरह के हमले से बचना चाहिए। समूह ने यह भी कहा कि अगर इस तरह के खतरे सामने आते हैं तो इजरायल की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है।

इजरायल के किबुत्ज में हमला करके हमास में बंधक बनाए गए लोगों की रिहाई और अदला-बदली के लिए तीन प्वॉइंट बनाए गए हैं। इनमें मिस्र की सीमा के पास स्थित केरेम शलोम, रीम शहर और एरेज़ शामिल हैं। बता दें कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायल हमला करके 1,200 लोग मार दिया था और करीब 250 लोगों को बंदी बना लिया था। हमास के पास अभी भी 100 के आसपास बंधक हैं।

यह समझौता तीन चरण में पूरा होगा। पहले चरण में आतंकी समूह हमास बंधक बनाए गए इजराइल के 33 लोगों को रिहा करेगा। इनमें अमेरिकी नागरिक अमेरिकी कीथ सीगल और सागुई डेकेल-चेन शामिल हैं। वहीं, इजराइली सेना गाजा की सीमा से 700 मीटर पीछे लौटेगी। इजराइली सरकार 95 फिलिस्तीनी कैदियों की लिस्ट जारी की है, जिन्हें रिहा किया जाएगा। इनमें 69 महिलाएँ, 16 पुरुष और 10 नाबालिग शामिल हैं।

अगर पहला फेज तय नियमों के तहत आगे बढ़ता है तो समझौते का दूसरा चरण 3 फरवरी को लागू किया जाएगा। इसके लिए योजना को आगे बढ़ाने पर बातचीत शुरू हो जाएगी। इस दौरान किसी भी पक्ष द्वारा कोई भी हमला नहीं किया जाएगा। इस चरण में युद्ध को स्थायी तौर पर खत्म करने पर विचार किया जाएगा। दूसरा चरण सफल होने पर तीसरा चरण लागू किया जाएगा।

19 जनवरी से 1 मार्च तक के लिए लागू इस समझौते के तहत इजरायल 735 फिलिस्तीनियों को रिहा करेगा। इनमें विभिन्न मामलों में गिरफ्तार करके इजरायल की जेलों में रखा गया है। इन लोगों के नाम की लिस्ट भी जारी की गई है। इस लिस्ट में हमास के कई कुख्यात आतंकी भी शामिल हैं। इसके अलावा, हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं जिहादी भी शामिल हैं।

इमरान ने सनातन में की घरवापसी तो भड़का लैंडलॉर्ड इफ्तिखार, घर में घुस पत्नी को धमकाया: बोला- ’24 घंटे में वापस मुस्लिम बन, वरना तुझे उठा लूँगा’

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में एक युवक और उसकी पत्नी को सनातन धर्म अपनाने के बाद मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। 14 जनवरी को इमरान नाम के युवक ने अपनी पत्नी के साथ विधि-विधान से हिंदू धर्म अपनाया और अपना नाम बदलकर ईश्वर रख लिया। महादेवगढ़ में इस धार्मिक अनुष्ठान के बाद ईश्वर और उनकी पत्नी खुश होकर अपने किराए के मकान में लौटे। लेकिन उनका यह फैसला उनके मुस्लिम मकान मालिक इफ्तिखार को रास नहीं आया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईश्वर के धर्म परिवर्तन की जानकारी मिलने के बाद इफ्तिखार उनके घर आया और गाली-गलौच करने लगा। गुस्से में उसने ईश्वर और उनकी पत्नी को जान से मारने की धमकी दी। ईश्वर ने बताया कि इफ्तिखार ने यह चेतावनी दी कि अगर 24 घंटे के भीतर दोनों ने इस्लाम मजहब में वापसी नहीं की, तो वह उन्हें मार डालेगा।

24 घंटे में अपनाओ इस्लाम, वर्ना पत्नी को रख लूँगा

घटना यहीं खत्म नहीं हुई। ईश्वर ने अपनी शिकायत में बताया कि इफ्तिखार ने उनकी पत्नी के साथ दुर्व्यवहार किया। उस समय ईश्वर की पत्नी घर पर अकेली थी। इफ्तिखार घर में जबरन घुसा और उनकी पत्नी की कलाई पकड़कर उसे धमकाने लगा। उसने कहा कि अगर उसने अपने पति को इस्लाम मजहब में वापस लाने के लिए मजबूर नहीं किया, तो वह उसे अपनी पत्नी बनाकर अपने साथ रख लेगा। महिला ने शोर मचाया और अपने पति को फोन किया। ईश्वर के घर पहुँचने पर मामला और गंभीर हो गया। इफ्तिखार ने ईश्वर के साथ मारपीट की और फिर पड़ोसियों के जमा होने पर मौके से भाग गया।

ईश्वर और उनकी पत्नी ने बताया कि उन्होंने महादेवगढ़ में पूरे विधि-विधान से हिंदू धर्म अपनाया था। इस प्रक्रिया में उनके परिवार के कुछ सदस्य और परिचित भी शामिल थे। इसके बाद उन्हें उम्मीद थी कि उनका जीवन शांति और सुकून से आगे बढ़ेगा। लेकिन उनके मकान मालिक ने उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर दीं। पड़ोसियों का कहना है कि इफ्तिखार अक्सर गुस्सैल रहता है और उसने पहले भी कुछ लोगों के साथ झगड़ा किया है। लेकिन इस बार उसने सारी हदें पार कर दीं। स्थानीय लोगों ने भी पुलिस से जल्द से जल्द कार्रवाई करने की माँग की है।

इफ्तिखार फरार, पुलिस कर रही तलाश

इस घटना के बाद दंपति जावर थाने पहुँचा। जहाँ उन्होंने इफ्तिखार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने ईश्वर और उनकी पत्नी की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। जावर थाना प्रभारी जीपी वर्मा ने बताया कि आरोपित इफ्तिखार के खिलाफ छेड़छाड़, मारपीट और जान से मारने की धमकी की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि आरोपित को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

‘भोलेनाथ का पुत्र, डरूँगा नहीं’

ईश्वर ने पुलिस को दिए अपने बयान में कहा कि वह भोलेनाथ का पुत्र है और किसी की धमकी से डरने वाला नहीं है। उन्होंने कहा, “मैंने अपनी मर्जी से सनातन धर्म अपनाया है। यह मेरी आस्था का मामला है और मैं इसी धर्म में रहूँगा। मुझे किसी का डर नहीं है, चाहे वह मुझे मारने की धमकी ही क्यों न दे।” पुलिस से सुरक्षा की माँग करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें अपने धर्म के आधार पर जीने का अधिकार है और किसी को भी इसमें दखल देने का अधिकार नहीं होना चाहिए।

बरेली में पाकिस्तानी महिला 9 साल से कर रही थी सरकारी टीचर की नौकरी, पोल खुलने पर बर्खास्त: जाँच में फर्जी निकले सारे प्रमाण-पत्र, 2021 में अम्मी भी ऐसे ही पकड़ी गई थी

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शुमायला खान नाम की महिला ने खुद को भारतीय नागरिक बताकर फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी स्कूल में सहायक अध्यापक की नौकरी हासिल कर ली। यह नौकरी उन्होंने 2015 में शुरू की और 9 साल तक सरकारी वेतन भी लिया। मामला तब खुला जब एक शिकायत के बाद प्रशासन ने उनके निवास प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेजों की जाँच की। फिलहाल, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने 3 अक्तूबर, 2024 को शुमायला खान को निलंबित कर दिया। इसके बाद, उन्हें नियुक्ति की तिथि से ही पद से हटा दिया गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुमायला ने रामपुर के एसडीएम कार्यालय से फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनवाया था। तहसीलदार की जाँच में पता चला कि यह प्रमाण पत्र गलत तथ्यों पर आधारित था। तहसीलदार की रिपोर्ट ने यह साफ किया कि शुमायला वास्तव में पाकिस्तान की नागरिक हैं। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने शुमायला को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया और उसके खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज कराया।

शुमायला ने अपनी अम्मी से प्रेरणा लेते हुए फर्जीवाड़ा किया। उन्होंने प्राथमिक विद्यालय माधौपुर में सहायक अध्यापक के पद पर नौकरी पाई। जाँच में पाया गया कि शुमायला के माता-पिता पाकिस्तानी नागरिक थे। रामपुर तहसील से निवास प्रमाण पत्र बनवाते समय उन्होंने यह तथ्य छिपाया।

फतेहगंज पश्चिमी के खंड शिक्षा अधिकारी भानु शंकर ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के निर्देश पर फतेहगंज पश्चिमी थाने में शुमायला के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई। अब उनके खिलाफ धोखाधड़ी और दस्तावेजों की हेराफेरी के आरोपों में कानूनी कार्रवाई हो रही है। पुलिस शुमायला की गिरफ्तारी की तैयारी कर रही है।

बता दें कि शुमायला की अम्मी माहिरा अख्तर को साल 2021 में बर्खास्त कर दिया गया था, जब वो रिटायरमेंट से सिर्फ 2 दिन दूर थी। 11 मार्च 2021 को रिटायर होने जा रही शुमायला की अम्मी माहिरा अख्तर को 9 मार्च 2021 को बर्खास्त किया गया था, जबकि शुमायरा को सस्पेंड किया गया था। माहिरा अख्तर ने भी खुद को भारतीय नागरिक बताया था, लेकिन जाँच में वे पाकिस्तानी पाई गईं। माहिरा का मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुँचा और अभी हाईकोर्ट में लंबित है।

यह मामला शिक्षा विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाता है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी पाना न केवल सिस्टम की खामियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे एक संगठित तरीके से सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया जा सकता है।

बहरहाल, शिक्षा विभाग ने इस घटना के बाद जाँच प्रक्रिया को और सख्त बनाने का निर्णय लिया है। यह घटना प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण है और इस बात की ओर इशारा करती है कि सरकारी दस्तावेजों की सत्यापन प्रक्रिया में सुधार की कितनी जरूरत है।

5 साल में AAP नेता मनीष सिसोदिया की संपत्ति में 7 गुना इजाफा, कमाई भी 7 गुना बढ़ी: हलफनामे से खुलासा, बेटी के विदेश में चल रहे 3 खाते

दिल्ली उपमुख्यमंत्री रहे मनीष सिसोदिया की चल सम्पत्ति में बीते पाँच वर्षों में 7 गुना की बढ़ोतरी हुई है। उनकी सालाना कमाई भी लगभग 7 गुना की बढ़ोतरी हुई है। उनकी पत्नी के पास भी प्रॉपर्टी बढ़ गई है। यह सब जानकारी उनके चुनावी हलफनामे से बाहर आई है। सिसोदिया आम आदमी पार्टी के जंगपुरा विधानसभा सीट से AAP के उम्मीदवार हैं।

AAP ने इस बार उनकी सीट बदल दी है। उन्होंने जंगपुरा सीट से गुरुवार (16 जनवरी, 2025) को नामांकन किया है। इसी में उन्होंने अपना हलफनामा दिया है, जिसके भीतर उनकी प्रॉपर्टी की जानकारी सामने आई है। मनीष सिसोदिया ने बताया है कि उनके पास ₹34.43 लाख की चल सम्पत्ति है।

उन्होंने बताया है कि उनके पास 4 बैंक खाते और फिक्स्ड डिपाजिट (FD) हैं। मनीष सिसोदिया ने खुलासा किया है कि इनमें ₹34 लाख जमा हैं। इसके अलावा उनकी पत्नी सीमा सिसोदिया के खाते में ₹2 लाख जमा हैं। हलफनामे में मनीष सिसोदिया ने बताया है कि उनके और उनकी पत्नी के पास ₹40 हजार नकद हैं।

मनीष सिसोदिया के हलफनामे से यह भी खुलासा हुआ है कि उनकी बेटी मीर सिसोदिया के विदेश में तीन खाते हैं। यह तीनों खाते कनाडा के ओंटारियो शहर में हैं। इन खातों में ₹2.4 लाख जमा हैं। उनकी पत्नी के पास ₹10 लाख से ज्यादा का लगभग 150 ग्राम सोना है। कुल मिलाकर दंपती के पास ₹47.30 लाख की चल सम्पत्ति है।

मनीष सिसोदिया की चल सम्पत्ति 2020 के चुनाव के दौरान ₹4.74 लाख और उनकी पत्नी की सम्पत्ति ₹2.66 लाख थी। इसकी तुलना वर्तमान सम्पत्ति से की जाए तो मनीष सिसोदिया की सम्पत्ति 700% जबकि उनकी पत्नी की सम्पत्ति 483% बढ़ गई है।

दोनों ने अपनी अचल सम्पत्ति की भी हलफनामे में जानकारी दी है। मनीष सिसोदिया और उनकी पत्नी के पास ₹93 लाख के 2 फ़्लैट हैं। एक फ़्लैट दिल्ली तो वहीं दूसरा गाजियाबाद में हैं। एक की कीमत ₹23 लाख और दूसरे की ₹70 लाख है। उन्होंने इस हलफनामे में अपने मुकदमों और कमाई के बारे में भी बताया है।

उनके मुकदमे शराब घोटाला से जुड़े हैं। वहीं सालाना कमाई में भी अच्छी खासी बढ़त हुई है। हलफनामे के अनुसार, 2021-22 में उन्होंने अपने ITR में बताया है कि उनकी कमाई ₹1.59 लाख थी। यह 2023-24 में बढ़ कर ₹11.59 लाख हो गई। उनकी पत्नी ने भी ₹78 हजार सालाना कमाई का खुलासा किया है।

महिलाओं को हर माह ₹2100, गर्भवतियों को ₹21000: दिल्ली के लिए BJP ने संकल्प पत्र किया जारी; बुजुर्गों और गरीबों का भी रखा खास ख्याल

दिल्ली विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने शुक्रवार (17 जनवरी 2025) को अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया। इसे ‘संकल्प पत्र’ नाम दिया गया है, जिसमें पार्टी ने महिलाओं, गरीबों, बुजुर्गों और झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों के लिए कई बड़े ऐलान किए हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पार्टी कार्यालय में इस संकल्प पत्र का पहला भाग पेश किया।

बीजेपी ने इस बार महिलाओं को प्राथमिकता देते हुए महिला समृद्धि योजना का ऐलान किया है। इस योजना के तहत हर महिला को प्रतिमाह 2,500 रुपये दिए जाएँगे। इसके साथ ही हर गर्भवती महिला को 21,000 रुपये की आर्थिक मदद का वादा किया गया है। पार्टी का कहना है कि यह योजनाएँ सरकार बनने के बाद पहली ही कैबिनेट बैठक में लागू की जाएँगी। महिलाओं को एलपीजी सिलेंडर पर 500 रुपये की सब्सिडी दी जाएगी, साथ ही होली और दिवाली के अवसर पर एक-एक सिलेंडर मुफ्त मिलेगा।

बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में आयुष्मान भारत योजना को दिल्ली में लागू करने का वादा किया है। इसके तहत प्रत्येक दिल्लीवासी को 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा मिलेगा। बुजुर्गों के लिए भी पार्टी ने विशेष प्रावधान किए हैं। 70 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को अतिरिक्त 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा दिया जाएगा, जिससे यह कुल बीमा कवर 10 लाख रुपये हो जाएगा। पेंशन योजनाओं में भी वृद्धि का ऐलान किया गया है। बुजुर्गों की पेंशन 2,000 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये की जाएगी, वहीं विधवाओं और दिव्यांगों को 3,000 रुपये की पेंशन दी जाएगी।

बीजेपी ने झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों के लिए अटल कैंटीन योजना शुरू करने की घोषणा की है। इस योजना के तहत पाँच रुपये में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। नड्डा ने कहा कि यह योजना झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले गरीबों को राहत पहुँचाएगी। पार्टी ने यह भी कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार की मोहल्ला क्लीनिक योजना में भ्रष्टाचार की जाँच कराई जाएगी और दोषियों को सजा दी जाएगी।

जेपी नड्डा ने आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि अन्य पार्टियों ने केवल वादे किए, लेकिन बीजेपी ने हर राज्य में अपने वादों को पूरा किया है। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी के पास 99.9% वादे निभाने का रिकॉर्ड है। नड्डा ने कहा कि पार्टी दिल्ली को विकसित राजधानी के रूप में बदलने का संकल्प लेकर आई है।

दिल्ली में 70 विधानसभा सीटों के लिए 5 फरवरी को मतदान होगा। नड्डा ने कहा कि यह संकल्प पत्र दिल्ली के हर वर्ग के कल्याण को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी सत्ता में आने के बाद दिल्ली में चल रही सभी मौजूदा जनकल्याण योजनाओं को जारी रखेगी।

बीजेपी के संकल्प पत्र (भाग-1) की बड़ी बातें

  • एलपीजी सिलेंडर पर 500 रुपये की सब्सिडी
  • महिला समृद्धि के तहत महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये
  • गर्भवती महिलाओं को 21000 रुपये दिए जाएँगे
  • होली-दिवाली पर एक-एक सिलेंडर मुफ्त दिया जाएगा
  • एलपीजी सब्सिडी 500 रुपये दी जाएगी
  • गर्भवती महिलाओं को न्यूट्रीशनल किट दिए जाएँगे
  • पाँच लाख रुपये तक का अतिरिक्त स्वास्थ्य बीमा दिया जाएगा
  • आयुष्मान भारत योजना को दिल्ली में लागू किया जाएगा
  • अटल कैंटीन योजना को लॉन्च करेंगे
  • झुग्गियों में पाँच रुपये में राशन दिया जाएगा
  • वरिष्ठ नागरिकों को 3000 रुपये तक की पेंशन दी जाएगी

बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में दिल्ली के विकास को प्राथमिकता दी है। इसमें महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने, गरीबों और बुजुर्गों के जीवन स्तर को सुधारने और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया गया है। पार्टी ने जनता से अपील की है कि वह इस बार बीजेपी को मौका दें और दिल्ली को नई दिशा में ले जाने में सहयोग करें।

18000 से 50000+ की छलाँग दे सकता है 8वाँ वेतन आयोग, जानिए कैसे तय होती है सैलरी-पेंशन में बढ़ोतरी: फिटमेंट फैक्टर है सबसे अहम, सब कुछ इसी से होगा तय

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय कैबिनेट ने गुरुवार (16 जनवरी, 2025) को 8वें वेतन आयोग को मंजूरी दे दी। इस आयोग का गठन केन्द्रीय कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन तय करने के लिए किया गया है। 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर ही 2026 से सैलरी और पेंशन का निर्धारण होगा।

इस आयोग का गठन सातवें वेतन आयोग की अवधि पूरे होने से लगभग एक वर्ष पूर्व किया गया है। 7वां वेतन आयोग 31 दिसम्बर, 2025 को समाप्त हो जाएगा। वेतन आयोग को मोटे तौर लोग सैलरी-पेंशन बढ़ने से ही जोड़ते हैं। नए वेतन आयोग के ऐलान के साथ ही कयास लगने लगे हैं कि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद सैलरी-पेंशन कितने बढ़ेंगे।

यह भी चर्चा चल रही है कि कब से यह बढ़ी हुई पेंशन मिलेगी। इस बीच पाँचवे, छठे और सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद सैलरी और पेंशन कितनी बढ़ी थी। इसके अलावा इस नए वेतन आयोग पर काम कितनी जल्दी चालू होगा, इसको लेकर भी चर्चाएँ चल रही है।

8वें वेतन आयोग में कितनी बढ़ेगी सैलरी-पेंशन?

8वें वेतन आयोग के लिए कुछ दिनों के भीतर चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति सरकार कर देगी। इसके बाद यह आयोग उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (IW) समेत बाकी तमाम तथ्यों को ध्यान में रख कर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा। इस रिपोर्ट में यह बताया जाएगा कि कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन कितनी बढ़ाए जाने की आवश्यकता है।

आयोग सैलरी और पेंशन बढ़ाने के लिए ‘फिटमेंट फैक्टर’ का इस्तेमाल करता है। फिटमेंट फैक्टर वह संख्या होती है, जिससे पिछले आयोग में तय की गई बेसिक सैलरी और पेंशन को गुणा करके नई बेसिक सैलरी और पेंशन तय की जाती है। इसको उदाहरण से समझा जाना चाहिए।

यदि आज किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹20 हजार है और इस पर 2 का फिटमेंट फैक्टर लगाया जाता है तो यह बढ़ कर ₹40 हजार हो जाएगी। यदि किसी की बेसिक सैलरी ₹1 लाख है तो यह बढ़ कर ₹2 लाख हो जाएगी। आयोग इसके अलावा कर्मचारियों को मिलने वाले बाकी भत्ते और भुगतान तय करेगी।

8वें वेतन आयोग की सिफारिशों में बेसिक सैलरी पर 2.86 का फिटमेंट फैक्टर लगाए जाने की चर्चा चल रही है। कहीं-कहीं यह फिटमेंट फैक्टर 2.28 लगाए जाने की चर्चा भी चल रही है। ऐसे में अभी के सभी ग्रेड के बेसिक सैलरी इसी से तय होंगे। वर्तमान में सबसे निचले स्तर के कर्मचारी को ₹18000 की बेसिक सैलरी मिलती है।

यदि इस पर 2.28 का फिटमेंट फैक्टर लगा तो यह बढ़ कर ₹41 हजार से ज्यादा हो जाएगा। यदि 2.86 का फिटमेंट फैक्टर लगा तो यह बढ़ कर ₹51 हजार से अधिक हो जाएगी। जो भी जिस कर्मचारी का पे बैंड और ग्रेड होगा, उसी हिसाब से उसका वेतन तय किया जाएगा। इस ग्राफ से आप यह समझ सकते हैं।

वेतन आयोग

पिछले वेतन आयोगों में कितना बढ़ा?

2016 में लागू किए गए 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लगाया गया था। यानि तब बेसिक सैलरी में 257% की बढ़ोतरी हुई थी। इसके अलावा इस दौरान पेंशन को भी 2.57 के फिटमेंट फैक्टर से बढ़ाया गया था। तब बेसिक पेंशन भी ₹3500 से बढ़ कर ₹9 हजार हो गई थी।

इसी तरह 2006 में केन्द्र सरकार द्वारा लाए गए 6ठे वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 1.86 का था। तब बेसिक सैलरी ₹3700 से बढ़ कर ₹7000 हुई थी। इस वेतन आयोग के चलते देश में बड़े बदलाव देखने को मिले थे।

इसके अलावा 5वें वेतन आयोग में 40% की बढ़त बेसिक सैलरी पर दी गई थी। यानी इसमें 1.4 का फिटमेंट फैक्टर लगाया गया था। यही फिटमेंट फैक्टर पेंशन पर भी लागू किया गया था।

आखिरकार ‘चंदू चैंपियन’ को मिला ‘अर्जुन अवॉर्ड’, जिसके लिए थाने पहुँचा था दिग्गज तैराक: मुरलीकांत पेटकर ने राष्ट्रपति के हाथों लिया सम्मान, मोदी सरकार ने 2018 में दिया था पद्मश्री

राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 4 खिलाड़ियों को खेल रत्न, 32 खिलाड़ियों को अर्जुन अवॉर्ड के साथ ही 2 खिलाड़ियों को लाइफटाइम अर्जुन अवॉर्ड भी दिया, इसमें पैरा-स्विमर मुरलीकांत पेटकर और एथलेटिस्ट में सुचा सिंह का नाम रहा।

मुरलीकांत पेटकर को मिला अर्जुन अवॉर्ड

मुरलीकांत पेटकर वही हैं, जिन्होंने खुद पुलिस स्टेशन जाकर अर्जुन अवॉर्ड न देने के लिए सरकार की शिकायत की थी। हालाँकि मोदी सरकार ने उनका सम्मान किया है और अर्जुन अवॉर्ड (लाइफटाइम) देकर सम्मानित किया है। मुरलीकांत पेटकर को सम्मानित करने के समय एक्टर कार्तिक आर्यन भी मौजूद थे, जिन्होंने उनकी जिंदगी पर बनी फिल्म ‘चंदू चैंपियन’ में उनका किरदार निभाया था। ‘चंदू चैंपियन’ फिल्म के डायरेक्टर कबीर खान भी मौके पर मौजूद रहे।

बता दें कि मुरलीकांत पेटकर को मोदी सरकार मार्च 2018 में पद्मश्री से भी सम्मानित कर चुकी है। वो जिस अर्जुन अवॉर्ड के लिए थाने तक पहुँचे थे, मोदी सरकार ने उन्हें वो सम्मान राष्ट्रपति के हाथों दिलाया। मुरलीकांत पेटकर अब 80 वर्ष के हो चुके हैं। इसके बावजूद अर्जुन अवॉर्ड लेने के लिए खुद वो पहुँचे थे।

कौन हैं मुरलीकांत पेटकर?

मुरलीकांत पेटकर का जन्म 1944 में महाराष्ट्र के सांगली में हुआ। वो पहलवानी करना चाहते थे, जिसके लिए वो घर से भी भाग गए। बाद में वो सेना में भर्ती हो गए और बॉक्सिंग शुरू की। सेना में रहते हुए उन्होंने कई मेडल जीते और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कैडेट्स के गेम में हिस्सा लिया। साल 1965 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में उन्होंने हिस्सा लिया, जहाँ 9 गोलियाँ लगने के बावजूद वो बच गए। 8 गोलियाँ तो शरीर से निकाल दी गई, लेकिन एक गोली उनकी रीढ़ की हड्डी में फंसी रह गई, जिसकी वजह से काफी समय तक वो लकवा के शिकार रहे। इस दौरान धीरे-धीरे वो ठीक होने के क्रम में ही स्विमिंग करने लगे और फिर अन्य खेलों में हिस्सा लेने लगे।

मुरलीकांत पेटकर ने साल 1968 के पैरालंपिक्स में टेबल टेनिस और फिर 1972 के हैडलवर्ग पैरालंपिक्स में स्विमिंग में हिस्सा लिया और मेडल जीते। हालाँकि उस समय और बाद की सरकारों ने उन्हें अनदेखा किया और कभी उनका सम्मान नहीं किया गया, जिसके बाद अपने गाँव की बदहाली की वजह से वो खुद पुलिस थाने पहुँचे थे और फिर मोदी सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था। उनकी ये कहानी ‘चंदू चैंपियन’ फिल्म में भी दिखाई गई है।

राष्ट्रीय खेल पुरस्कार समारोह के मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मनु भाकर, डी. गुकेश, हरमनप्रीत सिंह और प्रवीन कुमार को खेल रत्न सम्मान से नवाजा। इस दौरान 18 वर्षीय शतरंज विश्व चैंपियन डी. गुकेश और डबल ओलंपिक पदक विजेता निशानेबाज मनु भाकर ने सभी का ध्यान खींचा, जबकि पैरा-एथलीट प्रवीन कुमार को सबसे ज्यादा तालियाँ मिलीं। प्रवीन ने पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया है। वहीं, भारतीय हॉकी टीम के कप्तान हरमनप्रीत सिंह को भी देश के सर्वोच्च खेल सम्मान से सम्मानित किया गया। इस दौरान 5 कोचों को द्रोणाचार्य पुरस्कार, फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया को राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार से नवाजा गया।

‘कठमुल्ला’ पर जस्टिस शेखर यादव ने नहीं माँगी माफी, कहा- संविधान के अनुरूप था बयान: VHP के कार्यक्रम में जाने पर पीछे पड़ गए थे लिबरल-वामपंथी

विश्व हिन्दू परिषद के कार्यक्रम में दिए गए अपने संबोधन को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शेखर यादव ने माफी नहीं माँगी है। उन्होंने इस संबोधन के ऊपर उठे विवाद को लेकर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिख कर अपना जवाब दिया है। जस्टिस यादव ने अपने संबोधन को नियमों के अनुसार बताया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जस्टिस शेखर यादव ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस अरुण भंसाली को पत्र भेज कर जवाब दिया है। जस्टिस यादव ने कहा है कि उनके संबोधन को तोड़मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। जस्टिस शेखर यादव ने माँग की है कि न्यायपालिका को उनका संरक्षण करना चाहिए क्योंकि उनके जैसे लोग अपना बचाव नहीं कर सकते।

जस्टिस शेखर यादव ने अपने पत्र में लिखा है कि उनका संबोधन संविधान में निहित मूल्यों के अनुरूप था। उन्होंने कहा है कि यह उनकी सामाजिक मुद्दों पर विचारों की अभिव्यक्ति थी, न कि किसी समुदाय के प्रति घृणा पैदा करने वाली बात। उन्होंने कहा है कि यह संबोधन किसी भी तरह से न्यायिक मर्यादा का उल्लंघन नहीं करता।

जस्टिस यादव ने यह जवाब 17 दिसम्बर, 2024 को उनकी सुप्रीम कोर्ट के कोलेजियम की बैठक के बाद दिया है। इस कोलेजियम की अध्यक्ष CJI संजीव खन्ना कर रहे थे। इसके बाद जनवरी, 2025 में CJI खन्ना ने जस्टिस भंसाली से इस मामले पर रिपोर्ट माँगी थी। इसी के बाद जस्टिस शेखर ने यह जवाब भेजा।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में बताया गया है कि जस्टिस शेखर यादव से यह जवाब एक वकालत के छात्र और एक सेवानिवृत्त IPS अधिकारी की शिकायत के बाद माँगा गया था। यह सभी शिकायतें 8 दिसम्बर, 2024 को इलाहाबाद हाई कोर्ट में UCC पर आयोजित किए गए एक कार्यक्रम में जस्टिस शेखर यादव के संबोधन के बाद की गई हैं।

यह कार्यक्रम विश्व हिन्दू परिषद (VHP) के लीगल सेल ने करवाया था। इस कार्यक्रम में जस्टिस यादव ने मुस्लिमों में कट्टरपंथ और रूढ़िवादिता को लेकर कुछ बातें कही थीं। उन्होंने ‘कठमुल्लों’ को देश के लिए घातक बताया था। उन्होंने UCC जैसे मुद्दों पर अपने विचार रखे थे। इसके बाद उनके पीछे पूरा लिबरल और वामपंथी गैंग पड़ गया था।

जस्टिस शेखर यादव ने यहाँ कहा था, “मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि यह हिंदुस्तान है, यह देश हिंदुस्तान में रहने वाले बहुसंख्यकों के अनुसार चलेगा। यही कानून है। आप यह नहीं कह सकते कि मैं हाईकोर्ट के जज होने के नाते ऐसा कह रहा हूँ। दरअसल, कानून ही बहुमत के हिसाब से काम करता है।”

जस्टिस शेखर यादव ने मुस्लिमों में फैली रूढ़िवादिता और दकियानूसी को लेकर प्रश्न खड़े किए थे। उन्होंने कहा, “हमारे हिंदू धर्म में बाल विवाह, सती प्रथा और बालिकाओं की हत्या जैसी कई सामाजिक कुरीतियाँ थीं, राम मोहन राय जैसे सुधारकों ने इन कुरीतियों को खत्म करने के लिए संघर्ष किया। लेकिन जब मुस्लिम समुदाय में हलाला, तीन तलाक और गोद लेने से जुड़े मुद्दों जैसी सामाजिक कुरीतियों की बात आती है, तब उनके पास इनके खिलाफ खड़े होने की हिम्मत नहीं थी।”

दिल्ली में अभी लागू नहीं होगी ‘आयुष्मान भारत योजना’ : हाई कोर्ट के आदेश पर SC ने लगाई रोक, केंद्र सरकार से जवाब माँगा

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में आयुष्मान भारत योजना लागू करने के हाईकोर्ट के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। यह फैसला दिल्ली सरकार की याचिका पर आया, जिसमें वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि हाईकोर्ट किसी राज्य सरकार को किसी योजना के एमओयू पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। दिल्ली सरकार ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना में 60% फंड केंद्र और 40% राज्य सरकार को देना है, लेकिन केंद्र आगे के खर्च के लिए बजट नहीं देगा।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने दिल्ली सरकार की याचिका पर सुनवाई के बाद केंद्र, एम्स और दिल्ली नगर निगम को भी नोटिस जारी किया। बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के बाद दिल्ली सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था, जिसमें उसने बताया था कि आयुष्मान भारत योजना को लागू करना पहले से प्रभावी दिल्ली आरोग्य कोष (DAK) योजना को कमजोर करने जैसा होगा।

दिल्ली सरकार ने तर्क दिया था कि उसकी योजना अधिक व्यापक और प्रभावशाली है। आयुष्मान भारत योजना केवल दिल्ली की सीमित आबादी को लाभ पहुँचाएगी, जबकि DAK योजना हर नागरिक को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराती है।

बता दें कि दिल्ली हाई कोर्ट ने पिछले महीने दिल्ली सरकार और केंद्र को निर्देश दिया था कि वे 5 जनवरी तक आयुष्मान भारत योजना को लागू करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करें। कोर्ट ने कहा था कि जब 33 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश इस योजना को लागू कर चुके हैं, तो दिल्ली में इसे न लागू करना उचित नहीं है।

इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने 24 दिसंबर को दिल्ली सरकार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर करने का आदेश दिया था। हालाँकि, दिल्ली सरकार ने इसे लागू नहीं किया है और अपनी दिल्ली आरोग्य कोष योजना को इससे बेहतर बताते हुए इसे प्राथमिकता दी है।

‘चाहे तो नजरबंद कर लो, लेकिन बेल दे दो’… कोर्ट में गिड़गिड़ाया आतंकी अबूबकर, PFI का था सरगना: सुप्रीम कोर्ट ने भगाया, कहा – निचली अदालत जाओ

भारत में प्रतिबंधित आतंकी संगठन ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ का सरगना अबू बकर सुप्रीम कोर्ट के पास मेडिकल ग्राउंड पर बेल लेने गया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसकी इस याचिका को खारिज कर दिया और उसे निचली कोर्ट के पास जाने को कहा। इसके पहले हाई कोर्ट भी उसकी याचिकाओं को खारिज कर चुका है।

गौरतलब है कि अबू बकर को साल 2022 में NIA ने प्रतिबंधित संगठन के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई के दौरान अरेस्ट किया था। उसके बाद से वो जेल में बंद है और बेल पर बाहर आने की कोशिश करता है। उसपर आईपीसी की धारा 120बी और 153ए के अलावा यूएपीए की धारा 17, 18, 18बी, 29, 22बी, 38 और 39 के तहत कार्रवाई हुई है।

पिछले साल भी बेल माँगे जाने पर 12 नवंबर को न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को एक मेडिकल टीम गठित करने का निर्देश दिया था, ताकि अबूबकर की गहन जाँच हो और पता लग सके कि अबूबबकर को मेडिकल ग्राउंड पर बेल मिलनी चाहिए या नहीं।

इसी रिपोर्ट के आधार पर अबूबकर के वकील ने फिर जमानत माँगी लेकिन अतिरिक्त सॉलिस्टर जनरल एसवी राजू ने तर्क दिया कि अबूबकर की सभी समस्याएँ इलाज से ठीक हो गई हैं इसलिए उसे बेल नहीं मिलनी चाहिए। इसके बाद जस्टिस सुंदरेश और राजेश बिंदल की पीठ ने कहा कि वे इस समय चिकित्सा आधार पर जमानत देने के लिए इच्छुक नहीं हैं और याचिकाकर्ता को ट्रायल कोर्ट जाने की स्वतंत्रता दी।

वहीं अबूबकर के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायण ने फिर कहा कि याचिकाकर्ता को घर में नजरबंद रख लिया जाए लेकिन बेल दे दें। इसका भी सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने विरोध किया और सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।