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35 लाख मजदूरों के खाते में 1-1 हजार रुपए: सीएम योगी का एलान, कोरोना वायरस से लड़ने के लिए UP तैयार

कोरोना वायरस का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। राज्यों ने इससे बचाव के लिए व्यापक स्तर पर प्रबंध किए हैं। उत्तर प्रदेश सरकार भी इस दिशा में कई बड़े कदम उठा रही है। प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार (मार्च 21, 2020) को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया कि अब तक 23 लोग वायरस से संक्रमित पाए जा चुके हैं, जिसमें 9 लोग ठीक हो चुके हैं।

सीएम योगी ने कहा कि हम सभी को प्रधानमंत्री द्वारा बुलाए गए ‘जनता कर्फ्यू’ का पालन करना चाहिए। राज्य की सभी मेट्रो रेल, राज्य और सिटी बस सेवाएँ कल रविवार को बंद रहेंगी। सीएम योगी ने आश्वस्त किया कि हमारे पास आवश्यक वस्तुओं और दवाओं का पर्याप्त स्टॉक है। अनावश्यक रूप से सामान खरीदने के लिए दुकानों पर न जाएँ और जमाखोरी से बचें। व्यापारी भी लागत से अधिक दामों पर सामान न बेचें।

आगे सीएम ने कहा कि घबराने की जरूरत नहीं है, सरकार हर प्रकार से लोगों की मदद कर रही है। राज्य के मजदूरों को भत्ते के रूप में एक हजार रुपए दिए जाएँगे। उन्होंने कहा, “15 लाख दिहाड़ी मजदूरों और कंस्ट्रक्शन क्षेत्र के 20.37 लाख श्रमिकों को अपनी रोजाना की जरूरतें पूरी करने के लिए 1000 रुपए दिए जाएँगे।”

सीएम योगी ने कहा कि पूरे देश में कोरोना वायरस सेकंड स्टेज पर है और अगर हम इसे यहीं रोकने में कामयाब होते है तो ये पूरी दुनिया के लिए एक मैसेज होगा। उन्होंने कहा कि इसके संक्रमण को रोकने के लिए हमारी तैयारी युद्धस्तर पर चल रही है। सभी जिलों के अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड बनाए गए है और पर्याप्त चिकित्साकर्मी तैनात किए गए हैं। कोरोना से घबराने की जरूरत नही है, लड़ने की जरूरत है, बचाव ही सबसे बेहतर उपाय है।

बता दें कि इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए राज्य के सभी मॉल, स्कूल, कॉलेज 2 अप्रैल तक बंद करने का आदेश दिया था। यूपी सरकार के अंतर्गत आने वाले सभी गैरजरूरी दफ्तर और सेवाएँ भी 2 अप्रैल तक बंद की गई हैं। योगी सरकार द्वारा जारी आदेश में यह साफ कहा गया है कि किसी तरह के धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन 2 अप्रैल तक नहीं किया जाएगा।

सरकार की तरफ से जारी इस आदेश में शादी जैसे समारोह की इजाजत दी गई है, लेकिन साथ ही यह साफ कर दिया गया है कि शादी में एक समय पर सिर्फ 10 लोग ही मौजूद हो सकते हैं। अस्पतालों में भी सिर्फ इमरजेंसी वार्ड ही खुले रहेंगे। उन्होंने कहा कि लोगों को भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचना चाहिए, बेहद जरूरी काम पर ही घरों से बाहर निकलें।

DU की छात्राओं पर बुरी नजर रखता है JNU का अमन सिन्हा, AISA और पिंजरा तोड़ से भी रहे हैं रिश्ते

अमन सिन्हा जेएनयू से डॉक्टरेट की पढ़ाई कर रहा है। वामपंथी छात्र संगठन आइसा और पिंजड़ा तोड़ से जुड़ा रहा सिन्हा दिल्ली विश्वविद्यालय की विभिन्न कॉलेजों की छात्राओं पर बुरी नजर डालने को लेकर चर्चा में है। डीयू बीट की ताजा रिपोर्ट से उसके खिलाफ यौन उत्पीड़न के कई मामले सामने आए हैं।

जनवरी 2019 में ऑपइंडिया ने दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस वूमेन डेवलपमेंट सेल (WDC) के बयान पर उसके खिलाफ रिपोर्ट की थी। इसमें जेएनयू के स्नातकोत्तर छात्र अमन सिन्हा पर महिलाओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया गया था। तब पीड़िता ने अपने बयान में कहा था कि अमन सिन्हा हर प्रदर्शन में प्रमुख छात्र नेताओं के साथ मौजूद रहता है। वहाँ मौजूद भोली-भाली महिलाओं को अपनी और आकर्षित कर उन्हें फाँसता है।

इन आरोपों के बाद ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) ने उसे संगठन से बाहर कर दिया था। पिंजरा तोड़ ने भी उसे निष्कासित कर दिया था। याद रहे कि पिंजरा तोड़ वही अल्ट्रा-लेफ्ट विंग संगठन है जिस पर दिल्ली में सीएए विरोध के नाम पर हिंसा भड़काने और सड़कों को जाम करने का आरोप लगे थे।

चौंकाने वाली बात यह है कि जेएनयू के छात्र अमन सिन्हा के खिलाफ अब कुछ और यौन उत्पीड़न के नए मामले सामने आए हैं। उसके व्यवहार से परेशान कई पीड़ितों ने आपबीती सुनाई है। एक महिला ने बताया कि सिन्हा बातचीत के दौरान अक्सर उसकी तस्वीरें लेता था। कई बार उसके हाथों को पकड़कर सहलाने लगता था।

इंद्रप्रस्थ कॉलेज फॉर वूमेन (IPCW) की एक छात्रा के अनुसार सिन्हा के लिए खुले रिश्ते का मतलब है यौन सुख। सिन्हा ने उसे कुछ आपत्तिजनक लिंक भेजे थे। उसने बताया- यह सब मेरे लिए बहुत डरावना और परेशान करने वाला था। मैंने उसे हर जगह ब्लॉक कर दिया। श्रेया नाम की एक महिला ने बताया कि सिन्हा ने उससे अपने रिश्तों के बारे में झूठ बोला था।

हालाँकि अमन सिन्हा इन आरोपों को मनगढ़ंत बताता है। उसका कहना है इस सबकी शुरुआत WDC मिरांडा के पोस्ट से हुई थी। इसमें कोई ठोस दावा नहीं था। बकौल सिन्हा वह इस मामले में आईसीसी या दिल्ली महिला आयोग या किसी अन्य संगठन की जाँच में पूरी तरह से सहयोग करने को तैयार है।

गौरतलब है कि सीएए विरोध के नाम पर जेएनयू में हुई हिंसा को अंजाम देने वालों में अमन सिन्हा का नाम प्रमुख रूप से सामने आया था। दरअसल, वामपंथी संगठनों ने अमन सिन्हा को एबीवीपी का गुंडा बताते हुए हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराया था। बाद में खुलासा हुआ कि वह कन्हैया कुमार, उमर खालिद और कट्टरपंथी वामपंथी संगठनों से जुड़ा रहा है। इसके बाद अमन को लेकर सोशल मीडिया पर एक यूजर ने खुलासा करते हुए लिखा था, क्या ये वही छात्र है, जिसने अफजल गुरु के शहीदी के नारे लगाए थे और उसके पोस्टर लेकर घूमा था।

प्रदर्शनकारी तबरेज को हुआ कोरोना, पूरी दिल्ली के लिए ख़तरा बना शाहीन बाग़: मजहबी तीर्थयात्रा पर गई बहन से फैला रोग

कई दिनों से जिसका डर जताया जा रहा था, आख़िर वही हुआ। सीएए विरोध के नाम पर शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारी कई दिनों से धरने पर बैठे हुए थे और लगातार नियम-क़ानून को धता बता रहे थे। हाल के दिनों में उन्होंने कोरोना वायरस से बचाव व सावधानी को लेकर सरकार, डॉक्टरों व विशेषज्ञों की सलाहों को धता बताया था। किसी ने कहा था कि ये क़ुरान का वायरस है जो मजहब के लोगों को कुछ नहीं करेगा, तो किसी ने पूछा था कि क्या गारंटी है कि भीड़ न जुटाने से कोरोना वायरस नहीं होगा? अब जहाँगीरपुरी में 2 प्रदर्शनकारियों को कोरोना वायरस ने अपना शिकार बना लिया है।

पहले उक्त प्रद्रशनकारी की बहन को कोरोना हुआ था, जिसके बाद उसे भी कोरोना वायरस के टेस्ट के दौरान पॉजिटिव पाया गया। प्रदर्शनकारी की बहन 11 मार्च को सऊदी अरब से आई थी। वो इस्लामी तीर्थयात्रा के लिए गई थी। इस मजहबी तीर्थयात्रा को ‘उमराह’ कहा जाता है, जिसे साल में कभी भी कर सकते हैं और ये सबके लिए अनिवार्य भी नहीं होता। सऊदी अरब ने हाल ही में सभी प्रकार की मजहबी तीर्थयात्राओं पर प्रतिबंध लगा दिया है क्योंकि इससे कोरोना के फैलने का ख़तरा है।

प्रदर्शनकारी ने दावा किया कि उसी बहन से जब उसने मुलाक़ात की थी, उसके 2 दिनों के बाद उसे कोरोना हुआ। वो अपनी बहन से मिलने के बाद भी प्रदर्शन स्थल पर जाता रहा। हालाँकि, उसने दावा किया है कि कोरोना के लक्षण दिखाई देते ही उसने हॉस्पिटल में संपर्क किया और सारी जानकारियाँ दी। 35 वर्षीय तबरेज को 16 मार्च को कफ आने के बाद कोरोना के लक्षण का शक हुआ। फिर जब उसे क्वारंटाइन कर के जाँच किया गया तो पता चला कि उसे भी कोरोना वायरस ने जकड़ लिया है। चूँकि सीएए विरोधी आंदोलन में कई लोग जा रहे हैं और वो लोग वहाँ से निकलने के बाद अपने परिवार व अन्य लोगों से मिलते होंगे, शाहीन बाग़ अब पूरी दिल्ली के लिए ख़तरा बन चुका है।

अब तक दिल्ली में कोरोना वायरस के 17 मामले आ चुके हैं, जिनमें से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने कई बार जाकर समझाया लेकिन वो नहीं माने। उन्होंने वहाँ से हटने से इनकार कर दिया। तबरेज ने दावा किया है कि उसकी बहन ने कभी किसी सीएए प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लिया है। पूरे भारत में ख़बर लिखे जाने तक कोरोना वायरस के 279 मामले आ चुके हैं, जिनमें से 23 लोग अब तक इलाज के बाद ठीक भी हुए हैं।

NDTV की एंकर सोनल मेहरोत्रा ने खुद को किया क्वारंटाइन, कोरोना(+) कनिका कपूर की हैं भौजी

जब से बॉलीवुड सिंगर कनिका कपूर के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की बात सामने आई है हड़कंप मचा हुआ है। खुद के संक्रमित होने की बात छिपाकर वे पार्टी में शामिल हुईं। इससे सैकड़ों लोगों के लिए संकट पैदा हो गया। लापरवाही को लेकर शुक्रवार (मार्च 20, 2020) देर रात लखनऊ में तीन धाराओं के तहत उन पर FIR दर्ज की गई।

कनिका के कोरोना पॉजिटिव होने की बात सामने आने के बाद कई लोगों ने खुद को सेल्फ क्वारंटाइन कर लिया है। इनमें से एक नाम विवादस्पद न्यूज चैनल NDTV में काम करने वाली एंकर सोनल मेहरोत्रा कपूर का भी है। वे रिश्ते में कनिका की भाभी बताई जाती हैं।

सोनल ने इसकी पुष्टि करते हुए ट्विटर पर लिखा है कि जुकाम होने के बाद वे पिछले 3 दिनों से सेल्फ आइसोलेशन में हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी एक रिश्तेदार यानी कि कनिका कपूर के कोराना पॉजिटिव पाए जाने के बाद वे सेल्फ क्वारंटाइन में हैं। वे अपने परिवार के सदस्यों से 15 फीट की दूरी बनाकर रख रही हैं।

NDTV के एंकर ने ट्वीट किया, “एक रिश्तेदार के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद मैंने अस्पताल में अपना टेस्ट करवाया है। इसका रिजल्ट आना अभी बाकी है। इस बीच हमारे घर को सैनिटाइज कर दिया गया है।”

इससे पहले कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद NDTV से बात करते हुए कनिका कपूर ने अपनी लापरवाही पर पर्दा डालने की कोशिश की थी। सरकार को दोषी ठहराया कि लंदन से वापस आने के बाद उन्हें स्क्रीनिंग के लिए पर्याप्त टेस्ट सुविधाएँ उपलब्ध नहीं कराई गई। कनिका कपूर ने दावा किया कि उन्होंने सरकारी अधिकारियों से 20 बार संपर्क किया और टेस्ट करने से पहले दो दिनों तक इंतजार किया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनकी रिश्तेदार सोनल कपूर को भी ‘NDTV की प्रमुख पत्रकार’ होने के बावजूद टेस्ट कराने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा।

बता दें कि कनिका कपूर ने संवेदनशील माहौल के बावजूद सरकार द्वारा जारी की गई तमाम एडवाइजरी को नजरअंदाज कर लगातार पार्टियाँ अटेंड की और बिना कोरोना परीक्षण के लोगों से मेलजोल जारी रखा। लंदन से लौटने के बाद उनके द्वारा अटेंड की गई हाई प्रोफाइल पार्टी में अफसरों से लेकर राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे समेत बड़े नेता मौजूद थे, जिनमें से कइयों ने खुद को घर पर ही सेल्फ क्वारंटाइन कर लिया है।

लंदन से लौटने के बाद 8 दिन के भीतर कनिका कपूर कई लोगों से मिलीं, और दो पार्टियों में भी शामिल हुई। कनिका ने एक आलीशान होटल में एक डिनर पार्टी भी होस्‍ट की थी, जिसमें लगभग 100 लोग शामिल हुए थे। बताया जा रहा है कि कनिका कपूर की इस पार्टी में कई अधिकारी, राजनेता और सामाजिक लोग शामिल हुए थे। कनिका कपूर के कोरोना पॉजिटिव होने की पुष्टि होने के बाद उन तमाम लोगों से संपर्क साधा जा रहा है, जो इस दौरान उनके संपर्क में रहे। पुलिस अधिकारी ने बताया कि कनिका कपूर के खिलाफ आइपीसी की धारा 188, 269 व 270 के तहत मामला दर्ज कराया गया है।

‘मौत के डर से मजहब छोड़ दोगे? हाथ और गले दोनों मिलाओ’ – Tik-Tok के खतरनाक वीडियो

सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स पर अक्सर ये आरोप लगते रहते हैं कि वहाँ वामपंथी विचारों को बढ़ावा दिया जाता है। न सिर्फ़ वहाँ कुछ इलीट किस्म के लोग इस काम में लगे रहते हैं बल्कि कई ऐसी कंपनियों के अधिकारियों पर भी हिन्दु-विरोधी कंटेंट्स को बढ़ावा देने के आरोप लगे हैं। उदाहरण के तौर पर ट्विटर पर दक्षिणपंथी विचारधारा वाले लोगों को ‘शैडो बैन’ कर दिया जाता है, जिससे उनके ट्वीट्स उनके सभी फॉलोवर्स को नहीं दिखते। फेसबुक भी समुदाय विशेष द्वारा की गई क्रूरता वाले कंटेंट्स को हटा देता है।

अब इसमें टिक-टॉक का नाम भी जुड़ गया है, जहाँ ऐसे कंटेंट्स को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो न सिर्फ़ मजहबी चीजों को वैज्ञानिक और मेडिकल सलाहों से ऊपर बता कर पेश किया जा रहा है बल्कि लोगों के बीच ग़लत बातें पहुँचाई जा रही है। जैसे, नीचे संलग्न किए गए वीडियो को देखिए। इसमें समुदाय विशेष के तीन दोस्त बात कर रहे होते हैं, तभी चौथा दोस्त आता है। वो ‘अस्सलाम वालेकुम’ बोल कर एक-दूसरे का अभिवादन करते हैं। फिर वो हाथ मिलाने और गले मिलने को बोलता है लेकिन एक दोस्त इनकार कर देता है।

वो कोरोना होने की बात करते हुए गले मिलने से इनकार कर देता है और कहता है कि इससे वो मर जाएगा। फिर दोस्त उससे पूछता है कि क्या मौत के डर से सुन्नत छोड़ दोगे? इसके बाद वो कहता है- “आज सुन्नत छोड़ रहे हो, कल को मौत के डर से इस्लाम छोड़ देंगे? अरे हम मुस्लिम हैं यार। हम मौत से नहीं डरते।” इसके बाद सभी दोस्त आपस में हाथ मिलाते हैं और गले मिलते हैं।

इसके अलावा एक अन्य वीडियो में भी कुछ लोग कोरोना वायरस के खतरों व इससे लेकर विशेषज्ञों की सलाहों को धता बताते हुए बातें कर रहे हैं कि हाथ मिलाने से बीमारी नहीं फैलती है बल्कि मोहब्बत बढ़ती है। जहाँ सरकार और सेलेब्रिटीज लोगों को कोरोना को लेकर डॉक्टरों की सलाहों को प्रमोट करने बोल रहे है, ऐसे वीडियो का आना खतरनाक है। मजहब के नाम पर बीमारी से बचाव के उपायों का मखौल उड़ाया जा रहा है।

बता दें कि कोरोना वायरस को लेकर लोगों को ‘सोशल डिस्टैन्सिंग’ की प्रैक्टिस करने की सलाह दी जा रही है। एक-दूसरे से हाथ मिलाने की जगह ‘नमस्ते’ कह कर अभिवादन करने की सलाह दुनिया भर के विशेषज्ञों ने दिया है। चूँकि अब तक कोरोना वायरस के शिकार लोगों के इलाज के लिए किसी भी प्रकार की दवा नहीं बनाई जा सकी है, इससे बचने के लिए सावधानी बरतना ही मुख्य उपाय है। इसीलिए दिन में भी कई बार दोनों हाथों को साबुन से अच्छे से धोने की सलाह दी गई है।

लखनऊ-कानुपर ही नहीं… मुंबई को भी कनिका से खतरा: लंदन से आकर पहले वहीं बिताए थे 72 घंटे

लंदन से भारत पहुँची गायिका कनिका कपूर की एक लापरवाही ने सैकड़ों भारतीयों के जीवन को खतरे में डाल दिया है। इसी बीच एक नई जानकारी सामने आई है कि कनिका ने लंदन से लौटने के बाद और लखनऊ जाने से पहले मुंबई में 72 घंटे बिताए थे। वहीं कनिका के कोरोना पॉजीटिव पाए जाने के बाद से स्वास्थ्य विभाग उन लोगों की तलाश में जुट गया है, जो कनिका से किसी न किसी रूप में मिले या उसके नजदीक आए।

वहीं बेबी डॉल गायिका कनिका कपूर ने शुक्रवार को अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर खुद के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने की जानकारी दी और बताया कि पिछले 4 दिनों से उन्हें इस बात के लक्षण अपने अंदर दिखाई दे रहे थे। जब मैंने इसका परीक्षण कराया तो दुर्भाग्य से यह पॉजिटिव पाया गया। इसके बाद से मैं और मेरा परिवार पूरी तरह से आईसोलेशन में है और डॉक्टरी सलाह से ही आगे कदम बढ़ाया जा रहा है। नई जानकारी के मुताबिक 9 मार्च को कनिका कपूर लंदन से भारत लौटी थी, इसके बाद उन्होंने 72 घंटे मुंबई में बिताए और फिर 11 मार्च को लखनऊ के लिए रवाना हो गई।

कनिका कपूर द्वारा सोशल मीडिया पर की गई पोस्ट का स्क्रीनशॉट

हालाँकि कनिका ने दावा किया कि उनका 10 दिन पहले सामान्य प्रक्रिया के तहत हवाई अड्डे पर स्कैन किया गया था। इसके बाद जब वो घर वापस आईं, तो कुछ लक्षण उन्हें अपने अंदर दिखाई दिए। वहीं कनिका पर आरोप यह भी है कि वह हवाई अड्डे के कुछ कर्मचारियों की मदद से स्क्रीनिंग के बिना ही लखनऊ हवाई अड्डे से बाहर निकल गई थीं।

कनिका के पिता राजीव कपूर का कहना है कि कनिका 10 मार्च को लंदन से मुंबई पहुँची और फिर अगले दिन उसने लखनऊ के लिए उड़ान भरी। जब वह लखनऊ आई थी, तब वह सामान्य थी और उसे किसी बीमारी के कोई संकेत नहीं थे। यही कारण था कि वह तीन-चार सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल हुईं। पिता ने बताया कि वह एक दिन के लिए अपने नाना-नानी के यहाँ कानपुर भी गए थे, लेकिन दो दिन पहले ही कनिका को हल्का बुखार और खाँसी की शिकायत हुई, जिसके बाद उन्होंने डॉक्टरी सलाह ली और अपने परिवार के सभी सदस्यों का परीक्षण कराने के लिए नमूने भेज दिए। रिपोर्ट में कनिका का कोरोना पॉजिटिव पाया गया।

अब सवाल और चिंता का विषय यह है कि करीब एक सप्ताह तक कनिका लखनऊ में कई कार्यक्रमों शामिल हुई। यही करण है कि कनिका के कोरोना पॉजिटिव पाए जाने के बाद से उन सभी लोगों की तलाश की जा रही है, जो लोग कनिका से किसी भी तरह से नजदीक आए या फिर मिले। क्योंकि लखनऊ के एक बिल्डर द्वारा पिछले शनिवार को एक राजनेता के घर पर एक बड़ी पार्टी आयोजित की गई थी, जिसमें बड़ी-बड़ी हस्तियों ने हिस्सा लिया था। यहाँ तक कि कई सासंदों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया था, जो बाद में संसद पहुँचे और राष्ट्रपति से भी मुलाकात की। इसकी जानकारी मिलते ही राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने सभी कार्यक्रम स्थगित कर दिए। साथ ही कनिका की लापरवाही के चलते लखनऊ के डीएम ने कनिका पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

‘हम दिन में 5 बार नमाज अदा करते हैं, 5 बार हाथ धोते हैं… नहीं होगा कोरोना’ – शाहीन बाग में चल रहा कुतर्क

कोरोना वायरस को लेकर देश दुनिया में बेहद सावधानी बरती जा रही है, वहीं दिल्ली के शाहीन बाग में प्रदर्शनकारी अब भी धरनास्थल खाली नहीं करने की जिद पर अड़े हैं। प्रदर्शनकारियों को जिला प्रशासन की ओर से मेडिकल टीम भेजने का प्रस्ताव दिया गया, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। शाहीन बाग में महिला प्रदर्शनकारी रविवार को ‘जनता कर्फ्यू’ के दिन भी अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखेंगी। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (मार्च 22, 2020) को ‘जनता कर्फ्यू की घोषणा की है और लोगों से अपने घरों के अंदर ही रहने की अपील की है।

प्रधानमंत्री की अपील पर देश भर में रविवार को जनता कर्फ्यू की तैयारी की जा रही है। मगर शाहीनबाग की महिलाओं ने जनता कर्फ्यू में शामिल होने से इनकार कर दिया है। हालाँकि जारी प्रदर्शन में कुछ बदलाव किए जाने की बात कही जा रही है, जिसमें कहा गया कि अब बच्चों और बुजुर्गों को प्रदर्शन स्थल पर आने की अनुमति नहीं होगी। वहीं किसी भी प्रदर्शनकारी को धरनास्थल पर 4 घंटे से अधिक रुकने की अनुमति नहीं होगी। यानी 4 घंटे तक ही कोई प्रदर्शनकारी वहाँ रुक सकता है। एक प्रदर्शनकारी महिला ने बताया कि विरोध स्थल पर 70 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग और 10 साल से कम उम्र के बच्चों के आने की अनुमति नहीं होगी।

इसके अलावा अब माइक से कोई भी अनाउंसमेंट नहीं किया जाएगा। गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन कानून को लेकर शाहीन बाग में 96 दिन से धरना जारी है। इसी बीच देश में कोरोना वायरस के प्रकोप को देखते हुए किसी भी स्थान पर 20 से अधिक लोगों के एकत्र होने की मनाही है। बावजूद इसके, शाहीन बाग में लोगों की भीड़ एकत्र हो रही है। बता दें कि पहले एक जगह पर 50 लोगों के एकत्रित होने पर मनाही थी।

इन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब सरकार ने 50 से ज्यादा लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगाया था, तब वे 50-50 के समूह में धरना दे रही थीं, लेकिन अब वे 20-20 के ग्रुप में धरना देंगी।  लेकिन किसी भी हालत में वे अपना प्रदर्शन जारी रखेंगी। क्योंकि उनके लिए नागरिकता कानून का मुद्दा कोरोना वायरस से भी ज्यादा बड़ा है।

एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “रविवार को, हम छोटे टेंटों के नीचे बैठेंगे। केवल दो महिलाएँ प्रत्येक टेंट के नीचे बैठेंगी और अपने बीच एक मीटर से अधिक दूरी बनाए रखेंगे।” वहीं एक अन्य प्रदर्शनकारी रिजवाना ने कहा कि महिलाएँ हर सावधानी बरत रही हैं और वे हर समय बुर्के में ढकी रहती हैं। उन्होंने कहा, “नियमित रूप से हाथ धोना हमारी जीवनशैली का हिस्सा है। हम दिन में पाँच बार नमाज अदा करते हैं और हर बार हाथ धोते हैं।” प्रदर्शन के प्रमुख आयोजकों में से एक तासीर अहमद ने कहा कि पर्याप्त संख्या में सैनिटाइटर और मास्क की व्यवस्था की गई है और प्रदर्शन स्थल को नियमित अंतराल पर संक्रमण-मुक्त किया जा रहा है।

इसके साथ ही शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों में अहम भूमिका निभा रही रूबी ने अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि कोरोना वायरस का खतरा बड़ा है, लेकिन इस खतरे से कुछ लोगों की ही जान जाएगी, जबकि NRC जैसे कानून पास होने से उनके जैसे लाखों लोगों की जिन्दगी एक पल में उजड़ जाएगी। इसलिए उनके जैसी महिलाओं की इच्छा है कि इस प्रदर्शन को किसी भी कीमत पर जारी रखा जाना चाहिए। गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में महिलाओं ने दिसंबर के मध्य से ही दक्षिण-पूर्वी दिल्ली से नोएडा को जोड़ने वाली सड़क का एक साइड अवरूद्ध कर रखा है। जिसकी वजह से लोगों को काफी परेशानी हो रही है।

AMU का आजाद, इकबाल और बिलाल गया था UAE, क्वारंटाइन के आइसोलेशन वॉर्ड से भागा, पुलिस ने धर दबोचा

कोरोना वायरस से बचाव के लिए युद्ध स्तर पर काम किया जा रहा है। सरकार इससे निपटने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है और साथ ही लोगों से भी अपील कर रही है कि वो जागरुक हों और सावधानी बरतें। केंद्र सरकार कोराना वायरस के प्रसार को रोकने की पूरी कोशिश कर रही है। इसको लेकर कई प्रतिबंध भी लगाए गए हैं, मगर कुछ लोग कोरोना वायरस को लेकर कुछ ऐसा कर रहे हैं जो दूसरे को भी संकट में डाल सकता है।

ऐसा ही एक मामला सामने आया है अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से। जहाँ के आइसोलेशन वार्ड से जम्मू कश्मीर के तीन पीएचडी स्कॉलर भाग निकले। इन तीनों को 18 मार्च 2020 को UHS आइसोलेशन वॉर्ड में क्वारंटाइन के लिए रखा गया था।

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर द्वारा जारी एक आधिकारिक पत्र में बताया गया है कि जम्मू कश्मीर के ये तीनों पीएचडी स्कॉलर 4 मार्च से 9 मार्च तक UAE की यात्रा की और 18 मार्च 2020 को 4 बजे शाम में उन्हें क्वारंटाइन के लिए UHS आइसोलेशन वॉर्ड में रखा गया था। मगर वो गुरुवार (मार्च 19, 2020) को लगभग 9:45 में हॉस्पिटल से फरार हो गए। 

AMU द्वारा जारी आधिकारिक पत्र (साभार: Kashmirdispatch)

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी द्वारा जारी इस आधिकारिक पत्र के मुताबिक जो तीन कश्मीरी क्वारंटाइन से भागे हैं, उनके नाम हैं- आजाद अहमद वानी, मोहम्मद इकबाल राथर और बिलाल अहमद राथर। आजाद अहमद वानी और मोहम्मद इकबाल राथर ABEM में स्कॉलर है। ये दोनों उत्तरी कश्मीर के वागुर बारामूला के रहने वाले हैं। वहीं बिलाल अहमद राथर बॉटनी में स्कॉलर है।

इस जानकारी के मिलने के बाद कश्मीरी प्रशासन अलर्ट हो गई और तीनों कश्मीरी स्कॉलर को ढूँढने के लिए लुकआउट नोटिस जारी किया गया। बारामूला के डिप्टी कमिश्नर ने कश्मीरी डिस्पैच से बात करते हुए कहा कि प्रशासन ने उन्हें ट्रैक-डाउन कर लिया है और कल सुबह उन्हें फिर से उचित क्वारंटाइन के लिए आइसोलेशन वार्ड में रखा जाएगा। बता दें कि इससे पहले भी कई जगहों से कोरोनावायरस से संक्रमित मरीजों के भाग जाने की खबरें सामने आ चुकी है। जिसकी वजह से कई लोगों की जान को खतरा हो सकता है।

627 मौत इटली में सिर्फ एक दिन में, कोरोना से लड़ने के लिए भारत द्वारा उठाए गए कदम की US ने की प्रशंसा

चीन के वुहान शहर से निकला कोरोना वायरस का कहर पूरे विश्व में जारी है। हर देश इसकी रोकथाम के लिए अपने-अपने स्तर पर घोषणाएँ करने में लगा हुआ है। वहीं पिछले दिनों सार्क देशों के बीच कोरोना पर हुई वीडियो कॉन्फ्रेसिंग पर अमेरिकी रक्षा सचिव ने भारत के पहल की प्रशंसा की है।

दरअसल पेंटागन ने कहा कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ अमेरिकी रक्षा मंत्री मार्क ओशो ने टेलीफोन पर बातचीत की और सार्क देशों के लिए भारत की COVID-19 के लिए उठाए गए पहल की प्रशंसा की है। उन्होंने बताया कि फोन कॉल के दौरान, दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय रक्षा प्राथमिकताओं पर भी चर्चा की, जिसमें रक्षा व्यापार को बढ़ाने के लिए चल रहे क्षेत्रीय सहयोग और पहल शामिल हैं। पेंटागन ने आगे कहा कि कोरोना महामारी के चलते दोनों ने संचार को बंद करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया, जो कि व्यापक वैश्विक साझेदारी को सुदृढ़ करता है।

पेंटागन ने यह भी बताया कि दक्षिण एशियाई देशों के बीच कोविड​​-19 से संबंधित राहत प्रयासों के समन्वय में भारत के नेतृत्व के लिए एरिज़ोना ने प्रशंसा व्यक्त की है और जल्द से जल्द अवसर पर भारत आने का अपना इरादा व्यक्त किया है। वहीं कोरोनो वायरस संकट के चलते एरिजोना ने इस महीने भारत में अपनी निर्धारित यात्रा को स्थगित कर दिया है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस पर रविवार को सार्क देशों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चर्चा करते हुए कहा था कि कोरोना वायरस को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। इस चर्चा में श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटबया राजपक्षे, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी, मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम सोली, भूटान के प्रधानमंत्री, नेपाल के प्रधानमंत्री शामिल रहे थे। भारत की इस पहल की ही अमेरिकी रक्षा सचिव ने प्रशंसा की है।

वहीं कोरोना वायरस से मुकाबला करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी कड़े कदम उठाए हैं। दरअसल अमेरिका में कोरोना की चपेट में आने से मरने वालों की संख्या 230, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 13000 के पार हो गई है। वहीं चीन के बाद कोरोना का इटली में तैजी से फैला है। शुक्रवार को इटली में एक दिन के अंदर कोरोना की वजह से 627 लोगों की जान चली गई, जबकि कोरोना वायरस के संक्रमण के 5986 नए मामले भी सामने आ गए। इसी के साथ इटली में मरने वालों की संख्या 4032 हो चुकी है। वहीं कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या भी बढ़कर 47021 हो गई है।

आपको बता दें कि भारत में भी कोरोना से मरने वालों की संख्या 5 हो गई है, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 200 के पार हो गई है। इसी की रोकथाम के लिए भारत सरकार ने 22 मार्च को जनता कर्फ्यू की अपील की है। साथ ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की जनता से अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलने की अपील की है।

22 मार्च को जमीन से लेकर आसमान तक होगा ‘जनता कर्फ्यू’: न चलेगी ट्रेन-मेट्रो, न उड़ेगी फ्लाइट

22 मार्च को ‘जनता कर्फ्यू’ के मद्देनजर कोरोना वायरस से लड़ने के लिए भारतीय रेलवे ने 2400 पैसेंजर और 1300 मेल व एक्सप्रेस ट्रेनें रद्द कर दी हैं। शनिवार (21 मार्च, 2020) मध्यरात्रि (12 बजे) से रविवार (22 मार्च, 2020) रात 10 बजे के बीच किसी भी स्टेशन से कोई यात्री ट्रेन सफर शुरू नहीं करेगी। मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें भी रविवार तड़के थम जाएँगी। सभी उपनगरीय ट्रेन सेवाएँ भी बहुत कम कर दी जाएँगी। यानी 21 मार्च की मध्‍यरात्रि से लेकर 22 मार्च की रात 10 बजे तक लगभग 3700 ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है।

भारतीय रेलवे ने कहा है कि जनता कर्फ्यू के कारण देश में शनिवार की मध्यरात्रि से रविवार रात 10 बजे के बीच कोई पैसेंजर ट्रेन रवाना नहीं होगी। हालाँकि जो ट्रेन सुबह 7 बजे तक खुल चुकी होंगी, उनके परिचालन पर असर नहीं पड़ेगा और वह अपने डेस्टिनेशन तक बिना रुकावट पहुँचेंगी। इसके साथ ही कहा गया है कि दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और सिंकदराबाद में इन ट्रेन सेवाओं को न्यूनतम लेवल पर रखा जाएगा, जिसमें यह सिर्फ जरूरी सफर के लिए होंगे। जोनल रेलवे को जरूरत के आकलन पर संख्या को तय करने के लिए कहा गया है। 

आदेश में कहा गया है कि जिन लोगों ने इन ट्रेनों में टिकट बुक कराए थे, उन्हें व्यक्तिगत रूप से इसकी जानकारी दी जा रही है। इन ट्रेनों में टिकट रद्द होने का कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। यात्रियों को पूरा पैसा वापस मिलेगा। रेलवे ने कहा कि सामाजिक दूरी सुनिश्चित करना जरूरी है।

इसके साथ ही IRCTC ने घोषणा की है कि मेल व एक्सप्रेस ट्रेनों में कैटरिंग की सुविधा 22 मार्च से अगले आदेश तक बंद रहेगी। एहतियात के तौर पर फूड प्लाजा, रिफ्रेशमेंट रूम, जन आहार और सेल किचन भी बंद रहेंगी।

इसके साथ ही दो देसी विमानन कंपनियां, इंडिगो और गोएयर भी जनता कर्फ्यू के समर्थन में उतर गई हैं। एक ओर गोएयर ने रविवार को अपनी सारी घरेलू उड़ानें रद्द करने का फैसला किया है, तो दूसरी ओर इडिगो ने महज 40% उड़ानें संचालित करने की ही बात कही है। बताया जा रहा है कि दोनों कंपनियों के फैसले से रविवार को करीब 1 हजार उड़ानें रद्द हो जाएँगी। बता दें कि इससे पहले दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने ‘जनता कर्फ्यू’ की अपील के बाद दिल्ली मेट्रो ने आगामी 22 मार्च को मेट्रो परिचालन बंद करने का फैसला लिया। दिल्ली मेट्रो ने कहा था कि सामाजिक दूरी को बनाए रखने और लोगों को घरों में रहने के लिए प्रोत्साहित करते हुए दिल्ली मेट्रो को 22 मार्च को बंद रखने का फैसला किया गया है। दिल्ली मेट्रो ने इसे कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई का एक कदम बताया था।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोरोना वायरस संकट को लेकर 22 मार्च को सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक ‘जनता कर्फ्यू’ का आह्वान किया है और कहा कि आवश्यक सेवाओं से जुड़े लोगों को छोड़कर किसी को भी घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। उन्होंने गुरुवार (19 मार्च, 2020) को करीब 30 मिनट के राष्ट्रीय संबोधन में सभी भारतीयों से अपील की कि कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए यथासंभव घरों के अंदर ही रहें और कहा कि दुनिया में कभी इतना गंभीर खतरा पैदा नहीं हुआ।