केरल के कोझिकोड में एक ड्रग एडिक्ट युवक ने अपनी अम्मी की हत्या कर दी। वह लगातार अपनी अम्मी से झगड़ता रहता था। उसकी अम्मी ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी के बाद आराम कर रही थी। उसने अपनी अम्मी की हत्या एक हँसिये से की। आरोपित युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह घटना कोझिकोड के थमारास्सेरी में हुई। यहाँ शनिवार को अपनी बहन शकीला के घर में रह रही सुबैदा को उसके 25 वर्षीय बेटे आशिक ने मार दिया। आशिक दिन में ही अपने पड़ोसी के घर से एक हँसिया माँग कर लाया और अम्मी की उससे हत्या कर दी। पड़ोसी जब घटनास्थल पर पहुँचे तो उन्हें खून से लथपथ आशिक दिखाई पड़ा।
आरोपित आशिक अपनी अम्मी सुबैदा से लगातार झगड़ता रहता था। आशिक एक ड्रग एडिक्ट है और वह इसी के लिए पैसे माँगा करता था। सुबैदा कई बार आशिक को नशामुक्ति केंद्र में भेज चुकी थी और इस पर लाखों रूपए भी खर्च कर चुकी थी लेकिन आशिक पर इसका कोई असर नहीं हुआ।
आशिक अपनी अम्मी सुबैदा की सम्पत्ति भी बेचना चाहता था। उसकी अम्मी सुबैदा का हाल ही में ब्रेन ट्यूमर के चलते ऑपरेशन हुआ था और वह वर्तमान में आराम कर रही थी। इसी बीच दोनों के बीच झगड़ा हुआ और उसने अपनी माँ को मार दिया। हालाँकि, यह सामने आया है कि हत्या करने के समय आशिक नशे में नहीं था।
सुबैदा को कुछ साल पहले उसके पति ने छोड़ दिया था और वह खुद काम करके अपने परिवार का गुजारा करती थी। मामले में घटना के बाद पुलिस ने हत्यारे बेटे आशिक को गिरफ्तार कर लिया है और उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करके पूछताछ कर रहे हैं।
पुलिस पूछताछ में उसने अपनी अम्मी की हत्या का कारण ‘उसे जन्म देना’ बताया है। आशिक ने पुलिस से कहा कि वह अपनी माँ को जन्म देने के लिए सजा देना चाहता था, इसीलिए हँसिये से उसकी हत्या कर दी। आशिक सुबैदा का अकेला लड़का था। पुलिस ने मृतका की नमाज ए जनाजा करवा दी है।
लंदन के हरो सिनेमा हॉल ( Harrow cinema London ) में कंगना रनौत की फिल्म इमरजेंसी की स्क्रीनिंग के दौरान खालिस्तानी कट्टरपंथियों ने जमकर हंगामा किया। जानकारी के मुताबिक, यूके की राजधानी लंदन में खालिस्तानी कट्टरपंथियों का ग्रुप अचानक सिनेमा हॉल में घुस आया और ‘इमरजेंसी’ फिल्म का विरोध करते हुए ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाने लगा। इस हंगामे से सिनेमा हॉल में अफरा-तफरी मच गई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हंगामा कर रहे खालिस्तानी समर्थक फिल्म को तुरंत रुकवाने की माँग कर रहे थे। उनका आरोप था कि यह फिल्म सिख समुदाय को गलत तरीके से पेश करती है। इस दौरान सिनेमा हॉल में मौजूद दर्शकों के साथ उनकी तीखी बहस भी हुई। कट्टरपंथी समर्थक फिल्म को रोकने के लिए दबाव बना रहे थे, जबकि दर्शकों ने उनका विरोध किया और फिल्म को जारी रखने की माँग की।
#BREAKING: Khalistani radicals with faces covered storm inside a Cinema Hall in London, UK to disrupt screening of the film #Emergency. Shameful, under watch of UK Govt against freedom of speech. No action taken by British Police. @KanganaTeam@AnupamPKherpic.twitter.com/pKVApwAqUd
घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए हैं, जिनमें यह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि खालिस्तानी समर्थक सिनेमा हॉल के अंदर नारे लगा रहे हैं और दर्शकों से उलझ रहे हैं। इस हंगामे के बावजूद सिनेमा हॉल प्रशासन ने अब तक इस मामले में कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई है। हालाँकि सिनेमा हॉल प्रशासन ने घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएँ न दोहराई जाएँ, इसके लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की जाएगी।
British lawmakers & law enforcement have repeatedly fallen hostage to Islamists & Khalistanis under the notion of human rights & multiculturalism. As highlighted in the @ColinBloom report, this unchecked disproportionate appeasement risks turning these groups into a greater… pic.twitter.com/zZBUb1ujRk
घटना के बाद स्थानीय पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया है और सिनेमा हॉल के सीसीटीवी फुटेज की जाँच शुरू कर दी है। हालाँकि, अब तक किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया गया है। पुलिस का कहना है कि दोषियों की पहचान करने और उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए जाँच जारी है। इस बीच यूके में कम से कम 3 जगहों पर ‘इमरजेंसी’ फिल्म की स्क्रीनिंग रोके जाने की भी रिपोर्ट्स आ रही हैं।
बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और 1970 के दशक में लगाए गए आपातकाल की सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्म इमरजेंसी शुरू से ही विवादों में रही है। फिल्म की कहानी को लेकर सिख संगठनों ने विरोध जताया था। उनका कहना था कि फिल्म में सिख समुदाय को नकारात्मक रूप में दिखाया गया है। इसी वजह से पंजाब में कई सिनेमा हॉल ने इस फिल्म को रिलीज करने से मना कर दिया।
फिल्म की रिलीज पहले सितंबर 2024 में होने वाली थी, लेकिन सेंसर बोर्ड ने इसे प्रमाण पत्र देने से इनकार कर दिया। इसके बाद, फिल्म के निर्माताओं को कुछ बदलाव करने और कट्स लगाने के बाद इसे दोबारा सेंसर बोर्ड के पास जमा करना पड़ा। अंततः फिल्म 17 जनवरी 2025 को रिलीज हुई।
IIT मद्रास के डायरेक्टर प्रोफ़ेसर वी कामकोटी ने गौमूत्र के औषधीय गुणों के की तारीफ़ की है। उन्होंने गौमूत्र से एक साधु का बुखार ठीक होने की घटना भी बताई है। उनके इस बयान के बाद कॉन्ग्रेस और DMK के नेता भड़क गए हैं। उनके इस बयान का तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष के अन्नामलाई ने बचाव किया है।
प्रोफ़ेसर वी कामकोटी ने गौमूत्र की यह तारीफ़ चेन्नई में एक कार्यक्रम में की। यह कार्यक्रम पोंगल के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि गौमूत्र में एंटी बैक्टीरियल, एंटी फंगल और पाचक गुण होते हैं। उन्होंने कहा कि गौमूत्र पेट की समस्याओं के लिए भी अच्छी दवा है। उन्होंने इसके बाकी औषधीय गुण भी बताए।
Madras #IIT Director V Kamakoti speaking in a Pongal festival in Chennai said diseases can be cured quickly by drinking cow urine. Kamakoti addedthat when his father had a fever, drank cow urine on the advice of a sanyasi and the fever subsided after fifteen minutes. he said… pic.twitter.com/JA40Qsicnv
प्रोफ़ेसर कामकोटी ने गौमूत्र की विशेषता बताए हुए कहा इससे बुखार कम होने की बात कही। उन्होंने इस बीच एक सन्यासी का नाम भी लिया। प्रोफ़ेसर कामकोटी ने गौमूत्र के यह गुण आर्गेनिक फार्मिंग के फायदे बताते हुए गिनाए।
उन्होंने कहा, “अगर हम उर्वरकों का खाद का करेंगे तो हम भूमि माता को भूल जाएँगे। जितनी जल्दी हम जैविक, प्राकृतिक खेती की ओर रुख करेंगे, हमारे लिए उतना ही बेहतर होगा।” उन्होंने गोवंश की देशी नस्लों की वकालत भी की और। उन्होंने इसके अर्थव्यवस्था और खेती में महत्व पर भी बात की।
प्रोफ़ेसर कामकोटी के इस बयान पर DMK और कॉन्ग्रेस नेता भड़क गए। कॉन्ग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने इसे झूठा विज्ञान और गलत करार दिया। DMK के एक नेता ने इसे देश में शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने का प्रयास बताया। तमिलनाडु के बाकी पेरियार समर्थक संगठनों ने इस बयान पर माफी की माँग की। उन्होंने प्रदर्शन की भी धमकी दी।
प्रोफ़ेसर कामकोटी के बयान का तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष के अन्नामलाई ने बचाव किया है और इसके राजनीतिकरण ना किए जाने की अपील की है। उन्होंने कहा, “IIT मद्रास के डायरेक्टर क्वांटम फिजिक्स के विशेषज्ञ हैं और वे शीर्ष सरकारी एजेंसियों के सदस्य भी रहे हैं। वह अपनी धार्मिक मान्यताओं और गाय के प्रति सम्मान में दृढ़ हैं, जो कहीं से गलत नहीं है।”
अन्नामलाई ने आगे कहा, “उन्होंने किसी को गाय का मूत्र पीने के लिए मजबूर नहीं किया और केवल अपनी मान्यताओं को व्यक्त किया। हमें ऐसे बयानों का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए। IIT-M के डायरेक्टर तमिलनाडु से हैं, जो हमारे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। मैं उन्हें जानता हूँ और मैं इसका राजनीतिकरण नहीं करना चाहता।”
कश्मीर पंडितों के नरसंहार के 35 साल होने पर बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर ने आज सोशल मीडिया पर एक कविता साझा की। इस कविता में उन्होंने विस्थापित हुए कश्मीरी पंडितों के दर्द बयां किया। कैप्शन में उन्होंने बताया कि ये कविता एक विस्थापित कश्मीरी पंडित सुनयना काचरू की है।
कविता थी- कश्मीरी पंडितों के घर
खूबसूरत डल झील से बस 4-5 किलोमीटर दूर केसर की महक से लबरेज बाजारों से पास ही पशमीना शॉल की दुकान के पीछे पुराने शहर की तंग गलियों में झेलम नदी के बूढ़े गले किनारों पर याद और यादश्त की तारों में उलझे
अधजली चिताओं से घर जो पोस्टकार्ड पर नहीं बिकते न फिल्मों में दिखते हैं ये भी तो कश्मीर ही है न
खिड़कियों के टूटे हुए चुभते शीशे पुश्तैनी छतों से रिसते हुए पानी की छीटों से नम बूढ़ी यादें आँगन पर कब्जा किए हुए दीमक लगे मौसम, खुद से टकराती धूप ऐसे गुजरती हैं यहाँ से जैसे रातों के सन्नाटों को चीर मौत सूँघ का निकली हो यहाँ से कभी गुजरना कश्मीरी पंडितों के मुहल्लों से भी बिलखती हुई कहानी पैर पकड़ लेगी यतीमखानों में फँसे बच्चे की तरह जिसे न कोई अपनाता है न इंसाफ दिलाता है
19th January, 1990. #KashmirHindus Exodus Day! It has been 35 Years since more than 500000 Hindus were brutally thrown out of their homes. Those homes are still there. But haunted and forgotten! #SunayanaKachrooBhide a victim of this tragedy has written heartbreaking poem about… pic.twitter.com/4U5OPXQxyK
इस कविता पाठ को करते हुए अनुपम खेर ने कैप्शन में लिखा- “19 जनवरी, 1990 कश्मीरी हिंदुओं का पलायन दिवस। 35 साल हो गए हैं, जब 5,00,000 से ज्यादा हिंदुओं को उनके घरों से बेरहमी से निकाल दिया गया था। वे घर अभी भी वहीं हैं, लेकिन उन्हें भुला दिया गया है। वे खंडहर हैं। इस त्रासदी की शिकार सुनयना काचरू भिडे ने उन घरों की यादों के बारे में दिल छूने वाली एक कविता लिखी। कविता की ये पंक्तियाँ उन सभी कश्मीरी पंडितों को वह मंजर याद दिला देंगी, जो इस भीषण त्रासदी के शिकार हुए थे। यह दुखद और सत्य दोनों है।”
बता दें कि अनुपम खेर ने कश्मीरी पंडितों के नरसंहार पर बनी ‘द कश्मीर फाइल्स’ में भी अहम रोल निभाया था। फिल्म में दिखाया गया था कि कैसे इस्लामी आतंकियों के कारण लाखों कश्मीरी हिंदू परिवारों को अपनी जमीन और संपत्ति छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था। वहीं सैंकड़ों कश्मीरी पंडित मारे गए थे।
द लल्लनटॉप के संपादक ‘पत्रकार’ सौरभ द्विवेदी ने 18 जनवरी को कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी के विवादित बयान का बचाव करने की कोशिश की, लेकिन उनका यह प्रयास उल्टा पड़ गया। दरअसल, राहुल गाँधी ने हाल ही में भारतीय राज्य (Indian State) के खिलाफ अपनी लड़ाई की बात कही थी, जिस पर विवाद हो गया था। इस मामले में लल्लनटॉप के संपादक सौरभ द्विवेदी ने बीजेपी को ही घेरने की कोशिश की और राहुल गाँधी के बयान का बचाव किया। ये अलग बात है कि शो में मौजूद राजनीतिक विश्लेषक रजत सेठी ने उन्हें आईना दिखाने में देरी नहीं की, जिसके बाद सौरभ द्विवेदी अपने दावे से पीछे हटते नजर आए।
राहुल गाँधी के बयान और बीजेपी के हमलों के बीच सौरभ द्विवेदी ने 18 जनवरी को अपने शो ‘नेता नगरी’ में राजनीतिक विश्लेषक रजत सेठी के साथ बातचीत के दौरान राहुल गाँधी का बचाव किया। सौरभ ने कहा, “जेपी नड्डा कह रहे हैं कि राहुल गाँधी ने भारत के खिलाफ लड़ाई की बात की है। जबकि राहुल गाँधी ने अपने भाषण में भारतीय सरकार (Indian Government) के खिलाफ लड़ाई का जिक्र किया था। भाजपा उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश कर रही है।” सौरभ ने दावा किया कि राहुल गाँधी ने ‘बीजेपी, आरएसएस और भारतीय सरकार के खिलाफ’ लड़ाई की बात कही।
हालाँकि, रजत सेठी ने सौरभ द्विवेदी की इस बात को तुरंत गलत ठहराया। उन्होंने कहा, “सौरभ जी, राहुल गाँधी ने भारतीय सरकार नहीं, बल्कि भारतीय राज्य (Indian State) का जिक्र किया था। उन्होंने यह बयान अंग्रेजी में दिया था और उनके शब्द साफ-साफ थे।”
रजत सेठी ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, “भारतीय राज्य का मतलब भारतीय संविधान, उसकी संस्थाएँ और उसकी संरचना से है। राहुल गाँधी ने जो कहा, वह एक बड़ी चूक हो सकती है, लेकिन इसके निहितार्थ गंभीर हैं। अगर कोई भारतीय राज्य के खिलाफ बोलता है, तो यह देशद्रोह के दायरे में आता है। राहुल गाँधी ने अपने भाषण में यह भी कहा कि उनकी लड़ाई और युद्ध भारतीय राज्य के खिलाफ है। वो कोई आम आदमी नहीं, बल्कि लोकसभा में विपक्ष के नेता हैं।”
सौरभ द्विवेदी ने आखिरकार रजत सेठी की बात मानते हुए कहा, “हाँ, राहुल गाँधी ने अपने बयान में भारतीय सरकार नहीं, बल्कि भारतीय राज्य कहा था। यह मेरे द्वारा दी गई जानकारी में गलती थी।”
Lallantop's Saurabh Dwivedi translates Rahul's statement "….Fight against INDIAN STATE" into Hindi as 'Fight against Indian Govt'.
~ Rajat Sethi quickly reminds him of the original quote. He then accepts
— The Analyzer (News Updates?️) (@Indian_Analyzer) January 18, 2025
क्या है पूरा मामला?
14 जनवरी को नई दिल्ली में कॉन्ग्रेस के नए हेडक्वार्टर के उद्घाटन के अवसर पर राहुल गाँधी ने अपने संबोधन में कहा, “यह मत सोचिए कि हम एक निष्पक्ष लड़ाई लड़ रहे हैं। अगर आप यह मानते हैं कि हम भाजपा और आरएसएस जैसे एक राजनीतिक संगठन से लड़ाई लड़ रहे हैं, तो यह सही नहीं है। उन्होंने देश की लगभग हर संस्था पर कब्जा कर लिया है। अब हम सिर्फ भाजपा और आरएसएस से नहीं, बल्कि भारतीय राज्य (Indian State) से लड़ रहे हैं।”
Mohan Bhagwat’s audacious comment that India didn’t gain true independence in 1947 is an insult to our freedom fighters, every single Indian citizen and an attack on our Constitution. pic.twitter.com/6sMhdxn3xA
राहुल गाँधी के इस बयान पर भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “राहुल गाँधी खुलकर देश के खिलाफ बोल रहे हैं। यह कॉन्ग्रेस की मानसिकता को दिखाता है, जो देश के खिलाफ षड्यंत्र कर रही है।”
बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा, “राहुल गाँधी का यह बयान देश के खिलाफ है। भारतीय राज्य का मतलब संविधान और उसकी संरचनाओं से है। ऐसे में राहुल गाँधी का यह बयान संविधान का अपमान है। कॉन्ग्रेस को इस पर तुरंत सफाई देनी चाहिए।”
बहरहाल, राहुल गाँधी के ‘भारतीय राज्य से लड़ाई’ वाले बयान ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। भाजपा इसे देशविरोधी बयान करार दे रही है, जबकि कॉन्ग्रेस इसे भाजपा और आरएसएस के खिलाफ लड़ाई का हिस्सा बता रही है। इस विवाद में सौरभ द्विवेदी का राहुल गाँधी का बचाव करना और फिर अपनी गलती मानना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि इस बयान का आगामी चुनावों में कॉन्ग्रेस और राहुल गाँधी पर क्या असर पड़ता है।
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज महाकुंभ मेले में रविवार (19 जनवरी 2025) को आग लग गई। कहा जा रहा है कि यह आग खाना बनाते समय एक टेंट में लगी और यह दूसरे टेंटों में भी फैल गई। इसके कारण टेंटों में रखे गैस सिलेंडरों में लगातार ब्लास्ट हुए। कहा जा रहा है कि अब तक लगभग 20-25 (कुछ रिपोर्ट में 50) टेंट जल चुके हैं। मौके पर दमकल की कई गाड़ियाँ बुलाई गई हैं। हालात फिलहाल नियंत्रण में है।
प्रयागराज महाकुंभ में भीषण आग से टेंटों में रखे सिलेंडर बम की तरह ब्लास्ट हुए। 20 से 25 टेंट जल गए हैं। यह आग अखाड़े से आगे वाली सड़क पर लोहे के ब्रिज के नीचे आग लगी है। मौके पर फायर बिग्रेड रवाना हो गई है।कुंभ मेले में भीषण आग लगी । आज सीएम भी मेले में ही थे #MahaKumbhMela2025… pic.twitter.com/ycm34pblS3
यह आग अखाड़े से आगे वाली सड़क पर लोहे के एक ब्रिज के नीचे लगी। यह घटना कुंभ मेले के सेक्टर-19 इलाके में हुई है। पूरे इलाके को सील कर दिया गया है। वहाँ हवा तेज चलने के कारण आग के और फैलने का खतरा बना हुआ है। कुछ लोगों के झुलसने की बात भी कही जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद हालात का जायजा लेने के लिए खुद महाकुंभ क्षेत्र में पहुँचे हुए हैं।
आग के कारण आसमान में धुएँ का गुबार दिखाई दे रहा है। कहा जा रहा है कि जिस शिविर में आग लगी वह धर्म संघ का शिविर है। इस आग में अब तक 50 से अधिक शिविर जलने की बात कही जा रही है। सेक्टर-20 में स्थित गीता प्रेस गोरखपुर का शिविर भी चपेट में आ गया है। मौके पर एनडीआरएफ की 4 टीमें, फायर ब्रिगेड की 12 से अधिक गाड़ियाँ और एंबुलेंस मौके पर पहुँच गई हैं।
एक अन्य रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि विवेकानंद सेवा समिति वाराणसी के टेंट में खाना बनाते हुए आग लगी है। हालाँकि, असली वजह का पता किया जा रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि अब तक 20 से अधिक सिलेंडर ब्लास्ट हो चुके हैं। हालात को सँभालने के लिए वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुँच गए हैं। इनमें मेलाधिकारी विजय किरण आनंद और मेला क्षेत्र के SSP राजेश द्विवेदी भी शामिल हैं।
राजेश द्विवेदी का कहना है कि सेक्टर-19 में गीता प्रेस के कैंप में आग लगी थी। आग पर काबू पर लिया गया है। उन्होंने कहा कि कोई कैजुअल्टी नहीं हुई है। बता दें कि टेंटों के जलने, सिलेंडर ब्लास्ट होने और फायर ब्रिगेड की गाड़ियों की संख्या को लेकर अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट में अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।
Fire at #MahaKumbhMela2025 | Ravindra Kumar, DM, Prayagraj says, "The fire broke out at 4.30 pm in sector 19 in the tent of Gita press. The fire spread to the nearby 10 tents. The police and administration team reached the spot. The fire has been extinguished. There is no… pic.twitter.com/YTx4QjGMF6
वहीं, प्रयागराज के डीएम रविंद्र कुमार ने बताया, “सेक्टर 19 में गीता प्रेस के टेंट में शाम 4.30 बजे आग लग गई। आग आस-पास के 10 टेंटों में फैल गई। पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई है। आग बुझा दी गई है। किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है। स्थिति नियंत्रण में है…।”
#WATCH | Fire at #MahaKumbhMela2025 | Prayagraj, UP: Maha Kumbh Mela DIG, Vaibhav Krishna says, "…The fire broke out in tents of Gita Press. There are no reports of any casualties. A survey is being conducted to ascertain the damage caused by the fire. The fire has been brought… pic.twitter.com/4J9lCyr6TU
वहीं, महाकुंभ मेला डीआईजी वैभव कृष्ण ने कहा, “गीता प्रेस के टेंट में आग लग गई। किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है। आग से हुए नुकसान का पता लगाने के लिए सर्वेक्षण किया जा रहा है। आग पर काबू पा लिया गया है। यह जाँच का विषय है (आग की घटना के पीछे का कारण)। केवल टेंट और कुछ चीजें जली हैं।”
कॉन्ग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गाँधी शनिवार (18 जनवरी 2025) को एकदिवसीय दौरे पर बिहार की राजधानी पहुँचे। यहाँ उन्होंने एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया और बिहार के महागठबंधन के सबसे बड़े सहयोगी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के मुखिया लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और उनके बेटे तेजस्वी यादव से मुलाकात की। इस दौरान राहुल गाँधी ने एक कार्यक्रम में कुछ ऐसा बोल दिया कि बिहार की राजनीति का तापमान बढ़ गया।
‘संविधान सुरक्षा सम्मेलन’ में बोलते हुए राहुल गाँधी ने कहा कि बिहार की जातीय जनगणना फेक है और लोगों को बेवकूफ बनाने वाला है। इससे सच्ची स्थिति का आकलन नहीं हो पाया है और ना ही इसका लाभ राज्य के लोगों को मिला है। राहुल गाँधी ने कहा कि वह पूरे देश में जाति गणना कराने के लिए लोकसभा और राज्यसभा में कानून पास कराएँगे। उन्होंने इसे देश का एक्स-रे और एमआरआइ जैसा बताया।
राहुल गाँधी ने कहा कि इसके आधार पर राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक भागीदारी तय की जाएगी। वर्तमान में किसकी कितनी भागीदारी है, इसका आकलन होने के बाद ही देश का सही तरीके से विकास संभव है। उन्होंने आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी देने का समर्थन किया। राहुल गाँधी ने आरक्षण की सीमा को भी 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ाने की बात कही और कहा कि वे ऐसा जरूर करेंगे।
राहुल गाँधी ने बिहार की जातीय गणना को फेक बताकर बिहार की राजनीति में दबाव बना दिया है। दरअसल, राहुल गाँधी ने पटना में तय कार्यक्रम को उलट दिया। वे पहले बापू सभागार में आयोजित ‘संविधान सुरक्षा सम्मेलन’ में बोलने वाले थे। उसके बाद राजद के नेताओं से मिलने वाले थे, लेकिन एयरपोर्ट से वे सीधे मौर्या होटल पहुँचे और वहाँ राजद के कार्यकारिणी की बैठक के बीच तेजस्वी यादव से काफी देर तक बंद कमरे में बातचीत की। हालाँकि, यह मुलाकात और वो भी इतनी जल्दी में करने की क्या वजह थी, इसको लेकर स्पष्ट रूख नहीं है।
हालाँकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गाँधी की यह मुलाकात कुछ दिन पहले तेजस्वी यादव द्वारा INDI गठबंधन को लेकर दिए बयान के संदर्भ में थी। दरअसल, बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने कुछ दिन पहले कह दिया था कि इस चुनाव में कोई ‘खेला’ नहीं होगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि लोकसभा चुनाव के लिए बने ‘INDI’ गठबंधन का अब अस्तित्व नहीं है। हालाँकि, बिहार में ‘महागठबंधन’ की प्राथमिकता पर उन्होंने बल दिया।
INDI गठबंधन के खत्म होने के लेकर पहले भी बयानबाजी होती रही है। राजद सुप्रीमो बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस बयान का समर्थन कर चुके हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि राहुल गाँधी से INDI गठबंधन नहीं संभल रहा है और वे इसका नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं। तब लालू यादव ने खुलेआम ममता बनर्जी की तरफदारी की थी और कहा था कि उन्हें मौका दिया जाना चाहिए।
ऐसे में राहुल गाँधी की पटना यात्रा के दौरान माना जाता है कि उनकी तेजस्वी यादव के साथ इसी मुद्दे पर लंबी चर्चा हुई। इसमें INDI गठबंधन के अस्तित्व को नकारने और जरूरत पड़ने की गठबंधन का नेतृत्व ममता बनर्जी को देने को लेकर भी चर्चा है। जानकारों का कहना है कि तेजस्वी यादव अपने बयान पर अडिग रहे और उन्होंने राहुल गाँधी को कोई स्पष्ट भरोसा नहीं दिया और पूरा फोकस बिहार विधानसभा चुनाव पर रखने की बात कही।
यह बात राहुल गाँधी को नहीं जँची। वहाँ से निकल राहुल गाँधी संविधान सुरक्षा सम्मेलन में पहुँचे और तेजस्वी यादव के जाति जनगणना के दावे की हवा निकाल दी। राहुल गाँधी ने बिहार की जातीय सर्वे को फेक बता दिया। इस जातीय गणना का पूरा श्रेय लेने की कोशिश तेजस्वी यादव करते रहे हैं। ये कई मौकों पर कह चुके हैं कि उनके दबाव में ही तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में जातीय जनगणना कराई थी।
बिहार की जातीय गणना को फेक बताकर राहुल गाँधी ने एक तीर से दो शिकार करने की कोशिश की है। एक तरफ वो दलित एवं पिछड़ों में ये संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि नीतीश कुमार और तेजस्वी द्वारा कराया गया जातीय सर्वे में आँकड़े सही नहीं हैं और दूसरा तेजस्वी यादव द्वारा इस गणना का श्रेय लेने की कोशिश पर भी पानी फेर दिया है। वहीं, नीतीश कुमार के हाथ से भी इस मुद्दे को छीन लिया है।
दरअसल, जिस वक्त नीतीश कुमार की जदयू और तेजस्वी का राजद की गठबंधन वाली सरकार ने यह जातीय गणना कराया था, उस सरकार में राहुल गाँधी की कॉन्ग्रेस भी सहयोगी थी। इसके बावजूद उन्होंने इस पर सवाल उठा दिया है। दरअसल, इसके पीछे राहुल गाँधी की कॉन्ग्रेस के कभी समर्पित वोटर रहे दलितों में पार्टी की स्वीकार्यता बढ़ाने की कोशिश के तौर पर बनाई गई रणनीति भी माना जा रहा है।
ऐसे में अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा करके इनके दो प्रमुख नेतृत्वों पर निशाना साध रहे हैं। इनमें पहला निशाना नीतीश कुमार हैं और दूसरा तेजस्वी यादव। एक अन्य कारण अगले कुछ महीनों में होने वाले बिहार विधानसभा चुनावों में टिकट बँटवारे को लेकर दबाव बनाने की राजनीति भी है। पिछले कुछ समय से मीडिया में लगातार खबर आ रही है कि कॉन्ग्रेस बिहार चुनाव में उसे अधिक सीटें देने का दबाव बना रही है।
शायद INDI गठबंधन को नकार कर तेजस्वी यादव यही संदेश देने की कोशिश कर रहे थे कि राष्ट्रीय स्तर पर कॉन्ग्रेस का कोई सहयोगी नहीं, लेकिन में वहीं उसकी नैया पार कराने वाली पार्टी है। इसलिए जो सीटें दी जा रही हैं वे उसे स्वीकार कर लें। हालाँकि, राहुल गाँधी ने अपने बयान में तेजस्वी यादव के मुख्य मुद्दे पर प्रहार करके उन्हें राजनीति के मैदान में शस्त्रविहीन कर दिया है।
बता दें कि तेजस्वी ने जातीय गणना को ही बिहार चुनावों में मुख्य मुद्दे के रूप में पेश करने की बात कही थी। तेजस्वी यादव नेे कहा था, “हमने विकास के साथ-साथ जाति आधारित गणना कराई और आरक्षण की सीमा भी बढ़ाई। हमने जो कहा, वह किया।” दरअसल, जल्दबाजी में पिछली सरकार ने बिहार में आरक्षण की सीमा को 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 65 प्रतिशत कर दिया था, जिस पर पटना हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है।
बिहार में जातीय गणना की बात राहुल गाँधी ने बहुत सोच-समझ कर की है। उन्हें पता है कि बिहार में चुनाव का मुख्य केंद्र जाति ही होती है। जातीय गोलबंदी के आधार पर ही यहाँ टिकट के बँटवारे से लेकर गठबंधन तक की राजनीति होती है। ऐसे में तेजस्वी यादव पर एक तरह महागठबंधन को सम्मानजनक तरीके से बनाए नैतिक भार डाल दिया है।
हत्या, अपहरण, लव जिहाद, धर्मांतरण, गोतस्करी, गोहत्या… ऐसे तमाम अपराधों के लिए कुख्यात मेवात (जो मुख्य रूप से हरियाणा के नूंह, राजस्थान के अलवर, भरतपुर और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में फैला हुआ है) एक बार फिर चर्चा में है।
कारण दैनिक भास्कर में प्रकाशित एक रिपोर्ट है। इस रिपोर्ट में दो महिला पत्रकारों ने जमीन पर उतरकर इस क्षेत्र में रहने वाली लड़कियों के जीवन की उस हकीकत को बयान किया है जिसकी कल्पना मेवात इलाके से बाहर रहने वाले कर भी नहीं सकते। रिपोर्ट मुख्यत: अलवर के मेवात इलाके से जुड़ी है।
सोचकर देखिए, सुनकर ही कैसा लगता है कि घर की दहलीज तक जाने के लिए छोटी-छोटी बच्चियों को चेहरे पर नकाब लगाना पड़े या बाहर जाने के लिए लड़कियाँ अपने कपड़े छोड़कर लड़कों वाले कपड़े पहनें ताकि किसी की नजर उनपर न पड़े और उनके साथ कोई अनहोनी न हो। दिन की रौशनी में लड़कियाँ मुँह ऐसे ढककर घूमें जैसे अगर पर्दा हटा तो कुछ भी हो सकता है।
प्रेरणा साहनी और पूजा शर्मा की यह रिपोर्ट यही बताती है कि दिन के उजालों में पसरा सन्नाटा ही इलाके की असली तस्वीर है। डर और बेचैनी से भरे माहौल में दूर तक चलते हुए जब दोनों पत्रकारों को एक बुजुर्ग महिला मिलीं तो उन्होंने बताया कि उनके घर में 4 पोतियाँ लेकिन वह चारों को लड़के वाले कपड़े पहनाती हैं ताकि जब कोई उन्हें देखे तो लड़का ही समझे, वो यही कपड़े पहनकर आती-जाती हैं।
दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर
इसके अतिरिक्त जो घर इन पत्रकारों को दिखे उनमें कपड़े बाहर निकली धूप में सूखने की बजाय भीतर टँगे मिले। सवाल किया तो पता चला कि ऐसा इसलिए ताकि किसी को ये मालूम न चले कि इस घर में लड़कियाँ है। सोच सकते हैं कि इलाके में रहने वाले लोग लड़कियों को बाहर के माहौल से बचाए रखने के लिए कितने प्रयत्न करते हैं।
ऐसा भी नहीं है कि मेवात के इलाकों में लड़कियाँ बाहर नहीं निकलती… बाहर निकलती हैं लेकिन पहला झुंड में, दूसरा अपना मुँह पूरी तरह से ढककर। कहीं आना जाना होता है तो ये लड़कियाँ उन टैम्पो का इंतजार करती हैं जो भरे हों, क्योंकि खाली टैम्पो में बैठने से लड़कयों को डर रहता है कि कहीं कोई अकेला पाकर कुछ गलत न कर दे।
लड़कियों की सुरक्षा के यहाँ ये हाल हैं कि घर की चारदीवारी में जब बेटियाँ होती हैं तब भी घर के पुरुषों को बाहर रहकर उनकी रक्षा करना पड़ती है। शायद उन्हें ऐसा लगता हो कि कहीं दरवाजे से हटने पर कोई जबरन घर में घुस बेटियों को शिकार न बना ले। घरवालों के मन में बच्चियों की सुरक्षा का डर ऐसा है कि उनकी शादी 14 साल की उम्र से पहले कर दी जाती है।
मेवात क्षेत्र में लड़कियों की सुरक्षा को लेकर पसरा यह भय निराधार ही नहीं है। मेवात के ग्रामों पर बनी रिपोर्ट में स्थानीयों के अलावा पूर्व सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ रवि माथुर का भी बयान है। डॉ माथुर कहते हैं कि उनके पास तो साल में रेप के ढाई सौ से ज्यादा मामले आते थे। हैवानियत के किस्से ऐसे होते थे कि दरिंदे जानवरों को भी नहीं छोड़ते थे।
डॉक्टर के अतिरिक्त इलाके की डिप्टी एसपी (स्पेशनल इन्वेस्टिगेशन यूनिट फॉर क्राइम अगेंस्ट विमन इंचार्ज) डॉ पूनम चौहान ने कहा कि उन्होंने कुछ ही माह में 70 से ज्यादा पॉक्सो के मामले देखे हैं। डिप्टी एसपी मानती हैं कि ये हालात तब तक नहीं बदलेंगे जब लड़कों को समझा, सिखाकर संवेदनशील नहीं बनाया जाएगा।
क्षेत्र के हालातों के परखने के बाद जब दोनों महिला पत्रकार उन क्षेत्रों की ओर बढ़ने चलीं जहाँ से रेप के मामले सबसे ज्यादा आए- जैसे रामदढ़, नौगाँव आदि तब उन्हें भी सलाह दी गई कि वो लोग रात के अंधेरे में उस तरफ न जाएँ क्योंकि वहाँ खतरा बहुत ज्यादा है।
सोच सकते हैं कि अंजान महिलाओं को लेकर इतनी चिंता में रहने में ग्रामीण अपने घर की बहन-बेटियों को कैसे रखते होंगे और उनकी चिंता में कैसे दिन-रात बीतती होगी…।
मेवात से बाहर रहने वालों को शायद ये बातें अतिश्योक्ति भरी लगें या दिमाग में ऐसा आए कि ये सब हो कैसे सकता है… लेकिन हकीकत वही जानतें है जो स्थानीय हैं।
मेवात के हाल और बढ़ती मुस्लिम आबादी
मेवात के हालात समझने के लिए पुरानी खबरें पढ़िए। ये इलाका पहली दफा चर्चा में नहीं आया है। इसकी पूरी टाइमलाइन पुरानी है।
इंटरनेट पर केवल क्षेत्र का नाम डाल देने भर से तमाम घटनाएँ निकलकर सामने आती हैं जो सोचने पर मजबूर करती हैं कि ऐसा आखिर यहाँ क्या है जो अपराध घटने की बजाय बढ़ते जा रहे हैं… फिर नजर यहाँ के डेमोग्राफी और एक ही पैटर्न में घटती घटनाओं पर जाती है, तब जाकर समझ आता है कि समस्या आखिर है कहाँ।
याद हो अगर साल 2020 में भी मेवात की खबरें चर्चा में आई थीं जिन्होंने सबको चौंका दिया था। उसी समय इलाके की जनसंख्या को लेकर खूब चर्चा हुई थी। चिंता जताई गई थी कि कैसे हिंदुओं की आबादी इन इलाकों से कम हो रही है और मुस्लिम बढ़ रहें हैं… फिर धर्मांतरण, लव जिहाद, मारपीट, पलायन की घटनाएँ पता चली थीं।
हरियाणा के मेवात में हिंदूविहिन गाँवों पर रिपोर्ट
जस्टिस पवन कुमार की अगुवाई में जाँच समिति ने एक रिपोर्ट बनाकर ये बताया था कि कैसे मुस्लिम बहुल मेवात हिंदुओं खासकर दलितों के लिए कब्रिस्तान बनता जा रहा है। उन्होंने कहा था कि समुदाय विशेष (बहुसंख्यक आबादी) का अल्पसंख्यकों पर अत्याचार इतना भीषण है कि जिले के करीब 500 गाँवों में से 103 गाँव ऐसे हैं जो हिंदू विहीनहो चुके हैं। 84 गाँव ऐसे हैं जहाँ अब केवल 4 या 5 हिंदू परिवार ही शेष हैं।
उसी रिपोर्ट में बताया गया था कि मेवात में महिलाओं को अगवा करना, दुष्कर्म और जबरन धर्म परिवर्तन की कई घटनाएँ वैसे ही सामने आए हैं, जैसी खबरें पाकिस्तान से आती रहती है। इन्हीं घटनाओं की वजह से उस समय मेवात को मिनी पाकिस्तान तक कहकर चलाया गया था।
मेवात की जनसंख्या
आज भी आँकड़े यही बताते हैं कि मेवात जिले की जनसंख्या वैसी ही है। आधिकारिक जनगणना 2011 और 2025 की जनसंख्या डेटा से पता चलता है कि यहाँ कि सबसे अधिक आबादी मुस्लिमों की है। जनगणना 2011 के अनुसार, मेवात की आबादी में मुस्लिमों की हिस्सेदारी 79.20 फीसद है और यहाँ हिंदुओं की आबादी मात्र 20.37% है।
मेवात से आई कुछ खबरें
2024 के नवंबर में ही यहाँ पुलिस ने 100+ गोवंशों को तस्करों के चंगुल से छुटाया था। 2024 की ही एक खबर है जो बताती है कि मेवात में सरकारी ट्यूबवेल से दलितों के पानी भरने पर मुस्लिम महिलाओं ने उन्हें किस कदर पीटा था। हिंदुओं की जलाभिषेक यात्रा पर मेवात में हमला करने की बात हो या पुलिस पर इस्लामी भीड़ का अटैक करना… ये सारी घटनाएँ इन इलाकों से आती रही हैं। इसके अलावा दलितों के उत्पीड़न के अनेक मामले ढूँढने पर पता चल जाएँगे।
आखिर में, ये बात बिलकुल सच है कि समाज में हो रहे दुष्कर्म के मामलों में कमी तभी आएगी जब लोगों की सोच में न बदलाव आए, लेकिन मेवात जैसे इलाकों में ये सोच कैसे बदलेगी ये ज्यादा सोच का विषय है।
मुंबई में बीसीसीआई मुख्यालय में शनिवार (18 जनवरी 2025) को चयन समिति की एक अहम बैठक हुई, जिसमें 2025 में पाकिस्तान और दुबई में होने वाली चैंपियंस ट्रॉफी और इंग्लैंड के खिलाफ आगामी वनडे सीरीज के लिए भारतीय टीम का चयन किया गया। हालाँकि टीम के अधिकांश नाम पहले से तय थे, लेकिन चर्चा का केंद्र हार्दिक पांड्या और शुभमन गिल को लेकर उपकप्तानी का मुद्दा रहा। यह मीटिंग ढाई घंटे तक चली और चयनकर्ताओं, कोच और कप्तान के बीच गंभीर मतभेद सामने आए।
हार्दिक और शुभमन के बीच उपकप्तानी को लेकर टशन!
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने हार्दिक पांड्या को रोहित शर्मा का डिप्टी बनाए जाने की सिफारिश की थी। उनका मानना था कि हार्दिक पांड्या की कप्तानी के अनुभव और ऑलराउंडर के तौर पर उनके योगदान को देखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। लेकिन दूसरी तरफ कप्तान रोहित शर्मा और मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर शुभमन गिल के नाम पर अड़े रहे। रोहित का तर्क था कि शुभमन गिल युवा हैं और उन्होंने पिछले एक साल में वनडे क्रिकेट में लगातार शानदार प्रदर्शन किया है।
हार्दिक पांड्या को लेकर तेजी से बदले समीकरण
बता दें कि हार्दिक पांड्या वनडे और टी-20 दोनों फॉर्मेट्स में पहले उपकप्तान रह चुके हैं। 2023 में भारत में हुए वनडे वर्ल्ड कप के दौरान वह रोहित शर्मा के साथ डिप्टी थे। हालाँकि चोट के कारण हार्दिक टूर्नामेंट के बीच से बाहर हो गए थे, जिसके बाद केएल राहुल ने उनकी जगह ली थी।
इस बीच, दिसंबर 2023 में मुंबई इंडियंस ने हार्दिक को अपनी फ्रेंचाइजी का कप्तान बनाया, जो रोहित शर्मा की जगह पर थी। दिग्गज खिलाड़ियों समेत फैन्स ने रोहित शर्मा की खूब धज्जियाँ उड़ाई, जिसके बाद से समीकरण बदलने लगे।
हालात ये बन गए कि इसके बाद भारत ने दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका के खिलाफ जो वनडे सीरीज खेली, उसमें शुभमन गिल को उपकप्तान बना दिया गया। इसी लाइन पर चलते हुए ही इस बार भी शुभमन गिल को उपकप्तानी सौंपी गई है। साथ ही ये भी बात अहम है कि वो सभी फॉर्मेट में टीम इंडिया के खेल रहे हैं। वहीं, हार्दिक पांड्या लगातार चोटों से जूझते रहे हैं और वो टेस्ट मैचों में नहीं खेलते।
संजू सैमसन और ऋषभ पंत को लेकर भी चयन समिति में मतभेद
उपकप्तानी के अलावा, टीम के विकेटकीपर को लेकर भी चयन समिति में असहमति देखने को मिली। मुख्य कोच गौतम गंभीर ने संजू सैमसन को टीम में जगह देने का समर्थन किया। उन्होंने तर्क दिया कि संजू ने टी-20 में एक कैलेंडर वर्ष में तीन शतक लगाए हैं और उनका अनुभव टीम के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। लेकिन चयन समिति ने ऋषभ पंत को तरजीह दी और केएल राहुल को बैकअप विकेटकीपर के रूप में टीम में शामिल किया। इस टीम में करुण नायर जैसे खिलाड़ियों की अनदेखी करना भी बड़ी चर्चा का विषय रहा है।
बीसीसीआई में बढ़ रहा मतभेद?
चयन समिति की इस बैठक में बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारियों के बीच मतभेद स्पष्ट नजर आए। टी-20 कप्तानी को लेकर भी रोहित शर्मा, चयन समिति और बोर्ड के बीच पहले भी असहमति देखी गई है। 2024 में रोहित ने वेस्टइंडीज में टी-20 वर्ल्ड कप जिताने के बाद इस फॉर्मेट से संन्यास लिया था। इसके बाद हार्दिक को टी-20 टीम की कप्तानी दी जानी थी, लेकिन सूर्यकुमार यादव को यह जिम्मेदारी दी गई।
बता दें कि ऑस्ट्रेलिया दौरे पर 2 टेस्ट मैच गवाँ देने के बाद आखिरी टेस्ट मैच से रोहित शर्मा ने खुद को बाहर कर लिया था। इसके बाद खबरें आई थी कि वो संन्यास ले सकते हैं। हालाँकि सिडनी टेस्ट के दौरान रोहित शर्मा ने स्टार स्पोर्ट्स पर इरफान पठान के साथ बातचीत में साफ किया था कि वो संन्यास नहीं ले रहे। इसके बाद गौतम गंभीर की नाराजगी की खबरें भी सामने आई थी।
इस बाद अभी 1 सप्ताह पहले हुई बीसीसीआई की बैठक के बाद भारतीय टीम के खिलाड़ियों के लिए कई नियम बनाए गए हैं, जिसमें विदेशी दौरों पर उनके परिवारों की उपस्थिति भी सीमित कर दी गई है।
इंग्लैंड सीरीज और चैंपियंस ट्रॉफी के लिए टीम का ऐलान
बहरहाल, बीसीसीआई की बैठक भले ही ढाई घंटे तक चली हो, लेकिन अंत में चैंपियंस ट्रॉफी और इंग्लैंड सीरीज के लिए टीम की घोषणा कर दी गई। कप्तानी रोहित शर्मा के पास बरकरार रही, तो उपकप्तानी शुभमन गिल को सौंप दी गई।
भारतीय टीम इस प्रकार है: रोहित शर्मा (कप्तान), शुभमन गिल (उपकप्तान), विराट कोहली, श्रेयस अय्यर, केएल राहुल, हार्दिक पांड्या, अक्षर पटेल, वाशिंगटन सुंदर, कुलदीप यादव, जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी, अर्शदीप सिंह, यशस्वी जायसवाल, रिषभ पंत, रवींद्र जडेजा। तेज गेंदबाज हर्षित राणा को सिर्फ इंग्लैंड सीरीज के लिए टीम में शामिल किया गया है।
टीम चयन पर उठ रहे सवाल
इस पूरी प्रक्रिया ने टीम चयन के पीछे मौजूद राजनीति और मतभेदों को उजागर कर दिया है। कोच और चयन समिति के बीच तालमेल की कमी और खिलाड़ियों के चयन में एकमत नहीं होने की वजह से कई बार टीम के प्रदर्शन पर भी असर पड़ता है। अब देखना यह होगा कि यह टीम इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज और चैंपियंस ट्रॉफी 2025 में कैसा प्रदर्शन करती है।
भारत और बांग्लादेश के बीच सीमा पर तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है, क्योंकि बांग्लादेश ने त्रिपुरा के कैलाशहर इलाके में जीरो पॉइंट पर एक स्थायी नदी तटबंध का निर्माण शुरू कर दिया है। यह निर्माण बांग्लादेश के मौलवीबाजार जिले और त्रिपुरा के उनाकोटी जिले के कैलाशहर सब-डिवीजन के बीच हो रहा है। यह क्षेत्र भारतीय सीमा से बहुत करीब है और ऐसे में तटबंध निर्माण से भारतीय इलाके में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
त्रिपुरा के उनाकोटी जिले के मजिस्ट्रेट दिलीप कुमार चकमा ने शुक्रवार (17 जनवरी 2025) को अधिकारियों के साथ इस निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। इसके बाद दिलीप कुमार चकमा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि बांग्लादेश द्वारा तटबंध की ऊँचाई बढ़ाने से त्रिपुरा के कैलाशहर क्षेत्र में बाढ़ के पानी का दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने बताया कि बांग्लादेश यह तटबंध बाढ़ से बचाव के लिए बना रहा है, लेकिन उनकी टीम ने जब सीमा क्षेत्र का दौरा किया तो पाया कि तटबंध की ऊँचाई को बहुत बढ़ा दिया गया है। चकमा ने कहा कि अब भारत को अपने तटबंध को और मजबूत करना पड़ेगा, क्योंकि अधिक पानी अब भारतीय इलाके की ओर बढ़ेगा। इस मामले को अब उच्च स्तर (सरकार के स्तर) पर उठाने की आवश्यकता है।
चकमा ने यह भी बताया कि भारतीय तटबंध जीरो पॉइंट से लगभग 350 गज की दूरी पर स्थित है। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश के तटबंध की लंबाई का कोई स्पष्ट आँकड़ा नहीं है, लेकिन उनके अनुसार लगभग एक किलोमीटर का हिस्सा दिखाई दे रहा है। इस पर काम अब भी चल रहा है और बांग्लादेश इसे स्थायी रूप (पक्का) से बनाने की तैयारी में है। चकमा ने कहा कि भारत को इस मामले में आवश्यक कदम उठाने चाहिए और राज्य सरकार इस मुद्दे को केंद्र सरकार के पास भेजने की योजना बना रही है।
इंदिरा-मुजीब संधि का उल्लंघन कर रहा बांग्लादेश
यह तटबंध निर्माण 1972 की इंदिरा-मुजीब संधि का उल्लंघन भी हो सकता है। इस संधि के तहत जीरो पॉइंट पर कोई स्थाई निर्माण नहीं किया जा सकता, सिवाय इसके कि दोनों देशों के बीच आपसी सहमति हो। जीरो पॉइंट दोनों देशों की सीमा पर लगे पिलर्स (खंबों) के 150 गज के भीतर आता है और इस पर कोई भी निर्माण भारतीय और बांग्लादेशी सरकार की सहमति के बिना नहीं किया जा सकता।
बांग्लादेश जिन तटबंधों को बना रहा है, उसकी वजह से भारत और बांग्लादेश की सीमा पर बहने वाली मनु नदी में पानी बढ़ जाने भारतीय इलाके में बाढ़ आ सकती है। खास बात यह है कि बांग्लादेश ने भारत को इस निर्माण के बारे में पहले से सूचित नहीं किया, जो भारत के लिए चिंता का कारण बन गया है। बांग्लादेश ने पहले ही भारत द्वारा सीमा पर बाड़ लगाने का विरोध किया था, जबकि वो घुसपैठ को रोकने के लिए बाड़ लगा रहा था। वहीं, दूसरी तरफ वो खुद तटबंध को बढ़ाकर भारतीय क्षेत्र में बाढ़ के खतरे को भी बढ़ा रहा है।
इस मामले में भारतीय अधिकारियों का कहना है कि इसे जल्द से जल्द सुलझाने की आवश्यकता है, ताकि भारतीय क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की इमरजेंसी की स्थिति से बचा जा सके।